
Posted by ved Kumar
Chattisgarh
19-08-2019 11:11 AM
ved kumar ji kripya aap iski saaf photo bheje aapke dwara bheji gayi photo blurr hai .dhanywad
Posted by yashpal kandhol
Haryana
19-08-2019 11:00 AM
Yashpal ji apke sabhi swalo ke jwab diya gye hai aap app mai apne swalo ke jwab dekkh skte hai dhnawad.

Posted by manbhinder Singh
Punjab
19-08-2019 10:47 AM
ਤੁਸੀ ਡਾ.ਦਲਾਲ ਘੋਲ ਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਡਾ.ਦਲਾਲ ਘੋਲ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਦਾ ਫਾਰਮੂਲਾ
• 2.5 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ, 2.5 ਕਿਲੋ ਡੀ.ਏ.ਪੀ ਅਤੇ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਜ਼ਿੰਕ (21% ਵਾਲ਼ੀ) ਲਓ
• ਡੀ.ਏ.ਪੀ. ਨੂੰ ਛਿੜਕਾਅ ਤੋਂ ਇੱਕ ਦਿਨ ਪਹਿਲਾਂ ਪਲਾਸਟਿਕ ਜਾਂ ਮਿੱਟੀ ਦੇ ਭਾਂਡੇ ਵਿੱਚ ਭਿਓਂ ਕੇ ਰੱਖ ਦਿਓ ਅਤੇ ਦਿਨ ਵਿੱਚ 2-3 ਵਾਰ ਇਸ ਨੂੰ ਡੰਡੇ ਨਾਲ ਹਿਲਾਉਂਦੇ ਰਹੋ ਇਸ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨਾਲ ਡੀ.ਏ.ਪੀ. ਖਾਦ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ ਪੋਸ਼ਕ ਤ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਡਾ.ਦਲਾਲ ਘੋਲ ਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਡਾ.ਦਲਾਲ ਘੋਲ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਦਾ ਫਾਰਮੂਲਾ
• 2.5 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ, 2.5 ਕਿਲੋ ਡੀ.ਏ.ਪੀ ਅਤੇ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਜ਼ਿੰਕ (21% ਵਾਲ਼ੀ) ਲਓ
• ਡੀ.ਏ.ਪੀ. ਨੂੰ ਛਿੜਕਾਅ ਤੋਂ ਇੱਕ ਦਿਨ ਪਹਿਲਾਂ ਪਲਾਸਟਿਕ ਜਾਂ ਮਿੱਟੀ ਦੇ ਭਾਂਡੇ ਵਿੱਚ ਭਿਓਂ ਕੇ ਰੱਖ ਦਿਓ ਅਤੇ ਦਿਨ ਵਿੱਚ 2-3 ਵਾਰ ਇਸ ਨੂੰ ਡੰਡੇ ਨਾਲ ਹਿਲਾਉਂਦੇ ਰਹੋ ਇਸ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਨਾਲ ਡੀ.ਏ.ਪੀ. ਖਾਦ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮਿਲ ਜਾਣਗੇ
• ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਛਿੜਕਾਅ ਵੇਲੇ ਯੂਰੀਆ ਅਤੇ ਜ਼ਿੰਕ ਨੂੰ ਵੀ ਅਲੱਗ-ਅਲੱਗ ਪਲਾਸਟਿਕ ਜਾਂ ਮਿੱਟੀ ਦੇ ਭਾਂਡਿਆਂ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਲਓ ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 100 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਘੋਲ ਕੇ ਫਸਲ ‘ਤੇ ਛਿੜਕੋ ਜਾਂ ਫਿਰ ਇੱਕ ਪੈਮਾਨਾ ਤਿਆਰ ਲਓ ਅਤੇ ਹਰ ਟੈਂਕੀ ਵਿੱਚ ਉਸ ਪੈਮਾਨੇ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਘੋਲੀ ਹੋਈ ਖਾਦ ਪਾਉਂਦੇ ਰਹੋ ਅਤੇ ਬਾਕੀ ਪਾਣੀ ਮਿਲਾ ਲਓ
• ਇਸ ਗੱਲ ਦਾ ਖਾਸ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਕਿ ਇਹ ਘੋਲ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ ਕਿਸੇ ਧਾਤੂ ਦੇ ਬਰਤਨ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਨਾ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ ਅਤੇ ਇਸ ਘੋਲ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਸਿਰਫ 100 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਹੀ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇ, ਨਾ ਘੱਟ ਨਾ ਜ਼ਿਆਦਾ
• ਫਸਲ ‘ਤੇ ਘੋਲ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਸਾਧਾਰਣ ਰੱਖੋ ਪੌਦੇ ‘ਤੇ ਇੱਕੋ ਜਗ੍ਹਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਘੋਲ ਦਾ ਛਿੜਕਾਅ ਨਾ ਕਰੋ ਇਸ ਨਾਲ ਪੌਦੇ ਦੇ ਪੱਤਿਆਂ ਨੂੰ ਨੁਕਸਾਨ ਪਹੁੰਚ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇਸ ਸਪਰੇਅ ਨਾਲ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਭਰਪੂਰ ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤ ਮਿਲ ਜਾਣਗੇ

