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Posted by हेमन्त कुमार सेन
Rajasthan
21-07-2019 03:19 PM
Maharashtra
07-23-2019 04:29 PM
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति व.... (Read More)
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति वर्ग फीट जगह) में मिलायें इसके बाद वेस्ट जैसे कि बची कुची सब्जियां, फल, कच्चा गोबर, गोबर की सलरी की 8—10 इंच मोटी परत डालें दूसरी परत के बाद इसके ऊपर सूखे पत्ते या पराली से ढक दें हर परत के बाद पानी छिड़कें ताकि नमी बनी रहे वर्मीकंपोस्ट के बैड को 3—4 इंच मोटी गोबर की परत से ढक दें और इसके ऊपर बोरा या तिरपाल रखें ताकि नमी बनी रहे रसोई, फसलों या डेयरी के बचे कुचे की परत को रैक से पलटते रहें और आवश्यकतानुसार थोड़ा थोड़ा करके और वेस्ट भी डाल सकते हैं इसके ऊपर कच्चा गोबर भी डाल सकते हैं पर ध्यान रखें कि यह परत पहले जितनी ही मोटी रहें वर्मी कंपोस्ट की खाद मौसम के हिसाब से 45—60 दिनों में तैयार हो जाती है सबसे ऊपर वाली परत को हटाकर गंडोए छलनी से अलग कर लें और निचली छोड़ दें इसके ऊपर दोबारा रसोई या एग्रो वेस्ट की 6 इंच मोटी परत बिछाकर दोबारा खाद तैयार की जा सकती हैं 45 दिनों के बाद पानी छिड़कना बंद करने से भी गंडोए निचली परत में चले जाते हैं और छलनी से अलग करने में समय कम लगता है तैयार वर्मी कंपोस्ट काले भूरे रंग की गंध रहित और चाय पत्ती जैसी होती है इसे छांव में हवा में सुखकर आवश्यकतानुसार थैले या बोरियों में डालकर रखा जा सकता है एक टन वर्मी कंपोस्ट में 1.0—1.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 5—10 किलोग्राम पोटाश और 3.5—5.0 किलो फासफोरस होता है इसके अलावा इसमें कई तरह के एन्ज़ाइम और सूक्ष्म तत्व कॉपर, आयरन, जिंक, सल्फर, कैलशियम और मैगनीशियम आदि होते हैं
Posted by sukh kang
Punjab
21-07-2019 03:14 PM
Maharashtra
11-30-2019 02:22 PM
sukh ji eh gobh di sundi ja patta lapet sundi di rotkham de layi varti jandi hai isdi matra 4kilo nu prtai acre de hisab nal vartya janda hai isda asar 15-18 din rehnda hai.dhanwad
Posted by ਰਸ਼ਪਿੰਦਰ ਭੁੱਲਰ
Punjab
21-07-2019 03:14 PM
Punjab
07-23-2019 10:13 PM
tuci uss nu Nutrich bolus 1-1 swere sham deo ate 15 din deo, iss nal heat vich aa jawegi.
Posted by sanjeev Kumar
Punjab
21-07-2019 03:03 PM
Punjab
07-23-2019 06:07 PM
sanjeev ji eh paniri smet ene din laindi hai.dhanwad
Posted by germandeep Singh bhangu
Punjab
21-07-2019 03:01 PM
Punjab
07-21-2019 03:04 PM
germandeep ji jhone Vich padaan gobh di sundi ja jad di sundi di roktham de layi varti jandi hai.jekar isda hamla nahi hai ta tuhanu isdi varto Karn di lod nahi hai.
Posted by abdulgaffar
Maharashtra
21-07-2019 02:58 PM
Punjab
07-24-2019 03:39 PM
Bakre ko kam se kam 1 year ki age se breeding ke liye use karna chahiye ji.
Posted by nirmal sahu
Madhya Pradesh
21-07-2019 02:58 PM
Punjab
07-21-2019 03:05 PM
Nirmal ji aap iske uper NPK 191919@1 killo ko 150 litre Pani men Mila Kar spray karen.is se paudhe me peelapan door ho jayega.dhanywad
Posted by manohar nandram rathod
Madhya Pradesh
21-07-2019 02:47 PM
Maharashtra
11-30-2019 02:28 PM
मनोहर जी नदीन नाशक की स्प्रे मौसम साफ़ होने के बाद ही करें धन्यवाद
Posted by Jagjeet singh
Punjab
21-07-2019 02:39 PM
Punjab
07-21-2019 02:58 PM
जगजीत जी इसकी रोकथाम के लिए आप nomnigold@100 ml को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by ਗੁਰਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
21-07-2019 02:37 PM
Punjab
07-30-2019 06:45 PM
ਗੁਰਜੀਤ ਜੀ ਜੇਕਰ ਪੱਤੇ ਸਿਰੇ ਤੋਂ ਪੀਲੇ ਪੈ ਰਹੇ ਹਨ ਤਾ ਇਹ ਲੋਹੇ ਦੀ ਕਮੀ ਦੇ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ferrous sulphate @1 ਕਿਲੋ ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by avaneeshradheavaneeshshakya@gmail.com
Uttar Pradesh
21-07-2019 02:34 PM

?

Punjab
07-21-2019 02:49 PM
कृप्या आप अपना सवाल पूछें इस एप में आप फसलों और पशुओं से संबंधित कोई भी जानकारी ले सकते है यदि आपका कोई सवाल है तो आप एप में हमारे माहिरों से पूछ सकते हैं धन्यवाद
Posted by jagtar sidhu
Punjab
21-07-2019 02:27 PM
Punjab
07-24-2019 12:04 PM
Pear ke plant lain layi Head Deptt. of Horticulture headhort@pau.edu te mail karke plant order kar sakte hai, jekar order approved ho gya ta month December 2019 or January 2020 vich paudhe mil jange.dhanwad
Posted by मुकेश
Uttar Pradesh
21-07-2019 02:23 PM
Rajasthan
07-23-2019 06:36 PM
मुकेश जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर.... (Read More)
मुकेश जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by rajendra mehra
Madhya Pradesh
21-07-2019 02:16 PM
Punjab
07-21-2019 02:27 PM
Desi chicks lene ke liye aap Sumit Kumar 8006000291, 7906547529 Sumit Kumar Poultry Farm se samparak kar sakte hai. Thank you.
Posted by vikas
Rajasthan
21-07-2019 01:48 PM
Punjab
07-21-2019 02:19 PM
usko aap pett ke kiro ke liye Albendazole bolus den, usko rojana 30-35 kg hara chara dalen, iske sath aap Cargill ki Heifer dry feed deni suru kren aur Cafplan powder 50-50gm subah sham dena suru kren, isse uski achi growth ho jayegi.
Posted by harbhajan
Punjab
21-07-2019 01:48 PM
Punjab
07-21-2019 02:20 PM
hanji tuc isdi bijai Kar sakde ho.
Posted by Mankirat singh sandhu
Punjab
21-07-2019 01:35 PM
Punjab
07-21-2019 02:20 PM
mankirat ji eh fungus di roktham krdi hai isda result vadia hai.
Posted by arvind
Punjab
21-07-2019 01:32 PM
Punjab
07-21-2019 02:21 PM
अरविन्द जी कृपया इसकी उम्र बताएं ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by Mankirat singh sandhu
Punjab
21-07-2019 01:30 PM
Punjab
07-21-2019 02:20 PM
Kirpa krke apna swal de nal photo v upload kro ji tan jo tuhanu sahi jankari diti jaa skee.
Posted by pramod Mishra
Madhya Pradesh
21-07-2019 01:28 PM
Punjab
07-21-2019 08:41 PM
धान भारत की एक महत्तवपूर्ण फसल है जो कि जोताई योग्य क्षेत्र के लगभग एक चौथाई हिस्से में उगाई जाती है और भारत की लगभग आधी आबादी इसे मुख्य भोजन के रूप में प्रयोग करती है यह उत्तर प्रदेश की मुख्य फसल है और उत्तर प्रदेश के लगभग 5.4 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है Basmati, Kalajeera, Vishnu Parag आदि धान की कुछ उच्च ग.... (Read More)
धान भारत की एक महत्तवपूर्ण फसल है जो कि जोताई योग्य क्षेत्र के लगभग एक चौथाई हिस्से में उगाई जाती है और भारत की लगभग आधी आबादी इसे मुख्य भोजन के रूप में प्रयोग करती है यह उत्तर प्रदेश की मुख्य फसल है और उत्तर प्रदेश के लगभग 5.4 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है Basmati, Kalajeera, Vishnu Parag आदि धान की कुछ उच्च गुणवत्ता वाली किस्में हैं जिनकी खेती उत्तर प्रदेश में की जाती है मिट्टी इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है प्रसिद्ध किस्में और पैदावार Jaya: यह छोटे कद की और अधिक उपज देने वाली किस्म गर्दन तोड़ के प्रतिरोधक है यह किस्म 142 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने बड़े और लंबे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 26 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Chakia 59: यह किस्म कम जल जमाव वाले हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है Govind: यह किस्म पंतनगर द्वारा विकसित की गई है यह किस्म 105 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Indrasan: यह तराई क्षेत्रों की प्रसिद्ध किस्म है Mahsud: यह किस्म निचले क्षेत्रों में बारानी स्थितियों में उगाने के लिए उपयुक्त है Majhera 3: यह लंबी किस्म सूखे को सहनेयोग्य है और ऊंचे क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Nagina 22: यह ऊंचे क्षेत्रों में बारानी हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं Narendra-1 and Narendra-2: यह किस्म 105 और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Pant Dhan 6: यह किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त है Saket 4: यह अगेते समय की किस्म है और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह यू पी की सबसे प्रसिद्ध किस्म है T9: यह देरी से बोयी जाने वाली सुगंधित किस्म है इसके दाने बेलनाकार होते हैं VL Dhan 16: यह निम्न और मध्यम क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त किस्म है VL 206: यह लंबी किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Usar 1: यह किस्म कानपुर में विकसित की गई यह क्षारीय और लवणीय मिट्टी में खेती करने के लिए उपयुक्त है बासमती किस्में Taraori Basmati: यह सिंचित क्षेत्रों में अगेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म 145-155 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Haryana Basmati no 1: यह अर्द्ध छोटे कद की किस्म है और सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Basmati 1121, Pusa Basmati 1, CSR 30, Shabnam दूसरे राज्यों की किस्में Hybrid 6201: यह सिंचित क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है यह भुरड़ रोग के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 25 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Vivek Dhan 62: यह सिंचित और पहाड़ी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं यह भुरड़ रोग के प्रतिरोधक किस्म है यह गर्दन तोड़ और कम तापमान वाले क्षेत्रों को भी सहन कर सकती है इसकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Karnataka Rice Hybrid 2: यह सिंचित और समय से बिजाई वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह पत्तों के झुलस रोग और अन्य बीमारियों को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 35 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kanak: यह दरमियाने क्षेत्रों में बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने लंबे और मोटे होते हैं यह बैक्टीरियल झुलस रोग के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Ratnagiri 1 and 2: सिंचित क्षेत्रों के लिए जबकि निचले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है ये अर्द्ध छोटे कद की किस्म हैं इनकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल और 21 क्विंटल प्रति एकड़ होती है ज़मीन की तैयारी शुष्क खेतों को अच्छा बनाने, नदीन रहित और सेहतमंद वृद्धि के लिए ग्लाफोसेट डालनी चाहिए गेहूं की कटाई के बाद ज़मीन पर हरी खाद के तौर पर मई के पहले सप्ताह ढैंचा (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़), या सन (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़) या लोबीया (बीज दर 12 किलोग्राम प्रति एकड़) की बिजाई करनी चाहिए जब फसल 6 से 8 सप्ताह की हो जाए तो इसे खेत में कद्दू करने से एक दिन खेत में ही जोत देना चाहिए इस तरह प्रति एकड़ 25 किलो नाइट्रोजन खाद की बचत होती है भूमि को समतल करने के लिए लेज़र लेवलर का प्रयोग किया जाता है इसके बाद खेत में पानी खड़ा कर दें ताकि भूमि के अंदर ऊंचे नीचे स्थानों की पहचान हो सके इस तरह पानी के रसाव के कारण पानी की होने वाले बर्बादी को कम किया जा सके बिजाई बिजाई का समय यू पी के सिंचित और निम्न बारानी क्षेत्रों में मध्य जून से शुरूआती जुलाई तक का समय उपयुक्त होता है बीज की गहराई पौधे की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए फासला बनाकर लगाने से पौधे ज्यादा पैदावार देते हैं फासला उपजाऊ मिट्टी में 20 सैं.मी. x 15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जबकि हल्की मिट्टी में रोपाई के लिए 15 सैं.मी. x 10 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 20 x 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बिजाई का ढंग सिंचित और कम बारानी क्षेत्रों में रोपाई ढंग प्रयोग किया जाता है रोपाई के लिए 25-30 दिनों के पौधों का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 30-35 दिनों के पौधे रोपाई के लिए प्रयोग करें ऊंचे क्षेत्रों में, शुष्क और गीली मिट्टी में रोपाई ढंग का प्रयोग करें बीज बीज की मात्रा एक एकड़ खेत में 6-8 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बीज का उपचार बिजाई से पहले 10 लीटर पानी में 20 ग्राम कार्बेनडाज़िम $ 1 ग्राम स्ट्रैप्टोसाईक्लिन घोल लें और इस घोल में बीजो को 8-10 घंटे तक भिगोयें उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं और फिर बिजाई के लिए प्रयोग करें पनीरी की देख-रेख और रोपण वैट बैड नर्सरी : यह तकनीक उन क्षेत्रों में अपनाई जाती है जहां पर पानी ज्यादा मात्रा में पाया जाता है नर्सरी का 1/10 हिस्सा दूसरे खेत में लगाया जाता है इसकी बिजाई छींटे द्वारा की जाती है यहां पर खेत की जोताई और खेत को समतल किया जाता है बैडों पर कईं दिन तक नमी बनाए रखनी चाहिए पानी से खेत को ज्यादा ना भरें जब नर्सरी 2 सैं.मी. से वृद्धि कर जाए तब पानी को खेत में लगाते रहना चाहिए बिजाई के 15 दिन बाद 26 किलो यूरिया डालना चाहिए जब नर्सरी 25-30 सैं.मी. तक लंबी हो जाए तब उसे 15-21 दिन बाद दूसरे खेत में लगा देना चाहिए और खेत को लगातार पानी लगाते रहना चाहिए सूखे बैड वाली नर्सरी : यह तकनीक शुष्क क्षेत्रों में अपनाई जाती है जो बैड बनाया जाता है वो बिजाई वाले खेत का 1/10 हिस्से में बीज बोया जाता है बैड का आकार सीमित होना चाहिए और उसकी ऊंचाई 6-10 से.मी होनी चाहिए धान का आधा जला हुआ छिलका बैड पर बिखेर देना चाहिए इससे जड़ें मजबूत होती हैं सही समय पर सिंचाई करते रहना चाहिए और नमी बनाए रखना चाहिए ताकि नए पौधे नष्ट ना हों तत्वों की पूर्ति के लिए खाद डालना जरूरी है मॉडीफाईड मैट नर्सरी : यह नर्सरी लगाने का एक ऐसा तरीका है जिसमें कम जगह और कम बीजों की जरूरत होती है यह नर्सरी किसी भी जगह पर बनाई जा सकती हैं जहां पर समतल जगह हो और पानी की सुविधा हो इसकी पनीरी लगाने के लिए 1% खेत की जरूरत होती है 4 से.मी की सतह पर नए पौधे लगाए जाते हैं इसे बनाने के लिए 1 मीटर चौड़े और 20-30 मीटर लंबे जमीन के टुकड़े की जरूरत होती है इसके ऊपर बिछाने के लिए पॉलीथीन और केले के पत्तों की जरूरत होती है इसके इलावा एक लकड़ी का बकसा जो कि 4 से.मी गहरा होता हैं मिट्टी के मिश्रण से भरा होता है बीजों को इसके अंदर रख देना चाहिए और फिर बीजों को सूखी मिट्टी के साथ ढक देना चाहिए इसके बाद पानी का छिड़काव कर देना चाहिए लकड़ी के बक्से को नमी देते रहना चाहिए बिजाई से 11-14 दिनों के बाद पौध तैयार हो जाती है जब पौध तैयार हो जाती है तब मैट से पौध को दूसरे खेत में रोपण कर दिया जाता है फासला: पौधों का फासला 20x20 सैं.मी. या 25x25 सैं.मी. होना चाहिए खेत में पौध रोपण पनीरी लगाने का ढंग 1. कद्दू करके लगाई जाने वाली पनीरी : आमतौर पर पंक्ति में लगाए जाने वाले पौधे 20x15 सैं.मी. दूरी पर लगाए जाते हैं और देरी से लगाई जाने वाली पनीरी 15x15 सैं.मी. पर लगाई जाती है नए पौधों की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए 2. बैड बनाकर लगाई जाने वाली पनीरी : यह बैड भारी ज़मीनों के लिए बनाए जाते हैं पनीरी लगाने से पहले खालियों में पानी लगाना चाहिए और फिर पनीरी को खेत में लगाना चाहिए पौधे से पौधे का फासला 9 सैं.मी. होना चाहिए 3. मशीनी ढंग से लगाई जाने वाली पनीरी : मैट पनीरी के लिए मशीनों का प्रयोग किया जाता है यह मशीन 30x12 सैं.मी. के फासले पर पनीरी लगानी चाहिए खरपतवार नियंत्रण रोपाई के 2 से 3 दिन बाद नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 50 ई सी 1200 मि.ली. या थायोबेनकार्ब 50 ई सी 1200 मि.ली. या पैंडीमैथालीन 30 ई सी या प्रैटीलाक्लोर 50 ई सी 600 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें इनमें से किसी एक नदीननाशक को 60 किलो रेत में मिलाकर 4-5 सैं.मी. गहरे खड़े पानी में बुरकाव करें चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए मेटसलफुरॉन 20 डब्लयु पी 30 ग्राम को 150 लीटर पानी में मिलाकर नदीनों के अंकुरण के बाद रोपाई के 20-25 दिन बाद डालें स्प्रे से पहले खेत में खड़े पानी का निकास कर दें और स्प्रे के एक दिन बाद सिंचाई करें नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 1 लीटर को बिजाई के 6 से 7 दिनों के बाद प्रति एकड़ में स्प्रे करें सिंचाई पनीरी लगाने के बाद खेत में दो सप्ताह तक अच्छी तरह पानी खड़ा रहने देना चाहिए जब सारा पानी सूख जाए तो उसके दो दिन बाद फिर से पानी को लगाना चाहिए खड़े पानी की गहराई 10 सै.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए खेत में से बूटी और नदीनों को निकालने से पहले खेत में से सारा पानी निकाल देना चाहिए ओर इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद खेत की फिर से सिंचाई करनी चाहिए पकने से 15 दिन पहले सिंचाई करनी बंद करनी चाहिए ताकि फसल को आसानी से काटा जा सके ऊंची भूमि पर सिंचाई पूरी तरह से बारिश पर निर्भर करती है बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर और पानी की उपलब्धता के आधार पर गंभीर अवस्थाओं में सिंचाई करें
Posted by rohit
Punjab
21-07-2019 01:19 PM
Punjab
07-23-2019 04:57 PM
Rohit ji you can saw the vegetables like cucumber,bitter gourd,okra ,tomato, radish,cauliflower etc.
Posted by Avi butter
Punjab
21-07-2019 01:19 PM

?

Punjab
07-21-2019 02:21 PM
Avi ji tuhade walo bejji audio upload nhi hoi hai kirpa krke audio dubara upload kro ta jo tuhanu sahi jankari diti jaa skee.
Posted by sumit
Haryana
21-07-2019 01:12 PM
Punjab
07-21-2019 02:24 PM
सुमि जी आप बताएं कि कौन सी किस्म की बिजाई की है ताकि आपको इसके बारे में पुरी जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by Mankirat singh sandhu
Punjab
21-07-2019 01:07 PM
Punjab
07-21-2019 02:25 PM
mankirat ji eh fungus hai isde layi tuc saaf@500 gram nu prati acre de hisab nal mitti Vich Mila ke chitta deo.dhanwad
Posted by Gurjeet Singh
Punjab
21-07-2019 01:06 PM
Maharashtra
07-23-2019 05:06 PM
gurjeet ji tuc hun kheere di bijai kar sakde ho. isd elayi tuc kisam jive Punjab Kheera-1,Punjab Naveen di bijai kar sakde ho.
Posted by pradeep
Himachal Pradesh
21-07-2019 01:05 PM
Punjab
07-21-2019 02:27 PM
Pradeep ji aap isme dheemak check Karen agar maujood hai to aap chlorpyriphos@4ml ko prati litre Pani ke hisab se daale.dhanywad
Posted by Gurjeet Singh
Punjab
21-07-2019 12:59 PM
Punjab
07-25-2019 10:13 AM
Gurjeet Singh ji hanji tusi hun v apne nede di cooperative society vich ja ke form bhar sakde ho ji.
Posted by ਪਿ੍ਤਪਾਲ ਸਿੰਘ
Punjab
21-07-2019 12:52 PM
Punjab
07-21-2019 01:02 PM
ਸ਼ਰੀ ਦੇ ਪੱਤਿਆਂ ਨੂੰ ਫੜਕੜੀ ਪਾ ਕੇ ਉਬਾਲ ਲਉ ਤੇ ਠਾਰ ਕੇ ਉਸ ਨਾਲ ਅੱਖ ਸਾਫ ਕਰੋ ਤੇ ਫਿਰ ਅੱਖ ਵਿਚ ਬੋਰਿਕ ਐਸਿਡ ਪਾਓ , ਤੁਸੀ 2-3 ਗ੍ਰਾਮ ਬੋਰਿਕ ਐਸਿਡ ਲੈ ਕੇ ਅੱਖ ਨੂੰ ਥੋੜਾ ਨੀਚੇ ਖਿੱਚ ਕੇ ਪਾਓ , ਇਸਨੂੰ 3-4 ਵਾਰ ਪਾਓ ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ ਜਾਂ ਅੱਖ ਵਿਚ ਬੋਰਿਕ ਐਸਿਡ ਦੀ ਕਿਸੀ ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ , ਇਕ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ 20 ਗ੍ਰਾਮ ਬੋਰਿਕ ਐਸਿਡ ਮਿਲਾ ਕੇ ਅੱਖ ਵਿਚ ਸਪਰੇ ਕਰੋ , ਇਸ ਨਾਲ.... (Read More)
ਸ਼ਰੀ ਦੇ ਪੱਤਿਆਂ ਨੂੰ ਫੜਕੜੀ ਪਾ ਕੇ ਉਬਾਲ ਲਉ ਤੇ ਠਾਰ ਕੇ ਉਸ ਨਾਲ ਅੱਖ ਸਾਫ ਕਰੋ ਤੇ ਫਿਰ ਅੱਖ ਵਿਚ ਬੋਰਿਕ ਐਸਿਡ ਪਾਓ , ਤੁਸੀ 2-3 ਗ੍ਰਾਮ ਬੋਰਿਕ ਐਸਿਡ ਲੈ ਕੇ ਅੱਖ ਨੂੰ ਥੋੜਾ ਨੀਚੇ ਖਿੱਚ ਕੇ ਪਾਓ , ਇਸਨੂੰ 3-4 ਵਾਰ ਪਾਓ ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ ਜਾਂ ਅੱਖ ਵਿਚ ਬੋਰਿਕ ਐਸਿਡ ਦੀ ਕਿਸੀ ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ , ਇਕ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ 20 ਗ੍ਰਾਮ ਬੋਰਿਕ ਐਸਿਡ ਮਿਲਾ ਕੇ ਅੱਖ ਵਿਚ ਸਪਰੇ ਕਰੋ , ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ.
Posted by akash kumar
Haryana
21-07-2019 12:47 PM
Punjab
07-24-2019 03:41 PM
लेयर फार्मिंग के लिए आपको 50 फीट लंबाई वाली जगह और 20 फीट चौड़ाई वाली जगह की जरूरत होती है यह आपका 1000 वर्ग फुट जगह बन जाती है यहां आप 1000 बच्चों को रख सकते हैं और यदि आप लेयर का बच्चा अपने फार्म पर तैयार करते है तो आपको बच्चा अंडे देने तक 160—170 रूप्ये प्रति बच्चे के हिसाब से खर्चा आएगा यदि आप तैयार बच्चा लेकर आते है तो .... (Read More)
लेयर फार्मिंग के लिए आपको 50 फीट लंबाई वाली जगह और 20 फीट चौड़ाई वाली जगह की जरूरत होती है यह आपका 1000 वर्ग फुट जगह बन जाती है यहां आप 1000 बच्चों को रख सकते हैं और यदि आप लेयर का बच्चा अपने फार्म पर तैयार करते है तो आपको बच्चा अंडे देने तक 160—170 रूप्ये प्रति बच्चे के हिसाब से खर्चा आएगा यदि आप तैयार बच्चा लेकर आते है तो वो आपको 205—210 रूप्ये प्रति बच्चे के हिसाब से पड़ेगा फिर आप उस हिसाब से इनको खरीद सकते है.
Posted by Sachin Sharma
Chattisgarh
21-07-2019 12:38 PM
Punjab
07-21-2019 12:46 PM
यदि आप मीट के लिए सिर्फ बकरा रखना चाहते है तो आप बरबरी नस्ल रख सकते है इसका मीट और ग्रोथ जल्दी होती है
Posted by Praful Thakare
Maharashtra
21-07-2019 12:33 PM
Maharashtra
07-22-2019 06:15 PM
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति वर्.... (Read More)
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति वर्ग फीट जगह) में मिलायें इसके बाद वेस्ट जैसे कि बची कुची सब्जियां, फल, कच्चा गोबर, गोबर की सलरी की 8—10 इंच मोटी परत डालें दूसरी परत के बाद इसके ऊपर सूखे पत्ते या पराली से ढक दें हर परत के बाद पानी छिड़कें ताकि नमी बनी रहे वर्मीकंपोस्ट के बैड को 3—4 इंच मोटी गोबर की परत से ढक दें और इसके ऊपर बोरा या तिरपाल रखें ताकि नमी बनी रहे रसोई, फसलों या डेयरी के बचे कुचे की परत को रैक से पलटते रहें और आवश्यकतानुसार थोड़ा थोड़ा करके और वेस्ट भी डाल सकते हैं इसके ऊपर कच्चा गोबर भी डाल सकते हैं पर ध्यान रखें कि यह परत पहले जितनी ही मोटी रहें वर्मी कंपोस्ट की खाद मौसम के हिसाब से 45—60 दिनों में तैयार हो जाती है सबसे ऊपर वाली परत को हटाकर गंडोए छलनी से अलग कर लें और निचली छोड़ दें इसके ऊपर दोबारा रसोई या एग्रो वेस्ट की 6 इंच मोटी परत बिछाकर दोबारा खाद तैयार की जा सकती हैं 45 दिनों के बाद पानी छिड़कना बंद करने से भी गंडोए निचली परत में चले जाते हैं और छलनी से अलग करने में समय कम लगता है तैयार वर्मी कंपोस्ट काले भूरे रंग की गंध रहित और चाय पत्ती जैसी होती है इसे छांव में हवा में सुखकर आवश्यकतानुसार थैले या बोरियों में डालकर रखा जा सकता है एक टन वर्मी कंपोस्ट में 1.0—1.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 5—10 किलोग्राम पोटाश और 3.5—5.0 किलो फासफोरस होता है इसके अलावा इसमें कई तरह के एन्ज़ाइम और सूक्ष्म तत्व कॉपर, आयरन, जिंक, सल्फर, कैलशियम और मैगनीशियम आदि होते हैं
Posted by Sukhwinder Jeet Singh
Punjab
21-07-2019 12:27 PM
Punjab
07-21-2019 12:32 PM
Posted by ਬਲਕਰਨ ਖੈਹਿਰਾ
Punjab
21-07-2019 12:24 PM
Punjab
07-21-2019 03:14 PM
ਬਲਕਰਨ ਜੀ ਕੋਈ ਫਾਰਮ ਨਾ ਭਰੋ , ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਕੋਈ ਸਕੀਮ ਨਹੀ
Posted by Lakhan singh
Madhya Pradesh
21-07-2019 12:17 PM
Punjab
07-22-2019 06:09 PM
Lakhan ji aap iski roktham ke liye quinalphos@4ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Bhagwant Singh
Punjab
21-07-2019 12:04 PM
Punjab
07-21-2019 12:33 PM
ਉਸ ਨੂੰ Minfa gold ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ Ovumin advance bolus ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਹੀਟ ਵਿਚ ਵੀ ਆ ਜਾਵੇਗੀ .