
Posted by sanjeev kumar
Haryana
23-08-2019 02:01 PM
sanjeev ji aap iske liye gypsum 1 quintal prati acre ke hisab se daale. iske bad aap toriya ki bijai kar sakte hai.dhanywad

Posted by अशोक कुमार
Rajasthan
23-08-2019 01:59 PM
आपने 500 ग्राम दिन में एक बार देनी है आप इसे चारे में भी दे सकते है जैसे आपका पशु खाता है उस हिसाब से दे सकते है

Posted by Vandana
Rajasthan
23-08-2019 01:55 PM
पंजाब में हर ज़िले में पशु पालन विभाग की तरफ से सभी तरह की ट्रेनिंग करवाई जाती है जी अपने ज़िले के इस विभाग से मिले और अपना नाम लिखवाये उसके बाद आपको ट्रेनिंग के समे बुला लिया जायेगा जी

Posted by Vandana
Rajasthan
23-08-2019 01:53 PM
Biofloc मछली पालन की नई तकनीक है जिसके साथ कई राज्यों में किसान मछली पालन कर रहे हैं,इसमें हम थोड़ी जगह में जहाँ सिर्फ 4 मीटर का टैंक लगता है और 1 मीटर इसकी लम्बाई होती है, इसमें हम अपना मछली पालन शुरू कर सकते हैं इसमें ज़्यादा पानी की ज़रूरत नहीं पड़ती और ना ही ज़्यादा जगह की ज़रूरत होती है, इसमें 650 -700 रूपये बिकने वाल.... (Read More)
Biofloc मछली पालन की नई तकनीक है जिसके साथ कई राज्यों में किसान मछली पालन कर रहे हैं,इसमें हम थोड़ी जगह में जहाँ सिर्फ 4 मीटर का टैंक लगता है और 1 मीटर इसकी लम्बाई होती है, इसमें हम अपना मछली पालन शुरू कर सकते हैं इसमें ज़्यादा पानी की ज़रूरत नहीं पड़ती और ना ही ज़्यादा जगह की ज़रूरत होती है, इसमें 650 -700 रूपये बिकने वाली मछलियां हैं वह हम इसमें डालते हैं और यह मछलियां 6 से 7 महीने तक बिकने योग्य हो जाती है, biofloc में हमे पानी रोटेट करने की ज़रूरत नहीं पड़ती, बिजली की जरूरत होती है, हमे केवल फीडिंग करनी है, पर अभी तक पंजाब में इसकी ट्रेनिंग नहीं दी जाती है जब भी इसकी ट्रेनिंग होगी तो आपको बता दिया जाएगा

Posted by Meena Suraj
Rajasthan
23-08-2019 01:52 PM
Suraj ji kripya aap yeh btayen ki uske thann se dhudh bilkul v nahi aa raha hai ya thoda dhudh aata hai, yaddi aata hai too kitna aata hai, kripya iske vare mai btayen tan jo apko sahi jankari di jaa skee..

Posted by kawal
Punjab
23-08-2019 01:47 PM
ਝੋਨੇ ਦੇ ਵਧੀਆ ਫੁਟਾਰੇ ਦੇ ਲਈ ਹੁਣ ਤੁਸੀ ਯੂਰੀਆ ਨਾਲ biovita @8 ਕਿਲੋ ਜਾ ਫਿਰ tata ਦੀ ralli gold @4 ਕਿਲੋ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿਚ ਇਸਦਾ ਛਿੱਟਾ ਦਵੋ ਉਸ ਨਾਲ ਤੁਹਾਡਾ ਝੋਨਾ ਵਧੀਆ ਫੋਟ ਮਾਰ ਲਵੇ ਗਾ ਜੀ I

Posted by parmaram swami
Rajasthan
23-08-2019 01:46 PM
परमाराम जी आप इसके ऊपर NPK 191919 एक किलो को 150 लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Himanshu Sharma
Uttar Pradesh
23-08-2019 01:44 PM
Himanshu Sharma ji, ap kripya apna CV info@apnikheti.com par bhej dein, dhanywad
Posted by jagdeep Singh jattana
Punjab
23-08-2019 01:42 PM
ਜਗਦੀਪ ਜੀ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨਾਲ ਜਾਣਕਾਰੀ ਸਾਂਝੀ ਕਰਨ ਲਈ ਤੁਹਾਡਾ ਬਹੁਤ ਬਹੁਤ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Dharmender Dubey
Madhya Pradesh
23-08-2019 01:36 PM
आप पशु के बीमार होने पर हमारी इसी एप में अपना सवाल डालकर डॉक्टरों से जानकारी ले सकते है आपको 24 घंटे के अंदर अंदर उसका जवाब आ जाएगा यदि आप ओर भी कोई जानकारी लेना चाहते है तो उसका भी सवाल पूछ सकते हैं