Posted by ram
Punjab
19-08-2019 10:45 AM
Ram ji punjab vich chicks len lai tusi Dalwinder Singh 9041009671 Papu Hatchery Farm nal samparak kar sakde ho. Thank you.

Posted by ansar khan badpani
Madhya Pradesh
19-08-2019 10:45 AM
यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा जल जमाव और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए उचित नह.... (Read More)
यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा जल जमाव और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए उचित नहीं होती Kufri Bahar: इस किस्म के पौधे लंबे और तने मोटे होते हैं तनों की संख्या 4-5 प्रति पौधा होती है इसके आलू बड़े, सफेद रंग के, गोलाकार से अंडाकार होते हैं और इसका गुद्दा सफेद रंग का होता है यह किस्म 100-110 दिनों में पक जाती है और इसकी औसतन पैदावार 125 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसे ज्यादा देर तक स्टोर करके रखा जा सकता है यह पिछेती और अगेती झुलस रोग और पत्ता मरोड़ रोग की रोधक है Kufri Badshah: इसके पौधे लंबे और 4-5 तने प्रति पौधा होते हैं इसके आलू बड़े से दरमियाने, गोलाकार और हल्के सफेद रंग के होते हैं इसके आलू स्वाद होते हैं यह किस्म 100-110 दिनों में पक जाती है यह किस्म कोहरे को सहनेयोग्य है और पिछेती, अगेती झुलस रोग की प्रतिरोधक है Kufri Sutlaj: इस किस्म के पौधे घने और मोटे तने वाले होते हैं पत्ते हल्के हरे रंग के होते हैं आलू बड़े आकार के, गोलाकार और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह किस्म 90-100 दिनों में पकती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म खाने के लिए अच्छी और स्वादिष्ट होती है इन आलुओं को पकाना आसान होता है यह नए उत्पाद बनाने के लिए उचित किस्म नहीं है Kufri Anand: यह मध्यम समय की किस्म है, जो कि पिछेते झुलस रोग और कोहरे के प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 140-160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kufri Pukhraj: इसके पौधे लंबे और तने संख्या में कम और दरमियाने मोटे होते हैं आलू सफेद, बड़े, गोलाकार और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह किस्म 70-90 दिनों में पकती है इसकी औसतन पैदावार 130 क्विंटल प्रति एकड़ है यह अगेती झुलस रोग की रोधक किस्म है और नए उत्पाद बनाने के लिए उचित नहीं है Kufri Chipsona 2: इस किस्म के पौधे दरमियाने कद के और कम तनों वाले होते हैं इसके पत्ते गहरे हरे और फूल सफेद रंग के होते हैं आलू सफेद, दरमियाने आकार के, गोलाकार, अंडाकार और नर्म होते हैं इसकी औसतन पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह पिछेती झुलस रोग की रोधक किस्म है यह किस्म चिपस और फरैंच फ्राइज़ बनाने के लिए उचित है खेत को एक बार 30 सैं.मी. गहरा जोतकर अच्छे ढंग से बैड बनाएं जोताई के बाद 2-3 बार तवियां फेरें और फिर 2-3 बार सुहागा फेरें बिजाई से पहले खेत में नमी की मात्रा बनाकर रखें बिजाई के लिए दो ढंग मुख्य तौर पर प्रयोग किए जाते हैं 1. मेंड़ और खालियों वाला ढंग 2. समतल बैडों वाला ढंग अगेती बिजाई के लिए, सितंबर के आखिरी सप्ताह से अक्तूबर का पहला सप्ताह खेती के लिए उपयुक्त होता है मुख्य फसल के लिए अक्तूबर का दूसरे से चौथा सप्ताह बिजाई के लिए उपयुक्त समय होता हैरोपाई के लिए बड़ी आकार की गांठों का प्रयोग किया जाता है बिजाई के लिए 13-15 क्विंटल बीज प्रयोग किए जाते हैं यदि संभव हो, तो आलू की रोपाई से पहले, हरी खाद वाली फसलें जैसे सनई, जंतर आदि फसलें उगायें और उन्हें मिट्टी में अच्छी तरह दबायें यदि हरी खाद उपलब्ध ना