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Posted by Gurpiar
Punjab
06-07-2019 09:04 PM
Punjab
07-06-2019 10:41 PM
Posted by Sukh Sidhu
Punjab
06-07-2019 09:01 PM
Punjab
07-07-2019 07:15 AM
सीधू जी आप भैंस को पेट के कीड़ों ​के लिए Flukarid-ds bolus दें इसके साथ आप Agrimin super powder 100gm रोजाना और Ovumin advance bolus रोजाना एक गोली दें और 21 दिनों तक दें इससे हीट में आ जाएगी
Posted by Sukh Sidhu
Punjab
06-07-2019 08:57 PM
Punjab
07-07-2019 07:15 AM
सीधू जी आप भैंस को पेट के कीड़ों ​के लिए Flukarid-ds bolus दें इसके साथ आप Agrimin super powder 100gm रोजाना और Ovumin advance bolus रोजाना एक गोली दें और 21 दिनों तक दें इससे हीट में आ जाएगी
Posted by Sadab
Uttar Pradesh
06-07-2019 08:55 PM
Punjab
08-21-2019 02:46 PM
धान भारत की एक महत्तवपूर्ण फसल है जो कि जोताई योग्य क्षेत्र के लगभग एक चौथाई हिस्से में उगाई जाती है और भारत की लगभग आधी आबादी इसे मुख्य भोजन के रूप में प्रयोग करती है यह उत्तर प्रदेश की मुख्य फसल है और उत्तर प्रदेश के लगभग 5.4 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है Basmati, Kalajeera, Vishnu Parag आदि धान की कुछ उच्च ग.... (Read More)
धान भारत की एक महत्तवपूर्ण फसल है जो कि जोताई योग्य क्षेत्र के लगभग एक चौथाई हिस्से में उगाई जाती है और भारत की लगभग आधी आबादी इसे मुख्य भोजन के रूप में प्रयोग करती है यह उत्तर प्रदेश की मुख्य फसल है और उत्तर प्रदेश के लगभग 5.4 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है Basmati, Kalajeera, Vishnu Parag आदि धान की कुछ उच्च गुणवत्ता वाली किस्में हैं जिनकी खेती उत्तर प्रदेश में की जाती है मिट्टी इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है प्रसिद्ध किस्में और पैदावार Jaya: यह छोटे कद की और अधिक उपज देने वाली किस्म गर्दन तोड़ के प्रतिरोधक है यह किस्म 142 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने बड़े और लंबे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 26 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Chakia 59: यह किस्म कम जल जमाव वाले हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है Govind: यह किस्म पंतनगर द्वारा विकसित की गई है यह किस्म 105 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Indrasan: यह तराई क्षेत्रों की प्रसिद्ध किस्म है Mahsud: यह किस्म निचले क्षेत्रों में बारानी स्थितियों में उगाने के लिए उपयुक्त है Majhera 3: यह लंबी किस्म सूखे को सहनेयोग्य है और ऊंचे क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Nagina 22: यह ऊंचे क्षेत्रों में बारानी हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं Narendra-1 and Narendra-2: यह किस्म 105 और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Pant Dhan 6: यह किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त है Saket 4: यह अगेते समय की किस्म है और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह यू पी की सबसे प्रसिद्ध किस्म है T9: यह देरी से बोयी जाने वाली सुगंधित किस्म है इसके दाने बेलनाकार होते हैं VL Dhan 16: यह निम्न और मध्यम क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त किस्म है VL 206: यह लंबी किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Usar 1: यह किस्म कानपुर में विकसित की गई यह क्षारीय और लवणीय मिट्टी में खेती करने के लिए उपयुक्त है बासमती किस्में Taraori Basmati: यह सिंचित क्षेत्रों में अगेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म 145-155 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Haryana Basmati no 1: यह अर्द्ध छोटे कद की किस्म है और सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Basmati 1121, Pusa Basmati 1, CSR 30, Shabnam दूसरे राज्यों की किस्में Hybrid 6201: यह सिंचित क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है यह भुरड़ रोग के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 25 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Vivek Dhan 62: यह सिंचित और पहाड़ी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं यह भुरड़ रोग के प्रतिरोधक किस्म है यह गर्दन तोड़ और कम तापमान वाले क्षेत्रों को भी सहन कर सकती है इसकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Karnataka Rice Hybrid 2: यह सिंचित और समय से बिजाई वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह पत्तों के झुलस रोग और अन्य बीमारियों को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 35 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kanak: यह दरमियाने क्षेत्रों में बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने लंबे और मोटे होते हैं यह बैक्टीरियल झुलस रोग के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Ratnagiri 1 and 2: सिंचित क्षेत्रों के लिए जबकि निचले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है ये अर्द्ध छोटे कद की किस्म हैं इनकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल और 21 क्विंटल प्रति एकड़ होती है ज़मीन की तैयारी शुष्क खेतों को अच्छा बनाने, नदीन रहित और सेहतमंद वृद्धि के लिए ग्लाफोसेट डालनी चाहिए गेहूं की कटाई के बाद ज़मीन पर हरी खाद के तौर पर मई के पहले सप्ताह ढैंचा (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़), या सन (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़) या लोबीया (बीज दर 12 किलोग्राम प्रति एकड़) की बिजाई करनी चाहिए जब फसल 6 से 8 सप्ताह की हो जाए तो इसे खेत में कद्दू करने से एक दिन खेत में ही जोत देना चाहिए इस तरह प्रति एकड़ 25 किलो नाइट्रोजन खाद की बचत होती है भूमि को समतल करने के लिए लेज़र लेवलर का प्रयोग किया जाता है इसके बाद खेत में पानी खड़ा कर दें ताकि भूमि के अंदर ऊंचे नीचे स्थानों की पहचान हो सके इस तरह पानी के रसाव के कारण पानी की होने वाले बर्बादी को कम किया जा सके बिजाई बिजाई का समय यू पी के सिंचित और निम्न बारानी क्षेत्रों में मध्य जून से शुरूआती जुलाई तक का समय उपयुक्त होता है बीज की गहराई पौधे की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए फासला बनाकर लगाने से पौधे ज्यादा पैदावार देते हैं फासला उपजाऊ मिट्टी में 20 सैं.