Experts Q&A Search

Posted by शैलेंद्र
Madhya Pradesh
25-06-2019 09:54 PM
Punjab
06-26-2019 03:10 PM
आप flukarid-ds bolus पेट के कीड़ों के लिए दें, इसके साथ आप Ovumin gold पाउडर 50 ग्राम रोज़ाना देना शुरू करें और minotas रोज़ाना 1 गोली दें और 21 दिन तक दें, इससे हीट में आ जाएगी.
Posted by Jitendar Mandal
Bihar
25-06-2019 09:34 PM
Punjab
06-26-2019 03:12 PM
Gabhin pashu ko aap rojana 35-40kg hara chara den, iske sath aap uski her 3 mahine ke baad deworming jrur krwayen, baki aap enerboost powder 50-50gm subah sham dena shuru kren aur byane se 2 mahine pehle vitum-h liquid 10ml rojana dena shuru kren.
Posted by anubhav siddhu
Uttar Pradesh
25-06-2019 09:23 PM
Punjab
06-26-2019 01:25 PM
अनुभव जी आप गन्ने के ऊपर NPK 191919 एक किल्लो को 150 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करे
Posted by Rawal Singh
Rajasthan
25-06-2019 09:19 PM
Punjab
06-26-2019 01:28 PM
रावल जी कृपया आप इसकी फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by nazar singh chahal village heron khurd distt mansa
Punjab
25-06-2019 09:16 PM
Punjab
06-27-2019 01:45 PM
tuci uss nu Hitek injection lgwao, ehh tuci usde sarir de bhar ke hisab nal chamdi vich lgwa skde ho..
Posted by Narpinder singh
Punjab
25-06-2019 09:15 PM
Punjab
06-25-2019 09:17 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਪਦਾਨ ਦਾ ਤੁਸੀਂ ਇਕੱਲੀ ਦਾ ਹੀ ਛਿੱਟਾ ਦੇ ਦਿਓ ਜੀ
Posted by r. k. mapit
Madhya Pradesh
25-06-2019 08:54 PM
Punjab
06-26-2019 01:40 PM
सिंचित और कम बारानी क्षेत्रों में रोपाई ढंग प्रयोग किया जाता है रोपाई के लिए 25-30 दिनों के पौधों का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 30-35 दिनों के पौधे रोपाई के लिए प्रयोग करें ऊंचे क्षेत्रों में, शुष्क और गीली मिट्टी में रोपाई ढंग का प्रयोग करें उपजाऊ मिट्टी में 20 सैं.मी. x 15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जब.... (Read More)
सिंचित और कम बारानी क्षेत्रों में रोपाई ढंग प्रयोग किया जाता है रोपाई के लिए 25-30 दिनों के पौधों का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 30-35 दिनों के पौधे रोपाई के लिए प्रयोग करें ऊंचे क्षेत्रों में, शुष्क और गीली मिट्टी में रोपाई ढंग का प्रयोग करें उपजाऊ मिट्टी में 20 सैं.मी. x 15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जबकि हल्की मिट्टी में रोपाई के लिए 15 सैं.मी. x 10 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 20 x 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें पौधे की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए फासला बनाकर लगाने से पौधे ज्यादा पैदावार देते हैं यू पी के सिंचित और निम्न बारानी क्षेत्रों में मध्य जून से शुरूआती जुलाई तक का समय उपयुक्त होता है
Posted by Krishna Patel
Madhya Pradesh
25-06-2019 08:43 PM
Punjab
06-26-2019 01:42 PM
Pesticide की दुकान खोलने के लिए B.SC AGRICULTURE की डिग्री की होनी चाहिए और डिग्री के बाद इसकी दवाई बेचने का लाइसेंस बनता है इसका लाइसेंस बनाने के लिए आपको फाइल कचेहरी से मिल जाती है और इस फाइल को तैयार कर chief of agriculture के हस्ताक्षर करवाकर जमा करवानी पड़ती है और वह बाद में स्थान देखते है और जांच करते है और 1 महीने में आपका लाइसेंस ब.... (Read More)
Pesticide की दुकान खोलने के लिए B.SC AGRICULTURE की डिग्री की होनी चाहिए और डिग्री के बाद इसकी दवाई बेचने का लाइसेंस बनता है इसका लाइसेंस बनाने के लिए आपको फाइल कचेहरी से मिल जाती है और इस फाइल को तैयार कर chief of agriculture के हस्ताक्षर करवाकर जमा करवानी पड़ती है और वह बाद में स्थान देखते है और जांच करते है और 1 महीने में आपका लाइसेंस बन जाता है यह जो chief of agriculture होता है वह के.वी.के. में होता है, ज़िले में इस अफसर की ड्यूटी होती है
