
Posted by kuldeep singh chouhan
Madhya Pradesh
15-06-2019 10:37 AM
kuldeep ji kripya btaye ke mothe konsi fasl men hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by kuldeep singh chouhan
Madhya Pradesh
15-06-2019 10:36 AM
kuldeep ji kirpya btaye ke motha konse fasl me hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by yograj
Himachal Pradesh
15-06-2019 10:36 AM
Yograj ji achhi kismo ke apple plant lene ke liye aap Hariman Sharma 9418867209, 7018520244 se samparak kar sakte hai, Thank you.

Posted by Travadi Aliasgar
Gujarat
15-06-2019 10:35 AM
यदि आपने बकरी फार्म बनाना है तो बहुत बढ़िया सोच है आप बीटल नस्ल रखें यह दूध और मीट दोनों के लिए फायदेमंद है बाकि आप जैसे इस व्यवसायों में आएंगे उस हिसाब से आपके लिंक बनने शुरू हो जाएंगे और बाकि मार्केटिंग इस बात निर्भर है कि आपका लोगों के साथ लिंक कैसा है इसका दूध गाय के रेट के बराबर मिल जाता है और बाकि यदि फार्.... (Read More)
यदि आपने बकरी फार्म बनाना है तो बहुत बढ़िया सोच है आप बीटल नस्ल रखें यह दूध और मीट दोनों के लिए फायदेमंद है बाकि आप जैसे इस व्यवसायों में आएंगे उस हिसाब से आपके लिंक बनने शुरू हो जाएंगे और बाकि मार्केटिंग इस बात निर्भर है कि आपका लोगों के साथ लिंक कैसा है इसका दूध गाय के रेट के बराबर मिल जाता है और बाकि यदि फार्म हो तो बच्चे भी बेचे जाते है कुल मिलाकर यदि मोटा सा हिसाब लगाना है तो एक बकरी से लगभग 20000 तक कमाई हो जाती है बाकि यह भी सलाह है कि आप आपने नज़दीक KVK से ट्रेनिंग ज़रूर लें .

Posted by yograj
Himachal Pradesh
15-06-2019 10:33 AM
Yograj ji boer goat khareedan ke lia aap 8879809944 (asif) se sampark kar sakte hai ya fir aap 97636-75583 pe bhi pata kar sakte hai Thankyou.

Posted by Ajit Ranjan
Bihar
15-06-2019 10:23 AM
Ajit Ranjan ji Chandan ki kheti ke bare me puri jankari ke liye aap Arun Khurmi 9878123123 se samparak kar sakte hai. Thank you.
Posted by dhanraj
Rajasthan
15-06-2019 10:21 AM
Surendra ji kripya app apna swal vistar se pushen ki app Soyaben ke vare mai kya jankari lena chathe hai tan jo apko sahi jankari di jaa skee.
Posted by Gurpal singh
Punjab
15-06-2019 10:06 AM
ਤੁਸੀ ਗਾਂ ਨੂੰ Lapnil-p ਪਾਊਡਰ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਪਾਊਡਰ ਨੂੰ 75 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ , ਇਸ ਵਿਚ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਬੇਸਣ ਅਤੇ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਦਿਓ, ਇਸ ਨੂੰ ਕੁਜ ਦਿਨਾਂ ਤਕ ਦਿਓ ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈਣ ਲੱਗ ਜਾਵੇਗਾ, ਬਾਕੀ ਉਸ ਨੂੰ Calcimust gold liquid 100 ਮਿਲੀ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਤੂੜੀ ਘੱਟ ਦੇਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਪਿੱਛਾ ਉਚਾ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਪੇਟੀ ਪਾ ਕੇ ਵ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਗਾਂ ਨੂੰ Lapnil-p ਪਾਊਡਰ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਪਾਊਡਰ ਨੂੰ 75 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ , ਇਸ ਵਿਚ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਬੇਸਣ ਅਤੇ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਦਿਓ, ਇਸ ਨੂੰ ਕੁਜ ਦਿਨਾਂ ਤਕ ਦਿਓ ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈਣ ਲੱਗ ਜਾਵੇਗਾ, ਬਾਕੀ ਉਸ ਨੂੰ Calcimust gold liquid 100 ਮਿਲੀ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਤੂੜੀ ਘੱਟ ਦੇਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਪਿੱਛਾ ਉਚਾ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਪੇਟੀ ਪਾ ਕੇ ਵੀ ਰੱਖਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ, ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਸਪਰੇ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਵੀ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਜਦੋ ਵੀ ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਪਿੱਛਾ ਬਾਹਰ ਨੂੰ ਆਵੇ ਇਸ ਨੂੰ ਉਸ ਉਪਰ popin ਸਪਰੇ ਕਰ ਦਿਓ ਇਸ ਨਾਲ ਉਹ ਸੁੰਗੜ ਕੇ ਅੰਦਰ ਚਲ ਜਾਵੇਗਾ
Posted by Raju Wamanarao Sonare
Maharashtra
15-06-2019 09:57 AM
Raju Wamanarao Sonare ji Fish Seed lene ke lia aap Moh. Anis 9451411371, 6394520950 se samparak kar sakte hai. Thankyou
Posted by Surjit Khicher
Haryana
15-06-2019 09:56 AM
Surjit Khicher g Kesar ki kheti kewal KASHMIR k thndey area mey hoti hai. Kujh log Saffola k seed ko Kesar ka seed btakr bech rahe hai or aab us ki sahi kimat nai mil rahi kirpya aap apne kesar ki photo bheje or je btae ke aap ne is ki kheti kaha ki thi. Thank you.
Posted by Sachin Kumar
Bihar
15-06-2019 09:53 AM
Sachin ji kripya app apna swal vistar se pushen tan jo apko sahi jankari di jaa skee.

