Experts Q&A Search

Posted by Manpreet singh
Punjab
20-07-2019 02:12 PM
Punjab
08-01-2019 03:03 AM
Manpreet g jhone dia jda dekho kyi vaar jda de vich kalapan aa janda hai. jis nu jad galan keha janda hai. uss de lyi 500gm saaf di spray kro. growth de lyi biovita 8kg urea de nal mila ke paa deo.
Posted by Ranjeet singh
Punjab
20-07-2019 02:07 PM
Punjab
07-20-2019 02:12 PM
ਇਹ ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਅੰਦਰ ਇਨਫੈਕਸ਼ਨ ਕਰਕੇ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਜੇਕਰ ਉਹ ਹੀਟ ਵਿਚ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਪਹਿਲਾ ਉਸਦੀ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ Metricef-IU ਦਵਾਈ ਦੋ ਦਿਨ ਲਗਾਤਾਰ ਭਰਵਾਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Bovimin-B ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਅਤੇ PG care bolus ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ, ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਦੁਬਾਰਾ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਓ, ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਕੇ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Pregstay gold ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ 2.... (Read More)
ਇਹ ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਅੰਦਰ ਇਨਫੈਕਸ਼ਨ ਕਰਕੇ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਜੇਕਰ ਉਹ ਹੀਟ ਵਿਚ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਪਹਿਲਾ ਉਸਦੀ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ Metricef-IU ਦਵਾਈ ਦੋ ਦਿਨ ਲਗਾਤਾਰ ਭਰਵਾਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Bovimin-B ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਅਤੇ PG care bolus ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ, ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਦੁਬਾਰਾ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਓ, ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਕੇ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Pregstay gold ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ 20 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ.
Posted by aakash sharma
Uttar Pradesh
20-07-2019 01:54 PM
Punjab
07-21-2019 02:25 PM
इसे आप Actinovet हामियोपेथिक दवा की 10—10 बूंदें दिन में तीन बार देनी शुरू करें इससे फर्क पड़ जाएगा
Posted by rammurti
Uttar Pradesh
20-07-2019 01:50 PM
Rajasthan
08-01-2019 04:34 PM
Rammurti जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म .... (Read More)
Rammurti जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Riyaz Ahmed
Uttarakhand
20-07-2019 01:33 PM
Punjab
07-20-2019 02:08 PM
Goat ki aap dudh aur meat dono kamo ke liye Beetal nasal rkh skte hai yadi meat ke liye rkhni hai to Barbari nasal rkh skte hai.
Posted by Sukhpreet Singh
Punjab
20-07-2019 01:31 PM
Punjab
08-01-2019 10:20 AM
ਸਾਉਣੀ/ਮਾਨਸੂਨ ਰੁੱਤ ਦੀ ਮੱਕੀ ਵਿੱਚ ਨਦੀਨ ਵੱਡੀ ਸਮੱਸਿਆ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜੋ ਕਿ ਖੁਰਾਕੀ ਤੱਤ ਲੈਣ ਵਿੱਚ ਫਸਲ ਨਾਲ ਮੁਕਾਬਲਾ ਕਰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ 35% ਤੱਕ ਝਾੜ ਘਟਾ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਲਈ ਵੱਧ ਝਾੜ ਲੈਣ ਲਈ ਨਦੀਨਾਂ ਦਾ ਹੱਲ ਕਰਨਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਮੱਕੀ ਦੀਆਂ ਘੱਟ ਤੋਂ ਘੱਟ ਦੋ ਗੋਡੀਆਂ ਕਰੋ ਪਹਿਲੀ ਗੋਡੀ, ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 20-25 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਅਤੇ ਦੂਜੀ ਗੋਡੀ 40-45 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਪਰ ਜਿਆਦਾ ਹੋਣ ਦੀ ਸੂਰਤ ਵਿੱਚ ਐਂਟੇ.... (Read More)
ਸਾਉਣੀ/ਮਾਨਸੂਨ ਰੁੱਤ ਦੀ ਮੱਕੀ ਵਿੱਚ ਨਦੀਨ ਵੱਡੀ ਸਮੱਸਿਆ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜੋ ਕਿ ਖੁਰਾਕੀ ਤੱਤ ਲੈਣ ਵਿੱਚ ਫਸਲ ਨਾਲ ਮੁਕਾਬਲਾ ਕਰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ 35% ਤੱਕ ਝਾੜ ਘਟਾ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਲਈ ਵੱਧ ਝਾੜ ਲੈਣ ਲਈ ਨਦੀਨਾਂ ਦਾ ਹੱਲ ਕਰਨਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਮੱਕੀ ਦੀਆਂ ਘੱਟ ਤੋਂ ਘੱਟ ਦੋ ਗੋਡੀਆਂ ਕਰੋ ਪਹਿਲੀ ਗੋਡੀ, ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 20-25 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਅਤੇ ਦੂਜੀ ਗੋਡੀ 40-45 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਪਰ ਜਿਆਦਾ ਹੋਣ ਦੀ ਸੂਰਤ ਵਿੱਚ ਐਂਟੇਰਾਜੀਨ 500 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ 200 ਲੀ. ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਸਪ੍ਰੇਅ ਕਰੋ ਗੋਡੀ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਮਿੱਟੀ ਉੱਪਰ ਖਾਦ ਦੀ ਪਤਲੀ ਪਰਤ ਵਿਛਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਜੜਾਂ ਨਾਲ ਮਿੱਟੀ ਲਾਓ
Posted by Abhiyant Singh Thakur
Madhya Pradesh
20-07-2019 01:30 PM
Punjab
07-21-2019 08:36 AM
Aap dairy Training apne jile ke kvk se le skte hai, aap waha apna training form bhar aaye jab v training hogi to woh apko phone krke bta denge, aap apne jile ke kvk se sampark kr skte hai, Lalitpur Mahrauni Marg, MDR 30B, TIKAMGARH– 472 001 (M.P.) Madhya Pradesh. Phone :07683 – 244934
Posted by ਹਰਨੇਕ ਸਿੰਘ
Punjab
20-07-2019 01:24 PM
Punjab
08-01-2019 03:05 AM
jhone de vich soondi di roktham de lyi tata tukumi@100gm ja coragen@60ml ja fame@20ml ja lambda@200ml ja proclaim@90gm nu 150 ltr pani de nal mila ke spray kr skde ho.
Posted by babu sing
Madhya Pradesh
20-07-2019 01:17 PM
Maharashtra
08-01-2019 10:22 AM
खेत को नदीन मुक्त करने के लिए, दो बार गोडाई की आवश्यकता होती है, पहली गोडाई बिजाई के 20 दिन बाद और दूसरी गोडाई बिजाई के 40 दिन बाद करें रासायनिक तरीके से नदीनों को रोकने के लिए, बिजाई के बाद, दो दिनो में, पैंडीमैथालीन 800 मि.ली. को 100-200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें
Posted by Aryan
Uttarakhand
20-07-2019 01:05 PM
Rajasthan
07-23-2019 08:06 PM
आर्यन जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर.... (Read More)
आर्यन जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by करमजीत
Uttarakhand
20-07-2019 01:00 PM
Punjab
07-20-2019 02:09 PM
उसके थन बड़े करने के लिए आप उसे Vitum-H liquid 10—10 मि.ली. सुबह शाम दें और जब उसके धार निकालते हैं तो उसे सरसों का तेल लगाकर निकालें
Posted by khuspal
Punjab
20-07-2019 12:59 PM
Punjab
07-22-2019 12:16 PM
khuspal ji kirpa karke daso ke isdi umar kinni hai ate isnu khaad kehdi kehdi matra vich payi hai ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake,dhanwad
Posted by ਹਰਮਨਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
20-07-2019 12:58 PM
Punjab
08-01-2019 03:35 AM
nahi g saron di khal paun nal ulli rog da koi khatra nahi hai. tuc iss di varto kr skde ho.
