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Posted by Vivek Kumar
Uttar Pradesh
14-05-2019 07:46 AM
Punjab
05-15-2019 02:25 PM
आप उसे Tablet NUTRICH 30 की एक गोली सुबह एक गोली शाम को दें
Posted by Ramandeep Singh
Punjab
14-05-2019 07:38 AM
Punjab
05-15-2019 02:17 PM
ramandeep ji kirpa karke apna swal vistar nal pucho ke tuc jankari ki laina chahunde ho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by Vijay nagbhide
Madhya Pradesh
14-05-2019 07:21 AM
Rajasthan
05-15-2019 02:21 PM
यदि आप गाय रखना चाहते है तो आप एचएफ नस्ल, साहीवाल, जरसी नस्ल की गाय रख सकते है और भैंसों में आप मुर्रा नस्ल, नीली रावी नस्ल की भैंस रख सकते है यदि आप पशु पालन का काम बड़े स्तर पर शुरू करना चाहते है तो आपको इस काम के लिए ट्रेनिंग की जरूरत पड़ेगी , ट्रेनिंग के साथ-साथ पशु की नस्ल सबसे ज़्यादा ज़रूरी है, पशु खरीदते समय .... (Read More)
यदि आप गाय रखना चाहते है तो आप एचएफ नस्ल, साहीवाल, जरसी नस्ल की गाय रख सकते है और भैंसों में आप मुर्रा नस्ल, नीली रावी नस्ल की भैंस रख सकते है यदि आप पशु पालन का काम बड़े स्तर पर शुरू करना चाहते है तो आपको इस काम के लिए ट्रेनिंग की जरूरत पड़ेगी , ट्रेनिंग के साथ-साथ पशु की नस्ल सबसे ज़्यादा ज़रूरी है, पशु खरीदते समय कोशिश करें कि तीन समय दूध निकालकर ही पशु खरीदें, भैंसों का एक दिन का दूध 12 लीटर और गायों का दूध 16-17 लीटर से कम न हो, भैंसों को खरीदने का सही समय रखड़ी से लेकर वैशाखी तक का होता है क्योंकि इस समय मौसम अच्छा होने के कारण हरा चारा भी खुला होता है पशुओं के लिए शैड परिवहन वाली सड़क पर ना बनाए और शैड सड़क से कम से कम 100 गज हटवा जरूर हो शैड को धूप और हवा का ध्यान रखकर बनाएं शैड हमेशा खेत या आस पास से 2 फुट ऊंचा बनाए क्योंकि निचले स्थान पर पानी खड़ा हो जाता है जिस कारण गंदगी पैदा हो जाती है और बाकी पशुओं का मल मूत्र का निकास भी आसानी से हो जाता है पशुओं के लिए बनाई जाने वाली खुरली ढाई तीन फुट चौड़ी होनी चाहिए खुरली पर खड़े होने के लिए एक पशु को तकरीबन तीन चार फुट जगह चाहिए मतलब 10 पशुओं के लिए 40 फुट लंबी खुरली बनेगी डेयरी फार्म से संबंधित सामान रखने के लिए स्टोर बनाए पशुओं का दाना स्टोर करने के लिए कमरा सैलाब से रहित होना बहुत जरूरी है शैड का फर्श पक्का, तिलकने रहित और जल्दी साफ होने वाला हो शैड में जितना हो सके पशुओं को खुला छोड़ें और पानी और दाना पूरा दें पशु को खुला छोड़ने से पशुओं में अफारे की समस्या कम आती है बाकी अपनी क्षमता और जरूरत मुताबिक ही समान खरीदें और आर्थिक नुकसान से बचने के लिए प्रत्येक पशु का बीमा जरूर करवायें डेयरी फार्मिंग की अगली ट्रेनिंग 17 जुलाई से शुरू हो रही है इसमें शामिल होने के लिए उम्मीदवारों को कम से कम 8वीं पास होना जरूरी है उम्र की सीमा 18—45 वर्ष होनी चाहिए और कम से कम 5 दुधारू पशु होना जरूरी है ट्रेनिंग के बारे में और जानने के लिए आप अपने जिले के pddb के दफ्तर में जाकर डेयरी डिवलेपमेंट अफसर को मिलें डेयरी ट्रेनिंग का स्र्टीफिकेट हासिल करने के लिए आप आगे डेयरी लोन एप्लाई कर सकते हैं.
Posted by Ramnath Singh
Jharkhand
14-05-2019 07:00 AM
Punjab
05-15-2019 09:30 AM
Jaya: यह छोटे कद की और अधिक उपज देने वाली किस्म गर्दन तोड़ के प्रतिरोधक है यह किस्म 142 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने बड़े और लंबे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 26 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Chakia 59: यह किस्म कम जल जमाव वाले हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है Govind: यह किस्म पंतनगर द्वारा विकसित की गई है य.... (Read More)
Jaya: यह छोटे कद की और अधिक उपज देने वाली किस्म गर्दन तोड़ के प्रतिरोधक है यह किस्म 142 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने बड़े और लंबे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 26 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Chakia 59: यह किस्म कम जल जमाव वाले हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है Govind: यह किस्म पंतनगर द्वारा विकसित की गई है यह किस्म 105 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Indrasan: यह तराई क्षेत्रों की प्रसिद्ध किस्म है Mahsud: यह किस्म निचले क्षेत्रों में बारानी स्थितियों में उगाने के लिए उपयुक्त है Majhera 3: यह लंबी किस्म सूखे को सहनेयोग्य है और ऊंचे क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Nagina 22: यह ऊंचे क्षेत्रों में बारानी हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं Narendra-1 and Narendra-2: यह किस्म 105 और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Pant Dhan 6: यह किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त है Saket 4: यह अगेते समय की किस्म है और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह यू पी की सबसे प्रसिद्ध किस्म है T9: यह देरी से बोयी जाने वाली सुगंधित किस्म है इसके दाने बेलनाकार होते हैं VL Dhan 16: यह निम्न और मध्यम क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त किस्म है VL 206: यह लंबी किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Usar 1: यह किस्म कानपुर में विकसित की गई यह क्षारीय और लवणीय मिट्टी में खेती करने के लिए उपयुक्त है
Posted by Anil Kumar
Rajasthan
14-05-2019 06:23 AM
Punjab
05-15-2019 09:29 AM
प्रभावित फल हर सप्ताह तोड़ कर नष्ट कर दें नर्सरी लगाने से 1 महीने बाद ट्राइज़ोफॉस 20 मि.ली. प्रति 10 लीटर पानी और 50 ग्राम नीम एक्सट्रैक्ट 50 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे करें 10-15 दिनों के फासले पर यह स्प्रे दोबारा करें फूल निकलने के समय कोराजैन 18.5 प्रतिशत एस सी 5 मि.ली. + टीपॉल 5 मि.ली. का घोल 12 लीटर पानी में मिलाकर 20 दिनों के.... (Read More)