Posted by Shinda
Punjab
15-06-2019 09:49 AM
shinda ji you can spray M-45@4 gram per litre of water. thank you
Posted by Alok kumar
Uttar Pradesh
15-06-2019 09:47 AM
यदि आपने बकरी फार्म बनाना है तो बहुत बढ़िया सोच है आप बीटल नस्ल रखें यह दूध और मीट दोनों के लिए फायदेमंद है बाकि आप जैसे इस व्यवसायों में आएंगे उस हिसाब से आपके लिंक बनने शुरू हो जाएंगे और बाकि मार्केटिंग इस बात निर्भर है कि आपका लोगों के साथ लिंक कैसा है इसका दूध गाय के रेट के बराबर मिल जाता है और बाकि यदि फार्.... (Read More)
यदि आपने बकरी फार्म बनाना है तो बहुत बढ़िया सोच है आप बीटल नस्ल रखें यह दूध और मीट दोनों के लिए फायदेमंद है बाकि आप जैसे इस व्यवसायों में आएंगे उस हिसाब से आपके लिंक बनने शुरू हो जाएंगे और बाकि मार्केटिंग इस बात निर्भर है कि आपका लोगों के साथ लिंक कैसा है इसका दूध गाय के रेट के बराबर मिल जाता है और बाकि यदि फार्म हो तो बच्चे भी बेचे जाते है कुल मिलाकर यदि मोटा सा हिसाब लगाना है तो एक बकरी से लगभग 20000 तक कमाई हो जाती है बाकि यह भी सलाह है कि आप आपने नज़दीक kvk से ट्रेनिंग ज़रूर लें और सफल बकरी पालकों के फार्म ज़रूर देखें.वहां से आपको इस काम के बारे में जानकारी और इसे करने के तरीकों के बारे में भी पता लगेगा.
Posted by Satpal Singh
Rajasthan
15-06-2019 09:45 AM
यदि आप पशु पालन का काम बड़े स्तर पर शुरू करना चाहते है तो आपको इस काम के लिए ट्रेनिंग की जरूरत पड़ेगी , ट्रेनिंग के साथ-साथ पशु की नस्ल सबसे ज़्यादा ज़रूरी है, पशु खरीदते समय कोशिश करें कि तीन समय दूध निकालकर ही पशु खरीदें, भैंसों का एक दिन का दूध 12 लीटर और गायों का दूध 16-17 लीटर से कम न हो, भैंसों को खरीदने का सही समय र.... (Read More)
यदि आप पशु पालन का काम बड़े स्तर पर शुरू करना चाहते है तो आपको इस काम के लिए ट्रेनिंग की जरूरत पड़ेगी , ट्रेनिंग के साथ-साथ पशु की नस्ल सबसे ज़्यादा ज़रूरी है, पशु खरीदते समय कोशिश करें कि तीन समय दूध निकालकर ही पशु खरीदें, भैंसों का एक दिन का दूध 12 लीटर और गायों का दूध 16-17 लीटर से कम न हो, भैंसों को खरीदने का सही समय रखड़ी से लेकर वैशाखी तक का होता है क्योंकि इस समय मौसम अच्छा होने के कारण हरा चारा भी खुला होता है पशुओं के लिए शैड परिवहन वाली सड़क पर ना बनाए और शैड सड़क से कम से कम 100 गज हटवा जरूर हो शैड को धूप और हवा का ध्यान रखकर बनाएं शैड हमेशा खेत या आस पास से 2 फुट ऊंचा बनाए क्योंकि निचले स्थान पर पानी खड़ा हो जाता है जिस कारण गंदगी पैदा हो जाती है और बाकी पशुओं का मल मूत्र का निकास भी आसानी से हो जाता है पशुओं के लिए बनाई जाने वाली खुरली ढाई तीन फुट चौड़ी होनी चाहिए खुरली पर खड़े होने के लिए एक पशु को तकरीबन तीन चार फुट जगह चाहिए मतलब 10 पशुओं के लिए 40 फुट लंबी खुरली बनेगी डेयरी फार्म से संबंधित सामान रखने के लिए स्टोर बनाए पशुओं का दाना स्टोर करने के लिए कमरा सैलाब से रहित होना बहुत जरूरी है शैड का फर्श पक्का, तिलकने रहित और जल्दी साफ होने वाला हो शैड में जितना हो सके पशुओं को खुला छोड़ें और पानी और दाना पूरा दें पशु को खुला छोड़ने से पशुओं में अफारे की समस्या कम आती है बाकी अपनी क्षमता और जरूरत मुताबिक ही समान खरीदें और आर्थिक नुकसान से बचने के लिए प्रत्येक पशु का बीमा जरूर करवायें..
Posted by Ajay mishra
Uttar Pradesh
15-06-2019 09:42 AM
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई कर.... (Read More)
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आप इसकी किस्मे जैसे Washington Coorg Honey Pusa Delicious Pusa Dwarf की बिजाई कर सकते है आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं एक एकड़ में 104 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें कम बारिश वाले क्षेत्रों में जून - जुलाई के महीने में बिजाई की जानी चाहिए और तराई और अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में सितंबर महीने में बिजाई की जानी चाहिए और क्षेत्र जहां सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हो वहां पर फरवरी - मार्च के महीने में बिजाई की जानी चाहिए आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 0.8 किलो प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं तुड़ाई एक एक फल को हाथों से तोड़कर की जाती है फलों को सुबह के समय तोड़ें धन्यवाद
Posted by Ravinder Kumar
Haryana
15-06-2019 09:36 AM
उसे आप vitum-h 500 मि.ली. लें और 10—10 मि.ली. सुबह शाम दें इसके साथ आप Bovimen-GL 150ml लें और 7 ग्राम रोजाना दें और जख्मों पर Coolmac टियूब लगाएं
Posted by Dhanveer singh Benipal
Punjab
15-06-2019 09:25 AM
dhanveer ji kirpa karke isdi photo bhejo tajo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by शौकीन
Uttar Pradesh
15-06-2019 09:23 AM
चूज़े लेने के लिए आप सुमित कुमार से 7906547529, 8006000291 संपर्क कर सकते है
Posted by Davinder singh
Punjab
15-06-2019 09:23 AM
davinder ji kirpa karke daso isnu hun tuc koi khaad payi hai kyuki isdiyan jdan hale theek ne eh fir chal payega.dhanwad
Posted by Nitish Darshan
Bihar
15-06-2019 09:22 AM
nitish ji kirpya btaye ke makka men konsa keet lga hai taki aapko uske hisab se jankari di ja sake ke aap konsi spray ka istemal kar sakte hai.dhanywad