Posted by jitendra Kumar Patel
Bihar
23-08-2019 01:32 PM
जतिंदरा कुमार पटेल जी तुलसी की उपज 8—9 टन प्रति एकड़ के हिसाब से हो जाती है
Posted by Harpinder singh
Punjab
23-08-2019 01:30 PM
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਮੱਝਾ ਤੇ ਲੋਨ ਲੈਣਾ ਹੈ ਤਾਂ ਡੇਅਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲਵੋ ਉਹ ਸਹੀ ਰਹੇਗਾ ਜੀ, ਡੇਅਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲਈ ਪੰਜਾਬ ਡੇਅਰੀ ਵਿਕਾਸ ਬੋਰਡ ਵੱਲੋਂ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਸੈਂਟਰ ਬਣਾਏ ਗਏ ਹਨ, ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਪੰਜਾਬ ਡੇਅਰੀ ਡਿਵੈਲਪਮੈਂਟ ਬੋਰਡ ਦੇ ਮੁੱਖ ਦਫਤਰ ਦੇ 0172-5027285 ਨੰਬਰ ਤੇ ਕਾਲ ਕਰਕੇ ਆਪਣਾ ਏਰੀਆ ਦੱਸ ਕੇ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਟ੍ਰੈਨਿੰਗ ਸੈਂਟਰ ਦਾ ਪਤਾ ਪੁੱਛ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਦੋਂ ਤੁਹ.... (Read More)
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਮੱਝਾ ਤੇ ਲੋਨ ਲੈਣਾ ਹੈ ਤਾਂ ਡੇਅਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲਵੋ ਉਹ ਸਹੀ ਰਹੇਗਾ ਜੀ, ਡੇਅਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲਈ ਪੰਜਾਬ ਡੇਅਰੀ ਵਿਕਾਸ ਬੋਰਡ ਵੱਲੋਂ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਸੈਂਟਰ ਬਣਾਏ ਗਏ ਹਨ, ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਪੰਜਾਬ ਡੇਅਰੀ ਡਿਵੈਲਪਮੈਂਟ ਬੋਰਡ ਦੇ ਮੁੱਖ ਦਫਤਰ ਦੇ 0172-5027285 ਨੰਬਰ ਤੇ ਕਾਲ ਕਰਕੇ ਆਪਣਾ ਏਰੀਆ ਦੱਸ ਕੇ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਟ੍ਰੈਨਿੰਗ ਸੈਂਟਰ ਦਾ ਪਤਾ ਪੁੱਛ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਦੋਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਮਿਲ ਗਿਆ ਫਿਰ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂ ਪਾਲਣ ਵਿਭਾਗ ਨਾਲ ਗੱਲ ਕਰੋ ਤੇ ਲੋਨ ਲਈ ਫਾਈਲ ਤਿਆਰ ਕਰਵਾਓ, ਬਾਕੀ ਇਸ ਵੀਡੀਓ ਵਿੱਚ ਪਸ਼ੂਆਂ ਤੇ ਲੋਨ ਲੈਣ ਦਾ ਤਰੀਕਾ ਬਾਰੇ ਡਿਟੇਲ ਨਾਲ ਦੱਸਿਆ ਗਿਆ ਹੈ ਜੀ, ਤੁਸੀ ਇਹ ਵੀਡੀਓ ਦੇਖੋ ਤੇ ਜੇਕਰ ਕਿਸੇ ਗੱਲ ਦੀ ਸਮਝ ਨਹੀ ਲੱਗੀ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਦੁਬਾਰਾ ਸਵਾਲ ਪੋਸਟ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ https://youtu.be/L9dsW7iAdgw

Posted by praveen Kumar
Uttar Pradesh
23-08-2019 01:27 PM
अकरकरा की खेती :- भूमि तथा जलवायु अच्छे जल निकासवाली सभी प्रकार की भूमि तथा उष्ण जलवायु इस पौधे के लिए उत्तम होती है पोषक तत्व तथा नमी धारण की अधिक क्षमता वाली भूमि में यह पौधा अच्छा फलता है बादल छाने से या थोड़ी छायावाली जगह पर पौधे की वृद्धि अच्छी होती है भूमि की तैयारी यह प्रमुखः जड़ की खेती है इसलिए खेत की .... (Read More)
अकरकरा की खेती :- भूमि तथा जलवायु अच्छे जल निकासवाली सभी प्रकार की भूमि तथा उष्ण जलवायु इस पौधे के लिए उत्तम होती है पोषक तत्व तथा नमी धारण की अधिक क्षमता वाली भूमि में यह पौधा अच्छा फलता है बादल छाने से या थोड़ी छायावाली जगह पर पौधे की वृद्धि अच्छी होती है भूमि की तैयारी यह प्रमुखः जड़ की खेती है इसलिए खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए फिर मिटटी को भुरभुरी बना लेना चाहिए इसमें प्रति एकड़ 6॰7 टन कंपोष्ट खाद मिलानी चाहिए इसके बाद पाटा लगाकर खेत को समतल कर लेना चाहिए पौधशाला पौधे तैयार करने के लिए बीजों को पौधशाला में बोया जाता है पौधशाला हेतु जून माह में 3 ग 1 मी आकार की क्यारियां तैयार करनी चाहिए प्रति एकड़ 800 ग्राम बीज बोने के लिए पर्याप्त होते हैं उन्हें 8॰10 सेमी॰ की दूरी पर कतारबद्ध 1॰2 सेमी॰ गहरे में बोना चाहिए बीज ज्यादा नीचे नहीं बोने चाहिए क्योंकि अधिक गहराई में बीज का अंकुरण नहीं होता बीज में एझोबक्टर जीवाणु लगाने से अंकुरण जल्दी होता है तथा पौधे को ब़ने में सहायता मिलती है प्रति किलोबीज हेतु 20 ग्राम जीवाणु का प्रयोग करना चाहिए क्यारियों की फुहारे क्षरा हल्की सिंचारई प्रतिदिन करते रहना चाहिए 8॰10 दिनों में अंकुरण हो जाता है पौधे की जल्दी ब़वार के लिए 20॰22 दिन बाद 2 ग्राम यूरिया प्रति लीटर पानी के घोल का छिड़काव करना चाहिए 45॰50 दिन में पौधे रोपाई योग्य हो जाते हैं सभी पौधे एक साथ रोपारड योग्य नहीं होते केवल बड़े पौधों को ही जो 12॰15 से॰मी॰ ऊंचाई के तथा 6॰8 पत्तियों वाले होते हैं रोपाई योग्य समझना चाहिए अतः उनकी ही रोपाई करनी चाहिए दूसरी विधि बीजों को 3 गुणा ज्यादा गोबर की बारीक या छानी हुई खाद में जीवाणु लगाकर उस मिश्रण को बरमे द्वारा रोपाई करने से पौधों के रख रखाव में सहायता मिलती है तथा कटाई भी आसान होती है खेत में खरपतवार निकालने में भी आसानी रहती है बुवाई के समय पौधे से पौधे की दूरी 10॰15 सेमी॰ और कतार से कतार की दूरी 30 सेमी॰ रखनी चाहिए रोपाई एवं देखभाल अगस्त माह में अच्छी तरह तैयार खेत में कतार से कतार की दूरी 45 सेमी॰ तथा पौधे से पौधे की दूरी 15 सेमी॰ रखकर रोपाई करनी चाहिए और रोपाई के तुरंत बाद सिंचाई करनी चाहिए रोपाई के 30॰35 दिन बाद प्रति एकड़ 15 किलो नत्रजन की मात्रा 25 किलो स्फुरद तथा 10 किलो पोटाष देना चाहिए तथा अतिरिक्त नत्रजन की मात्रा 15 किलो प्रथम मात्रा के 30 दिन बाद देनी चाहिए रासायनिक बाद की जगह पर प्रति एकड़ 40 किलो नीम की खली की खाद की प्रथम मात्रा रोपाई के पूर्व तथा 20 किलो अतिरिक्त मात्रा 20॰25 दिन बाद देने से पौधे स्वस्थ तथा अच्छे बढ़ते हैं जब पौधे छोटे होते हैं यानी रोपाई के 10॰12 दिन बाद निराई करके खरपतवार निकाल देना चाहिए अकरकरा के पौधों को छाया मिलने से इनके ऊंचा बढ़ने में मदद मिलती है अतः इसे ज्वार मक्का बाजरा सूर्यमुखी अरहर इत्यादि की फसलों की कतार के बीच बोना चाहिए कटाई पौधे अंकुरण के 150॰160 दिन बाद जब फूल सूखने लगें तब सूखे फूलों को तोड़कर छाया में सुखाना चाहिए 3॰4 बाद की कटाई में फूल पूर्णतः निकाले जा सकते हैं फरवरी माह के बाद पौधों को उखाड़कर जड़ों को साफ करके काटकर छाया में सुखाना चाहिए जड़ें 8॰10 से॰मी॰ लंबाई की और 2॰3 से॰मी॰ मोटाई की हो जाती हैं बीज के हिसाब से सूखे हुए फूल अलग कर लेने चाहिए पौध संरक्षण पौधे के तनों शाखाओं तथा पतितयों पर ग्रंथि एवं रोएं होने के कारण किसी कीट का प्रकोप नहीं होता केवल रूके हुए पानी या ज्यादा दिन बारिश के होते रहनेसे पत्तियों पर सफेद दाग तथा जड़ों में सड़न दिखाई देती है इसकी रोकथाम हेतु डाइथेन जेड॰78 का तथा 10॰12 दिन के बाद बेनलेट का छिड़काव करना चाहिए उत्पादन अकरकरा की खेती से प्रति एकड़ 150॰250 किलो फूल 250॰400 किलो पंचांग तथा 80॰100 किलो जडें प्राप्त होती हैं औषधीय उपयोग रू आयुर्वेद में अकरकरा को वातनाशक पित्तनाशक तथा शोथ नष्ट करने में श्रेष्ठ माना गया है इसका पंचांग सर्दी खांसी जुकाम वायु विकार से होने वाले सिरदर्द तथा अनिद्रा अपस्मार मिरगी दांत दर्द सूजन जोड़ों का दर्द मज्जा तंतु विकार लकवा सफेद दाग मुंह का सूखना और जुबान का जड़त्व आना इत्यादि विकारों पर उपयुक्त माना गया है अकरकरा को स्तंभनकारी तथा रतिकिरया में देर तक आनंददायी माना गया है इसकी जड़ दांतों पर मलने से दातों का दर्द दूर होता है हकलाना या जुबान लड़खड़ाती हो तो फूलों का उपयोग लाभप्रद कहा गया है इसकी पत्तियों का रस श्वेत कुष्ठ पर लाभदायी है सर्दी से सिरदर्द होता हो तो इसे मुंह में दांतों के नीचे दबा रखने से शीघ्र लाभ होता है इसमें उत्तेजक गुण काफी मात्रा में होने से आयुर्वेद ने इसे कामोत्तेजक औषधीयों में प्रधान माना है

