Posted by robin singh
Rajasthan
20-04-2019 02:12 PM
संतुलित खुराक 100 किलो बनाने के लिए आवश्यक सामग्री चाहिए जैसे 25 किलो अनाज (ज्वार, बाजरी (सर्दियां), गेहूं, जौं (गर्मियां)इनमें से कोई एक), दाल चूरी 20 किलो (मूंग चूरी, मांह चूरी, मोठ चूरी (केवल सर्दियों के लिए), मसूर चूरी, अरहर (इनमें से एक), डी ओ सी 25 किलो (धान का चूरा), फाइबर छिल्का 15 किलो (गेहूं, चौकर, चना छिल्का, मटर छिल्का.... (Read More)
संतुलित खुराक 100 किलो बनाने के लिए आवश्यक सामग्री चाहिए जैसे 25 किलो अनाज (ज्वार, बाजरी (सर्दियां), गेहूं, जौं (गर्मियां)इनमें से कोई एक), दाल चूरी 20 किलो (मूंग चूरी, मांह चूरी, मोठ चूरी (केवल सर्दियों के लिए), मसूर चूरी, अरहर (इनमें से एक), डी ओ सी 25 किलो (धान का चूरा), फाइबर छिल्का 15 किलो (गेहूं, चौकर, चना छिल्का, मटर छिल्का, इनमें से एक), खल 15 किला (सरसों, बिनौला या सोया (इनमें से कोई एक), मीठा सोडा 250 ग्राम, 1 किलो नमक, गुड़ 1 किला, 1 किलो हल्दी (सर्दियां में) इन्हें मिला लें यह फीड पशु के लिए बहुत लाभदायक होती है बाकि इसके साथ Enerboost पाउडर 100 ग्राम रोज़ाना दें, इससे पशु की कमज़ोरी दूर होती है, बाकि फीड आप उसे 2 किलो दूध मगर 1 किलो के हिसाब से दे सकते हैं

Posted by 1095
Punjab
20-04-2019 02:06 PM
यह मुर्रा नस्ल है, इसे कारगिल की heifer dry फीड डालें और साथ पाउडर Calf Plan 3kg 100gm रोज़ाना दें

Posted by joga Gatt
Haryana
20-04-2019 01:45 PM
अरंडी मुख्य रूप से इसके बीजों के लिए उगाया जाने वाला वार्षिक पौधा है इसके बीजों से निकाला गया तेल खाने के लिए प्रयोग नहीं होता है, पर इसका उद्योगिक स्तर पर काफी प्रयोग होता है इसके अलावा औषधीय और प्रकाश उद्देश्य से भी इसका उपयोग किया जाता है तेल निकालने के बाद बाकी बचे तेल केक को जैविक खाद के रूप में प्रयोग.... (Read More)
अरंडी मुख्य रूप से इसके बीजों के लिए उगाया जाने वाला वार्षिक पौधा है इसके बीजों से निकाला गया तेल खाने के लिए प्रयोग नहीं होता है, पर इसका उद्योगिक स्तर पर काफी प्रयोग होता है इसके अलावा औषधीय और प्रकाश उद्देश्य से भी इसका उपयोग किया जाता है तेल निकालने के बाद बाकी बचे तेल केक को जैविक खाद के रूप में प्रयोग किया जाता है भारत अरंडी का मुख्य उत्पादक देश है और भारत में गुजरात, आंध्र प्रदेश और राजस्थान मुख्य अरंडी उत्पादक राज्य हैं व्यापारिक खेती के लिए कम उपजाऊ भूमि का प्रयोग अरंडी की खेती के लिए किया जाता है पर यह गहरी, अच्छे निकास वाली, उपजाऊ, हल्की तेजाबी रेतली दोमट मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी की पी एच 5 से 8.5 होनी चाहिए गर्मियों में खेत की तीन से चार बार गहरी जोताई करें इससे नदीनों को खत्म करने और मिट्टी में नमी रखने में मदद मिलेगी डलियों को तोड़ने के लिए जोताई के बाद तवियों से जोताई करें फिर मिट्टी के स्तर को समतल करें ताकि खेत में पानी ना खड़ा रह सके अरंडी को पूरे वर्ष उगाया जा सकता है, जहां सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो अरंडी की खेती के लिए जुलाई के दूसरे सप्ताह से लेकर अगस्त का पहला सप्ताह उपयुक्त होता है फासला किस्म और बिजाई के समय पर आधारित होता है सिंचित हालातों में 90सैं.मी.x60 सैं.मी. या 120 सैं.मी.x 60 सैं.मी.फासले का प्रयोग करें जब कि बारानी हालातों में 60 सैं.मी.x45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को ज्यादा गहराई में बोने से परहेज़ करें इन्हें 5 सैं.मी. की गहराई में बोयें इसकी बिजाई गड्ढा खोदकर की जाती है किस्म के आधार पर फसल 145-180 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है जब एक या दो फल सूखते या पीले होते दिखाई दें, तो अरंडी की गुच्छों में कटाई शुरू करें सभी गुच्छे समान समय पर नहीं पकते इसलिए दो-तीन तुड़ाइयां आवश्यक हैं तुड़ाई के बाद गुच्छों को धूप में चार से पांच दिन सुखाएं अच्छी तरह से सूखने के बाद बीजों को अलग कर लें फलों की जल्दी कटाई ना करें इससे तेल की प्रतिशतता कम हो जाती है यह बिजाई के ढंग पर आधारित होती है यदि बीजों को हल के पीछे डालना है तो ज्यादा बीजों की मात्रा 4.5 से 6 किलोग्राम प्रति एकड़ में आवश्यकता होती है यदि गड्ढा खोदकर बिजाई की जाए तो 2.5 से 3.3 किलोग्राम प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है फसल को मिट्टी से होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए बिजाई से पहले कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें अच्छी तरह से सूखे हुए फलों में से बीजों को अलग कर लें उसके बाद बीजों से अरंडी का तेल निकाल लें तेल निकालने के बाद तेल केक में 8-10 प्रतिशत अरंडी का तेल होता है तेल केक का प्रयोग खेत में जैविक खाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता है अरंडी की पूरी फसल को 17-20 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बारिश के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती शुरूआती अवस्था में नदीनों की रोकथाम बहुत महत्तवपूर्ण है बिजाई के 20वें और 50वें दिन बाद हाथों से दो बार गोडाई करें बिजाई के दूसरे और तीसरे दिन बाद पैंडीमैथालीन 1 लीटर को 250 लीटर पानी में मिलाकर डालें यह घास और चौड़े पत्तों वाले नदीनों को रोकने में सहायक होगा
Posted by विवेक कु यादव
Chattisgarh
20-04-2019 01:29 PM
ऐसे बहुत सारे पौधे और जड़ी बूटियाँ है जिसका प्रयोग पशु को ठीक करने के लिया किया जाता है इस तरह बताना मुश्किल है जी आप यह वीडियो देखे इसमें जड़ी बूटियाँ की जानकारी दी गयी है अगर कोई आपका फिर भी सवाल हुआ तो आप दोबारा अपना सवाल पोस्ट कर सकते हो जी
https://youtu.be/7Kqo37rXT_A
Posted by Harinder Singh
Punjab
20-04-2019 01:24 PM
Harinder g moongi ka sarkari rate apko market se hi ptaa krna pdega ..kyuki vhaan par iss ka exact rate ptaa chal payega...
Posted by krishan singh
Punjab
20-04-2019 01:04 PM
आप भैंस को potasium-iodied दवा देनी शुरू करें इसकी 20 ग्राम की पैकिंग होती है इसे रोजाना 5 ग्राम दें आप Ifer-h 5ml के इंजेक्शन भी लगवायें इसके तीन इंजेक्शन लगवायें इसे आप 3—3 दिनों के फर्क से लगवायें

