Posted by surajpal
Uttar Pradesh
17-06-2019 10:26 PM
धान में सरसों की खल बहुत ही लाभकारी है यह एक ऐसा जैविक तरीका है जिसके साथ आप धान की पैदावार में वृद्धि कर सकते हैं धान के पौधे की फोट करवाने के लिए इसके परिणाम बहुत ही बढ़िया हैं इसमें छ मुख्य तत्व हैं जिसमें मुख्य तौर पर नाइट्रोजन, पोटाश और फासफोरस के साथ साथ सल्फर जिंक और बोरोन भी पाये जाते हैं सरसों की खल .... (Read More)
धान में सरसों की खल बहुत ही लाभकारी है यह एक ऐसा जैविक तरीका है जिसके साथ आप धान की पैदावार में वृद्धि कर सकते हैं धान के पौधे की फोट करवाने के लिए इसके परिणाम बहुत ही बढ़िया हैं इसमें छ मुख्य तत्व हैं जिसमें मुख्य तौर पर नाइट्रोजन, पोटाश और फासफोरस के साथ साथ सल्फर जिंक और बोरोन भी पाये जाते हैं सरसों की खल धान में प्रयोग करने के लिए दो तरीके हैं पहला तरीका है कि इसे ड्रम में भिगो लें और 5—6 दिन लगातार इसे हिलाते रहें और इस घोल को पानी देने वाले दिन खेत में डाल दें दूसरा तरीका यह है कि इसे बारीक कूटकर इसका छींटा ज़मीन में दे सकते हैं इसे प्रयोग करने का सही समय जब धान 15—20 दिनों का हो क्योंकि इस समय जड़ों का सबसे अधिक विकास होता है इसकी मात्रा एक एकड़ में सिर्फ 16 किलो का प्रयोग कर सकते हैं रेते वाले और बारानी ज़मीन में हम 20 किलो प्रयोग कर सकते हैं

Posted by ਅਮਰਬੀਰ ਸਿੰਘ
Punjab
17-06-2019 10:18 PM
amarbeer ji jekar tuc kanak vich DAP di varto kiti hai ta tuhanu SSP paun di lod nahi hai. jekar nahi payi ta tuc bijai to 18 din bad 75 killo SSP prati acre de hisab nal pao.dhanwad

Posted by Birjesh kumar singh
Uttar Pradesh
17-06-2019 10:09 PM
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी दि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं तो कम से कम 10 हजार मुर्गियों का धंधा शुरू करना चाहते हैं तो आपको 4 से 5 लाख का इतज़ा.... (Read More)
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी दि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं तो कम से कम 10 हजार मुर्गियों का धंधा शुरू करना चाहते हैं तो आपको 4 से 5 लाख का इतज़ाम करना पड़ेगा, यदि आप 10 हजार मुर्गियों के साथ लेयर फार्मिंग करना चाहते हैं तो आपको 10 से 12 लाख का इंतज़ाम करना पड़ेगा,इसकी ट्रेनिंग लेकर इस काम को शुरू करें ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते है बाकि आप किसी सफल पोल्ट्री फार्म के फार्म पर खुद जाकर इस काम को देंखे जिससे आपको इस काम के बारे में ओर भी से जानकारी प्राप्त होगी.

