
Posted by ਦੀਪ ਉਟਾਲ
Punjab
22-08-2019 10:01 PM
sheath blight di roktham lyi Adama company da Custodia @200 ml per acre ja Validamycin @300 ml ja Folicur @200 ml per acre da spray kr skde ho g

Posted by ਰਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
22-08-2019 09:57 PM
ਰਵਿੰਦਰ ਜੀ 130045 ਵਿਚ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਅਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ ਦੇ ਤੱਤ ਮੌਜੂਦ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇਹ ਦਾਣੇ ਬਣਨ ਦੇ ਸਮੇ ਸਪਰੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ 005234 ਵਿਚ ਫਾਸਫੋਰਸ ਅਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ ਤੱਤ ਮੌਜੂਦ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ ਪੋਟਾਸ਼ ਪਹਿਲਾਂ ਦੇ ਦਿਤੀ ਹੈ ਤਾ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਨ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Manpreet Singh
Punjab
22-08-2019 09:45 PM
ਇਸ ਸਿਸਟਮ ਵਿੱਚ ਘੱਟ ਜਗਾਂ ਤੇ ਘੱਟ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮੱਛੀ ਪਾਲੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਜੀ ਤੇ ਇਸ ਵਿੱਚ ਚਾਰ ਮੀਟਰ ਦਾ ਟੈਕ ਵਿੱਚ ਮੱਛੀ ਪਾਲੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬਾਕੀ ਅਜੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੇਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਇਸ ਤੇ ਕੰਮ ਕਰ ਰਹੀ ਹੈ ਤੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਅਜੇ ਕਿਸੇ ਕਿਸਾਨ ਨੇ ਸ਼ੁਰੂ ਨਹੀ ਕੀਤੀ ਕਿਉਕੀ ਇਸ ਦੀ ਅਜੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਕਿਤੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਵੀ ਸ਼ੁਰੂ ਨਹੀ ਹੋਈ, ਹਰਿਆਣਾ ਵਿੱਚ ਕੁੱਝ ਕਿਸਾ.... (Read More)
ਇਸ ਸਿਸਟਮ ਵਿੱਚ ਘੱਟ ਜਗਾਂ ਤੇ ਘੱਟ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮੱਛੀ ਪਾਲੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਜੀ ਤੇ ਇਸ ਵਿੱਚ ਚਾਰ ਮੀਟਰ ਦਾ ਟੈਕ ਵਿੱਚ ਮੱਛੀ ਪਾਲੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬਾਕੀ ਅਜੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੇਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਇਸ ਤੇ ਕੰਮ ਕਰ ਰਹੀ ਹੈ ਤੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਅਜੇ ਕਿਸੇ ਕਿਸਾਨ ਨੇ ਸ਼ੁਰੂ ਨਹੀ ਕੀਤੀ ਕਿਉਕੀ ਇਸ ਦੀ ਅਜੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਕਿਤੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਵੀ ਸ਼ੁਰੂ ਨਹੀ ਹੋਈ, ਹਰਿਆਣਾ ਵਿੱਚ ਕੁੱਝ ਕਿਸਾਨ ਇਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਮੱਛੀ ਪਾਲ ਰਹੇ ਹਨ ਜੀ ਬਾਕੀ ਮੈ ਇਸ ਤੇ ਜਲਦੀ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹਾਂ ਤੇ ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਵਿਭਾਗ ਨਾਲ ਇਸ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਬਾਰੇ ਵੀ ਗੱਲ ਕਰ ਰਿਹਾਂ ਹਾਂ ਜੀ , ਜਦੋਂ ਇਸ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਸ਼ੁਰੂ ਕੀਤੀ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਦੱਸ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇਗਾ ਜੀ