Posted by gurpreet singh
Punjab
15-06-2019 09:22 AM
gurpreet ji kirpa karke daso ke jhone vich kehde keede di roktham bare jankari laian chahunde ho ta jo tuahnu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by Nitish Darshan
Bihar
15-06-2019 09:21 AM
nitish ji kripya btaye ke konsa keet lga hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by Varun
Punjab
15-06-2019 09:20 AM
varun ji 1121 de ik acre vich 36 killo urea payi jandi hai.isnu bijai to 3 hafteya bad pehli kist pao ate dooji bijai to 6 hafteya bad.dhanwad

Posted by mandip ghuman
Punjab
15-06-2019 09:19 AM
ohna nu tuci Anabolite liquid 100ml rojana dena suru kro ate Milkout powder 2-2 chamch swere sham ate Lactomax bolus 10 golia rojana deo ate 20 din tak dinde rho, iss nal duudh vich farak paa jawega baki tuci usdi khurak da puura dian rkho ji.

Posted by Gursharan preet singh
Punjab
15-06-2019 09:17 AM
ਗੁਰਸ਼ਰਨ ਜੀ ਇਹ ਇਕ ਤੱਤ ਹੈ ਜੋ ਫ਼ਸਲ ਦੀ ਗਰੋਥ ਕਰਾਉਣ ਵਿਚ ਮਦਦ ਕਰਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਕਣਕ ਵਿਚ DAP ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਹੈ ਤਾ ਤੁਹਾਨੂੰ ਝੋਨੇ ਵਿਚ ਇਸਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by शौकीन
Uttar Pradesh
15-06-2019 09:17 AM
शौकीन जी चूज़े लेने के लिए आप सुमित कुमार 8006000291, 7906547529 जी से संपर्क कर सकते है

Posted by Kumar Parveen
Uttar Pradesh
15-06-2019 09:16 AM
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी दि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं तो कम से कम 10 हजार मुर्गियों का धंधा शुरू करना चाहते हैं तो आपको 4 से 5 लाख का इतज़ा.... (Read More)
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी दि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं तो कम से कम 10 हजार मुर्गियों का धंधा शुरू करना चाहते हैं तो आपको 4 से 5 लाख का इतज़ाम करना पड़ेगा, यदि आप 10 हजार मुर्गियों के साथ लेयर फार्मिंग करना चाहते हैं तो आपको 10 से 12 लाख का इंतज़ाम करना पड़ेगा,इसकी ट्रेनिंग लेकर इस काम को शुरू करें ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते है बाकि आप किसी सफल पोल्ट्री फार्म के फार्म पर खुद जाकर इस काम को देंखे जिससे आपको इस काम के बारे में ओर भी से जानकारी प्राप्त होगी.
Posted by Dhanveer singh Benipal
Punjab
15-06-2019 09:12 AM
dhanveer ji isd euper NPK 19:19:19@1 killo nu 150 litre pani vich mila ke spray karo.dhanwad

Posted by ਹਰਮਨਜੀਤ ਸਿੰਘ ਢਿੱਲੋਂ
Punjab
15-06-2019 09:09 AM
Vitum-H liquid Tineta Pharma company da product hai, iss nu tuci garmia vich v de skde ho, iss nal vitamin milde hai, isda koi nuksan nhi hai ate ehh tuci roti de lgga ke pashu nu khwa skde ho ate din vich kisi v time de skde ho, tuci rojana 10ml de skde ho, ehh tuci feed ton pehla jaa badd ch v de skde ho.
Posted by Amandeep singh
Punjab
15-06-2019 09:07 AM
amandeep ji fasl de uper alcohol di spray karni university valo sifarish nahi hai.dhanwad

Posted by harman
Haryana
15-06-2019 09:03 AM
CSR 30 : ਇਹ ਕਿਸਮ 142 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 13.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਨੂੰ 18 ਕਿੱਲੋ ਯੂਰੀਆ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ

Posted by manpreet singh
Punjab
15-06-2019 08:52 AM
ਸੰਧੂ ਜੀ ਉਸ ਨੂੰ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ, 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁਲਕੰਦ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੌੰਫ, 100ਗ੍ਰਾਮ ਸੁਕੇ ਆਵਲੇ ਤੇ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਅਜਵਾਇਨ ਉਬਾਲ ਕੇ ਠਾਰ ਕੇ ਦਿਉ ਜੀ, ਬਾਕੀ ਉਸ ਨੂੰ Anabolite liquid 100-100ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ, Calcimust gold liquid 50ml , Milkout powder 2-2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦੇਣੇ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗਾ ..