Posted by Baljinder Singh
Punjab
25-06-2019 08:35 PM
Punjab
06-26-2019 02:10 PM
baljinder ji kirpa karke daso ke tuc urea di kini matra khet vich payi c ta jo tuhanu is abr epoori janakri diti ja sake.dhanwad
Posted by prashant
Madhya Pradesh
25-06-2019 08:32 PM
Punjab
06-26-2019 05:12 PM
इसे मिट्टी की विभिन्न किस्मों हल्की से उच्च पोषक तत्वों वाली मिट्टी में उगाया जा सकता है जैसे कि गहरी गाद चिकनी, दोमट और उच्च दोमट मिट्टी केले की खेती के लिए उपयुक्त होती है केले की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6 से 7.5 होनी चाहिए केला उगाने के लिए, अच्छे निकास वाली, पर्याप्त उपजाऊ और नमी की क्षमता वाली मिट्टी का .... (Read More)
इसे मिट्टी की विभिन्न किस्मों हल्की से उच्च पोषक तत्वों वाली मिट्टी में उगाया जा सकता है जैसे कि गहरी गाद चिकनी, दोमट और उच्च दोमट मिट्टी केले की खेती के लिए उपयुक्त होती है केले की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6 से 7.5 होनी चाहिए केला उगाने के लिए, अच्छे निकास वाली, पर्याप्त उपजाऊ और नमी की क्षमता वाली मिट्टी का चयन करें उच्च नाइट्रोजन युक्त मिट्टी,पर्याप्त फासफोरस और उच्च स्तर की पोटाश वाली मिट्टी में केले की खेती अच्छी होती है जल जमाव, कम हवादार और कम पौष्टिक तत्वों वाली मिट्टी में इसकी खेती ना करें रेतली, नमक वाली, कैल्शियम युक्त और अत्याधिक चिकनी मिट्टी में भी इसकी खेती ना करें Grand Naine: यह किस्म 2008 में जारी की गई है और यह एशिया में उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है यह औसतन 25-30 किलो गुच्छे निकालते हैं गर्मियों में, कम से कम 3 से 4 बार जोताई करें आखिरी जोताई के समय, 10 टन अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें ज़मीन को समतल करने के लिए ब्लेड हैरो या लेज़र लेवलर का प्रयोग करें वे क्षेत्र जहां निमाटोड की समस्या होती है वहां पर रोपाई से पहले निमाटीसाइड और धूमन, गड्ढों में डालें बिजाई के लिए मध्य फरवरी से मार्च का पहला सप्ताह उपयुक्त होता है केले की जड़ों को 45x 45x45 सैं.मी. या 60x60x60 सैं.मी. आकार के गड्ढों में रोपित करें गड्ढों को धूप में खुला छोड़ें, इससे हानिकारक कीट मर जायेंगे गड्ढों को 10 किलो रूड़ी की खाद या गला हुआ गोबर, नीम केक 250 ग्राम और कार्बोफ्युरॉन 20 ग्राम से भरें जड़ों को गड्ढें के मध्य में रोपित करे और मिट्टी के आसपास अच्छी तरह से दबायें गहरी रोपाई ना करें बिजाई के लिए, रोपाई ढंग का प्रयोग किया जाता है
Posted by baljinder singh
Punjab
25-06-2019 08:24 PM
Maharashtra
06-26-2019 05:03 PM
6444 ਝੋਨੇ ਦੀ ਕਿਸਮ ਦਾ ਝਾੜ ਲਗਭਗ 23-25 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ 135-140 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ
Posted by manpreet
Punjab
25-06-2019 08:21 PM
Punjab
06-26-2019 05:07 PM
manpreet ji eh phosphorus tat di kami nu poora kardi hai jeka rtuc pichli fasl de vich DAP payi hai ta tuhanu is vich 12 32-16 paun di lod nahi hai.dhanwad
Posted by Mudit Pratap Singh
Uttar Pradesh
25-06-2019 08:19 PM
Punjab
06-27-2019 08:34 AM
Mudit ji you can sow varities like Lucknow seedless,Pant Lemon,Lisbon lemon Thank you
Posted by Husanpreet Singh
Punjab
25-06-2019 08:18 PM
Punjab
06-26-2019 03:16 PM
ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਫੀਡ ਦੇ ਨਾਲ 1kg ਸਰੋੰ ਦੀ ਖੱਲ, 1kg ਵੜੇਵਿਆ ਦੀ ਖੱਲ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਉ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਮਿਠਾਸੋਡਾ ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਵਾਰ ਦਿਉ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Fatplus ਪਾਊਡਰ 50gm ਜਾਂ Fatmax ਪਾਊਡਰ 50gm ਅਤੇ Anabolite liquid 100ml ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ.
