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Posted by Raj Kushwaha
Uttar Pradesh
19-05-2019 11:13 AM
Haryana
05-20-2019 04:52 PM
व्हाट्सएप नंबर पर बात करें 9053842542
Posted by Mandeep Singh bhathal
Punjab
19-05-2019 11:09 AM
Punjab
05-19-2019 05:56 PM
ਬੀਜ ਨੂੰ ਬੀਜਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਬਾਵਿਸਟਨ 50 ਡਬਲਯੂ ਪੀ 0•2% (20 ਗ੍ਰਾਮ) + ਸਟਰੈਪਟੋਸਾਈਕਲੀਨ 0•01% ( 1 ਗ੍ਰਾਮ) 10 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਾਲੇ ਘੋਲ ਵਿੱਚ 12 ਘੰਟੇ ਤੱਕ ਡੁਬੋ ਦਿਉ ਪਨੀਰੀ ਪੁੱਟ ਕੇ ਖੇਤ ਵਿਚ ਲਾਉਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਵੀ ਉਸਦੀਆਂ ਜੜ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਬਾਵਿਸਟਨ 50 ਡਬਲਯੂ ਪੀ 0•2 %( 20 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ 10 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ) ਦੇ ਘੋਲ ਵਿੱਚ 6 ਘੰਟੇ ਤੱਕ ਡੁਬੋ ਦਿਉ ਇਸ ਲਈ ਅਸੀਂ ਪੁੱਟੀ ਗਈ ਪਨੀਰੀ ਦੀਆਂ ਗੁੱਟੀਆਂ ਨੂੰ ਕਿ.... (Read More)
ਬੀਜ ਨੂੰ ਬੀਜਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਬਾਵਿਸਟਨ 50 ਡਬਲਯੂ ਪੀ 0•2% (20 ਗ੍ਰਾਮ) + ਸਟਰੈਪਟੋਸਾਈਕਲੀਨ 0•01% ( 1 ਗ੍ਰਾਮ) 10 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਾਲੇ ਘੋਲ ਵਿੱਚ 12 ਘੰਟੇ ਤੱਕ ਡੁਬੋ ਦਿਉ ਪਨੀਰੀ ਪੁੱਟ ਕੇ ਖੇਤ ਵਿਚ ਲਾਉਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਵੀ ਉਸਦੀਆਂ ਜੜ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਬਾਵਿਸਟਨ 50 ਡਬਲਯੂ ਪੀ 0•2 %( 20 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ 10 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ) ਦੇ ਘੋਲ ਵਿੱਚ 6 ਘੰਟੇ ਤੱਕ ਡੁਬੋ ਦਿਉ ਇਸ ਲਈ ਅਸੀਂ ਪੁੱਟੀ ਗਈ ਪਨੀਰੀ ਦੀਆਂ ਗੁੱਟੀਆਂ ਨੂੰ ਕਿਸੇ ਪਾਣੀ ਦੇ ਚੁਬੱਚੇ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਖੜਾ ਕੇ ਉਸ ਵਿੱਚ ਦੱਸੇ ਅਨੁਸਾਰ ਦਵਾਈ ਪਾ ਕੇ ਪਨੀਰੀ ਦੀਆਂ ਜੜ੍ਹਾਂ 6 ਘੰਟੇ ਲਈ ਭਿੱਜੀਆਂ ਰਹਿਣ ਦਿਉ, ਉਪਰੰਤ ਪਨੀਰੀ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਾ ਦਿਉ ਜਾਂ ਬੀਜ ਨੂੰ ਬੀਜਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਬਾਵਿਸਟਨ 50 ਡਬਲਯੂ ਪੀ 0•2% (20 ਗ੍ਰਾਮ) + ਸਟਰੈਪਟੋਸਾਈਕਲੀਨ 0•01% ( 1 ਗ੍ਰਾਮ) 10 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਾਲੇ ਘੋਲ ਵਿੱਚ 12 ਘੰਟੇ ਤੱਕ ਡੁਬੋ ਦਿਉ ਫਿਰ ਬੀਜਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਟਰਾਈਕੋਡਰਮਾ ਹਰਜੀਐਨਮ 15 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸੋਧ ਲਉ ਪਨੀਰੀ ਪੁੱਟ ਕੇ ਖੇਤ ਵਿਚ ਲਾਉਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਉਸ ਦੀਆਂ ਜੜ੍ਹਾਂ ਵੀ ਟਰਾਈਕੋਡਰਮਾ ਹਰਜੀਐਨਮ 15 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ 6 ਘੰਟੇ ਤੱਕ ਡੁਬੋ ਕੇ ਰੱਖੋ ਟਰਾਈਕੋਡਰਮਾ ਹਰਜੀਐਨਮ ਪੰਜਾਬ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਤੋਂ ਲਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈI
Posted by karanvir singh
Punjab
19-05-2019 11:09 AM
Punjab
05-22-2019 11:32 AM
ਨਿੰਮ ਦੇ ਤੇਲ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ, ਨਿੰਮ ਦੇ ਬੀਜ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਨਿੰਮ ਦੇ ਬੀਜ ਇਕੱਠੇ ਕਰੋ ਅਤੇ ਇਸਨੂੰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਉਬਾਲੋ ਇਸ ਨੂੰ 40-50 ਮਿੰਟ ਲਈ ਉਬਾਲੋ, ਉਬਾਲਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਾਣੀ ਅਤੇ ਨਿੰਮ ਦੇ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਠੰਡਾ ਕਰੋ ਠੰਢਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ, ਨਿੰਮ ਦੇ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਰਗੜੋ ਰਗੜਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇਸ ਨੂੰ ਕੱਪੜੇ ਨਾਲ ਛਾਣ ਲਓ ਉਬਾਲਣ ਦੇ ਸਮੇਂ ਤੁਸੀਂ ਨਿੰਮ ਦੇ ਪੱਤੇ, ਧਤੂਰਾ ਦੇ ਪੱਤੇ .... (Read More)
ਨਿੰਮ ਦੇ ਤੇਲ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ, ਨਿੰਮ ਦੇ ਬੀਜ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਨਿੰਮ ਦੇ ਬੀਜ ਇਕੱਠੇ ਕਰੋ ਅਤੇ ਇਸਨੂੰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਉਬਾਲੋ ਇਸ ਨੂੰ 40-50 ਮਿੰਟ ਲਈ ਉਬਾਲੋ, ਉਬਾਲਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਾਣੀ ਅਤੇ ਨਿੰਮ ਦੇ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਠੰਡਾ ਕਰੋ ਠੰਢਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ, ਨਿੰਮ ਦੇ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਰਗੜੋ ਰਗੜਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇਸ ਨੂੰ ਕੱਪੜੇ ਨਾਲ ਛਾਣ ਲਓ ਉਬਾਲਣ ਦੇ ਸਮੇਂ ਤੁਸੀਂ ਨਿੰਮ ਦੇ ਪੱਤੇ, ਧਤੂਰਾ ਦੇ ਪੱਤੇ ਅਤੇ Asafoetidia (ਹਿੰਗ) ਨੂੰ ਵੀ ਮਿਲਾ ਸਕਦੇ ਹੋ neem seeds@300ml ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਨੁਕਸਾਨਦਾਇਕ ਕੀੜਿਆਂ ਤੋਂ ਫਸਲ ਦੀ ਰੱਖਿਆ ਕਰਨ ਲਈ ਇਹ ਘਰੇਲੂ ਤਰੀਕਾ ਵੀ ਲਾਭਦਾਇਕ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਸਪਰੇਅ 7 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ
Posted by Rajveer Singh
Punjab
19-05-2019 11:08 AM
Punjab
05-22-2019 05:37 PM