हो तो गली सड़ी रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ में खेत की तैयारी के समय रोपाई से दो सप्ताह पहले डालें फसल की उचित वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 40-50 किलो (90-110 किलो यूरिया), फासफोरस 24-32 किलो (150-200 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 40-50 किलो (66-85 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में डालें बिजाई के समय नाइट्रोजन का 3/4 हिस्सा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बचा हुआ नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा बिजाई से 35-40 दिन बाद जड़ों में मिट्टी लगाने के समय डालें जड़ों के साथ मिट्टी लगाना : मिट्टी में सही हवा, पानी और तापमान बनाए रखने के लिए यह काम बहुत जरूरी है ताकि फसल का विकास अच्छा हो सके आलुओं के अच्छे विकास के लिए पौधे की जड़ों के साथ मिट्टी लगाएं मिट्टी को अच्छी तरह से पौधे के आधार पर डाला जाता है जिससे गांठे अच्छे से बनने में मदद मिलती है यह काम पौधों के 15-20 सैं.मी. कद होने पर करें यदि जरूरत पड़े तो पहली बार मिट्टी लगाने के दो सप्ताह बाद दूसरी बार फिर मिट्टी लगाएं यह काम कही से हाथों के द्वारा या बड़े क्षेत्रों में मोल्ड बोर्ड या रिज़र की सहायता से किया जा सकता है पानी में घुलनशील खादें : मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:00:45, 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:00 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे पौधे की वृद्धि के समय करें
Posted by Narender jaat
Haryana
19-08-2019 10:40 AM
यदि बिजाई के 80-100 दिनों के बाद फसल को फूल ना निकलें या फूल कम हों तो फूलों की पैदावार बढ़ाने के लिए ज्यादा सूक्ष्म तत्व खाद 750 ग्राम प्रति एकड़ प्रति 150 लीटर पानी की स्प्रे करें बी.टी किस्मों की पैदावार बढ़ाने के लिए बिजाई के 85, 95 और 105 दिनों के बाद 13:0:45 के अनुसार 10 ग्राम या पोटाश 5 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे शाम के सम.... (Read More)
यदि बिजाई के 80-100 दिनों के बाद फसल को फूल ना निकलें या फूल कम हों तो फूलों की पैदावार बढ़ाने के लिए ज्यादा सूक्ष्म तत्व खाद 750 ग्राम प्रति एकड़ प्रति 150 लीटर पानी की स्प्रे करें बी.टी किस्मों की पैदावार बढ़ाने के लिए बिजाई के 85, 95 और 105 दिनों के बाद 13:0:45 के अनुसार 10 ग्राम या पोटाश 5 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे शाम के समय करें अधिक पैदावार प्राप्त करने के लिए पोटाश्यिम 10 ग्राम प्रति लीटर और डी.ए.पी. 20 ग्राम प्रति लीटर (पहले फूल खिलने के प्रत्येक 15 दिनों के फासले पर 2-3 स्प्रे) की स्प्रे करें कई बार वर्गाकार लार्वा गिरता है और इससे फूल झड़ने शुरू हो जाते हैं, इसकी रोकथाम के लिए पलैनोफिक्स (एन ए ए) 4 मि.ली. और ज्यादा सूक्ष्म तत्व 120 ग्राम, मैगनीश्यिम सल्फेट 150 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी की स्प्रे करें यदि खराब मौसम के कारण टिंडे झड़ते दिखाई दें तो इसकी रोकथाम के लिए 100 ग्राम 00:52:34+30 मि.ली. हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत से कम)+6 मि.मी. स्टिकर को 15 लीटर पानी में मिलाकर 10 दिनों के फासले पर तीन स्प्रे करें आज कल पत्तों में लाली बहुत ज्यादा दिख रही है, इसका मुख्य कारण पौष्टिक तत्वों की कमी है इसे खादों के सही उपयोग से ठीक किया जा सकता है इस तरह करने के लिए 1 किलो मैगनीश्यिम सल्फेट की पत्तियों पर स्प्रे करें और इसके बाद यूरिया 2 किलो को 100 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें

Posted by vijay
Haryana
19-08-2019 10:32 AM
सफ़ेद मूसली की खेती के लिए 15-35°C तापमान की जरुरत होती है इसकी खेती कई तरह की मिट्टी जैसे कि दोमट से रेतली और बढ़िया निकास वाली में की जा सकती है यह पहाड़ी ढलानों वाली या गीली मिट्टी को भी सहर सकती है यह जैविक तत्वों से भरपूर लाल मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है जल-जमाव वाली स्थिति में इसकी खेती ना करें इस लिए मिट्ट.... (Read More)
सफ़ेद मूसली की खेती के लिए 15-35°C तापमान की जरुरत होती है इसकी खेती कई तरह की मिट्टी जैसे कि दोमट से रेतली और बढ़िया निकास वाली में की जा सकती है यह पहाड़ी ढलानों वाली या गीली मिट्टी को भी सहर सकती है यह जैविक तत्वों से भरपूर लाल मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है जल-जमाव वाली स्थिति में इसकी खेती ना करें इस लिए मिट्टी का pH 6.5-8.5 होना चाहिए आप इसकी किस्मे जैसे RC-2, RC-16, RC-36, RC-20, RC-23, RC-37 and CT-1,MDB-13 and MDB-14 की बिजाई कर सकते है सफेद मूसली के लिए अच्छी तरह से तैयार बैडों की जरूरत होती है बिजाई से पहले ज़मीन की तैयारी के लिए एक बार 2-3 गहरी जोताई करें ज़मीन की तैयारी आम-तौर पर अप्रैल-मई के महीने में की जाती है सफेद मूसली की बिजाई के लिए उचित समय जून से अगस्त तक का होता है पौधे के विकास के अनुसार पौधों के बीच 10x12 इंच का फासला रखें इसकी बिजाई नए पौधे मुख्य खेत में रोपाई करके की जाती है इसकी बिजाइसके प्रजनन के लिए आम-तौर पर गांठों या बीजों का प्रयोग करें इसके उचित विकास के लिए 450 किलो बीजों का प्रयोग करें ई नए पौधे मुख्य खेत में रोपाई करके की जाती है सफेद मूसली की बिजाई 1.2 मीटर चौड़े और आवश्यकता अनुसार लम्बे बैडों पर करें नए पौधे तैयार करने वाले बैड अच्छी तरह से तैयार करें इसकी बिजाई छिड़काव के द्वारा की जाती है बिजाई के बाद बैडों को हल्की मिट्टी से ढक दें बढ़िया विकास के लिए मलचिंग भी की जा सकती है बीज 5-6 दिनों में अंकुरण होना शुरू होना कर देते है और पौधे बिजाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई से 24 घंटे पहले बैडों को पानी दें, ताकि नए पौधों को आसानी के साथ उखाड़ा जा सके खेत की तैयारी समय, रूड़ी की खाद 80-100 क्विंटल प्रति एकड़ गोबर डालें और मिट्टी में मिलाये जैविक खादें जैसे कि रूड़ी की खाद 8-10 टन प्रति एकड़ डालर मिट्टी में मिलाये सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो, मिउरेट ऑफ़ पोटाश 50 किलो और हड्डियों का चूरा 100 किलो प्रति एकड़ डालें 3 महीने तक कसी की सहायता के साथ गोड़ाई करें और मेंड़ के साथ मिट्टी लगाएं अंकुरण के बाद 2-3 बार करें अगर पौधे के विकास में कोई कमी दिखाई दें, तो तुरंत आवश्यक स्प्रे करें बढ़िया विकास के लिए 20-22 दिनों के फासले पर सिंचाई करें बारिश की ऋतु में, सिंचाई की जरूरत नहीं होती, पर बारिश ना होने पर सिंचाई सही फासले पर करें सिंचाई जलवायु और मिट्टी पर भी निर्भर करती है इस फसल के पौधे बिजाई से लगभग 90 दिन के बाद फल देना शुरू कर देती है इसकी कटाई सितम्बर-अक्तूबर महीने में की जाती है कटाई पत्ते पीले पड़ने और सूखने पर की जाती है इसका बीज आपको लोकल मार्किट में मिल जायेगा

Posted by sheela
Rajasthan
19-08-2019 10:30 AM
Sheela ji shimla(Rampur) mandi me apple ka bhav 2000-2500/q tak chal raha hai. thank you.
Posted by kulwinder singh
Punjab
19-08-2019 10:15 AM
ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਤੇ ਲੋਨ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਹਾਡੇ ਕੋਲ ਇਸ ਕੰਮ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਹੋਣੀ ਜਰੂਰੀ ਹੈ
ਤੁਸੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਕੇ ਨਾਬਾਰਡ ਤੋਂ ਲੋਨ ਲੈਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ 25 ਤੋਂ 35 % ਤੱਕ ਸਬਸਿਡੀ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਕਰਨ ਦੀ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਵਿੱਭਾਗ ਵੱਲੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦਿਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਤੋਂ .... (Read More)
ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਤੇ ਲੋਨ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਹਾਡੇ ਕੋਲ ਇਸ ਕੰਮ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਹੋਣੀ ਜਰੂਰੀ ਹੈ
ਤੁਸੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਕੇ ਨਾਬਾਰਡ ਤੋਂ ਲੋਨ ਲੈਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ 25 ਤੋਂ 35 % ਤੱਕ ਸਬਸਿਡੀ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਕਰਨ ਦੀ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਵਿੱਭਾਗ ਵੱਲੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦਿਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਤੋਂ ਜਾਂ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਜਾਂ ਫਿਰ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਵੀ ਦਿਨ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਤੇ ਪਹੁੰਚ ਕੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਫਾਰਮ ਭਰ ਆਊ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜਦੋਂ ਵੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਆਵੇਗੀ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਵੱਲੋਂ ਕਾਲ ਕਰਕੇ ਦੱਸ ਦਿੱਤਾ ਜਾਦਾ ਹੈ ਬਹੁਤ ਵਧੀਆ ਕੰਮ ਹੈ ਜੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦਾ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਬ੍ਰਾਇਲਰ ਰੱਖਦੇ ਹੋਂ ਤਾਂ ਪੰਜ ਤੋਂ ਛੇ ਹਫਤਿਆਂ ਦੇ ਅੰਦਰ ਅੰਦਰ ਮੰਡੀਕਰਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤਕਰੀਬਨ ਪੰਜ ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਅੰੰਡਿਆ ਦੀ ਉਪਜ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਾਰਾ ਸਾਲ ਦੀ ਆਮਦਨ ਵਾਲਾ ਕੰਮ ਹੈ ਜੀ ਜਿਆਦਾ ਮਿਹਨਤ ਵੀ ਨਹੀ ਲੱਗਦੀ ਇਹ ਨਾਜੁਕ ਕਿਸਮ ਦੇ ਜਾਨਵਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਕੁੱਝ ਕੁ ਖਤਰਨਾਕ ਬਿਮਾਰੀਆ ਵੀ ਹਨ ਜਿੰਨਾਂ ਤੋੰ ਬਚਣ ਲਈ ਖਾਸ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਹੂੰਦੀ ਹੈ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਡਿਟੇਲ ਵਿੱਚ ਦੱਸੋ ਜਾਂ ਫਿਰ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਕੋਈ ਹੋਰ ਮੁਸ਼ਕਿਲ ਹੈ ਜਾਂ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਆਪਣਾ ਸਵਾਲ ਦੁਬਾਰਾ ਪੁੱਛ ਸਕਦੇ ਹੋਂ

