Posted by Mahendra pal
Rajasthan
26-08-2019 08:35 AM
महेंद्र जी कृपया आप बताये के आपने इसकी बिजाई कलम के द्वारा की है या इसे बीज के द्वारा बिजाई की है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Naharsingh Choudhary
Rajasthan
26-08-2019 08:32 AM
नाहरसिंह जी आप इसके ऊपर quinalphos @400 ml को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by ramshrisht kumar
Bihar
26-08-2019 08:29 AM
Ramshrisht kumar जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य क.... (Read More)
Ramshrisht kumar जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by ujjwal chaohan
Chattisgarh
26-08-2019 08:22 AM
झुलस रोग के कारण पत्तों के ऊपर तिरछे धब्बे जो कि अंदर से सलेटी रंग और बाहर से भूरे रंग के दिखाई देते हैं इससे फसल की बालियां गल जाती हैं और उसके दाने गिरने शुरू हो जाते हैं जिन क्षेत्रों में नाइट्रोजन का बहुत ज्यादा प्रयोग किया जाता है वहां इस बीमारी का प्रभाव ज्यादा देखने को मिलता है
इसका हमला दिखने पर ज़ि.... (Read More)
झुलस रोग के कारण पत्तों के ऊपर तिरछे धब्बे जो कि अंदर से सलेटी रंग और बाहर से भूरे रंग के दिखाई देते हैं इससे फसल की बालियां गल जाती हैं और उसके दाने गिरने शुरू हो जाते हैं जिन क्षेत्रों में नाइट्रोजन का बहुत ज्यादा प्रयोग किया जाता है वहां इस बीमारी का प्रभाव ज्यादा देखने को मिलता है
इसका हमला दिखने पर ज़िनेब 500 ग्राम को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें
Posted by Pushpendra Singh
Uttar Pradesh
26-08-2019 08:21 AM
Pushpendra ji aap iske uper NPK 191919@1 kilo ko 150 litre pani men mila kar spray karen.dhanywad

Posted by Tarlochan singh
Punjab
26-08-2019 08:20 AM
ਇਹ ਦੀ ਕੀਮਤ ਲੱਗਭੱਗ 8000 - 9,000 ਤੱਕ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ
Posted by Abhiyant Singh Thakur
Madhya Pradesh
26-08-2019 08:20 AM
sarson ka tel sirf kabaz or afaara mein dete hai jo feed tyar kartehai us mein 5-7kg sarson har quintal feed mein daal lao
Posted by Ramesh Mourya
Uttar Pradesh
26-08-2019 08:13 AM
रमेश जी कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से बताएं कि आप इस गाय के बारे में क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Ramesh Mourya
Uttar Pradesh
26-08-2019 08:12 AM
रमेश जी आप इसका बुखार नज़दीकी डॉक्टर सं जांच करवायें फिर उसके बुखार के हिसाब से इसका सही इलाज हो सकता है

Posted by Amit Kaushik
Haryana
26-08-2019 08:06 AM
धान भारत की एक महत्तवपूर्ण फसल है जो कि जोताई योग्य क्षेत्र के लगभग एक चौथाई हिस्से में उगाई जाती है और भारत की लगभग आधी आबादी इसे मुख्य भोजन के रूप में प्रयोग करती है यह उत्तर प्रदेश की मुख्य फसल है और उत्तर प्रदेश के लगभग 5.4 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है Basmati, Kalajeera, Vishnu Parag आदि धान की कुछ उच्च ग.... (Read More)
धान भारत की एक महत्तवपूर्ण फसल है जो कि जोताई योग्य क्षेत्र के लगभग एक चौथाई हिस्से में उगाई जाती है और भारत की लगभग आधी आबादी इसे मुख्य भोजन के रूप में प्रयोग करती है यह उत्तर प्रदेश की मुख्य फसल है और उत्तर प्रदेश के लगभग 5.4 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है Basmati, Kalajeera, Vishnu Parag आदि धान की कुछ उच्च गुणवत्ता वाली किस्में हैं जिनकी खेती उत्तर प्रदेश में की जाती है मिट्टी इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है प्रसिद्ध किस्में और पैदावार Jaya: यह छोटे कद की और अधिक उपज देने वाली किस्म गर्दन तोड़ के प्रतिरोधक है यह किस्म 142 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने बड़े और लंबे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 26 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Chakia 59: यह किस्म कम जल जमाव वाले हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है Govind: यह किस्म पंतनगर द्वारा विकसित की गई है यह किस्म 105 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Indrasan: यह तराई क्षेत्रों की