Posted by Manish Patidar
Madhya Pradesh
22-08-2019 09:43 PM
डॉ. दलाल घोल तैयार करने का फॉर्मूला:
• 2.5 किलो यूरिया, 2.5 किलो डी.ए.पी. और आधा किलो जिंक (21 प्रतिशत वाली) लें
• डी.ए.पी. को छिड़काव से एक दिन पहले प्लास्टिक या मिट्टी के बर्तन में भिगोकर रख दें और दिन में 2—3 बार इसे डंडे से हिलाते रहें इस प्रक्रिया से डी.ए.पी. खाद में मौजूद पोषक तत्व अच्छी तरह मिल जायेंगे
• इसके बाद छ.... (Read More)
डॉ. दलाल घोल तैयार करने का फॉर्मूला:
• 2.5 किलो यूरिया, 2.5 किलो डी.ए.पी. और आधा किलो जिंक (21 प्रतिशत वाली) लें
• डी.ए.पी. को छिड़काव से एक दिन पहले प्लास्टिक या मिट्टी के बर्तन में भिगोकर रख दें और दिन में 2—3 बार इसे डंडे से हिलाते रहें इस प्रक्रिया से डी.ए.पी. खाद में मौजूद पोषक तत्व अच्छी तरह मिल जायेंगे
• इसके बाद छिड़काव के समय यूरिया और जिंक को अलग अलग प्लास्टिक या मिट्टी के बर्तनों में पानी में घोल लें इसके बाद 100 लीटर पानी में इन्हें घोलकर फसल पर छिड़कें या फिर एक पैमाना तैयार कर लें और हर टैंकी में उस पैमाने के अनुसार घोली हुई खाद डालते रहें और बाकी पानी मिला लें
• इस बात का खास ध्यान रखें कि यह घोल तैयार करने के लिए किसी धातु के बर्तन का प्रयोग ना किया जाये और इस घोल का प्रयोग सिर्फ 100 लीटर पानी में ही किया जाये, ना कम ना ज्यादा
• फसल पर घोल की प्रक्रिया साधारण रखें पौधे पर एक ही जगह ज्यादा घोल का छिड़काव ना करें इससे पौधे के पत्तों को नुकसान पहुंच सकता है इस स्प्रे से पौधों को भरपूर पोषक तत्व मिल जायेंगे
Posted by Tinu shekhawat
Rajasthan
22-08-2019 09:37 PM
टीनू जी आप इसके ऊपर NPK 191919 एक किलो को 150 लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Manpreet Singh
Punjab
22-08-2019 09:27 PM
Manpreet ji isde vare jankari lai tuci mera nal 9466419455 sampark kr skde ho.

Posted by bablu kumar singh
Bihar
22-08-2019 09:27 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बारीकियों का पता चल जायेगा, आप ब्लैक बंगाल, बीटल, सिरोही, जमुनापरी, बरबरी नस्ल रख सकते हैं, बकरी पालन में लोन लेने के लिए सबसे जरूरी है ट्रेनिंग सर्टीफिकेट अपने नज़दीक के कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग करने के बाद ट्रेनिंग के सर्टीफिकेट पर लोन एप्लाई होता है पर लोन मिलेगा या नहीं यह बैंक मेनेजर पर निर्भर करता है क्योंकि पहली बात यह है कि बैंक देखता है कि आपके अकाउंट में कितने पैसों का लेन देन हो रहा है और आपके पास ज़मीन गारंटी के तौर पर देने के लिए है या नहीं और अन्य भी कई बातें चैक करके लोन के लिए सहमत होता है बाकी कोशिश करें कि लोन के बिना अपने स्तर पर ही काम शुरू करें क्योंकि लोन की किश्त हर महीने भरनी पड़ेगी पर बकरियों से कमाई हर महीने नहीं होने होगी बाकी यदि कोशिश करके देखनी है तो अपने ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप अपने जिले के पशु पालन विभाग अफसर को मिलें और उस पर प्रवानगी लेकर फिर बैंक से बात करके देखें, यदि आपने बकरी फार्म बनाना है तो बहुत बढ़िया सोच है आप बीटल नस्ल रखें यह दूध और मीट दोनों के लिए फायदेमंद है बाकि आप जैसे इस व्यवसायों में आएंगे उस हिसाब से आपके लिंक बनने शुरू हो जाएंगे और बाकि मार्केटिंग इस बात निर्भर है कि आपका लोगों के साथ लिंक कैसा है इसका दूध गाय के रेट के बराबर मिल जाता है और बाकि यदि फार्म हो तो बच्चे भी बेचे जाते है कुल मिलाकर यदि मोटा सा हिसाब लगाना है तो एक बकरी से लगभग 20000 तक कमाई हो जाती है बाकि यह भी सलाह है कि आप आपने नज़दीक kvk से ट्रेनिंग ज़रूर लें और सफल बकरी पालकों के फार्म ज़रूर देखें.वहां से आपको इस काम के बारे में जानकारी और इसे करने के तरीकों के बारे में भी पता लगेगा
Posted by Atinderpal singh chahal
Punjab
22-08-2019 09:26 PM
mashi farm to kini income bare pehla kuj nai keha ja sakda ji. eh bohat gallan te nirbhar kardi hai ke tusi kine area vich shuru karde ho te is tarah managment karde ho. baki 90-100 per kg de hissab nal fish sale ho jandi hai ji. marketing tohanu khud banoni pavegi ji.

