Posted by Jaipal Singh
Haryana
25-05-2019 08:38 AM
जयपाल जी स्टीविया की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से संपर्क कर सकते है धन्यवाद

Posted by Harpinder Singh
Punjab
25-05-2019 08:36 AM
ਰੀਫਟ ਸੈਜੇਟਾਂ ਦੇ ਇਕ ਲਿਟਰ ਦੀ ਪੈਕਿੰਗ ਦਾ ਰੇਟ 470 ਰੁਪਏ ਹੈ ਅਤੇ 5 ਲਿਟਰ ਦੀ ਪੈਕਿੰਗ ਦਾ ਰੇਟ ਤੁਹਾਨੂੰ ਡੀਲਰ ਕੋਲੋਂ ਹੀ ਪਤਾ ਲਗੇਗਾ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Bhagwant singh
Punjab
25-05-2019 08:26 AM
ਭਗਵੰਤ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਸਦੀ ਫੋਟੋ ਪੂਰੀ ਭੇਜੋ ਤੁਹਾਡੇ ਦੁਆਰਾ ਭੇਜੀ ਫੋਟੋ ਪੂਰੀ ਅੱਪਲੋਡ ਨਹੀਂ ਹੋਈ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Gurdeep jattana
Punjab
25-05-2019 08:22 AM
Tuci uss nu vitum-h liquid 10-10ml swere sham, anabolite liquid 100ml rojana dena suru kro ate suun to 1 mahina pehla cargill di transition mix feed deni suru kro.

Posted by jaswinder singh
Punjab
25-05-2019 08:19 AM
Jaswinder singh ji Jalandhar vich chuje len lai tusi Manjinder Singh 9876666406 (Shota Poultry Farm) nal samparak kar sakde ho. Thankyou.

Posted by govardhan Gurjar
Madhya Pradesh
25-05-2019 07:55 AM
गोवर्धन गुरजार जी MP में प्याज़ (Red) का भाव 700-820 रूपये क्विंटल तक चल रहा है, धन्यवाद

Posted by ਰिਵਦਰ िਸਘ
Punjab
25-05-2019 07:51 AM
ਰਵਿੰਦਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਇਸਦੇ ਲਈ ਹਰੀ ਖਾਦ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਜਿਵੇ ਮੂੰਗੀ ਗਵਾਰ ਜਾ ਜੰਤਰ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਤੁਸੀ ਮਿੱਟੀ ਟੈਸਟ ਜਰੂਰ ਕਰੋ ਜਿਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਹ ਅੰਦਾਜਾ ਹੋ ਜਾਏਗਾ ਕਿ ਮਿੱਟੀ ਨੂੰ ਕਿਹੜੇ ਤੱਤ ਦੀ ਕਮੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by malkeet singh
Punjab
25-05-2019 07:48 AM
Malkeet ji palak de patteya de uper tuc NPk 19:19:19@1 liter nu 150 liter pani de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by malkeet singh
Punjab
25-05-2019 07:47 AM
Bhindi vich soondi di roktham lyi Proclaim @70 gm per acre de hisab nal spray kr skde ho g.

Posted by Harjeet singh
Punjab
25-05-2019 07:46 AM
Harjeet ji oragnic dwayian nu vechan de layi vi license di lod payegi kyuki oragnic dwayian di vi testing hundi hai ke eh orignalhaigiyan han ja nai.dhanwad

Posted by Raees Shaikh
Maharashtra
25-05-2019 07:22 AM
कपास की बिजाई का सही समय 1 अप्रैल से 15 मई तक का होता है
Posted by baljit singh
Punjab
25-05-2019 07:12 AM
Baljit ji eh ehna diyan kisman te nirbahr karda hai ke kina jhaad niklega.kirpa karke tuc kisam da nam daso ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by Amrinder Singh
Punjab
25-05-2019 07:11 AM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Calcimust gold liquid 100ml ਰੋਜਾਨਾ ਅਤੇ Stay projen ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ.
Posted by Pindariya shailesh
Gujarat
25-05-2019 07:08 AM
इसकी खेती किसी भी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन अच्छी पैदावार और अच्छी उपज के लिए अच्छे निकास वाली, गहरी रेतली दोमट मिट्टी जिसकी पी एच 7-8 हो , उचित रहती है जिस मिट्टी की 2 मीटर नीचे तक सतह सख्त हो, उन मिट्टी में उगाने से परहेज़ करें क्षारीय और नमक वाली मिट्टी भी इसकी खेती के लिए उपयुक्त होती है लेकिन इन.... (Read More)
इसकी खेती किसी भी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन अच्छी पैदावार और अच्छी उपज के लिए अच्छे निकास वाली, गहरी रेतली दोमट मिट्टी जिसकी पी एच 7-8 हो , उचित रहती है जिस मिट्टी की 2 मीटर नीचे तक सतह सख्त हो, उन मिट्टी में उगाने से परहेज़ करें क्षारीय और नमक वाली मिट्टी भी इसकी खेती के लिए उपयुक्त होती है लेकिन इनमें खजूर की कम पैदावार होती है प्रसिद्ध किस्में :-Halawy,Medjool,Khunezi मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की दो से तीन बार जोताई करें मिट्टी के समतल होने के बाद, गर्मियों में 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के खड्ढे खोदें इन खड्ढों को दो सप्ताह के लिए खुला रखें उसके बाद अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर और उपजाऊ मिट्टी से खड्ढों को भरें क्लोरपाइरीफॉस@20 मि.ली. प्रत्येक खड्ढे में डालें मॉनसून में खजूर की खेती के लिए जुलाई-अगस्त का समय उपयुक्त होता है जबकि बसंत के मौसम में फरवरी-मार्च के महीने में रोपाई पूरी कर लें रोपाई के लिए 6मीटर या 8 मीटर के फासले पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के खड्ढे खोदें रोपाई के लिए 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के खड्ढे खोदें मुख्य खेत में वानस्पतिक भाग की रोपाई की जाती है जब कतार से कतार और पौधे से पौधे में 6 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है, तब एक एकड़ में 112 नए पौधों का प्रयोग करें, जबकि 8 मीटर x 8 मीटर के फासले पर 63 नए पौधों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें खड्ढों में जड़ के भाग की रोपाई से पहले जड़ के आधार को IBA 1000 पी पी एम और क्लोरपाइरीफॉस 5 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में दो से पांच मिनट के लिए डुबोकर रखें खजूर का प्रजणन जड़ के भाग की सहायता से किया जाता है मुख्य पौधे से जड़ के भाग या टहनी को लें रोपाई के 4 या 5 साल बाद पौधे के वनस्पतिक भाग प्राप्त होते हैं वनस्पतिक भाग का उचित भार 15-20 किलोग्राम होना चाहिए जड़ के भाग को मुख्य पौधे से अलग करने से छ: महीने या साल पहले अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर, रेत और लकड़ी का बुरादा जड़ के आस-पास डालें अलग करने के समय पुराने पत्तों को निकाल दें और एक अकेला कट लें बीज प्रजनन की तरह ही जड़ के साथ प्रजनन की कुछ सीमाएं होती हैं राजस्थान में प्रजनन उद्देश्य के लिए टिशु कल्चर तकनीकों का प्रयोग किया जाता है टिशू कल्चर से प्राप्त पौधे बहुत महंगे होते हैं लेकिन राजस्थान सरकार ड्रिप किसानों को 75 प्रतिशत सब्सिडी उपलब्ध करवाती है प्रत्येक वर्ष के अगस्त-सितंबर महीने में 40-50 किलो गाय का गला हुआ गोबर प्रति पौधे में डालें खजूर को नाइट्रोजन खाद 500-1500 ग्राम प्रति पौधा बिजाई से पहले और फूल निकलने के समय आवश्यक होती है प्रत्येक वर्ष फासफोरस 500-1000 ग्राम और पोटाश 250-500 ग्राम भी प्रति पौधे में डालें 10 वर्ष के पौधे के लिए अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 25 किलो, नाइट्रोजन 750 ग्राम, फासफोरस 125 ग्राम और पोटाश 125 ग्राम और सल्फर 50 ग्राम प्रति पौधे में अगस्त-सितंबर के महीने में डालें खेत को साफ और नदीन मुक्त रखें नदीनों की तीव्रता के आधार पर निराई और गोडाई करें नदीनों की रोकथाम के लिए मल्च का प्रयोग करें नई बोयी फसल के लिए तीन महीने तक नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है गर्मियों में सात दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जबकि सर्दियों में 15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने, फल बनने और पकने की अवस्थाओं पर सिंचाई की कमी ना होने दें मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखें कम से कम पानी प्रयोग करने के साथ साथ खरपतवार नियंत्रण के लिए मलचिंग एक प्रभावी तरीका है पौधे के आधार पर काली पॉलीथीन की शीट चढ़ाएं रोपाई के चार से पांच साल बाद खजूर का वृक्ष पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाता है फल की तुड़ाई की तीन अवस्थाएं होती हैं पहली जब फल पकने की अवस्था में होते हैं दूसरी, जब फल ताजे होते हैं तीसरी जब फल नर्म और पके हुए होते हैं और सूखी अवस्था जब फल सूख जाते हैं राजस्थान में चूहड़ा या पिंड खजूर के लिए फलों की तुड़ाई फल पकने की अवस्था में की जाती है मॉनसून का मौसम शुरू होने से पहले तुड़ाई पूरी कर लें
Posted by baljit singh
Punjab
25-05-2019 07:05 AM
Baljit ji pathiyan de pani di spray tu 10-12 din bad dubara kar sakde ho. is to ilava tuc khatti lassi di spray karo. eh fungus ate tat di kami de karn ho janda hai.dhanwad