मी. x 15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जबकि हल्की मिट्टी में रोपाई के लिए 15 सैं.मी. x 10 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 20 x 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बिजाई का ढंग सिंचित और कम बारानी क्षेत्रों में रोपाई ढंग प्रयोग किया जाता है रोपाई के लिए 25-30 दिनों के पौधों का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 30-35 दिनों के पौधे रोपाई के लिए प्रयोग करें ऊंचे क्षेत्रों में, शुष्क और गीली मिट्टी में रोपाई ढंग का प्रयोग करें बीज बीज की मात्रा एक एकड़ खेत में 6-8 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बीज का उपचार बिजाई से पहले 10 लीटर पानी में 20 ग्राम कार्बेनडाज़िम $ 1 ग्राम स्ट्रैप्टोसाईक्लिन घोल लें और इस घोल में बीजो को 8-10 घंटे तक भिगोयें उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं और फिर बिजाई के लिए प्रयोग करें पनीरी की देख-रेख और रोपण वैट बैड नर्सरी : यह तकनीक उन क्षेत्रों में अपनाई जाती है जहां पर पानी ज्यादा मात्रा में पाया जाता है नर्सरी का 1/10 हिस्सा दूसरे खेत में लगाया जाता है इसकी बिजाई छींटे द्वारा की जाती है यहां पर खेत की जोताई और खेत को समतल किया जाता है बैडों पर कईं दिन तक नमी बनाए रखनी चाहिए पानी से खेत को ज्यादा ना भरें जब नर्सरी 2 सैं.मी. से वृद्धि कर जाए तब पानी को खेत में लगाते रहना चाहिए बिजाई के 15 दिन बाद 26 किलो यूरिया डालना चाहिए जब नर्सरी 25-30 सैं.मी. तक लंबी हो जाए तब उसे 15-21 दिन बाद दूसरे खेत में लगा देना चाहिए और खेत को लगातार पानी लगाते रहना चाहिए सूखे बैड वाली नर्सरी : यह तकनीक शुष्क क्षेत्रों में अपनाई जाती है जो बैड बनाया जाता है वो बिजाई वाले खेत का 1/10 हिस्से में बीज बोया जाता है बैड का आकार सीमित होना चाहिए और उसकी ऊंचाई 6-10 से.मी होनी चाहिए धान का आधा जला हुआ छिलका बैड पर बिखेर देना चाहिए इससे जड़ें मजबूत होती हैं सही समय पर सिंचाई करते रहना चाहिए और नमी बनाए रखना चाहिए ताकि नए पौधे नष्ट ना हों तत्वों की पूर्ति के लिए खाद डालना जरूरी है मॉडीफाईड मैट नर्सरी : यह नर्सरी लगाने का एक ऐसा तरीका है जिसमें कम जगह और कम बीजों की जरूरत होती है यह नर्सरी किसी भी जगह पर बनाई जा सकती हैं जहां पर समतल जगह हो और पानी की सुविधा हो इसकी पनीरी लगाने के लिए 1% खेत की जरूरत होती है 4 से.मी की सतह पर नए पौधे लगाए जाते हैं इसे बनाने के लिए 1 मीटर चौड़े और 20-30 मीटर लंबे जमीन के टुकड़े की जरूरत होती है इसके ऊपर बिछाने के लिए पॉलीथीन और केले के पत्तों की जरूरत होती है इसके इलावा एक लकड़ी का बकसा जो कि 4 से.मी गहरा होता हैं मिट्टी के मिश्रण से भरा होता है बीजों को इसके अंदर रख देना चाहिए और फिर बीजों को सूखी मिट्टी के साथ ढक देना चाहिए इसके बाद पानी का छिड़काव कर देना चाहिए लकड़ी के बक्से को नमी देते रहना चाहिए बिजाई से 11-14 दिनों के बाद पौध तैयार हो जाती है जब पौध तैयार हो जाती है तब मैट से पौध को दूसरे खेत में रोपण कर दिया जाता है फासला: पौधों का फासला 20x20 सैं.मी. या 25x25 सैं.मी. होना चाहिए खेत में पौध रोपण पनीरी लगाने का ढंग 1. कद्दू करके लगाई जाने वाली पनीरी : आमतौर पर पंक्ति में लगाए जाने वाले पौधे 20x15 सैं.मी. दूरी पर लगाए जाते हैं और देरी से लगाई जाने वाली पनीरी 15x15 सैं.मी. पर लगाई जाती है नए पौधों की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए 2. बैड बनाकर लगाई जाने वाली पनीरी : यह बैड भारी ज़मीनों के लिए बनाए जाते हैं पनीरी लगाने से पहले खालियों में पानी लगाना चाहिए और फिर पनीरी को खेत में लगाना चाहिए पौधे से पौधे का फासला 9 सैं.मी. होना चाहिए 3. मशीनी ढंग से लगाई जाने वाली पनीरी : मैट पनीरी के लिए मशीनों का प्रयोग किया जाता है यह मशीन 30x12 सैं.मी. के फासले पर पनीरी लगानी चाहिए खरपतवार नियंत्रण रोपाई के 2 से 3 दिन बाद नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 50 ई सी 1200 मि.ली. या थायोबेनकार्ब 50 ई सी 1200 मि.ली. या पैंडीमैथालीन 30 ई सी या प्रैटीलाक्लोर 50 ई सी 600 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें इनमें से किसी एक नदीननाशक को 60 किलो रेत में मिलाकर 4-5 सैं.मी. गहरे खड़े पानी में बुरकाव करें चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए मेटसलफुरॉन 20 डब्लयु पी 30 ग्राम को 150 लीटर पानी में मिलाकर नदीनों के अंकुरण के बाद रोपाई के 20-25 दिन बाद डालें स्प्रे से पहले खेत में खड़े पानी का निकास कर दें और स्प्रे के एक दिन बाद सिंचाई करें नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 1 लीटर को बिजाई के 6 से 7 दिनों के बाद प्रति एकड़ में स्प्रे करें सिंचाई पनीरी लगाने के बाद खेत में दो सप्ताह तक अच्छी तरह पानी खड़ा रहने देना चाहिए जब सारा पानी सूख जाए तो उसके दो दिन बाद फिर से पानी को लगाना चाहिए खड़े पानी की गहराई 10 सै.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए खेत में से बूटी और नदीनों को निकालने से पहले खेत में से सारा पानी निकाल देना चाहिए ओर इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद खेत की फिर से सिंचाई करनी चाहिए पकने से 15 दिन पहले सिंचाई करनी बंद करनी चाहिए ताकि फसल को आसानी से काटा जा सके ऊंची भूमि पर सिंचाई पूरी तरह से बारिश पर निर्भर करती है बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर और पानी की उपलब्धता के आधार पर गंभीर अवस्थाओं में सिंचाई करें
Posted by gurveer singh
Punjab
06-07-2019 08:50 PM
Punjab
07-12-2019 05:24 PM
ਝੋਨੇ ਦੇ ਵਧੀਆ ਫੁਟਾਰੇ ਦੇ ਲਈ ਹੁਣ ਤੁਸੀ ਯੂਰੀਆ ਨਾਲ biovita @8 ਕਿਲੋ ਜਾ ਫਿਰ tata ਦੀ ralli gold @4 ਕਿਲੋ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿਚ ਇਸਦਾ ਛਿੱਟਾ ਦਵੋ ਉਸ ਨਾਲ ਤੁਹਾਡਾ ਝੋਨਾ ਵਧੀਆ ਫੋਟ ਮਾਰ ਲਵੇ ਗਾ ਜੀ I
Posted by anuj singh
Uttarakhand
06-07-2019 08:46 PM
Punjab
07-07-2019 07:19 AM
tuci iss hisab nal bachia di growth krwa skde ho jiwe janam ton pehle 5 din chicks booster feed deo , fir 5 to 15 din tak Broiler stater feed deo atte 15-25 din tak Chicks growther feed deni suru kro ,fir badd ch chicks finisher feed de skde ho, iss trah tuci feed de skde ho , jiss nal vdia growth ho jawegi, jinaa ohh asani nal hajam kr jawe uss matra vich he deo.
