Posted by BITU KUMAR
Bihar
09-08-2019 07:58 AM
Aap cow ko Anabolite liquid 100ml rojana, Milkout powder 2-2 chamch subah sham den isse dhudh vddh jayega.

Posted by Rammurtiram
Haryana
09-08-2019 07:53 AM
राममूर्तिराम जी वेस्ट डी कम्पोज़र एक जैविक तत्व है जो फसल की ग्रोथ के लिए इस्तेमाल किया जाता है इसकी मात्रा एक एकड़ में 200 लीटर का इस्तेमाल किया जाता है धन्यवाद

Posted by lakhvir Singh brar
Punjab
09-08-2019 07:22 AM
lakhvir ji kirpa karke swal vistar nal pucho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by sidharath
Himachal Pradesh
09-08-2019 07:20 AM
gudh animal ko energy deta hai......NEB se bachayega......but excess will cause diarrhoea

Posted by vicky
Haryana
09-08-2019 07:20 AM
आपके सभी सवालो का जवाब दिया जा चुका है आप अपने सवालों के जवाब एप में मेरे सवाल का क्लिक करके देख सकते हैं या फिर मेरी प्रोफाईल के नीचे अपने सवालों के जवाब देख कते हैं यदि आपकी कोई ओर समस्या है तो आप हैल्प लाईन नंबर : 97799-77641 पर संपर्क कर सकते हैं

Posted by Raja Babu Kumar
Bihar
09-08-2019 07:15 AM
राजा जी बच्चे लेने के लिए आप जितेंदर कुमार 7250555572 पोल्ट्री फार्म से सम्पर्क कर सकते हैं
Posted by om kumar
Punjab
09-08-2019 07:05 AM
om G tusi 9646457187 te call kar Lena puri jankari mil javegi

Posted by parm
Punjab
09-08-2019 06:47 AM
ਤੁਸੀ ਉਸਦੇ ਪੈਰ ਨੂੰ ਲਾਲ ਦਵਾਈ ਦੇ ਘੋਲ ਵਿਚ ਡੋਬੋ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Injection Neoprofin 15ml, Injection intasef 3gm, 3 ਦਿਨ ਲਗਵਾਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ
Posted by amar sen sahu
Uttar Pradesh
09-08-2019 06:17 AM
खरीफ ऋतु की मक्की में नदीन बड़ी समस्या होते हैं, जो कि खुराकी तत्व लेने में फसल से मुकाबला करते हैं और 35 प्रतिशत तक पैदावार कम कर देते हैं इसलिए अधिक पैदावार लेने के लिए नदीनों का हल करना जरूरी है मक्की की कम से कम दो गोडाई करें पहली गोडाई बिजाई से 20-25 दिन बाद और दूसरी गोडाई 40-45 दिनों के बाद, पर ज्यादा होने की सूरत .... (Read More)
खरीफ ऋतु की मक्की में नदीन बड़ी समस्या होते हैं, जो कि खुराकी तत्व लेने में फसल से मुकाबला करते हैं और 35 प्रतिशत तक पैदावार कम कर देते हैं इसलिए अधिक पैदावार लेने के लिए नदीनों का हल करना जरूरी है मक्की की कम से कम दो गोडाई करें पहली गोडाई बिजाई से 20-25 दिन बाद और दूसरी गोडाई 40-45 दिनों के बाद, पर ज्यादा होने की सूरत में एट्राज़िन 500 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी से स्प्रे करें गोडाई करने के बाद मिट्टी के ऊपर खाद की पतली परत बिछा दें और जड़ों में मिट्टी लगाएं

Posted by ਜਗਮੀਤ ਸਿਂਘ
Punjab
09-08-2019 05:57 AM
ਜਗਮੀਤ ਜੀ ਇਹ ਤੱਤ ਦੀ ਕਮੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਬੂਟੇ ਨੂੰ 3 ਤੋਂ 4 ਕਿੱਲੋ ਵਰਮੀਕੰਪੋਸਟ ਪਾਓ ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਬੂਟੇ ਦੀ ਗਰੋਥ ਵਧੀਆ ਹੋਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਬੂਟਾ ਗਰੋਥ ਵੀ ਕਰਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by SANDEEP PANDEY
Uttar Pradesh
09-08-2019 05:57 AM
यह मिट्टी की कई किस्मों जैसे अच्छे जल निकास वाली लाल दोमट से चिकनी मिट्टी, काली मिट्टी से लैटेराइट मिट्टी में उगाई जाती है यह चट्टानी मिट्टी और हल्की मिट्टी में भी उगाई जा सकती है मिट्टी की गहराई 20-30 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए यह रेतली दोमट से दरमियानी काली मिट्टी जो अच्छे जल निकास वाली हो, में अच्छे पर.... (Read More)