ਨਰਮੇ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਮਈ ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਨਰਮੇ ਦੀਆਂ Rasi 653, Rasi 776 ਕਿਸਮਾਂ ਲਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by Rajesh kumar
Uttar Pradesh
19-05-2019 10:58 AM
Punjab
05-22-2019 06:33 PM
इसकी पूंग छोड़ने के लिए मार्च से अक्तूबर का समय उपयुक्त होता है एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिलेगा यदि बढ़िया खुराक डाली जाए तो 8 महीनो.... (Read More)
इसकी पूंग छोड़ने के लिए मार्च से अक्तूबर का समय उपयुक्त होता है एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिलेगा यदि बढ़िया खुराक डाली जाए तो 8 महीनों में यह लगभग 800—900 ग्राम का हो जाता है बाकी मछली पालन के लिए नहरी पानी बढ़िया होता है और आप गांव का छप्पड़ ठेके से लेकर भी यह काम शुरू कर सकते हैं तालाब में मछली के बीज डालने से पहले इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि उस तालाब में काफी मात्रा में मछली की कुदरती खुराक उपलब्ध है तालाब में प्लैंकटान की अच्छी मात्रा करने के उद्देश्य से यह जरूरी है कि रूड़ी की खाद के साथ सुपर फास्फेट 300 किलोग्राम और यूरिया 180 किलोग्राम प्रति वर्ष प्रति हेक्टैयर के मान से डाली जाए तालाब में से हानिकारक मछलियों और कीड़े मकौड़ों को निकाल लेना चाहिए मंडीकरण की कोई दिक्कत नहीं है यह लोकल ही सेल हो जाती हे यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी यह मुफ्त है कोई पैसा नहीं लगता इसका आपको र्स्टीफिकेट दिया जाता है ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है आप वहां ज़मीन की फर्द, स10th र्टिफिकेट और जहाँ तालाब बनाना है वहां की 2 फोटो लेकर जाएं उसके बाद FFDA के अफ़सर आपको फाइल तैयार करवाएंगे और आपकी ज़मीन देखकर तालाब बनाने का तरीका बताएंगे.वहां से आपको इसके बारे में ओर भी जानकारी प्राप्त हो जाएगी
Posted by अरविंद
Madhya Pradesh
19-05-2019 10:49 AM
Punjab
05-20-2019 07:46 PM
अरविंद जी गोल्डी 333 कॉटन सीड्स Kirtiman Agro Genetics Ltd के द्वारा त्यार की गई किसम है धन्यवाद
Posted by Saurabh Upadhyay Bku
Uttar Pradesh
19-05-2019 10:25 AM
Madhya Pradesh
05-20-2019 03:38 PM
मोती पालन के फायदे - मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो आपको अन्य लोगो से अलग करता है .वही लोग इस व्यवसाय को कर सकते है ..जिनकी सोच कुछ अलग करने की हो .. (1) एक एकड़ में पारंपरिक खेती से 50000/- का मुनाफा हो सकता है और मोती पालन से 8-10 लाख (2) एक तालाब में बहुउदेशीय योजनाओ का लाभ लेके 8-10 प्रकार के व्यापर करके आय मे बृद्धि (3) जमीन में ज.... (Read More)
मोती पालन के फायदे - मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो आपको अन्य लोगो से अलग करता है .वही लोग इस व्यवसाय को कर सकते है ..जिनकी सोच कुछ अलग करने की हो .. (1) एक एकड़ में पारंपरिक खेती से 50000/- का मुनाफा हो सकता है और मोती पालन से 8-10 लाख (2) एक तालाब में बहुउदेशीय योजनाओ का लाभ लेके 8-10 प्रकार के व्यापर करके आय मे बृद्धि (3) जमीन में जल स्तर को बढ़ाकर सरकार की मदद (4) बचे हुए सामान से हस्तकला उद्योग को बढ़ावा देना (5) यदि महिला वर्ग इस व्यवसाय में आते है तो ज्यादा फायदे है क्योकि मोती के आभूषण के साथ साथ मदर ऑफ़ पर्ल (Shell jewellery) का भी फायदा ले सकते है (6) आसपास के लोगो को रोजगार अधिक जानकारी संपर्क करे ..अमित बमोरिया 9407461361 9770085381 बमोरिया मोती सम्बर्धन केंद्र मध्य प्रदेश https://m.bhaskar.com/news/MP-HOSH-quitting-govt-job-engineer-is-earning-money-from-pearl-cultivation-news-hindi-5533297-PHO.html
Posted by happy
Punjab
19-05-2019 10:23 AM
Punjab
05-22-2019 06:02 PM
Happy ji tuc NPk 19:19:19@1 killo nu prati acre de hisab nal spray karo eh tuhanu bani bnayi market vich mil jandi hai. Tuc isdi spray kar sakde ho.dhanwad
Posted by Nirvair Singh
Punjab
19-05-2019 10:17 AM
Punjab
05-19-2019 11:25 AM
cow de heat vich auun ton badd 18-36 ghntia vich tika bhrwa skde ho tuci iss nu tika bhrwa ke concimax bolus 1-1 goli swere sham deni suru kro iss nal pashu nu gaban rehhn vich help mildi hai, iss nu 14 din deo ji ehh intas company da product hai..
Posted by gurwinder
Punjab
19-05-2019 10:16 AM
Punjab
05-22-2019 06:36 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Concimax ਗੋਲੀਆਂ ਇਕ ਇਕ ਗੋਲੀ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ 14 ਦਿਨ ਦਿਓ ਬਾਕੀ Calcimust gold liquid 100ml ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਅੰਦਰ ਤੋਂ ਇਨਫੈਕਸ਼ਨ ਖਤਮ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਪਸ਼ੂ ਗੱਭਣ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਰਹਿ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਨਾ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਪੂਰੀ ਤ੍ਰਾਹ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ .
Posted by Nagendr singh
Uttar Pradesh
19-05-2019 10:12 AM
Punjab
05-23-2019 05:41 PM
PK 472: यह किस्म यू पी के सभी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने बड़े, मोटे और पीले भूरे रंग के होते हैं यह किस्म 120-125 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है JS 71.5: यह किस्म बुंदेलखंड क्षेत्र में उगाने के लिए उपयुक्त है यह 100-105 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जा.... (Read More)
PK 472: यह किस्म यू पी के सभी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने बड़े, मोटे और पीले भूरे रंग के होते हैं यह किस्म 120-125 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है JS 71.5: यह किस्म बुंदेलखंड क्षेत्र में उगाने के लिए उपयुक्त है यह 100-105 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-11 क्विंटल प्रति एकड़ होती है PS 564: यह किस्म यू पी के सभी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 115-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने मध्यम और पीले रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म पीले चितकबरे रोग के प्रतिरोधक है PK 262: यह किस्म तराई क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 120-125 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने बड़े, मोटे, गोल और पीले रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 11-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है JS 2: यह किस्म बुंदेलखंड क्षेत्र में उगाने के लिए उपयुक्त है यह 98-105 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है JS 93-05: यह किस्म बुंदेलखंड क्षेत्र में उगाने के लिए उपयुक्त है यह किस्म तना गलन, फली और कली के झुलस रोग की प्रतिरोधक किस्म है इसके बीज हरे पीले रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है JS 72.44: यह किस्म बुंदेलखंड क्षेत्र में उगाने के लिए उपयुक्त है यह 105-110 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-11 क्विंटल प्रति एकड़ होती है JS 335: यह किस्म बुंदेलखंड क्षेत्र में उगाने के लिए उपयुक्त है यह जल्दी पकने वाली किस्म है और बैक्टीरियल झुलस रोग के प्रतिरोधी और तने की मक्खी और कली के झुलस रोग को सहनेयोग्य है इसकी औसतन पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है JS 75.46: यह किस्म बुंदेलखंड क्षेत्र में उगाने के लिए उपयुक्त है यह 105-110 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-11 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa 20: यह किस्म बुंदेलखंड क्षेत्र में उगाने के लिए उपयुक्त है यह 110-115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 12-13 क्विंटल प्रति एकड़ होती है PK 416: यह किस्म पूरे यू पी में उगाने के लिए उपयुक्त है यह 120-125 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने मध्यम, अंडाकार और पीले रंग के होते हैं यह किस्म पीले चितकबरे रोग के प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है PS 1024: यह किस्म तराई क्षेत्र में उगाने के लिए उपयुक्त है यह 115-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 12-14 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa 16: यह किस्म पूरे यू पी में उगाने के लिए उपयुक्त है यह 110-115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-14 क्विंटल प्रति एकड़ होती है PS 1042: यह किस्म पूरे यू पी में उगाने के लिए उपयुक्त है इसकी औसतन पैदावार 12-14 क्विंटल प्रति एकड़ होती है JS 335: यह जल्दी पकने वाली किस्म बैक्टीरियल झुलस रोग और तने की मक्खी, कली के झुलस रोग के प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है MAUS 47: यह किस्म कली के झुलस रोग, तना गलन, एंथ्राक्नोस, सलेटी सुंडी आदि के प्रतिरोधक किस्म है इसके बीज पीले रंग के होते है NRC 37 (Ahilya 4): इसके बीज हल्के से गहरे भूरे रंग के होते हैं यह किस्म तना गलन, फली और कली के झुलस रोग, तने की मक्खी और पत्ते के सुरंगी कीड़े की रोधक किस्म है
Posted by sukhvinder Singh
Punjab
19-05-2019 10:03 AM
Punjab
05-21-2019 05:47 PM
Sukhvinder ji eh kisam university valo sifarish nahi hai isdi jankari tuhanu dealer kolo hi milegi jisto tuc eh beej leya hai.dhanwad
Posted by DHARMENDRA KUSHWAH
Madhya Pradesh
19-05-2019 10:02 AM
Madhya Pradesh
05-20-2019 12:24 PM
मोती पालन के फायदे - मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो आपको अन्य लोगो से अलग करता है .वही लोग इस व्यवसाय को कर सकते है ..जिनकी सोच कुछ अलग करने की हो .. (1) एक एकड़ में पारंपरिक खेती से 50000/- का मुनाफा हो सकता है और मोती पालन से 8-10 लाख (2) एक तालाब में बहुउदेशीय योजनाओ का लाभ लेके 8-10 प्रकार के व्यापर करके आय मे बृद्धि (3) जमीन में ज.... (Read More)
मोती पालन के फायदे - मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो आपको अन्य लोगो से अलग करता है .वही लोग इस व्यवसाय को कर सकते है ..जिनकी सोच कुछ अलग करने की हो .. (1) एक एकड़ में पारंपरिक खेती से 50000/- का मुनाफा हो सकता है और मोती पालन से 8-10 लाख (2) एक तालाब में बहुउदेशीय योजनाओ का लाभ लेके 8-10 प्रकार के व्यापर करके आय मे बृद्धि (3) जमीन में जल स्तर को बढ़ाकर सरकार की मदद (4) बचे हुए सामान से हस्तकला उद्योग को बढ़ावा देना (5) यदि महिला वर्ग इस व्यवसाय में आते है तो ज्यादा फायदे है क्योकि मोती के आभूषण के साथ साथ मदर ऑफ़ पर्ल (Shell jewellery) का भी फायदा ले सकते है (6) आसपास के लोगो को रोजगार अधिक जानकारी संपर्क करे ..अमित बमोरिया 9407461361 9770085381 बमोरिया मोती सम्बर्धन केंद्र मध्य प्रदेश https://m.bhaskar.com/news/MP-HOSH-quitting-govt-job-engineer-is-earning-money-from-pearl-cultivation-news-hindi-5533297-PHO.html
Posted by Mahendra Singh
Rajasthan
19-05-2019 10:02 AM
Punjab
05-21-2019 05:53 PM
महेंद्र जी कृपया आपबताएं कि आप कौन से औजार के बारे में जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको उसके बारे में जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by sukhvinder Singh
Punjab
19-05-2019 10:01 AM
Punjab
05-20-2019 08:00 PM
PR 126 ਕਿਸਮ ਘਟ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 123 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਸਮਾਂ ਚਲ ਰਿਹਾ ਹੈ ਜੀ
Posted by ਨਿਰਪਾਲ ਸਿੰਘ
Punjab
19-05-2019 10:00 AM
Punjab
05-23-2019 04:30 PM
ਨਿਰਪਾਲ ਸਿੰਘ ਜੀ 20 ਗਰਾਮ ਸਾਥੀ ਦੀ ਪੁੜੀ 32 ਵਿਸਵਿਆਂ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਵਿੱਚ ਪਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Harman Sidhu
Chattisgarh
19-05-2019 09:52 AM
Punjab
05-20-2019 04:50 PM
ਇੰਨਸੂਲੀਨ ਦਾ ਪੋਦਾ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸੁਰਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਨਾਗਰਾ ਕੋਲੋ ਮਿਲ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜੀ ਇਹਨਾਂ ਦਾ ਸੰਪਰਕ ਨੰਬਰ 9781620010 ਹੈ ਜੀ
Posted by ved yadav
Uttar Pradesh
19-05-2019 09:50 AM
Punjab
05-23-2019 06:10 PM
Fatehpur me aap sirohi bakri ki breed rakh sakte hai ji.