Posted by Manpreet Singh
Punjab
22-08-2019 09:25 PM
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਖਰਗੋਸ਼ ਪਾਲਣ ਦਾ ਕੰਮ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਖਰਗੋਸ਼ ਪਾਲਣ ਲਈ ਤੁਸੀ 1 ਯੂਨਿਟ ਨਾਲ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਇਕ ਯੂਨਿਟ ਵਿੱਚ 3 ਮੇਲ ਤੇ 10 ਫੀਮੇਲ ਖਰਗੋਸ਼ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇੱਕ ਯੂਨਿਟ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੱਗਭੱਗ 30000 ਰੁਪਏ ਤੱਕ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਇਸ ਲਈ ਤੁਹਾਨੂੰ 30X35 ਦਾ ਸ਼ੈਡ ਬਣਾਉਣਾ ਪਵੇਗਾ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਖੁਰਾਕ ਦੀ ਗੱਲ ਕਰੀਏ ਤਾਂ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਇੱਕ ਟਾਈਮ ਫੀਡ ਅਤੇ ਇੱਕ ਟਾਈਮ ਪੱਠੇ ਖਵ.... (Read More)
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਖਰਗੋਸ਼ ਪਾਲਣ ਦਾ ਕੰਮ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਖਰਗੋਸ਼ ਪਾਲਣ ਲਈ ਤੁਸੀ 1 ਯੂਨਿਟ ਨਾਲ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਇਕ ਯੂਨਿਟ ਵਿੱਚ 3 ਮੇਲ ਤੇ 10 ਫੀਮੇਲ ਖਰਗੋਸ਼ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇੱਕ ਯੂਨਿਟ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੱਗਭੱਗ 30000 ਰੁਪਏ ਤੱਕ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਇਸ ਲਈ ਤੁਹਾਨੂੰ 30X35 ਦਾ ਸ਼ੈਡ ਬਣਾਉਣਾ ਪਵੇਗਾ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਖੁਰਾਕ ਦੀ ਗੱਲ ਕਰੀਏ ਤਾਂ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਇੱਕ ਟਾਈਮ ਫੀਡ ਅਤੇ ਇੱਕ ਟਾਈਮ ਪੱਠੇ ਖਵਾਉਣੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਲੱਗਭੱਗ 3 ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵੇਚਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤੁਸੀ ਇਸ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਲਈ ਸਾਡੀ ਪੈਰਾਡਾਈਜ਼ ਕੰਪਨੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਸਾਡਾ ਸੰਪਰਕ ਨੰਬਰ 9466419455 ਹੈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਅਤੇ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਦੀ ਸਾਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦੇਵਾਗੇ ਜੀ .