Posted by Anil Kumar
Rajasthan
23-08-2019 01:22 PM
सोनू जी आप निमाटोड की रोकथाम के लिए नीम केक का इस्तेमाल करें एक एकर में 10 क्विंटल नीम खली का इस्तेमाल किया जाता है धन्यवाद

Posted by rakesh verma
Madhya Pradesh
23-08-2019 01:20 PM
Rakesh ji aap iske liye fame@20ml ya coragen@60ml ko 150 litre pani men mila kar spray karen.dhanywad

Posted by Anil Kumar
Rajasthan
23-08-2019 01:20 PM
अमरुद सख्त किस्म की फसल है और इसकी पैदावार के लिए हर तरह की मिट्टी अनुकूल होती है, जिसमें हल्की से लेकर भारी और कम निकास वाली मिट्टी भी शामिल है इसकी पैदावार 6.5 से 7.5 पी एच वाली मिट्टी में भी की जा सकती हैपौधे लगाने के लिए 6x5 मीटर का फासला रखें यदि पौधे वर्गाकार ढंग से लगाएं हैं तो पौधों का फासला 7 मीटर रखें 81 पौधे प.... (Read More)
अमरुद सख्त किस्म की फसल है और इसकी पैदावार के लिए हर तरह की मिट्टी अनुकूल होती है, जिसमें हल्की से लेकर भारी और कम निकास वाली मिट्टी भी शामिल है इसकी पैदावार 6.5 से 7.5 पी एच वाली मिट्टी में भी की जा सकती हैपौधे लगाने के लिए 6x5 मीटर का फासला रखें यदि पौधे वर्गाकार ढंग से लगाएं हैं तो पौधों का फासला 7 मीटर रखें 81 पौधे प्रति एकड़ लगाए जाते हैं जड़ों को 25 सैं.मी. की गहराई पर बीजना चाहिए इसके पौधे बीज लगाके या कलम विधि के द्वारा तैयार किए जाते हैं सरदार किस्म के बूटों पर बीज मुरझाने की बीमारी का असर नहीं होता और इन्हें जड़ों के द्वारा पनीरी तैयार करने के लिए उपयोग किया जा सकता है इसके पूरी तरह पके हुए फलों में से बीज तैयार करके उन्हें बैड या नर्म क्यारियों में अगस्त से मार्च के महीने में बीजना चाहिए क्यारियों की लंबाई 2 मीटर और चौड़ाई 1 मीटर तक होनी चाहिए बिजाई से 6 महीने के बाद पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाती है नईं अंकुरित पनीरी की चौड़ाई 1 से 1.2 सैं.मी. और ऊंचाई 15 सैं.मी. तक हो जाने पर यह अंकुरन विधि के लिए प्रयोग करने के लिए तैयार हो जाती है मई से जून तक का समय कलम विधि के लिए अनुकूल होता है नए पौधे और ताजी कटी टहनियों या कलमें अंकुरन विधि के लिए प्रयोग की जा सकती हैं पौधों की मजबूती और सही वृद्धि के लिए कटाई और छंटाई की जरूरत होती है जितना मजबूत बूटे का तना होगा, उतनी ही पैदावार अधिक अच्छी गुणवत्ता भरपूर होगी बूटे की उपजाई क्षमता बनाए रखने के लिए फलों की पहली तुड़ाई के बाद बूटे की हल्की छंटाई करनी जरूरी है जब कि सूख चुकी और बीमारी आदि से प्रभावित टहनियों की कटाई लगातार करनी चाहिए बूटे की कटाई हमेशा नीचे से ऊपर की तरफ करनी चाहिए अमरूद के बूटे को फूल, टहनियां और तने की स्थिति के अनुसार पड़ते हैं इसलिए साल में एक बार पौधे की हल्की छंटाई करने के समय टहनियों के ऊपर वाले हिस्से को 10 सैं.मी. तक काट देना चाहिए इस तरह कटाई के बाद नईं टहनियां अकुंरन में सहायता मिलती है एक वर्ष की फसल के लिए यूरिया 200 ग्राम, एस एस पी 200 ग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश 100 ग्राम के साथ 10 किलो गाय का गोबर प्रति वृक्ष में डालें 2 वर्ष की फसल के लिए 20 किलो गाय का गोबर, यूरिया 400 ग्राम, एस एस पी 400 ग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश 200 ग्राम प्रति वृक्ष में डालें 3 वर्ष की फसल के लिए यूरिया 600 ग्राम, एस एस पी 600 ग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश 300 ग्राम प्रति वृक्ष में डालें 4 वर्ष की फसल के लिए यूरिया 800 ग्राम, एस एस पी 800 ग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश 400 ग्राम प्रति वृक्ष में डालें 5 वर्ष की फसल के लिए गाय का गोबर 50 किलो, यूरिया 1000 ग्राम, एस एस पी 1000 ग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश 500 ग्राम प्रति वृक्ष में डालें पहली सिंचाई पौधे लगाने के तुरंत बाद और दूसरी सिंचाई तीसरे दिन करें इसके बाद मौसम और मिट्टी की किस्म के हिसाब से सिंचाई की जरूरत पड़ती है अच्छे और तंदरूस्त बागों में सिंचाई की ज्यादा जरूरत नहीं होती नए लगाए पौधों को गर्मियों में सप्ताह बाद और सर्दियों के महीने में 2 से 3 बार सिंचाई की जरूरत होती है पौधे को फूल लगने के समय ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं होती क्योंकि ज्यादा सिंचाई से फूल गिरने का खतरा बढ़ जाता है अमरूद के बाग में पहले 3 से 4 वर्ष के दौरान मूली, भिंडी, बैंगन और गाजर की फसल उगाई जा सकती है इसके इलावा फलीदार फसलें जैसे चने, फलियां आदि भी उगाई जा सकती हैं फसल की अच्छी वृद्धि और उपज के लिए नदीनों का नियंत्रण आवश्यक है नदीनों की जांच के लिए ग्रामोक्सोन 6 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में मिलाकर मार्च, जुलाई और सितंबर महीने में डालें ग्लाइफोसेट 1.6 लीटर को नदीनों के अंकुरण के बाद प्रति एकड़ में डालें एक एकड़ खेत के लिए 200 लीटर पानी पर्याप्त होता है इन बूटीनाशकों को अमरूद के पौधों पर स्प्रे ना करें इनका प्रयोग सिर्फ नदीनों पर ही करें बिजाई के 2-3 साल बाद अमरूद के बूटों को फल लगने शुरू हो जाते हैं फलों के पूरी तरह पकने के बाद इनकी तुड़ाई करनी चाहिए पूरी तरह पकने के बाद फलों का रंग हरे से पीला होना शुरू हो जाता है फलों की तुड़ाई सही समय पर कर लेनी चाहिए फलों को ज्यादा पकने नहीं देना चाहिए, क्योंकि ज्यादा पकने से फलों के स्वाद और गुणवत्ता प्रभावित होती है धन्यवाद