यह मिट्टी की कई किस्मों जैसे अच्छे जल निकास वाली लाल दोमट से चिकनी मिट्टी, काली मिट्टी से लैटेराइट मिट्टी में उगाई जाती है यह चट्टानी मिट्टी और हल्की मिट्टी में भी उगाई जा सकती है मिट्टी की गहराई 20-30 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए यह रेतली दोमट से दरमियानी काली मिट्टी जो अच्छे जल निकास वाली हो, में अच्छे परिणाम देती है पौधे की वृद्धि के लिए मिट्टी pH 6-8 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- Satavari (Asparagus racemosus),Satavari (Asparagus sarmentosa Linn.)शतावरी की खेती के लिए, अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए, ज़मीन की अच्छे से जोताई करें, और 15 सैं.मी. की गहराई में गड्ढा खोदें रोपाई तैयार बैडों पर की जाती है पौधों की रोपाई जून-जुलाई के महीने में की जाती है इसके विकास के अनुसार 4.5x 1.2 मीटर फासले का प्रयोग करें और 20 सैं.मी. गहराई में गड्ढा खोदें जब पौधा 45 सैं.मी. का हो जाए, तब खेत में रोपाई की जाती है अधिक पैदावार के लिए, 400-600 ग्राम बीजों का प्रति एकड़ में प्रयोग करें फसल को मिट्टी से होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए, बिजाई से पहले बीजों को गाय के मूत्र में 24 घंटे के लिए डाल कर उपचार करें उपचार के बाद बीज नर्सरी बैड में बोये जाते हैं अधिक पैदावार के लिए, 400-600 ग्राम बीजों का प्रति एकड़ में प्रयोग करें फसल को मिट्टी से होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए, बिजाई से पहले बीजों को गाय के मूत्र में 24 घंटे के लिए डाल कर उपचार करें उपचार के बाद बीज नर्सरी बैड में बोये जाते हैं बिजाई से पहले मिट्टी का रासायनिक उपचार किया जाता है अप्रैल के महीने में बीज बोये जाते हैं शतावरी के बीजों को 30-40 सैं.मी. की चौड़ाई वाले और आवश्यक लंबाई वाले बैडों पर बोया जाता है बिजाई के बाद बैडों को नमी के लिए पतले कपड़े से ढक दिया जाता है 8-10 दिनों में पौधों का अंकुरण शुरू हो जाता है 45 सैं.मी. ऊंचाई के होने पर पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं पौधों की रोपाई 60 x 60 सैं.मी. की मेड़ों पर की जाती है खेत की तैयारी के समय, 80 क्विंटल प्रति एकड़ गली हुई रूड़ी की खाद को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 32 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 52 किलो), और पोटाश 40 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 66 किलो) प्रति एकड़ में डालें मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारियों से पौधे को बचाने के लिए जैविक कीट नाशी जैसे धतूरा, चित्रकमूल और गाय के मूत्र का प्रयोग करें फसल के विकास के समय लगातार गोडाई की आवश्यकता होती है खेत को नदीन मुक्त बनाने के लिए 6-8 हाथ से गोडाई की आवश्यकता होती है पौधों को खेत में रोपण करने के बाद पहली सिंचाई तुरंत कर देनी चाहिए इस फसल को ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं होती इसलिए शुरूआत में 4-6 दिनों के फासले पर सिंचाई कर दें और फिर कुछ समय के बाद सप्ताह के फासले पर सिंचाई करें पुटाई से पहले सिंचाई जरूर करनी चाहिए ताकि गड्ढों मे से जड़ों को आसानी से निकाला जा सके रोपाई के बाद 20-30 महीनों में पौधे की जड़ें परिपक्व हो जाती हैं मिट्टी और जलवायु के आधार पर जड़ें 12-14 महीनों में पक जाती हैं मार्च-मई के महीने में जब बीज पक जाये, तब पुटाई की जाती है पुटाई कसी की सहायता से की जाती है प्रक्रिया और दवाइयां बनाने के लिए अच्छे से पके बीजों की आवश्यकता होती है आप इसके पौधे नजदीकी नर्सरी से ले सकते है अगर आपको पौधे वह न मिले तो आप दुबारा सवाल दाल कर हमें बता सकते है धन्यवाद
Posted by ਬਾਬਾ ਸੋਹਨ ਦਾਸ ਵੱਟਸ ਐਪ +919524823000
Punjab
09-08-2019 05:56 AM

Posted by uv brar
Rajasthan
09-08-2019 05:48 AM
Isme quinalphos@800ml ja proclaim@90gm prati acre ke hisaab se spray kr skte ho.
