Experts Q&A Search

Posted by jorawarsingh
Punjab
28-04-2019 09:21 PM
Maharashtra
04-29-2019 04:32 PM
ਇਕ ਏਕੜ ਵਿਚ ਬਾਜਰੇ ਦਾ ਬੀਜ 6-8 ਕਿੱਲੋ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by sandeep singh
Punjab
28-04-2019 09:20 PM
Haryana
05-02-2019 12:25 PM
Sandeep Singh ji Punjab vich jhone di fasal lon lai tusi Answer nal diti Photo dekho ji.
Posted by vijay patidar
Madhya Pradesh
28-04-2019 09:19 PM
Maharashtra
04-29-2019 04:34 PM
आप सोयाबीन की किसम जैसे Alankar, Ankur, Bragg, Lee, PK 262, PK 308, PK 327, PK 416, PK 472, PK 564, Pant Soybean 1024, Pant Soybean 1042, Pusa 16, Pusa 20, Pusa 22, Pusa 24, Pusa 37, Shilajeet, VL soya 2, VL soya 47, MAUS 158, VL soya 65, VL soya 59, SL 525, Pratap Soya 2, TAMS 9821, Phule Kalyani (DS 228), Pusa 9814, Co (SOY)-3, LSB-1, Hara soya की बिजाई कर सकते है
Posted by anand Kumar
Haryana
28-04-2019 09:13 PM
Punjab
04-29-2019 03:11 PM
Anand Kumar ji Haryana me kesar ki kheti nahi ki ja sakti is ki kheti ke lia tapman 0 se bhi niche chahia hota hai.
Posted by Gurchet
Punjab
28-04-2019 09:04 PM
Punjab
04-29-2019 03:17 AM
Jhone de vich urea@110kg kg prati acre paya janda hai. jhona mukh khet de vich lgaun ton 18 dina baad urea ate DAP pauni shuru ko. iss de vich 27kg DAP paa skde ho jekar kanak de vich DAP nahi paayi hai..iss ton ilaava iss de vich 20kg potash paauni hai. jo urea hai uss nu 3 hissya de vich vand ke pauna hai. 18-45 dina tak urea di saari maatra paa deo. jekar khet de vich zinc pauna chaunde ho tan pehli urea nal zinc mix kr ke khet de vich shitta de deo. ihh zinc tuc 21% wali ja 33% wali paa skde ho. 21% wali zinc di maatra 25 kg prati acre hai ate 33% wali zinc di maatra 16-17 kg prati acre hai.
Posted by Jagraj choudhary
Rajasthan
28-04-2019 08:50 PM
Madhya Pradesh
04-29-2019 06:35 PM
आदरणीय मित्रो 11मई को आयोजित मोती पालन एवं इंटीग्रेटेड फार्मिंग ( मोती पालन प्रशिक्षण एवं मोती पालन के साथ होने वाले व्यवसायों की जानकरी ) प्रशिक्षण में आपका स्वागत है प्रशिक्षण उपरांत संस्था की और से आप सभी को निम्निलिखित उपहार भेट किये जायेंगे . 1) मोती पालन की किताब 2)सेम्पल मटेरियल 3) वनौषधि की कि.... (Read More)
आदरणीय मित्रो 11मई को आयोजित मोती पालन एवं इंटीग्रेटेड फार्मिंग ( मोती पालन प्रशिक्षण एवं मोती पालन के साथ होने वाले व्यवसायों की जानकरी ) प्रशिक्षण में आपका स्वागत है प्रशिक्षण उपरांत संस्था की और से आप सभी को निम्निलिखित उपहार भेट किये जायेंगे . 1) मोती पालन की किताब 2)सेम्पल मटेरियल 3) वनौषधि की किताब 4)स्टेविआ का पौधा 5)हाफ राउंड मोती 6)सर्टिफिकेट 7) लाइफ टाइम सपोर्ट 8) संस्था के साथ व्यापर की जानकारी आदि कृपया नामांकन कराये अधिक जानकरी के लिए संपर्क. करे अमित बमोरिया 9770085381 सुलक्षणा बमोरिया 9584120929
Posted by SUKHDEV Singh
Punjab
28-04-2019 08:47 PM
Rajasthan
04-29-2019 02:04 PM
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਇਹ ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਸੁੱਕਾ ਪਾਓ ਤਾਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਵਧਿਆ ਹੈ ਬਾਕੀ ਇਹ ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਖਾਣ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਕਿਉਕਿ ਕਈ ਪਸ਼ੂ ਗਿਲਾ ਦਾਣਾ ਖਾਣਾ ਪਸੰਦ ਕਰਦੇ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ ਗਿਲਾ ਕਰਕੇ ਵੀ ਖਵਾ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਜਿਵੇਂ ਤੁਹਾਡਾ ਪਸ਼ੂ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਖਾਂਦਾ ਹੈ ਉਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਦਿਓ ਜੀ
Posted by ਰਜਿੰਦਰ ਉੱਪਲ
Punjab
28-04-2019 08:30 PM
Punjab
05-03-2019 03:45 PM
rajinder ji there is no new seed released by PAU.
Posted by Shubham Agarkar
Maharashtra
28-04-2019 08:18 PM
Punjab
04-29-2019 03:37 PM
इनकी मार्केटिंग के लिए आप Growfurther.in 9826556880 कंपनी से संपर्क कर सकते है यह कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग भी कराते है धन्यवाद
Posted by मुकेश
Maharashtra
28-04-2019 08:12 PM
Maharashtra
05-03-2019 04:56 PM
यह रेतीली दोमट से लेकर मिट्टी दोमट मिट्टी में उगाई जाती है पथरीली मिट्टी में खेती करने से बचें बांस की खेती के लिए 4.5-6.0 के बीच की मिट्टी का pH अच्छा है आप इसकी किस्में जैसे Thamnocalamus falconeri, Thamnocalamus spathiflorus की बिजाई कर सकते हैं बुवाई फरवरी-मार्च महीने में की जानी चाहिए बीज बुवाई के लिए, 3.0-4.5 मी. या 3x3 मी. की दूरी का उपयोग करें गह.... (Read More)
यह रेतीली दोमट से लेकर मिट्टी दोमट मिट्टी में उगाई जाती है पथरीली मिट्टी में खेती करने से बचें बांस की खेती के लिए 4.5-6.0 के बीच की मिट्टी का pH अच्छा है आप इसकी किस्में जैसे Thamnocalamus falconeri, Thamnocalamus spathiflorus की बिजाई कर सकते हैं बुवाई फरवरी-मार्च महीने में की जानी चाहिए बीज बुवाई के लिए, 3.0-4.5 मी. या 3x3 मी. की दूरी का उपयोग करें गहराई 10-15 से.मी. होनी चाहिए बुवाई के लिए प्रति एकड़ भूमि पर 165 पौधों का प्रयोग करें बुवाई से पहले, rhizomes का उपचार बाविस्टिन@0.1% के साथ किया जाता है बुवाई के समय गोबर / कम्पोस्ट खाद @ 5kg, SSP @100gm और MOP @ 50gm डाली जनि चाहिए दीमक से बचाव के लिए क्लोरपायरीफॉस @10 मि.ली. मिलाएं यूरिया @ 100 ग्राम दो समान विभाजन में डाला जाता है; पहला जून महीने में और दूसरा जुलाई महीने में इंटरक्रैपिंग के लिए, अदरक, मिर्च और हल्दी का उपयोग किया जा सकता है छायादार सुगंधित या औषधीय पौधों को उगाया जा सकता है पौधे की बुवाई के शुरुआती साल में गोड़ाई आवश्यक है पहले दो वर्षों में, बरसात के मौसम या नमी के मौसम के अंत में निराई-गुड़ाई की जाती है एक बार तना स्थापित हो जाने के बाद, खरपतवारों की संख्या कम हो जाती है खरपतवार को नियंत्रित करने के लिए मल्चिंग भी एक प्रभावी तरीका है
Posted by hariom yadav
Madhya Pradesh
28-04-2019 07:53 PM
Punjab
05-03-2019 04:01 PM
Hariom ji aap kapas ki kisam jaise Ankur 226BG, PCH 406 BT, Sigma Bt, SDS 1368 Bt, SDS 9Bt, NAMCOT 402 Bt, GK 206 Bt, 6317 Bt, 6488 Bt, MRC 7017 BG II, MRC 7031 BG II, NCS 145 BG II , ACH 33-2 BG II, JKCH 1050 Bt, MRC 6025 Bt, MRC 6029 Bt, NCS 913 Bt, NCS 138 Bt, RCH 308 Bt, RCH 314 Bt ki bijai kar sakte hai.
Posted by devendra bihone
Madhya Pradesh
28-04-2019 07:29 PM
Punjab
05-03-2019 04:04 PM
Devendra bihone ji aap waste decomposer ko spray ya sinchai ke pani ke sath khet men daal sakte hai.isde aap beejon ko sodh sakte hai.iski matra ik acre men 200 litre ka istemal kar skate hai.dhanywad
Posted by Gurwinder Sran Zaildar
Punjab
28-04-2019 06:42 PM
Punjab
04-29-2019 03:20 AM
Gurwinder g jekar tuhada koi swaal reh gya hai tan tuc uss swaaal nu dubara post kt skde ho...Asi tuhade swaala de jawab ghat ton ghat sme vich den di poori koshish krde han....tuc apna swaal dubara post kr deo...dhanwad g
Posted by Rakesh kumar das
Andaman & Nicobar Islands
28-04-2019 06:41 PM
Punjab
05-01-2019 03:11 PM
Catfish का 1kg वजन 8 महीने में हो जाता है, पर इसकी मार्केटिन बहुत कम है और इनकी ग्रोथ भी कम होती है यह बच्चे भी ज़्यादा देती है, इसके बच्चों के बारे में मछली पालन विभाग से पता कर सकते है
Posted by Naveen
Punjab
28-04-2019 06:27 PM
Punjab
04-29-2019 04:34 PM
Mushroom sale karne ke liye aap Mr. jai 8882876224 nal sampark kar sakde ho.
Posted by ਹਰਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
28-04-2019 06:26 PM
Punjab
05-03-2019 04:07 PM
ਹਰਵਿੰਦਰ ਜੀ ਇਸਦੇ ਉਪਰ ਛੋਟੇ ਛੋਟੇ ਮੱਛਰ ਦਾ ਹਮਲਾ ਚੈੱਕ ਕਰੋ ਜੇਕਰ ਮੌਜੂਦ ਹੈ ਤਾ ਤੁਸੀ ਇਸਦੇ ਉਪਰ imidacloprid @1.5ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by kamal
Haryana
28-04-2019 06:26 PM
Punjab
05-03-2019 04:08 PM
Moong is mainly grown as a kharif crop. If needed provide irrigation depending upon the climatic conditions. For summer season crop, three to five irrigations are required depending upon soil type and climatic condition. For good yield stop irrigation 55 days after sowing.
Posted by Harwinder Singh
Punjab
28-04-2019 06:24 PM
Punjab
05-03-2019 04:58 PM
darmiyani jameena vich 6.5 killo zinc sulphate monohydrate bijai de same hi pa deo.
Posted by dilip kumar sharma
Bihar
28-04-2019 06:14 PM
Punjab
05-03-2019 04:39 PM
भिंडी काफी तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है भिंडी की फसल के लिए उचित मिट्टी रेतली से चिकनी होती है, जिसमें जैविक तत्व भरपूर मात्रा में हों और जिसकी निकास प्रणाली भी अच्छी ढंग की हो यदि निकास अच्छे ढंग का हो तो यह भारी ज़मीनों में भी अच्छी उगती है मिट्टी का पी एच 6.0 से 6.5 होना चाहिए खारी, नमक वाली या घटिया निकास वा.... (Read More)
भिंडी काफी तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है भिंडी की फसल के लिए उचित मिट्टी रेतली से चिकनी होती है, जिसमें जैविक तत्व भरपूर मात्रा में हों और जिसकी निकास प्रणाली भी अच्छी ढंग की हो यदि निकास अच्छे ढंग का हो तो यह भारी ज़मीनों में भी अच्छी उगती है मिट्टी का पी एच 6.0 से 6.5 होना चाहिए खारी, नमक वाली या घटिया निकास वाली मिट्टी में इसकी खेती ना करें Pusa Mahakali: यह किस्म आई ए आर आई, नई दिल्ली द्वारा बनाई गई है इसके फल हलके हरे रंग के होते हैं Parbhani Kranti: इसके फल आकार में दरमियाने लंबे होते हैं और अच्छी क्वालिटी के कारण ज्यादा देर तक स्टोर किए जा सकते हैं यह चितकबरा रोग को सहनेयोग्य किस्म है यह 120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 40-48 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Sawani: यह किस्म आई ए आर आई, नई दिल्ली द्वारा बनाई गई है यह किस्म गर्मी और बरसात के मौसम में उगानेयोग्य किस्म है यह 50 दिनों में पककर तैयार हो जाती है इसके फल गहरे हरे रंग के और कटाई के समय 10-12 सैं.मी. लंबे होते हैं यह चितकबरा रोग को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 48-60 क्विंटल होता है Arka Anamika: यह किस्म आई आई एच आर बैंगलोर द्वारा तैयार की गई है यह चितकबरा रोग की रोधक किस्म है खेत की तैयारी करने के लिए ज़मीन की 5-6 बार गहरी जोताई करें फिर दो-तीन बार सुहागा मार कर ज़मीन को समतल करें आखिरी बार जोताई करते समय 100 क्विंटल प्रति एकड़ अच्छी रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें खालियां और मेंड़ वाला ढंग बनाएं कईं बार भिंडियों को खेत में लगाई हुई मुख्य फसल के आस-पास भी लगा दिया जाता है और इसके लिए बिजाई का ढंग भी मुख्य फसल के साथ का ही प्रयोग किया जाता है इसे बिजाई वाली मशीन से, हाथों से गड्ढा खोदकर या हलों के पीछे बीज डालकर भी बोया जा सकता है उत्तर में यह वर्षा और बसंत के मौसम में उगाई जाती है वर्षा वाले मौसम में, इसकी बिजाई जून-जुलाई के महीने और बसंत ऋतु में फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है पंक्तियों में फासला 45 सैं.मी. और पौधों में फासला 15-20 सैं.मी. रखना चाहिए बीज की गहराई बीज 1-2 सैं.मी. गहराई में बोयें बिजाई का ढंग:- इसकी बिजाई गड्ढा खोदकर की जाती है वर्षा ऋतु (जून-जुलाई) में टहनियों वाली किस्मों के लिए 4-6 किलो बीज प्रति एकड़, 60x30 सैं.मी. फासले पर बोयें बिना टहनियों वाली किस्मों के लिए 45x30 सैं.मी. का फासला रखें मध्य फरवरी तक 15-18 किलो बीज प्रति एकड़ डालें और मार्च में बिजाई के लिए 4-6 किलो बीज प्रति एकड़ बोयें शुरूआती खाद के तौर पर 120-150 कि्ंवटल अच्छी रूड़ी की खाद डालें भिंडी की फसल के लिए नाइट्रोजन 36 किलो (80 किलो यूरिया) प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय और बाकी बची मात्रा पहली तुड़ाई के बाद डालें अच्छी पैदावार की प्राप्ती के लिए बिजाई से 10-15 दिनों के बाद 19:19:19 की 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें अच्छे फूलों और फलों की प्राप्ती के लिए 00:52:34 की 50 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी की स्प्रे फूल निकलने से पहले और फिर फल बनने के समय दोबारा करें अच्छी पैदावार और अच्छी क्वालिटी के फलों के लिए , फूल बनने के समय 13:00:45 (पोटाश्यिम नाइट्रेट) की 100 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी की स्प्रे करें
Posted by Mangal yadav
Jharkhand
28-04-2019 06:12 PM
Punjab
04-29-2019 02:16 PM
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी कितने में शुरू होगा यह धंधा नेशनल बैंक फॉर ए.... (Read More)
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी कितने में शुरू होगा यह धंधा नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डिवलेपमेंट (नाबार्ड) द्वारा तैयार किए मॉडल प्रोजेक्ट्स के मुताबिक यदि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं तो कम से कम 10 हजार मुर्गियों का धंधा शुरू करना चाहते हैं तो आपको 4 से 5 लाख का इतज़ाम करना पड़ेगा जब कि बैंक से आपको 75 फीसदी यानि 27 लाख का लोन मिल जाएगा यदि आप 10 हजार मुर्गियों के साथ लेयर फार्मिंग करना चाहते हैं तो आपको 10 से 12 लाख का इंतज़ाम करना पड़ेगा और बैंक आपको 40 से 42 लाख तक का लोन दे सकता है बैंक से आसाने से लोन लेने के लिए नाबार्ड कंसलटेंसी सर्विस की सहायता ली जा सकती है यदि आप पोल्टरी की ट्रेनिंग लेकर नाबार्ड से लोन लेते हैं तो आपको 25 से 35 प्रतिशत तक सब्सिडी मिल जाती है लेान एप्लाई करने के लिए पूरी जानकारी आपको विभाग की तरफ से ट्रेनिंग के बाद दी जाती है ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं आप किसी भी दिन अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र पर जाकर ट्रेनिंग लेने के लिए फार्म भर आयें उसके बाद जब भी पोल्टरी की ट्रेनिंग आयेगी तो आपको के वी के की तरफ से कॉल करके बता दिया जायेगा बहुत बढ़िया काम है पोल्टरी का यदि आप ब्रॉयलर रखते हैं तो पांच से छ हफ्तों के अंदर अंदर मंडीकरण करने के लिए तैयार हो जाते हैं तकरीबन पांच महीनों में अंडों की उपज शुरू हो जाती है सारा साल की आमदन वाला काम है ज्यादा मेहनत भी नहीं लगती यह नाज़ुक किस्म के जानवर होते हैं कुछ खतरनाक बीमारियां हैं जिनसे बचने के लिए खास ध्यान रखने की जरूरत होती है बाकी आप विस्तार में बतायें या फिर शुरूआत करने में कोई और मुश्किल है या जानकारी लेना है तो अपना सवाल दोबारा पूछ सकते हैं
Posted by Aman maan
Punjab
28-04-2019 06:04 PM
Punjab
04-30-2019 02:04 PM
Aman maan ji tusi dashmesh amargarh nal 9872028219 number te kuldeep singh ji nal gal karo. oh das sakde hai ji.
Posted by PRAWEEN KUMAR JHA
Bihar
28-04-2019 05:53 PM
Punjab
05-03-2019 04:48 PM
Praween ji mausam vibhag ke anusar aaj aur kal barish hone ki sambhavna hai.dhanywad
Posted by Ramnarayan
Madhya Pradesh
28-04-2019 05:32 PM
Punjab
04-29-2019 02:21 PM
यदि आप Vetmate इंजेक्शन लगवाना चाहते है तो यह पशु को हीट में लाने के लिए प्रयोग किया जाता है यह 2 मि.ली. इंजेक्शन लगता है यदि एक बार इंजेक्शन लगाने से पशु हीट में नहीं आता तो आप 7 दिनों के बाद दोबारा रिपीट कर सकते है इसके इलावा ब्याने के बाद पशु को लगाने से इससे बच्चेदानी की सफाई भी होती है और यदि आप Tune-H इंजेक्शन लगाते .... (Read More)
यदि आप Vetmate इंजेक्शन लगवाना चाहते है तो यह पशु को हीट में लाने के लिए प्रयोग किया जाता है यह 2 मि.ली. इंजेक्शन लगता है यदि एक बार इंजेक्शन लगाने से पशु हीट में नहीं आता तो आप 7 दिनों के बाद दोबारा रिपीट कर सकते है इसके इलावा ब्याने के बाद पशु को लगाने से इससे बच्चेदानी की सफाई भी होती है और यदि आप Tune-H इंजेक्शन लगाते है तो इसे 10 मि.ली. लगा सकते है इससे भी पशु हीट में आता है और यह गाभिन पशुओं को ब्याने से एक महीना पहले लगाने से लेवा अच्छा बनाता है
Posted by Satnam singh gill
Punjab
28-04-2019 05:20 PM
Punjab
05-03-2019 04:50 PM
satnam ji tuc jhone di kisam 5050 signet :iss kisam da jhaad 80-90man tak hai iss di ktaayi lagbhag 120-130 dina de vich ho jandi hai. is to ilava tuc raja 44,45 di bijai kar sakde ho. haldi rog di roktham de layi tuc tilt@200ml nu 150 litre pani vich mila ke spray karo.dhanwad
Posted by Rajinder Singh
Punjab
28-04-2019 05:13 PM
Punjab
04-29-2019 03:08 PM
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਗੱਭਣ ਪਸ਼ੂ ਦੀ ਜਾਂਚ ਬਾਰੇ ਪੁੱਛ ਰਹੇ ਹੋਂ ਤਾਂ ਇਸਦਾ ਪਤਾ ਤਿੰਨ ਮਹੀਨਿਆਂ ਬਾਅਦ ਡਾਕਟਰ ਤੋਂ ਹੀ ਚੈਕ ਕਰਵਾਉਣਾ ਪਵੇਗਾ ਜਾਂ ਫਿਰ ਤੁਸੀ ਦੇਸੀ ਤਰੀਕੇ ਅਨੁਸਾਰ ਜਦੋਂ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਕਰੌਸ ਕਰਵਾਇਆ ਜਾਂ ਟੀਕਾ ਭਰਾਇਆ 40 ਦਿਨ ਹੋ ਜਾਣ ਤਾਂ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਪਿਸ਼ਾਬ ਨੁੂੰ ਖੁੱਲੇ ਬਰਤਨ ਵਿੱਚ ਪਾ ਲਵੋ ਤੇ ਉਸ ਵਿੱਚ 1 ਚੱਮਚ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਪਾ ਦਿਓ ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਧਿਆਨ ਨਾਲ ਚੈੱਕ.... (Read More)
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਗੱਭਣ ਪਸ਼ੂ ਦੀ ਜਾਂਚ ਬਾਰੇ ਪੁੱਛ ਰਹੇ ਹੋਂ ਤਾਂ ਇਸਦਾ ਪਤਾ ਤਿੰਨ ਮਹੀਨਿਆਂ ਬਾਅਦ ਡਾਕਟਰ ਤੋਂ ਹੀ ਚੈਕ ਕਰਵਾਉਣਾ ਪਵੇਗਾ ਜਾਂ ਫਿਰ ਤੁਸੀ ਦੇਸੀ ਤਰੀਕੇ ਅਨੁਸਾਰ ਜਦੋਂ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਕਰੌਸ ਕਰਵਾਇਆ ਜਾਂ ਟੀਕਾ ਭਰਾਇਆ 40 ਦਿਨ ਹੋ ਜਾਣ ਤਾਂ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਪਿਸ਼ਾਬ ਨੁੂੰ ਖੁੱਲੇ ਬਰਤਨ ਵਿੱਚ ਪਾ ਲਵੋ ਤੇ ਉਸ ਵਿੱਚ 1 ਚੱਮਚ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਪਾ ਦਿਓ ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਧਿਆਨ ਨਾਲ ਚੈੱਕ ਕਰੋ ਕਿ ਜੇਕਰ ਸਰੌ ਦਾ ਤੇਲ ਉਸ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਟਿੱਕੀ ਦੀ ਤਰਾਂ ਜੰਮ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਪਸ਼ੂ ਠਹਿਰ (ਗੱਭਣ) ਗਿਆ ਹੈ ਪਰ ਜੇਕਰ ਤੇਲ ਦੀਆਂ ਬੂੰਦਾਂ ਬਿੱਖਰ ਜਾਣ ਤਾਂ ਸਮਝ ਲਵੋਂ ਕਿ ਪਸ਼ੂ ਖਾਲੀ ਹੈ
Posted by dipali shinde
Maharashtra
28-04-2019 05:13 PM
Punjab
04-29-2019 04:38 PM
Dipali shinde to get all the information about these you can contact to Achal singh 9711858258 (GLITTER PEARL FARMING).
Posted by Baldev Kamboj
Punjab
28-04-2019 04:58 PM
Punjab
05-02-2019 03:23 PM
ਜਵਾਰ ਵਿਚ ਮੱਛਰ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ imidacloprid @1.5 ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by ਹਰਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
28-04-2019 04:57 PM
Punjab
05-03-2019 04:52 PM
ਹਰਵਿੰਦਰ ਜੀ ਇਸਦੇ ਉਪਰ ਮੱਛਰ ਦਾ ਹਮਲਾ ਚੈੱਕ ਕਰੋ ਜੇਕਰ ਮੌਜੂਦ ਹੈ ਤਾ ਇਸਦੇ ਉਪਰ Imidacloprid @1.5ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by rajesh Kumar
Uttar Pradesh
28-04-2019 04:52 PM
Maharashtra
05-03-2019 04:53 PM
Rajesh ji aap moong ki bijai kar sakte hai yeh hari khaad ke liye bhi istemal ho sakta hai aur aap is se munafa bhi kma sakte hai.dhanywad
Posted by jasvir singh
Punjab
28-04-2019 04:48 PM
Maharashtra
04-29-2019 04:37 PM
ਝੋਨੇ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ 20 ਮਈ ਤੋਂ ਬਾਦ ਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਨੂੰ ਮੁਖ ਖੇਤ ਵਿਚ ਲਾਉਣ ਦੀ ਤਾਰੀਕ 20 ਜੂਨ ਤੋਂ ਬਾਦ ਦੀ ਹੈ
Posted by Maan Saab
Punjab
28-04-2019 04:41 PM
Punjab
04-29-2019 03:21 AM
jhone di nwi tareek aje nahi ayi hai...pehla wali date 20may ton paneeri ate 20june ton jhona lgaun di hi hai...
Posted by Pinkabrar
Punjab
28-04-2019 04:15 PM
Punjab
05-03-2019 03:56 PM
ਪਿੰਕਾ ਬਰਾੜ ਜੀ ਬਾਸਮਤੀ ਦੀ ਕਿਸਮ ਜੋ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਝਾੜ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਹੈ ਉਹ pusa 44 ਹੈ ਇਹ ਲੇਟ ਪੱਕਦੀ ਹੈ ਇਹ 155 ਦਿਨ ਤਕ ਪੱਕਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਜੁਲਾਈ ਵਿਚ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਪਨੀਰੀ ਜੂਨ ਮਹੀਨੇ ਵਿਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ\ਧੰਨਵਾਦ
Posted by ਹਰਭਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
28-04-2019 03:43 PM
Punjab
04-29-2019 02:24 PM
ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ Vitum-H ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਲਗਵਾਓ, ਇਹ ਤੁਸੀ 5 ਮਿਲੀ ਲਗਵਾਓ ਅਤੇ 2-2 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਫਰਕ ਨਾਲ ਲਗਵਾਓ ਅਤੇ ਇਸਦੇ 5 ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਲਗਵਾਓ ਜੀ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Metabolite ਪਾਊਡਰ ਦੀ ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਪੁੜੀ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਲੇਵਾ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਵਧਿਆ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ
Posted by suraj
Maharashtra
28-04-2019 03:23 PM
Punjab
04-30-2019 05:03 PM
कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by parbhpreet singh
Punjab
28-04-2019 03:12 PM
Punjab
05-03-2019 03:51 PM
thoothi rog di roktham de lyi tata di tata mida ja nagarjuna di crop mida@40-60ml nu 150 ltr pani de nal mila ke prati acre te spray kro.. thoothi rog di roktham de lyi imidacloprid ja thiamethoxam ja dimethoate ja acephate varge salt kam krde hnn..
Posted by Amandeep Singh
Punjab
28-04-2019 03:09 PM
Maharashtra
04-29-2019 04:38 PM
ਨਰਮੇ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਅੱਧ ਮਈ ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਨਰਮੇ ਦੀਆਂ BUNTY, SHRIRAM 6588, 6488, Ankur 3028, RCH 134(Rasi), RCH 650(Rasi), Rasi 653, Rasi 776. Rasi 773 , US 51 , US 71, BAYER da 7172, 7272 ਕਿਸਮਾਂ ਲਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by Gulab ram
Chattisgarh
28-04-2019 03:09 PM
Punjab
04-29-2019 02:31 PM
उसे आप अच्छी कंपनी का मिर्नल मिक्सर्च जैसे Agrimin super, Bovimin-B रोजाना 50 ग्राम देना शुरू करें इसके साथ आप Minotas bolus रोजाना एक गोली दें और 21 दिनों तक देते रहें इससे हीट में आ जाएगी
Posted by Harman Smagh
Punjab
28-04-2019 02:57 PM
Punjab
05-03-2019 03:50 PM
harman ji aap moong ki kism jaise Narendra Moong 1,Malviya Jagriti,Samrat (PDM 139),Moong Janpriya (HUM-6),Meha ki bijai kar sakte hai. dhanywad
Posted by jagdev Singh
Punjab
28-04-2019 02:55 PM
Maharashtra
05-03-2019 03:43 PM
jagdev ji hari khaad de layi bajre di bijai nahi kiti ja sakdi hari khaad de layi tuc moongi ja gwar di bijai kar sakde ho.dhanwad
Posted by kush kumar
Uttar Pradesh
28-04-2019 02:51 PM
Punjab
04-30-2019 04:55 PM
यू पी में गन्ने की खेती का उपयुक्त समय बसंत का मौसम है फरवरी से मार्च गन्ने की रोपाई के लिए सबसे उपयुक्त समय है उपउष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में कतारों में 60-120 सैं.मी. का फासला रखें बिजाई के लिए सुधरे ढंग जैसे कि गहरी खालियां, मेंड़ बनाकर,पंक्तियों में जोड़े बनाकर और गड्ढा खोदकर बिजाई की जाती है
Posted by धर्मेन्द्र यादव
Rajasthan
28-04-2019 02:21 PM
Punjab
04-29-2019 02:37 PM
आप भैंस को Agrimin super पाउडर 100 ग्राम रोजाना दें इसके साथ आप Minotas bolus रोजाना एक गोली दें और 21 दिनों तक देते रहें इससे हीट में आ जाएगी
Posted by jaspreet
Punjab
28-04-2019 02:11 PM
Rajasthan
04-29-2019 02:38 PM
tuci pashu nu suun ton 1-2 dina de baad kanak da dalia rinn ke de skde ho, ehh tuci pashu nu 5-7 din tak dinde rho, iss nal pashu da dudh vdia ho jnda hai ate ehh jaldi hajam honn wali khurak hai .
Posted by chirag chopra
Haryana
28-04-2019 02:10 PM
Punjab
04-29-2019 03:19 PM
चिराग चोपड़ा जी इसके बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Narender Kumar 9950708819 से संपर्क करें
Posted by sohan
Rajasthan
28-04-2019 01:56 PM
Punjab
04-30-2019 04:47 PM
सोहन जी एचएफ गाय के लिए बिमारियों के हिसाब से इंजेक्शन लगायें जाते हैं इसे ज्यादा थनैला रोग, बुखार की समस्या होती है जो साफ सफाई की कमी के कारण होती है उसे हिसाब से इसे इंजेक्शन लगवाया जाता है इसके इलावा मुखखूर,लंगड़ा बुखार और बरूसीलोसिस की बिमारी वाले इंजेक्शन लगते है जो एक साल में दो बार लगाए जाते है
Posted by Dinesh kumar
Haryana
28-04-2019 01:46 PM
Maharashtra
05-03-2019 03:39 PM
बढ़िया रेतली दोमट, धूप वाली स्थिति, गर्म नमी वाली जलवायु, इस फसल के लिए अनुकूल होती हैं इसके लिए मिट्टी का pH 5-8 होना चाहिए और 75- 90° फारनहीट वाली गर्म मिट्टी का प्रयोग करें प्रसिद्ध किस्में:- Pant Aparna, Pant Shivani, Pant Sujata, Pant Urvashi नाम की किस्में जी.बी. पंत यूनिवर्सिटी ऑफ़ ऐग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, पंतनगर, उत्तराखंड की तरफ से तैयार क.... (Read More)
बढ़िया रेतली दोमट, धूप वाली स्थिति, गर्म नमी वाली जलवायु, इस फसल के लिए अनुकूल होती हैं इसके लिए मिट्टी का pH 5-8 होना चाहिए और 75- 90° फारनहीट वाली गर्म मिट्टी का प्रयोग करें प्रसिद्ध किस्में:- Pant Aparna, Pant Shivani, Pant Sujata, Pant Urvashi नाम की किस्में जी.बी. पंत यूनिवर्सिटी ऑफ़ ऐग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, पंतनगर, उत्तराखंड की तरफ से तैयार की गई है Pant Aparna: इसके वृक्ष छोटे कद के, लटकते हुए फूलों वाले, काटों रहित, जल्दी और भारी पैदावार वाले होते है इसके पत्ते बढ़े, गहरे हरे और नाशपाती के आकर के जैसे होते है इसके फल आकर में गोल होते है, जिनका औसतन भार 1 किलो होता है बेल की खेती के लिए, साफ़ रेतली या दोमट मिट्टी की जरूरत होती है भुरभुरी मिटटी के लिए, 90x90x90 सै.मी. आकर के गड्ढे खोदे जाते है और बाग़ की मिट्टी और 25 किलो रूडी की खाद, 1 किलो नीम तेल केक और 1 किलो हड्डीओं के चूरे का मिश्रण गड्ढों में डालें मिट्टी को स्थिर बनाने के लिए सिंचाई करना जरूरी होता है फरवरी से मार्च या जुलाई से अगस्त का समय इसकी बिजाई के लिए उचित होता है बढ़िया विकास के लिए अंकुरण हुए पौधे 8x8 मीटर फासले पर बोयें और नए पौधों के बीच का फासला 10 x10 मीटर होना चाहियें इसकी बिजाई पनीरी मुख्य खेत में लगा कर की जाती है पैच और रिंग बडिंग प्रजनन के लिए प्रयोग किये जाने वाले उचित ढंग है इस ढंग में सफलता की दर ज्यादा होती है पहले बीजों को लगभग 12-14 घंटों के लिए पानी में भिगो दिया जाता है और फिर हवा में सुखाया जाता है फिर इनको बोया जाता है बीजों को पॉलीथिन या तैयार किये बैडों पर उगाया जाता है मिट्टी में नमी बरकरार रखने के लिए सूखे पत्तों के साथ मल्चिंग करें तैयार किये गए नरसरी बैडों पर बीजों की बिजाई करें बीज 2-3 हफ्ते में अंकुरण हो जाते है और पनीरी लगाने के लिए तैयार हो जाते है पनीरी और बीज द्वारा लगाएं गये पौधों में बहुत फर्क होता है इस कमी को दूर करने के लिए, पनीरी लगाकर पौधे तैयार किये जाते है मुख्य पौधे के साथ पैच बडिंग की जाती है और इसकी जड़े काट कर भी पौधा तैयार किया जाता है यह दोनों क्रियाएं इस लिए बढ़िया मानी जाती है इसकी छंटाई भी करनी चाहिए बढ़िया आकर वाली 4-6 टहनियाँ ओर ज्यादा बढ़ती है यह पानी को सोखने वाली स्थितियों के लिए बहुत संवेदनशील होती है, इस लिए इसका ध्यान रखें जब पौधा एक साल का हो जाये तो, 10 किलो रूडी की खाद, 50 ग्राम नाइट्रोजन, 25 ग्राम फास्फोरस और 50 ग्राम पोटाशियम बीमारीयां और कीटों से बचाने के लिए डालें हर साल विकास दर के अनुसार खादों की मात्रा बढ़ाते रहें खादें डालने के बाद सिंचाई करना जरूरी है ज़मीन की तैयारी के समय 25 किलो रूडी की खाद, 1 किलो नीम तेल केक और 1 किलो हड्डियों का चूरा डालें और मिट्टी में मिला दें पनीरी लगाने के बाद 10 किलो रूडी की खाद, 500 ग्राम नाइट्रोजन, 250 फास्फोरस और 500 ग्राम पोटाशियम प्रति पौधे में डालें कटाई के बाद फलों के बनावटी स्टोरेज के लिए एथ्रेल(2-क्लोरोइथेन फोस्फोनिक एसिड ) 1,000 से 15,000 ppm डालें और 86° फारनहीट(30°सैल्सिअस) पर स्टोर करें इस फसल में ज्यादा गोड़ाई की जरूरत नहीं होती है पहली गोड़ाई शुरू में पौधों के विकास के समय करें और फिर अगली गोड़ाई पौधे की 2 साल की उम्र में करें नये पौधों के बढ़िया विकास और जमने के लिए गर्मियों में लगातार और सर्दियों में 1 महीने के फासले पर पानी दें खुश्क गर्मियों में फल देने वाले वृक्ष को पानी ना दें, क्योंकि इनके पत्तें झड़ते है और खुश्क गर्म मौसम के प्रतिरोधक होते है नये पत्ते निकलते समय पानी दें पनीरी लगाने से 6 से 7 साल बाद यह पौधे फल देना शुरू कर देते है इसकी तुड़ाई जनवरी में की जाती है जब पौधे पीले-हरे दिखने लग जाते है यह पीले-हरे फल 8 दिनों के लिए रखें, ताकि इनका हरा रंग चला जाये फलों को उठाने-रखने के समय सावधानी का प्रयोग करें, नहीं तो फल गिरने के साथ इसमें दरार आ सकती है इससे नयें उत्पाद तैयार करने के लिए पूरी तरह से पके हुए और नरम गुद्दे वाले फल ही प्रयोग करें
Posted by virpal singh
Punjab
28-04-2019 01:24 PM
Haryana
05-03-2019 03:35 PM
Virpal ji tuc 27p31, sava 200, sava 127, Cr212 kisam di bijai kar sakde ho.dhanwad
Posted by Dinesh kumar
Haryana
28-04-2019 01:23 PM
Punjab
05-03-2019 03:32 PM
बढ़िया रेतली दोमट, धूप वाली स्थिति, गर्म नमी वाली जलवायु, इस फसल के लिए अनुकूल होती हैं इसके लिए मिट्टी का pH 5-8 होना चाहिए और 75- 90° फारनहीट वाली गर्म मिट्टी का प्रयोग करें बेल की खेती के लिए, साफ़ रेतली या दोमट मिट्टी की जरूरत होती है भुरभुरी मिटटी के लिए, 90x90x90 सै.मी. आकर के गड्ढे खोदे जाते है और बाग़ की मिट्टी और 25 किलो .... (Read More)
बढ़िया रेतली दोमट, धूप वाली स्थिति, गर्म नमी वाली जलवायु, इस फसल के लिए अनुकूल होती हैं इसके लिए मिट्टी का pH 5-8 होना चाहिए और 75- 90° फारनहीट वाली गर्म मिट्टी का प्रयोग करें बेल की खेती के लिए, साफ़ रेतली या दोमट मिट्टी की जरूरत होती है भुरभुरी मिटटी के लिए, 90x90x90 सै.मी. आकर के गड्ढे खोदे जाते है और बाग़ की मिट्टी और 25 किलो रूडी की खाद, 1 किलो नीम तेल केक और 1 किलो हड्डीओं के चूरे का मिश्रण गड्ढों में डालें मिट्टी को स्थिर बनाने के लिए सिंचाई करना जरूरी होता है फरवरी से मार्च या जुलाई से अगस्त का समय इसकी बिजाई के लिए उचित होता है बढ़िया विकास के लिए अंकुरण हुए पौधे 8x8 मीटर फासले पर बोयें और नए पौधों के बीच का फासला 10 x10 मीटर होना चाहियें इसकी बिजाई पनीरी मुख्य खेत में लगा कर की जाती है पैच और रिंग बडिंग प्रजनन के लिए प्रयोग किये जाने वाले उचित ढंग है इस ढंग में सफलता की दर ज्यादा होती है मिट्टी में नमी बरकरार रखने के लिए सूखे पत्तों के साथ मल्चिंग करें तैयार किये गए नरसरी बैडों पर बीजों की बिजाई करें बीज 2-3 हफ्ते में अंकुरण हो जाते है और पनीरी लगाने के लिए तैयार हो जाते है पनीरी और बीज द्वारा लगाएं गये पौधों में बहुत फर्क होता है इस कमी को दूर करने के लिए, पनीरी लगाकर पौधे तैयार किये जाते है मुख्य पौधे के साथ पैच बडिंग की जाती है और इसकी जड़े काट कर भी पौधा तैयार किया जाता है यह दोनों क्रियाएं इस लिए बढ़िया मानी जाती है इसकी छंटाई भी करनी चाहिए बढ़िया आकर वाली 4-6 टहनियाँ ओर ज्यादा बढ़ती है यह पानी को सोखने वाली स्थितियों के लिए बहुत संवेदनशील होती है, इस लिए इसका ध्यान रखें ज़मीन की तैयारी के समय 25 किलो रूडी की खाद, 1 किलो नीम तेल केक और 1 किलो हड्डियों का चूरा डालें और मिट्टी में मिला दें पनीरी लगाने के बाद 10 किलो रूडी की खाद, 500 ग्राम नाइट्रोजन, 250 फास्फोरस और 500 ग्राम पोटाशियम प्रति पौधे में डालें कटाई के बाद फलों के बनावटी स्टोरेज के लिए एथ्रेल(2-क्लोरोइथेन फोस्फोनिक एसिड ) 1,000 से 15,000 ppm डालें और 86° फारनहीट(30°सैल्सिअस) पर स्टोर करें इस फसल में ज्यादा गोड़ाई की जरूरत नहीं होती है पहली गोड़ाई शुरू में पौधों के विकास के समय करें और फिर अगली गोड़ाई पौधे की 2 साल की उम्र में करें पनीरी लगाने से 6 से 7 साल बाद यह पौधे फल देना शुरू कर देते है इसकी तुड़ाई जनवरी में की जाती है जब पौधे पीले-हरे दिखने लग जाते है यह पीले-हरे फल 8 दिनों के लिए रखें, ताकि इनका हरा रंग चला जाये फलों को उठाने-रखने के समय सावधानी का प्रयोग करें, नहीं तो फल गिरने के साथ इसमें दरार आ सकती है इससे नयें उत्पाद तैयार करने के लिए पूरी तरह से पके हुए और नरम गुद्दे वाले फल ही प्रयोग करें
Posted by Gurvinder Singh
Punjab
28-04-2019 01:21 PM
Punjab
05-02-2019 04:09 PM
ਝੋਨੇ ਦੀ ਸਿੱਧੀ ਬਿਜਾਈ ਸਿਰਫ ਦਰਮਿਆਨੀ ਤੋਂ ਭਰੀਆਂ ਜਮੀਨ ਵਿਚ ਹੀ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਹਲਕੀਆਂ ਜਮੀਨਾਂ ਵਿਚ ਝੋਨੇ ਦੀ ਸਿੱਧੀ ਬਿਜਾਈ ਕਾਰਨ ਤੇ ਲੋਹੇ ਦੀ ਘਾਟ ਆ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਝਾੜ ਘਾਟ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਲਈ ਖੇਤ ਲੇਜਰ ਕਰਾਹੇ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਨਾਲ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਹੀ ਸੰਜਮਤਾ ਨਾਲ ਵਰਤੋਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਖੇਤ ਨੂੰ ਤਿਆਰ ਕਾਰਨ ਲਈ 2 ਤੋਂ 3 ਵਾਰ ਤਵੀਆਂ ਨਾਲ ਵਾਹੁਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇਕ ਵਾਰ ਹਾਲ .... (Read More)
ਝੋਨੇ ਦੀ ਸਿੱਧੀ ਬਿਜਾਈ ਸਿਰਫ ਦਰਮਿਆਨੀ ਤੋਂ ਭਰੀਆਂ ਜਮੀਨ ਵਿਚ ਹੀ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਹਲਕੀਆਂ ਜਮੀਨਾਂ ਵਿਚ ਝੋਨੇ ਦੀ ਸਿੱਧੀ ਬਿਜਾਈ ਕਾਰਨ ਤੇ ਲੋਹੇ ਦੀ ਘਾਟ ਆ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਝਾੜ ਘਾਟ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਲਈ ਖੇਤ ਲੇਜਰ ਕਰਾਹੇ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਨਾਲ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਹੀ ਸੰਜਮਤਾ ਨਾਲ ਵਰਤੋਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਖੇਤ ਨੂੰ ਤਿਆਰ ਕਾਰਨ ਲਈ 2 ਤੋਂ 3 ਵਾਰ ਤਵੀਆਂ ਨਾਲ ਵਾਹੁਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇਕ ਵਾਰ ਹਾਲ ਫੇਰ ਕੇ ਸੁਹਾਗਾ ਫੇਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਲੇਜਰ ਕਰਾਹੇ ਨਾਲ ਜਮੀਨ ਨੂੰ ਪੱਧਰਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਲੇਜਰ ਕਰਾਹੇ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਖੇਤੀ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਲਗਾਓ ਅਤੇ ਇੱਕ ਵਾਰ ਹੱਲ ਨਾਲ ਵਾਹ ਕੇ ਸੁਹਾਗਾ ਫੇਰ ਦਿਓ ਢੁਕਵੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ : ਘਟ ਸਮਾਂ ਲੈਣ ਲਯੀ ਕਿਸਮ ਪੀ ਆਰ 115 ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਢੁਕਵੀਂ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਸਮਾਂ : ਝੋਨੇ ਦੀ ਸਿੱਧੀ ਬਿਜਾਈ ਜੂਨ ਦੇ ਪਹਲੇ ਪੰਦਰਵਾੜੇ ਵਿਚ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਬੀਜ ਦੀ ਸੋਧ : ਬੀਜ ਨੂੰ ਉੱਲੀਨਾਸ਼ਕ ਦੇ ਘੋਲ ਵਿਚ 10-12 ਘੰਟੇ ਲਈ ਡੁਬੋ ਲਓ ਅਤੇ ਇਸਨੂੰ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ ਛਾਂ ਵਿਚ ਸੁਕਾ ਲਵੋ ਬੀਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਅਤੇ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਢੰਗ : ਝੋਨੇ ਦੀ ਸਿੱਧੀ ਬਿਜਾਈ 8-10 ਕਿੱਲੋ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਰਤ ਕੇ ਟੇਢੀ ਪਲੇਟ ਵਾਲੀ ਟਰੈਕਟਰ ਡਰਿੱਲ ਨਾਲ 20 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਦੂਰ ਕਤਾਰਾਂ ਵਿਚ ਸੁੱਕੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਰੌਣੀ ਕੀਤੇ ਖੇਤ ਵਿਚ ਕਰੋ ਬੀਜ ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ 2-3 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਰੱਖਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਆਦਾ ਡੂੰਘਾਈ ਤੇ ਬੀਜ ਨਹੀਂ ਜੰਮਦਾ ਜੇਕਰ ਮਸ਼ੀਨ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਤਾ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਨਜਦੀਕੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇੰਦਰ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ Krishi Vigyan Kendra, Address: Post Box No.-22, Rauni, Punjab 147001 Phone: 094642 10460 nal samparak kar sakde ho.
Posted by baljinder Singh Sandhu
Punjab
28-04-2019 01:15 PM
Punjab
05-03-2019 03:28 PM
ਬਲਜਿੰਦਰ ਜੀ ਜੈਵਿਕ ਖੇਤੀ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਨਜਦੀਕੀ ਜੋ ਵੀ ਕਿਸਾਨ ਜੈਵਿਕ ਖੇਤੀ ਕਰਦੇ ਹਨ ਓਹਨਾ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰੋ ਅਤੇ ਉਹਨਾਂ ਦੇ ਅਨੁਭਵ ਨੂੰ ਜਾਣੋ ਅਤੇ ਥੋੜੀ ਜਗਾ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਜਿਵੇ ਜਿਵੇ ਤੁਹਾਡਾ ਅਨੁਭਵ ਵਧੇਗਾ ਓਦਾਂ ਤੁਸੀ ਜੈਵਿਕ ਖੇਤੀ ਦੇ ਲਈ ਜਗਾਹ ਨੂੰ ਵਧਾਉਂਦੇ ਜਾਓ ਧੰਨਵਾਦ