
Posted by Harpreet Singh
Punjab
17-05-2019 08:05 PM
ਉਸ ਨੂੰ 2 ਕਿਲੋ ਖੰਡ ਦੀ ਚਾਸ਼ਨੀ ਬਣਾ ਕੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ 2 ਲਿਟਰ ਮੀਠਾ ਤੇਲ ਪਾਓ ਅਤੇ ਚੰਗੀ ਤ੍ਰਾਹ ਉਬਾਲ ਦਿਓ ਅਤੇ 500 ਗ੍ਰਾਮ ਕਲਮੀਸੋਰਾ, 250 ਗ੍ਰਾਮ ਮੀਠਾ ਸੋਡਾ, 250 ਗ੍ਰਾਮ ਜੋਖਾਰ ਅਤੇ 150 ਗ੍ਰਾਮ ਨਿਸ਼ਾਦਰ ਰਗੜ ਦੇ ਵਿਚ ਪਾਓ ਅਤੇ ਇਸਦੇ 5 ਹਿਸੇ ਕਰ ਲਓ ਅਤੇ ਰੋਜਾਨਾ ਸ਼ਾਮ ਨੂੰ ਦਿਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ vitum-h liquid 10-10ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ
Posted by Sandeep Singh
Punjab
17-05-2019 08:04 PM
666:-ਇਹ ਝੋਨੇ ਦੀ ਇੱਕ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ 110-120 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ Sava 127 ਹਾਇਬ੍ਰਿਡ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦਾ ਝਾੜ 30-32 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ 85-90 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ

Posted by राजेश कुमार
Uttar Pradesh
17-05-2019 08:01 PM
बैंगन की फसल सख्त होने के कारण इसे अलग अलग तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है यह एक लंबे समय की फसल है, इसलिए अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ रेतली दोमट मिट्टी उचित होती है और अच्छी पैदावार देती है अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी और अधिक पैदावार के लिए चिकनी और नमी या गारे वाली मिट्टी उचित होती है फसल की वृद्धि के लिए.... (Read More)
बैंगन की फसल सख्त होने के कारण इसे अलग अलग तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है यह एक लंबे समय की फसल है, इसलिए अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ रेतली दोमट मिट्टी उचित होती है और अच्छी पैदावार देती है अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी और अधिक पैदावार के लिए चिकनी और नमी या गारे वाली मिट्टी उचित होती है फसल की वृद्धि के लिए 5.5-6.6 पी एच होनी चाहिए लंबी किस्में
Pusa Purple Long: यह जल्दी पकने वाली किस्म है सर्दियों में यह 70-80 दिनों में और गर्मियों में यह 100-110 दिनों में पक जाती है इस किस्म के बूटे दरमियाने कद के और फल लंबे और जामुनी रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Pusa Purple Cluster: यह किस्म आई. सी. ए. आर. नई दिल्ली द्वारा बनाई गई है यह दरमियाने समय की किस्म है इसके फल गहरे जामुनी रंग और गुच्छे में होते हैं यह बैक्टीरिया सूखे के कुछ हद तक प्रतिरोधक है
Pusa Kranti: यह किस्म IARI, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है यह किस्म बसंत और पतझड़ के मौसम में उगाने के लिए अनुकूल है यह किसम 130-150 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती हे इसके फल आकर्षित गहरे जामुनी रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 56-64 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Punjab Sadabahar: इसकी औसतन पैदावार 120-160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Punjab Basarati: इसकी औसतन पैदावार 120-140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Pant Samrat: इसके फल रोपाई के 70 दिनों के बाद तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं
गोल किस्में
Pusa Purple Round: यह किस्म छोटे पत्ते, शाख और फल के छेदक की रोधक किस्म है
Pant Rituraj: इस किस्म के फल गोल और आकर्षित जामुनी रंग के होते हैं और इनमें बीज की मात्रा भी कम होती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Banaras Giant: यह वाराणसी और उसके नजदीक के क्षेत्रों में प्रसिद्ध किस्म है इसके फल हरे और सफेद रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 400 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Swarna Mani: यह किस्म बैक्टीरियल सूखे के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 24-26 टन प्रति एकड़ होती है
Swarna Ajay: इसकी औसतन पैदावार 28-30 टन प्रति एकड़ होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की तीन से चार बार जोताई करें गाय का गला हुआ गोबर 42 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें बैंगन के बीज 3 मीटर लंबे, 1 मीटर चौड़े और 15 सैं.मी. ऊंचे बैडों पर बोये जाते हैं पहले बैडों में बढ़िया रूड़ी की खाद डालें फिर बिजाई से दो दिन पहले कप्तान का घोल डालें ताकि जो नर्सरी बैडों में पौधों को नष्ट होने से बचाया जा सके उसके बाद बीजों को कतारों में 2.5 सैं.मी. के फासले पर और 1.5 सैं.मी. की गहराई पर बोयें हल्की सिंचाई करें पौधों के अंकुरन तक बैडों को काले रंग की पॉलीथीन शीट या पराली से ढक दें तंदरूस्त पौधे जिनके 3-4 पत्ते निकलें हों और कद 12-15 सैं.मी. (30-40 days crop) हो, खेत में पनीरी लगाने के लिए तैयार होते हैं बैंगन की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ मौसम के लिए, नर्सरी फरवरी - मार्च के महीने में तैयार करें और मार्च - अप्रैल के महीने में रोपाई करें
सर्दियों के मौसम में, नर्सरी की तैयारी के लिए जून जुलाई का समय उपयुक्त होता है और रोपाई के लिए जुलाई अगस्त का महीना उपयुक्त होता है
बसंत के मौसम में, सितंबर के महीने में नर्सरी तैयार करें और अक्तूबर - नवंबर के महीने में रोपाई पूरी कर लें लंबी किस्मों के लिए, कतार से कतार में 60-75 सैं.मी. जबकि गोल किस्मों के लिए कतारों में 80-90 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 60-70 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें
नर्सरी में, बीज को 1.5 सैं.मी. गहराई में बोयें और मिट्टी से ढक दें खेत में पनीरी लगाकर इसकी बिजाई की जाती है एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 300-400 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन 60 किलो (130 किलो यूरिया), फासफोरस 20 किलो (125 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 20 किलो (35 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा आखिरी जोताई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को रोपाई के बाद 30 वें और 45वें दिन डालें नदीनों को रोकने, अच्छे विकास और उचित हवा के लिए दो - चार गोडाई करें काले रंग की पॉलिथीन शीट से पौधों को ढक दें जिससे नदीनों का विकास कम हो जाता है और ज़मीन का तापमान भी बना रहता हैं
नदीनों को रोकने के लिए पौधे लगाने से पहले मिट्टी में फलूकलोरालिन 600-800 मि.ली. प्रति एकड़ या ऑक्साडायाज़ोन 400 ग्राम प्रति एकड़ डालें अच्छे परिणाम के लिए पौधे लगाने से पहले एलाकलोर 2 लीटर प्रति एकड़ की मिट्टी के तल पर स्प्रे करें
Posted by manpreet singh
Punjab
17-05-2019 07:57 PM
Manjit Singh ji har parkar di Poultry Accessories lai tusi Mohit Goel : +919888103368, Ashwani Goel: +917696603754 (AK AGENCIES) nal samparak kar sakde ho. Thankyou.

