Posted by Manpreet Hayer
Punjab
18-04-2019 12:05 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਤੁਸੀਂ ਸਬਜੀਆਂ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਕਰਕੇ ਵੀ ਵਧੀਆ ਮੁਨਾਫਾ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹ ਖੇਤੀ ਵੀ ਬਹੁਤ ਲਾਹੇਵੰਦ ਸਾਬਤ ਹੋ ਰਹੀ ਹੈ

Posted by ਰਛਪਾਲ ਸਿੰਘ
Punjab
18-04-2019 11:45 AM
ਅਪ੍ਰੈਲ ਦੇ ਅੰਤ ਚ ਬੀਜ ਦਿਓ ਜਾਂ ਪਨੀਰੀ ਵੀ ਲਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਪਨੀਰੀ 35-40 ਦੀ ਹੋਵੇ

Posted by happy
Punjab
18-04-2019 11:36 AM
tuci uss nu Cargill di Transition mix feed de skde ho, isde nal tuci Anabolite liquid 100-100ml swere sham deo ate Lactomax bolus 10 golia rojana deo, iss nal vdia dudh howega ate energy v milegi.
Posted by ravi saxena
Madhya Pradesh
18-04-2019 11:27 AM
रवि जी आप छत्त पर सब्जियों की बिजाई कर सकते है इस से आप अच्छा मुनाफा कमा सकते है अगर आपकी मार्किट नजदीक है
Posted by Shubham Agarkar
Maharashtra
18-04-2019 11:27 AM
ताजे पानी के मोती का उत्पादन — मोती उत्पादन क्या है? मोती एक प्राकृतिक रत्न है जो सीप से पैदा होता है भारत समेत हर जगह हालांकि मोतियों की माँग बढ़ती जा रही है, लेकिन दोहन और प्रदूषण से इनकी संख्या घटती जा रही है अपनी घरेलू माँग को पूरा करने के लिए भारत अंतरराष्ट्रीय बाजार से हर साल मोतियों का बड़ी मात्रा .... (Read More)
ताजे पानी के मोती का उत्पादन — मोती उत्पादन क्या है? मोती एक प्राकृतिक रत्न है जो सीप से पैदा होता है भारत समेत हर जगह हालांकि मोतियों की माँग बढ़ती जा रही है, लेकिन दोहन और प्रदूषण से इनकी संख्या घटती जा रही है अपनी घरेलू माँग को पूरा करने के लिए भारत अंतरराष्ट्रीय बाजार से हर साल मोतियों का बड़ी मात्रा में आयात करता है सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेश वॉटर एक्वाकल्चर, भुवनेश्वर ने ताजा पानी के सीप से ताजा पानी का मोती बनाने की तकनीक विकसित कर ली है जो देशभर में बड़ी मात्रा में पाये जाते हैं तराशे हुए मोती प्राकृतिक रूप से एक मोती का निर्माण तब होता है जब कोई बाहरी कण जैसे रेत, कीट आदि किसी सीप के भीतर प्रवेश कर जाते हैं और सीप उन्हें बाहर नहीं निकाल पाता, बजाय उसके ऊपर चमकदार परतें जमा होती जाती हैं इसी आसान तरीके को मोती उत्पादन में इस्तेमाल किया जाता है मोती सीप की भीतरी सतह के समान होता है जिसे मोती की सतह का स्रोत कहा जाता है और यह कैल्शियम कार्बोनेट, जैपिक पदार्थों व पानी से बना होता है बाजार में मिलने वाले मोती नकली, प्राकृतिक या फिर उपजाए हुए हो सकते हैं नकली मोती, मोती नहीं होता बल्कि उसके जैसी एक करीबी चीज होती है जिसका आधार गोल होता है और बाहर मोती जैसी परत होती है प्राकृतिक मोतियों का केंद्र बहुत सूक्ष्म होता है जबकि बाहरी सतह मोटी होती है यह आकार में छोटा होता और इसकी आकृति बराबर नहीं होती पैदा किया हुआ मोती भी प्राकृतिक मोती की ही तरह होता है, बस अंतर इतना होता है कि उसमें मानवीय प्रयास शामिल होता है जिसमें इच्छित आकार, आकृति और रंग का इस्तेमाल किया जाता है भारत में आमतौर पर सीपों की तीन प्रजातियां पाई जाती हैं- लैमेलिडेन्स मार्जिनालिस, एल.कोरियानस और पैरेसिया कोरुगाटा जिनसे अच्छी गुणवत्ता वाले मोती पैदा किए जा सकते हैं उत्पादन का तरीका इसमें छह प्रमुख चरण होते हैं- सीपों को इकट्ठा करना, इस्तेमाल से पहले उन्हें अनुकूल बनाना, सर्जरी, देखभाल, तालाब में उपजाना और मोतियों का उत्पादन 1. सीपों को इकट्ठा करना: तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा किया जाता है और पानी के बरतन या बाल्टियों में रखा जाता है इसका आदर्श आकार 8 सेंटी मीटर से ज्यादा होता है 2. इस्तेमाल से पहले उन्हें अनुकूल बनाना: इन्हें इस्तेमाल से पहले दो-तीन दिनों तक पुराने पानी में रखा जाता है जिससे इसकी माँसपेशियाँ ढीली पड़ जाएं और सर्जरी में आसानी हो 3. सर्जरी: सर्जरी के स्थान के हिसाब से यह तीन तरह की होती है- सतह का केंद्र, सतह की कोशिका और प्रजनन अंगों की सर्जरी इसमें इस्तेमाल में आनेवाली प्रमुख चीजों में बीड या न्यूक्लियाई होते हैं, जो सीप के खोल या अन्य कैल्शियम युक्त सामग्री से बनाए जाते हैं सतह के केंद्र की सर्जरी इस प्रक्रिया में 4 से 6 मिली मीटर व्यास वाले डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध आदि के आकार वाले सीप के भीतर उसके दोनों खोलों को अलग कर डाला जाता है इसमें सर्जिकल उपकरणों से सतह को अलग किया जाता है कोशिश यह की जाती है कि डिजायन वाला हिस्सा सतह की ओर रहे वहाँ रखने के बाद थोड़ी सी जगह छोड़कर सीप को बंद कर दिया जाता है सतह कोशिका की सर्जरी यहाँ सीप को दो हिस्सों- दाता और प्राप्तकर्त्ता कौड़ी में बाँटा जाता है इस प्रक्रिया के पहले कदम में उसके कलम (ढके कोशिका के छोटे-छोटे हिस्से) बनाने की तैयारी है इसके लिए सीप के किनारों पर सतह की एक पट्टी बनाई