Posted by devendra kumar
Uttar Pradesh
06-07-2019 08:46 PM
Punjab
07-08-2019 10:24 AM
Posted by ਨਿਸ਼ਾਨ ਸਿੰਘ ਸੰਧੂ
Punjab
06-07-2019 08:44 PM
Punjab
07-07-2019 07:20 AM
ਜੇਕਰ ਉਸਦੇ ਥਣ ਵਿੱਚੋ ਛਿਦੀ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ 200 ਗ੍ਰਾਮ ਖੰਡ ਦੀ ਚਾਸ਼ਨੀ , 200 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮਿਲਾ ਕੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ 200 ਗ੍ਰਾਮ ਨੀਂਬੂ ਨਿਚੋੜ ਕੇ 3 ਤੋਂ 5 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ, ਬਾਕੀ ਉਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ FMC @ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ
Posted by Saab hundal
Punjab
06-07-2019 08:40 PM
Punjab
07-07-2019 07:28 AM
कृपया आप अपना सवाल दोबारा पूछें और यह भी बताएं की वो ब्याने वाली है या ब्याय चुकी है और उसे ओर क्या समस्या आ रही है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Chaudhary Vipin
Uttarakhand
06-07-2019 08:35 PM
Maharashtra
07-12-2019 05:25 PM
चौधरी जी आप जुलाई* खीरा-ककड़ी-लोबिया, करेला, लौकी, तुरई, पेठा, भिण्डी, टमाटर, चौलाई, मूली *अगस्त* गाजर, शलगम, फूलगोभी, बीन, टमाटर, काली सरसों के बीज, पालक, धनिया, ब्रसल्स स्प्राउट, चौला की बिजाई कर सकते है धन्यवाद
Posted by Sharry Ahluwalia
Punjab
06-07-2019 08:24 PM
Punjab
07-06-2019 10:44 PM
ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਨਦੀਨਨਾਸ਼ਕ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ●● ਨਦੀਨ ਉੱਗਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ (ਲੁਆਈ ਤੋਂ 2-3 ਦਿਨ ਦੇ ਅੰਦਰ) - ਬੂਟਾਕਲੋਰ 1200 ਮਿਲੀ ਲਿਟਰ ਜਾਂ ਪਰੈਟੀਲਾਕਲੋਰ 50 ਈ ਸੀ ( ਰਿਫਿਟ) 600 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਜਾਂ ਅਨੀਲੋਫਾਸ 18 ਈ ਸੀ 800 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਜਾਂ ਅਨੀਲੋਫਾਸ 30 ਈ ਸੀ 500 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਜਾਂ ਅਨੀਲੋਫਾਸ 50 ਈ ਸੀ 300 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਜਾਂ ਸਟੌਂਪ 30 ਈ ਸੀ 1000 ਤੋਂ 1200 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ( ਹਲਕੀ ਜਾਂ ਭਾਰੀ ਜਮੀਨ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ਼) ਜਾਂ .... (Read More)
ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਨਦੀਨਨਾਸ਼ਕ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ●● ਨਦੀਨ ਉੱਗਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ (ਲੁਆਈ ਤੋਂ 2-3 ਦਿਨ ਦੇ ਅੰਦਰ) - ਬੂਟਾਕਲੋਰ 1200 ਮਿਲੀ ਲਿਟਰ ਜਾਂ ਪਰੈਟੀਲਾਕਲੋਰ 50 ਈ ਸੀ ( ਰਿਫਿਟ) 600 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਜਾਂ ਅਨੀਲੋਫਾਸ 18 ਈ ਸੀ 800 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਜਾਂ ਅਨੀਲੋਫਾਸ 30 ਈ ਸੀ 500 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਜਾਂ ਅਨੀਲੋਫਾਸ 50 ਈ ਸੀ 300 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਜਾਂ ਸਟੌਂਪ 30 ਈ ਸੀ 1000 ਤੋਂ 1200 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ( ਹਲਕੀ ਜਾਂ ਭਾਰੀ ਜਮੀਨ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ਼) ਜਾਂ ਪਰੈਟੀਲਾਕਲੋਰ 37 ਈ ਡਬਲਯੂ ( ਰਿਫਿਟ ਪਲੱਸ) ਜਾਂ ਸਾਥੀ 10 ਡਬਲਯੂ ਪੀ ( ਪਾਈਰੈਜੋਸਲਫਿਊਰਾਨ ਇਥਾਈਲ) 60 ਗ੍ਰਾਮ ਜਾਂ ਟੌਪਸਟਾਰ 80 ਡਬਲਯੂ ਪੀ 45 ਗ੍ਰਾਮ ਵਿੱਚੋਂ ਕਿਸੇ ਇੱਕ ਨਦੀਨਨਾਸ਼ਕ ਨੂੰ 60 ਕਿਲੋ ਰੇਤੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ਼ ਖੜ੍ਹੇ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਛੱਟਾ ਦੇ ਦਿਉ ●● ਜਿੰਨਾ ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਖੜਾ ਕਰਨ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਝੋਨੇ ਦੀ ਲੁਆਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 10-12 ਦਿਨ ਦੇ ਅੰਦਰ ਅੰਦਰ 40 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਗਰੈਨਿਟ 240 SC (ਪਿਨਾਕਸੁਲਮ) ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰ ਦਿਉ ਜਿਸ ਨਾਲ ਸਵਾਂਕ, ਝੋਨੇ ਦੇ ਮੋਥੇ ਅਤੇ ਚੌੜੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੇ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਹੋਵੇਗੀ •• ਜੇਕਰ ਝੋਨੇ ਦੀ ਲੁਆਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਖੇਤ ਵਿਚ ਸਵਾਂਕ ਅਤੇ ਝੋਨੇ ਦੇ ਮੋਥੇ ਉੱਗ ਪੈਂਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਲੁਆਈ ਤੋਂ 20-25 ਦਿਨ ਦੇ ਅੰਦਰ ਅੰਦਰ 100 ਮਿਲੀ ਲਿਟਰ ਨੌਮਨੀ ਗੋਲਡ/ ਵਾਸ਼ ਆਊਟ/ਮਾਚੋ/ ਤਾਰਕ 10 ਐਸ ਸੀ (ਬਿਸਪਾਇਰੀਬੈਕ) ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰ ਦਿਉ •• ਜੇਕਰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲੈਪਟੋਕਲੋਆ (ਚੀਨੀ) ਘਾਹ ਜਾਂ ਕਣਕੀ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਹੋਵੇ ਤਾਂ 400 ਮਿਲੀ ਲਿਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ 6•7 ਈਸੀ ( ਫਿਨੋਕਸਾਪਰੌਪ) ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਝੋਨੇ ਦੀ ਲੁਆਈ ਤੋਂ 20-25 ਦਿਨ ਦੇ ਅੰਦਰ ਅੰਦਰ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰ ਦਿਉ ** ਜੇਕਰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਚੌੜੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੇ ਨਦੀਨ ਘਰਿੱਲਾ, ਸਣੀ ਆਦਿ ਅਤੇ ਝੋਨੇ ਦੇ ਮੋਥੇ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਹੋਵੇ ਤਾਂ 30 ਗਰਾਮ ਐਲਗਰਿਪ 20 ਡਬਲਯੂ ਜੀ ( ਮੈਟਸਲਫੂਰਾਨ) ਜਾਂ 16 ਗਰਾਮ ਸੈਗਮੈਂਟ 50 ਡੀ ਐਫ ( ਅਜਿਮਸਲਫੂਰਾਨ) ਜਾਂ 8 ਗਰਾਮ ਐਲਮਿਕਸ 20 ਡਬਲਯੂ ਪੀ (ਮੈਟਸਲਫੂਰਾਨ+ਕਲੋਰੀਮਿਯੂਰਾਨ) ਜਾਂ 50 ਗਰਾਮ ਸਨਰਾਈਜ 15 WDG (ਇਥੋਕਸੀਸਲਫੂਰਾਨ) ਨੂੰ ਲੁਆਈ ਤੋਂ 20 ਦਿਨ ਬਾਅਦ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰ ਦਿਉ
Posted by Vikash Jalodiya
Madhya Pradesh
06-07-2019 08:07 PM
Punjab
07-07-2019 08:46 AM
app bhians ko rojana 35-40kg hara chara den, iske sath app Anabolite liquid 100ml rojana, Milkout powder 2-2 chamch subah sham dena suru kren, iske sath Calcimust bolus 1-1 bolus subah sham deni suru kren, isse dudh mai farak padd jayega.
Posted by Ravi yaduvanshi
Uttar Pradesh
06-07-2019 08:00 PM
Punjab
07-07-2019 08:48 AM
यदि आपकी गाय अपनी दूध खुद पीती है तो आप उसके नाक में रिंग की तरह कड़ा डाल सकते है जिससे जब वो दूध पीने की कोशिश करेगी तो उसका मुं​ह खीच होगा और वो दूध नहीं पर सकेगी आप इस फोटो को देख सकते है
Posted by Mukesh Kumar
Haryana
06-07-2019 07:54 PM
Punjab
07-07-2019 06:41 AM
आप भैंस को Ifer-H injection 5ml लगवायें यह एक दिन लगवाना है और अगले दिन Vitum-h injection 5ml लगवायें यह आपने दो दिन लगाना है और फिर अगले दिन Ifer-h 5ml injection लगवाना है बाकि आप Betacef 3gm, Megludyne 20ml, CRB 20ml injection यह सभी इंजेक्शन तीन दिन लगवायें इससे फर्क पड़ जाएगा
Posted by sarjerao Daud
Maharashtra
06-07-2019 07:53 PM

?

