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Posted by ladi
Punjab
02-06-2019 07:08 AM
Punjab
06-05-2019 06:05 PM
ਤੁਸੀ ਬਲਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਜੀ ਨਾਲ 9814799714 ਨੰਬਰ ਤੇ ਸੰਪਰਕ ਕਰੋ ਇਹਨਾਂ ਕੋਲ ਮੋਗੇ ਵਿਖੇ abs ਦੀ ਡੀਲਰਸ਼ਿੱਪ ਹੈ ਇਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਵਧੀਆ ਰਿਕਾਰਡ ਵਾਲੇ ਬੁੱਲ ਬਾਰੇ ਵੀ ਦੱਸ ਦੇਣਗੇ ਜੀ
Posted by jaswinder Singh
Punjab
02-06-2019 06:55 AM
Punjab
06-02-2019 07:03 AM
जसविंदर जी यह फंगस के कारण हो रहा है घर में खट्टी लस्सी की इसके ऊपर स्प्रे कर सकते है यहां यह लगाएं है वहां पानी सूखाकर फिर पानी लगाएं
Posted by ਸਤਨਾਮ ਸਿੰਘ
Punjab
02-06-2019 06:30 AM
Punjab
06-02-2019 07:40 AM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Fendikind plus ਦਵਾਈ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ ਦਿਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ broton liqiud 50-50ml ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ Aptifast bolus 1-1 ਗੋਲੀ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..
Posted by ਕੁਲਵੀਰ ਸਿੰਘ
Punjab
02-06-2019 06:21 AM
Punjab
06-13-2019 04:35 PM
kulveer ji it is attack of red rot. to control this do a spray of carbendazim@3gm per litre of water. thank you
Posted by pinder singh khalsa
Punjab
02-06-2019 06:15 AM
Punjab
06-02-2019 07:04 AM
pinder g aje amistar di lod nahi hai...iss di spray krn da sma bhut late aunda hai...aje paneeri nu urea , dap ate lohe di hi lod hundi hai...ja fir nadeena wali spray kr skde ho.
Posted by Narinder Dullat
Punjab
02-06-2019 05:59 AM
Punjab
06-02-2019 07:06 AM
यह फंगस के कारण हो रहा है इसके लिए ridomil gold@250gm या M-45@400gm को 150 लीटर पानी के साथ मिलाकर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें
Posted by Amit
Haryana
02-06-2019 05:56 AM
Punjab
06-07-2019 11:53 AM
Posted by abuansari
Uttar Pradesh
02-06-2019 05:49 AM
Punjab
06-13-2019 04:45 PM
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई कर.... (Read More)
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आप इसकी किस्मे जैसे Washington Coorg Honey Pusa Delicious Pusa Dwarf की बिजाई कर सकते है आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं एक एकड़ में 104 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें कम बारिश वाले क्षेत्रों में जून - जुलाई के महीने में बिजाई की जानी चाहिए और तराई और अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में सितंबर महीने में बिजाई की जानी चाहिए और क्षेत्र जहां सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हो वहां पर फरवरी - मार्च के महीने में बिजाई की जानी चाहिए आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 0.8 किलो प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं तुड़ाई एक एक फल को हाथों से तोड़कर की जाती है फलों को सुबह के समय तोड़ें धन्यवाद
Posted by charanjeet dhami
Punjab
02-06-2019 05:47 AM
Punjab
06-20-2019 02:16 PM
Charnjeet ji tuc bajre di kisam jive PHBF1, PCB164, FBC16, PHB2884 di bijai kar sakde ho.dhanwad
Posted by charanjeet dhami
Punjab
02-06-2019 05:40 AM
Punjab
07-04-2019 04:10 PM
charnjeet ji tuc bajre di kisma jive PHBF1,PCB164 di bijai kar sakde ho.dhanwad
Posted by Naresh Pal Singh
Uttar Pradesh
02-06-2019 04:58 AM
Punjab
06-02-2019 07:06 AM
यूपी में धान मई में पनीरी तैयार करके जून जुलाई महीने में बिजाई कर सकते है
Posted by Arun Mouryawanshi
Madhya Pradesh
02-06-2019 12:12 AM
Punjab
06-13-2019 05:55 PM
Arun Mouryawanshi ji Aloe vera Sell karne ke lia aap Narender Kumar 9950708819 se samparak kar sakte hai. Thankyou.