Posted by inderpal
Punjab
20-04-2019 12:59 PM
Alsi da tel rojana 50-50ml de skde ho, ehh bhutt garam hunda hai isdi jyada varto nahi krni chahidi hai, jekar tuci pashu nu heat vich lyauna hai tan tuci uss nu vdia mineral mixture jiwe Agrimin super powder, Bovimin-B powder, Ovumin powder koi v 50gm rojana de skde ho, isde nal Minotas bolus rojana 1 goli deo ate 21 din tak denn nal cow heat vich aa jawegi.

Posted by jay pee kalia
Punjab
20-04-2019 12:54 PM
Jaspal kumar ji uss nu tuci jo v feed dinde ho ohhi dinde rho , hara chara v vdia matra vich deo, isde nal nal tuci uss nu Pregstay gold powder 30gm rojana dena suru kro, iss nal pashu de gaban rehnn di ass vaddh jndi hai .
Posted by umatiya samir
Gujarat
20-04-2019 12:53 PM
आप बच्चे और गाय की डीवॉर्मिंग एक सप्ताह के बाद कर सकते है जब बच्चा एक सप्ताह से ज्यादा आयु का हो जाए तब आप उसकी और उसकी मां की डीवॉर्मिंग करवा सकते है

Posted by Imran khan
Uttar Pradesh
20-04-2019 12:47 PM
बहुत बहुत शुभकामनाये मोती पालन के फायदे - मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो आपको अन्य लोगो से अलग करता है .वही लोग इस व्यवसाय को कर सकते है ..जिनकी सोच कुछ अलग करने की हो .. (1) एक एकड़ में पारंपरिक खेती से 50000/- का मुनाफा हो सकता है और मोती पालन से 8-10 लाख (2) एक तालाब में बहुउदेशीय योजनाओ का लाभ लेके 8-10 प्रकार के व्यापर करके आ.... (Read More)
बहुत बहुत शुभकामनाये मोती पालन के फायदे - मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो आपको अन्य लोगो से अलग करता है .वही लोग इस व्यवसाय को कर सकते है ..जिनकी सोच कुछ अलग करने की हो .. (1) एक एकड़ में पारंपरिक खेती से 50000/- का मुनाफा हो सकता है और मोती पालन से 8-10 लाख (2) एक तालाब में बहुउदेशीय योजनाओ का लाभ लेके 8-10 प्रकार के व्यापर करके आय मे बृद्धि (3) जमीन में जल स्तर को बढ़ाकर सरकार की मदद (4) बचे हुए सामान से हस्तकला उद्योग को बढ़ावा देना (5) यदि महिला वर्ग इस व्यवसाय में आते है तो ज्यादा फायदे है क्योकि मोती के आभूषण के साथ साथ मदर ऑफ़ पर्ल (Shell jewellery) का भी फायदा ले सकते है (6) आसपास के लोगो को रोजगार , मोती पालन एवं इंटिग्रेटेड फार्मिंग की संपूर्ण जानकारी के लिए अधिक जानकारी संपर्क करे ..अमित बमोरिया 9407461361 9770085381 बमोरिया मोती सम्बर्धन केंद्र मध्य प्रदेश https://m.bhaskar.com/news/MP-HOSH-quitting-govt-job-engineer-is-earning-money-from-pearl-cultivation-news-hindi-5533297-PHO.html

