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Posted by Sandeep Chauhan
Punjab
01-06-2019 09:59 AM
Punjab
06-04-2019 11:37 AM
Sandeep ji jo gibberellic acid hai isdi varto ta kiti jandi hai isdi matra 250ml nu prati acre de hisab nal spray kiti jandi hai.sparkel di varto 300gm nu prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by Sandeep Chauhan
Punjab
01-06-2019 09:49 AM
Punjab
06-02-2019 07:19 PM
Iss ki maatra 400gm prati acre hai...jis mein pani ki maatra 150ltr hai...paneeri mein abhi iss ki jrurat nahi hai...paneeri mein lohe aur zinc aur urea ja dap ki hi jrurat padhti hai...jab main khet mein iss ko lgaa doge fir iss ki spray krni pdhti hai.
Posted by bittu
Punjab
01-06-2019 09:46 AM
Punjab
06-01-2019 01:39 PM
ਇਕ ਮਹੀਨੇ ਤਕ ਮਾਂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਪਿਲਾਓ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਹਜ਼ਮ ਕਰ ਸਕੇ, ਉਸ ਨੂੰ ਖੁਲਾ ਰੱਖੋ ਜਿਸ ਨਾਲ ਉਹ ਭੱਜ ਭੱਜ ਕੇ ਕਸਰਤ ਕਰਦੀ ਰਹੇ, ਇਕ ਮਹੀਨੇ ਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਦ ਤੁਸੀ ਕਾਰਗਿਲ ਦਾ Calf starter ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨੂੰ ਦੁੱਧ ਵਿਚ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, 3 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਦ Calf grower ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, 8 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦੀ ਉਮਰ ਤੋਂ ਬਾਦ Heifer dry ਫੀਡ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਹ ਸਾਰਾ ਕੁਜ ਉੱਨ.... (Read More)
ਇਕ ਮਹੀਨੇ ਤਕ ਮਾਂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਪਿਲਾਓ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਹਜ਼ਮ ਕਰ ਸਕੇ, ਉਸ ਨੂੰ ਖੁਲਾ ਰੱਖੋ ਜਿਸ ਨਾਲ ਉਹ ਭੱਜ ਭੱਜ ਕੇ ਕਸਰਤ ਕਰਦੀ ਰਹੇ, ਇਕ ਮਹੀਨੇ ਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਦ ਤੁਸੀ ਕਾਰਗਿਲ ਦਾ Calf starter ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨੂੰ ਦੁੱਧ ਵਿਚ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, 3 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਦ Calf grower ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, 8 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦੀ ਉਮਰ ਤੋਂ ਬਾਦ Heifer dry ਫੀਡ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਹ ਸਾਰਾ ਕੁਜ ਉੱਨੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਦਿਓ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਉਹ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਹਜ਼ਮ ਕਰ ਸਕੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਗਰੋਥ ਦੇ ਲਈ Growth Mantra ਪਾਊਡਰ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਜਾਂ ਤੁਸੀ puberaid ਪਾਊਡਰ ਵੀ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ 2 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦੀ ਉਮਰ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ, ਜੇਕਰ ਉਮਰ 2 ਮਹੀਨੇ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੈ ਤਾਂ 20 ਗ੍ਰਾਮ ਪਾਊਡਰ ਦੇਣਾ ਹੈ, 4 ਮਹੀਨਿਆਂ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੋਣ ਤੇ 25 ਗ੍ਰਾਮ ਦਿਓ, ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਉਮਰ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ 5-5 ਗ੍ਰਾਮ ਵਧਾ ਦਿਓ. ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਉਸਦੀ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਦਾ ਵੀ ਪੂਰਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਜੀ..
Posted by जालम सिंह भाटी
Rajasthan
01-06-2019 09:41 AM
Punjab
06-04-2019 11:27 AM
जालम सिंह भाटी जी HHB 67 (Unnat): यह किस्म कम और ज्यादा वर्षा वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 65-70 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 6-8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें भारी और नदीनों से ग्रसित मिट्टी की दो बार जोताई करें आखिरी जोताई के समय 6.... (Read More)
जालम सिंह भाटी जी HHB 67 (Unnat): यह किस्म कम और ज्यादा वर्षा वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 65-70 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 6-8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें भारी और नदीनों से ग्रसित मिट्टी की दो बार जोताई करें आखिरी जोताई के समय 6 टन गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में मिलायें बाजरे की बिजाई के लिए मध्य जून से अंत जुलाई का समय अनुकूल होता है कतार से कतार में 40-45 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 10-15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को 3-5 सैं.मी. गहराई में बोयें बिजाई के लिए गड्डा खोदकर या बीज ड्रिल विधि का प्रयोग किया जाता है
Posted by sudhir kumar
Bihar
01-06-2019 08:55 AM
Punjab
06-01-2019 01:42 PM
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी दि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं तो कम से कम 10 हजार मुर्गियों का धंधा शुरू करना चाहते हैं तो आपको 4 से 5 लाख का इतज़ा.... (Read More)
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी दि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं तो कम से कम 10 हजार मुर्गियों का धंधा शुरू करना चाहते हैं तो आपको 4 से 5 लाख का इतज़ाम करना पड़ेगा, यदि आप 10 हजार मुर्गियों के साथ लेयर फार्मिंग करना चाहते हैं तो आपको 10 से 12 लाख का इंतज़ाम करना पड़ेगा,इसकी ट्रेनिंग लेकर इस काम को शुरू करें ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते है बाकि आप किसी सफल पोल्ट्री फार्म के फार्म पर खुद जाकर इस काम को देंखे जिससे आपको इस काम के बारे में ओर भी से जानकारी प्राप्त होगी.