प्रभावित फल हर सप्ताह तोड़ कर नष्ट कर दें नर्सरी लगाने से 1 महीने बाद ट्राइज़ोफॉस 20 मि.ली. प्रति 10 लीटर पानी और 50 ग्राम नीम एक्सट्रैक्ट 50 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे करें 10-15 दिनों के फासले पर यह स्प्रे दोबारा करें फूल निकलने के समय कोराजैन 18.5 प्रतिशत एस सी 5 मि.ली. + टीपॉल 5 मि.ली. का घोल 12 लीटर पानी में मिलाकर 20 दिनों के फासले पर दो बार स्प्रे करें शुरूआती हमले में 5 प्रतिशत नीम एक्सट्रैक्ट 50 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे करें ज्यादा हमला दिखने पर 25 प्रतिशत साइपरमैथरिन 2.4 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें कीटों की गिनती अधिक हो जाने पर स्पाइनोसैड 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें फल पकने के बाद ट्राइज़ोफॉस या किसी और कीटनाशक की स्प्रे ना करें
Posted by sarbjeet singh
Punjab
14-05-2019 06:12 AM
Punjab
05-14-2019 04:01 PM
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਖੁਦ ਮੱਝ ਨੂੰ ਘਰ ਵਿਚ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦਿੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਇਸ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸੋਇਆਬੀਨ ਅਤੇ ਬਾਕੀ ਚੀਜਾਂ ਮਿਕਸ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ , ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ 10 ਕਿਲੋ ਸੋਇਆਬੀਨ, 8 ਕਿਲੋ ਵੜੇਵਿਆਂ ਦੀ ਖਲ, 9 ਸਰੋਂ ਦੀ ਖਲ, 40 ਕਿਲੋ ਚੋਕਰ, 20 ਕਿਲੋ ਕਣਕ ਜਾਂ ਮੱਕੀ, 10 ਕਿਲੋ ਛੋਲੇ, 1 ਕਿਲੋ ਨਮਕ, 2 ਮਿਨਰਲ ਮਿਸ਼ਰਣ , ਇਹ 100 ਕਿਲੋ ਫੀਡ ਦਾ ਫਾਰਮੂਲਾ ਹੈ
Posted by lakhvir Brar
Punjab
14-05-2019 05:08 AM
Punjab
05-14-2019 03:46 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Metricef-iu ਦਵਾਈ 2 ਦਿਨ ਭਰਵਾਂ ਦਿਓ , ਇਹ ਦਵਾਈ ਭਰਵਾਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗਾਂ ਨੂੰ Agrimin super ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿਓ ਇਸਨੂੰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਲਗਭਗ 2 ਕਿਲੋ ਤਕ ਦੇ ਦਿਓ , ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Pregstay gold ਪਾਊਡਰ ਵੀ ਦਿਓ , ਇਸਦੀ 600 ਗ੍ਰਾਮ ਦੀ ਪੈਕਿੰਗ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦੇ 2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਦੇਣੇ ਹੈ , ਫਿਰ ਜਦੋ ਗਾਂ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆ ਜਾਵੇ ਉਸਦੀ AI ਕਰਵਾ ਦਿਓ , ਗਾਂ ਰਹਿ ਜਾਵੇਗੀ.
Posted by Puran Kumawat
Rajasthan
13-05-2019 11:49 PM
Punjab
05-14-2019 02:51 PM
देसी इलाज तो है कि डालडा घी की मालिश करें इससे पशु को चिचड़ों से छुटकारा मिल सकता है इसके अलावापशु के आस पास tobacco/ channa(Kali) की लाइन लगा दें और आप virbac कंपनी की clinar दवाई 2—4 मि.ली. को एक लीटर पानी में घोलकर पशु के शरीर पर लगायें और साथ की साथ पशुओं के रहने वाली जगह की सफाई जरूर रखें
Posted by Golu patidar
Madhya Pradesh
13-05-2019 11:33 PM
Punjab
05-14-2019 11:19 AM
Golu ji kripya btaye ke mirch men kya dikkat aa rahihai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by sukhjinder Brar
Punjab
13-05-2019 11:19 PM
Punjab
05-14-2019 05:16 AM
PR-122 smet paneri 140- 142 lenda g average yield 30q- 35q Tak a jandi a
Posted by sukhjinder Brar
Punjab
13-05-2019 11:19 PM
Punjab
05-14-2019 05:20 AM
1121 140 days di variety hai, yield 20 q tak a skdi a per acre 1509 120 days di variety hai, yield 20q - 25q tak a skdi a per acre
Posted by amandeep singh
Punjab
13-05-2019 10:56 PM
Punjab
05-22-2019 05:36 PM
Amandeep singh ji Marigold da seed len lai tusi Gurpreet Shergill 9872624253 nal samparak kar sakde ho.
Posted by jagmeet brar
Punjab
13-05-2019 10:35 PM
Punjab
05-14-2019 04:03 PM
Tuci katti nu Flukarid-Ds bolus pett de kiria lai deo ate Agrimin super powder 100gm rojana ate Minotas bolus rojana 1 goli deo ate 21 dina tak dinde rho, iss nal heat vich aa jawegi .
Posted by Vishal Tiwari
Uttar Pradesh
13-05-2019 10:20 PM
Punjab
05-14-2019 11:27 AM
फसल बीजने से पहले मिट्टी के अंदरूनी तत्वों को जांच करवानी आवश्यक है ताकि खादों की सही आवश्यकता को समझा जा सके बिजाई से पहले 8 टन प्रति एकड़ रूड़ी की खाद मिलाएं या वर्मीकंपोस्ट + रैलीगोल्ड 8-10 किलोग्राम प्रति एकड़ या जीवाणु खाद 5-10 किलोग्राम प्रति एकड़ का प्रयोग करें बिजाई के समय 66 किलो यूरिया का प्रयोग प्रति एकड़ क.... (Read More)
फसल बीजने से पहले मिट्टी के अंदरूनी तत्वों को जांच करवानी आवश्यक है ताकि खादों की सही आवश्यकता को समझा जा सके बिजाई से पहले 8 टन प्रति एकड़ रूड़ी की खाद मिलाएं या वर्मीकंपोस्ट + रैलीगोल्ड 8-10 किलोग्राम प्रति एकड़ या जीवाणु खाद 5-10 किलोग्राम प्रति एकड़ का प्रयोग करें बिजाई के समय 66 किलो यूरिया का प्रयोग प्रति एकड़ के हिसाब से करें यूरिया की दूसरी किश्त 66 किलो प्रति एकड़ दूसरे पानी के बाद डालो और यूरिया की तीसरी किश्त 66 किलो प्रति एकड़ चौथे पानी के बाद डालें सर्दियों के मौसम में तापमान कम होने के कारण फसल तत्व ज्यादा लेती है जिस कारण पौधा पीला पड़ जाता है इसकी रोकथाम के लिए N:P:K 19:19:19 की स्प्रे 250 ग्राम 150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ के लिए प्रयोग करें जिन इलाकों में पानी की कमी है वहां यूरिया+पोटाश का प्रयोग 2.5 किलोग्राम को 100 लीटर पानी में मिलाकर करें
Posted by gagansandhu
Punjab
13-05-2019 10:08 PM
Punjab
05-14-2019 05:14 AM
1718 di average yield 1121 nalo 1q- 3q per acre vadh a g
Posted by Mishra Vijay
Bihar
13-05-2019 10:08 PM
Punjab
05-14-2019 11:32 AM
मिश्रा जी आप इसे वर्मी कम्पोस्ट डाले और पौधे को सही मात्रा में ही पानी दे ज्यादा पानी देने से भी फूल गिरना शुरू हो जाते है धन्यवाद
Posted by daljit singh
Punjab
13-05-2019 09:43 PM
Punjab
05-14-2019 01:29 PM