Posted by Gurdeep Singh Grewal
Punjab
25-05-2019 06:47 AM
Gurdip ji you can sow the nursery of this variety in month of may and after 13 june you can transplant it in main field. thank you

Posted by Gurdeep Singh chahal
Punjab
25-05-2019 06:43 AM
Gurdeep ji isnal tuc seed treat kar sakde ho isto ilava tuc isnu ik killo nu 10 killo mitti vich rla ke prati acre de hisab nal chitta deo.dhanwad
Posted by satpal
Punjab
25-05-2019 06:41 AM
ਨਰਮੇ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਅੱਧ ਮਈ ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਨਰਮੇ ਦੀਆਂ BUNTY, SHRIRAM 6588, 6488, Ankur 3028, RCH 134(Rasi), RCH 650(Rasi), Rasi 653, Rasi 776. Rasi 773 , US 51 , US 71, BAYER da 7172, 7272 ਕਿਸਮਾਂ ਲਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by Gurwinder Sran Zaildar
Punjab
25-05-2019 06:27 AM
ਤੁਸੀ ਇਸਦੀ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ lixin-iu ਦਵਾਈ 3 ਦਿਨ ਲਗਾਤਾਰ ਭਰਵਾਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Bovimin-B ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ Concimax bolus ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ-ਇਕ ਗੋਲੀ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ 14 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ, ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ ਇਹ ਗੋਲੀਆਂ 14 ਦਿਨ ਤਕ ਹੋਰ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ,ਬਾਕੀ ਟੀਕਾ ਤੁਸੀ ਉਸ ਦੇ ਖੂਨ ਸੁੱਟਣ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਭਰਵਾਓ ਜਿਵੇਂ ਇਕ ਟੀਕਾ ਖੂਨ ਸੁੱਟਣ ਤੋਂ ਪਹ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਇਸਦੀ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ lixin-iu ਦਵਾਈ 3 ਦਿਨ ਲਗਾਤਾਰ ਭਰਵਾਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Bovimin-B ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ Concimax bolus ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ-ਇਕ ਗੋਲੀ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ 14 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ, ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ ਇਹ ਗੋਲੀਆਂ 14 ਦਿਨ ਤਕ ਹੋਰ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ,ਬਾਕੀ ਟੀਕਾ ਤੁਸੀ ਉਸ ਦੇ ਖੂਨ ਸੁੱਟਣ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਭਰਵਾਓ ਜਿਵੇਂ ਇਕ ਟੀਕਾ ਖੂਨ ਸੁੱਟਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ ਅਤੇ ਦੂਜਾ ਸੁੱਟਣ ਤੋਂ ਬਾਦ ਵਿਚ ਭਰਵਾਓ ਅਤੇ ਗੋਲੀਆਂ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਰਹਿ ਜਾਵੇਗੀ .
Posted by jass Dhaliwal
Punjab
25-05-2019 06:25 AM
ਧਾਲੀਵਾਲ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਹ ਦੱਸੋ ਕਿ ਤੁਸੀ ਕਿਹੜੇ ਪੌਦੇ ਲੈਣਾ ਚਾਉਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Jaswant Ranu
Punjab
25-05-2019 06:13 AM
Jaswant ji iske uper aap copper oxychloride@3gm ko prati liter ko prati liter pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by Jagdeep singh
Punjab
25-05-2019 06:04 AM
jekar paniri uper to peeli pai rahi hai ta isde vich lohe di kami hai. isdi roktham de layi ferrous sulphate 1% @1 killo nu prati aikad de hisab nal spray karen.jekar chelated ferrous sulphate di spray karni hai ta isdi matra 200 gram prati aikad hundi hai. jekar hale tak urea nahi payi ta 3 killo prati knal de hisab nal pao.kayi var paniri nitrogen di kami de karn vi paniri peeli honi shuru ho jandi hai.
Posted by jass Dhaliwal
Punjab
25-05-2019 06:00 AM
ਆੜੂ ਦੇ ਫ਼ਲ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਹੈਕਸਾਵਿਨ 50 ਡਬਲਿਯੂ ਪੀ 1 ਕਿਲੋ ਨੂੰ 500 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਕੇ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਮੇਂ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਜੇਕਰ ਹਮਲਾ ਜਿਆਦਾ ਹੋਵੇ ਤਾਂ 5-6 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਬਾਅਦ ਦੁਬਾਰਾ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ
Posted by jass Dhaliwal
Punjab
25-05-2019 05:58 AM
ਜੱਸ ਜੀ ਇਹ ਫੰਗਸ ਦੇ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ Planofix @4ml ਨੂੰ 15 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Manish Yadav
Uttar Pradesh
25-05-2019 05:56 AM
कृषि, पौधों और पशुओं की खेती करने का विज्ञान और कला है कृषि आसीन मानव सभ्यता के उदय में महत्वपूर्ण विकास था, जिससे घरेलू प्रजातियों की खेती ने खाद्य सरप्लस पैदा किए जिससे लोग शहरों में रहने के लिए सक्षम हुए कृषि का इतिहास हजारों साल पहले शुरू हुआ था

Posted by kulwinder singh
Punjab
25-05-2019 05:55 AM
ਕੁਲਵਿੰਦਰ ਜੀ ਬਾਜਰੇ ਦੇ ਉਪਰ ਤੁਸੀ hoshi @400 ml ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by kulwinder singh
Punjab
25-05-2019 05:50 AM
ਕੁਲਵਿੰਦਰ ਜੀ ਬਾਜਰੇ ਦੇ ਉਪਰ ਤੁਸੀ hoshi @400 ml ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by mantu singh
Uttar Pradesh
25-05-2019 05:44 AM
Mantu singh ji Dairy ke liye loan vgera lena chahte hai sab se pehle aap Dairy training le fir aap apne loan ke liye apply kar sakte hai. jis pe sarkar duara Subsidy bhi di jaegi. Thank you.
Posted by Gulshan Thakur
Madhya Pradesh
25-05-2019 05:39 AM
Gulshan Thakur ji aap NPk 19:19:19@1 killo ko 150 litre pani ke hisab se spray kare yeh tatv ki kami ke karn ho raha hai.dhanywad