Posted by randhir singh rana
Himachal Pradesh
09-08-2019 05:39 AM
Randhir ji sampurn ahaar usko bolte hai jisme sabhi chijjen sahi matra mai hoti hai, jo pashu ke sarir ke sahi vikas ke liye jruri hoti hai, usko sampurn ahaar bolte hai, aap rojana 35-40kg pashuo ko hara chara dena suru kren, unki her 3 mahine badd deworming jrurr krwayen, feed aap wohi dalen jo pashu assani se khata hai ya fir aap khuud ghar per tyar krke de skte hai jisme sabhi chijjen sahi marta mai hoti hain..
Posted by BITU KUMAR
Bihar
09-08-2019 05:37 AM
बढ़िया विकास के लिए, बढ़िया निकास वाली, घनी और उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है इसके लिए मिट्टी का pH 6.5 या इससे ज्यादा होना चाहिए मिट्टी की pH 6.5 से कम होने पर फसल के विकास पर असर पड़ता है प्रसिद्ध किस्में :- Konni Teak, West African teak, Godhavari Teak, South and Central American Teak, Nilambur or Malabar Teak.मिट्टी के भुरभुरा बनाने के लिए खेत की 2-3 बार जोताई करें मिट्टी को समतल क.... (Read More)
बढ़िया विकास के लिए, बढ़िया निकास वाली, घनी और उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है इसके लिए मिट्टी का pH 6.5 या इससे ज्यादा होना चाहिए मिट्टी की pH 6.5 से कम होने पर फसल के विकास पर असर पड़ता है प्रसिद्ध किस्में :- Konni Teak, West African teak, Godhavari Teak, South and Central American Teak, Nilambur or Malabar Teak.मिट्टी के भुरभुरा बनाने के लिए खेत की 2-3 बार जोताई करें मिट्टी को समतल करें ताकि खेत में पानी खड़ा ना हो सके नए पौधों की रोपाई के लिए 45x45x45 सैं.मी. के फासले पर गड्ढे खोदे प्रत्येक गड्ढे में गली हुई रूड़ी की खाद के साथ कीटनाशी डालें बीजों को नर्सरी बैड में बोया जाता है रोपाई के लिए 12-15 महीने के नए पौधों का प्रयोग करें टिशू प्रजनन ग्राफ्टिंग, जड़, तने काट कर और micro छोटे प्रजनन द्वारा किया जाता है रोपाई के लिए पूर्व अंकुरन पौधों का प्रयोग किया जाता है मॉनसून का मौसम सागवान की रोपाई के लिए सबसे अच्छा मौसम होता है रोपाई के लिए 2x2 या 2.5x2.5 या 3x3 मीटर के फासले रखा जाता है जब अंतर-फसली अपनाई हो, तो 4x4 मीटर या 5.x5 मीटर फासला रखें सागवान की रोपाई के लिए पूर्व अंकुरित पौधों का प्रयोग करें 45x45x45 सैं.मी. के गड्ढे बनाएं प्रत्येक गड्ढे में गली हुई रूड़ी की खाद और मिट्टी डालें बिजाई पंक्ति में, छींटे द्वारा या पनीरी लगाकर की जा सकती है एक एकड़ में रोपाई के लिए लगभग 1500-1800 clones का प्रयोग करें सागवान वृक्ष के फल का छिल्का मोटा और सख्त होता है, इसलिए नर्सरी में बिजाई से पहले सागवान के बीजों की अंकुरन प्रतिशतता बढ़ाने के लिए बीजों का पूर्व उपचार किया जाता है फलों को भिगोने और सुखाने के लिए पूर्व उपचार का पारंपरिक ढंग प्रयोग किया जाता है इस विधि में बीजों को 12 घंटे के लिए पानी में भिगोया जाता है और फिर 12 घंटे के लिए धूप में सुखाया जाता है यह प्रक्रिया 10-14 दिनों तक बार बार दोहराई जाती है बीजों के उपचार के लिए अन्य तेजाबी और गड्ढा वाले पूर्व उपचार के ढंग हैं हर साल अगस्त और सितंबर महीने में 50 ग्राम प्रति पौधे में पहले तीन वर्ष डालें पहले तीन वर्षों में खेत को नदीन मुक्त करना आवश्यक है नियमित समय पर गोड़ाई करें पहले वर्ष में 3 और दूसरे वर्ष में 2 गोड़ाई करें रोपाई के तीसरे वर्ष में एक बार गोड़ाई करें मॉनसून के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती सिंचाई गर्म या गर्मियों के महीने में और आवश्यकता अनुसार करें आवश्यकता अनुसार सिंचाई करने के साथ काफी हद तक पैदावार में सुधार आता है अतिरिक्त सिंचाई से पानी के धब्बे और फंगस ज्यादा हो जाती है