Posted by thakur vinod Singh ketheria
Uttar Pradesh
22-08-2019 09:24 PM
ठाकुर जी कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से बताएं कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है यदि आपकी गाय गाभिन नहीं हो रही है तो आप ये बताएं कि वो बार बार रिपीट हो रही है या हीट में नहीं या कोई ओर समस्या आ रही है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Aroor singh Bhullar
Punjab
22-08-2019 09:23 PM
JHONE DE VICH PATTA LAPET: jhone de vich patta lapet di roktham de lyi tata tukumi@100gm ja coragen@60ml ja fame@20ml ja lambda@200ml nu 150 ltr pani de nal mila ke spray kr skde ho. iss ton ilaava tuc padan@5-7kg ja ferterra@4kg ja regent ultra@4kg prati acre de hisaab nal shitta de skde ho. JHONE DE LYI FUNGICIDE: iss de vich fungus de kaarn dhabbe bn jande hn. iss de upper Thiophanate methyl@300gm ja carbendazim@400gm ja M-45@400gm ja Upl di saaf@400gm nu 150 ltr pani de nal mila ke prati acre te spray kro. ihh dhabba rog thik ho jawega. iss ton ilaava ihna nu urea de nal mila ke v shitta de skde ho. iss nal jda di fungus control ho jawegi.
Posted by Jagjit Hundal
Punjab
22-08-2019 09:15 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Enerdyna liquid 100-100ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ, Gog powder 30gm ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਕਾੜਾ ਬਣਾ ਕੇ ਦਿਓ ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ, 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁਲਕੰਦ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੌੰਫ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੁਕੇ ਆਵਲੇ ਤੇ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਅਜਵਾਇਨ ਉਬਾਲ ਕੇ ਠਾਰ ਕੇ 5 ਦਿਨ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ..
Posted by rabari shamal bhai
Gujarat
22-08-2019 08:55 PM
यदि बिजाई के 80-100 दिनों के बाद फसल को फूल ना निकलें या फूल कम हों तो फूलों की पैदावार बढ़ाने के लिए ज्यादा सूक्ष्म तत्व खाद 750 ग्राम प्रति एकड़ प्रति 150 लीटर पानी की स्प्रे करें बी.टी किस्मों की पैदावार बढ़ाने के लिए बिजाई के 85, 95 और 105 दिनों के बाद 13:0:45 के अनुसार 10 ग्राम या पोटाश 5 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे शाम के समय.... (Read More)
यदि बिजाई के 80-100 दिनों के बाद फसल को फूल ना निकलें या फूल कम हों तो फूलों की पैदावार बढ़ाने के लिए ज्यादा सूक्ष्म तत्व खाद 750 ग्राम प्रति एकड़ प्रति 150 लीटर पानी की स्प्रे करें बी.टी किस्मों की पैदावार बढ़ाने के लिए बिजाई के 85, 95 और 105 दिनों के बाद 13:0:45 के अनुसार 10 ग्राम या पोटाश 5 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे शाम के समय करें अधिक पैदावार प्राप्त करने के लिए पोटाश्यिम 10 ग्राम प्रति लीटर और डी.ए.पी. 20 ग्राम प्रति लीटर (पहले फूल खिलने के प्रत्येक 15 दिनों के फासले पर 2-3 स्प्रे) की स्प्रे करें कई बार वर्गाकार लार्वा गिरता है और इससे फूल झड़ने शुरू हो जाते हैं, इसकी रोकथाम के लिए पलैनोफिक्स (एन ए ए) 4 मि.ली. और ज्यादा सूक्ष्म तत्व 120 ग्राम, मैगनीश्यिम सल्फेट 150 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी की स्प्रे करें यदि खराब मौसम के कारण टिंडे झड़ते दिखाई दें तो इसकी रोकथाम के लिए 100 ग्राम 00:52:34+30 मि.ली. हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत से कम)+6 मि.मी. स्टिकर को 15 लीटर पानी में मिलाकर 10 दिनों के फासले पर तीन स्प्रे करें आज कल पत्तों में लाली बहुत ज्यादा दिख रही है, इसका मुख्य कारण पौष्टिक तत्वों की कमी है इसे खादों के सही उपयोग से ठीक किया जा सकता है इस तरह करने के लिए 1 किलो मैगनीश्यिम सल्फेट की पत्तियों पर स्प्रे करें और इसके बाद यूरिया 2 किलो को 100 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें

Posted by gurwinder singh
Punjab
22-08-2019 08:54 PM
sheath blight di roktham lyi Adama company da Custodia @200 ml per acre ja Validamycin @300 ml ja Folicur @200 ml per acre da spray kr skde ho g

Posted by kadir Ahmed mansuri
Madhya Pradesh
22-08-2019 08:53 PM
बटेर पालन के लिए किसी लाइसेंस की जरुरत नहीं है जी यह मुर्गी पालन से मिलता जुलता काम ही है बटेर पालन से जुड़ी कुछ आम जानकारी आपसे शेयर कर रहे हैं 1.यह बहुत छोटा पक्षी होने के कारण इस काम को शुरू करने के लिए कम जगह की जरूरत होती है उदाहरण के तौर पर 5-6 पक्षियों के लिए 1 वर्ग फीट जगह की आवश्यकता होती है 2.खुराक की खप्त भ.... (Read More)
बटेर पालन के लिए किसी लाइसेंस की जरुरत नहीं है जी यह मुर्गी पालन से मिलता जुलता काम ही है बटेर पालन से जुड़ी कुछ आम जानकारी आपसे शेयर कर रहे हैं 1.यह बहुत छोटा पक्षी होने के कारण इस काम को शुरू करने के लिए कम जगह की जरूरत होती है उदाहरण के तौर पर 5-6 पक्षियों के लिए 1 वर्ग फीट जगह की आवश्यकता होती है 2.खुराक की खप्त भी कम होती है, सिर्फ 20-25 ग्राम प्रति पक्षी रोज़ाना 3.बटेर के अंडे और मांस में अमीनो अम्ल, विटामिन, चर्बी और धातु आदि पदार्थ उपलब्ध रहते हैं 4.बटेर पालन में, 5 सप्ताह का पक्षी मीट के लिए तैयार हो जाता है और 6-7 सप्ताह में अंडे देना शुरू कर देता है 5.मुर्गियों की बजाय बटेरों में छूत की बीमारियां कम होती हैं बीमारियों की रोकथाम के लिए मुर्गी पालन की तरह इनमें किसी प्रकार का टीका लगाने की जरूरत नहीं है 6.बटेर हर वर्ष तीन से चार पीढ़ियों को जन्म दे सकने की क्षमता रखती है 7.इसका मीट मुर्गे से काफी अधिक स्वाद और पोष्टिक होता है हेचरी में 35 से 40 दिनों में बटेरें खाने योग्य हो जाती हैं एक अंडा पांच रूपये में बिकता है जापानी बटेर और इसे पालने की सिखलाई चंडीगढ़ के केंद्रीय मुर्गी पालन संस्था (Central Poultry Development Organization (Northern Region) की तरफ से करवायी जाती है अन्य जानकारी के लिए वैबसाइट http://cpdonrchd.gov.in पर जाकर इसकी सिखलाई और ट्रेनिंग के बारे में पता कर सकते हैं
Posted by Chaitanya Suryawanshi
Madhya Pradesh
22-08-2019 08:52 PM
चैतन्य जी अगर आप फूलों की खेती शुरू कर रहे है तो आप सबसे पहले गेंदे की खेती कर सकते है इसमें आप फ्रेंच गेंदे की किसम की बिजाई करें धन्यवाद

Posted by Jaswant Ranu
Punjab
22-08-2019 08:47 PM
Jaswant ji PAU de admission de layi april mahine vich entrance test de form niklde han jihna da test june mahine vich entrance test ho jande han. kirpa karke daso ke tuc graduation de courses de bare jankari laina chahunde ho ja post graduation de bare vich ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by Sanjeev Thakur
Himachal Pradesh
22-08-2019 08:46 PM

Posted by Simar brar
Rajasthan
22-08-2019 08:42 PM
Simar ji hanji tuc isdi varto kar sakde ho.dhanwad

Posted by harjodh
Punjab
22-08-2019 08:42 PM
ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ ਅਤੇ 1 ਕਿਲੋ ਦਲੀਆ ਚੰਗੀ ਤ੍ਰਾਹ ਰਿਨ ਕੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰੋ , ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਅੱਧਾ ਅੱਧਾ ਕਰਕੇ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਤੁਸੀ 5-7 ਦਿਨ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗਾ , ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ Anabolite liquid 100ml ਰੋਜ, Milkout ਪਾਊਡਰ ਦੇ 2-2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ, ਇਸਦਾ ਵੀ ਦੁੱਧ ਵਧਾਉਣ ਵਿਚ ਵਧਿਆ ਰਿਜਲਟ ਹੈ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਖੁਰਾਕ ਦਾ ਪੂਰਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ.

Posted by jassa
Punjab
22-08-2019 08:41 PM
ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ, 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁਲਕੰਦ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੌੰਫ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੁਕੇ ਆਵਲੇ ਤੇ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਅਜਵਾਇਨ ਉਬਾਲ ਕੇ ਠਾਰ ਕੇ 5 ਦਿਨ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਬਾਕੀ ਦਲੀਆ ਤੁਸੀ ਕਿਸੀ ਵੀ ਸਮੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਤੁਸੀ ਦਲੀਆ ਚੰਗੀ ਤ੍ਰਾਹ ਰਿਨ ਕੇ ਦਿਓ, ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਤੁਸੀ ਜਦੋ ਉਹ ਵਧਿਆ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਫੀਡ, ਚਾਰਾ ਖਾਣ ਲਗ ਜਾਵੇ ਉਦੋਂ 50 ਮਿਲੀ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤੁਸੀ Calcimust gold liquid ਜਾ Calcimust strong ਕੋਈ ਵੀ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by raghvendra Singh kushwaha
Uttar Pradesh
22-08-2019 08:40 PM

Posted by Sandeep Singh
Uttar Pradesh
22-08-2019 08:40 PM
Dear First you decide on which model you want to work.
Breeding Meat Kid nursaray
According to your decision I can try to suggest you right path.
Thank you