Posted by gurwinder
Punjab
25-05-2019 05:38 AM
ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜੇ ਮਾਰਨ ਦੀ ਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਡਿਵਰਮਿੰਗ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਪਸ਼ੂ ਜਦੋ ਦਾਣਾ, ਚਾਰਾ ਖਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸ ਨਾਲ ਮਿੱਟੀ,ਰੇਤ ਦੇ ਕਣ ਪੇਟ ਅੰਦਰ ਜਾਂਦੇ ਰਹਿੰਦੇ ਹੈ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜੇ ਬਣਦੇ ਹੈ, ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਖਤਮ ਕਰਨਾ ਡਿਵਰਮਿੰਗ ਹੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਜੇਕਰ ਪਸ਼ੂ ਗੱਭਣ ਹੈ ਤਾਂ Albendazole ਸਾਲਟ ਦੀ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ ਦੂਜਿਆਂ ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ Fenbendazole ਸਾਲਟ ਦੀ ਗੋਲੀ ਦਿਓ, ਇਹਨਾਂ ਨਾਲ ਵਧਿਆ ਡਿ.... (Read More)
ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜੇ ਮਾਰਨ ਦੀ ਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਡਿਵਰਮਿੰਗ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਪਸ਼ੂ ਜਦੋ ਦਾਣਾ, ਚਾਰਾ ਖਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸ ਨਾਲ ਮਿੱਟੀ,ਰੇਤ ਦੇ ਕਣ ਪੇਟ ਅੰਦਰ ਜਾਂਦੇ ਰਹਿੰਦੇ ਹੈ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜੇ ਬਣਦੇ ਹੈ, ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਖਤਮ ਕਰਨਾ ਡਿਵਰਮਿੰਗ ਹੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਜੇਕਰ ਪਸ਼ੂ ਗੱਭਣ ਹੈ ਤਾਂ Albendazole ਸਾਲਟ ਦੀ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ ਦੂਜਿਆਂ ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ Fenbendazole ਸਾਲਟ ਦੀ ਗੋਲੀ ਦਿਓ, ਇਹਨਾਂ ਨਾਲ ਵਧਿਆ ਡਿਵਰਮਿੰਗ ਹੁੰਦੀ ਹੈ.
Posted by ASHWANI BANTH
Punjab
25-05-2019 04:34 AM
ਤੁਸੀ ਬੱਕਰੀਆ ਫਾਰਮ ਬਣਾਉਣਾ ਹੈ ਤਾਂ ਬਹੁਤ ਵਧੀਆ ਸੋਚ ਹੈ ਜੀ ਤੁਸੀ ਬੀਟਲ ਨਸਲ ਰੱਖੋ ਇਹ ਦੁੱਧ ਤੇ ਮੀਟ ਦੋਨਾਂ ਲਈ ਫਾਇਦੇਮੰਦ ਹੈ ਬਾਕੀ ਜਿਵੇ ਤੁਸੀ ਇਸ ਕਿੱਤੇ ਵਿੱਚ ਆਜੋਗੇ ਉਸ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਤੁਹਾਡੇ ਲਿਂਕ ਬਣਣੇ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਣਗੇ ਬਾਕੀ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਇਸ ਗੱਲ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਹੈ ਕਿ ਤੁਹਾਡੇ ਲੋਕਾ ਨਾਲ ਲਿੰਕ ਕਿਵੇ ਦੇ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਦੁੱਧ ਗਾਂ ਦੇ ਰੇਟ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਵਿਕ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤੇ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਫ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਬੱਕਰੀਆ ਫਾਰਮ ਬਣਾਉਣਾ ਹੈ ਤਾਂ ਬਹੁਤ ਵਧੀਆ ਸੋਚ ਹੈ ਜੀ ਤੁਸੀ ਬੀਟਲ ਨਸਲ ਰੱਖੋ ਇਹ ਦੁੱਧ ਤੇ ਮੀਟ ਦੋਨਾਂ ਲਈ ਫਾਇਦੇਮੰਦ ਹੈ ਬਾਕੀ ਜਿਵੇ ਤੁਸੀ ਇਸ ਕਿੱਤੇ ਵਿੱਚ ਆਜੋਗੇ ਉਸ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਤੁਹਾਡੇ ਲਿਂਕ ਬਣਣੇ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਣਗੇ ਬਾਕੀ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਇਸ ਗੱਲ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਹੈ ਕਿ ਤੁਹਾਡੇ ਲੋਕਾ ਨਾਲ ਲਿੰਕ ਕਿਵੇ ਦੇ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਦੁੱਧ ਗਾਂ ਦੇ ਰੇਟ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਵਿਕ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤੇ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਫਾਰਮ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਬੱਚੇ ਵਗੈਰਾ ਵੀ ਸੇਲ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਕੁੱਲ ਮਿਲਾ ਕੇ ਜੇਕਰ ਮੋਟਾ ਜਿਹਾ ਹਿਸਾਬ ਲਗਾਉਣਾ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਇੱਕ ਬੱਕਰੀ ਤੋਂ ਸਾਲ ਵਿੱਚ ਲੱਗਭੱਗ 20000 ਤੱਕ ਕਮਾਈ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬਾਕੀ ਇਹ ਵੀ ਸਲਾਹ ਹੈ ਤੁਸੀ ਇੱਕ ਵਾਰ ਆਪਣੇ ਨੇੜੇ ਤੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਜਰੂਰ ਲਵੋ ਤੇ ਸਫਲ ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਕਾਂ ਦੇ ਫਾਰਮ ਜਰੂਰ ਦੇਖੋ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਪ੍ਰੋਗੈਸਿਵ ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮਰ ਐਸੋਸੀਏਸ਼ਨ ਦੀ ਮੀਟਿੰਗ ਜੋ ਕਿ ਮਹੀਂਨੇ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਸ਼ੁੱਕਰਵਾਰ ਨੂੰ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਦੇ ਕਿਸਾਨ ਹੋਸਟਲ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਉੱਥੇ ਜਾ ਕੇ ਸਫਲ ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਕਾ ਨੂੰ ਮਿਲੋ ਇਸ ਮੀਟਿੰਗ ਵਿੱਚ ਜਾਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਪ੍ਰੋਗੈਸਿਵ ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮਰ ਐਸੋਸੀਏਸ਼ਨ ਦੇ ਪ੍ਰਧਾਨ ਜਗਰਾਜ਼ ਸਿੰਘ ਨਾਲ 9023441504 ਤੇ ਗੱਲ ਕਰ ਲਵੋ ਉਹਨਾਂ ਨਾਲ ਪੂਰੇ ਪੰਜਾਬ ਤੋਂ ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮਰ ਜੁੜੈ ਹਨ ਇਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਰੋਪੜ ਦੇ ਨੇੜਲੇ ਫਾਰਮਰ ਦਾ ਨੰਬਰ ਵੀ ਦੇ ਦੇਣਗੇ ਜੀ
Posted by ASHWANI BANTH
Punjab
25-05-2019 04:27 AM
Ashwani ji kirpa karke daso ke basmati di paniri di jankari lena chahunde ho ja isdi sidhi bijai karni hai ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanywad
Posted by ASHWANI BANTH
Punjab
25-05-2019 04:23 AM
ਅਸ਼ਵਨੀ ਜੀ ਤੁਸੀ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ Punjab Basmati 3: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੀ ਏ ਯੂ ਲੁਧਿਆਣਾ ਵੱਲੋਂ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਪੱਕਣ ਦੀ ਗੁਣਵੱਤਾ ਵਧੀਆ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਹ ਬਾਸਮਤੀ 386 ਦੀ ਉੱਨਤ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦੇ ਦਾਣੇ ਬਹੁਤ ਲੰਮੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 16 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ Punjab Basmati 4: ਇਹ ਇੱਕ ਉੱਚ ਝਾੜ ਕਿਸਮ ਦੇ ਹੈ ਜਿਸ ਦੀ ਲੰਬਾਈ 96cm ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਨੂੰ ਸਟੋਰ ਕਰਨਾ ਸੌਖਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਜੀਵਾਣੂ ਝੁਲ.... (Read More)
ਅਸ਼ਵਨੀ ਜੀ ਤੁਸੀ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ Punjab Basmati 3: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੀ ਏ ਯੂ ਲੁਧਿਆਣਾ ਵੱਲੋਂ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਪੱਕਣ ਦੀ ਗੁਣਵੱਤਾ ਵਧੀਆ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਹ ਬਾਸਮਤੀ 386 ਦੀ ਉੱਨਤ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦੇ ਦਾਣੇ ਬਹੁਤ ਲੰਮੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 16 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ Punjab Basmati 4: ਇਹ ਇੱਕ ਉੱਚ ਝਾੜ ਕਿਸਮ ਦੇ ਹੈ ਜਿਸ ਦੀ ਲੰਬਾਈ 96cm ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਨੂੰ ਸਟੋਰ ਕਰਨਾ ਸੌਖਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਜੀਵਾਣੂ ਝੁਲਸ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 146 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 17 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ Punjab Basmati 5: ਇਹ ਵੀ ਇੱਕ ਉੱਚ ਝਾੜ ਕਿਸਮ ਦੇ ਹੈ ਇਸਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 15 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 137 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ Pusa Punjab Basmati 1509: ਇਹ ਜਲਦੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ ਕਿ 120 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਝੁਲਸ ਰੋਗ ਨੂੰ ਸਹਿਣਯੋਗ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਪਕਾਉਣ ਦੀ ਯੋਗਤਾ ਵਧੀਆਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 15.7 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ Pusa Basmati 1121: ਇਸਦਾ ਪੌਦਾ ਲੰਬਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 137 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਪੱਕਣ ਦੀ ਗੁਣਵੱਤਾ ਵਧੀਆਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 13.7 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ

Posted by Rajinder Singh Batth
Punjab
25-05-2019 04:03 AM
ਚਿੱਚੜਾਂ ਦੇ ਇਲਾਜ ਲਈ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੇ ਰਹਿਣ ਵਾਲੀ ਜਗਾਂ ਦੀ ਸਫਾਈ ਜਰੂਰ ਰੱਖੋ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ msd ਕੰਪਨੀ ਦੀ Taktic ਦਵਾਈ ਆਉਦੀ ਹੈ ਉਹ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋਂ, ਇਸ ਨੂੰ 2 ਮਿਲੀ ਇਕ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੀ ਮਾਲਿਸ਼ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ.ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ.