Posted by varinder singh kahlon
Punjab
01-06-2019 11:25 PM
Punjab
06-04-2019 03:47 PM
varinder ji tuc isde uper hoshi@400ml nu 150 litre pani vich mila ke spray karo. isde nal patheya di growth ho jayegi,dhanwad
Posted by असलम मंसूरी
Rajasthan
01-06-2019 11:21 PM
Punjab
06-07-2019 02:47 PM
बकरी पालन की ट्रेनिंग आपको आपके ज़िले के कृषि विज्ञानं केंदर से मिलेगी , आपके नज़दीकी कृषि विज्ञानं केंदर का पता आप नोट कर सकते है वह पर जाकर आप ट्रेनिंग के लिए फॉर्म भरके जमा करवा सकते हो जी उसके बाद जब ट्रेनिंग शुरू होगी तो आपको कॉल करके बता दिया जाता है जी
Posted by असलम मंसूरी
Rajasthan
01-06-2019 11:16 PM
Punjab
06-02-2019 07:47 AM
मंसूरी जी आप यह बताएं कि आप किस बीमारी के इलाज के लिए दवा देना चाहते है ​कृपया अपना सवाल विस्तार से बताएं ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Ranjeet Ansal
Madhya Pradesh
01-06-2019 11:03 PM
Punjab
06-04-2019 03:51 PM
Ranjeet ji you can sow varities like Durga, Gaurav(JS 72-280), gaurav (JS 72-44), JS 75-46, JS2 etc.
Posted by Amarjit Singh
Punjab
01-06-2019 10:45 PM
Punjab
06-02-2019 07:48 AM
कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें आप मुर्गियों के बारे में क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by shankarlal
Chattisgarh
01-06-2019 10:19 PM
Punjab
06-04-2019 03:53 PM
Shankarlal ji aap bhindi ki kisam jaise Kashi Harittima,Kashi Sudha ki bijai kar sakte hai.dhanywad
Posted by उत्तमवीर यादव
Uttar Pradesh
01-06-2019 10:16 PM
Punjab
06-04-2019 03:51 PM
यू पी के सिंचित और निम्न बारानी क्षेत्रों में मध्य जून से शुरूआती जुलाई तक का समय उपयुक्त होता है
Posted by yuvraj janwa
Rajasthan
01-06-2019 10:08 PM
Punjab
06-02-2019 07:50 AM
उसे Injection Zackshot 20ml Injection, Vitamin K 1ml x 15 Injection, Megludyne 20ml Injection, Intacef-tejo 3.375gm 3 दिन लगाएं जी, साथ ही powder Mamidum 50gm रोज़ाना 5 दिन तक दें, Bolus Mammi UP 2 रोज़ाना 5 दिन तक दें .
Posted by deepakchouhan
Madhya Pradesh
01-06-2019 09:58 PM
Punjab
06-04-2019 03:54 PM
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्ष.... (Read More)
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्षेत्रों में पाई जाती है यह गले को सूखेपन से राहत देता है यह हाथों, पैरों और गठिया की सूजन से आराम देता है Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum): यह चीन, ब्राज़ील, पूर्व नेपाल और साथ ही बंगाल, बिहार, चटगांव और भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में पाई जाती है इसका तना जामुनी और पत्ते हरे रंग के और बहुत ज्यादा सुगंधित होते है इसमें उचित मात्रा में औषधीय गुण जैसे ऐज़ाडिरैकटिन, ऐंटीफंगल , ऐंटीबैक्टीरियल, और पाचन तंत्र को ठीक रखती है यह गर्म क्षेत्रों में बढ़िया उगता है Babi Tulsi: यह पंजाब से त्रिवेंद्रम, बंगाल और बिहार में भी पाई जाती है इसका पौधा 1-2 फीट लम्बा होता है पत्ते 1-2 इंच लम्बे, अंडाकार और नुकीले होते है इसके पत्तों का स्वाद लौंग की तरह और सब्जियों में स्वाद के लिए प्रयोग किया जाता है तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें इसके मंडीकरण के लिए आप विवेश शर्मा 9826556880 Grow Further से संपर्क कर सकते हैं
Posted by sunil kumar
Punjab
01-06-2019 09:49 PM
Maharashtra
06-04-2019 03:57 PM
ਇਸ ਨੂੰ ਹਰ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ I ਵਧੇਰੇ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲੈਣ ਲਈ ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਰੇਤਲੀ, ਚੀਕਣੀ ਅਤੇ ਸਹੀ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿਚ ਕਰਨੀ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ I Guara 80: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੀ ਖੇਤੀ ਪੂਰੇ ਰਾਜ ਵਿਚ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਉਤੇ ਧੱਬੇ ਪੈਣ ਅਤੇ ਡੰਡਲ ਟੁੱਟਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ I ਇਸ ਦੇ ਬੀਜ ਗੋਲ ਚਪਟੇ ਆਕਾਰ ਅਤੇ ਸਲੇਟੀ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ I ਇਹ .... (Read More)