Posted by Ravi kumar
Uttar Pradesh
23-08-2019 01:17 PM
परवल कद्दू कुल की एक पौष्टिक सब्जी है परवल की खेती के लिए गर्म एवं अधिक आर्द्रता वाली जलवायु उपयुक्त होती है ऐसे क्षेत्र जहां औसत वार्षिक वर्षा 100 से 120 सेंमी. हो तथा तापक्रम 5 डिग्री सेल्सियस से कम नहीं जाता हो, वह क्षेत्र परवल की खेती के लिए सर्वोत्तम होता है लेकिन जहां सिंचाई की सुविधा न हो, वहाँ भी परवल की खे.... (Read More)
परवल कद्दू कुल की एक पौष्टिक सब्जी है परवल की खेती के लिए गर्म एवं अधिक आर्द्रता वाली जलवायु उपयुक्त होती है ऐसे क्षेत्र जहां औसत वार्षिक वर्षा 100 से 120 सेंमी. हो तथा तापक्रम 5 डिग्री सेल्सियस से कम नहीं जाता हो, वह क्षेत्र परवल की खेती के लिए सर्वोत्तम होता है लेकिन जहां सिंचाई की सुविधा न हो, वहाँ भी परवल की खेती सफलतापूर्वक होती है बिहार की गंगा, सोन एवं गंडक दियारा क्षेत्रों में परवल की असिंचित फसल ही उगाई जाती है, फिर भी उपज अधिक प्राप्त होती है परवल भारी मिट्टी को छोड़कर सभी प्रकार की मिट्टियों में उगाया जा सकता है, परन्तु परवल की अच्छी पैदावार के लिए जल निकासयुक्त दोमट, बलुई दोमट मिट्टी जिसमें पर्याप्त मात्रा में जीवांश हो, अधिक उपयुक्त होती है यही कारण है कि परवल की खेती उत्तरप्रदेश, बिहार एवं पश्चिम बंगाल की नदियों के किनारों के दियारा क्षेत्रों में सफलतापूर्वक की जाती है परवल को हमेशा ऊँचे स्थान पर लगाना चाहिए, जहां पानी का जमाव नहीं होता हो उत्तरप्रदेश, बिहार तथा बंगाल में परवल की खेती पान के बरेजों में अंतरावर्ती फसल के रूप में करने की प्रथा अत्यंत पुरानी है, जहां के परवल के फल उच्च कोटि के गुणवत्ता वाले होते हैं मई-जून के महीनों में मिट्टी पलटने वाले हल से खेत को एकबार जुताई कर खुला छोड़ देना चाहिए ताकि हानिकारक कीड़े-मकोड़े मर जायें तथा खरपतवार सुख जायें लत्तर की रोपाई के लगभग एक महीना पहले मिट्टी में गोबर की सड़ी खाद अथवा कम्पोस्ट 200-250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से अच्छी तरह मिला देना चाहिए लत्तर रोपाई के समय खेत को 3-4 बार देशी हल से जुताई करके पाटा चलाकर मिट्टी को भुरभुरा तथा समतल बना लेना आवश्यक है डंडाली, राजेन्द्र परवल-1, राजेन्द्र परवल-2, स्वर्ण रेखा, स्वर्ण अलौकिक, निमियां, सफेदा, सोनपुरा, संतोखबा, तिरकोलबा, गुथलिया की बिजाई कर सकते है परवल उगाने की निम्नलिखित विधियां हैं:-1. बीज द्वारा 2. जड़ों की कलम द्वारा. लत्ताओं की लच्छी द्वारा रोपाई का समय भिन्न-भिन्न स्थानों पर अलग-अलग होता है मैदानी भागों में परवल की रोपनी का उचित समय मध्य जुलाई से अक्टूबर तक और दियारा क्षेत्रों में सितम्बर से अक्टूबर तक होता है परवल में अलग-अलग पौधों पर नर और मादा फूल उत्पन्न होते हैं नर पुष्पों से फल नहीं बनते हैं बल्कि वे मादा पुष्पों में परागण का कार्य करते हैं जिसमें मादा पुष्पों से फल बनना सम्भव होता है नर पुष्प बड़े और सफेद होते हैं, जबकि मादा पुष्प थोड़ा छोटा और सफेद होता है, उसके नीचे गर्भाश्य जुड़ा रहता है जो कुछ दिनों में परागण के बाद बढ़कर फल बन जाता है इसका विस्तार लताओं या बेलों द्वारा किया जाता है परवल लगाने के समय नर और मादा पौधों का अनुपात 1:19 होना अनिवार्य है उपरोक्त अनुपात नहीं रहने पर उत्पादन में काफी कमी हो जाती है खेत में कतार से कतार की दूरी 2.5 मीटर तथा पौधे से पौधे की दूरी 1.5 मीटर रखना चाहिए साथ ही थल्ले, भूमि की सतह से 6-8 सेंमी. ऊँचाई पर बनाने चाहिए एक वर्ष पुरानी लताओं से 120-150 सेंमी. लम्बे टुकड़े काटकर इस प्रकार मोड़ना चाहिए कि लच्छी की लम्बाई 30 सेंमी. हो जाये तथा 10 सेंमी. गहरे थालों में इस प्रकार लगाया जाय कि दोनों सिरे ऊपर खुले रहें रोपनी के बाद और फल लगने के समय तक 4-5 बार निकाई-गुड़ाई करनी चाहिए ताकि लताओं की शाकीय वृद्धि तेजी से हो लताओं के बढ़ जाने पर इसकी अनावश्यक वृद्धि को रोकने के लिए बार-बार लताओं को हाथ से उलटते-पलटते रहना चाहिए ऐसा करने से गांठों से जड़ें निकलकर जमीन में प्रवेश नहीं कर पाती है और फलन अधिक होता है मार्च माह के मध्य से पौधों पर फल लगना शुरू हो जाता है प्रारम्भ में फल लगने के 10-12 दिनों के बाद फल तोड़ने लायक हो जाते हैं इस प्रकार मार्च एवं अप्रैल माह में फलों की तोडनी प्रति सप्ताह एक बार तथा मई में प्रति सप्ताह दो बार अवश्य करनी चाहिए फलों की तोड़ाई मुलायम एवं हरी अवस्था में सूर्योदय से पहले करनी चाहिए इससे फल अधिक समय तक ताजे बने रहते हैं