Posted by Vijay Kumar Yadav
Uttar Pradesh
19-08-2019 10:14 AM
बटेर पालन के लिए किसी लाइसेंस की जरुरत नहीं है जी यह मुर्गी पालन से मिलता जुलता काम ही है बटेर पालन से जुड़ी कुछ आम जानकारी आपसे शेयर कर रहे हैं 1.यह बहुत छोटा पक्षी होने के कारण इस काम को शुरू करने के लिए कम जगह की जरूरत होती है उदाहरण के तौर पर 5-6 पक्षियों के लिए 1 वर्ग फीट जगह की आवश्यकता होती है 2.खुराक की खप्त भ.... (Read More)
बटेर पालन के लिए किसी लाइसेंस की जरुरत नहीं है जी यह मुर्गी पालन से मिलता जुलता काम ही है बटेर पालन से जुड़ी कुछ आम जानकारी आपसे शेयर कर रहे हैं 1.यह बहुत छोटा पक्षी होने के कारण इस काम को शुरू करने के लिए कम जगह की जरूरत होती है उदाहरण के तौर पर 5-6 पक्षियों के लिए 1 वर्ग फीट जगह की आवश्यकता होती है 2.खुराक की खप्त भी कम होती है, सिर्फ 20-25 ग्राम प्रति पक्षी रोज़ाना 3.बटेर के अंडे और मांस में अमीनो अम्ल, विटामिन, चर्बी और धातु आदि पदार्थ उपलब्ध रहते हैं 4.बटेर पालन में, 5 सप्ताह का पक्षी मीट के लिए तैयार हो जाता है और 6-7 सप्ताह में अंडे देना शुरू कर देता है 5.मुर्गियों की बजाय बटेरों में छूत की बीमारियां कम होती हैं बीमारियों की रोकथाम के लिए मुर्गी पालन की तरह इनमें किसी प्रकार का टीका लगाने की जरूरत नहीं है 6.बटेर हर वर्ष तीन से चार पीढ़ियों को जन्म दे सकने की क्षमता रखती है 7.इसका मीट मुर्गे से काफी अधिक स्वाद और पोष्टिक होता है हेचरी में 35 से 40 दिनों में बटेरें खाने योग्य हो जाती हैं एक अंडा पांच रूपये में बिकता है जापानी बटेर और इसे पालने की सिखलाई चंडीगढ़ के केंद्रीय मुर्गी पालन संस्था (Central Poultry Development Organization (Northern Region) की तरफ से करवायी जाती है अन्य जानकारी के लिए वैबसाइट http://cpdonrchd.gov.in पर जाकर इसकी सिखलाई और ट्रेनिंग के बारे में पता कर सकते हैं