जाती है जो दाता हिस्से की होती है इसे 2/2 मिली मीटर के दो छोटे टुकड़ों में काटा जाता है जिसे प्राप्त करने वाले सीप के भीतर डिजायन डाले जाते हैं यह दो किस्म का होता है- न्यूक्लीयस और बिना न्यूक्लीयस वाला पहले में सिर्फ कटे हुए हिस्सों यानी ग्राफ्ट को डाला जाता है जबकि न्यूक्लीयस वाले में एक ग्राफ्ट हिस्सा और साथ ही दो मिली मीटर का एक छोटा न्यूक्लीयस भी डाला जाता है इसमें ध्यान रखा जाता है कि कहीं ग्राफ्ट या न्यूक्लीयस बाहर न निकल आएँ प्रजनन अंगों की सर्जरी इसमें भी कलम बनाने की उपर्युक्त प्रक्रिया अपनाई जाती है सबसे पहले सीप के प्रजनन क्षेत्र के किनारे एक कट लगाया जाता है जिसके बाद एक कलम और 2-4 मिली मीटर का न्यूक्लीयस का इस तरह प्रवेश कराया जाता है कि न्यूक्लीयस और कलम दोनों आपस में जुड़े रह सकें ध्यान रखा जाता है कि न्यूक्लीयस कलम के बाहरी हिस्से से स्पर्श करता रहे और सर्जरी के दौरान आँत को काटने की जरूरत न पड़े देखभाल इन सीपों को नायलॉन बैग में 10 दिनों तक एंटी-बायोटिक और प्राकृतिक चारे पर रखा जाता है रोजाना इनका निरीक्षण किया जाता है और मृत सीपों और न्यूक्लीयस बाहर कर देने वाले सीपों को हटा लिया जाता है Perl Culture तालाब में पालन ताजा पानी में सीपों का पालन देखभाल के चरण के बाद इन सीपों को तालाबों में डाल दिया जाता है इसके लिए इन्हें नायलॉन बैगों में रखकर (दो सीप प्रति बैग) बाँस या पीवीसी की पाइप से लटका दिया जाता है और तालाब में एक मीटर की गहराई पर छोड़ दिया जाता है इनका पालन प्रति हेक्टेयर 20 हजार से 30 हजार सीप के मुताबिक किया जाता है उत्पादकता बढ़ाने के लिए तालाबों में जैविक और अजैविक खाद डाली जाती है समय-समय पर सीपों का निरीक्षण किया जाता है और मृत सीपों को अलग कर लिया जाता है 12 से 18 माह की अवधि में इन बैगों को साफ करने की जरूरत पड़ती है मोती का उत्पादन गोल मोतियों का संग्रहणपालन अवधि खत्म हो जाने के बाद सीपों को निकाल लिया जाता है कोशिका या प्रजनन अंग से मोती निकाले जा सकते हैं, लेकिन यदि सतह वाला सर्जरी का तरीका अपनाया गया हो, तो सीपों को मारना पड़ता है विभिन्न विधियों से प्राप्त मोती खोल से जुड़े होते हैं और आधे होते हैं; कोशिका वाली विधि में ये जुड़े नहीं होते और गोल होते हैं तथा आखिरी विधि से प्राप्त सीप काफी बड़े आकार के होते हैं ताजे पानी में मोती उत्पादन का खर्च ध्यान रखने योग्य बातें- ये सभी अनुमान सीआईएफए में प्राप्त प्रायोगिक परिणामों पर आधारित हैं डिजायनदार या किसी आकृति वाला मोती अब बहुत पुराना हो चुका है, हालांकि सीआईएफए में पैदा किए जाने वाले डिजायनदार मोतियों का पर्याप्त बाजार मूल्य है क्योंकि घरेलू बाजार में बड़े पैमाने पर चीन से अर्द्ध-प्रसंस्कृत मोती का आयात किया जाता है इस गणना में परामर्श और विपणन जैसे खर्चे नहीं जोड़े जाते कामकाजी विवरण क्षेत्र : 0.4 हेक्टेयर उत्पाद : डिजायनदार मोती भंडारण की क्षमता : 25 हजार सीप प्रति 0.4 हेक्टेयर पैदावार अवधि : डेढ़ साल क्रम संख्या सामग्री राशि(लाख रुपये में) I. व्यय क . स्थायी पूँजी 1. परिचालन छप्पर (12 मीटर x 5 मीटर) 1.00 2. सीपों के टैंक (20 फेरो सीमेंट/एफआरपी टैंक 200 लीटर की क्षमता वाले प्रति डेढ़ हजार रुपये) 0.30 3. उत्पादन इकाई (पीवीसी पाइप और फ्लोट) 1.50 4. सर्जिकल सेट्स (प्रति सेट 5000 रुपये के हिसाब से 4 सेट) 0.20 5. सर्जिकल सुविधाओं के लिए फर्नीचर (4 सेट) 0.10 कुल योग 3.10 ख . परिचालन लागत 1. तालाब को पट्टे पर लेने का मूल्य (डेढ़ साल के फसल के लिए) 0.15 2. सीप (25,000 प्रति 50 पैसे के हिसाब से) 0.125 3. डिजायनदार मोती का खाँचा (50,000 प्रति 4 रुपये के हिसाब से) 2.00 4. कुशल मजदूर (3 महीने के लिए तीन व्यक्ति 6000 प्रति व्यक्ति के हिसाब से) 0.54 5. मजदूर (डेढ़ साल के लिए प्रबंधन और देखभाल के लिए दो व्यक्ति प्रति व्यक्ति 3000 रुपये प्रति महीने के हिसाब से 1.08 6. उर्वरक, चूना और अन्य विविध लागत 0.30 7. मोतियों का फसलोपरांत प्रसंस्करण (प्रति मोती 5 रुपये के हिसाब से 9000 रुपये) 0.45 कुल योग 4.645 ग. कुल लागत 1. कुल परिवर्तनीय लागत 4.645 2. परिवर्तनीय लागत पर छह महीने के लिए 15 फीसदी के हिसाब से ब्याज 0.348 3. स्थायी पूँजी पर गिरावट लागत (प्रतिवर्ष 10 फीसदी के हिसाब से डेढ़ वर्ष के लिए) 0.465 4. स्थायी पूँजी पर ब्याज (प्रतिवर्ष 15 फीसदी के हिसाब से डेढ़ वर्ष के लिए 0.465 कुल योग 5.923 II. कुल आय 1. मोतियों की बिक्री पर रिटर्न (15,000 सीपों से निकले 30,000 मोती यह मानते हुए कि उनमें से 60 फीसदी बचे रहेंगे) डिजायन मोती (ग्रेड ए) (कुल का 10 फीसदी) प्रति मोती 150 रुपये के हिसाब से 3000 4.50 डिजायन मोती (ग्रेड बी) (कुल का 20 फीसदी) प्रति मोती 60 रुपये के हिसाब से 6000 3.60 कुल रिटर्न 8.10 III. शुद्ध आय (कुल आय- कुल लागत) 2.177 *स्रोत- *सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेशवॉटर एक्वाकल्चर, भुवनेश्वर, उड़ीसा**