Posted by Adarsh yadav
Uttar Pradesh
17-05-2019 07:57 PM
दोनों किस्में ही अच्छी है, 1121 का रेट बहुत अच्छा मिल जाता है, आप यह लगा सकते हैं

Posted by Harpreet Singh
Punjab
17-05-2019 07:52 PM
ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ), ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ, ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ), DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ), ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕਿਲੋ (ਕਣਕ, ਚੌਕਰ, ਚਨਾ ਛਿਲਕਾ, ਮਟਰ ਛਿਲਕਾ, ਇਨਾਂ ਵਿੱ.... (Read More)
ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ), ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ, ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ), DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ), ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕਿਲੋ (ਕਣਕ, ਚੌਕਰ, ਚਨਾ ਛਿਲਕਾ, ਮਟਰ ਛਿਲਕਾ, ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ), ਖਲ਼ 14 ਕਿਲੋ(ਸਰੋਂ, ਬਿਨੌਲਾ ਜਾਂ ਸੋਇਆ (ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ), ਮਿੱਠਾ ਸੋਡਾ 250 ਗ੍ਰਾਮ, 1 ਕਿਲੋ ਨਮਕ, ਗੁੜ 1 ਕਿਲੋ, 1 ਕਿੱਲੋ ਹਲਦੀ (ਸਰਦੀਆ ਵਿੱਚ ), 1 ਕਿਲੋ ਮਿਨਰਲ ਮਿਕਸਰ ਇਹ ਨੂੰ ਰਲਾ ਲਵੋ ਇਹ ਫੀਡ ਪਸ਼ੂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ .
Posted by vinod ahluwalia
Haryana
17-05-2019 07:38 PM
धान के लिए आप PR 113, PR 111, PR 114, PR 115, PR 116,PR 118 ,PR 121,PR 122, PR 123 , PR 126, PR 127, Cr 212 लगा सकते हैं

Posted by ਹਰਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
17-05-2019 07:35 PM
PR 126: यह किस्म पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी द्वारा जारी की गयी है जो की सामान्य खेती के लिए पंजाब में उगाई जाती है यह 123 दिनों में पक जाती है यह किस्म झुलस रोग को सहने योग्य है इसकी औसतन पैदावार 30 क्विंटल प्रति एकड़ है

Posted by gurtej singh
Punjab
17-05-2019 07:34 PM
1718, 136-138 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੇ ਝਾੜ 18-20qtl/acre ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਪਨੀਰੀ ਜੂਨ ਦੇ ਦੂਜੇ ਪੰਦਰਵਾੜੇ ਵਿਚ ਬੀਜੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Manuj Chiring
Assam
17-05-2019 07:30 PM
यदि आप नए सिरे से मक्खी पालन का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो अगस्त से जनवरी तक शुरू किया जा सकता है मक्खी फार्म के पास जी टी रोड, रेलवे लाइन्स तथा टेलीफोन या बिजली की तारों का जाल न हो फूलों से मक्खियों को नैक्टर (फूलों का रस ) तथा पोलन मिलता है जो की मक्खियों की खुराक होते हैं अधिक शहद इकठा करने के लिए फूलों व.... (Read More)
यदि आप नए सिरे से मक्खी पालन का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो अगस्त से जनवरी तक शुरू किया जा सकता है मक्खी फार्म के पास जी टी रोड, रेलवे लाइन्स तथा टेलीफोन या बिजली की तारों का जाल न हो फूलों से मक्खियों को नैक्टर (फूलों का रस ) तथा पोलन मिलता है जो की मक्खियों की खुराक होते हैं अधिक शहद इकठा करने के लिए फूलों वाली मुख्य फसलें सरसों, तोरियां, राया गोभी सरसों सफेदा बरसीम सूरजमुखी लीची अरहर टाहली कपास आदि हैं जिन इलाकों में यह फूलके स्रोत के समय समय पर मिलते हैं उन इलाकों में इस व्यवसाय को बहुत कामयाबी के साथ अपनाया जाता है इसमें 100 मक्खी के बक्सों से आप औसतन 25000-30000 तक का मुनाफा ले सकते हैं शुरूआत में यदि आप 100 बक्सों से काम शुरू करते हैं तो औसतन 4-5 लाख तक खर्चा आता है आप अपने बजट के हिसाब से बक्सों की गिणती कम ज्यादा कर सकते हैं बाकी यदि इसकी ट्रेनिंग लेकर शुरू करें तो बढ़िया रहेगा ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने ज़िले के कृषि विज्ञान केंद्र में फॉर्म भर सकते है

Posted by jasvinder
Haryana
17-05-2019 07:19 PM
Jasvinder ji aap bengan aur kaddu ki bijai kar sakte hai. dhanywad
Posted by Gurbinder Singh
Punjab
17-05-2019 07:19 PM
ਗੁਰਬਿੰਦਰ ਜੀ ਸੁੰਡੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ quinalphos @4 ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by kulvinder
Punjab
17-05-2019 07:09 PM
कुलविंदर जी यह कौन सी फसल में हो रहा है, कृपया यह बताएं
Posted by kulvinder
Punjab
17-05-2019 07:05 PM
ਕੁਲਵਿੰਦਰ ਜੀ ਇਹ ਤੱਤ ਦੀ ਕਮੀ ਦੇ ਕਾਰਨ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਬੂਟੇ ਨੂੰ 5 ਕਿੱਲੋ ਵਰਮੀ ਕੰਪੋਸਟ ਪਾਓ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by kuldeep kumar verma
Uttar Pradesh
17-05-2019 06:59 PM
आप उसकी पूंछ पर Topicure स्प्रे लगानी शुरू करें यह आप दिन में 3 बार लगा सकते है इससे जल्दी फर्क पड़ जाएगा

