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Posted by anil Pratap Singh
Uttar Pradesh
15-08-2019 10:42 AM
Punjab
08-16-2019 04:11 PM
तुलसी - (ऑसीमम सैक्टम) एक शाकीय तथा औषधीय पौधा है इनमें ऑसीमम सैक्टम को प्रधान या पवित्र तुलसी माना गया जाता है, इसकी भी दो प्रधान प्रजातियाँ हैं- श्री तुलसी जिसकी पत्तियाँ हरी होती हैं तथा कृष्णा तुलसी जिसकी पत्तियाँ निलाभ-कुछ बैंगनी रंग लिए होती हैं इसके अतिरिक्त ऐलोपैथी, होमियोपैथी और यूनानी दवाओं में भ.... (Read More)
तुलसी - (ऑसीमम सैक्टम) एक शाकीय तथा औषधीय पौधा है इनमें ऑसीमम सैक्टम को प्रधान या पवित्र तुलसी माना गया जाता है, इसकी भी दो प्रधान प्रजातियाँ हैं- श्री तुलसी जिसकी पत्तियाँ हरी होती हैं तथा कृष्णा तुलसी जिसकी पत्तियाँ निलाभ-कुछ बैंगनी रंग लिए होती हैं इसके अतिरिक्त ऐलोपैथी, होमियोपैथी और यूनानी दवाओं में भी तुलसी का किसी न किसी रूप में प्रयोग किया जाता है तुलसी ऐसी औषधि है जो ज्यादातर बीमारियों में काम आती है इसका उपयोग सर्दी-जुकाम, खॉसी, दंत रोग और श्वास सम्बंधी रोग के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है तुलसी की पत्तियों में एक चमकीला पीला वाष्पशील तेल पाया जाता है जो कीड़े और बैक्टीरिया के खिलाफ उपयोगी होता है काली तुलसी की खेती (Black Tulsi farming in hindi) हेतु यह सूरज की रोशनी में बहुत अधिक पनपता है तुलसी स्वाभाविक रूप से समुद्र तल से 2000 मीटर की ऊचाँई तक पाई जाती है यह प्रारंभिक स्थिति में अच्छी तरह नहीं बढ़ती है और इसे धूप की आवश्यकता होती है इसे अच्छी तरह से सूखी मिट्टी की आवश्यकता होती है पौधे को विशेष रूप से घर के अंदर गर्म मिट्टी में रखने पर तेजी से बढ़ता है यह पौधा नम मिट्टी में स्वाभाविक रूप से बढ़ता है इसकी बुबाई वर्षा आधारित क्षेत्रों में बारिश के मौसम में और सिंचित क्षेत्रों अक्टूबर – नवंबर माह में की जाती है सिंचित क्षेत्रों में 6 से 10 से.मी. लंबे अंकुरित पौधो को जुलाई या अक्टूबर – नवंबर माह में खेतों में लगाया जाता है अंकुरित पौधो को कतार में 40 से.मी. की दूरी पर लगाया जाता है रोपण के तुंरत बाद खेत की सिंचाई की जाती है गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग किया जाता है बीज नर्सरी में बोये जाते है एक हेक्टेयर भूमि के लिए लगभग 20-30 कि.ग्रा. बीजों की आवश्यकता होती है बुवाई के बाद FYM और मिट्टी के मिश्रण की पतली परत को बीजों के ऊपर फैलाया जाता है स्पिंक्लर द्दारा सिंचाई की जाती है बीज अंकुरण के लिए 8-12 दिन का समय लेते है और लगभग 6 सप्ताह के बाद पौधे रोपण के लिए तैयार हो जाते है काली तुलसी हेतु रोपण के बाद विशेष रूप से मानसून के अंत के बाद खेत की सिंचाई की जाती है दूसरी सिंचाई के बाद पौधे अच्छी तरह जम जाते है अंतराल को भरने और कमजोर पौधो को अलग करने का यह सही समय होता है ताकि खेत में एक समान पौधे रहें गार्मियो में 3-4 बार सिंचाई की आवश्यकता होती है जबकि शेष अवधि के दौरान आवश्यकता के अनुसार सिंचाई की जाती है लगभग 20-25 बार सिंचाई देना पर्याप्त होता है
Posted by Harmeet
Punjab
15-08-2019 10:36 AM
Punjab
08-15-2019 03:47 PM
Deputy director Pashu Palan naal sampatk karo Verka milk plant sahmne daftar ae
Posted by ਹਰਮਨਜੀਤ ਸਿੰਘ ਢਿੱਲੋਂ
Punjab
15-08-2019 10:36 AM
Punjab
08-15-2019 10:42 AM
tuci iss nu lactomood homeopathic dwai dia 10-10 drops din vich 3 varr deo ate Anabolite liquid 100ml rojana, Milkout powder 2-2 chamch swere sham ate Lactin bolus 1-1 goli swere sham deo, baki iss nu kanak da dalia de skde ho ..
