
Posted by ਬਲਜੀਤ ਸਿੰਘ ਗਰੇਵਾਲ
Punjab
06-08-2019 02:28 PM
Baljeet Singh ji iss da hamla ikk dum ho janda hai. iss di roktham de lyi tuc tilt@200ml ja bumper@200ml ja oswal di gillete@200ml nu 150ltr pani de nal mila ke prati acre de hisaab nal spray kro. Thankyou.
Posted by Gurdeep Singh
Punjab
06-08-2019 02:28 PM
ਹਰਗੋਪਾਲ ਜੀ ਇਸਦੀਆਂ ਜੜਾਂ ਵਿਚ ਸਿਉਂਕ ਚੈੱਕ ਕਰੋ ਜੇਕਰ ਮੌਜੂਦ ਹੈ ਤਾ ਤੁਸੀ chlorpyriphos @4 ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Jitender
Haryana
06-08-2019 02:12 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके

Posted by ਗਗਨਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
06-08-2019 02:05 PM
ਗਗਨਦੀਪ ਸਿੰਘ ਜੀ ਤੁਸੀ ਚਾਰੇ ਵਾਲੀ ਮੱਕੀ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ J1006 ਜਾ African tall ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by sikandar kumar majhi
Bihar
06-08-2019 02:04 PM
किसान पंजीकरण बंद नहीं हुआ है जी आप अब भी नज़दीकी सहकारी सोसाइटी से पंजीकरण करवा सकते हो जी

Posted by Sumit
Haryana
06-08-2019 01:52 PM
फूल लगने से फल पकने तक सात महीने लगते है आपके फल कितने दिनों के हो गए है
Posted by Deepak labana
Rajasthan
06-08-2019 01:49 PM
दीपक जी कृपया सवाल विस्तार से पूछे के आप झिल्ली किसे कह रहे है ताकि आपको उसके हिसाब से जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by jagdeep Singh jattana
Punjab
06-08-2019 01:46 PM
jekar ohh 2 mahine badd dubara heat vich aa jndi hai tan tuci uss nu gaban krwa skde ho, jekar gaban nhi krwani hai tan heat khali shdd skde ho..

Posted by hetram
Rajasthan
06-08-2019 01:45 PM
Hetram ji kripya iski photo bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Amrit Sandhu
Punjab
06-08-2019 01:43 PM
Amrit ji eh mychorriza hai eh fasl di growth de layi varti jandi hai.
Posted by Amrit Sandhu
Punjab
06-08-2019 01:36 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਇਹਨਾਂ ਦਵਾਈਆਂ ਦਾ ਵਧੀਆ ਅਤੇ ਲੰਮਾ ਰਿਜਲਟ ਲੈਣ ਲਈ ਅਲਗ ਅਲਗ ਹੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਜੀ
Posted by kalyan lodha
Madhya Pradesh
06-08-2019 01:33 PM
kalayan g bhindi mein NPK 13.O.45 @1 kg per acre ko 100 liter pani mein mila ke spray kro g.
Posted by Gurbhej
Punjab
06-08-2019 01:30 PM
Basmati 1121 di growth lyi tricontanol @7 kg per acre da chitta deo g ja frr liquid tricontanol @300 ml per acre da spray kr skde ho g.
Posted by pavan brar
Punjab
06-08-2019 01:29 PM
Pavan g tuc mitti test krva ke gypsum @100 kg per acre pao..

Posted by Shiv Mohan
Uttar Pradesh
06-08-2019 01:24 PM
शिव जी दीमक की रोकथाम के लिए आप chlorpyriphos @1 लीटर को 60 किलो रेत में मिला कर छींटा दे धन्यवाद
Posted by Akashdeep Singh
Punjab
06-08-2019 01:16 PM
Arvinder ji iss dwai vich mineral ate vitamin hunde hai jiss nal pashu de sarir di kami purri hundi hai ate pashu jaldi heat vich aa jnda hai..

