Posted by ਰਣਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
29-05-2019 12:44 PM
ਰਣਜੀਤ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਸਦੀ ਉਮਰ ਦੱਸੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ

Posted by ravi kumar
Uttar Pradesh
29-05-2019 12:43 PM
रतुआ रोग : यह फंगस रोग है जिस कारण गन्ने का तीसरा और चौथा पत्ता पीला हो कर सूख जाता है इस रोग से गन्ने का अंदरूनी गुद्दा लाल हो जाता है काटे हुए गन्ने में खट्टी और शराब जैसी बदबू आती है
इसकी रोकथाम के लिए रोग रहित फसल से बीज लें और रोग को सहने योग्य किस्म बोयें धान और हरी खाद वाली फसलों का फसली चक्र अपनाना चाह.... (Read More)
रतुआ रोग : यह फंगस रोग है जिस कारण गन्ने का तीसरा और चौथा पत्ता पीला हो कर सूख जाता है इस रोग से गन्ने का अंदरूनी गुद्दा लाल हो जाता है काटे हुए गन्ने में खट्टी और शराब जैसी बदबू आती है
इसकी रोकथाम के लिए रोग रहित फसल से बीज लें और रोग को सहने योग्य किस्म बोयें धान और हरी खाद वाली फसलों का फसली चक्र अपनाना चाहिए खेत में पानी ना रूकने दें प्रभावित बूटों को उखाड़ कर खेत से बाहर फेंके कार्बेनडाज़िम घोल की 0.1 प्रतिशत मात्रा को मिट्टी के ऊपर प्रयोग करने से बीमारी रोकी जा सकती है मुरझाना : जड़ बेधक, नेमाटोडस, शुष्क और ज्यादा पानी खड़ने के हालातों में यह बीमारी ज्यादा आती है इससे पत्ते पीले पड़ कर सूख जाते हैं पौधों में किश्ती के आकार के गड्ढे पड़ जाते हैं और फसल सिकुड़ जाती है इससे फसल का उगना और पैदावार दोनों ही कम हो जाती है
इसकी रोकथाम के लिए गुलियों को कार्बेनडाज़िम 0.2 प्रतिशत+बोरिक एसिड 0.2 प्रतिशत के घोल में 10 मिनट तक उपचार करें इसके इलावा प्याज लहसुन और धनिये की फसल भी इस बीमारी को कम करने में मदद करती है चोटी गलन : यह बीमारी हवा से पैदा होती है जो मॉनसून में होती है बीमारी वाले गन्ने के पत्ते सिकुड़ जाते हैं तने के नजदीक वाले पत्ते लाल हो जाते हैं नए पत्ते छोटे और तिरछे हो जाते हैं
इस बीमारी की प्रतिरोधक किस्मों का प्रयोग करें यदि इसका हमला दिखे तो कार्बेनडाज़िम 4 ग्राम या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 3 ग्राम या मैनकोज़ेब 3 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें

Posted by Kuldeep vats
Uttar Pradesh
29-05-2019 12:42 PM
Kuldeep ji apke duara bheji gyi audio upload nahi hui hai kripa aap audio dubara upload kren tan jo apko sahi jankari di ja ske.
Posted by Akash Bhadana
Uttar Pradesh
29-05-2019 12:37 PM
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है बारानी फसल होने के कारण, यह जलोढ़ मिट्टी, दोमट मिट्टी और काली चिकनी मिट्टी में सबसे अच्छी बढ़ती है सिगार और चिरूट तंबाकू की खेती सलेटी से लाल मिट्टी से लेकर हल्की बजरीयुक्त से रेतली दोमट मिट्टी में की जाती है चबाने वाला तंबाकू हर किस्म की मिट्टी में उगाया जा सकता ह.... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है बारानी फसल होने के कारण, यह जलोढ़ मिट्टी, दोमट मिट्टी और काली चिकनी मिट्टी में सबसे अच्छी बढ़ती है सिगार और चिरूट तंबाकू की खेती सलेटी से लाल मिट्टी से लेकर हल्की बजरीयुक्त से रेतली दोमट मिट्टी में की जाती है चबाने वाला तंबाकू हर किस्म की मिट्टी में उगाया जा सकता है जल जमाव वाली मिट्टी में इसकी खेती ना करें सिगार की अच्छी गुणवत्ता के लिए मिट्टी में रेत मिलायें नाइट्रोजन, पोटाशियम, कैलशियम और मैगनीशियम की उच्च मात्रा युक्त मिट्टी ही चुनें प्रसिद्ध किस्में :- Flue-Cured Virginia (FCV), Bidi, Hookah and Chewing, Cigar filler, Cigar Wrapper,Cheroot, Burley मिट्टी की किस्म के आधार पर खेत की मोल्ड बोर्ड और सिंगल हल से 6-10 बार जोताई करें डलियों को तोड़ने और मिट्टी को समतल करने के लिएहैरो से जोताई करें नदीनों को निकाल दें और खेत को नदीन मुक्त रखें मिट्टी की किस्म के आधार पर, अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर या रूड़ी की खाद मिट्टी में अच्छी तरह से मिलायें यह बिजाई के क्षेत्र और किस्म पर निर्भर करता है विभिन्न किस्मों के लिए नर्सरी की बिजाई और रोपाई का समय अलग अलग होता है, चाहे ये समान जगह पर हो नर्सरी में बिजाई के लिए अप्रैल से मई का महीना उपयुक्त होता है और रोपाई अक्तूबर महीने में की जा सकती है फासला क्षेत्र और किस्म के साथ अलग होता है FCV तंबाकू के लिए 70x50 सैं.मी. या 100x60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीड़ी तंबाकू के लिए 90x60 सैं.मी., 100x75 सैं.मी. या 75x50 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बरली, नाटू और लंका तंबाकू के लिए 90x45 सैं.मी. या 90x90 सैं.मी. या 60x60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें सिगार और चिरूट के लिए 70x50 सैं.मी. या 60x45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें हुका के लिए 90x90 सैं.मी. या 60x45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नए पौधों का मुख्य खेत में रोपण किया जाता है रोपाई मेंड़ों पर या समतल बैडों पर की जाती है तंबाकू के बीज छोटे और अंडे के आकार के होने के कारण ये खेत में सीधा बोने के लिए उपयुक्त नहीं होते इसलिए इन्हें पहले नर्सरी में बोया जाता है और बाद में मुख्य खेत में रोपण कर दिया जाता है नर्सरी के लिए रेतली या रेतली दोमट मिट्टी चुनें भारी काली मिट्टी ना लें क्योंकि ये मिट्टियां हल्के निकास वाली होती हैं जिससे नर्सरी में उखेड़ा रोग की बीमारी आ जाती है गहरे धूप और भारी बारिश के दौरान नर्सरी को नुकसान से बचायें मल्च और कवर का प्रयोग करें आवश्यकता के अनुसार नाइट्रोजन का बुरकाव करें जब पौधे 6-8 सप्ताह के हो जायें तब वे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं पौधों के नर्सरी में से निकालने से एक सप्ताह पहले सिंचाई देना बंद कर दें तंबाकू की सभी किस्मों के लिए प्रति एकड़ में 1.2 से 2 किलो बीजों की मात्रा उपयुक्त होती है तंबाकू उगाने वाले विभिन्नि क्षेत्रों में खादों की मात्रा भी विभिन्न होती है खेत की तैयारी के समय 10 टन रूड़ी की खाद या अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर या फिल्टर प्रैस केक प्रति एकड़ में डालें फासफोरस 40 किलो (एस एस पी 250 किलो) शुरूआती खुराक के तौर पर डालें नाइट्रोजन 40 किलो (यूरिया 90 किलो) का बुरकाव प्रति एकड़ में करें नर्सरी में, नदीनों की जांच के लिए हाथों से गोडाई करें मुख्य खेत में, रोपाई के बाद शुरूआती 60 दिनों तक खेत को नदीन मुक्त रखें मुख्य खेत में, कतारों में फासला ज्यादा होने के कारण इसमें अंतरफसली संभव है पर रखा जाता है, इनमें अंतर कतारों में खेती संभव है हाथों से 1-2 गोडाई करें इससे नदीनों पर पर्याप्त नियंत्रण होता है तंबाकू की फसल अंकुरन की बाद की नदीनाशकों के प्रति संवेदनशील होती है इसलिए मुख्य खेत में पौधों की रोपाई से पहले नदीनाशक जैसे प्रोनामाइड, फलूक्लोरालिन, इसोप्रोपालिन, इसोक्साबेन डालें काली मिट्टी में तंबाकू सामान्य सिंचित नहीं होता, लेकिन कई हालातों में 40 दिन के पौधों को एक सिंचाई देने की सिफारिश की गई है जब इसकी खेती हल्की मिट्टी में की जाए तो छ: सिंचाइयों की आवश्यकता होती है सिंचाई के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले पानी का प्रयोग करें, इसमें क्लोराइड की मात्रा 50 पी एम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए क्योंकि इससे पत्ते झुलस जाते हैं और पत्तों की गुणवत्ता पर भी इसका असर पड़ेगा जब सामान्य हरे रंग के पत्ते पीले हरे से हल्के पीले में बदल जायें तब वे कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं कटाई का समय क्षेत्र और किस्म के आधार पर अलग अलग होता है आंध्र प्रदेश में flue-cured Virginia की कटाई का उपयुक्त समय दिसंबर-मार्च जबकि कर्नाटका में कटाई के लिए जुलाई-सितंबर का महीना उपयुक्त समय होता है बीड़ी तंबाकू की कटाई जनवरी फरवरी में की जाती है सिगार और चेरूट तंबाकू की कटाई का सही समय रोपाई के 90-100 दिनों के बाद पत्तों के नाज़ुक और पीले रंग के हो जाने पर होता है जबकि चबाने वाले तंबाकू की कटाई रोपाई के 110-120 दिनों के बाद की जाती है हुका तंबाकू का सही समय मई जून का महीना होता है कटाई के लिए दो ढंगों का प्रयोग किया जाता है प्राइमिंग और तना काटकर प्राइमिंग : सामान्य तौर पर ऊपरी पत्तों की बजाय निचले पत्ते जल्दी परिपक्व होते हैं पत्तों के पकने पर कटाई करें और कुछ पत्तों को निकाल लें सिगरेट और रैपर तंबाकू के लिए प्राइमिंग ढंग का प्रयोग किया जाता है तना काटकर : सिगार, चेरूट, चबाने वाले, बीड़ी और हुका के लिए तना काटकर ढंग का प्रयोग किया जाता है इस विधि में ज़मीनी स्तर से पौधे का भाग दरांती की सहायता से काटा जाता है और उसे सूखने के लिए पूरी रात खेत में छोड़ दिया जाता है ज्यादा संख्या में पत्तों के परिपक्व होने पर कटाई करें औसतन, flue cured Virginia और नाटू तंबाकू की उपज 312 किलो और 395 किलो प्रति एकड़ प्राप्त होती है बीड़ी तंबाकू की 145-187 किलो प्रति एकड़ उपज प्राप्त होती है सिगार, चेरूट और चबाने वाले तंबाकू की औसतन उपज 520-666 किलो प्रति एकड़ में प्राप्त होती है

Posted by manpreet singh
Punjab
29-05-2019 12:31 PM
Manpreet ji jhone di lvayi di tareek 13 june to hai.dhanwad

Posted by Kulwinder Sidhu
Rajasthan
29-05-2019 12:29 PM
आपके सभी सवालो का जवाब दिया जा चुका है आप अपने सवालों के जवाब एप में मेरे सवाल का क्लिक करके देख सकते हैं या फिर मेरी प्रोफाईल के नीचे अपने सवालों के जवाब देख कते हैं यदि आपकी कोई ओर समस्या है तो आप हैल्प लाईन नंबर : 97799-77641 पर संपर्क कर सकते हैं