ਤੁਸੀ ਮੱਝ ਨੂੰ Lapnil-p ਪਾਊਡਰ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਪਾਊਡਰ ਨੂੰ 75 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ, ਇਸ ਵਿਚ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਬੇਸਣ ਅਤੇ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਦਿਓ, ਇਸ ਨੂੰ ਕੁਜ ਦਿਨਾਂ ਤਕ ਦਿਓ ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈਣ ਲੱਗ ਜਾਵੇਗਾ, ਬਾਕੀ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਤੂੜੀ ਘੱਟ ਦੇਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਪਿੱਛਾ ਉਚਾ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਪੇਟੀ ਪਾ ਕੇ ਵੀ ਰੱਖਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ, ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਸਪਰੇ .... (Read More)
ਤੁਸੀ ਮੱਝ ਨੂੰ Lapnil-p ਪਾਊਡਰ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਪਾਊਡਰ ਨੂੰ 75 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ, ਇਸ ਵਿਚ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਬੇਸਣ ਅਤੇ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਦਿਓ, ਇਸ ਨੂੰ ਕੁਜ ਦਿਨਾਂ ਤਕ ਦਿਓ ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈਣ ਲੱਗ ਜਾਵੇਗਾ, ਬਾਕੀ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਤੂੜੀ ਘੱਟ ਦੇਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਪਿੱਛਾ ਉਚਾ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਪੇਟੀ ਪਾ ਕੇ ਵੀ ਰੱਖਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ, ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਸਪਰੇ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਵੀ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਜਦੋ ਵੀ ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਪਿੱਛਾ ਬਾਹਰ ਨੂੰ ਆਵੇ ਇਸ ਨੂੰ ਉਸ ਉਪਰ popin ਸਪਰੇ ਕਰ ਦਿਓ ਇਸ ਨਾਲ ਉਹ ਸੁੰਗੜ ਕੇ ਅੰਦਰ ਚਲ ਜਾਵੇਗਾ ,ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਕਾਲੀਆ ਮਿਰਚਾਂ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਲਿਆ ਕੇ 20 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣੀਆਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਸਬਜ਼ੀ ਵਾਲਾ ਪੇਠਾ 1 ਕਿਲੋ ਰੋਜਾਨਾ ਖਿਲਾਓ, 5 ਦਿਨ ਦੇਣ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ,ਇਸ ਨਾਲ ਸੋਜਿਸ਼ ਵਿਚ ਫਰਕ ਪਵੇਗਾ.
Posted by Chiku Nu Bachu Patel
Gujarat
13-05-2019 09:37 PM
Punjab
05-14-2019 11:37 AM
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट.... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट्टी का pH 9.5 से ज्यादा हो तो इसमें जिप्सम डालें आप इसकी किस्मे जैसे Co 8014 (Mahalakshami) ,Vasant 1,Co 86032 ,Co 92005 की बिजाई कर सकते है पतझड़ के मौसम में 15 अक्तूबर से २० नवंबर तक बिजाई की जाती है, बसंत के मौसम में बिजाई 15 फरवरी तक और गर्मियों के मौसम में 15 जुलाई से 15 सितंबर तक बिजाई की जाती है बिजाई के लिए सुधरे ढंग जैसे कि (गहरी खालियां, मेंड़ बनाकर,पंक्तियों में जोड़े बनाकर और गड्ढा खोदकर बिजाई ) प्रयोग किये जाते हैं 1) खालियां और मेंड़ बनाकर सूखी बिजाई: ट्रैक्टर द्वारा मेंड़ बनाने वाली मशीन की मदद से मेंड़ और खालियां बनाएं और इन मेड़ और खालियों में बिजाई करें मेड़ और खालियों में 90 सैं.मी. का फासला होना चाहिए गन्ने की गुलियों को मिट्टी में दबाएं और उसके बाद हल्की सिंचाई करें 2) पंक्तियों के जोड़े बनाकर बिजाई: खालियां बनाने वाले यंत्र के प्रयोग से खेत में 150 सैं.मी. के फासले पर खालियां बनाएं और उनमें 30:30-90-30:30 सैं.मी. के फासले पर गन्ने की रोपाई करें इस तरीके से मेड़ वाली बिजाई से अधिक पैदावार मिलती है 3) गड्ढा खोदकर बिजाई: गड्ढे खोदने वाली मशीन से 60 सैं.मी. व्यास के 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोदें जिनमें 60 सैं.मी. का फासला हो इससे गन्ना 2-3 बार उगाया जा सकता है और मेड़ वाली बिजाई से 25-50 % अधिक पैदावार आती है B) एक आंख वाले गन्नों की बिजाई: रोपाई के लिए सेहतमंद गुलियां चुनें और 75-90 सैं.मी. के अंतर पर खालियों में बिजाई करें गुलियां एक आंख वाली होनी चाहिए यदि गन्ने के ऊपरी भाग में छोटी डलियां चुनी गई हों तो बिजाई 6 -9 सैं.मी. के अंतर पर करें फसल के अच्छे उगने के लिए आंखों को ऊपर की ओर रखें और हल्की सिंचाई करें पतझड़ के मौसम में 14500-16500 तीन आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और बसंत के मौसम में 16500-25000 तीन आंख वाले बीज और 21600-25000 दो आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें गन्ने में नदीनों के कारण 12-72 % पैदावार का नुकसान होता है शुरूआती 60-120 दिनों तक नदीनों की रोकथाम बहुत जरूरी है इसलिए रोपाई के बाद 3-4 महीने बाद फसल की नदीनों की रोकथाम करें नीचे लिखे तरीकों से नदीनों को रोका जा सकता है 1) हाथों से गोडाई करके: गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली फसल है इसलिए नदीनों को गोडाई करके रोका जा सकता है इसके इलावा प्रत्येक सिंचाई के बाद 3-4 गोडाई जरूरी है 2) काश्तकारी ढंग: इस प्रक्रिया में खेती के तरीके, अंतरफसली और मलचिंग तरीके शामिल हैं बहुफसली के कारण नदीनों का हमला ज्यादा होता है इसकी रोकथाम के लिए चारे वाली फसलें और हरी खाद वाली फसलों के आधार वाला फसली चक्र गन्ने में नदीनों की रोकथाम करता है गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली भी फसल है जिससे नदीनों के हमले का खतरा भी ज्यादा होता है यदि गन्ने को कम समय वाली फसलों के साथ अंतरफसली किया जाए तो इससे नदीनों को कम किया जा सकता है और ज्यादा लाभ भी मिल सकता है गन्ने के अंकुरन के बाद गन्ने की कतारों में 10-12 सैं.