
Posted by sanjeev
Uttar Pradesh
04-08-2019 11:52 AM
Sanjeev ji kripya swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by Gurpreet singh
Punjab
04-08-2019 11:49 AM

Posted by lakha khokhar
Punjab
04-08-2019 11:47 AM
ਭਾਰ ਪੈਣ ਦੇ ਇਲਾਜ ਲਈ ਤੁਸੀ ਇਹ ਦੇਸੀ ਤਰੀਕਾ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਤੁਸੀ 1 ਕਿਲੋ ਸਤਿਆਨਾਸ਼ੀ ਬੀਜ ਲਓ, ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਕਮਰਕੱਸ, ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਜੋਂਖਾਰ ਲਓ, ਇਹ ਸਭ ਪੰਸਾਰੀ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਇਹ ਸਾਰਾ ਕੁਜ ਤੁਸੀ ਮਿਲਾ ਲਓ ਅਤੇ ਇਸਦਾ ਪਾਊਡਰ ਬਣਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਰੋਜਾਨਾ ਰਾਤ ਨੂੰ ਇਹ ਮਿਸ਼ਰਣ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਲਓ ਅਤੇ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਸ਼ੱਕਰ ਲਓ ਅਤੇ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਭਿਗੋ ਕੇ ਰੱਖ ਦਿਓ ਅਤੇ ਅਗਲੇ ਦਿਨ ਪਸ਼ੂ ਨ.... (Read More)
ਭਾਰ ਪੈਣ ਦੇ ਇਲਾਜ ਲਈ ਤੁਸੀ ਇਹ ਦੇਸੀ ਤਰੀਕਾ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਤੁਸੀ 1 ਕਿਲੋ ਸਤਿਆਨਾਸ਼ੀ ਬੀਜ ਲਓ, ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਕਮਰਕੱਸ, ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਜੋਂਖਾਰ ਲਓ, ਇਹ ਸਭ ਪੰਸਾਰੀ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਇਹ ਸਾਰਾ ਕੁਜ ਤੁਸੀ ਮਿਲਾ ਲਓ ਅਤੇ ਇਸਦਾ ਪਾਊਡਰ ਬਣਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਰੋਜਾਨਾ ਰਾਤ ਨੂੰ ਇਹ ਮਿਸ਼ਰਣ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਲਓ ਅਤੇ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਸ਼ੱਕਰ ਲਓ ਅਤੇ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਭਿਗੋ ਕੇ ਰੱਖ ਦਿਓ ਅਤੇ ਅਗਲੇ ਦਿਨ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਦਿਓ, ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਤੁਸੀ 4 ਦਿਨ ਲਗਾਤਾਰ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ.

Posted by SANJAY KUMAR SHARMA
Uttar Pradesh
04-08-2019 11:40 AM
Sanjay ji, yeh snail hai or iski roktham ke liye kisi dawai ki sifarish nahi ki jati hai, kyu ki yeh keet fasal koi koi nuksaan nahi karta hai, dhanywad

Posted by Amar Jeet singh
Uttarakhand
04-08-2019 11:36 AM
Amarjeet ji iske uper aap NPK 191919 ek kilo ko 150 litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Anuj
Haryana
04-08-2019 11:33 AM
अनुज जी कृपया बताएं कि आपने धान में अभी तक क्या क्या खाद डाली है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by Amar Jeet singh
Uttarakhand
04-08-2019 11:33 AM
amarjeet ji aap iske uper NPK 191919 ek kilo ko 150 litre pani men mila kar spray karen.dhanywad
Posted by kamlesh kumar
Bihar
04-08-2019 11:25 AM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्च.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बारीकियों का पता चल जायेगा, आप ब्लैक बंगाल, बीटल, सिरोही, जमुनापरी, बरबरी नस्ल रख सकते हैं, बकरी पालन में लोन लेने के लिए सबसे जरूरी है ट्रेनिंग सर्टीफिकेट अपने नज़दीक के कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग करने के बाद ट्रेनिंग के सर्टीफिकेट पर लोन एप्लाई होता है पर लोन मिलेगा या नहीं यह बैंक मेनेजर पर निर्भर करता है क्योंकि पहली बात यह है कि बैंक देखता है कि आपके अकाउंट में कितने पैसों का लेन देन हो रहा है और आपके पास ज़मीन गारंटी के तौर पर देने के लिए है या नहीं और अन्य भी कई बातें चैक करके लोन के लिए सहमत होता है बाकी कोशिश करें कि लोन के बिना अपने स्तर पर ही काम शुरू करें क्योंकि लोन की किश्त हर महीने भरनी पड़ेगी पर बकरियों से कमाई हर महीने नहीं होने होगी बाकी यदि कोशिश करके देखनी है तो अपने ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप अपने जिले के पशु पालन विभाग अफसर को मिलें और उस पर प्रवानगी लेकर फिर बैंक से बात करके देखें, यदि आपने बकरी फार्म बनाना है तो बहुत बढ़िया सोच है आप बीटल नस्ल रखें यह दूध और मीट दोनों के लिए फायदेमंद है बाकि आप जैसे इस व्यवसायों में आएंगे उस हिसाब से आपके लिंक बनने शुरू हो जाएंगे और बाकि मार्केटिंग इस बात निर्भर है कि आपका लोगों के साथ लिंक कैसा है इसका दूध गाय के रेट के बराबर मिल जाता है और बाकि यदि फार्म हो तो बच्चे भी बेचे जाते है कुल मिलाकर यदि मोटा सा हिसाब लगाना है तो एक बकरी से लगभग 20000 तक कमाई हो जाती है बाकि यह भी सलाह है कि आप आपने नज़दीक kvk से ट्रेनिंग ज़रूर लें और सफल बकरी पालकों के फार्म ज़रूर देखें.वहां से आपको इस काम के बारे में जानकारी और इसे करने के तरीकों के बारे में भी पता लगेगा..

Posted by Anil kumar Bhagat
Chattisgarh
04-08-2019 11:19 AM
बीमारियां और रोकथाम
1 भुरड़ रोग : झुलस रोग के कारण पत्तों के ऊपर तिरछे धब्बे जो कि अंदर से सलेटी रंग और बाहर से भूरे रंग के दिखाई देते हैं इससे फसल की बालियां गल जाती हैं और उसके दाने गिरने शुरू हो जाते हैं जिन क्षेत्रों में नाइट्रोजन का बहुत ज्यादा प्रयोग किया जाता है वहां इस बीमारी का प्रभाव ज्यादा देखने क.... (Read More)
बीमारियां और रोकथाम
1 भुरड़ रोग : झुलस रोग के कारण पत्तों के ऊपर तिरछे धब्बे जो कि अंदर से सलेटी रंग और बाहर से भूरे रंग के दिखाई देते हैं इससे फसल की बालियां गल जाती हैं और उसके दाने गिरने शुरू हो जाते हैं जिन क्षेत्रों में नाइट्रोजन का बहुत ज्यादा प्रयोग किया जाता है वहां इस बीमारी का प्रभाव ज्यादा देखने को मिलता है इसका हमला दिखने पर ज़िनेब 500 ग्राम को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें
2. करनाल बंट : लाग की शुरूआत पहले बालियों के कुछ दानों पर होती है और इससे ग्रसित दाने बाद में काले रंग का चूरा बन जाते हैं हालत ज्यादा खराब होने की सूरत में पूरे का पूरा सिट्टा प्रभावित होता है और सारा सिट्टा खराब होकर काला चूरा बनके पत्ते दानों पर गिरना शुरू हो जाते है
इस बीमारी की रोकथाम के लिए नाइट्रोजन की ज्यादा प्रयोग करने से परहेज़ करना चाहिए जब फसल पर 10 प्रतिशत बालिया निकल जायें तब टिल्ट 25 ई सी 200 मि.ली. को 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें 10 दिनों के अंतराल पर दोबारा स्प्रे करें
3. भूरे रंग के धब्बे : पत्तों के भूरेपन के लक्षण की पहचान पत्तों के ऊपर अंदर से गहरे भूरे रंग और बाहरे से हल्के भूरे रंग के अंडाकार या लंबाकार धब्बों से होती है यह धब्बे दानों के ऊपर भी पड़ जाते हैं जिस मिट्टी में पौष्टिक तत्वों की कमी पाई जाती है वहां इस बीमारी का हमला ज्यादा देखने को मिलता है
इस बीमारी की रोकथाम के लिए सही मात्रा में मिट्टी में पौष्टिक तत्व डालते रहने चाहिए जब बालियां बननी शुरू हो जाए उस समय 200 मि.ली. टैबूकोनाज़ोल या 200 मि.ली. प्रोपीकोनाज़ोल को 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें 15 दिनों के अंतराल पर दोबारा स्प्रे करें
4. झूठी कांगियारी: इस रोग के कारण फफूंद की तरह हर दाने के ऊपर हरे रंग की परत जम जाती है उच्च नमी, ज्यादा वर्षा और बादलवाई हालातों में यह बीमारी के फैलने का खतरा बढ़ जाता है नाइट्रोजन के ज्यादा प्रयोग से भी इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है
इसकी रोकथाम के लिए जब बालियां बननी शुरू हो जाये उस समय 500 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड को 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें 10 दिनों के अंतराल पर टिल्ट 25 ई सी 200 मि.ली. को 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें
5. तने का झुलस रोग: पत्तों की परत के ऊपर सलेटी रंग के जामुनी रंग की धारी वाले धब्बे पड़ जाते हैं बाद में यह धब्बे बड़े हो जाते हैं इस बीमारी का हमला ज्यादा हो तो फसल में ज्यादा दाना नहीं पड़ता नाइट्रोजन का ज्यादा प्रयोग नहीं करना चाहिए खेत का साफ सुथरा रखें
यदि इसका हमला दिखे तो टैबुकोनाज़ोल या टिल्ट 25 ई सी 200 मि.ली. या कार्बेनडाज़िम 25 प्रतिशत 200 ग्राम को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें 15 दिनों के अंतराल पर दोबारा स्प्रे करें