Posted by navpreet Singh
Punjab
18-04-2019 11:25 AM
Navdeep singh ji Amrood de baag lai tusi Pawan Kumar 9878726420 nal samparak kar sakde ho.
Posted by sharry
Punjab
18-04-2019 11:07 AM
Sharry ji jekar makki chare de layi beejni hai ta tuc kisam J1006 ate african tall di bijai kar sakde ho. jekar pkavi makki beejni hai ta tuc PMH1 ja PMh2 kisam di bijai kar sakde ho.dhanwad
Posted by sharry
Punjab
18-04-2019 11:02 AM
sharry ji retli jameen vich jhone da jhaad ghat vadh ho sakda hai par tuc isdi koi v kisam la sakde ho jive PR 111, 113,114,115,118,120,121,122,123,126, di bijai kar sakde ho. is to ilava tuc basmati Punjab Basmati 3,Punjab Basmati 4,Punjab Basmati 5,Pusa Punjab Basmati 1509,Pusa Basmati 1121.
Posted by robin singh
Rajasthan
18-04-2019 10:49 AM
रोविन जी यह हरियाणवी क्रोस गाय है यदि आप इसे रोजाना मिर्नल मिक्स देते रहते है तो यह जल्दी हीट में आ जाएगी, इसे जल्दी हीट में लाने के लिए आप Agrimin super पाउडर 50 ग्राम रोजाना देते रहें और Ovumin advance गोलियां भी रोजाना एक गोली दें और 21 दिन तक देते रहें इससे हीट में आ जाएगी
Posted by Kuldeep Rawat
Uttarakhand
18-04-2019 10:21 AM
Kuldeep Rawat ji Madhumakhi palan ke bare me puri jankari or is ki training ke liye aap mere se 9411006092 (Dr. Ruchira Tiwari) pe samparak kare.

Posted by Palwinder Singh
Punjab
18-04-2019 10:15 AM
Apne nearby KVK ch contact kro Uh Tuhadi help krn gey

Posted by Maan Sukh
Punjab
18-04-2019 10:14 AM
यह धान पनीरी से लेकर पकने तक 120 दिन का समय लेती है और 90 मण तक निकल जाता है

Posted by Abhishek
Uttar Pradesh
18-04-2019 10:07 AM
फसल का समय पर बोना महत्तवपूर्ण है क्योंकि देरी से बिजाई करने पर उपज में काफी नुकसान होता है देरी से बिजाई के लिए जुलाई का महीना उपयुक्त है जबकि अगेती बिजाई की किस्मों के लिए बिजाई जून के मध्यम में पूरी कर लें

Posted by ADARSH KUMAR
Bihar
18-04-2019 10:07 AM
ADARSH KUMAR ji Moti ki kheti ki training ke liye aap Bijender Chouhan 9719994499 se samparak kare.

Posted by ramansaini
Punjab
18-04-2019 10:02 AM
ਖੇਤੀ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਦੇ ਸਮੇਂ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦਾ ਗਲ਼ਿਆ ਹੋਇਆ ਗੋਬਰ 20 ਟਨ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਪਾਓ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 15 ਦਿਨ ਬਾਅਦ, ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ 30 ਕਿਲੋ(ਯੂਰੀਆ 70 ਕਿਲੋ) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਪਾਓ ਹਰੇਕ ਕਟਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਫਿਰ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਖਾਦ ਪਾਓ ਫਾਸਫੋਰਸ 40 ਕਿਲੋ(ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ 240 ਕਿਲੋ) ਦੋ ਬਰਾਬਰ ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਪਾਓ ਪਹਿਲਾ ਹਿੱਸਾ ਬਸੰਤ ਰੁੱਤ ਅਤੇ ਦੂਜਾ ਮਾਨਸੂਨ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ ਪਾਓ
Posted by राकेश भाई चौधरी
Rajasthan
18-04-2019 09:51 AM
राकेश भाई चौधरी जी गिर गाय लेने के लिए आप अमीर खान पठान 9414745465 से संपर्क करें और साहीवाल लेने के लिए आप नवरूप सिंह 9649038200 से संपर्क करें

Posted by Raj
Rajasthan
18-04-2019 09:43 AM
नरमे की बिजाई का सही समय अप्रैल से मध्य मई तक है, आप नरमे की BUNTY, SHRIRAM 6588, 6488, Ankur 3028, RCH 134(Rasi), RCH 650(Rasi), Rasi 653, Rasi 776. Rasi 773 , US 51 , US 71, BAYER da 7172, 7272 किस्में लगा सकते हैं

Posted by sidharath
Himachal Pradesh
18-04-2019 09:33 AM
आप एक पाइया सत्यानाशी बूटी, आधा किलो शक्कर, एक पाइया शकरपारों में डालने वाला अनमीनीयम, इसकी तीन खुराके बना लेनी है एक खुराक जब देनी है उसमें बराबर पानी डालकर पशु को आगे रख दें यदि पशु ना खाये जल्दी जल्दी हाथों से खिला दें नहीं तो यह दवाई मुश्किल से खा होती है तीन दिन इस तरह दवाई देनी है पानी तब ही डालना है जब द.... (Read More)
आप एक पाइया सत्यानाशी बूटी, आधा किलो शक्कर, एक पाइया शकरपारों में डालने वाला अनमीनीयम, इसकी तीन खुराके बना लेनी है एक खुराक जब देनी है उसमें बराबर पानी डालकर पशु को आगे रख दें यदि पशु ना खाये जल्दी जल्दी हाथों से खिला दें नहीं तो यह दवाई मुश्किल से खा होती है तीन दिन इस तरह दवाई देनी है पानी तब ही डालना है जब दवाई देनी हो पहले नहीं डालनी दवाई देने से आधा घंटा बाद तक पशु को कुछ नहीं खिलाना और पशु का पिछला हिस्सा ऊंचा रखें
Posted by Amandeep singh Dhaliwal 97804 10102
Punjab
18-04-2019 09:24 AM
amandeep ji kirpa karke isdi photo bhejo ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by Narendra singh panwar
Madhya Pradesh
18-04-2019 09:15 AM
अगर आपने मिल्किंग मशीन लेनी है तो आप रोविन जी से 9910050731 नंबर पर संपर्क करे वह आपको गाइड भी करेंगे के आप को कौनसी मशीन खरीदनी चाहिए और वह आपको मशीन प्रोवाइड भी करवा देंगे

Posted by Om Prakash Pandey
Uttar Pradesh
18-04-2019 08:58 AM
खेत को नदीन मुक्त रखें, एक या दो गोडाई करें पहली गोडाई बिजाई के चार सप्ताह बाद करें और दूसरी गोडाई पहली गोडाई के दो सप्ताह बाद करें रासायनिक तरीके से नदीनों को ख्त्म करने के लिए फलूक्लोरालिन 600 मि.ली. प्रति एकड़ और ट्राइफलूरालिन 800 मि.ली बिजाई के समय या पहले प्रति एकड़ में डालें बिजाई के बाद दो दिनों में पैंडीम.... (Read More)
खेत को नदीन मुक्त रखें, एक या दो गोडाई करें पहली गोडाई बिजाई के चार सप्ताह बाद करें और दूसरी गोडाई पहली गोडाई के दो सप्ताह बाद करें रासायनिक तरीके से नदीनों को ख्त्म करने के लिए फलूक्लोरालिन 600 मि.ली. प्रति एकड़ और ट्राइफलूरालिन 800 मि.ली बिजाई के समय या पहले प्रति एकड़ में डालें बिजाई के बाद दो दिनों में पैंडीमैथालीन 1 लीटर को 100 से 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें

Posted by Raj
Rajasthan
18-04-2019 08:53 AM
raj ji kripya iski photo bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Laddi Singh Sarao
Punjab
18-04-2019 08:50 AM
ਬਲਵਾਨ ਜੀ ਝੋਨੇ ਦੀ ਇਸ ਵਾਰ ਕੋਈ ਨਵੀ ਕਿਸਮ ਨਹੀਂ ਆਈ ਹੈ ਤੁਸੀ ਝੋਨੇ ਦੀਆਂ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕਿਸਮਾਂ:-PR-126:-ਇਹ ਕਿਸਮ ਘਟ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ 123 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PR:-127 ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 137 ਦਿਨਾਂ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ PR121 ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 140 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱ.... (Read More)
ਬਲਵਾਨ ਜੀ ਝੋਨੇ ਦੀ ਇਸ ਵਾਰ ਕੋਈ ਨਵੀ ਕਿਸਮ ਨਹੀਂ ਆਈ ਹੈ ਤੁਸੀ ਝੋਨੇ ਦੀਆਂ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕਿਸਮਾਂ:-PR-126:-ਇਹ ਕਿਸਮ ਘਟ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ 123 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PR:-127 ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 137 ਦਿਨਾਂ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ PR121 ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 140 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ PR 124 ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 135 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਵਿੱਚ ਭੂਰੇ ਧੱਬੇ ਦਾ ਹਮਲਾ ਜਿਆਦਾ ਆਉਂਦਾ ਹੈ PR 122 ਇਹ ਕਿਸਮ 147 ਦਿਨ ਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਝਾੜ 31.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PR 123 ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 29 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 143 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ PR-114 ਇਹ ਕਿਸਮ ਨਿਰਯਾਤ ਲਈ ਢੁੱਕਵੀਂ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਝਾੜ 27.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ 145 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by ਸੁਖਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
18-04-2019 08:50 AM
ਉਸ ਨੂੰ ਇੰਜੈਕਸ਼ਨ Mifex 450ml ਦੀ ਬੋਤਲ ਵਿੱਚ ਇੰਜੈਕਸ਼ਨ Tonophos 20ml ਪਾ ਕੇ slow IV ਲਗਵਾਓ ਇੰਜੈਕਸ਼ਨ Trineurosol-Hp 5ml ਦੇ 2 ਟੀਕੇ ਇੰਜੈਕਸ਼ਨ Nurokind plus 15ml , ਇੰਜੈਕਸ਼ਨ Rumirec 10ml 3 ਦਿਨ ਲਗਵਾਓ ਤੇ ਨਾਲ ਹੀ ਪਾਊਡਰ Latifur ultra 30gm x 6 pouch 1 ਸਵੇਰੇ 1 ਸ਼ਾਮ ਨੂੰ ਦਿਓ ਤੇ ਨਾਲ Liquid Anabolit 1 litter 100ml ਸਵੇਰੇ 100ml ਸ਼ਾਮ ਨੂੰ ਦਿਓ Liquid Hepamust 200ml 50ml ਸਵੇਰੇ ਤੇ 50ml ਸ਼ਾਮ ਨੂੰ ਦਿਓ ਜੀ

Posted by sahil
Haryana
18-04-2019 08:28 AM
इसे Hiteck plane injection लगवाएं, इसे 1ml/50kg शरीर के वजन के हिसाब से लगाएं, बाकि इसके शरीर पर डालडा घी की मालिश करें

Posted by sahil
Haryana
18-04-2019 08:14 AM
आप pailtox shop लगाएं यह पशु को नहलाने से पहले अच्छी तरह झाग करके आधा घंटा लगा रहने दें फिर बाद में नहला दें इसका कोई नुकसान नहीं है इससे चमड़ी भी बढ़िया रहती है इसके साथ आप Bovimin-B पाउडर 100 ग्राम रोजाना दें और उसकी आंखों में पाउडर boric acid 10gm थोड़ा थोड़ा करके डालें और 5 मिनट के बाद आँखों में Gnta-D की दवाई दिन में 3 बार डालें इससे फर.... (Read More)
आप pailtox shop लगाएं यह पशु को नहलाने से पहले अच्छी तरह झाग करके आधा घंटा लगा रहने दें फिर बाद में नहला दें इसका कोई नुकसान नहीं है इससे चमड़ी भी बढ़िया रहती है इसके साथ आप Bovimin-B पाउडर 100 ग्राम रोजाना दें और उसकी आंखों में पाउडर boric acid 10gm थोड़ा थोड़ा करके डालें और 5 मिनट के बाद आँखों में Gnta-D की दवाई दिन में 3 बार डालें इससे फर्क पड़ने लग जाएगा
Posted by Gurmeet singh
Punjab
18-04-2019 08:01 AM
Tuci iss nu nazdiki doctor to check krwao, kyuki isdi janch krke isda sahi ilagg howega.
Posted by Gurmeet singh
Punjab
18-04-2019 08:00 AM
Tuci iss nu nazdiki doctor to check krwao, kyuki isdi janch krke isda sahi ilagg howega.

Posted by chamkaur sangha
Punjab
18-04-2019 07:04 AM
Chamkaur ji tuci jhoti nu Flukarid-DS bolus rojana 1 goli deo ate Agrimin super powder 100gm rojana ate Minotas bolus rojana 1 goli deo ate 21 din tak dinde rho, iss nal heat vich aa jawegi fir tuci uss nu nawe dudh krwa skde ho.

Posted by Amandeep Singh
Punjab
18-04-2019 06:59 AM
Os nu powder milk out 900gm 2 chamach swere 2 chamach shame nu deo nall hi liquid Vitamor H 10ml swere 10ml shame nu deo ji es nall farak pe jawega ji

Posted by Prem Singh
Rajasthan
18-04-2019 06:48 AM
खरगोश पालन की शुरूआत आप 1 यूनिट से शुरू कर सकते हैं एक यूनिट में 3 मेल और 10 फीमेल खरगोश होते हैं एक यूनिट आपको लगभग 30000 रूपये तक मिल जायेगा इसलिए आपको 30ग35 का शैड बनाना पड़ेगा बाकी यदि इनकी खुराक की बात करें तो इन्हें एक समय फीड और एक समय पठ्ठे खिलाने होते हैं बीमारियां कुछ खास नहीं लगती इन्हें लगभग 3 महीनों में बेचन.... (Read More)
खरगोश पालन की शुरूआत आप 1 यूनिट से शुरू कर सकते हैं एक यूनिट में 3 मेल और 10 फीमेल खरगोश होते हैं एक यूनिट आपको लगभग 30000 रूपये तक मिल जायेगा इसलिए आपको 30ग35 का शैड बनाना पड़ेगा बाकी यदि इनकी खुराक की बात करें तो इन्हें एक समय फीड और एक समय पठ्ठे खिलाने होते हैं बीमारियां कुछ खास नहीं लगती इन्हें लगभग 3 महीनों में बेचने के लिए तैयार हो जाते हैं खरगोश मीट के लिए और इनसे वैक्सीन तैयार की जाती हैं इसकी शुरूआत के लिए कंपनियां कॉन्ट्रैक्ट करती हैं और हर वर्ष 10 प्रतिशत रेट बढ़ाती हैं पंजाब में खरगोश पालन का व्यवसाय अभी बहुत कम है पर धीरे धीरे बढ़ रहा है आप पैराडाइज़ कंपनी से संपर्क कर सकते हैं जिनका संपर्क नंबर है 9466419455 आप खुद जाकर इनका फार्म देखकर आयें .वहां से आपको पूरी जानकारी मिल जाएगी