Posted by aakash kumar
Haryana
17-05-2019 06:52 PM
Aap use Tablet Ipraz 10mg ki 3 golia le or 3 din chod ke ekk goli de . Tablet Cipro 500mg ki 6 golia le or 1 goli Rojana Tablet Livocitrzen ki 6 golia le 1 goli Rojana de ji es se jaldi teek ho jaegi
Posted by Radhey Verma
Haryana
17-05-2019 06:17 PM
गर्मियों में पशुओं के लिए 1 क्विंटल भैंसों की फीड में 30 किलो जौं, 40 किलो गेहूं, 15 किलो बड़ेवें की खल, 15 किलो सरसों की खल मिकस करें और गायों के लिए 1 क्विंटल फीड में 35 किलो जौं, 45 किलो गेहूं, 10 किलो बड़ेवें की खल और 10 किलो सरसों की खल मिक्स करके तैयार करें और खिलायें, इस तरीके से पशुओं के लिए बढ़िया फीड तैयार कर सकते हैं .... (Read More)
गर्मियों में पशुओं के लिए 1 क्विंटल भैंसों की फीड में 30 किलो जौं, 40 किलो गेहूं, 15 किलो बड़ेवें की खल, 15 किलो सरसों की खल मिकस करें और गायों के लिए 1 क्विंटल फीड में 35 किलो जौं, 45 किलो गेहूं, 10 किलो बड़ेवें की खल और 10 किलो सरसों की खल मिक्स करके तैयार करें और खिलायें, इस तरीके से पशुओं के लिए बढ़िया फीड तैयार कर सकते हैं बाकि आप किसी बढ़िया कंपनी का मिनरल मिक्सचर भी रोज़ाना 50 ग्राम देते रहें, इससे पशुओं की बढ़िया ग्रोथ होती है यह आपको सस्ती पड़ेगी क्योंकि इसमें से कुछ सामान घर पर ही उपलब्ध होता है जो हमें बाजार से नहीं खरीदना पड़ता

Posted by BUTA SINGH
Punjab
17-05-2019 06:15 PM
ਇਕ ਸਾਲ ਪੁਰਾਣੀਆਂ 8 ਪਾਥੀਆਂ ਨੂੰ ਪਲਾਸਟਿਕ ਦੇ ਡ੍ਰਮ ਵਿੱਚ 35 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਡਬੋ ਦਿਓ 4 ਦਿਨ ਛਾਂਵੇਂ ਰੱਖ ਦਿਓ ਫੇਰ ਪਾਥੀਆਂ ਕੱਢ ਕੇ ਪਾਣੀ ਨੂੰ 90 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਇਹ ਪਾਣੀ ਲਘੂ ਤੱਤਾਂ ਦੀ ਘਾਟ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਕਰਦਾ ਹੈ ਤੇ ਫਸਲ ਦਾ ਚੰਗਾ ਵਿਕਾਸ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਕ ਕਿਲੋ ਆਂਵਲਾ ਲੈ ਕ ਕੁੱਟ ਕੇ ਚਟਨੀ ਬਣਾਓ ਫੇਰ 7 ਲੀਟਰ ਲੱਸੀ ਵਿੱਚ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਇਕ ਹਫਤੇ ਲਈ ਰੱ.... (Read More)
ਇਕ ਸਾਲ ਪੁਰਾਣੀਆਂ 8 ਪਾਥੀਆਂ ਨੂੰ ਪਲਾਸਟਿਕ ਦੇ ਡ੍ਰਮ ਵਿੱਚ 35 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਡਬੋ ਦਿਓ 4 ਦਿਨ ਛਾਂਵੇਂ ਰੱਖ ਦਿਓ ਫੇਰ ਪਾਥੀਆਂ ਕੱਢ ਕੇ ਪਾਣੀ ਨੂੰ 90 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਇਹ ਪਾਣੀ ਲਘੂ ਤੱਤਾਂ ਦੀ ਘਾਟ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਕਰਦਾ ਹੈ ਤੇ ਫਸਲ ਦਾ ਚੰਗਾ ਵਿਕਾਸ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਕ ਕਿਲੋ ਆਂਵਲਾ ਲੈ ਕ ਕੁੱਟ ਕੇ ਚਟਨੀ ਬਣਾਓ ਫੇਰ 7 ਲੀਟਰ ਲੱਸੀ ਵਿੱਚ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਇਕ ਹਫਤੇ ਲਈ ਰੱਖੋ ਫੇਰ ਇਕ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਇਹ ਘੋਲ ਫਸਲ ਨੂੰ ਤਾਕਤ ਦੇਂਦਾ ਹੈ ਇਕ ਕਿਲੋ ਦੁੱਧ ਦਾ ਦਹੀਂ ਜਮਾਂ ਲਓ ( ਮਿੱਟੀ ਦੇ ਵਰਤਣ ਵਿੱਚ) ਫੇਰ ਉਸ ਵਿੱਚ ਇਕ ਤਾਂਬੇ ਦਾ ਵਰਤਨ ਰੱਖੋ,12 ਦਿਨ ਲਈ ਢੱਕ ਕ ਛਾਂਵੇਂ ਰੱਖੋ ,ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਦ ਦਹੀਂ ਨੂੰ ਪਲਾਸਟਿਕ ਦੇ ਵਰਤਨ ਵਿੱਚ ਪਾ ਕੇ 3 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਪਾ ਲਓ ,ਇਹ ਪੰਜ ਲੀਟਰ ਘੋਲ ਨੂੰ ਇਕ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ,ਇਹ ਘੋਲ 25 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਖਾਦ ਦਾ ਕੰਮ ਕਰਦਾ ਹੈ

Posted by lali Bachhal
Haryana
17-05-2019 06:10 PM
PR 126: यह किस्म पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी द्वारा जारी की गयी है जो की सामान्य खेती के लिए पंजाब में उगाई जाती है यह 123 दिनों में पक जाती है यह किस्म झुलस रोग को सहने योग्य है इसकी औसतन पैदावार 30 क्विंटल प्रति एकड़ है