Posted by narendra
Uttar Pradesh
09-08-2019 05:17 AM
गेंदे की बिजाई एक वर्ष में कभी भी की जा सकती है बारिश के मौसम में इसकी बिजाई मध्य जून से मध्य जुलाई में करें सर्दियों में इसकी बिजाई मध्य सितंबर से मध्य अक्तूबर में पूरी कर लें

Posted by malkeet singh grewal
Punjab
09-08-2019 01:37 AM
ਤੁਸੀ ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਹੈ ਤਾ ਸਭ ਤੋਂ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਇਹ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੁਹਾਨੂੰ FFDA(fish farmer development aggency) ਜੋ ਕਿ ਲੱਗਭੱਗ ਹਰ ਜ਼ਿਲੇ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਾਂ ਉੱਥੇ ਜਾ ਕੇ ਐਪਲੀਕੇਸ਼ਨ ਫਾਰਮ ਭਰੋ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਤੁਹਾਨੂੰ 5 ਦਿਨ ਦੀ ਮੁਫਤ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇਗੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲਈ ਦਸਵੀ ਪਾਸ ਹੋਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਤੇ ਇਹ ਡਿਪਾਰਮੈ੍ਟ ਜਿੱਥੇ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਅਫਸਰ ਬੈਠਦਾ ਹੈ ਜਿਵ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਹੈ ਤਾ ਸਭ ਤੋਂ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਇਹ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੁਹਾਨੂੰ FFDA(fish farmer development aggency) ਜੋ ਕਿ ਲੱਗਭੱਗ ਹਰ ਜ਼ਿਲੇ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਾਂ ਉੱਥੇ ਜਾ ਕੇ ਐਪਲੀਕੇਸ਼ਨ ਫਾਰਮ ਭਰੋ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਤੁਹਾਨੂੰ 5 ਦਿਨ ਦੀ ਮੁਫਤ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇਗੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲਈ ਦਸਵੀ ਪਾਸ ਹੋਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਤੇ ਇਹ ਡਿਪਾਰਮੈ੍ਟ ਜਿੱਥੇ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਅਫਸਰ ਬੈਠਦਾ ਹੈ ਜਿਵੇ ਕਚਿਹਰੀਆਂ , ਡੀ ਸੀ ਆਫਿਸ ਕਹਿੰ ਦਿੰਦੇ ਹਾਂ ਉਸ ਵਿੱਚ ਬਣਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਲਈ ਸੇਮ ਵਾਲੇ ਇਲਾਕੇ ਵਿੱਚ 90% ਸਬਸਿਡੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੇ ਬਾਕੀ ਇਲਾਕਿਆ ਵਿੱਚ 40 % ਸਬਸਿਡੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਜ਼ਿਲੇ ਦੇ FFDA ( fish farming development agency ) ਦਫਤਰ ਵਿੱਚ ਜਾਓ ਜੋ ਕਿ ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਡੀਸੀ ਦਫਤਰ ਜਾਂ ਕਚਿਹਰੀਆਂ ਵਿੱਚ ਬਣਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਉੱਥੇ ਆਪਣੇ ਜਮੀਂਨ ਦੀ ਫਰਦ , 10th ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਤੇ ਜਿੱਥੇ ਤਲਾਬ ਬਣਾਉਣਾ ਹੈ ਉੱਥੋ ਦੀਆਂ 2 ਫੋਟੋ ਲੈ ਕੇ ਜਾਓ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ FFDA ਦੇ ਅਫਸਰ ਤੁਹਾਨੂੂੰ ਫਾਈਲ ਤਿਆਰ ਕਰਵਾਉਣਗੇ ਤੇ ਤੁਹਾਡੀ ਜਮੀਨ ਦੇਖ ਕੇ ਤਲਾਬ ਬਣਾਉਣ ਦਾ ਤਰੀਕਾ ਦੱਸਣਗੇ ਤੇ ਫਿਰ ਤੁਹਾਨੂੰ 40% ਸਬਸਿਡੀ ਲਈ ਫਾਈ਼ਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਬਾਰੇ ਸਮਝਾ ਦੇਣਗੇ..
Posted by ਬੂਟਾ ਸਿੰਘ
Punjab
09-08-2019 12:25 AM
ਬੂਟਾ ਜੀ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ surinder Nagra 9814305864 ਜੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by yogi rathi
Haryana
09-08-2019 12:24 AM
धान के बढ़िया फुटाव के लिए अब आप यूरिया के साथ biovita @8 किलो या फिर टाटा की ralli gold @4 किलो को प्रति एकड़ में इसका छींटा दें, इससे आपका धान बढ़िया फुटाव कर लेगा
Posted by ਬੂਟਾ ਸਿੰਘ
Punjab
09-08-2019 12:19 AM
ਬੂਟਾ ਜੀ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ surinder Nagra 9814305864 ਜੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by ਸਤਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
08-08-2019 11:37 PM
ਸਤਿੰਦਰ ਜੀ ਪੁਦੀਨੇ ਦੇ ਪੱਤੇ ਫੰਗਸ ਦੇ ਕਾਰਨ ਗੱਲ ਰਹੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ carbendazim @3 ਗ੍ਰਾਮ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Vikas Pareta
Rajasthan
08-08-2019 11:14 PM
Vikas ji kripya aap iski photo bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad

Posted by Gurpreet singh
Punjab
08-08-2019 11:08 PM
1-3 ਸਾਲ ਦੇ ਪੌਦੇ ਜਾਂ ਰੁੱਖ ਨੂੰ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 5-20 ਕਿਲੋ, ਯੂਰੀਆ 100-200 ਗ੍ਰਾਮ, ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ 250-500 ਗ੍ਰਾਮ ਅਤੇ ਮਿਊਰੇਟ ਆਫ ਪੋਟਾਸ਼ 175-350 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਰੁੱਖ ਪਾਓ 4-6 ਸਾਲ ਪੌਦੇ ਜਾਂ ਰੁੱਖ ਨੂੰ ਲਈ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 25 ਕਿਲੋ , ਯੂਰੀਆ 200-400 ਗ੍ਰਾਮ, ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ 500-700 ਗ੍ਰਾਮ ਅਤੇ ਮਿਊਰੇਟ ਆਫ ਪੋਟਾਸ਼ 350-700 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਰੁੱਖ ਪਾਓ

Posted by Nitesh kumar
Haryana
08-08-2019 10:51 PM
Nitesh ji aap mashro ko bhagane ke liye pashu ke pass duua paa skte hai, isse nuksan nhi hai, per duua jyada nhi hona chahiye, duua aap pashuo se duur kren, isse pashuo per makhi masar kam aate hai, duua sirf sukhi ruudi aur sukke kakho ka hona chahiye, aap plastic ka usee duue mai naa kren..
Posted by Sharad Yadav
Uttar Pradesh
08-08-2019 10:39 PM
सिंचित और कम बारानी वाले क्षेत्रों के लिए लगभग 41-50 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 90-110 किलो), 30 किलो फासफोरस (एस एस पी 190 किलो) और 27 किलो पोटाश (म्यूरेट ऑफ पोटाश 45 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा रोपाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर, नाइट्रोजन का 1/4 .... (Read More)
सिंचित और कम बारानी वाले क्षेत्रों के लिए लगभग 41-50 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 90-110 किलो), 30 किलो फासफोरस (एस एस पी 190 किलो) और 27 किलो पोटाश (म्यूरेट ऑफ पोटाश 45 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा रोपाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर, नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा शाखाएं निकलने के समय और 1/4 हिस्सा बालियां निकलने के समय डालें
जल जमाव वाले क्षेत्रों में नाइट्रोजन 30-41 किलो (यूरिया 65-90 किलो) प्रति एकड़ में शुरूआती खुराक के तौर पर डालें
कम बारानी क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23-32 किलो (यूरिया 52-70 किलो) और फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो) प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा रोपाई से पहले और बाकी बची नाइट्रोजन बालियां निकलने के समय डालें
ऊंचे क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो) और पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के तीन सप्ताह बाद डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटे पहले भाग को बिजाई के 6 सप्ताह बाद और दूसरे भाग को बालियां निकलने के समय डालें

Posted by Amritpal singh
Punjab
08-08-2019 10:38 PM
ਸੰਦੀਪ ਜੀ ਤੁਹਾਡਾ 5 ਸੂਰੀਆ ਰੱਖਣ ਵਿਚ ਲਗਭਗ 5-6 ਲੱਖ ਤਕ ਖਰਚ ਆ ਸਕਦਾ ਹੈ ਬਾਕੀ ਓਹਨਾ ਦੀ ਨਸਲ ਅਤੇ ਗਰੋਥ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ, ਜੇਕਰ ਸਹੀ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਸੂਰ ਪਾਲਣ ਦਾ ਕੰੰਮ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਕੇ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਕਾਮਯਾਬੀ ਮਿਲ ਸਕਦੀ ਹੈ ਜੀ ਬਾਕੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨ ਲਈ ਪਹਿਲਾਂ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਸਫਲ ਸੂਰ ਪਾਲਕ ਦੇ ਫਾਰਮ ਤੇ ਖੁਦ ਜਾ ਕੇ ਬਾਕੀ ਸ਼ੈਡ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਫਾਰਮ ਤੇ ਜਾ ਕੇ ਖੁਦ ਸਮਝਨਾ ਪੈਣਾ ਕਿਉਕੀ .... (Read More)
ਸੰਦੀਪ ਜੀ ਤੁਹਾਡਾ 5 ਸੂਰੀਆ ਰੱਖਣ ਵਿਚ ਲਗਭਗ 5-6 ਲੱਖ ਤਕ ਖਰਚ ਆ ਸਕਦਾ ਹੈ ਬਾਕੀ ਓਹਨਾ ਦੀ ਨਸਲ ਅਤੇ ਗਰੋਥ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ, ਜੇਕਰ ਸਹੀ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਸੂਰ ਪਾਲਣ ਦਾ ਕੰੰਮ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਕੇ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਕਾਮਯਾਬੀ ਮਿਲ ਸਕਦੀ ਹੈ ਜੀ ਬਾਕੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨ ਲਈ ਪਹਿਲਾਂ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਸਫਲ ਸੂਰ ਪਾਲਕ ਦੇ ਫਾਰਮ ਤੇ ਖੁਦ ਜਾ ਕੇ ਬਾਕੀ ਸ਼ੈਡ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਫਾਰਮ ਤੇ ਜਾ ਕੇ ਖੁਦ ਸਮਝਨਾ ਪੈਣਾ ਕਿਉਕੀ ਇਹ ਅਲੱਗ ਅਲੱਗ ਜਗਾਂ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸੈਟ ਕਰਨਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਸਫ਼ਲ ਸੂ੍ਰ ਪਾਲਕਾ ਦੇ ਤਜ਼ਰਬੇ ਅਨੁਸਾਰ ਇੱਕ ਸੂਰੀ ਇੱਕ ਸਾਲ ਵਿੱਚ ਦੋ ਵਾਰ ਬੱਚੇ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਪਹਿਲੇ ਸੂਏ 6-7 ਬੱਚੇ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਤੇ ਦੂਜੇ ਸੂਏ 10-14 ਬੱਚੇ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਸੂਰ ਮੀਟ ਲਈ ਤਿਆਰ ਕਰ ਰਹੇ ਹੋਂ ਤਾਂ ਇੱਕ ਸੂਰ 7-8 ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਲੱਗਭੱਗ 1 ਕੁਇੰਟਲ ਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤੇ ਉਸ ਤੋਂ 100 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕਿਲੋ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਿਕ ਜਾਂਦਾਂ ਹੈ ਤੇ ਗੱਭਣ ਸੂਰੀ 150-200 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕਿਲੋ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵੇਚੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਸੂਰਾਂ ਦੀ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਦੀ ਵੀ ਕੋਈ ਦਿੱਕਤ ਨਹੀ ਕਿੳਂਕੀ ਵਪਾਰੀ ਖੁਦ ਫਾਰਮ ਤੋਂਂ ਆ ਕੇ ਸੂਰ ਲੈ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਮਂੱਨ ਲਵੋ ਅੱਜ ਸੂਰੀ ਗੱਭਣ ਕਰਵਾਈ ਉਸ ਤੋਂ 115 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਬੱਚੇ ਦੇ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਫਿਰ 1 ਮਹੀਨਾ ਬੱਚਿਆਂ ਨੂੰ ਦੁੱਧ ਪਿਆਉਣਾ ਹੈ ਤੇ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਉਨਾਂ ਨੂੰ ਅਲੱਗ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਦੋੰ ਸੂਰੀ ਤੋਂਂ ਬੱਚੇ ਵੱਖ ਕੀਤੇ ਫਿਰ 5-7 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਫਿਰ ਦੁਬਾਰਾ ਗੱਬਣ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸੂਰੀ ਇਸ ਤਰਾਂ ਇਹ ਦੁਬਾਰਾ ਫਿਰ ਸਰਕਲ ਚੱਲਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ ਇਥੇ ਗੱਲ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣ ਵਾਲੀ ਹੈ ਕਿ ਇਹ ਸਰਕਲ ਤਾਂ ਹੀ ਸਹੀ ਚੱਲੇਗਾ ਜੇਕਰ ਫੀਡ ਸਹੀ ਪਾਉਦੇ ਰਹਾਂਗੇ ਜੇਕਰ ਆਪਾਂ ਫੀਡ ਸਹੀ ਨਾ ਪਾਈ ਤੇ 2 ਮਹੀਂਨੇ ਤੱਕ ਦੁੱਧ ਪਿਆਉਦੇ ਰਹੇ ਤੇ ਬੱਚਿਆਂ ਨੂੰ ਵੱਖ ਨਾ ਕੀਤਾ ਤਾਂ ਸਰਕਲ ਖਰਾਬ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ ਸੋ ਫੀਡ ਤੇ ਖਰਚਾ ਤਾਂ ਜਿਆਦਾ ਆਉਦਾ ਹੈ ਤੇ ਮੁਨਾਫਾ ਵੀ ਪੂਰਾ ਮਿਲ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪੰਜ ਗੱਭਣ ਸੂਰੀਆ 10-11 ਮਹੀਨਿਆ ਬਾਅਦ ਪਹਿਲੀ ਇਨਕਮ ਆਉਸੀ ਹੈ ਤੇ ਲੱਗਭੱਗ ਇੱਕ ਸੂਰੀ 3500 ਰੁਪਏ ਮਹੀਨੇ ਦੀ ਇਨਕਮ ਆਉਦੀ ਹੈ ਇਸ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਅੰਦਾਜ਼ਾ ਲਾ ਸਕਦੇ ਸਬਸਿਡੀ - ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸੂਰ ਪਾਲਣ ਤੇ 2 ਲੱਖ ਦੀ ਸਬਸਿਡੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਕੁੱਲ ਪ੍ਰੋਜੇਕਟ 8 ਲੱਖ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਉਸ ਵਿੱਚੋ 2 ਲੱਖ ਸਬਸਿਡੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੇ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਕਰਨਾ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ 2-2.50 ਲੱਖ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਵਾਰ ਛੋਟੇ ਲੈਵਲ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਕਰਵਾਉਣ ਲਈ ਸਰਕਾਰੀ ਸੂਰ ਫਾਰਮ ਬਣੇ ਹਨ ਜਿਵੇ ਮੱਲੋਵਾਲ, ਖਰੜ, ਨਾਭਾ , ਗੁਰਦਾਸਪੁਰ ਵਿੱਚ ਜਿੱਥੇ 5 ਦਿਨ ਦੀ ਮੁਫਤ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ..
Posted by कृष्ण गोपाल चौधरी
Uttar Pradesh
08-08-2019 10:11 PM
कृष्ण गोपाल जी आप इसके पत्तों के नीचे मच्छर का हमला चैक करें अगर मौजूद है तो आप imidacloprid @1.5 ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Naveen khatri
Uttarakhand
08-08-2019 10:04 PM
नवीन जी यदि आप ट्रेनिंग लेकर इस काम को शुरू करते है तो आपको इनकी बीमारियां, देखभाल, खुराक की पूरी जानकारी मिलेगी जिससे आपको इस काम में कोई समस्या नहीं आएगी

Posted by virender sharma
Rajasthan
08-08-2019 09:55 PM
कृपया इसकी फोटो भेजें और यह बताएं कि धान अभी कितने दिन का है, उस हिसाब से आपको दवाई बताई जा सके
Posted by मनजीत
Haryana
08-08-2019 09:52 PM
इस बीमारी की रोकथाम के लिए रोधक किस्मों का प्रयोग करें इस बीमारी की रोकथाम के लिए इंडोफिल एम 45 या कप्तान 260 ग्राम को 100 लीटर पानी में डालकर प्रति एकड़ पर छिड़काव करें जरूरत पड़ने पर 15 दिनों के फासले पर दुबारा स्प्रे करें
Posted by sonje shravan uttam
Maharashtra
08-08-2019 09:50 PM
श्रवण जी कृपया बताएं कि मक्का में कोनसा कीट है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Ranjit singh
Punjab
08-08-2019 09:48 PM
ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਤਾਰਾਮੀਰਾ ਦਾ ਤੇਲ ਰੋਜਾਨਾ 20 ਦਿਨ ਦਿਉ ਅਤੇ ਤੁਸੀ taktic 2ml/1liter ਸਪਰੇ ਵੀ ਵਰਤੋਂ, ਇਹ ਤੁਸੀ ਸਪਰੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੇ ਉਪਰ ਅਤੇ ਆਸ ਪਾਸ ਵੀ ਕਰੋ..

Posted by lovepreet singh
Punjab
08-08-2019 09:44 PM
ਉਸ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Albendazole bolus ਦਿਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Ovumin gold ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਅਤੇ Min21 bolus ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆ ਜਾਵੇਗੀ. ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਕੋਈ ਹੋਰ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈਣੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ ਉਹ ਵਾਰ ਵਾਰ ਰਪੀਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਦੁਬਾਰਾ ਸਵਾਲ ਪੁੱਛ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by sukhwinder singh
Punjab
08-08-2019 09:42 PM
tusi feed teyar karan lai 25 kg makki, 20 kg kanak, 5-6 kg soeyabeen khal te thoda mineral mixture mix karke morning te evening nu feed murgiya nu pao. ehna nu rajvi feed deyo jinni eh kha sakan
Posted by deepak tomar
Uttar Pradesh
08-08-2019 09:42 PM
दीपक जी उसे आप Amoxikind-CV bolus 1—1 गोली सुबह शाम और उसकी नाभी पर Povide स्प्रे करनी शुरू करें यह tineta animal health कंपनी का प्रोडक्ट है इससे फर्क पड़ जाएगा
Posted by mangilal gurjar
Rajasthan
08-08-2019 09:39 PM
जब पौधे 1 से 3 वर्ष के हो जाएं तो इसमें 10 से 25 किलोग्राम देसी रूड़ी की खाद, 155 से 200 ग्राम यूरिया, 500 से 1600 ग्राम सिंगल सुपर फासफेट और 100 से 400 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति पौधे के हिसाब से डालनी चाहिए
Posted by Deepak kumar
Haryana
08-08-2019 09:35 PM
धान के लिए फंगसनाशी — इसमें फंगस के कारण धब्बे बन जाते हैं इस पर Thiophanate methyl@300gm या carbendazim@400gm या M-45@400gm या Upl की saaf@400gm को 150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ पर स्प्रे करें यह धब्बा रोग ठीक हो जायेगा इसके अलावा इन्हें युरिया में मिलाकर भी छींटा दे सकते हैं इससे जड़ की फंगस कंटरोल हो जायेगी
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