Posted by Rajnesh
Haryana
04-08-2019 11:18 AM
इस फसल को मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह भुरभुरी, रेतली दोमट मिट्टी में अच्छे परिणाम देती है भारी और ठोस मिट्टी में खेती करने से परहेज़ करें, इसकी जड़ें टेढ़ी होती है फसल के बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-6.8 होना चाहिए ज़मीन की तैयारी के लिए खेत की हल से जोताई करें और खेत को नदीनों और ढेलियों रहित क.... (Read More)
इस फसल को मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह भुरभुरी, रेतली दोमट मिट्टी में अच्छे परिणाम देती है भारी और ठोस मिट्टी में खेती करने से परहेज़ करें, इसकी जड़ें टेढ़ी होती है फसल के बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-6.8 होना चाहिए ज़मीन की तैयारी के लिए खेत की हल से जोताई करें और खेत को नदीनों और ढेलियों रहित करें प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरें खेत की तैयारी के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद 5-10 टन प्रति एकड़ मिट्टी में मिलाएं अच्छी तरह से ना गली हुई रूड़ी की खाद को ना डालें इससे जड़ें दोमुंही हो जाती हैं, पंक्ति से पंक्ति में फासला 30-40 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 30-40 सैं.मी. का फासला रखें एक एकड़ खेत में 4-5 किलोग्राम बीज काफी है जड़ों के उचित विकास के लिए बिजाई मेंड़ों पर करें नदीनों की रोकथाम और मिट्टी को हवादार बनाने के लिए हाथों से और कही की सहायता से गोडाई करें पहली गोडाई बिजाई के 2-3 सप्ताह बाद करें गोडाई के बाद, मेंड़ों पर मिट्टी चढ़ाएं बिजाई के बाद, पहली सिंचाई करें गर्मियों में मिट्टी की किस्म और जलवायु के आधार पर बाकी की सिंचाईयां 6-7 दिनों में करें और सर्दियों में 10-12 दिनों के अंतराल पर करें ज्यादा सिंचाइयां देने से परहेज़ करें इससे जड़ों का आकार बेढंगा और जड़ों के ऊपर बालों की वृद्धि बहुत ज्यादा हो जाती है गर्मियों के मौसम में, कटाई से पहले हल्की सिंचाई करें इससे फल तजव रहते है और दुर्गंध कम हो जाती है फसल की किस्म के अनुसार, मूली बिजाई के 25-60 दिनों के बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है पुटाई हाथों से पौधे को उखाड़कर की जाती है उखाड़ी गई जड़ों को धोएं और इनके आकार के अनुसार छांटे इसकी किसम pusa chetki की बिजाई कर सकते है धन्यवाद

Posted by paras ram janwa
Rajasthan
04-08-2019 11:09 AM
यदि आपकी भैंस समय पर दूध नहीं देती और दूध देते समय भी टांगे मारती है तो आप उसे Lactomood होमियोपेथिक दवाई दें इसकी 10—10 बूंदों को दिन में तीन बार दें और Lactin bolus 1-1 गोली सुबह शाम दें और आप Anabolite liquid 100ml रोजाना देना शुरू करें, Milkout पाउडर 2—2 चम्मच सुबह शाम दें इससे दूध बढ़ जाएगा और फर्क पड़ जाएगा बाकि आप उसे काली मिर्च 20 ग्राम रोजाना.... (Read More)
यदि आपकी भैंस समय पर दूध नहीं देती और दूध देते समय भी टांगे मारती है तो आप उसे Lactomood होमियोपेथिक दवाई दें इसकी 10—10 बूंदों को दिन में तीन बार दें और Lactin bolus 1-1 गोली सुबह शाम दें और आप Anabolite liquid 100ml रोजाना देना शुरू करें, Milkout पाउडर 2—2 चम्मच सुबह शाम दें इससे दूध बढ़ जाएगा और फर्क पड़ जाएगा बाकि आप उसे काली मिर्च 20 ग्राम रोजाना लगातार 5 दिन तक दें
Posted by vakil singh
Punjab
04-08-2019 11:04 AM
ਵਕੀਲ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਸਦੀ ਫੋਟੋ ਭੇਜੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by आकाश कुमार यादव
Jharkhand
04-08-2019 11:02 AM
आकाश जी आप बकरी फार्म के लिए बीटल नस्ल, बरबरी नस्ल रख सकते है

Posted by Subhash CHOURE
Madhya Pradesh
04-08-2019 10:59 AM
Subhash ji iske uper keet ka hamla hai iske liye aap iske uper quinalphos@400ml ko 150 litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by vicky
Punjab
04-08-2019 10:52 AM
Vicky ji isde vare jankari lai tuci mera nal sampark kr skde ho. 9466419455

Posted by sapan
Jharkhand
04-08-2019 10:45 AM
Sapan ji aap training lene ke liye apne nazdiki kvk se sampark kr skte hai aur uss training certificate se apko loan v mill jayega, training ke liye aap Krishi Vigyan Kendra, Bokaro, P.O.- Petarwar, P.S.- Petarwar, Block - Petarwar, Dist. - Bokaro - 829121 (Jharkhand) India, Phone : 06549 - 265048 se sampark kr skte hai.

Posted by paras ram janwa
Rajasthan
04-08-2019 10:44 AM
पारस राम जी आपकी फोटो के हिसाब से यह मुर्रा नस्ल की लग रही है
Posted by AKHILESH YADAV UP POLICE
Uttar Pradesh
04-08-2019 10:41 AM
पंक्ति से पंक्ति में फासला 45 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 7.5 सैं.मी. का फासला रखें अच्छी पैदावार के लिए, बीजों को 1.5 सैं.मी. गहरा बोयें बिजाई पंक्तियों में या बुरकाव विधि द्वारा की जा सकती है

Posted by ਨਿਸ਼ਾਨ ਸਿੰਘ
Haryana
04-08-2019 10:41 AM

Posted by Mohit kumar
Uttar Pradesh
04-08-2019 10:40 AM
इसकी रोकथाम के लिए राइनैक्सीपायर 20 एस सी 60 मि.ली. को 100-150 लीटर पानी में मिलाकर अंत अप्रैल से मई के पहले सप्ताह तक प्रति एकड़ में स्प्रे करें खेत में जल निकास का उचित प्रबंध करें, क्योंकि पानी के खड़ा होने से इसका हमला बढ़ जाता है

Posted by Sonu Yadav
Bihar
04-08-2019 10:29 AM
सोनू जी कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by Lakhvir Singh
Punjab
04-08-2019 10:21 AM
ਲਖਵੀਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਇਸਦੇ ਵਿਚ ਸਿਉਂਕ ਦਾ ਹਮਲਾ ਚੈੱਕ ਕਰੋ ਜੇਕਰ ਮੌਜੂਦ ਹੈ ਤਾ ਤੁਸੀ ਇਸਦੇ ਵਿਚ chlorpyriphos @4 ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by BK Bhai
Uttar Pradesh
04-08-2019 10:06 AM
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं .... (Read More)
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं है तो तो आप अमृतपाल सिंह बराड़ प्रोफेसर, पीएयू लुधियाना इस वीडियो संबंधी विचार पड़ सकते हैं, यह फसल केसर की नहीं है, यह फसल कसुंबडे की है, इसे अंग्रेजी में Safflower कहते है, और विज्ञानं में इसे Carthamus tinctorius कहते है

Posted by A man deep Singh
Punjab
04-08-2019 10:02 AM
uss nu Ifer-H injection 5ml lgwao ate 3-3 dina de frak nal 3 injection lgwao baki uss nu FMC powder 50gm rojana deo, iss nal frak paa jawega.

Posted by ANIL KUMAR tiwari
Madhya Pradesh
04-08-2019 09:52 AM
अनिल कुमार जी मिटटी टेस्टिंग मशीन से आप 10 के करीब टेस्ट कर सकते है जैसे ph,niterogen , EC, organic carbon, nitrogen, phosphorus, potassium, Sulphur, free calcium carbonate, zinc, iron, and boron आदि I इस को खरीदने के लिए आप 9912261000 पर संपर्क कर सकते होI
Posted by BISHWAMITRA MISHRA
Bihar
04-08-2019 09:43 AM
आपके द्धारा भेंजी गई वीडियों में आवाज समझ नहीं आ रही है कृप्या आप दोबारा साफ आवाज में वीडियों अपलोड करें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by BISHWAMITRA MISHRA
Bihar
04-08-2019 09:32 AM
BISHWAMITRA ji aap dhan men nominee gold@100 gram ko 150 litre pani men mila kar spray karen.dhanywad

Posted by vivek
Uttar Pradesh
04-08-2019 09:18 AM
इसे सभी प्रकार की मिट्टी जिसमें जैविक तत्व उच्च मात्रा में होते हैं, में उगाया जा सकता है लेकिन अच्छे जल निकास वाली दोमट या रेतली दोमट मिट्टी में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है इसके अच्छे विकास के लिए मिट्टी की पी एच 6 से 8 होनी चाहिए धनिये की खेती के लिए खारी और लवण वाली मिट्टी ठीक नहीं होती Rajendra swathi: यह मध्यम क.... (Read More)
इसे सभी प्रकार की मिट्टी जिसमें जैविक तत्व उच्च मात्रा में होते हैं, में उगाया जा सकता है लेकिन अच्छे जल निकास वाली दोमट या रेतली दोमट मिट्टी में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है इसके अच्छे विकास के लिए मिट्टी की पी एच 6 से 8 होनी चाहिए धनिये की खेती के लिए खारी और लवण वाली मिट्टी ठीक नहीं होती Rajendra swathi: यह मध्यम किस्म की गोल और सुगंधित दानों वाली किस्म है यह चेपे को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 520 किलो प्रति एकड़ होती है Sadhana: यह किस्म 95-110 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह दोहरे उद्देश्य वाली किस्म है और सफेद मक्खी को सहनेयोग्य है इसकी औसतन पैदावार 410 किलो प्रति एकड़ होती है Swathi: यह जल्दी पकने वाली किस्म है यह बारानी और पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह 82-85 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 360 किलो प्रति एकड़ होती है Sindhu: यह किस्म बारानी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त किस्म है यह सूखे और पत्तों पर सफेद धब्बों को सहनेयोग्य किस्म है यह किस्म 100-110 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 400 किलो प्रति एकड़ होती है सब से पहले ज़मीन की दो तीन बार हल से अच्छी तरह जोताई करें इसके बाद सुहागे की मदद से ज़मीन को समतल कर देना चाहिए आखिरी जोताई से पहले ज़मीन में 40 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से रूड़ी की खाद मिलानी चाहिए सब्जियों में प्रयोग करने के लिए, इसकी बिजाई अक्तूबर के पहले सप्ताह में करनी चाहिए और बीज तैयार करने के लिए, बिजाई अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह तक करनी चाहिएकतार से कतार का फासला 30 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 15 सैं.मी. रखें बीज की गहराई 3 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए इसकी बिजाई के लिए पोरा ढंग का प्रयोग किया जाता हैंबिजाई के लिए 8-10 किलो बीज प्रति एकड़ डाला जाता है फसल की अच्छी वृद्धि के लिए, नाइट्रोजन 25 किलो (यूरिया 55 किलो) और फासफोरस 20 किलो (एस एस पी 125 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को फूल निकलने के समय डालें अंकुरण के 15-20 दिनों के बाद तेज वृद्धि के लिए ट्राइकोंटानोल हारमोन 20 मि.ली. को 10 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें NPK (19:19:19) @75 ग्राम को प्रति 15 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के 20 दिन बाद करें यह फसल की अच्छी और तेज वृद्धि करने में सहायक है उच्च उपज के लिए ब्रासीनोलाइड 50 मि.ली. को प्रति 150 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के 40-50 दिन बाद प्रति एकड़ में स्प्रे करें 10 दिनों के बाद इसकी दूसरी स्प्रे करें मोनो अमोनियल फासफेट 12:61:00 45 ग्राम केा प्रति 15 लीटर पानी में मिलाकर पत्तों और शाखाओं के बढ़ने की अवस्था में एक स्प्रे करें यह अच्छी उपज में मदद करती है और पैदावार को बढ़ाती है

Posted by Manoj Singh
Uttar Pradesh
04-08-2019 09:15 AM
इसकी बिजाई के लिए पोरा ढंग का प्रयोग किया जाता है बीज की गहराई 3 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए कतार से कतार का फासला 30 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 15 सैं.मी. रखें सब्जियों में प्रयोग करने के लिए इसकी बिजाई अक्तूबर के पहले सप्ताह में करनी चाहिए और बीज तैयार करने के लिए बिजाई अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से नवंब.... (Read More)
इसकी बिजाई के लिए पोरा ढंग का प्रयोग किया जाता है बीज की गहराई 3 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए कतार से कतार का फासला 30 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 15 सैं.मी. रखें सब्जियों में प्रयोग करने के लिए इसकी बिजाई अक्तूबर के पहले सप्ताह में करनी चाहिए और बीज तैयार करने के लिए बिजाई अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह तक करनी चाहिए एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 8-10 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें

Posted by vinay Kumar kushwaha
Bihar
04-08-2019 09:11 AM
Vinay ji aap pusa chetki kisam ki bijai kar sakte hai.
Posted by Raj kumar singh
Bihar
04-08-2019 09:11 AM
अंजीर की खेती भिन्न-भिन्न जलवायु वाले स्थानों में की जाती है, परंतु भूमध्यसागरीय जलवायु इसके लिए अत्यंत उपयुक्त है फल के विकास तथा परिपक्वता के समय वायुमंडल का शुष्क रहना अत्यंत आवश्यक है पर्णपाती वृक्ष होने के कारण पाले का प्रभाव इस पर कम पड़ता है यों तो सभी प्रकार की मिट्टी में इसका वृक्ष उपजाया जा सकता.... (Read More)
अंजीर की खेती भिन्न-भिन्न जलवायु वाले स्थानों में की जाती है, परंतु भूमध्यसागरीय जलवायु इसके लिए अत्यंत उपयुक्त है फल के विकास तथा परिपक्वता के समय वायुमंडल का शुष्क रहना अत्यंत आवश्यक है पर्णपाती वृक्ष होने के कारण पाले का प्रभाव इस पर कम पड़ता है यों तो सभी प्रकार की मिट्टी में इसका वृक्ष उपजाया जा सकता है, परंतु दोमट अथवा मटियार दोमट, जिसमें उत्तम जल निकास (ड्रेनेज) हो, इसके लिए सबसे श्रेष्ठ मिट्टी है इसमें प्राय खाद नहीं दी जाती; तो भी अच्छी फसल के लिए प्रति वर्ष प्रति वृक्ष 20-30 सेर सड़े हुए गोबर की खाद या कंपोस्ट जनवरी-फरवरी में देना लाभदायक है इसे अधिक सिंचाई की भी आवश्यकता नहीं पड़ती ग्रीष्म ऋतु में फल की पूर्ण वृद्धि के लिए एक या दो सिंचाई कर देना अत्यंत लाभप्रद है अंजीर के नए पौधे मुख्यत कृत्तों (कटिंग) द्वारा प्राप्त होते हैं एक वर्ष की अवस्था की डाल का इस कार्य के लिए प्रयोग किया जाता है कृत्त जनवरी में लगाए जाते हैं और एक वर्ष बाद इस प्रकार तैयार हुए पौधों को स्थायी स्थान पर पंद्रह-पंद्रह फुट की दूरी पर रोपते हैं प्रति वर्ष सुषुप्ति काल में इसकी कटाई-छँटाई करनी चाहिए क्योंकि अच्छे फल पर्याप्त मात्रा में नई डालियों पर ही आते हैं फल अप्रैल से जून तक प्राप्त होते हैं लगाने के तीन वर्ष बाद वृक्ष फल देने लगता है और एक स्वस्थ, प्रौढ़ वृक्ष से लगभग 400 फल मिलते हैं पत्तियों के निचले भाग में एक प्रकार का रोग लगता है जिसे मंडूर (रस्ट) कहते हैं, परंतु यह रोग विशेष हानिकारक नहीं है आप इसकी किस्मे जैसे Brown Turkey. Smyrna Fig की बिजाई कर सकते है

Posted by Vikas Pareta
Rajasthan
04-08-2019 09:06 AM
खेत को नदीन मुक्त करने के लिए, दो बार गोडाई की आवश्यकता होती है, पहली गोडाई बिजाई के 20 दिन बाद और दूसरी गोडाई बिजाई के 40 दिन बाद करें
रासायनिक तरीके से नदीनों को रोकने के लिए, बिजाई के बाद, दो दिनो में, पैंडीमैथालीन 800 मि.ली. को 100-200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें

Posted by vinay Kumar kushwaha
Bihar
04-08-2019 09:06 AM
Posted by Amandeep singh Dhaliwal 97804 10102
Punjab
04-08-2019 09:03 AM
Posted by yuvraj janwa
Rajasthan
04-08-2019 09:02 AM
इसके प्रयोग से पशु दूध जल्दी उतार देता है और दूध देते समय कोई परेशानी नहीं करता पशु का दूध में फायदा होता है और पसमां भी पूरा रहता है
Posted by Yogesh Sahu
Madhya Pradesh
04-08-2019 08:59 AM
इसे मिट्टी की कई किस्मों जैसे लाल रेतली मिट्टी से तटीय रेतली और लेटराइट मिट्टी में उगाया जाता है यह अच्छे निकास वाली गहरी रेतली दोमट और हल्की तेजाबी मिट्टी में अच्छे परिणाम देती है भारी चिकनी और अत्याधिक खारी और क्षारीय मिट्टी में काजू की खेती ना करें मिट्टी की पी एच 8.0 से अधिक नहीं होनी चाहिए प्रसिद्ध किस.... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों जैसे लाल रेतली मिट्टी से तटीय रेतली और लेटराइट मिट्टी में उगाया जाता है यह अच्छे निकास वाली गहरी रेतली दोमट और हल्की तेजाबी मिट्टी में अच्छे परिणाम देती है भारी चिकनी और अत्याधिक खारी और क्षारीय मिट्टी में काजू की खेती ना करें मिट्टी की पी एच 8.0 से अधिक नहीं होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Selection 1,Selection 2,Ullal 1,Ullal 2 काजू की खेती के लिए अच्छी तरह से तैयार और समतल ज़मीन की आवश्यकता होती है खेत की तैयारी मॉनसून का मौसम शुरू होने से पहले करें बिजाई मई महीने में की जाती है अनउपजाऊ मिट्टी में 7.5मीटर x 7.5 मीटर और गहरी उपजाऊ मिट्टी में 10 मीटर x 10 मीटर फासले का प्रयोग करें बीज की मात्रा:-प्रति एकड़ भूमि में बिजाई के लिए 250 ग्राफ्ट किए पौधों का प्रयोग करें अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए नाइट्रोजन 750 ग्राम, फास्फोरस 325 ग्राम और पोटाश 750 ग्राम प्रति एकड़ में डाली जानी चाहिए नदीनों की बढ़ती संख्या के अनुसार, जून - जुलाई और सितंबर - अक्तूबर महीने में हाथों से या रासायनिक तरीके से गोडाई करें जुलाई के शुरू में और फिर 2 महीने के अंतराल पर पैराकुएट 160 ग्राम प्रति एकड़ में डालें या जून - जुलाई महीने में ग्लाईफोसेट 350 ग्राम प्रति एकड़ में डालें बिजाई के 3 वर्ष बाद तुड़ाई करनी शुरू करें और 10 वर्ष के वृक्ष में पूरी उपज प्राप्त की जा सकती है यह फसल अगले 20 वर्षों तक नियमित उपज देती है फलों की हाथों से तुड़ाई की जाती है और फिर छिल्के से अलग किया जाता है और फिर 2-3 दिनों के लिए धूप में सुखाया जाता है सुखाने के बाद इन्हें स्टोर किया जाता है इसकी औसतन उपज 3 किलो प्रति वृक्ष प्रति वर्ष होती है
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