प्रसिद्ध किस्म है Mahsud: यह किस्म निचले क्षेत्रों में बारानी स्थितियों में उगाने के लिए उपयुक्त है Majhera 3: यह लंबी किस्म सूखे को सहनेयोग्य है और ऊंचे क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Nagina 22: यह ऊंचे क्षेत्रों में बारानी हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं Narendra-1 and Narendra-2: यह किस्म 105 और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Pant Dhan 6: यह किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त है Saket 4: यह अगेते समय की किस्म है और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह यू पी की सबसे प्रसिद्ध किस्म है T9: यह देरी से बोयी जाने वाली सुगंधित किस्म है इसके दाने बेलनाकार होते हैं VL Dhan 16: यह निम्न और मध्यम क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त किस्म है VL 206: यह लंबी किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Usar 1: यह किस्म कानपुर में विकसित की गई यह क्षारीय और लवणीय मिट्टी में खेती करने के लिए उपयुक्त है बासमती किस्में Taraori Basmati: यह सिंचित क्षेत्रों में अगेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म 145-155 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Haryana Basmati no 1: यह अर्द्ध छोटे कद की किस्म है और सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Basmati 1121, Pusa Basmati 1, CSR 30, Shabnam दूसरे राज्यों की किस्में Hybrid 6201: यह सिंचित क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है यह भुरड़ रोग के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 25 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Vivek Dhan 62: यह सिंचित और पहाड़ी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं यह भुरड़ रोग के प्रतिरोधक किस्म है यह गर्दन तोड़ और कम तापमान वाले क्षेत्रों को भी सहन कर सकती है इसकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Karnataka Rice Hybrid 2: यह सिंचित और समय से बिजाई वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह पत्तों के झुलस रोग और अन्य बीमारियों को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 35 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kanak: यह दरमियाने क्षेत्रों में बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने लंबे और मोटे होते हैं यह बैक्टीरियल झुलस रोग के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Ratnagiri 1 and 2: सिंचित क्षेत्रों के लिए जबकि निचले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है ये अर्द्ध छोटे कद की किस्म हैं इनकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल और 21 क्विंटल प्रति एकड़ होती है ज़मीन की तैयारी शुष्क खेतों को अच्छा बनाने, नदीन रहित और सेहतमंद वृद्धि के लिए ग्लाफोसेट डालनी चाहिए गेहूं की कटाई के बाद ज़मीन पर हरी खाद के तौर पर मई के पहले सप्ताह ढैंचा (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़), या सन (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़) या लोबीया (बीज दर 12 किलोग्राम प्रति एकड़) की बिजाई करनी चाहिए जब फसल 6 से 8 सप्ताह की हो जाए तो इसे खेत में कद्दू करने से एक दिन खेत में ही जोत देना चाहिए इस तरह प्रति एकड़ 25 किलो नाइट्रोजन खाद की बचत होती है भूमि को समतल करने के लिए लेज़र लेवलर का प्रयोग किया जाता है इसके बाद खेत में पानी खड़ा कर दें ताकि भूमि के अंदर ऊंचे नीचे स्थानों की पहचान हो सके इस तरह पानी के रसाव के कारण पानी की होने वाले बर्बादी को कम किया जा सके बिजाई बिजाई का समय यू पी के सिंचित और निम्न बारानी क्षेत्रों में मध्य जून से शुरूआती जुलाई तक का समय उपयुक्त होता है बीज की गहराई पौधे की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए फासला बनाकर लगाने से पौधे ज्यादा पैदावार देते हैं फासला उपजाऊ मिट्टी में 20 सैं.मी. x 15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जबकि हल्की मिट्टी में रोपाई के लिए 15 सैं.