ਇਸ ਨੂੰ ਹਰ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ I ਵਧੇਰੇ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲੈਣ ਲਈ ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਰੇਤਲੀ, ਚੀਕਣੀ ਅਤੇ ਸਹੀ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿਚ ਕਰਨੀ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ I Guara 80: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੀ ਖੇਤੀ ਪੂਰੇ ਰਾਜ ਵਿਚ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਉਤੇ ਧੱਬੇ ਪੈਣ ਅਤੇ ਡੰਡਲ ਟੁੱਟਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ I ਇਸ ਦੇ ਬੀਜ ਗੋਲ ਚਪਟੇ ਆਕਾਰ ਅਤੇ ਸਲੇਟੀ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ I ਇਹ ਦੇਰ ਨਾਲ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ I ਇਸ ਦੀ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪੈਦਾਵਾਰ 8 ਕੁਇੰਟਲ ਤੱਕ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ I HG 365: ਇਹ ਛੇਤੀ ਤਿਆਰ ਹੋਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ I ਇਹ 105 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ I ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 5.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੱਕ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ I Ageta Guara 112: ਇਸ ਦੇ ਪੌਦਿਆਂ ਦੀ ਉਚਾਈ 1 ਤੋਂ 1.5 ਮੀਟਰ ਤੱਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ I ਇਸ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 8 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ I ਗੁਆਰੇ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ ਸਮਤਲ ਅਤੇ ਪੱਧਰੀ ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ I ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿਚ 2 ਤੋਂ 3 ਵਾਰ ਹੱਲ ਵਾਹੁਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸੁਹਾਗਾ ਫੇਰਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਤਵੀਆਂ ਨਾਲ ਵਾਹੁਣ ਉਪਰੰਤ ਸੁਹਾਗੇ ਨਾਲ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਪੱਧਰਾ ਕਰ ਲੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ I ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅੱਧ ਜੁਲਾਈ ਤੋਂ ਅੱਧ ਅਗੱਸਤ ਤੱਕ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਕਤਾਰਾਂ ਦਾ ਆਪਸ ਵਿੱਚ ਫਾਸਲਾ 30 ਸੈ:ਮੀ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਬੀਜ ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ 2-3 ਸੈ:ਮੀ: ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਲਈ 8-10 ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਰਤਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ,ਫਾਸਫੋਰਸ 9:19 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ (ਯੂਰੀਆਂ 20 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਅਤੇ ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰਫਾਸਫੇਟ 120 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਪਾਉ
Posted by Dhondu
Maharashtra
01-06-2019 09:41 PM
Punjab
06-02-2019 07:09 AM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है इसका बीज लेने के लिए आप Mr. jai 8882876224 जी से संपर्क कर सकते है
Posted by Dhondu
Maharashtra
01-06-2019 09:41 PM
Punjab
06-02-2019 07:09 AM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है इसका बीज लेने के लिए आप Mr. jai 8882876224 जी से संपर्क कर सकते है
Posted by Gurdhyan Singh
Haryana
01-06-2019 09:41 PM
Punjab
06-04-2019 04:00 PM
gurdhayn ji paniri vich cheltaed zinc di matra 25 gram nu prati litre pani de hisab nal spray karo. eh tat hai isda mnukh nu koi nuksaan nahi hunda.dhanwad
Posted by rahul kumar
Uttar Pradesh
01-06-2019 09:34 PM
Punjab
06-07-2019 05:24 PM
हाँजी पशुओ की बीमारियों की बहुत सारी किताबें आपको https://www amazon in वेबसाइट पर मिल जाएगी जी लेकिन कोई भी मेडिसन बुक में से देखकर पशु को देना हानिकारक भी हो सकता है क्युकी एक बीमारी के बहुत सारे कारण हो सकते है जिनको पशु को देख कर ही पता लगाया जा सकता है जी बाकि आप बुक खरीद कर दवाई देख कर नज़दीकी डॉक्टर की सलाह भी जरूर ले .... (Read More)
हाँजी पशुओ की बीमारियों की बहुत सारी किताबें आपको https://www amazon in वेबसाइट पर मिल जाएगी जी लेकिन कोई भी मेडिसन बुक में से देखकर पशु को देना हानिकारक भी हो सकता है क्युकी एक बीमारी के बहुत सारे कारण हो सकते है जिनको पशु को देख कर ही पता लगाया जा सकता है जी बाकि आप बुक खरीद कर दवाई देख कर नज़दीकी डॉक्टर की सलाह भी जरूर ले जी
Posted by Dheeraj bind
Uttar Pradesh
01-06-2019 09:29 PM
Punjab
06-07-2019 04:37 PM
धीरज जी इसके लिए आप हमारी दूसरी एप्प Apni kheti buy and sell डाउनलोड करे उसपे आपको पुराने ट्रेक्टर की ऐड मिल जाएगी जी
Posted by Paedeep Kumar
Punjab
01-06-2019 09:25 PM
Punjab
06-20-2019 02:17 PM
Pradeep ji please check the insect attack on it. if there is any infestation on it then spray imidacloprid@1.5ml per litre.Thank you
Posted by Dheeraj bind
Uttar Pradesh
01-06-2019 09:16 PM
Punjab
06-20-2019 02:18 PM
Jaya: यह छोटे कद की और अधिक उपज देने वाली किस्म गर्दन तोड़ के प्रतिरोधक है यह किस्म 142 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने बड़े और लंबे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 26 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Chakia 59: यह किस्म कम जल जमाव वाले हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है Govind: यह किस्म पंतनगर द्वारा विकसित की गई है य.... (Read More)
Jaya: यह छोटे कद की और अधिक उपज देने वाली किस्म गर्दन तोड़ के प्रतिरोधक है यह किस्म 142 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने बड़े और लंबे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 26 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Chakia 59: यह किस्म कम जल जमाव वाले हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है Govind: यह किस्म पंतनगर द्वारा विकसित की गई है यह किस्म 105 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Indrasan: यह तराई क्षेत्रों की प्रसिद्ध किस्म है Mahsud: यह किस्म निचले क्षेत्रों में बारानी स्थितियों में उगाने के लिए उपयुक्त है Majhera 3: यह लंबी किस्म सूखे को सहनेयोग्य है और ऊंचे क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Nagina 22: यह ऊंचे क्षेत्रों में बारानी हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं Narendra-1 and Narendra-2: यह किस्म 105 और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Pant Dhan 6: यह किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त है Saket 4: यह अगेते समय की किस्म है और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह यू पी की सबसे प्रसिद्ध किस्म है T9: यह देरी से बोयी जाने वाली सुगंधित किस्म है इसके दाने बेलनाकार होते हैं VL Dhan 16: यह निम्न और मध्यम क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त किस्म है VL 206: यह लंबी किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Usar 1: यह किस्म कानपुर में विकसित की गई यह क्षारीय और लवणीय मिट्टी में खेती करने के लिए उपयुक्त है
Posted by aman deep
Punjab
01-06-2019 09:11 PM
Maharashtra
06-04-2019 05:44 PM
Paneeri vich roots vich nematode check krke Furadon @1 kg per knal pao..
Posted by Raja Sidhu
Punjab
01-06-2019 09:10 PM
Punjab
06-03-2019 07:47 PM
Jekar paniri uper to peeli pai rahi hai ta isde vich lohe di kami hai. isdi roktham de layi ferrous sulphate 1% @1 killo nu prati aikad de hisab nal spray karen.jekar chelated ferrous sulphate di spray karni hai ta isdi matra 200 gram prati aikad hundi hai. jekar hale tak urea nahi payi ta 3 killo prati knal de hisab nal pao.kayi var paniri nitrogen di kami de karn vi paniri peeli honi shuru ho jandi hai.
Posted by Natt Jaspal
Punjab
01-06-2019 09:05 PM
Punjab
06-02-2019 08:03 AM
tuci uss nu Flukaird-ds bolus pett de kiria lai deo, isde nal Ovumin Gold powder 50gm rojana ate Minotas bolus rojana 1goli deo ate 21 din tak dinde rho, iss nal heat vich aa jawegi.