Posted by Satpal Singh Randhawa
Punjab
29-05-2019 12:23 PM
Satpal Singh Randhawa ji tusi bathinda vich pata karo ke kehde hotel vich bater da meat milda hai. fr os hotel vich tusi oh vechan di gal kar sakde ho ji. ehdi direct hi market karni pavegi ji.
Posted by ਹਰਜੀਤ ਗਿੱਲ
Punjab
29-05-2019 12:19 PM
ਹਰਜੀਤ ਜੀ ਜੜਾਂ ਵਿਚ ਸਿਉਂਕ ਚੈੱਕ ਕਰੋ ਜੇਕਰ ਮੌਜੂਦ ਹੈ ਤਾ ਤੁਸੀ chlorpyriphos @4 ਮਿਲ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਜੜਾਂ ਵਿਚ ਪਾਓ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by ਸਿਮਰਨਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
29-05-2019 12:16 PM
Simrandeep ji jhone di bijai di tareek 13 june to hai ji.dhanwad

Posted by bivnesh kumar
Uttar Pradesh
29-05-2019 11:59 AM
स्टेप बाई स्टेप जाने कैसे लें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ
1.प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ लेने के लिए आपको ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन करना पड़ेगा
2.किसानों को इसका लाभ पाने के लिए सबसे पहले कृषि विभाग में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा, प्रशासन उसका वेरीफिकेशन करेगा रेवेन्यू रिकॉर्ड.... (Read More)
स्टेप बाई स्टेप जाने कैसे लें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ
1.प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ लेने के लिए आपको ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन करना पड़ेगा
2.किसानों को इसका लाभ पाने के लिए सबसे पहले कृषि विभाग में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा, प्रशासन उसका वेरीफिकेशन करेगा रेवेन्यू रिकॉर्ड, बैंक अकाउंट नंबर, मोबाइल नंबर और आधार नंबर देना होगा कोई कन्फ्यूजन है तो अपने लेखपाल से संपर्क कर सकते हैं लेखपाल ही यह वेरीफाई करता है कि आप किसान हैं
3.अगर लेखपाल और कृषि अधिकारी किसी असली किसान को इसका लाभ देने में आनाकानी कर रहे हैं तो सोमवार से शुक्रवार तक पीएम-किसान हेल्प डेस्क (PM-KISAN Help Desk) के ई-मेल Email (pmkisan-ict@gov.in) पर संपर्क कर सकते हैं वहां से भी न बात बने तो इस सेल के फोन नंबर 011-23381092 (Direct HelpLine) पर फोन करें
4.आॉनलाइन आवेदन करते समय किसान को अपना आधार कार्ड नंबर, मतदाता पहचान पत्र और बैंक से संबंधित यानी कि बैंक खाता संख्या पास होना जरूरी है
5.इसके अलावा अगर किसान एससी/एसटी वर्ग से है तो उसके लिए उसे सर्टिफिकेट देना होगा
6.इसके बाद आपको अपनी जानकारी देने होगी जैसे कि पिता का नाम, मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, खेती की जानकारी जैसे- खेत का आकार, कितनी जमीन है आदि
7.प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का ऑफलाइन आवेदन करने के लिए किसानों को ग्राम पंचायत या फिर पास के सीएससी सेंटर जाना होगा वहां पर जाने के बाग आपको फार्म दिए जाएंगे, जिन्हें आपको भरना होगा

Posted by ਜਸਮੇਲ ਸਿੰਘ
Punjab
29-05-2019 11:51 AM
ਜਸਮੇਲ ਸਿੰਘ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਦੇ ਨਾਲ ਫੋਟੋ ਵੀ ਅੱਪਲੋਡ ਕਰੋ ਤਾਂ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ

Posted by gopal waman dighore
Maharashtra
29-05-2019 11:49 AM
Gopal waman dighore ji 1 murgi 72 week me 80-100 egg deti hai ji. is hissab se aap aap 100 murgi ke egg ki ginti nikal sakte ho.

Posted by Ravi Choudhary
Madhya Pradesh
29-05-2019 11:48 AM
Type 27,Type 56,Pusa 1,Pant 430,HPU 6,T 65,LBG 22,LBG 402,LBG 20 ki bijai kar sakte hai. yeh aapko local market men mil jayegi.dhanywad

Posted by Balwinder Singh
Punjab
29-05-2019 11:48 AM
Balwinder singh ji Bute len lai tusi Balwinder Singh Lakhewali 98142-39041 nal samparak kar sakde ho. Thankyou.
Posted by Gagan chahal
Punjab
29-05-2019 11:47 AM
gagan chahl ji kirpa karke makki di photo bhejo ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake ke isde patte peele kyu ho rahe han is to ilava tuc tidde di roktham de layi imidacloprid@1.5ml nu prati litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by Gursahib singh
Punjab
29-05-2019 11:44 AM
Gursahib ji kirpa krke apna swal vistar nal pusho ji tan jo tuhanu sahi jankari diti ja ske..

Posted by Ravi Nagar
Rajasthan
29-05-2019 11:39 AM
अच्छी उपज और वृद्धि के लिए इसे उपजाऊ, अच्छे निकास वाली काली मिट्टी और हल्की दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 7 के लगभग होनी चाहिए Chetak: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसके पौधे का औसतन कद 80-90 सैं.मी. होता है इसके फूल सफेद रंग के और फल बड़े और गोल आकार में होते हैं यह अधिक उपजाऊ मिट्टी में अच्छी पैदावार देत.... (Read More)
अच्छी उपज और वृद्धि के लिए इसे उपजाऊ, अच्छे निकास वाली काली मिट्टी और हल्की दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 7 के लगभग होनी चाहिए Chetak: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसके पौधे का औसतन कद 80-90 सैं.मी. होता है इसके फूल सफेद रंग के और फल बड़े और गोल आकार में होते हैं यह अधिक उपजाऊ मिट्टी में अच्छी पैदावार देती है इसमें मोर्फिन की मात्रा 12.5 प्रतिशत होती है यह मोर्फिन की औसतन पैदावार 2 किलोग्राम प्रति एकड़ देती है मिट्टी की किस्म के आधार पर मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की दो-तीन बार जोताई करें मिट्टी को अच्छे से समतल करें ताकि खेत में पानी ना खड़ा हो सके खेत की तैयारी के समय अच्छी तरह से गला हुआ, गाय का गोबर 4 टन प्रति एकड़ में डालें राजस्थान के लिए अफीम की बिजाई के लिए अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर नवंबर के पहले सप्ताह तक का समय उपयुक्त होता है इसके बीज छोटे होते हैं इसलिए बीजों को बारीक रेत में अच्छे से मिलाया जाता है और फिर बिजाई के लिए प्रयोग किया जाता है 3 मीटर चौड़े और 5 मीटर लंबे बैड तैयार किए जाते हैं बैड पर 30 सैं.मी. के फासले पर कतार बनाई जाती है, फिर बीजों को कतारों में बोया जाता है पौधे से पौधे का फासला 30 सैं.मी. रखें बिजाई के लिए बुरकाव या कतार में बिजाई का ढंग प्रयोग किया जाता है बीज की मात्रा ज्यादा डालने से गोडाई करने में परेशानी आती है, जिससे फसल का विकास अच्छा नहीं होता, इसलिए बुरकाव विधि से ज्यादा कतारों में बिजाई करने को ज्यादा महत्तव दिया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 2 किलो बीज की मात्रा बहुत होती है बिजाई से पहले मैनकोजेब 4 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें नाइट्रोजन 36 किलो (यूरिया 80 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 4 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 10 किलो) प्रति एकड़ में डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा को दो भागों में बांटे, पहली मात्रा बिजाई के 40-50 दिन के बाद डालें और दूसरी मात्रा फूल बनने से पहले डालें अफीम की पूरी फसल को 8-10 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बिजाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें फिर मिट्टी की किस्म, सिंचित क्षेत्र के आधार पर 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जलवायु हालातों और आवश्यकता के आधार पर सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर, सिंचित खेत में 10-12 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें चीरा लगाने से 8-10 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें नदीनों की तीव्रता के आधार पर दो से तीन गोडाई करें नदीनों की रासायनिक रोकथाम के लिए लसोप्रोटियूरॉन 500 ग्राम को 200 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के बाद तीसरे दिन डालें नदीननाशक क्रिया के 30 दिन बाद पहली गोडाई करें

Posted by Rajinder Singh Chambyal
Himachal Pradesh
29-05-2019 11:35 AM
राजिंदर सिंह जी नींबू के पौधे लेने के लिए आप मेरे से 8003892293, 9530002191 पर संपर्क करें, धन्यवाद
Posted by pravin
Maharashtra
29-05-2019 11:34 AM
स्ट्रॉबेरी की खेती पॉलीहाउस के अंदर या खुले खेत में कर सकते हैं चीकनी, बालुई और अच्छे निकास वाली ज़मीन स्ट्रॉबेरी के लिए अच्छी होती है तेजाबी में पी एच 5.0 से 6.5 होनी चाहिए मिट्टी की नाज़ुकता तीस से चालीस सैं.मी. होनी चाहिए स्ट्रॉबेरी की सही वृद्धि के लिए दिन में तापमान 20-25 डिगरी और रात के समय 7-12 डिगरी होना चाहिए इस.... (Read More)
स्ट्रॉबेरी की खेती पॉलीहाउस के अंदर या खुले खेत में कर सकते हैं चीकनी, बालुई और अच्छे निकास वाली ज़मीन स्ट्रॉबेरी के लिए अच्छी होती है तेजाबी में पी एच 5.0 से 6.5 होनी चाहिए मिट्टी की नाज़ुकता तीस से चालीस सैं.मी. होनी चाहिए स्ट्रॉबेरी की सही वृद्धि के लिए दिन में तापमान 20-25 डिगरी और रात के समय 7-12 डिगरी होना चाहिए इसलिए इसकी पनीरी लगाने का काम मध्य अक्तूबर से मध्य नवंबर तक कर देना चाहिए इन महीनों और इसके बाद पंजाब में लगभग यही तापमान होता है स्ट्रॉबेरी की खेती मलचिंग विधि द्वारा की जाती है सबसे पहले खेत को तैयार किया जाता है इसके बाद ही ट्रैक्टर की सहायता से मलचिंग मशीन को खेत में उतारा जाता है चार फुट क्यारी तैयार की जाती है इसमें ड्रिप लाइन फिट की जाती है इसके बाद मशीन की सहायता से क्यारियों पर प्लास्टिक शीट बिछाई जाती है मलचिंग के लिए हल्का और लचकीला पदार्थ लें ताकि स्ट्रॉबेरी के पौधे की रफ्तार पर असर ना पड़े जिसे बाद में दोनों ओर से मिट्टी में दबा दिया जाता है अब इस शीट में छेद करके उसमें स्ट्रॉबेरी की पनीरी लगायी जाती है पनीरी लगाने के समय जड़ को पूरी तरह मिट्टी में व्यवस्थित कर दें जड़ बाहर रहने से पौधे के सूखने का खतरा होता है पौधे को ज्यादा तापमान और ठंड से बचाने के लिए इसके ऊपर छांव करनी चाहिए जो आप लो टन्नल विधि से कर सके हैं मौसम का बहुत ख्याल रखना पड़ता है थोड़ी सी लापरवाही से सारी फसल खराब हो सकती है पहले साल अपने खेत में स्ट्रॉबेरी की खेती करने का कुल खर्चा ढाई से तीन लाख रूप्ये प्रति एकड़ के हिसाब से आ जाता है क्योंकि किसान को पहले साल ड्रिप सिस्टम और फव्वारों आदि पर खर्च करना पड़ता है पर अगले वर्षों में किसानों का यह खर्चा बच जाता है इसके लिए एक एकड़ में 40 बैड बनते हैं और एक बैड पर 1000 स्ट्रॉबेरी के पौधे लगते हैं इस तरह एक एकड़ में चालीस हजार पौधे लगाए जाते हैं एक पौधा 3 से 4 रूप्ये तक मिल जाता है और इसकी उपज 50 से 60 क्विंटल तक निकल आता है 25-30क्विंटल गोबर की खाद एक एकड़ में डालें यह खाद एक साल में डालनी होती है फिर 20 : 40 : 40 NPK KG / हेक्टेयर डालनी है अच्छी फसल के लिए यूरिया दो फीसदी जिंक सल्फेट, आधा प्रतिशत कैलशियम सल्फेट और बोरिक एसिड 0.2 फीसदी अच्छी फसल के लिए ठीक है सिंचाई जल्दी जल्दी पर हल्की करनी चाहिए ज्यादा पानी ठीक नहीं है पत्ते गीले ना करें तुपका सिंचाई से पानी कम लग सकता है यदि तुपका सिंचाई नहीं कर रहे तो क्यारियों में पानी खाली में ही लगाएं नदीन हाथ से हटाएं या कीड़े मकौड़े और अन्य बीमारियों की तरफ ध्यान रखना जरूरी है यदि कोई पौधा ज्यादा खराब है उसे हटा दें जब फल का रंग 70 प्रतिशत लाल हो जाये तो तोड़ लेना चाहिए यदि मार्किट दूरी पर है तो थोड़ा सख्त ही तोड़ना चाहिए तुड़ाई अलग अलग दिनों में करनी चाहिए स्ट्रॅाबेरी की पैकिंग प्लास्टिक की प्लेटों में करनी चाहिए इसे हवादार जगह पर रखना चाहिए जहां तापमान पांच डिगरी हो एक दिन के बाद स्ट्रॉबेरी की पैकिंग का तापमान ज़ीरो डिग्री होना चाहिए मार्किट में स्ट्रॉबेरी औसतन 200 रूपये प्रति तक बिकती है इस तरह पांच लाख प्रति एकड़ से इसकी आमदन शुरू होकर आगे अपनी मेहनत से किसान आमदन में भरपूर वृद्धि कर सकता है स्ट्रॉबेरी के पौधे सितंबर से अक्तूबर तक लगाए जाते हैं और 3 महीने के बाद यह फल देना शुरू कर देते हैं इसकी फसल अप्रैल तक चलती है इसकी मार्केटिंग में किसी भी तरह की मुश्किल नहीं है, यह ऐलनाबाद, सिरसा, हनुमानगढ़, गंगानगर के इलावा बठिंडा, मोगा, जलंधर. लुधियाना में इसकी मार्केटिंग कर सकते है, यदि ज़्यादा मात्रा में स्ट्रॉबेरी है तो दिल्ली इसकी मुख्य मार्किट है
Posted by gurwinder singh
Punjab
29-05-2019 11:32 AM
ਤੁਸੀ 250ਗ੍ਰਾਮ ਜੋੰ-ਖਾਰ, 250ਗ੍ਰਾਮ ਕਲਮੀਸ਼ੋਰਾ, 250ਗ੍ਰਾਮ ਮਿਠਾਸੋਡਾ ਤੇ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਫੜਕੜੀ ਲਉ ਤੇ ਖਿਲ ਕਰੋ ਫਿਰ ਸਾਰਾ ਸਾਮਾਨ ਰਗੜ ਕੇ ਪੋਡਰ ਬਣਾਉ ਤੇ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ 50gm ਰੋਜਾਨਾ ਖਾਲੀ ਪੇਟ ਦਿਉ ਜੀ ਇਸ ਨਾਲ ਜਲਦੀ ਠੀਕ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Macmin dry ਪਾਊਡਰ 25-25 ਗ੍ਰਾਮ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਇਹ ਤੁਸੀ 20 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ .
Posted by Gurpal singh
Punjab
29-05-2019 11:13 AM
ਗੁਰਪਾਲ ਸਿੰਘ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਨੰਬਰ ਨੂੰ ਵੱਟਪ ਅੱਪ ਗਰੁੱਪ ਵਿੱਚ ਐਡ ਕਰਨ ਲਈ ਰਿਕਵੈਸਟ ਭੇਜ ਦਿੱਤੀ ਗਈ ਹੈ ਜੀ ਜਲਦ ਹੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਐਡ ਕਰ ਲਿਆ ਜਾਵੇਗਾ ਜੀ
Posted by Nikhil Sandhu
Haryana
29-05-2019 11:09 AM
Nikhil Sandhu ji Contract Poultry ke lia aap Salil Sood 9781017711 se samparak kar sak sakte hai agar aap desi me ana chahte hai to aap Sumit Jandar 8275592788 se samparak kar sakte hai. Thankyou.
Posted by Rajkumar
Uttar Pradesh
29-05-2019 11:05 AM
स्टीविया को हनी प्लांट के नाम से जाना जाता है क्योंकि यह स्वाद में मीठा होता है यह एक प्राकृतिक स्वीटनर होता है जो कि शूगर के मरीजों को उनके शरीर में इंसुलन की मात्रा को संतुलित रखता है यह मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है इसे रेतली दोमट से दोमट मिट्टी जिसमें जैविक तत्वों की उच्च मात्रा हो और अ.... (Read More)
स्टीविया को हनी प्लांट के नाम से जाना जाता है क्योंकि यह स्वाद में मीठा होता है यह एक प्राकृतिक स्वीटनर होता है जो कि शूगर के मरीजों को उनके शरीर में इंसुलन की मात्रा को संतुलित रखता है यह मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है इसे रेतली दोमट से दोमट मिट्टी जिसमें जैविक तत्वों की उच्च मात्रा हो और अच्छे जल निकास वाली हो, में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है खारी मिट्टी में खेती करने से परहेज करें क्योंकि यह स्टीविया के लिए हानिकारक होती है पौधे के विकास के लिए मिट्टी का pH 6-8 होना चाहिए MDS -14 और MDS-13स्टीविया की किस्में हैं स्टीविया की खेती के लिए, अच्छी तरह से तैयार खेत की आवश्यकता होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक, खेत की 2-3 बार जोताई करें जोताई के समय मिट्टी में ट्राइकोडरमा अच्छे से मिलायें और आखिरी जोताई के समय रूड़ी की खाद मिट्टी में अच्छे से मिलायें स्टीविया की रोपाई तैयार बैडों पर की जाती है इसकी बिजाई के लिए फरवरी से मार्च का समय उचित होता है नए पौधों में 18 इंच का फासला और पंक्ति के बीच का फासला 20-24 इंच रखें स्टीविया के बीजों को 6-8 सप्ताह तक कंटेनरों के भीतर बोया जाता है बिजाई के बाद बैडों को मिट्टी से ढक दें मिट्टी में नमी रखने के लिए पानी देते रहें झाड़ियों के बढ़िया विकास के लिए रोपाई से पहले पौधे के शिखर को काट दें
पौधों की रोपाई 60 सैं.मी. चौड़े और 15 सैं.मी. ऊंचाई वाले तैयार बैडों पर की जाती है पौधे 6-8 सप्ताह में रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं रोपाई से 24 घंटे पहले पौधों को पानी देना चाहिए ताकि उन्हें आसानी से बैडों में से निकाला जा सके खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद 200 क्विंटल, गाय का गोबर या मूत्र और गंडोया खाद को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 11 किलो (यूरिया 24 किलो), फासफोरस 45 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 282 किलो), पोटाश 45 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 75 किलो) प्रति एकड़ में डालें सिंगल सुपर फासफेट की पूरी मात्रा शुरूआती खुराक के तौर पर डालें नाइट्रोजन और पोटाश की मात्रा प्रति महीना 10 खुराकें दी जाती है
अधिक सूखे पत्तों कीपैदावार के लिए बोरोन और मैगनीज़ की स्प्रे करें खेत में से नदीनों को निकालने के लिए मुख्यत: हाथों से गोडाई करें रोपाई के एक महीना बाद पहली गोडाई की जाती है और फिर हर दो सप्ताह में लगातार गोडाई की जाती है नदीनों को बाहर निकालने के लिए गोडाई करें क्योंकि फसल तैयार किये बैडों पर विकास करते है और यह मजदूरों के लिए भी आसान होता है सिंचाई मुख्य रूप से फुव्वारा और ड्रिप सिंचाई द्वारा की जाती है पौधे को ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती इसलिए नियमित अंतराल पर हल्की सिंचाई करें गर्मियों में, 8 दिनों के फासले पर सिंचाई करें खेत में पानी ना खड़ा होने दें यह फसल के लिए नुकसानदायक है बिजाई के बाद 3 महीने में पौधा पैदावार देना शुरू कर देता है कटाई 90 दिनों के फासले पर लगातार की जाती है इस बात का ध्यान रखें कि कटाई करते समय 5-8 सैं.मी. तने को दोबारा पनपने के लिए जमीनी स्तर पर छोड़ देना चाहिए एक वर्ष में लगभग चार बार कटाई की जाती है दोबारा प्रक्रिया के लिए, पत्तों का प्रयोग किया जाता है अधिक जानकारी के लिए आप राजपाल गाँधी से 9814060700 संपर्क करें

Posted by gurpreet
Punjab
29-05-2019 11:05 AM
Gurpreet ji 21% vali zinc di matra ik acre vich 25 killo payi jandi hai jo ke 2-3 saal de layi kaafi hundi hai. dhanwad
Posted by kulwinder singh
Punjab
29-05-2019 11:03 AM
Jekar paniri uper to peeli pai rahi hai ta isde vich lohe di kami hai. isdi roktham de layi ferrous sulphate 1% @1 killo nu prati aikad de hisab nal spray karen.jekar chelated ferrous sulphate di spray karni hai ta isdi matra 200 gram prati aikad hundi hai. jekar hale tak urea nahi payi ta 3 killo prati knal de hisab nal pao.kayi var paniri nitrogen di kami de karn vi paniri peeli honi shuru ho jandi hai.
Posted by Lal Bahadur singh kushwaha
Uttar Pradesh
29-05-2019 10:46 AM
मिर्च की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ की फसल के लिए मई-जून और गर्मियों की फसल के लिए फरवरी - मार्च का समय मिर्च की रोपाई के लिए उपयुक्त होता है खरीफ के मौसम में 60-75 सैं.मी. x 45 सैं.मी. और सिंचित क्षेत्रों में 60 x 60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में बीजों को 3-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें और फिर मिट्टी से ढक दें इसकी.... (Read More)
मिर्च की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ की फसल के लिए मई-जून और गर्मियों की फसल के लिए फरवरी - मार्च का समय मिर्च की रोपाई के लिए उपयुक्त होता है खरीफ के मौसम में 60-75 सैं.मी. x 45 सैं.मी. और सिंचित क्षेत्रों में 60 x 60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में बीजों को 3-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें और फिर मिट्टी से ढक दें इसकी मुख्य खेत में रोपाई की जाती है
1 मीटर चौड़े और आवश्यकतानुसार लंबे बैड बनाएं कीटाणु रहित कोकोपिट 300 किलो, 5 किलो नीम केक को मिलाए और 1-1किलो एज़ोसपीरिलियम और फासफोबैक्टीरिया भी डालें उपचार किए हुए बीज ट्रे में एक बीज प्रति सैल बोयें बीज को कोकोपिट से ढक दें और ट्रे एक- दूसरे के साथ रखें बीज अंकुरन तक इन्हें पॉलीथीन से ढक दें नर्सरी में बीज बीजने के बाद बैडों को 400 मैश नाइलोन जाल या पतले सफेद कपड़े से ढक दें यह नए पौधों को कीड़े-मकौड़े और बीमारियों के हमले से बचाता है 6 दिनों के बाद, ट्रे में लगे नए पौधों को एक एक करके जाल की छांव के नीचे बैडों में लगाएं बीज अंकुरन तक पानी देने वाले बर्तन की मदद से पानी दें बिजाई के 18 दिन बाद 19:19:19 की 0.5 % (5 ग्राम प्रति लीटर ) की स्प्रे करें किस्मों के लिए 200 ग्राम बीज और हाइब्रिड के लिए 80-100 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें

Posted by sanjay. kumar
Uttar Pradesh
29-05-2019 10:43 AM
खादों की सही आवश्यकता जानने के लिए प्रत्येक तीन वर्ष के बाद मिट्टी की जांच जरूरी है बिजाई से पहले आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 8 टन या वर्मीकंपोस्ट + रालीगोल्ड 8-10 किलो या पी एस बी 5-10 किलो प्रति एकड़ में डालें
नाइट्रोजन 60-90 किलो (यूरिया 135-200 किलो) और फासफोरस 20 किलो (एस एस पी 125 किलो) प्रति एकड़ में.... (Read More)
खादों की सही आवश्यकता जानने के लिए प्रत्येक तीन वर्ष के बाद मिट्टी की जांच जरूरी है बिजाई से पहले आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 8 टन या वर्मीकंपोस्ट + रालीगोल्ड 8-10 किलो या पी एस बी 5-10 किलो प्रति एकड़ में डालें
नाइट्रोजन 60-90 किलो (यूरिया 135-200 किलो) और फासफोरस 20 किलो (एस एस पी 125 किलो) प्रति एकड़ में डालें फासफोरस की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दूसरी और चौथी सिंचाई के समय डालें
सर्दियों के मौसम में तापमान कम होने के कारण फसल तत्व ज्यादा लेती है जिस कारण मौधा पीला पड़ जाता है इसकी रोकथाम के लिए N:P:K 19:19:19 की स्प्रे 100 ग्राम 150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ के लिए प्रयोग करें जिन इलाकों में पानी की कमी है वहां यूरिया+पोटाश का प्रयोग 2.5 किलोग्राम को 100 लीटर पानी में मिलाकर करें