Posted by Rahul
Haryana
01-06-2019 08:44 AM
Punjab
06-04-2019 11:23 AM
धान में सरसों की खल बहुत ही लाभकारी है यह एक ऐसा आॅरगैनिक तरीका है जिसके साथ आप धान की पैदावार में वृद्धि कर सकते हैं धान के पौधे की फोट करवाने के लिए इसके परिणाम बहुत ही बढ़िया हैं इसमें छ मुख्य तत्व हैं जिसमें मुख्य तौर पर नाइट्रोजन, पोटाश और फासफोरस के साथ साथ सल्फर जिंक और बोरोन भी पाये जाते हैं सरसों की .... (Read More)
धान में सरसों की खल बहुत ही लाभकारी है यह एक ऐसा आॅरगैनिक तरीका है जिसके साथ आप धान की पैदावार में वृद्धि कर सकते हैं धान के पौधे की फोट करवाने के लिए इसके परिणाम बहुत ही बढ़िया हैं इसमें छ मुख्य तत्व हैं जिसमें मुख्य तौर पर नाइट्रोजन, पोटाश और फासफोरस के साथ साथ सल्फर जिंक और बोरोन भी पाये जाते हैं सरसों की खल धान में प्रयोग करने के लिए दो तरीके हैं पहला तरीका है कि इसे ड्रम में भिगो लें और 5—6 दिन लगातार इसे हिलाते रहें और इस घोल को पानी देने वाले दिन खेत में डाल दें दूसरा तरीका यह है कि इसे बारीक कूटकर इसका छींटा ज़मीन में दे सकते हैं इसे प्रयोग करने का सही समय जब धान 15—20 दिनों का हो क्योंकि इस समय जड़ों का सबसे अधिक विकास होता है इसकी मात्रा एक एकड़ में सिर्फ 16 किलो का प्रयोग कर सकते हैं रेते वाले और बारानी ज़मीन में हम 20 किलो प्रयोग कर सकते हैं यूरिया बीच मिलाकर प्रयोग नहीं कर सकते हैं
Posted by Joginder singh
Punjab
01-06-2019 08:40 AM
Punjab
06-02-2019 07:15 PM
Peeli usha ka jhaad 90 man tak chla jaata hai..yeh kisam 155-157 din tak time leti hai...lambe sme mein pakkne ke kaarn iss ko thodi si bimaari jayda pdhti hai.
Posted by sanju
Uttar Pradesh
01-06-2019 08:16 AM
Punjab
06-04-2019 11:21 AM
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट.... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट्टी का pH 9.5 से ज्यादा हो तो इसमें जिप्सम डालें आप इसकी किस्मे जैसे Co 8014 (Mahalakshami) ,Vasant 1,Co 86032 ,Co 92005 की बिजाई कर सकते है पतझड़ के मौसम में 15 अक्तूबर से २० नवंबर तक बिजाई की जाती है, बसंत के मौसम में बिजाई 15 फरवरी तक और गर्मियों के मौसम में 15 जुलाई से 15 सितंबर तक बिजाई की जाती है बिजाई के लिए सुधरे ढंग जैसे कि (गहरी खालियां, मेंड़ बनाकर,पंक्तियों में जोड़े बनाकर और गड्ढा खोदकर बिजाई ) प्रयोग किये जाते हैं 1) खालियां और मेंड़ बनाकर सूखी बिजाई: ट्रैक्टर द्वारा मेंड़ बनाने वाली मशीन की मदद से मेंड़ और खालियां बनाएं और इन मेड़ और खालियों में बिजाई करें मेड़ और खालियों में 90 सैं.मी. का फासला होना चाहिए गन्ने की गुलियों को मिट्टी में दबाएं और उसके बाद हल्की सिंचाई करें 2) पंक्तियों के जोड़े बनाकर बिजाई: खालियां बनाने वाले यंत्र के प्रयोग से खेत में 150 सैं.मी. के फासले पर खालियां बनाएं और उनमें 30:30-90-30:30 सैं.मी. के फासले पर गन्ने की रोपाई करें इस तरीके से मेड़ वाली बिजाई से अधिक पैदावार मिलती है 3) गड्ढा खोदकर बिजाई: गड्ढे खोदने वाली मशीन से 60 सैं.मी. व्यास के 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोदें जिनमें 60 सैं.मी. का फासला हो इससे गन्ना 2-3 बार उगाया जा सकता है और मेड़ वाली बिजाई से 25-50 % अधिक पैदावार आती है B) एक आंख वाले गन्नों की बिजाई: रोपाई के लिए सेहतमंद गुलियां चुनें और 75-90 सैं.मी. के अंतर पर खालियों में बिजाई करें गुलियां एक आंख वाली होनी चाहिए यदि गन्ने के ऊपरी भाग में छोटी डलियां चुनी गई हों तो बिजाई 6 -9 सैं.