Posted by preet
Punjab
15-08-2019 10:34 AM
Punjab
08-15-2019 09:52 PM
tuci uss nu banminth forte bolus 1 goli deo ate 3 dina badd fir 1 goli deo baki uss nu Ciprofloxacin-TZ bolus 1-1 swere sham 3 din deo, iss nal frak paa jawega.
Posted by praveen Kumar Choudhary
Rajasthan
15-08-2019 10:27 AM
Punjab
08-21-2019 08:44 PM
praveen ji iski roktham ke liye aap quinalphos@4ml ko prati liter pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by joginder
Punjab
15-08-2019 10:22 AM

?

Punjab
08-15-2019 10:26 AM
devmedia
Posted by gurjit singh
Punjab
15-08-2019 10:08 AM
Punjab
08-16-2019 06:03 PM
gurjit ji cha de lai tuc pippal, amb, drek, bheda, jaman di bijai kar sakde ho.dhanwad
Posted by Mudit Pratap Singh
Uttar Pradesh
15-08-2019 10:06 AM
Rajasthan
08-16-2019 04:16 PM
आप निम्बू की किसम जैसे Kagzi: यह बड़े क्षेत्र में उगाई जाने वाली नींबू की आम किस्म है इसके वृक्ष ज्यादा घनत्व वाले, छोटे पत्ते और फैलने वाले होते हैं फल छोटे गोल और पतली त्वचा वाले होते हैं इसका रस स्वाद में बहुत तेज़ाबी होता है यह किस्म मध्य अगस्त में पक जाती है Dhaulakuan Seedless: यह देरी से पकने वाली किस्म है किस्म से इसमे.... (Read More)
आप निम्बू की किसम जैसे Kagzi: यह बड़े क्षेत्र में उगाई जाने वाली नींबू की आम किस्म है इसके वृक्ष ज्यादा घनत्व वाले, छोटे पत्ते और फैलने वाले होते हैं फल छोटे गोल और पतली त्वचा वाले होते हैं इसका रस स्वाद में बहुत तेज़ाबी होता है यह किस्म मध्य अगस्त में पक जाती है Dhaulakuan Seedless: यह देरी से पकने वाली किस्म है किस्म से इसमें 20-25 प्रतिशत मात्रा रस की होती है यह किस्म आचार और जूस बनाने के लिए उपयुक्त है
Posted by kulwinder singh
Punjab
15-08-2019 09:57 AM
Punjab
08-15-2019 03:50 PM
50 g mineral mix rozaana deo 1 kg feed roj pao Swer shaam tarran vakho Arhamdi na dekho
Posted by hansdeep singh
Punjab
15-08-2019 09:42 AM

ਫਾਰਮ ਵਿੱਚੋਂ ਬੇਲੋੜੇ ਬੂਟਿਆਂ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਰਸਤਿਆਂ ਤੇ ਖਾਲ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਉਗੇ ਨਦੀਨ ਮਾਰਨ ਲਈ 500 ਮਿ.ਲਿ. ਗਰੈਮੈਕਸੋਨ 24 ਐਸ ਐਲ (ਪੈਰਾਕੁਆਟ ਡਾਇਕਲੋਰਾਈਡ) ਜਾਂ 700 ਮਿ.