Posted by ਹਰਪਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
29-05-2019 10:33 AM
ਵੱਧ ਝਾੜ ਲੈਣ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਅਪ੍ਰੈਲ ਦੇ ਅੰਤ ਵਿੱਚ ਕਰੋ ਇਸ ਨੂੰ ਪਨੀਰੀ ਦੇ ਨਾਲ ਵੀ ਉਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਜੂਨ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਪੰਦੜਵਾੜੇ ਤੱਕ ਪਨੀਰੀ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਾ ਦਿਓ ਪਨੀਰੀ ਲਈ 35-45 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾਓ

Posted by ਗਗਨਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
29-05-2019 10:24 AM
ਗਗਨਦੀਪ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਰਿਪੋਰਟ ਦੀ ਫੋਟੋ ਭੇਜੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by vikram
Chattisgarh
29-05-2019 10:23 AM
Vikram ji Goat Farming ki training ke lia aap apne nazdiki Krishi Vigyan Kendra, Anjora-Durg (C.G.) Pin- 491006, +91 0788-2623461 se samparak kar sakte hai. Thankyou.

Posted by NILESH Kumar Singh
Jharkhand
29-05-2019 10:15 AM
निलेश जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप मेरे से 9711858258 पर संपर्क करें, धन्यवाद

Posted by Dinesh
Gujarat
29-05-2019 10:09 AM
It can be grown on variety of soils. For optimum growth and yield, it required deep loamy and alluvial soils. It is tolerant to loamy and slightly alkaline soils. It is also cultivated on poor soils. Also medium and black soils are suitable for pomegranate cultivation.Seedless (Bedana): Fruits are medium to large in size. Fruits are sweet, very juicy and soft seeded.
Jyothi: This variety is dwarf and evergreen. Gives average juice yield of 75% on the basis of grains weight. TSS content of juice is about 17%. Gives average yield 3.2 tonnes per acre.
Mridula: Fruits having red coloured rind. Its grains are also blood red in colour. The juice is 78 percent on the basis of grain weight. TSS content of juice is about 17-18%.
Ruby: It fruits are of small size and having red coloured. A.... (Read More)
It can be grown on variety of soils. For optimum growth and yield, it required deep loamy and alluvial soils. It is tolerant to loamy and slightly alkaline soils. It is also cultivated on poor soils. Also medium and black soils are suitable for pomegranate cultivation.Seedless (Bedana): Fruits are medium to large in size. Fruits are sweet, very juicy and soft seeded.
Jyothi: This variety is dwarf and evergreen. Gives average juice yield of 75% on the basis of grains weight. TSS content of juice is about 17%. Gives average yield 3.2 tonnes per acre.
Mridula: Fruits having red coloured rind. Its grains are also blood red in colour. The juice is 78 percent on the basis of grain weight. TSS content of juice is about 17-18%.
Ruby: It fruits are of small size and having red coloured. Average Juice percentage is 80 and TSS content is about 15%.Plough the land for two - three times and bring soil to fine tilth. After then carried out planking operation to make land levelled and uniform. In Spring season, February-March is optimum time for planting and July-August in sub-tropical and tropical regions respectively.Optimum spacing is depend on soil type and climate. For Pomegranate planting, if square system of planting is adopted, use spacing of 5m x 5m.For sowing dug Pits of 60 x 60 x 60 cm size about a month prior to planting. Keep open pit under the sun for a fortnight. Then filled pits with top soil mixed with 20kg of farmyard manure and 1 kg of super phosphate. After filling pit, apply water. It will settle down the soil.Transplanting of seedlings in main field.
Pomegranate is propagated through air layering method. Air layering is done in rainy season as well as in November-December month. For air layering select one to two year old, healthy, mature shoot having length of 45-60cm with pencil thickness.Before sowing, dipped seedling or cutting in IBA solution of 1000PPM@1gm/Ltr of water.During first year apply, well decomposed cowdung@10kg/plant, Urea@100gm, SSP@250gm and MOP@50gm per plant. Apply whole quantity of cowdung, SSP, Potash and half quantity of Urea six week before flowering. Apply remaining quantity of Urea at time of fruit development.
Keep removing inflorescence during initial three years. For good growth and yield, start bearing from 3-4 years onwards.Apply irrigation immediately after planting. After then give water at interval of 3 days upto 10-15 days after planting.
In rainy season, provide drainage facility as it cannot withstand in water logged conditions. In summer apply water at interval of 7-10 days and in winter increased irrigation interval to 10-15 days.
Irregular irrigation can lead to flower drop. Water stress during fruit development stage and heavy watering after water stress leads to fruit cracking, and then fruit drop. So provide regular and sufficient irrigation from flowering to harvesting stage. Pomegranate responds well to drip irrigation. Drip irrigation, not only saves water but gives higher yield in small quantity of water.To control weeds, mulching can be done. Along with weed control, it helps to conserved moisture and reduce evaporation loss.Training and Pruning help in growth of fresh healthy shoots. It removes old also disease branches and avoids overcrowding of branches. It also maintain proper shape of plant.After flowering, fruits gets mature within 5-6months. When fruit changes its color from green to light yellow or red i.e fruits start ripening, it is optimum time for harvesting. Avoid delay in harvesting as it will lead to fruit cracking and thus leads to yield loss.After harvesting, stored fruits in shades for a one week. It will help in hardening of fruit skin. So that less damage is observed in transportation. Fruits are graded according to weight.

Posted by Jyoti Verma
Uttar Pradesh
29-05-2019 10:04 AM
ज्योति वर्मा जी आम की पौध लेने के लिए आप Sabhanshu 9919674574 से सम्पर्क कर सकते है धन्यवाद
Posted by SUKHDEV Singh
Punjab
29-05-2019 10:01 AM
ਇਹ ਖੰਡ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੋ ਗੁੜ ਤੋਂ ਬਾਦ ਬੂਰਾ ਬੱਚਦਾ ਹੈ ਉਹ ਖੰਡ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਬੂਰਾ ਖੰਡ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by sandhu
Punjab
29-05-2019 09:59 AM
ਸੰਧੂ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਸਦੀ ਫੋਟੋ ਭੇਜੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by sandhu
Punjab
29-05-2019 09:57 AM
Jekar paniri uper to peeli pai rahi hai ta isde vich lohe di kami hai. isdi roktham de layi ferrous sulphate 1% @1 killo nu prati aikad de hisab nal spray karen.jekar chelated ferrous sulphate di spray karni hai ta isdi matra 200 gram prati aikad hundi hai. jekar hale tak urea nahi payi ta 3 killo prati knal de hisab nal pao.kayi var paniri nitrogen di kami de karn vi paniri peeli honi shuru ho jandi hai.
Posted by ਮਲਕੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
29-05-2019 09:49 AM
ਤੁਸੀ ਕਿਸਮ ਜਿਵੇ signet ਦਾ raja 44 ja raja 45 , 5050, 5005, 5051, 5455 ਜਾ pioneer ਦਾ 27p31 ja 25p35 ja 27p63,ਵਰਗੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by Mahendra pal
Uttar Pradesh
29-05-2019 09:47 AM
Murgi farm ki training aapko apke zile ke KVK se milegi. aapko KVK ka address bta diya geya hai aap waha jakar training ke liye apne form bhare ji. Krishi Vigyan Kendra,
IVRI, Izatnagar,
Distt.- Bareilly - (U.P.)
INDIA
PIN - 243 122
Tel. No.: 0581-2301181

Posted by Jaswant Ranu
Punjab
29-05-2019 09:26 AM
jaswant ji tuc thrips di roktham de layi imidacloprid@60ml nu prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by kuldeep Dhaliwal
Haryana
29-05-2019 09:26 AM
kuldeep ji tuc vermi compost nu kise vi fasl vich pa sakde ho. isdi matra 4 quintal prati acre de hisab nal pao . eh roodi vali khaad varga hi kam kardi hai ate mitti di upjau shakti nu vdhaundi hai. dhanwad
Posted by happy
Punjab
29-05-2019 09:16 AM
Happy ji kirpa karke isdi photo bhejo ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by ਜਸਮੇਲ ਸਿੰਘ
Punjab
29-05-2019 09:07 AM
mirchan de patteya de uper mashar da hamla check karo jekar maujood hai ta tuc isde uper imidacloprid@1.5 ml nu prati liter pani de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by robin singh
Rajasthan
29-05-2019 09:04 AM
पशु को दूध उसकी खुराक और उसकी देखभाल पर निर्भर करता है कि आप कैसी खुराक दे रहे है और पशु की ग्रोथ कैसी हो रही है और वो कौनसी नस्लों से क्रोस है इन सभी बातों के साथ साथ उसके माता पिता का रिकॉर्ड कितना है यह भी देखना होता है जिससे उसके दूध का सही पता लगता है
Posted by Rohit patel
Madhya Pradesh
29-05-2019 08:59 AM
Rohit ji aap cow ko Flukarid-Ds bolus pett ke kiro ke liye dein, iske sath aap Anabolite liquid 100ml rojana aur Milkout powder 2-2 chamch subah sham dene shuru kren, baki aap rojana 35-40kg hara chara den, baki aap feed, khall sara kush dete rehe aur uski har 3 mahine ke bad deworming jrur kren, isse dudh mai farak padd jayega.
Posted by mohit Kumar
Uttar Pradesh
29-05-2019 08:58 AM
मोहित कुमार जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप मेरे से 9711858258 पर संपर्क करें, धन्यवाद

Posted by रविठाकुर
Madhya Pradesh
29-05-2019 08:57 AM
ग्राफ्टिंग, पौधों के कृत्रिम प्रजनन तरीकों में से एक अर्थात्, एक पौधे की शाखाएं या कूड़े, किसी अन्य संयंत्र के स्टेम या जड़ से जुड़ी होती हैं, जिससे दोनों पार्टियां एक पूर्ण संयंत्र में उगती रहें ग्राफ्टिंग विधि को चमड़े और कली में विभाजित किया गया है इस वंशज को कसकर रूटस्टॉक के गठन की परत में शामिल होना चा.... (Read More)
ग्राफ्टिंग, पौधों के कृत्रिम प्रजनन तरीकों में से एक अर्थात्, एक पौधे की शाखाएं या कूड़े, किसी अन्य संयंत्र के स्टेम या जड़ से जुड़ी होती हैं, जिससे दोनों पार्टियां एक पूर्ण संयंत्र में उगती रहें ग्राफ्टिंग विधि को चमड़े और कली में विभाजित किया गया है इस वंशज को कसकर रूटस्टॉक के गठन की परत में शामिल होना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वंशज जीवित है शाखाओं या कलियों, वंशज बुलाया, संयंत्र से लिया जाता है, रूटस्टॉक या लकड़ी कहा जाता है आमतौर पर वृक्ष को बीज के 2 से 4 क्यूले के साथ चुना जाता है, जो कि पौधे या ऊपरी भाग के ऊपर बनने के लिए जुड़ा हुआ है; पौधे की जड़ हिस्से के बाद रूटस्टॉक को छिद्रित किया गया यह अलग अलग पौधे के लिए अलग तरीके से की जाती है कृपया बताये के आप कोनसे पौधे की जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके/ धन्यवाद

Posted by yadwinder singh
Punjab
29-05-2019 08:54 AM
ਯਾਦਵਿੰਦਰ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਦੇ ਦਿਤੇ ਗਏ ਹੈ ਤੁਸੀ ਐਪ ਵਿਚ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ.
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