Posted by Rajdeep Sarao
Punjab
16-05-2019 11:53 PM
PR 127: ਇਹ ਇੱਕ ਮੱਧਮ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ 137 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦੀ ਔਸਤਨ ਲੰਬਾਈ 104 ਸੈ.ਮੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਕਲਰਾਠੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਅਤੇ ਮਾੜੇ ਪਾਣੀਆਂ ਵਿੱਚ ਨਾ ਉਗਾਓ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
Posted by Sumit Yadav
Rajasthan
16-05-2019 11:35 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है

Posted by ANEESH SINGH
Uttar Pradesh
16-05-2019 11:21 PM
इसकी खेती के लिए अच्छे निकास वाली, उच्च उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 6-7.5 होनी चाहिए यह चूना और क्लोरीन युक्त मिट्टी को भी सहनेयोग्य है इसकी खेती के लिए नदी के नज़दीक वाली मिट्टी भी उपयुक्त होती है Pant Mahima: यह लंबी और फैलने वाली किस्म है इसके फल हल्के हरे से हल्के भूरे रंग के होते हैं इसक कतारो.... (Read More)
इसकी खेती के लिए अच्छे निकास वाली, उच्च उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 6-7.5 होनी चाहिए यह चूना और क्लोरीन युक्त मिट्टी को भी सहनेयोग्य है इसकी खेती के लिए नदी के नज़दीक वाली मिट्टी भी उपयुक्त होती है Pant Mahima: यह लंबी और फैलने वाली किस्म है इसके फल हल्के हरे से हल्के भूरे रंग के होते हैं इसक कतारों में रखने के साथ साथ पकाने के लिए भी उपयुक्त किस्म है इसके फल का औसतन भाग लगभग 6.5 किलो होता है
Pant Garima: यह लंबी और फैलने वाली किस्म है इसके फल हल्के हरे से हल्के भूरे रंग के होते हैं इसके फल का औसतन भाग लगभग 5 किलो होता है
Singapore or Ceylon Jack: यह जल्दी फल देने वाली किस्म है इसके फल मध्यम आकार के मीठे होते हैं और गुद्दा कुरकुरा होता है इसका मादा प्रजनन अंग पीले रंग का, छोटा और गुठली से चिपका हुआ और तेज सुगंध वाला होता है गर्मियों में, रोपाई के लिए 1x1x1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें और धूप में खुला छोड़ दें इससे हानिकारक बैक्टीरिया मर जायेंगे और फसल मिट्टी से पैदा होने वाले कीटों और बीमारियों से बचेगी उसके बाद गड्ढों को रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 20-30 किलो, सिंगल सुपर फास्फेट 0.5 किलो और फोरेट 10-20 ग्राम से भरें प्रत्येक गड्ढे में 3-4 बीज बोयें कटहल की बिजाई के लिए जून - जुलाई का महीना उपयुक्त होता है
बिजाई के लिए, आयताकार या वर्गाकार बिजाई ढंग प्रयोग किया जाता है कम उपजाऊ मिट्टी में षट्कोणीय प्रणाली का प्रयोग करें मिट्टी के आधार पर 8x8 मीटर या 10x10 मीटर या 12x12 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है बिजाई के लिए ताजे बीजों या एक महीने से कम स्टोर किए बीजों का प्रयोग किया जाता है बीजों को पहले पॉलीथीन बैग में बोया जाता है और फिर मुख्य खेत में रोपण किया जाता है बिजाई से पहले बीजों को NAA 25 पी पी एम के घोल में 24 घंटे के लिए भिगो कर रखें यह बीजों के जल्दी अंकुरण के साथ अच्छी वृद्धि में भी मदद करेगा कटहल खादों में अच्छे परिणाम देता है 1 से 3 वर्ष के पौधों मे नाइट्रोजन 200 ग्राम और फासफोरस 60 ग्राम प्रति वर्ष डालें
चार से छ: वर्ष के पौधों के लिए नाइट्रोजन 400 ग्राम, फासफोरस 240 ग्राम और पोटाश 120 ग्राम प्रति वर्ष डालें नियमित कटाई और छंटाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन फसल को कीटों और बीमारियों के हमले से बचाने के लिए कमज़ोर, बीमारी वाली और मरी हुई शाखाओं को बारिश के मौसम के अंत तक निकाल दें नदीनों की तीव्रता के आधार पर गोडाई करें नदीनों के हमले से फसल को बचाने के लिए मल्च का प्रयोग करें यह फसल की उचित वृद्धि में भी सहायता करेगा शुरूआती वर्षों के दौरान, जब फसल फल देने की अवस्था में पहुंच जाती है (वृक्ष 6-8 वर्ष में फल देना शुरू करता है) अंतरफसली जैसे मिर्च, बैंगन, और दालें जैसे लोबिया, कुलथी और काले चने को अंतरफसली के रूप में लिया जा सकता है बारिश के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती बारिश की नियमितता और तीव्रता के आधार पर सिंचाई करें कटहल की फसल को शुरूआती 2-3 वर्षों में सिंचाई की आवश्यकता होती है उसके बाद सिंचाई की कोई आवश्यकता नहीं होती भारी बारिश में पानी खड़ा ना होने दें क्योंकि यह फसल जल जमाव की स्थिति को सहनेयोग्य नहीं है

Posted by कमर दीन
Rajasthan
16-05-2019 11:10 PM
कमर दीन जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछे कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके

Posted by कमर दीन
Rajasthan
16-05-2019 11:08 PM
कमर दीन जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by harminder singh
Punjab
16-05-2019 10:59 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਇਕ ਮਰਲੇ ਵਿੱਚ 3 ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਦਾ ਛਿੱਟਾ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ ਅਤੇ 10 ਮਰਲੇ ਜਗਾ 30 ਕਿਲੋ ਪਨੀਰੀ ਲਈ ਬਹੁਤ ਹੈ ਜੀ
Posted by विजय पाटीदार
Madhya Pradesh
16-05-2019 10:58 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है

Posted by Rohi Singh Sandhu
Punjab
16-05-2019 10:30 PM
PR 126 ਦਾ ਬੀਜ ਝੋਨੇ ਦੇ ਪਕਣ ਸਮੇਂ ਸਿਹਤਮੰਦ ਅਤੇ ਰੋਗ ਰਹਿਤ ਬੂਟਿਆਂ ਤੋਂ ਝਾੜ ਕੇ ਰਖਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜੀ

Posted by Thaneshwar saw
Jharkhand
16-05-2019 10:06 PM
Thaneshwar saw ji Moti ki kheti ke bare me puri jankari ke liye aap mere se 9711858258 samparak kare. Thank you.
Posted by sureshkumarsaini
Rajasthan
16-05-2019 09:49 PM
यह आमतौर पर कलमों और टहनियों के द्वारा लगाया जाता है कत्था बेर आमतौर पर जड़ों के लिए प्रयोग किया जाता है बेर के बीजों को 17-18 प्रतिशत नमक के घोल में 24 घंटों के लिए भिगो कर रखें फिर अप्रैल के महीने नर्सरी में बिजाई करें पंक्ति से पंक्ति का फासला 15 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 30 सैं.मी होना चाहिए 3 से 4 सप्ताह बाद .... (Read More)
यह आमतौर पर कलमों और टहनियों के द्वारा लगाया जाता है कत्था बेर आमतौर पर जड़ों के लिए प्रयोग किया जाता है बेर के बीजों को 17-18 प्रतिशत नमक के घोल में 24 घंटों के लिए भिगो कर रखें फिर अप्रैल के महीने नर्सरी में बिजाई करें पंक्ति से पंक्ति का फासला 15 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 30 सैं.मी होना चाहिए 3 से 4 सप्ताह बाद बीज अंकुरन होना शुरू हो जाता है और पौधा अगस्त महीने में कलम लगाने के लिए तैयार हो जाता है टी के आकार में काटकर जून-सितंबर महीने में इसे लगाना चाहिए इसका खेत में रोपण फरवरी-मार्च या अगस्त-सितंबर महीने में किया जाता है खेत में रोपण करने से पहले पौधों के पत्ते काट लें पौधे लगाने के लिए 7.5x7.5 मीटर का फासला रखें पौधे लगाने से पहले 60x60x60 सैं.मी. के गड्ढे खोदें और 15 दिनों के लिए धूप में खुले छोड़ दें इसके बाद इन गड्ढों को मिट्टी और गोबर से भर दें इसके बाद पौधों को इन गड्ढों में लगा दें
Posted by Ajay kamboj
Punjab
16-05-2019 09:43 PM
ਹਲਵਾ ਕੱਦੂ ਦੀ ਫਸਲ ਦੇ ਵਧੀਆ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਦੋਮਟ ਮਿੱਟੀ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਜੈਵਿਕ ਤੱਤਾਂ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੋਵੇ, ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਹਲਵਾ ਕੱਦੂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਦਾ pH 6-7 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ PAU Magaz Kaddoo-1: ਇਹ ਕਿਸਮ 2018 ਵਿੱਚ ਜਾਰੀ ਹੋਈ ਹੈ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਖਾਣ ਵਾਲੇ ਬੀਜ(ਮਗਜ਼ ਅਤੇ ਸਨੈਕਸ) ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਬੀਜ ਛਿਲਕੇ ਰਹਿਤ, ਵੇਲਾਂ ਛੋਟੀਆਂ ਅਤੇ ਪੱਤੇ ਗੂ.... (Read More)
ਹਲਵਾ ਕੱਦੂ ਦੀ ਫਸਲ ਦੇ ਵਧੀਆ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਦੋਮਟ ਮਿੱਟੀ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਜੈਵਿਕ ਤੱਤਾਂ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੋਵੇ, ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਹਲਵਾ ਕੱਦੂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਦਾ pH 6-7 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ PAU Magaz Kaddoo-1: ਇਹ ਕਿਸਮ 2018 ਵਿੱਚ ਜਾਰੀ ਹੋਈ ਹੈ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਖਾਣ ਵਾਲੇ ਬੀਜ(ਮਗਜ਼ ਅਤੇ ਸਨੈਕਸ) ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਬੀਜ ਛਿਲਕੇ ਰਹਿਤ, ਵੇਲਾਂ ਛੋਟੀਆਂ ਅਤੇ ਪੱਤੇ ਗੂੜ੍ਹੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਫਲ ਦਰਮਿਆਨੇ, ਗੋਲ ਅਤੇ ਪੱਕਣ ਸਮੇਂ ਪੀਲੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਬੀਜ ਵਿੱਚ 32% ਉਮੇਗਾ-6, 3% ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਅਤੇ 27% ਤੇਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਬੀਜ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 2.9 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
PPH-1: ਇਹ ਕਿਸਮ 2016 ਵਿੱਚ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਜਲਦੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸ ਦੀਆਂ ਵੇਲਾਂ ਛੋਟੇ ਕੱਦ ਦੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਿਚਕਾਰਲਾ ਹਿੱਸਾ ਛੋਟਾ ਅਤੇ ਪੱਤੇ ਗੂੜੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਫਲ ਛੋਟੇ ਅਤੇ ਗੋਲ ਆਕਾਰ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਦੇ ਫਲ ਜਦ ਕੱਚੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਚਿਤਕਬਰੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜੋ ਪੱਕਣ ਸਮੇਂ ਚਿਤਕਬਰੇ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਫਲ ਦਾ ਗੁੱਦਾ ਸੁਨਹਿਰੀ ਪੀਲੇ ਰੰਗ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 206 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
PPH-2: ਇਹ ਕਿਸਮ 2016 ਵਿੱਚ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਬਹੁਤ ਜਲਦੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸ ਦੀਆਂ ਬੇਲਾਂ ਛੋਟੇ ਕੱਦ ਦੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਿਚਕਾਰਲਾ ਹਿੱਸਾ ਛੋਟਾ ਅਤੇ ਪੱਤੇ ਗੂੜੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਫਲ ਛੋਟੇ ਅਤੇ ਗੋਲ ਆਕਾਰ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਫਲ ਜਦ ਕੱਚੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਚਿਤਕਬਰੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜੋ ਪੱਕਣ ਸਮੇਂ ਨਰਮ ਅਤੇ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਫਲ ਦਾ ਗੁੱਦਾ ਸੁਨਹਿਰੀ ਪੀਲੇ ਰੰਗ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 222 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
Punjab Samrat (Released in 2008): ਇਸ ਦੀਆਂ ਬੇਲਾਂ ਦਰਮਿਆਨੀ ਲੰਬੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਤਣਾ ਤਿੱਖਾ ਅਤੇ ਪੱਤਿਆਂ ਦਾ ਰੰਗ ਗੂੜਾ ਹਰਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਫਲ ਛੋਟੇ ਅਤੇ ਗੋਲ ਆਕਾਰ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਦੇ ਫਲ ਜਦ ਕੱਚੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਅਤੇ ਪੱਕਣ ਸਮੇਂ ਹਲਕੇ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਫਲ ਦਾ ਗੁੱਦਾ ਸੁਨਹਿਰੀ ਪੀਲੇ ਰੰਗ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 165 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ.