Posted by Daljeet singh
Punjab
06-08-2019 01:10 PM
daljeet ji aap ise vermicompost@4 kilo ko prati paudhe ke hisab se daale.dhanywad

Posted by Jay Singh YADAV
Uttar Pradesh
06-08-2019 01:08 PM
यादव जी कृप्या आप अपना सवाल दोबारा पूछें आपके द्धारा भेंजी ओडियों अपलोड नहीं हुई है कृप्या दोबारा अपलोड करें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by gurdeep dhaliwal
Punjab
06-08-2019 01:07 PM
gurdeep ji isde uper tuc fenvalerate @2 ml nu prati litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by lovepreet Singh
Punjab
06-08-2019 01:01 PM
Posted by Rajendra Godara
Rajasthan
06-08-2019 12:49 PM
ड्रैगन फल के 1 एकड़ में 1600 पौधे लगते हैं और इसे मार्च —अगस्त तक कर सकते हैं गर्मियों में इसकी बिजाई होती है इसे कम पानी की जरूरत पड़ती है और ज़मीन पानी रोकने वाली ना हो ज्यादा खाद भी जरूरत नहीं पड़ती. 2 महीने के अंतराल में पानी लगते हैं जी, मार्केटिंग लोकल ही हो जाती है जी कोई समस्या वाली बात नहीं. बाकी और जानका.... (Read More)
ड्रैगन फल के 1 एकड़ में 1600 पौधे लगते हैं और इसे मार्च —अगस्त तक कर सकते हैं गर्मियों में इसकी बिजाई होती है इसे कम पानी की जरूरत पड़ती है और ज़मीन पानी रोकने वाली ना हो ज्यादा खाद भी जरूरत नहीं पड़ती. 2 महीने के अंतराल में पानी लगते हैं जी, मार्केटिंग लोकल ही हो जाती है जी कोई समस्या वाली बात नहीं. बाकी और जानकारी के लिए आप सतनाम सिंह से बात कर सकते हैं इन्होंने ड्रैगन फल लगाया है 9779846777
Posted by Deepak Panwar
Madhya Pradesh
06-08-2019 12:49 PM
deepak ji aap iske uper NPK 191919 ek kilo ko 150 litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by
--
06-08-2019 12:44 PM
रत्नकांत सुंगुरवाड जी आप बीज ऑनलाइन न मंगवाए जी नज़दीकी फार्मर से पता करो और जो आपने ऑनलाइन मंगवाए है उसमे देखे के return की ऑप्शन भी होगी आप बीज वापिस रेतुर्न भी कर सकते हो जी
Posted by Tejinder Singh
Punjab
06-08-2019 12:39 PM
tuci iss nu Lactin bolus 1-1 goli swere sham, Milkout powder 2-2 chamch swere sham ate Fmc powder 50gm rojana dena suru kro, iss nal frak paa jawega..
Posted by jagdish kushwah mothpur
Rajasthan
06-08-2019 12:37 PM
जगदीश जी इल्ली की रोकथाम के लिए quinalphos @4 ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Balram
Uttar Pradesh
06-08-2019 12:23 PM
Deemak ki roktham ke liye chloro@1ltr prati acre je hisaab se spray krein...yeh kgade pani mein aap kr skte ho..
Posted by प्रकाश चन्द्र
Uttar Pradesh
06-08-2019 12:21 PM
बाजरे की बिजाई के लिए जुलाई के पहले पखवाड़े का समय अनुकूल होता है

Posted by Kulveer Singh
Punjab
06-08-2019 12:19 PM
tuci majh nu pett de kiria lai Flukarid -Ds bolus deo, isde nal tuci Minfa gold powder 100gm rojana ate Ovumin advance bolus rojana 1 goli deo ate 21 din tak dinde rho, iss nal heat vich aa jawegi..