Posted by khuspal
Punjab
20-07-2019 12:48 PM
Punjab
07-22-2019 12:15 PM
khuspal ji urea vich saro di khal mila ke nahi payi ja sakdi kyuki saro di kahl ik jaivik hal hai ate urea ik achemical so ehna da koi mel nahi hai is karke ehna di alag to vareto karo.dhanwad
Posted by jay
Gujarat
20-07-2019 12:42 PM
Punjab
07-24-2019 01:43 PM
Sir, best treatment will be if you can visit a doctor, then he can advise you in this case. But according to the picture, you can apply a mixture of glycerine and boric acid in equal proportions with the help of cotton plug. Thank you.
Posted by Aasu karavadara
Gujarat
20-07-2019 12:37 PM
Maharashtra
07-25-2019 06:25 PM
Aasu karavadara जी अफीम एक वार्षिक औषधीय बूटी है, जिसमें कई जरूरी एल्कलॉइड (वे तत्व जिनमें ड्रग्स की मात्रा होती है) जैसे मोर्फिन, कोडेन और थिबेन होते हैं अच्छी उपज और वृद्धि के लिए इसे उपजाऊ, अच्छे निकास वाली काली मिट्टी और हल्की दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 7 के लगभग होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :- Chetak.... (Read More)
Aasu karavadara जी अफीम एक वार्षिक औषधीय बूटी है, जिसमें कई जरूरी एल्कलॉइड (वे तत्व जिनमें ड्रग्स की मात्रा होती है) जैसे मोर्फिन, कोडेन और थिबेन होते हैं अच्छी उपज और वृद्धि के लिए इसे उपजाऊ, अच्छे निकास वाली काली मिट्टी और हल्की दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 7 के लगभग होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :- Chetak: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसके पौधे का औसतन कद 80-90 सैं.मी. होता है इसके फूल सफेद रंग के और फल बड़े और गोल आकार में होते हैं यह अधिक उपजाऊ मिट्टी में अच्छी पैदावार देती है इसमें मोर्फिन की मात्रा 12.5 प्रतिशत होती है यह मोर्फिन की औसतन पैदावार 2 किलोग्राम प्रति एकड़ देती है मिट्टी की किस्म के आधार पर मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की दो-तीन बार जोताई करें मिट्टी को अच्छे से समतल करें ताकि खेत में पानी ना खड़ा हो सके खेत की तैयारी के समय अच्छी तरह से गला हुआ, गाय का गोबर 4 टन प्रति एकड़ में डालें अफीम की बिजाई के लिए अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर नवंबर के पहले सप्ताह तक का समय उपयुक्त होता है इसके बीज छोटे होते हैं इसलिए बीजों को बारीक रेत में अच्छे से मिलाया जाता है और फिर बिजाई के लिए प्रयोग किया जाता है 3 मीटर चौड़े और 5 मीटर लंबे बैड तैयार किए जाते हैं बैड पर 30 सैं.मी. के फासले पर कतार बनाई जाती है, फिर बीजों को कतारों में बोया जाता है पौधे से पौधे का फासला 30 सैं.मी. रखें बिजाई के लिए बुरकाव या कतार में बिजाई का ढंग प्रयोग किया जाता है बीज की मात्रा ज्यादा डालने से गोडाई करने में परेशानी आती है, जिससे फसल का विकास अच्छा नहीं होता, इसलिए बुरकाव विधि से ज्यादा कतारों में बिजाई करने को ज्यादा महत्तव दिया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 2 किलो बीज की मात्रा बहुत होती है बिजाई से पहले मैनकोजेब 4 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें नाइट्रोजन 36 किलो (यूरिया 80 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 4 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 10 किलो) प्रति एकड़ में डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा को दो भागों में बांटे, पहली मात्रा बिजाई के 40-50 दिन के बाद डालें और दूसरी मात्रा फूल बनने से पहले डालें अफीम की पूरी फसल को 8-10 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बिजाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें फिर मिट्टी की किस्म, सिंचित क्षेत्र के आधार पर 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जलवायु हालातों और आवश्यकता के आधार पर सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर, सिंचित खेत में 10-12 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें चीरा लगाने से 8-10 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें नदीनों की तीव्रता के आधार पर दो से तीन गोडाई करें नदीनों की रासायनिक रोकथाम के लिए लसोप्रोटियूरॉन 500 ग्राम को 200 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के बाद तीसरे दिन डालें नदीननाशक क्रिया के 30 दिन बाद पहली गोडाई करें बिजाई के 95-115 दिनों बाद अफीम में फूल निकलते हैं फूल बनने के बाद, 15-20 दिनों में फल परिपक्व हो जाते हैं जब फल अपने रंग को हरे से हल्के हरे में बदल देता है और फल घना हो जाता है तब कट लगाने और दूध इक्ट्ठा करने के लिए सही अवस्था होती है दोपहर में कट लगाने के प्रक्रिया पूरी कर लें और दूध को अगले दिन की सवेर में इक्ट्ठा करें इस प्रक्रिया को हर तीन दिन बाद दोहरायें प्रत्येक फल में 3-56 बार कट लगाए जा सकते हैं आखिरी कट लगाने के बाद फसल को 20-25 दिनों के लिए फसल को सूखने के लिए छोड़ दें अच्छी तरह से सुखाने के बाद फल की तुड़ाई करें और फसल को दरांती के साथ काट दें सूखे फलों की तुड़ाई के बाद उन्हें खुली जगह में बिछा दें और उनमें से बीज निकाल लें धन्यवाद
Posted by Vikash Kumar ji
Bihar
20-07-2019 12:29 PM
Maharashtra
02-26-2020 05:23 PM
श्रीमान जी, कृपया आप इस पौधे की पूरी फोटो भेजें ताकि आपको इसके बारे में जानकरी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by ਗੁਰਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
20-07-2019 12:24 PM
Punjab
08-01-2019 03:34 AM
ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਨਦੀਨਨਾਸ਼ਕ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ●● ਨਦੀਨ ਉੱਗਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ (ਲੁਆਈ ਤੋਂ 2-3 ਦਿਨ ਦੇ ਅੰਦਰ) - ਬੂਟਾਕਲੋਰ 1200 ਮਿਲੀ ਲਿਟਰ ਜਾਂ ਪਰੈਟੀਲਾਕਲੋਰ 50 ਈ ਸੀ ( ਰਿਫਿਟ) 600 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਜਾਂ ਅਨੀਲੋਫਾਸ 18 ਈ ਸੀ 800 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਜਾਂ ਅਨੀਲੋਫਾਸ 30 ਈ ਸੀ 500 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਜਾਂ ਅਨੀਲੋਫਾਸ 50 ਈ ਸੀ 300 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਜਾਂ ਸਟੌਂਪ 30 ਈ ਸੀ 1000 ਤੋਂ 1200 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ( ਹਲਕੀ ਜਾਂ ਭਾਰੀ ਜਮੀਨ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ਼).... (Read More)
ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਨਦੀਨਨਾਸ਼ਕ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ●● ਨਦੀਨ ਉੱਗਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ (ਲੁਆਈ ਤੋਂ 2-3 ਦਿਨ ਦੇ ਅੰਦਰ) - ਬੂਟਾਕਲੋਰ 1200 ਮਿਲੀ ਲਿਟਰ ਜਾਂ ਪਰੈਟੀਲਾਕਲੋਰ 50 ਈ ਸੀ ( ਰਿਫਿਟ) 600 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਜਾਂ ਅਨੀਲੋਫਾਸ 18 ਈ ਸੀ 800 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਜਾਂ ਅਨੀਲੋਫਾਸ 30 ਈ ਸੀ 500 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਜਾਂ ਅਨੀਲੋਫਾਸ 50 ਈ ਸੀ 300 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਜਾਂ ਸਟੌਂਪ 30 ਈ ਸੀ 1000 ਤੋਂ 1200 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ( ਹਲਕੀ ਜਾਂ ਭਾਰੀ ਜਮੀਨ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ਼) ਜਾਂ ਪਰੈਟੀਲਾਕਲੋਰ 37 ਈ ਡਬਲਯੂ ( ਰਿਫਿਟ ਪਲੱਸ) ਜਾਂ ਸਾਥੀ 10 ਡਬਲਯੂ ਪੀ ( ਪਾਈਰੈਜੋਸਲਫਿਊਰਾਨ ਇਥਾਈਲ) 60 ਗ੍ਰਾਮ ਜਾਂ ਟੌਪਸਟਾਰ 80 ਡਬਲਯੂ ਪੀ 45 ਗ੍ਰਾਮ ਵਿੱਚੋਂ ਕਿਸੇ ਇੱਕ ਨਦੀਨਨਾਸ਼ਕ ਨੂੰ 60 ਕਿਲੋ ਰੇਤੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ਼ ਖੜ੍ਹੇ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਛੱਟਾ ਦੇ ਦਿਉ ●●ਜਿੰਨਾ ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਖੜਾ ਕਰਨ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਝੋਨੇ ਦੀ ਲੁਆਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 10-12 ਦਿਨ ਦੇ ਅੰਦਰ ਅੰਦਰ 40 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਗਰੈਨਿਟ 240 ਐਸ ਸੀ ( ਪਿਨਾਕਸੁਲਮ) ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰ ਦਿਉ ਜਿਸ ਨਾਲ ਸਵਾਂਕ, ਝੋਨੇ ਦੇ ਮੋਥੇ ਅਤੇ ਚੌੜੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੇ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਹੋਵੇਗੀ ●● ਜੇਕਰ ਝੋਨੇ ਦੀ ਲੁਆਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਖੇਤ ਵਿਚ ਸਵਾਂਕ ਅਤੇ ਝੋਨੇ ਦੇ ਮੋਥੇ ਉੱਗ ਪੈਂਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਲੁਆਈ ਤੋਂ 20-25 ਦਿਨ ਦੇ ਅੰਦਰ ਅੰਦਰ 100 ਮਿਲੀ ਲਿਟਰ ਨੌਮਨੀ ਗੋਲਡ/ ਵਾਸ਼ ਆਊਟ/ਮਾਚੋ/ ਤਾਰਕ 10 ਐਸ ਸੀ (ਬਿਸਪਾਇਰੀਬੈਕ) ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰ ਦਿਉ ●●ਜੇਕਰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲੈਪਟੋਕਲੋਆ (ਚੀਨੀ) ਘਾਹ ਜਾਂ ਕਣਕੀ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਹੋਵੇ ਤਾਂ 400 ਮਿਲੀ ਲਿਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ 6•7 ਈਸੀ ( ਫਿਨੋਕਸਾਪਰੌਪ) ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਝੋਨੇ ਦੀ ਲੁਆਈ ਤੋਂ 20-25 ਦਿਨ ਦੇ ਅੰਦਰ ਅੰਦਰ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰ ਦਿਉ ●●ਜੇਕਰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਚੌੜੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੇ ਨਦੀਨ ਘਰਿੱਲਾ, ਸਣੀ ਆਦਿ ਅਤੇ ਝੋਨੇ ਦੇ ਮੋਥੇ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਹੋਵੇ ਤਾਂ 30 ਗਰਾਮ ਐਲਗਰਿਪ 20 ਡਬਲਯੂ ਜੀ ( ਮੈਟਸਲਫੂਰਾਨ) ਜਾਂ 16 ਗਰਾਮ ਸੈਗਮੈਂਟ 50 ਡੀ ਐਫ ( ਅਜਿਮਸਲਫੂਰਾਨ) ਜਾਂ 8 ਗਰਾਮ ਐਲਮਿਕਸ 20 ਡਬਲਯੂ ਪੀ (ਮੈਟਸਲਫੂਰਾਨ+ਕਲੋਰੀਮਿਯੂਰਾਨ) ਜਾਂ 50 ਗਰਾਮ ਸਨਰਾਈਜ 15 ਡਬਲਯੂ ਡੀ ਜੀ(ਇਥੋਕਸੀਸਲਫੂਰਾਨ) ਨੂੰ ਲੁਆਈ ਤੋਂ 20 ਦਿਨ ਬਾਅਦ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰ ਦਿਉ
Posted by sukhpreet singh
Punjab
20-07-2019 12:22 PM
Punjab
07-20-2019 02:13 PM
ਸੁਖਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਆਪਣਾ ਸਵਾਲ ਵਿਸਤਾਰ ਨਾਲ ਪੁੱਛੋਂ ਜੀ ਤਾਂ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ .
Posted by Naresh kumar
Haryana
20-07-2019 12:20 PM
Haryana
07-20-2019 01:04 PM
नरेश कुमार जी किसान को ज्यादा जहर के चक्कर में नहीं रहना चाहिए आपको यह मालूम होना चाहिए कि यह कितनी गर्मी के बाद बाद जब पहली बार बारिश आते हैं तो धरती से एकदम फूफा रे बाहर निकलते हैं जो के पौधों पर भी एकदम असर डालते हैं एकदम वातावरण चेंज होने के कारण कुछ फूल झड़ जाते हैं और जिनको आप फूल झड़ना बता रहे उनमें से आ.... (Read More)
नरेश कुमार जी किसान को ज्यादा जहर के चक्कर में नहीं रहना चाहिए आपको यह मालूम होना चाहिए कि यह कितनी गर्मी के बाद बाद जब पहली बार बारिश आते हैं तो धरती से एकदम फूफा रे बाहर निकलते हैं जो के पौधों पर भी एकदम असर डालते हैं एकदम वातावरण चेंज होने के कारण कुछ फूल झड़ जाते हैं और जिनको आप फूल झड़ना बता रहे उनमें से आपको एक पहचान और होनी चाहिए कि आपके फसल में नर फूल और माता फूल कितने थे मर फूल का किसी प्रकार का फल नहीं आता वह हमेशा झड़ने के काम आते हैं घर जाते हैं और अपने खेत के अनजान लोगों के द्वारा बताए गए जहर की सप्रे करके अपने परिवार की ओर धरती और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का काम करता है इसलिए सबसे पहले आपको अपने फसल को नजदीक से जाकर देख लेना चाहिए अगर आपको कोई बीमारी नजर आए उसके बाद छिड़काव करें अशोक वशिष्ठ 70 15136 739
Posted by ravishankar
Uttar Pradesh
20-07-2019 12:12 PM
Maharashtra
07-23-2019 08:10 PM
स्टीविया से हमें शूगर मिलती है हमें इसके पत्तों से ज़ीरो कैलोरी स्वीटनेस मिलती है जो कि यह शूगर से ज्यादा मीठे होते हैं भारत में इसकी 2 किस्में लगायी जाती हैं mds 14औरmds 13 इसके लिए तापमान 30 डिगरी सेल्सियस से 32 डिगरी सेल्सियस चाहिए पंजाब में धान की काश्त ज्यादा होने के कारण ज़मीन निचले पानी का स्तर नीचे जाना बड़ी चिं.... (Read More)
स्टीविया से हमें शूगर मिलती है हमें इसके पत्तों से ज़ीरो कैलोरी स्वीटनेस मिलती है जो कि यह शूगर से ज्यादा मीठे होते हैं भारत में इसकी 2 किस्में लगायी जाती हैं mds 14औरmds 13 इसके लिए तापमान 30 डिगरी सेल्सियस से 32 डिगरी सेल्सियस चाहिए पंजाब में धान की काश्त ज्यादा होने के कारण ज़मीन निचले पानी का स्तर नीचे जाना बड़ी चिंता का विषय है पंजाब की जलवायु मुताबिक रेतली और कंडियाली क्षेत्र क धरती इस फसल के लिए अधिक लाभदायक है इस फसल को पानी बहुत कम लगता है और एक बार पौधे लगाने के बाद 5 साल फसल की कटाई ही करनी होती है पहली फसल की कटाई तीन महीनों के बाद होने के कारण किसानों को आमदन जल्दी शुरू हो जाती है एक एकड़ ज़मीन में 30 से 40 हज़ार पौधे लगते हैं महत्तवपूर्ण तथ्य यह है कि इस फसल पर कीटनाशक या नदीननाशक दवाईयों का प्रयोग नहीं होता यूरिया या डी ए पी खाद के स्थान पर सिर्फ रूड़ी की खाद का ही प्रयोग होता है इस तरह से कुदरती खेती का हिस्सा भी कहा जा सकता है स्टीविया के पौधे में मीठास होने के काराण पशु भी मुंह नहीं लगाते यह फसल कम से कम एक कनाल रकबे में भी लगायी जा सकती है पर यदि 5 एकड़ में लगायी जाये तो भारत सरकार कुल लागत का 40 फीसदी सब्सिडी भी देती है फसल को प्रफुल्लित करने के लिए सरकार लगा रही ज़ोर इसलिए कंडियाली क्षेत्र के किसानों को स्टीविया लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है पंजाब के कमिश्नर खेतीबाड़ी डॉ.बलविंदर सिंह सिद्धू का कहना है कि स्टीविया की फसल धान और गेहूं का बदल बन सकती है, दूसरा इस फसल से गेहूं और धान के मुकाबले कमाई भी ज़्यादा होती है, स्टीविया की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से संपर्क कर सकते है धन्यवाद
Posted by Aman deep Singh
Punjab
20-07-2019 12:10 PM
Punjab
07-22-2019 02:00 PM
ਝੋਨੇ ਵਿਚ ਸਰੋਂ ਦੀ ਖਲ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਬਹੁਤ ਹੀ ਲਾਭਕਾਰੀ ਹੈ ਇਹ ਅਜਿਹਾ ਆਰਗੈਨਿਕ ਤਰੀਕਾ ਹੈ ਜਿਸਦੇ ਨਾਲ ਅਸੀਂ ਝੋਨੇ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਿਚ ਵਾਧਾ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੈ ਝੋਨੇ ਦੇ ਬੂਟੇ ਦੀ ਫੋਟ ਕਰਾਉਣ ਦੇ ਲਈ ਇਸਦੇ ਨਤੀਜੇ ਬਹੁਤ ਹੀ ਵਧੀਆ ਹਨ ਇਸ ਵਿਚ ਛੇ ਮੁੱਖ ਤੱਤ ਹਨ ਜਿਸ ਵਿਚ ਮੁੱਖ ਤੋਰ ਤੇ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ,ਪੋਟਾਸ਼ ਤੇ ਫਾਸਫੋਰਸ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਸਲਫਰ ,ਜਿੰਕ ਤੇ ਬਰੋਨ ਵੀ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨI ਸਰੋਂ ਦੀ ਖਲ ਨੂ.... (Read More)
ਝੋਨੇ ਵਿਚ ਸਰੋਂ ਦੀ ਖਲ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਬਹੁਤ ਹੀ ਲਾਭਕਾਰੀ ਹੈ ਇਹ ਅਜਿਹਾ ਆਰਗੈਨਿਕ ਤਰੀਕਾ ਹੈ ਜਿਸਦੇ ਨਾਲ ਅਸੀਂ ਝੋਨੇ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਿਚ ਵਾਧਾ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੈ ਝੋਨੇ ਦੇ ਬੂਟੇ ਦੀ ਫੋਟ ਕਰਾਉਣ ਦੇ ਲਈ ਇਸਦੇ ਨਤੀਜੇ ਬਹੁਤ ਹੀ ਵਧੀਆ ਹਨ ਇਸ ਵਿਚ ਛੇ ਮੁੱਖ ਤੱਤ ਹਨ ਜਿਸ ਵਿਚ ਮੁੱਖ ਤੋਰ ਤੇ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ,ਪੋਟਾਸ਼ ਤੇ ਫਾਸਫੋਰਸ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਸਲਫਰ ,ਜਿੰਕ ਤੇ ਬਰੋਨ ਵੀ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨI ਸਰੋਂ ਦੀ ਖਲ ਨੂੰ ਝੋਨੇ ਵਿੱਚ ਵਰਤਣ ਦੇ ਲਈ ਦੋ ਤਰੀਕੇ ਹਨ ਪਹਿਲਾ ਤਰੀਕਾ ਇਹ ਹੈ ਕੇ ਇਸਨੂੰ ਡਰੰਮ ਦੇ ਵਿਚ ਭਿਓਂ ਲੋ ਤੇ 5 -6 ਦਿਨ ਲਗਾਤਾਰ ਇਸਨੂੰ ਹਲਾਉਂਦੇ ਰਹੋ ਤੇ ਇਸ ਘੋਲ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਵਾਰੀ ਵਾਲੇ ਦਿਨ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਪਾ ਦਿਓ ਦੂਸਰਾ ਤਰੀਕਾ ਇਹ ਹੈ ਕੇ ਇਸਨੂੰ ਬਰੀਕ ਕੁੱਟ ਕੇ ਇਸਦਾ ਛਿੱਟਾ ਵਾਹਣ ਵਿਚ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸਨੂੰ ਵਰਤਣ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਜਦੋਂ ਝੋਨਾ 15 -20 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਹੋਵੇ ਕਿਓਂਕਿ ਇਸ ਸਮੇ ਜੜ੍ਹਾਂ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਵਿਕਾਸ ਹੁੰਦਾ ਹੀ ਇਸਦੀ ਮਾਤਰਾ ਇਕ ਕਿੱਲੇ ਦੇ ਵਿੱਚ ਸਿਰਫ 16 ਕਿੱਲੋ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਰੇਤੇ ਵਾਲੇ ਜਾਂ ਬਰਾਨੀ ਵਾਹਣ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ 20 ਕਿੱਲੋ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹਾ I
Posted by sanjay Moond
Rajasthan
20-07-2019 12:10 PM
Punjab
07-20-2019 02:15 PM
Sanjay ji aap desi murgi chujje lene ke liye Man Singh 9649050050 (Shree Karni group) se sampark kr skte hai.
Posted by dharmendra singh
Uttar Pradesh
20-07-2019 12:03 PM
Punjab
07-20-2019 12:07 PM
ग्रामप्रिया चूज़े लेने के लिए आप सुमित कुमार 8006000291,7906547529 से संपर्क करें
Posted by gaurav rana
Haryana
20-07-2019 11:58 AM
Punjab
08-01-2019 05:08 AM
Iski matra aap 16-20kg prati acre ke hisab se dal skte ho.
Posted by Gurmeet singh
Punjab
20-07-2019 11:45 AM
Punjab
07-23-2019 08:12 PM
ਖੁੰਬਾ ਦੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਕਈ ਤਰਾਂ ਦੀਆ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਬਟਨ ਖੁੰਬ, ਢੀਂਗਰੀ, ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ, ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਅਤੇ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਇਹਨਾਂ ਵਿਚੋਂ +ਅਲਗ ਹੈ ਜਿਵੇ *ਬਟਨ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 2 ਫਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * *ਢੀਂਗਰੀ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 3 ਫ਼ਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * * ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬ.... (Read More)
ਖੁੰਬਾ ਦੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਕਈ ਤਰਾਂ ਦੀਆ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਬਟਨ ਖੁੰਬ, ਢੀਂਗਰੀ, ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ, ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਅਤੇ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਇਹਨਾਂ ਵਿਚੋਂ +ਅਲਗ ਹੈ ਜਿਵੇ *ਬਟਨ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 2 ਫਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * *ਢੀਂਗਰੀ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 3 ਫ਼ਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * * ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਅੱਧ ਫਰਵਰੀ ਤਕ ਹੈ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ ਇਕ ਫ਼ਸਲ ਹੀ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * *ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਅਗਸਤ ਤਕ ਹੈ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 4 ਫਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਸਤੰਬਰ ਤਕ ਹੈ ਤੁਸੀ ਹੁਣ ਅਪ੍ਰੈਲ ਵਿਚ ਪਰਾਲੀ ਜਾ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਲਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਦੇ ਲਈ ਤੁਹਾਨੂੰ ਪਰਾਲੀ,ਬੀਜ,ਬਾਂਸ, ਸੇਬਾ ਆਦਿ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੈ *ਪਰਾਲੀ ਦੇ ਪੂਲੇ*-- ਝੋਨੇ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਦੇ 1-1 ਕਿਲੋ ਦੇ ਪੂਲੇ ਦੋਨੋ ਸਿਰਿਆ ਤੋਂ ਸੇਬੇ ਨਾਲ ਬੰਨ ਕੇ ਤਿਆਰ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਪੂਲੇ ਦੇ ਸਿਰੇ ਕਟ ਕ ਇਕ ਬਰਾਬਰ ਕਰ ਲਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ *ਪੂਲਿਆ ਦੀ ਕਿਆਰੀ ਲਗਾਉਣਾ*---ਪਰਾਲੀ ਦੇ ਪੂਲਿਆ ਨੂੰ ਸਾਫ ਪਾਣੀ ਵਿਚ 16-20 ਘੰਟੇ ਲਈ ਡਬੋ ਦਇਓ ਗਿਲੇ ਪੂਲਿਆ ਨੂੰ ਢਲਾਨ ਤੇ ਰੱਖ ਕੇ ਵਾਧੂ ਪਾਣੀ ਨਿਕਲਣ ਦਇਓ ਕਮਰੇ ਚ ਇੱਟਾਂ ਤੇ ਬਾਂਸ ਦਾ ਇਕ ਢਕਵਾ ਪਲੇਟਫਾਰਮ ਬਣਾਓ ਇਸ ਪਲੇਟਫਾਰਮ ਤੇ 5 ਪੂਲਿਆ ਦੀ ਇਕ ਤਹਿ ਲਗਾਓ ਜਿਸ ਉਪਰ ਲਗਭਗ 75 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪਾਓ ਇਸ ਤੋਂ ਉਪਰ ਵਾਲੀ ਤਹਿ ਉਲਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤਰਾਂ 5-5 ਪੂਲਿਆ ਦੀਆ 4 ਤਹਿਆ ਵਿਚ 300 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪਾ ਕ ਇਕ ਕਿਆਰੀ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਉਪਰ 2 ਪੂਲੇ ਖੋਲ ਕੇ ਰੱਖ ਦਿਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ *ਖੁੰਬਾ ਦਾ ਫੁੱਟਣਾ*---ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 7-9 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਖੁੰਬਾਂ ਫੁਟਣ ਲਗ ਪੈਂਦੀਆਂ ਹਨ *ਪਾਣੀ ਤੇ ਹਵਾ ਦਾ ਸੰਚਾਰ*-- ਬਿਜਾਈ ਦੇ 2 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਹਰ ਰੋਜ ਪਾਣੀ ਦਾ ਛਿੜਕਾਅ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਖੁੰਬਾਂ ਫੁਟਣ ਉਪਰੰਤ ਹਵਾ ਦਾ ਸੰਚਾਰ 6-8 ਘੰਟੇ ਪ੍ਰਤੀ ਦਿਨ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ * ਖੁੰਬਾਂ ਦੀ ਤੁੜਾਈ*-- ਖੁੰਬਾਂ ਫੁੱਟਣ ਉਪਰੰਤ 1-2 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਤੋੜਨ ਯੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ **ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ** ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਲਈ ਤੂੜੀ ,ਬੀਜ ,ਮੋਮੀ ਲਿਫਾਫੇ(12×16),ਸੇਬਾ,ਕੇਸਿੰਗ, ਮਿਟੀ ਆਦਿ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ *ਤੂੜੀ ਦੀ ਤਿਆਰੀ*--ਸੁਕੀ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਪੱਕੇ ਫ਼ਰਸ਼ ਤੇ ਵਿਛਾ ਕੇ 16-20 ਘੰਟੇ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਗਿਲਾ ਕਰੋ ਗਿਲੀ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਬੋਰੀ ਵਿਚ ਭਰ ਕੇ ਸੇਬੇ ਨਾਲ਼ ਬੰਨ ਦਇਓ ਇਸ ਬੋਰੀ ਨੂੰ ਉਬਲਦੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ 45-50 ਮਿੰਟ ਲਈ ਰੱਖੋ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਕੱਢ ਕੇ ਪੱਕੇ ਫ਼ਰਸ਼ ਤੇ ਵਿਛਾ ਕੇ ਠੰਡਾ ਕਰ ਲਓ ਇਹ ਤੂੜੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੈ *ਬਿਜਾਈ*--- ਠੰਡੀ ਤੂੜੀ ਵਿਚ ਬੀਜ ਰਲਾ ਕੇ ਮੋਮੀ ਲਿਫਾਫੇ ਵਿਚ ਭਰ ਦਇਓ 1 ਮੋਮੀ ਲਿਫਾਫੇ ਵਿਚ ਲਗਭਗ 2 ਕਿਲੋ ਗਿਲੀ ਤੂੜੀ ਅਤੇ 70-80 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਲਿਫਾਫੇ ਦੇ ਮੂੰਹ ਨੂੰ ਸੇਬੇ ਨਾਲ ਬੰਨ ਕੇ ਕਮਰੇ ਵਿਚ ਰੱਖ ਦਇਓ *ਕੇਸਿੰਗ*--ਬਿਜਾਈ ਦੇ 2-3 ਹਫਤਿਆਂ ਬਾਅਦ ਲਿਫਾਫੇ ਖੋਲ ਕੇ ਕੇਸਿੰਗ ਦੀ 1-1.5 ਦੀ ਤਹਿ ਲਗਾ ਦਇਓ ਕੇਸਿੰਗ ਵਿਚ ਰੂੜੀ ਤੇ ਰੇਤਲੀ ਮਿਟੀ(4:1) ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੋ ਕ 24 ਘੰਟਿਆ ਲਈ 4% ਫਾਰਮਲੇਨ ਦੇ ਘੋਲ਼ ਨਾਲ ਜੀਵਣੁ ਰਹਿਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ *ਖੁੰਬਾਂ ਦਾ ਫੁੱਟਣਾ*-- ਕੇਸਿੰਗ ਮਿਟੀ ਪਾਉਣ ਤੋਂ ਲਗਭਗ 2 ਹਫਤਿਆਂ ਵਿਚ ਖੁੰਬਾਂ ਦੇ ਛੋਟੇ-ਛੋਟੇ ਕਿਣਕੇ ਨਿਕਲਣੇ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਜੋ ਕ 4-5 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਤੋੜਨ ਯੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ *ਖੁੰਬਾਂ ਦੀ ਤੁੜਾਈ*-- ਲਗਭਗ 35 -40 ਦਿਨਾਂ ਤਕ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ.
Posted by kulwant singh
Punjab
20-07-2019 11:42 AM
Punjab
08-01-2019 03:09 AM
Jhone de vich urea@110kg kg prati acre paya janda hai. jhona mukh khet de vich lgaun ton 18 dina baad urea ate DAP pauni shuru ko. iss de vich 27kg DAP ja SSP@75kg paa skde ho jekar kanak de vich DAP nahi paayi hai..iss ton ilaava iss de vich 20kg potash paauni hai. Potash da jhona lgaun ton pehla ja kadoo krn de sme khet de vich shitta de skde ho. jo urea hai uss nu 3 hissya de vich vand ke pauna hai. Pehli urea 18 dina te pao. 18-45 dina tak urea di saari maatra paa deo. jekar khet de vich zinc pauna chaunde ho tan pehli urea nal zinc mix kr ke khet de vich shitta de deo. ihh zinc tuc 21% wali ja 33% wali paa skde ho. 21% wali zinc di maatra 25 kg prati acre hai ate 33% wali zinc di maatra 16-17 kg prati acre hai.
Posted by ਰਾਜਵੀਰ ਸਿੰਘ
Punjab
20-07-2019 11:32 AM
Punjab
08-01-2019 03:10 AM
jhone de vich padan di varto 35 dina baad kro. soondi da hamla 35-45 dina de vich hunda hai. odo iss di varto kro.
Posted by ਰਾਜਵੀਰ ਸਿੰਘ
Punjab
20-07-2019 11:31 AM
Punjab
07-20-2019 03:07 PM
ਰਾਜਵੀਰ ਸਿੰਘ ਜੀ, ਝੋਨੇ ਵਿੱਚ ਪਾਦਾਨ ਜਾਂ ਫਰਟੇਰਾ ਨਹੀਂ ਪਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ, ਕਿਉਂਕਿ ਦਾਣੇਦਾਰ ਕੀਟਨਾਸ਼ਕ ਮਿੱਤਰ ਜੀਵਾਂ ਦਾ ਵੀ ਖ਼ਾਤਮਾ ਕਰਦੇ ਨੇ, ਇਸ ਲਈ ਤੁਸੀ ਪੱਤਾ ਲਪੇਟ ਸੁੰਡੀ ਆਉਣ ਤੇ ਫੇਮ 30 ml ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਨਾਲ Hexaconazole ਜਾਂ Folicur 250 ml ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਛਿੜਕਾਓ ਕਰੋ ਪਾਦਾਨ ਦੀ ਜਗਾਹ ਤੁਸੀਂ ਉਹਨੇ ਈ ਖ਼ਰਚੇ ਵਿੱਚ ਦੋਗੁਣਾ ਰਿਜ਼ਲਟ ਲੈ ਰਹੇ ਓ ਕੀਟਨਾਸ਼ਕ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਫੰਗੀ.... (Read More)
ਰਾਜਵੀਰ ਸਿੰਘ ਜੀ, ਝੋਨੇ ਵਿੱਚ ਪਾਦਾਨ ਜਾਂ ਫਰਟੇਰਾ ਨਹੀਂ ਪਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ, ਕਿਉਂਕਿ ਦਾਣੇਦਾਰ ਕੀਟਨਾਸ਼ਕ ਮਿੱਤਰ ਜੀਵਾਂ ਦਾ ਵੀ ਖ਼ਾਤਮਾ ਕਰਦੇ ਨੇ, ਇਸ ਲਈ ਤੁਸੀ ਪੱਤਾ ਲਪੇਟ ਸੁੰਡੀ ਆਉਣ ਤੇ ਫੇਮ 30 ml ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਨਾਲ Hexaconazole ਜਾਂ Folicur 250 ml ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਛਿੜਕਾਓ ਕਰੋ ਪਾਦਾਨ ਦੀ ਜਗਾਹ ਤੁਸੀਂ ਉਹਨੇ ਈ ਖ਼ਰਚੇ ਵਿੱਚ ਦੋਗੁਣਾ ਰਿਜ਼ਲਟ ਲੈ ਰਹੇ ਓ ਕੀਟਨਾਸ਼ਕ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਫੰਗੀਸਾਈਡ ਦਾ ਵੀ ਦਾ ਰਿਜ਼ਲਟ ਵੀ ਪੂਰਾ ਮੈਂ ਖ਼ੁਦ ਕਿਸਾਨ ਹਾਂ ਮੈਨੂੰ ਪੰਜ ਸਾਲ ਹੋ ਗਏ ਆਪਣੇ ਖੇਤਾਂ ਚ ਪਾਦਾਨ ਵਰਤੀ ਨੂੰ
Posted by ਜਗਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
20-07-2019 11:26 AM
Punjab
07-20-2019 02:21 PM
ਤੁਸੀ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿਚ ਮੁਰਗੀਆਂ ਨੂੰ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਸ਼ੈੱਡ ਵਿਚ ਸਾਫ ਸਫਾਈ ਰੱਖੋ, ਸ਼ੈੱਡ ਵਿਚ ਧੂੜ ਨਹੀਂ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ, ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਸ਼ੈੱਡ ਦੇ ਭਾਰ ਬੋਰੀਆਂ ਗਿਲੀਆਂ ਕਰਕੇ ਲਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਿਸ ਨਾਲ ਗਰਮ ਹਵਾ ਸਿੱਧੀ ਅੰਦਰ ਨਾ ਆ ਸਕੇ, ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਸ਼ੈੱਡ ਵਿਚ ਗਰਮੈਸ਼ ਪੈਦਾ ਨਾ ਹੋਣਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਮੁਰਗੀਆਂ ਮੁਰਗਿਆਂ ਕੋਲ ਠੰਡਾ ਪਾਣੀ ਹਮੇਸ਼ਾ ਰੱਖੋ ਜਿਸ ਨੂੰ ਉਹ ਆਪਣੀ ਮਰਜੀ ਨਾਲ ਪੀ ਸਕੇ, ਬਾਕੀ ਓਹਨਾ .... (Read More)
ਤੁਸੀ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿਚ ਮੁਰਗੀਆਂ ਨੂੰ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਸ਼ੈੱਡ ਵਿਚ ਸਾਫ ਸਫਾਈ ਰੱਖੋ, ਸ਼ੈੱਡ ਵਿਚ ਧੂੜ ਨਹੀਂ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ, ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਸ਼ੈੱਡ ਦੇ ਭਾਰ ਬੋਰੀਆਂ ਗਿਲੀਆਂ ਕਰਕੇ ਲਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਿਸ ਨਾਲ ਗਰਮ ਹਵਾ ਸਿੱਧੀ ਅੰਦਰ ਨਾ ਆ ਸਕੇ, ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਸ਼ੈੱਡ ਵਿਚ ਗਰਮੈਸ਼ ਪੈਦਾ ਨਾ ਹੋਣਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਮੁਰਗੀਆਂ ਮੁਰਗਿਆਂ ਕੋਲ ਠੰਡਾ ਪਾਣੀ ਹਮੇਸ਼ਾ ਰੱਖੋ ਜਿਸ ਨੂੰ ਉਹ ਆਪਣੀ ਮਰਜੀ ਨਾਲ ਪੀ ਸਕੇ, ਬਾਕੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ Broton 20ml/ 100 birds ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਅਤੇ B-complex 15ml/100birds ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਵਧਿਆ ਗਰੋਥ ਹੋਵੇਗੀ ..
Posted by ਜਸਵੰਤ ਸਿੰਘ
Punjab
20-07-2019 11:25 AM
Rajasthan
07-20-2019 02:16 PM
ਜਸਵੰਤ ਜੀ ਉਸ ਨੂੰ 200 ਗ੍ਰਾਮ ਮਿਸ਼ਰੀ ਦੀ ਚਾਂਸਨੀ ਬਣਾ ਕੇ ਫਿਰ ਉਸ ਨੂੰ 200gm ਡਾਲਡਾ ਘਿਓ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਗਰਮ ਕਰੋ ਅਤੇ ਫਿਰ ਬਾਦ ਵਿਚ 200 ਗ੍ਰਾਮ ਨੀਂਬੂ ਨਿਚੋੜ ਕੇ 5-7 ਦਿਨ ਮੱਝ ਨੂੰ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਧਾਰ ਵੀ ਨਰਮ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ .
Posted by sachin
Madhya Pradesh
20-07-2019 11:10 AM
Punjab
08-01-2019 03:11 AM
Dhaniya mein kharpatvaar ke liye koi bhi dwaayi sifarish nahi ki jaati hai. yeh kharpatvaar haath se hi nikaala ja skta hai.
Posted by harshal
Maharashtra
20-07-2019 11:07 AM
Punjab
07-24-2019 10:43 PM
Harshal ji kripya aap iski photo bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Arun begana
Uttar Pradesh
20-07-2019 11:03 AM
Punjab
08-01-2019 10:25 AM
मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें जोताई के बाद मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें आखिरी जोताई के समय गाय का गला हुआ गोबर 40 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें यह वर्षा और बसंत के मौसम में उगाई जाती है खरीफ के मौसम में, इसकी बिजाई जून-जुलाई के महीने और बसंत ऋतु में फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है गर्.... (Read More)
मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें जोताई के बाद मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें आखिरी जोताई के समय गाय का गला हुआ गोबर 40 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें यह वर्षा और बसंत के मौसम में उगाई जाती है खरीफ के मौसम में, इसकी बिजाई जून-जुलाई के महीने और बसंत ऋतु में फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है गर्मियों में समय पर बिजाई के लिए कतार से कतार में 45 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें गर्मियों में अगेती बिजाई के लिए 30 सैं.मी. x 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बारिश के मौसम में कतार से कतार में 60 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 20-30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें
Posted by Deepak parmar
Madhya Pradesh
20-07-2019 10:55 AM
Punjab
08-01-2019 03:14 AM
सोयबीन की जानकारी के लिए आप इस लिंक पर क्लिक करें, इसमें सभी जानकारी दी गई है http://www.apnikheti.com/hn/pn/%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A4%BF/%E0%A4%AB%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%82/%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%B2-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%AB%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%82/%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%A8
Posted by ਪਲਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
20-07-2019 10:55 AM
Punjab
07-20-2019 11:00 AM
ਸ੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ ਝੋਨੇ ਵਿੱਚ ਪਦਾਨ(ਕਾਰਟਪ ਹਾਈਡਰੋਕਲੋਰਾਈਡ) @8 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਛਿੱਟਾ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ
Posted by Rajendra Singh Parmar
Madhya Pradesh
20-07-2019 10:47 AM
Punjab
07-23-2019 08:13 PM
Rajendra Singh Parmar जी सभी प्रकार की मिट्टियों में सहजन की खेती की जा सकती है यहाँ तक कि बेकार, बंजर और कम उर्वरा भूमि में भी इसकी खेती की जा सकती है, परन्तु व्यवसायिक खेती के लिए साल में दो बार फलनेवाला सहजन के प्रभेदों के लिए 6-7.5 पी.एच. मान वाली बलुई दोमट मिट्टी बेहतर पाया गया है सहजन के पौध की रोपनी में गड्ढा बनाकर किया ज.... (Read More)
Rajendra Singh Parmar जी सभी प्रकार की मिट्टियों में सहजन की खेती की जा सकती है यहाँ तक कि बेकार, बंजर और कम उर्वरा भूमि में भी इसकी खेती की जा सकती है, परन्तु व्यवसायिक खेती के लिए साल में दो बार फलनेवाला सहजन के प्रभेदों के लिए 6-7.5 पी.एच. मान वाली बलुई दोमट मिट्टी बेहतर पाया गया है सहजन के पौध की रोपनी में गड्ढा बनाकर किया जाता है खेत को अच्छी तरह खरपतवार से साफ़-सफाई का 2.5 x 2.5 मीटर की दूरी पर 45 x 45 x 45 सेंमी. आकार का गड्ढा बनाते हैं गड्ढे के उपरी मिट्टी के साथ 10 किलोग्राम सड़ा हुआ गोबर का खाद मिलाकर गड्ढे को भर देते हैं इससे खेत पौध के रोपनी हेतु तैयार हो जाता है सहजन में बीज और शाखा के टुकड़ों दोनों से ही प्रबर्द्धन होता है अच्छी फलन और साल में दो बार फलन के लिए बीज से प्रबर्द्धन करना अच्छा है एक हेक्टेयर में खेती करने के लिए 500 ग्राम बीज पर्याप्त है बीज को सीधे तैयार गड्ढों में या फिर पॉलीथीन बैग में तैयार कर गड्ढों में लगाया जा सकता है पॉलीथीन बैग में पौध एक महीना में लगाने योग्य तैयार हो जाता है एक महीने के तैयार पौध को पहले से तैयार किए गये गड्ढों में माह जुलाई-सितम्बर तक रोपनी कर दें पौध जब लगभग 75 सेंमी. का हो जाये तो पौध के ऊपरी भाग की खोटनी कर दें, इससे बगल से शाखाओं को निकलने में आसानी होगी रोपनी के तीन महीने के बाद 100 ग्राम यूरिया + 100 ग्राम सुपर फास्फेट + 50 ग्राम पोटाश प्रति गड्ढा की दर से डालें तथा इसके तीन महीने बाद 100 ग्राम यूरिया प्रति गड्ढा का पुन: व्यवहार करें सहजन पर किए गए शोध से यह पाया गया कि मात्र 15 किलोग्राम गोबर की खाद प्रति गड्ढा तथा एजोसपिरिलम और पी.एस.बी. (5 किलोग्राम/हेक्टेयर) के प्रयोग से जैविक सहजन की खेती, उपज में बिना किसी ह्रास के किया जा सकता है अच्छे उत्पादन के लिए सिंचाई करना लाभदायक है गड्ढों में बीज से अगर प्रबर्द्धन किया गया है तो बीज के अंकुरण और अच्छी तरह से स्थापन तक नमी का बना रहना आवश्यक है फूल लगने के समय खेत ज्यादा सूखा या ज्यादा गीला रहने पर दोनों ही अवस्था में फूल के झड़ने की समस्या होती है, इस के बारे में और ज्यादा जानकारी के लिए आप J.B Lal 8290200303 से सम्पर्क कर सकते है धन्यवाद
Posted by Nitin Phogat
Haryana
20-07-2019 10:44 AM
Punjab
07-20-2019 10:51 AM
उसे आप रोजाना 35—40 किलो हरा चारा डालें उसकी हर 3 महीने बाद डीवॉर्मिंग जरूर करवाएं, इनके साथ साथ आप Calcimust gold liquid 50ml, anabolite liquid 100ml रोज़ाना Gog पाउडर 50 ग्राम रोज़ाना देना शुरू करें, इससे फर्क पड़ जाएगा .
Posted by Deepak parmar
Madhya Pradesh
20-07-2019 10:43 AM
Punjab
08-01-2019 03:14 AM
सोयबीन की जानकारी के लिए आप इस लिंक पर क्लिक करें, इसमें सभी जानकारी दी गई है http://www.apnikheti.com/hn/pn/%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A4%BF/%E0%A4%AB%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%82/%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%B2-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%AB%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%82/%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%A8
Posted by gurwinder singh
Punjab
20-07-2019 10:36 AM
Punjab
07-22-2019 04:39 PM
gurwinder ji jehdiyan eh jdan gal rahiyan usd elayi saaf@500 gram nu prati acre de hisab nal chitta deo. dooja isde vich tuc biovita@8 killo nu prati acre de hisab nal varto.dhanwad
Posted by Suryavanshi Sukhvinder Saini
Haryana
20-07-2019 10:34 AM
Punjab
08-01-2019 10:28 AM
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है ब.... (Read More)
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है बस आपको इस बात का ध्यान रखना है कि पौधा ज्यादा पानी वाली और ज्यादा ठंड पड़ने वाली जगह पर नहीं लगाना है कम पानी और रेतली भूमि में लगाने के लिए यह सबसे अच्छी फसल है खेत की तैयारी - खेत की तैयारी के लिए सबसे पहले खेत की 2 बार अच्छी तरह जोताई करके उसमें प्रति हेक्टेयर 10 से 20 टन में पुरानी रूड़ी की खाद डालें साथ ही 120 किलोग्राम यूरिया + 150 किलोग्राम फास्फोरस + 30 किलोग्राम पोटाश इन्हें खेत में समान रूप से बिखेर दें फिर एक बार हल्की जोताई और कराहे से भूमि को समतल कर लें फिर खेत में 50x50 सैं.मी. की दूरी पर मेंड़ें बना लें पौधे की रोपाई और देख रेख - पौधे की रोपाई किसी भी समय की जा सकती है पर अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए जून- जुलाई या फरवरी- मार्च में कर सकते हैं एलोवेरा की रोपाई मेंड़ों पर होती है यह पौधे किसी पुरानी एलोवेरा फार्म या नर्सरी से प्राप्त किए जा सकते हैं यही पौधे बाद में पनीरी के रूप में प्रयोग किए जाते हैं इस विधि को रूट सक्कर कहा जाता है अच्छी उपज के लिए किस्में - सिम सितल, L 1 , 2 , 5 और 49 लगाएं जिसमें जैल की मात्रा ज्यादा पायी जाती है इसके अलावा नेशनल बोटनीकल और प्लांट जैनेटिक रिसोर्स, आई. सी. ए. आर द्वारा रिलीज़ की गई किस्में IC111271, IC111269, IC111280 आदि हैं मेंड़ों पर 50 x 50 सैं.मी. की दूरी पर पौधों को लगाएं पौधे से पौधे की दूरी 50 सैं.मी. रखने पर प्रति एकड़ में 15000 पौधों की रोपाई की जरूरत पड़ेगी सिंचाई - सिंचाई साल भर में इसे सिर्फ 4 से 5 बार सिंचाई की जरूरत होती है सिंचाई के लिए ड्रिप प्रणाली अच्छी रहती है इससे इसकी उपज में वृद्धि होती है गर्मी क दिनों में 25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए कीट और बीमारियां - वैसे इस फसल पर कोई विशेष कीट और रोगों का प्रभाव नहीं होता है पर कहीं कहीं तने के सड़ने और पत्तियों पर दाग वाली बीमारियों का असर देखा गया है जो एक फंगस रोग होता है उसके उपचार के लिए मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए कटाई - यह फसल एक साल बाद काटने के लायक हो जाती है कटाई के दौरान पौधों की सबसे पहले निचली ठोस 3 या 4 पत्तों की कटाई करें उसके बाद लगभग 1 महीने के बाद उससे ऊपर वाली पत्तियों की कटाई करनी चाहिए कभी भी ऊपर वाली नई नाज़ुक पत्तियों की कटाई ना करें कटी हुई पत्तियों में फिर नई पत्तियां बननी शुरू हो जाती हैं प्रति हेक्टेयर में 50 से 60 टन ताजी पत्तियां प्रति वर्ष मिल जाती हैं दूसरे वर्ष में 15 से 20 फीसदी वृद्धि होती है बाजार में इसकी पत्तियों की अनुमानित कीमत 3 से 6 रूपये किलो होती है एक तंदरूस्त पौधे से एक साल में लगभग 3-4 किलो पत्तियां ली जा सकती हैं इस तरह एक वर्ष में एक एकड़ में से 1.5 से 3 लाख की फसल हो जाती है एलोवेरा का प्रयोग तंदरूस्त पत्तियों की कटाई के बाद साफ पानी से धोकर पत्तियों के निचली ओर ब्लेड या चाकू से कट लगाकर थोड़े समय के लिए छोड़ देते हैं जिसमें पीले रंग का गाढ़ा चिपचिपा रस (जेल) निकलता है उसे एक टैंक में इकट्ठा करके इस रस को सुखा लिया जाता है इस सूखे हुए रस को अलग अलग ढंग से तैयार करने के बाद अलग अलग नामों से जाना जाता है जैसे कि सकोतरा केप जब फसल पूरी तरह तैयार हो जाये और उसकी कटाई कर ली जाये तो उसे आप सब्जी मंडी में सीधे तौर पर बेच सकते हैं यदि आप खुद मंडी में बेचते हैं तो आपको अंदाजन 5 से 10 रूपये प्रति किलो तक मुल्य मिल सकता है पर यदि आप किसी कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट करते हो तो इसका रेट उस कंपनी की जरूरत और शर्तों के मुताबिक उस कंपनी के द्वारा तय होता है
Posted by Harman deep
Punjab
20-07-2019 10:27 AM
Punjab
07-24-2019 11:35 PM
harman ji kirpa karke daso ke tuc kehde kehde boote laye han ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by sandeep
Punjab
20-07-2019 10:20 AM
Punjab
07-20-2019 10:59 AM
Sandeep ji cabriotop vdhia fungicide aa mirch te vdhia kam krda is nu kr sakde ho tusi mirch te
Posted by ਨਰਿੰਦਰ ਕੌਰ
Haryana
20-07-2019 10:19 AM
Punjab
07-20-2019 10:52 AM
ਨਰਿੰਦਰ ਕੌਰ ਜੀ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਤੁਹਾਡੇ ਲਈ ਇਹ ਜਾਨਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਧੰਦਾ ਦੋ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਜਾਂ ਮੀਟ ਦਾ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੇਇਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਮੀਟ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਬਰਾਇਲਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀ.... (Read More)
ਨਰਿੰਦਰ ਕੌਰ ਜੀ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਤੁਹਾਡੇ ਲਈ ਇਹ ਜਾਨਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਧੰਦਾ ਦੋ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਜਾਂ ਮੀਟ ਦਾ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੇਇਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਮੀਟ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਬਰਾਇਲਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਬਰਾਇਲਰ ਮੁਰਗੀ ਫਾਰਮਿੰਗ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਘੱਟ ਤੋਂ ਘੱਟ 10 ਹਜਾਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ 4 ਤੋਂ 5 ਲੱਖ ਦਾ ਇੰਤਜਾਮ ਕਰਨਾ ਪਵੇਗਾ , ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਆਡਿਆਂ ਲਈ 500 ਮੁਰਗੀਆਂ ਨਾਲ ਲੇਇਰ ਫਾਰਮਿੰਗ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਇੱਕ ਮੁਰਗੀ ਦੇ ਇੱਕ ਬੱਚੇ ਤੇ ਤੇ ਜਨਮ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਅੰਡੇ ਦੇਣ ਤੱਕ 250-300 ਤੱਕ ਖਰਚਾ ਆ ਜਾਵੇਗਾ ਤੇ ਇਸ ਲਈ 1250 ਸਕੇਅਰ ਫੁੱਟ ਦੇ ਸ਼ੈੱਡ ਜਗਾਂ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਪਵੇਗੀ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਕੇ ਨਾਬਾਰਡ ਤੋਂ ਲੋਨ ਲੈਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ 25 ਤੋਂ 35 % ਤੱਕ ਸਬਸਿਡੀ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਕਰਨ ਦੀ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਵਿੱਭਾਗ ਵੱਲੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦਿਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਤੋਂ ਜਾਂ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਜਾਂ ਫਿਰ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਵੀ ਦਿਨ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਤੇ ਪਹੁੰਚ ਕੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਫਾਰਮ ਭਰ ਆਊ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜਦੋਂ ਵੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਆਵੇਗੀ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਵੱਲੋਂ ਕਾਲ ਕਰਕੇ ਦੱਸ ਦਿੱਤਾ ਜਾਦਾ ਹੈ ਬਹੁਤ ਵਧੀਆ ਕੰਮ ਹੈ ਜੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦਾ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਬ੍ਰਾਇਲਰ ਰੱਖਦੇ ਹੋਂ ਤਾਂ ਪੰਜ ਤੋਂ ਛੇ ਹਫਤਿਆਂ ਦੇ ਅੰਦਰ ਅੰਦਰ ਮੰਡੀਕਰਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤਕਰੀਬਨ ਪੰਜ ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਅੰੰਡਿਆ ਦੀ ਉਪਜ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਾਰਾ ਸਾਲ ਦੀ ਆਮਦਨ ਵਾਲਾ ਕੰਮ ਹੈ ਜੀ ਜਿਆਦਾ ਮਿਹਨਤ ਵੀ ਨਹੀ ਲੱਗਦੀ ਇਹ ਨਾਜੁਕ ਕਿਸਮ ਦੇ ਜਾਨਵਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਕੁੱਝ ਕੁ ਖਤਰਨਾਕ ਬਿਮਾਰੀਆ ਵੀ ਹਨ ਜਿੰਨਾਂ ਤੋੰ ਬਚਣ ਲਈ ਖਾਸ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਹੂੰਦੀ ਹੈ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਡਿਟੇਲ ਵਿੱਚ ਦੱਸੋ ਜਾਂ ਫਿਰ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਕੋਈ ਹੋਰ ਮੁਸ਼ਕਿਲ ਹੈ ਜਾਂ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਆਪਣਾ ਸਵਾਲ ਦੁਬਾਰਾ ਪੁੱਛ ਸਕਦੇ ਹੋਂ.
Posted by gurchet singh
Punjab
20-07-2019 10:18 AM
Punjab
07-25-2019 01:29 PM
gurchet ji kripa karke daso ke isnu tuc hale tak kini urea payi hai ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad