
Posted by Chet Ram Chauhan
Himachal Pradesh
21-06-2019 07:14 PM
Chet Ram Chauhan जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र यहाँ जून और जुलाई म.... (Read More)
Chet Ram Chauhan जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र यहाँ जून और जुलाई महीने में 3 दिन का प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए जून - 22,23,24 (प्रशिक्षण की तारीख ) जुलाई - 20,21,22 (प्रशिक्षण की तारीख ) अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by puraram solanki
Rajasthan
21-06-2019 07:10 PM
puraram ji kripya aap btaye aapne konsi fasl ke mandi bhav ke bare men jankari lena chahte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by Jagtar maan
Punjab
21-06-2019 07:06 PM
ਜਗਤਾਰ ਜੀ ਗਾਵਾ ਨੂੰ ਬੋਹਲੀ ਨਹੀਂ ਪਿਲਾਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਕਿਉਕਿ ਕਈ ਗਾਵਾ ਬਾਦ ਵਿਚ ਆਪਣਾ ਦੁੱਧ ਆਪੇ ਚੁੰਗਣ ਲੱਗ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਦੁੱਧ ਚੁੰਗਣ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਆ ਜਾਂਦੀ ਹੈ

Posted by Satwant Singh Randhawa
Punjab
21-06-2019 07:00 PM
ਝੋਨੇ ਦੇ ਵਿਚ ਝੰਡਾ ਰੋਗ ਦਾ ਕੋਈ ਵੀ ਪੱਕਾ ਇਲਾਜ ਨਹੀਂ ਹੈ ਜਦ ਵੀ ਇਹ ਰੋਗ ਆਉਂਦਾ ਹੈ ਤਾ ਓਹਨਾ ਪੌਧਿਆ ਨੂੰ ਪੁੱਟ ਦਿਓ ਅਤੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚੋ ਬਾਹਰ ਸੁੱਟ ਦਿਓ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਜਦੋ ਵੀ ਪਨੀਰੀ ਮੁੱਖ ਖੇਤ ਵਿਚ ਲਗਾਉਂਦੇ ਹੋ ਤਾ ਇਸਨੂੰ Bavistin @3gm /killo ਦੇ ਘੋਲ ਵਿਚ ਪਨੀਰੀ ਨੂੰ ਡਬੋ ਕੇ ਲਾਓ
Posted by Karan Odedara
Gujarat
21-06-2019 06:55 PM
पशु का दूध और फैट उसकी खुराक और उसकी नस्ल पर निर्भर करती है जो अच्छी नस्ल होती है उनकी फैट भी अच्छी होती है फैट बढ़ाने के लिए उन्हें फीड के साथ 1kg सरसों की खल, 1kg बडेवे की खल सुबह शाम दें, 50 ग्राम मीठा सोडा रोज़ाना एक बार दें, इसके साथ आप fatplus पाउडर 50 ग्राम या fatmax पाउडर 50 ग्राम ओर coolmax पाउडर 50 ग्राम रोज़ाना दें .