Posted by Jasveer Singh
Punjab
19-05-2019 09:47 AM
Punjab
05-20-2019 09:44 AM
ਪਰਮਲ ਝੋਨੇ ਦੀਆ PR PR 113, PR 111, PR 114, PR 115, PR 116,PR 118 ,PR 121,PR 122, PR 123 , PR 126, PR 127, Cr 212, ਕਿਸਮਾਂ ਦਾ ਝਾੜ ਸਭ ਦਾ ਹੀ ਚੰਗਾ ਹੈI ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਲੰਬੇ ਸਮੇ ਵਾਲੀ ਅਤੇ ਵੱਧ ਝਾੜ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਲਗਾਉਣੀ ਚਾਉਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਉਸ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਪੂਸਾ 44 ਕਿਸਮ ਲਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋ I
Posted by SUKHJINDER SINGH
Punjab
19-05-2019 09:47 AM
Punjab
05-23-2019 05:42 PM
ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀਆਂ ਛੋਟੀਆਂ ਗੁਲਾਬੀ ਸੁੰਡੀਆਂ ਪੌਦੇ ਦੀ ਗੋਭ ਵਿੱਚ ਮੋਰੀਆਂ ਕਰ ਕੇ ਅੰਦਰੋਂ ਤੰਤੂ(ਟਿਸ਼ੂ) ਖਾਂਦੀਆ ਹਨ ਅਤੇ ਬਾਅਦ ਵਿੱਚ ਫ਼ਲ ਤੇ ਹਮਲਾ ਕਰਦੀਆਂ ਹਨ ਨੁਕਸਾਨੇ ਫ਼ਲਾਂ ਉੱਪਰ ਵੱਡੇ ਸੁਰਾਖ ਨਜ਼ਰ ਆਉਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਖਾਣ ਯੋਗ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਨੁਕਸਾਨੇ ਫ਼ਲ ਹਰ ਹਫਤੇ ਤੋੜ ਕੇ ਨਸ਼ਟ ਕਰ ਦਿਓ ਨਰਸਰੀ ਲਾਉਣ ਤੋਂ 1 ਮਹੀਨੇ ਬਾਅਦ ਟ੍ਰਾਈਜ਼ੋਫੋਸ 20 ਮਿ.ਲੀ. ਪ੍ਰਤੀ 10 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਅਤੇ 5.... (Read More)
ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀਆਂ ਛੋਟੀਆਂ ਗੁਲਾਬੀ ਸੁੰਡੀਆਂ ਪੌਦੇ ਦੀ ਗੋਭ ਵਿੱਚ ਮੋਰੀਆਂ ਕਰ ਕੇ ਅੰਦਰੋਂ ਤੰਤੂ(ਟਿਸ਼ੂ) ਖਾਂਦੀਆ ਹਨ ਅਤੇ ਬਾਅਦ ਵਿੱਚ ਫ਼ਲ ਤੇ ਹਮਲਾ ਕਰਦੀਆਂ ਹਨ ਨੁਕਸਾਨੇ ਫ਼ਲਾਂ ਉੱਪਰ ਵੱਡੇ ਸੁਰਾਖ ਨਜ਼ਰ ਆਉਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਖਾਣ ਯੋਗ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਨੁਕਸਾਨੇ ਫ਼ਲ ਹਰ ਹਫਤੇ ਤੋੜ ਕੇ ਨਸ਼ਟ ਕਰ ਦਿਓ ਨਰਸਰੀ ਲਾਉਣ ਤੋਂ 1 ਮਹੀਨੇ ਬਾਅਦ ਟ੍ਰਾਈਜ਼ੋਫੋਸ 20 ਮਿ.ਲੀ. ਪ੍ਰਤੀ 10 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਅਤੇ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਨਿੰਮ ਐਕਸਟ੍ਰੈਕਟ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ 10-15 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਵਕਫੇ ਤੇ ਇਹ ਸਪਰੇਅ ਦੋਬਾਰਾ ਕਰੋ ਫੁੱਲ ਨਿਕਲਣ ਸਮੇਂ ਕੋਰਾਜੈੱਨ 18.5% ਐੱਸ.ਸੀ. 5 ਮਿ.ਲੀ. + ਟੀਪੋਲ 5 ਮਿ.ਲੀ. ਦਾ ਘੋਲ 12 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ 20 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਵਕਫੇ ਤੇ ਦੋ ਵਾਰ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਸ਼ੁਰੂਆਤੀ ਹਮਲੇ ਵਿੱਚ 5% ਨਿੰਮ ਐਕਸਟ੍ਰੈਕਟ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹਮਲਾ ਦਿਖਣ ਤੇ 25% ਸਾਈਪਰਮੈਥਰੀਨ 2.4 ਮਿ.ਲੀ. ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਕੀੜਿਆਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਵੱਧ ਜਾਣ ਤੇ ਸਪਾਈਨੋਸੈੱਡ 1 ਮਿ.ਲੀ. ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਫਲ ਪੱਕਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਟ੍ਰਾਈਜ਼ੋਫੋਸ ਜਾਂ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਕੀਟਨਾਸ਼ਕ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਨਾ ਕਰੋ
Posted by ਜੱਜ ਸਿੰਘ
Punjab
19-05-2019 09:41 AM
Punjab
05-23-2019 05:45 PM
Jajj ji eh kisam university valo sifarish nahi hai tuhanu isdi jankari dealer kolo hi milegi jis to tuc eh beej leya hai.dhanwad
Posted by अजय शुक्ला
Uttar Pradesh
19-05-2019 09:37 AM
Maharashtra
05-23-2019 05:44 PM
अजय जी आप जून* फूलगोभी, खीरा-ककड़ी, लोबिया, करेला, लौकी, तुरई, पेठा, बीन, भिण्डी, टमाटर, प्याज, चौलाई, शरीफा की बिजाई कर सकते है धन्यवाद
Posted by gopal waman dighore
Maharashtra
19-05-2019 09:30 AM
Rajasthan
05-20-2019 07:23 PM
Gopal waman ji Seep ki kheti ke bare me puri jankari ke liye aap mere se 9711858258 samparak kare. Thank you.
Posted by satpal singh
Punjab
19-05-2019 09:19 AM
Punjab
05-21-2019 04:14 PM
ਰੇਤਲੀ ਜਮੀਨ ਵਿਚ ਤੁਸੀ ਕਿਸਮ ਜਿਵੇ signet ਦਾ raja 44 ja raja 45 , 5050, 5005, 5051, 5455 ਜਾ pioneer ਦਾ 27p31 ja 25p35 ja 27p63 ਵਰਗੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by dashrathvyas
Rajasthan
19-05-2019 09:14 AM
Punjab
05-22-2019 06:04 PM
अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ दोमट मिट्टी में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है मिट्टी की पी एच 6 से 7.5 सोयाबीन की अच्छी उपज के लिए अनूकूल होती है जल जमाव, खारी और क्षारीय मिट्टी सोयाबीन की खेती के लिए अनुकूल नहीं होती कम तापमान भी इस फसल को गंभीर रूप से प्रभावित करता है JS 93-05: यह किस्म तना गलन, फली और कली के झुलस रोग की .... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ दोमट मिट्टी में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है मिट्टी की पी एच 6 से 7.5 सोयाबीन की अच्छी उपज के लिए अनूकूल होती है जल जमाव, खारी और क्षारीय मिट्टी सोयाबीन की खेती के लिए अनुकूल नहीं होती कम तापमान भी इस फसल को गंभीर रूप से प्रभावित करता है JS 93-05: यह किस्म तना गलन, फली और कली के झुलस रोग की प्रतिरोधक किस्म है इसके बीज हरे पीले रंग के होते हैं JS 95-60: यह किस्म 82-88 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह तना गलन और विभन्न प्रकार के कीटों की प्रतिरोधक किस्म है JS 335: यह जल्दी पकने वाली किस्म है जो कि बैक्टीरियल झुलस रोग के प्रतिरोधी और तने की मक्खी, कली के झुलस रोग के प्रतिरोधी किस्म है इसकी औसतन पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है रबी की मौसम की कटाई के बाद या अप्रैल महीने में गहरी जोताई करें इसकी मदद से कीटों के अंडे नष्ट हो जाएंगे जोताई के बाद तीन-चार बार सुहागा फेरें और मिट्टी को समतल करें ताकि खेत में पानी ना खड़ा हो सके सोयाबीन के लिए जून के तीसरे सप्ताह से मध्य जुलाई का महीना खेती के लिए अनुकूल होता है बीजों को तभी बोयें, जब मिट्टी में आवश्यक मात्रा में नमी हो (2-3 दिनों में कम से कम 50-60 मि.मी. वर्षा हुई हो) बिजाई के लिए कतार से कतार का 10-12 इंच और पौधे से पौधे का फासला 4-7 सैं.मी. रखें नमी की उचित मात्रा में बीजों को 3-4 सैं.मी. की गहराई में बोयें ज्यादा गहराई में ना बोयें, क्योंकि यह अंकुरण को प्रभावित करता है बीजों को सीड ड्रिल की सहायता से बोयें एक एकड़ खेत में 25-30 किलोग्राम बीजों का प्रयोग करें बिजाई के समय गली हुई रूड़ी की खाद और गाय का गला हुआ गोबर 4 टन और नाइट्रोजन 10 किलो (यूरिया 25 किलो) और फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 8 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 15 किलो) प्रति एकड़ में डालें इन तत्वों के साथ 8 किलो सलफर प्रति एकड़ में डालें अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए यूरिया 3 किलो को 150 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के बाद 60 वें और 75 वें दिन स्प्रे करें खेत को नदीन मुक्त करने के लिए दो गोडाई की आवश्यकता होती है, पहली गोडाई बिजाई के 15-20 दिन बाद और दूसरी गोडाई बिजाई के 30-40 दिन बाद करें रासायनिक तरीके से नदीनों को रोकने के लिए बिजाई के बाद दो दिनो में पैंडीमैथालीन 900 मि.ली. को 100-200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें या इमाजेथापर 150&170 मि.ली. को 150-200 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के 15 से 20 दिन बाद बूटीनाशक के तौर पर डालें बारानी फसल होने के कारण इसे सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती बारिश की स्थिति के आधार पर सिंचाई का उपयोग करें फली बनने के समय सिंचाई आवश्यक है इस समय पानी की कमी उपज को काफी प्रभावित करती है जब फलियां सूख जाएं और पत्तों का रंग बदल कर पीला हो जाए और पत्ते गिर जाएं, तब फसल कटाई के लिए तैयार होती है कटाई हाथों से या दराती से करें कटाई के बाद पौधों में से बीजों को निकाल लें
Posted by Arshdeep Singh Maan
Punjab
19-05-2019 09:07 AM
Punjab
05-20-2019 09:45 AM
Jekar tuc paneeri di transplanting 20-25 June tkk kr rhe ho tn koi jyada late nhi bt 13 June to transplanting start ho javegi.