Posted by Sanjeev Thakur
Himachal Pradesh
18-04-2019 06:45 AM
टमाटर के छोटे कद की किस्मों के लिए 60 x 45 सैं.मी. और अधिक फैलने वाली किस्मों के लिए 90 x 30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बैंगन की कतारों के बीच में 60-70 सैं.मी. और पौधों के बीच में 60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें शिमला मिर्च की बिजाई के लिए कतारों के बीच 60 सैं.मी. और पौधों के बीच 45 सैं.मी. का फासला रखें
Posted by neeraj raina
Jammu & Kashmir
18-04-2019 12:32 AM
neeraj ji kripya aap apna swal vistar se pooche ki aap konsi fasl ki jankari lena chahte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by neeraj raina
Jammu & Kashmir
18-04-2019 12:27 AM
आप गेंदे की खेती करना चाहते है से मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इसकी खेती क.... (Read More)
आप गेंदे की खेती करना चाहते है से मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल नहीं है फ्रैंच गेंदे की किस्म हल्की मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म उच्च जैविक खाद वाली मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है प्रसिद्ध किस्में :- African Marigold: इस किस्म की फसल 90 सैं.मी. तक लम्बी होती है इसके फूल बड़े आकार के और लैमन, पीले, सुनहरे, संतरी और गहरे पीले रंग के होते हैं यह लम्बे समय की किस्म है इसकी अन्य किस्में जैसे Giant Double African Orange, Crown of Gold, Giant Double African Yellow, Chrysanthemum Charm, Golden Age, Cracker Jack आदि हैं French Marigold: यह छोटे कद की जल्दी पकने वाली किस्में हैं इसके फूल छोटे आकार के और पीले, संतरी, सुनहरे पीले, लाल जंग और महोगनी रंग के होते हैं इसकी अन्य किस्में जैसे Rusty Red, Butter Scotch, Red Borcade, Star of India, Lemon drop आदि हैं Pusa Basanti Gainda: यह लम्बे समय की किस्म है इसका पौधा 58.80 सैं.मी. लम्बा और गहरे हरे रंग के पत्ते होते हैं इसके फूल सल्फर पीले, दोहरे और कारनेशन किस्म के होते हैं Pusa Narangi Gainda: फूल निकलने के लिए 125-136 दिनों की आवश्यकता होती है इसका पौधा लम्बा और कद में 73.30 सैं.मी. का होता है और पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं इसके फूल संतरी रंग के और कारनेशन किस्म के होते हैं फूल घने और दोहरी परत वाले होते हैं इसके ताजे फूलों की पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए आखिरी जोताई के समय 250 क्विंटल रूड़ी की खाद और अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर मिट्टी में मिलायें गेंदे की बिजाई एक वर्ष में कभी भी की जा सकती है बारिश के मौसम में इसकी बिजाई मध्य जून से मध्य जुलाई में करें सर्दियों में इसकी बिजाई मध्य सितंबर से मध्य अक्तूबर में पूरी कर लें नर्सरी बैड 3x1 मीटर आकार के तैयार करें गाय का गला हुआ गोबर मिलायें बैडों में नमी बनाए रखने के लिए पानी दें सूखे फूलों का चूरा करें और उनका कतार या बैड पर छिड़काव करें जब पौधों का कद 10-15 सैं.मी. हो जाये, तब वे रोपाई के लिए तैयार होते हैं फैंच किस्म को 35x35 सैं.मी. और अफ्रीकी किस्म को 45x45 सैं.मी. के फासले पर रोपाई करें नर्सरी बैड पर बीजों का छिड़काव करें बिजाई के लिए पनीरी ढंग का प्रयोग किया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 600 से 800 ग्राम बीजों की आवश्यकता होती है जब फसल 30-45 दिन की हो जाए, तब पौधे के सिरे से उसे काट दें इससे पौधे को झाड़ीदार और घना होने में मदद मिलती है, इससे फूलों की गुणवत्ता और अच्छा आकार भी प्राप्त होता है बिजाई से पहले बीजों को एजोसपीरियम 200 ग्राम को 50 मि.ली. धान के चूरे में मिलाकर उपचार करें शुरूआती खुराक के तौर पर अच्छी वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 32 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 53 किलो) प्रति एकड़ में डालें मिट्टी की किस्म के अनुसार खाद की खुराक बदल दें सही खुराक देने के लिए मिट्टी की जांच करवायें और उसके आधार पर खुराक दें नदीनों की संख्या के आधार पर गोडाई करें खेत में रोपाई के बाद तुरंत सिंचाई करें कली बनने से लेकर कटाई तक की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है अप्रैल से जून के महीने में 4-5 दिनों के अंतराल पर लगातार सिंचाई करना आवश्यक होता है किस्म के आधार पर गेंदा 2 से 2.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं फ्रैंच गेंदे की किस्म 1.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म दो महीने में तैयार हो जाती है जब गेंदे का पूरा आकार विकसित हो जाये तब उसे तोड़ लें कटाई सुबह के समय और शाम के समय करें फूलों की तुड़ाई से पहले खेत को सिंचित करना चाहिए इससे फूलों की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है इसे आप अपनी नजदीकी फूल मंडी में बेच कर इसे अपनी आय का साधन बना सकते है

Posted by arvind
Punjab
18-04-2019 12:02 AM
Kya mai aap ko answer Punjabi mey likh k send kr skta hoo

Posted by Rajendra Patil
Maharashtra
17-04-2019 11:49 PM
अगर आप छोटे से इन्वेस्टमेंट से लाखों कमाना चाहते हैं तो आपके लिए मोती की खेती एक बेहतर विकल्प हो सकती है मोती की मांग इन दिनों घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में काफी अधिक है, इसलिए इसके अच्छे दाम भी मिल रहे हैं आप महज 2 लाख रुपए के इंन्वेस्ट से इससे करीब डेढ़ साल में इंटीग्रेटेड फार्मिंग करके 10-12 लाख .... (Read More)
अगर आप छोटे से इन्वेस्टमेंट से लाखों कमाना चाहते हैं तो आपके लिए मोती की खेती एक बेहतर विकल्प हो सकती है मोती की मांग इन दिनों घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में काफी अधिक है, इसलिए इसके अच्छे दाम भी मिल रहे हैं आप महज 2 लाख रुपए के इंन्वेस्ट से इससे करीब डेढ़ साल में इंटीग्रेटेड फार्मिंग करके 10-12 लाख रुपए यानी हर महीने 1लाख रुपए से अधिक की कमाई कर सकते हैं आइए आपको बताते हैं कि कैसे करें मोती की खेती से कमाई...
कम लागत ज्यादा मुनाफा Pearl Farming
बाजार में 1 मिमी से 20 मिमी सीप के मोती का दाम करीब 300 रूपये से लेकर 1500 रूपये होता है आजकल डिजायनर मोतियों को खासा पसन्द किया जा रहा है जिनकी बाजार में अच्छी कीमत मिलती है भारतीय बाजार की अपेक्षा विदेशी बाजार में मोतिओ का निर्यात कर काफी अच्छा पैसा कमाया जा सकता है तथा सीप से मोती निकाल लेने के बाद सीप को भी बाजार में बेंचा जा सकता है सीप द्वारा कई सजावटी सामान तैयार किये जाते है जैसे कि सिलिंग झूमर, आर्कषक झालर, गुलदस्ते आदि सीपों से नदीं और तालाबों के जल का शुद्धिकरण भी होता रहता है जिससे जल प्रदूषण की समस्या से काफी हद तक निपटा जा सकता है
सूखा-अकाल की मार झेल रहे किसानों एवं बेरोजगार छात्र-छात्राओं को मीठे पानी में मोती संवर्धन के क्षेत्र में आगे आना चाहिए क्योंकि मोतीयों की मांग देश विदेश में बनी रहने के कारण इसके खेती का भविष्य उज्जवल प्रतीत होता है भारत के अनेक राज्यों के नवयुवकों ने मोती उत्पादन को एक पेशे के रूप में अपनाया है उत्तर प्रदेश ,मध्य प्रदेश,झारखण्ड एवं छत्तीसगढ़ राज्य में भी मोती उत्पादन की बेहतर संभावना है मोती संवर्द्धन से सम्बधित अधिक जानकारी के लिए Smt बमाेरिया 9584120929 (Bamoriya मोती फार्म एवं ट्रेनिंग सेंटर) से संपर्क किया जा सकता है यह संस्थान ग्रामीण नवयुवकों, किसानों एवं छात्र-छात्राओँ को मोती उत्पादन पर तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करता है मोती पालन एवं सहयोगी व्यवसाय से किसान भाई या व्यापारी भाई अपनी आय 10-12 गुना बड़ा सकते है .
मोती पालन , मछली पालन और 20-25 व्यवसाय इसके साथ किये जा सकते है जो एक दुसरे के पूरक होते है
मोती पालन से आय तो होती है साथ ही जल संरक्षण एवं वायु प्रदुषण भी काम किया जा सकता है
मोती एक प्राकृतिक रत्न है जो सीप के अंदर पैदा होता है इसकी खेती भी की जाती है मोती की खेती मे ज्यादा खर्चा भी नहीं होता किसान ही नहीं बल्कि नौकरी पेसे वाले वे लोग भी कर सकते हैं जिनके पास मात्र सप्ताह के 2 दिन का समय ही उपलब्ध रहता है इस ग्रुप का उद्देश्य मोती की खेती को हर इच्छुक व्यक्ति तक पहुंचाना है
मोतियों की खेती के प्रति लोगों के बढ़ते हुए उत्साह को देखते हुए हमने मोती की खेती की ट्रेनिंग क्लासेस शुरू की हैं यह ट्रेनिंग 1 दिन की होती है ,इस 1दिनों में सीप में डिज़ाइनर मोती और गोल मोती बनाने की विधि के बारे में पूरी जानकारी विस्तार से दी जाती है सीपों का पालन पोषण सीपों की सर्जरी आदि के बारे में विस्तार से बताया जाता है कृपया इच्छुक व्यक्ति प्रशिक्षण के लिए कम से कम 5 दिन पहले बताएं प्रशिक्षण में निम्नलिखित विषयों को विस्तार से समझाया जाता है,
1. सीपों के प्रकार
2. सीप के विभिन्न अंग
3. प्रयोग में लाए जाने वाले सभी प्रकार के इंस्ट्रुमेंट्स
4. मोतियों का बीज अर्थार्त बीड़ बनाने की विधि तथा उसके लिए प्रयोग में लाए जाने वाले पदार्थ की जानकारी
5. Designer bead तथा गोल बीड़ तैयार करना
6 डिजाइनर मोती तैयार करने की विधि
7. तालाब बनाने की विधि के बारे में
8. सीपों के लिए भोजन तैयार करने की विधि
9. Operation से पहले सीपों के रखरखाव के बारे में
10. ऑपरेशन करके गोल मोती तैयार करने की विधि
11. ऑपरेशन के पश्चात सीपों के रखरखाव के बारे में
Posted by Tabrej Shah
Uttar Pradesh
17-04-2019 11:09 PM
अगर आप छोटे से इन्वेस्टमेंट से लाखों कमाना चाहते हैं तो आपके लिए मोती की खेती एक बेहतर विकल्प हो सकती है मोती की मांग इन दिनों घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में काफी अधिक है, इसलिए इसके अच्छे दाम भी मिल रहे हैं आप महज 2 लाख रुपए के इंन्वेस्ट से इससे करीब डेढ़ साल में इंटीग्रेटेड फार्मिंग करके 10-12 लाख .... (Read More)
अगर आप छोटे से इन्वेस्टमेंट से लाखों कमाना चाहते हैं तो आपके लिए मोती की खेती एक बेहतर विकल्प हो सकती है मोती की मांग इन दिनों घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में काफी अधिक है, इसलिए इसके अच्छे दाम भी मिल रहे हैं आप महज 2 लाख रुपए के इंन्वेस्ट से इससे करीब डेढ़ साल में इंटीग्रेटेड फार्मिंग करके 10-12 लाख रुपए यानी हर महीने 1लाख रुपए से अधिक की कमाई कर सकते हैं आइए आपको बताते हैं कि कैसे करें मोती की खेती से कमाई...
कम लागत ज्यादा मुनाफा Pearl Farming
बाजार में 1 मिमी से 20 मिमी सीप के मोती का दाम करीब 300 रूपये से लेकर 1500 रूपये होता है आजकल डिजायनर मोतियों को खासा पसन्द किया जा रहा है जिनकी बाजार में अच्छी कीमत मिलती है भारतीय बाजार की अपेक्षा विदेशी बाजार में मोतिओ का निर्यात कर काफी अच्छा पैसा कमाया जा सकता है तथा सीप से मोती निकाल लेने के बाद सीप को भी बाजार में बेंचा जा सकता है सीप द्वारा कई सजावटी सामान तैयार किये जाते है जैसे कि सिलिंग झूमर, आर्कषक झालर, गुलदस्ते आदि सीपों से नदीं और तालाबों के जल का शुद्धिकरण भी होता रहता है जिससे जल प्रदूषण की समस्या से काफी हद तक निपटा जा सकता है
सूखा-अकाल की मार झेल रहे किसानों एवं बेरोजगार छात्र-छात्राओं को मीठे पानी में मोती संवर्धन के क्षेत्र में आगे आना चाहिए क्योंकि मोतीयों की मांग देश विदेश में बनी रहने के कारण इसके खेती का भविष्य उज्जवल प्रतीत होता है भारत के अनेक राज्यों के नवयुवकों ने मोती उत्पादन को एक पेशे के रूप में अपनाया है उत्तर प्रदेश ,मध्य प्रदेश,झारखण्ड एवं छत्तीसगढ़ राज्य में भी मोती उत्पादन की बेहतर संभावना है मोती संवर्द्धन से सम्बधित अधिक जानकारी के लिए Smt बमाेरिया 9584120929 (Bamoriya मोती फार्म एवं ट्रेनिंग सेंटर) से संपर्क किया जा सकता है यह संस्थान ग्रामीण नवयुवकों, किसानों एवं छात्र-छात्राओँ को मोती उत्पादन पर तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करता है मोती पालन एवं सहयोगी व्यवसाय से किसान भाई या व्यापारी भाई अपनी आय 10-12 गुना बड़ा सकते है .
मोती पालन , मछली पालन और 20-25 व्यवसाय इसके साथ किये जा सकते है जो एक दुसरे के पूरक होते है
मोती पालन से आय तो होती है साथ ही जल संरक्षण एवं वायु प्रदुषण भी काम किया जा सकता है
मोती एक प्राकृतिक रत्न है जो सीप के अंदर पैदा होता है इसकी खेती भी की जाती है मोती की खेती मे ज्यादा खर्चा भी नहीं होता किसान ही नहीं बल्कि नौकरी पेसे वाले वे लोग भी कर सकते हैं जिनके पास मात्र सप्ताह के 2 दिन का समय ही उपलब्ध रहता है इस ग्रुप का उद्देश्य मोती की खेती को हर इच्छुक व्यक्ति तक पहुंचाना है
मोतियों की खेती के प्रति लोगों के बढ़ते हुए उत्साह को देखते हुए हमने मोती की खेती की ट्रेनिंग क्लासेस शुरू की हैं यह ट्रेनिंग 1 दिन की होती है ,इस 1दिनों में सीप में डिज़ाइनर मोती और गोल मोती बनाने की विधि के बारे में पूरी जानकारी विस्तार से दी जाती है सीपों का पालन पोषण सीपों की सर्जरी आदि के बारे में विस्तार से बताया जाता है कृपया इच्छुक व्यक्ति प्रशिक्षण के लिए कम से कम 5 दिन पहले बताएं प्रशिक्षण में निम्नलिखित विषयों को विस्तार से समझाया जाता है,
1. सीपों के प्रकार
2. सीप के विभिन्न अंग
3. प्रयोग में लाए जाने वाले सभी प्रकार के इंस्ट्रुमेंट्स
4. मोतियों का बीज अर्थार्त बीड़ बनाने की विधि तथा उसके लिए प्रयोग में लाए जाने वाले पदार्थ की जानकारी
5. Designer bead तथा गोल बीड़ तैयार करना
6 डिजाइनर मोती तैयार करने की विधि
7. तालाब बनाने की विधि के बारे में
8. सीपों के लिए भोजन तैयार करने की विधि
9. Operation से पहले सीपों के रखरखाव के बारे में
10. ऑपरेशन करके गोल मोती तैयार करने की विधि
11. ऑपरेशन के पश्चात सीपों के रखरखाव के बारे में
Posted by विशवेशवर सिंह
Himachal Pradesh
17-04-2019 10:39 PM
विशवेशवर सिंह जी लंगूर खरीदना और बेचना कानूनी अपराध है और बंदरों से नुक्सान को बचाने के लिए आप Prem raj Saini 9719432296 से संपर्क कर सकते है इन्होंने एक जैविक खाद तैयार की हुई है