Posted by praveen Kumar
Uttar Pradesh
23-08-2019 01:12 PM
Posted by kawrjeet singh
Punjab
23-08-2019 01:12 PM
ਲਸਣ :- ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਦੇ ਅਖੀਰਲੇ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਅਕਤੂਬਰ ਦਾ ਪਹਿਲਾ ਹਫਤਾ ਮੰਨਿਆਂ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਗਾਜ਼ਰ ਦੀਆਂ ਦੇਸੀ ਕਿਸਮਾਂ ਲਈ ਅਗਸਤ-ਸਤੰਬਰ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਹੀ ਮੰਨਿਆਂ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਯੂਰੋਪੀਅਨ ਕਿਸਮਾਂ ਲਈ ਅਕਤੂਬਰ- ਨਵੰਬਰ ਦਾ ਮਹੀਨਾ ਵਧੀਆ ਮੰਨਿਆਂ ਜਾਂਦਾ ਹੈ

Posted by Pradeep Kumar
Uttar Pradesh
23-08-2019 01:11 PM
abs का सीमन आपको vk traders वाराणसी से मिलेगा जी आप इस नंबर पर कांटेक्ट करे जी 097948 95070

Posted by Vandana
Rajasthan
23-08-2019 01:10 PM
कोटकपूरा बकरी पालन की ट्रेनिंग की अभी कोई तारीख जारी नहीं की गयी जी जब ट्रेनिंग की डेट जारी होगी आपको बता दिया जायेगा जी