Posted by sandesh Dhundiraj Munje
Maharashtra
22-08-2019 08:38 PM
खुम्ब की खेती करके कई किसम मुनाफा कमा रहे है खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डींगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुछ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक हो.... (Read More)
खुम्ब की खेती करके कई किसम मुनाफा कमा रहे है खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डींगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुछ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुम्ब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तह लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तह उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तह में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तह लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
Posted by हेमन्त कुमार सेन
Rajasthan
22-08-2019 08:28 PM
app cow ko flukarid ds bollas pet k kere k lai , totavit starong bollas 10 1 daily deni 50 GM minralmix agrimin ford payo het vich Aya u gi
Posted by ritik
Uttar Pradesh
22-08-2019 08:06 PM
उसे आप Nutrich bolus 1—1 गोली सुबह शाम दें और 15 दिनों तक देते रहें इससे हीट में आ जाएगी
Posted by RAHUL KUMAR
Uttar Pradesh
22-08-2019 08:06 PM
Rahul ji kripya aap iski aur photo bheje taki aapke khet ki smasya ko jayada bariki se jancha ja sake aur aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by shravan kumar
Rajasthan
22-08-2019 07:58 PM
Shravan ji, kripya ap apna sawal visthar se puchein ke ap aam ki kis kisam ki baat kar rahe hain, taki apko iske bare mein jankari di ja sake, dhanywad

Posted by RAMESH Kumar ROY
Bihar
22-08-2019 07:57 PM
Ramesh ji aap iske uper NPK 191919@1 killo ko 150 litre pani men mila kar spray karen.dhanywad
Posted by rajkumar mourya
Uttar Pradesh
22-08-2019 07:54 PM
Rajkumar ji aap iske uper NPK 191919 @1 killo ko 150 litre pani men mila kar spray karen.dhanywad

Posted by shravan kumar
Rajasthan
22-08-2019 07:45 PM
आम की खेती कईं तरह की मिट्टी में की जा सकती है इसकी खेती के लिए घनी ज़मीन, जो 4 फुट की गहराई तक सख्त ना हो, की जरूरत होती है मिट्टी की पी एच 8.5 प्रतिशत से कम होनी चाहिए Dusheri: यह बहुत ज्यादा क्षेत्रों में उगाया जाता है इसके फल जुलाई के पहले सप्ताह में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं इस किस्म के फलों का आकार छोटे से दरमिया.... (Read More)
आम की खेती कईं तरह की मिट्टी में की जा सकती है इसकी खेती के लिए घनी ज़मीन, जो 4 फुट की गहराई तक सख्त ना हो, की जरूरत होती है मिट्टी की पी एच 8.5 प्रतिशत से कम होनी चाहिए Dusheri: यह बहुत ज्यादा क्षेत्रों में उगाया जाता है इसके फल जुलाई के पहले सप्ताह में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं इस किस्म के फलों का आकार छोटे से दरमियाना, रंग पीला, चिकना और गुठली छोटी होती है यह फल ज्यादा देर तक स्टोर किए जा सकते हैं ये फल सदाबहार लगते रहते हैं इसकी औसतन पैदावार 150 क्विंटल प्रति वृक्ष होती है Langra: इस किस्म के फलों का आकार दरमियाने से बड़ा, रंग निंबू जैसा पीला और चिकना होता है यह फल रेशे रहित और स्वाद में बढ़िया होते हैं इसके फल का छिल्का दरमियाना मोटा होता है इसके फल जुलाई के दूसरे सप्ताह में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं इसकी औसतन पैदावार 100 किलो प्रति वृक्ष होती है Chausa: यह पिछेते मौसम की किस्म है इसके फल बड़े और अंडाकार आकार के और हल्के पीले रंग के होते हैं Ambika: इसके फल मध्यम आकार के, नर्म और मजबूत छिल्का होता है इसके फल गहरे पीले रंग के होते हैं और गहरी लाल रंग की लालिमा देते हैं यह देरी से पकने वाली किस्म है और लगातार फल देती है Arunika: यह किस्म Amrapali और Vanraj किस्म से तैयार की गई है इस किस्म के फल आकर्षित हल्के लाल रंग के होते हैं पौधे अगस्त से सितंबर और फरवरी मार्च के महीने में बोये जाते हैं पौधे हमेशा शाम को ठंडे समय में बोयें फसल को तेज हवा से बचाएं कलमी किस्मों के लिए 10 मीटर x 10 मीटर फासले का प्रयोग करें और मध्यम घनता की रोपाई के लिए 5 x 5 मीटर फासले का प्रयोग करें रोपाई के लिए वर्गाकार प्रणाली का प्रयोग करें बिजाई से एक महीना पहले 1x1x1 मीटर के आकार के गड्ढे 10x10 मीटर के फासले पर खोदें गड्ढों को सूर्य की रोशनी में खुला छोड़ दें फिर इन्हें मिट्टी में 30-40 किलो रूड़ी की खाद और 1 किलो सिंगल सुपर फासफेट मिलाकर भर दें बिजाई वर्गाकार और 6 भुजाओं वाले तरीके से की जा सकती है 6 भुजाओं वाले तरीके से बिजाई करने से 15 प्रतिशत वृक्ष ज्यादा लगाए जा सकते हैं
Posted by Rajveer Singh
Punjab
22-08-2019 07:40 PM

Posted by अशोक कुमार
Rajasthan
22-08-2019 07:40 PM
इसे रोजाना आधा किलो खट्टी गलगलें खिलायें यह किन्नू की तरह होती है इसे लगातार 10 दिन खिलायें यदि लोहे की जाली को निगल लिया है तो गल कर बाहर आ जाएगी ..