Posted by Roshan Sharma
Rajasthan
25-06-2019 08:04 PM
Punjab
06-26-2019 04:58 PM
गुलाब फूलों में सबसे मह्त्वपूर्ण फूल है गुलाब की खेती के लिए जैविक तत्वों से भरपूर और अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी अनुकूल होती है बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 6 से 7.5 होना चाहिए यह जल जमाव को सहनयोग्य नहीं है, इसलिए उचित जल निकास का प्रबंध होना चाहिए और अनावश्यक पानी को निकाल देना चाहिए प्रसिद्ध कि.... (Read More)
गुलाब फूलों में सबसे मह्त्वपूर्ण फूल है गुलाब की खेती के लिए जैविक तत्वों से भरपूर और अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी अनुकूल होती है बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 6 से 7.5 होना चाहिए यह जल जमाव को सहनयोग्य नहीं है, इसलिए उचित जल निकास का प्रबंध होना चाहिए और अनावश्यक पानी को निकाल देना चाहिए प्रसिद्ध किस्में :- इसमें तीन मुख्य समूह हैं,1) प्रजातियां 2) पुराने बाग़ 3) आधुनिक या नए गुलाब Species roses: इसे जंगली गुलाब के नाम से भी जाना जाता है इस तरह के फूलों की पांच पंखुड़ियां और रंग चमकीला होता है ये सर्दियों में ज्यादा समय तक रहती हैं जैसे कि: Rosa rugose: इनका मूल स्थान जापान है यह किस्म प्रकृति रूप में कठोर होती हैं इसके फूल बेहद सुगंधित होते हैं, पत्ते झुर्रीदार चमड़े की तरह होते हैं ये घनी और मोटी झाड़ियों में उगते हैं रासायनिक स्प्रे का उपयोग ना करें, क्योंकि इस पर स्प्रे करने से सारे पत्ते झड़ जाते हैं Banksiae: इसे लेडी बैंक केनाम से भी जाना जाता है और इसका मूल स्थान चीन है फूल छोटे, सुगंधित और जामुनी रंग के होते हैं फूल छोटे गुच्छों में लगते है मिट्टी को नरम करने के लिए जोताई और गोड़ाई करें बिजाई से 4-6 सप्ताह पहले खेती के लिए बैड तैयार करें बैड बनाने कि लिए 2 टन रूड़ी की खाद और 2 किलो सुपर फासफेट डालें बैडों को एक समान बनाने के लिए उनको समतल करें और बैडों के ऊपर बोयें होये गुलाब गड्डों में बोयें हुए गुलाबों से ज्यादा मुनाफे वाले होते है उत्तरी भारत में बिजाई का सही समय मध्य अक्तूबर है रोपाई के बाद पौधे को छांव में रखें और अगर बहुत ज्यादा धुप हो, तो पौधे पर पानी का छिड़काव करें दोपहर के अंत वाले समय बोया गया गुलाब बढ़िया उगता है बैड पर 30 सैं.मी. व्यास और 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोद कर 75 सैं.मी. के फासले पर पौधों की बिजाई करें दो पौधों के बीच में फासला गुलाब की किस्म पर निर्भर करता है बीजों को 2-3 सैं.मी. गहराई में बोयें इसकी बिजाई सीधी या पनीरी लगा कर की जाती है गुलाब की फसल का का प्रजनन काटी गई जड़ों और बडिंग द्वारा किया जाता है उत्तरी भारत में दिसंबर-फरवरी महीने का समय टी-बडिंग के लिए उचित होता है पौधे की कांट-छांट दूसरे और उसके बाद के वर्षों में की जाती है उत्तरी भारत में गुलाब की झाड़ियों की कांट-छांट अक्तूबर के दूसरे या तीसरे हफ्ते में की जाती है जो शाखाएं झाड़ियों को घना बनाएं, उन्हें निकाल दें लटके हुए गुलाबों को छंटाई की जरूरत नहीं होती छंटाई के बाद, अच्छे से गले हुए 7-8 किलो गाय के गोबर को प्रति पौधे को डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें ग्रीन हाउस में, गुलाबों को पंक्तियों में बोया जाता है और पौधों का घनत्व 7-14 पौधे प्रति वर्ग मीटर होनी चाहिए बैड की तैयारी के समय 2 टन रूड़ी की खाद और 2 किलो सुपर फास्फेट को मिट्टी में डालें तीन महीने के फासले पर 10 किलो रूड़ी की खाद और 8 किलो नाइट्रोजन, 8 किलो फासफोरस और 16 किलो पोटाश प्रति पौधे में डालें छंटाई के बाद ही सारी खादों को डालें ज्यादा पैदावार लेने के लिए छंटाई से एक महीने बाद, जी ए 3@ 200 पी पी एम(2 ग्राम प्रति लीटर) की स्प्रे करें पौधे की तनाव सहन शक्ति को बढ़ाने के लिए घुलनशील जड़ उत्तेजक(रैली गोल्ड/रिजोम) 100 ग्राम+ टिपोल 60 मि.ली. को 100 लीटर पानी में डालकर प्रति एकड़ में शाम के समय सिंचाई करें मोनोकोट नदीनों की रोकथाम के लिए ग्लाइफोसेट 300 ग्राम और डिकोट नदीनों को रोकने के लिए ऑक्सीफ्लूरॉन 200 ग्राम को अंकुरन से पहले प्रति एकड़ में स्प्रे करें पौधों को खेत में लगाएं ताकि बढ़िया ढंग से विकास कर सके सिंचाई मिट्टी की किस्म और जलवायु के अनुसार करें आधुनिक सिंचाई तकनीक जैसे ड्रिप सिंचाई गुलाब की खेती के लिए लाभदायक होती है फव्वारा सिंचाई से परहेज करें क्योंकि इससे पत्तों को लगने वाली बीमारियां बढ़ती हैं गुलाब की फसल से दूसरे वर्ष से बढ़िया किफायती पैदावार लिया जा सकता है गुलाब की तुड़ाई फूलों का रंग पूरी तरह से विकसित पर और पहली एक और दो पंखुड़ियां खुलनी(पर पूरी तरह नहीं) पर तेज़ छुरी की सहायता से की जाती है निर्धारित लंबाई होने पर हाथ वाली छुरी के साथ काटा जाता है विदेशी बाज़ार के मांग के अनुसार बड़े फूलों के लिए तने की लंबाई 60-90 सैं.मी. और छोटे फूलों के लिए 40-50 सैं.मी. होती है फ़ॉलोन को सुबह जल्दी या दोपहर के अंत वाले समय में तोडना चाहिए इसकी मार्केटिंग आप नजदीकी फूल मार्किट में कर सकते है धन्यवाद
Posted by rajesh saini
Rajasthan
25-06-2019 07:55 PM
Rajasthan
06-27-2019 06:37 PM
Rajesh saini जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र यहाँ जून और जुलाई मह.... (Read More)
Rajesh saini जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र यहाँ जून और जुलाई महीने में 3 दिन का प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए जून - 22,23,24 (प्रशिक्षण की तारीख ) जुलाई - 20,21,22 (प्रशिक्षण की तारीख ) अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Raj dadawat
Rajasthan
25-06-2019 07:52 PM
Punjab
06-26-2019 09:51 PM
उसे आप Sharkoferol liquid 25-25ml सुबह शाम दें और Trinosole-hp 3ml, Nurokind 10ml, Metphos 10ml, Tinacal 20ml injection यह सभी इंजेक्शन तीन दिन लगवायें इससे जल्दी फर्क पड़ जाएगा आप तीन दिनों के बाद दोबारा सवाल पूछ सकते हैं
Posted by Davinder Kumar
Punjab
25-06-2019 07:45 PM
Punjab
06-26-2019 04:55 PM
Davinder ji tuc isnu 8-10 killo vermicompost prati boota pao. isto ilava isde uper tuc zinc sulphate@3 gram nu prati litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by Anil Rana
Punjab
25-06-2019 07:29 PM
Rajasthan
06-27-2019 02:12 PM
Anil Rana ji you can contact to us on 96490 38200 .
Posted by Surinder Sra
Haryana
25-06-2019 07:26 PM
Maharashtra
06-26-2019 04:53 PM
इसकी खेती कई प्रकार की मिट्टी, जैसे कि रेतली-दोमट से चिकनी-दोमट या गहरी चिकनी-दोमट या तेज़ाबी मिट्टी में की जाती है, जिनका जल निकास अच्छा हो यह फसल नमकीन और क्षारीय मिट्टी में विकास नहीं करती है यह जल-जमाव वाली मिट्टी को भी सहनयोग्य है फसल के उचित विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7.5 होना चाहिए
Posted by ajay yadav
Haryana
25-06-2019 07:07 PM
Punjab
06-25-2019 09:23 PM
US-51 कपास में DAP 25kg, 110kg यूरिया, 25kg पोटाश,zinc 21%16 kg और मैग्नीशियम सलफेट 10kg प्रति एकड़ डाल सकते हैं।
Posted by malkeet
Punjab
25-06-2019 07:07 PM
Punjab
06-26-2019 03:33 PM
Malkeet ji pashu nu suun ton 2 mahina badd heat vich auun te nawe duudh krwauna chahida hai, baki kujj pashu suun ton 2-3 mahina badd v heat ch aa jnde hai, kujj pashu suun ton 7-8 mahina tak v heat vich nahi aunnde , ehh pashu di khurak, usdi nasal te nirbhar krda hai, baki pashu nu rojana mineral mixture ate deworming krna v jruri hai.
Posted by krishan kumar
Haryana
25-06-2019 07:05 PM
Punjab
06-26-2019 04:50 PM
Krishan ji please tell us which amount of fertilizers you have provided to the crop so that we can give you information accordingly. Thank you
Posted by प्रथ्विराज सिसोदिया
Madhya Pradesh
25-06-2019 07:03 PM
Maharashtra
06-26-2019 04:42 PM
प्रथ्विराज जी आप फफूंद की रोकथाम के लिए carbendazim @3 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Dwarika Prasad
Uttar Pradesh
25-06-2019 07:02 PM
Rajasthan
07-30-2019 07:08 PM
Dwarika Prasad जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर.... (Read More)
Dwarika Prasad जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Harwinder singh
Punjab
25-06-2019 06:37 PM
Punjab
06-26-2019 04:35 PM
harwinder ji tuc urea de nal biovita@4 killo prati acre de hisab nal rla ke khet vich pa sakde ho.dhanwad
Posted by Harwinder singh
Punjab
25-06-2019 06:32 PM
Punjab
06-25-2019 09:25 PM
Jhone vich nutrient proper dose vich pao jiss nal growth v vdia hundi hai and tuc mychorhiza v pa skde ho g..