मी. के अंतर पर करें फसल के अच्छे उगने के लिए आंखों को ऊपर की ओर रखें और हल्की सिंचाई करें पतझड़ के मौसम में 14500-16500 तीन आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और बसंत के मौसम में 16500-25000 तीन आंख वाले बीज और 21600-25000 दो आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें गन्ने में नदीनों के कारण 12-72 % पैदावार का नुकसान होता है शुरूआती 60-120 दिनों तक नदीनों की रोकथाम बहुत जरूरी है इसलिए रोपाई के बाद 3-4 महीने बाद फसल की नदीनों की रोकथाम करें नीचे लिखे तरीकों से नदीनों को रोका जा सकता है 1) हाथों से गोडाई करके: गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली फसल है इसलिए नदीनों को गोडाई करके रोका जा सकता है इसके इलावा प्रत्येक सिंचाई के बाद 3-4 गोडाई जरूरी है 2) काश्तकारी ढंग: इस प्रक्रिया में खेती के तरीके, अंतरफसली और मलचिंग तरीके शामिल हैं बहुफसली के कारण नदीनों का हमला ज्यादा होता है इसकी रोकथाम के लिए चारे वाली फसलें और हरी खाद वाली फसलों के आधार वाला फसली चक्र गन्ने में नदीनों की रोकथाम करता है गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली भी फसल है जिससे नदीनों के हमले का खतरा भी ज्यादा होता है यदि गन्ने को कम समय वाली फसलों के साथ अंतरफसली किया जाए तो इससे नदीनों को कम किया जा सकता है और ज्यादा लाभ भी मिल सकता है गन्ने के अंकुरन के बाद गन्ने की कतारों में 10-12 सैं.मी. मोटी तह बिछा दी जाती है यह सूर्य की रोशनी को सोखता है जिससे नदीन कम होते हैं यह मिट्टी में नमी को भी बचाता है 3) रासायनिक तरीके: नदीनों की रोकथाम के लिए, सिमाज़ीन या एट्राज़ीन 600-800 ग्राम या मैट्रीब्यूज़िन 800 ग्राम या ड्यूरॉन 1-1.2 किलोग्राम प्रति एकड़ में बिजाई के तुरंत बाद प्रयोग करना चाहिए इसके इलावा चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए 2, 4-डी@ 300-400 ग्राम का प्रयोग प्रति एकड़ के हिसाब से करें नाइट्रोजन 62 किलो, फासफोरस 32 किलो और पोटाश 42 किलो प्रति एकड़ में डालें बिजाई से पहले नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो मात्रा को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें नाइट्रोजन की पहली मात्रा को बीज वाली आंख के अंकुरण के समय और दूसरी मात्रा को बीज अंकुरण के 45 दिन बाद डालें 3 वर्षों के बाद गन्ने की गुलियों में 40-50 क्विंटल गाय का गोबर प्रति एकड़ में डालें पतझड़ के मौसम में 90-100 दिनों में नाइट्रोजन को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें और बसंत के मौसम में 150-160 दिन बाद डालनी चाहिए सिंचाई की संख्या मिट्टी की किस्म और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है गर्मी के महीने में गर्म हवाओं और सूखे में वृद्धि होने के कारण फसल को पानी की जरूरत पड़ती है पहली सिंचाई फसल के 20-25 % अंकुरित होने पर करें मानसून में गन्ने को पानी और बारिश के आधार पर लगाएं कम वर्षा में सिंचाई 10 दिनों के अंतराल पर करें इसके बाद सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर 20-25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जमीन में नमी संभालने के लिए गन्ने की पंक्तियों में मलचिंग का प्रयोग करें अप्रैल जून के महीने में पानी की कमी ना होने दें इससे पैदावार कम होगी इसके इलावा बारिश के दिनों में पानी ना खड़ा होने दें जोताई का समय, वृद्धि का समय और अधिक विकास का समय सिंचाई के लिए बहुत नाज़ुक होता है मिट्टी को मेंड़ पर चढ़ाना: कसी की मदद से खालियों में और पौधे के किनारों पर मिट्टी चढ़ाई जाती है यह मिट्टी में अच्छी तरह से तैयार की गई खाद को अच्छी तरह से मिश्रित होने में मदद करती है पौधे को सहारा देने और उसे गिरने से बचाने में भी मदद करती है ज्यादा पैदावार और चीनी प्राप्त करने के लिए गन्ने की सही समय पर कटाई जरूरी है समय से पहले या बाद में कटाई करने से पैदावार पर प्रभाव पड़ता है किसान शूगर रीफरैक्टोमीटर का प्रयोग करके कटाई का समय पता लगा सकते हैं गन्ने की कटाई द्राती की सहायता से की जाती है गन्ना धरती से ऊपर थोड़ा हिस्सा छोड़कर काटा जाता है क्योंकि गन्ने में चीनी की मात्रा ज्यादा होती है कटाई के बाद गन्ना फैक्टरी में लेकर जाना जरूरी होता है
Posted by sunny kuma
Punjab
01-06-2019 08:12 AM
Maharashtra
06-04-2019 11:16 AM
कृषि प्रणाली में मिट्टी के कटाव, मिट्टी का उपजाऊपन, मिट्टी की गुणवत्ता, पानी, खरपतवार, कीट, रोग, जैव विविधता और वन्य जीवन का प्रबंधन करने के लिए मानव द्वारा एक कवर फसल लगाई जाती है जिसे एग्रोइकोसिस्टम कहते हैं मतलब कि मानव द्वारा एक पारिस्थितिक प्रणाली का प्रबंधन किया जाता है कवर फसलें नकदी फसल की कटाई के ब.... (Read More)
कृषि प्रणाली में मिट्टी के कटाव, मिट्टी का उपजाऊपन, मिट्टी की गुणवत्ता, पानी, खरपतवार, कीट, रोग, जैव विविधता और वन्य जीवन का प्रबंधन करने के लिए मानव द्वारा एक कवर फसल लगाई जाती है जिसे एग्रोइकोसिस्टम कहते हैं मतलब कि मानव द्वारा एक पारिस्थितिक प्रणाली का प्रबंधन किया जाता है कवर फसलें नकदी फसल की कटाई के बाद लगाई जाने वाली ऑफ-सीजन फसल हो सकती हैं सर्दियों के दौरान कवर फसल उगाई जा सकती है
Posted by Manpreet Singh
Punjab
01-06-2019 08:05 AM
Punjab
06-02-2019 07:17 PM
Zinc 33% di maatra 16-17Kg prati acre hundi hai..iss di varto tuc 10kg v kr skde ho...zinc 21% wali di maatra 25kg prati acre hundi hai...
Posted by ਜਗਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
01-06-2019 07:46 AM
Punjab
06-02-2019 08:44 PM
Punjab Basmati 3, Pusa Basmati 1509, Pusa Basmati 1121, Punjab basmati 4, punjab basmati 5, pusa basmati 1637, pusa basmati 1728. Ih basmati jhone dia kisma hnn. ihna kisma nu tuc july de vich lgaa skde ho.
Posted by karan Gautam
Himachal Pradesh
01-06-2019 07:38 AM
Punjab
06-04-2019 11:03 AM
कारन जी यह तत्व की कमी के कारण हो रहा है इसके लिए आप NPK 19:19:19 @1 किल्लो को 150 लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by ਕੁਲਵੀਰ ਸਿੰਘ
Punjab
01-06-2019 07:21 AM
Punjab
06-03-2019 09:32 AM
Kulveer ji kirpa karke isdi saaf photo bhejo ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake tuhade walo bheji gayi photo saaf dikhai nahi de rahi hai.dhanwad
Posted by ਕੁਲਵੀਰ ਸਿੰਘ
Punjab
01-06-2019 07:18 AM
Punjab
06-03-2019 09:30 AM
kulveer ji kirpa karke isdi saaf photo bhejo ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake tuhade walo bheji gayi photo saaf dikhai nahi de rahi hai.dhanwad
Posted by jashan
Punjab
01-06-2019 07:15 AM
Punjab
06-01-2019 08:10 AM
Jashan ji pashuaa de laon layi fogger system tohanu preet fogger sytem rampura to mil javega ji. eh apne aap gar lga ke jange 10 fuhareya da sytem te 6000 rupees kharcha aavega ji. jekar koe hor jankari leni hai ta 9464196810 number te bablu ji nal gal kar lavo. Thankyou.
Posted by Sanjeev Kumar
Uttar Pradesh
01-06-2019 07:15 AM
Uttar Pradesh
06-01-2019 09:27 AM
Sanjeev Kumar ji aap inko Sirka dedo 1 ml per liter Pani mai dhal kar.
Posted by Gurwinder Sran Zaildar
Punjab
01-06-2019 06:58 AM
Punjab
06-04-2019 11:01 AM
Gurwinder Sran ji eh ik fungicide hai jo fungus diyan bimariyan di roktham de layi vartya janda hai.dhanwad
Posted by Ajay
Chattisgarh
01-06-2019 06:57 AM
Punjab
06-04-2019 10:59 AM
Ajay ji MTU 1010 kisam ki variety 120-125 din men pakk kar tyr ho jati hai. iska yield 17-18 quintal prati acre niklta hai. dhanywad
Posted by Ajay
Chattisgarh
01-06-2019 06:54 AM
Maharashtra
06-04-2019 10:57 AM
Ajay ji kripya aap apna swal vistar se pooche ke aap konsi fasl ki variety ke bare men jankari di ja sake.dhanywad
Posted by tajinder singh
Punjab
01-06-2019 06:49 AM
Punjab
06-04-2019 10:56 AM
Tajinder ji UPL saaf di matra ik acre vich 500gm nu prati acre de hisab nal spray kiti jandi hai.dhanwad
Posted by UTKARSH BAVISKAR
Maharashtra
01-06-2019 06:49 AM
Rajasthan
06-03-2019 02:50 PM
UTKARSH BAVISKAR to get all the information about pearl training you can contact with me 9711858258. Thank you.