ਹਲਵਾ ਕੱਦੂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਤਿਆਰ ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਮਿੱਟੀ ਨੂੰ ਭੁਰਭੁਰਾ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਟ੍ਰੈਕਟਰ ਨਾਲ ਖੇਤ ਦੀ ਵਾਹੀ ਕਰੋ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਫਰਵਰੀ-ਮਾਰਚ ਅਤੇ ਜੂਨ-ਜੁਲਾਈ ਦਾ ਸਮਾਂ ਉਚਿੱਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇੱਕ ਜਗ੍ਹਾ ਤੇ ਦੋ ਬੀਜ ਬੀਜੋ ਅਤੇ 60 ਸੈ.ਮੀ. ਦਾ ਫਾਸਲਾ ਰੱਖੋ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਕਿਸਮਾਂ ਲਈ, ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਬੈੱਡਾਂ ਦੇ ਦੋਨਾਂ ਪਾਸੇ 45 ਸੈ.ਮੀ. ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਬੀਜੋ
ਬੀਜ ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ:-
ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ 1 ਇੰਚ ਡੂੰਘਾ ਬੀਜੋ ਸਿੱਧਾ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਇੱਕ ਏਕੜ ਖੇਤ ਵਿੱਚ 1 ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਕਾਫ਼ੀ ਹਨ ਬੈੱਡਾਂ ਨੂੰ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 8-10 ਟਨ ਪਾਓ ਖਾਦ ਦੇ ਤੌਰ ਤੇ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ 40 ਕਿਲੋ(ਯੂਰੀਆ 90 ਕਿਲੋ), ਫਾਸਫੋਰਸ 20 ਕਿਲੋ(ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ 125 ਕਿਲੋ) ਅਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ 20 ਕਿਲੋ(ਮਿਊਰੇਟ ਆਫ ਪੋਟਾਸ਼ 35 ਕਿਲੋ) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਪਾਓ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਨੂੰ ਦੋ ਬਰਾਬਰ ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਪਾਓ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਅੱਧੀ ਮਾਤਰਾ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲੇ ਅਤੇ ਬਾਕੀ ਬਚੀ ਹੋਈ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਖਾਦ ਦਾ 3-4 ਹਫਤਿਆਂ ਵਿੱਚ ਖੜੀ ਫਸਲ ਤੇ ਛਿੱਟਾ ਦਿਓ. ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ, ਲਗਾਤਾਰ ਗੋਡੀ ਕਰਨ ਅਤੇ ਮਿੱਟੀ ਚੜਾਉਣ ਦੀ ਕਿਰਿਆ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਗੋਡੀ ਕਹੀ ਜਾਂ ਹੱਥਾਂ ਨਾਲ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਪਹਿਲੀ ਗੋਡੀ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 2-3 ਹਫਤਿਆਂ ਬਾਅਦ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਖੇਤ ਨੂੰ ਨਦੀਨ-ਮੁਕਤ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਕੁੱਲ 3-4 ਗੋਡੀਆਂ ਕਰੋ ਇਸ ਫਸਲ ਲਈ ਸਹੀ ਸਮੇਂ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਉਚਿੱਤ ਸਿੰਚਾਈ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਬੀਜ ਬੀਜਣ ਤੋਂ ਤੁਰੰਤ ਬਾਅਦ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਮੌਸਮ ਦੇ ਆਧਾਰ ਤੇ, 6-7 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਲਗਾਤਾਰ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਕੁੱਲ 8-10 ਸਿੰਚਾਈਆਂ ਕਰੋ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ਤੇ ਫਲ ਦੇ ਛਿੱਲਕੇ ਦਾ ਹਲਕਾ ਭੂਰਾ ਰੰਗ ਅਤੇ ਅੰਦਰੂਨੀ ਗੁੱਦਾ ਸੁਨਹਿਰੀ ਪੀਲੇ ਰੰਗ ਦਾ ਹੋਣ ਤੇ ਤੁੜਾਈ ਕਰੋ ਲੰਬੀ ਦੂਰੀ ਵਾਲੇ ਸਥਾਨ ਤੇ ਲਿਜਾਣ ਲਈ ਪੱਕੇ ਫਲਾਂ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸਟੋਰ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਵੇਚਣ ਦੇ ਉਦੇਸ਼ ਲਈ ਇਸਦੇ ਕੱਚੇ ਫਲਾਂ ਦੀ ਤੁੜਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ
Posted by sureshkumarsaini
Rajasthan
16-05-2019 09:43 PM
सुरेश कुमार जी इसके बारे में विस्तार से जानकारी के लिए आप रवि चौधरी 8003892293, 9530002191 से संपर्क करें
Posted by Akmal husain
Uttar Pradesh
16-05-2019 09:28 PM
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है बारानी फसल होने के कारण, यह जलोढ़ मिट्टी, दोमट मिट्टी और काली चिकनी मिट्टी में सबसे अच्छी बढ़ती है सिगार और चिरूट तंबाकू की खेती सलेटी से लाल मिट्टी से लेकर हल्की बजरीयुक्त से रेतली दोमट मिट्टी में की जाती है चबाने वाला तंबाकू हर किस्म की मिट्टी में उगाया जा सकता ह.... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है बारानी फसल होने के कारण, यह जलोढ़ मिट्टी, दोमट मिट्टी और काली चिकनी मिट्टी में सबसे अच्छी बढ़ती है सिगार और चिरूट तंबाकू की खेती सलेटी से लाल मिट्टी से लेकर हल्की बजरीयुक्त से रेतली दोमट मिट्टी में की जाती है चबाने वाला तंबाकू हर किस्म की मिट्टी में उगाया जा सकता है जल जमाव वाली मिट्टी में इसकी खेती ना करें सिगार की अच्छी गुणवत्ता के लिए मिट्टी में रेत मिलायें नाइट्रोजन, पोटाशियम, कैलशियम और मैगनीशियम की उच्च मात्रा युक्त मिट्टी ही चुनें प्रसिद्ध किस्में :- Flue-Cured Virginia (FCV), Bidi, Hookah and Chewing, Cigar filler, Cigar Wrapper,Cheroot, Burley मिट्टी की किस्म के आधार पर खेत की मोल्ड बोर्ड और सिंगल हल से 6-10 बार जोताई करें डलियों को तोड़ने और मिट्टी को समतल करने के लिएहैरो से जोताई करें नदीनों को निकाल दें और खेत को नदीन मुक्त रखें मिट्टी की किस्म के आधार पर, अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर या रूड़ी की खाद मिट्टी में अच्छी तरह से मिलायें यह बिजाई के क्षेत्र और किस्म पर निर्भर करता है विभिन्न किस्मों के लिए नर्सरी की बिजाई और रोपाई का समय अलग अलग होता है, चाहे ये समान जगह पर हो नर्सरी में बिजाई के लिए अप्रैल से मई का महीना उपयुक्त होता है और रोपाई अक्तूबर महीने में की जा सकती है फासला क्षेत्र और किस्म के साथ अलग होता है FCV तंबाकू के लिए 70x50 सैं.मी. या 100x60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीड़ी तंबाकू के लिए 90x60 सैं.मी., 100x75 सैं.मी. या 75x50 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बरली, नाटू और लंका तंबाकू के लिए 90x45 सैं.मी. या 90x90 सैं.