Posted by sarbjit
Punjab
17-05-2019 06:06 PM
ਜੇਕਰ ਗਾਂ ਵਾਰ ਵਾਰ ਰਪੀਟ ਹੋ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਇਸਦੀ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ Utrawin-oz ਦਵਾਈ 3 ਦਿਨ ਲਗਾਤਾਰ ਭਰਵਾਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Bovimin-B ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ Concimax bolus ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ-ਇਕ ਗੋਲੀ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ 14 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ, ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ ਇਹ ਗੋਲੀਆਂ 15 ਦਿਨ ਤਕ ਹੋਰ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ .
Posted by Jeet Yaduvanshi
Uttar Pradesh
17-05-2019 06:02 PM
गमलों का चयन: बोन्साई के लिए आम गमले का प्रयोग नहीं किया जाता खासतौर पर उनकी गहराई बहुत ज़्यादा नहीं होती, परन्तु वह गोलाकार, अंडाकार, चारकोने, 6 किनारे आदि किसी भी तरह के दिखाई देने वाले हो सकते हैं
पौधे का चयन: बोन्साई तैयार करने के लिए पौधे का चयन सबसे अहम ज़रूरी है, क्योंकि हर पौधे का विकास और दिखावट अलग ही.... (Read More)
गमलों का चयन: बोन्साई के लिए आम गमले का प्रयोग नहीं किया जाता खासतौर पर उनकी गहराई बहुत ज़्यादा नहीं होती, परन्तु वह गोलाकार, अंडाकार, चारकोने, 6 किनारे आदि किसी भी तरह के दिखाई देने वाले हो सकते हैं
पौधे का चयन: बोन्साई तैयार करने के लिए पौधे का चयन सबसे अहम ज़रूरी है, क्योंकि हर पौधे का विकास और दिखावट अलग ही होती है और हर पौधे को बोन्साई रूप दिया भी नहीं जा सकता हमरे वातावरण हालात में जिन पौधों को इस काम के लिए प्रयोग किया जाता है- पीपल, बोहड़, पिलकन, चिलकन, शहतूत, चील्ह, आड़ू, अनार, नारंगी, चाइना रोज़, विसटीरिया, जूनीपर्स, करोंदा, नींम, आम, बोगनविलिया, अढ़ीनियम, बोतलबुर्श आदि मुख्य रूप में है
पौधे लगाना: गमलों में सिर्फ मिट्टी ही नहीं डाली जाती, गमले के बीच के छेद ढकने के समय नीचे की तह बहुत बारीक, कंकर पत्थर आदि की होनी चाहिए और उसके बाद मिट्टी, गली हुई गोबर की खाद आदि का मिश्रण तैयार करने के समय पौधा लगाया जाता है
पौधे लगाने के बाद ही असल का शुरू होता है कि उसकी कांट-छांट समय पर सही तरीके से करनी चाहिए कुछ समय के बाद जड़ों का गुच्छा बन जाता है, फिर री-पोटिंग की ज़रूरत होती है मतलब यह है कि पौधे को गमले में से बाहर निकालकर उसकी अतिरिक्त कड़ों की कांट-छांट की जाती है खाद का भी खास ध्यान रखना चाहिए ताकि वृद्धि सही तरीके से हो पौधे को खूबसूरत और अनोखा रूप देने के लिए तारों की लपेट की जाती है जिसके लिए तांबे की तार या एल्युमीनियम की तार का प्रयोग किया जाता है सभी कामों को सही रूप में करने के लिए अनेक तरह के उपकरणों की ज़रूरत पड़ती है जो मार्किट में से आसानी से मिल जाते है गर्मी और सर्दी की ऋतु के हिसाब को देखते ही पानी लगाया जाता है
Posted by Harsh
Haryana
17-05-2019 06:01 PM
हर्ष जी कृपया फोटो भेजें ताकि आपको उचित जानकारी दी जा सके, धन्यवाद

Posted by kulwinder singh
Punjab
17-05-2019 06:01 PM
यह किस्म 144 दिन का समय लेती है और इसकी उपज 31 क्विंटल प्रति एकड़ है

Posted by Pardeep punnu
Punjab
17-05-2019 05:45 PM
धान की पनीरी तैयार करने की तिथि 13-15 मई है और 13 जून से आप इसे मुख्य खेत में लगा सकते हैं
Posted by gurichahal
Punjab
17-05-2019 05:32 PM
ਇਸ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਦੀਆਂ ਵੱਖ ਵੱਖ ਕਿਸਮਾਂ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਪਾਣੀ ਸੋਖਣ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਘੱਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦੀ pH 5.0 ਤੋਂ 9.5 ਵਿਚਕਾਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਤੇ ਵੀ ਉਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈI ਝੋਨੇ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ ਰੇਤਲੀ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਗਾਰੀ ਅਤੇ ਚੀਕਣੀ ਮਿੱਟੀ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਸੋਖਣ ਦੀ ਯੋਗਤਾ ਘੱਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਇਸ ਫ਼ਸਲ ਲਈ ਵਧੀਆ ਮੰਨੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ I
Posted by gurjeet
Punjab
17-05-2019 05:29 PM
Gurjeet ji har boote di air layering nahi hundi sirf nimbu di possible hai oh feb-march ate aug-september mahine vich kiti jandi hai.dhanwad