Posted by Gopi Sarpanch
Punjab
17-06-2019 10:03 PM
gopi ji chloro di varto ta kiti jandi hai jeka rkhet vich seonk maujood hundi hai. jado tuc jhone nu mukh khet vich launde ho ta seonk da hamla hon te isdi spray kiti jandi hai.
Posted by Ahivaran Kumar
Uttar Pradesh
17-06-2019 10:02 PM
Ahivaran ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by Kashyap Amit
Uttar Pradesh
17-06-2019 09:59 PM
कश्यप जी आप इसे 10 दिन बाद 3 किल्लो यूरिया प्रति कनाल के हिसाब से दे धन्यवाद
Posted by Kailash Bishnoi
Rajasthan
17-06-2019 09:31 PM
अमेरिकन कपास की किस्में
RS 2013: यह किस्म कपास के पत्ता मरोड़ रोग की प्रतिरोधक है और अमेरिकन सुंडी और तेले की कुछ हद तक प्रतिरोधक है इसका औसतन कद 125-130 सैं.मी. होता है यह पीले रंग के फूलों का उत्पादन करती है और इसके मध्यम आकार के टिंडे होते हैं यह किस्म 165-170 दिनों में परिपक्व हो जाती है इसके कपास की बीजों की औसतन पैदाव.... (Read More)
अमेरिकन कपास की किस्में
RS 2013: यह किस्म कपास के पत्ता मरोड़ रोग की प्रतिरोधक है और अमेरिकन सुंडी और तेले की कुछ हद तक प्रतिरोधक है इसका औसतन कद 125-130 सैं.मी. होता है यह पीले रंग के फूलों का उत्पादन करती है और इसके मध्यम आकार के टिंडे होते हैं यह किस्म 165-170 दिनों में परिपक्व हो जाती है इसके कपास की बीजों की औसतन पैदावार 22-24 क्विंटल प्रति एकड़ होती है और पिंजाई के बाद 35 प्रतिशत रूई प्राप्त होती है
RS 810: यह किस्म कपास के पत्ता मरोड़ रोग की प्रतिरोधक है इसका औसतन कद 130-140 सैं.मी. होता है यह पीले रंग के फूलों का उत्पादन करती है और इसके मध्यम आकार के टिंडे होते हैं इसके कपास की बीजों की औसतन पैदावार 22-24 क्विंटल प्रति एकड़ होती है और पिंजाई के बाद 35 प्रतिशत रूई प्राप्त होती है
RST 9: इस किस्म के हल्के हरे रंग के पत्ते और हल्के पीले रंग के फूल होते हैं इसका औसतन कद 130-140 सैं.मी. होता है यह किस्म 160-200 दिनों में परिपक्व हो जाती है इसके टिंडे का औसतन भार 3.5 ग्राम होता है इसकी पिंजाई के बाद रूई की उच्च प्रतिशतता प्राप्त होती है इस किस्म की पहली सिंचाई 50 दिनों के बाद की जा सकती है
RS 875: इसका औसतन कद 100-110 सैं.मी. होता है इसके मध्यम आकार के टिंडे होते हैं जिनका औसतन भार 3.5 ग्राम प्रति टिंडा होता है इस किस्म की तेल की मात्रा बाकी सिफारिश की गई किस्मों से अधिक होती है यह किस्म 150-160 दिनों में परिपक्व हो जाती है
Ganganagar Ageti: इसका औसतन कद 120-150 सैं.मी. होता है इसके गहरे हरे रंग के पत्ते और हल्के पीले रंग के फूल होते हैं इसके मध्यम आकार के टिंडे होते हैं जिनका औसतन भार 2.5 ग्राम प्रति टिंडा होता है यह किस्म 170-180 दिनों में परिपक्व हो जाती है
Bikaneri Narma: इसका औसतन कद 160-200 सैं.मी. होता है इसके मध्यम आकार के टिंडे होते हैं जिनका औसतन भार 2.0 ग्राम प्रति टिंडा होता है यह किस्म 160-200 दिनों में परिपक्व हो जाती है
Bioseed Bunty BG II: यह उच्च उपज वाली अमेरिकन बी टी कपास की किस्म है पौधे का कद 150-170 सैं.मी. होता है इसकी औसतन पैदावार 8.8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
RCH 650BG II: यह उच्च उपज वाली अमेरिकन बी टी कपास की किस्म है यह टिंडे की सुंडी और तंबाकू सुंडी के प्रतिरोधी किस्म है पौधे का कद 150-160 सैं.मी. होता है इसकी औसतन पैदावार 8.8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
MRCH - 6304 BG I: यह उच्च उपज वाली अमेरिकन बी टी कपास की किस्म है यह टिंडे की सुंडी और तंबाकू सुंडी के प्रतिरोधी किस्म है यह किस्म 165-170 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Bioseed 6588 BG-II: इसके पौधे का कद 150-175 सैं.मी. होता है यह टिंडे की सुंडी और तंबाकू सुंडी के प्रतिरोधी किस्म है इसकी औसतन पैदावार 10-11.2 क्विंटल प्रति एकड़ होती है अमेरिकन कपास की हाइब्रिड किस्में
Maru Vikas: यह अमेरिकन कपास की उच्च उपज वाली किस्म है इसका औसतन कद 135-145 सैं.मी. होता है इसके मध्यम आकार के पत्ते होते हैं जो कि रंग में हरे और हल्के पीले रंग के फूल होते हैं मध्यम आकार के टिंडे होते हैं, जिनका औसतन भार 4.5 ग्राम प्रति टिंडा होता है यह किस्म 170-180 दिनों में परिपक्व हो जाती है और पिंजाई के बाद 35 प्रतिशत रूई प्राप्त होती है
LHH 144
Sankar 4: यह एक हाइब्रिड किस्म है इसके रेशे की लंबाई 1.06 से 1.10 इंच होती है रेशा नर्म और सफेद रंग का होता है
Varahlakshmi: यह एक हाइब्रिड किस्म है इसके रेशे की लंबाई 2.2 से 3 सैं.मी. होती है

Posted by Parwinder Singh
Punjab
17-06-2019 09:30 PM
ਪਰਵਿੰਦਰ ਜੀ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਉਸਦੀ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਡਾਕਟਰ ਤੋਂ ਜਾਂਚ ਕਰਵਾਓ ਕਿਉਕਿ ਉਸ ਨੂੰ ਕਿਸੀ ਚੀਜ ਦੀ ਕਮੀ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ਜੋ ਉਸਦੀ ਜਾਂਚ ਕਰਕੇ ਹੀ ਪਤਾ ਲਗ ਸਕਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਉਸਦਾ ਸਹੀ ਇਲਾਜ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ

Posted by Harpreet Singh
Punjab
17-06-2019 09:20 PM
jekar paniri uper to peeli pai rahi hai ta isde vich lohe di kami hai. isdi roktham de layi ferrous sulphate 1% @1 killo nu prati aikad de hisab nal spray karen.jekar chelated ferrous sulphate di spray karni hai ta isdi matra 200 gram prati aikad hundi hai. jekar hale tak urea nahi payi ta 3 killo prati knal de hisab nal pao.kayi var paniri nitrogen di kami de karn vi paniri peeli honi shuru ho jandi hai.