Posted by armaan
Punjab
01-06-2019 08:50 PM
Punjab
06-02-2019 08:06 AM
dudh vdhane ke liye pashu ki khurak ka pura dian rakhen, Pashu ko rojana 35-40kg hara chara den aur her 3 mahine ke bad deworming kren, baki aap usko anabolite liquid 100ml rojana, gog powder 50gm rojana dena suru kren, isse dudh mai farak padd jayega.
Posted by pk
Bihar
01-06-2019 08:48 PM
Madhya Pradesh
06-06-2019 07:21 PM
मोती पालन के फायदे - मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो आपको अन्य लोगो से अलग करता है .वही लोग इस व्यवसाय को कर सकते है ..जिनकी सोच कुछ अलग करने की हो .. (1) एक एकड़ में पारंपरिक खेती से 50000/- का मुनाफा हो सकता है और मोती पालन से 8-10 लाख (2) एक तालाब में बहुउदेशीय योजनाओ का लाभ लेके 8-10 प्रकार के व्यापर करके आय मे बृद्ध.... (Read More)
मोती पालन के फायदे - मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो आपको अन्य लोगो से अलग करता है .वही लोग इस व्यवसाय को कर सकते है ..जिनकी सोच कुछ अलग करने की हो .. (1) एक एकड़ में पारंपरिक खेती से 50000/- का मुनाफा हो सकता है और मोती पालन से 8-10 लाख (2) एक तालाब में बहुउदेशीय योजनाओ का लाभ लेके 8-10 प्रकार के व्यापर करके आय मे बृद्धि (3) जमीन में जल स्तर को बढ़ाकर सरकार की मदद (4) बचे हुए सामान से हस्तकला उद्योग को बढ़ावा देना (5) यदि महिला वर्ग इस व्यवसाय में आते है तो ज्यादा फायदे है क्योकि मोती के आभूषण के साथ साथ मदर ऑफ़ पर्ल (Shell jewellery) का भी फायदा ले सकते है (6) आसपास के लोगो को रोजगार अधिक जानकारी संपर्क करे ..अमित बमोरिया 9407461361 9770085381 बमोरिया मोती सम्बर्धन केंद्र मध्य प्रदेश https://m.bhaskar.com/news/MP-HOSH-quitting-govt-job-engineer-is-earning-money-from-pearl-cultivation-news-hindi-5533297-PHO.html
Posted by Durgesh shukla
Uttar Pradesh
01-06-2019 08:39 PM
Punjab
07-04-2019 04:52 PM
Durgesh shukla ji kagji Nimbu ka bag lgane ke liye aap Ravi Choudhary 8003892293, 9530002191 se samparak kar sakte hai. Thnk you.
Posted by राजेश कुमार
Uttar Pradesh
01-06-2019 08:28 PM
Punjab
06-20-2019 02:19 PM
यू पी के सिंचित और निम्न बारानी क्षेत्रों में मध्य जून से शुरूआती जुलाई तक का समय उपयुक्त होता है
Posted by राजेश कुमार
Uttar Pradesh
01-06-2019 08:24 PM
Punjab
06-04-2019 03:46 PM
यह फसल रेतली दोमट से चिकनी किसी भी तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती हैं पिछेती बिजाई की किस्मों के लिए चिकनी दोमट मिट्टी को पहल दी जाती है और जल्दी पकने वाली किस्मों के लिए रेतली दोमट मिटटी की सिफारिश की जाती है मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए मिट्टी का pH कम होने पर उसमें चूना डालें अगेती किस्में Early Kunwari: यह जल्दी पकने .... (Read More)
यह फसल रेतली दोमट से चिकनी किसी भी तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती हैं पिछेती बिजाई की किस्मों के लिए चिकनी दोमट मिट्टी को पहल दी जाती है और जल्दी पकने वाली किस्मों के लिए रेतली दोमट मिटटी की सिफारिश की जाती है मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए मिट्टी का pH कम होने पर उसमें चूना डालें अगेती किस्में Early Kunwari: यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसके फल क्रीम रंग के और आकार में छोटे होते हैं यह किस्म 60-70 दिनों में तैयार हो जाती है और इसकी औसतन पैदावार 25-37.5 क्विंटल प्रति एकड़ है Pusa Deepali: यह किस्म IARI द्वारा विकसित की गई है यह जल्दी पकने वाली किस्म है और उत्तरी भारत में बिजाई के लिए उपयुक्त है इसकी खेती के लिए गर्म जलवायु (20-25°सै.) अनुकूल होती है इसकी औसतन पैदावार 42-62.5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Summer King: यह हाइब्रिड किस्म है यह रोपाई के 60 से 65 दिनों क बाद तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है इसके बीज को जून के महीने में बोया जाता है इसकी औसतन पैदावार 50 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Paavas: यह हाइब्रिड किस्म है यह रोपाई के 60 से 65 दिनों क बाद तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है इसके बीज को जून के महीने में बोया जाता है और रोपाई जुलाई के महीने में की जाती है इसकी औसतन पैदावार 50 क्विंटल प्रति एकड़ होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की अच्छे से जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें अगेती किस्मों के लिए, जून के दूसरे सप्ताह से जुलाई के पहले सप्ताह तक का समय उपयुक्त होता है मुख्य मौसम की किस्मों के लिए, अगस्त के महीने में बिजाई पूरी कर लें, जबकि पिछेती किस्मों की बिजाई अक्तूबर महीने में करें अगेती किस्मों के लिए 45x30 सैं.मी., दरमियानी किस्मों और पिछेती किस्मों के लिए 45-60x45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज को 1-2 सैं.मी. गहरा बोयें बिजाई के लिए, रोपण विधि का प्रयोग किया जाता है बीज को नर्सरी में बोयें और सिंचाई करें पौध लगाने के समय जरूरत के अनुसार पानी और खाद डालें 25-30 दिनों में पौध खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाती है पौध रोपण के लिए तीन से चार सप्ताह के पुराने पौधे लगाएं अगेती मौसम की किस्मों के लिए 500 ग्राम बीज और पिछेती मौसम की किस्मों के लिए 250 ग्राम बीज प्रति एकड़ के लिए आवश्यक है खेत में गली हुई रूड़ी की खाद 8-10 टन प्रति एकड़ में डालें और साथ ही नाइट्रोजन 60 किलो (130 किलो यूरिया), फासफोरस 25 किलो (155 किलो सिंगल सुपर फासफेट), पोटाश 25 किलो (40 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) गाय का गोबर, एस एस पी और म्यूरेट ऑफ पोटाश की पूरी मात्रा और युरिया की एक तिहाई मात्रा खेत की तैयारी के समय डालें बाकी बची यूरिया को दो समान भागों में बांटकर रोपाई के बाद 30वें और 45वें दिन डालें फूल के अच्छी तरह बनने और अच्छी वृद्धि के लिए, पानी में घुलनशील खाद NPK(19:19:19) 10 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर पौधे के शुरूआती विकास के दौरान स्प्रे करें रोपाई के 40 दिन बाद 12:61:00 4-5 ग्राम + सूक्ष्म तत्व 2.5 से 3 ग्राम + बोरोन 1 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें फूल की गुणवत्ता को सुधारने के लिए पानी में घुलनशील खाद NPK 13:00:45 20 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर फूल के विकसित होने के समय डालें मिट्टी की जांच करें और यदि मैगनीशियम की कमी दिखे तो इसे पूरा करने के लिए मैगनीशियम सल्फेट 5 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर रोपाई के 30-35 दिन बाद और कैल्शियम की कमी को पूरा करने के लिए कैल्शियम नाइट्रेट 5 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर रोपाई के 30-35 दिन बाद डालें कई बार खोखले और बेरंगे तने दिखाई देते हैं, जिससे फूल भी भूरे रंग का हो जाता है और पत्ते भी मुड़ जाते हैं यह सब बोरोन की कमी के कारण होता है इसके लिए बोरेक्स 250-400 ग्राम को प्रति एकड़ में डालें नदीनों को रोकने के लिए फसल को खेत में लगाने के बाद फलुक्लोरालिन (बसालिन) 1-2 लीटर प्रति 800 मि.ली.को 200 लीटर पानी का छिड़काव करें और 30-40 दिनों के बाद रोपाई करें फसल को खेत में लगाने से 1 दिन पहले पैंडीमैथलीन 1 लीटर प्रति एकड़ में छिड़काव करें फसल को खेत में रोपण करने के बाद पहली सिंचाई करें मिट्टी और वातावरण के अनुसार गर्मियों में 7-8 दिनों के बाद और सर्दियों में 10-15 दिनों के बाद सिंचाई करें पूरा फूल विकसित होने पर सुबह के समय फुलों की कटाई की जा सकती है और कटाई के बाद फूलों को ठंडी जगह पर रखना चाहिए
Posted by aman deep
Punjab
01-06-2019 08:16 PM
Punjab
06-01-2019 09:06 PM
Kirpa krke tuc ehna de result dekho and paneeri de roots vich nematode jroor check kro g.
Posted by gurlal singh
Punjab
01-06-2019 08:10 PM
Punjab
06-01-2019 09:07 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਨਰਮੇ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਬਹੁਤ ਲੇਟ ਹੋ ਗਈ ਹੈ ਹੁਣ ਨਰਮੇ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦੀ ਸ਼ਿਫਾਰਿਸ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ
Posted by bawa
Punjab
01-06-2019 08:00 PM
Punjab
06-02-2019 07:34 AM
Os nu najdeeke Veterinary polyclinic ch dikhao ji osda Blood test karwao ji ta jo sahi karan da pata lagg sake..
Posted by Navjagdeep Singh
Punjab
01-06-2019 07:43 PM
Punjab
06-01-2019 08:24 PM
ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ ਅਤੇ 2 ਕਿਲੋ ਦਲੀਆ ਚੰਗੀ ਤ੍ਰਾਹ ਰਿਨ ਕੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰੋ, ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਅੱਧਾ ਅੱਧਾ ਕਰਕੇ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਤੁਸੀ 5-7 ਦਿਨ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗਾ, ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ Anabolite liquid 100ml ਰੋਜ, Lactomax bolus 10 ਗੋਲੀਆਂ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ, ਇਸਦਾ ਵੀ ਦੁੱਧ ਵਧਾਉਣ ਵਿਚ ਵਧਿਆ ਰਿਜਲਟ ਹੈ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਖੁਰਾਕ ਦਾ ਪੂਰਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ.
Posted by bhimani vibhabhimani1994@gmail.com
Gujarat
01-06-2019 07:43 PM
Punjab
06-13-2019 04:21 PM
भिमानी जी आप कमल की खेती के लिए यह वीडियो देख सकते है इसके लिए आप इस लिंक पर क्लीक करें :- https://www.youtube.com/watch?v=bJH-nKry7uU
Posted by ਸਤਿਗੁਰ ਸਿੰਘ
Punjab
01-06-2019 07:41 PM
Punjab
06-02-2019 08:09 AM
उसे आप पेट के कीड़ों के लिए Albendazole साल्ट की गोली दें इसके साथ उसकी खुराक का ध्यान रखें और उसे enerboost पाउडर 100 ग्राम रोजाना दें इससे ग्रोथ हो जाएगी
Posted by Rajpal singh
Punjab
01-06-2019 07:40 PM
Punjab
06-01-2019 08:27 PM
yaddi app duudh acha aur jyada fatt ke liye cow lena chahte hai too app Sahiwal nasal ki cow rkh skte hai, iska duudh v acha hota hai aur dudh mai fatt v acho hoti hai, isse bimaria v kam lgti hai aur yeh garmi v kam manti hai..
Posted by Parmjeet singh
Punjab
01-06-2019 07:37 PM
Punjab
06-04-2019 03:41 PM
ਪਰਮਜੀਤ ਜੀ ਮੌਸਮ ਵਿਭਾਗ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਅੱਜ ਤੁਹਾਡੇ ਇਲਾਕੇ ਵਿਚ ਮੀਹ ਪੈਣ ਦੀ ਸੰਭਾਵਨਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by gurmindear singh
Punjab
01-06-2019 07:35 PM
Punjab
06-01-2019 09:10 PM
Gurmindear singh g jhone vich potash @25 kg per acre kadd@110 kgu krn de time pa skde ho g.Jhone vich total @110 kg urea transplanting to 40 din de vich pa skde ho g..
Posted by ramesh kumar bishnoi
Punjab
01-06-2019 07:28 PM
Punjab
06-04-2019 03:39 PM
ramesh ji bordo paste ko fruit plants men istemal kiya jata hai.ise cereal crops men istemal nahi kiya jata.dhanywad
Posted by rahul kumar
Uttar Pradesh
01-06-2019 07:27 PM
Punjab
06-01-2019 08:29 PM
Rahul ji iska karan uske andar infection ho sakti hai, iske liye aap Utrawin-oz dwai 3 din lagatr bachedani mai bhrwayen aur sath mai Concimax bolus rojana 1 goli den aur 14 tak dete rehen fir agli var heat mai aane per usko AI krwayen, isse gabhin ho jayegi aur infection khtm ho jayega.