Posted by Gurtej singh
Punjab
20-04-2019 12:46 PM
ਉਸ ਨੂੰ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਵੜੇਮੇ ਰਾਤ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਭਿਗੋ ਕੇ ਰੱਖੋ ਅਤੇ ਸਵੇਰੇ ਨੂੰ ਉਸ ਵਿਚ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ ਮਿਲਾ ਕੇ ਕੱਟੀ ਨੂੰ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਇਸ ਨੂੰ ਲਗਾਤਾਰ 10-12 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ , ਤੁਹਾਡੀ ਕੱਟੀ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆ ਜਾਵੇਗੀ , ਅਤੇ ਜਿਸ ਕੱਟੀ ਦੀ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਪੂਰੀ ਤਿਆਰ ਨਹੀਂ ਹੈ ਉਸ ਨੂੰ ਵੀ ਤੁਸੀ ਵੜੇਮੇ ਅਤੇ ਗੁੜ ਇਸੇ ਤਰ੍ਹਾ ਦੇਣਾ ਹੈ ਉਸ ਨੂੰ 1 ਮਹੀਨਾ ਲਗਾਤਾਰ ਦਿਓ , ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ ,ਜ.... (Read More)
ਉਸ ਨੂੰ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਵੜੇਮੇ ਰਾਤ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਭਿਗੋ ਕੇ ਰੱਖੋ ਅਤੇ ਸਵੇਰੇ ਨੂੰ ਉਸ ਵਿਚ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ ਮਿਲਾ ਕੇ ਕੱਟੀ ਨੂੰ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਇਸ ਨੂੰ ਲਗਾਤਾਰ 10-12 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ , ਤੁਹਾਡੀ ਕੱਟੀ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆ ਜਾਵੇਗੀ , ਅਤੇ ਜਿਸ ਕੱਟੀ ਦੀ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਪੂਰੀ ਤਿਆਰ ਨਹੀਂ ਹੈ ਉਸ ਨੂੰ ਵੀ ਤੁਸੀ ਵੜੇਮੇ ਅਤੇ ਗੁੜ ਇਸੇ ਤਰ੍ਹਾ ਦੇਣਾ ਹੈ ਉਸ ਨੂੰ 1 ਮਹੀਨਾ ਲਗਾਤਾਰ ਦਿਓ , ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ ,ਜੈਫਲ ਦੇਣ ਨਾਲ ਵੀ ਪਸ਼ੂ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਪੰਸਾਰੀ ਦੀ ਦੁਕਾਨ ਤੋਂ ਜੈਫਲ ਦੇ ਤਿੰਨ ਪੀਸ ਲੈ ਆਵੋ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇਸ ਨੂੰ ਗਰਮ ਕਰਕੇ ਭੁੰਨ ਲਵੋ ਜਿਸ ਨਾਲ ਇਹ ਨਰਮ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ ਜੈਫਲ ਦਾ ਇੱਕ ਪੀਸ ਭੁੰਨ ਕੇ ਬਰੀਕ ਕਰ ਲਓ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇਸਨੂੰ ਆਟੇ ਦੇ ਪੇੜੇ ਦੇ ਉੱਪਰ ਗੁੜ ਲਗਾ ਕੇ ਖਵਾ ਦਿਓ ਇਸ ਤਰਾਂ ਲਗਾਤਾਰ ਤਿੰਨ ਦਿਨ ਤੱਕ ਖਵਾਓ .

Posted by Gurtej singh
Punjab
20-04-2019 12:45 PM
sampurna gha di bijai march mahien vich kiti jandi hai isde bare hor jankari lain layi ja isde beej mangvaun de layi tuc 09412568747 bharat bhusan tyagi ji nal sampark kar sakde ho. dhanwad

Posted by Gurtej singh
Punjab
20-04-2019 12:43 PM
आप उसे गेहूं का दलिया और चने दे सकते है आप गेहूं का दलिया रिन्न कर दें यह आप उसके खाने के हिसाब से दे सकते है जितना वो आसानी से हज़म कर जाए बाकि उसे विटामिन—एच 10 मि.ली. रोजाना दें इससे लेवा और दूध अच्छा हो जाएगा

Posted by Harvinder Singh
Punjab
20-04-2019 12:34 PM
makki dia bhut saaria kisma hnn jiwe ki buland, pratap 1, PMH 1, PMH 2, PMH 9 .. iss ton ilaava tuc pioneer dia kisma v lgaa skde ho jiwe ki 31Y45 , P3396, P3377, P3533, P1844 etc. iss ton bina tuc j-1006 kism di b bijai kr skde ho. tuc advanta di sugarage ja jumbo ja j 1006 variety lgaa skde ho ..iss ton ilaava tuc rasi di 3591 variety lgaa skde ho.
Posted by Tanveer Ali
Uttar Pradesh
20-04-2019 12:24 PM
गेंहू के बाद आप मूंग की बिजाई कर सकते है इस से मिटटी की गुणवत्ता भी बाद जाती है और फायदा भी होता है धन्यवाद
Posted by Gurpal singh
Punjab
20-04-2019 12:07 PM
ਗੁਰਪਾਲ ਜੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਮੁਸ਼ਰੂਮ ਦਾ ਬੀਜ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਨਹੀਂ ਮਿਲੇਗਾ ਇਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸੋਲਣ ਤੋਂ ਮਿਲੇਗਾ ਜਿਸਦਾ ਪਤਾ ਹੈ:- ICAR-Directorate of Mushroom Research Address: NH 22, Chambaghat, Solan, Himachal Pradesh 173213 ,Phone: 01792 230 767

Posted by S Kumar
Odisha
20-04-2019 11:59 AM
इस किस्म को पूरे विश्व में उगाया जाता है और पूरे वर्ष उगाया जा सकता है, सफेद बटन खुम्ब में उच्च मात्रा में प्रोटीन होता है इसका ताजा और डिब्बा बंद उपभोग किया जा सकता है इसकी औषधीय विशेषताएं हैं हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, आंध्रा प्रदेष, तामिलनाडू और कर्नाटक मुख्य खुम्ब उगाने वा.... (Read More)
इस किस्म को पूरे विश्व में उगाया जाता है और पूरे वर्ष उगाया जा सकता है, सफेद बटन खुम्ब में उच्च मात्रा में प्रोटीन होता है इसका ताजा और डिब्बा बंद उपभोग किया जा सकता है इसकी औषधीय विशेषताएं हैं हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, आंध्रा प्रदेष, तामिलनाडू और कर्नाटक मुख्य खुम्ब उगाने वाले राज्य हैं यू पी में खुम्ब को उगाने के लिए नवंबर से मार्च का महीना उपयुक्त होता है अच्छी वृद्धि के लिए इसे 22-25 डिगरी सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है और खुम्ब निकलते समय इसे 14-18 डिगरी सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है वीडियो के लिए आप इस लिंक पे क्लीक करे:- https://www.youtube.com/watch v=7QajTrlf3u8