Posted by Gurveer sidhu
Punjab
01-06-2019 06:48 AM
Punjab
06-04-2019 10:54 AM
jekar paniri uper to peeli pai rahi hai ta isde vich lohe di kami hai. isdi roktham de layi ferrous sulphate 1% @1 killo nu prati aikad de hisab nal spray karen.jekar chelated ferrous sulphate di spray karni hai ta isdi matra 200 gram prati aikad hundi hai. jekar hale tak urea nahi payi ta 3 killo prati knal de hisab nal pao.kayi var paniri nitrogen di kami de karn vi paniri peeli honi shuru ho jandi hai.
Posted by husan
Punjab
01-06-2019 06:41 AM
Punjab
06-01-2019 01:58 PM
hnji tuci uss nu pani vich v pilaa skde ho, per ek gal da dian rkho ki uss nu huthu nhi aunna chahida, baki tuci isdi varto kisi v trike nal kr skde ho.
Posted by lohit ADHIKARY
Chattisgarh
01-06-2019 06:28 AM
Punjab
06-04-2019 10:53 AM
Lohit ji its a fungal attack you can spray copper oxychloride@3gm per litre of water.Thank you
Posted by RAHUL KUMAR
Bihar
01-06-2019 06:24 AM
Maharashtra
06-04-2019 10:51 AM
मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिसमे नमी सोखने की क्षमता हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की pH 6-7 अनुकूल है आप इसकी .... (Read More)
मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिसमे नमी सोखने की क्षमता हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की pH 6-7 अनुकूल है आप इसकी किस्मे जैसे Arka Meghana,Arka Sweta,Kashi Early, Kashi Surkh की बिजाई कर सकते है खेत को तैयार करने के लिए 2-3 बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद डलियों को तोड़ें बिजाई से 15-20 दिन पहले रूड़ी की खाद 150-200 क्विंटल प्रति एकड़ डालकर मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें टमाटर और मिर्च की खेती एक ही या नज़दीक वाले खेत में ना करें, क्योंकि दोनों की बीमारियां एक जैसी होती हैं और इस कारण एंथ्राक्नोस और बैक्टीरिया वाली बीमारीयों के बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है मिर्च की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ की फसल के लिए मई-जून और गर्मियों की फसल के लिए फरवरी - मार्च का समय मिर्च की रोपाई के लिए उपयुक्त होता है खरीफ के मौसम में 60-75 सैं.मी. x 45 सैं.मी. और सिंचित क्षेत्रों में 60 x 60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में बीजों को 3-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें और फिर मिट्टी से ढक दें इसकी मुख्य खेत में रोपाई की जाती है 1 मीटर चौड़े और आवश्यकतानुसार लंबे बैड बनाएं कीटाणु रहित कोकोपिट 300 किलो, 5 किलो नीम केक को मिलाए और 1-1किलो एज़ोसपीरिलियम और फासफोबैक्टीरिया भी डालें उपचार किए हुए बीज ट्रे में एक बीज प्रति सैल बोयें बीज को कोकोपिट से ढक दें और ट्रे एक- दूसरे के साथ रखें बीज अंकुरन तक इन्हें पॉलीथीन से ढक दें नर्सरी में बीज बीजने के बाद बैडों को 400 मैश नाइलोन जाल या पतले सफेद कपड़े से ढक दें यह नए पौधों को कीड़े-मकौड़े और बीमारियों के हमले से बचाता है 6 दिनों के बाद, ट्रे में लगे नए पौधों को एक एक करके जाल की छांव के नीचे बैडों में लगाएं बीज अंकुरन तक पानी देने वाले बर्तन की मदद से पानी दें बिजाई के 18 दिन बाद 19:19:19 की 0.5 % (5 ग्राम प्रति लीटर ) की स्प्रे करें किस्मों के लिए 200 ग्राम बीज और हाइब्रिड के लिए 80-100 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (110 किलो यूरिया), फासफोरस 16 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा पनीरी खेत में लगाने के समय डालें रोपाई के बाद बाकी बची नाइट्रोजन दो बराबर हिस्सों में 30वें और 50वें दिन डालें सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 84 किलो (182 किलो यूरिया), फासफोरस 24 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 किलो) प्रति एकड़ डालें रोपाई से पहले 24 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 52 किलो), फासफोरस की पूरी मात्रा और पोटाश की आधी मात्रा प्रति एकड़ में डालें बाकी बची नाइट्रोजन को पांच भागों में बांटें और पोटाश को तीन बराबर भागों में बांटें नाइट्रोजन 12 किलो (यूरिया 26 किलो) को बिजाई के बाद 45वें, 60वें, 75वें, 95वें और 115वें दिन डालें और पोटाश 4 किलो को बिजाई के बाद 45वें, 60वें, और 75वें दिन डालें 45 दिनों तक गोडाई करें, कही की मदद से मिट्टी चढ़ाएं और खेत को नदीन मुक्त रखें यदि नदीनों की रोकथाम ना की जाये तो यह 70-90 % पैदावार कम कर देते हैं रोपाई से पहले मुख्य खेत में पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ में डालें यदि नदीनों की संख्या ज्यादा हो तो उनके अंकुरण के बाद सेन्कोर 800 मि.