Posted by Umashankar Sharma
Uttar Pradesh
25-05-2019 02:46 AM
इसके बढ़िया विकास के लिए अच्छे जल निकास वाली मिट्टी की जरूरत होती है यह बहुत किस्म की मिट्टी में उगाई जाती है, पर यह अच्छे विकास वाली, जैविक तत्वों से भरपूर दोमट मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है पानी सोखने वाली, खारी और नमकीन मिट्टी सफेदे की पैदावार के लिए उचित नहीं मानी जाती हैं किस्में: Eucalyptus camaldulensis, FRI 4 and FRI 6, Eucalyptus g.... (Read More)
इसके बढ़िया विकास के लिए अच्छे जल निकास वाली मिट्टी की जरूरत होती है यह बहुत किस्म की मिट्टी में उगाई जाती है, पर यह अच्छे विकास वाली, जैविक तत्वों से भरपूर दोमट मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है पानी सोखने वाली, खारी और नमकीन मिट्टी सफेदे की पैदावार के लिए उचित नहीं मानी जाती हैं किस्में: Eucalyptus camaldulensis, FRI 4 and FRI 6, Eucalyptus globules, Eucalyptus citriodora.सफेदे की खेती मुख्य रूप से उद्योगिक कामों के लिए की जाती है व्यापारक खेती के लिए ज़मीन में से नदीन और खूंटिया निकाल दें ज़मीन को भुरभुरा करने के लिए 2-3 बार जोताई करें बिजाई के लिए 30x30x30 या 45 x45x45 के गड्डे खोदे इसकी बिजाई का समय जून से अक्तूबर तक का होता है ज्यादा घनत्व के साथ बिजाई के लिए 1.5x1.5 मीटर के फासले पर (लगभग 1690 पौधे प्रति एकड़) या 2x2 मीटर फासले पर (लगभग 1200 पौधे प्रति एकड़) बिजाई करें शुरुआत में अंतर-फसलें भी उगाई जा सकती है अंतर-फसलों के समय फासला 4x2 मीटर (लगभग 600) या 6x1.5 या 8x1 मीटर का फासला रखें हल्दी और अदरक जैसी फसलें या चिकित्सिक पौधे अंतर-फसलों के रूप में लगाएं जा सकते है 2x2 मीटर का फासला ज्यादातर प्रयोग किया जाता है 1.5x1.5 मीटर फासले पर बिजाई करने के साथ लगभग 1690 पौधे प्रति एकड़ में प्राप्त किये जा सकते है, जबकि 2x2 मीटर के फासले के साथ लगभग 1200 पौधे प्रति एकड़ में प्राप्त किये जा सकते है इस फसल के लिए बीज बोने की जरूरत नहीं होती है इसका प्रजनन बीजों या पौधों के भागों के द्वारा होता है नरसरी के लिए छाँव में बैड तैयार करें और उस पर बीज बोयें 25-35° सैं. मी तापमान पर नयें पौधों का तेज़ी से विकास होता है 6 हफ्तों में पौधे, जब इनका दूसरा पत्ता निकलना शुरू हो जाता है, तब यह पॉलीथिन के लिफाफ़े में डालकर लगाने के लिए तैयार हो जाता है बिजाई से 3-5 महीने के बाद यह पौधे मुख्य खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाते है मुख्य खेत में पनीरी ज्यादातर बारिश के मौसम में लगाई जाती है बिजाई से 3-5 महीने बाद नयें पौधे मुख्य खेत में लगाएं जाते है नयें पौधे गड्ढों में मानसून के शुरू होने पर लगाएं जाते है बिजाई के समय नीम के तत्वों के साथ-साथ फास्फेट 50 ग्राम और गन्डोयां खाद 250 ग्राम प्रति गड्ढे में डालें नीम के तत्व पौधों को दीमक से बचाते है पहले साल NPK की 50 ग्राम मात्रा डालें दूसरे साल 17:17:17@ 50 ग्राम प्रति पौधे को डालें हाथों से गोड़ाई करते रहें और नदीनों के हमले की जाँच करते रहें शुरुआती समय में खेत को नदीन-मुक्त रखने के लिए दो से तीन हाथों से गोड़ाई की जरूरत होती है मुख्य खेत में पनीरी लगाने के तुरंत बाद सिंचाई करें मानसून में सिंचाई की जरूरत नहीं होती, पर अगर मानसून में देरी हो जाएँ या बढ़िया तरीके के साथ ना हो तों सुरक्षित सिंचाई करें सफेदा सोखे को सहन करने वाली फसल है, पर उचित पैदावार के लिए पूरे विकास वाले समय में कुल 25 सिंचाइयों की जरूरत होती है सिंचाई की ज्यादातर जरूरत गर्मियों में और काफी हद तक सर्दियों में होती है टिशू के द्वारा बिजाई से 5 साल में 50 से 76 मि.ली. टन पैदावार प्राप्त की जा सकती है, जबकि मूल बिजाई से 30 से 50 मि.ली. टन पैदावार प्राप्त की जा सकती है फसल की पैदावार खेत प्रबंध, पौधे का घनत्व, जलवायु आदि के अनुसार कम-ज्यादा भी हो सकती है इसके पेड़ आप नजदीकी नर्सरी से ले सकते है और इसके पेड़ भी आप अपनी नजदीकी टिम्बर मार्किट में बेच सकते है धन्यवाद