Posted by ਜਸਵੀਰ ਸਿੰਘ
Punjab
17-05-2019 05:18 PM
ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਕਰਵਾਉਣ ਲਈ ਸਰਕਾਰੀ ਸੂਰ ਫਾਰਮ ਬਣੇ ਹਨ ਜਿਵੇ ਮੱਲੋਵਾਲ, ਖਰੜ, ਨਾਭਾ , ਗੁਰਦਾਸਪੁਰ ਵਿੱਚ ਜਿੱਥੇ 5 ਦਿਨ ਦੀ ਮੁਫਤ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬਾਕੀ ਇਸ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਵਿੱਚ ਵੀ ਟ੍ੇਨਿੰਗ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀ ਉੱਥੇ ਵੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦੇ ਲਈ ਆਪਣਾ ਫਾਰਮ ਭਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਜ਼ਿਲੇ ਦੇ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਵਿ.... (Read More)
ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਕਰਵਾਉਣ ਲਈ ਸਰਕਾਰੀ ਸੂਰ ਫਾਰਮ ਬਣੇ ਹਨ ਜਿਵੇ ਮੱਲੋਵਾਲ, ਖਰੜ, ਨਾਭਾ , ਗੁਰਦਾਸਪੁਰ ਵਿੱਚ ਜਿੱਥੇ 5 ਦਿਨ ਦੀ ਮੁਫਤ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬਾਕੀ ਇਸ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਵਿੱਚ ਵੀ ਟ੍ੇਨਿੰਗ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀ ਉੱਥੇ ਵੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦੇ ਲਈ ਆਪਣਾ ਫਾਰਮ ਭਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਜ਼ਿਲੇ ਦੇ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਵਿੱਚ ਵੀ ਟ੍ੇਨਿੰਗ ਦੇ ਲਈ ਫਾਰਮ ਭਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਉੱਥੇ ਵੀ ਟ੍ੇਨਿੰਗ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਕੋਈ ਪੱਕੀ ਮਿਤੀ ਨਹੀ ਹੈ ਤੁਸੀ ਫਾਰਮ ਭਰ ਦਿਓ ਜਦੋਂ ਟ੍ਰੈਨਿੰਗ ਹੋਈ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕਾਲ ਕਰਕੇ ਬੁਲਾ ਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ

Posted by Gurdeep Singh chahal
Punjab
17-05-2019 05:18 PM
यह पकने में 135-137 दिन लेता है और इसकी उपज 28-29 क्विंटल प्रति एकड़ है
Posted by Avdesh Chauhan
Uttar Pradesh
17-05-2019 05:18 PM
sir g jaivik khaad ka ghol banaiye k liye buffalo ya bail ka paishab bhi paryog kar saktai hai kya ?
Avdesh Chauhan ji agar gobar aur mootr desi gaye ka ho to vo jyada faydemand hota hai.dhanwad
Posted by Gurveer sidhu
Punjab
17-05-2019 05:08 PM
gurveer ji tuc chari de uper hoshi@400ml nu prati litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by jashan
Punjab
17-05-2019 04:59 PM
ਖਰਗੋਸ਼ ਫਾਰਮ ਵਿਚ ਤੁਸੀ ਤਾਪਮਾਨ ਠੀਕ ਰੱਖਣ ਲਈ ਸ਼ੈਡ ਦੇ ਕਿਨਾਰਿਆਂ ਦੇ ਬੋਰੀਆਂ ਲਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਜੋ ਸੇਬੇ ਦੀਆ ਬੋਰੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹੈ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਗਿਲਾ ਕਰਕੇ ਰੱਖੋ ਜਿਸ ਨਾਲ ਅੰਦਰ ਤਾਪਮਾਨ ਠੀਕ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਖਿੜਕੀਆਂ ਤੇ ਵੀ ਲਗਾ ਦਿਓ ਜਿਸ ਨਾਲ ਠੰਡੀ ਹਵਾ ਅੰਦਰ ਆਉਂਦੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ.

Posted by Gurpreet Singh
Punjab
17-05-2019 04:57 PM
हांजी इसका उपयोग आप इस साल भी कर सकते हैं, इसमें कोई समस्या नहीं है, जो एक छोटे पैकेट में बीज आता है जो कि इसके अंदर ही है उसका उपयोग न करें, सर 776 जो बड़े पैकेट में है उसका उपयोग करें

Posted by Preet SanDhu
Punjab
17-05-2019 04:54 PM
tuci uss nu hun calcium dena bnnd kr deo ji, uss nu tuci hun vitum-h liquid 10ml rojana dena suru kro ate usdi khurak da purra dian rkho, usdi Deworming v krwao uss nu tuci Flukarid-ds bolus deworming lai deo ji..

Posted by ਅਜੀਤ ਸਿੰਘ ਕਾਹਲੋਂ
Punjab
17-05-2019 04:52 PM
ਫਲ ਦੀ ਮੱਖੀ: ਇਹ ਅਮਰੂਦ ਦੇ ਬੂਟੇ ਨੂੰ ਲੱਗਣ ਵਾਲਾ ਖਤਰਨਾਕ ਕੀੜਾ ਹੈ ਮਾਦਾ ਮੱਖੀ ਨਵੇਂ ਲੱਗਣ ਵਾਲੇ ਫਲਾਂ ਦੇ ਅੰਦਰਲੇ ਪਾਸੇ ਅੰਡੇ ਦੇ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਇਹ ਕੀੜੇ ਇਸ ਦਾ ਗੁੱਦਾ ਖਾਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਫ਼ਲ ਗਲ ਕੇ ਡਿੱਗ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਫ਼ਲ ਉਤੇ ਮੱਖੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਪਹਿਲਾਂ ਵੀ ਹੁੰਦਾ ਰਿਹਾ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਬਰਸਾਤੀ ਮੌਸਮ ਵਿਚ ਬੂਟਿਆਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਨਹੀਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਫ਼.... (Read More)
ਫਲ ਦੀ ਮੱਖੀ: ਇਹ ਅਮਰੂਦ ਦੇ ਬੂਟੇ ਨੂੰ ਲੱਗਣ ਵਾਲਾ ਖਤਰਨਾਕ ਕੀੜਾ ਹੈ ਮਾਦਾ ਮੱਖੀ ਨਵੇਂ ਲੱਗਣ ਵਾਲੇ ਫਲਾਂ ਦੇ ਅੰਦਰਲੇ ਪਾਸੇ ਅੰਡੇ ਦੇ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਇਹ ਕੀੜੇ ਇਸ ਦਾ ਗੁੱਦਾ ਖਾਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਫ਼ਲ ਗਲ ਕੇ ਡਿੱਗ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਫ਼ਲ ਉਤੇ ਮੱਖੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਪਹਿਲਾਂ ਵੀ ਹੁੰਦਾ ਰਿਹਾ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਬਰਸਾਤੀ ਮੌਸਮ ਵਿਚ ਬੂਟਿਆਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਨਹੀਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਫ਼ਸਲ ਦੀ ਤੁੜਾਈ ਸਹੀ ਸਮੇਂ ਕਰ ਲੈਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਤੁੜਾਈ ਵਿਚ ਦੇਰੀ ਨਹੀਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਪੀੜਤ ਟਾਹਣੀਆਂ ਅਤੇ ਫ਼ਲਾਂ ਨੂੰ ਤੋੜ ਕੇ ਖੇਤ ਵਿਚੋਂ ਬਾਹਰ ਸੁੱਟ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਫ਼ਲਾਂ ਦੇ ਪੱਕਣ ਵੇਲੇ 80 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਫੈਨਵਾਲਰੇਟ ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਘੋਲ ਕੇ ਹਫ਼ਤੇ ਦੇ ਵਕਫ਼ੇ ਬਾਅਦ ਬੂਟਿਆਂ ਉਤੇ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਫੈਨਵਾਲਰੇਟ ਦੇ ਛਿੜਕਾਅ ਤੋਂ ਤੀਸਰੇ ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਫ਼ਲਾਂ ਦੀ ਤੁੜਾਈ ਕਰ ਲੈਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ

Posted by Kulwinder Sidhu
Rajasthan
17-05-2019 04:51 PM
कुलविंदर जी आप किस्मे जैसे Allahbad Sufeda: यह दरमियाने कद की किस्म है जिसका बूटा गोलाकार होता है इसकी टहनियां फैली हुई होती हैं इसका फल नर्म और गोल आकार का होता है इसके गुद्दे का रंग सफेद होता है जिस में से आकर्षित खुशबू आती है इसमें टी एस एस की मात्रा 10 से 12 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 145 किलो प्रति वृक्ष होती .... (Read More)
कुलविंदर जी आप किस्मे जैसे Allahbad Sufeda: यह दरमियाने कद की किस्म है जिसका बूटा गोलाकार होता है इसकी टहनियां फैली हुई होती हैं इसका फल नर्म और गोल आकार का होता है इसके गुद्दे का रंग सफेद होता है जिस में से आकर्षित खुशबू आती है इसमें टी एस एस की मात्रा 10 से 12 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 145 किलो प्रति वृक्ष होती है Sardar: इसे एल 49 के नाम से भी जाना जाता है यह छोटे कद वाली किस्म है, जिसकी टहनियां काफी घनी और फैली हुई होती हैं इसका फल बड़े आकार और बाहर से खुरदुरा जैसा होता है इसका गुद्दा क्रीम रंग का होता है खाने को यह नर्म, रसीला और स्वादिष्ट होता है इसमें टी एस एस की मात्रा 10 से 12 प्रतिशत होती है इसकी प्रति बूटा पैदावार 130 से 155 किलोग्राम तक होती है
Lalit: यह किस्म सैंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रोपीकल हॉर्टीकल्चर द्वारा जारी की गई है इसके अंदर का गुद्दा गुलाबी रंग का और बाहर का छिल्का केसरी रंग का होता है यह किस्म किस्म से 24 प्रतिशत अधिक उपज देती है यह किस्म खाने और अन्य उत्पाद बनाने के लिए उपयुक्त किस्म है इंस्टीट्यूट द्वारा इस पौधे को कम कीमतों पर उपलब्ध करवाया जा रहा है CISH-G-1: इस किस्म का गहरा लाल रंग का फल होता है, जो कि खाने में मीठा होता है इस किस्म के फल आकर्षित होते हैं जिनके बीज नर्म होते हैं यह किस्म निर्यात उद्देश्यों के लिए उपयुक्त किस्म है CISH-G-2: इस किस्म के फल का गुद्दा लाल रंग का और छिल्के पर सफेद रंग की धारियां होती हैं फल के बीज नर्म होते हैं CISH-G-4: फल आकार में गोल और स्वाद में मीठे होते हैं फल के बीज कुछ हद तक नर्म होते हैं यह एक अच्छी उपज वाली किस्म है

Posted by kamal
Haryana
17-05-2019 04:51 PM
खुम्ब की खेती अच्छे हवादार कमरे, शैड, बेसमैंट, गैरेज आदि में की जा सकती है पैडी स्ट्रॉ खुम्ब को बाहर शैड वाले स्थान पर उगाया जा सकता है भारत में तीन प्रकार के खुम्ब को उगाया जा सकता है बटन खुम्ब इस किस्म को पूरे विश्व में उगाया जाता है और पूरे वर्ष उगाया जा सकता है, सफेद बटन खुम्ब में उच्च मात्रा में प्रोटीन हो.... (Read More)
खुम्ब की खेती अच्छे हवादार कमरे, शैड, बेसमैंट, गैरेज आदि में की जा सकती है पैडी स्ट्रॉ खुम्ब को बाहर शैड वाले स्थान पर उगाया जा सकता है भारत में तीन प्रकार के खुम्ब को उगाया जा सकता है बटन खुम्ब इस किस्म को पूरे विश्व में उगाया जाता है और पूरे वर्ष उगाया जा सकता है, सफेद बटन खुम्ब में उच्च मात्रा में प्रोटीन होता है इसका ताजा और डिब्बा बंद उपभोग किया जा सकता है इसकी औषधीय विशेषताएं हैं हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, आंध्रा प्रदेष, तामिलनाडू और कर्नाटक मुख्य खुम्ब उगाने वाले राज्य हैं यू पी में खुम्ब को उगाने के लिए नवंबर से मार्च का महीना उपयुक्त होता है अच्छी वृद्धि के लिए इसे 22-25 डिगरी सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है और खुम्ब निकलते समय इसे 14-18 डिगरी सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है स्ट्रॉ खुम्ब यह पूरे विश्व में उगाई जाने वाली तीसरी सबसे प्रसिद्ध किस्म है इसे कपास के व्यर्थ मिश्रण के साथ पराली की छोटी मात्रा के ऊपर उगाया जाता है यह छोटे आकार की खुम्ब होती हैं जो कि कोण के आकार की होती हैं इसकी टोपी ऊपर से गहरे भूरे रंग की होती है भारत में इसकी तीन प्रजातियां हैं V. diplasia, V. volvacea and V. esculenta इन प्रजातियों के अलावा उत्तर प्रदेश में Volvariella volvacea की खेती की जाती है इसे “चाइनीज़” या “पैडी” खुम्ब के रूप में भी जाना जाता है इन्हें बड़े स्तर पर उष्णकटिबंधीय और उपउष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगाया जाता है इन्हें 35 डिगरी सेल्सियस के तापमान पर उगाया जा सकता है इस किस्म की खुम्ब की खेती के लिए अप्रैल से सितंबर का समय उपयुक्त होता है ओइस्टर खुम्ब या ढींगरी खुम्ब यह सामान्य और खाने योग्य खुम्ब है इसका गुद्दा नर्म, मखमली बनावट और अच्छा स्वाद होता है यह प्रोटीन, फाइबर और विटामिन बी1 से बी 12 का उच्च स्त्रोत है इस किस्म की सभी प्रजातियां और किस्में खाने योग्य हैं सिर्फ P. olearius और P. nidiformis को छोड़कर, ये ज़हरीली होती हैं उड़ीसा, महाराष्ट्र, आंध्रा प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिमी बंगाल और उत्तर पूर्व के पहाड़ी क्षेत्र मुख्य राज्य हैं जो खुम्ब का उत्पादन करते हैं इस खुम्ब को उगाने का उपयुक्त समय अक्तूबर से मार्च तक का है यह 20-30 डिगरी सेल्सियस तापमान के साथ 80-85 प्रतिशत आर्द्रता को सहने योग्य है स्पान (बीज) की तैयारी सबस्ट्रेट की तैयारी सबस्ट्रेट की स्पॉनिंग फसल का प्रबंधन स्पान की तैयारी स्पान / खुम्ब के बीजों की तैयारी ये बाज़ार में उपलब्ध होते हैं इन्हें खेत में भी तैयार या उत्पादन किया जा सकता है ताजे तैयार किए हुए खुम्ब के बीज प्रयोग के लिए सबसे अच्छे होते हैं सबस्ट्रेट की तैयारी खुम्ब की खेती बडी़ मात्रा में खेत के व्यर्थ पदार्थ और अन्य सामग्री जैसे व्यर्थ कागज़, कपास का व्यर्थ पदार्थ, अनाज की पराली आदि पर की जा सकती है धान की पराली और गेहूं की पराली मुख्य तौर पर प्रयोग होने वाली सामग्री हैं जिनका प्रयोग सब्स्ट्रेट की तैयारी के लिए किया जाता है ओइस्टर को पॉलीथीन बैग में उगाया जाता है कार्बेनडाज़ि़म 7 ग्राम के साथ फॉरमालीन 125 मि.ली. को 100 लीटर पानी में मिलाकर डालें और एक मिश्रण तैयार करें ऊपर दिए गए मिश्रण में 20 किलो गेहूं की पराली डालें और इसे 18 घंटे के लिए रख दें 18 घंटों के बाद गेहूं की पराली को हटा दें और इसे एक सतह पर रखें और इसमें से अतिरिक्त पानी को निकाल दें गेहूं की पराली में 2 प्रतिशत बीज डालें और इस मिश्रण को 15x12 इंच के पॉलीथीन बैग में भरें पॉलीथीन बैग 2 मि.मी. अर्द्ध व्यास से छिद्रित हो हवा परिसंचरण के लिए पूरी सतह पर लगभग 4 सैं.मी. के छेद हों उसके बाद बैग को 80-85 प्रतिशत आर्द्रता वाले कमरे में शैल्फ पर रखें कमरे का तापमान 24-26 डिगरी सेल्सियस होना चाहिए बैगों को सुरक्षित जगह पर रखें और पानी के छिड़काव द्वारा इनमें नमी बनाए रखें पराली पर सफेद रंग की सूती माइसीलियम विकसित हो जाती है गेहूं की पराली अपना रंग बदलकर भूरे रंग की हो जाती है और आवाज करती है और सिकुड़ जाती है इस अवस्था में पॉलीथीन को काट कर निकाल दें पॉलीथीन में पराली सिकुड़ जाती है और बेलनाकार हो जाती है इन बेलनाकार पराली के आकार को शैल्फ पर लगाएं और इनमें पानी के छिड़काव द्वारा नमी बनाए रखें स्पॉनिंग के 18-20 दिन बाद पहली खुम्ब दिखनी शुरू हो जाती है एक सप्ताह के अंतराल पर दो से तीन खुम्ब दिखनी शुरू हो जायेंगी जब खुम्ब की टोपी मुड़ना शुरू हो जाये तो खुम्ब की तुड़ाई कर लें तुड़ाई के लिए तीखे चाकू का प्रयोग करें और इसे उंगलियों से मरोड़ कर भी तोड़ा जा सकता है इसे ताजा भी खाया जा सकता है या धूप में या मशीनी ड्रायर से सुखाकर इसका प्रयोग किया जा सकता है 45-60 दिनों के अंदर अंदर एक टन सूखी पराली से 500 किलो से ज्यादा ताजी खुम्ब प्राप्त की जा सकती है

Posted by Gurdeep Singh chahal
Punjab
17-05-2019 04:50 PM
ਬਾਸਮਤੀ 1718, 136-138 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੇ ਝਾੜ 18-20 qtl/acre ਦਿੰਦੀ ਹੈ Pusa Punjab Basmati 1509: ਇਹ ਜਲਦੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ ਕਿ 120 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਝੁਲਸ ਰੋਗ ਨੂੰ ਸਹਿਣਯੋਗ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਪਕਾਉਣ ਦੀ ਯੋਗਤਾ ਵਧੀਆਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 15.7 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ

Posted by jagtar singh
Punjab
17-05-2019 04:45 PM
jagtar ji jekar paniri uper to peeli pai rahi hai ta isde vich lohe di kami hai. isdi roktham de layi ferrous sulphate 1% @1 killo nu prati aikad de hisab nal spray karen.jekar chelated ferrous sulphate di spray karni hai ta isdi matra 200 gram prati aikad hundi hai. jekar hale tak urea nahi payi ta 3 killo prati knal de hisab nal pao.kayi var paniri nitrogen di kami de karn vi paniri peeli honi shuru ho jandi hai.
Posted by Parwinder singh
Punjab
17-05-2019 04:01 PM
आप बकरी को पेट के कीड़ों के लिए आनार का छिलका सूखाकर फिर पाउडर बनाकर रोजाना 10 ग्राम दे सकते है या फिर खट्टी लस्सी 50 मि.ली. रोजाना दे सकते है इसके लिए आप नीम के पत्ते भी खिला सकते है इससे भी पेट के कीड़े खत्म हो जाते है
Posted by Amandeep Singh Batth
Punjab
17-05-2019 04:00 PM
Amandeep ji eh tat di kami de karn hunde han isde layi tuc calcium nitrate ate 13:00:45 di varto karo. dhanwad
Posted by Ranjeet singh
Punjab
17-05-2019 04:00 PM
Ranjeet ji kirpa karke is kisam da poor nam daso ta jo tuahnu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by Guri Dalio
Punjab
17-05-2019 03:54 PM
Mobile te jmeen di fard lai tusi eh link te click karo. http://210.212.41.167/frmSelectDistrict.aspx
Posted by Babulal meena
Rajasthan
17-05-2019 03:51 PM
बाबू लाल जी डेयरी लोन के लिए सबसे पहले आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी ज़रूरी है, उसके बाद आप अपना लोन ले सकते हैं , इसके बार्रे में पूरी जानकारी के लिए आप डॉ.अनिल 9660669992 से संपर्क करें

Posted by AMIT DHAGE
Maharashtra
17-05-2019 03:43 PM
जी हां सीमेंट के टैंक में भी छलियां तैयार की जा सकती हैं जी

Posted by Balkrishna Mittha
Maharashtra
17-05-2019 03:43 PM
मोती पालन के फायदे - मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो आपको अन्य लोगो से अलग करता है .वही लोग इस व्यवसाय को कर सकते है ..जिनकी सोच कुछ अलग करने की हो .. (1) एक एकड़ में पारंपरिक खेती से 50000/- का मुनाफा हो सकता है और मोती पालन से 8-10 लाख (2) एक तालाब में बहुउदेशीय योजनाओ का लाभ लेके 8-10 प्रकार के व्यापर करके आय मे बृद्धि (3) जमीन में ज.... (Read More)
मोती पालन के फायदे - मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो आपको अन्य लोगो से अलग करता है .वही लोग इस व्यवसाय को कर सकते है ..जिनकी सोच कुछ अलग करने की हो .. (1) एक एकड़ में पारंपरिक खेती से 50000/- का मुनाफा हो सकता है और मोती पालन से 8-10 लाख (2) एक तालाब में बहुउदेशीय योजनाओ का लाभ लेके 8-10 प्रकार के व्यापर करके आय मे बृद्धि (3) जमीन में जल स्तर को बढ़ाकर सरकार की मदद (4) बचे हुए सामान से हस्तकला उद्योग को बढ़ावा देना (5) यदि महिला वर्ग इस व्यवसाय में आते है तो ज्यादा फायदे है क्योकि मोती के आभूषण के साथ साथ मदर ऑफ़ पर्ल (Shell jewellery) का भी फायदा ले सकते है (6) आसपास के लोगो को रोजगार अधिक जानकारी संपर्क करे ..अमित बमोरिया 9407461361 9770085381 बमोरिया मोती सम्बर्धन केंद्र मध्य प्रदेश https://m.bhaskar.com/news/MP-HOSH-quitting-govt-job-engineer-is-earning-money-from-pearl-cultivation-news-hindi-5533297-PHO.html

Posted by मलकीत गुर्जर
Haryana
17-05-2019 03:41 PM
कृपया आप अपना सवाल विसतर से पूछें कि आप इसके मार्किट रेट के बारे में जानकारी लेना चाहते है या इसके बीज के बारे में ताकि आपको उसके हिसाब से जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by Iqbal singh
Punjab
17-05-2019 03:36 PM
1121: ਇਸਦਾ ਪੌਦਾ ਲੰਬਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 137 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਪੱਕਣ ਦੀ ਗੁਣਵੱਤਾ ਵਧੀਆਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 13.7 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਰੇਟ ਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਡੀਲਰ ਕੋਲੋਂ ਹੀ ਮਿਲੇਗੀ ਕਿਉਕਿ ਇਹ ਇਕ ਪ੍ਰਾਇਵੇਟ ਕੰਪਨੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Dhanraj patel
Uttar Pradesh
17-05-2019 03:30 PM
अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी, जिसमें जैविक तत्व उच्च मात्रा में होते हैं करेले की खेती के लिए उपयुक्त है मिट्टी की पी एच 6.5-7.5 करेले की खेती के लिए सबसे अच्छी रहती है Pusa Do Mousami: यह गर्मियों के साथ साथ खरीफ के मौसम के लिए उपयुक्त किस्म है इसके फल मध्यम, लंबे और हरे रंग के होते हैं यह किस्म बिजाई के 55 दिनों के .... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी, जिसमें जैविक तत्व उच्च मात्रा में होते हैं करेले की खेती के लिए उपयुक्त है मिट्टी की पी एच 6.5-7.5 करेले की खेती के लिए सबसे अच्छी रहती है Pusa Do Mousami: यह गर्मियों के साथ साथ खरीफ के मौसम के लिए उपयुक्त किस्म है इसके फल मध्यम, लंबे और हरे रंग के होते हैं यह किस्म बिजाई के 55 दिनों के बाद पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है Pusa Vishesh: इसके फल हरे, पतले और मध्यम आकार के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 48-52 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Arka Harit: इसके फल चमकदार हरे रंग के होते हैं यह किस्म बिजाई के 120 दिनों के बाद तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है इसके फल कम बीज वाले होते हैं और कम कड़वे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 52 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kashi Harit: इसके फल गहरे हरे रंग के होते हैं यह किस्म बिजाई के 50 दिनों के बाद तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kashi Urvashi: इस किस्म के फल सीधे और हरे रंग के होते हैं यह किस्म बिजाई के 60 दिनों के बाद पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Priya: इसके फल लगभग 40 सैं.मी. लंबे होते हैं यह किस्म बिजाई के 60 दिनों के बाद पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है Kalyanpur Baramansi: इस किस्म के फल हल्के हरे रंग के 30-50 सैं.मी. लंबे होते हैं यह किस्म बारिश के मौसम में खेती के लिए उपयुक्त होती है Faijabadi: यह स्थानीय किस्म है इसके फल लंबे, मध्यम आकार के और गहरे हरे रंग के होते हैं Pant Karela 1: इसके फल मोटे होते हैं यह 55 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 60 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Hybrid 2: इसके फल मध्यम लंबे, मोटे और चमकदार हरे होते हैं गर्मियों के मौसम में, बिजाई के लिए फरवरी से मार्च और खरीफ के मौसम के लिए, जून से जुलाई का महीना उपयुक्त होता है पहाड़ी क्षेत्रों में, मार्च से अप्रैल में बिजाई पूरी कर लें
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