मी. x 10 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 20 x 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बिजाई का ढंग सिंचित और कम बारानी क्षेत्रों में रोपाई ढंग प्रयोग किया जाता है रोपाई के लिए 25-30 दिनों के पौधों का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 30-35 दिनों के पौधे रोपाई के लिए प्रयोग करें ऊंचे क्षेत्रों में, शुष्क और गीली मिट्टी में रोपाई ढंग का प्रयोग करें बीज बीज की मात्रा एक एकड़ खेत में 6-8 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बीज का उपचार बिजाई से पहले 10 लीटर पानी में 20 ग्राम कार्बेनडाज़िम $ 1 ग्राम स्ट्रैप्टोसाईक्लिन घोल लें और इस घोल में बीजो को 8-10 घंटे तक भिगोयें उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं और फिर बिजाई के लिए प्रयोग करें पनीरी की देख-रेख और रोपण वैट बैड नर्सरी : यह तकनीक उन क्षेत्रों में अपनाई जाती है जहां पर पानी ज्यादा मात्रा में पाया जाता है नर्सरी का 1/10 हिस्सा दूसरे खेत में लगाया जाता है इसकी बिजाई छींटे द्वारा की जाती है यहां पर खेत की जोताई और खेत को समतल किया जाता है बैडों पर कईं दिन तक नमी बनाए रखनी चाहिए पानी से खेत को ज्यादा ना भरें जब नर्सरी 2 सैं.मी. से वृद्धि कर जाए तब पानी को खेत में लगाते रहना चाहिए बिजाई के 15 दिन बाद 26 किलो यूरिया डालना चाहिए जब नर्सरी 25-30 सैं.मी. तक लंबी हो जाए तब उसे 15-21 दिन बाद दूसरे खेत में लगा देना चाहिए और खेत को लगातार पानी लगाते रहना चाहिए सूखे बैड वाली नर्सरी : यह तकनीक शुष्क क्षेत्रों में अपनाई जाती है जो बैड बनाया जाता है वो बिजाई वाले खेत का 1/10 हिस्से में बीज बोया जाता है बैड का आकार सीमित होना चाहिए और उसकी ऊंचाई 6-10 से.मी होनी चाहिए धान का आधा जला हुआ छिलका बैड पर बिखेर देना चाहिए इससे जड़ें मजबूत होती हैं सही समय पर सिंचाई करते रहना चाहिए और नमी बनाए रखना चाहिए ताकि नए पौधे नष्ट ना हों तत्वों की पूर्ति के लिए खाद डालना जरूरी है मॉडीफाईड मैट नर्सरी : यह नर्सरी लगाने का एक ऐसा तरीका है जिसमें कम जगह और कम बीजों की जरूरत होती है यह नर्सरी किसी भी जगह पर बनाई जा सकती हैं जहां पर समतल जगह हो और पानी की सुविधा हो इसकी पनीरी लगाने के लिए 1% खेत की जरूरत होती है 4 से.मी की सतह पर नए पौधे लगाए जाते हैं इसे बनाने के लिए 1 मीटर चौड़े और 20-30 मीटर लंबे जमीन के टुकड़े की जरूरत होती है इसके ऊपर बिछाने के लिए पॉलीथीन और केले के पत्तों की जरूरत होती है इसके इलावा एक लकड़ी का बकसा जो कि 4 से.मी गहरा होता हैं मिट्टी के मिश्रण से भरा होता है बीजों को इसके अंदर रख देना चाहिए और फिर बीजों को सूखी मिट्टी के साथ ढक देना चाहिए इसके बाद पानी का छिड़काव कर देना चाहिए लकड़ी के बक्से को नमी देते रहना चाहिए बिजाई से 11-14 दिनों के बाद पौध तैयार हो जाती है जब पौध तैयार हो जाती है तब मैट से पौध को दूसरे खेत में रोपण कर दिया जाता है फासला: पौधों का फासला 20x20 सैं.मी. या 25x25 सैं.मी. होना चाहिए खेत में पौध रोपण पनीरी लगाने का ढंग 1. कद्दू करके लगाई जाने वाली पनीरी : आमतौर पर पंक्ति में लगाए जाने वाले पौधे 20x15 सैं.मी. दूरी पर लगाए जाते हैं और देरी से लगाई जाने वाली पनीरी 15x15 सैं.मी. पर लगाई जाती है नए पौधों की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए 2. बैड बनाकर लगाई जाने वाली पनीरी : यह बैड भारी ज़मीनों के लिए बनाए जाते हैं पनीरी लगाने से पहले खालियों में पानी लगाना चाहिए और फिर पनीरी को खेत में लगाना चाहिए पौधे से पौधे का फासला 9 सैं.मी. होना चाहिए 3. मशीनी ढंग से लगाई जाने वाली पनीरी : मैट पनीरी के लिए मशीनों का प्रयोग किया जाता है यह मशीन 30x12 सैं.मी. के फासले पर पनीरी लगानी चाहिए खरपतवार नियंत्रण रोपाई के 2 से 3 दिन बाद नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 50 ई सी 1200 मि.ली. या थायोबेनकार्ब 50 ई सी 1200 मि.ली. या पैंडीमैथालीन 30 ई सी या प्रैटीलाक्लोर 50 ई सी 600 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें इनमें से किसी एक नदीननाशक को 60 किलो रेत में मिलाकर 4-5 सैं.मी. गहरे खड़े पानी में बुरकाव करें चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए मेटसलफुरॉन 20 डब्लयु पी 30 ग्राम को 150 लीटर पानी में मिलाकर नदीनों के अंकुरण के बाद रोपाई के 20-25 दिन बाद डालें स्प्रे से पहले खेत में खड़े पानी का निकास कर दें और स्प्रे के एक दिन बाद सिंचाई करें नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 1 लीटर को बिजाई के 6 से 7 दिनों के बाद प्रति एकड़ में स्प्रे करें सिंचाई पनीरी लगाने के बाद खेत में दो सप्ताह तक अच्छी तरह पानी खड़ा रहने देना चाहिए जब सारा पानी सूख जाए तो उसके दो दिन बाद फिर से पानी को लगाना चाहिए खड़े पानी की गहराई 10 सै.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए खेत में से बूटी और नदीनों को निकालने से पहले खेत में से सारा पानी निकाल देना चाहिए ओर इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद खेत की फिर से सिंचाई करनी चाहिए पकने से 15 दिन पहले सिंचाई करनी बंद करनी चाहिए ताकि फसल को आसानी से काटा जा सके ऊंची भूमि पर सिंचाई पूरी तरह से बारिश पर निर्भर करती है बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर और पानी की उपलब्धता के आधार पर गंभीर अवस्थाओं में सिंचाई करें

Posted by श्री नारायण
Uttar Pradesh
26-08-2019 08:06 AM
श्री नारायण जी आप इसके ऊपर NPK 191919 एक किलो को 150 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकर के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by kawal
Punjab
26-08-2019 07:55 AM
ਕੰਵਲ ਜੀ ਇਹ ਫੰਗੂਸਨਾਸ਼ੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ bayer ALIETTE@600gm ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇ ਕਰੋ
Posted by bhangu sabb
Punjab
26-08-2019 07:54 AM
jhone de vich patta lapet di roktham de lyi tata tukumi@100gm ja coragen@60ml ja fame@20ml ja lambda@200ml nu 150 ltr pani de nal mila ke spray kr skde ho. iss ton ilaava tuc padan@5-7kg ja ferterra@4kg ja regent ultra@4kg prati acre de hisaab nal shitta de skde ho. JHONE DE LYI FUNGICIDE: iss de vich fungus de kaarn dhabbe bn jande hn. iss de upper Thiophanate methyl@300gm ja carbendazim@400gm ja M-45@400gm ja Upl di saaf@400gm nu 150 ltr pani de nal mila ke prati acre te spray kro. ihh dhabba rog thik ho jawega. iss ton ilaava ihna nu urea de nal mila ke v shitta de skde ho. iss nal jda di fungus control ho jawegi.Jekar kaale tele di aje shuruaat hai tan iss di roktham de lyi tuc chess@120gm ja glamore@50gm ja dentop@35gm nu 150 ltr paani de nal mila k prati acre te spray kr skde ho..ihn.... (Read More)
jhone de vich patta lapet di roktham de lyi tata tukumi@100gm ja coragen@60ml ja fame@20ml ja lambda@200ml nu 150 ltr pani de nal mila ke spray kr skde ho. iss ton ilaava tuc padan@5-7kg ja ferterra@4kg ja regent ultra@4kg prati acre de hisaab nal shitta de skde ho. JHONE DE LYI FUNGICIDE: iss de vich fungus de kaarn dhabbe bn jande hn. iss de upper Thiophanate methyl@300gm ja carbendazim@400gm ja M-45@400gm ja Upl di saaf@400gm nu 150 ltr pani de nal mila ke prati acre te spray kro. ihh dhabba rog thik ho jawega. iss ton ilaava ihna nu urea de nal mila ke v shitta de skde ho. iss nal jda di fungus control ho jawegi.Jekar kaale tele di aje shuruaat hai tan iss di roktham de lyi tuc chess@120gm ja glamore@50gm ja dentop@35gm nu 150 ltr paani de nal mila k prati acre te spray kr skde ho..ihna spreha di varto tela pain ton pehla kro..iss ton ilaava jekar tela jyaada fail gya hai tan uss di rokthaam de lyi 1 ltr DDVP nu 12 kg sukki ret de nal mila k khet de vich shitta de deo..iss ton bina tuc koram 300ml ja acetamiprid 20EC @60-80gm ja acephate@500gm nu 150 ltr paani de nal mila k prati acre te spray krdeo..iss ton ilaava tuc jhone de vich actara @80gm ja buprofezin@200ml nu 150 ltr paani de nal mila k prati acre te spray kr deo. jekar harra tela hai tan uss de lyi tuc solomon@120 ml prati acre de lyi spray kr skde ho...