मी. या 60x60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें सिगार और चिरूट के लिए 70x50 सैं.मी. या 60x45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें हुका के लिए 90x90 सैं.मी. या 60x45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नए पौधों का मुख्य खेत में रोपण किया जाता है रोपाई मेंड़ों पर या समतल बैडों पर की जाती है तंबाकू के बीज छोटे और अंडे के आकार के होने के कारण ये खेत में सीधा बोने के लिए उपयुक्त नहीं होते इसलिए इन्हें पहले नर्सरी में बोया जाता है और बाद में मुख्य खेत में रोपण कर दिया जाता है नर्सरी के लिए रेतली या रेतली दोमट मिट्टी चुनें भारी काली मिट्टी ना लें क्योंकि ये मिट्टियां हल्के निकास वाली होती हैं जिससे नर्सरी में उखेड़ा रोग की बीमारी आ जाती है गहरे धूप और भारी बारिश के दौरान नर्सरी को नुकसान से बचायें मल्च और कवर का प्रयोग करें आवश्यकता के अनुसार नाइट्रोजन का बुरकाव करें जब पौधे 6-8 सप्ताह के हो जायें तब वे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं पौधों के नर्सरी में से निकालने से एक सप्ताह पहले सिंचाई देना बंद कर दें तंबाकू की सभी किस्मों के लिए प्रति एकड़ में 1.2 से 2 किलो बीजों की मात्रा उपयुक्त होती है तंबाकू उगाने वाले विभिन्नि क्षेत्रों में खादों की मात्रा भी विभिन्न होती है खेत की तैयारी के समय 10 टन रूड़ी की खाद या अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर या फिल्टर प्रैस केक प्रति एकड़ में डालें फासफोरस 40 किलो (एस एस पी 250 किलो) शुरूआती खुराक के तौर पर डालें नाइट्रोजन 40 किलो (यूरिया 90 किलो) का बुरकाव प्रति एकड़ में करें नर्सरी में, नदीनों की जांच के लिए हाथों से गोडाई करें मुख्य खेत में, रोपाई के बाद शुरूआती 60 दिनों तक खेत को नदीन मुक्त रखें मुख्य खेत में, कतारों में फासला ज्यादा होने के कारण इसमें अंतरफसली संभव है पर रखा जाता है, इनमें अंतर कतारों में खेती संभव है हाथों से 1-2 गोडाई करें इससे नदीनों पर पर्याप्त नियंत्रण होता है तंबाकू की फसल अंकुरन की बाद की नदीनाशकों के प्रति संवेदनशील होती है इसलिए मुख्य खेत में पौधों की रोपाई से पहले नदीनाशक जैसे प्रोनामाइड, फलूक्लोरालिन, इसोप्रोपालिन, इसोक्साबेन डालें काली मिट्टी में तंबाकू सामान्य सिंचित नहीं होता, लेकिन कई हालातों में 40 दिन के पौधों को एक सिंचाई देने की सिफारिश की गई है जब इसकी खेती हल्की मिट्टी में की जाए तो छ: सिंचाइयों की आवश्यकता होती है सिंचाई के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले पानी का प्रयोग करें, इसमें क्लोराइड की मात्रा 50 पी एम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए क्योंकि इससे पत्ते झुलस जाते हैं और पत्तों की गुणवत्ता पर भी इसका असर पड़ेगा जब सामान्य हरे रंग के पत्ते पीले हरे से हल्के पीले में बदल जायें तब वे कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं कटाई का समय क्षेत्र और किस्म के आधार पर अलग अलग होता है आंध्र प्रदेश में flue-cured Virginia की कटाई का उपयुक्त समय दिसंबर-मार्च जबकि कर्नाटका में कटाई के लिए जुलाई-सितंबर का महीना उपयुक्त समय होता है बीड़ी तंबाकू की कटाई जनवरी फरवरी में की जाती है सिगार और चेरूट तंबाकू की कटाई का सही समय रोपाई के 90-100 दिनों के बाद पत्तों के नाज़ुक और पीले रंग के हो जाने पर होता है जबकि चबाने वाले तंबाकू की कटाई रोपाई के 110-120 दिनों के बाद की जाती है हुका तंबाकू का सही समय मई जून का महीना होता है कटाई के लिए दो ढंगों का प्रयोग किया जाता है प्राइमिंग और तना काटकर प्राइमिंग : सामान्य तौर पर ऊपरी पत्तों की बजाय निचले पत्ते जल्दी परिपक्व होते हैं पत्तों के पकने पर कटाई करें और कुछ पत्तों को निकाल लें सिगरेट और रैपर तंबाकू के लिए प्राइमिंग ढंग का प्रयोग किया जाता है तना काटकर : सिगार, चेरूट, चबाने वाले, बीड़ी और हुका के लिए तना काटकर ढंग का प्रयोग किया जाता है इस विधि में ज़मीनी स्तर से पौधे का भाग दरांती की सहायता से काटा जाता है और उसे सूखने के लिए पूरी रात खेत में छोड़ दिया जाता है ज्यादा संख्या में पत्तों के परिपक्व होने पर कटाई करें औसतन, flue cured Virginia और नाटू तंबाकू की उपज 312 किलो और 395 किलो प्रति एकड़ प्राप्त होती है बीड़ी तंबाकू की 145-187 किलो प्रति एकड़ उपज प्राप्त होती है सिगार, चेरूट और चबाने वाले तंबाकू की औसतन उपज 520-666 किलो प्रति एकड़ में प्राप्त होती है
Posted by narendra singh
Rajasthan
16-05-2019 09:19 PM
Posted by Gurdhyan Singh
Haryana
16-05-2019 09:18 PM
Sathi di spray paneeri uggan ton baad krni hundi hai...paneeri de upper nadeena di roktham de lyi Sathi@60gm ja pretilachlor @600ml nu 150 ltr pani de nal mila ke prati acre te spray kro. jekar kanal de hisab nal pauni hai tan sathi 7.5gm kanal di paindi hai ate pretilachlor@75ml prati kanal paa skde ho. Nomini gold di spray 25 dina ton baad spray kr skde ho. ih paneeri nu nuksaan phuncha dewegi kyuki iss de lyi paneeri vaddi honi chaidi hai ate paneeri de vich pani nahi khda hona chaida hai.
Posted by Harinder Singh
Punjab
16-05-2019 09:11 PM
Tuci majj nu vitum-h 10-10ml swere sham, Metabolite powder di rojana 1 pudi ate anabolite liquid 100ml rojana dena suru kro, iss nal lewa ate dudh vdia ho jawega.
Posted by sukhmander Singh
Punjab
16-05-2019 09:08 PM
PR 127: ਇਹ ਇੱਕ ਮੱਧਮ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ 137 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦੀ ਔਸਤਨ ਲੰਬਾਈ 104 ਸੈ.ਮੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਕਲਰਾਠੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਅਤੇ ਮਾੜੇ ਪਾਣੀਆਂ ਵਿੱਚ ਨਾ ਉਗਾਓ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ

Posted by Palwinder Singh
Punjab
16-05-2019 09:07 PM
इसके रेट की जानकारी आपको प्राइवेट डीलर से ही मिलेगी, आप अपनी मार्किट के किसी भी दुकानदार से जाकर रेट पता कर सकते हैं

Posted by Palwinder Singh
Punjab
16-05-2019 09:07 PM
इसके रेट की जानकारी आपको प्राइवेट डीलर से ही मिलेगी, आप अपनी मार्किट के किसी भी दुकानदार से जाकर रेट पता कर सकते हैं

Posted by Palwinder Singh
Punjab
16-05-2019 09:04 PM
Palwinder Singh ji Punjab vich Anaar di kheti kiti ja sakdi hai. Amritsar vich is de plant len lai tusi apne najdiki nursery ja fir Josan Nursery 9814183992,9815806969 nal samparak kare sakde ho. Thankyou.

Posted by Avadhesh sharma
Bihar
16-05-2019 09:01 PM
Avadhesh sharma ji Bihar me aap Beetal, Black Bangal, Barbari, Sirohi, Boar Kisme rakh sakte hai. Thank you.

Posted by Krishan Kant Swami
Haryana
16-05-2019 08:56 PM
गुलाब फूलों में सबसे मह्त्वपूर्ण फूल है गुलाब की खेती के लिए जैविक तत्वों से भरपूर और अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी अनुकूल होती है बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 6 से 7.5 होना चाहिए यह जल जमाव को सहनयोग्य नहीं है, इसलिए उचित जल निकास का प्रबंध होना चाहिए और अनावश्यक पानी को निकाल देना चाहिए प्रसिद्ध कि.... (Read More)
गुलाब फूलों में सबसे मह्त्वपूर्ण फूल है गुलाब की खेती के लिए जैविक तत्वों से भरपूर और अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी अनुकूल होती है बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 6 से 7.5 होना चाहिए यह जल जमाव को सहनयोग्य नहीं है, इसलिए उचित जल निकास का प्रबंध होना चाहिए और अनावश्यक पानी को निकाल देना चाहिए प्रसिद्ध किस्में :- इसमें तीन मुख्य समूह हैं,1) प्रजातियां 2) पुराने बाग़ 3) आधुनिक या नए गुलाब Species roses: इसे जंगली गुलाब के नाम से भी जाना जाता है इस तरह के फूलों की पांच पंखुड़ियां और रंग चमकीला होता है ये सर्दियों में ज्यादा समय तक रहती हैं जैसे कि: Rosa rugose: इनका मूल स्थान जापान है यह किस्म प्रकृति रूप में कठोर होती हैं इसके फूल बेहद सुगंधित होते हैं, पत्ते झुर्रीदार चमड़े की तरह होते हैं ये घनी और मोटी झाड़ियों में उगते हैं रासायनिक स्प्रे का उपयोग ना करें, क्योंकि इस पर स्प्रे करने से सारे पत्ते झड़ जाते हैं Banksiae: इसे लेडी बैंक केनाम से भी जाना जाता है और इसका मूल स्थान चीन है फूल छोटे, सुगंधित और जामुनी रंग के होते हैं फूल छोटे गुच्छों में लगते है मिट्टी को नरम करने के लिए जोताई और गोड़ाई करें बिजाई से 4-6 सप्ताह पहले खेती के लिए बैड तैयार करें बैड बनाने कि लिए 2 टन रूड़ी की खाद और 2 किलो सुपर फासफेट डालें बैडों को एक समान बनाने के लिए उनको समतल करें और बैडों के ऊपर बोयें होये गुलाब गड्डों में बोयें हुए गुलाबों से ज्यादा मुनाफे वाले होते है उत्तरी भारत में बिजाई का सही समय मध्य अक्तूबर है रोपाई के बाद पौधे को छांव में रखें और अगर बहुत ज्यादा धुप हो, तो पौधे पर पानी का छिड़काव करें दोपहर के अंत वाले समय बोया गया गुलाब बढ़िया उगता है बैड पर 30 सैं.मी. व्यास और 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोद कर 75 सैं.मी. के फासले पर पौधों की बिजाई करें दो पौधों के बीच में फासला गुलाब की किस्म पर निर्भर करता है बीजों को 2-3 सैं.मी. गहराई में बोयें इसकी बिजाई सीधी या पनीरी लगा कर की जाती है गुलाब की फसल का का प्रजनन काटी गई जड़ों और बडिंग द्वारा किया जाता है उत्तरी भारत में दिसंबर-फरवरी महीने का समय टी-बडिंग के लिए उचित होता है पौधे की कांट-छांट दूसरे और उसके बाद के वर्षों में की जाती है उत्तरी भारत में गुलाब की झाड़ियों की कांट-छांट अक्तूबर के दूसरे या तीसरे हफ्ते में की जाती है जो शाखाएं झाड़ियों को घना बनाएं, उन्हें निकाल दें लटके हुए गुलाबों को छंटाई की जरूरत नहीं होती छंटाई के बाद, अच्छे से गले हुए 7-8 किलो गाय के गोबर को प्रति पौधे को डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें ग्रीन हाउस में, गुलाबों को पंक्तियों में बोया जाता है और पौधों का घनत्व 7-14 पौधे प्रति वर्ग मीटर होनी चाहिए बैड की तैयारी के समय 2 टन रूड़ी की खाद और 2 किलो सुपर फास्फेट को मिट्टी में डालें तीन महीने के फासले पर 10 किलो रूड़ी की खाद और 8 किलो नाइट्रोजन, 8 किलो फासफोरस और 16 किलो पोटाश प्रति पौधे में डालें छंटाई के बाद ही सारी खादों को डालें ज्यादा पैदावार लेने के लिए छंटाई से एक महीने बाद, जी ए 3@ 200 पी पी एम(2 ग्राम प्रति लीटर) की स्प्रे करें पौधे की तनाव सहन शक्ति को बढ़ाने के लिए घुलनशील जड़ उत्तेजक(रैली गोल्ड/रिजोम) 100 ग्राम+ टिपोल 60 मि.ली. को 100 लीटर पानी में डालकर प्रति एकड़ में शाम के समय सिंचाई करें मोनोकोट नदीनों की रोकथाम के लिए ग्लाइफोसेट 300 ग्राम और डिकोट नदीनों को रोकने के लिए ऑक्सीफ्लूरॉन 200 ग्राम को अंकुरन से पहले प्रति एकड़ में स्प्रे करें पौधों को खेत में लगाएं ताकि बढ़िया ढंग से विकास कर सके सिंचाई मिट्टी की किस्म और जलवायु के अनुसार करें आधुनिक सिंचाई तकनीक जैसे ड्रिप सिंचाई गुलाब की खेती के लिए लाभदायक होती है फव्वारा सिंचाई से परहेज करें क्योंकि इससे पत्तों को लगने वाली बीमारियां बढ़ती हैं गुलाब की फसल से दूसरे वर्ष से बढ़िया किफायती पैदावार लिया जा सकता है गुलाब की तुड़ाई फूलों का रंग पूरी तरह से विकसित पर और पहली एक और दो पंखुड़ियां खुलनी(पर पूरी तरह नहीं) पर तेज़ छुरी की सहायता से की जाती है निर्धारित लंबाई होने पर हाथ वाली छुरी के साथ काटा जाता है विदेशी बाज़ार के मांग के अनुसार बड़े फूलों के लिए तने की लंबाई 60-90 सैं.मी. और छोटे फूलों के लिए 40-50 सैं.मी. होती है फ़ॉलोन को सुबह जल्दी या दोपहर के अंत वाले समय में तोडना चाहिए इसकी मार्केटिंग आप नजदीकी फूल मार्किट में कर सकते है धन्यवाद

Posted by ਅਮਰਬੀਰ ਸਿੰਘ
Punjab
16-05-2019 08:55 PM
Amarveer singh ji kirpa krke apna swal post ton badd 24 hours tak uddek kro ji jekar 24 hours vich tuhade swal da jwab nahi milda tan tuci sade helpline no. 97799-77641 te sampark kr skde ho..

Posted by preet
Punjab
16-05-2019 08:52 PM
प्रीत जी रेट की जानकारी के लिए आप साथ में दी गई फोटो देखें

Posted by jay pee kalia
Punjab
16-05-2019 08:42 PM
Pregstay gold powder nai milda ji. eh tohanu medical store to hi mil sakda hai ji. ya fir jado kissan mele lagde hai othe eh company stall lagondi hai otho v mil jauga ji.

