Posted by vijay bhojani
Gujarat
19-06-2019 09:01 AM
भोजनी जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सब से जरुरी है इस की ट्रेनिंग, क्योकि इस में बहुत सी ऐसी बरीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सिखने को मिलती है अगर आप इस की ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र यहाँ जून और जुलाई म.... (Read More)
भोजनी जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सब से जरुरी है इस की ट्रेनिंग, क्योकि इस में बहुत सी ऐसी बरीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सिखने को मिलती है अगर आप इस की ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र यहाँ जून और जुलाई महीने में 3 दिन का प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए जून - 22,23,24 (प्रशिक्षण की तारीख ) जुलाई - 20,21,22 (प्रशिक्षण की तारीख ) अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Gurpal singh
Punjab
19-06-2019 08:59 AM
Gurpal singh ji Contract farming lai tusi Salil Sood (venkey company) 9781017711 nal samparak kar sakde ho. Thankyou.

Posted by rishi
Rajasthan
19-06-2019 08:54 AM
हर साल अगस्त और सितंबर महीने में 50 ग्राम प्रति पौधे में पहले तीन वर्ष डालें
Posted by Vishal Sisodiya
Madhya Pradesh
19-06-2019 08:52 AM
इसे पेट के कीड़ों के लिए Flukarid-ds गोली दें इसके साथ इसे Lactin गोलियां एक सुबह और एक शाम को दें Magic milk पाउडर 50 ग्राम रोजाना दें Calcimust gold रोजाना 100 मि.ली. देनी शुरू करें यह दूध को बढ़ाने में मदद करते हैं बाकी पशु का दूध उसकी नसल के हिसाब से होता है क्योंकि यदि नसल बढ़िया है तो दूध बढ़िया खुराक से बढ़ जाता है उसे हरा चारा 35-40 किल.... (Read More)
इसे पेट के कीड़ों के लिए Flukarid-ds गोली दें इसके साथ इसे Lactin गोलियां एक सुबह और एक शाम को दें Magic milk पाउडर 50 ग्राम रोजाना दें Calcimust gold रोजाना 100 मि.ली. देनी शुरू करें यह दूध को बढ़ाने में मदद करते हैं बाकी पशु का दूध उसकी नसल के हिसाब से होता है क्योंकि यदि नसल बढ़िया है तो दूध बढ़िया खुराक से बढ़ जाता है उसे हरा चारा 35-40 किलो रोजाना देना शुरू करें
Posted by Gyanu singh
Rajasthan
19-06-2019 08:43 AM
अजवाइन एक रबी की मसाला फसल हैं इसकी खेती के लिए अच्छे जल निकास वाली दोमट मिटटी सर्वोत्तम होती हैं सामान्यतः बलुई दोमट मिटटी जिसका पि.एच. मान 6.5 से 8.2 तक है, में अजवाइन सफलतापूर्वक उगाई जा सकती हैं जहां भूमि में नमी कम हो वहां सिंचाई की व्यवस्था आवश्यक हैं खेत तैयार करने के लिए मिटटी पलटने वाले हल से जुताई करें.... (Read More)
अजवाइन एक रबी की मसाला फसल हैं इसकी खेती के लिए अच्छे जल निकास वाली दोमट मिटटी सर्वोत्तम होती हैं सामान्यतः बलुई दोमट मिटटी जिसका पि.एच. मान 6.5 से 8.2 तक है, में अजवाइन सफलतापूर्वक उगाई जा सकती हैं जहां भूमि में नमी कम हो वहां सिंचाई की व्यवस्था आवश्यक हैं खेत तैयार करने के लिए मिटटी पलटने वाले हल से जुताई करें तथा इसके बाद 2 जुताई देशी हल से कर खेत को भली-भांति तैयार करें अजवाइन का बीज बारीक़ होता हैं अतः खेत की मिट्टी को अच्छी तरह भरभूरा होने तक जुताई करें अजवाइन की भरपूर पैदावार लेने के लिए 15-20 दिन पूर्व 20-25 टन सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर की दर से अच्छी तरह मिलाए उर्वरक के रूप में इस फसल को 20 किग्रा. नत्रजन, 30 किग्रा फास्फोरस एवं 20 किग्रा. पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से देवें फास्फोरस एवं पोटाश की पूरी मात्रा एवं नत्रजन की आधी मात्रा बुवाई से पूर्व खेत में डाल देवें नत्रजन की शेष आधी मात्रा बुवाई के लगभग 25-30 दिन बाद खड़ी फसल में देवें अजवाइन की बुवाई का उचित समय सितम्बर से नवम्बर होता है इसे छिड़काव या क़तर विधि से बोया जाता है एक हेक्टेयर के लिए 4-5 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है छिड़काव विधि के लिए बीजों को इसकी बीज दर से आठ से दस गुना बारीक छनि हुई मिट्टी के साथ मिलाकर बुवाई करे इससे बीज दर सही रखने में मदद मिलती है कतारों में बुवाई करना ज्यादा उपयुक्त है इस विधि में कतार से कतार की दुरी 30-40 से.मी. तथा पौधे से पौधे की दुरी 15-25 से.मी. रखें इसमें बीजों का अंकुरण 10-15 दिनों में पूर्ण होता है अजवाइन की फसल काफी हद तक सूखा सहन कर सकती है इसका सिंचित और असिंचित दोनों ही परीस्थितियों में उत्पादन किया जा सकता है सामान्यतया अजवाइन के लिए 2-5 सिंचाई की आवश्यकता होती है जब पौधे 15-20 से.मी. तक बड़े हो जाये तब पौधों की छंटाई करके पौधे से पौधे की दुरी में पर्याप्त अंतर रखें फसल में जल निकासी की भी उचित व्यवस्था करे ताकि पौधों को उचित बढ़वार के लिए पर्याप्त स्थान एवं वातावरण मिल सके कटाई की उपयुक्त अवस्था में फसल पीली पड़ जाती है तथा दाने सुखकर भूरे रंग के हो जाते है अजवाइन की फसल लगभग 140-150 दिन में पककर तैयार हो जाती है कटाई पश्चात फसल को खलिहान में सुखावें तथा बाद में गहाई और औसाई की जाय साफ बीजों को 5-6 दिन सूखा कर बोरों में भर कर भंडारण करे

Posted by sandeep singh
Punjab
19-06-2019 08:35 AM
Sandeep singh ji Saal 2019-20 da jhone da MSP smarthan mull Rs. 1815/q, Grade A 1835 hai. Thankyou.
Posted by Suraj
Haryana
19-06-2019 08:20 AM
Suraj ji mausam vibhag ke anusar aj aapke ilake men barish hone ki sambhavna hai.dhanywad

Posted by sonu
Haryana
19-06-2019 08:05 AM
सोनू जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सब से जरुरी है इस की ट्रेनिंग, क्योकि इस में बहुत सी ऐसी बरीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सिखने को मिलती है अगर आप इस की ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र यहाँ जून और जुलाई मह.... (Read More)
सोनू जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सब से जरुरी है इस की ट्रेनिंग, क्योकि इस में बहुत सी ऐसी बरीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सिखने को मिलती है अगर आप इस की ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र यहाँ जून और जुलाई महीने में 3 दिन का प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए जून - 22,23,24 (प्रशिक्षण की तारीख ) जुलाई - 20,21,22 (प्रशिक्षण की तारीख ) अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Aman Dhillon Doda
Punjab
19-06-2019 07:54 AM
Delete vich pertilachlor 50% naam da salt hai jo jhone vich nadeen nu control karn lyi kddu krn de time pa skde ho g.esdi dose @500 ml per acre hai..