Posted by Kuldeep Singh
Punjab
15-06-2019 08:36 AM
ਕੁਲਦੀਪ ਜੀ, ਤੁਸੀ ਹਮੇਸ਼ਾ ਠੰਡਾ ਪਾਣੀ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਪਿਆਓ ਤੇ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ electrolyte ਪਾ ਕੇ ਪਾਣੀ ਪਿਆਓ ਜੀ ਬਾਕੀ 11-12 ਵਜ਼ੇ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ Paracetamol 500mg @ 1 tab ਪ੍ਰਤੀ 50-70 ਮੁਰਗੀ ਲਈ ਦਿਓ ਜੀ
Posted by जयराम जागु
Rajasthan
15-06-2019 08:36 AM
जयराम जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें और सही फोटो अपलोड करें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by N m
Rajasthan
15-06-2019 08:33 AM
इसे किसी भी तरह की हल्की से भारी ज़मीनों में उगाया जा सकता है गहरी मैरा, अच्छी जल निकास वाली, पानी को बांध कर रखने वाली और अच्छी जैविक खनिजों वाली ज़मीन सब से अच्छी रहती है नर्म और रेतली ज़मीनें इसके लिए अच्छी नहीं होती क्योंकि इसमें बनी गांठे जल्दी खराब हो जाती हैं ज़मीन की तैयारी के लिए मिट्टी के भुरभुरा होने त.... (Read More)
इसे किसी भी तरह की हल्की से भारी ज़मीनों में उगाया जा सकता है गहरी मैरा, अच्छी जल निकास वाली, पानी को बांध कर रखने वाली और अच्छी जैविक खनिजों वाली ज़मीन सब से अच्छी रहती है नर्म और रेतली ज़मीनें इसके लिए अच्छी नहीं होती क्योंकि इसमें बनी गांठे जल्दी खराब हो जाती हैं ज़मीन की तैयारी के लिए मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत को 3-4 बार जोताई करें और मिट्टी में जैविक खनिजों को बढ़ाने के लिए रूड़ी की खाद डालें खेत को समतल करके क्यारियों और खालियों में बांट दें बिजाई के लिए सही समय सितंबर के आखिरी सप्ताह से अक्तूबर का पहला सप्ताह माना जाता है पौधे से पौधे का फासला 7.5 सैं.मी. और कतारों में फासला 15 सैं.मी. रखें लहसुन की गांठों को 3-5 सैं.मी. गहरा और उसका उगने वाला हिस्सा ऊपर की तरफ रखें इसकी बिजाई के लिए केरा ढंग का प्रयोग करें बिजाई हाथों से या मशीन से की जा सकती है लहसुन की गांठों को मिट्टी से ढककर हल्की सिंचाई करें बीज की मात्रा 225-250 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से 10 दिन पहले खेत में 2 टन रूड़ी की खाद डालें 50 किलो नाइट्रोजन (110 किलो यूरिया) और 25 किलो फासफोरस (155 किलो एस एस पी) प्रति एकड़ डालें सारी एस एस पी बिजाई से पहले और नाइट्रोजन तीन हिस्सों में बिजाई के 30, 45 और 60 दिन बाद डालें शुरू में लहसुन का पौधा धीरे धीरे बढ़ता है इसलिए नदीन नाशकों का प्रयोग गोडाई से बढ़िया रहता है नदीनों को रोकने के लिए पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति 200 लीटर पानी प्रति एकड़ में डालकर बिजाई से 72 घंटो में स्प्रे करें इसके बिना नदीन नाशक ऑक्सीफ्लोरफेन 425 मि.ली. प्रति 200 लीटर पानी में डालकर स्प्रे बिजाई के 7 दिन बाद करें नदीनों की रोकथाम के लिए 2 गोडाई की जरूरत है पहली गोडाई बिजाई से 1 महीने बाद और दूसरी गोडाई बिजाई के 2 महीने बाद करें वातावरण और मिट्टी की किस्म के आधार पर सिंचाई करें बिजाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई करें और आवश्यकता के आधार पर 10-15 दिनों के अंतराल पर आवश्यकतानुसार सिंचाई करें कटाई करने और सूखाने के बाद गांठों को आकार के अनुसार छांटे
Posted by manjot singh
Punjab
15-06-2019 08:33 AM
iss nu Hitek injection 1ml/33kg bharr de hisab nal chamdi vich lgwao , bakki iss nu Cleaner pet-M shampuu nal nhaaoo, nhann ton 5 mint pehla shampu di changi trah jgahh krke lgga ke rakho fir nhaoo..
Posted by Sonu Kumar
Haryana
15-06-2019 08:24 AM
sonu ji jawar ki growth ke liye aap iske uper gibberellic acid@2.5ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by sanjeev
Uttar Pradesh
15-06-2019 08:24 AM
यदि पनीरी ऊपर से पीली पड़ रही है तो इसमें लोहे की कमी है, इसकी रोकथाम के लिए ferrous sulphate 1% @1 किलो को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें, यदि chelated ferrous sulphate स्प्रे करनी है तो इसकी मात्रा 200 ग्राम प्रति एकड़ होती है, यदि अभी तक यूरिया नहीं डाली तो 3 किलो प्रति कनाल के हिसाब से डालें , कई बार नाइट्रोजन की कमी के कारण भी पनीरी पीली हो.... (Read More)
यदि पनीरी ऊपर से पीली पड़ रही है तो इसमें लोहे की कमी है, इसकी रोकथाम के लिए ferrous sulphate 1% @1 किलो को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें, यदि chelated ferrous sulphate स्प्रे करनी है तो इसकी मात्रा 200 ग्राम प्रति एकड़ होती है, यदि अभी तक यूरिया नहीं डाली तो 3 किलो प्रति कनाल के हिसाब से डालें , कई बार नाइट्रोजन की कमी के कारण भी पनीरी पीली होनी शुरू हो जाती है
Posted by Sonu Kumar
Haryana
15-06-2019 08:22 AM
नरमे में SSP@75kg या DAP@27 प्रति एकड के हिसाब से डाल सकते है इनमें से किसी भी एक का प्रयोग कर सकते है इनका प्रयोग करने से जो नरमे में पत्ते जामुनी रंग के हो रहे है वो नहीं होगे इनका प्रयोग आप शुरू में भी कर सकते है या फिर बाद में नरमे के उगने पर भी कर सकते है जो पौटाश का प्रयोग करना होता है उसे मिट्टी में उसकी कमी के अनुस.... (Read More)
नरमे में SSP@75kg या DAP@27 प्रति एकड के हिसाब से डाल सकते है इनमें से किसी भी एक का प्रयोग कर सकते है इनका प्रयोग करने से जो नरमे में पत्ते जामुनी रंग के हो रहे है वो नहीं होगे इनका प्रयोग आप शुरू में भी कर सकते है या फिर बाद में नरमे के उगने पर भी कर सकते है जो पौटाश का प्रयोग करना होता है उसे मिट्टी में उसकी कमी के अनुसार करें यदि इसकी कमी है तो 20 किलोग्राम प्रति एकड के हिसाब से कर सकते है सल्फर की इसमें जरूरत नहीं होतीं इसका प्रयोग करने से प्रहेज करे
Posted by Sonu Kumar
Haryana
15-06-2019 08:15 AM
Usko heat kit na den or pehle mook ke liye Bolus Biotrum DS ki 2 golia swere te 2 golia shame nu deo ji nall powder Tonakind hearb 50gm din vich 2 time deo.