Posted by Gaganjot Singh
Punjab
19-08-2019 10:11 AM
gaganjot ji aap isme gobh ki sundi ka hamla check karen agar maujood hai to aap iske uper fame@20ml ya coragen@60ml ko 150 litre pani vich mila ke spray karo.dhanwad

Posted by Avadhnath Singh
Uttar Pradesh
19-08-2019 10:08 AM
Avadhnath ji yaddi woh bayne ke 20 dino ke badd tarr girra rehi hai to aap usko abhi gabhin naa krwayen, usko byane se 40-45 dino ke badd heat mai aane per gabhin krwa skte hai.

Posted by aman
Punjab
19-08-2019 10:05 AM
Aman ji usko aap nazdiki doctor se janch krwayen uske bhukar ki janch krwayen, uski janch krke uska sahi ilaj ho skta hai.

Posted by sanampreet
Punjab
19-08-2019 10:02 AM
Sanampreet ji tuci uss nu Enerdyna liquid 100-100ml liquid swere sham, Vitum-H liquid 10-10ml swere sham ate Glactogouge powder 1-1 pouch swere sham deo, iss nal dudh vaddh jawegi usdi kamjori door howegi ate lewa v vdia ho jawega..

Posted by khuspal
Punjab
19-08-2019 09:45 AM
ਪੂਸਾ 44: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਝਾੜ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਪਰ ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ 155 ਦਿਨ ਤੱਕ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਬਿਮਾਰੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਝਾੜ 90 ਮਣ ਤੱਕ ਚਲਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ

Posted by Navdeep
Punjab
19-08-2019 09:45 AM
tuci usde parra nu Lal dwai de ghol vich dubbo ke rakho, isde nal uss nu Sarakind plus bolus 1-1 goli swere sham deo, iss nal frak paa jawega..
Posted by ਅਮਰੀਕ ਸਿੰਘ
Punjab
19-08-2019 09:40 AM
ਇਸ ਤਰਾਂ ਨਹੀ ਪਤਾ ਚੱਲਣਾ ਜੀ ਤੁਸੀ ਬਾਰ ਕੋਡ ਸਕੈਨ ਕਰ ਲਓ ਤੇ ਬਾਕੀ ਦੁਕਾਨਦਾਰ ਤੋਂ ਪੱਕਾ ਬਿੱਲ ਜਰੂਰ ਲੈ ਲਵੋ

Posted by Iqbal Singh randhawa
Punjab
19-08-2019 09:27 AM
Iqbal ji tuci uss nu pett de kiria lai Flukarid-Ds bolus deo isde nal tuci Sharkoferol liquid 50-50ml swere sham deo, iss nal frak paa jawega..
Posted by ytendra Yadav
Uttar Pradesh
19-08-2019 09:26 AM
यादव जी कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से बताएं क्या आपकी गाय हीट में नहीं आ रही है या वो बार बार रिपीट हो रही है कृप्या इसके बारे में विस्तार से बताएं ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by Tarlochan singh
Punjab
19-08-2019 09:26 AM
Gurtej singh ji batihinda de kvk te mansa de krishi vigyan kendra vich traning di koe date aje jari nahi kiti gayi hai ji. tusi othe ja ke ana goat farming di traning layi apna name likhwa deo ji. baki pashu palan vibag patiala de rouni farm te goat farming traning 27-28 aug nu ho rahi hai ji. tusi othe ja ke admission layi pata kar sakde ho.