मी. मोटी तह बिछा दी जाती है यह सूर्य की रोशनी को सोखता है जिससे नदीन कम होते हैं यह मिट्टी में नमी को भी बचाता है 3) रासायनिक तरीके: नदीनों की रोकथाम के लिए, सिमाज़ीन या एट्राज़ीन 600-800 ग्राम या मैट्रीब्यूज़िन 800 ग्राम या ड्यूरॉन 1-1.2 किलोग्राम प्रति एकड़ में बिजाई के तुरंत बाद प्रयोग करना चाहिए इसके इलावा चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए 2, 4-डी@ 300-400 ग्राम का प्रयोग प्रति एकड़ के हिसाब से करें नाइट्रोजन 62 किलो, फासफोरस 32 किलो और पोटाश 42 किलो प्रति एकड़ में डालें बिजाई से पहले नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो मात्रा को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें नाइट्रोजन की पहली मात्रा को बीज वाली आंख के अंकुरण के समय और दूसरी मात्रा को बीज अंकुरण के 45 दिन बाद डालें 3 वर्षों के बाद गन्ने की गुलियों में 40-50 क्विंटल गाय का गोबर प्रति एकड़ में डालें पतझड़ के मौसम में 90-100 दिनों में नाइट्रोजन को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें और बसंत के मौसम में 150-160 दिन बाद डालनी चाहिए सिंचाई की संख्या मिट्टी की किस्म और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है गर्मी के महीने में गर्म हवाओं और सूखे में वृद्धि होने के कारण फसल को पानी की जरूरत पड़ती है पहली सिंचाई फसल के 20-25 % अंकुरित होने पर करें मानसून में गन्ने को पानी और बारिश के आधार पर लगाएं कम वर्षा में सिंचाई 10 दिनों के अंतराल पर करें इसके बाद सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर 20-25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जमीन में नमी संभालने के लिए गन्ने की पंक्तियों में मलचिंग का प्रयोग करें अप्रैल जून के महीने में पानी की कमी ना होने दें इससे पैदावार कम होगी इसके इलावा बारिश के दिनों में पानी ना खड़ा होने दें जोताई का समय, वृद्धि का समय और अधिक विकास का समय सिंचाई के लिए बहुत नाज़ुक होता है मिट्टी को मेंड़ पर चढ़ाना: कसी की मदद से खालियों में और पौधे के किनारों पर मिट्टी चढ़ाई जाती है यह मिट्टी में अच्छी तरह से तैयार की गई खाद को अच्छी तरह से मिश्रित होने में मदद करती है पौधे को सहारा देने और उसे गिरने से बचाने में भी मदद करती है ज्यादा पैदावार और चीनी प्राप्त करने के लिए गन्ने की सही समय पर कटाई जरूरी है समय से पहले या बाद में कटाई करने से पैदावार पर प्रभाव पड़ता है किसान शूगर रीफरैक्टोमीटर का प्रयोग करके कटाई का समय पता लगा सकते हैं गन्ने की कटाई द्राती की सहायता से की जाती है गन्ना धरती से ऊपर थोड़ा हिस्सा छोड़कर काटा जाता है क्योंकि गन्ने में चीनी की मात्रा ज्यादा होती है कटाई के बाद गन्ना फैक्टरी में लेकर जाना जरूरी होता है
Posted by Jitender Malik
Haryana
13-05-2019 09:36 PM
Rajasthan
05-15-2019 02:29 PM
डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें ,इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अप.... (Read More)
डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें ,इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी केवीके से प्राप्त कर सकते है वहां समय समय पर ट्रेनिंग दी जाती है आप वहां जाकर अपना फार्म भर आए जब भी वहां ट्रेनिंग होगी तो आपको फोन करके बता दिया जाएगा
Posted by Gurdita singh
Punjab
13-05-2019 09:30 PM
Punjab
05-14-2019 10:39 AM
Cr 212 : ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਝਾੜ 30-35 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਕੱਦ 104-105 ਸੈਟੀਮੀਟਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਤੁਸੀ 20 ਮਈ ਤੱਕ ਲਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਇਸਦੇ ਪੱਕਣ ਦਾ ਸਮਾਂ 135 -145 ਦਿਨ ਹੈ
Posted by Vijay Thakur
Punjab
13-05-2019 09:22 PM
Punjab
05-14-2019 11:42 AM
Sava 134 di height 100-110cm tak hai. isda jhaad lagbhag 30-32 quintal prati acre hunda hai.raja 45 kisam 130 din laindi hai pakkan de layi ate isda jhaad 30-35 quintal prati acre hunda hai.dhanwad
Posted by swinder singh
Punjab
13-05-2019 09:20 PM
Punjab
05-14-2019 11:54 AM
Swinder ji mausam vibhag de anusar aaj halki badlwai rahegi.dhanwad
Posted by sudhanshu verma
Uttar Pradesh
13-05-2019 09:16 PM
Punjab
05-14-2019 12:05 PM
सुधांशु जी इसके ऊपर आप म-45 @4 ग्राम को परतै लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें ये फंगस के कारण गिरना शुरू हो जाता है धन्यवाद
Posted by happy
Punjab
13-05-2019 09:13 PM
Punjab
05-14-2019 12:21 PM
Happy ji isdi growth de layi tuc hoshi@400ml nu 150 litre pani vich mila ke spray karo.dhanwad
Posted by SONU KUMAR
Uttar Pradesh
13-05-2019 09:12 PM
Rajasthan
05-14-2019 10:33 AM
SONU KUMAR ji Moti ki kheti ke bare me puri jankari ke liye aap mere se 9711858258 samparak kare. Thank you.
Posted by Johal Saab
Punjab
13-05-2019 09:03 PM
Haryana
05-14-2019 12:24 PM
Pusa Punjab Basmati 1509: ਇਹ ਜਲਦੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ ਕਿ 120 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਝੁਲਸ ਰੋਗ ਨੂੰ ਸਹਿਣਯੋਗ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਪਕਾਉਣ ਦੀ ਯੋਗਤਾ ਵਧੀਆਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 15.7 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
Posted by Ranveer Singh
Punjab
13-05-2019 08:54 PM
Maharashtra
05-14-2019 12:02 PM
देसी कपास के लिए रेतली दोमट से चिकनी मिट्टी की आवश्यकता होती है और अमेरिकन कपास की किस्मों के लिए दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है इसे हर तरह की मिट्टी, जिसकी पी एच दर 6-8 होती है, में उगाया जा सकता है इस फसल की खेती के लिए गहरी, नर्म, अच्छे निकास वाली और उपजाऊ मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है कपास की बिजाई के लिए रेत.... (Read More)