Posted by guri singh
Punjab
15-06-2019 07:55 AM
Narme de vich SSP@75kg ja DAP@27 kg prati acre de hisab nal paa skde ho. ihna de vicho kise v ikk di varto kr skde ho. ihna di varto krn nal jo narme de vich patte jamni rang de hunde hnn ohh nahi hunde..ihna di varto tuc shuru de vich v kr skde ho ja fir baad de vich narma uggran te v kr skde ho. Jo potash di varto krni hundi hai ohh mitti de vich iss di ghaat de anusaar kro. jekar iss di ghaat hai tan 20kg prati acre de hisaab nal paa skde ho. sulphur di iss de vich lod nahi hundi hai. iss di varto krn ton parhej kro.
Posted by pardeep
Haryana
15-06-2019 07:50 AM
Jaya: यह छोटे कद की और अधिक उपज देने वाली किस्म है यह किस्म गर्दन तोड़ के प्रतिरोधक है यह किस्म 142 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने बड़े और लंबे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 26 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
PR 106: यह छोटे कद की और अधिक उपज देने वाली किस्म है यह किस्म गर्दन तोड़ के प्रतिरोधक है यह किस्म 145 दिनों .... (Read More)
Jaya: यह छोटे कद की और अधिक उपज देने वाली किस्म है यह किस्म गर्दन तोड़ के प्रतिरोधक है यह किस्म 142 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने बड़े और लंबे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 26 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
PR 106: यह छोटे कद की और अधिक उपज देने वाली किस्म है यह किस्म गर्दन तोड़ के प्रतिरोधक है यह किस्म 145 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने लंबे और पतले होते हैं इसकी औसतन पैदावार 24 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
HKR 120: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में जल्दी बोने के लिए अनुकूल है यह किस्म 146 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 25 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
HKR 126: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में जल्दी बोने के लिए अनुकूल है यह किस्म 140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह नमी की मात्रा कम होने वाले हालातों को सहनेयोग्य है यह तना गलन, मुरझाना और भूरे धब्बों के प्रतिरोधी है इसकी औसतन पैदावार 27 क्विंटल प्रति एकड़ है
HKR 127: यह छोटे कद की, दरमियाने समय की किस्म सामान्य बोने के लिए अनुकूल है यह किस्म कांगियारी के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 28 क्विंटल प्रति एकड़ है
PR 113: यह एक छोटे कद की सीधी बालियों वाली किस्म है और इसके पत्ते बिल्कुल सीधे और गहरे हरे रंग के होते हैं यह 142 दिनों में पक जाती है दाने मोटे और भारी होते हैं यह पत्तों के पीलेपन की बीमारी से रहित है इसकी औसतन पैदावार 28 क्विंटल प्रति एकड़ है
Pusa 44: यह लंबे समय की किस्म है और झुलस रोग के प्रति सहने योग्य है
Haryana Shankar Dhan 1: यह किस्म जल्दी बोने के लिए अनुकूल हैं यह किस्म 139 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह तना छेदक और पत्ता छेदक के प्रतिरोधी किस्म है इसकी औसतन पैदावार 30 क्विंटल प्रति एकड़ है

Posted by Vicky
Haryana
15-06-2019 07:49 AM
vicky ji kripya aap btaye ke paudhon ko kya ho raha hai kyuki photo men kuch saaf dikhai nahi de raha.dhanywad