Posted by inderpal
Punjab
19-08-2019 09:25 AM
Inderpal ji Ai sure RG VET HEALTHCARE PVT LTD company da aunda hai tuci ehh photo dekh skde ho..
Posted by ROHIT KUMAR
Uttar Pradesh
19-08-2019 09:24 AM
Posted by amit pandey
Uttar Pradesh
19-08-2019 09:24 AM
Amit ji usko aap pett ke kiro ke liye Bendikind plus bolus den, iske sath aap Enerdyna liquid 100ml rojana, Milkout powder 2-2 chamch subah sham den aur Calcimust gold liquid 50ml rojana dena suru kren, isse frak padd jayega.
Posted by बुलेश जांगिड़
Rajasthan
19-08-2019 09:11 AM
सिट्रोनेला का यह पौधा उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय परिस्थिति में अच्छी तरह बढ़ता है सिट्रोनेला इसके अच्छे विकास के लिए प्रचुर मात्रा में धूप और नमी की आवश्यकता होती है एक उपयुक्त आर्द्र जलवायु इसके विकास के लिए आदर्श मानी जाती है बरसात यानि मानसून के शुरूआत में खेत देशी हल अथवा हैरो से 25 से 30 सेंटीमीट.... (Read More)
सिट्रोनेला का यह पौधा उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय परिस्थिति में अच्छी तरह बढ़ता है सिट्रोनेला इसके अच्छे विकास के लिए प्रचुर मात्रा में धूप और नमी की आवश्यकता होती है एक उपयुक्त आर्द्र जलवायु इसके विकास के लिए आदर्श मानी जाती है बरसात यानि मानसून के शुरूआत में खेत देशी हल अथवा हैरो से 25 से 30 सेंटीमीटर गहरी 2-3 जुताई करें हर जुताई के बाद पटेला चलाकर खेत को ढेला रहित बना लें खेत को अच्छी प्रकार भुरभूरा बनाकर खेत में मेड़ ओर लकीरे बना लें सिट्रोनेला के पौधे की रोपाई 60X90 से.मी. अंतरण पर करें यानि कतार से कतार की दूरी 60 सेंटीमीटर व पौध से पौध की दूरी 90 सेंटीमीटरगहराई – 10 सेंटीमीटर सिट्रोनेला की खेती के लिए भारी चिकनी और रेतीली मिट्रटी विकास के लिए अच्छी नहीं मानी जाती है सिट्रोनेला की खेती के लिए जिस मिट्टी का pH मान 5.8 से.मी. के बीच होता है वह मृदा सर्वोत्तम मानी जाती है फसल पानी की अधिकता के लिए अति संवेदन शील होती है इसे विभिन्न प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है परन्तु उत्तम विकास और उपज रेतीली दोमट मिट्टी से प्राप्त होती है जुलाई से सितम्बरसिट्रोनेला के पौधे की रोपाई के लिए प्रत्येक स्लिप में 1 से 3 टिलर होना चाहिए स्लिप को 50-60 से.मी की दूरी में और 10 से.मी. की गहराई में लागाया जाता है सिट्रोनेला घास की वाणिज्यिक खेती स्लिप द्दारा की जाती है सिट्रोनेला के पौधे को वर्षा न होने की स्थिति में रोपाई के 24 घंटे के भीतर ही सिंचाई की आवश्यकता होती है इसके अतिरिक्त मौसम और मिट्टी की स्थिति को देखते हुए वर्षा रहित सूखे प्रदेशो में 8-10 बार सिंचाई की आवश्यकता होती है

Posted by Lovepreet singh
Punjab
19-08-2019 09:09 AM
Hanji lovepreet ji tuci uss nu lassi pilla skde ho, jini ohh asani nal pee skdi hai uss matra vich deo ji..
Posted by charanvir singh
Punjab
19-08-2019 09:03 AM
tuci uss nu Novimix advance powder rojana 1 pouch dena suru kro ,isde nal tuci Teatasule kit deo ehh Goelvet pharma company da product hai, baki uss nu vitum-h liquid 10-10ml swere sham deo, usde ass pass saff safai da purra dian rkho ji..
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