देसी कपास के लिए रेतली दोमट से चिकनी मिट्टी की आवश्यकता होती है और अमेरिकन कपास की किस्मों के लिए दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है इसे हर तरह की मिट्टी, जिसकी पी एच दर 6-8 होती है, में उगाया जा सकता है इस फसल की खेती के लिए गहरी, नर्म, अच्छे निकास वाली और उपजाऊ मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है कपास की बिजाई के लिए रेतली, खारी या जल जमाव वाली मिट्टी ठीक नहीं होती मिट्टी की गहराई 20-25 सैं.मी. से कम नहीं होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में:-RS 2013,RS 810,RST 9,RS 875,Ganganagar Ageti, की बिजाई कर सकते है फसल की अच्छी पैदावार और अच्छे अंकुरण के लिए ज़मीन को अच्छी तरह तैयार करना जरूरी होता है रबी की फसल को काटने के बाद तुरंत खेत को पानी लगाना चाहिए इसके बाद खेत की हल से अच्छी तरह जोताई करें और फिर सुहागा फेर दें ज़मीन को तीन वर्षों में एक बार गहराई तक जोतें, इससे सदाबहार नदीनों की रोकथाम में मदद मिलती है और इससे मिट्टी में पैदा होने वाले कीड़ों और बीमारियों को भी रोका जा सकता है बिजाई के लिए अप्रैल से मध्य मई का समय उपयुक्त होता है अमेरिकन कपास के लिए कतार से कतार का फासला 60 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 45 सैं.मी. रखें देसी कपास की किस्म के लिए कतार से कतार का फासला 45 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासल 30 सैं.मी. रखें बीजों के अंकुरन ना होने और नए पौधों के नष्ट होने के कारण कुछ फासले पड़ जाते हैं इन्हें भरने के लिए 2-3 पानी में भिगोये हुए बीजों या अंकुरन के बाद एक सेहतमंद नए पौधे को बोयें बिजाई के दो सप्ताह बाद कमज़ोर, बीमार, प्रभावित नए पौधों को निकालकर सेहतमंद नए पौधे की रोपाई करें बीजों को बोने के लिए 4-5 सैं.मी. की गहराई होनी चाहिए देसी कपास की बिजाई के लिए सीड ड्रिल का प्रयोग करें जब कि हाइब्रिड और बी टी कपास के लिए डिबलिंग ढंग का प्रयोग करें आयताकार रोपाई के मुकाबले वर्गाकार रोपाई ज्यादा लाभदायक होती है बीजों के अंकुरन ना होने और नए पौधों के नष्ट होने के कारण कुछ फासले पड़ जाते हैं इन्हें भरने के लिए 2-3 पानी में भिगोये हुए बीजों या अंकुरन के बाद एक सेहतमंद नए पौधे को बोयें बिजाई के दो सप्ताह बाद कमज़ोर, बीमार, प्रभावित नए पौधों को निकालकर सेहतमंद नए पौधे की रोपाई करें हाइब्रिड और बी टी कपास के लिए 1 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें, जब कि देसी किस्मों के लिए 3-5 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें पौधों में ज्यादा फासला होने के कारण फसल पर नदीनों का गंभीर हमला होता है अच्छी पैदावार के लिए फसल की बिजाई के बाद 50-60 दिनों तक फसल का नदीन रहित होना जरूरी है, नहीं तो फसल की पैदावार में 60-80 प्रतिशत कमी आ सकती है नदीनों की असरदार रोकथाम के लिए हाथों से, मशीनी और रासायनिक ढंगों के सुमेल का उपयोग होना जरूरी है बिजाई के 5-6 सप्ताह बाद या पहली सिंचाई करने से पहले हाथों से गोडाई करें बाकी गोडाई प्रत्येक सिंचाई के बाद करनी चाहिए कपास के खेतों के आस पास गाजर बूटी पैदा ना होने दें, क्योंकि इससे मिली बग के हमले का खतरा ज्यादा रहता है बिजाई के बाद नदीनों के पैदा होने से पहले ही पैंडीमैथालीन 25-33 मि.ली. प्रति 10 लीटर पानी की स्प्रे करें बिजाई के 6-8 सप्ताह बाद जब पौधों का कद 40-45 सैं.मी. हो तो पेराकुएट (ग्रामोक्सोन) 24 प्रतिशत डब्लयू एस सी 500 मि.ली. प्रति एकड़ या ग्लाइफोसेट 1 लीटर को 100 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीन नाशक 2, 4-डी से कपास की फसल काफी संवेदनशील होती है बेशक इस नदीननाश्क की स्प्रे नज़दीक के खेत में की जाए, तो भी इसके कण उड़ कर कपास की फसल को बहुत ज्यादा नुकसान पहंचा सकते हैं नदीन नाशक की स्प्रे सुबह या शाम के समय में ही करनी चाहिए खादें और सिंचाई के साधनों के सही उपयोग और अच्छी तरह से की जोताई से कीड़ों को पैदा होने से पहले ही रोका जा सकता है कीड़ों के कुदरती दुश्मनों की भी रक्षा की जा सकती है पौधे के उचित विकास और ज्यादा टिंडे वाली टहनियों की प्रफुल्लता के लिए, मुख्य टहनी के बढ़ रहे हिस्से को लगभग 5 फुट की ऊंचाई से काट दें देसी कपास की किस्मों क लिए नाइट्रोजन 20 किलो (यूरिया 44 किलो) और फासफोरस 10 किलो (एस एस पी 63 किलो) प्रति एकड़ में डालें हाइब्रिड कपास की किस्मों के लिए खादों की दोहरी मात्रा नाइट्रोजन 40 किलो और फासफोरस 20 किलो प्रति एकड़ में डालें मिट्टी की जांच के आधार पर पोटाश डालें फासफोरस की पूरी मात्रा और पोटाश यदि जरूरत हो तो और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई से पहले आखिरी जोताई के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा फूल निकलने के समय डालें यदि मिट्टी में जिंक की कमी हो तो जिंक सल्फेट 10 किलो मिट्टी में बीज बोने से पहले डालें कपास की फसल को बारिश की तीव्रता के अनुसार चार से छः सिंचाई की जरूरत होती है पहली सिंचाई बिजाई के चार से छः सप्ताह बाद करें बाकी सिंचाइयां दो या तीन सप्ताह के फासले पर करें छोटे पौधों में पानी खड़ा ना होने दें फूल और टिंडे गिरने से बचाने के लिए, फूल निकलने और फूल लगने के समय फसल को पानी की कमी नहीं रहने देनी चाहिए जब टिंडे 33 प्रतिशत खिल जायें उस समय आखिरी सिंचाई करें और इसके बाद फसल को सिंचाई के द्वारा पानी ना दें जब भी फसल की सिंचाई के लिए खारे पानी का उपयोग किया जाये, तो सिंचाई करने से पहले पानी की जांच प्रमाणित लैबोरेटरी से करवाएं और उनकी सलाह के अनुसार ही पानी में जिप्सम या पाइराइट का उपयोग करें सूखे वाली स्थितियों में खालियां बनाकर और एक क्यारी छोड़कर सिंचाई करें सूक्ष्म सिंचाई सिस्टम अपनाएं (जहां भी संभव हो), इससे सिंचाई वाला पानी बचाने में सहायता होती है
Posted by Palwinder Singh
Punjab
13-05-2019 08:49 PM
Punjab
05-14-2019 12:28 PM
ਇਸ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਦੀਆਂ ਵਿਆਪਕ ਕਿਸਮਾਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਵਧੀਆ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਪਹਾੜੀ ਮਿੱਟੀ ਪਪੀਤੇ ਦੀ ਖੇਤੀ ਦੇ ਲਈ ਅਨੁਕੂਲ ਹੈ ਰੇਤਲੀ ਅਤੇ ਭਾਰੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ ਖੇਤੀ ਨਾ ਕਰੋ ਪਪੀਤੇ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਦਾ pH 6.5-7.0 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਕਿਸਮਾਂ ਅਤੇ ਝਾੜ :- Red Lady,Punjab Sweet,Pusa Delicious,Pusa Dwarf ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਪਪੀਤੇ ਦੀ ਖੇਤੀ ਦੇ ਲਈ, ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਤਿਆਰ ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਲੋੜ .... (Read More)