Posted by chetan meena
Rajasthan
19-06-2019 07:23 AM
चेतन जी आप इसके लिए pendimethalin@1 लीटर को 150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें। धन्यवाद

Posted by mandip ghuman
Punjab
19-06-2019 07:17 AM
uss nu tuci Sarakind plus bolus 2-2 golia swere sham denia suru kro ate isdi sojish wali jgah te iodex di malish krke garm patti bnn deo ji, iss nal farak paa jawega.

Posted by Mangal Singh
Madhya Pradesh
19-06-2019 07:17 AM
यदि आप पशु पालन का काम बड़े स्तर पर शुरू करना चाहते है तो आपको इस काम के लिए ट्रेनिंग की जरूरत पड़ेगी , ट्रेनिंग के साथ-साथ पशु की नस्ल सबसे ज़्यादा ज़रूरी है, पशु खरीदते समय कोशिश करें कि तीन समय दूध निकालकर ही पशु खरीदें, भैंसों का एक दिन का दूध 12 लीटर और गायों का दूध 16-17 लीटर से कम न हो, भैंसों को खरीदने का सही समय र.... (Read More)
यदि आप पशु पालन का काम बड़े स्तर पर शुरू करना चाहते है तो आपको इस काम के लिए ट्रेनिंग की जरूरत पड़ेगी , ट्रेनिंग के साथ-साथ पशु की नस्ल सबसे ज़्यादा ज़रूरी है, पशु खरीदते समय कोशिश करें कि तीन समय दूध निकालकर ही पशु खरीदें, भैंसों का एक दिन का दूध 12 लीटर और गायों का दूध 16-17 लीटर से कम न हो, भैंसों को खरीदने का सही समय रखड़ी से लेकर वैशाखी तक का होता है क्योंकि इस समय मौसम अच्छा होने के कारण हरा चारा भी खुला होता है पशुओं के लिए शैड परिवहन वाली सड़क पर ना बनाए और शैड सड़क से कम से कम 100 गज हटवा जरूर हो शैड को धूप और हवा का ध्यान रखकर बनाएं शैड हमेशा खेत या आस पास से 2 फुट ऊंचा बनाए क्योंकि निचले स्थान पर पानी खड़ा हो जाता है जिस कारण गंदगी पैदा हो जाती है और बाकी पशुओं का मल मूत्र का निकास भी आसानी से हो जाता है पशुओं के लिए बनाई जाने वाली खुरली ढाई तीन फुट चौड़ी होनी चाहिए खुरली पर खड़े होने के लिए एक पशु को तकरीबन तीन चार फुट जगह चाहिए मतलब 10 पशुओं के लिए 40 फुट लंबी खुरली बनेगी डेयरी फार्म से संबंधित सामान रखने के लिए स्टोर बनाए पशुओं का दाना स्टोर करने के लिए कमरा सैलाब से रहित होना बहुत जरूरी है शैड का फर्श पक्का, तिलकने रहित और जल्दी साफ होने वाला हो शैड में जितना हो सके पशुओं को खुला छोड़ें और पानी और दाना पूरा दें पशु को खुला छोड़ने से पशुओं में अफारे की समस्या कम आती है बाकी अपनी क्षमता और जरूरत मुताबिक ही समान खरीदें और आर्थिक नुकसान से बचने के लिए प्रत्येक पशु का बीमा जरूर करवायें
Posted by GURSEWAK SINGH
Punjab
19-06-2019 07:03 AM
ਹਾਜੀ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇਹਨਾਂ ਬੂਟਿਆ ਦੇ ਨੇੜੇ ਪੱਥਰ ਲੱਗਿਆ ਹੋਵੇ ਜੀ ਕਿਉਕੀ ਜੇਕਰ ਪੱਥਰ ਨੇੜੇ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਇਹ ਸੇਕ ਨਾਲ ਬੂਟੇ ਚੱਲਦੇ ਨਹੀ ਹਨ ਜੀ

Posted by mandip ghuman
Punjab
19-06-2019 06:50 AM
hnji mandeep ji ehh tuci gaban pashu nu de skde ho, ehh kisi v gaban pashu nu de skde ho, isda pashu nu nuksan nahi hai ..

Posted by dharmendra patel
Punjab
19-06-2019 06:40 AM
Dharmendra patel ji seed lene ke lia aap Shine Brand Seeds 8770896002 se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by nazar ahmad khan
Chattisgarh
18-06-2019 11:41 PM
हांजी बिलकुल आपको लोन मिल सकता है लेकिन इसके लिए आपको सही तरीका पता होना चाहिए, जैसे के सबसे पहले आपके पास बकरी पालन और देसी मुर्गी पालन की ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट होना चाहिए जो के आपको नज़दीकी कृषि विज्ञा केंद्र से पशु पालन की ट्रेनिंग लेने के बाद ही मिलेगा जी. उसके बाद अप्प जितने पशु लेने है उसकी पूरी प्रोज.... (Read More)
हांजी बिलकुल आपको लोन मिल सकता है लेकिन इसके लिए आपको सही तरीका पता होना चाहिए, जैसे के सबसे पहले आपके पास बकरी पालन और देसी मुर्गी पालन की ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट होना चाहिए जो के आपको नज़दीकी कृषि विज्ञा केंद्र से पशु पालन की ट्रेनिंग लेने के बाद ही मिलेगा जी. उसके बाद अप्प जितने पशु लेने है उसकी पूरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनानी पड़ेगी जिसमे आपका पशु पालन विभाग आपके हेल्प कर सकता है उसके बाद सबसे जरुरी है की जिस बैंक में आपका बैंक का खाता चलता है उसमे पैसे का लेन देन कैसा चलता है फिर बैंक की जो भी शर्ते होती है वह आप पूरी करते हो तो बैंक आपको लोन दे सकता है . बैंक की शर्ते आपके बैंक मैनेजर ही बता सकता है जी.

Posted by balwinder singh
Punjab
18-06-2019 11:35 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਵਧਿਆ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਦਿਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਗਰਮੀ ਤੋਂ ਬਚਾ ਕੇ ਰੱਖੋ, ਉਸਦੀ ਹਰ 3 ਮਹੀਨੇ ਬਾਦ ਡਿਵਰਮਿੰਗ ਜਰੂਰ ਕਰਵਾਓ, ਇਹਨਾਂ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Calcimust gold liquid 50ml, anabolite liquid 50-50ml ਰੋਜਾਨਾ, Gog ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ .

Posted by Mahesh kumar
Haryana
18-06-2019 11:22 PM
सोनू जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सब से जरुरी है इस की ट्रेनिंग, क्योकि इस में बहुत सी ऐसी बरीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सिखने को मिलती है अगर आप इस की ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र यहाँ जून और जुलाई मह.... (Read More)
सोनू जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सब से जरुरी है इस की ट्रेनिंग, क्योकि इस में बहुत सी ऐसी बरीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सिखने को मिलती है अगर आप इस की ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र यहाँ जून और जुलाई महीने में 3 दिन का प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए जून - 22,23,24 (प्रशिक्षण की तारीख ) जुलाई - 20,21,22 (प्रशिक्षण की तारीख ) अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Rs Patel
Madhya Pradesh
18-06-2019 10:37 PM
RS Patel ji seed lene ke lia aap Shine Brand Seeds 8770896002 se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by sonu
Madhya Pradesh
18-06-2019 10:33 PM
Sonu ji app usko feed kisi v company ki de skte hai jo apki bhains ache trike se khati ho, iske sath sath app usko pett ke kiro ke liye Flukarid-ds bolus den aur her 3 mahine ke badd salt change krke goli jrur den aur isko Enerboost powder 50-50gm subah sham dena suru kro, jabb isko byane mai 2 mahine rehh jaye too isko Vitum-h liquid 10-10ml subah sham dena v suru kren, isse lewa aur dudh acha ho jayega.

Posted by sonu
Madhya Pradesh
18-06-2019 10:33 PM
Sonu ji app usko feed kisi v company ki de skte hai jo apki bhains ache trike se khati ho, iske sath sath app usko pett ke kiro ke liye Flukarid-ds bolus den aur her 3 mahine ke badd salt change krke goli jrur den aur isko Enerboost powder 50-50gm subah sham dena suru kro, jabb isko byane mai 2 mahine rehh jaye too isko Vitum-h liquid 10-10ml subah sham dena v suru kren, isse lewa aur dudh acha ho jayega.
Posted by Rs Patel
Madhya Pradesh
18-06-2019 10:32 PM
बारानी हालातों में मूंगफली की बिजाई मॉनसून के शुरू होने, जून के अंतिम सप्ताह या जुलाई के पहले सप्ताह में शुरू करें बिजाई जितनी जल्दी हो सके पूरी कर लें, क्योंकि देरी से बिजाई करने पर पैदावार में कमी आती है
Posted by Rs Patel
Madhya Pradesh
18-06-2019 10:29 PM
एक वर्ष के बाद उसी खेत में मूंगफली बीजने से परहेज़ करें मूंगफली का अंतरफसली अनाज की फसलों के साथ करें बिजाई से पहले खेत को साफ करें और पिछली फसल के बचे कुचे को निकाल दें 15-20 सैं.मी. की गहराई तक ज़मीन की जोताई करें और मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए अच्छी तरह जोताई करें खेती करने के लिए हैरो और हल का प्रयोग करें मिट्.... (Read More)
एक वर्ष के बाद उसी खेत में मूंगफली बीजने से परहेज़ करें मूंगफली का अंतरफसली अनाज की फसलों के साथ करें बिजाई से पहले खेत को साफ करें और पिछली फसल के बचे कुचे को निकाल दें 15-20 सैं.मी. की गहराई तक ज़मीन की जोताई करें और मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए अच्छी तरह जोताई करें खेती करने के लिए हैरो और हल का प्रयोग करें मिट्टी से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए मूंगफली की बिजाई जुलाई महीने के दूसरे पखवाड़े में करें प्रयोग की जाने वाली किस्म के आधार पर फासले का प्रयोग करें अर्द्ध फैलने वाली और फैलने वाली किस्मों के लिए कतारों में 30-45 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 10-15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें ना फैलने वाली किस्मों के लिए कतारो में 30 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 10 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें Amber, Chitra किस्मों के लिए 40 सैं.मी.x 15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें सीड ड्रिल की सहायता से 5 सैं.मी. की गहराई में फलियों को बोयें बीज को सीड ड्रिल की सहायता से बोया जाता है मूंगफली की बिजाई के लिए इसकी बिजाई वाली मशीन भी उपलब्ध होती है
Posted by lovepreet singh
Punjab
18-06-2019 10:16 PM
ਲਵਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਦੱਸੋ ਕੇ ਤੁਸੀ ਇਸਨੂੰ ਕਿਵੇਂ ਲਾਇਆ ਹੈ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Amandeep
Punjab
18-06-2019 10:02 PM
ਇਸ ਨੂੰ ਹਰ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮਿੱਟੀ, ਜਿਸ ਦੀ pH ਦਰ 6-8 ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇਸ ਫਸਲ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ ਡੂੰਘੀ, ਨਰਮ, ਚੰਗੇ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਅਤੇ ਉਪਜਾਊ ਮਿੱਟੀ ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਮੰਨੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਨਰਮੇ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਰੇਤਲੀ, ਖਾਰੀ ਜਾਂ ਪਾਣੀ ਦੀ ਖੜੋਤ ਵਾਲੀ ਜ਼ਮੀਨ ਠੀਕ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ 20-25 ਸੈਂ.ਮੀ. ਤੋਂ ਘੱਟ ਨਹੀਂ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਫ਼ਸਲ ਦੀ ਚੰਗੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਅਤੇ ਵਿ.... (Read More)
ਇਸ ਨੂੰ ਹਰ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮਿੱਟੀ, ਜਿਸ ਦੀ pH ਦਰ 6-8 ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇਸ ਫਸਲ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ ਡੂੰਘੀ, ਨਰਮ, ਚੰਗੇ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਅਤੇ ਉਪਜਾਊ ਮਿੱਟੀ ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਮੰਨੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਨਰਮੇ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਰੇਤਲੀ, ਖਾਰੀ ਜਾਂ ਪਾਣੀ ਦੀ ਖੜੋਤ ਵਾਲੀ ਜ਼ਮੀਨ ਠੀਕ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ 20-25 ਸੈਂ.ਮੀ. ਤੋਂ ਘੱਟ ਨਹੀਂ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਫ਼ਸਲ ਦੀ ਚੰਗੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਅਤੇ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਜ਼ਮੀਨ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਤਿਆਰ ਕਰਨਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਹਾੜੀ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ ਵੱਢਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਤੁਰੰਤ ਖੇਤ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਲਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਖੇਤ ਨੂੰ ਹਲ ਨਾਲ ਵਾਹੋ ਅਤੇ ਫਿਰ ਸੁਹਾਗਾ ਫੇਰੋ ਜ਼ਮੀਨ ਨੂੰ ਤਿੰਨ ਸਾਲਾਂ ਵਿਚ ਇਕ ਵਾਰੀ ਡੂੰਘਾਈ ਤੱਕ ਵਾਹੋ, ਇਸ ਤੋਂ ਸਦਾਬਹਾਰ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਵਿਚ ਮਦਦ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਨਾਲ ਮਿੱਟੀ ਵਿਚ ਪੈਦਾ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਕੀੜਿਆਂ ਅਤੇ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਵੀ ਰੋਕਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਉਚਿੱਤ ਸਮਾਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਮਿਲੀ ਬੱਗ ਤੋਂ ਬਚਾਓ ਲਈ ਨਰਮੇ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ਦੇ ਆਲੇ-ਦੁਆਲੇ ਬਾਜਰਾ, ਅਰਹਰ, ਮੱਕੀ ਅਤੇ ਜਵਾਰ ਦੀ ਫਸਲ ਉਗਾਓ ਨਰਮੇ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ਦੇ ਆਲੇ-ਦੁਆਲੇ ਅਰਹਰ, ਮੂੰਗੀ ਅਤੇ ਭਿੰਡੀ ਨੂੰ ਨਾ ਬੀਜੋ ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਕੀੜਿਆਂ ਦਾ ਟਿਕਾਣਾ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਸਹਾਈ ਫਸਲਾਂ ਹਨ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਨਰਮਾ-ਕਣਕ ਦਾ ਫ਼ਸਲੀ-ਚੱਕਰ ਅਪਨਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪਰੰਤੂ ਜੇਕਰ ਨਰਮੇ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ਨਾਲ ਬਰਸੀਮ ਅਤੇ ਗਵਾਰੇ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ਦੇ ਫ਼ਸਲੀ-ਚੱਕਰ ਨੂੰ ਅਪਨਾਇਆ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਇਹ ਨਰਮੇ ਦੀ ਫਸਲ ਲਈ ਲਾਭਦਾਇਕ ਸਿੱਧ ਹੋਵੇਗਾ ਅਮਰੀਕਨ ਨਰਮੇ ਲਈ ਸੇਂਜੂ ਸਥਿਤੀ ਵਿੱਚ 75x15 ਸੈ.ਮੀ. ਅਤੇ ਬਾਰਾਨੀ ਸਥਿਤੀ ਵਿੱਚ 60x30 ਸੈ.ਮੀ. ਦਾ ਫਾਸਲਾ ਰੱਖੋ ਦੇਸੀ ਨਰਮੇ ਲਈ ਸੇਂਜੂ ਅਤੇ ਬਾਰਾਨੀ ਸਥਿਤੀ ਵਿੱਚ 60x30 ਦਾ ਫਾਸਲਾ ਰੱਖੋ ਬਿਜਾਈ 5 ਸੈ.ਮੀ. ਡੂੰਘਾਈ ਵਿੱਚ ਕਰੋ ਦੇਸੀ ਨਰਮੇ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ, ਬਿਜਾਈ ਵਾਲੀ ਮਸ਼ੀਨ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ ਅਤੇ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਜਾਂ ਬੀ ਟੀ ਕਿਸਮਾਂ ਲਈ ਟੋਏ ਪੁੱਟ ਕੇ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਆਇਤਾਕਾਰ ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਵਰਗਾਕਾਰ ਬਿਜਾਈ ਲਾਭਦਾਇਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਕੁੱਝ ਬੀਜਾਂ ਦੇ ਨਾ ਪੁੰਗਰਨ ਅਤੇ ਨਸ਼ਟ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਕਈ ਜਗ੍ਹਾ ਤੇ ਫਾਸਲਾ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਫਾਸਲੇ ਨੂੰ ਖਤਮ ਕਰਨਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਦੋ ਹਫਤੇ ਬਾਅਦ ਕਮਜ਼ੋਰ/ਬਿਮਾਰ/ਨੁਕਸਾਨੇ ਪੌਦੇ ਪੁੱਟ ਦਿਓ ਅਤੇ ਨਵੇਂ ਤੰਦਰੁਸਤ ਪੌਦੇ ਲਗਾ ਦਿਓ ਬੀਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਬੀਜਾਂ ਦੀ ਕਿਸਮ, ਉਗਾਏ ਜਾਣ ਵਾਲੇ ਇਲਾਕੇ, ਸਿੰਚਾਈ ਆਦਿ ਤੇ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦੀ ਹੈ ਅਮਰੀਕਨ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਨਰਮੇ ਲਈ 1.5 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਜਦਕਿ ਅਮਰੀਕਨ ਨਰਮੇ ਲਈ ਬੀਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 3.5 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਦੇਸੀ ਨਰਮੇ ਦੀ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਕਿਸਮ ਲਈ ਬੀਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 1.25 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਅਤੇ ਨਰਮੇ ਦੀਆਂ ਦੇਸੀ ਕਿਸਮਾਂ ਲਈ 3 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਖਾਦਾਂ ਅਤੇ ਸਿੰਚਾਈ ਦੇ ਸਾਧਨਾਂ ਦੇ ਸਹੀ ਉਪਯੋਗ ਅਤੇ ਸਾਫ-ਸੁਥਰੀ ਖੇਤੀ ਨਾਲ ਕੀੜਿਆਂ ਨੂੰ ਪੈਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਰੋਕਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਕੀੜਿਆਂ ਦੇ ਕੁਦਰਤੀ ਦੁਸ਼ਮਣਾਂ ਦੀ ਵੀ ਰੱਖਿਆ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਪੌਦੇ ਦੇ ਉਚਿੱਤ ਵਿਕਾਸ ਅਤੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਟੀਂਡਿਆਂ ਵਾਲੀਆਂ ਟਾਹਣੀਆਂ ਦੀ ਪ੍ਰਫੁੱਲਤਾ ਲਈ, ਮੁੱਖ ਟਾਹਣੀ ਦੇ ਵੱਧ ਰਹੇ ਹਿੱਸੇ ਨੂੰ ਲਗਭਗ 5 ਫੁੱਟ ਦੀ ਉੱਚਾਈ ਤੋਂ ਕੱਟ ਦਿਓ ਅਖੀਰਲੀ ਵਾਰ ਹਲ ਵਾਹੁਣ ਵੇਲੇ ਬਰਾਨੀ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ 5-10 ਟਨ ਰੂੜੀ ਅਤੇ ਸਿੰਚਿਤ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ 10-20 ਟਨ ਰੂੜੀ (ਦੇਸੀ ਖਾਦ) ਦਾ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਪਾਓ ਇਹ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਨਮੀ ਨੂੰ ਬਣਾਈ ਰੱਖਣ ਵਿਚ ਸਹਾਇਕ ਸਿੱਧ ਹੋਵੇਗਾ ਨਰਮੇ ਦੀਆਂ ਵੱਖਰੀਆਂ-ਵੱਖਰੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਲਈ ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਮਾਤਰਾ, 65 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਅਤੇ 27 ਕਿਲੋ ਡੀ.ਏ.ਪੀ. ਜਾਂ 75 ਕਿਲੋ ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਪਾਓ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਕਿਸਮਾਂ ਲਈ, 130 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਅਤੇ 27 ਕਿਲੋ ਡੀ.ਏ.ਪੀ. ਜਾਂ 75 ਕਿਲੋ ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਖੇਤ ਵਿਚ ਪਾਓ ਜੇਕਰ 27 ਕਿਲੋ ਡੀ.ਏ.ਪੀ. ਦੀ ਥਾਂ ਤੇ ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਯੂਰੀਆ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 10 ਕਿਲੋ ਘਟਾ ਦਿਓ
ਅਖੀਰੀਲੀ ਵਾਰ ਹਲ ਵਾਹੁਣ ਵੇਲੇ ਫਾਸਫੋਰਸ ਦੀ ਪੂਰੀ ਮਾਤਰਾ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਪਾਓ ਪੌਦੇ ਦੇ ਬੇਲੋੜੇ ਹਿੱਸੇ ਕੱਟਣ ਸਮੇਂ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਅੱਧੀ ਮਾਤਰਾ ਅਤੇ ਬਾਕੀ ਬਚੀ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਪਹਿਲੇ ਫੁੱਲ ਨਿਕਲਣ ਸਮੇਂ ਪਾਓ ਘੱਟ ਉਪਜਾਊ ਮਿੱਟੀ ਲਈ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਅੱਧੀ ਮਾਤਰਾ ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ ਪਾਓ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਕਮੀ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਕਰਨ ਲਈ 50 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਵਿਚ 8 ਕਿਲੋ ਸਲਫਰ ਪਾਊਡਰ ਨਾਲ ਮਿਲਾ ਕੇ ਖੜੀ ਫਸਲ ਦੀਆਂ ਕਤਾਰਾਂ ਵਿੱਚ ਪਾਓ ਪੌਦਿਆਂ ਵਿੱਚਕਾਰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਫਾਸਲਾ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਫਸਲ ਤੇ ਨਦੀਨਾਂ ਦਾ ਗੰਭੀਰ ਹਮਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਚੰਗੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ ਫਸਲ ਦੀ ਬੀਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 50-60 ਦਿਨਾਂ ਤੱਕ ਫਸਲ ਦਾ ਨਦੀਨ-ਰਹਿਤ ਹੋਣਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ, ਨਹੀਂ ਤਾਂ ਫਸਲ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਿਚ 60-80% ਘੱਟ ਸਕਦੀ ਹੈ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਅਸਰਦਾਰ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਹੱਥੀਂ, ਮਸ਼ੀਨੀ ਅਤੇ ਰਸਾਇਣਕ ਢੰਗਾਂ ਦੇ ਸੁਮੇਲ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 5-6 ਹਫਤੇ ਬਾਅਦ ਜਾਂ ਪਹਿਲੀ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰਨ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹੱਥੀਂ ਗੋਡੀ ਕਰੋ ਬਾਕੀ ਗੋਡੀਆਂ ਹਰੇਕ ਸਿੰਚਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਕਰਨੀਆਂ ਚਾਹੀਦੀਆਂ ਹਨ ਨਰਮੇ ਦੇ ਖੇਤਾਂ ਦੇ ਆਲੇ-ਦੁਆਲੇ ਗਾਜਰ-ਬੂਟੀ ਪੈਦਾ ਨਾ ਹੋਣ ਦਿਓ, ਕਿਉਂਕਿ ਇਸ ਨਾਲ ਮਿਲੀ ਬੱਗ ਦੇ ਹਮਲੇ ਦਾ ਖਤਰਾ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ ਹੈ
ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਨਦੀਨਾਂ ਦੇ ਪੈਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਪੈਂਡੀਮਿਥਾਲਿਨ 25-33 ਮਿ.ਲੀ. ਪ੍ਰਤੀ 10 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 6-8 ਹਫਤੇ ਬਾਅਦ ਜਦੋਂ ਪੌਦਿਆਂ ਦਾ ਕੱਦ 40-45 ਸੈਂ.ਮੀ. ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਪੈਰਾਕੁਐਟ (ਗਰਾਮੋਕਸੋਨ) 24% ਡਬਲਿਊ ਐੱਸ ਸੀ 500 ਮਿ.ਲੀ. ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਜਾਂ ਗਲਾਈਫੋਸੇਟ 1 ਲੀਟਰ ਨੂੰ 100 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਨਦੀਨ-ਨਾਸ਼ਕ 2,4-ਡੀ ਤੋਂ ਨਰਮਾ ਦੀ ਫਸਲ ਕਾਫੀ ਸੰਵੇਦਨਸ਼ੀਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਭਾਵੇਂ ਇਸ ਨਦੀਨਨਾਸ਼ਕ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਨਾਲ ਲਗਦੇ ਖੇਤ ਵਿਚ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇ, ਤਾਂ ਵੀ ਇਸ ਦੇ ਕਣ ਉੱਡ ਕੇ ਨਰਮਾ ਦੀ ਫਸਲ ਨੂੰ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਨੁਕਸਾਨ ਪਹੁੰਚਾ ਸਕਦੇ ਹਨ ਨਦੀਨ-ਨਾਸ਼ਕ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਸਵੇਰ ਜਾਂ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਮੇਂ ਹੀ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ

Posted by AkshayDubey
Madhya Pradesh
18-06-2019 09:59 PM
akshay ji dhan lgane ka same july mahine tak ka hai.dhanywad
Posted by golu Yadav
Uttar Pradesh
18-06-2019 09:52 PM
Golu Yadav ji mentha ka rate 600-800/q ke aas pass hai, Thank you.

Posted by Parveen Kumar
Haryana
18-06-2019 09:51 PM
Parveen Kumar ji Kadaknath ke chicks lene ke lia aap Sumit Kumar 8006000291, 7906547529 (Sumit Kumar Poultry Farm) ja fir aap Central Poultry Development Organization (Northern Region) Ministry of Agriculture & Farmers Welfare, Government of India Industrial Area, Phase-I, Chandigarh – 160 002, Tel.No: 0172-2655391 se samparak kar sakte hai. Thankyou.

Posted by Parveen Kumar
Haryana
18-06-2019 09:49 PM
Parveen Kumar ji Murgi palan ki training lene ke lia aap Central Poultry Development Organization (Northern Region) Ministry of Agriculture & Farmers Welfare, Government of India, Industrial Area, Phase-I, Chandigarh – 160 002 Tel.No: 0172-2655391 se samparak kar sakte hai.

Posted by mahiman
Uttarakhand
18-06-2019 09:46 PM
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई कर.... (Read More)
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आप इसकी किस्मे जैसे Washington Coorg Honey Pusa Delicious Pusa Dwarf की बिजाई कर सकते है आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं एक एकड़ में 104 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें कम बारिश वाले क्षेत्रों में जून - जुलाई के महीने में बिजाई की जानी चाहिए और तराई और अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में सितंबर महीने में बिजाई की जानी चाहिए और क्षेत्र जहां सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हो वहां पर फरवरी - मार्च के महीने में बिजाई की जानी चाहिए आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 0.8 किलो प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं तुड़ाई एक एक फल को हाथों से तोड़कर की जाती है फलों को सुबह के समय तोड़ें धन्यवाद

Posted by anuj dangi
Madhya Pradesh
18-06-2019 09:46 PM
बिजाई के समय गली हुई रूड़ी की खाद और गाय का गला हुआ गोबर 4 टन और नाइट्रोजन 8 किलो (यूरिया 20 किलो) और फासफोरस 32 किलो (एस एस पी 200 किलो), पोटाश 16 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ में डालें इन तत्वों के साथ 8 किलो सलफर प्रति एकड़ में डालें खादों को 6-7 सैं.मी. की गहराई में डालें एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 30-32 किलोग्राम बी.... (Read More)
बिजाई के समय गली हुई रूड़ी की खाद और गाय का गला हुआ गोबर 4 टन और नाइट्रोजन 8 किलो (यूरिया 20 किलो) और फासफोरस 32 किलो (एस एस पी 200 किलो), पोटाश 16 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ में डालें इन तत्वों के साथ 8 किलो सलफर प्रति एकड़ में डालें खादों को 6-7 सैं.मी. की गहराई में डालें एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 30-32 किलोग्राम बीजों का प्रयोग करें

Posted by bivnesh kumar
Uttar Pradesh
18-06-2019 09:44 PM
Bivnesh kumar ji seed lene ke lia aap Shine Brand Seeds 8770896002 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by surajpal
Uttar Pradesh
18-06-2019 09:31 PM
धान में सरसों की खल बहुत ही लाभकारी है यह एक ऐसा जैविक तरीका है जिसके साथ आप धान की पैदावार में वृद्धि कर सकते हैं धान के पौधे की फोट करवाने के लिए इसके परिणाम बहुत ही बढ़िया हैं इसमें छ मुख्य तत्व हैं जिसमें मुख्य तौर पर नाइट्रोजन, पोटाश और फासफोरस के साथ साथ सल्फर जिंक और बोरोन भी पाये जाते हैं सरसों की खल .... (Read More)
धान में सरसों की खल बहुत ही लाभकारी है यह एक ऐसा जैविक तरीका है जिसके साथ आप धान की पैदावार में वृद्धि कर सकते हैं धान के पौधे की फोट करवाने के लिए इसके परिणाम बहुत ही बढ़िया हैं इसमें छ मुख्य तत्व हैं जिसमें मुख्य तौर पर नाइट्रोजन, पोटाश और फासफोरस के साथ साथ सल्फर जिंक और बोरोन भी पाये जाते हैं सरसों की खल धान में प्रयोग करने के लिए दो तरीके हैं पहला तरीका है कि इसे ड्रम में भिगो लें और 5—6 दिन लगातार इसे हिलाते रहें और इस घोल को पानी देने वाले दिन खेत में डाल दें दूसरा तरीका यह है कि इसे बारीक कूटकर इसका छींटा ज़मीन में दे सकते हैं इसे प्रयोग करने का सही समय जब धान 15—20 दिनों का हो क्योंकि इस समय जड़ों का सबसे अधिक विकास होता है इसकी मात्रा एक एकड़ में सिर्फ 16 किलो का प्रयोग कर सकते हैं रेते वाले और बारानी ज़मीन में हम 20 किलो प्रयोग कर सकते हैं

Posted by Dwarka Gujar
Madhya Pradesh
18-06-2019 09:29 PM
5 एकड़ खेत में बिजाई के लिए 150-160 किलोग्राम बीजों का प्रयोग करें
Posted by ਬਲਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਸੈਣੀ
Punjab
18-06-2019 09:28 PM
ਬਲਵਿੰਦਰ ਜੀ ਇਸਦੇ ਉਪਰ ਕੀੜੇ ਚੈੱਕ ਕਰੋ ਜੇਕਰ ਮੌਜੂਦ ਹਨ ਤਾ ਤੁਸੀ ਇਸਦੇ ਉਪਰ malathion @2.5 ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਦੂਸਰਾ 3 ਤੋਂ 4 ਦਿਨ ਬਾਦ ਤਕ ਇਸਦੇ ਉਪਰ carbendazim @3 ਗ੍ਰਾਮ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by pintu
Bihar
18-06-2019 09:18 PM
Pintu ji bihar me kadaknath ke chuje lene ke lia aap Tinku Prasad 9883609252 Sirvastav Hatchery Farm se samparak kar sakte hai. Thankyou.

Posted by raghuvir
Rajasthan
18-06-2019 09:14 PM
Basf opera बहुत अच्छा फंगीनाशी है जिसमें Epoxiconazole 4.7% + Pyroclostrobin12.5% नाम का साल्ट होता है जो फसल में फंगस कंट्रोल करता है इसकी मात्रा 200 मि.ली. प्रति एकड़ है
Posted by sumit Kumar
Bihar
18-06-2019 09:10 PM
जी हां आप उसे पेट के कीड़ों की गोली दे सकते है या फिर आप उसके ब्याने से एक सप्ताह के बाद गोली दे सकते है

Posted by Rupinder sony
Punjab
18-06-2019 09:10 PM
ਰੁਪਿੰਦਰ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਸਦੀ ਉਮਰ ਦੱਸੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Shaman Preet Singh
Haryana
18-06-2019 09:09 PM
Jekar pani khade de vich ja chalde vich paayi hai tan 2-4 ghantya de vich poori tarah khur jandi hai. jekar halki nami hai ate is nu machine nal beejya hai tan 24 ghante tak khurdi hai.
Posted by ashok tiwari
Madhya Pradesh
18-06-2019 09:03 PM
ashok tiwari ji kripya aap apna swal vistar se pooche ke aap konse plant ke bare men jankari lena chahte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by arshdeep singh
Punjab
18-06-2019 09:02 PM
इसे मिट्टी की कई किस्मों जैसे रेतली दोमट से काली मिट्टी में उगाया जा सकता है यह उपजाऊ और जल निकास वाली मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है यह फसल हल्की क्षारीय मिट्टी को भी सहनेयोग्य है अम्लीय और जल जमाव वाली मिट्टी में इसकी खेती करने से परहेज़ करें मिट्टी की पी एच लगभग 6.5-8 होनी चाहिए Jwalamukhi - यह दरमियाने क.... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों जैसे रेतली दोमट से काली मिट्टी में उगाया जा सकता है यह उपजाऊ और जल निकास वाली मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है यह फसल हल्की क्षारीय मिट्टी को भी सहनेयोग्य है अम्लीय और जल जमाव वाली मिट्टी में इसकी खेती करने से परहेज़ करें मिट्टी की पी एच लगभग 6.5-8 होनी चाहिए Jwalamukhi - यह दरमियाने कद की किस्म है पौधे का कद 170 सैं.मी. है फसल 120 दिनों में पक जाती है इसकी औसत पैदावार 7.3 क्विंटल प्रति एकड़ है तेल की मात्रा 42 प्रतिशत है
GKSFH 2002 - यह दरमियाने कद की दोगली किस्म है फसल 115 दिनों में पक जाती है इसकी औसत पैदावार 7.5 क्विंटल प्रति एकड़ है तेल की मात्रा 42.5 प्रतिशत है
PSH 569 - पौधे का कद 162 सै.मी. है फसल 98 दिनों में पक जाती है यह किस्म पिछेती बिजाई के लिए अनुकूल है इसकी औसत पैदावार 7.44 क्विंटल प्रति एकड़ है और 36.3 प्रतिशत तेल होता है सीड बैड तैयार करने के लिए दो से तीन बार जोताई करके सुहागा फेरें अच्छी उपज के लिए बिजाई अंत जनवरी तक पूरी कर लें बिजाई में देरी करने से, यदि बिजाई फरवरी के महीने में की गई हो तो रोपण विधि का प्रयोग करें, क्योंकि सीधी बिजाई करने से उपज में कमी आती है और देरी से बिजाई करने पर कीटों और बीमारियों का हमला बढ़ जाता है अधिक पैदावार लेने के लिए फसल को जनवरी के आखिर तक लगा दें यदि बिजाई फरवरी महीने में करनी हो तो पनीरी से करें क्योंकि इस समय सीधी बिजाई वाली फसल को कीड़े और बीमारियां ज्यादा लगती हैं दो पंक्तियों में 60 सै.मी. और दो पौधों के बीच में 30 सै.मी. की दूरी रखें बीजों को 4-5 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई गड्ढा खोदकर की जाती है इसके इलावा बीजों को बिजाई वाली मशीन से बैड बनाकर या मेड़ बनाकर की जाती है
देर से बीजने वाली फसल के लिए पनीरी का प्रयोग करें और 1 एकड़ खेत के लिए 30 वर्ग मीटर क्षेत्र की पनीरी का प्रयोग किया जाता है 15 किलो बीज प्रयोग करके खेत में लगाने से पहले पनीरी लगाएं बैड बनाने के समय 05 किलो यूरिया और 1.5 किलो एस एस पी डालें और बैडों को पलास्टिक की शीट हटा दें और 4 पत्तों वाले बूटों को खेत में लगाएं पनीरी को उखाड़ने से पहले सिंचाई करें बिजाई के लिए 2-3 किलोग्राम प्रति एकड़ बीज का प्रयोग करें हाइब्रिड के लिए 2-2.5 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें.
बिजाई से पहले बीज को 24 घंटों के लिए पानी में डालें फिर छांव में सुखाएं और 2 ग्राम प्रति किलो थीरम से उपचार करें इससे बीज को मिट्टी के कीड़ों और बीमारियों से बचाया जा सकता है फसल को पीले धब्बों के रोगों से बचाने के लिए बीज को मैटालैक्सिल 6 ग्राम या इमीडाक्लोपरिड 5-6 मि.ली. प्रति किलो बीज से उपचार करें बिजाई से 2-3 सप्ताह पहले 4-5 टन रूड़ी की खाद डालें ज़मीन में 24 किलो नाइट्रोजन (50 किलो यूरिया) 12 किलो फासफोरस (75 किलो एस एस पी) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें सही मात्रा में खाद डालने के लिए मिट्टी की जांच करवाएं आधी नाइट्रोजन, पूरी फासफोरस और पोटाश बिजाई के समय और बाकी नाइट्रोजन बिजाई से 30 दिनों के बाद डालें सिंचित क्षेत्रों में बाकी नाइट्रोजन को दो भागों में बिजाई से 30 दिनों बाद डालें सूरजमुखी के पौधे को पहले 45 दिन नदीन मुक्त रखें और गंभीर अवस्थाओं में फसल पर सिंचाई करें बिजाई के 3 सप्ताह बाद पहली गोडाई और 6 सप्ताह बाद दूसरी गोडाई करें नदीनों को रोकने के लिए पैंडीमैथालीन 1 ली. को 150-200 ली. पानी में फसल के उगने से पहले बिजाई के 2-3 दिनों में स्प्रे करें फसल को गिरने से बचाने के लिए 60-70 सै.मी. लंबे बूटों की जड़ों को फूल निकलने से पहले मिट्टी लगाएं जब फसल 60-70 लंबी हो जाये तो फसल को तने टूटने वाली बीमारी से बचाने के लिए फूल बनने से पहले जड़ों में मिट्टी लगादें मिट्टी की किस्म और मौसम के अनुसार 9-10 सिंचाई करें पहली सिंचाई बिजाई से 3 महीने बाद करें फसल को 50 प्रतिशत फूल पड़ने पर, दानों के नर्म और सख्त समय पर सिंचाई अति जरूरी है इस समय पानी की कमी से पैदावार कम हो सकती है बहुत ज्यादा और लगातार सिंचाई करने से उखेड़ा और जड़ों का गलना जैसी बीमारियां लग सकती हैं भारी जमीनों में सिंचाई 20-25 दिन और हल्की ज़मीनों में 8-10 दिनों के फासले पर करें मधु मक्खी बीज बनने में मदद करती है यदि मधु मक्खियां कम हो तो सुबह 8-11 समय 7-10 दिनों के अंतर पर हाथों से पहचान करें इसलिए हाथों को मलमल के कपड़े से ढक लें पत्तों के सूखने और फूलों के पीले रंग के होने पर कटाई करें कटाई में देरी ना करें क्योंकि इससे पत्ते गिर जाते हैं और दीमक का खतरा बढ़ जाता है