Punjab
02-20-2020 09:27 PM
आपके द्धारा भेजी गई ओडियो में आवाज समझ नहीं आ रही है कृप्या आप दोबारा साफ आवाज में ओडियो अपलोड करें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by kulwant singh
Punjab
06-07-2019 07:50 PM
Punjab
07-12-2019 05:27 PM
ਝੋਨੇ ਦੇ ਵਧੀਆ ਫੁਟਾਰੇ ਦੇ ਲਈ ਹੁਣ ਤੁਸੀ ਯੂਰੀਆ ਨਾਲ biovita @8 ਕਿਲੋ ਜਾ ਫਿਰ tata ਦੀ ralli gold @4 ਕਿਲੋ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿਚ ਇਸਦਾ ਛਿੱਟਾ ਦਵੋ ਉਸ ਨਾਲ ਤੁਹਾਡਾ ਝੋਨਾ ਵਧੀਆ ਫੋਟ ਮਾਰ ਲਵੇ ਗਾ ਜੀ I
Posted by ਲਖਵੀਰ ਸਿੰਘ ਖਾਲਸਾ
Punjab
06-07-2019 07:40 PM
Punjab
07-12-2019 05:23 PM
ਲਖਵੀਰ ਜੀ ਇਸਦੇ ਉਪਰ ਤੁਸੀ NPK 191919 @1 ਕਿੱਲੋ ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by veer Bahadur Singh
Uttar Pradesh
06-07-2019 07:37 PM
Punjab
07-07-2019 07:10 AM
Bahadur ji isme apko lagbhag 3-4 lakh tak profit ho skta hai yaddi app unki khurak aur growth ka sahi dian rkhte hai.
Posted by ਲਖਵੀਰ ਸਿੰਘ ਖਾਲਸਾ
Punjab
06-07-2019 07:37 PM
Punjab
07-17-2019 06:39 PM
ਲਖਵੀਰ ਸਿੰਘ ਖਾਲਸਾ ਬਗੀਚੀ ਨੂੰ ਸੱਪਾਂ ਤੋਂ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਲੱਸਣ ਵੇਲ ਜਾਂ ਕਪੂਰ ਦੇ ਬੂਟੇ ਲਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸ ਬਾਰੇ ਵਿਸਥਾਰ ਵਿੱਚ ਜਾਣਕਾਰੀ ਅਤੇ ਬੂਟੇ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ surinder Nagra 9814305864 Rehsam Ayurvedic Nursery ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by lakhraj Jat
Madhya Pradesh
06-07-2019 07:36 PM
Punjab
07-07-2019 08:49 AM
यदि आपने बकरी फार्म बनाना है तो बहुत बढ़िया सोच है आप बीटल नस्ल रखें यह दूध और मीट दोनों के लिए फायदेमंद है बाकि आप जैसे इस व्यवसायों में आएंगे उस हिसाब से आपके लिंक बनने शुरू हो जाएंगे और बाकि मार्केटिंग इस बात निर्भर है कि आपका लोगों के साथ लिंक कैसा है इसका दूध गाय के रेट के बराबर मिल जाता है और बाकि यदि फार्.... (Read More)
यदि आपने बकरी फार्म बनाना है तो बहुत बढ़िया सोच है आप बीटल नस्ल रखें यह दूध और मीट दोनों के लिए फायदेमंद है बाकि आप जैसे इस व्यवसायों में आएंगे उस हिसाब से आपके लिंक बनने शुरू हो जाएंगे और बाकि मार्केटिंग इस बात निर्भर है कि आपका लोगों के साथ लिंक कैसा है इसका दूध गाय के रेट के बराबर मिल जाता है और बाकि यदि फार्म हो तो बच्चे भी बेचे जाते है कुल मिलाकर यदि मोटा सा हिसाब लगाना है तो एक बकरी से लगभग 20000 तक कमाई हो जाती है बाकि यह भी सलाह है कि आप आपने नज़दीक kvk से ट्रेनिंग ज़रूर लें और सफल बकरी पालकों के फार्म ज़रूर देखें.वहां से आपको इस काम के बारे में जानकारी और इसे करने के तरीकों के बारे में भी पता लगेगा
Posted by Deepak goyal
Punjab
06-07-2019 07:35 PM
Punjab
07-08-2019 02:27 PM
Deepak goyal ji insulin plant len lai tusi surinder Nagra 9814305864 (Rehsam Ayurvedic Nursery) nal samparak kar sakde ho.Thankyou.
Posted by Anshu nagar
Uttar Pradesh
06-07-2019 07:31 PM
Punjab
07-12-2019 05:23 PM
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट.... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट्टी का pH 9.5 से ज्यादा हो तो इसमें जिप्सम डालें आप इसकी किस्मे जैसे Co 8014 (Mahalakshami) ,Vasant 1,Co 86032 ,Co 92005 की बिजाई कर सकते है पतझड़ के मौसम में 15 अक्तूबर से २० नवंबर तक बिजाई की जाती है, बसंत के मौसम में बिजाई 15 फरवरी तक और गर्मियों के मौसम में 15 जुलाई से 15 सितंबर तक बिजाई की जाती है बिजाई के लिए सुधरे ढंग जैसे कि (गहरी खालियां, मेंड़ बनाकर,पंक्तियों में जोड़े बनाकर और गड्ढा खोदकर बिजाई ) प्रयोग किये जाते हैं 1) खालियां और मेंड़ बनाकर सूखी बिजाई: ट्रैक्टर द्वारा मेंड़ बनाने वाली मशीन की मदद से मेंड़ और खालियां बनाएं और इन मेड़ और खालियों में बिजाई करें मेड़ और खालियों में 90 सैं.मी. का फासला होना चाहिए गन्ने की गुलियों को मिट्टी में दबाएं और उसके बाद हल्की सिंचाई करें 2) पंक्तियों के जोड़े बनाकर बिजाई: खालियां बनाने वाले यंत्र के प्रयोग से खेत में 150 सैं.मी. के फासले पर खालियां बनाएं और उनमें 30:30-90-30:30 सैं.मी. के फासले पर गन्ने की रोपाई करें इस तरीके से मेड़ वाली बिजाई से अधिक पैदावार मिलती है 3) गड्ढा खोदकर बिजाई: गड्ढे खोदने वाली मशीन से 60 सैं.मी. व्यास के 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोदें जिनमें 60 सैं.मी. का फासला हो इससे गन्ना 2-3 बार उगाया जा सकता है और मेड़ वाली बिजाई से 25-50 % अधिक पैदावार आती है B) एक आंख वाले गन्नों की बिजाई: रोपाई के लिए सेहतमंद गुलियां चुनें और 75-90 सैं.मी. के अंतर पर खालियों में बिजाई करें गुलियां एक आंख वाली होनी चाहिए यदि गन्ने के ऊपरी भाग में छोटी डलियां चुनी गई हों तो बिजाई 6 -9 सैं.मी. के अंतर पर करें फसल के अच्छे उगने के लिए आंखों को ऊपर की ओर रखें और हल्की सिंचाई करें पतझड़ के मौसम में 14500-16500 तीन आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और बसंत के मौसम में 16500-25000 तीन आंख वाले बीज और 21600-25000 दो आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें गन्ने में नदीनों के कारण 12-72 % पैदावार का नुकसान होता है शुरूआती 60-120 दिनों तक नदीनों की रोकथाम बहुत जरूरी है इसलिए रोपाई के बाद 3-4 महीने बाद फसल की नदीनों की रोकथाम करें नीचे लिखे तरीकों से नदीनों को रोका जा सकता है 1) हाथों से गोडाई करके: गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली फसल है इसलिए नदीनों को गोडाई करके रोका जा सकता है इसके इलावा प्रत्येक सिंचाई के बाद 3-4 गोडाई जरूरी है 2) काश्तकारी ढंग: इस प्रक्रिया में खेती के तरीके, अंतरफसली और मलचिंग तरीके शामिल हैं बहुफसली के कारण नदीनों का हमला ज्यादा होता है इसकी रोकथाम के लिए चारे वाली फसलें और हरी खाद वाली फसलों के आधार वाला फसली चक्र गन्ने में नदीनों की रोकथाम करता है गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली भी फसल है जिससे नदीनों के हमले का खतरा भी ज्यादा होता है यदि गन्ने को कम समय वाली फसलों के साथ अंतरफसली किया जाए तो इससे नदीनों को कम किया जा सकता है और ज्यादा लाभ भी मिल सकता है गन्ने के अंकुरन के बाद गन्ने की कतारों में 10-12 सैं.