Posted by Meena Suraj
Rajasthan
06-08-2019 12:13 PM
यदि आपकी भैंस को भार पड़ता है तो आप भार पड़ने के इलाज के लिए यह तरीका प्रयोग कर सकते हैं, आप 1 किलो सत्यानाशी बीज लें, आधा किलो कमरकस, आधा किलो जोखार लें, यह सब पंसारी से मिल जायेगा, यह सब कुछ आप मिला लें और इसका पाउडर बना सकते हैं और रोज़ाना रात को यह मिश्रण आधा किलो लें और आधा किलो शकर लें और इन्हे भिगोकर रख दें और अ.... (Read More)
यदि आपकी भैंस को भार पड़ता है तो आप भार पड़ने के इलाज के लिए यह तरीका प्रयोग कर सकते हैं, आप 1 किलो सत्यानाशी बीज लें, आधा किलो कमरकस, आधा किलो जोखार लें, यह सब पंसारी से मिल जायेगा, यह सब कुछ आप मिला लें और इसका पाउडर बना सकते हैं और रोज़ाना रात को यह मिश्रण आधा किलो लें और आधा किलो शकर लें और इन्हे भिगोकर रख दें और अगले दिन पशु को दें, इस तरह आप 4 दिन लगातार दें और उसेे Calcimust gel liquid 300ml लगातार 3 दिन तक दें इससे फर्क पड़ जाएगा
Posted by ਅਮਰੀਕ ਸਿੰਘ
Punjab
06-08-2019 12:12 PM
amreek singh ji 2700 nahi veer ji . eh 5700+200 =5900 hai ji. oh special day c jado
4700+200 =4900 hoe c . vese eh 5900/ hai ji. Oh filhal Proposed scheme aa regulatory commission kol payi aa , fer koi decision ton baad kuch hou ga ji.Filhaal nhi.
Posted by umesh
Uttar Pradesh
06-08-2019 12:10 PM
खेत की तैयारी के समय मिट्टी में 10 किलो रूड़ी की खाद अच्छी तरह मिलाएं खेत में नाइट्रोजन 100 ग्राम, फासफोरस 50 ग्राम और पोटाश्यिम 100 ग्राम प्रति पौधा डालें यह खाद एक वर्ष के पौधे को डालें और 10 साल तक खाद की मात्रा बढ़ते रहें फासफोरस की पूरी और पोटाशियम और नाइट्रोजन आधी मात्रा को जनवरी-फरवरी में शुरूआती खुराक के तौर प.... (Read More)
खेत की तैयारी के समय मिट्टी में 10 किलो रूड़ी की खाद अच्छी तरह मिलाएं खेत में नाइट्रोजन 100 ग्राम, फासफोरस 50 ग्राम और पोटाश्यिम 100 ग्राम प्रति पौधा डालें यह खाद एक वर्ष के पौधे को डालें और 10 साल तक खाद की मात्रा बढ़ते रहें फासफोरस की पूरी और पोटाशियम और नाइट्रोजन आधी मात्रा को जनवरी-फरवरी में शुरूआती खुराक के तौर पर डालें बाकी की मात्रा अगस्त के महीने में डालें बोरोन और ज़िंक सल्फेट 100-150 ग्राम, सोडियम की ज्यादा मात्रा वाली मिटटी में पौधे की आयु और सेहत के अनुसार डालें
Posted by Er R K Dikshit
Uttar Pradesh
06-08-2019 12:01 PM
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट.... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट्टी का pH 9.5 से ज्यादा हो तो इसमें जिप्सम डालें आप इसकी किस्मे जैसे Co 8014 (Mahalakshami) ,Vasant 1,Co 86032 ,Co 92005 की बिजाई कर सकते है पतझड़ के मौसम में 15 अक्तूबर से २० नवंबर तक बिजाई की जाती है, बसंत के मौसम में बिजाई 15 फरवरी तक और गर्मियों के मौसम में 15 जुलाई से 15 सितंबर तक बिजाई की जाती है बिजाई के लिए सुधरे ढंग जैसे कि (गहरी खालियां, मेंड़ बनाकर,पंक्तियों में जोड़े बनाकर और गड्ढा खोदकर बिजाई ) प्रयोग किये जाते हैं 1) खालियां और मेंड़ बनाकर सूखी बिजाई: ट्रैक्टर द्वारा मेंड़ बनाने वाली मशीन की मदद से मेंड़ और खालियां बनाएं और इन मेड़ और खालियों में बिजाई करें मेड़ और खालियों में 90 सैं.