ਲਿ. ਰਾਊਂਡਅਪ / ਗੈਨਕੀ 41 ਐਸ ਐਲ (ਗਲਾਈਫੋਸੇਟ) ਜਾਂ 400 ਗ੍ਰਾਮ ਐਕਸਲ ਮੈਰਾ 71 ਐਸ ਜੀ (ਗਲਾਈਫੋਸੇਟ) ਨੂੰ 100 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰੋ। ਪਾਰਥੀਨੀਅਮ/ਗਾਜਰ ਬੂਟੀ /ਕਾਂਗਰਸ ਬੂਟੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ : ਇਹ ਨਦੀਨ ਅਣ-ਵਾਹੀਆ ਜ਼ਮੀਨਾਂ, ਬਾਗਾਂ ਅਤੇ ਹੋਰ ਦਰੱਖਤਾਂ ਵਾਲੀਆਂ ਥਾਵਾਂ ਤੇ ਬੜੀ ਸਮੱਸਿਆ ਬਣਦਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਇਹ ਨਦੀਨ ਕਈ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਅਲਰਜੀ, ਸਾਹ ਅਤੇ ਚਮੜੀ ਦੇ ਰੋਗ ਵੀ ਉਤਪੰਨ ਕਰਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਨੂੰ ਵਾਰ-ਵਾਰ ਕੱਟ ਕੇ ਜਾਂ ਜੜ੍ਹੋਂ ਪੁੱਟ ਕੇ ਇਸ ਦਾ ਨਾਸ਼ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜਾਂ 70 ਗ੍ਰਾਮ ਤੋਂ 1 ਕਿੱਲੋ ਐਟਰਾਟਾਫ 50 ਡਬਲਯੂ ਪੀ (ਅੇੈਟਰਾਜ਼ੀਨ) 100 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਗਾਜਰ ਬੂਟੀ ਉੱਗਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਕਰਨ ਨਾਲ ਇਸ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ। ਐਟਰਾਟਾਫ ਦਾ ਛਿੜਕਾਅ 1 ਤੋਂ 2 ਪੱਤਿਆਂ ਦੀ ਹਾਲਤ ਵਿੱਚ ਵੀ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਜੇਕਰ ਨਦੀਨ ਦੇ 3 ਤੋਂ 4 ਪੱਤੇ ਜਾਂ ਜਿਆਦਾ ਹੋਣ ਤਾਂ ਇਸ ਨਦੀਨ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ 700 ਮਿ.ਲਿ. ਤੋਂ 1 ਲਿਟਰ ਰਾਊਂਡ-ਅੱਪ 41 ਐੱਸ ਐੱਲ (ਗਲਾਈਫੋਸੇਟ) ਜਾਂ 400 ਗ੍ਰਾਮ ਐਕਸਲ ਮੈਰਾ 71 ਐਸ ਜੀ (ਗਲਾਈਫੋਸੇਟ) ਨੂੰ 100 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰੋ। ( ੲਇਹੋ ਸਲਾਹਾ ਪੰਜਾਬ ਨੂੰ ਬਰਬਾਦ ਕਰ ਰਹਿਆ ਨੇ।ਲੋਕਾ ਨੂੰ ਹੱਥਾਂ ਨਾਲ ਕੰਮ ਕਰਨ ਦੀ ਸਲਾਹ ਦੇਣ ਦੀ ਬਜਾਏ। ਤੁਸੀਂ ੳੁਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਜੀਵਨ ਵਿਚ ਜਿਹਰ ਘੋਲ ਰਹੇ ਹੋ। ਇਹਨਾਂ ਜੀਹਰਾ ਨੇ ਪੰਜਾਬ ਚ ਮਧੂਮੱਖੀ ਪਾਲਣ ਧੰਦਾ ਬਰਬਾਦ ਕਰ ਦਿੱਤਾ।

Punjab
02-26-2020 04:48 PM
hasandeep ji feedback den layi dhanwad sadi team is gal da poora dhyan rakhegi.
Posted by Dhaneshnayak Dhaneshnayak
Chattisgarh
15-08-2019 09:07 AM
Punjab
08-15-2019 10:35 AM
Posted by DINESH KUNDU BUTANA
Haryana
15-08-2019 09:04 AM
Punjab
08-15-2019 10:36 AM
Posted by ranjit singh
Punjab
15-08-2019 08:50 AM
Punjab
08-21-2019 08:43 PM
ਝੋਨੇ ਦੇ ਵਧੀਆ ਫੁਟਾਰੇ ਦੇ ਲਈ ਹੁਣ ਤੁਸੀ ਯੂਰੀਆ ਨਾਲ biovita @8 ਕਿਲੋ ਜਾ ਫਿਰ tata ਦੀ ralli gold @4 ਕਿਲੋ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿਚ ਇਸਦਾ ਛਿੱਟਾ ਦਵੋ ਉਸ ਨਾਲ ਤੁਹਾਡਾ ਝੋਨਾ ਵਧੀਆ ਫੋਟ ਮਾਰ ਲਵੇ ਗਾ ਜੀ I ਝੋਨੇ ਵਿਚ ਫੋਟ ਸੁੰਡੀ ਦੇ ਕਾਰਨ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਸੁੰਡੀ ਦਾ ਲਗਾਤਾਰ ਸਰਵੇਖਣ ਕਰਦੇ ਰਹੋ ਜੇਕਰ ਮੌਜੂਦ ਹੈ ਤਾ fame @20ml ਜਾ coragen @60ml ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Gurpreet Singh
Punjab
15-08-2019 08:48 AM
Punjab
08-16-2019 10:17 PM
Gurpreet ji rauni da mela 13 september nu hai ji ..
Posted by jasraj
Rajasthan
15-08-2019 08:30 AM
Punjab
08-15-2019 10:38 AM
Posted by Ak singh
Uttar Pradesh
15-08-2019 08:28 AM
Punjab
08-15-2019 10:39 AM
Posted by Sukhwinder Singh
Punjab
15-08-2019 08:23 AM
Punjab
08-21-2019 08:40 PM
ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਵਿਚ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰਨ ਲਈ ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਹਫ਼ਤੇ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਬੀਜ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਅਖੀਰਲੇ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਹਫਤੇ ਤੱਕ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਕਤਾਰ ਤੋਂ ਕਤਾਰ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 30 ਸੈ:ਮੀ: ਅਤੇ ਪੌਦੇ ਤੋਂ ਪੌਦੇ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 15 ਸੈ:ਮੀ: ਰੱਖੋ ਬੀਜ ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ 3 ਸੈ:ਮੀ: ਤੋਂ ਜਿਆਦਾ ਨਹੀ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਪੋਰਾ ਢੰਗ ਵਰਤਿਆ .... (Read More)
ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਵਿਚ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰਨ ਲਈ ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਹਫ਼ਤੇ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਬੀਜ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਅਖੀਰਲੇ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਹਫਤੇ ਤੱਕ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਕਤਾਰ ਤੋਂ ਕਤਾਰ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 30 ਸੈ:ਮੀ: ਅਤੇ ਪੌਦੇ ਤੋਂ ਪੌਦੇ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 15 ਸੈ:ਮੀ: ਰੱਖੋ ਬੀਜ ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ 3 ਸੈ:ਮੀ: ਤੋਂ ਜਿਆਦਾ ਨਹੀ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਪੋਰਾ ਢੰਗ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ
Posted by Karan Riar Karan Riar
Punjab
15-08-2019 08:17 AM
Punjab
08-15-2019 12:37 PM
Posted by jasraj
Rajasthan
15-08-2019 08:14 AM
Punjab
08-15-2019 10:43 AM
Posted by jagdeep Singh jattana
Punjab
15-08-2019 07:59 AM
Punjab
08-15-2019 09:33 AM
tuci isde jldi ilag lai uss nu Biotrim injction 3ml lgwao ya tuci Enrofloxacin injection 3ml lgwa skde ho, baki tuci broton liquid 10-10ml dena suru kro.
Posted by महेन्द्र सिंह इन्दा
Rajasthan
15-08-2019 07:52 AM
Punjab
08-18-2019 10:14 AM
अदरक भारत की एक अहम मसाले वाली फसल है यह फसल अच्छे जल निकास वाली चिकनी, रेतली और लाल हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है खेत में पानी ना खड़ा होने दें क्योंकि खड़े पानी में यह ज्यादा देर बच नहीं पाएगी फसल की वृद्धि के लिए 6-6.5 पी एच वाली मिट्टी अच्छी मानी जाती है उस खेत में अदरक की फसल ना उगाएं जहां पिछली बार अदरक की.... (Read More)
अदरक भारत की एक अहम मसाले वाली फसल है यह फसल अच्छे जल निकास वाली चिकनी, रेतली और लाल हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है खेत में पानी ना खड़ा होने दें क्योंकि खड़े पानी में यह ज्यादा देर बच नहीं पाएगी फसल की वृद्धि के लिए 6-6.5 पी एच वाली मिट्टी अच्छी मानी जाती है उस खेत में अदरक की फसल ना उगाएं जहां पिछली बार अदरक की फसल उगाई गई हो हर साल एक ही ज़मीन पर अदरक की फसल ना लगाएं प्रसिद्ध किस्में :-Himgiri, IISR Varanda, IISR Mahima,Suprabha, Suruchi, IISR Rejatha खेत को दो तीन बार जोतें और सुहागे से समतल करें अदरक की बिजाई के लिए आवश्यक लंबाई के 15 सैं.मी. ऊंचे और 1 मीटर चौड़े बैड तैयार करें दो बैडों के बीच 50 सैं.मी. का फासला रखें नदीनों कीटों और बीमारियों की जांच के लिए बैड की मिट्टी को धूप लगवायें इसके लिए बैड को पॉलीथीन शीट से 20-30 दिनों के लिए ढकें रोपाई के समय नीम केक 25 ग्राम को प्रति गड्ढे में डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए राइज़ोम की बिजाई मई के पहले सप्ताह में पूरी कर लें राइज़ोम को कतारों में बोयें और कतार में 40-45 सैं.मी. और दो पौधों में 30 सैं.मी. फासला रखें राइज़ोम की रोपाई के बाद खेत में 50 क्विंटल हरे पत्तों की मलचिंग प्रति एकड़ में करें दूसरी मलचिंग 20 क्विंटल हरे पत्तों के साथ 40 दिनों के बाद करें बीज की गहराई 3-4 सैं.मी. के करीब होनी चाहिए अदरक की बिजाई सीधे ढंग से और पनीरी लगाकर की जा सकती है बिजाई के लिए ताजे और बीमारी रहित गांठों का प्रयोग करें बिजाई के लिए 5-6.5 क्विंटल प्रति एकड़ बीज का प्रयोग करें बिजाई से पहले गांठों को मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी से उपचार करें गांठों को 30 मिनट के लिए घोल में भिगो दें इससे गांठों को फफूंदी से बचाया जा सकता है उपचार के बाद गांठों को 3-4 घंटें के लिए छांव में सुखाएं खेत की तैयारी के समय 60 क्विंटल रूड़ी की खाद प्रति एकड़ मिट्टी में डालें नाइट्रोजन 24 किलो (52 किलो यूरिया), फासफोरस 20 किलो (125 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 20 किलो (35 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें रूड़ी की खाद या गाय का गोबर 60 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की दूसरी मात्रा 20 किलो (45 किलो यूरिया) बिजाई के 45 दिनों के बाद, जबकि बिजाई के 120 दिनों के बाद नाइट्रोजन की तीसरी मात्रा 16 किलो (यूरिया 35 किलो) डालें रोपाई के बाद पहली सिंचाई करें इसे बारानी फसल के तौर पर उगाया जाता है इसलिए बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर सिंचाई करें बारिश की अनुपस्थिति में, बाकी की सिंचाई 10 दिनों के अंतराल पर करें अदरक की पूरी फसल को कुल 16-18 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बिजाई के 3 दिन बाद एट्राज़िन 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की नमी वाली मिट्टी पर स्प्रे करें उन नदीनों को खत्म करने के लिए जो पहली नदीन नाशक स्प्रे के बाद पैदा होते हैं, बिजाई के 12-15 दिनों के बाद गलाइफोसेट 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें नदीन नाशक की स्प्रे करने के बाद खेत को हरी खाद से या धान की पराली से ढक दें जड़ों के विकास के लिए जड़ों में मिट्टी लगाएं बिजाई के 50-60 दिनों के बाद पहली बार जड़ों में मिट्टी लगाएं और उसके 40 दिन बाद दोबारा मिट्टी लगाएं
Posted by darasingh
Haryana
15-08-2019 07:51 AM
Punjab
08-16-2019 06:07 PM
दारा जी कृपया बताये के आपने इसमें क्या क्या खाद डाली है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by rajwinder singh
Punjab
15-08-2019 07:43 AM
Punjab
08-15-2019 10:44 AM
Posted by charanvir singh
Punjab
15-08-2019 07:37 AM
Punjab
08-15-2019 09:36 AM
hnji isda vdia result hai, iss nal pashu nu vitamin, mineral milde hai, ehh pashu de sarir di kami puri krda hai ate pregnancy nu v safe rkhda hai tuci isdi varto kr skde ho.
Posted by Bhola singh
Punjab
15-08-2019 07:22 AM
Punjab
08-15-2019 09:37 AM
Nili ravi katti len lai tusi Jai Singh 7973302035 ja fir Bhadur Singh 9463817201(Nili Ravi Dairy Farm) nal samparak kar sakde ho. Thankyou.
Posted by ARJUN CHOUDHURY
Madhya Pradesh
15-08-2019 07:05 AM
Maharashtra
08-21-2019 08:06 PM
खेत को नदीन मुक्त करने के लिए, दो बार गोडाई की आवश्यकता होती है, पहली गोडाई बिजाई के 20 दिन बाद और दूसरी गोडाई बिजाई के 40 दिन बाद करें रासायनिक तरीके से नदीनों को रोकने के लिए, बिजाई के बाद, दो दिनो में, पैंडीमैथालीन 800 मि.ली. को 100-200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें
Posted by davinder brar
Punjab
15-08-2019 06:59 AM
Punjab
08-15-2019 10:17 AM
Hnji sat sri akal ji, veer ji ajehi gal nai ji te na hi fukri aayi a te na hi pair shade hai, user ta aje hor v vadange te service v puri devage ji eh gal da vaada karde ha ji. Baki gal answer di os te sadi team pura kamm kar rahi hai ji je jaldi hi sare answer mileya v karange ji. Kai var answer late hon de hor v bohat sare reasion hunde hun Tusi sade helpline number 9779977641 te contact karke apni smaseya share karo apa detail nal gal karde ha ji.tohade saath te bharose di jarurat hai ji. DHANWAD
Posted by Neeraj Rathi
Uttar Pradesh
15-08-2019 06:44 AM
Punjab
08-15-2019 10:47 AM
Posted by Jaspal Singh Cheema
Punjab
15-08-2019 06:43 AM
Punjab
08-21-2019 08:05 PM
ਜਸਪਾਲ ਜੀ ਇਸਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਹਮਲਾ ਹੋਏ ਫਲਾਂ ਨੂੰ ਤੋੜ ਕੇ ਜਮੀਨ ਵਿਚ ਦੱਬ ਦਿਓ ਅਤੇ ਅਮਰੂਦ ਦੇ ਬਾਗ਼ ਵਿਚ ਕਿੰਨੂੰ ਦੇ ਬੂਟੇ ਲਾਓ ਜਿਸਦੇ ਨਾਲ ਇਸਦੇ ਉਪਰ ਮੱਖੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਘੱਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by om patel
Bihar
15-08-2019 06:40 AM
Punjab
08-15-2019 10:19 AM
सूर पालन का काम भी ट्रेनिंग से बिना न शुरू करें, शुरू करने से पहले आप किसी सफल सुअर पालक के फार्म पर खुद जाकर बाकी शैड बनाने के लिए फार्म पर जाकर खुद समझना पड़ेगा क्योंकि यह अलग अलग जगह के हिसाब से सैट करना पड़ता है सफल सुअर पाल के तजुर्बे के अनुसार एक सुअरी एक वर्ष में 2—2.5 बार बच्चे देती है पहले ब्यांत में 6—7 बच.... (Read More)
सूर पालन का काम भी ट्रेनिंग से बिना न शुरू करें, शुरू करने से पहले आप किसी सफल सुअर पालक के फार्म पर खुद जाकर बाकी शैड बनाने के लिए फार्म पर जाकर खुद समझना पड़ेगा क्योंकि यह अलग अलग जगह के हिसाब से सैट करना पड़ता है सफल सुअर पाल के तजुर्बे के अनुसार एक सुअरी एक वर्ष में 2—2.5 बार बच्चे देती है पहले ब्यांत में 6—7 बच्चे देती है और दूसरे ब्यांत में 10—14 बच्चे देती है यदि आप सुअर मीट के लिए तैयार कर रहे हैं तो एक सुअर 7—8 महीनों में लगभग 1 क्विंटल का हो जाता है और उससे 100 रूपये प्रति किलो के हिसाब से बिमक जाता है और गाभिन सुअरी 150—200 रूपये प्रति किलो के हिसाब से बेची जाती है सुअरों की मार्किटिंग की भी कोई दिक्कत नहीं हैक्योंकि व्यापारी खुद फार्म से आकर सुअर ले जाते हैं उसके बाद फीड सही खिलाकर उन्हें आगे बेच देना बाकी लोन के लिए ट्रेनिंग स्र्टीफिकेट तो जरूरी है ही पर सिर्फ स्र्टीफिकेट ही नहीं और भी कागज़ों की जरूरत पड़ेगी क्योंकि यह सारा कुछ बैंकों पर निर्भर करता है कि बैंक को लोन पास करने के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए यह अलग अलग बैंकों के अनुसार कम ज्यादा हो सकता है क्योंकि कोई बैंक कैसे वैरीफिकेशन करता है कोई कैसे पांच सुअरी गाभिन 10—11 महीनों के बाद पहली इनकम आती है और लगभग एक सुअरी 3500 रूपये महीने की इनकम आती है,इस तरह आप सुअर पालन का काम शुरू कर सकते है.