Posted by balli
Punjab
26-08-2019 07:40 AM
jhone de vich gobh di sundi di roktham de lyi tata tukumi@100gm ja coragen@60ml ja fame@20ml ja lambda@200ml nu 150 ltr pani de nal mila ke spray kr skde ho.
Posted by ਹਰਮਨਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
26-08-2019 07:27 AM
harman ji isd evich gobh di sundi da hamla check karo jekar maujood hai ta tuc fame@20ml ja coragen@60ml nu 150 litre pani vich mila ke spray karo.dhanwad
Posted by Jitendra parmar
Uttar Pradesh
26-08-2019 07:23 AM
Jitendra ji yeh tatv ki kami aur fungus ke karn hota hai iske liye aap iske uper NPK 191919@1 killo ko 150 litre pani men mila kar spray karen.iske 3-4 din bad M-45@4 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by yuvraj janwa
Rajasthan
26-08-2019 07:13 AM
युवराज जी आप इसका बुखार नज़दीकी डॉक्टर से जांच करवायें यदि इसे बुखार है तो बुखार के हिसाब डॉक्टर से इलाज करवायें यदि बुखार नहीं है तो इसे पेट के कीड़ों के लिए Flukarid-DS दवा की गोली दें और Broton liquid 50-50ml सुबह शाम और Aptifast bolus 1—1 गोली सुबह शाम दें इससे फर्क पड़ जाएगा
Posted by Harvinder singh
Punjab
26-08-2019 07:08 AM
ਹਾਜੀ ਸਤਿ ਸ਼੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਵੱਲੋਂ ਪੁੱਛੇ ਸਾਰੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦਾ ਜਵਾਬ ਦਾ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਦੇਖਣ ਲਈ ਐਪ ਵਿੱਚ ਮੇਰੇ ਸਵਾਲ ਤੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਮੇਰੀ ਪ੍ਰੋਫਾਈਲ ਦੇ ਹੇਠਾ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਜਵਾਬ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਵੀ ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਨੂੰ ਜਵਾਬ ਸਬੰਧੀ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਨੰਬਰ: 97799-77641 ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ .... (Read More)
ਹਾਜੀ ਸਤਿ ਸ਼੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਵੱਲੋਂ ਪੁੱਛੇ ਸਾਰੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦਾ ਜਵਾਬ ਦਾ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਦੇਖਣ ਲਈ ਐਪ ਵਿੱਚ ਮੇਰੇ ਸਵਾਲ ਤੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਮੇਰੀ ਪ੍ਰੋਫਾਈਲ ਦੇ ਹੇਠਾ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਜਵਾਬ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਵੀ ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਨੂੰ ਜਵਾਬ ਸਬੰਧੀ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਨੰਬਰ: 97799-77641 ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ
Posted by Harvinder singh
Punjab
26-08-2019 07:06 AM
ਹਰਵਿੰਦਰ ਜੀ ਇਸਦੇ ਉਪਰ ਤੁਸੀ ਖੱਟੀ ਲੱਸੀ ਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਇਸਦੀ ਮਾਤਰਾ 3 ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by bansilal bairwa
Rajasthan
26-08-2019 06:57 AM
Bansilal ji mausam vibahg ke ausar aj barish hone ki sambhavna hai.dhanywad
Posted by mithun
Bihar
26-08-2019 06:44 AM
पहली फसल के लिए अक्तूबर में पनीरी बोयें ताकि जो नवंबर तक पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाये
दूसरी फसल के लिए नवंबर में पनीरी बोयें ताकि जो फरवरी के पहले पखवाड़े तक पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाये
तीसरी फसल के लिए फरवरी मार्च में पनीरी बोयें ताकि जो अप्रैल के आखिर से पहले ही पनीरी खेत में लगाने .... (Read More)
पहली फसल के लिए अक्तूबर में पनीरी बोयें ताकि जो नवंबर तक पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाये
दूसरी फसल के लिए नवंबर में पनीरी बोयें ताकि जो फरवरी के पहले पखवाड़े तक पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाये
तीसरी फसल के लिए फरवरी मार्च में पनीरी बोयें ताकि जो अप्रैल के आखिर से पहले ही पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाये
चौथी फसल के लिए जुलाई में पनीरी बोयें ताकि जो अगस्त तक पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाये
Posted by akash Raj Prayagraj
Uttar Pradesh
26-08-2019 06:21 AM
akash ji kripya btaye ke allu ki bijai ko kitne din ho gaye hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Kulwinder Singh
Punjab
26-08-2019 06:08 AM
Deputy director anlmal husbandry Patialaor nazdik de veterinary doctor naal sampark karo or University ludhiana da No hai 0161- 2553364 2414026
Posted by jaswinder singh Jassa
Punjab
26-08-2019 05:35 AM
ਨਰਮੇ ਵਿਚ ਤੇਲੇ ਅਤੇ ਜੂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ prophenofos@500ml ਜਾ Ethion@800ml ਜਾ oberon@200ml ਜਾ Bayer Admire pro@12gm ਜਾ Flotis@400ml ਦੀ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Dharmender Dubey
Madhya Pradesh
26-08-2019 05:03 AM
जी हां आप सोयावीन का भूसा जानवरों को खिला सकते हैं

Posted by Davinder Kumar
Punjab
26-08-2019 04:55 AM
Davinder ji eh thrips de karn bande han isde layi tuc imidacloprid@1.5ml nu prati litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by Ramesh Mourya
Uttar Pradesh
26-08-2019 04:35 AM
रमेश जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by Adarsh Ranjan Bharadwaj
Bihar
26-08-2019 01:27 AM
जैविक खेती क्या है यह एक तरीका है जिसमें फसलें उगाने के लिए रासायनिक खादों या कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया जाता जैविक खेती से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है और पैदावार की गुणवत्ता में भी वृद्धि होती है इसमें खेती के लिए पशुओं और फसलों के व्यर्थ और कुछ बायोफर्टिलाइज़र प्रयोग किए जाते हैंं जैविक खेती के ल.... (Read More)
जैविक खेती क्या है यह एक तरीका है जिसमें फसलें उगाने के लिए रासायनिक खादों या कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया जाता जैविक खेती से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है और पैदावार की गुणवत्ता में भी वृद्धि होती है इसमें खेती के लिए पशुओं और फसलों के व्यर्थ और कुछ बायोफर्टिलाइज़र प्रयोग किए जाते हैंं जैविक खेती के लिए वातावरण अनुकूलन विधि है और प्रदूषण को कम करने में मदद करती है विशेषताएं इससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति लंबे समय तक बनी रही है और खेती के लिए मशीनों की कम जरूरत पड़ती है यह अप्रत्यक्ष ढंग से ज़मीन को मित्र सूक्ष्मजीव प्रदान करता है जो घुलनाशील तत्वों को पौधों की वृद्धि के लिए प्रयाग में लाते हैं इस कुदरती तरीके से नाइट्रोजन की कमी पूरी हो जाती है और हमें बार बार खेत में रसायन डालने की जरूरत नहीं पड़ती इससे पशुओं के गोबर और फसलों के बचे कुचे को दोबारा प्रयेाग में लाया जा सकता है जो पशु जैविक ढंग से तैयार की फसलों को खुराक के तौर पर प्रयोग करते हैं उन्हें अधिक संतुलन तत्व मिलते हैं और सेहत भी अच्छी रहती है जैविक खेती करने से जंगली जीवन और कुदरती आवास में सुधार आता है

Posted by bhagvanaram
Rajasthan
26-08-2019 12:57 AM
bhagvanaram ji kirpa karke apna swal vistar nal pucho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by iqbal dhounsi
Punjab
26-08-2019 12:01 AM
Tuci us nu pett de kiria lai Bendikind plus bolus deo ate Agrimin powder 100gm rojana ate ovumin advance bolus rojana 1 goli deo ate 21 din tak dinde rho, iss nal heat vich aa jawegi..