मी. का फासला होना चाहिए गन्ने की गुलियों को मिट्टी में दबाएं और उसके बाद हल्की सिंचाई करें 2) पंक्तियों के जोड़े बनाकर बिजाई: खालियां बनाने वाले यंत्र के प्रयोग से खेत में 150 सैं.मी. के फासले पर खालियां बनाएं और उनमें 30:30-90-30:30 सैं.मी. के फासले पर गन्ने की रोपाई करें इस तरीके से मेड़ वाली बिजाई से अधिक पैदावार मिलती है 3) गड्ढा खोदकर बिजाई: गड्ढे खोदने वाली मशीन से 60 सैं.मी. व्यास के 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोदें जिनमें 60 सैं.मी. का फासला हो इससे गन्ना 2-3 बार उगाया जा सकता है और मेड़ वाली बिजाई से 25-50 % अधिक पैदावार आती है B) एक आंख वाले गन्नों की बिजाई: रोपाई के लिए सेहतमंद गुलियां चुनें और 75-90 सैं.मी. के अंतर पर खालियों में बिजाई करें गुलियां एक आंख वाली होनी चाहिए यदि गन्ने के ऊपरी भाग में छोटी डलियां चुनी गई हों तो बिजाई 6 -9 सैं.मी. के अंतर पर करें फसल के अच्छे उगने के लिए आंखों को ऊपर की ओर रखें और हल्की सिंचाई करें पतझड़ के मौसम में 14500-16500 तीन आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और बसंत के मौसम में 16500-25000 तीन आंख वाले बीज और 21600-25000 दो आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें गन्ने में नदीनों के कारण 12-72 % पैदावार का नुकसान होता है शुरूआती 60-120 दिनों तक नदीनों की रोकथाम बहुत जरूरी है इसलिए रोपाई के बाद 3-4 महीने बाद फसल की नदीनों की रोकथाम करें नीचे लिखे तरीकों से नदीनों को रोका जा सकता है 1) हाथों से गोडाई करके: गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली फसल है इसलिए नदीनों को गोडाई करके रोका जा सकता है इसके इलावा प्रत्येक सिंचाई के बाद 3-4 गोडाई जरूरी है 2) काश्तकारी ढंग: इस प्रक्रिया में खेती के तरीके, अंतरफसली और मलचिंग तरीके शामिल हैं बहुफसली के कारण नदीनों का हमला ज्यादा होता है इसकी रोकथाम के लिए चारे वाली फसलें और हरी खाद वाली फसलों के आधार वाला फसली चक्र गन्ने में नदीनों की रोकथाम करता है गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली भी फसल है जिससे नदीनों के हमले का खतरा भी ज्यादा होता है यदि गन्ने को कम समय वाली फसलों के साथ अंतरफसली किया जाए तो इससे नदीनों को कम किया जा सकता है और ज्यादा लाभ भी मिल सकता है गन्ने के अंकुरन के बाद गन्ने की कतारों में 10-12 सैं.मी. मोटी तह बिछा दी जाती है यह सूर्य की रोशनी को सोखता है जिससे नदीन कम होते हैं यह मिट्टी में नमी को भी बचाता है 3) रासायनिक तरीके: नदीनों की रोकथाम के लिए, सिमाज़ीन या एट्राज़ीन 600-800 ग्राम या मैट्रीब्यूज़िन 800 ग्राम या ड्यूरॉन 1-1.2 किलोग्राम प्रति एकड़ में बिजाई के तुरंत बाद प्रयोग करना चाहिए इसके इलावा चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए 2, 4-डी@ 300-400 ग्राम का प्रयोग प्रति एकड़ के हिसाब से करें नाइट्रोजन 62 किलो, फासफोरस 32 किलो और पोटाश 42 किलो प्रति एकड़ में डालें बिजाई से पहले नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो मात्रा को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें नाइट्रोजन की पहली मात्रा को बीज वाली आंख के अंकुरण के समय और दूसरी मात्रा को बीज अंकुरण के 45 दिन बाद डालें 3 वर्षों के बाद गन्ने की गुलियों में 40-50 क्विंटल गाय का गोबर प्रति एकड़ में डालें पतझड़ के मौसम में 90-100 दिनों में नाइट्रोजन को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें और बसंत के मौसम में 150-160 दिन बाद डालनी चाहिए सिंचाई की संख्या मिट्टी की किस्म और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है गर्मी के महीने में गर्म हवाओं और सूखे में वृद्धि होने के कारण फसल को पानी की जरूरत पड़ती है पहली सिंचाई फसल के 20-25 % अंकुरित होने पर करें मानसून में गन्ने को पानी और बारिश के आधार पर लगाएं कम वर्षा में सिंचाई 10 दिनों के अंतराल पर करें इसके बाद सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर 20-25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जमीन में नमी संभालने के लिए गन्ने की पंक्तियों में मलचिंग का प्रयोग करें अप्रैल जून के महीने में पानी की कमी ना होने दें इससे पैदावार कम होगी इसके इलावा बारिश के दिनों में पानी ना खड़ा होने दें जोताई का समय, वृद्धि का समय और अधिक विकास का समय सिंचाई के लिए बहुत नाज़ुक होता है मिट्टी को मेंड़ पर चढ़ाना: कसी की मदद से खालियों में और पौधे के किनारों पर मिट्टी चढ़ाई जाती है यह मिट्टी में अच्छी तरह से तैयार की गई खाद को अच्छी तरह से मिश्रित होने में मदद करती है पौधे को सहारा देने और उसे गिरने से बचाने में भी मदद करती है ज्यादा पैदावार और चीनी प्राप्त करने के लिए गन्ने की सही समय पर कटाई जरूरी है समय से पहले या बाद में कटाई करने से पैदावार पर प्रभाव पड़ता है किसान शूगर रीफरैक्टोमीटर का प्रयोग करके कटाई का समय पता लगा सकते हैं गन्ने की कटाई द्राती की सहायता से की जाती है गन्ना धरती से ऊपर थोड़ा हिस्सा छोड़कर काटा जाता है क्योंकि गन्ने में चीनी की मात्रा ज्यादा होती है कटाई के बाद गन्ना फैक्टरी में लेकर जाना जरूरी होता है

Posted by harsh
Gujarat
06-08-2019 11:59 AM

Posted by Ghanshyam Kumawat
Rajasthan
06-08-2019 11:58 AM
iske liye aap 9646457187 pe call kr le aapko jankari mil jayegi
Posted by ਮਨਦੀਪ ਸਿੰਘ ਸਿੱਧੂ
Punjab
06-08-2019 11:57 AM
Mandeep ji pkavi makki de lyi PMH1, PMH2 kisam di bijai Kar sakde ho.
Posted by Er R K Dikshit
Uttar Pradesh
06-08-2019 11:55 AM
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट.... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट्टी का pH 9.5 से ज्यादा हो तो इसमें जिप्सम डालें आप इसकी किस्मे जैसे Co 8014 (Mahalakshami) ,Vasant 1,Co 86032 ,Co 92005 की बिजाई कर सकते है पतझड़ के मौसम में 15 अक्तूबर से २० नवंबर तक बिजाई की जाती है, बसंत के मौसम में बिजाई 15 फरवरी तक और गर्मियों के मौसम में 15 जुलाई से 15 सितंबर तक बिजाई की जाती है बिजाई के लिए सुधरे ढंग जैसे कि (गहरी खालियां, मेंड़ बनाकर,पंक्तियों में जोड़े बनाकर और गड्ढा खोदकर बिजाई ) प्रयोग किये जाते हैं 1) खालियां और मेंड़ बनाकर सूखी बिजाई: ट्रैक्टर द्वारा मेंड़ बनाने वाली मशीन की मदद से मेंड़ और खालियां बनाएं और इन मेड़ और खालियों में बिजाई करें मेड़ और खालियों में 90 सैं.मी. का फासला होना चाहिए गन्ने की गुलियों को मिट्टी में दबाएं और उसके बाद हल्की सिंचाई करें 2) पंक्तियों के जोड़े बनाकर बिजाई: खालियां बनाने वाले यंत्र के प्रयोग से खेत में 150 सैं.मी. के फासले पर खालियां बनाएं और उनमें 30:30-90-30:30 सैं.मी. के फासले पर गन्ने की रोपाई करें इस तरीके से मेड़ वाली बिजाई से अधिक पैदावार मिलती है 3) गड्ढा खोदकर बिजाई: गड्ढे खोदने वाली मशीन से 60 सैं.मी. व्यास के 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोदें जिनमें 60 सैं.मी. का फासला हो इससे गन्ना 2-3 बार उगाया जा सकता है और मेड़ वाली बिजाई से 25-50 % अधिक पैदावार आती है B) एक आंख वाले गन्नों की बिजाई: रोपाई के लिए सेहतमंद गुलियां चुनें और 75-90 सैं.मी. के अंतर पर खालियों में बिजाई करें गुलियां एक आंख वाली होनी चाहिए यदि गन्ने के ऊपरी भाग में छोटी डलियां चुनी गई हों तो बिजाई 6 -9 सैं.मी. के अंतर पर करें फसल के अच्छे उगने के लिए आंखों को ऊपर की ओर रखें और हल्की सिंचाई करें पतझड़ के मौसम में 14500-16500 तीन आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और बसंत के मौसम में 16500-25000 तीन आंख वाले बीज और 21600-25000 दो आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें गन्ने में नदीनों के कारण 12-72 % पैदावार का नुकसान होता है शुरूआती 60-120 दिनों तक नदीनों की रोकथाम बहुत जरूरी है इसलिए रोपाई के बाद 3-4 महीने बाद फसल की नदीनों की रोकथाम करें नीचे लिखे तरीकों से नदीनों को रोका जा सकता है 1) हाथों से गोडाई करके: गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली फसल है इसलिए नदीनों को गोडाई करके रोका जा सकता है इसके इलावा प्रत्येक सिंचाई के बाद 3-4 गोडाई जरूरी है 2) काश्तकारी ढंग: इस प्रक्रिया में खेती के तरीके, अंतरफसली और मलचिंग तरीके शामिल हैं बहुफसली के कारण नदीनों का हमला ज्यादा होता है इसकी रोकथाम के लिए चारे वाली फसलें और हरी खाद वाली फसलों के आधार वाला फसली चक्र गन्ने में नदीनों की रोकथाम करता है गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली भी फसल है जिससे नदीनों के हमले का खतरा भी ज्यादा होता है यदि गन्ने को कम समय वाली फसलों के साथ अंतरफसली किया जाए तो इससे नदीनों को कम किया जा सकता है और ज्यादा लाभ भी मिल सकता है गन्ने के अंकुरन के बाद गन्ने की कतारों में 10-12 सैं.मी. मोटी तह बिछा दी जाती है यह सूर्य की रोशनी को सोखता है जिससे नदीन कम होते हैं यह मिट्टी में नमी को भी बचाता है 3) रासायनिक तरीके: नदीनों की रोकथाम के लिए, सिमाज़ीन या एट्राज़ीन 600-800 ग्राम या मैट्रीब्यूज़िन 800 ग्राम या ड्यूरॉन 1-1.2 किलोग्राम प्रति एकड़ में बिजाई के तुरंत बाद प्रयोग करना चाहिए इसके इलावा चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए 2, 4-डी@ 300-400 ग्राम का प्रयोग प्रति एकड़ के हिसाब से करें नाइट्रोजन 62 किलो, फासफोरस 32 किलो और पोटाश 42 किलो प्रति एकड़ में डालें बिजाई से पहले नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो मात्रा को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें नाइट्रोजन की पहली मात्रा को बीज वाली आंख के अंकुरण के समय और दूसरी मात्रा को बीज अंकुरण के 45 दिन बाद डालें 3 वर्षों के बाद गन्ने की गुलियों में 40-50 क्विंटल गाय का गोबर प्रति एकड़ में डालें पतझड़ के मौसम में 90-100 दिनों में नाइट्रोजन को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें और बसंत के मौसम में 150-160 दिन बाद डालनी चाहिए सिंचाई की संख्या मिट्टी की किस्म और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है गर्मी के महीने में गर्म हवाओं और सूखे में वृद्धि होने के कारण फसल को पानी की जरूरत पड़ती है पहली सिंचाई फसल के 20-25 % अंकुरित होने पर करें मानसून में गन्ने को पानी और बारिश के आधार पर लगाएं कम वर्षा में सिंचाई 10 दिनों के अंतराल पर करें इसके बाद सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर 20-25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जमीन में नमी संभालने के लिए गन्ने की पंक्तियों में मलचिंग का प्रयोग करें अप्रैल जून के महीने में पानी की कमी ना होने दें इससे पैदावार कम होगी इसके इलावा बारिश के दिनों में पानी ना खड़ा होने दें जोताई का समय, वृद्धि का समय और अधिक विकास का समय सिंचाई के लिए बहुत नाज़ुक होता है मिट्टी को मेंड़ पर चढ़ाना: कसी की मदद से खालियों में और पौधे के किनारों पर मिट्टी चढ़ाई जाती है यह मिट्टी में अच्छी तरह से तैयार की गई खाद को अच्छी तरह से मिश्रित होने में मदद करती है पौधे को सहारा देने और उसे गिरने से बचाने में भी मदद करती है ज्यादा पैदावार और चीनी प्राप्त करने के लिए गन्ने की सही समय पर कटाई जरूरी है समय से पहले या बाद में कटाई करने से पैदावार पर प्रभाव पड़ता है किसान शूगर रीफरैक्टोमीटर का प्रयोग करके कटाई का समय पता लगा सकते हैं गन्ने की कटाई द्राती की सहायता से की जाती है गन्ना धरती से ऊपर थोड़ा हिस्सा छोड़कर काटा जाता है क्योंकि गन्ने में चीनी की मात्रा ज्यादा होती है कटाई के बाद गन्ना फैक्टरी में लेकर जाना जरूरी होता है

Posted by Deepak Kasaudhan
Uttar Pradesh
06-08-2019 11:53 AM
Posted by Charanjit Singh Jhajj
Punjab
06-08-2019 11:48 AM
ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕਿਲੋ (ਕਣਕ, ਚੌਕਰ, ਚਨਾ ਛਿਲਕਾ, ਮਟਰ ਛਿਲਕਾ, ਇਨਾਂ ਵਿ.... (Read More)
ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕਿਲੋ (ਕਣਕ, ਚੌਕਰ, ਚਨਾ ਛਿਲਕਾ, ਮਟਰ ਛਿਲਕਾ, ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ) , ਖਲ਼ 15 ਕਿਲੋ(ਸਰੋਂ, ਬਿਨੌਲਾ ਜਾਂ ਸੋਇਆ (ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ) , ਮਿੱਠਾ ਸੋਡਾ 250 ਗ੍ਰਾਮ, 1 ਕਿਲੋ ਨਮਕ, ਗੁੜ 1 ਕਿਲੋ, 1 ਕਿੱਲੋ ਹਲਦੀ (ਸਰਦੀਆ ਵਿੱਚ ) ਇਹ ਨੂੰ ਰਲਾ ਲਵੋ ਇਹ ਫੀਡ ਪਸ਼ੂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ..
Posted by mukesh yadav
Rajasthan
06-08-2019 11:48 AM
मुकेश जी अगर इसमें फंगस लग गयी है तो आप इसके ऊपर carbendazim @4 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Amritpal singh
Punjab
06-08-2019 11:45 AM
ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਣ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਕਰਨ ਲਈ ਤੁਸੀ 10 ਬੱਕਰੀਆਂ ਅਤੇ 2 ਬਕਰਿਆਂ ਨਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਖੁਰਾਕ ਅਵਸਥਾ ਘਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਅਸੀਂ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਅਸਾਨੀ ਨਾਲ ਪਾਲ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਇਹ ਹਰ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਵਾਤਾਵਰਨ ਵਿੱਚ ਪਾਲੀਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ਬਕਰੀਆਂ12-14 ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਬੱਚੇ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦੇਂਦੀਆਂ ਹਨ ਬਕਰੀ ਦਾ ਗਰਬ ਸਮਾਂ 150 ਦਿਨ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਾਲ ਵਿੱਚ 1-5 ਬੱਚੇ ਦਿੰਦਿਆਂ ਹਨ ਸ.... (Read More)
ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਣ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਕਰਨ ਲਈ ਤੁਸੀ 10 ਬੱਕਰੀਆਂ ਅਤੇ 2 ਬਕਰਿਆਂ ਨਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਖੁਰਾਕ ਅਵਸਥਾ ਘਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਅਸੀਂ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਅਸਾਨੀ ਨਾਲ ਪਾਲ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਇਹ ਹਰ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਵਾਤਾਵਰਨ ਵਿੱਚ ਪਾਲੀਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ਬਕਰੀਆਂ12-14 ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਬੱਚੇ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦੇਂਦੀਆਂ ਹਨ ਬਕਰੀ ਦਾ ਗਰਬ ਸਮਾਂ 150 ਦਿਨ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਾਲ ਵਿੱਚ 1-5 ਬੱਚੇ ਦਿੰਦਿਆਂ ਹਨ ਸਾਲ ਵਿੱਚ 2 ਬੱਚੇ ਦੇਨਾ ਆਮ ਗੱਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਬਕਰੀਆਂ 8-10 ਸਾਲ ਤਕ ਬੱਚੇ ਦਿੰਦਿਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਆਪਣੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਤੇਜੀ ਨਾਲ ਵਾਧਾ ਕਰ ਲੈਂਦਿਆਂ ਹਨ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਤੁਸੀ ਬਰਬਰੀ, ਬਲੈਕ ਬੰਗਾਲ, ਸਿਰੋਹੀ ਆਦਿ ਨਸਲ ਪਾਲ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਨੇੜੇ ਦੇ ਕਿਸੇ ਸਫਲ ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਕ ਜਾਂ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀਂ ਉਸ ਕਿਸਾਨ ਨੂੰ ਮਿਲ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੋ ਪਹਿਲਾਂ ਕਈ ਸਾਲਾਂ ਤੋਂ ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮ ਚਲਾ ਰਿਹਾ ਹੋਵੇ, ਉਸ ਤੋਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗੀ ਇਸ ਕਿੱਤੇ ਤੇ ਲੋਨ ਲੈਣ ਲਈ 25% ਸਬਸਿਡੀ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਲੋਨ ਕਲੀਅਰ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਜ਼ਿਲੇ ਦੇ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਂਦਰ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰੋ ਤੇ ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਣ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਹਾਸਿਲ ਕਰੋ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਹਾਸਿਲ ਹੋਵੇਗਾ ਇਸ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਦੇ ਦੁਆਰਾ ਤੁਸੀ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਲਈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਜ਼ਿਲੇ ਦੇ ਵੈਟਨਰੀ ਅਫਸਰ ਨੂੰ ਮਿਲੋ ਉਹ ਤੁਹਾਡੀ ਫਾਈਲ ਦੀ ਕਾਰਵਾਈ ਅੱਗੇ ਤੋਰਨ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦੇਣਗੇ

Posted by Baldeep singh
Chandigarh
06-08-2019 11:44 AM
बलदीप सिंह जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार.... (Read More)
बलदीप सिंह जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by AMANDEEP SINGH
Punjab
06-08-2019 11:37 AM
AMANDEEP SINGH ji 5 Majha nal shuru karan lai tusi eh audio suno ji.
Posted by Tejpal S Lamba
Haryana
06-08-2019 11:35 AM
तेजपाल जी कृपया अपना सवाल विस्तार से पूछें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Expert Communities
We do not share your personal details with anyone
We do not share your personal details with anyone
Sign In
Registering to this website, you accept our Terms of Use and our Privacy Policy.
Your mobile number and password is invalid
We have sent your password on your mobile number
All fields marked with an asterisk (*) are required:
Sign Up
Registering to this website, you accept our Terms of Use and our Privacy Policy.
All fields marked with an asterisk (*) are required:
Please select atleast one option
Please select text along with image