Posted by मनोज पवैया जी
Uttar Pradesh
18-06-2019 09:01 PM
मनोज पवैया जी पोपलर के बीज या पौधा लेने के लिए आप Reaz Khan 7007586769 से सम्पर्क करे धन्यवाद

Posted by Prabh
Punjab
18-06-2019 09:01 PM
ਪ੍ਰਭ ਜੀ ਤੁਸੀ ਡਾ.ਦਲਾਲ ਘੋਲ ਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
ਘੋਲ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਦਾ ਫਾਰਮੂਲਾ
• 2.5 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ, 2.5 ਕਿਲੋ ਡੀ.ਏ.ਪੀ ਅਤੇ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਜ਼ਿੰਕ (21% ਵਾਲ਼ੀ) ਲਓ
• ਡੀ.ਏ.ਪੀ. ਨੂੰ ਛਿੜਕਾਅ ਤੋਂ ਇੱਕ ਦਿਨ ਪਹਿਲਾਂ ਪਲਾਸਟਿਕ ਜਾਂ ਮਿੱਟੀ ਦੇ ਭਾਂਡੇ ਵਿੱਚ ਭਿਓਂ ਕੇ ਰੱਖ ਦਿਓ ਅਤੇ ਦਿਨ ਵਿੱਚ 2-3 ਵਾਰ ਇਸ ਨੂੰ ਡੰਡੇ ਨਾਲ ਹਿਲਾਉਂਦੇ ਰਹੋ ਇਸ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨਾਲ ਡੀ.ਏ.ਪੀ. ਖਾਦ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ ਪੋਸ਼ਕ .... (Read More)
ਪ੍ਰਭ ਜੀ ਤੁਸੀ ਡਾ.ਦਲਾਲ ਘੋਲ ਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
ਘੋਲ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਦਾ ਫਾਰਮੂਲਾ
• 2.5 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ, 2.5 ਕਿਲੋ ਡੀ.ਏ.ਪੀ ਅਤੇ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਜ਼ਿੰਕ (21% ਵਾਲ਼ੀ) ਲਓ
• ਡੀ.ਏ.ਪੀ. ਨੂੰ ਛਿੜਕਾਅ ਤੋਂ ਇੱਕ ਦਿਨ ਪਹਿਲਾਂ ਪਲਾਸਟਿਕ ਜਾਂ ਮਿੱਟੀ ਦੇ ਭਾਂਡੇ ਵਿੱਚ ਭਿਓਂ ਕੇ ਰੱਖ ਦਿਓ ਅਤੇ ਦਿਨ ਵਿੱਚ 2-3 ਵਾਰ ਇਸ ਨੂੰ ਡੰਡੇ ਨਾਲ ਹਿਲਾਉਂਦੇ ਰਹੋ ਇਸ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨਾਲ ਡੀ.ਏ.ਪੀ. ਖਾਦ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮਿਲ ਜਾਣਗੇ
• ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਛਿੜਕਾਅ ਵੇਲੇ ਯੂਰੀਆ ਅਤੇ ਜ਼ਿੰਕ ਨੂੰ ਵੀ ਅਲੱਗ-ਅਲੱਗ ਪਲਾਸਟਿਕ ਜਾਂ ਮਿੱਟੀ ਦੇ ਭਾਂਡਿਆਂ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਲਓ ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 100 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਘੋਲ ਕੇ ਫਸਲ ‘ਤੇ ਛਿੜਕੋ ਜਾਂ ਫਿਰ ਇੱਕ ਪੈਮਾਨਾ ਤਿਆਰ ਲਓ ਅਤੇ ਹਰ ਟੈਂਕੀ ਵਿੱਚ ਉਸ ਪੈਮਾਨੇ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਘੋਲੀ ਹੋਈ ਖਾਦ ਪਾਉਂਦੇ ਰਹੋ ਅਤੇ ਬਾਕੀ ਪਾਣੀ ਮਿਲਾ ਲਓ
• ਇਸ ਗੱਲ ਦਾ ਖਾਸ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਕਿ ਇਹ ਘੋਲ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ ਕਿਸੇ ਧਾਤੂ ਦੇ ਬਰਤਨ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਨਾ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ ਅਤੇ ਇਸ ਘੋਲ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਸਿਰਫ 100 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਹੀ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇ, ਨਾ ਘੱਟ ਨਾ ਜ਼ਿਆਦਾ
• ਫਸਲ ‘ਤੇ ਘੋਲ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਸਾਧਾਰਣ ਰੱਖੋ ਪੌਦੇ ‘ਤੇ ਇੱਕੋ ਜਗ੍ਹਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਘੋਲ ਦਾ ਛਿੜਕਾਅ ਨਾ ਕਰੋ ਇਸ ਨਾਲ ਪੌਦੇ ਦੇ ਪੱਤਿਆਂ ਨੂੰ ਨੁਕਸਾਨ ਪਹੁੰਚ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇਸ ਸਪਰੇਅ ਨਾਲ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਭਰਪੂਰ ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤ ਮਿਲ ਜਾਣਗੇ

Posted by mahiman
Uttarakhand
18-06-2019 08:50 PM
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई कर.... (Read More)
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आप इसकी किस्मे जैसे Washington Coorg Honey Pusa Delicious Pusa Dwarf की बिजाई कर सकते है आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं एक एकड़ में 104 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें कम बारिश वाले क्षेत्रों में जून - जुलाई के महीने में बिजाई की जानी चाहिए और तराई और अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में सितंबर महीने में बिजाई की जानी चाहिए और क्षेत्र जहां सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हो वहां पर फरवरी - मार्च के महीने में बिजाई की जानी चाहिए आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 0.8 किलो प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं तुड़ाई एक एक फल को हाथों से तोड़कर की जाती है फलों को सुबह के समय तोड़ें धन्यवाद
Posted by ਡਾਕਟਰ ਮੇਜਰ ਸਿੰਘ ਧਾਲੀਵਾਲ
Punjab
18-06-2019 08:41 PM
ਮੇਜਰ ਸਿੰਘ ਜੀ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਉਣ ਸਮੇ ਇਹ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਕਿ ਪਾਣੀ ਤਕ ਗਰਮ ਹੋਵੇ, ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੋਂ ਘੰਟਿਆਂ ਵਿਚ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਓ, ਪਸ਼ੂ ਪੂਰੀ ਤ੍ਰਾਹ ਬੋਲ ਕੇ ਗੱਭਣ ਹੋਵੇ, ਤਾਰਾ ਸਾਫ਼ ਹੋਣੀਆਂ ਚਾਹੀਦੀਆਂ ਹੈ, ਜੇਕਰ ਪਸ਼ੂ ਲੰਬੇ ਸਮੇ ਤਕ ਤਾਰਾ ਕਰਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਟੀਕਾ ਨਾ ਭਰਵਾਓ, ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਦ ਇਕ ਦਮ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਬੈਠਣ ਨਾ ਦਿਓ, ਇਹਨਾਂ ਗੱਲਾਂ ਦਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖ ਕੇ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਗੱਭ.... (Read More)
ਮੇਜਰ ਸਿੰਘ ਜੀ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਉਣ ਸਮੇ ਇਹ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਕਿ ਪਾਣੀ ਤਕ ਗਰਮ ਹੋਵੇ, ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੋਂ ਘੰਟਿਆਂ ਵਿਚ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਓ, ਪਸ਼ੂ ਪੂਰੀ ਤ੍ਰਾਹ ਬੋਲ ਕੇ ਗੱਭਣ ਹੋਵੇ, ਤਾਰਾ ਸਾਫ਼ ਹੋਣੀਆਂ ਚਾਹੀਦੀਆਂ ਹੈ, ਜੇਕਰ ਪਸ਼ੂ ਲੰਬੇ ਸਮੇ ਤਕ ਤਾਰਾ ਕਰਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਟੀਕਾ ਨਾ ਭਰਵਾਓ, ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਦ ਇਕ ਦਮ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਬੈਠਣ ਨਾ ਦਿਓ, ਇਹਨਾਂ ਗੱਲਾਂ ਦਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖ ਕੇ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਗੱਭਣ ਕਰਵਾ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by Aman Rajput
Punjab
18-06-2019 08:37 PM
Aman to get the insulin plant you can Contact with surinder Nagra 9814305864 (Rehsam Ayurvedic Nursery). Thankyou.
Posted by Yogesh Gour
Rajasthan
18-06-2019 08:36 PM
सौंफ की अच्छी उपज के लिए शुष्क और ठण्डी जलवायु उत्तम होती है बीजों के अंकुरण के लिए उपयुक्त तापमान 20 से 29 डिग्री सेल्सियस है तथा फसल की अच्छी बढ़वार 15 से 20 डिग्री सेल्सियस पर होती है 25 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान फसल की बढ़वार को रोक देता है फसल के पुष्पन अथवा पकने के समय आकाश में लम्बे समय तक बादल रहने से त.... (Read More)
सौंफ की अच्छी उपज के लिए शुष्क और ठण्डी जलवायु उत्तम होती है बीजों के अंकुरण के लिए उपयुक्त तापमान 20 से 29 डिग्री सेल्सियस है तथा फसल की अच्छी बढ़वार 15 से 20 डिग्री सेल्सियस पर होती है 25 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान फसल की बढ़वार को रोक देता है फसल के पुष्पन अथवा पकने के समय आकाश में लम्बे समय तक बादल रहने से तथा हवा में अधिक नमी रहने से झुलसा बीमारी तथा माहू कीट के प्रकोप की संभावना बढ़ जाती है रेतीली भूमि को छोड़कर सौंफ सभी तरह की मिट्टी जिनमें पर्याप्त मात्रा में जैविक पदार्थ विद्यमान हो, में सफलतापूर्वक उगाई जा सकती है इसकी खेती के लिए उर्वरक और अच्छी जल निकास वाली बलुई दोमट भूमि सर्वोत्तम होती है सौंफ की अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए हल्की मृदा की अपेक्षा भारी मृदा ज्यादा उपयुक्त होती है इसकी खेती के लिए मिटटी का पी एच मान 6.6 से 8.0 के बीच होना चाहिए सौंफ एक लम्बी अवधि में पकने वाली फसल है अतः रबी की शुरूआत में बुवाई करना अधिक उपज के लिए लाभदायक होता है सौंफ को सीधा खेत में या पौधशाला में पौध तैयार करके रोपाई की जा सकती है सौंफ की बुवाई के लिए अक्टूबर का प्रथम सप्ताह सर्वोत्तम होता है नर्सरी विधि से बोने पर नर्सरी में बुवाई जुलाई से अगस्त माह में की जाती है तथा 45 से 60 दिन के बाद पौध की रोपाई कर दी जाती है एक एकड़ में इसका 4 किल्लो बीज की जरूरत होती है धन्यवाद
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