Posted by Vishal Rana
Haryana
19-05-2019 09:04 AM
Punjab
05-20-2019 09:46 AM
ND53 ਝੋਨੇ ਦੀ ਹਲਕੇ ਪਾਣੀ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜਿੰਨਾਂ ਨੂੰ ਕਿ ਦਰਮਿਆਨੀਆ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਅਤੇ ਹਲਕੇ ਪਾਣੀਆ ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਤੁਸੀਂ 15-20 ਮਈ ਤੋਂ ਲਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਅਤੇ ਇਸਦਾ ਝਾੜ 30-32 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਕੱਦ ਜਿਆਦਾ ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਪਰਾਲੀ ਜਿਆਦਾ ਬਣਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 135-145 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਵਿੱਚ ਕੱਟਣਯੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ
Posted by uddam singh
Punjab
19-05-2019 08:55 AM
Punjab
05-23-2019 05:52 PM
ਖੁੰਬਾ  ਦੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਕਈ ਤਰਾਂ ਦੀਆ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਬਟਨ ਖੁੰਬ, ਢੀਂਗਰੀ, ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ, ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਅਤੇ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ, ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੁੱਝ ਖੁੰਬਾ ਸਰਦੀਆਂ ਦੇ ਮੌਸਮ ਅਤੇ ਕੁੱਝ ਗਰਮੀਆਂ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ ਲਗਾਈ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਹਰ ਇਕ ਖੁੰਬ ਨੂੰ ਲਗਾਉਣ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਲਗ ਅਲਗ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਵੇ *ਬਟਨ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 2 ਫਸਲਾਂ ਲ.... (Read More)
ਖੁੰਬਾ  ਦੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਕਈ ਤਰਾਂ ਦੀਆ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਬਟਨ ਖੁੰਬ, ਢੀਂਗਰੀ, ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ, ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਅਤੇ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ, ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੁੱਝ ਖੁੰਬਾ ਸਰਦੀਆਂ ਦੇ ਮੌਸਮ ਅਤੇ ਕੁੱਝ ਗਰਮੀਆਂ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ ਲਗਾਈ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਹਰ ਇਕ ਖੁੰਬ ਨੂੰ ਲਗਾਉਣ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਲਗ ਅਲਗ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਵੇ *ਬਟਨ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 2 ਫਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ, ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਅੱਧ ਫਰਵਰੀ ਤਕ ਹੈ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 1 ਫ਼ਸਲ ਹੀ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * *ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਅਗਸਤ ਤਕ ਹੈ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 4 ਫਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਸਤੰਬਰ ਤਕ ਹੈ ਤੁਸੀ ਹੁਣ ਅਪ੍ਰੈਲ ਵਿਚ ਪਰਾਲੀ ਜਾ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਲਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਦੇ ਲਈ ਤੁਹਾਨੂੰ ਪਰਾਲੀ,ਬੀਜ,ਬਾਂਸ, ਸੇਬਾ ਆਦਿ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੈ *ਪਰਾਲੀ ਦੇ ਪੂਲੇ*-- ਝੋਨੇ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਦੇ 1-1 ਕਿਲੋ ਦੇ ਪੂਲੇ  ਦੋਨੋ ਸਿਰਿਆ ਤੋਂ ਸੇਬੇ ਨਾਲ ਬੰਨ ਕੇ ਤਿਆਰ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਪੂਲੇ ਦੇ ਸਿਰੇ ਕਟ ਕ ਇਕ ਬਰਾਬਰ ਕਰ ਲਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ *ਪੂਲਿਆ ਦੀ ਕਿਆਰੀ ਲਗਾਉਣਾ*---ਪਰਾਲੀ ਦੇ ਪੂਲਿਆ ਨੂੰ ਸਾਫ ਪਾਣੀ ਵਿਚ 16-20 ਘੰਟੇ ਲਈ ਡਬੋ ਦਇਓ ਗਿਲੇ ਪੂਲਿਆ ਨੂੰ ਢਲਾਨ ਤੇ ਰੱਖ ਕੇ ਵਾਧੂ ਪਾਣੀ ਨਿਕਲਣ ਦਇਓ ਕਮਰੇ ਚ ਇੱਟਾਂ ਤੇ ਬਾਂਸ ਦਾ ਇਕ ਢਕਵਾ ਪਲੇਟਫਾਰਮ ਬਣਾਓ, ਇਸ ਪਲੇਟਫਾਰਮ ਤੇ  5 ਪੂਲਿਆ ਦੀ ਇਕ ਤਹਿ ਲਗਾਓ, ਜਿਸ ਉਪਰ ਲਗਭਗ 75 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪਾਓ. ਇਸ ਤੋਂ ਉਪਰ ਵਾਲੀ ਤਹਿ ਉਲਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤਰਾਂ 5-5 ਪੂਲਿਆ ਦੀਆ 4 ਤਹਿਆ ਵਿਚ  300 ਗ੍ਰਾਮ  ਬੀਜ ਪਾ ਕ  ਇਕ ਕਿਆਰੀ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਉਪਰ 2 ਪੂਲੇ ਖੋਲ ਕੇ ਰੱਖ ਦਿਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ *ਖੁੰਬਾ ਦਾ ਫੁੱਟਣਾ*---ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 7-9 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਖੁੰਬਾਂ ਫੁਟਣ ਲਗ ਪੈਂਦੀਆਂ ਹਨ *ਪਾਣੀ ਤੇ ਹਵਾ ਦਾ ਸੰਚਾਰ*--  ਬਿਜਾਈ ਦੇ 2 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਹਰ ਰੋਜ ਪਾਣੀ ਦਾ ਛਿੜਕਾਅ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਖੁੰਬਾਂ ਫੁਟਣ ਉਪਰੰਤ ਹਵਾ ਦਾ ਸੰਚਾਰ 6-8 ਘੰਟੇ ਪ੍ਰਤੀ ਦਿਨ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ * ਖੁੰਬਾਂ ਦੀ ਤੁੜਾਈ*-- ਖੁੰਬਾਂ ਫੁੱਟਣ ਉਪਰੰਤ 1-2 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਤੋੜਨ ਯੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ **ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ** ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਲਈ ਤੂੜੀ ,ਬੀਜ ,ਮੋਮੀ ਲਿਫਾਫੇ(12×16),ਸੇਬਾ,ਕੇਸਿੰਗ, ਮਿਟੀ ਆਦਿ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ *ਤੂੜੀ ਦੀ ਤਿਆਰੀ*--ਸੁਕੀ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਪੱਕੇ ਫ਼ਰਸ਼ ਤੇ ਵਿਛਾ ਕੇ 16-20 ਘੰਟੇ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਗਿਲਾ ਕਰੋ, ਗਿਲੀ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਬੋਰੀ ਵਿਚ ਭਰ ਕੇ ਸੇਬੇ ਨਾਲ਼ ਬੰਨ ਦਇਓ. ਇਸ ਬੋਰੀ ਨੂੰ ਉਬਲਦੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ 45-50 ਮਿੰਟ ਲਈ ਰੱਖੋ, ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਕੱਢ ਕੇ ਪੱਕੇ ਫ਼ਰਸ਼ ਤੇ  ਵਿਛਾ ਕੇ ਠੰਡਾ ਕਰ ਲਓ ਇਹ ਤੂੜੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੈ *ਬਿਜਾਈ*--- ਠੰਡੀ ਤੂੜੀ ਵਿਚ ਬੀਜ ਰਲਾ ਕੇ ਮੋਮੀ ਲਿਫਾਫੇ ਵਿਚ ਭਰ ਦਇਓ 1 ਮੋਮੀ ਲਿਫਾਫੇ ਵਿਚ ਲਗਭਗ 2 ਕਿਲੋ ਗਿਲੀ ਤੂੜੀ ਅਤੇ 70-80 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪੈਂਦਾ ਹੈ. ਲਿਫਾਫੇ ਦੇ ਮੂੰਹ ਨੂੰ ਸੇਬੇ ਨਾਲ ਬੰਨ ਕੇ ਕਮਰੇ ਵਿਚ ਰੱਖ ਦਇਓ *ਕੇਸਿੰਗ*--ਬਿਜਾਈ ਦੇ 2-3 ਹਫਤਿਆਂ ਬਾਅਦ ਲਿਫਾਫੇ ਖੋਲ ਕੇ ਕੇਸਿੰਗ ਦੀ 1-1.5 ਦੀ ਤਹਿ ਲਗਾ ਦਇਓ, ਕੇਸਿੰਗ ਵਿਚ ਰੂੜੀ ਤੇ ਰੇਤਲੀ ਮਿਟੀ(4:1) ਹੁੰਦੀ ਹੈ. ਜੋ ਕ 24 ਘੰਟਿਆ ਲਈ 4% ਫਾਰਮਲੇਨ ਦੇ ਘੋਲ਼ ਨਾਲ ਜੀਵਣੁ ਰਹਿਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ *ਖੁੰਬਾਂ ਦਾ ਫੁੱਟਣਾ*-- ਕੇਸਿੰਗ ਮਿਟੀ ਪਾਉਣ ਤੋਂ ਲਗਭਗ 2 ਹਫਤਿਆਂ ਵਿਚ ਖੁੰਬਾਂ ਦੇ ਛੋਟੇ-ਛੋਟੇ ਕਿਣਕੇ ਨਿਕਲਣੇ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਜੋ ਕ 4-5 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਤੋੜਨ ਯੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ. ਖੁੰਬਾਂ ਦੀ ਤੁੜਾਈ ਲਗਭਗ 35 -40 ਦਿਨਾਂ ਤਕ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ
Posted by Amarjit singh
Punjab
19-05-2019 08:53 AM
Punjab
05-23-2019 05:47 PM
SL44: ਇਹ ਮਿੱਠੀ, ਰਸੀਲੀ, ਪਤਲੇ ਤਣੇ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਪੂਰੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਸਾਉਣੀ ਵਿੱਚ ਸੇਂਜੂ ਹਲਾਤਾਂ ਵਿੱਚ ਠੀਕ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 240 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ Punjab Sudax: ਇਹ ਜਵਾਰ ਦੀ ਦੋਗਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦੇ ਪੌਦੇ ਲੰਬੇ ਅਤੇ ਪੱਤੇ ਮੋਟੇ ਅਤੇ ਚੌੜੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਤਣਾ ਮਿੱਠਾ ਅਤੇ ਰਸੀਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਸਹੀ ਸਮੇਂ ਬੀਜੀ ਫਸਲ 3 ਵਾਰ ਕੱਟੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਲਾਲ ਧੱਬਾ ਰੋਗ ਦੀ .... (Read More)
SL44: ਇਹ ਮਿੱਠੀ, ਰਸੀਲੀ, ਪਤਲੇ ਤਣੇ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਪੂਰੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਸਾਉਣੀ ਵਿੱਚ ਸੇਂਜੂ ਹਲਾਤਾਂ ਵਿੱਚ ਠੀਕ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 240 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ Punjab Sudax: ਇਹ ਜਵਾਰ ਦੀ ਦੋਗਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦੇ ਪੌਦੇ ਲੰਬੇ ਅਤੇ ਪੱਤੇ ਮੋਟੇ ਅਤੇ ਚੌੜੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਤਣਾ ਮਿੱਠਾ ਅਤੇ ਰਸੀਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਸਹੀ ਸਮੇਂ ਬੀਜੀ ਫਸਲ 3 ਵਾਰ ਕੱਟੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਲਾਲ ਧੱਬਾ ਰੋਗ ਦੀ ਰੋਧਕ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 480 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਲਈ 30-35 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਰਤੋਂ
Posted by yogesh kumar
Haryana
19-05-2019 08:52 AM
Punjab
05-21-2019 05:49 PM
योगेश जी आप अरंडी की किसम जैसे GCH 7,D.C.S 9 (Jyoti) ,R.H.C 1,G.C.H 5,G.C.H 4 की बिजाई कर सकते है धन्यवाद
Posted by Mandeep
Punjab
19-05-2019 08:32 AM
Punjab
05-19-2019 05:57 PM
ਪੂਸਾ 44: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਝਾੜ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਪਰ ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ 155 ਦਿਨ ਤੱਕ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਬਿਮਾਰੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਝਾੜ 90 ਮਣ ਤੱਕ ਚਲਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ
Posted by Gurpartap singh
Haryana
19-05-2019 08:19 AM
Posted by deep
Punjab
19-05-2019 08:18 AM
Punjab
05-19-2019 05:59 PM
हांजी दीप जी आप urea@3kg प्रति कनाल के हिसाब से डाल सकते हैं, इससे पीलापन नहीं आएगा और ग्रोथ भी अच्छी होगी, दिन के समय पनीरी को पानी न दें, सुबह जल्दी या शाम सूरज डलने के समय बाद पानी दें
Posted by Sanjay Kumawat
Rajasthan
19-05-2019 08:05 AM
Rajasthan
05-20-2019 12:17 PM
Ji Moti ki kheti ke bare me puri jankari ke liye aap mere se 9711858258 samparak kare. Thank you.
Posted by gurwinder singh
Punjab
19-05-2019 07:50 AM
Punjab
05-19-2019 07:57 AM
ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ Metricef-iu 2 ਦਿਨ ਦਵਾਈ ਭਰਵਾਂ ਦਿਓ, ਇਹ ਦਵਾਈ ਭਰਵਾਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਓਹਨਾ ਨੂੰ Agrimin super powder ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿਓ ਇਸਨੂੰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਲਗਭਗ 2 ਕਿਲੋ ਤਕ ਦੇ ਦਿਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Concimax ਗੋਲੀਆਂ ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 14 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ ਇਹ ਗੋਲੀਆਂ 14 ਦਿਨ ਹੋਰ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਉਹ ਗੱਭਣ ਰਹਿ ਜ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ Metricef-iu 2 ਦਿਨ ਦਵਾਈ ਭਰਵਾਂ ਦਿਓ, ਇਹ ਦਵਾਈ ਭਰਵਾਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਓਹਨਾ ਨੂੰ Agrimin super powder ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿਓ ਇਸਨੂੰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਲਗਭਗ 2 ਕਿਲੋ ਤਕ ਦੇ ਦਿਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Concimax ਗੋਲੀਆਂ ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 14 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ ਇਹ ਗੋਲੀਆਂ 14 ਦਿਨ ਹੋਰ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਉਹ ਗੱਭਣ ਰਹਿ ਜਾਵੇਗੀ ..
Posted by Gurmeet
Madhya Pradesh
19-05-2019 07:48 AM
Punjab
05-24-2019 05:52 PM
इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है 1509: यह जल्दी पकने वाली, क.... (Read More)
इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है 1509: यह जल्दी पकने वाली, किस्म है जो कि 120 दिनों में पककर कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म झुलस रोग को सहने योग्य है इसकी पकाने की गुणवत्ता बहुत अच्छी है इसकी औसतन पैदावर 15.7 क्विंटल प्रति एकड़ है
Posted by ਅੰਮਿ੍ਤਪਾਲ ਸਿੰਘ
Punjab
19-05-2019 07:30 AM
Punjab
05-21-2019 03:28 PM
ਅਮ੍ਰਿਤਪਾਲ ਜੀ ਜੈਵਿਕ ਖੇਤੀ ਵਿਚ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਵੀ chemical ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਅਤੇ ਖਾਦ ਦੀ ਜਗਾਹ ਵਰਮੀਕੰਪੋਸਟ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਤੁਸੀ ਖੱਟੀ ਲੱਸੀ ਦੀ ਵਰਤੋਂ Fungus ਦੇ ਹਮਲੇ ਤੋਂ ਰੋਕਣ ਲਈ ਅਤੇ ਕੀਟ ਦੇ ਹਮਲੇ ਤੋਂ ਬਚਾਉਣ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਨੀਮ ਦੇ ਤੇਲ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Amritpal singh
Punjab
19-05-2019 07:26 AM
Punjab
05-19-2019 07:59 AM
ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ Albendazole bolus ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ ਦਿਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ Ovumin gold ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ Minotas ਰੋਜਾਨਾ 1 ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨਾਂ ਤਕ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆ ਜਾਵੇਗੀ .
Posted by kashmir singh
Punjab
19-05-2019 07:01 AM
Punjab
05-19-2019 07:23 AM
जब धान वाले खेत तैयार करोगे तब उसमें इसका प्रयोग एक क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से करें धान लगाने के बाद इसका प्रयोग ना करें
Posted by manveer
Punjab
19-05-2019 06:53 AM
Punjab
05-21-2019 03:32 PM
Manveer ji kirpa karke daso ke tuc kehdi app de bare gal kar rahe ho ta jo tuahnu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by MAJAN SINGH JADON
Rajasthan
19-05-2019 06:36 AM
Madhya Pradesh
05-19-2019 09:15 AM
मोती पालन के फायदे - मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो आपको अन्य लोगो से अलग करता है .वही लोग इस व्यवसाय को कर सकते है ..जिनकी सोच कुछ अलग करने की हो .. (1) एक एकड़ में पारंपरिक खेती से 50000/- का मुनाफा हो सकता है और मोती पालन से 8-10 लाख (2) एक तालाब में बहुउदेशीय योजनाओ का लाभ लेके 8-10 प्रकार के व्यापर करके आय मे बृद्ध.... (Read More)
मोती पालन के फायदे - मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो आपको अन्य लोगो से अलग करता है .वही लोग इस व्यवसाय को कर सकते है ..जिनकी सोच कुछ अलग करने की हो .. (1) एक एकड़ में पारंपरिक खेती से 50000/- का मुनाफा हो सकता है और मोती पालन से 8-10 लाख (2) एक तालाब में बहुउदेशीय योजनाओ का लाभ लेके 8-10 प्रकार के व्यापर करके आय मे बृद्धि (3) जमीन में जल स्तर को बढ़ाकर सरकार की मदद (4) बचे हुए सामान से हस्तकला उद्योग को बढ़ावा देना (5) यदि महिला वर्ग इस व्यवसाय में आते है तो ज्यादा फायदे है क्योकि मोती के आभूषण के साथ साथ मदर ऑफ़ पर्ल (Shell jewellery) का भी फायदा ले सकते है (6) आसपास के लोगो को रोजगार अधिक जानकारी संपर्क करे ..अमित बमोरिया 9407461361 9770085381 बमोरिया मोती सम्बर्धन केंद्र मध्य प्रदेश https://m.bhaskar.com/news/MP-HOSH-quitting-govt-job-engineer-is-earning-money-from-pearl-cultivation-news-hindi-5533297-PHO.html
Posted by jatinder singh
Punjab
19-05-2019 06:27 AM
Punjab
05-19-2019 08:04 AM
tuci Cow nu Zeckshot injection 20ml ate Fortivir injection 30ml, Intasef tazo 3.5gm , CRB injection 20ml lgwane suru kro , ehh tuci usdi bimari de hisab nal repeat krde rho , iss nal farak pann lgg jawega, baki tuci 100gm saro da tel ate 50gm haldi mix krke is nu dinde rho ..
Posted by Palwinder Singh
Punjab
19-05-2019 06:14 AM
Punjab
05-19-2019 07:25 AM
Soondi di roktham de lyi tuc hari mirch 5 kg , lasan 5 kg, akk de patte 5 kg, sukhchain de patte 5 kg, dhatura 5 kg, arind 5 kg nu 10 leetr gau mootar de vich 4 dina de lyi bhio ke rakho. 4 dina baad ihna pattya nu gau mootar de vich maslo ate 1 din lyi fir iss nu shaawe rakh deo. Iss nu dhakk ke ate shaawe rakhna jruri hunda hai. iss ghol nu kise kpde de nal pun lao ate fir 100 ltr paani de hisaab nal ikk acre de vich iss di spray kro. Iss nal soondi control ho jandi hai.
Posted by gurdip
Punjab
19-05-2019 06:09 AM
Punjab
05-19-2019 08:00 AM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Oxfendo plus ਗੋਲੀ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ ਦਿਓ ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Agrimin super ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ Minotas ਗੋਲੀਆਂ ਰੋਜਾਨਾ 1 ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆ ਜਾਵੇਗੀ, ਫਿਰ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਨਵੇਂ ਦੁੱਧ ਕਰਵਾ ਸਕਦੇ ਹੋ.
Posted by gopal waman dighore
Maharashtra
19-05-2019 06:08 AM
Madhya Pradesh
05-19-2019 09:14 AM
मोती पालन के फायदे - मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो आपको अन्य लोगो से अलग करता है .वही लोग इस व्यवसाय को कर सकते है ..जिनकी सोच कुछ अलग करने की हो .. (1) एक एकड़ में पारंपरिक खेती से 50000/- का मुनाफा हो सकता है और मोती पालन से 8-10 लाख (2) एक तालाब में बहुउदेशीय योजनाओ का लाभ लेके 8-10 प्रकार के व्यापर करके आय मे बृद्ध.... (Read More)
मोती पालन के फायदे - मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो आपको अन्य लोगो से अलग करता है .वही लोग इस व्यवसाय को कर सकते है ..जिनकी सोच कुछ अलग करने की हो .. (1) एक एकड़ में पारंपरिक खेती से 50000/- का मुनाफा हो सकता है और मोती पालन से 8-10 लाख (2) एक तालाब में बहुउदेशीय योजनाओ का लाभ लेके 8-10 प्रकार के व्यापर करके आय मे बृद्धि (3) जमीन में जल स्तर को बढ़ाकर सरकार की मदद (4) बचे हुए सामान से हस्तकला उद्योग को बढ़ावा देना (5) यदि महिला वर्ग इस व्यवसाय में आते है तो ज्यादा फायदे है क्योकि मोती के आभूषण के साथ साथ मदर ऑफ़ पर्ल (Shell jewellery) का भी फायदा ले सकते है (6) आसपास के लोगो को रोजगार अधिक जानकारी संपर्क करे ..अमित बमोरिया 9407461361 9770085381 बमोरिया मोती सम्बर्धन केंद्र मध्य प्रदेश https://m.bhaskar.com/news/MP-HOSH-quitting-govt-job-engineer-is-earning-money-from-pearl-cultivation-news-hindi-5533297-PHO.html
Posted by ravneet maan
Punjab
19-05-2019 03:11 AM
Punjab
05-19-2019 08:02 AM
ਤੁਸੀ ਕਲਮੀਸ਼ੋਰਾ 500ਗ੍ਰਾਮ, ਜੋ ਖਾਰ 250ਗ੍ਰਾਮ, ਮਿਠਾਸੋਡਾ 250ਗ੍ਰਾਮ, ਨਸ਼ਾਦਰ 150ਗ੍ਰਾਮ, ਖੰਡ 2 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਮਿਠਾ ਤੇਲ 2 ਕਿਲੋ ਲਉ ਤੇ ਪਹਿਲਾਂ ਖੰਡ ਦੀ ਚਾਸਣੀ ਬਣਾਉਣ ਤੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ ਮਿੱਠਾ ਤੇਲ ਪਾਉ ਤੇ ਉਬਾਲੋ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ ਬਾਕੀ ਸਾਰਾ ਸਾਮਾਨ ਪਾਉ ਤੇ ਉਬਾਲ ਕੇ ਠਾਰ ਕੇ ਪੰਜ ਹਿੱਸੇ ਕਰ ਲਉ ਤੇ ਇਕ ਹਿੱਸਾ ਰੋਜਾਨਾ ਰਾਤ ਵੇਲੇ ਦਿਉ ਤੇ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਤ੍ਰੇਲ ਵਿਚ ਨਾ ਬੰਨ੍ਹੋ ਤੇ ਨਾ ਹੀ 6 ਦਿਨ ਨਵਾਹੋ,ਇ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਕਲਮੀਸ਼ੋਰਾ 500ਗ੍ਰਾਮ, ਜੋ ਖਾਰ 250ਗ੍ਰਾਮ, ਮਿਠਾਸੋਡਾ 250ਗ੍ਰਾਮ, ਨਸ਼ਾਦਰ 150ਗ੍ਰਾਮ, ਖੰਡ 2 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਮਿਠਾ ਤੇਲ 2 ਕਿਲੋ ਲਉ ਤੇ ਪਹਿਲਾਂ ਖੰਡ ਦੀ ਚਾਸਣੀ ਬਣਾਉਣ ਤੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ ਮਿੱਠਾ ਤੇਲ ਪਾਉ ਤੇ ਉਬਾਲੋ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ ਬਾਕੀ ਸਾਰਾ ਸਾਮਾਨ ਪਾਉ ਤੇ ਉਬਾਲ ਕੇ ਠਾਰ ਕੇ ਪੰਜ ਹਿੱਸੇ ਕਰ ਲਉ ਤੇ ਇਕ ਹਿੱਸਾ ਰੋਜਾਨਾ ਰਾਤ ਵੇਲੇ ਦਿਉ ਤੇ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਤ੍ਰੇਲ ਵਿਚ ਨਾ ਬੰਨ੍ਹੋ ਤੇ ਨਾ ਹੀ 6 ਦਿਨ ਨਵਾਹੋ,ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Vitum-H injection 5ml ਲਗਵਾਓ ਅਤੇ 2-2 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਫਰਕ ਨਾਲ 5 ਟੀਕੇ ਲਗਵਾਓ ਬਾਕੀ ਉਸ ਨੂੰ FMC ਪਾਊਡਰ 50gm ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਜੀ ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ
Posted by akil
Maharashtra
19-05-2019 01:27 AM
Punjab
05-21-2019 03:24 PM
फसल की अच्छी पैदावार और विकास के लिए ज़मीन को अच्छी तरह तैयार करना जरूरी होता है रबी की फसल को काटने के बाद तुरंत खेत को पानी लगाना चाहिए इसके बाद खेत की हल से अच्छी तरह जोताई करें और फिर सुहागा फेर दें ज़मीन को तीन वर्षों में एक बार गहराई तक जोतें, इससे सदाबहार नदीनों की रोकथाम में मदद मिलती है और इससे मिट्टी .... (Read More)
फसल की अच्छी पैदावार और विकास के लिए ज़मीन को अच्छी तरह तैयार करना जरूरी होता है रबी की फसल को काटने के बाद तुरंत खेत को पानी लगाना चाहिए इसके बाद खेत की हल से अच्छी तरह जोताई करें और फिर सुहागा फेर दें ज़मीन को तीन वर्षों में एक बार गहराई तक जोतें, इससे सदाबहार नदीनों की रोकथाम में मदद मिलती है और इससे मिट्टी में पैदा होने वाले कीड़ों और बीमारियों को भी रोका जा सकता है आखिरी बार हल से जोतते समय बारानी क्षेत्रों में 2-4 टन रूड़ी और सिंचित क्षेत्रों में 4-8 टन रूड़ी का प्रति एकड़ के हिसाब से डालें यह मिट्टी की नमी को बनाए रखने में सहायक सिद्ध होगी
Posted by devjeet
Chattisgarh
19-05-2019 01:23 AM
Punjab
05-19-2019 02:15 AM
कृपया अपना सवाल विस्तार से पुछें कि आप क्या पूछना चाहते हैं
Posted by Navin
Gujarat
19-05-2019 12:33 AM
Punjab
05-21-2019 03:20 PM
Navin ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad