Experts Q&A Search

Posted by Rameshwar Mishra
Madhya Pradesh
27-05-2019 12:29 AM
Punjab
05-28-2019 05:25 PM
Aleovera :-The plant can be grown in a variety of soils ranging from sandy coastal soils to loamy soils of plains. It cannot withstand in water logging conditions. It gives best results when grown under well drained loam to coarse sandy loam having pH ranges up to 8.5. SHATAVARI:- It is grown in variety of soils such as red loamy to clayey soil, black soil to laterite soil having good drainage system. It can also grow under rocky and shallow soils having soil depth not more than 20-30cm. It gives best result in sandy loam to medium black soil having good drainage system and pH ranging from 6-8 ranges best for plant growth.
Posted by zeeshan
Bihar
27-05-2019 12:23 AM
Punjab
05-28-2019 05:23 PM
ज़ीशान जी आप जून महीने में फूलगोभी, खीरा-ककड़ी, लोबिया, करेला, लौकी, तुरई, पेठा, बीन, भिण्डी, टमाटर, प्याज, चौलाई, शरीफा जैसी सब्जियों की बिजाई कर सकते है धन्यवाद
Posted by rajnikant sonwane
Maharashtra
26-05-2019 11:36 PM
Madhya Pradesh
05-27-2019 10:31 AM
मोती पालन के फायदे - मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो आपको अन्य लोगो से अलग करता है .वही लोग इस व्यवसाय को कर सकते है ..जिनकी सोच कुछ अलग करने की हो .. (1) एक एकड़ में पारंपरिक खेती से 50000/- का मुनाफा हो सकता है और मोती पालन से 8-10 लाख (2) एक तालाब में बहुउदेशीय योजनाओ का लाभ लेके 8-10 प्रकार के व्यापर करके आय मे बृद्धि (3) जमीन में ज.... (Read More)
मोती पालन के फायदे - मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो आपको अन्य लोगो से अलग करता है .वही लोग इस व्यवसाय को कर सकते है ..जिनकी सोच कुछ अलग करने की हो .. (1) एक एकड़ में पारंपरिक खेती से 50000/- का मुनाफा हो सकता है और मोती पालन से 8-10 लाख (2) एक तालाब में बहुउदेशीय योजनाओ का लाभ लेके 8-10 प्रकार के व्यापर करके आय मे बृद्धि (3) जमीन में जल स्तर को बढ़ाकर सरकार की मदद (4) बचे हुए सामान से हस्तकला उद्योग को बढ़ावा देना (5) यदि महिला वर्ग इस व्यवसाय में आते है तो ज्यादा फायदे है क्योकि मोती के आभूषण के साथ साथ मदर ऑफ़ पर्ल (Shell jewellery) का भी फायदा ले सकते है (6) आसपास के लोगो को रोजगार अधिक जानकारी संपर्क करे ..अमित बमोरिया 9407461361 9770085381 बमोरिया मोती सम्बर्धन केंद्र मध्य प्रदेश https://m.bhaskar.com/news/MP-HOSH-quitting-govt-job-engineer-is-earning-money-from-pearl-cultivation-news-hindi-5533297-PHO.html
Posted by vinay Sharma
Himachal Pradesh
26-05-2019 11:15 PM
Maharashtra
05-28-2019 04:36 PM
चेपा: चेपे का हमला नए पत्तों और फलों पर देखा जा सकता है यह पौधे का रस चूसकर उसे कमज़ोर कर देता है गंभीर हमले की स्थिति में पत्ते मुड़ जाते हैं या बेढंगे रूप के हो जाते हैं यह शहद की बूंद जैसा पदार्थ जो धुंएं जैसा होता है, को छोड़ते हैं प्रभावित भागों पर काले रंग की फफूंद पैदा हो जाती है जैसे ही हमला देखा जाये, .... (Read More)
चेपा: चेपे का हमला नए पत्तों और फलों पर देखा जा सकता है यह पौधे का रस चूसकर उसे कमज़ोर कर देता है गंभीर हमले की स्थिति में पत्ते मुड़ जाते हैं या बेढंगे रूप के हो जाते हैं यह शहद की बूंद जैसा पदार्थ जो धुंएं जैसा होता है, को छोड़ते हैं प्रभावित भागों पर काले रंग की फफूंद पैदा हो जाती है जैसे ही हमला देखा जाये, तुरंत प्रभावित हिस्से नष्ट कर दें डाइमैथोएट 300 मि.ली. प्रति 150 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई से 20-35 दिन बाद डालें यदि जरूरत हो तो दोबारा डालें हमला दिखने पर थाइमैथोक्सम 25 डब्लयु जी 5 ग्राम को प्रति 15 लीटर पानी की स्प्रे करें बीमारियां और रोकथाम चितकबरा रोग : इस बीमारी के लक्षणों के तौर पर सारे पत्तों पर एक जैसी पीली धारियां होती हैं इससे पौधे की वृद्धि पर भी असर पड़ता है और विकास रूक जाता है इससे फल भी पीले दिखाई देते हैं और आकार में छोटे और सख्त होते हैं इस से 80-90 प्रतिशत पैदावार कम हो जाती है यह बीमारी सफेद मक्खी और पत्ते के टिड्डे के कारण फैलती है इसकी रोकथाम के लिए रोधक किस्मों का प्रयोग करें बीमारी वाले पौधों को खेत में से दूर ले जाकर नष्ट कर दें सफेद मक्खी की रोकथाम के लिए डाइमैथोएट 300 मि.ली. प्रति 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें पत्तों पर सफेद धब्बे : इससे नए पत्तों और फलों पर सफेद धब्बे पड़ जाते हैं गंभीर हमले की स्थिति में फल पकने से पहले ही झड़ जाते हैं इससे फल की क्वालिटी भी कम हो जाती है और फल आकार में छोटे रह जाते हैं यदि इसका हमला दिखे तो घुलनशील सलफर 25 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी या डाइनोकैप 5 मि.ली. प्रति 10 लीटर पानी की स्प्रे 4 बार 10 दिनों के फासले पर करें या ट्राइडमॉर्फ 5 मि.ली. या पैनकोनाज़ोल 10 मि.ली. प्रति 10 लीटर की स्प्रे 4 बार 10 दिनों के फासले पर करें पत्तों पर धब्बा रोग : पत्तों के मध्य में सलेटी और किनारों पर लाल धब्बे पड़ जाते हैं गंभीर हमले की स्थिति में पत्ते झड़ने शुरू हो जाते हैं भविष्य में हमले से बचने के लिए बीजों को थीरम से उपचार करें यदि खेत में इसका हमला दिखे तो मैनकोजेब 4 ग्राम प्रति लीटर या कप्तान 2 ग्राम प्रति लीटर या कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें डाइफैनोकोनाज़ोल/ हैक्साकोनाज़ोल 0.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें जड़ गलन : प्रभावित जड़ें गहरे भूरे रंग की हो जाती हैं और ज्यादा हमले की स्थिति में पौधा मर जाता है इसकी रोकथाम के लिए एक ही फसल खेत में बार बार ना लगाएं, बल्कि फसली चक्र अपनाएं बिजाई से पहले बीजों को कार्बेनडाज़िम 2.5 ग्राम प्रति किलो बीज से उपचार करें मिट्टी में कार्बेनडाज़िम घोल 1 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें सूखा : इससे शुरूआत में पुराने पत्ते पीले पड़ जाते हैं और बाद में सारी फसल ही सूख जाती है यह बीमारी फसल पर किसी भी समय हमला कर सकती है यदि इसका हमला दिखे तो पौधे की नज़दीक की जड़ों में कार्बेनडाज़िम 10 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी डालें
Posted by Harpinder singh Hans
Punjab
26-05-2019 10:48 PM
Rajasthan
06-05-2019 09:11 AM
ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र अब बन गया है भारत का पहला निशुल्कः मोती प्रशिक्षण केंद्र जून और जुलाई महीने में 3 दिन का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए # जून - 22,23,24 (प्रशिक्ष.... (Read More)
ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र अब बन गया है भारत का पहला निशुल्कः मोती प्रशिक्षण केंद्र जून और जुलाई महीने में 3 दिन का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए # जून - 22,23,24 (प्रशिक्षण की तारीख ) # जुलाई - 20,21,22 (प्रशिक्षण की तारीख ) अचल सिंह (फाउंडर ) 9711858258 सवाईमाधोपुर, ग्राम(लहसोड़ा ), राजस्थान
Posted by Navdeep
Punjab
26-05-2019 10:39 PM
Punjab
05-31-2019 02:29 PM
ਇਸ ਵੀਡੀਓ ਵਿੱਚ ਪਸ਼ੂਆਂ ਤੇ ਲੋਨ ਲੈਣ ਦਾ ਤਰੀਕਾ ਬਾਰੇ ਡਿਟੇਲ ਨਾਲ ਦੱਸਿਆ ਗਿਆ ਹੈ ਜੀ, ਤੁਸੀ ਇਹ ਵੀਡੀਓ ਦੇਖੋ ਤੇ ਜੇਕਰ ਕਿਸੇ ਗੱਲ ਦੀ ਸਮਝ ਨਹੀ ਲੱਗੀ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਦੁਬਾਰਾ ਸਵਾਲ ਪੋਸਟ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ https://youtu.be/L9dsW7iAdgw
Posted by Sapan
Chattisgarh
26-05-2019 10:34 PM
Punjab
05-28-2019 04:20 PM
Aap unko janam ke 7 dino ke badd R2B vaccine krwayen fir 10 dino ke badd Chicken fowl pox vaccine krwa skte hai, baki app unki khurak ka puura dian rkhen.
Posted by जैद़ मेहर
Madhya Pradesh
26-05-2019 10:20 PM
Punjab
05-28-2019 05:21 PM
Pusa Sneha: यह किस्म 2004 में IARI द्वारा विकसित की गई इस किस्म के फल मध्यम आकार के, जो कि नर्म और रंग में गहरे हरे रंग के होते हैं जिन पर काले सलेटी रंग की धारियां बनी होती हैं यह किस्म उच्च तापमान के प्रतिरोधी है इस फसल के उत्पादन के लिए बसंत और बारिश का मौसम अच्छा रहता है इसकी कटाई मुख्य रूप से बिजाई के 45-50 दिनों के बाद की .... (Read More)
Pusa Sneha: यह किस्म 2004 में IARI द्वारा विकसित की गई इस किस्म के फल मध्यम आकार के, जो कि नर्म और रंग में गहरे हरे रंग के होते हैं जिन पर काले सलेटी रंग की धारियां बनी होती हैं यह किस्म उच्च तापमान के प्रतिरोधी है इस फसल के उत्पादन के लिए बसंत और बारिश का मौसम अच्छा रहता है इसकी कटाई मुख्य रूप से बिजाई के 45-50 दिनों के बाद की जाती है Azad Toria-1: उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में उगाने के लिए इस किस्म की सिफारिश की गई है
Posted by Laddi Singh Dhaliwal
Punjab
26-05-2019 10:12 PM
Punjab
06-01-2019 02:52 PM
ਧਾਲੀਵਾਲ ਜੀ ਤੁਸੀ ਅੰਬ, ਨਿੰਬੂ, ਆੜੂ, ਲੀਚੀ, ਅਮਰੂਦ, ਅੰਗੂਰ ਲਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹਨਾਂ ਸਾਰਿਆਂ ਬੂਟਿਆਂ ਦਾ ਅਲੱਗ-ਅਲੱਗ ਰੇੇਟ ਹੈ ਜੀ ਅਤੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ ਤੁਸੀ Raju 9878618854, Vishal Nursery ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by ਹਰਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਬਰਾੜ
Punjab
26-05-2019 10:09 PM
Punjab
05-31-2019 02:34 PM
यह घी की क्वालिटी, पैकिंग पर निर्भर करता है यह 1000 रूप्ये किलो भी बेचा जा सकता है मार्किटिंग आपको खुद ही करनी पड़ेगी
Posted by bazad khan
Punjab
26-05-2019 09:59 PM
Punjab
05-28-2019 05:19 PM
Bazad khan ji tuc isde uper khatti lassi di spray kar sakde ho. isdi matra 3ml nu prati liter pani de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by Rajkumar Jat
Rajasthan
26-05-2019 09:57 PM
Punjab
05-28-2019 05:18 PM
इसे ज्यादा और कम गहरी वाली मिट्टी के इलावा रेतली और चिकनी मिट्टी में भी उगाया जा सकता है इसकी खेती बंजर और बारानी इलाकों में की जा सकती है इसकी खेती लवण वाली, खारी और दलदली मिट्टी में भी की जा सकती है इसकी अच्छी पैदावार के लिए पानी को सोखने में सक्षम रेतली मिट्टी, जिस में पानी के निकास का अनुकूल प्रबंध हो , ठीक.... (Read More)
इसे ज्यादा और कम गहरी वाली मिट्टी के इलावा रेतली और चिकनी मिट्टी में भी उगाया जा सकता है इसकी खेती बंजर और बारानी इलाकों में की जा सकती है इसकी खेती लवण वाली, खारी और दलदली मिट्टी में भी की जा सकती है इसकी अच्छी पैदावार के लिए पानी को सोखने में सक्षम रेतली मिट्टी, जिस में पानी के निकास का अनुकूल प्रबंध हो , ठीक रहती है अगेती बोने वाली किस्में Gola: उच्च उपज और जल्दी पकने वाली यह किस्म सूखे क्षेत्रों के लिए अनुकूल है इसके फल गोल, हरे पीले रंग के होते हैं इसके फल जनवरी के पहले सप्ताह में पक जाते हैं दरमियानी पकने वाली किस्में Seb: इसके फल का औसतन भार 14 ग्राम होता है इसकी औसतन पैदावार 80 किलो प्रति वृक्ष होती है इसमें 20.7 प्रतिशत घुलनशील ठोस, 85 ग्राम प्रति 100 ग्राम विटामिन सी और 44 प्रतिशत तेजाब की मात्रा होती है इसके फल जनवरी के पहले सप्ताह में पक जाते हैं Mundia: इसके फल घंटी के आकार के फल होते हैं जो कि पकने पर पीले रंग के हो जाते हैं इनमें घुलनशील ठोस की मात्रा 18.5 प्रतिशत, विटामिन सी 90.7 मि.ग्राम प्रति 100 ग्राम और तेजाब की मात्रा 29 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 125 किलो प्रति वृक्ष होती है पिछेती बोने वाली किस्में Umran: इस किस्म के फल अंडाकार आकार के चमकदार होते हैं इसके फल का रंग सुनहरी पीला होता है जो पूरी तरह पकने के बाद चॉकलेटी रंग के हो जाते हैं यह किस्म मार्च के अंत से मध्य अप्रैल तक परिपक्व हो जाती है इसके एक बूटे की पैदावार 150 से 200 किलोग्राम प्रति वृक्ष होती है Kaithli: इस किस्म के फल दरमियाने और अंडाकर आकार के होते हैं और फल का रंग हरा पीला होता है इसकी फसल मार्च के आखिर में पककर तैयार हो जाती है इसके फलों में मिठास भरपूर मात्रा में होती है इसके बूटे से 75 किलोग्राम तक फल प्राप्त हो जाते हैं इस किस्म को फफूंद के हमले का ज्यादा खतरा रहता है यह आमतौर पर कलमों और टहनियों के द्वारा लगाया जाता है कत्था बेर आमतौर पर जड़ों के लिए प्रयोग किया जाता है बेर के बीजों को 17-18 प्रतिशत नमक के घोल में 24 घंटों के लिए भिगो कर रखें फिर अप्रैल के महीने नर्सरी में बिजाई करें पंक्ति से पंक्ति का फासला 15 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 30 सैं.मी होना चाहिए 3 से 4 सप्ताह बाद बीज अंकुरन होना शुरू हो जाता है और पौधा अगस्त महीने में कलम लगाने के लिए तैयार हो जाता है टी के आकार में काटकर जून-सितंबर महीने में इसे लगाना चाहिए इसका खेत में रोपण फरवरी-मार्च या अगस्त-सितंबर महीने में किया जाता है खेत में रोपण करने से पहले पौधों के पत्ते काट लें पौधे लगाने के लिए 7.5x7.5 मीटर का फासला रखें पौधे लगाने से पहले 60x60x60 सैं.मी. के गड्ढे खोदें और 15 दिनों के लिए धूप में खुले छोड़ दें इसके बाद इन गड्ढों को मिट्टी और गोबर से भर दें इसके बाद पौधों को इन गड्ढों में लगा दें हर साल पूरी तरह पौधे की कटाई और छंटाई जरूरी होती है यह नर्सरी के समय शुरू होती है ध्यान रखें कि नर्सरी में एक तने वाला पौधा हो खेत में रोपण के समय पौधे का ऊपर वाला सिरा साफ हो और 30-45 सैं.मी. लंबी 4-5 मजबूत टहनियां हों पौधे की टहनियों की कटाई करें ताकि टहनियां धरती पर ना फैल सकें पौधे की सूखी, टूटी हुई और बीमारी वाली टहनियों को काट दें मई के दूसरे पखवाड़े में पौधे की छंटाई करें जब पौधा ना बढ़ रहा हो एक वर्ष की फसल के लिए 10 किलोग्राम गाय का गला हुआ गोबर यूरिया 220 ग्राम के साथ प्रति वृक्ष में डालें दो वर्ष की फसल के लिए 20 किलोग्राम गाय का गला हुआ गोबर यूरिया 440 ग्राम के साथ प्रति वृक्ष में डालें तीन वर्ष की फसल के लिए 20 किलोग्राम गाय का गला हुआ गोबर यूरिया 1100 ग्राम के साथ प्रति वृक्ष में डालें चार वर्ष की फसल के लिए 25 किलोग्राम गाय का गला हुआ गोबर यूरिया 1200 ग्राम के साथ प्रति वृक्ष में डालें पांच वर्ष की फसल के लिए 30 किलोग्राम गाय का गला हुआ गोबर यूरिया 1200 ग्राम के साथ प्रति वृक्ष में डालें
Posted by mohandeep singh sekhon
Punjab
26-05-2019 09:56 PM
Maharashtra
05-28-2019 04:32 PM
ਰਾਜਮਾਂਹ ਨੂੰ ਚਿਲੀ ਬੀਨ ਵੀ ਕਿਹਾ ਜਾਦਾ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਇਸਦਾ ਰੰਗ ਲਾਲ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਕਿਡਨੀ ਵਰਗਾ ਹੈ ਇਹ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦਾ ਮੁੱਖ ਸ੍ਰੋਤ ਹੈ ਅਤੇ ਮੋਲੀਬੱਡੇਨਮ ਤੱਤ ਵੀ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਵਿੱਚ ਕਲੈਸਟਰੋਲ ਨੂੰ ਘਟਾਉਣ ਵਾਲੇ ਤੱਤ ਵੀ ਹਨ ਉੱਤਰੀ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ ਦਾਲ ਵੀ ਬਣਾਈ ਜਾਦੀ ਹੈ ਮਹਾਰਾਸ਼ਟਰ, ਜੰਮੂ ਅਤੇ ਕਸ਼ਮੀਰ, ਹਿਮਾਚਲ ਪ੍ਰਦੇਸ਼, ਉਤਰਾਖੰਡ, ਬੰਗਾਲ, ਤਾਮਿਲਨਾਡੂ, ਕੇਰਲ, ਕਰਨਾਟਕ ਵਿੱਚ .... (Read More)
ਰਾਜਮਾਂਹ ਨੂੰ ਚਿਲੀ ਬੀਨ ਵੀ ਕਿਹਾ ਜਾਦਾ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਇਸਦਾ ਰੰਗ ਲਾਲ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਕਿਡਨੀ ਵਰਗਾ ਹੈ ਇਹ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦਾ ਮੁੱਖ ਸ੍ਰੋਤ ਹੈ ਅਤੇ ਮੋਲੀਬੱਡੇਨਮ ਤੱਤ ਵੀ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਵਿੱਚ ਕਲੈਸਟਰੋਲ ਨੂੰ ਘਟਾਉਣ ਵਾਲੇ ਤੱਤ ਵੀ ਹਨ ਉੱਤਰੀ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ ਦਾਲ ਵੀ ਬਣਾਈ ਜਾਦੀ ਹੈ ਮਹਾਰਾਸ਼ਟਰ, ਜੰਮੂ ਅਤੇ ਕਸ਼ਮੀਰ, ਹਿਮਾਚਲ ਪ੍ਰਦੇਸ਼, ਉਤਰਾਖੰਡ, ਬੰਗਾਲ, ਤਾਮਿਲਨਾਡੂ, ਕੇਰਲ, ਕਰਨਾਟਕ ਵਿੱਚ ਉਗਣ ਵਾਲੀ ਫ਼ਸਲ ਹੈ ਮਿੱਟੀ ਇਹ ਫਸਲ ਹਰ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਰੇਤਲੀ ਅਤੇ ਭਾਰੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਉਗਦੀ ਹੈ ਜਲ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀਆਂ ਮੈਰਾ ਜਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦਾ ਝਾੜ ਬਹੁਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਫਸਲ ਜਿਆਦਾ ਖਾਰਾਪਣ ਨਹੀ ਸਹਾਰ ਸਕਦੀ ਲੱਗਪੱਗ 5.5 - 6 pH ਵਾਲੀਆਂ ਜਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦਾ ਝਾੜ ਵਧੇਰੇ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਕਿਸਮਾਂ ਅਤੇ ਝਾੜ VL Rajma 125: ਇਹ ਕਿਸਮ ਉਤਰਾਖੰਡ ਦੇ ਪਹਾੜੀ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਸਮੇਂ ਤੇ ਬੀਜੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਫਲੀ ਵਿੱਚ 4-5 ਬੀਜ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ 100 ਬੀਜ ਦਾ ਭਾਰ ਲੱਗਪੱਗ 41.38 ਗ੍ਰਾਮ ਹੁੰਦਾ ਹੈ RBL 6: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਬੀਜੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਬੀਜ ਹਲਕੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਫਲੀ ਵਿੱਚ 6-8 ਬੀਜ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਹੋਰ ਰਾਜਾਂ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈਆ ਜਾਣ ਵਾਲੀਆ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਕਿਸਮਾਂ: HUR 15, HUR-137, Amber and Arun, Arka Komal, Arka Suvidha, Pusa Parvathi, Pusa Himalatha, VL Boni 1, Ooty 1 ਆਦਿ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ 2-3 ਵਾਰ ਵਾਹ ਕੇ ਖੇਤ ਤਿਆਰ ਕਰ ਲਉ ਖੇਤ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਵਾਹੋ ਤਾਂ ਕਿ ਪਾਣੀ ਨਾ ਖੜ ਸਕੇ ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਫ਼ਸਲ ਪਾਣੀ ਨਹੀ ਸਹਾਰ ਸਕਦੀ ਫ਼ਸਲ ਬੀਜਣ ਤੋ ਪਹਿਲਾ 60-80 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਪਾਉ ਤਾਂ ਕਿ ਵਧੀਆਂ ਝਾੜ ਮਿਲ ਸਕੇ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਸਮਾਂ ਬਸੰਤ ਦੀ ਰੁੱਤ ਵਿੱਚ ਰਾਜਮਾਂਹ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਫਰਵਰੀ - ਮਾਰਚ ਅਤੇ ਸਾਉਣੀ ਦੀ ਰੁੱਤ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਮਈ -ਜੂਨ ਦੇ ਮਹੀਂਨੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਕੁੱਝ ਕਿਸਾਨ ਰਾਜਮਾਂਹ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਜਨਵਰੀ ਦੇ ਅਖੀਰਲੇ ਹਫਤੇ ਕਰਦੇ ਹਨ ਫਾਸਲਾ ਅਗੇਤੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਲਈ ਕਤਾਰ ਤੋਂ ਕਤਾਰ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 45-60 ਸੈ:ਮੀ: ਅਤੇ ਪੌਦੇ ਤੋਂ ਪੌਦੇ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 10-15 ਸੈ:ਮੀ: ਰੱਖੋ ਪੋਲ ਵਰਗੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਲਈ ਪਹਾੜੀ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਪੌਦੇ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 3-4 ਮੀਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਪਹਾੜੀ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਬੀਜ ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ ਬੀਜ ਨੂੰ 6-7 ਸੈ:ਮੀ:ਡੂੰਘਾ ਬੀਜੋ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਢੰਗ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਟੋਆ ਪੁੱਟ ਕੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਮਤਲ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਬੀਜ ਕਤਾਰਾਂ ਵਿੱਚ ਬੀਜੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਪਹਾੜੀ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ ਖੇਤੀ ਬੈਡ ਬਣਾ ਕੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬੀਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਅਗੇਤੀ ਕਿਸਮਾਂ ਲਈ 30-35 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਰਤੋ ਪੋਲ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਪਹਾੜੀ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ 1 ਮੀਟਰ ਦੇ ਫਾਸਲੇ 3-4 ਪੌਦੇ ਪ੍ਰਤੀ ਪਹਾੜੀ ਤੇ ਲਗਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਬੀਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 10-12 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬੀਜ ਦੀ ਸੋਧ ਬੀਜ ਦੀ ਸੋਧ ਥੀਰਮ 4 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਕਿੱਲੋ ਬੀਜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬੀਜ ਨੁੰ ਛਾਂ ਵਿੱਚ ਸਕਾਉ ਅਤੇ ਤੁਰੰਤ ਬੀਜ ਦਿਉ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਫ਼ਸਲ ਦੇ ਸ਼ੁਰੂ ਵਿੱਚ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋ 2-3 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਅੰਦਰ ਅੰਦਰ ਫਲੂਕਲੋਰਿਨ 800 ਮਿ:ਲੀ: ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਜਾਂ ਪੈਂਡੀਮੈਥਾਲਿਨ 1 ਲੀਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਰਤੋ ਸਿੰਚਾਈ ਖੇਤ ਨੂੰ ਰਾਉਣੀ ਕਰਨੀ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਇਸ ਤੋ ਇਲਾਵਾ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ 6-7 ਪਾਣੀ ਲਗਦੇ ਹਨ ਪਹਿਲਾ ਪਾਣੀ ਫ਼ਸਲ ਬੀਜਣ ਤੋਂ 25 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਲੱਗਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਅਗਲੇ ਤਿੰਨ ਪਾਣੀ 25 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਲਗਾਉ ਵਧੀਆ ਝਾੜ ਲਈ ਇਸ ਤੋਂ ਅਗਲਾ ਪਾਣੀ ਫੁੱਲ ਪੈਣ ਤੇ ਅਤੇ ਫਲੀਆ ਬਨਣ ਤੇ ਲਗਾਉਣੇ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹਨ ਜੇਕਰ ਇਹਨਾ ਪੜਾਅ ਤੇ ਪਾਣੀ ਨਾ ਲੱਗੇ ਤਾਂ ਫ਼ਸਲ ਦੇ ਝਾੜ ਤੇ ਬਹੁਤ ਅਸਰ ਪੈਦਾ ਹੈ ਫਸਲ ਦੀ ਕਟਾਈ ਜਦੋਂ ਇਸ ਦੀਆਂ ਫਲੀਆ ਪੂਰੀ ਤਰਾਂ ਪੱਕ ਜਾਣ ਅਤੇ ਰੰਗ ਪੀਲਾ ਹੋ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਇਸ ਦੀ ਕਟਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਪੱਤੇ ਪੀਲੇ ਪੈਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਡਿੱਗਣੇ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਕਿਸਮ ਦੇ ਆਧਾਰ ਤੇ ਇਸ ਦੀਆ ਫਲੀਆਂ 7-12 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਕਟਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆ ਹਨ ਇਹ ਫਸਲ 120-130 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕਟਾਈ ਸਮੇਂ ਤੇ ਕਰੋ ਕੱਟੀ ਹੋਈ ਫਸਲ 3-4 ਦਿਨਾਂ ਲਈ ਧੁੱਪ ਵਿੱਚ ਰੱਖੋ ਚੰਗੀ ਤਰਾਂ ਸੁੱਕਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਬਲਦਾਂ ਜਾਂ ਸੋਟੀਆਂ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਛਟਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕਟਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਰਾਜਮਾਂਹ ਨੂੰ ਕਟਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਕਈ ਕੰਮਾਂ ਲਈ ਵਰਤਿਆਂ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਸਾਂਭ ਸੰਭਾਲ ਦੇ ਸਮੇਂ ਇਸ ਦੀ ਦੇਖਭਾਲ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਰਾਜਮਾਂਹ ਨੂੰ ਸਟੋਰ ਕਰਨ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਆਕਾਰ ਅਤੇ ਕੁਆਲਿਟੀ ਦੇ ਆਧਾਰ ਤੇ ਵੰਡਿਆਂ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਗਲੇ ਹੋਏ ਰਾਜਮਾਂਹ ਧੁੱਪ ਵਿੱਚ ਹਲਕੀ ਗਰਮੀ ਵਿੱਚ ਰੱਖ ਦਿੱਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਕਿ ਉਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਨਮੀ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਘੱਟ ਜਾਵੇ ਇਸ ਲਈ ਹਮੇਸ਼ਾ ਠੰਡੀ,ਹਨੇਰੇ ਅਤੇ ਸੁੱਕੀ ਜਗਾਹ ਤੇ ਰੱਖ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ
Posted by bazad khan
Punjab
26-05-2019 09:55 PM
Punjab
05-28-2019 02:19 PM
Bazad khan ji Jhona loan vali machine da price is de size de hisab nal alag alag hai, is bar puri jankari lai tusi Rahul Jain 9814121860 nal samparak kar sakde ho. Thank you.
Posted by Gurjeet Singh
Uttar Pradesh
26-05-2019 09:55 PM
Maharashtra
05-28-2019 04:57 PM
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई कर.... (Read More)
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आप इसकी किस्मे जैसे Washington Coorg Honey Pusa Delicious Pusa Dwarf की बिजाई कर सकते है आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं एक एकड़ में 104 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें कम बारिश वाले क्षेत्रों में जून - जुलाई के महीने में बिजाई की जानी चाहिए और तराई और अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में सितंबर महीने में बिजाई की जानी चाहिए और क्षेत्र जहां सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हो वहां पर फरवरी - मार्च के महीने में बिजाई की जानी चाहिए आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 0.8 किलो प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं तुड़ाई एक एक फल को हाथों से तोड़कर की जाती है फलों को सुबह के समय तोड़ें धन्यवाद
Posted by Gurjeet Singh
Uttar Pradesh
26-05-2019 09:54 PM
Punjab
05-28-2019 04:48 PM
इसे मिट्टी की विभिन्न किस्मों हल्की से उच्च पोषक तत्वों वाली मिट्टी में उगाया जा सकता है जैसे कि गहरी गाद चिकनी, दोमट और उच्च दोमट मिट्टी केले की खेती के लिए उपयुक्त होती है केले की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6 से 7.5 होनी चाहिए केला उगाने के लिए, अच्छे निकास वाली, पर्याप्त उपजाऊ और नमी की क्षमता वाली मिट्टी का .... (Read More)
इसे मिट्टी की विभिन्न किस्मों हल्की से उच्च पोषक तत्वों वाली मिट्टी में उगाया जा सकता है जैसे कि गहरी गाद चिकनी, दोमट और उच्च दोमट मिट्टी केले की खेती के लिए उपयुक्त होती है केले की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6 से 7.5 होनी चाहिए केला उगाने के लिए, अच्छे निकास वाली, पर्याप्त उपजाऊ और नमी की क्षमता वाली मिट्टी का चयन करें उच्च नाइट्रोजन युक्त मिट्टी,पर्याप्त फासफोरस और उच्च स्तर की पोटाश वाली मिट्टी में केले की खेती अच्छी होती है जल जमाव, कम हवादार और कम पौष्टिक तत्वों वाली मिट्टी में इसकी खेती ना करें रेतली, नमक वाली, कैल्शियम युक्त और अत्याधिक चिकनी मिट्टी में भी इसकी खेती ना करें गर्मियों में, कम से कम 3 से 4 बार जोताई करें आखिरी जोताई के समय, 10 टन अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें ज़मीन को समतल करने के लिए ब्लेड हैरो या लेज़र लेवलर का प्रयोग करें वे क्षेत्र जहां निमाटोड की समस्या होती है वहां पर रोपाई से पहले निमाटीसाइड और धूमन, गड्ढों में डालें प्रसिद्ध किस्में:- Grand Naine, Red Banana, Safed Velachi, Basarai, Rasthali, Dwarf Cavendish, Robusta, Poovan, Nendran, Ardhapuri, Nyali केले की रोपाई के लिए मई-जून या सितंबर-अक्तूबर का समय उपयुक्त होता है टिशू कल्चर से तैयार पौधों को पूरे साल में लगाया जा सकता है, जब तक कि तापमान के बहुत कम या बहुत अधिक होने पर पौधों की रोपाई नहीं की जा सकती उत्तरी भारत में, तटीय क्षेत्रों में, जहां उच्च नमी और तापमान जैसे 5-7 डिगरी सेल्सियस से कम तापमान हो, वहां पर रोपाई के लिए 2.1 मीटरx 2.1 मीटर से कम फासला नहीं होना चाहिए केले की जड़ों को 45x 45x45 सैं.मी. या 60x60x60 सैं.मी. आकार के गड्ढों में रोपित करें गड्ढों को धूप में खुला छोड़ें, इससे हानिकारक कीट मर जायेंगे गड्ढों को 10 किलो रूड़ी की खाद या गला हुआ गोबर, नीम केक 250 ग्राम और कार्बोफ्युरॉन 20 ग्राम से भरें जड़ों को गड्ढें के मध्य में रोपित करे और मिट्टी के आसपास अच्छी तरह से दबायें गहरी रोपाई ना करें यदि फासला 1.8x1.5 मीटर लिया जाये तो प्रति एकड़ में 1452 पौधे लगाएं यदि फासला 2 मीटर x 2.5 मीटर लिया जाये, तो एक एकड़ में 800 पौधे लगाने की सिफारिश की जाती है धन्यवाद
Posted by davinder singh
Punjab
26-05-2019 09:50 PM
Punjab
05-27-2019 03:15 PM
ਦਵਿੰਦਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਝੋਟੀ ਨੂੰ 35-40 ਕਿਲੋ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿਓ, ਉਸ ਵਿਚ ਤੁਸੀ 5-7 ਕਿਲੋ ਤੂੜੀ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਦਿਓ, ਬਾਕੀ ਉਸ ਨੂੰ ਫੀਡ 2-2.5 ਕਿਲੋ ਇਕ ਟਾਈਮ ਦੀ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਬਾਕੀ ਉਸਦੀ ਹਰ 3 ਮਹੀਨੇ ਬਾਦ ਡਿਵਰਮਿੰਗ ਜਰੂਰ ਕਰਵਾਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਵਧਿਆ ਗਰੋਥ ਹੁੰਦੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ .
Posted by dk
Madhya Pradesh
26-05-2019 09:46 PM
Punjab
05-28-2019 02:12 PM
DK जी आप अपना सवाल सगी और विस्तार से लिखें ताकि आपको सही और पूरी जानकारी दी जा सके, आपके द्वारा पूछे गए सवाल की पुष्टि के लिए आपको कॉल भी की गई थी पर आपने फ़ोन नहीं उठाया, धन्यवाद
Posted by Dheeraj Kumar
Uttar Pradesh
26-05-2019 09:45 PM
Punjab
05-27-2019 04:45 PM
इससे वो गाभिन नहीं होगी अगर कोई दर्द हो तो उसे Injection Megludyne 20ml, Injection Intacef 3gm तीन दिन लगवायें इसमें कोई खतरा नहीं है
Posted by Vishesh Pal
Uttar Pradesh
26-05-2019 09:45 PM
Maharashtra
05-28-2019 04:46 PM
गन्ने की जड़ों में इमीडाकलोपरिड 4-6 मि.ली. को प्रति 10 लीटर पानी में मिला कर प्रयोग करें फसल अगेती बीजने से भी इसके नुकसान से बचा जा सकता है बीजों का कलोरपाइरीफॉस से उपचार करना चाहिए इसके इलावा 4 किलो फोरेट या कार्बोफिउरॉन 13 किलो प्रति एकड़ को मिट्टी में मिलाएं खेत में पानी खड़ा करके भी इस कीड़े को रोका जा सकता है .... (Read More)
गन्ने की जड़ों में इमीडाकलोपरिड 4-6 मि.ली. को प्रति 10 लीटर पानी में मिला कर प्रयोग करें फसल अगेती बीजने से भी इसके नुकसान से बचा जा सकता है बीजों का कलोरपाइरीफॉस से उपचार करना चाहिए इसके इलावा 4 किलो फोरेट या कार्बोफिउरॉन 13 किलो प्रति एकड़ को मिट्टी में मिलाएं खेत में पानी खड़ा करके भी इस कीड़े को रोका जा सकता है क्लोथाइनीडिन 40 ग्राम एकड़ को 400 लीटर पानी में मिलाकर डालें
Posted by Ashish Rana
Punjab
26-05-2019 09:35 PM
Punjab
05-28-2019 04:44 PM
Jhone di bijayi to 18 din bad tuc is vich khaada pauniyan shuru karo. jis vich 36 killo urea ate 27 killo DAP prati acre de hisab nal khet vich payi jandi hai. jekar tuc pichli fasl vich Dap payi hai ta tuhanu hun DAP paun di lod nahi hai.is to ilava tuc urea di poori matra paun to bad biovita@8 killo ja tata ralli gold@4 killo prati acre de hisab nal khet vich pao.isde nal jhone da futara vadia hunda hai.
Posted by Lovepreet Singh
Punjab
26-05-2019 09:27 PM
Maharashtra
05-27-2019 12:29 PM
Lovepreet Singh ji kirpa karke apna swal visthar nal pusho ta jo tuhanu sahi jankari diti ja sake. Thank you.
Posted by Rajendra Kumar rajbhar
Uttar Pradesh
26-05-2019 09:16 PM
Punjab
05-27-2019 03:43 PM
यदि आप नए सिरे से मक्खी पालन का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो अगस्त से जनवरी तक शुरू किया जा सकता है मक्खी फार्म के पास जी टी रोड, रेलवे लाइन्स तथा टेलीफोन या बिजली की तारों का जाल न हो फूलों से मक्खियों को नैक्टर (फूलों का रस ) तथा पोलन मिलता है जो की मक्खियों की खुराक होते हैं अधिक शहद इकठा करने के लिए फूलों व.... (Read More)
यदि आप नए सिरे से मक्खी पालन का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो अगस्त से जनवरी तक शुरू किया जा सकता है मक्खी फार्म के पास जी टी रोड, रेलवे लाइन्स तथा टेलीफोन या बिजली की तारों का जाल न हो फूलों से मक्खियों को नैक्टर (फूलों का रस ) तथा पोलन मिलता है जो की मक्खियों की खुराक होते हैं अधिक शहद इकठा करने के लिए फूलों वाली मुख्य फसलें सरसों, तोरियां, राया गोभी सरसों सफेदा बरसीम सूरजमुखी लीची अरहर टाहली कपास आदि हैं जिन इलाकों में यह फूलके स्रोत के समय समय पर मिलते हैं उन इलाकों में इस व्यवसाय को बहुत कामयाबी के साथ अपनाया जाता है इसमें 100 मक्खी के बक्सों से आप औसतन 25000-30000 तक का मुनाफा ले सकते हैं शुरूआत में यदि आप 100 बक्सों से काम शुरू करते हैं तो औसतन 4-5 लाख तक खर्चा आता है आप अपने बजट के हिसाब से बक्सों की गिणती कम ज्यादा कर सकते हैं बाकी यदि इसकी ट्रेनिंग लेकर शुरू करें तो बढ़िया रहेगा ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने ज़िले के कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग ले सकते है आप वहां जाकर अपना ट्रेनिंग फार्म भर आएं जब भी वहां इसकी ट्रेनिंग होगी तो वो आपको फोन करके बता देंगे इस तरह आप ट्रेनिंग लेकर इस काम को शुरू कर सकते है
Posted by BECHULAL
Uttar Pradesh
26-05-2019 09:15 PM
Rajasthan
05-27-2019 10:52 AM
BECHULAL जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप मेरे से 9711858258 पर संपर्क करें, धन्यवाद
Posted by Sandeep singh
Punjab
26-05-2019 09:07 PM
Punjab
05-26-2019 11:02 PM
ਸੋਲਰ ਮੋਟਰ ਸਿਰਫ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ 2700 ਕੁਨੈਕਸ਼ਨ ਜਾਰੀ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਸੀ, ਓਹ ਤਕਰੀਬਨ ਲਗ ਚੁਕਾ ਹੈ ਜੀ, ਇਹ ਕੁਨੈਕਸ਼ਨ AC 65000 ਅਤੇ DC 75000 ਵਿਚ ਲਗਾਏ ਗਏ ਹਨ,ਇਹਨਾ ਕੁਨੈਕਸ਼ਨ ਵਿਚ 80% ਸਬਸਿਡੀ ਦਿੱਤੀ ਗਈ ਹੈ ! AC ਮੋਟਰ 5 HP ਦੀ ਸਬਮਰਸੀਬਲ ਲਗਦੀ ਹੈ ਜੋ 60/70 ਫੁਟ ਤੋ 3 ਇੰਚੀ ਪਾਣੀ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਤੇ ਰੋਜ਼ਾਨਾ 10 ਘੰਟੇ ਚਲਦੀ ਹੈ! DC 3 HP ਦੀ ਮੋਟਰ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਤੇ 2:5 ਇੰਚੀ ਪਾਣੀ ਦਿੰਦੀ ਇਹ AC ਮੋਟਰ ਨਾਲੋ ਥੋਡਾ ਵਧ ਸਮਾ ਚਲਦੀ ਹੈ .... (Read More)
ਸੋਲਰ ਮੋਟਰ ਸਿਰਫ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ 2700 ਕੁਨੈਕਸ਼ਨ ਜਾਰੀ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਸੀ, ਓਹ ਤਕਰੀਬਨ ਲਗ ਚੁਕਾ ਹੈ ਜੀ, ਇਹ ਕੁਨੈਕਸ਼ਨ AC 65000 ਅਤੇ DC 75000 ਵਿਚ ਲਗਾਏ ਗਏ ਹਨ,ਇਹਨਾ ਕੁਨੈਕਸ਼ਨ ਵਿਚ 80% ਸਬਸਿਡੀ ਦਿੱਤੀ ਗਈ ਹੈ ! AC ਮੋਟਰ 5 HP ਦੀ ਸਬਮਰਸੀਬਲ ਲਗਦੀ ਹੈ ਜੋ 60/70 ਫੁਟ ਤੋ 3 ਇੰਚੀ ਪਾਣੀ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਤੇ ਰੋਜ਼ਾਨਾ 10 ਘੰਟੇ ਚਲਦੀ ਹੈ! DC 3 HP ਦੀ ਮੋਟਰ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਤੇ 2:5 ਇੰਚੀ ਪਾਣੀ ਦਿੰਦੀ ਇਹ AC ਮੋਟਰ ਨਾਲੋ ਥੋਡਾ ਵਧ ਸਮਾ ਚਲਦੀ ਹੈ ਪਰ ਇਸਦੀ ਲੋਕਲ ਰਿਪੇਅਰ ਨਹੀ ਹੁੰਦੀ,,ਸੋਲਰ ਮੋਟਰ ਸਵੇਰੇ 2 ਘੰਟੇ ਅਤੇ ਸ਼ਾਮ ਨੂੰ 2 ਘੰਟੇ ਅੱਧਾ ਪਾਣੀ ਕੱਡਦੀ ਹੈ ਤੇ ਦੋਪੇਹਰ ਨੂੰ 6 ਘੰਟੇ ਪੂਰਾ ਪਾਣੀ ਕਡਦੀ ਹੈ ਜੀ
Posted by Amritpal singh
Punjab
26-05-2019 09:05 PM
Punjab
05-27-2019 03:19 PM
tuci uss nu vitum-h liquid 10ml-10ml swere sham dena suru kro, isde nal tuci anabolite liquid 100ml rojana deo ate suun ton 1 mahina pehla metabolite powder di rojana 1 pudi deo, baki usdi khurak da dian rkho ate usdi her 3 mahine de farak nal deworming jrurr krwao ji..
Posted by aashish
Rajasthan
26-05-2019 09:04 PM
Punjab
05-27-2019 03:21 PM
कृपया आप अपना सवाल विस्तार से बताएं कि आप बरसीम के बारे में क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by jella.pardhan
Punjab
26-05-2019 09:03 PM
Maharashtra
05-27-2019 06:57 PM
ਬੀਜ ਦੀ ਸੋਧ: ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ 10 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ 20 ਗ੍ਰਾਮ ਕਾਰਬੈਨਡਾਜ਼ਿਮ @ 1 ਗ੍ਰਾਮ ਸਟਰੈਪਟੋਸਾਈਕਲਿਨ ਘੋਲ ਲਵੋ ਅਤੇ ਇਸ ਘੋਲ ਵਿੱਚ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ 8-10 ਘੰਟੇ ਭਿਉ ਦੇਵੋ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਛਾਂ ਵਿੱਚ ਸੁਕਾਉ ਇਸ ਤਰਾਂ ਬੀਜਾ ਨੂੰ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ
Posted by Jaspreet Singh
Punjab
26-05-2019 08:56 PM
Punjab
05-27-2019 06:55 PM
ਹਾਜੀ 35/- ਪ੍ਰਤੀ ਬੂਟਾ ਵਣ ਵਿਭਾਗ ਤੋ ਮਿਲੇਗਾ ਇਸ ਲਈ ਬੇਅੰਤ ਕੌਰ ਵਣ ਗਾਰਡ ਨਾਲ ਤਾਲਮੇਲ ਕਰੋ ਸਬਸਿਟੀ 70% ਬਾਅਦ ਵਿੱਚ ਮਿਲੇਗੀ ਬੇਅੰਤ ਕੌਰ ਜੀ ਦਾ ਨੰਬਰ ‎ 99158 87997 ਹੈ ਜੀ
Posted by chirag chopra
Haryana
26-05-2019 08:56 PM
Punjab
05-27-2019 03:23 PM
ਜੇਕਰ ਉਹ ਮੋਟੇ ਨਾਲੇ ਕਰਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Concimax ਗੋਲੀਆਂ 1-1 ਗੋਲੀ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ 14 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਅੰਦਰ ਤੋਂ ਇਨਫੈਕਸ਼ਨ ਖਤਮ ਹੋਵੇਗਾ, ਜੇਕਰ ਉਹ ਦੁਬਾਰਾ ਪੂਰੀ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਦੁਬਾਰਾ ਆਪਣਾ ਸਵਾਲ ਪੁੱਛੋਂ ਜੀ ..
Posted by Manoj Khere
Madhya Pradesh
26-05-2019 08:52 PM
Punjab
05-28-2019 11:35 AM
ज़मीन की तैयारी गेहूं की कटाई के बाद ज़मीन पर हरी खाद के तौर पर मई के पहले सप्ताह ढैंचा (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़), या सन (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़) या लोबीया (बीज दर 12 किलोग्राम प्रति एकड़) की बिजाई करनी चाहिए जब फसल 6 से 8 सप्ताह की हो जाए तो इसे खेत में कद्दू करने से एक दिन में ही जोत देना चाहिए इस तरह प्रति एक.... (Read More)
ज़मीन की तैयारी गेहूं की कटाई के बाद ज़मीन पर हरी खाद के तौर पर मई के पहले सप्ताह ढैंचा (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़), या सन (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़) या लोबीया (बीज दर 12 किलोग्राम प्रति एकड़) की बिजाई करनी चाहिए जब फसल 6 से 8 सप्ताह की हो जाए तो इसे खेत में कद्दू करने से एक दिन में ही जोत देना चाहिए इस तरह प्रति एकड़ 25 किलो नाइट्रोजन खाद की बचत होती है भूमि को समतल करने के लिए लेज़र लेवलर का प्रयोग किया जाता है इसके बाद खेत में पानी खड़ा कर दें ताकि भूमि के अंदर ऊंचे नीचे स्थानों की पहचान हो सके इस तरह पानी के रसाव के कारण पानी की होने वाले बर्बादी को कम किया जा सके बीज बीज की मात्रा छींटे द्वारा की जाने वाली बिजाई के लिए 7-8 किलोग्राम प्रति एकड़ बीज का प्रयोग किया जाता है गड्ढा खोदकर की जाने वाली बिजाई के लिए 7-9 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ डाला जाता है वैट बैड और सूखे बैड बनाकर लगाई जाने वाली पनीरी के लिए 10-12 किलोग्राम बीज 500 वर्ग मीटर में प्रयोग किया जाता है जो कि एक एकड़ खेत के लिए बहुत होता है मॉडीफाइड बैड नर्सरी के लिए 8-10 किलोग्राम बीज 200 वर्ग मीटर में प्रयोग किया जाता है जो कि एक एकड़ खेत के लिए बहुत होता है बीजों का उपचार बिजाई से पहले 10 लीटर पानी में 20 ग्राम कार्बेनडाज़िम + 1 ग्राम स्ट्रैप्टोसाईक्लिन घोल लें और इस घोल में बीजो को 8-10 घंटे तक भिगोयें उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं और फिर बीज बिजाई के लिए तैयार हैं बिजाई का समय इसकी बिजाई के लिए 20 मई से 5 जून का समय अनुकूल होता है फासला सही समय पर उगाई जाने वाली फसल के लिए पंक्तियों का फासला 20-22.5 सैं.मी. रखा जाता है यदि फसल की बिजाई पिछेती होती है तो फासला 15-18 सैं.मी. रखना चाहिए बिजाई का ढंग इसकी बिजाई छींटे द्वारा की जाती है पौधे की गहराई पौधे की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए फासला बनाकर लगाने से पौधे ज्यादा पैदावार देते हैं बिजाई से पहले 10 लीटर पानी में 20 ग्राम कार्बेनडाज़िम @ 1 ग्राम स्ट्रैप्टोसाईक्लिन घोल लें और इस घोल में बीजों को 8-10 घंटे तक भिगोयें उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं इस तरह बीज बिजाई के लिए तैयार होते हैं नर्सरी तैयार करना - नर्सरी तैयार करने के लिए 15 से 30 मई तक का अनुकूल समय होता है वैट बैड नर्सरी : यह तकनीक उन क्षेत्रों में अपनाई जाती है जहां पर पानी ज्यादा मात्रा में पाया जाता है नर्सरी का 1/10 हिस्सा दूसरे खेत में लगाया जाता है इसकी बिजाई छींटे द्वारा की जाती है यहां पर खेत की जोताई और खेत को समतल किया जाता है बैडों पर कईं दिन तक नमी बनाए रखनी चाहिए पानी से खेत को ज्यादा ना भरें जब नर्सरी 2 सैं.मी. से वृद्धि कर जाए तब पानी को खेत में लगाते रहना चाहिए बिजाई के 15 दिन बाद 26 किलो यूरिया डालना चाहिए जब नर्सरी 25-30 सैं.मी. तक लंबी हो जाए तब उसे 15-21 दिन बाद दूसरे खेत में लगा देना चाहिए और खेत को लगातार पानी लगाते रहना चाहिए सूखे बैड वाली नर्सरी : यह तकनीक शुष्क क्षेत्रों में अपनाई जाती है जो बैड बनाया जाता है वो बिजाई वाले खेत का 1/10 हिस्से में बीज बोया जाता है बैड का आकार सीमित होना चाहिए और उसकी ऊंचाई 6-10 से.मी होनी चाहिए धान का आधा जला हुआ छिलका बैड पर बिखेर देना चाहिए इससे जड़ें मजबूत होती हैं सही समय पर सिंचाई करते रहना चाहिए और नमी बनाए रखना चाहिए ताकि नए पौधे नष्ट ना हों तत्वों की पूर्ति के लिए खाद डालना जरूरी है मॉडीफाईड मैट नर्सरी : यह नर्सरी लगाने का एक ऐसा तरीका है जिसमें कम जगह और कम बीजों की जरूरत होती है यह नर्सरी किसी भी जगह पर बनाई जा सकती हैं जहां पर समतल जगह हो और पानी की सुविधा हो इसकी पनीरी लगाने के लिए 1% खेत की जरूरत होती है 4 से.मी की सतह पर नए पौधे लगाए जाते हैं इसे बनाने के लिए 1 मीटर चौड़े और 20-30 मीटर लंबे जमीन के टुकड़े की जरूरत होती है इसके ऊपर बिछाने के लिए पॉलीथीन और केले के पत्तों की जरूरत होती है इसके इलावा एक लकड़ी का बकसा जो कि 4 से.मी गहरा होता हैं मिट्टी के मिश्रण से भरा होता है बीजों को इसके अंदर रख देना चाहिए और फिर बीजों को सूखी मिट्टी के साथ ढक देना चाहिए इसके बाद पानी का छिड़काव कर देना चाहिए लकड़ी के बक्से को नमी देते रहना चाहिए बिजाई से 11-14 दिनों के बाद पौध तैयार हो जाती है जब पौध तैयार हो जाती है तब मैट से पौध को दूसरे खेत में रोपण कर दिया जाता है फासला: पौधों का फासला 20x20 से.मी या 25x25 से.मी होना चाहिए पनीरी लगाने का ढंग 1. कद्दू करके लगाई जाने वाली पनीरी : आमतौर पर पंक्ति में लगाए जाने वाले पौधे 20x15 सैं.मी. दूरी पर लगाए जाते हैं और देरी से लगाई जाने वाली पनीरी 15x15 सैं.मी. पर लगाई जाती है नए पौधों की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए 2. बैड बनाकर लगाई जाने वाली पनीरी : यह बैड भारी ज़मीनों के लिए बनाए जाते हैं पनीरी लगाने से पहले खालियों में पानी लगाना चाहिए और फिर पनीरी को खेत में लगाना चाहिए पौधे से पौधे का फासला 9 सैं.मी. होना चाहिए 3. मशीनी ढंग से लगाई जाने वाली पनीरी : मैट पनीरी के लिए मशीनों का प्रयोग किया जाता है यह मशीन 30x12 सैं.मी. के फासले पर पनीरी लगानी चाहिए
Posted by manjesh kumar
Uttar Pradesh
26-05-2019 08:39 PM
Punjab
05-27-2019 03:38 PM
यदि आप लेयर पोल्ट्री फार्म करना चाहते है तो लेयर फार्मिंग के लिए आपको 50 फुट लंबी लगह और 20 फुट चौड़ाई वाली जगह की जरूरी होगी यह सारी जगह 1000 वर्ग फुट बन जाती है इसमें आप 1000 बच्चे रख सकते हैं यदि आप लेयर का बच्चा अपने फार्म पर लाकर तैयार करते है तो एक बच्चे का अंडे देने का कुल खर्च 160—170 रूपये आ जाता है और यदि आप पूरी त.... (Read More)
यदि आप लेयर पोल्ट्री फार्म करना चाहते है तो लेयर फार्मिंग के लिए आपको 50 फुट लंबी लगह और 20 फुट चौड़ाई वाली जगह की जरूरी होगी यह सारी जगह 1000 वर्ग फुट बन जाती है इसमें आप 1000 बच्चे रख सकते हैं यदि आप लेयर का बच्चा अपने फार्म पर लाकर तैयार करते है तो एक बच्चे का अंडे देने का कुल खर्च 160—170 रूपये आ जाता है और यदि आप पूरी तरह तैयार बच्चा लेते हैं तो आपके फार्म पर सिर्फ अंडे दे तो वह एक बच्चा 205—210 रूपये तक पड़ जाता है फिर आप उस हिसाब से बच्चे खरीद सकते हैं इसके लिए आप लेयर वाली कंपनी से संपर्क कर सकते हैं बाकी यदि आप deep litter में बच्चे रखते हैं तो इससे भी बढ़िया फायदा मिलता है पर इसमें देख रेख ज्यादा करनी पड़ती है
Posted by lakhwinder singh
Punjab
26-05-2019 08:34 PM
Punjab
05-28-2019 04:42 PM
Lakhwinder ji kirpa karke daso ke tuc isnu kehdi fasl vich pauna hai ta jo tuhanu isde hisab nal jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by manjesh kumar
Uttar Pradesh
26-05-2019 08:32 PM
Punjab
05-26-2019 08:58 PM
ट्रेनिंग के लिए आप बरेली संपर्क करें
Posted by Bhagwant Singh
Punjab
26-05-2019 08:32 PM
Punjab
05-28-2019 02:25 PM
Bhagwant Singh ji 1125 nai PUSA Basmati 1121 hai. Basmati 1121 di paneeri 1 June to 15 June tak beej skde ho ਇਸਦਾ ਪੌਦਾ ਲੰਬਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 137 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਪੱਕਣ ਦੀ ਗੁਣਵੱਤਾ ਵਧੀਆਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 13.7 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by manjesh kumar
Uttar Pradesh
26-05-2019 08:29 PM
Haryana
05-27-2019 11:47 AM
Kya jankari chahiye whatsapp karo 9053842542
Posted by Dharminder
Punjab
26-05-2019 08:27 PM
Punjab
05-27-2019 12:13 PM
Dharminder ji kirpa karke apna swal visthar nal pushu ta jo tuhanu sahi jankari diti ja sake.Thank you.
Posted by j.p
Rajasthan
26-05-2019 08:18 PM
Punjab
05-28-2019 04:40 PM
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है लेकिन अच्छे निकास वाली गहरी जलोढ़, रेतली दोमट और काली मिट्टी चीकू की खेती के लिए उत्तम रहती है चीकू की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.0-8.0 उपयुक्त होती है चिकनी मिट्टी और कैल्शियम की उच्च मात्रा युक्त मिट्टी में इसकी खेती ना करें Chhatri: यह Kaalipatti किस्म से कम गुणवत्ता वाली कि.... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है लेकिन अच्छे निकास वाली गहरी जलोढ़, रेतली दोमट और काली मिट्टी चीकू की खेती के लिए उत्तम रहती है चीकू की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.0-8.0 उपयुक्त होती है चिकनी मिट्टी और कैल्शियम की उच्च मात्रा युक्त मिट्टी में इसकी खेती ना करें Chhatri: यह Kaalipatti किस्म से कम गुणवत्ता वाली किस्म है यह अधिक उपज वाली किस्म है Dhola Diwani: यह किस्म अच्छी गुणवत्ता वाली उपज देती है इसके फल अंडाकार होते हैं Baramasi: यह किस्म उत्तरी भारत में प्रसिद्ध है इसके फल गोल और मध्यम होते हैं यह 12 महीने उपज देने वाली किस्म है Pot Sapota: पौधे गमले में ही फल देना शुरू कर देते हैं इसके फल छोटे होते हैं जो कि अंडाकार और शिखर से तीखे होते हैं फल मीठे और सुगंधित होते हैं Calcutta Round, Pala, Vavi Valsa, Pilipatti, Murabba, Baharu, and Gandhevi दूसरे राज्यों में उगाने वाली किस्म है चीकू की खेती के लिए, अच्छी तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए 2-3 बार जोताई करके ज़मीन को समतल करें बिजाई मुख्यत: फरवरी से मार्च और अगस्त से अक्तूबर महीने में की जाती है बिजाई के लिए 9 मी. फासले का प्रयोग करें सिंचाई की उपलब्धता और जलवायु के आधार पर अनानास और कोकोआ, टमाटर, बैंगन, फूलगोभी, मटर, कद्दू, केला और पपीता को अंतरफसली के तौर पर उगाया जा सकता है नदीनों के अंकुरण से पहले शुरूआती 10-12 महीनों में स्टांप 800 मि.ली. या ड्यूरॉन 800 ग्राम प्रति एकड़ में डालें
Posted by ਪਵਿੱਤਰ ਸਿੰਘ
Punjab
26-05-2019 08:11 PM
Punjab
05-26-2019 09:02 PM
Waste decomposer nu Gobar gas plant ch taa na pao per bahar nikldi sullary ch pa skde ho.
Posted by raghav
Punjab
26-05-2019 08:10 PM
Punjab
05-28-2019 04:23 PM
Tuci isde lai Enrofloxacin liquid 2ml/1liter pani vich mila ke pilao baki tuci Lixen powder 2gm nu 1 liter pani vich mila ke chicks uppar spray kro, baki shedd vich saaf safai rkho, iss nal farak padd jayega.
Posted by manvir singh
Punjab
26-05-2019 08:09 PM
Punjab
05-29-2019 11:11 AM
Manvir Singh ji Solar Pump bare puri jankari ja lagvon lai tusi mere nal 9814221784 samparak kar sakde ho. Thank you.
Posted by Dharminder
Punjab
26-05-2019 08:05 PM
Maharashtra
05-27-2019 11:49 AM
Dharminder ji Kirpa karke apna swal visthar nal pushu ke Pniri bare ki jankari lena chode ho. Thank you.
Posted by Bikramjit singh
Punjab
26-05-2019 07:59 PM
Maharashtra
05-28-2019 04:04 PM
Bikramjit singh ji tusi gurdaspur vich tusi Phalla da baag lga sakde ho is vich tusi ਅੰਗੂਰ, ਆੜੂ, ਅਮਰੂਦ, ਚੀਕੂ, ਬੇਰ, ਥਾਈ ਬੇਰ, ਆਲੂਬੁਖਾਰਾ, ਅੰਬ lga sakde ho. Thank you.
Posted by UDHAM singh
Haryana
26-05-2019 07:55 PM
Punjab
06-22-2019 02:13 PM
Udham Singh ji Chhat par baghbani ke bare me puri jankari ke lia aap Dr K.G Singh PAU 9779514520 se samparak kar sakte hai, Hydroponics vidhi se kheti karne ke lia aap Somveer singh 9878733551 se samparak kar sakte hai. Thankyou.
Posted by Daljeet Singh Aulakh
Punjab
26-05-2019 07:54 PM
Punjab
05-30-2019 03:47 PM
Daljeet Singh Aulakh ji, you can contact to Mr. Jugraj Singh on this number 90234-41504. He is the president of Goat Farmer Association , Punjab. He will guide you about goat farming and will help you with right information.
Posted by Pritam meena
Rajasthan
26-05-2019 07:54 PM
Maharashtra
05-29-2019 10:51 AM
धान भारत की एक महत्तवपूर्ण फसल है जो कि जोताई योग्य क्षेत्र के लगभग एक चौथाई हिस्से में उगाई जाती है और भारत की लगभग आधी आबादी इसे मुख्य भोजन के रूप में प्रयोग करती है यह उत्तर प्रदेश की मुख्य फसल है और उत्तर प्रदेश के लगभग 5.4 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है Basmati, Kalajeera, Vishnu Parag आदि धान की कुछ उच्च .... (Read More)
धान भारत की एक महत्तवपूर्ण फसल है जो कि जोताई योग्य क्षेत्र के लगभग एक चौथाई हिस्से में उगाई जाती है और भारत की लगभग आधी आबादी इसे मुख्य भोजन के रूप में प्रयोग करती है यह उत्तर प्रदेश की मुख्य फसल है और उत्तर प्रदेश के लगभग 5.4 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है Basmati, Kalajeera, Vishnu Parag आदि धान की कुछ उच्च गुणवत्ता वाली किस्में हैं जिनकी खेती उत्तर प्रदेश में की जाती है मिट्टी इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है प्रसिद्ध किस्में और पैदावार Jaya: यह छोटे कद की और अधिक उपज देने वाली किस्म गर्दन तोड़ के प्रतिरोधक है यह किस्म 142 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने बड़े और लंबे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 26 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Chakia 59: यह किस्म कम जल जमाव वाले हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है Govind: यह किस्म पंतनगर द्वारा विकसित की गई है यह किस्म 105 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Indrasan: यह तराई क्षेत्रों की प्रसिद्ध किस्म है Mahsud: यह किस्म निचले क्षेत्रों में बारानी स्थितियों में उगाने के लिए उपयुक्त है Majhera 3: यह लंबी किस्म सूखे को सहनेयोग्य है और ऊंचे क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Nagina 22: यह ऊंचे क्षेत्रों में बारानी हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं Narendra-1 and Narendra-2: यह किस्म 105 और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Pant Dhan 6: यह किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त है Saket 4: यह अगेते समय की किस्म है और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह यू पी की सबसे प्रसिद्ध किस्म है T9: यह देरी से बोयी जाने वाली सुगंधित किस्म है इसके दाने बेलनाकार होते हैं VL Dhan 16: यह निम्न और मध्यम क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त किस्म है VL 206: यह लंबी किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Usar 1: यह किस्म कानपुर में विकसित की गई यह क्षारीय और लवणीय मिट्टी में खेती करने के लिए उपयुक्त है बासमती किस्में Taraori Basmati: यह सिंचित क्षेत्रों में अगेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म 145-155 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Haryana Basmati no 1: यह अर्द्ध छोटे कद की किस्म है और सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Basmati 1121, Pusa Basmati 1, CSR 30, Shabnam दूसरे राज्यों की किस्में Hybrid 6201: यह सिंचित क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है यह भुरड़ रोग के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 25 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Vivek Dhan 62: यह सिंचित और पहाड़ी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं यह भुरड़ रोग के प्रतिरोधक किस्म है यह गर्दन तोड़ और कम तापमान वाले क्षेत्रों को भी सहन कर सकती है इसकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Karnataka Rice Hybrid 2: यह सिंचित और समय से बिजाई वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह पत्तों के झुलस रोग और अन्य बीमारियों को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 35 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kanak: यह दरमियाने क्षेत्रों में बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने लंबे और मोटे होते हैं यह बैक्टीरियल झुलस रोग के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Ratnagiri 1 and 2: सिंचित क्षेत्रों के लिए जबकि निचले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है ये अर्द्ध छोटे कद की किस्म हैं इनकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल और 21 क्विंटल प्रति एकड़ होती है ज़मीन की तैयारी शुष्क खेतों को अच्छा बनाने, नदीन रहित और सेहतमंद वृद्धि के लिए ग्लाफोसेट डालनी चाहिए गेहूं की कटाई के बाद ज़मीन पर हरी खाद के तौर पर मई के पहले सप्ताह ढैंचा (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़), या सन (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़) या लोबीया (बीज दर 12 किलोग्राम प्रति एकड़) की बिजाई करनी चाहिए जब फसल 6 से 8 सप्ताह की हो जाए तो इसे खेत में कद्दू करने से एक दिन खेत में ही जोत देना चाहिए इस तरह प्रति एकड़ 25 किलो नाइट्रोजन खाद की बचत होती है भूमि को समतल करने के लिए लेज़र लेवलर का प्रयोग किया जाता है इसके बाद खेत में पानी खड़ा कर दें ताकि भूमि के अंदर ऊंचे नीचे स्थानों की पहचान हो सके इस तरह पानी के रसाव के कारण पानी की होने वाले बर्बादी को कम किया जा सके बिजाई बिजाई का समय यू पी के सिंचित और निम्न बारानी क्षेत्रों में मध्य जून से शुरूआती जुलाई तक का समय उपयुक्त होता है बीज की गहराई पौधे की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए फासला बनाकर लगाने से पौधे ज्यादा पैदावार देते हैं फासला उपजाऊ मिट्टी में 20 सैं.मी. x 15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जबकि हल्की मिट्टी में रोपाई के लिए 15 सैं.मी. x 10 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 20 x 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बिजाई का ढंग सिंचित और कम बारानी क्षेत्रों में रोपाई ढंग प्रयोग किया जाता है रोपाई के लिए 25-30 दिनों के पौधों का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 30-35 दिनों के पौधे रोपाई के लिए प्रयोग करें ऊंचे क्षेत्रों में, शुष्क और गीली मिट्टी में रोपाई ढंग का प्रयोग करें बीज बीज की मात्रा एक एकड़ खेत में 6-8 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बीज का उपचार बिजाई से पहले 10 लीटर पानी में 20 ग्राम कार्बेनडाज़िम $ 1 ग्राम स्ट्रैप्टोसाईक्लिन घोल लें और इस घोल में बीजो को 8-10 घंटे तक भिगोयें उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं और फिर बिजाई के लिए प्रयोग करें पनीरी की देख-रेख और रोपण वैट बैड नर्सरी : यह तकनीक उन क्षेत्रों में अपनाई जाती है जहां पर पानी ज्यादा मात्रा में पाया जाता है नर्सरी का 1/10 हिस्सा दूसरे खेत में लगाया जाता है इसकी बिजाई छींटे द्वारा की जाती है यहां पर खेत की जोताई और खेत को समतल किया जाता है बैडों पर कईं दिन तक नमी बनाए रखनी चाहिए पानी से खेत को ज्यादा ना भरें जब नर्सरी 2 सैं.मी. से वृद्धि कर जाए तब पानी को खेत में लगाते रहना चाहिए बिजाई के 15 दिन बाद 26 किलो यूरिया डालना चाहिए जब नर्सरी 25-30 सैं.मी. तक लंबी हो जाए तब उसे 15-21 दिन बाद दूसरे खेत में लगा देना चाहिए और खेत को लगातार पानी लगाते रहना चाहिए सूखे बैड वाली नर्सरी : यह तकनीक शुष्क क्षेत्रों में अपनाई जाती है जो बैड बनाया जाता है वो बिजाई वाले खेत का 1/10 हिस्से में बीज बोया जाता है बैड का आकार सीमित होना चाहिए और उसकी ऊंचाई 6-10 से.मी होनी चाहिए धान का आधा जला हुआ छिलका बैड पर बिखेर देना चाहिए इससे जड़ें मजबूत होती हैं सही समय पर सिंचाई करते रहना चाहिए और नमी बनाए रखना चाहिए ताकि नए पौधे नष्ट ना हों तत्वों की पूर्ति के लिए खाद डालना जरूरी है मॉडीफाईड मैट नर्सरी : यह नर्सरी लगाने का एक ऐसा तरीका है जिसमें कम जगह और कम बीजों की जरूरत होती है यह नर्सरी किसी भी जगह पर बनाई जा सकती हैं जहां पर समतल जगह हो और पानी की सुविधा हो इसकी पनीरी लगाने के लिए 1% खेत की जरूरत होती है 4 से.मी की सतह पर नए पौधे लगाए जाते हैं इसे बनाने के लिए 1 मीटर चौड़े और 20-30 मीटर लंबे जमीन के टुकड़े की जरूरत होती है इसके ऊपर बिछाने के लिए पॉलीथीन और केले के पत्तों की जरूरत होती है इसके इलावा एक लकड़ी का बकसा जो कि 4 से.मी गहरा होता हैं मिट्टी के मिश्रण से भरा होता है बीजों को इसके अंदर रख देना चाहिए और फिर बीजों को सूखी मिट्टी के साथ ढक देना चाहिए इसके बाद पानी का छिड़काव कर देना चाहिए लकड़ी के बक्से को नमी देते रहना चाहिए बिजाई से 11-14 दिनों के बाद पौध तैयार हो जाती है जब पौध तैयार हो जाती है तब मैट से पौध को दूसरे खेत में रोपण कर दिया जाता है फासला: पौधों का फासला 20x20 सैं.मी. या 25x25 सैं.मी. होना चाहिए खेत में पौध रोपण पनीरी लगाने का ढंग 1. कद्दू करके लगाई जाने वाली पनीरी : आमतौर पर पंक्ति में लगाए जाने वाले पौधे 20x15 सैं.मी. दूरी पर लगाए जाते हैं और देरी से लगाई जाने वाली पनीरी 15x15 सैं.मी. पर लगाई जाती है नए पौधों की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए 2. बैड बनाकर लगाई जाने वाली पनीरी : यह बैड भारी ज़मीनों के लिए बनाए जाते हैं पनीरी लगाने से पहले खालियों में पानी लगाना चाहिए और फिर पनीरी को खेत में लगाना चाहिए पौधे से पौधे का फासला 9 सैं.मी. होना चाहिए 3. मशीनी ढंग से लगाई जाने वाली पनीरी : मैट पनीरी के लिए मशीनों का प्रयोग किया जाता है यह मशीन 30x12 सैं.मी. के फासले पर पनीरी लगानी चाहिए खरपतवार नियंत्रण रोपाई के 2 से 3 दिन बाद नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 50 ई सी 1200 मि.ली. या थायोबेनकार्ब 50 ई सी 1200 मि.ली. या पैंडीमैथालीन 30 ई सी या प्रैटीलाक्लोर 50 ई सी 600 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें इनमें से किसी एक नदीननाशक को 60 किलो रेत में मिलाकर 4-5 सैं.मी. गहरे खड़े पानी में बुरकाव करें चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए मेटसलफुरॉन 20 डब्लयु पी 30 ग्राम को 150 लीटर पानी में मिलाकर नदीनों के अंकुरण के बाद रोपाई के 20-25 दिन बाद डालें स्प्रे से पहले खेत में खड़े पानी का निकास कर दें और स्प्रे के एक दिन बाद सिंचाई करें नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 1 लीटर को बिजाई के 6 से 7 दिनों के बाद प्रति एकड़ में स्प्रे करें सिंचाई पनीरी लगाने के बाद खेत में दो सप्ताह तक अच्छी तरह पानी खड़ा रहने देना चाहिए जब सारा पानी सूख जाए तो उसके दो दिन बाद फिर से पानी को लगाना चाहिए खड़े पानी की गहराई 10 सै.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए खेत में से बूटी और नदीनों को निकालने से पहले खेत में से सारा पानी निकाल देना चाहिए ओर इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद खेत की फिर से सिंचाई करनी चाहिए पकने से 15 दिन पहले सिंचाई करनी बंद करनी चाहिए ताकि फसल को आसानी से काटा जा सके ऊंची भूमि पर सिंचाई पूरी तरह से बारिश पर निर्भर करती है बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर और पानी की उपलब्धता के आधार पर गंभीर अवस्थाओं में सिंचाई करें
Posted by gurmeet
Punjab
26-05-2019 07:37 PM
Punjab
05-28-2019 04:22 PM
Gurmeet ji 126 di paniri nu tuc may de dooje pandervade tak beej sakde ho.dhanwad
Posted by Sameer Kumawat
Rajasthan
26-05-2019 07:23 PM
Punjab
05-27-2019 06:44 PM
Red sandalwood, white sandalwood चंदन की किस्में हैं. इसकी खेती के लिए जमीन को अप्रैल-मई महीने में तैयार किया जाता है इसकी बिजाई मई-अक्टूबर महीने में की जाती है पर इसको बीजने का सबसे सही समय जुलाई-अगस्त महीना है पौधे से पौधे की दूरी 3 मीटर होनी चाहिए..यूरिया@50ग्राम/पेड़/साल , एसएसपी@100 ग्राम/पेड़/साल और मयूरिएट आफ पोटाश@40 ग्राम/पेड़/साल.... (Read More)
Red sandalwood, white sandalwood चंदन की किस्में हैं. इसकी खेती के लिए जमीन को अप्रैल-मई महीने में तैयार किया जाता है इसकी बिजाई मई-अक्टूबर महीने में की जाती है पर इसको बीजने का सबसे सही समय जुलाई-अगस्त महीना है पौधे से पौधे की दूरी 3 मीटर होनी चाहिए..यूरिया@50ग्राम/पेड़/साल , एसएसपी@100 ग्राम/पेड़/साल और मयूरिएट आफ पोटाश@40 ग्राम/पेड़/सालको दो हिस्सों में डालना चाहिए पहली डोज़ मार्च-अप्रैल महीने में और दूसरी डोज़ सितम्बर-अक्टूबर में दी जानी चाहिए इसके बारे में और जानकारी लेने के लिए आप अरुण खुरमी 9878123123 जी से संपर्क कर सकते है