Posted by rajwinder singh
Punjab
21-06-2019 06:19 PM
ਰਾਜਵਿੰਦਰ ਜੀ ਤੁਸੀ 1121 ਨੂੰ ਮੁਖ ਖੇਤ ਵਿਚ 13 ਜੁਲਾਈ ਤੋਂ ਲਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦराजविंदर जी आप 1121 को मुख्य खेत में 13 जुलाई से लगा सकते हैं धन्यवाद
Posted by संतोष कुमार सन ऑफ ओम प्रकाश
Rajasthan
21-06-2019 06:16 PM
stosh ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by kuldeep singh
Punjab
21-06-2019 06:15 PM
kuldeep ji isde uper NPK 19:19:19@1 killo nu 150 litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by चन्द्रप्रकाश सिन्हा
Chattisgarh
21-06-2019 06:13 PM
चन्द्रप्रकाश जी आप जैविक खाद में गोबर की खाद दाल सकते है इसके इलावा आप वर्मीकम्पोस्ट का इस्तेमाल कर सकते है
Posted by Gurdeep Saharan
Haryana
21-06-2019 06:12 PM
गुरदीप जी यह फंगस के कारण होता है इसकी रोकथाम के लिए आप म-45 @4 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by BRIJESH KUMAR
Uttar Pradesh
21-06-2019 06:04 PM
BRIJESH KUMAR जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र यहाँ जून और जुलाई मह.... (Read More)
BRIJESH KUMAR जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र यहाँ जून और जुलाई महीने में 3 दिन का प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए जून - 22,23,24 (प्रशिक्षण की तारीख ) जुलाई - 20,21,22 (प्रशिक्षण की तारीख ) अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Sanjay Kushwaha
Madhya Pradesh
21-06-2019 05:56 PM
Sanjay ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki apako iske bare men poori janakri di ja sake.
Posted by Sanjay Kushwaha
Madhya Pradesh
21-06-2019 05:55 PM
धान भारत की एक महत्तवपूर्ण फसल है जो कि जोताई योग्य क्षेत्र के लगभग एक चौथाई हिस्से में उगाई जाती है और भारत की लगभग आधी आबादी इसे मुख्य भोजन के रूप में प्रयोग करती है यह उत्तर प्रदेश की मुख्य फसल है और उत्तर प्रदेश के लगभग 5.4 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है Basmati, Kalajeera, Vishnu Parag आदि धान की कुछ उच्च ग.... (Read More)
धान भारत की एक महत्तवपूर्ण फसल है जो कि जोताई योग्य क्षेत्र के लगभग एक चौथाई हिस्से में उगाई जाती है और भारत की लगभग आधी आबादी इसे मुख्य भोजन के रूप में प्रयोग करती है यह उत्तर प्रदेश की मुख्य फसल है और उत्तर प्रदेश के लगभग 5.4 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है Basmati, Kalajeera, Vishnu Parag आदि धान की कुछ उच्च गुणवत्ता वाली किस्में हैं जिनकी खेती उत्तर प्रदेश में की जाती है मिट्टी इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है प्रसिद्ध किस्में और पैदावार Jaya: यह छोटे कद की और अधिक उपज देने वाली किस्म गर्दन तोड़ के प्रतिरोधक है यह किस्म 142 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने बड़े और लंबे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 26 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Chakia 59: यह किस्म कम जल जमाव वाले हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है Govind: यह किस्म पंतनगर द्वारा विकसित की गई है यह किस्म 105 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Indrasan: यह तराई क्षेत्रों की प्रसिद्ध किस्म है Mahsud: यह किस्म निचले क्षेत्रों में बारानी स्थितियों में उगाने के लिए उपयुक्त है Majhera 3: यह लंबी किस्म सूखे को सहनेयोग्य है और ऊंचे क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Nagina 22: यह ऊंचे क्षेत्रों में बारानी हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं Narendra-1 and Narendra-2: यह किस्म 105 और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Pant Dhan 6: यह किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त है Saket 4: यह अगेते समय की किस्म है और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह यू पी की सबसे प्रसिद्ध किस्म है T9: यह देरी से बोयी जाने वाली सुगंधित किस्म है इसके दाने बेलनाकार होते हैं VL Dhan 16: यह निम्न और मध्यम क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त किस्म है VL 206: यह लंबी किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Usar 1: यह किस्म कानपुर में विकसित की गई यह क्षारीय और लवणीय मिट्टी में खेती करने के लिए उपयुक्त है बासमती किस्में Taraori Basmati: यह सिंचित क्षेत्रों में अगेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म 145-155 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Haryana Basmati no 1: यह अर्द्ध छोटे कद की किस्म है और सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Basmati 1121, Pusa Basmati 1, CSR 30, Shabnam दूसरे राज्यों की किस्में Hybrid 6201: यह सिंचित क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है यह भुरड़ रोग के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 25 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Vivek Dhan 62: यह सिंचित और पहाड़ी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं यह भुरड़ रोग के प्रतिरोधक किस्म है यह गर्दन तोड़ और कम तापमान वाले क्षेत्रों को भी सहन कर सकती है इसकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Karnataka Rice Hybrid 2: यह सिंचित और समय से बिजाई वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह पत्तों के झुलस रोग और अन्य बीमारियों को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 35 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kanak: यह दरमियाने क्षेत्रों में बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने लंबे और मोटे होते हैं यह बैक्टीरियल झुलस रोग के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Ratnagiri 1 and 2: सिंचित क्षेत्रों के लिए जबकि निचले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है ये अर्द्ध छोटे कद की किस्म हैं इनकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल और 21 क्विंटल प्रति एकड़ होती है ज़मीन की तैयारी शुष्क खेतों को अच्छा बनाने, नदीन रहित और सेहतमंद वृद्धि के लिए ग्लाफोसेट डालनी चाहिए गेहूं की कटाई के बाद ज़मीन पर हरी खाद के तौर पर मई के पहले सप्ताह ढैंचा (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़), या सन (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़) या लोबीया (बीज दर 12 किलोग्राम प्रति एकड़) की बिजाई करनी चाहिए जब फसल 6 से 8 सप्ताह की हो जाए तो इसे खेत में कद्दू करने से एक दिन खेत में ही जोत देना चाहिए इस तरह प्रति एकड़ 25 किलो नाइट्रोजन खाद की बचत होती है भूमि को समतल करने के लिए लेज़र लेवलर का प्रयोग किया जाता है इसके बाद खेत में पानी खड़ा कर दें ताकि भूमि के अंदर ऊंचे नीचे स्थानों की पहचान हो सके इस तरह पानी के रसाव के कारण पानी की होने वाले बर्बादी को कम किया जा सके बिजाई बिजाई का समय यू पी के सिंचित और निम्न बारानी क्षेत्रों में मध्य जून से शुरूआती जुलाई तक का समय उपयुक्त होता है बीज की गहराई पौधे की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए फासला बनाकर लगाने से पौधे ज्यादा पैदावार देते हैं फासला उपजाऊ मिट्टी में 20 सैं.मी. x 15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जबकि हल्की मिट्टी में रोपाई के लिए 15 सैं.मी. x 10 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 20 x 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बिजाई का ढंग सिंचित और कम बारानी क्षेत्रों में रोपाई ढंग प्रयोग किया जाता है रोपाई के लिए 25-30 दिनों के पौधों का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 30-35 दिनों के पौधे रोपाई के लिए प्रयोग करें ऊंचे क्षेत्रों में, शुष्क और गीली मिट्टी में रोपाई ढंग का प्रयोग करें बीज बीज की मात्रा एक एकड़ खेत में 6-8 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बीज का उपचार बिजाई से पहले 10 लीटर पानी में 20 ग्राम कार्बेनडाज़िम $ 1 ग्राम स्ट्रैप्टोसाईक्लिन घोल लें और इस घोल में बीजो को 8-10 घंटे तक भिगोयें उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं और फिर बिजाई के लिए प्रयोग करें पनीरी की देख-रेख और रोपण वैट बैड नर्सरी : यह तकनीक उन क्षेत्रों में अपनाई जाती है जहां पर पानी ज्यादा मात्रा में पाया जाता है नर्सरी का 1/10 हिस्सा दूसरे खेत में लगाया जाता है इसकी बिजाई छींटे द्वारा की जाती है यहां पर खेत की जोताई और खेत को समतल किया जाता है बैडों पर कईं दिन तक नमी बनाए रखनी चाहिए पानी से खेत को ज्यादा ना भरें जब नर्सरी 2 सैं.मी. से वृद्धि कर जाए तब पानी को खेत में लगाते रहना चाहिए बिजाई के 15 दिन बाद 26 किलो यूरिया डालना चाहिए जब नर्सरी 25-30 सैं.मी. तक लंबी हो जाए तब उसे 15-21 दिन बाद दूसरे खेत में लगा देना चाहिए और खेत को लगातार पानी लगाते रहना चाहिए सूखे बैड वाली नर्सरी : यह तकनीक शुष्क क्षेत्रों में अपनाई जाती है जो बैड बनाया जाता है वो बिजाई वाले खेत का 1/10 हिस्से में बीज बोया जाता है बैड का आकार सीमित होना चाहिए और उसकी ऊंचाई 6-10 से.मी होनी चाहिए धान का आधा जला हुआ छिलका बैड पर बिखेर देना चाहिए इससे जड़ें मजबूत होती हैं सही समय पर सिंचाई करते रहना चाहिए और नमी बनाए रखना चाहिए ताकि नए पौधे नष्ट ना हों तत्वों की पूर्ति के लिए खाद डालना जरूरी है मॉडीफाईड मैट नर्सरी : यह नर्सरी लगाने का एक ऐसा तरीका है जिसमें कम जगह और कम बीजों की जरूरत होती है यह नर्सरी किसी भी जगह पर बनाई जा सकती हैं जहां पर समतल जगह हो और पानी की सुविधा हो इसकी पनीरी लगाने के लिए 1% खेत की जरूरत होती है 4 से.मी की सतह पर नए पौधे लगाए जाते हैं इसे बनाने के लिए 1 मीटर चौड़े और 20-30 मीटर लंबे जमीन के टुकड़े की जरूरत होती है इसके ऊपर बिछाने के लिए पॉलीथीन और केले के पत्तों की जरूरत होती है इसके इलावा एक लकड़ी का बकसा जो कि 4 से.मी गहरा होता हैं मिट्टी के मिश्रण से भरा होता है बीजों को इसके अंदर रख देना चाहिए और फिर बीजों को सूखी मिट्टी के साथ ढक देना चाहिए इसके बाद पानी का छिड़काव कर देना चाहिए लकड़ी के बक्से को नमी देते रहना चाहिए बिजाई से 11-14 दिनों के बाद पौध तैयार हो जाती है जब पौध तैयार हो जाती है तब मैट से पौध को दूसरे खेत में रोपण कर दिया जाता है फासला: पौधों का फासला 20x20 सैं.मी. या 25x25 सैं.मी. होना चाहिए खेत में पौध रोपण पनीरी लगाने का ढंग 1. कद्दू करके लगाई जाने वाली पनीरी : आमतौर पर पंक्ति में लगाए जाने वाले पौधे 20x15 सैं.मी. दूरी पर लगाए जाते हैं और देरी से लगाई जाने वाली पनीरी 15x15 सैं.मी. पर लगाई जाती है नए पौधों की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए 2. बैड बनाकर लगाई जाने वाली पनीरी : यह बैड भारी ज़मीनों के लिए बनाए जाते हैं पनीरी लगाने से पहले खालियों में पानी लगाना चाहिए और फिर पनीरी को खेत में लगाना चाहिए पौधे से पौधे का फासला 9 सैं.मी. होना चाहिए 3. मशीनी ढंग से लगाई जाने वाली पनीरी : मैट पनीरी के लिए मशीनों का प्रयोग किया जाता है यह मशीन 30x12 सैं.मी. के फासले पर पनीरी लगानी चाहिए खरपतवार नियंत्रण रोपाई के 2 से 3 दिन बाद नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 50 ई सी 1200 मि.ली. या थायोबेनकार्ब 50 ई सी 1200 मि.ली. या पैंडीमैथालीन 30 ई सी या प्रैटीलाक्लोर 50 ई सी 600 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें इनमें से किसी एक नदीननाशक को 60 किलो रेत में मिलाकर 4-5 सैं.मी. गहरे खड़े पानी में बुरकाव करें चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए मेटसलफुरॉन 20 डब्लयु पी 30 ग्राम को 150 लीटर पानी में मिलाकर नदीनों के अंकुरण के बाद रोपाई के 20-25 दिन बाद डालें स्प्रे से पहले खेत में खड़े पानी का निकास कर दें और स्प्रे के एक दिन बाद सिंचाई करें नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 1 लीटर को बिजाई के 6 से 7 दिनों के बाद प्रति एकड़ में स्प्रे करें सिंचाई पनीरी लगाने के बाद खेत में दो सप्ताह तक अच्छी तरह पानी खड़ा रहने देना चाहिए जब सारा पानी सूख जाए तो उसके दो दिन बाद फिर से पानी को लगाना चाहिए खड़े पानी की गहराई 10 सै.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए खेत में से बूटी और नदीनों को निकालने से पहले खेत में से सारा पानी निकाल देना चाहिए ओर इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद खेत की फिर से सिंचाई करनी चाहिए पकने से 15 दिन पहले सिंचाई करनी बंद करनी चाहिए ताकि फसल को आसानी से काटा जा सके ऊंची भूमि पर सिंचाई पूरी तरह से बारिश पर निर्भर करती है बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर और पानी की उपलब्धता के आधार पर गंभीर अवस्थाओं में सिंचाई करें

Posted by dharmendra patel
Gujarat
21-06-2019 05:50 PM
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है ब.... (Read More)
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है बस आपको इस बात का ध्यान रखना है कि पौधा ज्यादा पानी वाली और ज्यादा ठंड पड़ने वाली जगह पर नहीं लगाना है कम पानी और रेतली भूमि में लगाने के लिए यह सबसे अच्छी फसल है खेत की तैयारी - खेत की तैयारी के लिए सबसे पहले खेत की 2 बार अच्छी तरह जोताई करके उसमें प्रति हेक्टेयर 10 से 20 टन में पुरानी रूड़ी की खाद डालें साथ ही 120 किलोग्राम यूरिया + 150 किलोग्राम फास्फोरस + 30 किलोग्राम पोटाश इन्हें खेत में समान रूप से बिखेर दें फिर एक बार हल्की जोताई और कराहे से भूमि को समतल कर लें फिर खेत में 50x50 सैं.मी. की दूरी पर मेंड़ें बना लें पौधे की रोपाई और देख रेख - पौधे की रोपाई किसी भी समय की जा सकती है पर अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए जून- जुलाई या फरवरी- मार्च में कर सकते हैं एलोवेरा की रोपाई मेंड़ों पर होती है यह पौधे किसी पुरानी एलोवेरा फार्म या नर्सरी से प्राप्त किए जा सकते हैं यही पौधे बाद में पनीरी के रूप में प्रयोग किए जाते हैं इस विधि को रूट सक्कर कहा जाता है अच्छी उपज के लिए किस्में - सिम सितल, L 1 , 2 , 5 और 49 लगाएं जिसमें जैल की मात्रा ज्यादा पायी जाती है इसके अलावा नेशनल बोटनीकल और प्लांट जैनेटिक रिसोर्स, आई. सी. ए. आर द्वारा रिलीज़ की गई किस्में IC111271, IC111269, IC111280 आदि हैं मेंड़ों पर 50 x 50 सैं.मी. की दूरी पर पौधों को लगाएं पौधे से पौधे की दूरी 50 सैं.मी. रखने पर प्रति एकड़ में 15000 पौधों की रोपाई की जरूरत पड़ेगी सिंचाई - सिंचाई साल भर में इसे सिर्फ 4 से 5 बार सिंचाई की जरूरत होती है सिंचाई के लिए ड्रिप प्रणाली अच्छी रहती है इससे इसकी उपज में वृद्धि होती है गर्मी क दिनों में 25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए कीट और बीमारियां - वैसे इस फसल पर कोई विशेष कीट और रोगों का प्रभाव नहीं होता है पर कहीं कहीं तने के सड़ने और पत्तियों पर दाग वाली बीमारियों का असर देखा गया है जो एक फंगस रोग होता है उसके उपचार के लिए मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए कटाई - यह फसल एक साल बाद काटने के लायक हो जाती है कटाई के दौरान पौधों की सबसे पहले निचली ठोस 3 या 4 पत्तों की कटाई करें उसके बाद लगभग 1 महीने के बाद उससे ऊपर वाली पत्तियों की कटाई करनी चाहिए कभी भी ऊपर वाली नई नाज़ुक पत्तियों की कटाई ना करें कटी हुई पत्तियों में फिर नई पत्तियां बननी शुरू हो जाती हैं प्रति हेक्टेयर में 50 से 60 टन ताजी पत्तियां प्रति वर्ष मिल जाती हैं दूसरे वर्ष में 15 से 20 फीसदी वृद्धि होती है बाजार में इसकी पत्तियों की अनुमानित कीमत 3 से 6 रूपये किलो होती है एक तंदरूस्त पौधे से एक साल में लगभग 3-4 किलो पत्तियां ली जा सकती हैं इस तरह एक वर्ष में एक एकड़ में से 1.5 से 3 लाख की फसल हो जाती है एलोवेरा का प्रयोग तंदरूस्त पत्तियों की कटाई के बाद साफ पानी से धोकर पत्तियों के निचली ओर ब्लेड या चाकू से कट लगाकर थोड़े समय के लिए छोड़ देते हैं जिसमें पीले रंग का गाढ़ा चिपचिपा रस (जेल) निकलता है उसे एक टैंक में इकट्ठा करके इस रस को सुखा लिया जाता है इस सूखे हुए रस को अलग अलग ढंग से तैयार करने के बाद अलग अलग नामों से जाना जाता है जैसे कि सकोतरा केप जब फसल पूरी तरह तैयार हो जाये और उसकी कटाई कर ली जाये तो उसे आप सब्जी मंडी में सीधे तौर पर बेच सकते हैं यदि आप खुद मंडी में बेचते हैं तो आपको अंदाजन 5 से 10 रूपये प्रति किलो तक मुल्य मिल सकता है पर यदि आप किसी कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट करते हो तो इसका रेट उस कंपनी की जरूरत और शर्तों के मुताबिक उस कंपनी के द्वारा तय होता है यह मुल्य आपकी उनके साथ डीलिंग पर निर्भर करता है