Posted by Anand Gupta
Uttar Pradesh
22-08-2019 07:31 PM
मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिसमे नमी सोखने की क्षमता हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की pH 6-7 अनुकूल है आप इसकी .... (Read More)
मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिसमे नमी सोखने की क्षमता हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की pH 6-7 अनुकूल है आप इसकी किस्मे जैसे Arka Meghana,Arka Sweta,Kashi Early, Kashi Surkh की बिजाई कर सकते है खेत को तैयार करने के लिए 2-3 बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद डलियों को तोड़ें बिजाई से 15-20 दिन पहले रूड़ी की खाद 150-200 क्विंटल प्रति एकड़ डालकर मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें टमाटर और मिर्च की खेती एक ही या नज़दीक वाले खेत में ना करें, क्योंकि दोनों की बीमारियां एक जैसी होती हैं और इस कारण एंथ्राक्नोस और बैक्टीरिया वाली बीमारीयों के बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है मिर्च की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ की फसल के लिए मई-जून और गर्मियों की फसल के लिए फरवरी - मार्च का समय मिर्च की रोपाई के लिए उपयुक्त होता है खरीफ के मौसम में 60-75 सैं.मी. x 45 सैं.मी. और सिंचित क्षेत्रों में 60 x 60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में बीजों को 3-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें और फिर मिट्टी से ढक दें इसकी मुख्य खेत में रोपाई की जाती है 1 मीटर चौड़े और आवश्यकतानुसार लंबे बैड बनाएं कीटाणु रहित कोकोपिट 300 किलो, 5 किलो नीम केक को मिलाए और 1-1किलो एज़ोसपीरिलियम और फासफोबैक्टीरिया भी डालें उपचार किए हुए बीज ट्रे में एक बीज प्रति सैल बोयें बीज को कोकोपिट से ढक दें और ट्रे एक- दूसरे के साथ रखें बीज अंकुरन तक इन्हें पॉलीथीन से ढक दें नर्सरी में बीज बीजने के बाद बैडों को 400 मैश नाइलोन जाल या पतले सफेद कपड़े से ढक दें यह नए पौधों को कीड़े-मकौड़े और बीमारियों के हमले से बचाता है 6 दिनों के बाद, ट्रे में लगे नए पौधों को एक एक करके जाल की छांव के नीचे बैडों में लगाएं बीज अंकुरन तक पानी देने वाले बर्तन की मदद से पानी दें बिजाई के 18 दिन बाद 19:19:19 की 0.5 % (5 ग्राम प्रति लीटर ) की स्प्रे करें किस्मों के लिए 200 ग्राम बीज और हाइब्रिड के लिए 80-100 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (110 किलो यूरिया), फासफोरस 16 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा पनीरी खेत में लगाने के समय डालें रोपाई के बाद बाकी बची नाइट्रोजन दो बराबर हिस्सों में 30वें और 50वें दिन डालें सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 84 किलो (182 किलो यूरिया), फासफोरस 24 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 किलो) प्रति एकड़ डालें रोपाई से पहले 24 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 52 किलो), फासफोरस की पूरी मात्रा और पोटाश की आधी मात्रा प्रति एकड़ में डालें बाकी बची नाइट्रोजन को पांच भागों में बांटें और पोटाश को तीन बराबर भागों में बांटें नाइट्रोजन 12 किलो (यूरिया 26 किलो) को बिजाई के बाद 45वें, 60वें, 75वें, 95वें और 115वें दिन डालें और पोटाश 4 किलो को बिजाई के बाद 45वें, 60वें, और 75वें दिन डालें 45 दिनों तक गोडाई करें, कही की मदद से मिट्टी चढ़ाएं और खेत को नदीन मुक्त रखें यदि नदीनों की रोकथाम ना की जाये तो यह 70-90 % पैदावार कम कर देते हैं रोपाई से पहले मुख्य खेत में पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ में डालें यदि नदीनों की संख्या ज्यादा हो तो उनके अंकुरण के बाद सेन्कोर 800 मि.ली की स्प्रे प्रति एकड़ में करें नदीनों की रोकथाम के साथ मिट्टी में नमी को बनाए रखने के लिए मलचिंग एक प्रभावी तरीका है मिट्टी में नमी के आधार पर सर्दियों में 6-7 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 4-5 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए गंभीर होती है इस अवस्था पर पानी की कमी से फल गिरते हैं जिससे फलों के उत्पादन में कमी होती है विभिन्न खोजों में यह पाया गया है, कि प्रत्येक पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई से जड़ों में नमी ज्यादा होती है जिससे वे अधिक उपज देती हैं मिर्चों की तुड़ाई हरा रंग आने पर करें या फिर पकने के लिए पौधे पर ही रहने दें मिर्चों का पकने के बाद वाला रंग किस्म पर निर्भर करता है अधिक तुड़ाइयां लेने के लिए यूरिया 10 ग्राम प्रति लीटर और घुलनशील K @ 10 ग्राम प्रति लीटर पानी (1 प्रतिशत प्रत्येक का घोल) की स्प्रे 15 दिनों के फासले पर कटाई के समय करें पैकिंग के लिए मिर्चें पक्की और लाल रंग की होने पर तोड़ें सुखाने के लिए प्रयोग की जाने वाली मिर्चों की पूरी तरह पकने के बाद ही तुड़ाई करें