Posted by Umashankar Sharma
Uttar Pradesh
25-05-2019 02:45 AM
इसके बढ़िया विकास के लिए अच्छे जल निकास वाली मिट्टी की जरूरत होती है यह बहुत किस्म की मिट्टी में उगाई जाती है, पर यह अच्छे विकास वाली, जैविक तत्वों से भरपूर दोमट मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है पानी सोखने वाली, खारी और नमकीन मिट्टी सफेदे की पैदावार के लिए उचित नहीं मानी जाती हैं किस्में: Eucalyptus camaldulensis, FRI 4 and FRI 6, Eucalyptus g.... (Read More)
इसके बढ़िया विकास के लिए अच्छे जल निकास वाली मिट्टी की जरूरत होती है यह बहुत किस्म की मिट्टी में उगाई जाती है, पर यह अच्छे विकास वाली, जैविक तत्वों से भरपूर दोमट मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है पानी सोखने वाली, खारी और नमकीन मिट्टी सफेदे की पैदावार के लिए उचित नहीं मानी जाती हैं किस्में: Eucalyptus camaldulensis, FRI 4 and FRI 6, Eucalyptus globules, Eucalyptus citriodora.सफेदे की खेती मुख्य रूप से उद्योगिक कामों के लिए की जाती है व्यापारक खेती के लिए ज़मीन में से नदीन और खूंटिया निकाल दें ज़मीन को भुरभुरा करने के लिए 2-3 बार जोताई करें बिजाई के लिए 30x30x30 या 45 x45x45 के गड्डे खोदे इसकी बिजाई का समय जून से अक्तूबर तक का होता है ज्यादा घनत्व के साथ बिजाई के लिए 1.5x1.5 मीटर के फासले पर (लगभग 1690 पौधे प्रति एकड़) या 2x2 मीटर फासले पर (लगभग 1200 पौधे प्रति एकड़) बिजाई करें शुरुआत में अंतर-फसलें भी उगाई जा सकती है अंतर-फसलों के समय फासला 4x2 मीटर (लगभग 600) या 6x1.5 या 8x1 मीटर का फासला रखें हल्दी और अदरक जैसी फसलें या चिकित्सिक पौधे अंतर-फसलों के रूप में लगाएं जा सकते है 2x2 मीटर का फासला ज्यादातर प्रयोग किया जाता है 1.5x1.5 मीटर फासले पर बिजाई करने के साथ लगभग 1690 पौधे प्रति एकड़ में प्राप्त किये जा सकते है, जबकि 2x2 मीटर के फासले के साथ लगभग 1200 पौधे प्रति एकड़ में प्राप्त किये जा सकते है इस फसल के लिए बीज बोने की जरूरत नहीं होती है इसका प्रजनन बीजों या पौधों के भागों के द्वारा होता है नरसरी के लिए छाँव में बैड तैयार करें और उस पर बीज बोयें 25-35° सैं. मी तापमान पर नयें पौधों का तेज़ी से विकास होता है 6 हफ्तों में पौधे, जब इनका दूसरा पत्ता निकलना शुरू हो जाता है, तब यह पॉलीथिन के लिफाफ़े में डालकर लगाने के लिए तैयार हो जाता है बिजाई से 3-5 महीने के बाद यह पौधे मुख्य खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाते है मुख्य खेत में पनीरी ज्यादातर बारिश के मौसम में लगाई जाती है बिजाई से 3-5 महीने बाद नयें पौधे मुख्य खेत में लगाएं जाते है नयें पौधे गड्ढों में मानसून के शुरू होने पर लगाएं जाते है बिजाई के समय नीम के तत्वों के साथ-साथ फास्फेट 50 ग्राम और गन्डोयां खाद 250 ग्राम प्रति गड्ढे में डालें नीम के तत्व पौधों को दीमक से बचाते है पहले साल NPK की 50 ग्राम मात्रा डालें दूसरे साल 17:17:17@ 50 ग्राम प्रति पौधे को डालें हाथों से गोड़ाई करते रहें और नदीनों के हमले की जाँच करते रहें शुरुआती समय में खेत को नदीन-मुक्त रखने के लिए दो से तीन हाथों से गोड़ाई की जरूरत होती है मुख्य खेत में पनीरी लगाने के तुरंत बाद सिंचाई करें मानसून में सिंचाई की जरूरत नहीं होती, पर अगर मानसून में देरी हो जाएँ या बढ़िया तरीके के साथ ना हो तों सुरक्षित सिंचाई करें सफेदा सोखे को सहन करने वाली फसल है, पर उचित पैदावार के लिए पूरे विकास वाले समय में कुल 25 सिंचाइयों की जरूरत होती है सिंचाई की ज्यादातर जरूरत गर्मियों में और काफी हद तक सर्दियों में होती है टिशू के द्वारा बिजाई से 5 साल में 50 से 76 मि.ली. टन पैदावार प्राप्त की जा सकती है, जबकि मूल बिजाई से 30 से 50 मि.ली. टन पैदावार प्राप्त की जा सकती है फसल की पैदावार खेत प्रबंध, पौधे का घनत्व, जलवायु आदि के अनुसार कम-ज्यादा भी हो सकती है इसके पेड़ आप नजदीकी नर्सरी से ले सकते है और इसके पेड़ भी आप अपनी नजदीकी टिम्बर मार्किट में बेच सकते है धन्यवाद
Posted by amit rai
Delhi
25-05-2019 01:18 AM
Ek plant se 3-4 mahine mein total 1kg approx. fruit nikal aata hai....yeh sabh plant kee variety pe depend kartaa hai...Kuch varieties Kam fruit deti hai aur Kuch jaada.

Posted by amjad khan
Madhya Pradesh
25-05-2019 12:48 AM
इसकी पूंग छोड़ने के लिए मार्च से अक्तूबर का समय उपयुक्त होता है एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिलेगा यदि बढ़िया खुराक डाली जाए तो 8 महीनो.... (Read More)
इसकी पूंग छोड़ने के लिए मार्च से अक्तूबर का समय उपयुक्त होता है एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिलेगा यदि बढ़िया खुराक डाली जाए तो 8 महीनों में यह लगभग 800—900 ग्राम का हो जाता है बाकी मछली पालन के लिए नहरी पानी बढ़िया होता है और आप गांव का छप्पड़ ठेके से लेकर भी यह काम शुरू कर सकते हैं तालाब में मछली के बीज डालने से पहले इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि उस तालाब में काफी मात्रा में मछली की कुदरती खुराक उपलब्ध है तालाब में प्लैंकटान की अच्छी मात्रा करने के उद्देश्य से यह जरूरी है कि रूड़ी की खाद के साथ सुपर फास्फेट 300 किलोग्राम और यूरिया 180 किलोग्राम प्रति वर्ष प्रति हेक्टैयर के मान से डाली जाए तालाब में से हानिकारक मछलियों और कीड़े मकौड़ों को निकाल लेना चाहिए मंडीकरण की कोई दिक्कत नहीं है यह लोकल ही सेल हो जाती हे यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी यह मुफ्त है कोई पैसा नहीं लगता इसका आपको र्स्टीफिकेट दिया जाता है ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है यह डिपार्टमेंट जहाँ खेतीबाड़ी अफसर बैठता है जैसे जैसे कचिहरी, डी सी दफ्तर बोल देते है उसमें बना होता है, वहां से आपको इसके बारे में ओर भी जानकारी मिल जाएगी
Posted by Amarjit Singh
Punjab
25-05-2019 12:46 AM
ਸਟੋਬਰੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਪੋਲੀਹਾਊਸ ਦੇ ਅੰਦਰ ਜਾਂ ਖੁੱਲੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਕਰ ਸਕਦੇਂ ਹੋ ਚੀਕਣੀ , ਬਾਲੂ ਅਤੇ ਚੰਗੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਨਿਕਾਸੀ ਵਾਲੀ ਜ਼ਮੀਨ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਲਈ ਚੰਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਏਸਿਡਿਕ ਵਿੱਚ PH level 5.0 to 6.5 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਨਾਜੁਕਤਾ ਤੀਹ ਤੋਂ ਚਾਲ੍ਹੀ ਸੇਂਟੀਮੀਟਰ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੇ ਸਹੀ ਵਾਧੇ ਲਈ ਦਿਨ ਵੇਲੇ ਤਾਪਮਾਨ 20-25° ਡਿਗਰੀ ਅਤੇ ਰਾਤ ਵੇਲੇ 7-12° ਡਿਗਰੀ ਹੋਣਾ .... (Read More)
ਸਟੋਬਰੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਪੋਲੀਹਾਊਸ ਦੇ ਅੰਦਰ ਜਾਂ ਖੁੱਲੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਕਰ ਸਕਦੇਂ ਹੋ ਚੀਕਣੀ , ਬਾਲੂ ਅਤੇ ਚੰਗੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਨਿਕਾਸੀ ਵਾਲੀ ਜ਼ਮੀਨ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਲਈ ਚੰਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਏਸਿਡਿਕ ਵਿੱਚ PH level 5.0 to 6.5 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਨਾਜੁਕਤਾ ਤੀਹ ਤੋਂ ਚਾਲ੍ਹੀ ਸੇਂਟੀਮੀਟਰ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੇ ਸਹੀ ਵਾਧੇ ਲਈ ਦਿਨ ਵੇਲੇ ਤਾਪਮਾਨ 20-25° ਡਿਗਰੀ ਅਤੇ ਰਾਤ ਵੇਲੇ 7-12° ਡਿਗਰੀ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਇਸਦੀ ਪਨੀਰੀ ਲਾਉਣ ਦਾ ਕੰਮ ਅੱਧ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਤਕ ਕਰ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਇਹਨਾਂ ਮਹੀਨਿਆਂ ਤੇ ਇਸਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਲਗਭਗ ਇਹੀ ਤਾਪਮਾਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਮਲਚਿੰਗ ਵਿਧੀ ਰਾਹੀਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਨੂੰ ਤਿਆਰ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਬਾਅਦ ਟਰੈਕਟਰ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਮਲਚਿੰਗ ਮਸ਼ੀਨ ਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਉਤਾਰਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਚਾਰ ਫੁੱਟ ਕਿਆਰੀ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਵਿੱਚ ਡਰਿੱਪ ਲਾਈਨ ਫਿੱਟ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਬਾਅਦ ਮਸ਼ੀਨ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਕਿਆਰੀਆਂ ਉੱਤੇ ਪਲਾਸਟਿਕ ਸ਼ੀਟ ਵਿਛਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਮਲਚਿੰਗ ਲਈ ਹਲਕਾ ਅਤੇ ਲਚਕੀਲਾ ਪਦਾਰਥ ਲਵੋ ਤਾਂ ਜੋ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੇ ਬੂਟੇ ਦੀ ਰਫ਼ਤਾਰ ਉੱਤੇ ਅਸਰ ਨਾ ਪਵੇ ਜਿਸਨੂੰ ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਦੋਨਾਂ ਪਾਸਿਆਂ ਤੋਂ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਦਬਾ ਦਿਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਹੁਣ ਇਸ ਸ਼ੀਟ ਵਿਚ ਮੋਰੀਆਂ ਕੱਢ ਕੇ ਉਸ ਵਿਚ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਲਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਪਨੀਰੀ ਲਾਉਣ ਵੇਲੇ ਜੜ ਨੂੰ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਸੇਟ ਕਰ ਦਿਓ ਜੜ ਬਹਾਰ ਰਹਿਣ ਨਾਲ ਪੌਦੇ ਦੇ ਸੁੱਕਣ ਦਾ ਖ਼ਤਰਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪੌਦੇ ਨੂੰ ਜਿਆਦਾ ਤਾਪਮਾਨ ਅਤੇ ਠੰਡ ਤੋਂ ਬਚਨ ਲਈ ਇਸਦੇ ਊਪਰ ਛਾਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜੋ ਤੁਸੀਂ ਲੋ ਟਨਲ ਵਿਧੀ ਨਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਮੌਸਮ ਦਾ ਬਹੁਤ ਖਿਆਲ ਰੱਖਣਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਥੋੜੀ ਜਿਹੀ ਲਾਪਰਵਾਹੀ ਨਾਲ ਸਾਰੀ ਫ਼ਸਲ ਖ਼ਰਾਬ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ਪਹਿਲੇ ਸਾਲ ਆਪਣੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਕਰਨ ਦਾ ਕੁੱਲ ਖਰਚਾ ਢਾਈ ਤੋ ਤਿੰਨ ਲੱਖ ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਆ ਜਾਦਾ ਹੈ ਕਿਉਕਿ ਕਿਸਾਨ ਨੂੰ ਪਹਿਲੇ ਸਾਲ ਡਰਿੱਪ ਸਿਸਟਮ ਅਤੇ ਫੁਆਰਿਆਂ ਆਦਿ ਤੇ ਵੀ ਖਰਚ ਕਰਨਾ ਪੈਦਾ ਹੈ ਪਰ ਅਗਲੇ ਸਾਲਾ ਵਿੱਚ ਕਿਸਾਨ ਦਾ ਇਹ ਖਰਚ ਬਚ ਜਾਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਲਈ ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ 40 ਬੈਡ ਬਣਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇੱਕ ਬੈਡ ਤੇ 1000 ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਦੇ ਪੌਦੇ ਲੱਗਦੇ ਹਨ ਇਸ ਤਰਾਂ ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਚਾਲੀ ਹਜ਼ਾਰ ਪੌਦੇ ਲਾਏ ਜਾਦੇ ਹਨ, ਇੱਕ ਪੌਦਾ 3 ਤੋ 4 ਰੁਪਏ ਤੱਕ ਮਿਲ ਜਾਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਝਾੜ 50 ਤੋ 60 ਕੁਇੰਟਲ ਤੱਕ ਨਿਕਲ ਆਉਦਾ ਹੈ 25-30 ਕੁਇੰਟਲ ਗੋਬਰ ਦੀ ਖਾਦ ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਪਾਓ ਇਹ ਖਾਦ ਇੱਕ ਸਾਲ ਵਿੱਚ ਪਾਉਣੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਫਿਰ 20 : 40 : 40 NPK KG / ਹੇਕਟਏਰ ਪਾਉਣੀ ਹੈ ਚੰਗੀ ਫਸਲ ਲਈ ਯੂਰਿਆ ਦੋ ਫ਼ੀਸਦੀ ਜ਼ਿੰਕ ਸਲਫੇਟ , ਅੱਧਾ ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਕੈਲਸ਼ਿਅਮ ਸਲਫੇਟ ਅੱਧਾ ਫ਼ੀਸਦੀ ਅਤੇ ਬੋਰਿਕ ਏਸਿਡ 0 . 2 ਫ਼ੀਸਦੀ ਚੰਗੀ ਫਸਲ ਲਈ ਠੀਕ ਹੈ ਸਿੰਚਾਈ ਛੇਤੀ ਛੇਤੀ ਪਰ ਹਲਕੀ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਆਦਾ ਪਾਣੀ ਠੀਕ ਨਹੀਂ ਹੈ ਪੱਤੇ ਗਿੱਲੇ ਨਾ ਕਰੋ ਤੁਪਕਾ ਸਿੰਚਾਈ ਨਾਲ ਘੱਟ ਪਾਣੀ ਲੱਗ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਪਕਾ ਸਚਾਈ ਨਹੀਂ ਕਰ ਰਹੇ ਤਾਂ ਕਿਆਰੀਆਂ ਦੇ ਵਿਚਾਲੇ ਪਾਣੀ ਖਾਲ ਵਿੱਚ ਹੀ ਲਗਾਓ ਨਦੀਨ ਹੱਥ ਨਾਲ ਹਟਾਓ ਜਾਂ ਕੀੜੇ ਮਕੋੜੇ ਅਤੇ ਦੂਜੀਆ ਬਿਮਾਰਿਆ ਵੱਲ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਕੋਈ ਪੋਦਾ ਜਿਆਦਾ ਖਰਾਬ ਹੈ ਉਹਨੂੰ ਹਟਾ ਦਿਓ ਜਦੋਂ ਫਲ ਦਾ ਰੰਗ 70% ਲਾਲ ਹੋ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਤੋੜ ਲੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਮਾਰਕਿਟ ਦੂਰੀ ਉੱਤੇ ਹੈ ਤਾਂ ਥੋੜ੍ਹਾ ਸਖ਼ਤ ਹੀ ਤੋੜਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਤੁੜਵਾਈ ਵੱਖ ਵੱਖ ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਪੈਕਿੰਗ ਪਲਾਸਟਿਕ ਦੀਆਂ ਪਲੇਟਾਂ ਵਿੱਚ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਇਸਨ੍ਹੂੰ ਹਵਾਦਾਰ ਜਗ੍ਹਾ ਉੱਤੇ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਜਿੱਥੇ ਤਾਪਮਾਨ ਪੰਜ ਡਿਗਰੀ ਹੋ ਇੱਕ ਦਿਨ ਦੇ ਬਾਅਦ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਪੈਕਿੰਗ ਦਾ ਤਾਪਮਾਨ ਜ਼ੀਰੋ ਡਿਗਰੀ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਮਾਰਕੀਟ ਵਿੱਚ ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਔਸਤ 200 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਤੱਕ ਵਿਕਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤਰਾਂ ਪੰਜ ਲੱਖ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੋ ਇਸ ਦੀ ਆਮਦਨ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਕੇ ਅੱਗੇ ਆਪਣੀ ਮਿਹਨਤ ਨਾਲ ਕਿਸਾਨ ਆਮਦਨ ਵਿੱਚ ਭਰਪੂਰ ਵਾਧਾ ਕਰ ਸਕਦਾ ਹੈ ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਦੇ ਪੌਦੇ ਸਤੰਬਰ ਤੋ ਅਕਤੂਬਰ ਤੱਕ ਲਾਏ ਜਾਦੇ ਹਨ ਅਤੇ 3 ਮਹੀਨੇ ਬਾਦ ਇਹ ਫਲ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਦੀ ਫਸਲ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੱਕ ਚਲਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਵਿੱਚ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਪਰੇਸ਼ਾਨੀ ਨਹੀ ਹੈ ਉਹ ਏਲਨਾਬਾਦ,ਸਿਰਸਾ,ਹਨੂੰਮਾਨਗੜ,ਗੰਗਾਨਗਰ ਤੋ ਇਲਾਵਾ ਬਠਿੰਡਾ,ਮੋਗਾ ਜਲੰਧਰ,ਲੁਧਿਆਣਾ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ, ਜੇਕਰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਦਿੱਲੀ ਇਸ ਦੀ ਮੁੱਖ ਮਾਰਕੀਟ ਹੈ

Posted by Sahil
Punjab
25-05-2019 12:34 AM
Sahil ji kirpa karke swal vistar nal pucho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by Dinesh ramteke
Chattisgarh
25-05-2019 12:03 AM
इसकी बिजाई अक्तूबर दूसरे पखवाड़े में की जाती है प्रति एकड़ के लिए 40—50 किलो बीज का प्रयोग किया जाता है 40x 10 सैं.मी. की दूरी पर बिजाई की जाती है खेत की तैयारी के समय 8—10 टन प्रति एकड़ रूड़ी की खाद का प्रयोग करें नाइट्रोजन 24—30 किलो, फासफोरस 24—30 किलो, पोटाश 20 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से बुनियादी डोज़ डालें और फिर नाइट.... (Read More)
इसकी बिजाई अक्तूबर दूसरे पखवाड़े में की जाती है प्रति एकड़ के लिए 40—50 किलो बीज का प्रयोग किया जाता है 40x 10 सैं.मी. की दूरी पर बिजाई की जाती है खेत की तैयारी के समय 8—10 टन प्रति एकड़ रूड़ी की खाद का प्रयोग करें नाइट्रोजन 24—30 किलो, फासफोरस 24—30 किलो, पोटाश 20 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से बुनियादी डोज़ डालें और फिर नाइट्रोजन 40 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से फूल बनने के समय करें

Posted by Rameshwar Mishra
Madhya Pradesh
24-05-2019 11:56 PM
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए, इसे गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी की आवश्यकता होती है यह दोमट और हल्की क्षारीय मिट्टी को भी सहनेयोग्य है इसकी खेती हल्की मिट्टी में भी की जा सकती है अनार की खेती के लिए, मध्यम और काली मिट्टी भी उपयुक्त होती है Seedless (Bedana): इसके फल मध्यम से ब.... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए, इसे गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी की आवश्यकता होती है यह दोमट और हल्की क्षारीय मिट्टी को भी सहनेयोग्य है इसकी खेती हल्की मिट्टी में भी की जा सकती है अनार की खेती के लिए, मध्यम और काली मिट्टी भी उपयुक्त होती है Seedless (Bedana): इसके फल मध्यम से बड़े आकार के होते हैं इसके फल मीठे, अधिक रसदार, और बीज नर्म होते हैं इसके प्रत्येक फल का भार 200-250 ग्राम होता है
Spin Dandan: इसके फल बड़े आकार के , भार लगभग 600-700 ग्राम, फल का रंग हल्का सफेद, अंदर से गहरा लाल और स्वाद में मीठा, बहुआयामी और फल में दरार पड़ने की संभावना मध्यम होती है
Chawla: इसका फैलावदार वृक्ष, अप्रैल के आखिरी सप्ताह में पूरे फूल, फल का भार लगभग 105 ग्राम, आकार 53.1 x 58.3 मि.मी., गुलाबी पीला रंग, पतला छिल्का, सख्त और मीठे बीज, उत्पादन 2.50 किलो प्रति वृक्ष होता है फल सितंबर के पहले सप्ताह में पक जाते हैं
Bhagwa: यह पिछेती बिजाई की किस्म है खाने और परिवहन के लिए उपयुक्त है, फलों में दरारें कम पड़ती हैं, फल का भार 200-300 ग्राम होता है, फल अधिक आकर्षित, संतरी रंग के नर्म और चमकदार होते हैं यह किस्म मध्य अक्तूबर में पक जाती है इसके दाने गोल, लाल रंग के नर्म और मीठे होते हैं घुलनशील पदार्थ 13 प्रतिशत और अम्लीय 0.61 प्रतिशत होती है और स्टोर करने की क्षमता अच्छी होती है
Jyothi: यह किस्म छोटे कद की और सदाबहार होती है इसके दानों के भार के आधार पर 75 प्रतिशत जूस की औसतन उपज होती है इसके जूस में टी एस एस की मात्रा 17 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 3.2 टन प्रति एकड़ होती है
Mridula: इसके फल का छिल्का लाल रंग का होता है इसके दानों का रंग भी गहरा लाल होता है दानों के भार के आधार पर 78 प्रतिशत जूस होता है जूस में टी एस एस की मात्रा 17-18 प्रतिशत होती है
Ruby: इसके फल छोटे आकार के और लाल रंग के होते हैं औसतन जूस 80 प्रतिशत और जूस में टी एस एस की मात्रा 15 प्रतिशत होती है
Jodhpur Local: इसके फल मध्यम आकार के और छिल्का सख्त होता है इसके फल रसदार, मीठे और बीज काफी हद तक सख्त होते हैं बिजाई से पहले, नए पौधों या कटिंग को IBA के घोल 1000 पी पी एम 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में डुबोयें इसकी बिजाई मुख्यत दिसंबर से जनवरी महीने में की जाती है उचित फासला मिट्टी की किस्म और जलवायु पर निर्भर करता है अनार की रोपाई के लिए, यदि वर्गाकार प्रणाली अपनाई गई है तो 5 मी x 5 मी फासले का प्रयोग करें रोपाई से एक महीना पहले बिजाई के लिए 60x60x60 सैं.मी. आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को 15 दिनों तक धूप में खुला छोड़ें उसके बाद 20 किलो रूड़ी की खाद और 1 किलो सुपर फास्फेट को मिट्टी में मिलाकर गड्ढों को भरें गड्ढे भरने के बाद पानी डालें ताकि मिट्टी अच्छे से नीचे बैठ जाये बिजाई के लिए रोपण विधि का प्रयोग किया जाता है
अनार का प्रजनन एयर लेयरिंग विधि द्वारा किया जाता है एयर लेयरिंग बारिश के मौसम के साथ साथ नवंबर-दिसंबर महीने में की जाती है एयर लेयरिंग विधि के लिए, एक से दो वर्ष के स्वस्थ, पकी हुई टहनियां जिनकी लंबाई 45-60 सैं.मी. और मोटाई पैंसिल जितनी हों, चुनें

Posted by jaspal
Punjab
24-05-2019 10:52 PM
ਜਸਪਾਲ ਜੀ ਪਰਾਲੀ ਦੀਆ ਗਠਾ ਬੰਨਣ ਵਾਲਾ ਸ਼ਕਤੀਮਾਨ ਦਾ ਨਵਾਂ ਬੇਲਰ ਲੈਣ ਅਤੇ ਇਸ ਉੱਪਰ ਚੱਲ ਰਹੀ ਸਬਸਿਡੀ ਲੈਣ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ ਤੁਸੀ Karam Kharoud 9826182899 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by LAKHWINDER SINGH
Punjab
24-05-2019 10:31 PM
ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਣ ਦੇ ਕੰਮ ਤੇ ਲੋਨ ਤੇ 25 % ਸਬਸਿਡੀ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੇ ਔਰਤਾ ਲਈ 35 % ਸਬਸਿਡੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਰ ਲੋਨ ਲੈਣ ਲਈ ਸਭ ਤੋਂ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਆਪਣੇ ਨੇੜੇ ਦੇ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਂਦਰ ਤੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦੇ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਤੇ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪਰ ਲੋਨ ਮਿਲੇਗਾ ਕੇ ਨਹੀ ਇਹ ਬੈਕ ਮੈਨੇਜ਼ਰ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਕਿਉਕੀ ਪਹਿਲੀ ਗੱਲ ਇਹ ਬੈਕ ਦ.... (Read More)
ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਣ ਦੇ ਕੰਮ ਤੇ ਲੋਨ ਤੇ 25 % ਸਬਸਿਡੀ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੇ ਔਰਤਾ ਲਈ 35 % ਸਬਸਿਡੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਰ ਲੋਨ ਲੈਣ ਲਈ ਸਭ ਤੋਂ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਆਪਣੇ ਨੇੜੇ ਦੇ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਂਦਰ ਤੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦੇ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਤੇ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪਰ ਲੋਨ ਮਿਲੇਗਾ ਕੇ ਨਹੀ ਇਹ ਬੈਕ ਮੈਨੇਜ਼ਰ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਕਿਉਕੀ ਪਹਿਲੀ ਗੱਲ ਇਹ ਬੈਕ ਦੇਖਦਾ ਹੈ ਕਿ ਤੁਹਾਡਾ ਅਕਾਉਟ ਵਿੱਚ ਕਿੰਨੇ ਕੁ ਪੈਸਿਆ ਦਾ ਲੈਣ ਦੇਣ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ ਤੇ ਤੁਹਾਡੇ ਕੋਲ ਆਪਣੀ ਜ਼ਮੀਨ ਗਰੰਟੀ ਵਜੋ ਦੇਣ ਲਈ ਹੈ ਕਿ ਨਹੀ ਤੇ ਹੋਰ ਵੀ ਕਈ ਗੱਲਾਂ ਚੈਕ ਕਰਕੇ ਲੋਨ ਲਈ ਸਹਿਮਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਬਾਕੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕਰੋ ਕਿ ਲੋਨ ਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਆਪਣੇ ਲੈਵਲ ਤੇ ਹੀ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਕਿਉਕੀ ਲੋਨ ਦੀ ਕਿਸ਼ਤ ਹਰ ਮਹੀਨੇ ਭਰਨੀ ਪਵੇਗੀ ਪਰ ਬੱਕਰੀਆ ਵਿੱਚੋ ਕਮਾਈ ਹਰ ਮਹੀਨੇ ਨਹੀ ਹੋਣੀ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕਰਕੇ ਦੇਖਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਆਪਣੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਜ਼ਿਲੇ ਦੇ ਪਸ਼ੂ ਪਾਲਣ ਵਿਭਾਗ ਅਫਸਰ ਨੂੰ ਮਿਲੋ ਤੇ ਉਸ ਤੋਂ ਅਪਰੂਵ ਕਰਵਾ ਕੇ ਫਿਰ ਬੈਕ ਨਾਲ ਗੱਲ ਕਰਕੇ ਦੇਖੋ ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਆਪਣੇ ਏਰੀਆ ਤੇ ਨਾਬਾਰਡ ਡਿਪਾਰਟਮੈਟ ਦੇ ਸੀਜੀਐਮ ਨੂੂੰ ਵੀ ਲੋਨ ਲਈ ਮਿਲੋ

Posted by pritpal singh kesar
Punjab
24-05-2019 10:24 PM
Pritpal singh kesar ji Adrak da beej len lai tusi Nishan Singh Kachoora 9927994011 nal samparak kar sakde ho. Thankyou.

Posted by Balraj Dabi
Madhya Pradesh
24-05-2019 10:16 PM
गुलाब फूलों में सबसे मह्त्वपूर्ण फूल है गुलाब की खेती के लिए जैविक तत्वों से भरपूर और अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी अनुकूल होती है बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 6 से 7.5 होना चाहिए यह जल जमाव को सहनयोग्य नहीं है, इसलिए उचित जल निकास का प्रबंध होना चाहिए और अनावश्यक पानी को निकाल देना चाहिए प्रसिद्ध कि.... (Read More)
गुलाब फूलों में सबसे मह्त्वपूर्ण फूल है गुलाब की खेती के लिए जैविक तत्वों से भरपूर और अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी अनुकूल होती है बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 6 से 7.5 होना चाहिए यह जल जमाव को सहनयोग्य नहीं है, इसलिए उचित जल निकास का प्रबंध होना चाहिए और अनावश्यक पानी को निकाल देना चाहिए प्रसिद्ध किस्में :- इसमें तीन मुख्य समूह हैं,1) प्रजातियां 2) पुराने बाग़ 3) आधुनिक या नए गुलाब Species roses: इसे जंगली गुलाब के नाम से भी जाना जाता है इस तरह के फूलों की पांच पंखुड़ियां और रंग चमकीला होता है ये सर्दियों में ज्यादा समय तक रहती हैं जैसे कि: Rosa rugose: इनका मूल स्थान जापान है यह किस्म प्रकृति रूप में कठोर होती हैं इसके फूल बेहद सुगंधित होते हैं, पत्ते झुर्रीदार चमड़े की तरह होते हैं ये घनी और मोटी झाड़ियों में उगते हैं रासायनिक स्प्रे का उपयोग ना करें, क्योंकि इस पर स्प्रे करने से सारे पत्ते झड़ जाते हैं Banksiae: इसे लेडी बैंक केनाम से भी जाना जाता है और इसका मूल स्थान चीन है फूल छोटे, सुगंधित और जामुनी रंग के होते हैं फूल छोटे गुच्छों में लगते है मिट्टी को नरम करने के लिए जोताई और गोड़ाई करें बिजाई से 4-6 सप्ताह पहले खेती के लिए बैड तैयार करें बैड बनाने कि लिए 2 टन रूड़ी की खाद और 2 किलो सुपर फासफेट डालें बैडों को एक समान बनाने के लिए उनको समतल करें और बैडों के ऊपर बोयें होये गुलाब गड्डों में बोयें हुए गुलाबों से ज्यादा मुनाफे वाले होते है उत्तरी भारत में बिजाई का सही समय मध्य अक्तूबर है रोपाई के बाद पौधे को छांव में रखें और अगर बहुत ज्यादा धुप हो, तो पौधे पर पानी का छिड़काव करें दोपहर के अंत वाले समय बोया गया गुलाब बढ़िया उगता है बैड पर 30 सैं.मी. व्यास और 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोद कर 75 सैं.मी. के फासले पर पौधों की बिजाई करें दो पौधों के बीच में फासला गुलाब की किस्म पर निर्भर करता है बीजों को 2-3 सैं.मी. गहराई में बोयें इसकी बिजाई सीधी या पनीरी लगा कर की जाती है गुलाब की फसल का का प्रजनन काटी गई जड़ों और बडिंग द्वारा किया जाता है उत्तरी भारत में दिसंबर-फरवरी महीने का समय टी-बडिंग के लिए उचित होता है पौधे की कांट-छांट दूसरे और उसके बाद के वर्षों में की जाती है उत्तरी भारत में गुलाब की झाड़ियों की कांट-छांट अक्तूबर के दूसरे या तीसरे हफ्ते में की जाती है जो शाखाएं झाड़ियों को घना बनाएं, उन्हें निकाल दें लटके हुए गुलाबों को छंटाई की जरूरत नहीं होती छंटाई के बाद, अच्छे से गले हुए 7-8 किलो गाय के गोबर को प्रति पौधे को डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें ग्रीन हाउस में, गुलाबों को पंक्तियों में बोया जाता है और पौधों का घनत्व 7-14 पौधे प्रति वर्ग मीटर होनी चाहिए बैड की तैयारी के समय 2 टन रूड़ी की खाद और 2 किलो सुपर फास्फेट को मिट्टी में डालें तीन महीने के फासले पर 10 किलो रूड़ी की खाद और 8 किलो नाइट्रोजन, 8 किलो फासफोरस और 16 किलो पोटाश प्रति पौधे में डालें छंटाई के बाद ही सारी खादों को डालें ज्यादा पैदावार लेने के लिए छंटाई से एक महीने बाद, जी ए 3@ 200 पी पी एम(2 ग्राम प्रति लीटर) की स्प्रे करें पौधे की तनाव सहन शक्ति को बढ़ाने के लिए घुलनशील जड़ उत्तेजक(रैली गोल्ड/रिजोम) 100 ग्राम+ टिपोल 60 मि.ली. को 100 लीटर पानी में डालकर प्रति एकड़ में शाम के समय सिंचाई करें मोनोकोट नदीनों की रोकथाम के लिए ग्लाइफोसेट 300 ग्राम और डिकोट नदीनों को रोकने के लिए ऑक्सीफ्लूरॉन 200 ग्राम को अंकुरन से पहले प्रति एकड़ में स्प्रे करें पौधों को खेत में लगाएं ताकि बढ़िया ढंग से विकास कर सके सिंचाई मिट्टी की किस्म और जलवायु के अनुसार करें आधुनिक सिंचाई तकनीक जैसे ड्रिप सिंचाई गुलाब की खेती के लिए लाभदायक होती है फव्वारा सिंचाई से परहेज करें क्योंकि इससे पत्तों को लगने वाली बीमारियां बढ़ती हैं गुलाब की फसल से दूसरे वर्ष से बढ़िया किफायती पैदावार लिया जा सकता है गुलाब की तुड़ाई फूलों का रंग पूरी तरह से विकसित पर और पहली एक और दो पंखुड़ियां खुलनी(पर पूरी तरह नहीं) पर तेज़ छुरी की सहायता से की जाती है निर्धारित लंबाई होने पर हाथ वाली छुरी के साथ काटा जाता है विदेशी बाज़ार के मांग के अनुसार बड़े फूलों के लिए तने की लंबाई 60-90 सैं.मी. और छोटे फूलों के लिए 40-50 सैं.मी. होती है फ़ॉलोन को सुबह जल्दी या दोपहर के अंत वाले समय में तोडना चाहिए इसकी मार्केटिंग आप नजदीकी फूल मार्किट में कर सकते है धन्यवाद

Posted by Bhopal Singh Saini
Uttar Pradesh
24-05-2019 09:58 PM
Bhopal Singh Saini ji Dairy Training ke liye aap Milk Commissioner s Office, Third Floor, Jawahar Bhawan, Ashok Marg, Lucknow-226001, Public Information Officer 0522-2286644 se samparak kare. Thank you.

Posted by Avdeshbhaduka
Rajasthan
24-05-2019 09:57 PM
अवदेश जी कृपया इसकी फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Gurjeevan singh
Haryana
24-05-2019 09:54 PM
Gurjeevan ji jehde khet vich leader, markpower di varto kiti jandi hai, othe jwar ja makki di bijai nahi kiti ja sakdi.dhanwad
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