Posted by Prajakta
Maharashtra
17-04-2019 10:34 PM
ਹਾਈਡਰੋਪੋਨਿਕ ਇਕ ਅਜੇਹੀ ਤਕਨੀਕ ਹੈ ਜਿਸਦੇ ਵਿਚ ਬਿਨਾ ਮਿੱਟੀ ਦੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਅਤੇ ਚਾਰਾ ਉਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸਦੇ ਵਿਚ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ ਤਰਲ ਰੂਪ ਦੇ ਵਿਚ ਤੱਤ ਦਿਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਬਾਰੇ ਵਿਚ ਹੋਰ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਸੋਮਵੀਰ ਜੀ 9878733551 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Prajakta
Maharashtra
17-04-2019 10:33 PM
अगर आप छोटे से इन्वेस्टमेंट से लाखों कमाना चाहते हैं तो आपके लिए मोती की खेती एक बेहतर विकल्प हो सकती है मोती की मांग इन दिनों घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में काफी अधिक है, इसलिए इसके अच्छे दाम भी मिल रहे हैं आप महज 2 लाख रुपए के इंन्वेस्ट से इससे करीब डेढ़ साल में इंटीग्रेटेड फार्मिंग करके 10-12 लाख .... (Read More)
अगर आप छोटे से इन्वेस्टमेंट से लाखों कमाना चाहते हैं तो आपके लिए मोती की खेती एक बेहतर विकल्प हो सकती है मोती की मांग इन दिनों घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में काफी अधिक है, इसलिए इसके अच्छे दाम भी मिल रहे हैं आप महज 2 लाख रुपए के इंन्वेस्ट से इससे करीब डेढ़ साल में इंटीग्रेटेड फार्मिंग करके 10-12 लाख रुपए यानी हर महीने 1लाख रुपए से अधिक की कमाई कर सकते हैं आइए आपको बताते हैं कि कैसे करें मोती की खेती से कमाई...
कम लागत ज्यादा मुनाफा Pearl Farming
बाजार में 1 मिमी से 20 मिमी सीप के मोती का दाम करीब 300 रूपये से लेकर 1500 रूपये होता है आजकल डिजायनर मोतियों को खासा पसन्द किया जा रहा है जिनकी बाजार में अच्छी कीमत मिलती है भारतीय बाजार की अपेक्षा विदेशी बाजार में मोतिओ का निर्यात कर काफी अच्छा पैसा कमाया जा सकता है तथा सीप से मोती निकाल लेने के बाद सीप को भी बाजार में बेंचा जा सकता है सीप द्वारा कई सजावटी सामान तैयार किये जाते है जैसे कि सिलिंग झूमर, आर्कषक झालर, गुलदस्ते आदि सीपों से नदीं और तालाबों के जल का शुद्धिकरण भी होता रहता है जिससे जल प्रदूषण की समस्या से काफी हद तक निपटा जा सकता है
सूखा-अकाल की मार झेल रहे किसानों एवं बेरोजगार छात्र-छात्राओं को मीठे पानी में मोती संवर्धन के क्षेत्र में आगे आना चाहिए क्योंकि मोतीयों की मांग देश विदेश में बनी रहने के कारण इसके खेती का भविष्य उज्जवल प्रतीत होता है भारत के अनेक राज्यों के नवयुवकों ने मोती उत्पादन को एक पेशे के रूप में अपनाया है उत्तर प्रदेश ,मध्य प्रदेश,झारखण्ड एवं छत्तीसगढ़ राज्य में भी मोती उत्पादन की बेहतर संभावना है मोती संवर्द्धन से सम्बधित अधिक जानकारी के लिए Smt बमाेरिया 9584120929 (Bamoriya मोती फार्म एवं ट्रेनिंग सेंटर) से संपर्क किया जा सकता है यह संस्थान ग्रामीण नवयुवकों, किसानों एवं छात्र-छात्राओँ को मोती उत्पादन पर तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करता है मोती पालन एवं सहयोगी व्यवसाय से किसान भाई या व्यापारी भाई अपनी आय 10-12 गुना बड़ा सकते है .
मोती पालन , मछली पालन और 20-25 व्यवसाय इसके साथ किये जा सकते है जो एक दुसरे के पूरक होते है
मोती पालन से आय तो होती है साथ ही जल संरक्षण एवं वायु प्रदुषण भी काम किया जा सकता है
मोती एक प्राकृतिक रत्न है जो सीप के अंदर पैदा होता है इसकी खेती भी की जाती है मोती की खेती मे ज्यादा खर्चा भी नहीं होता किसान ही नहीं बल्कि नौकरी पेसे वाले वे लोग भी कर सकते हैं जिनके पास मात्र सप्ताह के 2 दिन का समय ही उपलब्ध रहता है इस ग्रुप का उद्देश्य मोती की खेती को हर इच्छुक व्यक्ति तक पहुंचाना है
मोतियों की खेती के प्रति लोगों के बढ़ते हुए उत्साह को देखते हुए हमने मोती की खेती की ट्रेनिंग क्लासेस शुरू की हैं यह ट्रेनिंग 1 दिन की होती है ,इस 1दिनों में सीप में डिज़ाइनर मोती और गोल मोती बनाने की विधि के बारे में पूरी जानकारी विस्तार से दी जाती है सीपों का पालन पोषण सीपों की सर्जरी आदि के बारे में विस्तार से बताया जाता है कृपया इच्छुक व्यक्ति प्रशिक्षण के लिए कम से कम 5 दिन पहले बताएं प्रशिक्षण में निम्नलिखित विषयों को विस्तार से समझाया जाता है,
1. सीपों के प्रकार
2. सीप के विभिन्न अंग
3. प्रयोग में लाए जाने वाले सभी प्रकार के इंस्ट्रुमेंट्स
4. मोतियों का बीज अर्थार्त बीड़ बनाने की विधि तथा उसके लिए प्रयोग में लाए जाने वाले पदार्थ की जानकारी
5. Designer bead तथा गोल बीड़ तैयार करना
6 डिजाइनर मोती तैयार करने की विधि
7. तालाब बनाने की विधि के बारे में
8. सीपों के लिए भोजन तैयार करने की विधि
9. Operation से पहले सीपों के रखरखाव के बारे में
10. ऑपरेशन करके गोल मोती तैयार करने की विधि
11. ऑपरेशन के पश्चात सीपों के रखरखाव के बारे में
Posted by Royal hussain
Punjab
17-04-2019 10:27 PM
पनीरी लगाने के बाद खेत में दो सप्ताह तक अच्छी तरह पानी खड़ा रहने देना चाहिए जब सारा पानी सूख जाए तो उसके दो दिन बाद फिर से पानी लगाना चाहिए खड़े पानी की गहराई 10 सै.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए खेत में से बूटी और नदीनों को निकालने से पहले खेत में से सारा पानी निकाल देना चाहिए ओर इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद ख.... (Read More)
पनीरी लगाने के बाद खेत में दो सप्ताह तक अच्छी तरह पानी खड़ा रहने देना चाहिए जब सारा पानी सूख जाए तो उसके दो दिन बाद फिर से पानी लगाना चाहिए खड़े पानी की गहराई 10 सै.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए खेत में से बूटी और नदीनों को निकालने से पहले खेत में से सारा पानी निकाल देना चाहिए ओर इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद खेत की फिर से सिंचाई करनी चाहिए पकने से 15 दिन पहले सिंचाई करनी बंद करनी चाहिए ताकि फसल को आसानी से काटा जा सके
Posted by neeraj raina
Jammu & Kashmir
17-04-2019 10:26 PM
आप गेंदे की खेती करना चाहते है से मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इसकी खेती क.... (Read More)
आप गेंदे की खेती करना चाहते है से मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल नहीं है फ्रैंच गेंदे की किस्म हल्की मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म उच्च जैविक खाद वाली मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है प्रसिद्ध किस्में :- African Marigold: इस किस्म की फसल 90 सैं.मी. तक लम्बी होती है इसके फूल बड़े आकार के और लैमन, पीले, सुनहरे, संतरी और गहरे पीले रंग के होते हैं यह लम्बे समय की किस्म है इसकी अन्य किस्में जैसे Giant Double African Orange, Crown of Gold, Giant Double African Yellow, Chrysanthemum Charm, Golden Age, Cracker Jack आदि हैं French Marigold: यह छोटे कद की जल्दी पकने वाली किस्में हैं इसके फूल छोटे आकार के और पीले, संतरी, सुनहरे पीले, लाल जंग और महोगनी रंग के होते हैं इसकी अन्य किस्में जैसे Rusty Red, Butter Scotch, Red Borcade, Star of India, Lemon drop आदि हैं Pusa Basanti Gainda: यह लम्बे समय की किस्म है इसका पौधा 58.80 सैं.मी. लम्बा और गहरे हरे रंग के पत्ते होते हैं इसके फूल सल्फर पीले, दोहरे और कारनेशन किस्म के होते हैं Pusa Narangi Gainda: फूल निकलने के लिए 125-136 दिनों की आवश्यकता होती है इसका पौधा लम्बा और कद में 73.30 सैं.मी. का होता है और पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं इसके फूल संतरी रंग के और कारनेशन किस्म के होते हैं फूल घने और दोहरी परत वाले होते हैं इसके ताजे फूलों की पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए आखिरी जोताई के समय 250 क्विंटल रूड़ी की खाद और अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर मिट्टी में मिलायें गेंदे की बिजाई एक वर्ष में कभी भी की जा सकती है बारिश के मौसम में इसकी बिजाई मध्य जून से मध्य जुलाई में करें सर्दियों में इसकी बिजाई मध्य सितंबर से मध्य अक्तूबर में पूरी कर लें नर्सरी बैड 3x1 मीटर आकार के तैयार करें गाय का गला हुआ गोबर मिलायें बैडों में नमी बनाए रखने के लिए पानी दें सूखे फूलों का चूरा करें और उनका कतार या बैड पर छिड़काव करें जब पौधों का कद 10-15 सैं.मी. हो जाये, तब वे रोपाई के लिए तैयार होते हैं फैंच किस्म को 35x35 सैं.मी. और अफ्रीकी किस्म को 45x45 सैं.मी. के फासले पर रोपाई करें नर्सरी बैड पर बीजों का छिड़काव करें बिजाई के लिए पनीरी ढंग का प्रयोग किया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 600 से 800 ग्राम बीजों की आवश्यकता होती है जब फसल 30-45 दिन की हो जाए, तब पौधे के सिरे से उसे काट दें इससे पौधे को झाड़ीदार और घना होने में मदद मिलती है, इससे फूलों की गुणवत्ता और अच्छा आकार भी प्राप्त होता है बिजाई से पहले बीजों को एजोसपीरियम 200 ग्राम को 50 मि.ली. धान के चूरे में मिलाकर उपचार करें शुरूआती खुराक के तौर पर अच्छी वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 32 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 53 किलो) प्रति एकड़ में डालें मिट्टी की किस्म के अनुसार खाद की खुराक बदल दें सही खुराक देने के लिए मिट्टी की जांच करवायें और उसके आधार पर खुराक दें नदीनों की संख्या के आधार पर गोडाई करें खेत में रोपाई के बाद तुरंत सिंचाई करें कली बनने से लेकर कटाई तक की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है अप्रैल से जून के महीने में 4-5 दिनों के अंतराल पर लगातार सिंचाई करना आवश्यक होता है किस्म के आधार पर गेंदा 2 से 2.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं फ्रैंच गेंदे की किस्म 1.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म दो महीने में तैयार हो जाती है जब गेंदे का पूरा आकार विकसित हो जाये तब उसे तोड़ लें कटाई सुबह के समय और शाम के समय करें फूलों की तुड़ाई से पहले खेत को सिंचित करना चाहिए इससे फूलों की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है इसे आप अपनी नजदीकी फूल मंडी में बेच कर इसे अपनी आय का साधन बना सकते है

Posted by Raman deep singh
Punjab
17-04-2019 09:49 PM
jekar nami jyada hai ta tuhanu rauni karn di lod nahi hai.dhanwad
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