ली की स्प्रे प्रति एकड़ में करें नदीनों की रोकथाम के साथ मिट्टी में नमी को बनाए रखने के लिए मलचिंग एक प्रभावी तरीका है मिट्टी में नमी के आधार पर सर्दियों में 6-7 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 4-5 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए गंभीर होती है इस अवस्था पर पानी की कमी से फल गिरते हैं जिससे फलों के उत्पादन में कमी होती है विभिन्न खोजों में यह पाया गया है, कि प्रत्येक पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई से जड़ों में नमी ज्यादा होती है जिससे वे अधिक उपज देती हैं मिर्चों की तुड़ाई हरा रंग आने पर करें या फिर पकने के लिए पौधे पर ही रहने दें मिर्चों का पकने के बाद वाला रंग किस्म पर निर्भर करता है अधिक तुड़ाइयां लेने के लिए यूरिया 10 ग्राम प्रति लीटर और घुलनशील K @ 10 ग्राम प्रति लीटर पानी (1 प्रतिशत प्रत्येक का घोल) की स्प्रे 15 दिनों के फासले पर कटाई के समय करें पैकिंग के लिए मिर्चें पक्की और लाल रंग की होने पर तोड़ें सुखाने के लिए प्रयोग की जाने वाली मिर्चों की पूरी तरह पकने के बाद ही तुड़ाई करें
Posted by rahim khan
Uttar Pradesh
01-06-2019 06:18 AM
Punjab
06-04-2019 10:50 AM
rahim khan ji kripya iski photo bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Anil Kumar
Haryana
01-06-2019 06:15 AM
Punjab
06-20-2019 02:21 PM
anil ji 1121 ko 36 killo urea prati acre ke hisab se daali jati hai . iske ilava bijai ke same potash@20 kg prati acre ke hisab se daali jati hai.agar aapne pichli fasl men DAP daali hai to abhi aapko DAP daalne ki jrurat nahi hai.dhanywad
Posted by Sukhpalbir Singh
Punjab
01-06-2019 06:14 AM
Punjab
06-14-2019 12:28 PM
ਸੁੱਖਪਾਲਵੀਰ ਜੀ ਇਸ ਸਬੰਧੀ ਵਿਸਥਾਰ ਨਾਲ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ ਤੁਸੀ Kuldeep Singh 9872028219, 9815387219 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Mithun Kumar
Uttar Pradesh
01-06-2019 05:57 AM
Punjab
06-04-2019 10:44 AM
Mithun ji yeh keet ka hamla hai iski roktham ke liye aap malathion@2.5ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Joginder Singh
Punjab
01-06-2019 04:54 AM
Punjab
06-01-2019 09:59 AM
ਜੋਗਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਜੀ ਸਤਾਵਰ ਅਤੇ ਸਫੈਦ ਮੂਸਲੀ ਦਾ ਬੀਜ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by चौधरी. अमन पटेल
Madhya Pradesh
01-06-2019 02:17 AM
Punjab
06-04-2019 10:39 AM
चौधरी. अमन पटेल जी आप धान की किस्मे जैसे JRH5,JRH10,PRH10,Narendra, Sahydri की बिजाई कर सकते है
Posted by gurlal singh
Punjab
01-06-2019 12:20 AM
Punjab
06-02-2019 08:45 PM
Narme ki beejai ka time 15 May tkk ka hi tha..
Posted by Pradeep Rai
Uttar Pradesh
01-06-2019 12:10 AM
Rajasthan
06-05-2019 09:11 AM
ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र अब बन गया है भारत का पहला निशुल्कः मोती प्रशिक्षण केंद्र जून और जुलाई महीने में 3 दिन का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए # जून - 22,23,24 (प्रशिक्.... (Read More)
ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र अब बन गया है भारत का पहला निशुल्कः मोती प्रशिक्षण केंद्र जून और जुलाई महीने में 3 दिन का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए # जून - 22,23,24 (प्रशिक्षण की तारीख ) # जुलाई - 20,21,22 (प्रशिक्षण की तारीख ) अचल सिंह (फाउंडर ) 9711858258 सवाईमाधोपुर, ग्राम(लहसोड़ा ), राजस्थान
Posted by surya singh
Uttar Pradesh
31-05-2019 11:54 PM
Rajasthan
06-03-2019 11:03 AM
Surya singh जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप मेरे से 9711858258 पर संपर्क करें, धन्यवाद
Posted by Ashvani Dehariya
Madhya Pradesh
31-05-2019 11:45 PM
Punjab
06-02-2019 07:35 AM
इसकेे लिए आप यह ओडियो सूनें
Posted by Mayur Gajbhiye
Maharashtra
31-05-2019 11:04 PM
Rajasthan
06-01-2019 11:43 AM
Mayur Gajbhiye ji agar cow ka dairy farm shuru kiya jaye to theek rahega ji.
Posted by Sukhi Dhillon
Punjab
31-05-2019 10:48 PM
Punjab
06-03-2019 11:11 AM
Sukhi Dhillon ji jekar 1 bige cho 18 man jiri nikaldi hai ta 24 bigea vicho 432 man bhav 172.8/q jiri jekar 1770/q de hisab nal dekhia ta Rs. 305856/- di jiri hovegi. Thankyou.
Posted by shyam ji verma
Uttar Pradesh
31-05-2019 10:47 PM
Punjab
05-31-2019 11:04 PM
Shyam Verma g Kesar ki Kheti Kewal KASHMIR ke thnde area me hoti hai. Kujh log Saffola k seed ko KESAR ka seed bta kr Farmers k saath fraud kr rahe hai.
Posted by Balwinder Singh
Punjab
31-05-2019 10:30 PM
Punjab
06-01-2019 05:22 PM
balwinder ji 15 din di paniri nu urea@3killo prati knal de hisab nal pao. isd enal paniri di growth vadia hundi hai.dhanwad
Posted by rahul kumar
Uttar Pradesh
31-05-2019 10:23 PM
Punjab
06-01-2019 02:00 PM
Rahul ji aap AI ke baad gaye ko Concimax bolus de skte hai, iski rojana 1 goli deni hai aur 14 din tak dete rehen, yeh intas company ka product hai, isse pashu ko gabhin rehne mai help milti hai.
Posted by Navpreet singh
Punjab
31-05-2019 10:10 PM
Punjab
06-01-2019 05:25 PM
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति वर्.... (Read More)
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति वर्ग फीट जगह) में मिलायें इसके बाद वेस्ट जैसे कि बची कुची सब्जियां, फल, कच्चा गोबर, गोबर की सलरी की 8—10 इंच मोटी परत डालें दूसरी परत के बाद इसके ऊपर सूखे पत्ते या पराली से ढक दें हर परत के बाद पानी छिड़कें ताकि नमी बनी रहे वर्मीकंपोस्ट के बैड को 3—4 इंच मोटी गोबर की परत से ढक दें और इसके ऊपर बोरा या तिरपाल रखें ताकि नमी बनी रहे रसोई, फसलों या डेयरी के बचे कुचे की परत को रैक से पलटते रहें और आवश्यकतानुसार थोड़ा थोड़ा करके और वेस्ट भी डाल सकते हैं इसके ऊपर कच्चा गोबर भी डाल सकते हैं पर ध्यान रखें कि यह परत पहले जितनी ही मोटी रहें वर्मी कंपोस्ट की खाद मौसम के हिसाब से 45—60 दिनों में तैयार हो जाती है सबसे ऊपर वाली परत को हटाकर गंडोए छलनी से अलग कर लें और निचली छोड़ दें इसके ऊपर दोबारा रसोई या एग्रो वेस्ट की 6 इंच मोटी परत बिछाकर दोबारा खाद तैयार की जा सकती हैं 45 दिनों के बाद पानी छिड़कना बंद करने से भी गंडोए निचली परत में चले जाते हैं और छलनी से अलग करने में समय कम लगता है तैयार वर्मी कंपोस्ट काले भूरे रंग की गंध रहित और चाय पत्ती जैसी होती है इसे छांव में हवा में सुखकर आवश्यकतानुसार थैले या बोरियों में डालकर रखा जा सकता है एक टन वर्मी कंपोस्ट में 1.0—1.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 5—10 किलोग्राम पोटाश और 3.5—5.0 किलो फासफोरस होता है इसके अलावा इसमें कई तरह के एन्ज़ाइम और सूक्ष्म तत्व कॉपर, आयरन, जिंक, सल्फर, कैलशियम और मैगनीशियम आदि होते हैं इसका मुनाफा कई किसान कमा रहे हैं, इसकी डिमांड आजकल बहुत बढ़ गई है क्योंकि अब किसान जैविक खेती की तरफ बढ़ रहे हैं, यह 800 रुपये क्विंटल के हिसाब से बिक जाता है धन्यवाद
Posted by Dilbag singh
Punjab
31-05-2019 10:02 PM
Punjab
06-01-2019 02:03 PM
ਨਹੀਂ ਦਿਲਬਾਗ ਜੀ ਇਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਨੂੰ ਫਰਕ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦਾ ਹੈ, ਇਹ ਦੇਸੀ ਇਲਾਜ ਹੈ, ਇਸਦਾ ਕੋਈ ਨੁਕਸਾਨ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਤੁਸੀ ਦੱਸੀ ਹੋਈ ਮਾਤਰਾ ਅਨੁਸਾਰ ਇਸਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ.
Posted by sandeep singh
Punjab
31-05-2019 09:56 PM
Punjab
05-31-2019 11:06 PM
Dairy training lyi apne District PDDB ( Punjab Dairy Development Board) dey Office ch contact kro. PDDB cho tuhanu 15 days & 4 weeks di training Dey schedule di proper knowledge mil jaaegi. Baki tusi GADVASU ch v contact kr skde ho
Posted by shankarlal
Chattisgarh
31-05-2019 09:55 PM
Punjab
06-01-2019 05:31 PM
भिंडी काफी तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है भिंडी की फसल के लिए उचित मिट्टी रेतली से चिकनी होती है, जिसमें जैविक तत्व भरपूर मात्रा में हों और जिसकी निकास प्रणाली भी अच्छी ढंग की हो यदि निकास अच्छे ढंग का हो तो यह भारी ज़मीनों में भी अच्छी उगती है मिट्टी का पी एच 6.0 से 6.5 होना चाहिए खारी, नमक वाली या घटिया निकास वा.... (Read More)
भिंडी काफी तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है भिंडी की फसल के लिए उचित मिट्टी रेतली से चिकनी होती है, जिसमें जैविक तत्व भरपूर मात्रा में हों और जिसकी निकास प्रणाली भी अच्छी ढंग की हो यदि निकास अच्छे ढंग का हो तो यह भारी ज़मीनों में भी अच्छी उगती है मिट्टी का पी एच 6.0 से 6.5 होना चाहिए खारी, नमक वाली या घटिया निकास वाली मिट्टी में इसकी खेती ना करें Pusa Mahakali: यह किस्म आई ए आर आई, नई दिल्ली द्वारा बनाई गई है इसके फल हलके हरे रंग के होते हैं Parbhani Kranti: इसके फल आकार में दरमियाने लंबे होते हैं और अच्छी क्वालिटी के कारण ज्यादा देर तक स्टोर किए जा सकते हैं यह चितकबरा रोग को सहनेयोग्य किस्म है यह 120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 40-48 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Sawani: यह किस्म आई ए आर आई, नई दिल्ली द्वारा बनाई गई है यह किस्म गर्मी और बरसात के मौसम में उगानेयोग्य किस्म है यह 50 दिनों में पककर तैयार हो जाती है इसके फल गहरे हरे रंग के और कटाई के समय 10-12 सैं.मी. लंबे होते हैं यह चितकबरा रोग को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 48-60 क्विंटल होता है Arka Anamika: यह किस्म आई आई एच आर बैंगलोर द्वारा तैयार की गई है यह चितकबरा रोग की रोधक किस्म है खेत की तैयारी करने के लिए ज़मीन की 5-6 बार गहरी जोताई करें फिर दो-तीन बार सुहागा मार कर ज़मीन को समतल करें आखिरी बार जोताई करते समय 100 क्विंटल प्रति एकड़ अच्छी रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें खालियां और मेंड़ वाला ढंग बनाएं कईं बार भिंडियों को खेत में लगाई हुई मुख्य फसल के आस-पास भी लगा दिया जाता है और इसके लिए बिजाई का ढंग भी मुख्य फसल के साथ का ही प्रयोग किया जाता है इसे बिजाई वाली मशीन से, हाथों से गड्ढा खोदकर या हलों के पीछे बीज डालकर भी बोया जा सकता है उत्तर में यह वर्षा और बसंत के मौसम में उगाई जाती है वर्षा वाले मौसम में, इसकी बिजाई जून-जुलाई के महीने और बसंत ऋतु में फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है पंक्तियों में फासला 45 सैं.मी. और पौधों में फासला 15-20 सैं.मी. रखना चाहिए बीज की गहराई बीज 1-2 सैं.मी. गहराई में बोयें बिजाई का ढंग:- इसकी बिजाई गड्ढा खोदकर की जाती है वर्षा ऋतु (जून-जुलाई) में टहनियों वाली किस्मों के लिए 4-6 किलो बीज प्रति एकड़, 60x30 सैं.मी. फासले पर बोयें बिना टहनियों वाली किस्मों के लिए 45x30 सैं.मी. का फासला रखें मध्य फरवरी तक 15-18 किलो बीज प्रति एकड़ डालें और मार्च में बिजाई के लिए 4-6 किलो बीज प्रति एकड़ बोयें शुरूआती खाद के तौर पर 120-150 कि्ंवटल अच्छी रूड़ी की खाद डालें भिंडी की फसल के लिए नाइट्रोजन 36 किलो (80 किलो यूरिया) प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय और बाकी बची मात्रा पहली तुड़ाई के बाद डालें अच्छी पैदावार की प्राप्ती के लिए बिजाई से 10-15 दिनों के बाद 19:19:19 की 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें अच्छे फूलों और फलों की प्राप्ती के लिए 00:52:34 की 50 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी की स्प्रे फूल निकलने से पहले और फिर फल बनने के समय दोबारा करें अच्छी पैदावार और अच्छी क्वालिटी के फलों के लिए , फूल बनने के समय 13:00:45 (पोटाश्यिम नाइट्रेट) की 100 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी की स्प्रे करें
Posted by sandhu
Punjab
31-05-2019 09:38 PM
Punjab
06-01-2019 07:35 AM
sb toh pehla je tusi ohnu pet de keede di koi dwayi nhi diti ya deworming nhi kiti ta Flukarid-Ds nal deworming kro. deworming krn toh baad jekr koi mineral mixture nhi de rhe ta eh dena shuru kro. intas company di minotas goli ik rozana 21 din tk deyo. is nal gaan heat ch aa jyegi. jekr fe v heat ch na aave ta Ovulenta naam di kit lyo jis ch vakh vakh rang diya 5 goliyan hundian hn. eh kit den toh baad pashu ykeenan heat ch aa jyega.
Posted by Suresh patidar
Madhya Pradesh
31-05-2019 09:32 PM
Punjab
05-31-2019 11:27 PM
Suresh g Poultry farm shuru krne k liye aap ko Training lena hoga. Certificate k behalf per ee banks loan sanction krta hai. Training mey aap ko Poultry farm k related saari knowledge mil jaaegi