Posted by praveen Kumar
Uttar Pradesh
23-08-2019 01:06 PM
अरंडी मुख्य रूप से इसके बीजों के लिए उगाया जाने वाला वार्षिक पौधा है इसके बीजों से निकाला गया तेल खाने के लिए प्रयोग नहीं होता है, पर इसका उद्योगिक स्तर पर काफी प्रयोग होता है इसके अलावा औषधीय और प्रकाश उद्देश्य से भी इसका उपयोग किया जाता है तेल निकालने के बाद बाकी बचे तेल केक को जैविक खाद के रूप में प्रयोग क.... (Read More)
अरंडी मुख्य रूप से इसके बीजों के लिए उगाया जाने वाला वार्षिक पौधा है इसके बीजों से निकाला गया तेल खाने के लिए प्रयोग नहीं होता है, पर इसका उद्योगिक स्तर पर काफी प्रयोग होता है इसके अलावा औषधीय और प्रकाश उद्देश्य से भी इसका उपयोग किया जाता है तेल निकालने के बाद बाकी बचे तेल केक को जैविक खाद के रूप में प्रयोग किया जाता है भारत अरंडी का मुख्य उत्पादक देश है और भारत में गुजरात, आंध्र प्रदेश और राजस्थान मुख्य अरंडी उत्पादक राज्य हैं व्यापारिक खेती के लिए कम उपजाऊ भूमि का प्रयोग अरंडी की खेती के लिए किया जाता है पर यह गहरी, अच्छे निकास वाली, उपजाऊ, हल्की तेजाबी रेतली दोमट मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी की पी एच 5 से 8.5 होनी चाहिए गर्मियों में खेत की तीन से चार बार गहरी जोताई करें इससे नदीनों को खत्म करने और मिट्टी में नमी रखने में मदद मिलेगी डलियों को तोड़ने के लिए जोताई के बाद तवियों से जोताई करें फिर मिट्टी के स्तर को समतल करें ताकि खेत में पानी ना खड़ा रह सके अरंडी को पूरे वर्ष उगाया जा सकता है, जहां सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो अरंडी की खेती के लिए जुलाई के दूसरे सप्ताह से लेकर अगस्त का पहला सप्ताह उपयुक्त होता है फासला किस्म और बिजाई के समय पर आधारित होता है सिंचित हालातों में 90सैं.मी.x60 सैं.मी. या 120 सैं.मी.x 60 सैं.मी.फासले का प्रयोग करें जब कि बारानी हालातों में 60 सैं.मी.x45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को ज्यादा गहराई में बोने से परहेज़ करें इन्हें 5 सैं.मी. की गहराई में बोयें इसकी बिजाई गड्ढा खोदकर की जाती है किस्म के आधार पर फसल 145-180 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है जब एक या दो फल सूखते या पीले होते दिखाई दें, तो अरंडी की गुच्छों में कटाई शुरू करें सभी गुच्छे समान समय पर नहीं पकते इसलिए दो-तीन तुड़ाइयां आवश्यक हैं तुड़ाई के बाद गुच्छों को धूप में चार से पांच दिन सुखाएं अच्छी तरह से सूखने के बाद बीजों को अलग कर लें फलों की जल्दी कटाई ना करें इससे तेल की प्रतिशतता कम हो जाती है यह बिजाई के ढंग पर आधारित होती है यदि बीजों को हल के पीछे डालना है तो ज्यादा बीजों की मात्रा 4.5 से 6 किलोग्राम प्रति एकड़ में आवश्यकता होती है यदि गड्ढा खोदकर बिजाई की जाए तो 2.5 से 3.3 किलोग्राम प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है फसल को मिट्टी से होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए बिजाई से पहले कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें अच्छी तरह से सूखे हुए फलों में से बीजों को अलग कर लें उसके बाद बीजों से अरंडी का तेल निकाल लें तेल निकालने के बाद तेल केक में 8-10 प्रतिशत अरंडी का तेल होता है तेल केक का प्रयोग खेत में जैविक खाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता है अरंडी की पूरी फसल को 17-20 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बारिश के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती शुरूआती अवस्था में नदीनों की रोकथाम बहुत महत्तवपूर्ण है बिजाई के 20वें और 50वें दिन बाद हाथों से दो बार गोडाई करें बिजाई के दूसरे और तीसरे दिन बाद पैंडीमैथालीन 1 लीटर को 250 लीटर पानी में मिलाकर डालें यह घास और चौड़े पत्तों वाले नदीनों को रोकने में सहायक होगा
Posted by ishvar Aanjna
Madhya Pradesh
23-08-2019 12:53 PM
बकरी पालन ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञानं केंद्र सकते है कृषि विज्ञानं केंद्र का पता आप नोट कर सकते हो जी Krishi Vigyan Kendra, Near Vikram Nagar Railway Station, Ujjain 456010 (M.P.)
Phone No.-0734-2526976 जी इसके इलावा हरयाणा के तारूआना गांव में भी बकरी पालन ट्रेनिंग SR Commercial Goat Farm पर 5 नवंबर से शुरू हो रही है इसके लिए आप रजिस्टर्ड करवाने के लिए 93501 46903 पर कॉल कर सकते .... (Read More)
बकरी पालन ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञानं केंद्र सकते है कृषि विज्ञानं केंद्र का पता आप नोट कर सकते हो जी Krishi Vigyan Kendra, Near Vikram Nagar Railway Station, Ujjain 456010 (M.P.)
Phone No.-0734-2526976 जी इसके इलावा हरयाणा के तारूआना गांव में भी बकरी पालन ट्रेनिंग SR Commercial Goat Farm पर 5 नवंबर से शुरू हो रही है इसके लिए आप रजिस्टर्ड करवाने के लिए 93501 46903 पर कॉल कर सकते है जी
Posted by ishvar Aanjna
Madhya Pradesh
23-08-2019 12:50 PM
बकरी पालन ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञानं केंद्र सकते है जी नज़दीकी कृषि विज्ञानं केंद्र का पता आप नोट कर सकते है जी
Krishi Vigyan Kendra, Near Vikram Nagar Railway Station, Ujjain 456010 (M.P.)
Phone No.-0734-2526976 इसके इलावा हरयाणा के तारूआना गांव में भी बकरी पालन ट्रेनिंग SR Commercial Goat Farm पर 09 सितम्बर से शुरू हो रही है इसके लिए आप रजिस्टर्ड करवाने के लिए 93501 46903 पर कॉ.... (Read More)
बकरी पालन ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञानं केंद्र सकते है जी नज़दीकी कृषि विज्ञानं केंद्र का पता आप नोट कर सकते है जी
Krishi Vigyan Kendra, Near Vikram Nagar Railway Station, Ujjain 456010 (M.P.)
Phone No.-0734-2526976 इसके इलावा हरयाणा के तारूआना गांव में भी बकरी पालन ट्रेनिंग SR Commercial Goat Farm पर 09 सितम्बर से शुरू हो रही है इसके लिए आप रजिस्टर्ड करवाने के लिए 93501 46903 पर कॉल कर सकते है जी

Posted by Pranit Hedau
Maharashtra
23-08-2019 12:45 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकते हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बारीकियों का पता चल जायेगा, आप ब्लैक बंगाल, बीटल, सिरोही, जमुनापरी, बरबरी नस्ल रख सकते हैं, बकरी पालन में लोन लेने के लिए सबसे जरूरी है ट्रेनिंग सर्टीफिकेट अपने नज़दीक के कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग करने के बाद ट्रेनिंग के सर्टीफिकेट पर लोन एप्लाई होता है पर लोन मिलेगा या नहीं यह बैंक मेनेजर पर निर्भर करता है क्योंकि पहली बात यह है कि बैंक देखता है कि आपके अकाउंट में कितने पैसों का लेन देन हो रहा है और आपके पास ज़मीन गारंटी के तौर पर देने के लिए है या नहीं और अन्य भी कई बातें चैक करके लोन के लिए सहमत होता है बाकी कोशिश करें कि लोन के बिना अपने स्तर पर ही काम शुरू करें क्योंकि लोन की किश्त हर महीने भरनी पड़ेगी पर बकरियों से कमाई हर महीने नहीं होने होगी बाकी यदि कोशिश करके देखनी है तो अपने ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप अपने जिले के पशु पालन विभाग अफसर को मिलें और उस पर प्रवानगी लेकर फिर बैंक से बात करके देखें, यदि आपने बकरी फार्म बनाना है तो बहुत बढ़िया सोच है आप बीटल नस्ल रखें यह दूध और मीट दोनों के लिए फायदेमंद है बाकि आप जैसे इस व्यवसायों में आएंगे उस हिसाब से आपके लिंक बनने शुरू हो जाएंगे और बाकि मार्केटिंग इस बात निर्भर है कि आपका लोगों के साथ लिंक कैसा है इसका दूध गाय के रेट के बराबर मिल जाता है और बाकि यदि फार्म हो तो बच्चे भी बेचे जाते है कुल मिलाकर यदि मोटा सा हिसाब लगाना है तो एक बकरी से लगभग 20000 तक कमाई हो जाती है बाकि यह भी सलाह है कि आप आपने नज़दीक kvk से ट्रेनिंग ज़रूर लें और सफल बकरी पालकों के फार्म ज़रूर देखें.वहां से आपको इस काम के बारे में जानकारी और इसे करने के तरीकों के बारे में भी पता लगेगा
Posted by jitin rajput
Uttar Pradesh
23-08-2019 12:36 PM
इसे आप Anabolite liquid 100ml रोजाना और Milkout पाउडर 2—2 चम्मच सुबह शाम और FMC पाउडर 50 ग्राम रोजाना दें इससे फर्क पड़ जाएगा
Posted by Gagan
Punjab
23-08-2019 12:35 PM
ਇਹ ਦਵਾਈ ਫੀਡ ਸਪਲੀਮੈਟ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਮੁਰਗੀਆ ਦੀ ਗਰੋਥ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੀ
Posted by ਜਗਮੋਹਨ ਸਿੰਘ ਜਟਾਣਾ
Punjab
23-08-2019 12:34 PM
ਜਗਮੋਹਨ ਜੀ ਤੁਸੀ j1006 ਕਿਸਮ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸਦੀ ਮਾਤਰਾ 3 -4 ਕਿੱਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਕਨਾਲ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by lovepreet singh
Punjab
23-08-2019 12:26 PM
lovepreet singh ji naag kallan kisaan mela 10 september nu ho reha hai ji.
Posted by amit pandey
Uttar Pradesh
23-08-2019 12:22 PM
Amit ji aap deworming sham ke sme kr skte hai jabb pashu apna chara khane ke badd khada hota hai fir usko aap roti mai deworming wali goli de skte hai aur her 3 mahine ke badd salt change krke goli jrur den..
Posted by ਕੁਲਵੀਰ ਸਿੰਘ
Punjab
23-08-2019 12:14 PM
kulveer ji picheti bijai de layi tuc PBW 658 kisam di bijai kar sakde ho.dhanwad

Posted by Harman Sidhu
Chattisgarh
23-08-2019 12:08 PM
ਮਟਰ ਦਾ ਬੀਜ ਸਤੰਬਰ ਮਹੀਨੇ ਚ ਲਾਉਨ ਲਈ ਪੈਨਸਿਲ ਮਟਰ ਦੇ ਬੀਜ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ ਪੈਨਸਿਲ ਮਟਰ ਪੰਜਾਬ ਐਗਰੀ ਯੁਨੀ ਦੀ ਪੰਜਾਬ 89 ਕਿਸਮ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ ਇਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ 20-24ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਪਹਿਲੀ ਤੁੜਾਈ 70-80ਦਿਨਾ ਵਿੱਚ ਸੂਰੁ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜ਼ਮੀਨ ਚ ਵੱਟਾ ਤੇ ਲਾ ਕੇ ਵੱਧ ਮੁਨਾਫ਼ਾ ਲਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਬੀਜ ਬੀਜਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ ਪੌਟਾਸ਼ 30ਕ ਤੇ ਡੀ ਏ ਪੀ 40ਕ ਪਾਉ
Posted by Gori Shankar
Uttar Pradesh
23-08-2019 12:02 PM
पौध को खेत में बीजने से 2-3 दिन बाद 1200 मि.ली. बूटाक्लोर 50 ई.सी. या 1200 मि.ली. थायोबैनकार्ब 50 ई.सी. या 1000 मि.ली. पैंडीमैथालीन 30 ई.सी. या 600 मि.ली. परैटीलाकलोर 50 ई.सी. प्रति एकड़ नामक बूटीनाशकों का प्रयोग करना चाहिए इनमें से किसी भी बूटी नाशक को 60 किलोग्राम मिट्टी में मिलाकर 4-5 सैं.मी. खड़े पानी में फैला दें
चौड़े पत्ते वाले नदीनो.... (Read More)
पौध को खेत में बीजने से 2-3 दिन बाद 1200 मि.ली. बूटाक्लोर 50 ई.सी. या 1200 मि.ली. थायोबैनकार्ब 50 ई.सी. या 1000 मि.ली. पैंडीमैथालीन 30 ई.सी. या 600 मि.ली. परैटीलाकलोर 50 ई.सी. प्रति एकड़ नामक बूटीनाशकों का प्रयोग करना चाहिए इनमें से किसी भी बूटी नाशक को 60 किलोग्राम मिट्टी में मिलाकर 4-5 सैं.मी. खड़े पानी में फैला दें
चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए 30 ग्राम मैटसल्फरोन 20 डब्लयू पी को प्रति एकड़ के हिसाब से 150 लीटर पानी में मिलाकर बीजने से 20-25 दिनों के बाद छिड़काव करना चाहिए छिड़काव करने से पहले खेत में रूके हुए पानी को निकाल दें और छिड़काव करने के एक दिन बाद खेत को फिर पानी दें
Posted by ਕੇਵਲਸਿੰਘ
Punjab
23-08-2019 12:01 PM
ਫ਼ਸਲ ਦੀ ਤੁੜਾਈ ਸਹੀ ਸਮੇਂ ਕਰ ਲੈਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਤੁੜਾਈ ਵਿਚ ਦੇਰੀ ਨਹੀਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਪੀੜਤ ਟਾਹਣੀਆਂ ਅਤੇ ਫ਼ਲਾਂ ਨੂੰ ਤੋੜ ਕੇ ਖੇਤ ਵਿਚੋਂ ਬਾਹਰ ਸੁੱਟ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਫ਼ਲਾਂ ਦੇ ਪੱਕਣ ਵੇਲੇ 80 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਫੈਨਵਾਲਰੇਟ ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਘੋਲ ਕੇ ਹਫ਼ਤੇ ਦੇ ਵਕਫ਼ੇ ਬਾਅਦ ਬੂਟਿਆਂ ਉਤੇ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਫੈਨਵਾਲਰੇਟ ਦੇ ਛਿੜਕਾਅ ਤੋਂ ਤੀਸਰੇ ਦਿਨ ਬਾ.... (Read More)
ਫ਼ਸਲ ਦੀ ਤੁੜਾਈ ਸਹੀ ਸਮੇਂ ਕਰ ਲੈਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਤੁੜਾਈ ਵਿਚ ਦੇਰੀ ਨਹੀਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਪੀੜਤ ਟਾਹਣੀਆਂ ਅਤੇ ਫ਼ਲਾਂ ਨੂੰ ਤੋੜ ਕੇ ਖੇਤ ਵਿਚੋਂ ਬਾਹਰ ਸੁੱਟ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਫ਼ਲਾਂ ਦੇ ਪੱਕਣ ਵੇਲੇ 80 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਫੈਨਵਾਲਰੇਟ ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਘੋਲ ਕੇ ਹਫ਼ਤੇ ਦੇ ਵਕਫ਼ੇ ਬਾਅਦ ਬੂਟਿਆਂ ਉਤੇ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਫੈਨਵਾਲਰੇਟ ਦੇ ਛਿੜਕਾਅ ਤੋਂ ਤੀਸਰੇ ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਫ਼ਲਾਂ ਦੀ ਤੁੜਾਈ ਕਰ ਲੈਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ
Posted by rajwinder singh
Punjab
23-08-2019 11:52 AM
rajwinde rji vermicompost gandoya di khaad nu kehnde han jo gandoyea dwara tyar kiti jandi hai.dhanwad