Posted by ਜਗਮੀਤ ਸਿਂਘ
Punjab
15-06-2019 07:43 AM
ਪੌਦਿਆਂ ਵਿੱਚਕਾਰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਫਾਸਲਾ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਫਸਲ ਤੇ ਨਦੀਨਾਂ ਦਾ ਗੰਭੀਰ ਹਮਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਚੰਗੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ ਫਸਲ ਦੀ ਬੀਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 50-60 ਦਿਨਾਂ ਤੱਕ ਫਸਲ ਦਾ ਨਦੀਨ-ਰਹਿਤ ਹੋਣਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ, ਨਹੀਂ ਤਾਂ ਫਸਲ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਿਚ 60-80% ਘੱਟ ਸਕਦੀ ਹੈ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਅਸਰਦਾਰ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਹੱਥੀਂ, ਮਸ਼ੀਨੀ ਅਤੇ ਰਸਾਇਣਕ ਢੰਗਾਂ ਦੇ ਸੁਮੇਲ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 5-6 ਹਫਤੇ ਬਾਅਦ ਜਾਂ ਪ.... (Read More)
ਪੌਦਿਆਂ ਵਿੱਚਕਾਰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਫਾਸਲਾ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਫਸਲ ਤੇ ਨਦੀਨਾਂ ਦਾ ਗੰਭੀਰ ਹਮਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਚੰਗੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ ਫਸਲ ਦੀ ਬੀਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 50-60 ਦਿਨਾਂ ਤੱਕ ਫਸਲ ਦਾ ਨਦੀਨ-ਰਹਿਤ ਹੋਣਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ, ਨਹੀਂ ਤਾਂ ਫਸਲ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਿਚ 60-80% ਘੱਟ ਸਕਦੀ ਹੈ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਅਸਰਦਾਰ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਹੱਥੀਂ, ਮਸ਼ੀਨੀ ਅਤੇ ਰਸਾਇਣਕ ਢੰਗਾਂ ਦੇ ਸੁਮੇਲ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 5-6 ਹਫਤੇ ਬਾਅਦ ਜਾਂ ਪਹਿਲੀ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰਨ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹੱਥੀਂ ਗੋਡੀ ਕਰੋ ਬਾਕੀ ਗੋਡੀਆਂ ਹਰੇਕ ਸਿੰਚਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਕਰਨੀਆਂ ਚਾਹੀਦੀਆਂ ਹਨ ਨਰਮੇ ਦੇ ਖੇਤਾਂ ਦੇ ਆਲੇ-ਦੁਆਲੇ ਗਾਜਰ-ਬੂਟੀ ਪੈਦਾ ਨਾ ਹੋਣ ਦਿਓ, ਕਿਉਂਕਿ ਇਸ ਨਾਲ ਮਿਲੀ ਬੱਗ ਦੇ ਹਮਲੇ ਦਾ ਖਤਰਾ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ ਹੈ
ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਨਦੀਨਾਂ ਦੇ ਪੈਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਪੈਂਡੀਮਿਥਾਲਿਨ 25-33 ਮਿ.ਲੀ. ਪ੍ਰਤੀ 10 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 6-8 ਹਫਤੇ ਬਾਅਦ ਜਦੋਂ ਪੌਦਿਆਂ ਦਾ ਕੱਦ 40-45 ਸੈਂ.ਮੀ. ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਪੈਰਾਕੁਐਟ (ਗਰਾਮੋਕਸੋਨ) 24% ਡਬਲਿਊ ਐੱਸ ਸੀ 500 ਮਿ.ਲੀ. ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਜਾਂ ਗਲਾਈਫੋਸੇਟ 1 ਲੀਟਰ ਨੂੰ 100 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਨਦੀਨ-ਨਾਸ਼ਕ 2,4-ਡੀ ਤੋਂ ਨਰਮਾ ਦੀ ਫਸਲ ਕਾਫੀ ਸੰਵੇਦਨਸ਼ੀਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਭਾਵੇਂ ਇਸ ਨਦੀਨਨਾਸ਼ਕ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਨਾਲ ਲਗਦੇ ਖੇਤ ਵਿਚ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇ, ਤਾਂ ਵੀ ਇਸ ਦੇ ਕਣ ਉੱਡ ਕੇ ਨਰਮਾ ਦੀ ਫਸਲ ਨੂੰ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਨੁਕਸਾਨ ਪਹੁੰਚਾ ਸਕਦੇ ਹਨ ਨਦੀਨ-ਨਾਸ਼ਕ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਸਵੇਰ ਜਾਂ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਮੇਂ ਹੀ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ

Posted by rahul kamboj
Haryana
15-06-2019 07:41 AM
ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਸਿੰਙ ਬਣਾਉਣ ਵਾਲੇ ਤੋਂ ਬਣਵਾਉ ਜੀ ਉਹ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਛਿੱਲ ਕੇ ਠੀਕ ਕਰ ਦੇਣਗੇ ਜੀ

Posted by pankaj verma
Uttar Pradesh
15-06-2019 07:31 AM
धान भारत की एक महत्तवपूर्ण फसल है जो कि जोताई योग्य क्षेत्र के लगभग एक चौथाई हिस्से में उगाई जाती है और भारत की लगभग आधी आबादी इसे मुख्य भोजन के रूप में प्रयोग करती है यह उत्तर प्रदेश की मुख्य फसल है और उत्तर प्रदेश के लगभग 5.4 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है Basmati, Kalajeera, Vishnu Parag आदि धान की कुछ उच्च ग.... (Read More)
धान भारत की एक महत्तवपूर्ण फसल है जो कि जोताई योग्य क्षेत्र के लगभग एक चौथाई हिस्से में उगाई जाती है और भारत की लगभग आधी आबादी इसे मुख्य भोजन के रूप में प्रयोग करती है यह उत्तर प्रदेश की मुख्य फसल है और उत्तर प्रदेश के लगभग 5.4 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है Basmati, Kalajeera, Vishnu Parag आदि धान की कुछ उच्च गुणवत्ता वाली किस्में हैं जिनकी खेती उत्तर प्रदेश में की जाती है मिट्टी इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है प्रसिद्ध किस्में और पैदावार Jaya: यह छोटे कद की और अधिक उपज देने वाली किस्म गर्दन तोड़ के प्रतिरोधक है यह किस्म 142 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने बड़े और लंबे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 26 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Chakia 59: यह किस्म कम जल जमाव वाले हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है Govind: यह किस्म पंतनगर द्वारा विकसित की गई है यह किस्म 105 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Indrasan: यह तराई क्षेत्रों की प्रसिद्ध किस्म है Mahsud: यह किस्म निचले क्षेत्रों में बारानी स्थितियों में उगाने के लिए उपयुक्त है Majhera 3: यह लंबी किस्म सूखे को सहनेयोग्य है और ऊंचे क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Nagina 22: यह ऊंचे क्षेत्रों में बारानी हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं Narendra-1 and Narendra-2: यह किस्म 105 और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Pant Dhan 6: यह किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त है Saket 4: यह अगेते समय की किस्म है और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह यू पी की सबसे प्रसिद्ध किस्म है T9: यह देरी से बोयी जाने वाली सुगंधित किस्म है इसके दाने बेलनाकार होते हैं VL Dhan 16: यह निम्न और मध्यम क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त किस्म है VL 206: यह लंबी किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Usar 1: यह किस्म कानपुर में विकसित की गई यह क्षारीय और लवणीय मिट्टी में खेती करने के लिए उपयुक्त है बासमती किस्में Taraori Basmati: यह सिंचित क्षेत्रों में अगेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म 145-155 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Haryana Basmati no 1: यह अर्द्ध छोटे कद की किस्म है और सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Basmati 1121, Pusa Basmati 1, CSR 30, Shabnam दूसरे राज्यों की किस्में Hybrid 6201: यह सिंचित क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है यह भुरड़ रोग के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 25 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Vivek Dhan 62: यह सिंचित और पहाड़ी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं यह भुरड़ रोग के प्रतिरोधक किस्म है यह गर्दन तोड़ और कम तापमान वाले क्षेत्रों को भी सहन कर सकती है इसकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Karnataka Rice Hybrid 2: यह सिंचित और समय से बिजाई वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह पत्तों के झुलस रोग और अन्य बीमारियों को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 35 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kanak: यह दरमियाने क्षेत्रों में बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने लंबे और मोटे होते हैं यह बैक्टीरियल झुलस रोग के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Ratnagiri 1 and 2: सिंचित क्षेत्रों के लिए जबकि निचले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है ये अर्द्ध छोटे कद की किस्म हैं इनकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल और 21 क्विंटल प्रति एकड़ होती है ज़मीन की तैयारी शुष्क खेतों को अच्छा बनाने, नदीन रहित और सेहतमंद वृद्धि के लिए ग्लाफोसेट डालनी चाहिए गेहूं की कटाई के बाद ज़मीन पर हरी खाद के तौर पर मई के पहले सप्ताह ढैंचा (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़), या सन (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़) या लोबीया (बीज दर 12 किलोग्राम प्रति एकड़) की बिजाई करनी चाहिए जब फसल 6 से 8 सप्ताह की हो जाए तो इसे खेत में कद्दू करने से एक दिन खेत में ही जोत देना चाहिए इस तरह प्रति एकड़ 25 किलो नाइट्रोजन खाद की बचत होती है भूमि को समतल करने के लिए लेज़र लेवलर का प्रयोग किया जाता है इसके बाद खेत में पानी खड़ा कर दें ताकि भूमि के अंदर ऊंचे नीचे स्थानों की पहचान हो सके इस तरह पानी के रसाव के कारण पानी की होने वाले बर्बादी को कम किया जा सके बिजाई बिजाई का समय यू पी के सिंचित और निम्न बारानी क्षेत्रों में मध्य जून से शुरूआती जुलाई तक का समय उपयुक्त होता है बीज की गहराई पौधे की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए फासला बनाकर लगाने से पौधे ज्यादा पैदावार देते हैं फासला उपजाऊ मिट्टी में 20 सैं.मी. x 15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जबकि हल्की मिट्टी में रोपाई के लिए 15 सैं.मी. x 10 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 20 x 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बिजाई का ढंग सिंचित और कम बारानी क्षेत्रों में रोपाई ढंग प्रयोग किया जाता है रोपाई के लिए 25-30 दिनों के पौधों का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 30-35 दिनों के पौधे रोपाई के लिए प्रयोग करें ऊंचे क्षेत्रों में, शुष्क और गीली मिट्टी में रोपाई ढंग का प्रयोग करें बीज बीज की मात्रा एक एकड़ खेत में 6-8 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बीज का उपचार बिजाई से पहले 10 लीटर पानी में 20 ग्राम कार्बेनडाज़िम $ 1 ग्राम स्ट्रैप्टोसाईक्लिन घोल लें और इस घोल में बीजो को 8-10 घंटे तक भिगोयें उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं और फिर बिजाई के लिए प्रयोग करें पनीरी की देख-रेख और रोपण वैट बैड नर्सरी : यह तकनीक उन क्षेत्रों में अपनाई जाती है जहां पर पानी ज्यादा मात्रा में पाया जाता है नर्सरी का 1/10 हिस्सा दूसरे खेत में लगाया जाता है इसकी बिजाई छींटे द्वारा की जाती है यहां पर खेत की जोताई और खेत को समतल किया जाता है बैडों पर कईं दिन तक नमी बनाए रखनी चाहिए पानी से खेत को ज्यादा ना भरें जब नर्सरी 2 सैं.मी. से वृद्धि कर जाए तब पानी को खेत में लगाते रहना चाहिए बिजाई के 15 दिन बाद 26 किलो यूरिया डालना चाहिए जब नर्सरी 25-30 सैं.मी. तक लंबी हो जाए तब उसे 15-21 दिन बाद दूसरे खेत में लगा देना चाहिए और खेत को लगातार पानी लगाते रहना चाहिए सूखे बैड वाली नर्सरी : यह तकनीक शुष्क क्षेत्रों में अपनाई जाती है जो बैड बनाया जाता है वो बिजाई वाले खेत का 1/10 हिस्से में बीज बोया जाता है बैड का आकार सीमित होना चाहिए और उसकी ऊंचाई 6-10 से.मी होनी चाहिए धान का आधा जला हुआ छिलका बैड पर बिखेर देना चाहिए इससे जड़ें मजबूत होती हैं सही समय पर सिंचाई करते रहना चाहिए और नमी बनाए रखना चाहिए ताकि नए पौधे नष्ट ना हों तत्वों की पूर्ति के लिए खाद डालना जरूरी है मॉडीफाईड मैट नर्सरी : यह नर्सरी लगाने का एक ऐसा तरीका है जिसमें कम जगह और कम बीजों की जरूरत होती है यह नर्सरी किसी भी जगह पर बनाई जा सकती हैं जहां पर समतल जगह हो और पानी की सुविधा हो इसकी पनीरी लगाने के लिए 1% खेत की जरूरत होती है 4 से.मी की सतह पर नए पौधे लगाए जाते हैं इसे बनाने के लिए 1 मीटर चौड़े और 20-30 मीटर लंबे जमीन के टुकड़े की जरूरत होती है इसके ऊपर बिछाने के लिए पॉलीथीन और केले के पत्तों की जरूरत होती है इसके इलावा एक लकड़ी का बकसा जो कि 4 से.मी गहरा होता हैं मिट्टी के मिश्रण से भरा होता है बीजों को इसके अंदर रख देना चाहिए और फिर बीजों को सूखी मिट्टी के साथ ढक देना चाहिए इसके बाद पानी का छिड़काव कर देना चाहिए लकड़ी के बक्से को नमी देते रहना चाहिए बिजाई से 11-14 दिनों के बाद पौध तैयार हो जाती है जब पौध तैयार हो जाती है तब मैट से पौध को दूसरे खेत में रोपण कर दिया जाता है फासला: पौधों का फासला 20x20 सैं.मी. या 25x25 सैं.मी. होना चाहिए खेत में पौध रोपण पनीरी लगाने का ढंग 1. कद्दू करके लगाई जाने वाली पनीरी : आमतौर पर पंक्ति में लगाए जाने वाले पौधे 20x15 सैं.मी. दूरी पर लगाए जाते हैं और देरी से लगाई जाने वाली पनीरी 15x15 सैं.मी. पर लगाई जाती है नए पौधों की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए 2. बैड बनाकर लगाई जाने वाली पनीरी : यह बैड भारी ज़मीनों के लिए बनाए जाते हैं पनीरी लगाने से पहले खालियों में पानी लगाना चाहिए और फिर पनीरी को खेत में लगाना चाहिए पौधे से पौधे का फासला 9 सैं.मी. होना चाहिए 3. मशीनी ढंग से लगाई जाने वाली पनीरी : मैट पनीरी के लिए मशीनों का प्रयोग किया जाता है यह मशीन 30x12 सैं.मी. के फासले पर पनीरी लगानी चाहिए खरपतवार नियंत्रण रोपाई के 2 से 3 दिन बाद नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 50 ई सी 1200 मि.ली. या थायोबेनकार्ब 50 ई सी 1200 मि.ली. या पैंडीमैथालीन 30 ई सी या प्रैटीलाक्लोर 50 ई सी 600 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें इनमें से किसी एक नदीननाशक को 60 किलो रेत में मिलाकर 4-5 सैं.मी. गहरे खड़े पानी में बुरकाव करें चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए मेटसलफुरॉन 20 डब्लयु पी 30 ग्राम को 150 लीटर पानी में मिलाकर नदीनों के अंकुरण के बाद रोपाई के 20-25 दिन बाद डालें स्प्रे से पहले खेत में खड़े पानी का निकास कर दें और स्प्रे के एक दिन बाद सिंचाई करें नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 1 लीटर को बिजाई के 6 से 7 दिनों के बाद प्रति एकड़ में स्प्रे करें सिंचाई पनीरी लगाने के बाद खेत में दो सप्ताह तक अच्छी तरह पानी खड़ा रहने देना चाहिए जब सारा पानी सूख जाए तो उसके दो दिन बाद फिर से पानी को लगाना चाहिए खड़े पानी की गहराई 10 सै.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए खेत में से बूटी और नदीनों को निकालने से पहले खेत में से सारा पानी निकाल देना चाहिए ओर इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद खेत की फिर से सिंचाई करनी चाहिए पकने से 15 दिन पहले सिंचाई करनी बंद करनी चाहिए ताकि फसल को आसानी से काटा जा सके ऊंची भूमि पर सिंचाई पूरी तरह से बारिश पर निर्भर करती है बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर और पानी की उपलब्धता के आधार पर गंभीर अवस्थाओं में सिंचाई करें

Posted by Gurpreet singh
Punjab
15-06-2019 07:15 AM
ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸਦੇ ਲਈ ਡੂੰਗੀ ਮਿੱਟੀ ਪੁੱਟਣ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੈ ਤੁਸੀ ਸਿਰਫ ਇਸਦੀਆਂ ਜੜਾਂ ਦੇ ਨਾਲ ਲੱਗਦੀ ਮਿੱਟੀ ਨੂੰ ਹਲਕਾ ਹੱਥ ਨਾਲ ਪੁੱਟੋ ਅਤੇ ਉਸਦੇ ਵਿਚ ਵਰਮੀਕੰਪੋਸਟ ਮਿਲਾ ਦਿਓ ਧੰਨਵਾਦ
Expert Communities
We do not share your personal details with anyone
We do not share your personal details with anyone
Sign In
Registering to this website, you accept our Terms of Use and our Privacy Policy.
Your mobile number and password is invalid
We have sent your password on your mobile number
All fields marked with an asterisk (*) are required:
Sign Up
Registering to this website, you accept our Terms of Use and our Privacy Policy.
All fields marked with an asterisk (*) are required:
Please select atleast one option
Please select text along with image