ਇਸ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਦੀਆਂ ਵਿਆਪਕ ਕਿਸਮਾਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਵਧੀਆ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਪਹਾੜੀ ਮਿੱਟੀ ਪਪੀਤੇ ਦੀ ਖੇਤੀ ਦੇ ਲਈ ਅਨੁਕੂਲ ਹੈ ਰੇਤਲੀ ਅਤੇ ਭਾਰੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ ਖੇਤੀ ਨਾ ਕਰੋ ਪਪੀਤੇ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਦਾ pH 6.5-7.0 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਕਿਸਮਾਂ ਅਤੇ ਝਾੜ :- Red Lady,Punjab Sweet,Pusa Delicious,Pusa Dwarf ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਪਪੀਤੇ ਦੀ ਖੇਤੀ ਦੇ ਲਈ, ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਤਿਆਰ ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜ਼ਮੀਨ ਨੂੰ ਸਮਤਲ ਕਰਨਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਆਖਰੀ ਵਾਰ ਵਾਹੀ ਸਮੇਂ, ਗਲੀ-ਸੜੀ ਰੂੜ੍ਹੀ ਦੀ ਖਾਦ ਪਾਓ 150-200 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਵਰਤੋ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ, ਮਿੱਟੀ ਤੋਂ ਪੈਦਾ ਹੋਣ ਵਾਲੀਆਂ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਤੋਂ ਬਚਾਅ ਲਈ ਕਪਤਾਨ 3 ਗ੍ਰਾਮ ਨਾਲ ਪ੍ਰਤੀ ਕਿਲੋ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਸੋਧੋ ਜੁਲਾਈ ਦੇ ਦੂਜੇ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਸਤੰਬਰ ਦੇ ਤੀਜੇ ਹਫਤੇ ਤੱਕ ਬੀਜਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਸਤੰਬਰ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਅੱਧ ਅਕਤੂਬਰ ਤੱਕ ਰੋਪਣ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪੌਦਿਆਂ ਵਿੱਚਲਾ ਫਾਸਲਾ 1.5x1.5 ਮੀਟਰ ਰੱਖੋ ਬੀਜ ਨੂੰ 1 ਸੈ.ਮੀ. ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ ਤੇ ਬੀਜੋ ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਪ੍ਰਜਣਨ ਵਿਧੀ ਦੁਆਰਾ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਨਵੇਂ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ 25x10 ਸੈ.ਮੀ. ਦੇ ਪੋਲੀਥੀਨ ਬੈਗਾਂ ਵਿੱਚ ਤਿਆਰ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪੋਲੀਥੀਨ ਬੈਗ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਦੇ ਉਚਿੱਤ ਨਿਕਾਸ ਲਈ ਹੇਠਲੇ ਹਿੱਸੇ ਵਿੱਚ 1 ਮਿ.ਮੀ. ਵਿਆਸ ਵਿੱਚ 8-10 ਸੁਰਾਖ ਕਰੋ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ, ਮਿੱਟੀ ਅਤੇ ਰੇਤ ਦੇ ਸਮਾਨ ਅਨੁਪਾਤ ਨਾਲ ਪੋਲੀਥੀਨ ਬੈਗਾਂ ਨੂੰ ਭਰੋ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ਤੇ ਬੈਗਾਂ ਵਿੱਚ ਜੁਲਾਈ ਦੇ ਦੂਜੇ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਸਤੰਬਰ ਦੇ ਤੀਜੇ ਹਫ਼ਤੇ ਤੱਕ ਬੀਜ ਬੀਜੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਕਪਤਾਨ 3 ਗ੍ਰਾਮ ਨਾਲ ਪ੍ਰਤੀ ਕਿਲੋ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਸੋਧੋ ਨਵੇਂ ਨਿਕਲੇ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਉਖੇੜਾ ਰੋਗ ਤੋਂ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਕਪਤਾਨ 0.2% ਦਾ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰੋ ਨਵੇਂ ਪੌਦਿਆਂ ਦਾ ਰੋਪਣ ਸਤੰਬਰ-ਅਕਤੂਬਰ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਰੋਪਣ ਸਮੇਂ ਕੋਈ ਵੀ ਖਾਦ ਨਾ ਪਾਓ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਫਰਵਰੀ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ N:P:K(19:19:19) @1 ਕਿਲੋ ਦੋ ਵਾਰ ਪਾਓ ਨਦੀਨਾਂ ਨੂੰ ਹੱਥ ਨਾਲ ਗੋਡਾਈ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਰਸਾਇਣਾ ਦੁਆਰਾ ਰੋਕਿਆਂ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਗਲਾਈਫੋਸੇਟ 1.6 ਲੀਟਰ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਗਲਾਈਫੋਸੇਟ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਸਿਰਫ ਨਦੀਨਾਂ ਤੇ ਹੀ ਕਰੋ , ਮੁੱਖ ਫਸਲ ਤੇ ਨਾ ਕਰੋ ਮੌਸਮ, ਫਸਲ ਦੇ ਵਾਧੇ ਅਤੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਕਿਸਮ ਦੇ ਆਧਾਰ ਤੇ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ਤੇ ਫਲ਼ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਆਕਾਰ ਲੈਣ ਅਤੇ ਹਰੇ ਤੋਂ ਹਲਕਾ ਪੀਲੇ ਰੰਗ ਦਾ ਹੋਣ ਤੇ ਤੁੜਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਪਹਿਲੀ ਤੁੜਾਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 14-15 ਮਹੀਨੇ ਬਾਅਦ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਹਰ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ 4-5 ਵਾਰ ਤੁੜਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ
Posted by Harpreet Singh
Punjab
13-05-2019 08:48 PM
Maharashtra
05-14-2019 01:20 PM
ਹਰਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਜੇਕਰ ਚਾਰੇ ਦੇ ਲਈ ਮੱਕੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰਨੀ ਹੈ ਤਾ ਤੁਸੀ J1006 ਜਾ african tall ਕਿਸਮ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਪਕਵੀ ਮੱਕੀ ਬੀਜਣੀ ਹੈ ਤਾ ਤੁਸੀ PMH1, PMH2 , ਕਿਸਮ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Bhupinder Singh Gill
Punjab
13-05-2019 08:44 PM
Maharashtra
05-14-2019 11:24 AM
Bhupinder ji isde uper tuc fame@20ml ja coragen@60ml nu 150 litre pani vich mila keprati acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by sandeep chahal
Punjab
13-05-2019 08:37 PM
Punjab
05-14-2019 05:22 AM
Bohat vadia variety hai, 1121 basmati di improved variety hai.
Posted by lali Bachhal
Haryana
13-05-2019 08:36 PM
Punjab
05-14-2019 01:21 PM
llai ji tuc kalar vali jameen vich gypsum pao isdi matra 1 quintal prati acre de hisab nal paye jande han is to ilava tuc kisam jive 27p31, sava 127,sava 134,sava 200 , di bijai kar sakde ho.dhawad
Posted by Dheerendra Raj
Uttar Pradesh
13-05-2019 08:32 PM
Punjab
05-14-2019 01:29 PM
धीरेन्द्र जी कृपया बताये के पानी में क्या दिक्कत है क्युकी अगर पानी खारा है तो इसमें कोई भी फसल नहीं होएगी धन्यवाद
Posted by anup dhuria
Haryana
13-05-2019 08:21 PM
Rajasthan
05-14-2019 12:41 PM
Anup dhuria जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप मुझे 9711858258 इस नंबर पर संपर्क करें
Posted by Navdeep puri
Punjab
13-05-2019 08:04 PM

..?