Posted by Jogesh Kumar
Uttar Pradesh
25-06-2019 06:31 PM
Punjab
06-26-2019 04:04 PM
बाजरा को मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है यह जल जमाव और तेजाबी मिट्टी में खड़ी नहीं रह सकती अच्छे निकास वाली काली कपास मिट्टी और रेतली देामट मिट्टी में उगान पर अच्छे परिणाम देती है KBH 108 (MH 1737): यह किस्म 80-86 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है MPMH 17: यह किस्म 79 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह बारान.... (Read More)
बाजरा को मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है यह जल जमाव और तेजाबी मिट्टी में खड़ी नहीं रह सकती अच्छे निकास वाली काली कपास मिट्टी और रेतली देामट मिट्टी में उगान पर अच्छे परिणाम देती है KBH 108 (MH 1737): यह किस्म 80-86 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है MPMH 17: यह किस्म 79 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह बारानी हालातों के लिए उपयुक्त किस्म है MH 1747: यह किस्म 84 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म खरीफ के मौसम में बिजाई के लिए उपयुक्त है Avika Bajra chari: यह दोहरे मंतव की किस्म है इसे हरे चारे के साथ साथ दाने लेने के उद्देश्य से उपयोग किया जाता है इसकी हरे चारे की औसतन उपज 15 टन और दानों की उपज 4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है 86M86: यह हाइब्रिड किस्म पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है और 80-85 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें भारी और नदीनों से ग्रसित मिट्टी की दो बार जोताई करें आखिरी जोताई के समय 6 टन गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में मिलायें बाजरे की बिजाई के लिए जुलाई के पहले पखवाड़े का समय अनुकूल होता है कतार से कतार में 40-45 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 10-15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को 2.5-3 सैं.मी. गहराई में बोयें बिजाई के लिए गड्डा खोदकर या बीज ड्रिल विधि का प्रयोग किया जाता है
Posted by Gurvail Singh Khera
Punjab
25-06-2019 06:30 PM

?

Punjab
06-26-2019 03:35 PM
Gurvail ji kirpa krke apna swal vistar nal pusho ji tuci ki jankari lena chahunde ho, tuhade walo beji gayi audio upload nhi hoi hai kirpa krke dubara upload kro tan jo tuhanu sahi jankari diti jaa skee.
Posted by Ramraksha jaiswal
Madhya Pradesh
25-06-2019 06:24 PM
Maharashtra
06-26-2019 04:07 PM
देसी कपास के लिए रेतली दोमट से चिकनी मिट्टी की आवश्यकता होती है और अमेरिकन कपास की किस्मों के लिए दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है इसे हर तरह की मिट्टी, जिसकी पी एच दर 6-8 होती है, में उगाया जा सकता है इस फसल की खेती के लिए गहरी, नर्म, अच्छे निकास वाली और उपजाऊ मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है कपास की बिजाई के लिए रेत.... (Read More)
देसी कपास के लिए रेतली दोमट से चिकनी मिट्टी की आवश्यकता होती है और अमेरिकन कपास की किस्मों के लिए दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है इसे हर तरह की मिट्टी, जिसकी पी एच दर 6-8 होती है, में उगाया जा सकता है इस फसल की खेती के लिए गहरी, नर्म, अच्छे निकास वाली और उपजाऊ मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है कपास की बिजाई के लिए रेतली, खारी या जल जमाव वाली मिट्टी ठीक नहीं होती मिट्टी की गहराई 20-25 सैं.मी. से कम नहीं होनी चाहिए अमेरिकन कपास की किस्में RS 2013: यह किस्म कपास के पत्ता मरोड़ रोग की प्रतिरोधक है और अमेरिकन सुंडी और तेले की कुछ हद तक प्रतिरोधक है इसका औसतन कद 125-130 सैं.मी. होता है यह पीले रंग के फूलों का उत्पादन करती है और इसके मध्यम आकार के टिंडे होते हैं यह किस्म 165-170 दिनों में परिपक्व हो जाती है इसके कपास की बीजों की औसतन पैदावार 22-24 क्विंटल प्रति एकड़ होती है और पिंजाई के बाद 35 प्रतिशत रूई प्राप्त होती है RS 810: यह किस्म कपास के पत्ता मरोड़ रोग की प्रतिरोधक है इसका औसतन कद 130-140 सैं.मी. होता है यह पीले रंग के फूलों का उत्पादन करती है और इसके मध्यम आकार के टिंडे होते हैं इसके कपास की बीजों की औसतन पैदावार 22-24 क्विंटल प्रति एकड़ होती है और पिंजाई के बाद 35 प्रतिशत रूई प्राप्त होती है RST 9: इस किस्म के हल्के हरे रंग के पत्ते और हल्के पीले रंग के फूल होते हैं इसका औसतन कद 130-140 सैं.