Posted by kamaldeep
Punjab
25-08-2019 11:46 PM
ਭੁਰੜ ਰੋਗ : ਝੁਲਸ ਰੋਗ ਕਾਰਨ ਪੱਤਿਆਂ ਉਤੇ ਤਿਰਛੇ ਧੱਬੇ ਜੋ ਕਿ ਅੰਦਰੋਂ ਸਲੇਟੀ ਰੰਗ ਅਤੇ ਬਾਹਰੋਂ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਵਿਖਾਈ ਦਿੰਦੇ ਹਨ I ਇਸ ਨਾਲ ਫ਼ਸਲ ਦੇ ਸਿੱਟੇ ਗਲ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਉਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਡਿੱਗਣੇ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਉੱਥੇ ਇਸ ਬਿਮਾਰੀ ਦਾ ਪ੍ਰਭਾਵ ਜ਼ਿਆਦਾ ਵੇਖਣ ਨੂੰ ਮਿਲਦਾ ਹੈ I ਜੇਕਰ ਇਸ ਬਿਮਾਰੀ ਦ.... (Read More)
ਭੁਰੜ ਰੋਗ : ਝੁਲਸ ਰੋਗ ਕਾਰਨ ਪੱਤਿਆਂ ਉਤੇ ਤਿਰਛੇ ਧੱਬੇ ਜੋ ਕਿ ਅੰਦਰੋਂ ਸਲੇਟੀ ਰੰਗ ਅਤੇ ਬਾਹਰੋਂ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਵਿਖਾਈ ਦਿੰਦੇ ਹਨ I ਇਸ ਨਾਲ ਫ਼ਸਲ ਦੇ ਸਿੱਟੇ ਗਲ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਉਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਡਿੱਗਣੇ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਉੱਥੇ ਇਸ ਬਿਮਾਰੀ ਦਾ ਪ੍ਰਭਾਵ ਜ਼ਿਆਦਾ ਵੇਖਣ ਨੂੰ ਮਿਲਦਾ ਹੈ I ਜੇਕਰ ਇਸ ਬਿਮਾਰੀ ਦੇ ਲੱਛਣ ਵਿਖਾਈ ਦੇਣ ਤਾਂ 500 ਗ੍ਰਾਮ ਜ਼ਿਨੇਬ ਦਾ 200 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਇਸ ਦਾ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ I

Posted by bhagvanaram
Rajasthan
25-08-2019 11:34 PM
bhagvanaram ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by pawan bishnoi
Rajasthan
25-08-2019 11:24 PM
नरमे में जूं, तेले और थ्रिप्स है, इसकी रोकथाम के लिए prophenofos@500ml याEthion@800ml या oberon@200ml या Bayer की Admire pro@12gm या Flotis@400ml की प्रति एकड़ के हिसाब से 150 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें
Posted by Deepak kumar
Haryana
25-08-2019 11:07 PM
दीपक जी कृपया आप इसकी फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by Soni Kumar
Punjab
25-08-2019 11:04 PM
ਜੇਕਰ ਇਸ ਬਿਮਾਰੀ ਦੇ ਲੱਛਣ ਆਉਣ ਤਾਂ 200 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਟੈਬੂਕੋਨਾਜ਼ੋਲ ਜਾਂ 200 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਟਿਲਟ 25 ਈ ਸੀ ਜਾਂ 200 ਗ੍ਰਾਮ ਦਾ 25% ਕਾਰਬੈਂਡਾਜ਼ਿਮ 200 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਘੋਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦਾ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ I 15 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਅੰਤਰਾਲ ਦੌਰਾਨ ਇਸ ਘੋਲ ਦਾ ਫਿਰ ਤੋਂ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ I
Posted by pawan bishnoi
Rajasthan
25-08-2019 10:48 PM
यदि बिजाई के 80-100 दिनों के बाद फसल को फूल ना निकलें या फूल कम हों तो फूलों की पैदावार बढ़ाने के लिए ज्यादा सूक्ष्म तत्व खाद 750 ग्राम प्रति एकड़ प्रति 150 लीटर पानी की स्प्रे करें बी.टी किस्मों की पैदावार बढ़ाने के लिए बिजाई के 85, 95 और 105 दिनों के बाद 13:0:45 के अनुसार 10 ग्राम या पोटाश 5 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे शाम के सम.... (Read More)
यदि बिजाई के 80-100 दिनों के बाद फसल को फूल ना निकलें या फूल कम हों तो फूलों की पैदावार बढ़ाने के लिए ज्यादा सूक्ष्म तत्व खाद 750 ग्राम प्रति एकड़ प्रति 150 लीटर पानी की स्प्रे करें बी.टी किस्मों की पैदावार बढ़ाने के लिए बिजाई के 85, 95 और 105 दिनों के बाद 13:0:45 के अनुसार 10 ग्राम या पोटाश 5 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे शाम के समय करें अधिक पैदावार प्राप्त करने के लिए पोटाश्यिम 10 ग्राम प्रति लीटर और डी.ए.पी. 20 ग्राम प्रति लीटर (पहले फूल खिलने के प्रत्येक 15 दिनों के फासले पर 2-3 स्प्रे) की स्प्रे करें कई बार वर्गाकार लार्वा गिरता है और इससे फूल झड़ने शुरू हो जाते हैं, इसकी रोकथाम के लिए पलैनोफिक्स (एन ए ए) 4 मि.ली. और ज्यादा सूक्ष्म तत्व 120 ग्राम, मैगनीश्यिम सल्फेट 150 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी की स्प्रे करें यदि खराब मौसम के कारण टिंडे झड़ते दिखाई दें तो इसकी रोकथाम के लिए 100 ग्राम 00:52:34+30 मि.ली. हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत से कम)+6 मि.मी. स्टिकर को 15 लीटर पानी में मिलाकर 10 दिनों के फासले पर तीन स्प्रे करें आज कल पत्तों में लाली बहुत ज्यादा दिख रही है, इसका मुख्य कारण पौष्टिक तत्वों की कमी है इसे खादों के सही उपयोग से ठीक किया जा सकता है इस तरह करने के लिए 1 किलो मैगनीश्यिम सल्फेट की पत्तियों पर स्प्रे करें और इसके बाद यूरिया 2 किलो को 100 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें
Posted by pawan bishnoi
Rajasthan
25-08-2019 10:41 PM
यदि बिजाई के 80-100 दिनों के बाद फसल को फूल ना निकलें या फूल कम हों तो फूलों की पैदावार बढ़ाने के लिए ज्यादा सूक्ष्म तत्व खाद 750 ग्राम प्रति एकड़ प्रति 150 लीटर पानी की स्प्रे करें बी.टी किस्मों की पैदावार बढ़ाने के लिए बिजाई के 85, 95 और 105 दिनों के बाद 13:0:45 के अनुसार 10 ग्राम या पोटाश 5 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे शाम के सम.... (Read More)
यदि बिजाई के 80-100 दिनों के बाद फसल को फूल ना निकलें या फूल कम हों तो फूलों की पैदावार बढ़ाने के लिए ज्यादा सूक्ष्म तत्व खाद 750 ग्राम प्रति एकड़ प्रति 150 लीटर पानी की स्प्रे करें बी.टी किस्मों की पैदावार बढ़ाने के लिए बिजाई के 85, 95 और 105 दिनों के बाद 13:0:45 के अनुसार 10 ग्राम या पोटाश 5 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे शाम के समय करें अधिक पैदावार प्राप्त करने के लिए पोटाश्यिम 10 ग्राम प्रति लीटर और डी.ए.पी. 20 ग्राम प्रति लीटर (पहले फूल खिलने के प्रत्येक 15 दिनों के फासले पर 2-3 स्प्रे) की स्प्रे करें कई बार वर्गाकार लार्वा गिरता है और इससे फूल झड़ने शुरू हो जाते हैं, इसकी रोकथाम के लिए पलैनोफिक्स (एन ए ए) 4 मि.ली. और ज्यादा सूक्ष्म तत्व 120 ग्राम, मैगनीश्यिम सल्फेट 150 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी की स्प्रे करें यदि खराब मौसम के कारण टिंडे झड़ते दिखाई दें तो इसकी रोकथाम के लिए 100 ग्राम 00:52:34+30 मि.ली. हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत से कम)+6 मि.मी. स्टिकर को 15 लीटर पानी में मिलाकर 10 दिनों के फासले पर तीन स्प्रे करें आज कल पत्तों में लाली बहुत ज्यादा दिख रही है, इसका मुख्य कारण पौष्टिक तत्वों की कमी है इसे खादों के सही उपयोग से ठीक किया जा सकता है इस तरह करने के लिए 1 किलो मैगनीश्यिम सल्फेट की पत्तियों पर स्प्रे करें और इसके बाद यूरिया 2 किलो को 100 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें

Posted by kuljit singh
Punjab
25-08-2019 10:38 PM
ਕੁਲਜੀਤ ਜੀ ਤੁਸੀ 005234 ਨੂੰ ਫੰਗਸਨਾਸ਼ੀ ਜਾ ਕੀਟਨਾਸ਼ੀ ਨਾਲ ਰਲਾ ਕੇ ਖੇਤ ਵਿਚ ਨਾ ਪਾਓ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by md shahid iqbal
Bihar
25-08-2019 10:13 PM
अगर आपने उसे पेट के कीड़े की दवाई नहीं दी तो उसे पेट के कीड़ों के लिए Albendazole bolus दें, इसके साथ आप Ovumin gold पाउडर 50 ग्राम रोज़ाना और Min21 bolus रोज़ाना एक गोली दें और 21 दिन तक दें, इससे हीट में आ जाएगी

Posted by jogi
Punjab
25-08-2019 10:04 PM
tuci uss nu Kol liquid 500ml ek varr vich pilao ate Tyral 100 liquid dia 2 botla ek varr vich pilao, iss nal frak paa jawega..

Posted by md shahid iqbal
Bihar
25-08-2019 10:03 PM
md shahid iqbal ji aapke sware swalo ko jwab mahiro ki taraf de diye gaye ji ji. agar aapko 24 gante me aapke swal ka jwan nahi milta to aap hmare helpline no. 9779977641 par bhi call kar sakte hai ji. feedback dene ke liye aapka dhaneyawad ji.
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