Punjab
05-14-2019 01:15 PM
Navdeep ji kirpa karke audio dubara bhejo tuhade dwara bheji gayi audio upload nahi hoyi hai dhanwad
Posted by ਪਿ੍ੰਸ ਵੜੈਚ
Punjab
13-05-2019 08:00 PM
Punjab
05-14-2019 12:25 PM
Pusa Basmati 1121: ਇਸਦਾ ਪੌਦਾ ਲੰਬਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 137 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਪੱਕਣ ਦੀ ਗੁਣਵੱਤਾ ਵਧੀਆਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 13.7 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸਦੀ ਪਨੀਰੀ 15 ਜੂਨ ਤੋਂ ਲਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Vijay nagbhide
Madhya Pradesh
13-05-2019 07:47 PM
Madhya Pradesh
05-14-2019 11:07 AM
मोती पालन के फायदे- मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो आपको अन्य लोगो से अलग करता है .वही लोग इस व्यवसाय को कर सकते है, जिनकी सोच कुछ अलग करने की हो (1) एक एकड़ में पारंपरिक खेती से 50000/- का मुनाफा हो सकता है और मोती पालन से 8-10 लाख (2) एक तालाब में बहुउदेशीय योजनाओ का लाभ लेके 8-10 प्रकार के व्यापर करके आय मे बृद्धि (3) जमीन में जल .... (Read More)
मोती पालन के फायदे- मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो आपको अन्य लोगो से अलग करता है .वही लोग इस व्यवसाय को कर सकते है, जिनकी सोच कुछ अलग करने की हो (1) एक एकड़ में पारंपरिक खेती से 50000/- का मुनाफा हो सकता है और मोती पालन से 8-10 लाख (2) एक तालाब में बहुउदेशीय योजनाओ का लाभ लेके 8-10 प्रकार के व्यापर करके आय मे बृद्धि (3) जमीन में जल स्तर को बढ़ाकर सरकार की मदद (4) बचे हुए सामान से हस्तकला उद्योग को बढ़ावा देना (5) यदि महिला वर्ग इस व्यवसाय में आते है तो ज्यादा फायदे है क्योकि मोती के आभूषण के साथ साथ मदर ऑफ़ पर्ल (Shell jewellery) का भी फायदा ले सकते है (6) आसपास के लोगो को रोजगार अधिक जानकारी संपर्क करे अमित बमोरिया 9407461361 9770085381 बमोरिया मोती सम्बर्धन केंद्र मध्य प्रदेश https://m.bhaskar.com/news/MP-HOSH-quitting-govt-job-engineer-is-earning-money-from-pearl-cultivation-news-hindi-5533297-PHO.html
Posted by Gikki Dhillon
Punjab
13-05-2019 07:42 PM
Punjab
05-14-2019 12:58 PM
Gikki Dhillon ਜੀ ਝੋਨਾ ਲਾਉਣ ਵਾਲੀ ਮਸ਼ੀਨ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ ਤੁਸੀ Rahul Jain 9814121860 (MS Automart, Kubota) ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by dinesh
Madhya Pradesh
13-05-2019 07:39 PM
Punjab
05-14-2019 05:54 PM
दिनेश जी अकरकरा ओषधीय फसल के बीज बेचने के लिए आप C.B Yadav 6268536795 से संपर्क करें, धन्यवाद
Posted by sandeep singh
Punjab
13-05-2019 07:36 PM
Punjab
05-14-2019 11:57 AM
Mausam vibhag de anusar aj halki badlwai rahegi.dhanwad
Posted by sukhwinder singh
Punjab
13-05-2019 07:33 PM
Punjab
05-14-2019 05:47 AM
Tusi us nu Liquid Utertone 450ml te Liquid Calcimust gell 300ml deo ji es nall pe jawe
Posted by Nagendr singh
Uttar Pradesh
13-05-2019 07:27 PM
Punjab
05-14-2019 02:29 PM
नागेंद्र जी यह फंगस के कारण हो रहा है इसके लिए आप Carbendazim @3 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Harwinder singh
Punjab
13-05-2019 07:25 PM
Punjab
05-14-2019 04:04 PM
tuci rojana 1.5-2 kg feed pashu nu de skde ho, isda vdia result hai..
Posted by Sanjeev Thakur
Himachal Pradesh
13-05-2019 07:19 PM
Punjab
05-14-2019 12:13 PM
संजीव ठाकुर जी आप m-45 को ड्रिप के साथ भी दे सकते है इसके इलावा आप इसकी स्प्रे भी कर सकते है धन्यवाद
Posted by Gurpreet Singh
Punjab
13-05-2019 07:01 PM
Punjab
05-14-2019 12:18 PM
jhone di paniri vich nadeen jive swak ho jande han isdi roktham de layi tuc 1200ml butachlor 50 EC nu 60 killo ret vich mila ke bijai to 5-7 dina bad chitta deo.bijai to 15 din bad 100ml nomni gold nu 150 liter pani vich mila ke prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by sandeep
Punjab
13-05-2019 06:58 PM
Punjab
05-14-2019 10:40 AM
ਨਰਮੇ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਅੱਧ ਮਈ ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਨਰਮੇ ਦੀਆਂ BUNTY, SHRIRAM 6588, 6488, Ankur 3028, RCH 134(Rasi), RCH 650(Rasi), Rasi 653, Rasi 776. Rasi 773 , US 51 , US 71, BAYER ਦਾ 7172, 7272 ਕਿਸਮਾਂ ਲਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by DALJINDER SINGH
Punjab
13-05-2019 06:54 PM
Punjab
05-14-2019 02:39 PM
ਬੀਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਤੇ ਸੋਧ: ਟੱਬ ਜਾਂ ਬਾਲਟੀ ਵਿੱਚ ਲੋੜ ਅਨੁਸਾਰ ਬੀਜ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਪਾਉ ਅਤੇ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹਿਲਾਉ ਹੁਣ ਜਿਹੜਾ ਹਲਕਾ ਬੀਜ ਪਾਣੀ ਉੱਤੇ ਤਰ ਆਵੇ ਉਸ ਨੂੰ ਬਾਹਰ ਸੁੱਟ ਦਿਉ ਭਾਰੇ ਬੀਜ ਥੱਲੇ ਬੈਠ ਜਾਣਗੇ ਅੱਠ ਕਿਲੋ ਭਾਰੇ ਬੀਜ ਨਾਲ ਬੀਜੀ ਪਨੀਰੀ ਇੱਕ ਏਕੜ ਲਈ ਕਾਫ਼ੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਪਨੀਰੀ ਦੇ ਬੂਟੇ ਨਰੋਏ ਅਤੇ ਇੱਕੋ ਜਿਹੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਚੁਣੇ ਹੋਏ ਬੀਜ ਨੂੰ 20 ਗ੍ਰਾਮ ਬਾਵਿਸਟ.... (Read More)
ਬੀਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਤੇ ਸੋਧ: ਟੱਬ ਜਾਂ ਬਾਲਟੀ ਵਿੱਚ ਲੋੜ ਅਨੁਸਾਰ ਬੀਜ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਪਾਉ ਅਤੇ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹਿਲਾਉ ਹੁਣ ਜਿਹੜਾ ਹਲਕਾ ਬੀਜ ਪਾਣੀ ਉੱਤੇ ਤਰ ਆਵੇ ਉਸ ਨੂੰ ਬਾਹਰ ਸੁੱਟ ਦਿਉ ਭਾਰੇ ਬੀਜ ਥੱਲੇ ਬੈਠ ਜਾਣਗੇ ਅੱਠ ਕਿਲੋ ਭਾਰੇ ਬੀਜ ਨਾਲ ਬੀਜੀ ਪਨੀਰੀ ਇੱਕ ਏਕੜ ਲਈ ਕਾਫ਼ੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਪਨੀਰੀ ਦੇ ਬੂਟੇ ਨਰੋਏ ਅਤੇ ਇੱਕੋ ਜਿਹੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਚੁਣੇ ਹੋਏ ਬੀਜ ਨੂੰ 20 ਗ੍ਰਾਮ ਬਾਵਿਸਟਨ ਅਤੇ ਇੱਕ ਗ੍ਰਾਮ ਸਟਰੈਪਟੋਸਾਈਕਲੀਨ* ਦੇ 10 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਘੋਲ ਵਿੱਚ, ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 8-10 ਘੰਟੇ ਪਹਿਲਾਂ ਡੁਬੋ ਲਉ ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਤਿਆਰੀ, ਖਾਦ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਅਤੇ ਬੀਜਣ ਦਾ ਢੰਗ : 12-15 ਟਨ ਗਲੀ-ਸੜੀ ਰੂੜੀ ਜਾਂ ਕੰਪੋਸਟ ਇੱਕ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਰਲਾਉ ਹੁਣ ਖੇਤ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਦਿਉ, ਤਾਂ ਕਿ ਨਦੀਨ ਉੱਗ ਪੈਣ ਉੱਗੇ ਹੋਏ ਨਦੀਨਾਂ ਨੂੰ ਮਾਰਨ ਲਈ ਇੱਕ ਹਫ਼ਤੇ ਬਾਅਦ ਖੇਤ ਨੂੰ ਦੋ ਵਾਰ ਵਾਹੋ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਨੀਰੀ ਬੀਜਣ ਸਮੇਂ ਖੇਤ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਭਰੋ ਅਤੇ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਕੱਦੂ ਕਰੋ ਕੱਦੂ ਦੀ ਆਖਰੀ ਵਾਹੀ ਸਮੇਂ 26 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਅਤੇ 60 ਕਿਲੋ ਸੁਪਰਫ਼ਾਸਫ਼ੇਟ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਖਿਲਾਰ ਦਿਉ ਸਿਹਤਮੰਦ ਪਨੀਰੀ ਲਈ 40 ਕਿਲੋ ਜ਼ਿੰਕ ਸਲਫ਼ੇਟ ਹੈਪਟਾਹਾਈਡ੍ਰੇਟ ਜਾਂ 25.5 ਕਿਲੋ ਜਿੰਕ ਸਲਫ਼ੇਟ ਮੋਨੋਹਾਈਡ੍ਰੇਟ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਉ ਫਿਰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ 10 ਅਤੇ 2 ਮੀਟਰ ਆਕਾਰ ਦੇ ਕਿਆਰੇ ਬਣਾਉ, ਜੋ ਕਿ ਲੋੜ ਅਨੁਸਾਰ ਵਧਾਏ-ਘਟਾਏ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ ਸੋਧੇ ਹੋਏ ਭਿੱਜੇ ਬੀਜ ਨੂੰ ਗਿੱਲੀਆਂ ਬੋਰੀਆਂ ਉਪਰ 7-8 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਮੋਟੀ ਤਹਿ ਵਿੱਚ ਖਲਾਰ ਦਿਉ ਅਤੇ ਉਪਰੋਂ ਗਿੱਲੀਆਂ ਬੋਰੀਆਂ ਨਾਲ ਢੱਕ ਦਿਉ ਢੱਕੇ ਹੋਏ ਬੀਜ ਉਪਰ ਸਮੇਂ-ਸਮੇਂ ਸਿਰ ਪਾਣੀ ਛਿੜਕ ਕੇ ਬੀਜ ਨੂੰ ਗਿੱਲਾ ਰੱਖੋ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ 24 ਤੋਂ 36 ਘੰਟੇ ਦੇ ਅੰਦਰ ਬੀਜ ਪੁੰਗਰ ਪਵੇਗਾ ਹਰੇਕ ਕਿਆਰੇ (10 ਅਤੇ 2 ਮੀਟਰ) ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਕਿਲੋ ਸੋਧਿਆ ਤੇ ਪੁੰਗਰਿਆ ਬੀਜ ਛੱਟੇ ਨਾਲ ਬੀਜੋ ਜ਼ਮੀਨ ਨੂੰ ਬਾਰ-ਬਾਰ ਪਾਣੀ ਲਾ ਕੇ ਗਿੱਲੀ ਰੱਖੋ ਪੰਛੀਆਂ ਤੋਂ ਬੀਜ ਨੂੰ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਗਲੀ-ਸੜੀ ਰੂੜੀ ਦੀ ਪਤਲੀ ਤਹਿ ਝੋਨੇ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਬੀਜਣ ਤੋਂ ਇੱਕ ਦਮ ਬਾਅਦ ਖਿਲਾਰ ਦਿਉ ਪਨੀਰੀ ਬੀਜਣ ਤੋਂ 15 ਦਿਨ ਬਾਅਦ 26 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੋਰ ਪਾਉ ਪਨੀਰੀ 24-30 ਦਿਨਾਂ ਤੱਕ ਲਾਉਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ ਜੇਕਰ 45 ਦਿਨ ਜਾਂ ਇਸ ਤੋਂ ਵੱਧ ਉਮਰ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਾਉਣੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ 26 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਚਾਰ ਹਫ਼ਤੇ ਬਾਅਦ ਹੋਰ ਪਾਉ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ 8 ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀਆਂ 8 ਕਿਆਰੀਆਂ (ਸਾਢੇ 6 ਮਰਲੇ) ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਇੱਕ ਏਕੜ ਲਈ ਕਾਫ਼ੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਪਨੀਰੀ ਵਿੱਚ ਕਿਸੇ ਕੀੜੇ ਜਾਂ ਬਿਮਾਰੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਦਿਸੇ ਤਾਂ ਸਿਫ਼ਾਰਸ਼ ਕੀਤੇ ਢੰਗ ਵਰਤੋ ਪਨੀਰੀ ਨੂੰ ਲਗਾਤਾਰ ਪਾਣੀ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ ਜਦ ਪਨੀਰੀ 20-25 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਉੱਚੀ ਜਾਂ 6-7 ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੀ ਹੋ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਸਮਝੋ ਪਨੀਰੀ ਲਾਉਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੈ ਜੇਕਰ ਪਨੀਰੀ ਦੇ ਨਵੇਂ ਪੱਤੇ ਪੀਲੇ ਪੈ ਜਾਣ ਤਾਂ ਫ਼ੈਰਸ ਸਲਫ਼ੇਟ ਦੇ ਤਿੰਨ ਛਿੜਕਾਅ ਹਫ਼ਤੇ-ਹਫ਼ਤੇ ਦੇ ਫ਼ਰਕ ਤੇ ਕਰੋ
Posted by snehangshu Goswami
West Bengal
13-05-2019 06:53 PM
Punjab
05-14-2019 02:43 PM
Snehangshu Goswami जी पश्चिम बंगाल में अंगूर की खेती की जा सकती है
Posted by Inderjeet
Haryana
13-05-2019 06:52 PM
Haryana
05-14-2019 01:14 PM
इसके लिए आप खुद अपने नज़दीकी मार्कीट में ही पता कर सकते हो अगर आपके नज़दीक कही आर्मी का ऑफिस है तो वहा पता कर सकते हो आर्मी वाले भी खरीद लेते है जी