Posted by khuspal
Punjab
23-08-2019 11:52 AM
sir khuspal g dso ongrid launa , offgrid launa , dso baki 9646457187 upar call kar lena
Posted by lovepreet singh
Punjab
23-08-2019 11:50 AM
Lovepreet ji tuci ehna nu nazdiki doctor ton check krwao ji kyuki ehna di janch krke sahi ilag ho skda hai ate bimari da sahi pta lgg skda hai..
Posted by T s sandhu
Punjab
23-08-2019 11:48 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਪਦਾਨ ਪਾਉਣ ਤੋਂ 4-5 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ

Posted by devendra jaat
Madhya Pradesh
23-08-2019 11:48 AM
नरमे में जूं, तेले और थ्रिप्स है, इसकी रोकथाम के लिए prophenofos@500ml याEthion@800ml या oberon@200ml या Bayer की Admire pro@12gm या Flotis@400ml की प्रति एकड़ के हिसाब से 150 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें
Posted by harry
Punjab
23-08-2019 11:45 AM
ਕਿਸਾਨ ਮੇਲਿਆਂ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਨਾਲ ਦਿਤੀ ਫੋਟੋ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by Nirvair Singh
Punjab
23-08-2019 11:33 AM
nirvair ji javi di bijai october de dooje hafte to beeji jandi hai.

Posted by Vinay Singh
Uttar Pradesh
23-08-2019 11:31 AM
Biofloc मछली पालन की नई तकनीक है, जिसका invention Dr.YORRAM AVNIMELECH जो कि ISRAEL के है जहाँ पानी की कमी हैै उस परस्तिथि में मछली पालन कैसे किया जाये, उस तकनीक का invention किया पर फ़िलहाल भारत के कई राज्यों में किसान इस तकनीक का इस्तेमाल करके मछली पालन कर रहे हैं इसमें हम थोड़ी जगह में जहाँ सिर्फ 4 मीटर का टैंक लगता है और 1 मीटर इसकी लम्बाई होत.... (Read More)
Biofloc मछली पालन की नई तकनीक है, जिसका invention Dr.YORRAM AVNIMELECH जो कि ISRAEL के है जहाँ पानी की कमी हैै उस परस्तिथि में मछली पालन कैसे किया जाये, उस तकनीक का invention किया पर फ़िलहाल भारत के कई राज्यों में किसान इस तकनीक का इस्तेमाल करके मछली पालन कर रहे हैं इसमें हम थोड़ी जगह में जहाँ सिर्फ 4 मीटर का टैंक लगता है और 1 मीटर इसकी लम्बाई होती है मतलब की 10,000 लीटर इसमें हम अपना मछली पालन शुरू करके 1100-1300 किलो fish बना सकते हैं इसमें ज़्यादा पानी की ज़रूरत नहीं पड़ती और ना ही ज़्यादा जगह की ज़रूरत होती है, इसमें 650 -700 रूपये बिकने वाली मछलियां हैं वह हम इसमें डालते हैं और यह मछलियां 6 से 7 महीने तक बिकने योग्य हो जाती है, shrimp farming मतलब की झींगा इसका culture period -90 दिन का होता है BFT टैंक में आपको C:N ratio की सहायता से आपको बढ़िया बैक्टीरिया maintain करना होता है, और drainage की सहायता से sludge removal किया जाता है अगर आपका मैनेजमेंट एकदम सटीक रहा तो 0 % प्रतिशत पानी अदला-बदली किये बिना culture पूरा किया जा सकता है आपको उचित blower की सहायता से DO (dissolved oxygen ) maintain करने की ज़रूरत पड़ती है C:N ratio मतलब की कार्बन: नाइट्रोजन ratio अनुपात बनाएं रखना पड़ता है कार्बन जिससे की बैक्टीरिया (हेट्रोट्रॉपिक बैक्टीरिया) ठीक से काम करके नाइट्रोजन को कम कर सके क्योंकि नाइट्रोजन का एक हिस्सा जो कि non ionised Ammonia [NH3] जो मछली के लिए जानलेवा होता हैैै अधिक जानकारी के लिए 9096843382 पर फ़ोन कीजिये.
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