Posted by RAMESH Kumar ROY
Bihar
22-08-2019 07:30 PM
Ramesh ji, yeh fungus ki vajah se hota hai ap iski roktham ke liye M 45 ki spray dubara kar skate hain, iski matra 4 gram prati liter pani ke hisaab se kar sakte hain, dhanywad

Posted by sagar
Uttar Pradesh
22-08-2019 07:29 PM
Sagar ji 2 bighe ke liye 2-2.5 killo bajra ke beej ki jrurat hoti hai.dhanywad
Posted by PRAMOD KUMAR
Rajasthan
22-08-2019 07:25 PM
इस बीमारी की रोकथाम के लिए टैबुकोनाज़ोल 1 मि.ली. या ट्राइफलोकसीट्रोबिन+ टैबुकोनाज़ोल 0.6 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे बिजाई के 60वें, 90वें, और 120वें दिन बाद करें यदि बीमारी खेत में दिखे तो कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या कप्तान 500 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें या कार्बेनडाज़िम 12 प्रतिशत + मैनकोज़े.... (Read More)
इस बीमारी की रोकथाम के लिए टैबुकोनाज़ोल 1 मि.ली. या ट्राइफलोकसीट्रोबिन+ टैबुकोनाज़ोल 0.6 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे बिजाई के 60वें, 90वें, और 120वें दिन बाद करें यदि बीमारी खेत में दिखे तो कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या कप्तान 500 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें या कार्बेनडाज़िम 12 प्रतिशत + मैनकोज़ेब 63 प्रतिशत डब्लयू पी 25 ग्राम को 10 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें

Posted by Dilip Kumar
Madhya Pradesh
22-08-2019 07:21 PM
आप फंगस की रोकथाम के लिए कार्बेनडाज़िम 50 डब्लयु पी या थायोफानेट मिथाइल 70 डब्लयु पी 500 ग्राम को 150 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें
Posted by Rampooj Bhanwala
Haryana
22-08-2019 07:16 PM
aap bhains ki katdi ko 3 sall ki hone per gabhin krwa skte hai jab uska bhar 3 quintal tak ho jaye tab aap gabin krwayen aur usko heat mai lane ke liye aap mineral mixture jaise Bovimin-B powder, Minfa gold powder, Agrimin powder rojana 50gm dena suru kren, isse jaldi heat mai aa jatti hai aur iska koi nuksan nhi hai..

Posted by arjun kaushik
Madhya Pradesh
22-08-2019 06:55 PM
Arjun g ess mein soondi ka attack hai.eski roktham ke liye Bifenthrin 10% @300 ml per acre ja Coragen @60 ml per acre ja Fame @30 ml per acre ka spray kr skte ho g..

Posted by Harsh Deep Singh
Punjab
22-08-2019 06:46 PM
ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ ਰੋਜਾਨਾ 35-40 ਕਿਲੋ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿਓ, ਇਸ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Flukarid-ds ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਇਸ ਨੂੰ Enerboost ਪਾਊਡਰ 50-50gm ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ, ਫੀਡ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਓਹੀ ਦਿਓ ਜੋ ਉਹ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਖਾ ਜਾਵੇ ਅਤੇ ਹਜ਼ਮ ਕਰ ਜਾਵੇ, ਇਹਨਾਂ ਨਾਲ ਉਸਦੀ ਵਧਿਆ ਗਰੋਥ ਹੋਵੇਗੀ..
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