Posted by sunil madhavi
Maharashtra
16-05-2019 08:40 PM
Sunil madhavi जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप मेरे से 9770085381,9407461361 संपर्क करें, धन्यवाद

Posted by Preet SanDhu
Punjab
16-05-2019 08:20 PM
Tuci uss nu Metra liquid 100ml rojana ate Milkout powder 2-2 chamch swere sham, Anabolite liquid 100ml rojana ate Agrimin powder 50gm rojana dena suru kro, iss nal farak paa jawega.

Posted by HARJEET SINGH
Punjab
16-05-2019 08:17 PM
ਸੁੰਡੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ: ਸੁੰਡੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਹਰੀ ਮਿਰਚ 5 ਕਿਲੋ, ਲਸਣ 5 ਕਿਲੋ, ਅੱਕ ਤੇ ਪੱਤੇ 5 ਕਿਲੋ, ਸੁਖਚੈਨ ਦੇ ਪੱਤੇ 5 ਕਿਲੋ, ਧਤੂਰਾ 5 ਕਿਲੋ, ਅਰਿੰਡ 5 ਕਿਲੋ ਨੂੰ 10 ਲੀਟਰ ਨੂੰ ਗਾਂ ਦੇ ਮੂਤਰ ਵਿੱਚ 4 ਦਿਨ ਲਈ ਭਿਓਂ ਕੇ ਰੱਖੋ 4 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਬਾਅਦ ਇਨ੍ਹਾਂ ਪੱਤਿਆਂ ਨੂੰ ਗਾਂ ਮੂਤਰ ਵਿੱਚ ਮਸਲੋ ਅਤੇ 1 ਦਿਨ ਲਈ ਫਿਰ ਇਸ ਨੂੰ ਛਾਂ ਵਿੱਚ ਰੱਖੋ ਇਸ ਨੂੰ ਢੱਕ ਕੇ ਅਤੇ ਛਾਂ ਵਿੱਚ ਰੱਖਣਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੁੰ.... (Read More)
ਸੁੰਡੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ: ਸੁੰਡੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਹਰੀ ਮਿਰਚ 5 ਕਿਲੋ, ਲਸਣ 5 ਕਿਲੋ, ਅੱਕ ਤੇ ਪੱਤੇ 5 ਕਿਲੋ, ਸੁਖਚੈਨ ਦੇ ਪੱਤੇ 5 ਕਿਲੋ, ਧਤੂਰਾ 5 ਕਿਲੋ, ਅਰਿੰਡ 5 ਕਿਲੋ ਨੂੰ 10 ਲੀਟਰ ਨੂੰ ਗਾਂ ਦੇ ਮੂਤਰ ਵਿੱਚ 4 ਦਿਨ ਲਈ ਭਿਓਂ ਕੇ ਰੱਖੋ 4 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਬਾਅਦ ਇਨ੍ਹਾਂ ਪੱਤਿਆਂ ਨੂੰ ਗਾਂ ਮੂਤਰ ਵਿੱਚ ਮਸਲੋ ਅਤੇ 1 ਦਿਨ ਲਈ ਫਿਰ ਇਸ ਨੂੰ ਛਾਂ ਵਿੱਚ ਰੱਖੋ ਇਸ ਨੂੰ ਢੱਕ ਕੇ ਅਤੇ ਛਾਂ ਵਿੱਚ ਰੱਖਣਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਗੋਲ ਨੂੰ ਕਿਸੇ ਕੱਪੜੇ ਨਾਲ ਪੁਣ ਲਓ ਅਤੇ ਫਿਰ 100 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਇਸ ਨਾਲ ਸੁੰਡੀ ਕੰਟਰੋਲ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ

Posted by Jagpreet Singh
Punjab
16-05-2019 08:08 PM
ਪਰਮਲ ਝੋਨੇ ਦੀਆ PR PR 113, PR 111, PR 114, PR 115, PR 116,PR 118 ,PR 121, PR 122, PR 123, PR 126, PR 127, Cr 212, ਕਿਸਮਾਂ ਦਾ ਝਾੜ ਸਭ ਦਾ ਹੀ ਚੰਗਾ ਹੈI ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਲੰਬੇ ਸਮੇ ਵਾਲੀ ਅਤੇ ਵੱਧ ਝਾੜ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਲਗਾਉਣੀ ਚਾਉਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਉਸ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਪੂਸਾ 44 ਕਿਸਮ ਲਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋ I
Posted by Mangat
Punjab
16-05-2019 08:07 PM
jekar ohh heat vich nahi auundi ate bachedani di sahi growth nhi hoi hai tan tuci iss nu Agrimin powder 50gm rojana ate Stimvet 21 bolus rojana 1 goli ate vitum-h 10ml rojana dena suru kro ate 21 din deo, iss nal farak paa jawega..

Posted by Vakil chand
Uttar Pradesh
16-05-2019 08:02 PM
जी आप गिर गाय को रख सकते है इसके इलावा आप साहीवाल गाय को भी रख सकते है या जरसी गाय भी रख सकते है इनका दूध भी अच्छा होता है बाकि आप गर्मी से बचाव रखें और खुराक का पूरा ध्यान रखें जिससे अच्छा दूध प्राप्त किया जा सके
Posted by jaspreet sandhu
Haryana
16-05-2019 07:45 PM
Jaspreet ji kripya kisam ka poora name btaye taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Akash Deep Baath
Punjab
16-05-2019 07:45 PM
ਬੀਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਤੇ ਸੋਧ: ਟੱਬ ਜਾਂ ਬਾਲਟੀ ਵਿੱਚ ਲੋੜ ਅਨੁਸਾਰ ਬੀਜ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਪਾਉ ਅਤੇ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹਿਲਾਉ ਹੁਣ ਜਿਹੜਾ ਹਲਕਾ ਬੀਜ ਪਾਣੀ ਉੱਤੇ ਤਰ ਆਵੇ ਉਸ ਨੂੰ ਬਾਹਰ ਸੁੱਟ ਦਿਉ ਭਾਰੇ ਬੀਜ ਥੱਲੇ ਬੈਠ ਜਾਣਗੇ ਅੱਠ ਕਿਲੋ ਭਾਰੇ ਬੀਜ ਨਾਲ ਬੀਜੀ ਪਨੀਰੀ ਇੱਕ ਏਕੜ ਲਈ ਕਾਫ਼ੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਪਨੀਰੀ ਦੇ ਬੂਟੇ ਨਰੋਏ ਅਤੇ ਇੱਕੋ ਜਿਹੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਚੁਣੇ ਹੋਏ ਬੀਜ ਨੂੰ 20 ਗ੍ਰਾਮ ਬਾਵਿਸਟ.... (Read More)
ਬੀਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਤੇ ਸੋਧ: ਟੱਬ ਜਾਂ ਬਾਲਟੀ ਵਿੱਚ ਲੋੜ ਅਨੁਸਾਰ ਬੀਜ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਪਾਉ ਅਤੇ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹਿਲਾਉ ਹੁਣ ਜਿਹੜਾ ਹਲਕਾ ਬੀਜ ਪਾਣੀ ਉੱਤੇ ਤਰ ਆਵੇ ਉਸ ਨੂੰ ਬਾਹਰ ਸੁੱਟ ਦਿਉ ਭਾਰੇ ਬੀਜ ਥੱਲੇ ਬੈਠ ਜਾਣਗੇ ਅੱਠ ਕਿਲੋ ਭਾਰੇ ਬੀਜ ਨਾਲ ਬੀਜੀ ਪਨੀਰੀ ਇੱਕ ਏਕੜ ਲਈ ਕਾਫ਼ੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਪਨੀਰੀ ਦੇ ਬੂਟੇ ਨਰੋਏ ਅਤੇ ਇੱਕੋ ਜਿਹੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਚੁਣੇ ਹੋਏ ਬੀਜ ਨੂੰ 20 ਗ੍ਰਾਮ ਬਾਵਿਸਟਨ ਅਤੇ ਇੱਕ ਗ੍ਰਾਮ ਸਟਰੈਪਟੋਸਾਈਕਲੀਨ* ਦੇ 10 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਘੋਲ ਵਿੱਚ, ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 8-10 ਘੰਟੇ ਪਹਿਲਾਂ ਡੁਬੋ ਲਉ ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਤਿਆਰੀ, ਖਾਦ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਅਤੇ ਬੀਜਣ ਦਾ ਢੰਗ : 12-15 ਟਨ ਗਲੀ-ਸੜੀ ਰੂੜੀ ਜਾਂ ਕੰਪੋਸਟ ਇੱਕ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਰਲਾਉ ਹੁਣ ਖੇਤ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਦਿਉ, ਤਾਂ ਕਿ ਨਦੀਨ ਉੱਗ ਪੈਣ ਉੱਗੇ ਹੋਏ ਨਦੀਨਾਂ ਨੂੰ ਮਾਰਨ ਲਈ ਇੱਕ ਹਫ਼ਤੇ ਬਾਅਦ ਖੇਤ ਨੂੰ ਦੋ ਵਾਰ ਵਾਹੋ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਨੀਰੀ ਬੀਜਣ ਸਮੇਂ ਖੇਤ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਭਰੋ ਅਤੇ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਕੱਦੂ ਕਰੋ ਕੱਦੂ ਦੀ ਆਖਰੀ ਵਾਹੀ ਸਮੇਂ 26 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਅਤੇ 60 ਕਿਲੋ ਸੁਪਰਫ਼ਾਸਫ਼ੇਟ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਖਿਲਾਰ ਦਿਉ ਸਿਹਤਮੰਦ ਪਨੀਰੀ ਲਈ 40 ਕਿਲੋ ਜ਼ਿੰਕ ਸਲਫ਼ੇਟ ਹੈਪਟਾਹਾਈਡ੍ਰੇਟ ਜਾਂ 25.5 ਕਿਲੋ ਜਿੰਕ ਸਲਫ਼ੇਟ ਮੋਨੋਹਾਈਡ੍ਰੇਟ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਉ ਫਿਰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ 10 ਅਤੇ 2 ਮੀਟਰ ਆਕਾਰ ਦੇ ਕਿਆਰੇ ਬਣਾਉ, ਜੋ ਕਿ ਲੋੜ ਅਨੁਸਾਰ ਵਧਾਏ-ਘਟਾਏ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ ਸੋਧੇ ਹੋਏ ਭਿੱਜੇ ਬੀਜ ਨੂੰ ਗਿੱਲੀਆਂ ਬੋਰੀਆਂ ਉਪਰ 7-8 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਮੋਟੀ ਤਹਿ ਵਿੱਚ ਖਲਾਰ ਦਿਉ ਅਤੇ ਉਪਰੋਂ ਗਿੱਲੀਆਂ ਬੋਰੀਆਂ ਨਾਲ ਢੱਕ ਦਿਉ ਢੱਕੇ ਹੋਏ ਬੀਜ ਉਪਰ ਸਮੇਂ-ਸਮੇਂ ਸਿਰ ਪਾਣੀ ਛਿੜਕ ਕੇ ਬੀਜ ਨੂੰ ਗਿੱਲਾ ਰੱਖੋ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ 24 ਤੋਂ 36 ਘੰਟੇ ਦੇ ਅੰਦਰ ਬੀਜ ਪੁੰਗਰ ਪਵੇਗਾ ਹਰੇਕ ਕਿਆਰੇ (10 ਅਤੇ 2 ਮੀਟਰ) ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਕਿਲੋ ਸੋਧਿਆ ਤੇ ਪੁੰਗਰਿਆ ਬੀਜ ਛੱਟੇ ਨਾਲ ਬੀਜੋ ਜ਼ਮੀਨ ਨੂੰ ਬਾਰ-ਬਾਰ ਪਾਣੀ ਲਾ ਕੇ ਗਿੱਲੀ ਰੱਖੋ ਪੰਛੀਆਂ ਤੋਂ ਬੀਜ ਨੂੰ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਗਲੀ-ਸੜੀ ਰੂੜੀ ਦੀ ਪਤਲੀ ਤਹਿ ਝੋਨੇ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਬੀਜਣ ਤੋਂ ਇੱਕ ਦਮ ਬਾਅਦ ਖਿਲਾਰ ਦਿਉ ਪਨੀਰੀ ਬੀਜਣ ਤੋਂ 15 ਦਿਨ ਬਾਅਦ 26 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੋਰ ਪਾਉ ਪਨੀਰੀ 24-30 ਦਿਨਾਂ ਤੱਕ ਲਾਉਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ ਜੇਕਰ 45 ਦਿਨ ਜਾਂ ਇਸ ਤੋਂ ਵੱਧ ਉਮਰ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਾਉਣੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ 26 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਚਾਰ ਹਫ਼ਤੇ ਬਾਅਦ ਹੋਰ ਪਾਉ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ 8 ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀਆਂ 8 ਕਿਆਰੀਆਂ (ਸਾਢੇ 6 ਮਰਲੇ) ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਇੱਕ ਏਕੜ ਲਈ ਕਾਫ਼ੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਪਨੀਰੀ ਵਿੱਚ ਕਿਸੇ ਕੀੜੇ ਜਾਂ ਬਿਮਾਰੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਦਿਸੇ ਤਾਂ ਸਿਫ਼ਾਰਸ਼ ਕੀਤੇ ਢੰਗ ਵਰਤੋ ਪਨੀਰੀ ਨੂੰ ਲਗਾਤਾਰ ਪਾਣੀ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ ਜਦ ਪਨੀਰੀ 20-25 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਉੱਚੀ ਜਾਂ 6-7 ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੀ ਹੋ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਸਮਝੋ ਪਨੀਰੀ ਲਾਉਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੈ ਜੇਕਰ ਪਨੀਰੀ ਦੇ ਨਵੇਂ ਪੱਤੇ ਪੀਲੇ ਪੈ ਜਾਣ ਤਾਂ ਫ਼ੈਰਸ ਸਲਫ਼ੇਟ ਦੇ ਤਿੰਨ ਛਿੜਕਾਅ ਹਫ਼ਤੇ-ਹਫ਼ਤੇ ਦੇ ਫ਼ਰਕ ਤੇ ਕਰੋ

Posted by Vakil chand
Uttar Pradesh
16-05-2019 07:40 PM
आपको डेरी की ट्रेनिंग आपके ज़िले के कृषि विज्ञानं केंद्र से मिलेगी जी आप वह पर जाकर ट्रेनिंग के लिए अपना नाम लिखवा सकते हो जी Kvk का पता आप नोट कर सकते हो जी कृषि विज्ञान केंद्र, Khekra,
जिला.- Baghpat - (U.P.)
INDIA
Tel. No.: 0121 2969011

Posted by Mitrapal Singh
Uttar Pradesh
16-05-2019 07:30 PM
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई कर.... (Read More)
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आप इसकी किस्मे जैसे Washington Coorg Honey Pusa Delicious Pusa Dwarf की बिजाई कर सकते है आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं एक एकड़ में 104 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें कम बारिश वाले क्षेत्रों में जून - जुलाई के महीने में बिजाई की जानी चाहिए और तराई और अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में सितंबर महीने में बिजाई की जानी चाहिए और क्षेत्र जहां सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हो वहां पर फरवरी - मार्च के महीने में बिजाई की जानी चाहिए आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 0.8 किलो प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं तुड़ाई एक एक फल को हाथों से तोड़कर की जाती है फलों को सुबह के समय तोड़ें धन्यवाद

Posted by ਅਮਰਬੀਰ ਸਿੰਘ
Punjab
16-05-2019 07:28 PM
ਅਮਰਬੀਰ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਸਦੀ ਫੋਟੋ ਭੇਜੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by tejinder singh
Punjab
16-05-2019 07:24 PM
Tejinder ji abhi aap mooli aur palak ki bijai kar sakte hai. dhanywad

Posted by nirankar Mishra
Uttar Pradesh
16-05-2019 07:23 PM
Nirankar ji kripya aap apna swal vistar se pooche ke aap kiske smadhan ke bare men jankari lena chahte hai taki aapko iske bare men poori jankarei di ja sake.

Posted by Sunny Jassi
Punjab
16-05-2019 07:18 PM
ਰੇਤਲੀ ਜਮੀਨ ਵਿਚ ਤੁਸੀ ਕਿਸਮ ਜਿਵੇ signet ਦਾ raja 44 ja raja 45 , 5050, 5005, 5051, 5455 ਜਾ pioneer ਦਾ 27p31 ja 25p35 ja 27p63,ਵਰਗੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by ਹਰਪਾਲ ਸਿੰਘ
Punjab
16-05-2019 07:17 PM
ਕੜਕਨਾਥ ਨਸਲ ਦੇ ਆਂਡੇ ਅਤੇ ਚੂਚੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਮੈਨੂੰ 97815 89637 ਨੰਬਰ ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ

Posted by Jaswant Singh
Punjab
16-05-2019 07:11 PM
iss tuci Sarakind plus bolus denia suru kro, isdi 1-1 goli swere sham deo isde nal tuci Floxivet injection 10ml lgwao eh carries company da product hai, iss nal farak pann lgg jawega.

Posted by Gurjit
Haryana
16-05-2019 07:00 PM
sir ji nyx 111 aur nyx ki hi mukti kaisi variety h ye dono jaankari de ji jeeri ki variety h ji ye ?
Gurjit ji kripya aap iska poora nam btaye taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by manish rana
Uttar Pradesh
16-05-2019 06:59 PM
Manish ji aap iske uper hoshi@400ml ko 150 litre pani men mila kar spray karen.dhanywad

Posted by Manpreet Singh
Punjab
16-05-2019 06:57 PM
zinc ate ferrous sulphate nu mila k spray kr sakde haan ja nahi? naal hi dose v dasso ji. dhanwaad ?
ਸਿਹਤਮੰਦ ਪਨੀਰੀ ਲਈ 40 ਕਿਲੋ ਜ਼ਿੰਕ ਸਲਫ਼ੇਟ ਹੈਪਟਾਹਾਈਡ੍ਰੇਟ ਜਾਂ 25.5 ਕਿਲੋ ਜਿੰਕ ਸਲਫ਼ੇਟ ਮੋਨੋਹਾਈਡ੍ਰੇਟ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਉ ਜਦ ਪਨੀਰੀ 20-25 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਉੱਚੀ ਜਾਂ 6-7 ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੀ ਹੋ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਸਮਝੋ ਪਨੀਰੀ ਲਾਉਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੈ ਜੇਕਰ ਪਨੀਰੀ ਦੇ ਨਵੇਂ ਪੱਤੇ ਪੀਲੇ ਪੈ ਜਾਣ ਤਾਂ ਫ਼ੈਰਸ ਸਲਫ਼ੇਟ ਦੇ ਤਿੰਨ ਛਿੜਕਾਅ ਹਫ਼ਤੇ-ਹਫ਼ਤੇ ਦੇ ਫ਼ਰਕ ਤੇ ਕਰੋ
Posted by ਹਰਵਿੰਦਰਪਾਲ ਸਿੰਘ
Punjab
16-05-2019 06:44 PM
ਇਹ ਦੋਨੋ ਆਪਣੀ ਜਗਾਂ ਠੀਕ ਹਨ ਜੀ ਬੱਸ ਇਹੀ ਫਰਕ ਹੈ ਕਿ ਬਾਜਰਾ ਹਰ ਤਰਾਂ ਦੀ ਜਮੀਨ ਵਿੱਚ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਬਾਕੀ ਘੋੜੀਆਂ ਨੂੰ ਚਰੀ ਨਹੀ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ

Posted by harjasdeep
Punjab
16-05-2019 06:41 PM
harjasdeep ji is tra diyan ads tuc apnikheti Buy/sell te pa sakde ho. jekar koi kisan nu jaurat hoyegi ta oh direct tuhade nal sampark kar lainge.dhanwad
Posted by lakhan singh
Rajasthan
16-05-2019 06:34 PM
Jaivik kheti vich bina kise chemical nu varte kheti kiti jandi hai isde vich fasl nu jaivik khaadan di varto kiti jandi hai. Jekar fasl vich koi keede da hamla hunda hai ta neem de tel di spray karo jekar ulli rog lagda hai ta tuc khatti lassi di spray kro.dhanwad

Posted by Brijesh Kushwaha
Madhya Pradesh
16-05-2019 06:31 PM
बृजेश जी चने की किसम जैसे RSG-44 ,KPG-59(Uday) ,Bharati(ICCV-10) ,Sadabahar की बिजाई कर सकते है गेंहू की किस्मे जैसे JW 17, JW 3269, JW 3288, HI1500, HI 1531, HD 4672
JW 1201, JW 322, JW 273, HI 1544, HI 8498, MPO 1215, JW 1203, MP 4010, HD 2864, HI 1454 की बिजाई कर सकते है
Expert Communities
We do not share your personal details with anyone
We do not share your personal details with anyone
Sign In
Registering to this website, you accept our Terms of Use and our Privacy Policy.
Your mobile number and password is invalid
We have sent your password on your mobile number
All fields marked with an asterisk (*) are required:
Sign Up
Registering to this website, you accept our Terms of Use and our Privacy Policy.
All fields marked with an asterisk (*) are required:
Please select atleast one option
Please select text along with image