मी. होता है यह किस्म 160-200 दिनों में परिपक्व हो जाती है इसके टिंडे का औसतन भार 3.5 ग्राम होता है इसकी पिंजाई के बाद रूई की उच्च प्रतिशतता प्राप्त होती है इस किस्म की पहली सिंचाई 50 दिनों के बाद की जा सकती है RS 875: इसका औसतन कद 100-110 सैं.मी. होता है इसके मध्यम आकार के टिंडे होते हैं जिनका औसतन भार 3.5 ग्राम प्रति टिंडा होता है इस किस्म की तेल की मात्रा बाकी सिफारिश की गई किस्मों से अधिक होती है यह किस्म 150-160 दिनों में परिपक्व हो जाती है Ganganagar Ageti: इसका औसतन कद 120-150 सैं.मी. होता है इसके गहरे हरे रंग के पत्ते और हल्के पीले रंग के फूल होते हैं इसके मध्यम आकार के टिंडे होते हैं जिनका औसतन भार 2.5 ग्राम प्रति टिंडा होता है यह किस्म 170-180 दिनों में परिपक्व हो जाती है Bikaneri Narma: इसका औसतन कद 160-200 सैं.मी. होता है इसके मध्यम आकार के टिंडे होते हैं जिनका औसतन भार 2.0 ग्राम प्रति टिंडा होता है यह किस्म 160-200 दिनों में परिपक्व हो जाती है Bioseed Bunty BG II: यह उच्च उपज वाली अमेरिकन बी टी कपास की किस्म है पौधे का कद 150-170 सैं.मी. होता है इसकी औसतन पैदावार 8.8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है RCH 650BG II: यह उच्च उपज वाली अमेरिकन बी टी कपास की किस्म है यह टिंडे की सुंडी और तंबाकू सुंडी के प्रतिरोधी किस्म है पौधे का कद 150-160 सैं.मी. होता है इसकी औसतन पैदावार 8.8-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है MRCH - 6304 BG I: यह उच्च उपज वाली अमेरिकन बी टी कपास की किस्म है यह टिंडे की सुंडी और तंबाकू सुंडी के प्रतिरोधी किस्म है यह किस्म 165-170 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Bioseed 6588 BG-II: इसके पौधे का कद 150-175 सैं.मी. होता है यह टिंडे की सुंडी और तंबाकू सुंडी के प्रतिरोधी किस्म है इसकी औसतन पैदावार 10-11.2 क्विंटल प्रति एकड़ होती है जब टिंडे पूरी तरह खिल जायें तो रूई की चुगाई करें सूखे टिंडों की चुगाई करें, रूई सूखे हुए पत्तों के बिना ही चुगें खराब टिंडों को अलग से चुगें और बीज के तौर पर प्रयोग करने के लिए रखें पहली और आखिरी चुगाई आमतौर पर कम क्वालिटी की होती है, इसलिए इसे अच्छा लाभ लेने के लिए बाकी की फसल के साथ ना मिलाएं चुगे हुए टिंडे साफ और सूखे हुए होने चाहिए चुगाई ओस सूखने के बाद करें चुगाई हर 7-8 दिनों के बाद लगातार करें, ताकि रूई के धरती पर गिरने से पहुंचाने वाली नुकसान से बचाया जा सके अमेरिकन कपास को 15-20 दिनों और देसी कपास को 8-10 दिनों के फासले पर चुगें चुगे हुए टिंडों को मंडी ले जाने से पहले अच्छी तरह साफ करें फसल की अच्छी पैदावार और अच्छे अंकुरण के लिए ज़मीन को अच्छी तरह तैयार करना जरूरी होता है रबी की फसल को काटने के बाद तुरंत खेत को पानी लगाना चाहिए इसके बाद खेत की हल से अच्छी तरह जोताई करें और फिर सुहागा फेर दें ज़मीन को तीन वर्षों में एक बार गहराई तक जोतें, इससे सदाबहार नदीनों की रोकथाम में मदद मिलती है और इससे मिट्टी में पैदा होने वाले कीड़ों और बीमारियों को भी रोका जा सकता है बिजाई के लिए अप्रैल से मध्य मई का समय उपयुक्त होता है अमेरिकन कपास के लिए कतार से कतार का फासला 60 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 45 सैं.मी. रखें देसी कपास की किस्म के लिए कतार से कतार का फासला 45 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासल 30 सैं.मी. रखें बीजों के अंकुरन ना होने और नए पौधों के नष्ट होने के कारण कुछ फासले पड़ जाते हैं इन्हें भरने के लिए 2-3 पानी में भिगोये हुए बीजों या अंकुरन के बाद एक सेहतमंद नए पौधे को बोयें बिजाई के दो सप्ताह बाद कमज़ोर, बीमार, प्रभावित नए पौधों को निकालकर सेहतमंद नए पौधे की रोपाई करें बीजों को बोने के लिए 4-5 सैं.