Posted by ajay
Uttar Pradesh
17-06-2019 09:19 PM
अजय जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सब से जरुरी है इस की ट्रेनिंग, क्योकि इस में बहुत सी ऐसी बरीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सिखने को मिलती है अगर आप इस की ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र यहाँ जून और जुलाई मही.... (Read More)
अजय जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सब से जरुरी है इस की ट्रेनिंग, क्योकि इस में बहुत सी ऐसी बरीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सिखने को मिलती है अगर आप इस की ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र यहाँ जून और जुलाई महीने में 3 दिन का प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए जून - 22,23,24 (प्रशिक्षण की तारीख ) जुलाई - 20,21,22 (प्रशिक्षण की तारीख ) अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by chandrashekhar
Maharashtra
17-06-2019 08:56 PM
भारत में कई प्रकार के sheep breeds पाए जाते है, जो व्यवसायिक तौर पर भारत में Sheep farming के लिए उचित है निचे दिए गए sheep breeds India में पाए जाते हैं : Bannur Bellary Cheviot Deccani Hassan Merino Ramboullet South डाउन Sheep farming में लागत बहुत ही कम है, अगर आपके पास कम पैसे है तो आप कम भेड़ो से अर्थात 2 female और 1 male के साथ भी इसकी farming की सुरुआत कर सकते है भारत में एक भेड़ की अच्छी नस्ल का मूल.... (Read More)
भारत में कई प्रकार के sheep breeds पाए जाते है, जो व्यवसायिक तौर पर भारत में Sheep farming के लिए उचित है निचे दिए गए sheep breeds India में पाए जाते हैं : Bannur Bellary Cheviot Deccani Hassan Merino Ramboullet South डाउन Sheep farming में लागत बहुत ही कम है, अगर आपके पास कम पैसे है तो आप कम भेड़ो से अर्थात 2 female और 1 male के साथ भी इसकी farming की सुरुआत कर सकते है भारत में एक भेड़ की अच्छी नस्ल का मूल्य Rs 4,000 से 5,000 होता है अगर आप Sheep Farming करने की सोच रखे है या करने जा रहे है, तो सबसे पहले farm का location तय करे और farm ऐसा जगह पर बनाए जहा हमेशा स्वच्छ पानी उपलब्ध हो और farm का चारागाह साफ और हरा भरा हो इन सभी बातो के साथ ये भी ध्यान दे की भेड के साल में एक बार खाल उतारी जाती है, इस खाल को बाजार तक ले जाने के लिए transport की सुविधा होनी चाहिए खाल के अलावा भेड से रोजाना दूध और meat का भी उत्पादन होता है, जिसे बाजार में बेचा जा सकता है

Posted by A man deep Singh
Punjab
17-06-2019 08:42 PM
ਉਸ ਨੂੰ ਕਾਰਗਿਲ ਦੀ ਟਰਾਂਸੇਸ਼ਨ ਮਿਕਸ ਫੀਡ ਪਾਉ ਤੇ ਨਾਲ ਹੀ Liquid Calcimust gold 100ml ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਦਿਓ ਤੇ ਉਸ ਦੇ ਨਾਲ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਵਾਲੀ ਗੋਲੀ Bolus Fendikind plus ਦਿਓ ਜੀ

Posted by Pardeep punnu
Punjab
17-06-2019 08:12 PM
Pardeep punnu ji Teak plant (ਸਗਵਾਨ) lene or is ke bare me puri jankari ke lia aap Vivek 97922 10555 se sampark kare.

Posted by ramneet singh
Rajasthan
17-06-2019 08:12 PM
ramneet singh ji , Desi murgiya 6-7 mohine baad aande denashueu kar diya ji. aje tusi wait karo ji.
Posted by AMAN PANDEY
Uttar Pradesh
17-06-2019 07:46 PM
धान में बिजाई के 18 दिनों के बाद खादें डालनी शुरू करें जिसमें 36 किलो यूरिया, 27 किलो डी ए पी और 20 किलो पोटाश पायी जाती है यदि आप पिछली फसल में डी ए पी डाली है तो आपको अब डी ए पी डालने की जरूरत नहीं है इसके अलावा एकड़ आप जिंक खेत में डालना चाहते हैं तो आप 21 प्रतिशत या 33 प्रतिशत वाली जिंक खेत में डाल सकते हैं यह 21 प्रतिश.... (Read More)
धान में बिजाई के 18 दिनों के बाद खादें डालनी शुरू करें जिसमें 36 किलो यूरिया, 27 किलो डी ए पी और 20 किलो पोटाश पायी जाती है यदि आप पिछली फसल में डी ए पी डाली है तो आपको अब डी ए पी डालने की जरूरत नहीं है इसके अलावा एकड़ आप जिंक खेत में डालना चाहते हैं तो आप 21 प्रतिशत या 33 प्रतिशत वाली जिंक खेत में डाल सकते हैं यह 21 प्रतिशत वाली जिंक की मात्रा 25 किलो और 33 प्रतिशत वाली की मात्रा 15—17 किलो होती है यदि आप यह पूरी मात्रा खेत में डाली जाती है तो आपको दोबारा खेत में 2—3 साल तक यूरिया डालने की जरूरत नहीं पड़ती आप ज़िंक nagarjuna या uttam company की खरीद सकते है धन्यवाद

Posted by gurpreet singh
Punjab
17-06-2019 07:27 PM
Gurpreet ji, boht sare departments vich subsidy mil rahi hai, kirpa kar ke daso ke tuhanu kis cheej te subsidy chahidi hai, taki tuhnu visthar nal jankari diti ja sake, dhanwad

Posted by bittu
Punjab
17-06-2019 07:22 PM
ਉਸ ਨੂੰ ਗਰਮੀ ਤੋਂ ਬਚਾ ਕੇ ਰੱਖੋ ਕਿਉਕਿ ਗਰਮੀ ਕਰਕੇ ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਬਹੁਤ ਜਲਦੀ ਘਟ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਤੁਸੀ Anabolite liqued 100ml ਰੋਜ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ ਅਤੇ 2 ਕਿਲੋ ਦਲੀਆ ਚੰਗੀ ਤ੍ਰਾਹ ਰਿਨ ਕੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰੋ, ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਅੱਧਾ ਅੱਧਾ ਕਰਕੇ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਤੁਸੀ 5-7 ਦਿਨ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗਾ ਅਤੇ ਤੁਸੀ .... (Read More)
ਉਸ ਨੂੰ ਗਰਮੀ ਤੋਂ ਬਚਾ ਕੇ ਰੱਖੋ ਕਿਉਕਿ ਗਰਮੀ ਕਰਕੇ ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਬਹੁਤ ਜਲਦੀ ਘਟ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਤੁਸੀ Anabolite liqued 100ml ਰੋਜ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ ਅਤੇ 2 ਕਿਲੋ ਦਲੀਆ ਚੰਗੀ ਤ੍ਰਾਹ ਰਿਨ ਕੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰੋ, ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਅੱਧਾ ਅੱਧਾ ਕਰਕੇ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਤੁਸੀ 5-7 ਦਿਨ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗਾ ਅਤੇ ਤੁਸੀ Milkout ਪਾਊਡਰ ਦੇ 2-2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ, ਇਸਦਾ ਵੀ ਦੁੱਧ ਵਧਾਉਣ ਵਿਚ ਵਧਿਆ ਰਿਜਲਟ ਹੈ, ਬਾਕੀ ਫੀਡ ਤੁਸੀ ਕਿਸੀ ਵੀ ਵਧਿਆ ਕੰਪਨੀ ਦੀ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ.
Posted by deepakchouhan
Madhya Pradesh
17-06-2019 06:52 PM
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्ष.... (Read More)
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्षेत्रों में पाई जाती है यह गले को सूखेपन से राहत देता है यह हाथों, पैरों और गठिया की सूजन से आराम देता है Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum): यह चीन, ब्राज़ील, पूर्व नेपाल और साथ ही बंगाल, बिहार, चटगांव और भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में पाई जाती है इसका तना जामुनी और पत्ते हरे रंग के और बहुत ज्यादा सुगंधित होते है इसमें उचित मात्रा में औषधीय गुण जैसे ऐज़ाडिरैकटिन, ऐंटीफंगल , ऐंटीबैक्टीरियल, और पाचन तंत्र को ठीक रखती है यह गर्म क्षेत्रों में बढ़िया उगता है Babi Tulsi: यह पंजाब से त्रिवेंद्रम, बंगाल और बिहार में भी पाई जाती है इसका पौधा 1-2 फीट लम्बा होता है पत्ते 1-2 इंच लम्बे, अंडाकार और नुकीले होते है इसके पत्तों का स्वाद लौंग की तरह और सब्जियों में स्वाद के लिए प्रयोग किया जाता है तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें इसके मंडीकरण के लिए आप विवेश शर्मा 9826556880 Grow Further से संपर्क कर सकते हैं
Posted by Mangat
Punjab
17-06-2019 06:50 PM
Mangat ji jhoti nu liquid UdderPox 15ml 10 drops 3 time din vich deo nall Liquid Lactomood 15ml 10 drops 3 time din vich deo Powder MilkOut 300gm 1 chamch swere ekk chamch sham nu deo ji

Posted by gurpreet singh
Punjab
17-06-2019 06:47 PM
ਪੱਤਾ ਲਪੇਟ ਸੁੰਡੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਟਾਟਾ ਟੁਕੁਮੀ@100gm ਜਾਂ ਕੋਰਾਜਨ@60ml ਜਾਂ ਫੇਮ@20ml ਜਾਂ ਲੈਮੜਾ@200ml ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਰਲਾ ਕੇ ਸਪ੍ਰੇ ਕਰੋ..
Posted by jaswinder singh Jassa
Punjab
17-06-2019 06:47 PM
jaswinder ji kirpa karke isd euper keede da hamla check karo jekar maujood hai ta usdi photo bhejo.dhanwad
Posted by deepak jaiswal
Uttar Pradesh
17-06-2019 06:41 PM
Deepak ji to control insect you can spray fame@20ml or coragen@60ml per acre. thank you
Posted by deepak jaiswal
Uttar Pradesh
17-06-2019 06:38 PM
Deepak ji to control insect you can spray fame@20ml or coragen@60ml per acre. thank you

Posted by कन्हैया लाल माली
Rajasthan
17-06-2019 06:11 PM
बछीया लिए इस हिसाब से खुराक का ध्यान रखना चाहिए एक महीने तक मां का दूध पिलायें जिसे आसानी से हजम कर सके, उसे खुला रखें जिससे वह चल फिर कर कसरत करती रहे एक महीने का होने के बाद आप कारगिल का देना शुरू करें इसे दूध में मिक्स करके दे सकते है 3 महीने का होने के बाद CAlf growther देना शुरू करं 8 महीने की उम्र के बाद Hifer dry फीड देन.... (Read More)
बछीया लिए इस हिसाब से खुराक का ध्यान रखना चाहिए एक महीने तक मां का दूध पिलायें जिसे आसानी से हजम कर सके, उसे खुला रखें जिससे वह चल फिर कर कसरत करती रहे एक महीने का होने के बाद आप कारगिल का देना शुरू करें इसे दूध में मिक्स करके दे सकते है 3 महीने का होने के बाद CAlf growther देना शुरू करं 8 महीने की उम्र के बाद Hifer dry फीड देनी शुरू करें इसके साथ साथ आप ग्रोथ के लिए Growth Mantra पाउडर देना शुरू करें या आपpuber-aid पाउडर भी दे सकते हैं इन्हें 2 महीनों की उम्र के बाद देना शुरू करना चाहिए यदि उम्र 2 महीने से ज्यादा है तो 20 ग्राम पाउडर देना है 4 महीनों से ज्यादा होने पर 25 ग्राम दें इस तरह उम्र के हिसाब से 5—5 ग्राम बढ़ा देंं

Posted by praveen
Madhya Pradesh
17-06-2019 05:47 PM
praveen ji kripya aap apna swal vistar se pooche ke aap konse plant ki grafting ke bar emen jankari lena chhate hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Shivam Singh Chauhan
Uttar Pradesh
17-06-2019 05:32 PM
shivam ji kirpya aap apna swal vistar s epooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by kawaljit singh
Punjab
17-06-2019 05:29 PM
kawaljit ji hishi di matra 1 acre vich 400ml hi hai isto vadh isdi spray nahi kiti jandi.dhanwad
Posted by ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਬਰਾੜ
Punjab
17-06-2019 05:28 PM
ਸਿਧੇ ਬੀਜੇ ਝੋਨੇ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ਵਿਚ 54 ਕਿੱਲੋ ਯੂਰੀਆ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਨੂੰ ਤਿੰਨ ਬਰਾਬਰ ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿਚ ਵੰਡ ਕੇ 3 ,6 ਅਤੇ 9 ਹਫਤਿਆਂ ਬਾਦ ਚਿੱਟੇ ਨਾਲ ਪਾਓ ਫਾਸਫੋਰਸ ਅਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ ਤੱਤ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਮਿੱਟੀ ਪਰਖ ਦੇ ਅਧਾਰ ਤੇ ਵਰਤੋਂ ਜੇਕਰ ਪਿਛਲੀ ਫ਼ਸਲ ਵਿਚ ਫਾਸਫੋਰਸ ਦੀ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕੀਤੀ ਮਾਤਰਾ ਪਾਈ ਹੈ ਤਾ ਸਿਧੇ ਬੀਜੇ ਝੋਨੇ ਨੂੰ ਫਾਸਫੋਰਸ ਪਾਉਣ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by indra bhan
Uttar Pradesh
17-06-2019 05:27 PM
यदि आपने बकरी फार्म बनाना है तो बहुत बढ़िया सोच है आप बीटल नस्ल रखें यह दूध और मीट दोनों के लिए फायदेमंद है बाकि आप जैसे इस व्यवसायों में आएंगे उस हिसाब से आपके लिंक बनने शुरू हो जाएंगे और बाकि मार्केटिंग इस बात निर्भर है कि आपका लोगों के साथ लिंक कैसा है इसका दूध गाय के रेट के बराबर मिल जाता है और बाकि यदि फार्.... (Read More)
यदि आपने बकरी फार्म बनाना है तो बहुत बढ़िया सोच है आप बीटल नस्ल रखें यह दूध और मीट दोनों के लिए फायदेमंद है बाकि आप जैसे इस व्यवसायों में आएंगे उस हिसाब से आपके लिंक बनने शुरू हो जाएंगे और बाकि मार्केटिंग इस बात निर्भर है कि आपका लोगों के साथ लिंक कैसा है इसका दूध गाय के रेट के बराबर मिल जाता है और बाकि यदि फार्म हो तो बच्चे भी बेचे जाते है कुल मिलाकर यदि मोटा सा हिसाब लगाना है तो एक बकरी से लगभग 20000 तक कमाई हो जाती है बाकि यह भी सलाह है कि आप आपने नज़दीक kvk से ट्रेनिंग ज़रूर लें और सफल बकरी पालकों के फार्म ज़रूर देखें.वहां से आपको इस काम के बारे में जानकारी और इसे करने के तरीकों के बारे में भी पता लगेगा, बकरी पालन में लोन लेने के लिए सबसे जरूरी है ट्रेनिंग सर्टीफिकेट अपने नज़दीक के कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग करने के बाद ट्रेनिंग के सर्टीफिकेट पर लोन एप्लाई होता है पर लोन मिलेगा या नहीं यह बैंक मेनेजर पर निर्भर करता है क्योंकि पहली बात यह है कि बैंक देखता है कि आपके अकाउंट में कितने पैसों का लेन देन हो रहा है और आपके पास ज़मीन गारंटी के तौर पर देने के लिए है या नहीं और अन्य भी कई बातें चैक करके लोन के लिए सहमत होता है बाकी कोशिश करें कि लोन के बिना अपने स्तर पर ही काम शुरू करें क्योंकि लोन की किश्त हर महीने भरनी पड़ेगी पर बकरियों से कमाई हर महीने नहीं होने होगी बाकी यदि कोशिश करके देखनी है तो अपने ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप अपने जिले के पशु पालन विभाग अफसर को मिलें और उस पर प्रवानगी लेकर फिर बैंक से बात करके देखें इससे अपने एरिया के नाबार्ड डिपार्टमैंट के सी जी एम को भी लोन के लिए मिलें.

Posted by sandeep
Uttar Pradesh
17-06-2019 05:27 PM
पोपलर की खेती क्षारीय और खारी मिट्टी में ना करें यह उपजाऊ मिट्टी, जिसमें जैविक तत्वों की उच्च मात्रा हो, में उगाये जाने पर अच्छे परिणाम देती है पोपलर की खेती के लिए मिट्टी का pH 5.8-8.5 होना चाहिए मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की 2-3 बार जोताई करें यदि जिंक की कमी हो तो खेत की तैयारी के समय जिंक सलफेट 10 किलोग्राम प्र.... (Read More)
पोपलर की खेती क्षारीय और खारी मिट्टी में ना करें यह उपजाऊ मिट्टी, जिसमें जैविक तत्वों की उच्च मात्रा हो, में उगाये जाने पर अच्छे परिणाम देती है पोपलर की खेती के लिए मिट्टी का pH 5.8-8.5 होना चाहिए मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की 2-3 बार जोताई करें यदि जिंक की कमी हो तो खेत की तैयारी के समय जिंक सलफेट 10 किलोग्राम प्रति एकड़ में डालें पोपलर के नए पौधे की रोपाई के लिए जनवरी से फरवरी का समय अच्छा होता है रोपाई 15 फरवरी से 10 मार्च में की जा सकती है एक एकड़ में 182 पौधे लगाने के लिए 5x5 मीटर के फासले का प्रयोग करें या 396 पौधे प्रति एकड़ में लगाने के लिए 5 मीटर x 4 मीटर या 6 मीटर x 2 मीटर और 476 पौधे प्रति एकड़ में लगाने के लिए 5 मीटर x 2 मीटर फासले का प्रयोग करें रोपाई के लिए 1 मीटर गड्ढा खोदें और पौधे को इसी गड्ढे में लगाएं मिट्टी में गले हुए गाय का गोबर 2 किलो, म्यूरेट ऑफ पोटाश 25 ग्राम और सिंगल सुपर फासफेट 50 ग्राम मिलायें इसकी बिजाई सीधे या पनीरी लगाकर की जाती है
Posted by Abrar raeeni
Uttar Pradesh
17-06-2019 05:18 PM
Abrar ji kripya btaye ke aam ki kisma konsi hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by varinder singh jammu
Punjab
17-06-2019 05:00 PM
ਗੰਢਾ ਪੂਰਾ ਪੱਕ ਜਾਣ ਤੇ ਪੁਟਾਈ ਕਰੋ,ਪੁਟਾਈ ਹਮੇਸ਼ਾ ਸੁੱਕੀ ਜਮੀਨ ਚੋਂ ਕਰੋ ਗੰਢਿਆਂ ਦੀਆਂ ਭੂਕਾਂ ਤੋੜ ਕੇ ਹਵਾਦਾਰ ਜਗਾ ਚ ਰੱਖੋ,ਜਿੱਥੇ ਧੁੱਪ ਨਾ ਲੱਗੇ ਜਾਲੀ ਵੀ ਬੈਗ ਵੀ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਆਂ ਟੋਕਰਿਆਂ ਚ ਵੀ ਰੱਖਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ

Posted by ravindra mandloi
Madhya Pradesh
17-06-2019 04:43 PM
रविंदरा जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें और सवाल के साथ फोटो भी अपलोड करें ताकि आपको पूरी जानकारी दी जा सके

Posted by ravindra mandloi
Madhya Pradesh
17-06-2019 04:33 PM
उसे आप Lactin bolus 1-1 गोली सुबह शाम दें और Anabolite liquid 100ml रोज़ाना और Milkout पाउडर 2-2 चम्मच सुबह शाम दें, इससे फर्क पड़ जाएगा .

Posted by Anupjit Singh
Punjab
17-06-2019 04:25 PM
ਖੁੰਬਾ ਦੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਕਈ ਤਰਾਂ ਦੀਆ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਬਟਨ ਖੁੰਬ, ਢੀਂਗਰੀ, ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ, ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਅਤੇ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ, ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੁੱਝ ਖੁੰਬਾ ਸਰਦੀਆਂ ਦੇ ਮੌਸਮ ਅਤੇ ਕੁੱਝ ਗਰਮੀਆਂ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ ਲਗਾਈ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਹਰ ਇਕ ਖੁੰਬ ਨੂੰ ਲਗਾਉਣ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਲਗ ਅਲਗ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਵੇ *ਬਟਨ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 2 ਫਸਲਾਂ ਲ.... (Read More)
ਖੁੰਬਾ ਦੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਕਈ ਤਰਾਂ ਦੀਆ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਬਟਨ ਖੁੰਬ, ਢੀਂਗਰੀ, ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ, ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਅਤੇ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ, ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੁੱਝ ਖੁੰਬਾ ਸਰਦੀਆਂ ਦੇ ਮੌਸਮ ਅਤੇ ਕੁੱਝ ਗਰਮੀਆਂ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ ਲਗਾਈ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਹਰ ਇਕ ਖੁੰਬ ਨੂੰ ਲਗਾਉਣ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਲਗ ਅਲਗ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਵੇ *ਬਟਨ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 2 ਫਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ, ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਅੱਧ ਫਰਵਰੀ ਤਕ ਹੈ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 1 ਫ਼ਸਲ ਹੀ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * *ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਅਗਸਤ ਤਕ ਹੈ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 4 ਫਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਸਤੰਬਰ ਤਕ ਹੈ ਤੁਸੀ ਹੁਣ ਅਪ੍ਰੈਲ ਵਿਚ ਪਰਾਲੀ ਜਾ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਲਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਦੇ ਲਈ ਤੁਹਾਨੂੰ ਪਰਾਲੀ,ਬੀਜ,ਬਾਂਸ, ਸੇਬਾ ਆਦਿ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੈ *ਪਰਾਲੀ ਦੇ ਪੂਲੇ*-- ਝੋਨੇ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਦੇ 1-1 ਕਿਲੋ ਦੇ ਪੂਲੇ ਦੋਨੋ ਸਿਰਿਆ ਤੋਂ ਸੇਬੇ ਨਾਲ ਬੰਨ ਕੇ ਤਿਆਰ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਪੂਲੇ ਦੇ ਸਿਰੇ ਕਟ ਕ ਇਕ ਬਰਾਬਰ ਕਰ ਲਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ *ਪੂਲਿਆ ਦੀ ਕਿਆਰੀ ਲਗਾਉਣਾ*---ਪਰਾਲੀ ਦੇ ਪੂਲਿਆ ਨੂੰ ਸਾਫ ਪਾਣੀ ਵਿਚ 16-20 ਘੰਟੇ ਲਈ ਡਬੋ ਦਇਓ ਗਿਲੇ ਪੂਲਿਆ ਨੂੰ ਢਲਾਨ ਤੇ ਰੱਖ ਕੇ ਵਾਧੂ ਪਾਣੀ ਨਿਕਲਣ ਦਇਓ ਕਮਰੇ ਚ ਇੱਟਾਂ ਤੇ ਬਾਂਸ ਦਾ ਇਕ ਢਕਵਾ ਪਲੇਟਫਾਰਮ ਬਣਾਓ, ਇਸ ਪਲੇਟਫਾਰਮ ਤੇ 5 ਪੂਲਿਆ ਦੀ ਇਕ ਤਹਿ ਲਗਾਓ, ਜਿਸ ਉਪਰ ਲਗਭਗ 75 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪਾਓ. ਇਸ ਤੋਂ ਉਪਰ ਵਾਲੀ ਤਹਿ ਉਲਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤਰਾਂ 5-5 ਪੂਲਿਆ ਦੀਆ 4 ਤਹਿਆ ਵਿਚ 300 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪਾ ਕ ਇਕ ਕਿਆਰੀ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਉਪਰ 2 ਪੂਲੇ ਖੋਲ ਕੇ ਰੱਖ ਦਿਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ *ਖੁੰਬਾ ਦਾ ਫੁੱਟਣਾ*---ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 7-9 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਖੁੰਬਾਂ ਫੁਟਣ ਲਗ ਪੈਂਦੀਆਂ ਹਨ *ਪਾਣੀ ਤੇ ਹਵਾ ਦਾ ਸੰਚਾਰ*-- ਬਿਜਾਈ ਦੇ 2 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਹਰ ਰੋਜ ਪਾਣੀ ਦਾ ਛਿੜਕਾਅ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਖੁੰਬਾਂ ਫੁਟਣ ਉਪਰੰਤ ਹਵਾ ਦਾ ਸੰਚਾਰ 6-8 ਘੰਟੇ ਪ੍ਰਤੀ ਦਿਨ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ * ਖੁੰਬਾਂ ਦੀ ਤੁੜਾਈ*-- ਖੁੰਬਾਂ ਫੁੱਟਣ ਉਪਰੰਤ 1-2 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਤੋੜਨ ਯੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ **ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ** ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਲਈ ਤੂੜੀ ,ਬੀਜ ,ਮੋਮੀ ਲਿਫਾਫੇ(12×16),ਸੇਬਾ,ਕੇਸਿੰਗ, ਮਿਟੀ ਆਦਿ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ *ਤੂੜੀ ਦੀ ਤਿਆਰੀ*--ਸੁਕੀ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਪੱਕੇ ਫ਼ਰਸ਼ ਤੇ ਵਿਛਾ ਕੇ 16-20 ਘੰਟੇ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਗਿਲਾ ਕਰੋ, ਗਿਲੀ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਬੋਰੀ ਵਿਚ ਭਰ ਕੇ ਸੇਬੇ ਨਾਲ਼ ਬੰਨ ਦਇਓ. ਇਸ ਬੋਰੀ ਨੂੰ ਉਬਲਦੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ 45-50 ਮਿੰਟ ਲਈ ਰੱਖੋ, ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਕੱਢ ਕੇ ਪੱਕੇ ਫ਼ਰਸ਼ ਤੇ ਵਿਛਾ ਕੇ ਠੰਡਾ ਕਰ ਲਓ ਇਹ ਤੂੜੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੈ *ਬਿਜਾਈ*--- ਠੰਡੀ ਤੂੜੀ ਵਿਚ ਬੀਜ ਰਲਾ ਕੇ ਮੋਮੀ ਲਿਫਾਫੇ ਵਿਚ ਭਰ ਦਇਓ 1 ਮੋਮੀ ਲਿਫਾਫੇ ਵਿਚ ਲਗਭਗ 2 ਕਿਲੋ ਗਿਲੀ ਤੂੜੀ ਅਤੇ 70-80 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪੈਂਦਾ ਹੈ. ਲਿਫਾਫੇ ਦੇ ਮੂੰਹ ਨੂੰ ਸੇਬੇ ਨਾਲ ਬੰਨ ਕੇ ਕਮਰੇ ਵਿਚ ਰੱਖ ਦਇਓ *ਕੇਸਿੰਗ*--ਬਿਜਾਈ ਦੇ 2-3 ਹਫਤਿਆਂ ਬਾਅਦ ਲਿਫਾਫੇ ਖੋਲ ਕੇ ਕੇਸਿੰਗ ਦੀ 1-1.5 ਦੀ ਤਹਿ ਲਗਾ ਦਇਓ, ਕੇਸਿੰਗ ਵਿਚ ਰੂੜੀ ਤੇ ਰੇਤਲੀ ਮਿਟੀ(4:1) ਹੁੰਦੀ ਹੈ. ਜੋ ਕ 24 ਘੰਟਿਆ ਲਈ 4% ਫਾਰਮਲੇਨ ਦੇ ਘੋਲ਼ ਨਾਲ ਜੀਵਣੁ ਰਹਿਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ *ਖੁੰਬਾਂ ਦਾ ਫੁੱਟਣਾ*-- ਕੇਸਿੰਗ ਮਿਟੀ ਪਾਉਣ ਤੋਂ ਲਗਭਗ 2 ਹਫਤਿਆਂ ਵਿਚ ਖੁੰਬਾਂ ਦੇ ਛੋਟੇ-ਛੋਟੇ ਕਿਣਕੇ ਨਿਕਲਣੇ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਜੋ ਕ 4-5 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਤੋੜਨ ਯੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ. ਖੁੰਬਾਂ ਦੀ ਤੁੜਾਈ ਲਗਭਗ 35 -40 ਦਿਨਾਂ ਤਕ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ
Posted by Jagdish Kumar
Haryana
17-06-2019 04:22 PM
jagdish ji kripya aap yeh btaye ke aapke khet ki mitti kaisi hai taki aapko sike bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by manjeet singh
Bihar
17-06-2019 04:16 PM
इसकी पूंग छोड़ने के लिए मार्च से अक्तूबर का समय उपयुक्त होता है एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिलेगा यदि बढ़िया खुराक डाली जाए तो 8 महीनो.... (Read More)
इसकी पूंग छोड़ने के लिए मार्च से अक्तूबर का समय उपयुक्त होता है एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिलेगा यदि बढ़िया खुराक डाली जाए तो 8 महीनों में यह लगभग 800—900 ग्राम का हो जाता है बाकी मछली पालन के लिए नहरी पानी बढ़िया होता है और आप गांव का छप्पड़ ठेके से लेकर भी यह काम शुरू कर सकते हैं तालाब में मछली के बीज डालने से पहले इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि उस तालाब में काफी मात्रा में मछली की कुदरती खुराक उपलब्ध है तालाब में प्लैंकटान की अच्छी मात्रा करने के उद्देश्य से यह जरूरी है कि रूड़ी की खाद के साथ सुपर फास्फेट 300 किलोग्राम और यूरिया 180 किलोग्राम प्रति वर्ष प्रति हेक्टैयर के मान से डाली जाए तालाब में से हानिकारक मछलियों और कीड़े मकौड़ों को निकाल लेना चाहिए मंडीकरण की कोई दिक्कत नहीं है यह लोकल ही सेल हो जाती हे यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी यह मुफ्त है कोई पैसा नहीं लगता इसका आपको र्स्टीफिकेट दिया जाता है ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है यह डिपार्टमेंट जहाँ खेतीबाड़ी अफसर बैठता है जैसे जैसे कचिहरी, डी सी दफ्तर बोल देते है उसमें बना होता है.
Posted by Jagdish Kumar
Haryana
17-06-2019 04:16 PM
jagdish ji aap iske uper keet ka hamla check karen. iski roktham ke liye aap malathion@2.5ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by sumit Kumar
Bihar
17-06-2019 04:13 PM
हाजी आप यह दवाई आठ महीने की गाभीन गाय को दे सकते है जी

Posted by Anupjit Singh
Punjab
17-06-2019 04:11 PM
ਅਨੁਪਜੀਤ ਜੀ ਤੁਸੀ ਤੁਲਸੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਦੇ ਲਈ 6268536795 Aushadhiya kheti vikas sansthan ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Davinder singh
Punjab
17-06-2019 04:03 PM
ਝੋਨੇ ਦੀ ਲੁਆਈ ਤੋਂ 6-7 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਯੂਰੀਆ ਖਾਦ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ

Posted by Amar jeet
Rajasthan
17-06-2019 03:57 PM
Amar jeet ji tusi Es nu 2kg Chini di chassni bana ke 2 Litter Mitha tel (Til da tel) pao fer 500gm Kalmishora, 250gm Jokhar, 250gm Mithasodha, 150gm noshader da powder bna ke pao te thar ke 5 hise kar lo te ekk hisa rojana deo ji

Posted by mandip ghuman
Punjab
17-06-2019 03:53 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Liquid Calcimust gold 100ml ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਦਿਓ ਤੇ ਨਾਲ ਹੀ Powder MilkOut 300gm ਲਿਆ ਕੇ 2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਤੇ 2 ਚਮਚ ਸ਼ਾਮ ਨੂੰ ਦਿਓ ਜੀ
Posted by Devendra Sahu
Madhya Pradesh
17-06-2019 03:53 PM
कंटोला सदियों से भारत में उगाई जाने वाली प्रसिद्ध और पोषण सब्जियों में से एक है भारत में इस सब्जी को कंटोला या ककरोल के नाम से जाना जाता है कंटोला सब्जी करेले की विशेषता से मिलती जुलती हैं लेकिन स्वाद में इसके जैसी नहीं है यह सब्जी लंबाई मं छोटी और गोल आकार की होती है
मिट्टी: कंटोला को रेतीली दोमट और चीकन.... (Read More)
कंटोला सदियों से भारत में उगाई जाने वाली प्रसिद्ध और पोषण सब्जियों में से एक है भारत में इस सब्जी को कंटोला या ककरोल के नाम से जाना जाता है कंटोला सब्जी करेले की विशेषता से मिलती जुलती हैं लेकिन स्वाद में इसके जैसी नहीं है यह सब्जी लंबाई मं छोटी और गोल आकार की होती है
मिट्टी: कंटोला को रेतीली दोमट और चीकनी भूमि पर 5.5 से 7.0 की ph में उगाया जा सकता है इसकी खेती के लिए मिट्टी अच्छी तरह से जल निकासी और अच्छे कार्बनिक पदार्थों के साथ सर्वोत्तम हो
जलवायु: कंटोला गर्म और कम सर्द मौसम की फसल है इस सब्जी की खेती उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय दोनों क्षेत्रों में की जा सकती है इस फसल को बेहतर विकास और उपज के लिए अच्छी धूप की आवश्यकता होती है इसकी खेती के लिए 27 से 32 डिग्री सेल्सियस का तापमान उपयुक्त है

Posted by deep
Punjab
17-06-2019 03:46 PM
deep ji fungicide da istemal ta kita janda hai jekar fasl uper koi fungus da hamla hunda hai. isdi matra 400-500 gram nu prati acre de hisab nal varto kiti jandi hai.dhanwad

Posted by Rajbir singh
Punjab
17-06-2019 03:43 PM
Pusa Basmati 1121: ਇਸਦਾ ਪੌਦਾ ਲੰਬਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 137 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਪੱਕਣ ਦੀ ਗੁਣਵੱਤਾ ਵਧੀਆਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 13.7 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ 1718, 136-138 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੇ ਝਾੜ 18-20qtl/acre ਦਿੰਦੀ ਹੈ
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