Posted by sagar
Maharashtra
20-04-2019 11:53 AM
बहुत बहुत शुभकामनाये मोती पालन के फायदे - मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो आपको अन्य लोगो से अलग करता है .वही लोग इस व्यवसाय को कर सकते है ..जिनकी सोच कुछ अलग करने की हो .. (1) एक एकड़ में पारंपरिक खेती से 50000/- का मुनाफा हो सकता है और मोती पालन से 8-10 लाख (2) एक तालाब में बहुउदेशीय योजनाओ का लाभ लेके 8-10 प्रकार के व्यापर करके आ.... (Read More)
बहुत बहुत शुभकामनाये मोती पालन के फायदे - मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो आपको अन्य लोगो से अलग करता है .वही लोग इस व्यवसाय को कर सकते है ..जिनकी सोच कुछ अलग करने की हो .. (1) एक एकड़ में पारंपरिक खेती से 50000/- का मुनाफा हो सकता है और मोती पालन से 8-10 लाख (2) एक तालाब में बहुउदेशीय योजनाओ का लाभ लेके 8-10 प्रकार के व्यापर करके आय मे बृद्धि (3) जमीन में जल स्तर को बढ़ाकर सरकार की मदद (4) बचे हुए सामान से हस्तकला उद्योग को बढ़ावा देना (5) यदि महिला वर्ग इस व्यवसाय में आते है तो ज्यादा फायदे है क्योकि मोती के आभूषण के साथ साथ मदर ऑफ़ पर्ल (Shell jewellery) का भी फायदा ले सकते है (6) आसपास के लोगो को रोजगार , मोती पालन एवं इंटिग्रेटेड फार्मिंग की संपूर्ण जानकारी के लिए अधिक जानकारी संपर्क करे ..अमित बमोरिया 9407461361 9770085381 बमोरिया मोती सम्बर्धन केंद्र मध्य प्रदेश https://m.bhaskar.com/news/MP-HOSH-quitting-govt-job-engineer-is-earning-money-from-pearl-cultivation-news-hindi-5533297-PHO.html

Posted by sagar
Maharashtra
20-04-2019 11:51 AM
Sagar ji kesar ki kheti sirf minus degree tapman vale ilake mein hoti hai. iski kheti maharashtra mein nahi hoti hai. dhnaywad
Posted by sachin kumar
Punjab
20-04-2019 11:21 AM
Sachin kumae silk reeling da matlab hunda hai jado silk filament nu cocoon to extrat krde han ta usnu reeling bolde han ate jekar eh damage ho jaye is process de dauran ta usnu spun silk bolya janda hai.dhanwad
Posted by sunil kumar
Uttar Pradesh
20-04-2019 11:17 AM
Sunil Kumar ji Moti ki Kheti ke liye aap Achal singh 9711858258 (GLITTERATI PEARL FARMS) se samparak kare.

Posted by harry
Punjab
20-04-2019 10:58 AM
Harry ji tuci ehna nu Teramycin powder 1.5gm/birds de hisab nal deo ate Broton liquid2m/birds deo ji, iss nal kujj farak paa jawega.
Posted by Gurpreet singh
Punjab
20-04-2019 10:54 AM
ਲਾਲ ਭੂੰਡੀ ਲਈ ਤੁਸੀਂ ਪਾਥੀਆਂ ਦੀ ਸਵਾਹ ਵਿੱਚ ਮਿੱਟੀ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਪੌਦਿਆਂ ਦੇ ਮੁੱਢਾਂ ਕੋਲ ਛੱਟਾ ਦਿਓ ਖੱਟੀ ਲੱਸੀ ਖੱਟੀ ਲੱਸੀ ਸਭ ਤੋਂ ਉੱਤਮ ਉੱਲੀਨਾਸ਼ਕ ਹੈ ਦੋਸਤੋ ਇਸ ਦੇ ਪ੍ਰਯੋਗ ਨਾਲ ਬੂਟੇ ਦੇ ਪੱਤਿਆਂ, ਫਲਾਂ ਅਤੇ ਤਣੇ ਨੂੰ ਪੈਣ ਵਾਲੀਆਂ ਸਾਰੀਆਂ ਉੱਲੀਆਂ ਦਾ ਨਾਸ਼ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਖਟਾਸ ਉੱਲੀਨਾਸ਼ਕ ਦਾ ਵਧੀਆ ਕੰਮ ਕਰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਥੰਦਿਆਈ ਬੂਟੇ ਨੂੰ ਭਰਪੂਰ ਪੋਸ਼ਣ ਪ੍.... (Read More)
ਲਾਲ ਭੂੰਡੀ ਲਈ ਤੁਸੀਂ ਪਾਥੀਆਂ ਦੀ ਸਵਾਹ ਵਿੱਚ ਮਿੱਟੀ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਪੌਦਿਆਂ ਦੇ ਮੁੱਢਾਂ ਕੋਲ ਛੱਟਾ ਦਿਓ ਖੱਟੀ ਲੱਸੀ ਖੱਟੀ ਲੱਸੀ ਸਭ ਤੋਂ ਉੱਤਮ ਉੱਲੀਨਾਸ਼ਕ ਹੈ ਦੋਸਤੋ ਇਸ ਦੇ ਪ੍ਰਯੋਗ ਨਾਲ ਬੂਟੇ ਦੇ ਪੱਤਿਆਂ, ਫਲਾਂ ਅਤੇ ਤਣੇ ਨੂੰ ਪੈਣ ਵਾਲੀਆਂ ਸਾਰੀਆਂ ਉੱਲੀਆਂ ਦਾ ਨਾਸ਼ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਖਟਾਸ ਉੱਲੀਨਾਸ਼ਕ ਦਾ ਵਧੀਆ ਕੰਮ ਕਰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਥੰਦਿਆਈ ਬੂਟੇ ਨੂੰ ਭਰਪੂਰ ਪੋਸ਼ਣ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਦੀ ਹੈ ਇਕ ਲਿਟਰ ਲੱਸੀ ਪ੍ਰਤੀ 15 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਪਾ ਕੇ ਫੁੱਲ ਆਉਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰੋ ਹਾਨੀਕਾਰਕ ਕੀਟਾਂ ਦੀ ਆਮਦ ਤਾਂ ਘੱਟ ਹੋਵੇਗੀ ਹੀ ਨਾਲ ਹੀ ਆਉਣ ਵਾਲਾ ਫਲ ਵੀ ਉੱਲੀ ਰੋਗਾਂ ਤੋਂ ਬਚੇਗਾ ਖੱਟੀ ਲੱਸੀ ਇਕ ਵਧੀਆ ਵਾਧਾ ਵਧਾਊ (ਗ੍ਰੋਥ ਪ੍ਰਮੋਟਰ) ਹੈ ਵਾਧੇ ਵਿਚ ਇਕਸਾਰਤਾ (ਗ੍ਰੋਥ ਰੈਗੂਲੇਟਰ) ਲਿਆਉਣ ਵਿਚ ਖੱਟੀ ਲੱਸੀ ਦਾ ਕੋਈ ਸਾਨੀ ਨਹੀਂ
ਪਾਥੀਆਂ ਦਾ ਪਾਣੀ
ਇਕ ਸਾਲ ਪੁਰਾਣੀਆਂ ਪਾਥੀਆਂ ਜੋ ਮੀਂਹ ਆਦਿ ਵਿਚ ਕਦੀ ਨਾ ਭਿੱਜੀਆਂ ਹੋਣ, ਬਹੁਤ ਕੰਮ ਦੀ ਵਸਤੂ ਹਨ ਇਕ ਬਾਲਗ ਫਲਦਾਰ ਬੂਟੇ ਲਈ ਇਕ ਜਾਂ ਅੱਧੀ ਪਾਥੀ ਹੀ ਬਹੁਤ ਹੈ ਇਕ ਪਾਥੀ ਨੂੰ ਥੋੜ੍ਹੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ 4 ਦਿਨ ਭਿਉਂ ਕੇ ਰੱਖੋ ਪੰਜਵੇਂ ਦਿਨ ਇਹ ਪਾਣੀ 15 ਲੀਟਰ ਹੋਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰੋ ਇਸ ਦਾ ਇਕ ਛਿੜਕਾਅ ਫੁੱਲ ਆਉਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਅਤੇ ਇਕ ਫੁੱਲ ਆਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਕਰੋ ਪਹਿਲੇ ਛਿੜਕਾਅ ਨਾਲ ਭਰਪੂਰ ਫੁੱਲ ਆਉਣਗੇ ਦੂਜੇ ਛਿੜਕਾਅ ਨਾਲ ਜ਼ਿਆਦਾਤਰ ਫੁੱਲ ਕਾਇਮ ਰਹਿ ਕੇ ਫਲ ਬਣਨਗੇ ਪਾਥੀਆਂ ਦੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਜਿਬਰੇਲਿਕ ਐਸਿਡ ਨਾਂਅ ਦਾ ਤੇਜ਼ਾਬ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਕੁਦਰਤ ਵੱਲੋਂ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਮੁਫਤ ਦਾ ਗ੍ਰੋਥ ਪ੍ਰਮੋਟਰ ਅਤੇ ਗ੍ਰੋਥ ਰੈਗੂਲੇਟਰ ਹੈ ਬਾਜ਼ਾਰ ਵਿਚ 40-50 ਹਜ਼ਾਰ ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਵਿਕਣ ਵਾਲਾ ਜਿਬਰੇਲਿਕ ਐਸਿਡ ਪਾਥੀਆਂ ਵਿਚ ਕੁਦਰਤੀ ਰੂਪ ਵਿਚ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ

Posted by ਅਜੀਤ ਸਿੰਘ ਕਾਹਲੋਂ
Punjab
20-04-2019 10:44 AM
tuci majj nu Flukarid-DS bolus pett de kiria lai deo, isde nal tuci Agrimin super powder 100gm rojana deo ate Ouvmin advance bolus rojana 1 goli deo ate 21 din tak deo, iss nal heat vich aa jawegi.

Posted by Rupinder sony
Punjab
20-04-2019 10:39 AM
ਚਤਾਮਲੀ ਵਿੱਚ ਪੰਜਾਬ ਡੇਅਰੀ ਡਿਵੈਲਪਮੈਟ ਬੋਰਡ ਦਾ ਡੇਅਰੀ ਟ੍ਰੈਨਿੰਗ ਸੈਂਟਰ ਬਣਿਆ ਹੋਇਆ ਹੈ ਤੁਸੀ ਇਸ ਪਤੇ ਤੇ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ Dairy Dev. Officer ,Dairy Training & Extension Centre, Vill. Chatamli,PO Kalewal,DIstt. Ropar Sh. Kuldip Singh
98557-32565,0160-2660300

Posted by vikas patidar
Rajasthan
20-04-2019 10:35 AM
उसे आप अच्छी खुराक दें और पेट के कीड़ों के लिए Flukarid-Ds bolus दें और हरा चारा 40—45 किलो रोजाना दें इसके साथ आप Anabolite liquid 100ml, Milkout powder 2-2 चम्मच सुबह शाम और Calcimust bolus 1-1 गोली शुबह शाम दें इससे फर्क पड़ जाएगा
Posted by sukhmander singh
Punjab
20-04-2019 10:31 AM
ਤੁਸੀ ਗਾਂ ਨੂੰ Bolus Halotas 2 ਗੋਲੀਆ ਸਵੇਰੇ 2 ਗੋਲੀਆ ਸ਼ਾਮ ਨੂੰ ਦਿਓ ਤੇ ਨਾਲ ਹੀ liquid Broton 500ml ਲਿਆ ਕੇ 50ml ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਦਿਓ ਤੇ 5 ਦਿਨ ਵਿੱਚ ਠੀਕ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ.
Posted by Dilpreet Singh
Punjab
20-04-2019 10:28 AM
दिलप्रीत जी pi का biovita अगर दानेदार रूप में मिल रहा है तो 8 किलो बायोविटा को मिट्टी या यूरिया के साथ मिलाकर डाल सकते है या फिर gibberellic acid@300ml की प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे कर सकते है इससे ग्रोथ हो जाएगी
Posted by jaspal singh
Punjab
20-04-2019 10:25 AM
Nater de chicks tohanu ya ta central poultry development office, Chandigarh to mil sakde hai ya fir tusi harbhajan singh ji nal 9815311687 number te sampark kar sakde ho.
Posted by RamNath Rana
Uttar Pradesh
20-04-2019 10:25 AM
फासफोरस को वर्ष में दो बार डालें दूसरे शब्दों में मॉनसून के शुरू होने पर जून जुलाई के महीने में डालें और उसके बाद सितंबर अक्तूबर महीने में डालें नाइट्रोजन और पोटाश को जून - जुलाई, सितंबर - अक्तूबर, जनवरी - फरवरी और मार्च - अप्रैल में बराबर भागों में बांटकर डालें कईं बार मौसम के बदलने पर फल गिरने लगते हैं यदि फल.... (Read More)
फासफोरस को वर्ष में दो बार डालें दूसरे शब्दों में मॉनसून के शुरू होने पर जून जुलाई के महीने में डालें और उसके बाद सितंबर अक्तूबर महीने में डालें नाइट्रोजन और पोटाश को जून - जुलाई, सितंबर - अक्तूबर, जनवरी - फरवरी और मार्च - अप्रैल में बराबर भागों में बांटकर डालें कईं बार मौसम के बदलने पर फल गिरने लगते हैं यदि फलों को गिरना देखा जाए तो 13:00:45 10 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें मलचिंग का प्रयोग तापमान के प्रभाव को कम करता है अच्छे फूल और उपज के लिए 00:52:34 150 ग्राम को 15 लीटर पानी में मिलाकर फूल निकलने के शुरू में 8 दिनों के अंतराल पर दो बार स्प्रे करें यह फूल के गिरने को रोकेगा

Posted by Ranjodh
Punjab
20-04-2019 10:12 AM
कृपया अकेले पत्ते की फोटो भेंजे जिसके देखकर आपको सही जानकारी दी जा सके क्योंकि फोटो नज़दीक करने पर साफ दिखाई नहीं दे रहा

Posted by aniket
Uttar Pradesh
20-04-2019 10:08 AM
Aniket ji aap 9616009911 number par Nabi Goat Farm se bat kare, unke pas se apko mil jaygei ji.
Posted by ਸਰਦਾਰ ਗੁਰਭੇਜ ਸਿੰਘ
Punjab
20-04-2019 09:56 AM
इसमें फंगस के कारण हमला हो सकता है इसकी रोकथाम के लिए एम45 500 ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे कर सकते है
Posted by Lokanath Upadhyay
Odisha
20-04-2019 09:22 AM
बहुत बहुत शुभकामनाये मोती पालन के फायदे - मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो आपको अन्य लोगो से अलग करता है .वही लोग इस व्यवसाय को कर सकते है ..जिनकी सोच कुछ अलग करने की हो .. (1) एक एकड़ में पारंपरिक खेती से 50000/- का मुनाफा हो सकता है और मोती पालन से 8-10 लाख (2) एक तालाब में बहुउदेशीय योजनाओ का लाभ लेके 8-10 प्रकार के व्यापर करके आय.... (Read More)
बहुत बहुत शुभकामनाये मोती पालन के फायदे - मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो आपको अन्य लोगो से अलग करता है .वही लोग इस व्यवसाय को कर सकते है ..जिनकी सोच कुछ अलग करने की हो .. (1) एक एकड़ में पारंपरिक खेती से 50000/- का मुनाफा हो सकता है और मोती पालन से 8-10 लाख (2) एक तालाब में बहुउदेशीय योजनाओ का लाभ लेके 8-10 प्रकार के व्यापर करके आय मे बृद्धि (3) जमीन में जल स्तर को बढ़ाकर सरकार की मदद (4) बचे हुए सामान से हस्तकला उद्योग को बढ़ावा देना (5) यदि महिला वर्ग इस व्यवसाय में आते है तो ज्यादा फायदे है क्योकि मोती के आभूषण के साथ साथ मदर ऑफ़ पर्ल (Shell jewellery) का भी फायदा ले सकते है (6) आसपास के लोगो को रोजगार , मोती पालन एवं इंटिग्रेटेड फार्मिंग की संपूर्ण जानकारी के लिए अधिक जानकारी संपर्क करे ..अमित बमोरिया 9407461361 9770085381 बमोरिया मोती सम्बर्धन केंद्र मध्य प्रदेश https://m.bhaskar.com/news/MP-HOSH-quitting-govt-job-engineer-is-earning-money-from-pearl-cultivation-news-hindi-5533297-PHO.html
Posted by Amandeep singh Dhaliwal 97804 10102
Punjab
20-04-2019 09:03 AM
Amandeep singh g jdo v motor connection nikalde hnn uss sme tuhanu pehla paise and form bharna painda hai jiss de vich tuhanu connection da dsna hunda hai ki tuhanu kehda connection chaida hai...Fuhara connection system normal connection nalo mehanga hai par jaldi lagg janda hai...iss sme sarkar walon koi v connection nahi kadde gye kahnn....4-5 mahine pehla purane bhare hoye connection loka nu mile c....hun jdo v koi connection bharn da form niklya tan tuc apne nede de JE ja bijli board de vich ja ke iss di jankari v lai skde ho ate ohna nu puch v skde ho ke connection nikal rhe hnn ja nahi...ohna ton tuhanu ihh v ptaa lagg jawega ki kehde connection de kinne paise hnn....
Posted by Amandeep singh Dhaliwal 97804 10102
Punjab
20-04-2019 09:01 AM
Amandeep singh g jdo v motor connection nikalde hnn uss sme tuhanu pehla paise and form bharna painda hai jiss de vich tuhanu connection da dsna hunda hai ki tuhanu kehda connection chaida hai...Fuhara connection system normal connection nalo mehanga hai par jaldi lagg janda hai...iss sme sarkar walon koi v connection nahi kadde gye hnn....4-5 mahine pehla purane bhare hoye connection loka nu mile c....hun jdo v koi connection bharn da form niklya tan tuc apne nede de JE ja bijli board de vich ja ke iss di jankari v lai skde ho ate ohna nu puch v skde ho ke connection nikal rhe hnn ja nahi...ohna ton tuhanu ihh v ptaa lagg jawega ki kehde connection de kinne paise hnn....

Posted by AJMER SINGH
Punjab
20-04-2019 08:55 AM
tuci ohna nu Flukarid-DS bolus deo, isde nal tuci Amalza powder 50gm ja Buffzon powder 50gm rojana deo, kyuki ehh pashu anndar tezabi madda banna krke v ho jnda hai,baki ohna nu livoferrol liquid 100ml rojana deo ji.

Posted by jagmeet Singh
Punjab
20-04-2019 08:55 AM
jagmeet ji eh fungus de karn ho reha hai isde layi tuc copper oxychloride@3gm nu prati litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by om kumar
Punjab
20-04-2019 08:48 AM
Om kumar ji eh fungus de karn ho rahe han isde layi tuc copper oxychloride@3gm nu prati litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by lekhraj
Uttarakhand
20-04-2019 08:46 AM
Moti ki Kheti ke liye aap Achal singh 9711858258 (GLITTERATI PEARL FARMS) se samparak kare.

Posted by Maninder
Punjab
20-04-2019 08:44 AM
श्रीमान जी धान की पनीरी लगाने का समय 15 मई से है और पनीरी को पुटाई करके खेत में लगाने का समय 20 जून रखा गया है
Posted by Karanveer Singh
Punjab
20-04-2019 08:16 AM
आप मानी कलेर से संपर्क कर सकते है -: 75085 18077

Posted by vijay singh
Madhya Pradesh
20-04-2019 08:14 AM
यह फसल काफी तरह की मिट्टी में उगाई जाती है चने की खेती के लिए रेतली दोमट से चिकनी मिट्टी बहुत अनुकूल मानी जाती है घटिया निकास वाली ज़मीन इसकी खेती के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती खारी या नमक वाली ज़मीन भी इसके लिए अच्छी नहीं मानी जाती इसके विकास के लिए 5.5 से 7 पी एच वाली मिट्टी अच्छी होती है हर साल एक खेत में एक ही फ.... (Read More)
यह फसल काफी तरह की मिट्टी में उगाई जाती है चने की खेती के लिए रेतली दोमट से चिकनी मिट्टी बहुत अनुकूल मानी जाती है घटिया निकास वाली ज़मीन इसकी खेती के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती खारी या नमक वाली ज़मीन भी इसके लिए अच्छी नहीं मानी जाती इसके विकास के लिए 5.5 से 7 पी एच वाली मिट्टी अच्छी होती है हर साल एक खेत में एक ही फसल ना बोयें अच्छा फसली चक्र अपनायें अनाज वाली फसलों को फसल चक्र में प्रयोग करने से ज़मीन से लगने वाली बीमारियां रोकने में मदद मिलती है आमतौर पर फसल चक्र में खरीफ के सफेद चने, खरीफ के काले चने + गेहूं/जौं/रायाचरी-चने, धान/मक्की-चने आदि फसलें आती हैं चने की फसल के लिए ज्यादा समतल बैडों की जरूरत नहीं होती यदि इसे मिक्स फसल के तौर पर उगाया जाये तो खेत की अच्छी तरह से जोताई होनी चाहिए यदि इस फसल को खरीफ की फसल के तौर पर बीजना हो, तो खेत को मॉनसून आने पर गहरी जोताई करें, जो बारिश के पानी को संभालने में मदद करेगा बिजाई से पहले खेत की एक बार जोताई करें यदि मिट्टी में नमी की कमी नज़र आये तो बिजाई से एक सप्ताह पहले सुहागा फेरें बारानी क्षेत्रों के लिए, अक्तूबर का दूसरा या तीसरा सप्ताह चने की खेती के लिए उपयुक्त होता है सिंचित क्षेत्रों के लिए, बिजाई नवंबर के दूसरे सप्ताह में पूरी कर लें चने की पिछेती बिजाई दिसंबर के पहले सप्ताह तक पूरी कर लें बिजाई के लिए, कतार से कतार में 20-25 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 10 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज को 6-8 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीज को सीड ड्रिल या लोकल हल की सहायता से बोयें
छोटे दानों के लिए 30-32 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और मोटे दानों के लिए 36-40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बथुआ, सेंजी, क्रुशन निल, हिंरनखुरी, चटरी मटरी, गाजरी, अकारा अकारी, जंगली गाजर आदि चने के खेत में पाये जाने वाले मुख्य नदीन हैं
नदीनों की जांच के लिए पहली गोडाई हाथों से या घास निकालने वाली चरखड़ी से बिजाई के 25-30 दिन बाद करें और जरूरत पड़ने पर दूसरी गोडाई बिजाई के 60 दिनों के बाद करें
फ्लूक्लोरालिन 45 ई सी 800 मि.ली. को 100-150 लीटर पानी में मिलाकर बीज की बिजाई से पहले खेत में डालें
नदीनों की प्रभावशाली रोकथाम के लिए बिजाई से पहले पैंडीमैथालीन 1 लीटर को प्रति 150 लीटर पानी में घोलकर बिजाई के 3 दिन बाद एक एकड़ में स्प्रे करें कम नुकसान होने पर नदीन नाशक की बजाय हाथों से गोडाई करें या कही से घास निकालें इस से मिट्टी हवादार बनी रहती है सभी किस्मों के लिए, नाइट्रोजन 9 किलो (यूरिया 20 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 9 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 15 किलो) और सल्फर 8 किलो प्रति एकड़ में डालें बारानी क्षेत्रों के लिए यूरिया 200 ग्राम को 10 लीटर पानी में मिलाकर फूल बनने के समय डालें फासफोरस, पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा बिजाई के 4-5 सप्ताह बाद डालें बारानी क्षेत्रों में मुख्यत: बंगाल ग्राम की खेती की जाती है यदि पानी उपलब्ध हो तो पहली सिंचाई बिजाई के 40-45 दिनों के बाद, फूल निकलने के बाद करें और अगली सिंचाई फली के विकास के बाद करें यदि सिर्फ एक सिंचाई उपलब्ध हो तो बिजाई के 60 दिनों के बाद करें जब पौधा सूख जाता है और पत्ते लाल-भूरे दिखते हैं और झड़ने शुरू हो जाते हैं, उस समय पौधा कटाई के लिए तैयार हो जाता है पौधे को द्राती की सहायता से काटें कटाई के बाद फसल को 5-6 दिनों के लिए धूप में सुखाएं फसल को अच्छी तरह सुखाने के बाद पौधों को छड़ियों से पीटें या फिर बैलों के पैरों के नीचे छंटाई के लिए बिछा दें
Posted by om kumar
Punjab
20-04-2019 08:12 AM
Om kumar ji kirpa krke apna swal vistar nal pusho tan jo tuhanu sahi jankari diti jaa ske.
Posted by ਹਰਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Haryana
20-04-2019 08:06 AM
ਮੂੰਗੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਤੁਸੀਂ ਡਾਕਰ ਖੇਤ ਵਿਚ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ ਸੱਠੀ ਮੂੰਗੀ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਲਈ 3 ਕਿਸਮਾਂ ਐਸ ਐਮ ਐਲ 832 ਅਤੇ ਐਸ ਐਮ ਐਲ 668, TMB 37 ਦੀ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਐਸ ਐਮ ਐਲ 832 ਕਿਸਮ ਤਕਰੀਬਨ 61 ਦਿਨ ਵਿੱਚ ਪੱਕਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 4.6qtl/acre ਹੈ ਐਸ ਐਮ ਐਲ 668 ਤਕਰੀਬਨ 60 ਦਿਨ ਵਿਚ ਪੱਕਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 4.5qtl/acre ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵਲੋਂ ਮੂੰਗੀ ਦੀ ਨਵੀਂ ਕਿਸਮ TMB 37 ਪੇਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ .... (Read More)
ਮੂੰਗੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਤੁਸੀਂ ਡਾਕਰ ਖੇਤ ਵਿਚ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ ਸੱਠੀ ਮੂੰਗੀ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਲਈ 3 ਕਿਸਮਾਂ ਐਸ ਐਮ ਐਲ 832 ਅਤੇ ਐਸ ਐਮ ਐਲ 668, TMB 37 ਦੀ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਐਸ ਐਮ ਐਲ 832 ਕਿਸਮ ਤਕਰੀਬਨ 61 ਦਿਨ ਵਿੱਚ ਪੱਕਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 4.6qtl/acre ਹੈ ਐਸ ਐਮ ਐਲ 668 ਤਕਰੀਬਨ 60 ਦਿਨ ਵਿਚ ਪੱਕਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 4.5qtl/acre ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵਲੋਂ ਮੂੰਗੀ ਦੀ ਨਵੀਂ ਕਿਸਮ TMB 37 ਪੇਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਜੋ ਕੇਵਲ 60 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਪੱਕਦੀ ਹੈ ਕਣਕ ਦੀ ਕਟਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਖੇਤ ਨੂੰ ਵਾਹੁਣ ਤੋਂ ਬਗੈਰ ਮੂੰਗੀ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਜ਼ੀਰੋ ਟਿਲ ਡਰਿਲ ਨਾਲ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਐਸ ਐਮ ਐਲ 832 ਲਈ 12 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਐਸ ਐਮ ਅਲ 668 ਲਈ 15 ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਰਤਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਬੀਜ ਨੂੰ ਬੀਜਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਕੈਪਟਾਨ ਜਾ ਥਿਰਮ 3 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਕਿੱਲੋ ਬੀਜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸੋਧ ਲੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਕਣਕ ਦੀ ਕਟਾਈ ਕੰਬਾਇਨ ਨਾਲ ਕੀਤੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਮੂੰਗੀ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਹੈਪੀ ਸੀਡਰ ਨਾਲ ਵੀ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ

Posted by sonu Verma
Uttar Pradesh
20-04-2019 08:06 AM
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई कर.... (Read More)
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं एक एकड़ में 104 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें कम बारिश वाले क्षेत्रों में जून - जुलाई के महीने में बिजाई की जानी चाहिए और तराई और अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में सितंबर महीने में बिजाई की जानी चाहिए और क्षेत्र जहां सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हो वहां पर फरवरी - मार्च के महीने में बिजाई की जानी चाहिए आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 0.8 किलो प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं तुड़ाई एक एक फल को हाथों से तोड़कर की जाती है फलों को सुबह के समय तोड़ें धन्यवाद
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