Posted by Indraraj singh
Uttar Pradesh
21-06-2019 05:49 PM
Indraraj Singh ji Chandan ki kheti ke lia aap Arun Khurmi 9878123123 se samparak kar sakte hai. Thankyou.
Posted by राम पृसाद
Madhya Pradesh
21-06-2019 05:49 PM
राम पृसाद जी आप सोयाबीन की क़िस्म जैसे Ahilya-1,Ahilya-3,NRC 37,Alankar की बिजाई कर सकते है धन्यवाद
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Posted by Arun begana
Uttar Pradesh
21-06-2019 05:45 PM
अरुण जी आप सुंडी की रोकथाम के लिए quinalphos @2.5 ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Lakhvir Singh
Punjab
21-06-2019 05:34 PM
ਝੋਨੇ ਵਿਚ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 18 ਦਿਨ ਬਾਦ ਖਾਦਾਂ ਪਾਉਣੀਆਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਜਿਸ ਵਿਚ 36 ਕਿੱਲੋ ਯੂਰੀਆ , 27 ਕਿੱਲੋ ਡਾਪ ਅਤੇ 20 ਕਿਲੋ ਪੋਟਾਸ਼ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪਿਛਲੀ ਫ਼ਸਲ ਵਿਚ DAP ਪਾਈ ਹੈ ਤਾ ਤੁਹਾਨੂੰ ਹੁਣ DAP ਪਾਉਣ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਏਕੜ ਤੁਸੀ ਜ਼ਿੰਕ ਖੇਤ ਵਿਚ ਪਾਉਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾ ਤੁਸੀ 21% ਜਾ 33% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਖੇਤ ਵਿਚ ਪਾ ਸਕਦਾ ਇਹੋ 21% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 25 ਕਿੱਲੋ ਅਤੇ 33%.... (Read More)
ਝੋਨੇ ਵਿਚ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 18 ਦਿਨ ਬਾਦ ਖਾਦਾਂ ਪਾਉਣੀਆਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਜਿਸ ਵਿਚ 36 ਕਿੱਲੋ ਯੂਰੀਆ , 27 ਕਿੱਲੋ ਡਾਪ ਅਤੇ 20 ਕਿਲੋ ਪੋਟਾਸ਼ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪਿਛਲੀ ਫ਼ਸਲ ਵਿਚ DAP ਪਾਈ ਹੈ ਤਾ ਤੁਹਾਨੂੰ ਹੁਣ DAP ਪਾਉਣ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਏਕੜ ਤੁਸੀ ਜ਼ਿੰਕ ਖੇਤ ਵਿਚ ਪਾਉਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾ ਤੁਸੀ 21% ਜਾ 33% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਖੇਤ ਵਿਚ ਪਾ ਸਕਦਾ ਇਹੋ 21% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 25 ਕਿੱਲੋ ਅਤੇ 33% ਵਾਲੀ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 15-17 ਕਿੱਲੋ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਇਹ ਪੂਰੀ ਮਾਤਰਾ ਖੇਤ ਵਿਚ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤਾ ਤੁਹਾਨੂੰ ਦੁਬਾਰਾ ਖੇਤ ਵਿਚ 2-3 ਸਾਲ ਤਕ ਪਾਉਣ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦੀ
Posted by भगवतीलाल नागर
Madhya Pradesh
21-06-2019 05:03 PM
भगवतीलाल नागर जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र यहाँ जून और.... (Read More)
भगवतीलाल नागर जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र यहाँ जून और जुलाई महीने में 3 दिन का प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए जून - 22,23,24 (प्रशिक्षण की तारीख ) जुलाई - 20,21,22 (प्रशिक्षण की तारीख ) अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258.

Posted by Pargat
Punjab
21-06-2019 05:02 PM
ਪ੍ਰਗਟ ਜੀ ਇਸਦੀਆਂ ਜੜਾਂ ਚੈੱਕ ਕਰੋ ਅਤੇ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਦੱਸੋ ਕੇ ਇਸਦੀਆਂ ਜੜਾਂ ਗਲ ਰਹੀਆਂ ਹਨ ਜਾ ਨਹੀਂ
Posted by Satinder Singh Goraya
Punjab
21-06-2019 04:59 PM
ਸਤਿੰਦਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਆਖਰੀ ਵਹਾਈ ਦੇ ਸਮੇ ਪੋਟਾਸ਼ 20 ਕਿੱਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by deepak patidar
Madhya Pradesh
21-06-2019 04:58 PM
deepak ji yeh tapman ke karn hone lagte hai iske liye aap paudhon ko 3-4 din ke antral par sichai karen. dhanywad

Posted by Sunil Kumar
Madhya Pradesh
21-06-2019 04:57 PM
Sunil Kumar ji moong ka bhav bad sakta hai hai lekin iske bare me pakka kuch nai kaha ja sakta ji.

Posted by Jagtar Singhj
Punjab
21-06-2019 04:50 PM
jagtar ji tuc jhone de futare de layi sumitomo di Hoshi@400ml ja oswal da jalwa@300ml prati acre de hisab nal spray kro. isde nal jhone da futara hona shuru ho janda hai.is to ilava 40-45 din de jhone nu tuc biovita@8 killo ja Tata Ralli gold@4 killo prati acre de hisab nal istemal kar sakde ho.
Posted by Ravinder Kumar
Haryana
21-06-2019 04:49 PM
आप भैंस को Biotrim IM इंजेक्शन लगवाएं यह आप 20 मि.ली. लगवाएं, यह आप 3 इंजेक्शन लगवाएं, इसके साथ आप Broton liqued 50ml रोज़ाना दें बाकि आप Halotas bolus 1-1 सुबह शाम दें इससे फर्क पड़ जाएगा

Posted by
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21-06-2019 04:44 PM
Posted by rameshwar neware
Madhya Pradesh
21-06-2019 04:43 PM
Rameshwar neware जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र यहाँ जून और जुलाई म.... (Read More)
Rameshwar neware जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र यहाँ जून और जुलाई महीने में 3 दिन का प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए जून - 22,23,24 (प्रशिक्षण की तारीख ) जुलाई - 20,21,22 (प्रशिक्षण की तारीख ) अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by Dwarika Prasad
Uttar Pradesh
21-06-2019 04:41 PM
धान में नदीन की रोकथाम के लिए आप हाथ से नदीन निकल सकते है इसके इलावा नदीनों के लिए कोई और तरीका नहीं है धन्यवाद
Posted by thaneshwar patel
Chattisgarh
21-06-2019 04:40 PM
Chandrahasini,IGKVR-1,IGKVR-2,Mahamaya kisam ki bijai kar sakte hai.dhanywad
Posted by Prince Pandey Sarkar
Uttar Pradesh
21-06-2019 04:36 PM
प्रिंस जी यह एक प्राइवेट किसम है कृपया इसकी कंपनी का नाम बताये ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Harpreet singh
Punjab
21-06-2019 04:29 PM
hnji uss nu kal nhwaa skde ho ate uss nu ratt nu bharr bnn skde ho..
Posted by Ravinder Kumar
Haryana
21-06-2019 04:28 PM
आप उसे Uteroton liquid 100ml और Anabolite liquid 100ml रोजाना दें बाकि आप 250 ग्राम गुड, 100 ग्राम सौंफ, 100 ग्राम सूखे आंवले, 50 ग्राम अज्वैण और 50 ग्राम हल्दी रोजाना उबाल कर फिर ठंडा करके 5 दिन दें.
Posted by Lovedeep Singh Khehra
Punjab
21-06-2019 04:28 PM
ਝੋਨੇ ਵਿਚ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 18 ਦਿਨ ਬਾਦ ਖਾਦਾਂ ਪਾਉਣੀਆਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਜਿਸ ਵਿਚ 36 ਕਿੱਲੋ ਯੂਰੀਆ , 27 ਕਿੱਲੋ ਡਾਪ ਅਤੇ 20 ਕਿਲੋ ਪੋਟਾਸ਼ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪਿਛਲੀ ਫ਼ਸਲ ਵਿਚ DAP ਪਾਈ ਹੈ ਤਾ ਤੁਹਾਨੂੰ ਹੁਣ DAP ਪਾਉਣ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਏਕੜ ਤੁਸੀ ਜ਼ਿੰਕ ਖੇਤ ਵਿਚ ਪਾਉਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾ ਤੁਸੀ 21% ਜਾ 33% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਖੇਤ ਵਿਚ ਪਾ ਸਕਦਾ ਇਹੋ 21% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 25 ਕਿੱਲੋ ਅਤੇ 33%.... (Read More)
ਝੋਨੇ ਵਿਚ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 18 ਦਿਨ ਬਾਦ ਖਾਦਾਂ ਪਾਉਣੀਆਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਜਿਸ ਵਿਚ 36 ਕਿੱਲੋ ਯੂਰੀਆ , 27 ਕਿੱਲੋ ਡਾਪ ਅਤੇ 20 ਕਿਲੋ ਪੋਟਾਸ਼ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪਿਛਲੀ ਫ਼ਸਲ ਵਿਚ DAP ਪਾਈ ਹੈ ਤਾ ਤੁਹਾਨੂੰ ਹੁਣ DAP ਪਾਉਣ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਏਕੜ ਤੁਸੀ ਜ਼ਿੰਕ ਖੇਤ ਵਿਚ ਪਾਉਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾ ਤੁਸੀ 21% ਜਾ 33% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਖੇਤ ਵਿਚ ਪਾ ਸਕਦਾ ਇਹੋ 21% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 25 ਕਿੱਲੋ ਅਤੇ 33% ਵਾਲੀ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 15-17 ਕਿੱਲੋ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਇਹ ਪੂਰੀ ਮਾਤਰਾ ਖੇਤ ਵਿਚ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤਾ ਤੁਹਾਨੂੰ ਦੁਬਾਰਾ ਖੇਤ ਵਿਚ 2-3 ਸਾਲ ਤਕ ਯੂਰੀਆ ਪਾਉਣ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦੀ
Posted by ਸਦੀਕ ਮੁਹੰਮਦ
Punjab
21-06-2019 04:22 PM
jekar tuci uss nu tika bhrwa dita hai tan tuci uss nu Concimax bolus 1-1 goli swere sham deni suru kro ate 14 din tak deo, ehh intas company da product hai, jekar oh agli varr dubara heat vich aaundi hai tan tuci dubara swal pusho ji ..

Posted by Vinod kumar
Uttar Pradesh
21-06-2019 04:21 PM
विनोद जी कीट की रोकथाम के लिए आप malathion @2.5 ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by ਗੁਰਮੀਤ ਸਿੰਘ
Delhi
21-06-2019 04:20 PM
ਗੁਰਮੀਤ ਜੀ ਗਮਲੇ ਵਿਚ ਵਰਮੀਕੰਪੋਸਟ ਅਤੇ FYM ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Karan Odedara
Gujarat
21-06-2019 04:20 PM
यदि आप पशु पालन का काम बड़े स्तर पर शुरू करना चाहते है तो आपको इस काम के लिए ट्रेनिंग की जरूरत पड़ेगी , ट्रेनिंग के साथ-साथ पशु की नस्ल सबसे ज़्यादा ज़रूरी है, पशु खरीदते समय कोशिश करें कि तीन समय दूध निकालकर ही पशु खरीदें, भैंसों का एक दिन का दूध 12 लीटर और गायों का दूध 16-17 लीटर से कम न हो, भैंसों को खरीदने का सही समय र.... (Read More)
यदि आप पशु पालन का काम बड़े स्तर पर शुरू करना चाहते है तो आपको इस काम के लिए ट्रेनिंग की जरूरत पड़ेगी , ट्रेनिंग के साथ-साथ पशु की नस्ल सबसे ज़्यादा ज़रूरी है, पशु खरीदते समय कोशिश करें कि तीन समय दूध निकालकर ही पशु खरीदें, भैंसों का एक दिन का दूध 12 लीटर और गायों का दूध 16-17 लीटर से कम न हो, भैंसों को खरीदने का सही समय रखड़ी से लेकर वैशाखी तक का होता है क्योंकि इस समय मौसम अच्छा होने के कारण हरा चारा भी खुला होता है पशुओं के लिए शैड परिवहन वाली सड़क पर ना बनाए और शैड सड़क से कम से कम 100 गज हटवा जरूर हो शैड को धूप और हवा का ध्यान रखकर बनाएं शैड हमेशा खेत या आस पास से 2 फुट ऊंचा बनाए क्योंकि निचले स्थान पर पानी खड़ा हो जाता है जिस कारण गंदगी पैदा हो जाती है और बाकी पशुओं का मल मूत्र का निकास भी आसानी से हो जाता है पशुओं के लिए बनाई जाने वाली खुरली ढाई तीन फुट चौड़ी होनी चाहिए खुरली पर खड़े होने के लिए एक पशु को तकरीबन तीन चार फुट जगह चाहिए मतलब 10 पशुओं के लिए 40 फुट लंबी खुरली बनेगी डेयरी फार्म से संबंधित सामान रखने के लिए स्टोर बनाए पशुओं का दाना स्टोर करने के लिए कमरा सैलाब से रहित होना बहुत जरूरी है शैड का फर्श पक्का, तिलकने रहित और जल्दी साफ होने वाला हो शैड में जितना हो सके पशुओं को खुला छोड़ें और पानी और दाना पूरा दें पशु को खुला छोड़ने से पशुओं में अफारे की समस्या कम आती है बाकी अपनी क्षमता और जरूरत मुताबिक ही समान खरीदें और आर्थिक नुकसान से बचने के लिए प्रत्येक पशु का बीमा जरूर करवायें

Posted by SANTRAM NISHAD
Uttar Pradesh
21-06-2019 04:19 PM
स्ट्रॉबेरी की खेती पॉलीहाउस के अंदर या खुले खेत में कर सकते हैं चीकनी, बालुई और अच्छे निकास वाली ज़मीन स्ट्रॉबेरी के लिए अच्छी होती है तेजाबी में पी एच 5.0 से 6.5 होनी चाहिए मिट्टी की नाज़ुकता तीस से चालीस सैं.मी. होनी चाहिए स्ट्रॉबेरी की सही वृद्धि के लिए दिन में तापमान 20-25 डिगरी और रात के समय 7-12 डिगरी होना चाहिए इस.... (Read More)
स्ट्रॉबेरी की खेती पॉलीहाउस के अंदर या खुले खेत में कर सकते हैं चीकनी, बालुई और अच्छे निकास वाली ज़मीन स्ट्रॉबेरी के लिए अच्छी होती है तेजाबी में पी एच 5.0 से 6.5 होनी चाहिए मिट्टी की नाज़ुकता तीस से चालीस सैं.मी. होनी चाहिए स्ट्रॉबेरी की सही वृद्धि के लिए दिन में तापमान 20-25 डिगरी और रात के समय 7-12 डिगरी होना चाहिए इसलिए इसकी पनीरी लगाने का काम मध्य अक्तूबर से मध्य नवंबर तक कर देना चाहिए इन महीनों और इसके बाद पंजाब में लगभग यही तापमान होता है स्ट्रॉबेरी की खेती मलचिंग विधि द्वारा की जाती है सबसे पहले खेत को तैयार किया जाता है इसके बाद ही ट्रैक्टर की सहायता से मलचिंग मशीन को खेत में उतारा जाता है चार फुट क्यारी तैयार की जाती है इसमें ड्रिप लाइन फिट की जाती है इसके बाद मशीन की सहायता से क्यारियों पर प्लास्टिक शीट बिछाई जाती है मलचिंग के लिए हल्का और लचकीला पदार्थ लें ताकि स्ट्रॉबेरी के पौधे की रफ्तार पर असर ना पड़े जिसे बाद में दोनों ओर से मिट्टी में दबा दिया जाता है अब इस शीट में छेद करके उसमें स्ट्रॉबेरी की पनीरी लगायी जाती है पनीरी लगाने के समय जड़ को पूरी तरह मिट्टी में व्यवस्थित कर दें जड़ बाहर रहने से पौधे के सूखने का खतरा होता है पौधे को ज्यादा तापमान और ठंड से बचाने के लिए इसके ऊपर छांव करनी चाहिए जो आप लो टन्नल विधि से कर सके हैं मौसम का बहुत ख्याल रखना पड़ता है थोड़ी सी लापरवाही से सारी फसल खराब हो सकती है पहले साल अपने खेत में स्ट्रॉबेरी की खेती करने का कुल खर्चा ढाई से तीन लाख रूप्ये प्रति एकड़ के हिसाब से आ जाता है क्योंकि किसान को पहले साल ड्रिप सिस्टम और फव्वारों आदि पर खर्च करना पड़ता है पर अगले वर्षों में किसानों का यह खर्चा बच जाता है इसके लिए एक एकड़ में 40 बैड बनते हैं और एक बैड पर 1000 स्ट्रॉबेरी के पौधे लगते हैं इस तरह एक एकड़ में चालीस हजार पौधे लगाए जाते हैं एक पौधा 3 से 4 रूप्ये तक मिल जाता है और इसकी उपज 50 से 60 क्विंटल तक निकल आता है 25-30क्विंटल गोबर की खाद एक एकड़ में डालें यह खाद एक साल में डालनी होती है फिर 20 : 40 : 40 NPK KG / हेक्टेयर डालनी है अच्छी फसल के लिए यूरिया दो फीसदी जिंक सल्फेट, आधा प्रतिशत कैलशियम सल्फेट और बोरिक एसिड 0.2 फीसदी अच्छी फसल के लिए ठीक है सिंचाई जल्दी जल्दी पर हल्की करनी चाहिए ज्यादा पानी ठीक नहीं है पत्ते गीले ना करें तुपका सिंचाई से पानी कम लग सकता है यदि तुपका सिंचाई नहीं कर रहे तो क्यारियों में पानी खाली में ही लगाएं नदीन हाथ से हटाएं या कीड़े मकौड़े और अन्य बीमारियों की तरफ ध्यान रखना जरूरी है यदि कोई पौधा ज्यादा खराब है उसे हटा दें जब फल का रंग 70 प्रतिशत लाल हो जाये तो तोड़ लेना चाहिए यदि मार्किट दूरी पर है तो थोड़ा सख्त ही तोड़ना चाहिए तुड़ाई अलग अलग दिनों में करनी चाहिए स्ट्रॅाबेरी की पैकिंग प्लास्टिक की प्लेटों में करनी चाहिए इसे हवादार जगह पर रखना चाहिए जहां तापमान पांच डिगरी हो एक दिन के बाद स्ट्रॉबेरी की पैकिंग का तापमान ज़ीरो डिग्री होना चाहिए मार्किट में स्ट्रॉबेरी औसतन 200 रूपये प्रति तक बिकती है इस तरह पांच लाख प्रति एकड़ से इसकी आमदन शुरू होकर आगे अपनी मेहनत से किसान आमदन में भरपूर वृद्धि कर सकता है स्ट्रॉबेरी के पौधे सितंबर से अक्तूबर तक लगाए जाते हैं और 3 महीने के बाद यह फल देना शुरू कर देते हैं इसकी फसल अप्रैल तक चलती है इसकी मार्केटिंग में किसी भी तरह की मुश्किल नहीं है, यह ऐलनाबाद, सिरसा, हनुमानगढ़, गंगानगर के इलावा बठिंडा, मोगा, जलंधर. लुधियाना में इसकी मार्केटिंग कर सकते है, यदि ज़्यादा मात्रा में स्ट्रॉबेरी है तो दिल्ली इसकी मुख्य मार्किट है

Posted by davinder brar
Punjab
21-06-2019 04:18 PM
davinder ji tuc urea de nal zinc mix krke pa sakde ho zinc tuc 33% ja 21% vali pa sakde ho.

Posted by Anmol Rajput
Punjab
21-06-2019 04:18 PM
अनमोल राजपूत जी आप सहजन ( Moringa ) के पेड़ भी लगा सकते है, इन से आप को अच्छी आमदन भी मिलेगी और पशुओ के लिए चारा भी मिलेगा, आप इस की फलिआ भी बेच सकते है, इस के बारे में और ज्यादा जानकारी के लिए आप J.B Lal 8290200303 से सम्पर्क कर सकते है धन्यवाद
Posted by Navraj Singh Johal
Punjab
21-06-2019 04:18 PM
navraj ji tuc jhone de uper sahi matra vich khaadan pao ate isnu bimariyan ate keetan de hamle to bchao jisde nal isd ajhaad vadia niklega.

Posted by Rajanpreet Singh
Punjab
21-06-2019 04:14 PM
rajanpreet ji tuc isde uper hoshi@2.5ml nu prati liter pani de hisab nal spray karo.isde nal paniri growth krna shuru kar dindi hai.dhanwad

Posted by davinder brar
Punjab
21-06-2019 04:14 PM
Magnesium sulphate di verto naal paude da rang hra bhra rehnda hai. ihh paude vich haryaali di dhaant maarda hai. iss di ghaat jyaadatar sbjia de vich aundi hai. jhone de vich iss di lod nahi paindi hai. iss di ghat aun de kaarn pattya de vichaale wali naadia dikhnia shuru ho jandia hnn ate patte bhoore rang de ho jande hn. iss ton ilaava patte fulle fulle jehe ate dhabbedar nazar aunde hnn. iss di ghat ohna jameena de vich jyaada aundi hai jithe potash di varto vadh hundi hai. iss di ghat poori krn de lyi magnesium sulphate 1%@1kg prati acre de hisab nal spray kiti jandi hai.
Posted by Dilbag singh
Punjab
21-06-2019 04:01 PM
ਉਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ flukarid-ds bolus ਦਿਓ ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Sharkoferrol liquid 50-50ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ Bovimin-b ਪਾਊਡਰ 50gm ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ .

Posted by ਬਲਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
21-06-2019 03:58 PM
ਬਲਜੀਤ ਜੀ 1509 ਨੂੰ ਮੁਖ ਖੇਤ ਵਿਚ ਤੁਸੀ ਜੁਲਾਈ ਮਹੀਨੇ ਦੇ ਦੂਜੇ ਪੰਦਰਵਾੜੇ ਵਿਚ ਲਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Amandeep Singh
Punjab
21-06-2019 03:50 PM
आप जिंक खेत में डालना चाहते है तो आप 21% या 33% वाली जिंक खेत में डाल सकते है 21 प्रतिशत वाली 25 किलो और 33 प्रतिशत वाली 15—17 किलो के हिसाब से डाल सकते है
Posted by Omprakash
Rajasthan
21-06-2019 03:49 PM
ओमप्रकाश जी नमस्कार ,अगर आपने पशुपालन करना है तो आप सबसे पहले किसी सफल डेयरी फार्मर की डेयरी पर कुछ दिन तक रहकर इस काम की बारीकियों को जानें क्योंकि कुछ बातों का ज्ञान सिर्फ खुद काम को देखकर ही पता चलता है बाकी कुछ और बातें आपसे शेयर कर रहे हैं आप एक बार में इक्ट्ठी गाय ना खरीदें गायों को 2-2 महीनों के फासले पर ख.... (Read More)
ओमप्रकाश जी नमस्कार ,अगर आपने पशुपालन करना है तो आप सबसे पहले किसी सफल डेयरी फार्मर की डेयरी पर कुछ दिन तक रहकर इस काम की बारीकियों को जानें क्योंकि कुछ बातों का ज्ञान सिर्फ खुद काम को देखकर ही पता चलता है बाकी कुछ और बातें आपसे शेयर कर रहे हैं आप एक बार में इक्ट्ठी गाय ना खरीदें गायों को 2-2 महीनों के फासले पर खरीदें या फिर 3 पहले खरीदें ओर 3 महीने बाद फिर खरीद लें इससे दूध की कमी नहीं आयेगी पशु की नसल सबसे ज्यादा जरूरी है पशु खरीदने के समय कोशिश करें कि दिन में तीन बार दूध निकालकर ही पशु खरीदें भैंसो का एक दिन का दूध 12 लीटर और गायों को दूध 16-17 लीटर से कम ना हो गाभिनों को खरीदने का सही समय रखड़ियों से लेकर वैशाखी तक का होता है क्योंकि इस समय मौसम अच्छा होने के कारण हरा चारा भी खुला होता है गाभिनों के लिए शैड आवाजाई वाली सड़क पर ना बनायें और शैड सड़क से कम से कम 100 गज दूर हो शैड को धूप और हवा का ध्यान रखकर ही बनायें शैड हमेशा खेत या आस पास से 2 फुट ऊंचा बनायें क्योंकि निचले स्थान पर पानी खड़ा हो जाता है जिस कारण गंदगी पैदा हो जाती है और बाकी पशुओं का मल मूत्र का निकास भी आसानी से हो जाता है पशुओं के लिए बनायी जाने वाली खुरली ढाई तीन फुट चौड़ी होनी चाहिए खुरली पर खड़ने के लिए एक पशु को तकरीबन चार फुट जगह चाहिए मतलब 10 पशुओं के लिए 40 फुट लंबी खुरली बनेगी डेयरी फार्म से संबंधित सामान रखने के लिए स्टोर बनायें पशुओं का वितरण/दाना स्टोर करने के लिए कमरा सैलाब से रहित होना चाहिए शैड का फर्श पक्क, फिसलन रहित और जल्दी साफ होने वाला हो शैड में जितना हो सके पशुओं को खुला छोंड़े और पानी और दाना पूरा डालें पशु को खुला छोड़ने से पशुओं में अफारे की समस्या कम आती है बाकी अपनी आवश्यकता और क्षमता के मुताबिक ही सामान खरीदें और आर्थिक नुकसान से बचने के लिए प्रत्येक गाभिन का बीमा जरूर करवायें

Posted by avtar bhullar
Punjab
21-06-2019 03:36 PM
ਝੋਨੇ ਵਿਚ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 18 ਦਿਨ ਬਾਦ ਖਾਦਾਂ ਪਾਉਣੀਆਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਜਿਸ ਵਿਚ 36 ਕਿੱਲੋ ਯੂਰੀਆ , 27 ਕਿੱਲੋ dap ਅਤੇ 20 ਕਿਲੋ ਪੋਟਾਸ਼ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪਿਛਲੀ ਫ਼ਸਲ ਵਿਚ DAP ਪਾਈ ਹੈ ਤਾ ਤੁਹਾਨੂੰ ਹੁਣ DAP ਪਾਉਣ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਏਕੜ ਤੁਸੀ ਜ਼ਿੰਕ ਖੇਤ ਵਿਚ ਪਾਉਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾ ਤੁਸੀ 21% ਜਾ 33% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਖੇਤ ਵਿਚ ਪਾ ਸਕਦਾ ਇਹੋ 21% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 25 ਕਿੱਲੋ ਅਤੇ 33% ਵ.... (Read More)
ਝੋਨੇ ਵਿਚ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 18 ਦਿਨ ਬਾਦ ਖਾਦਾਂ ਪਾਉਣੀਆਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਜਿਸ ਵਿਚ 36 ਕਿੱਲੋ ਯੂਰੀਆ , 27 ਕਿੱਲੋ dap ਅਤੇ 20 ਕਿਲੋ ਪੋਟਾਸ਼ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪਿਛਲੀ ਫ਼ਸਲ ਵਿਚ DAP ਪਾਈ ਹੈ ਤਾ ਤੁਹਾਨੂੰ ਹੁਣ DAP ਪਾਉਣ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਏਕੜ ਤੁਸੀ ਜ਼ਿੰਕ ਖੇਤ ਵਿਚ ਪਾਉਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾ ਤੁਸੀ 21% ਜਾ 33% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਖੇਤ ਵਿਚ ਪਾ ਸਕਦਾ ਇਹੋ 21% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 25 ਕਿੱਲੋ ਅਤੇ 33% ਵਾਲੀ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 15-17 ਕਿੱਲੋ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਇਹ ਪੂਰੀ ਮਾਤਰਾ ਖੇਤ ਵਿਚ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤਾ ਤੁਹਾਨੂੰ ਦੁਬਾਰਾ ਖੇਤ ਵਿਚ 2-3 ਸਾਲ ਤਕ ਯੂਰੀਆ ਪਾਉਣ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦੀ

Posted by सोनू धाकड़
Madhya Pradesh
21-06-2019 03:34 PM
आप उसे हरा चारा बढ़िया मात्रा में दें, इसके साथ आप उसे गर्मी से बचा कर रखें, उसकी हर 3 महीने बाद
डीवॉर्मिंग जरूर करवाएं, इनके साथ साथ आप Calcimust gold liquid 50ml, anabolite liquid 50-50ml रोज़ाना Gog पाउडर 50 ग्राम रोज़ाना देना शुरू करें, इससे फर्क पड़ जाएगा .
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