मी. मोटी तह बिछा दी जाती है यह सूर्य की रोशनी को सोखता है जिससे नदीन कम होते हैं यह मिट्टी में नमी को भी बचाता है 3) रासायनिक तरीके: नदीनों की रोकथाम के लिए, सिमाज़ीन या एट्राज़ीन 600-800 ग्राम या मैट्रीब्यूज़िन 800 ग्राम या ड्यूरॉन 1-1.2 किलोग्राम प्रति एकड़ में बिजाई के तुरंत बाद प्रयोग करना चाहिए इसके इलावा चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए 2, 4-डी@ 300-400 ग्राम का प्रयोग प्रति एकड़ के हिसाब से करें नाइट्रोजन 62 किलो, फासफोरस 32 किलो और पोटाश 42 किलो प्रति एकड़ में डालें बिजाई से पहले नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो मात्रा को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें नाइट्रोजन की पहली मात्रा को बीज वाली आंख के अंकुरण के समय और दूसरी मात्रा को बीज अंकुरण के 45 दिन बाद डालें 3 वर्षों के बाद गन्ने की गुलियों में 40-50 क्विंटल गाय का गोबर प्रति एकड़ में डालें पतझड़ के मौसम में 90-100 दिनों में नाइट्रोजन को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें और बसंत के मौसम में 150-160 दिन बाद डालनी चाहिए सिंचाई की संख्या मिट्टी की किस्म और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है गर्मी के महीने में गर्म हवाओं और सूखे में वृद्धि होने के कारण फसल को पानी की जरूरत पड़ती है पहली सिंचाई फसल के 20-25 % अंकुरित होने पर करें मानसून में गन्ने को पानी और बारिश के आधार पर लगाएं कम वर्षा में सिंचाई 10 दिनों के अंतराल पर करें इसके बाद सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर 20-25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जमीन में नमी संभालने के लिए गन्ने की पंक्तियों में मलचिंग का प्रयोग करें अप्रैल जून के महीने में पानी की कमी ना होने दें इससे पैदावार कम होगी इसके इलावा बारिश के दिनों में पानी ना खड़ा होने दें जोताई का समय, वृद्धि का समय और अधिक विकास का समय सिंचाई के लिए बहुत नाज़ुक होता है मिट्टी को मेंड़ पर चढ़ाना: कसी की मदद से खालियों में और पौधे के किनारों पर मिट्टी चढ़ाई जाती है यह मिट्टी में अच्छी तरह से तैयार की गई खाद को अच्छी तरह से मिश्रित होने में मदद करती है पौधे को सहारा देने और उसे गिरने से बचाने में भी मदद करती है ज्यादा पैदावार और चीनी प्राप्त करने के लिए गन्ने की सही समय पर कटाई जरूरी है समय से पहले या बाद में कटाई करने से पैदावार पर प्रभाव पड़ता है किसान शूगर रीफरैक्टोमीटर का प्रयोग करके कटाई का समय पता लगा सकते हैं गन्ने की कटाई द्राती की सहायता से की जाती है गन्ना धरती से ऊपर थोड़ा हिस्सा छोड़कर काटा जाता है क्योंकि गन्ने में चीनी की मात्रा ज्यादा होती है कटाई के बाद गन्ना फैक्टरी में लेकर जाना जरूरी होता है
Posted by SHAMSHER SINGH
Punjab
06-07-2019 07:30 PM
Maharashtra
07-12-2019 05:22 PM
चूहों की रोकथाम के लिए आप 1kg अनाज का आटा या दाने लें उसमें 20gm बनसपती तेल + 20gm बूरा चीनी+ 25gm जिंक फास्फाइड मिलाएं इन चार चीज़ों को अच्छी तरह मिलाकर तैयार करने के बाद जहाँ-जहाँ चूहें है वहां रख दीजिये बनस्पती तेल खुशबूदार होना चाहिए ताकि चूहें उसकी खुशबू की तरफ ज़्यादा आये
Posted by goverdhan thakur
Madhya Pradesh
06-07-2019 07:26 PM
Punjab
07-17-2019 05:51 PM
गोवेर्धन ठाकुर जी चकुंदर लेने के लिए आप मनमोहन स्वामी 9672101420 (Swami Agro Producer & Supplier) से सम्पर्क कर सकते है धन्यवाद
Posted by goverdhan thakur
Madhya Pradesh
06-07-2019 07:24 PM
Punjab
07-17-2019 05:51 PM
गोवेर्धन ठाकुर जी चकुंदर लेने के लिए आप मनमोहन स्वामी 9672101420 (Swami Agro Producer & Supplier) से सम्पर्क कर सकते है धन्यवाद
Posted by ਗੁਰਸੇਵਕ ਸਿੰਘ
Punjab
06-07-2019 07:14 PM
Punjab
07-07-2019 08:50 AM
ਗਾਂਵਾ ਕਮਜ਼ੌਰ ਹੋਣ ਦੇ ਕਈ ਕਾਰਨ ਹੋ ਸਕਦੇ ਹੈ ਜਿਵੇਂ ਉਸਦੀ ਸਹੀ ਟਾਈਮ ਤੇ ਡਿਵਰਮਿੰਗ ਨਾ ਹੋਣਾ, ਉਸ ਨੂੰ ਦਿਤੀ ਜਾਣ ਵਾਲੀ ਖੁਰਾਕ ਸਹੀ ਨਾ ਹੋਣਾ, ਉਸਦੇ ਰਹਿਣ ਸਹਿਣ ਵਿਚ ਕੋਈ ਸਮੱਸਿਆ ਹੋਣਾ, ਸਰੀਰ ਵਿਚ ਮਿਨਰਲ ਦੀ ਕਮੀ ਹੋਣਾ, ਚਿੱਚੜ ਲਗੇ ਹੋਣਾ, ਇਹਨਾਂ ਕਾਰਨਾਂ ਕਰਕੇ ਵੀ ਪਸ਼ੂ ਲਿਸਾ ਹੁੰਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Zenvet bolus ਦਿਓ ਅਤੇ 3D red liquid 50-50ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਅਤੇ Enerboost pow.... (Read More)
ਗਾਂਵਾ ਕਮਜ਼ੌਰ ਹੋਣ ਦੇ ਕਈ ਕਾਰਨ ਹੋ ਸਕਦੇ ਹੈ ਜਿਵੇਂ ਉਸਦੀ ਸਹੀ ਟਾਈਮ ਤੇ ਡਿਵਰਮਿੰਗ ਨਾ ਹੋਣਾ, ਉਸ ਨੂੰ ਦਿਤੀ ਜਾਣ ਵਾਲੀ ਖੁਰਾਕ ਸਹੀ ਨਾ ਹੋਣਾ, ਉਸਦੇ ਰਹਿਣ ਸਹਿਣ ਵਿਚ ਕੋਈ ਸਮੱਸਿਆ ਹੋਣਾ, ਸਰੀਰ ਵਿਚ ਮਿਨਰਲ ਦੀ ਕਮੀ ਹੋਣਾ, ਚਿੱਚੜ ਲਗੇ ਹੋਣਾ, ਇਹਨਾਂ ਕਾਰਨਾਂ ਕਰਕੇ ਵੀ ਪਸ਼ੂ ਲਿਸਾ ਹੁੰਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Zenvet bolus ਦਿਓ ਅਤੇ 3D red liquid 50-50ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਅਤੇ Enerboost powder 50-50gm ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ
Posted by Randhir singh Ramgharia
Punjab
06-07-2019 06:55 PM
Punjab
02-25-2020 05:30 PM
Randhir singh ji, ICAR ... Krishi Bhavan, Dr. Rajendra Prasad Road, New Delhi-110001. Phone: 91-11-25843301, dhanywad
Posted by sukhbeer singh
Punjab
06-07-2019 06:47 PM
Punjab
07-07-2019 07:11 AM
ਹਾਂਜੀ ਸੁਖਬੀਰ ਜੀ ਇਹ ਕੜਕਨਾਥ ਨਸਲ ਹੀ ਹੈ .
Posted by Ajmer singh
Punjab
06-07-2019 06:46 PM
Punjab
07-12-2019 05:19 PM
ਮੌਸਮ ਵਿਭਾਗ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਹਫਤੇ ਵਿਚ ਮੀਹ ਆਉਣ ਦੀ ਸੰਭਾਵਨਾ ਘੱਟ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by kulwant singh
Punjab
06-07-2019 06:40 PM
Maharashtra
07-12-2019 05:04 PM
ਝੋਨੇ ਦੇ ਵਧੀਆ ਫੁਟਾਰੇ ਦੇ ਲਈ ਹੁਣ ਤੁਸੀ ਯੂਰੀਆ ਨਾਲ biovita @8 ਕਿਲੋ ਜਾ ਫਿਰ tata ਦੀ ralli gold @4 ਕਿਲੋ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿਚ ਇਸਦਾ ਛਿੱਟਾ ਦਵੋ ਉਸ ਨਾਲ ਤੁਹਾਡਾ ਝੋਨਾ ਵਧੀਆ ਫੋਟ ਮਾਰ ਲਵੇ ਗਾ ਜੀ I
Posted by shankar Kumar Singh
Bihar
06-07-2019 06:39 PM
Punjab
07-10-2019 06:12 PM
Chicks ko 1 days md vaccine karen 5 day par ib lasota fir 7 day par ibd karen, 12days par ibd std 18 days ndkild 24 days ibd 35 days par lasota drinking water mai den.
Posted by gurdip
Punjab
06-07-2019 05:41 PM
Punjab
07-07-2019 09:35 PM
ਝੋਨੇ ਵਿਚ ਸਰੋਂ ਦੀ ਖਲ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਬਹੁਤ ਹੀ ਲਾਭਕਾਰੀ ਹੈ ਇਹ ਅਜਿਹਾ ਆਰਗੈਨਿਕ ਤਰੀਕਾ ਹੈ ਜਿਸਦੇ ਨਾਲ ਅਸੀਂ ਝੋਨੇ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਿਚ ਵਾਧਾ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੈ ਝੋਨੇ ਦੇ ਬੂਟੇ ਦੀ ਫੋਟ ਕਰਾਉਣ ਦੇ ਲਈ ਇਸਦੇ ਨਤੀਜੇ ਬਹੁਤ ਹੀ ਵਧੀਆ ਹਨ ਇਸ ਵਿਚ ਛੇ ਮੁੱਖ ਤੱਤ ਹਨ ਜਿਸ ਵਿਚ ਮੁੱਖ ਤੋਰ ਤੇ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ,ਪੋਟਾਸ਼ ਤੇ ਫਾਸਫੋਰਸ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਸਲਫਰ ,ਜਿੰਕ ਤੇ ਬਰੋਨ ਵੀ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨI ਸਰੋਂ ਦੀ ਖਲ ਨੂ.... (Read More)
ਝੋਨੇ ਵਿਚ ਸਰੋਂ ਦੀ ਖਲ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਬਹੁਤ ਹੀ ਲਾਭਕਾਰੀ ਹੈ ਇਹ ਅਜਿਹਾ ਆਰਗੈਨਿਕ ਤਰੀਕਾ ਹੈ ਜਿਸਦੇ ਨਾਲ ਅਸੀਂ ਝੋਨੇ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਿਚ ਵਾਧਾ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੈ ਝੋਨੇ ਦੇ ਬੂਟੇ ਦੀ ਫੋਟ ਕਰਾਉਣ ਦੇ ਲਈ ਇਸਦੇ ਨਤੀਜੇ ਬਹੁਤ ਹੀ ਵਧੀਆ ਹਨ ਇਸ ਵਿਚ ਛੇ ਮੁੱਖ ਤੱਤ ਹਨ ਜਿਸ ਵਿਚ ਮੁੱਖ ਤੋਰ ਤੇ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ,ਪੋਟਾਸ਼ ਤੇ ਫਾਸਫੋਰਸ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਸਲਫਰ ,ਜਿੰਕ ਤੇ ਬਰੋਨ ਵੀ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨI ਸਰੋਂ ਦੀ ਖਲ ਨੂੰ ਝੋਨੇ ਵਿੱਚ ਵਰਤਣ ਦੇ ਲਈ ਦੋ ਤਰੀਕੇ ਹਨ ਪਹਿਲਾ ਤਰੀਕਾ ਇਹ ਹੈ ਕੇ ਇਸਨੂੰ ਡਰੰਮ ਦੇ ਵਿਚ ਭਿਓਂ ਲੋ ਤੇ 5 -6 ਦਿਨ ਲਗਾਤਾਰ ਇਸਨੂੰ ਹਲਾਉਂਦੇ ਰਹੋ ਤੇ ਇਸ ਘੋਲ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਵਾਰੀ ਵਾਲੇ ਦਿਨ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਪਾ ਦਿਓ ਦੂਸਰਾ ਤਰੀਕਾ ਇਹ ਹੈ ਕੇ ਇਸਨੂੰ ਬਰੀਕ ਕੁੱਟ ਕੇ ਇਸਦਾ ਛਿੱਟਾ ਵਾਹਣ ਵਿਚ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸਨੂੰ ਵਰਤਣ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਜਦੋਂ ਝੋਨਾ 15 -20 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਹੋਵੇ ਕਿਓਂਕਿ ਇਸ ਸਮੇ ਜੜ੍ਹਾਂ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਵਿਕਾਸ ਹੁੰਦਾ ਹੀ ਇਸਦੀ ਮਾਤਰਾ ਇਕ ਕਿੱਲੇ ਦੇ ਵਿੱਚ ਸਿਰਫ 16 ਕਿੱਲੋ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਰੇਤੇ ਵਾਲੇ ਜਾਂ ਬਰਾਨੀ ਵਾਹਣ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ 20 ਕਿੱਲੋ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹਾ I
Posted by ATMA singh
Punjab
06-07-2019 05:37 PM
Punjab
07-07-2019 06:47 AM
Atma singh ji tuci usdi bachedani di janch krwao kyuki kayi varr bachedani vich sojish, ya koi hor kami krke pashu heat vich nhi aunda, pehla tuci usdi janch krwao fir uss hisab nal vdia ilagg howega.
Posted by sachchidanand
Uttar Pradesh
06-07-2019 05:31 PM

?

Punjab
07-07-2019 08:51 AM
कृपया आप अपना सवाल दोबारा पूछें आपके द्धारा भेंजी गई ओडियो अपलोड नहीं हुई है कृपया दोबारा अपलोड करें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Rajanpreet Singh
Punjab
06-07-2019 05:01 PM
Punjab
07-07-2019 08:53 AM
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਗੱਭਣ ਕਰਵਾ ਦਿੱਤਾ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Concimax bolus ਗੋਲੀਆਂ ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 14 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ ਜੇਕਰ ਉਹ ਦੁਬਾਰਾ ਫਿਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀ ਗਾਂ ਨੂੰ Metricef-iu 2 ਦਿਨ ਦਵਾਈ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ ਭਰਵਾਂ ਦਿਓ, ਇਹ ਦਵਾਈ ਭਰਵਾਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗਾਂ ਨੂੰ Agrimin super powder ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿਓ ਇਸਨੂੰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਲਗਭਗ 2 ਕਿਲੋ ਤਕ ਦੇ ਦਿਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ PG care ਗ.... (Read More)
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਗੱਭਣ ਕਰਵਾ ਦਿੱਤਾ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Concimax bolus ਗੋਲੀਆਂ ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 14 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ ਜੇਕਰ ਉਹ ਦੁਬਾਰਾ ਫਿਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀ ਗਾਂ ਨੂੰ Metricef-iu 2 ਦਿਨ ਦਵਾਈ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ ਭਰਵਾਂ ਦਿਓ, ਇਹ ਦਵਾਈ ਭਰਵਾਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗਾਂ ਨੂੰ Agrimin super powder ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿਓ ਇਸਨੂੰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਲਗਭਗ 2 ਕਿਲੋ ਤਕ ਦੇ ਦਿਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ PG care ਗੋਲੀਆਂ ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ ਇਹ ਗੋਲੀਆਂ 21 ਦਿਨ ਹੋਰ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਉਹ ਗੱਭਣ ਰਹਿ ਜਾਵੇਗੀ.
Posted by Rajanpreet Singh
Punjab
06-07-2019 05:00 PM
Punjab
07-07-2019 08:54 AM
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਗੱਭਣ ਕਰਵਾ ਦਿੱਤਾ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Concimax ਗੋਲੀਆਂ ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 14 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ ਜੇਕਰ ਉਹ ਦੁਬਾਰਾ ਫਿਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀ ਗਾਂ ਨੂੰ Metricef-iu 2 ਦਿਨ ਦਵਾਈ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ ਭਰਵਾਂ ਦਿਓ, ਇਹ ਦਵਾਈ ਭਰਵਾਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗਾਂ ਨੂੰ Agrimin super powder ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿਓ ਇਸਨੂੰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਲਗਭਗ 2 ਕਿਲੋ ਤਕ ਦੇ ਦਿਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ PG care ਗੋਲ.... (Read More)
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਗੱਭਣ ਕਰਵਾ ਦਿੱਤਾ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Concimax ਗੋਲੀਆਂ ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 14 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ ਜੇਕਰ ਉਹ ਦੁਬਾਰਾ ਫਿਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀ ਗਾਂ ਨੂੰ Metricef-iu 2 ਦਿਨ ਦਵਾਈ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ ਭਰਵਾਂ ਦਿਓ, ਇਹ ਦਵਾਈ ਭਰਵਾਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗਾਂ ਨੂੰ Agrimin super powder ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿਓ ਇਸਨੂੰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਲਗਭਗ 2 ਕਿਲੋ ਤਕ ਦੇ ਦਿਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ PG care ਗੋਲੀਆਂ ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ ਇਹ ਗੋਲੀਆਂ 21 ਦਿਨ ਹੋਰ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਉਹ ਗੱਭਣ ਰਹਿ ਜਾਵੇਗੀ.
Posted by Prabhjeet
Rajasthan
06-07-2019 04:58 PM
Maharashtra
07-12-2019 05:14 PM
नरमे पर सफेद मक्खी के हमले को रोकने के लिए हमने कुदरती फार्मूला तैयार किया है जिसे कि जियान का नाम दिया गया है इसे बनाने का तरीका भी आपसे शेयर करने जा रहे हैं 5 लीटर घोल तैयार करने के लिए निम्नलिखित आवश्यक चीज़ें जरूरी हैं- 200 ग्राम नीम के पत्तों का अर्क 200 ग्राम धतूरे के पत्तों का अर्क 200 ग्राम अक्क के पत्तों का .... (Read More)
नरमे पर सफेद मक्खी के हमले को रोकने के लिए हमने कुदरती फार्मूला तैयार किया है जिसे कि जियान का नाम दिया गया है इसे बनाने का तरीका भी आपसे शेयर करने जा रहे हैं 5 लीटर घोल तैयार करने के लिए निम्नलिखित आवश्यक चीज़ें जरूरी हैं- 200 ग्राम नीम के पत्तों का अर्क 200 ग्राम धतूरे के पत्तों का अर्क 200 ग्राम अक्क के पत्तों का अर्क 200 ग्राम करंज के पत्तों का अर्क 200 ग्राम तुम्मे का अर्क 50 ग्राम लहसुन का अर्क 50 ग्राम तंबाकू के पत्तों का अर्क 5 लीटर गऊ भैंस का मूत्र (यदि देसी गाय का हो, तो ज्यादा अच्छा है) तैयार करने की विधि इन सब चीजों को मिला कर 12-12 घंटे के अंतराल पर धीमी आंच पर उबालकर ठंडा कर लें 3 बार 12-12 घंटे के अंतराल पर गर्म करके और ठंडा करके यह प्रयोग करने के लिए तैयार हो जाता है इसकी विशेषता यह भी है कि इसे जितने समय तक रखना चाहें, रख सकते हैं यह खराब नहीं होता
Posted by dalpat singh
Rajasthan
06-07-2019 04:58 PM
Maharashtra
07-12-2019 05:11 PM
अंजीर का पौधा 2 से 6 साल तक फल देना शुरू कर देता है धन्यवाद
Posted by Gurpreet singh
Punjab
06-07-2019 04:55 PM
Punjab
07-07-2019 08:57 AM
ਉਸ ਨੂੰ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ, 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁਲਕੰਦ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੌੰਫ, 100ਗ੍ਰਾਮ ਸੁਕੇ ਆਵਲੇ ਤੇ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਅਜਵਾਇਨ ਉਬਾਲ ਕੇ ਠਾਰ ਕੇ 5-7 ਦਿਨ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਬਾਕੀ ਉਸ ਨੂੰ Anabolite liquid 100-100ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ, Lactomax bolus ਰੋਜਾਨਾ 10 ਗੋਲੀਆਂ ਦੇਣੀਆਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਇਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗਾ.
Posted by dalpat singh
Rajasthan
06-07-2019 04:46 PM
Maharashtra
07-12-2019 05:10 PM
अंजीर एक लोकप्रिय फल है, जो ताजा और सूखा खाया जाता है भारती में इसकी खेती राजस्थान, हरियाणा, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात तथा उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में की जाती है विश्व स्तर पर इसकी खेती दक्षिणी और पश्चिमी अमरीका और मेडिटेरेनियन और उत्तरी अफ्रीकी देशों में उगाया जाता है इस लेख द्वारा आप जानेगे.... (Read More)
अंजीर एक लोकप्रिय फल है, जो ताजा और सूखा खाया जाता है भारती में इसकी खेती राजस्थान, हरियाणा, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात तथा उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में की जाती है विश्व स्तर पर इसकी खेती दक्षिणी और पश्चिमी अमरीका और मेडिटेरेनियन और उत्तरी अफ्रीकी देशों में उगाया जाता है इस लेख द्वारा आप जानेगे की अंजीर की खेती कैसे करें, और इसके लिए उपयुक्त जलवायु, भूमि, किस्में, देखभाल, पैदावार आदि की जानकारी, जिससे किसान और बागवान भाई अंजीर की उत्तम खेती कर सकते है और अच्छी पैदावार भी प्राप्त कर सकते है अंजीर को सभी प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है, परंतु दोमट अथवा मटियार दोमट, जिसमें उत्तम जल निकास हो, इसके लिए सबसे श्रेष्ठ मिट्टी है भारत के निचले क्षेत्रों में पाये जाने वाली अंजीर की जैव-विविधता का वर्गीकरण तीन प्रजातियों बी एफ- I, बी एफ- II तथा बी एफ- III में किया गया है इनमें बी एफ- III प्रजाति सर्वोत्तम पाई गई है और इसका नामकरण ‘बडका अंजीर’ किस्म के रूप में किया गया है इस किस्म के फलों का औसतन भार 36.8 ग्राम और कुल घुलनशील ठोस तत्त्वों की मात्रा 18.8 डिग्री ब्रिक्स होती है इसमें अन्य किस्मों की तुलना में पानी की मात्रा कम होती है, इसलिए यह किस्म सुखाने के लिये भी उपयुक्त है अंजीर के पौधे मुख्यतः 1 से 2 सेंटीमीटर मोटी, 15 से 20 सेंटीमीटर लम्बी परिपक्व कलमों द्वारा तैयार किये जाते हैं मातृ पौधों से सर्दियों में कलमें लेकर इन्हें 1 से 2 माह तक कैल्सिंग हेतु मिट्टी में दबाया जाता है फरवरी से मार्च में जैसे ही तापमान बढ़ने लगता है, इल कलमों को निकाल कर 15 x 15 सेंटीमीटर की दूरी पर नर्सरी में रोपित किया जाता है अंजीर की नर्सरी की क्यारियों में प्रति वर्गमीटर 7 किलो गोबर की खाद तथा 25 से 30 ग्राम फॉस्फोरस और 20 से 25 ग्राम पोटाश खाद, क्यारी तैयारी के समय डालनी चाहिए नत्रजन खाद 10 से 15 ग्राम प्रतिवर्गमीटर कलमें रोपित करने के एक महीने बाद तथा इतनी ही मात्रा 2 महीने बाद डालनी चाहिए अंजीर के छोटे पौधों 1 से 3 वर्ष में 7 से 10 किलो गोबर की खाद और 3 वर्ष की आयु से बड़े पौधों में 15 से 25 किलोग्राम गोबर की खाद प्रति पौधा, प्रतिवर्ष डालनी चाहिए उर्वरक का प्रयोग मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार करें वैसे अंजीर की फसल बिना उर्वरक के प्रयोग के बाद भी अच्छी पैदावार देती है अंजीर के पौधों की सिधाई इस प्रकार होनी चाहिए कि हर दिशा में इसका फैलाव बराबर हो और पौधे के हर हिस्से तक सूर्य का प्रकाश पहुँच सके इसमें फल एक से दो साल पुरानी टहनियों पर निकलने वाली नई शाखाओं पर लगता है अतः शुरू के वर्षों में इस प्रकार की टहनियों को बढ़ावा देना चाहिए पुराने पेड़ों में भारी काट-छांट लाभप्रद होती है रोग ग्रस्त और सुखी शाखाओं की फल तुड़ाई के बाद काट-छांट करते रहना चाहिए नस्ल सुधार हेतु देसी पेड़ों को जमीन से मीटर की ऊँचाई पर काट दें और मार्च में प्रति तना 3 से 4 कोंपलें रखें और बाकि कोंपलें निकाल दें रखी गई कोंपलों पर जून से जुलाई में चिप या टी बडिंग द्वारा उन्नत किस्मों का रोपण करें इसके अतिरिक्त सितम्बर व मार्च से अप्रैल में भी चिप बडिंग की जा सकती है
Posted by ਲਖਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
06-07-2019 04:46 PM
Punjab
07-08-2019 05:58 PM
ਤੁਸੀ ਕੜਕਨਾਥ ਮੁਰਗੀ ਦਾ ਕੰਮ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ,ਪਰ ਜੇਕਰ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਂਦਰ ਤੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਕੇ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਤਾਂ ਵਧੀਆ ਹੈ ਜੀ ਕੜਕਨਾਥ ਮੱਧ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਦੀ ਪਿਓਰ ਨਸਲ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਚਮੜੀ ਕਾਲੀ ਚਮਕੀਲੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਕਲਗੀ ਵੀ ਕਾਲੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੇ ਇਸਦੀ ਚੁੰਝ ਤੇ ਜੀਭ ਵੀ ਕਾਲੇ ਰੰਗ ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅੰਡੇ ਦੇਸੀ ਅੰਡਿਆ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਤੇ ਖੂਨ ਲਾਲ ਨਾਲੋਂ ਥੋੜਾ ਗੂੜਾ .... (Read More)
ਤੁਸੀ ਕੜਕਨਾਥ ਮੁਰਗੀ ਦਾ ਕੰਮ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ,ਪਰ ਜੇਕਰ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਂਦਰ ਤੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਕੇ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਤਾਂ ਵਧੀਆ ਹੈ ਜੀ ਕੜਕਨਾਥ ਮੱਧ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਦੀ ਪਿਓਰ ਨਸਲ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਚਮੜੀ ਕਾਲੀ ਚਮਕੀਲੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਕਲਗੀ ਵੀ ਕਾਲੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੇ ਇਸਦੀ ਚੁੰਝ ਤੇ ਜੀਭ ਵੀ ਕਾਲੇ ਰੰਗ ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅੰਡੇ ਦੇਸੀ ਅੰਡਿਆ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਤੇ ਖੂਨ ਲਾਲ ਨਾਲੋਂ ਥੋੜਾ ਗੂੜਾ ਲਾਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਅੰਡੇ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਜਿਆਦਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੇ ਫੈਟ ਬਿਲਕੁੱਲ ਘੱਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਸੂਗਰ ਦੇ ਮਰੀਜ਼ਾਂ ਲਈ ਵੀ ਇਹ ਫਾਇਦੇਮੰਦ ਹਨ ਇਸ ਦੇ ਚਿਕਨ ਦਾ 800 ਰੁਪਏ ਕਿਲੋ ਤੱਕ ਰੇਟ ਹੈ ਤੇ ਛੋਟੇ ਬੱਚੇ ਜੇਕਰ ਮੱਧ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਤੋਂ ਮਗਵਾਉਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਪ੍ਰਤੀ ਬੱਚਾ 90-100 ਰੁਪਏ ਤੁਹਾਨੂੰ ਮਿਲੇਗਾ ਇਸ ਦਾ ਅੰਡਾ 45-50 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਅੰਡਾ ਸੇਲ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ 3 ਮਹੀਨੇ ਤੱਕ ਇੱਕ ਬੱਚੇ ਦੇ ਪਾਲਣ ਤੇ ਖਰਚਾ 150 ਰੁਪਏ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤੇ ਜਦੋਂ ਚੂਚੇ ਵੱਡੇ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤਾਂ 1500 ਰੁਪਏ ਆਮਦਨ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਨੂੰ ਫੀਡ ਨਾਰਮਲ ਬਰੈਲਰ ਵਾਲੀ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਾਂ ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਪਾਲਕ ਵੀ ਖਵਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਆਇਰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜੋ ਇਸ ਲਈ ਫਾਇਦੇਮੰਦ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਕੜਕਨਾਥ ਮੁਰਗੀ ਸਾਲ ਵਿਚ 120-130 ਅੰਡੇ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਕੜਕਨਾਥ ਦੇ ਬੱਚੇ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਮੈਂਨੂੰ 9781589637 ਨੰਬਰ ਤੇ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by rahul manda
Rajasthan
06-07-2019 04:37 PM
Punjab
07-12-2019 05:14 PM
Rahul ji vermicompost ko aap kisi bhi fasl men istemal kar sakte hai.iski matra har fasl ke liye alg hoti hai kripya aap btaye ke aapne konsi fasl ki bijai ki hai taki aapko uske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad