Experts Q&A Search

Posted by Chandra Prakash
Uttar Pradesh
02-08-2019 11:58 PM
Punjab
08-03-2019 06:40 AM
चंद्रा जी कृपया यह बताएं कि इसमें क्या समस्या आ चुकी है ताकि आपको इसका समाधान बताया जा सके
Posted by kamlesh kumar patel
Uttar Pradesh
02-08-2019 11:49 PM
Punjab
08-16-2019 11:21 AM
kumar patel ji सब्जियों में प्रयोग करने के लिए, इसकी बिजाई अक्तूबर के पहले सप्ताह में करनी चाहिए और बीज तैयार करने के लिए, बिजाई अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह तक करनी चाहिए बिजाई के लिए 8-10 किलो बीज प्रति एकड़ डाला जाता है Rajendra swathi: यह मध्यम किस्म की गोल और सुगंधित दानों वाली किस्म है यह चेपे को सहनेयोग.... (Read More)
kumar patel ji सब्जियों में प्रयोग करने के लिए, इसकी बिजाई अक्तूबर के पहले सप्ताह में करनी चाहिए और बीज तैयार करने के लिए, बिजाई अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह तक करनी चाहिए बिजाई के लिए 8-10 किलो बीज प्रति एकड़ डाला जाता है Rajendra swathi: यह मध्यम किस्म की गोल और सुगंधित दानों वाली किस्म है यह चेपे को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 520 किलो प्रति एकड़ होती है Sadhana: यह किस्म 95-110 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह दोहरे उद्देश्य वाली किस्म है और सफेद मक्खी को सहनेयोग्य है इसकी औसतन पैदावार 410 किलो प्रति एकड़ होती है Swathi: यह जल्दी पकने वाली किस्म है यह बारानी और पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह 82-85 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 360 किलो प्रति एकड़ होती है Sindhu: यह किस्म बारानी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त किस्म है यह सूखे और पत्तों पर सफेद धब्बों को सहनेयोग्य किस्म है यह किस्म 100-110 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 400 किलो प्रति एकड़ होती है Pant Haritima: यह किस्म 150-160 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह लंबी और दोहरे उद्देश्य वाली किस्म है इसकी औसतन पैदावार 480 किलो प्रति एकड़ होती है Hissar Anand: यह मध्यम पिछेती बिजाई की किस्म है जिसकी शाखाएं काफी मात्रा में होती हैं और वृद्धि झाड़ीनुमा होती है यह पत्तों और दानों के लिए प्रसिद्ध किस्म है इसकी औसतन पैदावार 7-8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है GC 1: इसके दाने मध्यम आकार के गोल और पीले रंग के होते हैं यह 112 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह पत्तों के मुरझाने और सफेद रंग के धब्बों के रोग को सहने योग्य है इसकी औसतन पैदावार 5.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है GC 2: यह लंबी और दरमियानी फैलने वाली किस्म है और इसके दाने दरमियाने आकार के होते हैं यह पत्तों के मुरझाने और सफेद रंग के धब्बों को सहने योग्य है इसकी औसतन पैदावार 5.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है CO 1: यह छोटे कद ओर छोटे आकार के भूरे रंग के दानो वाली किस्म है यह 100-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 2 क्विंटल प्रति एकड़ होती है CO 2: यह दरमियाने आकार और पीले भूरे रंग के दानों वाली किस्म है यह किस्म 90-100 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 2.08 क्विंटल प्रति एकड़ होती है RCr 20: यह किस्म 100-110 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म राजस्थान के बारानी और भारी मिट्टी वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म तना गलन के प्रतिरोधक किस्म है इसके दाने मोटे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 3.6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है RCr 446: इस किस्म के दाने मध्यम आकार के होते हैं यह किस्म तना गलन के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 4.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है RCr 436: यह जल्दी बढ़ने वाली किस्म है यह 90-100 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने मोटे होते हैं यह जड़ गलन और निमाटोड के प्रतिरोधक किस्म हैं इसकी औसतन पैदावार 4.4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है RCr 435 : यह जल्दी बढ़ने वाली किस्म है यह 110-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने मोटे, मध्यम आकार के होते हैं यह किस्म सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त किस्म है यह जड़ गलन और पत्तों पर सफेद धब्बों के प्रतिरोधक किस्म हैं इसकी औसतन पैदावार 4.2 क्विंटल प्रति एकड़ होती है RCr 41: यह किस्म 130-140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त किस्म है इसकी औसतन पैदावार 3.7 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Hisar Sugandh: यह अधिक उपज वाली किस्म हैं यह सुखे और पत्तों पर सफेद धब्बों के प्रतिरोधक किस्म है Hisar Bhoomit: यह किस्म तना गलन बीमारी के प्रतिरोधक किस्म है इसके दाने छोटे आकार के होते हैं इनमें तेल की मात्रा अधिक होती है Hisar Surbhi: यह किस्म चेपे और पत्तों पर सफेद धब्बों के प्रतिरोधक किस्म है इसके दाने मध्यम आकार के होते हैं
Posted by Ashok
Haryana
02-08-2019 11:12 PM
Punjab
08-03-2019 06:41 AM
Isme chloro ki spray 1ltr prati acre ke hisaab se krein aur lohe ki spray krein. yeh lohe ki kami ke kaarn ho jaata hai.
Posted by balwant singh tomar
Madhya Pradesh
02-08-2019 11:10 PM
Maharashtra
08-16-2019 11:26 AM
तुलसी - (ऑसीमम सैक्टम) एक शाकीय तथा औषधीय पौधा है इनमें ऑसीमम सैक्टम को प्रधान या पवित्र तुलसी माना गया जाता है, इसकी भी दो प्रधान प्रजातियाँ हैं- श्री तुलसी जिसकी पत्तियाँ हरी होती हैं तथा कृष्णा तुलसी जिसकी पत्तियाँ निलाभ-कुछ बैंगनी रंग लिए होती हैं इसके अतिरिक्त ऐलोपैथी, होमियोपैथी और यूनानी दवाओं में .... (Read More)
तुलसी - (ऑसीमम सैक्टम) एक शाकीय तथा औषधीय पौधा है इनमें ऑसीमम सैक्टम को प्रधान या पवित्र तुलसी माना गया जाता है, इसकी भी दो प्रधान प्रजातियाँ हैं- श्री तुलसी जिसकी पत्तियाँ हरी होती हैं तथा कृष्णा तुलसी जिसकी पत्तियाँ निलाभ-कुछ बैंगनी रंग लिए होती हैं इसके अतिरिक्त ऐलोपैथी, होमियोपैथी और यूनानी दवाओं में भी तुलसी का किसी न किसी रूप में प्रयोग किया जाता है तुलसी ऐसी औषधि है जो ज्यादातर बीमारियों में काम आती है इसका उपयोग सर्दी-जुकाम, खॉसी, दंत रोग और श्वास सम्बंधी रोग के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है तुलसी की पत्तियों में एक चमकीला पीला वाष्पशील तेल पाया जाता है जो कीड़े और बैक्टीरिया के खिलाफ उपयोगी होता है काली तुलसी की खेती (Black Tulsi farming in hindi) हेतु यह सूरज की रोशनी में बहुत अधिक पनपता है तुलसी स्वाभाविक रूप से समुद्र तल से 2000 मीटर की ऊचाँई तक पाई जाती है यह प्रारंभिक स्थिति में अच्छी तरह नहीं बढ़ती है और इसे धूप की आवश्यकता होती है इसे अच्छी तरह से सूखी मिट्टी की आवश्यकता होती है पौधे को विशेष रूप से घर के अंदर गर्म मिट्टी में रखने पर तेजी से बढ़ता है यह पौधा नम मिट्टी में स्वाभाविक रूप से बढ़ता है इसकी बुबाई वर्षा आधारित क्षेत्रों में बारिश के मौसम में और सिंचित क्षेत्रों अक्टूबर – नवंबर माह में की जाती है सिंचित क्षेत्रों में 6 से 10 से.मी. लंबे अंकुरित पौधो को जुलाई या अक्टूबर – नवंबर माह में खेतों में लगाया जाता है अंकुरित पौधो को कतार में 40 से.मी. की दूरी पर लगाया जाता है रोपण के तुंरत बाद खेत की सिंचाई की जाती है गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग किया जाता है बीज नर्सरी में बोये जाते है एक हेक्टेयर भूमि के लिए लगभग 20-30 कि.ग्रा. बीजों की आवश्यकता होती है बुवाई के बाद FYM और मिट्टी के मिश्रण की पतली परत को बीजों के ऊपर फैलाया जाता है स्पिंक्लर द्दारा सिंचाई की जाती है बीज अंकुरण के लिए 8-12 दिन का समय लेते है और लगभग 6 सप्ताह के बाद पौधे रोपण के लिए तैयार हो जाते है काली तुलसी हेतु रोपण के बाद विशेष रूप से मानसून के अंत के बाद खेत की सिंचाई की जाती है दूसरी सिंचाई के बाद पौधे अच्छी तरह जम जाते है अंतराल को भरने और कमजोर पौधो को अलग करने का यह सही समय होता है ताकि खेत में एक समान पौधे रहें गार्मियो में 3-4 बार सिंचाई की आवश्यकता होती है जबकि शेष अवधि के दौरान आवश्यकता के अनुसार सिंचाई की जाती है लगभग 20-25 बार सिंचाई देना पर्याप्त होता है
Posted by prince khad beej bhandar kumarkhand
Bihar
02-08-2019 10:48 PM

?

Punjab
08-03-2019 02:04 PM
प्रिंस जी इस एप में आप खेतीबाड़ी, पशुपालन के बारे में अपना कोई भी सवाल पूछ सकते है और माहिरों से उनका जवाब लें सकते है यदि आप खेतीबाड़ी या पशु पालन के बारे में कोई भी जानकारी लेना चाहते है तो आप अपना एप में पूछ सकते हैं धन्यवाद
Posted by gurvinder singh
Rajasthan
02-08-2019 10:42 PM
Punjab
08-16-2019 01:19 PM
Gurvinder singh ji is bare visthar vich jankari lai tusi Mr Mishra 9465884780, 9810363807 nal samparak kar sakde ho. Thank you.
Posted by DILEEP KUMAR
Uttar Pradesh
02-08-2019 10:29 PM
Maharashtra
08-26-2019 10:27 PM
dileep ji yeh fungus ki roktham ke liye istemal kiya jata hai iski matra 3 killo o prati acre ke hisab se istemal kiya jata hai.dhanywad
Posted by Bhagi Ram
Haryana
02-08-2019 10:23 PM
Punjab
08-03-2019 06:42 AM
Ram g yeh tna galan ho rha hai. iske liye upl ki saaf@500gm ki prati acre ke hisaab se spray krein.
Posted by jaswinder singh
Punjab
02-08-2019 10:20 PM
Punjab
08-16-2019 01:46 PM
Jaswinder singh ji punjan vich bohat saria Feed companys kam kar rahia han kirpa karke tusi eh daso ke tusi kis company da samarak lena chonda ta jo tuhanu sahi samparak No. dita ja sake, Cargill feed lai tusi Vikram Bhandari 8283832872 nal samparak kar sakde ho, Thankyou.
Posted by रामलाल
Rajasthan
02-08-2019 10:19 PM
Punjab
08-03-2019 06:45 AM
रामलाल जी इसमें फंगस की समस्या है, इसके ऊपर M-45@400gm या antracol@500gm प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें
Posted by jatinder singh
Punjab
02-08-2019 10:15 PM
Haryana
08-03-2019 02:07 PM
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਖਰਗੋਸ਼ ਪਾਲਣ ਦਾ ਕੰਮ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਖਰਗੋਸ਼ ਪਾਲਣ ਲਈ ਤੁਸੀ 1 ਯੂਨਿਟ ਨਾਲ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਇਕ ਯੂਨਿਟ ਵਿੱਚ 3 ਮੇਲ ਤੇ 10 ਫੀਮੇਲ ਖਰਗੋਸ਼ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇੱਕ ਯੂਨਿਟ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੱਗਭੱਗ 30000 ਰੁਪਏ ਤੱਕ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਇਸ ਲਈ ਤੁਹਾਨੂੰ 30X35 ਦਾ ਸ਼ੈਡ ਬਣਾਉਣਾ ਪਵੇਗਾ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਖੁਰਾਕ ਦੀ ਗੱਲ ਕਰੀਏ ਤਾਂ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਇੱਕ ਟਾਈਮ ਫੀਡ ਅਤੇ ਇੱਕ ਟਾਈਮ ਪੱਠੇ ਖਵ.... (Read More)
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਖਰਗੋਸ਼ ਪਾਲਣ ਦਾ ਕੰਮ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਖਰਗੋਸ਼ ਪਾਲਣ ਲਈ ਤੁਸੀ 1 ਯੂਨਿਟ ਨਾਲ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਇਕ ਯੂਨਿਟ ਵਿੱਚ 3 ਮੇਲ ਤੇ 10 ਫੀਮੇਲ ਖਰਗੋਸ਼ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇੱਕ ਯੂਨਿਟ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੱਗਭੱਗ 30000 ਰੁਪਏ ਤੱਕ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਇਸ ਲਈ ਤੁਹਾਨੂੰ 30X35 ਦਾ ਸ਼ੈਡ ਬਣਾਉਣਾ ਪਵੇਗਾ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਖੁਰਾਕ ਦੀ ਗੱਲ ਕਰੀਏ ਤਾਂ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਇੱਕ ਟਾਈਮ ਫੀਡ ਅਤੇ ਇੱਕ ਟਾਈਮ ਪੱਠੇ ਖਵਾਉਣੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਲੱਗਭੱਗ 3 ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵੇਚਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤੁਸੀ ਇਸ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਲਈ ਸਾਡੀ ਪੈਰਾਡਾਈਜ਼ ਕੰਪਨੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਸਾਡਾ ਸੰਪਰਕ ਨੰਬਰ 9466419455 ਹੈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਅਤੇ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਦੀ ਸਾਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦੇਵਾਗੇ ਜੀ .
Posted by jaswinder singh
Punjab
02-08-2019 10:12 PM
Punjab
08-16-2019 05:15 PM
ਤੁਸੀ ਚਰੀ ਦੀ ਕਿਸਮ ਜਿਵੇ Punjab sudex chari 4 , SL 44 ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਨਦੀਨਾਂ ਨੂੰ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਪੁੱਟ ਦਿਓ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by jaswinder singh
Punjab
02-08-2019 10:11 PM
Punjab
08-03-2019 02:09 PM
tuci pashu de suun ton 1 mahine pehla Cargill di Transition mix feed de skde ho, ehh jldi hajam ho jndi hai ate pashu nu energy mildi hai ehh tuci sunn ton badd v de skde ho.
Posted by jaswinder singh
Punjab
02-08-2019 10:11 PM
Punjab
08-03-2019 02:11 PM
tuci ohna nu Pett de kiria lai Zenvet bolus deo, baki ohna nu Sharkoferol liquid 50-50ml rojana ate Enerboost powder 50-50gm swere sham deo, iss nal vdia growth howegi, baki tuci rojana 35-40kg hara chare rojana deo ji.
Posted by jaswinder singh
Punjab
02-08-2019 10:06 PM
Punjab
08-03-2019 02:13 PM
Cross nasal di cow ohh hundi hai jo 2 nasala ton tyar hundi hai jiwe jekar tuci sahiwal nasal di cow rakhi hai ate uss nu heat vich aaun te sahiwal bull de semen di jgah jersey bull da semen bhrwaunde ho tan jo bacha howega ohh cross nasal da howega jiss nu mix breed v keha jnda hai.
Posted by sudhir.Saharan
Haryana
02-08-2019 09:55 PM
Punjab
08-02-2019 10:05 PM
Flag leaf ki roktham ke liye Carbendazem 12% + Mancozeb 63% @500 gm per acre ko mitti mein mila ke khet mein chitta de skte ho g..
Posted by ਰਣਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
02-08-2019 09:47 PM
Punjab
08-02-2019 10:08 PM
Posted by yogesh kuntal
Uttar Pradesh
02-08-2019 09:47 PM
Punjab
08-16-2019 11:33 AM
बाजरा विश्व में व्यापक तौर पर उगाई जाती है यह सूखे को सहन कर सकती है इसलिए इसे कम वर्षा वाले क्षेत्रों में ज्यादा अपनाया जाता है भारत बाजरे का सबसे बड़ा उत्पादक देश है मानव उपभोग के साथ इसे पशुओं के चारे के लिए भी प्रयोग किया जाता है इसका डंठल पशुओं को खिलाने के लिए प्रयोग किया जाता है भारत में राजस्थान, महा.... (Read More)
बाजरा विश्व में व्यापक तौर पर उगाई जाती है यह सूखे को सहन कर सकती है इसलिए इसे कम वर्षा वाले क्षेत्रों में ज्यादा अपनाया जाता है भारत बाजरे का सबसे बड़ा उत्पादक देश है मानव उपभोग के साथ इसे पशुओं के चारे के लिए भी प्रयोग किया जाता है इसका डंठल पशुओं को खिलाने के लिए प्रयोग किया जाता है भारत में राजस्थान, महांराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तामिलनाडू मुख्य बाजरा उत्पादक राज्य हैं उत्तर प्रदेश बाजरे का लगभग 9 लाख टन उत्पादन करता है यू पी के मथुरा, कानपुर, आगरा, अलाहबाद, फारूखबाद, अलीगढ़, मोरादाबाद, ईटाह, बदुआं, बुलंदशहर, शाहजहांपुर, गाज़ीपुर, मैनपुरी, प्रतापगढ़ क्षेत्र बाजरा उगाने वाले मुख्य क्षेत्र हैं पहले बाजरा की खेती का क्षेत्र कम हो रहा थालेकिन इसके पोषक तत्वों को देखते हुए आज के किसान बाजरा की खेती को पहल देते हैं बाजरा को मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है यह जल जमाव और तेजाबी मिट्टी में खड़ी नहीं रह सकती अच्छे निकास वाली काली कपास मिट्टी और रेतली देामट मिट्टी में उगान पर अच्छे परिणाम देती है बिजाई का समय बाजरे की बिजाई के लिए जुलाई के पहले पखवाड़े का समय अनुकूल होता है फासला कतार से कतार में 40-45 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 10-15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज की गहराई बीजों को 2.5-3 सैं.मी. गहराई में बोयें बिजाई का ढंग बिजाई के लिए गड्डा खोदकर या बीज ड्रिल विधि का प्रयोग किया जाता है बिजाई की विधि के अनुसार 1.5-2 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बीजों को गूंदिया रोग से बचाने के लिए 20 प्रतिशत नमक के घोल में पांच मिनट के लिए डुबोकर रखें जो बीज पानी के ऊपर तैरने लग जायें उन्हें पानी में से निकालकर नष्ट कर दें और बाकी के बीजों को साफ पानी से धोयें इसके बाद बीजों को थीरम 3 ग्राम या क्लोरपाइरीफॉस 20 ई सी 4 मि.ली. से प्रति किलो बीज का उपचार करें बाजरे की पूरी फसल को नाइट्रोजन 35-40 किलो (यूरिया 75-87 किलो), फासफोरस 8-12 किलो (एस एस पी 50-75 किलो) प्रति एकड़ में जरूरत होती है नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा बाजरे की बिजाई से पहले डालें बाकी बची नाइट्रोजन की मात्रा बिजाई के 30-35 दिनों के बाद डालें खेत को साफ और नदीन रहित रखें बाजरे की बिजाई के बाद एट्राज़िन 300 ग्राम को 150 लीटर पानी में मिलाकर डालें बिजाई के 15-17 दिनों के बाद छंटाई की क्रिया करें और सिर्फ सेहतमंद फसल ही रखें यह बारानी क्षेत्र की फसल है इसलिए इसे कम सिंचाई की आवश्यकता होती है बारिश की तीव्रता और नियमितता के अनुसार सिंचाई दें जोताई के समय, फूल निकलने और दाने भरने की अवस्था में पानी की कमी ना होने दें इन अवस्थाओं में पानी की कमी होना पैदावार में गंभीर नुकसान करता है जब दाने सख्त और इनमें आवश्यक नमी हो तो फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है दरांती की सहायता से खड़ी फसल में से बालियों को निकाल लें कुछ किसान दरांती से पूरे पौधे को ही काट लेते हैं कटाई के बाद इन्हें इकट्ठा करें और तना फसल को खुली जगह में रखें और चार-पांच दिनों के लिए सुखाएं
Posted by vinod chouhan harwar
Madhya Pradesh
02-08-2019 09:45 PM
Punjab
08-05-2019 03:59 PM
अदरक भारत की एक अहम मसाले वाली फसल है यह फसल अच्छे जल निकास वाली चिकनी, रेतली और लाल हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है खेत में पानी ना खड़ा होने दें क्योंकि खड़े पानी में यह ज्यादा देर बच नहीं पाएगी फसल की वृद्धि के लिए 6-6.5 पी एच वाली मिट्टी अच्छी मानी जाती है उस खेत में अदरक की फसल ना उगाएं जहां पिछली बार अदरक की.... (Read More)
अदरक भारत की एक अहम मसाले वाली फसल है यह फसल अच्छे जल निकास वाली चिकनी, रेतली और लाल हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है खेत में पानी ना खड़ा होने दें क्योंकि खड़े पानी में यह ज्यादा देर बच नहीं पाएगी फसल की वृद्धि के लिए 6-6.5 पी एच वाली मिट्टी अच्छी मानी जाती है उस खेत में अदरक की फसल ना उगाएं जहां पिछली बार अदरक की फसल उगाई गई हो हर साल एक ही ज़मीन पर अदरक की फसल ना लगाएं प्रसिद्ध किस्में :-Himgiri, IISR Varanda, IISR Mahima,Suprabha, Suruchi, IISR Rejatha खेत को दो तीन बार जोतें और सुहागे से समतल करें अदरक की बिजाई के लिए आवश्यक लंबाई के 15 सैं.मी. ऊंचे और 1 मीटर चौड़े बैड तैयार करें दो बैडों के बीच 50 सैं.मी. का फासला रखें नदीनों कीटों और बीमारियों की जांच के लिए बैड की मिट्टी को धूप लगवायें इसके लिए बैड को पॉलीथीन शीट से 20-30 दिनों के लिए ढकें रोपाई के समय नीम केक 25 ग्राम को प्रति गड्ढे में डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए राइज़ोम की बिजाई मई के पहले सप्ताह में पूरी कर लें राइज़ोम को कतारों में बोयें और कतार में 40-45 सैं.मी. और दो पौधों में 30 सैं.मी. फासला रखें राइज़ोम की रोपाई के बाद खेत में 50 क्विंटल हरे पत्तों की मलचिंग प्रति एकड़ में करें दूसरी मलचिंग 20 क्विंटल हरे पत्तों के साथ 40 दिनों के बाद करें बीज की गहराई 3-4 सैं.मी. के करीब होनी चाहिए अदरक की बिजाई सीधे ढंग से और पनीरी लगाकर की जा सकती है बिजाई के लिए ताजे और बीमारी रहित गांठों का प्रयोग करें बिजाई के लिए 5-6.5 क्विंटल प्रति एकड़ बीज का प्रयोग करें बिजाई से पहले गांठों को मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी से उपचार करें गांठों को 30 मिनट के लिए घोल में भिगो दें इससे गांठों को फफूंदी से बचाया जा सकता है उपचार के बाद गांठों को 3-4 घंटें के लिए छांव में सुखाएं खेत की तैयारी के समय 60 क्विंटल रूड़ी की खाद प्रति एकड़ मिट्टी में डालें नाइट्रोजन 24 किलो (52 किलो यूरिया), फासफोरस 20 किलो (125 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 20 किलो (35 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें रूड़ी की खाद या गाय का गोबर 60 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की दूसरी मात्रा 20 किलो (45 किलो यूरिया) बिजाई के 45 दिनों के बाद, जबकि बिजाई के 120 दिनों के बाद नाइट्रोजन की तीसरी मात्रा 16 किलो (यूरिया 35 किलो) डालें रोपाई के बाद पहली सिंचाई करें इसे बारानी फसल के तौर पर उगाया जाता है इसलिए बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर सिंचाई करें बारिश की अनुपस्थिति में, बाकी की सिंचाई 10 दिनों के अंतराल पर करें अदरक की पूरी फसल को कुल 16-18 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बिजाई के 3 दिन बाद एट्राज़िन 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की नमी वाली मिट्टी पर स्प्रे करें उन नदीनों को खत्म करने के लिए जो पहली नदीन नाशक स्प्रे के बाद पैदा होते हैं, बिजाई के 12-15 दिनों के बाद गलाइफोसेट 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें नदीन नाशक की स्प्रे करने के बाद खेत को हरी खाद से या धान की पराली से ढक दें जड़ों के विकास के लिए जड़ों में मिट्टी लगाएं बिजाई के 50-60 दिनों के बाद पहली बार जड़ों में मिट्टी लगाएं और उसके 40 दिन बाद दोबारा मिट्टी लगाएं
Posted by sudhir.Saharan
Haryana
02-08-2019 09:30 PM
Punjab
08-03-2019 06:54 AM
Agar dhan mein jhanda rog aa gya hai ton carbendazim@400gm ja oswal ki combo 75 @400gm ja upl ki saaf@500gm ki prati acre ke hisaab se spray krein..
Posted by Amit Kumar Bamoriya
Madhya Pradesh
02-08-2019 09:12 PM
Punjab
08-16-2019 02:35 PM
Amit Kumar ji jankari ke lia bohat bohat dhanyavad kirpya aap hmari Apni kheti Buy/sell App me add dale ta jo or bhi farmer aap se sida samparak kare, Thankyou.
Posted by ammy
Punjab
02-08-2019 09:07 PM
Punjab
08-02-2019 09:38 PM
ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਆਪਣਾ ਸਵਾਲ ਵਿਸਤਾਰ ਨਾਲ ਪੁੱਛੋਂ ਜੀ ਤੁਸੀ ਝੋਨੇ ਵਾਰੇ ਕਿ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ
Posted by ਅਮਰਬੀਰ ਸਿੰਘ
Punjab
02-08-2019 08:53 PM
Punjab
08-02-2019 10:11 PM
ਝੋਨੇ ਵਿਚ ਸਰੋਂ ਦੀ ਖਲ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਬਹੁਤ ਹੀ ਲਾਭਕਾਰੀ ਹੈ ਇਹ ਅਜਿਹਾ ਆਰਗੈਨਿਕ ਤਰੀਕਾ ਹੈ ਜਿਸਦੇ ਨਾਲ ਅਸੀਂ ਝੋਨੇ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਿਚ ਵਾਧਾ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੈ ਝੋਨੇ ਦੇ ਬੂਟੇ ਦੀ ਫੋਟ ਕਰਾਉਣ ਦੇ ਲਈ ਇਸਦੇ ਨਤੀਜੇ ਬਹੁਤ ਹੀ ਵਧੀਆ ਹਨ ਇਸ ਵਿਚ ਛੇ ਮੁੱਖ ਤੱਤ ਹਨ ਜਿਸ ਵਿਚ ਮੁੱਖ ਤੋਰ ਤੇ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ,ਪੋਟਾਸ਼ ਤੇ ਫਾਸਫੋਰਸ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਸਲਫਰ ,ਜਿੰਕ ਤੇ ਬਰੋਨ ਵੀ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨI ਸਰੋਂ ਦੀ ਖਲ ਨੂ.... (Read More)
ਝੋਨੇ ਵਿਚ ਸਰੋਂ ਦੀ ਖਲ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਬਹੁਤ ਹੀ ਲਾਭਕਾਰੀ ਹੈ ਇਹ ਅਜਿਹਾ ਆਰਗੈਨਿਕ ਤਰੀਕਾ ਹੈ ਜਿਸਦੇ ਨਾਲ ਅਸੀਂ ਝੋਨੇ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਿਚ ਵਾਧਾ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੈ ਝੋਨੇ ਦੇ ਬੂਟੇ ਦੀ ਫੋਟ ਕਰਾਉਣ ਦੇ ਲਈ ਇਸਦੇ ਨਤੀਜੇ ਬਹੁਤ ਹੀ ਵਧੀਆ ਹਨ ਇਸ ਵਿਚ ਛੇ ਮੁੱਖ ਤੱਤ ਹਨ ਜਿਸ ਵਿਚ ਮੁੱਖ ਤੋਰ ਤੇ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ,ਪੋਟਾਸ਼ ਤੇ ਫਾਸਫੋਰਸ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਸਲਫਰ ,ਜਿੰਕ ਤੇ ਬਰੋਨ ਵੀ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨI ਸਰੋਂ ਦੀ ਖਲ ਨੂੰ ਝੋਨੇ ਵਿੱਚ ਵਰਤਣ ਦੇ ਲਈ ਦੋ ਤਰੀਕੇ ਹਨ ਪਹਿਲਾ ਤਰੀਕਾ ਇਹ ਹੈ ਕੇ ਇਸਨੂੰ ਡਰੰਮ ਦੇ ਵਿਚ ਭਿਓਂ ਲੋ ਤੇ 5 -6 ਦਿਨ ਲਗਾਤਾਰ ਇਸਨੂੰ ਹਲਾਉਂਦੇ ਰਹੋ ਤੇ ਇਸ ਘੋਲ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਵਾਰੀ ਵਾਲੇ ਦਿਨ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਪਾ ਦਿਓ ਦੂਸਰਾ ਤਰੀਕਾ ਇਹ ਹੈ ਕੇ ਇਸਨੂੰ ਬਰੀਕ ਕੁੱਟ ਕੇ ਇਸਦਾ ਛਿੱਟਾ ਵਾਹਣ ਵਿਚ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸਨੂੰ ਵਰਤਣ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਜਦੋਂ ਝੋਨਾ 15 -20 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਹੋਵੇ ਕਿਓਂਕਿ ਇਸ ਸਮੇ ਜੜ੍ਹਾਂ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਵਿਕਾਸ ਹੁੰਦਾ ਹੀ ਇਸਦੀ ਮਾਤਰਾ ਇਕ ਕਿੱਲੇ ਦੇ ਵਿੱਚ ਸਿਰਫ 16 ਕਿੱਲੋ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਰੇਤੇ ਵਾਲੇ ਜਾਂ ਬਰਾਨੀ ਵਾਹਣ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ 20 ਕਿੱਲੋ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹਾ I
Posted by Parveen kumar
Punjab
02-08-2019 08:53 PM
Punjab
08-23-2019 05:55 PM
parveen ji tuc citrus canker de layi blitox 3 gm per litre + streptocycline 50 gm nu 500 litre pani vich mila ke spray karo.dhanwad
Posted by Khushi
Punjab
02-08-2019 08:52 PM
Punjab
08-03-2019 02:15 PM
Bathinda kisan mela 26 September nu hai.
Posted by lali Bachhal
Haryana
02-08-2019 08:50 PM
Punjab
08-02-2019 10:08 PM
Lalli ji app usko nazdiki doctor se janch krwayen kyuki uski janch krke sahi ilagg kiya ja skta hai.
Posted by Harchand Kumar
Punjab
02-08-2019 08:44 PM
Punjab
08-23-2019 05:50 PM
mooli di kisam punjab psand di bijai kar sakde ho.dhanwad
Posted by Ajaib sandha
Punjab
02-08-2019 08:42 PM
Punjab
08-02-2019 10:03 PM
ਉਸ ਨੂੰ 500ਗ੍ਰਾਮ ਦਹੀਂ, 500ਗ੍ਰਾਮ ਸੱਕਰ, 250ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋੰ ਦਾ ਤੇਲ ਅਤੇ 100ਗ੍ਰਾਮ ਹਲਦੀ ਰਲਾ ਕੇ ਦਿਨ ਵਿਚ ਦੋ ਵਾਰ ਦਿਉ ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਹੀ ਉਸ ਨੂੰ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਡਾਕਟਰ ਨੂੰ ਦਿਖਾਉ ਤੇ ਉਸ ਦਾ ਇਲਾਜ ਵੀ ਕਰਵਾਉ
Posted by chhina saab
Punjab
02-08-2019 08:40 PM
Punjab
08-03-2019 02:17 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Injection Enrostrong 4.5gm ਲਗਵਾਓ ਬਾਕੀ ਉਸ ਨੂੰ Biotrim-DS bolus 1-1 ਗੋਲੀ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ.
Posted by Ajmal beniwal
Rajasthan
02-08-2019 08:40 PM
Posted by jagdeep Singh jattana
Punjab
02-08-2019 08:37 PM
Punjab
08-07-2019 04:59 PM
ਹਾਜੀ ਬੀਟਲ ਨਸਲ ਕਾਲੇ ਜਾ ਲਾਲ ਰੰਗ ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਹ ਗੂੜਾ ਕਾਲਾ ਜਾ ਫਿੱਕਾ ਕਾਲਾ ਜਾ ਫਿਰ ਗੂੜਾ ਲਾਲ ਜਾਂ ਫਿੱਕਾ ਲਾਲ ਵੀ ਸੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜੀ, ਇਸ ਵਿੱਚ ਕਾਲੇ ਜਾ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਡੱਬੇ ਵੀ ਹੋ ਸਕਦੇ ਹਨ ਬਾਕੀ ਜੋ ਨਾਵਾਂ ਦੀ ਗੱਲ ਹੈ ਉਹ ਇਸ ਤਰਾਂ ਹੈ ਕਿ ਆਪਣੇ ਲੋਕਲ ਏਰੀਆ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਅਲੱਗ ਅਲੱਗ ਨਾਮ ਰੱਖੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਕਈ ਅਮ੍ਰਿਤਸਰੀ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ਜਿਵੇ ਆਦਿ
Posted by Manpreet Singh
Punjab
02-08-2019 08:36 PM
Punjab
08-03-2019 07:01 AM
Jhone di growth de lyi tuc TATA da RALLI GOLD@4KG prati acre de hisaab nal vart skde ho ja fir PI da BIOVITA@8kg jo ki granual de vich aunda hai uss di varto kr skde ho. Iss to ilaava OSWAL company da granual de vich TRIACONTANOL GR 0.05% aunda hai. Iss di maatra 8-10kg prati acre hundi hai. Tuc iss da v khet de vich shitta de skde ho. Coromandel da RUTOZ@6-8kg prati acre da v growth de lyi shitta de skde ho.
Posted by sanjiv kumar
Haryana
02-08-2019 08:31 PM
Punjab
08-16-2019 03:29 PM
Sanjiv kumar ji wh711 ka seed lene ke lia aap Sushant Sood 9837027013 (Sood Hybrid Seeds) se samparak kar sakte hai. Thankyou.
Posted by baljit Singh
Punjab
02-08-2019 08:25 PM
Punjab
08-07-2019 08:54 PM
Desi murgi de annde da weight 50-60gm tak ho skda hai
Posted by P S meena
Madhya Pradesh
02-08-2019 08:21 PM
Maharashtra
08-23-2019 05:48 PM
खेत को नदीन मुक्त करने के लिए दो गोडाई की आवश्यकता होती है, पहली गोडाई बिजाई के 15-20 दिन बाद और दूसरी गोडाई बिजाई के 30-40 दिन बाद करें रासायनिक तरीके से नदीनों को रोकने के लिए बिजाई के बाद दो दिनो में पैंडीमैथालीन 900 मि.ली. को 100-200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें या इमाजेथापर 150&170 मि.ली. को 150-200 लीटर पानी में मिलाकर बि.... (Read More)
खेत को नदीन मुक्त करने के लिए दो गोडाई की आवश्यकता होती है, पहली गोडाई बिजाई के 15-20 दिन बाद और दूसरी गोडाई बिजाई के 30-40 दिन बाद करें रासायनिक तरीके से नदीनों को रोकने के लिए बिजाई के बाद दो दिनो में पैंडीमैथालीन 900 मि.ली. को 100-200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें या इमाजेथापर 150&170 मि.ली. को 150-200 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के 15 से 20 दिन बाद बूटीनाशक के तौर पर डालें
Posted by jasvir singh hayer
Punjab
02-08-2019 08:18 PM
Punjab
08-07-2019 03:12 PM
ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹੋਰ ਕਾਮਯਾਬ ਪੋਲਟਰੀ ਫਾਰਮਾਂ ਤੇ ਜਾ ਕੇ ਆਓ ਬਾਕੀ ਪੋਲਟਰੀ ਫਾਰਮ ਖੋਲਣ ਬਾਰੇ ਰਾਇ ਲੈਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਸਾਡੀ ਪੂਰੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਰਹੇਗੀ ਕਿ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਦੇ ਸਕੀਏ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲੀ ਗੱਲ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪੋਲਟਰੀ ਫਾਰਮ ਖੋਲਣਾ ਹੈ ਤਾਂ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਇਹ ਦੇਖੋ ਕਿ ਲੇਇਰ ਫਾਰਮਿੰਗ ਕਰਨੀ ਹੈ ਬਰੈਲਰ ਫਾਰਮਿੰਗ ਕਰਨੀ ਹੈ ਦੂਸਰੀ ਗੱਲ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਕੇ.... (Read More)
ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹੋਰ ਕਾਮਯਾਬ ਪੋਲਟਰੀ ਫਾਰਮਾਂ ਤੇ ਜਾ ਕੇ ਆਓ ਬਾਕੀ ਪੋਲਟਰੀ ਫਾਰਮ ਖੋਲਣ ਬਾਰੇ ਰਾਇ ਲੈਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਸਾਡੀ ਪੂਰੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਰਹੇਗੀ ਕਿ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਦੇ ਸਕੀਏ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲੀ ਗੱਲ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪੋਲਟਰੀ ਫਾਰਮ ਖੋਲਣਾ ਹੈ ਤਾਂ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਇਹ ਦੇਖੋ ਕਿ ਲੇਇਰ ਫਾਰਮਿੰਗ ਕਰਨੀ ਹੈ ਬਰੈਲਰ ਫਾਰਮਿੰਗ ਕਰਨੀ ਹੈ ਦੂਸਰੀ ਗੱਲ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਕੇ ਜਰੂਰ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਤੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਫੀਡ ਵਗੈਰਾਂ ਦਾ ਪਤਾ ਚੱਲੇਗਾ ਕਿਉਕੀ ਪੋਲਟਰੀ ਵਿੱਚ ਬਾਇਉਸਕਿਉਰਟੀ ਰੱਖਣੀ ਬਹੁਤ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਇੱਕ ਵਾਰ ਬਿਮਾਰੀ ਫਾਰਮ ਵਿੱਚ ਆ ਗਈ ਤਾਂ ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਸਾਰੇ ਫਾਰਮ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚਦੀ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਸਾਰੀਆ ਗੱਲਾਂ ਧਿਆਨ ਵਿੱਚ ਰੱਖ ਕੇ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਬਾਕੀ ਇਹ ਵੀ ਸਲਾਹ ਹੈ ਕਿ ਵੱਡੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਇਕਦਮ ਨਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਇੱਕ ਵਾਰ ਥੋੜੀਆ ਮੁਰਗੀਆ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਨਸਲ ਦੀ ਗੱਲ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਲੇਇਰ ਵਿੱਚ ਅੰਡਿਆ ਲਈ BV 300 ਨਸਲ ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਰਹੇਗੀ ਇਹ ਨਸਲ 18 ਹਫਤਿਆ ਦੀ ਉਮਰ ਤੋਂ ਆਂਡੇ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਤੇ 19 ਹਫਤਿਆ ਤੋਂ 80 ਵੇ ਹਫਤੇ ਤੱਕ ਲੱਗਭੱਗ 370 ਆਂਡੇ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਪ੍ਰਤੀ ਮੁਰਗੀ ਲਈ 1.5-2.0 ਫੁੱਟ ਜਗਾਂ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ਪਹਿਲੇ ਦਿਨ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਅੰਡੇ ਦੇਣ ਤੱਕ ਇੱਕ ਮੁਰਗੀ ਤੇ ਲੱਗਭੱਗ 250-300 ਰੁਪਏ ਖਰਚਾ ਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਬਾਕੀ ਤੁਹਾਡੇ ਰੱਖ ਰਖਾਵ ਤੇ ਬਿਮਾਰੀਆ ਤੇ ਟੀਕਾਕਰਣ ਦਾ ਖਰਚਾ ਅਲੱਗ ਹੈ ਇਹ ਕੁੱਝ ਮੁੱਢਲੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਸੀ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਪਹਿਲਾ ਕਿਸੇ ਸਫਲ ਪੋਲਟਰੀ ਫਾਰਮਰ ਨੂੰ ਜਰੂਰ ਮਿਲੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਹੋਰ ਬਹੁਤ ਗੱਲਾਂ ਦਾ ਤੇ ਬਰੀਕੀਆ ਤਾਂ ਪਤਾ ਲੱਗੇਗਾ ਬਾਕੀ ਸਵਾਲ ਕਿ ਚੂਚੇ ਕਿੱਥੋ ਮਿਲਕਣਗੇ , ਇਸ ਲਈ ਦੋ ਹੀ ਭਰੋਸੇਮੰਦ ਅਦਾਰੇ ਹਨ ਜਿੰਨਾਂ ਤੋਂ ਚੂਚੇ ਖਰੀਦ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹੈ ਸੈਟਰਲ ਪੋਲਟਰੀ ਡਿਵੈਲਪਮੈਂਟ ਦੇ ਦਫਤਰ ਚੰਡੀਗੜ ਫੇਸ-1 ਤੇ ਬੱਚੇ ਬੁੱਕ ਕਰਵਾਉਣ ਲਈ ਤੁਸੀ Central Poultry Development Industrial Area, Phase-I, Chandigarh – Tel.No: 0172-2655391 ਤੇ ਸੰਪਰਕ ਕਰਕੇ ਬੱਚੇ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਜਾਂ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਦੀ ਹੈਚਰੀ ਜਿਸ ਲਈ ਤੁਸੀ Dr Dubey 9888802905 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by deepak patidar
Madhya Pradesh
02-08-2019 08:15 PM
Punjab
08-23-2019 05:41 PM
चिया यह एक प्रकार का तुलसी जैसा पौधा होता है इसमे बहुत अधिक मात्रा मे प्रोटीन केल्शियम आयरन मैग्नेशियम तथा ओमेगा -3 फेटी एसीड होता है जिसके कारण इसका उपयोग दवाईयाँ बनाने में तथा शारीरिक सुंदरता बडाने में किया जाता है यह वजन कम करने तथा ह्र्दय रोग को दूर करने में भी सहायक होता है इसमे उपस्थित ओमेगा -3 घुटनो .... (Read More)
चिया यह एक प्रकार का तुलसी जैसा पौधा होता है इसमे बहुत अधिक मात्रा मे प्रोटीन केल्शियम आयरन मैग्नेशियम तथा ओमेगा -3 फेटी एसीड होता है जिसके कारण इसका उपयोग दवाईयाँ बनाने में तथा शारीरिक सुंदरता बडाने में किया जाता है यह वजन कम करने तथा ह्र्दय रोग को दूर करने में भी सहायक होता है इसमे उपस्थित ओमेगा -3 घुटनो के दर्द में भी सहायक होता है इस पौधे की ऊंचाई लगभग 3-4 फिट तक होती है इसका उत्पादन लगभग 5-6 क्विंटल प्रति एकड़ होता हैइसे मुख्यरुप से अक्टूबर महीने में लगाया जाता है इसे लगाने के लिये खेत को रोटावेटर से तैयार कर लेते है फिर मेड़ बनकार पारियों पर हल्का चीरा लगा देते है फिर 600 ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से चिया बीज लेकर उसमे 10 किलो बालू रेत मिलाकर मेड़ पर लगाए गए चीरें में बीज हाथ से डाल देते है बीज डालते समय यह कोशिश करते है कि पौधे से पौधों की दूरी लगभग 1- 1 फिट रहे लगभग 7-8 दिन इसमे पौधा बाहर आ जाता है और इसके 10-15 दिन बाद पौधों की छटाई करके दूरी बना लेते हैपूरी फ़सल में लगभग 5-6 पानी लगता है पहला पानी लगने के तुरंत बाद तथा दूसरा पानी 10 दिन बाद इस प्रकार पौधे की आवश्यकता अनुसार पानी दिया जाता है पानी मिट्टी के हिसाब से कम या ज़्यादा लग सकता है वैसे तो फसल केवल देसी खाद से ही होती है लेकिन अच्छे उत्पादन के लिए खाद डालना चाहें तो प्रति एकड़ 100 किलो सिंगल सुपर फास्फेट, 16 किलो म्यूरेट आफ फास्फेट भी डाल सकते है यह फसल 120- 130 दिनो का समय पूरी तरह पकने में लेती है फसल को पूरी तरह पकने के बाद खेत मे पाल बिछाकर काट कर डाल देना चाहिए और 4-5 दिन धूप लगने के बाद मशीन मे कम चाल पर निकल ले
Posted by davinder singh sidhu
Punjab
02-08-2019 08:06 PM
Punjab
08-03-2019 07:01 AM
Jhone di growth de lyi tuc TATA da RALLI GOLD@4KG prati acre de hisaab nal vart skde ho ja fir PI da BIOVITA@8kg jo ki granual de vich aunda hai uss di varto kr skde ho. Iss to ilaava OSWAL company da granual de vich TRIACONTANOL GR 0.05% aunda hai. Iss di maatra 8-10kg prati acre hundi hai. Tuc iss da v khet de vich shitta de skde ho. Coromandel da RUTOZ@6-8kg prati acre da v growth de lyi shitta de skde ho.
Posted by Gurlal Singh
Punjab
02-08-2019 08:06 PM
Punjab
08-07-2019 03:18 PM
tuci uss nu Ifer-h injection 5ml lgwao, ehh tuci 3-3 dina de frak nal lgwao ate uss nu FMC powder 50gm rojana deo, iss nal frak paa jawega .