मी. की गहराई होनी चाहिए देसी कपास की बिजाई के लिए सीड ड्रिल का प्रयोग करें जब कि हाइब्रिड और बी टी कपास के लिए डिबलिंग ढंग का प्रयोग करें आयताकार रोपाई के मुकाबले वर्गाकार रोपाई ज्यादा लाभदायक होती है बीजों के अंकुरन ना होने और नए पौधों के नष्ट होने के कारण कुछ फासले पड़ जाते हैं इन्हें भरने के लिए 2-3 पानी में भिगोये हुए बीजों या अंकुरन के बाद एक सेहतमंद नए पौधे को बोयें बिजाई के दो सप्ताह बाद कमज़ोर, बीमार, प्रभावित नए पौधों को निकालकर सेहतमंद नए पौधे की रोपाई करें हाइब्रिड और बी टी कपास के लिए 1 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें, जब कि देसी किस्मों के लिए 3-5 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें पौधों में ज्यादा फासला होने के कारण फसल पर नदीनों का गंभीर हमला होता है अच्छी पैदावार के लिए फसल की बिजाई के बाद 50-60 दिनों तक फसल का नदीन रहित होना जरूरी है, नहीं तो फसल की पैदावार में 60-80 प्रतिशत कमी आ सकती है नदीनों की असरदार रोकथाम के लिए हाथों से, मशीनी और रासायनिक ढंगों के सुमेल का उपयोग होना जरूरी है बिजाई के 5-6 सप्ताह बाद या पहली सिंचाई करने से पहले हाथों से गोडाई करें बाकी गोडाई प्रत्येक सिंचाई के बाद करनी चाहिए कपास के खेतों के आस पास गाजर बूटी पैदा ना होने दें, क्योंकि इससे मिली बग के हमले का खतरा ज्यादा रहता है बिजाई के बाद नदीनों के पैदा होने से पहले ही पैंडीमैथालीन 25-33 मि.ली. प्रति 10 लीटर पानी की स्प्रे करें बिजाई के 6-8 सप्ताह बाद जब पौधों का कद 40-45 सैं.मी. हो तो पेराकुएट (ग्रामोक्सोन) 24 प्रतिशत डब्लयू एस सी 500 मि.ली. प्रति एकड़ या ग्लाइफोसेट 1 लीटर को 100 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीन नाशक 2, 4-डी से कपास की फसल काफी संवेदनशील होती है बेशक इस नदीननाश्क की स्प्रे नज़दीक के खेत में की जाए, तो भी इसके कण उड़ कर कपास की फसल को बहुत ज्यादा नुकसान पहंचा सकते हैं नदीन नाशक की स्प्रे सुबह या शाम के समय में ही करनी चाहिए खादें और सिंचाई के साधनों के सही उपयोग और अच्छी तरह से की जोताई से कीड़ों को पैदा होने से पहले ही रोका जा सकता है कीड़ों के कुदरती दुश्मनों की भी रक्षा की जा सकती है पौधे के उचित विकास और ज्यादा टिंडे वाली टहनियों की प्रफुल्लता के लिए, मुख्य टहनी के बढ़ रहे हिस्से को लगभग 5 फुट की ऊंचाई से काट दें देसी कपास की किस्मों क लिए नाइट्रोजन 20 किलो (यूरिया 44 किलो) और फासफोरस 10 किलो (एस एस पी 63 किलो) प्रति एकड़ में डालें हाइब्रिड कपास की किस्मों के लिए खादों की दोहरी मात्रा नाइट्रोजन 40 किलो और फासफोरस 20 किलो प्रति एकड़ में डालें मिट्टी की जांच के आधार पर पोटाश डालें फासफोरस की पूरी मात्रा और पोटाश यदि जरूरत हो तो और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई से पहले आखिरी जोताई के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा फूल निकलने के समय डालें यदि मिट्टी में जिंक की कमी हो तो जिंक सल्फेट 10 किलो मिट्टी में बीज बोने से पहले डालें कपास की फसल को बारिश की तीव्रता के अनुसार चार से छः सिंचाई की जरूरत होती है पहली सिंचाई बिजाई के चार से छः सप्ताह बाद करें बाकी सिंचाइयां दो या तीन सप्ताह के फासले पर करें छोटे पौधों में पानी खड़ा ना होने दें फूल और टिंडे गिरने से बचाने के लिए, फूल निकलने और फूल लगने के समय फसल को पानी की कमी नहीं रहने देनी चाहिए जब टिंडे 33 प्रतिशत खिल जायें उस समय आखिरी सिंचाई करें और इसके बाद फसल को सिंचाई के द्वारा पानी ना दें जब भी फसल की सिंचाई के लिए खारे पानी का उपयोग किया जाये, तो सिंचाई करने से पहले पानी की जांच प्रमाणित लैबोरेटरी से करवाएं और उनकी सलाह के अनुसार ही पानी में जिप्सम या पाइराइट का उपयोग करें सूखे वाली स्थितियों में खालियां बनाकर और एक क्यारी छोड़कर सिंचाई करें सूक्ष्म सिंचाई सिस्टम अपनाएं (जहां भी संभव हो), इससे सिंचाई वाला पानी बचाने में सहायता होती है
Posted by kiran bhandari
Uttarakhand
25-06-2019 06:13 PM
Punjab
06-26-2019 04:09 PM
kiran ji kripya iske label ki photo bhejen taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by jaswant Singh
Punjab
25-06-2019 05:59 PM
Punjab
06-26-2019 03:40 PM
jaswant singh ji kirpa krke pig farm ate Poultry farm di video bnna ke behjo jiss vich ohna di duuri pta lgge ate ohh de rehn vare ptaa lgg skee, jiss nu dekh ke tuhanu sahi jankari di jaa skee.
Posted by waraich
Punjab
25-06-2019 05:55 PM
Punjab
06-25-2019 06:01 PM
tuci uss nu minerla mixture 50gm rojana dena suru kro ate TOtavet bolus v deo, iss nal heat vich aa jawegi, jekar heat vich nahi aunndi tan tuci dubara apna swal push skde ho. pehla tuci ehh treatment kr skde ho.
Posted by parmvir dhillon
Punjab
25-06-2019 05:52 PM
Maharashtra
06-26-2019 03:48 PM
ਝੋਨੇ ਵਿੱਚ ਯੂਰੀਆ @110 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਝੋਨਾ ਮੁੱਖ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਤੋਂ 18 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਯੂਰੀਆ ਅਤੇ ਡੀਏਪੀ ਪਾਉਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਇਸਦੇ ਵਿੱਚ 27kg ਡੀਏਪੀ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਡੀਏਪੀ ਨਹੀਂ ਪਾਈ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਸ ਦੇ ਵਿੱਚ 20kg ਪੋਟਾਸ਼ ਪਾਉਣੀ ਹੈ, ਜੋ ਯੂਰੀਆ ਹੈ ਉਸ ਨੂੰ ਤਿੰਨ ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵੰਡ ਕੇ 18-45 ਦਿਨਾ ਤੱਕ ਯੂਰੀਆ ਦੀ ਸਾਰੀ ਮਾਤਰਾ ਪਾ ਦਿਓ ਜ.... (Read More)
ਝੋਨੇ ਵਿੱਚ ਯੂਰੀਆ @110 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਝੋਨਾ ਮੁੱਖ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਤੋਂ 18 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਯੂਰੀਆ ਅਤੇ ਡੀਏਪੀ ਪਾਉਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਇਸਦੇ ਵਿੱਚ 27kg ਡੀਏਪੀ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਡੀਏਪੀ ਨਹੀਂ ਪਾਈ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਸ ਦੇ ਵਿੱਚ 20kg ਪੋਟਾਸ਼ ਪਾਉਣੀ ਹੈ, ਜੋ ਯੂਰੀਆ ਹੈ ਉਸ ਨੂੰ ਤਿੰਨ ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵੰਡ ਕੇ 18-45 ਦਿਨਾ ਤੱਕ ਯੂਰੀਆ ਦੀ ਸਾਰੀ ਮਾਤਰਾ ਪਾ ਦਿਓ ਜੇਕਰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਜ਼ਿੰਕ ਪਾਉਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਪਹਿਲੀ ਯੂਰੀਆ ਨਾਲ ਜ਼ਿੰਕ ਮਿਲਾ ਕੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਛਿੱਟਾ ਦੇ ਦਿਓ ਇਹ ਜ਼ਿੰਕ 21% ਵਾਲੀ ਜਾਂ 33% ਵਾਲੀ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ 21% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 25 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ 33% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 16-17 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
Posted by ਪਿ੍ਤਪਾਲ ਸਿੰਘ
Punjab
25-06-2019 05:49 PM
Rajasthan
06-25-2019 05:59 PM
ਮੱਖੀਆਂ ਦੇ ਇਲਾਜ ਜੇਕਰ ਦੇਸੀ ਤਰੀਕਾ ਵਰਤਣਾ ਹੈ ਤਾਂ ਥੋੜੇ ਜੇ ਨਿੰਮ ਦੇ ਪੱਤੇ ਤੇ ਗਲੋਅ ਦੇ ਪੱਤੇ ਲਿਆੳ ਅੰਦਾਜਨ ਦੋਨੋ 200 ਗ੍ਰਾਮ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ ਜਾਂ ਫਿਰ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਘੱਟ ਵੱਧ ਵੀ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਫਿਰ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਕੂਡੇ ਵਿੱਚ ਕੁੱਟ ਕੇ ਪੀਸ ਲੈਣਾ. ਪੀਸਦੇ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਥੋੜਾ ਜਿਹਾ ਪਾਣੀ ਵੀ ਪਾਉਦੇ ਰਹੋ, ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜਦੋਂ ਪੀਸ ਲਏ ਤਾਂ ਪਾਣੀ ਨਿਚੋੜ ਲੈਣਾ ਤੇ ਪੱਤੇ ਸੁੱਟ ਦੇਣ.... (Read More)
ਮੱਖੀਆਂ ਦੇ ਇਲਾਜ ਜੇਕਰ ਦੇਸੀ ਤਰੀਕਾ ਵਰਤਣਾ ਹੈ ਤਾਂ ਥੋੜੇ ਜੇ ਨਿੰਮ ਦੇ ਪੱਤੇ ਤੇ ਗਲੋਅ ਦੇ ਪੱਤੇ ਲਿਆੳ ਅੰਦਾਜਨ ਦੋਨੋ 200 ਗ੍ਰਾਮ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ ਜਾਂ ਫਿਰ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਘੱਟ ਵੱਧ ਵੀ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਫਿਰ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਕੂਡੇ ਵਿੱਚ ਕੁੱਟ ਕੇ ਪੀਸ ਲੈਣਾ. ਪੀਸਦੇ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਥੋੜਾ ਜਿਹਾ ਪਾਣੀ ਵੀ ਪਾਉਦੇ ਰਹੋ, ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜਦੋਂ ਪੀਸ ਲਏ ਤਾਂ ਪਾਣੀ ਨਿਚੋੜ ਲੈਣਾ ਤੇ ਪੱਤੇ ਸੁੱਟ ਦੇਣਾ ਨਿਚੋੜੇ ਹੋਏ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਥੋੜਾ ਜਿਹਾ ਅੰਦਾਜ਼ੇ ਨਾਲ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰ ਲਵੋ ਉਸ ਮਿਕਸ ਕੀਤੇ ਮਿਸ਼ਰਣ ਨੂੰ ਕੱਪੜੇ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਸਾਰੇ ਸਰੀਰ ਤੇ ਮਲ ਦਿਓ ਜੀ.
Posted by sandeep singh
Punjab
25-06-2019 05:46 PM
Punjab
06-27-2019 01:42 PM
ਮਾਰਕਫੈੱਡ ਫੀਡ ਵਿਚ ਛੋਲੇ, ਮੱਕੀ, ਕਣਕ, ਸਰੋਂ, ਵੜੇਮੇ ਦੀ ਖੱਲ, ਸੀਰਾ, ਮਿਨਰਲ ਮਿਕਸਚਰ ਇਹ ਚੀਜਾਂ ਪਾਈਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹੈ