
Posted by Aman
Punjab
23-06-2019 03:06 PM
ਚੁਕੰਦਰ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅਗਸਤ-ਨਵੰਬਰ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਸਮੇਂ ਚੁਕੰਦਰ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ 24-28 ਕਿਲੋ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ, 40-48 ਕਿਲੋ ਪੋਟਾਸ਼ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ 4-6 ਟਨ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਵੀ ਨਾਲ ਮਿਲਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ detroit dark red,crimson globe, crosby Egyptian ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by Anil Kumar Bhakta
Bihar
23-06-2019 03:04 PM
अदरक भारत की एक अहम मसाले वाली फसल है यह फसल अच्छे जल निकास वाली चिकनी, रेतली और लाल हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है खेत में पानी ना खड़ा होने दें क्योंकि खड़े पानी में यह ज्यादा देर बच नहीं पाएगी फसल की वृद्धि के लिए 6-6.5 पी एच वाली मिट्टी अच्छी मानी जाती है उस खेत में अदरक की फसल ना उगाएं जहां पिछली बार अदरक की.... (Read More)
अदरक भारत की एक अहम मसाले वाली फसल है यह फसल अच्छे जल निकास वाली चिकनी, रेतली और लाल हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है खेत में पानी ना खड़ा होने दें क्योंकि खड़े पानी में यह ज्यादा देर बच नहीं पाएगी फसल की वृद्धि के लिए 6-6.5 पी एच वाली मिट्टी अच्छी मानी जाती है उस खेत में अदरक की फसल ना उगाएं जहां पिछली बार अदरक की फसल उगाई गई हो हर साल एक ही ज़मीन पर अदरक की फसल ना लगाएं प्रसिद्ध किस्में :-Himgiri, IISR Varanda, IISR Mahima,Suprabha, Suruchi, IISR Rejatha खेत को दो तीन बार जोतें और सुहागे से समतल करें अदरक की बिजाई के लिए आवश्यक लंबाई के 15 सैं.मी. ऊंचे और 1 मीटर चौड़े बैड तैयार करें दो बैडों के बीच 50 सैं.मी. का फासला रखें नदीनों कीटों और बीमारियों की जांच के लिए बैड की मिट्टी को धूप लगवायें इसके लिए बैड को पॉलीथीन शीट से 20-30 दिनों के लिए ढकें रोपाई के समय नीम केक 25 ग्राम को प्रति गड्ढे में डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए राइज़ोम की बिजाई मई के पहले सप्ताह में पूरी कर लें राइज़ोम को कतारों में बोयें और कतार में 40-45 सैं.मी. और दो पौधों में 30 सैं.मी. फासला रखें राइज़ोम की रोपाई के बाद खेत में 50 क्विंटल हरे पत्तों की मलचिंग प्रति एकड़ में करें दूसरी मलचिंग 20 क्विंटल हरे पत्तों के साथ 40 दिनों के बाद करें बीज की गहराई 3-4 सैं.मी. के करीब होनी चाहिए अदरक की बिजाई सीधे ढंग से और पनीरी लगाकर की जा सकती है बिजाई के लिए ताजे और बीमारी रहित गांठों का प्रयोग करें बिजाई के लिए 5-6.5 क्विंटल प्रति एकड़ बीज का प्रयोग करें बिजाई से पहले गांठों को मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी से उपचार करें गांठों को 30 मिनट के लिए घोल में भिगो दें इससे गांठों को फफूंदी से बचाया जा सकता है उपचार के बाद गांठों को 3-4 घंटें के लिए छांव में सुखाएं खेत की तैयारी के समय 60 क्विंटल रूड़ी की खाद प्रति एकड़ मिट्टी में डालें नाइट्रोजन 24 किलो (52 किलो यूरिया), फासफोरस 20 किलो (125 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 20 किलो (35 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें रूड़ी की खाद या गाय का गोबर 60 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की दूसरी मात्रा 20 किलो (45 किलो यूरिया) बिजाई के 45 दिनों के बाद, जबकि बिजाई के 120 दिनों के बाद नाइट्रोजन की तीसरी मात्रा 16 किलो (यूरिया 35 किलो) डालें रोपाई के बाद पहली सिंचाई करें इसे बारानी फसल के तौर पर उगाया जाता है इसलिए बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर सिंचाई करें बारिश की अनुपस्थिति में, बाकी की सिंचाई 10 दिनों के अंतराल पर करें अदरक की पूरी फसल को कुल 16-18 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बिजाई के 3 दिन बाद एट्राज़िन 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की नमी वाली मिट्टी पर स्प्रे करें उन नदीनों को खत्म करने के लिए जो पहली नदीन नाशक स्प्रे के बाद पैदा होते हैं, बिजाई के 12-15 दिनों के बाद गलाइफोसेट 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें नदीन नाशक की स्प्रे करने के बाद खेत को हरी खाद से या धान की पराली से ढक दें जड़ों के विकास के लिए जड़ों में मिट्टी लगाएं बिजाई के 50-60 दिनों के बाद पहली बार जड़ों में मिट्टी लगाएं और उसके 40 दिन बाद दोबारा मिट्टी लगाएं

Posted by कन्हैया लाल माली
Rajasthan
23-06-2019 03:03 PM
यह चीनी भूरे रंग की होती है जो गुड़ के बाद बारीक सा बचता है वह चीनी होती है, बारीक चीनी प्रयोग कर सकते है

Posted by mintu
Uttar Pradesh
23-06-2019 03:02 PM
गेंदे की खेती करना चाहते है से मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इसकी खेती के ल.... (Read More)
गेंदे की खेती करना चाहते है से मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल नहीं है फ्रैंच गेंदे की किस्म हल्की मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म उच्च जैविक खाद वाली मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है प्रसिद्ध किस्में :- African Marigold: इस किस्म की फसल 90 सैं.मी. तक लम्बी होती है इसके फूल बड़े आकार के और लैमन, पीले, सुनहरे, संतरी और गहरे पीले रंग के होते हैं यह लम्बे समय की किस्म है इसकी अन्य किस्में जैसे Giant Double African Orange, Crown of Gold, Giant Double African Yellow, Chrysanthemum Charm, Golden Age, Cracker Jack आदि हैं French Marigold: यह छोटे कद की जल्दी पकने वाली किस्में हैं इसके फूल छोटे आकार के और पीले, संतरी, सुनहरे पीले, लाल जंग और महोगनी रंग के होते हैं इसकी अन्य किस्में जैसे Rusty Red, Butter Scotch, Red Borcade, Star of India, Lemon drop आदि हैं Pusa Basanti Gainda: यह लम्बे समय की किस्म है इसका पौधा 58.80 सैं.मी. लम्बा और गहरे हरे रंग के पत्ते होते हैं इसके फूल सल्फर पीले, दोहरे और कारनेशन किस्म के होते हैं Pusa Narangi Gainda: फूल निकलने के लिए 125-136 दिनों की आवश्यकता होती है इसका पौधा लम्बा और कद में 73.30 सैं.मी. का होता है और पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं इसके फूल संतरी रंग के और कारनेशन किस्म के होते हैं फूल घने और दोहरी परत वाले होते हैं इसके ताजे फूलों की पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए आखिरी जोताई के समय 250 क्विंटल रूड़ी की खाद और अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर मिट्टी में मिलायें गेंदे की बिजाई एक वर्ष में कभी भी की जा सकती है बारिश के मौसम में इसकी बिजाई मध्य जून से मध्य जुलाई में करें सर्दियों में इसकी बिजाई मध्य सितंबर से मध्य अक्तूबर में पूरी कर लें नर्सरी बैड 3x1 मीटर आकार के तैयार करें गाय का गला हुआ गोबर मिलायें बैडों में नमी बनाए रखने के लिए पानी दें सूखे फूलों का चूरा करें और उनका कतार या बैड पर छिड़काव करें जब पौधों का कद 10-15 सैं.मी. हो जाये, तब वे रोपाई के लिए तैयार होते हैं फैंच किस्म को 35x35 सैं.मी. और अफ्रीकी किस्म को 45x45 सैं.मी. के फासले पर रोपाई करें नर्सरी बैड पर बीजों का छिड़काव करें बिजाई के लिए पनीरी ढंग का प्रयोग किया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 600 से 800 ग्राम बीजों की आवश्यकता होती है जब फसल 30-45 दिन की हो जाए, तब पौधे के सिरे से उसे काट दें इससे पौधे को झाड़ीदार और घना होने में मदद मिलती है, इससे फूलों की गुणवत्ता और अच्छा आकार भी प्राप्त होता है बिजाई से पहले बीजों को एजोसपीरियम 200 ग्राम को 50 मि.ली. धान के चूरे में मिलाकर उपचार करें शुरूआती खुराक के तौर पर अच्छी वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 32 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 53 किलो) प्रति एकड़ में डालें मिट्टी की किस्म के अनुसार खाद की खुराक बदल दें सही खुराक देने के लिए मिट्टी की जांच करवायें और उसके आधार पर खुराक दें नदीनों की संख्या के आधार पर गोडाई करें खेत में रोपाई के बाद तुरंत सिंचाई करें कली बनने से लेकर कटाई तक की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है अप्रैल से जून के महीने में 4-5 दिनों के अंतराल पर लगातार सिंचाई करना आवश्यक होता है किस्म के आधार पर गेंदा 2 से 2.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं फ्रैंच गेंदे की किस्म 1.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म दो महीने में तैयार हो जाती है जब गेंदे का पूरा आकार विकसित हो जाये तब उसे तोड़ लें कटाई सुबह के समय और शाम के समय करें फूलों की तुड़ाई से पहले खेत को सिंचित करना चाहिए इससे फूलों की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है इसे आप अपनी नजदीकी फूल मंडी में बेच कर इसे अपनी आय का साधन बना सकते है इसका बीज आप कृषि यूनिवर्सिटी से ले सकते है या नजदीकी नर्सरी से ले सकते है जा फिर गेंदे और गुलाब के बीज लेने के लिए आप प्रेम राज सैनी 9719432296 से सम्पर्क करे धन्यवाद
Posted by jakir Hussain
Rajasthan
23-06-2019 03:00 PM
आप चूज़ों को फीड उनके खाने के हिसाब से डालें उनको आप फीड खाने वाले बर्तन में फीड डालें जितनी उन्होंने खानी होगी वो उतनी खाएगी जिसे वो आसानी से हज़म भी कर हो जाएगी

Posted by Gursewak singh
Punjab
23-06-2019 02:57 PM
Gursewak singh ji corn harvester, Silage Making ja packing Machine len lai tusi Bakhsish Combine, Patiala Road, Ghagga, Patiala-147102, Punjab, India Gurbakhsish Singh 9888831443 ji nal samparak kar sakde ho. Thankyou
Posted by deepak dhakad
Madhya Pradesh
23-06-2019 02:54 PM
गराडू की खेती के लिए बलुई दोम्मट मिटटी , काली मिट्टी जिसमे जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था हो उचित मानी जाती है फ़रवरी माह में पलाऊ करे इसके बाद कल्टीवेटर , फिर रोटावेटर से जमीन को अच्छी तरह से जोत कर समतल करे उस के बाद पकी गोबर की खाद पाँच ट्रालि प्रति एकड़ डाले गोबर खाद को खेत मे अच्छी तरह से फैला ले और मिट्टी म.... (Read More)
गराडू की खेती के लिए बलुई दोम्मट मिटटी , काली मिट्टी जिसमे जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था हो उचित मानी जाती है फ़रवरी माह में पलाऊ करे इसके बाद कल्टीवेटर , फिर रोटावेटर से जमीन को अच्छी तरह से जोत कर समतल करे उस के बाद पकी गोबर की खाद पाँच ट्रालि प्रति एकड़ डाले गोबर खाद को खेत मे अच्छी तरह से फैला ले और मिट्टी मैं मिला दे गराडू की बुआइ बेड बनाकर ड्रिप डाल कर की जाती है ड्रिप विधि से गराडू की खेती मैं पौधै से पौध की दूरी1.5 फीट बेड 1.5 फ़ीट उचा, 2 फिट चोड़ा एक बैड से दूसरे बैड की दुरी 3 फ़ीट होनी चाहिए 1 मई --30जून तक करे बुआई के लिए 100से 120 ग्राम के गराडू के टुकड़े उचित बीज की मात्रा प्रति एकड़ 1000से1200 किलोग्राम रखे बुआई के पहले 200 किलो सुपर फॉस्फेट 30 किलो यूरिया व् 100 किलो पोटाश प्रति एकड़ के मान से डाले फिर बुआई केर बुआई करने के कुछ समय बाद गराडू गरमिनेट हो कर जमीन से बाहर आ जाता है मई माह मैं गराडू की बुआई करने पर ईसकी ख़ुदाई नवम्बर माह मैं की जाती है ठण्ड मैं ईसकी खुदाई की जाती है
Posted by Mahendra Singh Shekhawat
Rajasthan
23-06-2019 02:53 PM
महेंद्र जी आप आम की किस्मे जैसे Amrapali ,Mallika,Arka Aruna,Arka Puneet,Arka Anmol ,Arka Neelkiran,Ratna ,Sindhu,Ambika,Au Rumani Mulgoa,Manjeera की बिजाई कर सकते है धन्यवाद

Posted by hariom
Uttar Pradesh
23-06-2019 02:53 PM
Hariom जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आ.... (Read More)
Hariom जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by vicky
Haryana
23-06-2019 02:49 PM
दरमियाने समय की किस्मों के लिए नाइट्रोजन: फासफोरस: पोटाश को 60:24:24 किलोग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से डालने के लिए 130 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़, 150 किलोग्राम सिंगल सुपर फासफेट प्रति एकड़ और 40 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति एकड़ के हिसाब से खेत में डालें कम समय वाली किस्मों के लिए नाइट्रोजन: फासफोरस: पोटाश को 48:24:24 क.... (Read More)
दरमियाने समय की किस्मों के लिए नाइट्रोजन: फासफोरस: पोटाश को 60:24:24 किलोग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से डालने के लिए 130 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़, 150 किलोग्राम सिंगल सुपर फासफेट प्रति एकड़ और 40 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति एकड़ के हिसाब से खेत में डालें कम समय वाली किस्मों के लिए नाइट्रोजन: फासफोरस: पोटाश को 48:24:24 किलोग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से डालने के लिए 105 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़, 150 किलोग्राम सिंगल सुपर फासफेट प्रति एकड़ और 40 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति एकड़ के हिसाब से खेत में डालें खादों को डालने से पहले मिट्टी की जांच करवा लें और मिट्टी की जांच के अनुसार खेत में खादों का उपयोग करना चाहिए जिंक सलफेट 10 किलोग्राम प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन का 1/3 हिस्सा और फासफोरस , पोटाश और जिंक की पूरी मात्रा आखिरी कद्दू करने के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी की मात्रा रोपाई के बाद तीसरे और 6वें सप्ताह में समान मात्रा में डालें नीम की परत चढ़े यूरिया का उपयोग करना चाहिए क्योंकि इससे नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ जाती है
Posted by Shanti Kumar
Uttar Pradesh
23-06-2019 02:27 PM
Aap uske bhukar ki janch krwayen, yadi bhukar nahi hai to aap Broton liquid 50ml rojana, Anabolite liquid 100ml rojana aur Aptifast 1-1 bolus subah sham deni shuru kren, isse farak pad jayega, yadi bhukar hai to nazdiki doctor se janch krwayen.

Posted by Gursewak singh
Punjab
23-06-2019 02:00 PM
gursewak ji tuc ehna di growth de layi hoshi@400ml nu 150 litre pani dehisab nal spray karo.dhanwad

Posted by sukhdeep singh
Punjab
23-06-2019 01:48 PM
ਇਸ ਲਈ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦਾ ਰੇਟ 30 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਸਟਰਾਅ ਹੈ ਜੀ
Posted by bhajan singh
Punjab
23-06-2019 01:42 PM
Bhajan ji kirpa karke isdi photo bhejo ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by sanju kasde
Madhya Pradesh
23-06-2019 01:39 PM
Sanju aap ganne ko NPK 191919@1 killo ko 150 litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by Gurdeep singh
Haryana
23-06-2019 01:38 PM
Sir 20 kilo watt da Generators kine hp tak sambesi ball motor chla sakda hai answer jaldi dena sir ?

Posted by Gurdeep singh
Haryana
23-06-2019 01:32 PM
Gurdeep ji isnu khet vich spray karn to bad 2-3 din tak pani na lao.dhanwad

Posted by kamlesh Kumar
Rajasthan
23-06-2019 01:17 PM
Kamlesh ji nadeen ek trah ka ghas hota hai jo fasl me bina jrurat ke fasl me ug jati hai. yeh fasl ke sath bhojan aur pani ke liye mukabla karti hai.dhanywad

Posted by Nilesh Singh
Bihar
23-06-2019 01:09 PM
नीलेश जी आप मूंग या सोयाबीन की बिजाई कर सकते है धन्यवाद

Posted by Devraj Tomar
Uttar Pradesh
23-06-2019 01:08 PM
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जाता है, लेकिन अंगूर की खेती के लिए उपजाऊ मिट्टी जिसकी पी एच 6.5-8.5 हो, और जल जमाव वाली मिट्टी उपयुक्त होती है अंगूर की खेती के लिए, अच्छी तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक ट्रैक्टर से 3-4 गहरी जोताई करें और हैरो से 3 जोताई करें तैयार की गई जड की कटिंग क.... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जाता है, लेकिन अंगूर की खेती के लिए उपजाऊ मिट्टी जिसकी पी एच 6.5-8.5 हो, और जल जमाव वाली मिट्टी उपयुक्त होती है अंगूर की खेती के लिए, अच्छी तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक ट्रैक्टर से 3-4 गहरी जोताई करें और हैरो से 3 जोताई करें तैयार की गई जड की कटिंग की रोपाई दिसंबर से जनवरी महीने में की जाती है निफिन विधि द्वारा 3x3 मीटर फासले का प्रयोग करें और आरबोर विधि से 5x3 मीटर फासले का प्रयोग करें Anab-e-Shahi किस्म के लिए 6x3 मीटर फासले का प्रयोग करें कटिंग को 1 मीटर की गहराई पर रोपित करें जोताई के बाद, मार्च के पहले पखवाड़े में नदीनों के अंकुरण से पहले स्टांप 800 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें और फिर ग्रामोक्सोन 24 WCS या ग्लाइसेल 41 एस सल (ग्लाईफोसेट) 1.6 लीटर को 150 लीटर पानी में मिलाकर, नदीनों के अंकुरण के बाद जब नदीन 15-20 सैं.मी. कद प्राप्त कर लें, तब स्प्रे करें

Posted by husan
Punjab
23-06-2019 01:06 PM
आप इसकी 3G cutting करें ये बढ़िया तरीके के फल लेने का एक बहुत अच्छा तरीका है, इसकी कटाई के समय पौधे की पहली शाखा के साथ फूल तोड़ दिए जाते हैं इस शाखा के फल और फूल लगभग नर ही होते हैं फिर दूसरी शाखा जो पहली शाखा से बनी है, उसके फूल भी तोड़ दिए जाते हैं इसेक फल ओर फूल कुछ नर ओर मादा होते हैं इन्हे भी नहीं रखा जाता अब जो दू.... (Read More)
आप इसकी 3G cutting करें ये बढ़िया तरीके के फल लेने का एक बहुत अच्छा तरीका है, इसकी कटाई के समय पौधे की पहली शाखा के साथ फूल तोड़ दिए जाते हैं इस शाखा के फल और फूल लगभग नर ही होते हैं फिर दूसरी शाखा जो पहली शाखा से बनी है, उसके फूल भी तोड़ दिए जाते हैं इसेक फल ओर फूल कुछ नर ओर मादा होते हैं इन्हे भी नहीं रखा जाता अब जो दूसरी शाखा से तीसरी टहनी निकली है, उसके फूल रखे जाते हैं, इसे तीसरी तुड़ाई कहते हैं, इसे फूल और फल लगभग मादा ही होते हैं.

Posted by Nilesh Singh
Bihar
23-06-2019 01:05 PM
नीलेश जी आप सोयाबीन या मूंग की बिजाई कर सकते है धन्यवाद

Posted by chenaram maghwal
Rajasthan
23-06-2019 01:01 PM
RHB 121 (MH 892): यह हाइब्रिड किस्म 75-78 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 8.8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
HHB 67 (Unnat): यह किस्म कम और ज्यादा वर्षा वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 65-70 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 6-8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
HHB 60: यह किस्म 70-75 दि.... (Read More)
RHB 121 (MH 892): यह हाइब्रिड किस्म 75-78 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 8.8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
HHB 67 (Unnat): यह किस्म कम और ज्यादा वर्षा वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह किस्म 65-70 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 6-8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
HHB 60: यह किस्म 70-75 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
RHB 177: यह सूखे को सहने योग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
ICMH 356: यह किस्म 70-75 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म सूखे को सहने योग्य है और पत्तों के धब्बा रोग की प्रतिरोधक किस्म है
Pusa 605: यह हाइब्रिड किस्म 70-80 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 3.6-4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
GHB 538: यह किस्म 75-80 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दानों की औसतन उपज 7 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Raj 171: यह हाइब्रिड किस्म 85 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म सामान्य वर्षा वाले हालातों में बिजाई के लिए उपयुक्त है इसकी औसतन पैदावार 8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Posted by dev sahu
Chattisgarh
23-06-2019 12:51 PM
Dev sahu जी सहजन के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप J.B Lal 8290200303से सम्पर्क कर सकते है धन्यवाद
Posted by dev sahu
Chattisgarh
23-06-2019 12:51 PM
Dev sahu जी सहजन के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप J.B Lal 8290200303से सम्पर्क कर सकते है धन्यवाद

Posted by कन्हैया लाल माली
Rajasthan
23-06-2019 12:36 PM
आप गाय को आधा किलो राब खंड और उसमे 4-5 निम्बू मिलाकर देना शुरू करें, इस तरह आप 6 दिन तक दें, इससे धार नरम हो जाएगी
Posted by gk
Punjab
23-06-2019 12:26 PM
gk ji tuc ehna vicho kise ik di varto karo jekar SSP di varto karni hai ta tuc isde vich 75killo di varto karo.dhanwad
Posted by Navkiran
Punjab
23-06-2019 12:25 PM
navkiran ji tuc isde uper NPK 191919@1 killo nu 150 litre pani vich mila ke prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by ramdev meghwal
Rajasthan
23-06-2019 12:21 PM
इसे हर तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे निकास वाली और रेतली सतह वाली ज़मीनों में ज्यादा पैदावार देती है कलराफी और सेम वाली ज़मीन मूंगी की पैदावार के लिए अनुकूल नहीं है प्रसिद्ध किस्में :-K 851: यह मध्यम ऊंचाई वाली किस्म है और खरीफ के साथ साथ गर्मियों में भी बोने के अनुकूल है यह सूखे की हालातों के प्रत.... (Read More)
इसे हर तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे निकास वाली और रेतली सतह वाली ज़मीनों में ज्यादा पैदावार देती है कलराफी और सेम वाली ज़मीन मूंगी की पैदावार के लिए अनुकूल नहीं है प्रसिद्ध किस्में :-K 851: यह मध्यम ऊंचाई वाली किस्म है और खरीफ के साथ साथ गर्मियों में भी बोने के अनुकूल है यह सूखे की हालातों के प्रतिरोधी है यह किस्म 65-70 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 3-4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Muskan: यह किस्म खरीफ के साथ साथ गर्मियों में भी बोने के अनुकूल है यह चितकबरा रोग और नाड़ी तोड़ के प्रतिरोधी किस्म है यह किस्म 75-80 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 5-7.5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Asha: यह मध्यम ऊंचाई वाली किस्म है और खरीफ के साथ साथ गर्मियों में भी बोने के अनुकूल है यह किस्म 65-70 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 3-4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है SML 668: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में बोने के लिए अनुकूल है यह 60 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 4-5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है MUM 2: यह किस्म 60-70 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 4.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa 9531: यह किस्म गर्मियों में बोने के लिए अनुकूल है यह 60 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 4-4.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Vishal: यह किस्म गर्मियों में बोने के लिए अनुकूल है यह 62 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 4-4.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Ganga 8: यह किस्म खरीफ में बोने के लिए अनुकूल है यह 60 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 4.4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है MH 125: यह किस्म 64 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 4.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है MH 421: यह किस्म गर्मियों और खरीफ में बोने के लिए अनुकूल है यह 60 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 4.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है ज़मीन को भुरभुरा करने के लिए दो या तीन जोताई करनी ज़रूरी है प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेर दें खरीफ की ऋतु के लिए बिजाई का अनुकूल समय जुलाई महीने का पहला पखवाड़ा है गर्मी की ऋतु की बिजाई के लिए सही समय मार्च से अप्रैल तक का है बिजाई के लिए बीजों को 4-6 सैं.मी. गहरा बोयें बिजाई के लिए बिजाई वाली मशीन, पोरा या केरा ढंग का प्रयोग किया जाता है खरीफ ऋतु के लिए 8-9 किलो बीज प्रति एकड़ और गर्मी ऋतु के लिए 12-15 किलो बीज प्रति एकड़ के हिसाब से बोयें
Posted by sumit Kumar
Bihar
23-06-2019 12:19 PM
यदि bovimin-gl नहीं मिल रही तो आप उसे का Curan-9 इंजेक्शन लगवा सकते है यह आगे गर्दन के नीचे चमड़ी में लगाया जाता है इसका एक इंजेक्शन 15 दिनों के बाद दोबारा फिर लगा सकते है वैसे Bovimin gl (CARRUS TECHNOLOGY PRIVATE LIMITED) कंपनी का प्रोडक्ट है

Posted by kamlesh Kumar
Rajasthan
23-06-2019 12:19 PM
कमलेश जी आप सब्जी जैसे जून* फूलगोभी, खीरा-ककड़ी, लोबिया, करेला, लौकी, तुरई, पेठा, बीन, भिण्डी, टमाटर, प्याज, चौलाई, शरीफा *जुलाई* खीरा-ककड़ी-लोबिया, करेला, लौकी, तुरई, पेठा, भिण्डी, टमाटर, चौलाई, मूली की बिजाई कर सकते है धन्यवाद

Posted by Tarachand
Haryana
23-06-2019 12:12 PM
Tarachand ji eh ik fungicide hai isdi varto tuc kar sakde ho. jekar patte uper to peele pai rahe han ta tuc isde vich ferrous sulphate di spray karo.dhanwad

Posted by sandeep singh
Punjab
23-06-2019 12:10 PM
Sandeep ji tuc gypsum di varto kar sakde ho isd enal mitti poli ho jandi hai ate paniri tutdi nahi hai.dhanwad
Posted by Ajay Thakur
Uttar Pradesh
23-06-2019 12:08 PM
रोपाई के 2 से 3 दिन बाद नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 50 ई सी 1200 मि.ली. या थायोबेनकार्ब 50 ई सी 1200 मि.ली. या पैंडीमैथालीन 30 ई सी या प्रैटीलाक्लोर 50 ई सी 600 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें इनमें से किसी एक नदीननाशक को 60 किलो रेत में मिलाकर 4-5 सैं.मी. गहरे खड़े पानी में बुरकाव करें
चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए मेटस.... (Read More)
रोपाई के 2 से 3 दिन बाद नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 50 ई सी 1200 मि.ली. या थायोबेनकार्ब 50 ई सी 1200 मि.ली. या पैंडीमैथालीन 30 ई सी या प्रैटीलाक्लोर 50 ई सी 600 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें इनमें से किसी एक नदीननाशक को 60 किलो रेत में मिलाकर 4-5 सैं.मी. गहरे खड़े पानी में बुरकाव करें
चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए मेटसलफुरॉन 20 डब्लयु पी 30 ग्राम को 150 लीटर पानी में मिलाकर नदीनों के अंकुरण के बाद रोपाई के 20-25 दिन बाद डालें स्प्रे से पहले खेत में खड़े पानी का निकास कर दें और स्प्रे के एक दिन बाद सिंचाई करें
नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 1 लीटर को बिजाई के 6 से 7 दिनों के बाद प्रति एकड़ में स्प्रे करें
Posted by Nilesh Yadav Basti
Uttar Pradesh
23-06-2019 11:55 AM
सिंचित और कम बारानी वाले क्षेत्रों के लिए लगभग 41-50 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 90-110 किलो), 30 किलो फासफोरस (एस एस पी 190 किलो) और 27 किलो पोटाश (म्यूरेट ऑफ पोटाश 45 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा रोपाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर, नाइट्रोजन का 1/4 .... (Read More)
सिंचित और कम बारानी वाले क्षेत्रों के लिए लगभग 41-50 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 90-110 किलो), 30 किलो फासफोरस (एस एस पी 190 किलो) और 27 किलो पोटाश (म्यूरेट ऑफ पोटाश 45 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा रोपाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर, नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा शाखाएं निकलने के समय और 1/4 हिस्सा बालियां निकलने के समय डालें
जल जमाव वाले क्षेत्रों में नाइट्रोजन 30-41 किलो (यूरिया 65-90 किलो) प्रति एकड़ में शुरूआती खुराक के तौर पर डालें
कम बारानी क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23-32 किलो (यूरिया 52-70 किलो) और फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो) प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा रोपाई से पहले और बाकी बची नाइट्रोजन बालियां निकलने के समय डालें
ऊंचे क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो) और पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के तीन सप्ताह बाद डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटे पहले भाग को बिजाई के 6 सप्ताह बाद और दूसरे भाग को बालियां निकलने के समय डालें
Posted by Tarnjit virk
Punjab
23-06-2019 11:53 AM
ਪੂਸਾ ਬਾਸਮਤੀ 1121 ਕਿਸਮਾਂ ਲਈ 36 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਦੋ ਬਰਾਬਰ ਕਿਸ਼ਤਾਂ ਵਿਚ ਪਨੀਰੀ ਪੁੱਟ ਕੇ ਲਾਉਣ ਤੋਂ 3 ਹਫ਼ਤੇ ਪਿੱਛੋਂ ਅਤੇ 6 ਹਫ਼ਤੇ ਪਿੱਛੋਂ ਪਾਉ ਇਸਦੇ ਵਿੱਚ 27kg ਡੀਏਪੀ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਡੀਏਪੀ ਨਹੀਂ ਪਾਈ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਸ ਦੇ ਵਿੱਚ 20kg ਪੋਟਾਸ਼ ਪਾਉਣੀ ਹੈ, ਜੋ ਯੂਰੀਆ ਹੈ ਉਸ ਨੂੰ ਤਿੰਨ ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵੰਡ ਕੇ 18-45 ਦਿਨਾ ਤੱਕ ਯੂਰੀਆ ਦੀ ਸਾਰੀ ਮਾਤਰਾ ਪਾ ਦਿਓ ਜੇਕਰ ਖੇਤ ਵ.... (Read More)
ਪੂਸਾ ਬਾਸਮਤੀ 1121 ਕਿਸਮਾਂ ਲਈ 36 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਦੋ ਬਰਾਬਰ ਕਿਸ਼ਤਾਂ ਵਿਚ ਪਨੀਰੀ ਪੁੱਟ ਕੇ ਲਾਉਣ ਤੋਂ 3 ਹਫ਼ਤੇ ਪਿੱਛੋਂ ਅਤੇ 6 ਹਫ਼ਤੇ ਪਿੱਛੋਂ ਪਾਉ ਇਸਦੇ ਵਿੱਚ 27kg ਡੀਏਪੀ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਡੀਏਪੀ ਨਹੀਂ ਪਾਈ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਸ ਦੇ ਵਿੱਚ 20kg ਪੋਟਾਸ਼ ਪਾਉਣੀ ਹੈ, ਜੋ ਯੂਰੀਆ ਹੈ ਉਸ ਨੂੰ ਤਿੰਨ ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵੰਡ ਕੇ 18-45 ਦਿਨਾ ਤੱਕ ਯੂਰੀਆ ਦੀ ਸਾਰੀ ਮਾਤਰਾ ਪਾ ਦਿਓ ਜੇਕਰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਜ਼ਿੰਕ ਪਾਉਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਪਹਿਲੀ ਯੂਰੀਆ ਨਾਲ ਜ਼ਿੰਕ ਮਿਲਾ ਕੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਛਿੱਟਾ ਦੇ ਦਿਓ ਇਹ ਜ਼ਿੰਕ 21% ਵਾਲੀ ਜਾਂ 33% ਵਾਲੀ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ 21% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 25 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ 33% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 16-17 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ

Posted by Tejbir singh
Punjab
23-06-2019 11:52 AM
ਝੋਨੇ ਵਿੱਚ ਯੂਰੀਆ @110 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਝੋਨਾ ਮੁੱਖ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਤੋਂ 18 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਯੂਰੀਆ ਅਤੇ ਡੀਏਪੀ ਪਾਉਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਇਸਦੇ ਵਿੱਚ 27kg ਡੀਏਪੀ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਡੀਏਪੀ ਨਹੀਂ ਪਾਈ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਸ ਦੇ ਵਿੱਚ 20kg ਪੋਟਾਸ਼ ਪਾਉਣੀ ਹੈ, ਜੋ ਯੂਰੀਆ ਹੈ ਉਸ ਨੂੰ ਤਿੰਨ ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵੰਡ ਕੇ 18-45 ਦਿਨਾ ਤੱਕ ਯੂਰੀਆ ਦੀ ਸਾਰੀ ਮਾਤਰਾ ਪਾ ਦਿਓ ਜ.... (Read More)
ਝੋਨੇ ਵਿੱਚ ਯੂਰੀਆ @110 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਝੋਨਾ ਮੁੱਖ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਤੋਂ 18 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਯੂਰੀਆ ਅਤੇ ਡੀਏਪੀ ਪਾਉਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਇਸਦੇ ਵਿੱਚ 27kg ਡੀਏਪੀ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਡੀਏਪੀ ਨਹੀਂ ਪਾਈ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਸ ਦੇ ਵਿੱਚ 20kg ਪੋਟਾਸ਼ ਪਾਉਣੀ ਹੈ, ਜੋ ਯੂਰੀਆ ਹੈ ਉਸ ਨੂੰ ਤਿੰਨ ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵੰਡ ਕੇ 18-45 ਦਿਨਾ ਤੱਕ ਯੂਰੀਆ ਦੀ ਸਾਰੀ ਮਾਤਰਾ ਪਾ ਦਿਓ ਜੇਕਰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਜ਼ਿੰਕ ਪਾਉਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਪਹਿਲੀ ਯੂਰੀਆ ਨਾਲ ਜ਼ਿੰਕ ਮਿਲਾ ਕੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਛਿੱਟਾ ਦੇ ਦਿਓ ਇਹ ਜ਼ਿੰਕ 21% ਵਾਲੀ ਜਾਂ 33% ਵਾਲੀ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ 21% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 25 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ 33% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 16-17 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ

Posted by Balwinder Singh
Punjab
23-06-2019 11:51 AM
ਜੇਕਰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਜ਼ਿੰਕ ਪਾਉਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਪਹਿਲੀ ਯੂਰੀਆ ਨਾਲ ਜ਼ਿੰਕ ਮਿਲਾ ਕੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਛਿੱਟਾ ਦੇ ਦਿਓ ਇਹ ਜ਼ਿੰਕ 21% ਵਾਲੀ ਜਾਂ 33% ਵਾਲੀ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ 21% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 25 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ 33% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 16-17 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
Posted by chanan
Punjab
23-06-2019 11:31 AM
Tuci uss nu Flukarid-ds bolus pett de kiria lai deo ate uss nu Kol liquid 100ml dena suru kro ate Latifur ultra powder deo iss nal farak paa jawega..

Posted by Karpal Brar
Rajasthan
23-06-2019 11:29 AM
बिजाई 4-5 सैं.मी. गहराई में होनी चाहिए शोध के मुताबिक पूर्व से पश्चिम में बिजाई उत्तर से दक्षिण में बिजाई से ज्यादा उपज देती है पंक्ति से पंक्ति का फसला 30 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फसला 67.5 सैं.मी. रखें यदि पिछेती बिजाई करनी हो तो पौधे का फासला कम कर दें और बीज की मात्रा को बढ़ा दें

Posted by balwinder singh
Punjab
23-06-2019 11:18 AM
ਝੋਨੇ ਵਿੱਚ ਯੂਰੀਆ @110 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਝੋਨਾ ਮੁੱਖ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਤੋਂ 18 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਯੂਰੀਆ ਅਤੇ ਡੀਏਪੀ ਪਾਉਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਇਸਦੇ ਵਿੱਚ 27kg ਡੀਏਪੀ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਡੀਏਪੀ ਨਹੀਂ ਪਾਈ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਸ ਦੇ ਵਿੱਚ 20kg ਪੋਟਾਸ਼ ਪਾਉਣੀ ਹੈ, ਜੋ ਯੂਰੀਆ ਹੈ ਉਸ ਨੂੰ ਤਿੰਨ ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵੰਡ ਕੇ 18-45 ਦਿਨਾ ਤੱਕ ਯੂਰੀਆ ਦੀ ਸਾਰੀ ਮਾਤਰਾ ਪਾ ਦਿਓ ਜ.... (Read More)
ਝੋਨੇ ਵਿੱਚ ਯੂਰੀਆ @110 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਝੋਨਾ ਮੁੱਖ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਤੋਂ 18 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਯੂਰੀਆ ਅਤੇ ਡੀਏਪੀ ਪਾਉਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਇਸਦੇ ਵਿੱਚ 27kg ਡੀਏਪੀ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਡੀਏਪੀ ਨਹੀਂ ਪਾਈ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਸ ਦੇ ਵਿੱਚ 20kg ਪੋਟਾਸ਼ ਪਾਉਣੀ ਹੈ, ਜੋ ਯੂਰੀਆ ਹੈ ਉਸ ਨੂੰ ਤਿੰਨ ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵੰਡ ਕੇ 18-45 ਦਿਨਾ ਤੱਕ ਯੂਰੀਆ ਦੀ ਸਾਰੀ ਮਾਤਰਾ ਪਾ ਦਿਓ ਜੇਕਰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਜ਼ਿੰਕ ਪਾਉਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਪਹਿਲੀ ਯੂਰੀਆ ਨਾਲ ਜ਼ਿੰਕ ਮਿਲਾ ਕੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਛਿੱਟਾ ਦੇ ਦਿਓ ਇਹ ਜ਼ਿੰਕ 21% ਵਾਲੀ ਜਾਂ 33% ਵਾਲੀ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ 21% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 25 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ 33% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 16-17 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
Posted by jaswinder singh Jassa
Punjab
23-06-2019 11:17 AM
jaswinder ji jekar paniri ne tillering krni nahi shuru kiti ta koi chakkar nahi hai ji jekar tillering ho gayi hai ta tuc isnu upro kat ke khet vich la sakde ho.dhanwad
Posted by Sarabjit Singh
Punjab
23-06-2019 11:10 AM
ਸਰਬਜੀਤ ਜੀ ਮੌਸਮ ਵਿਭਾਗ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਅਜੇ ਮੀਹ ਪੈਣ ਦੀ ਸੰਭਾਵਨਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
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