
Posted by sukhwinder singh
Punjab
26-08-2019 01:27 PM
Sukha ji tuc insecticide ate fungicide nu rla ke ikathe varto na karo.dhanwad

Posted by suresh
Rajasthan
26-08-2019 01:27 PM
नींबू को मिट्टी की सभी किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली हल्की मिट्टी इसकी खेती के लिए उपयुक्त होती है मिट्टी की पी एच 5.5-7.5 होनी चाहिए इन्हें हल्की क्षारीय और अम्लीय मिट्टी में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली हल्की दोमट मिट्टी कागज़ी-निंबू की खेती के लिए अच्छी होती है Kagzi: यह बड़े क्षेत्र में उगाई .... (Read More)
नींबू को मिट्टी की सभी किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली हल्की मिट्टी इसकी खेती के लिए उपयुक्त होती है मिट्टी की पी एच 5.5-7.5 होनी चाहिए इन्हें हल्की क्षारीय और अम्लीय मिट्टी में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली हल्की दोमट मिट्टी कागज़ी-निंबू की खेती के लिए अच्छी होती है Kagzi: यह बड़े क्षेत्र में उगाई जाने वाली नींबू की आम किस्म है इसके वृक्ष ज्यादा घनत्व वाले, छोटे पत्ते और फैलने वाले होते हैं फल छोटे गोल और पतली त्वचा वाले होते हैं इसका रस स्वाद में बहुत तेज़ाबी होता है यह किस्म मध्य अगस्त में पक जाती है Dhaulakuan Seedless: यह देरी से पकने वाली किस्म है किस्म से इसमें 20-25 प्रतिशत मात्रा रस की होती है यह किस्म आचार और जूस बनाने के लिए उपयुक्त है कटहल की खेती के लिए अच्छे निकास वाली, उच्च उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 6-7.5 होनी चाहिए यह चूना और क्लोरीन युक्त मिट्टी को भी सहनेयोग्य है इसकी खेती के लिए नदी के नज़दीक वाली मिट्टी भी उपयुक्त होती है GKVK -1 and Swarna: यह किस्म कर्नाटक राज्य द्वारा जारी की गई है इसके फल उच्च गुणवत्ता के और गोंदरहित होते हैं Singapore or Ceylon Jack: यह जल्दी फल देने वाली किस्म है इसके फल मध्यम आकार के मीठे होते हैं और गुद्दा कुरकुरा होता है इसका मादा प्रजनन अंग पीले रंग का, छोटा और गुठली से चिपका हुआ और तेज सुगंध वाला होता है Local variety: Gulabi, Champa, Rudrakshi Exotic variety: Hazari, Golden nuggets, Black gold, Lemmon gold, Chala, Khaja, NS-1, J 30, J 31

Posted by RAjendra mewada
Madhya Pradesh
26-08-2019 01:27 PM
जून* फूलगोभी, खीरा-ककड़ी, लोबिया, करेला, लौकी, तुरई, पेठा, बीन, भिण्डी, टमाटर, प्याज, चौलाई, शरीफा
Posted by vishal parmar
Madhya Pradesh
26-08-2019 01:24 PM
Vishal ji, apke dawara bheji gayi audio saaf sunai nahi de rahi hai,kripya ap isse dubara record kar ke bhjeien taki sun kar apko iske bare mein jankari di ja sak,e dhanywad
Posted by brajesh pal
Uttar Pradesh
26-08-2019 01:24 PM
देसी मुर्गी पालन को हम कम पूँजी थोड़ी जमीन और थोड़ी सी मेहनत से आसानी से किया जा सकता है , मुर्गी पालन का चलन भारत में तेज़ी से बढ़ रहा है चीन और अमेरिका के बाद भारत अंडा उत्पादन में तीसरे स्थान पर और मांस उत्पादन में 5 स्थान पर है यह 3 देसी मुर्गी की प्रजातियां ज्यादा प्रचलित हैं ग्रामप्रिया श्रीनिधि वनराजा कुक्क.... (Read More)
देसी मुर्गी पालन को हम कम पूँजी थोड़ी जमीन और थोड़ी सी मेहनत से आसानी से किया जा सकता है , मुर्गी पालन का चलन भारत में तेज़ी से बढ़ रहा है चीन और अमेरिका के बाद भारत अंडा उत्पादन में तीसरे स्थान पर और मांस उत्पादन में 5 स्थान पर है यह 3 देसी मुर्गी की प्रजातियां ज्यादा प्रचलित हैं ग्रामप्रिया श्रीनिधि वनराजा कुक्कुट पालन परियोजना हैदराबाद के द्वारा यह तीनो प्रजातियां विकसित की गयीं हैं यह मुर्गियां अण्डों और मांस दोनों के लिए बहुत लाभदायक हैं देखा जाता है के जो हमारे किसान भाई ग्रामीण प्रजाति के मुर्गी पालन करते हैं उसके अपेक्षा में यह संकर नस्ल की प्रजाति अंडे और मांस में ज्यादा मुनाफा देता हैं आइये हम विस्तार से इन तीन प्रजाति के बारे में बात करें ग्रामप्रिया – ग्रामप्रिया प्रजाति की मुर्गियां भी दोहरी उपयोगिता वाली प्रजाति की मुर्गी है इसका अर्थ यह है के यह अंडा और मांस दोनों के लिए उपयोगी है , 18 महीने में यह 240 से 250 अंडे तक दे सकती है और इसका वजन 1.5 kg से 2 kg तक होता है श्रीनिधि प्रजाति की मुर्गी – यह प्रजाति ग्रामीण प्रजाति की मुर्गी के अपेक्षा में 230-250 अंडे तक देती है , श्रीनिधि मुर्गियों का वजन 2.5kg से लेकर 5 kg तक का होता है जो की ग्रामीण प्रजाति के मुर्गियों से बहुत ज्यादा है इसीलिए यह दोहरी उपयोगिता प्रजाति में गिनी जाती है इसके मांस और अंडे दोनों से ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है ,इन प्रजातियों की मुर्गियां तेजी से बढ़ती हैं वनराजा – वनराजा प्रजाति की मुर्गियां भी ग्रामीण प्रवेश के लिए काफी अच्छी मानी जाती है यह मुर्गी 120 – 130 अंडे 3 महीने में देती है देसी मुर्गी पालन के लिए यह 3 विकसित प्रजातियां बहुत ही लाभदायक साबित हुई है

Posted by JITENDRA KUMAR SINGH
Uttar Pradesh
26-08-2019 01:22 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डींगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुछ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी .... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डींगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुछ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुम्ब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तह लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तह उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तह में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तह लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
Posted by vishal parmar
Madhya Pradesh
26-08-2019 01:17 PM
इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सहनेयोग्य किस्म है यह .... (Read More)
इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सहनेयोग्य किस्म है यह उच्च घनत्व में रोपाई के लिए लाभदायक है Pusa Giant: इस किस्म के पौधे तेज हवा को सहनेयोग्य है यह बड़े फलों का उत्पादन करती है यह पैकिंग के लिए उपयुक्त किस्म है CO 3: इसके फल बड़े आकार के और अंडाकार होते हैं इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है CO 1: यह छोटे कद की किस्म है जिसके फल मध्यम आकार के होते हैं फल गोलाकार, नर्म हरा-पीला छिल्का और संतरी पीले रंग का गुद्दा होता है फल रसदार होता है और इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है Coorg Honey Dew: इसे सीधे तौर पर खाने के लिए और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है इसके फल आयताकार और गुद्दा मोटा संतरी रंग का होता है Pusa Majesty: इसके फल मध्यम आकार के, गोल होते हैं इन्हें रखने की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है यह किस्म 146 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म जड़ गलन निमाटोड के प्रतिरोधक किस्म है Pusa Delicious: यह मध्यम लंबी किस्म है इसके फल मध्यम आकार के होते हैं, गुद्दा गहरे संतरी रंग का होता है इस किस्म को कतारों में लगाने के लिए प्रयोग किया जाता है पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें यूरिया 150 ग्राम, फासफोरस 80 ग्राम, पोटाश 100 ग्राम प्रति वृक्ष में प्रति वर्ष डालें खादों को 4 भागों में बांटकर रोपाई के बाद पहले, तीसरे, पांचवे और सातवें महीने में डालें बसंत के मौसम में फरवरी मार्च के महीने में बिजाई करें जबकि मॉनसून के मौसम में बिजाई के लिए जून जुलाई का महीना उपयुक्त होता है और पतझड़ के मौसम में बिजाई अक्तूबर से नवंबर महीने में की जाती है आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 1 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है 100-120 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें मिट्टी की किस्म, जलवायु के हालातों आदि के आधार पर सिंचाई करें सर्दियों में 15 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें तने को पानी के संपर्क में ना आने दें और खेत में पानी भी खड़ा ना होने दें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 800 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं धन्यवाद

Posted by sukhjinder Brar
Punjab
26-08-2019 01:17 PM
ਸੁਖਜਿੰਦਰ ਜੀ ਇਸਦੇ ਵਿਚ ਤੁਸੀ 130045 ਰਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇ ਨਾ ਕਰੋ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਅਲੱਗ ਅਲੱਗ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by devendra
Rajasthan
26-08-2019 01:16 PM
देवेंद्र जी आप इसके ऊपर NPK 191919 एक किलो को 150 लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करें यह तत्व की कमी के कारण होता है धन्यवाद

Posted by Gurpreet singh
Punjab
26-08-2019 01:14 PM
ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਇਹ ਕਿਸੇ ਕਿਸੇ ਬੀਜ ਦੇ ਕਾਰਨ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਦਿੱਕਤ ਕੁਝ ਕੇ ਬੂਟਿਆ ਤੇ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ਸਾਰੇ ਖੇਤ ਵਿਚ ਨਹੀਂ
Posted by gurpreet singh
Punjab
26-08-2019 01:07 PM
ਤੁਸੀ ਬਰਸੀਮ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ BL 1 :- ਇਹ ਜਲਦੀ ਉੱਗਣ ਵਾਲੀ ਦਰਮਿਆਨੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਬੂਟਾ ਵਧੀਆ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ,ਜੋ ਮਈ ਦੇ ਅਖੀਰਲੇ ਹਫਤੇ ਤੱਕ ਵੀ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਹਰਾ ਚਾਰਾ 380 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
BL 10:- ਇਹ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ ਜੂਨ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਪੰਦੜਵਾੜੇ ਤੱਕ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਇਹ ਤਣੇ ਦੇ ਗਲਣ ਰੋਗ ਨੂੰ ਸਹਾਰਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ, ਜਿਸ ਦਾ ਝਾੜ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਬਰਸੀਮ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ BL 1 :- ਇਹ ਜਲਦੀ ਉੱਗਣ ਵਾਲੀ ਦਰਮਿਆਨੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਬੂਟਾ ਵਧੀਆ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ,ਜੋ ਮਈ ਦੇ ਅਖੀਰਲੇ ਹਫਤੇ ਤੱਕ ਵੀ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਹਰਾ ਚਾਰਾ 380 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
BL 10:- ਇਹ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ ਜੂਨ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਪੰਦੜਵਾੜੇ ਤੱਕ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਇਹ ਤਣੇ ਦੇ ਗਲਣ ਰੋਗ ਨੂੰ ਸਹਾਰਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ, ਜਿਸ ਦਾ ਝਾੜ 410 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
BL 42 :- ਇਹ ਜਲਦੀ ਉੱਗਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ, ਜਿਸ ਦਾ ਜੰਮ ਵਧੀਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਤਣੇ ਦੇ ਗਲਣ ਵਾਲੇ ਰੋਗ ਨੂੰ ਸਹਾਰਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਜੂਨ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਹਫਤੇ ਤੱਕ ਮਿਲਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਝਾੜ 440 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
BL 43: ਇਹ ਅਗੇਤੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਹਰੇ ਚਾਰੇ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 390 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ

Posted by Raj bargale
Madhya Pradesh
26-08-2019 01:07 PM
यदि आप मछली पालन शुरू करना चाहते है तो इसकी पूंग छोड़ने के लिए मार्च से अक्तूबर का समय उपयुक्त होता है एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिले.... (Read More)
यदि आप मछली पालन शुरू करना चाहते है तो इसकी पूंग छोड़ने के लिए मार्च से अक्तूबर का समय उपयुक्त होता है एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिलेगा यदि बढ़िया खुराक डाली जाए तो 8 महीनों में यह लगभग 800—900 ग्राम का हो जाता है बाकी मछली पालन के लिए नहरी पानी बढ़िया होता है और आप गांव का छप्पड़ ठेके से लेकर भी यह काम शुरू कर सकते हैं तालाब में मछली के बीज डालने से पहले इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि उस तालाब में काफी मात्रा में मछली की कुदरती खुराक उपलब्ध है तालाब में प्लैंकटान की अच्छी मात्रा करने के उद्देश्य से यह जरूरी है कि रूड़ी की खाद के साथ सुपर फास्फेट 300 किलोग्राम और यूरिया 180 किलोग्राम प्रति वर्ष प्रति हेक्टैयर के मान से डाली जाए तालाब में से हानिकारक मछलियों और कीड़े मकौड़ों को निकाल लेना चाहिए मंडीकरण की कोई दिक्कत नहीं है यह लोकल ही सेल हो जाती हे

Posted by sandeep garg
Haryana
26-08-2019 01:02 PM
संदीप जी आप एक बार नज़दीकी डॉक्टर को बुलाकर इसकी ज़ेर की जांच करवायें कि इसे ज़ेर पड़ी है या नहीं बाकि आप इसे Enerdyna liquid 100-100ml सुबह शाम और Lactin bolus 1—1 गोली सुबह शाम दें इससे दूध देने लगेगी
Posted by akshay
Maharashtra
26-08-2019 01:02 PM
यदि इनका हमला बहुत ज्यादा हो तो क्लोरपाइरीफॉस 20 ई सी 1 लीटर या क्लोरैंटरानीलीपरोल 18.5 प्रतिशत एस सी 50 मि.ली. या डाइफलूबैंज़ियूरॉन 25 प्रतिशत डब्लयू पी 100-150 ग्राम की स्प्रे प्रति एकड़ में करें कीटनाशकों की स्प्रे सुबह या शाम के समय ही करनी चाहिए

Posted by devdas manikpuri
Chattisgarh
26-08-2019 01:02 PM
devdas ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by Baljinder Singh
Punjab
26-08-2019 01:01 PM
ਬਲਜਿੰਦਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਮੱਕੀ ਚਰੀ ਜਾ ਬਾਜਰਾ ਕਿਸੇ ਦੀ ਵੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by डिलेश्वर चंद्राकर
Chattisgarh
26-08-2019 01:01 PM
डिलेश्वर जी आप इसकी रोकथाम के लिए folicur@200ml या pulsor@200ml या custodia@300ml या nativo@80gm या amistar top@200ml को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by devdas manikpuri
Chattisgarh
26-08-2019 12:59 PM
देवदास जी आप इसके ऊपर quinalphos @4 ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Sanjeev Thakur
Himachal Pradesh
26-08-2019 12:59 PM
इसकी बिजाई के लिए पोरा ढंग का प्रयोग किया जाता है बीज की गहराई 3 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए कतार से कतार का फासला 30 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 15 सैं.मी. रखें सब्जियों में प्रयोग करने के लिए इसकी बिजाई अक्तूबर के पहले सप्ताह में करनी चाहिए और बीज तैयार करने के लिए बिजाई अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से नवंब.... (Read More)
इसकी बिजाई के लिए पोरा ढंग का प्रयोग किया जाता है बीज की गहराई 3 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए कतार से कतार का फासला 30 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 15 सैं.मी. रखें सब्जियों में प्रयोग करने के लिए इसकी बिजाई अक्तूबर के पहले सप्ताह में करनी चाहिए और बीज तैयार करने के लिए बिजाई अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह तक करनी चाहिए एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 8-10 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें

Posted by RAHI
Madhya Pradesh
26-08-2019 12:45 PM
राही जी इसमें कीट का हमला है इसके लिए आप इसके ऊपर quinalphos @4ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धंन्यवाद
Posted by manoj yadav
Madhya Pradesh
26-08-2019 12:40 PM
उसे आप रोजाना 35—40 किलो हरा चारा डालें इसके साथ उसे अच्छी कंपनी की फीड डालें जिसे वो आसानी से हज़म कर जाए इसे आप पेट के कीड़ों के लिए Flukarid-ds गोली दें इसके साथ आप Enerdyna liquid 100-100ml सुबह शाम, calcimust gold liquid 50ml रोजाना और Gouge पाउडर 1—1 पाउच सुबह शाम दें इससे फर्क पड़ जाएगा

Posted by Vijay Kumar
Bihar
26-08-2019 12:40 PM
विजय जी आप इसके ऊपर folicur@200ml या pulsor@200ml या custodia@300ml या nativo@80gm या amistar top@200ml को 150 लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by pawan bishnoi
Rajasthan
26-08-2019 12:35 PM
पवन जी आप इसमें मछर या कीट का हमला चेक करें नरमे में जूं, तेले और थ्रिप्स है, इसकी रोकथाम के लिए prophenofos@500ml याEthion@800ml या oberon@200ml या Bayer की Admire pro@12gm या Flotis@400ml की प्रति एकड़ के हिसाब से 150 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें
Posted by ਕੇਵਲਸਿੰਘ
Punjab
26-08-2019 12:33 PM
keval ji kirpa karke daso ke amrood vich ki dikkat aa rahi hai ta jo tuhanu osd ehisab nal jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by vipin kumar
Uttar Pradesh
26-08-2019 12:32 PM
vipin ji aap jad men keet ki roktham ke liye fame@20ml ya coragen@60ml ko 150 litre pani men mila kar spray karen.dhanywad

Posted by rajesh kumar gupta
Uttar Pradesh
26-08-2019 12:32 PM
राजेश जी कृपया बताये के यह कोनसी फसल में है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by meniya nitesh
Gujarat
26-08-2019 12:30 PM
जीरा भारत का महत्तवपूर्ण मसाला है अच्छे निकास वाली और उच्च कार्बनिक पदार्थों वाली मिट्टी जीरे की खेती के लिए उपयुक्त होती है जीरे की खेती के लिए उस ज़मीन का चयन करें जहां 3-4 वर्ष जीरे की खेती ना की गई हो प्रसिद्ध किस्में:-RZ 19,RZ 209,Gujarat Jeera 2,RZ 223,GC 4 जीरे की खेती के लिए अच्छी तरह से जोती गई और समतल ज़मीन की आवश्यकता होती है म.... (Read More)
जीरा भारत का महत्तवपूर्ण मसाला है अच्छे निकास वाली और उच्च कार्बनिक पदार्थों वाली मिट्टी जीरे की खेती के लिए उपयुक्त होती है जीरे की खेती के लिए उस ज़मीन का चयन करें जहां 3-4 वर्ष जीरे की खेती ना की गई हो प्रसिद्ध किस्में:-RZ 19,RZ 209,Gujarat Jeera 2,RZ 223,GC 4 जीरे की खेती के लिए अच्छी तरह से जोती गई और समतल ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें और मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें जीरे की बिजाई के लिए 15 से 30 नवंबर सही समय होता है कतारों में बिजाई के लिए दो पंक्तियों में 30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को 10 सैं.मी. की गहराई में बोयें बिजाई के लिए बुरकाव ढंग या कतार में बिजाई ढंग का प्रयोग करें एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 4-6 किलो बीज पर्याप्त होते हैं बिजाई से पहले कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें यह बीजों का फंगस संक्रमक से बचाव करेगा खादों की सही मात्रा के लिए और अतिरिक्त प्रयोग ना करने के लिए मिट्टी की जांच सबसे महत्तवपूर्ण कदम है फसल की अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए नाइट्रोजन 15 किलो (यूरिया 32 किलो) फासफोरस 11 किलो (एस एस पी 66 किलो) और पोटाश 7 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 12 किलो) को गाय के गले हुए गोबर 2 टन के साथ प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के 35 दिनों के बाद डालें बिजाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें दूसरी सिंचाई बिजाई के 10 दिनों के बाद अंकुरण के समय करें उसके बाद तीन सिंचाइयां पर्याप्त होती हैं बाकी की सिंचाइयां बिजाई के 35वें, 60वें और 85वें दिन बाद करें एक बार फसल पक जाये तब सिंचाई ना करें बीज भरने की अवस्था में सिंचाई पत्तों के ऊपरी धब्बा रोग, चेपे और झुलस रोग के हमले को बढ़ाती है जीरे की फसल में नदीन गंभीर समस्या होते हैं नदीनों की जांच के लिए लगातार गोडाई और निराई करें पहली गोडाई बिजाई के 30-35 दिनों के बाद करें जब जीरे की फसल 5 सैं.मी. कद की हो जाये दूसरी गोडाई पहली गोडाई के 20-25 दिन बाद करें और खेत को नदीन रहित रखें रासायनिक रोकथाम के लिए बिजाई के 1-2 दिन बाद पैंडीमैथालीन 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें जीरे की फसल 100-115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है कटाई दरांती की सहायता से की जाती है फसल की कटाई के बाद पौधों को फर्श पर खिलार दें और धूप में सुखाने के लिए छोड़ दें धूप में अच्छे से सुखाने के बाद पौधों से दाने अलग कर लें

Posted by Kashmir Singh
Punjab
26-08-2019 12:27 PM
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छी उपज और अच्छी वृद्धि के लिए गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी की आवश्यकता होती है यह दोमट और हल्की क्षारीय मिट्टी को भी सहनेयोग्य है इसे हल्की मिट्टी में भी उगाया जा सकता है अनार की खेती के लिए मध्यम और काली मिट्टी भी उपयुक्त रहती है अगेती किस्मों के लिए 45x30 सैं.मी., दर.... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छी उपज और अच्छी वृद्धि के लिए गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी की आवश्यकता होती है यह दोमट और हल्की क्षारीय मिट्टी को भी सहनेयोग्य है इसे हल्की मिट्टी में भी उगाया जा सकता है अनार की खेती के लिए मध्यम और काली मिट्टी भी उपयुक्त रहती है अगेती किस्मों के लिए 45x30 सैं.मी., दरमियानी किस्मों और पिछेती किस्मों के लिए 45-60x45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें अगेती मौसम की फसल के लिए 45x30 सैं.मी. जबकि देरी से पकने वाली फसल के लिए 60 x 45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज को 1-2 सैं.मी. गहरा बोयें बिजाई के लिए, रोपण विधि का प्रयोग किया जाता है बीज को नर्सरी में बोयें और सिंचाई करें पौध लगाने के समय जरूरत के अनुसार पानी और खाद डालें 25-30 दिनों में पौध खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाती है पौध रोपण के लिए तीन से चार सप्ताह के पुराने पौधे लगाएं अगेती मौसम की किस्मों के लिए 500 ग्राम बीज और पिछेती मौसम की किस्मों के लिए 250 ग्राम बीज प्रति एकड़ के लिए आवश्यक है बिजाई से पहले, बीज को गर्म पानी में (50°सै. पर 30 मिनट) या 0.01 ग्राम सटरैपटोसाइकलिन प्रति लीटर दो घंटों के लिए रखें इसके बाद बीज को छांव में सुखाएं और क्यारियों में बीज दें रबी के मौसम में फल गलन का रोग ज्यादातर होता है इसके उपचार के लिए मरकरी क्लोराईड से बीज का उपचार करें बीज को 1 ग्राम मरकरी क्लोराईड प्रति लीटर से 30 मिनट के लिए उपचार करें और सुखा लें रेतली ज़मीनों में फसल ज्यादातर तने पर से गल जाती है इससे बचाने के लिए 3 ग्राम कारबनडैज़िम 50% डब्लयू पी प्रति किलो से बीज का उपचार करें खेत में गली हुई रूड़ी की खाद 8-10 टन प्रति एकड़ में डालें और साथ ही नाइट्रोजन 60 किलो (130 किलो यूरिया), फासफोरस 25 किलो (155 किलो सिंगल सुपर फासफेट), पोटाश 25 किलो (40 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) गाय का गोबर, एस एस पी और म्यूरेट ऑफ पोटाश की पूरी मात्रा और युरिया की एक तिहाई मात्रा खेत की तैयारी के समय डालें बाकी बची यूरिया को दो समान भागों में बांटकर रोपाई के बाद 30वें और 45वें दिन डालें फूल के अच्छी तरह बनने और अच्छी वृद्धि के लिए, पानी में घुलनशील खाद NPK(19:19:19) 10 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर पौधे के शुरूआती विकास के दौरान स्प्रे करें रोपाई के 40 दिन बाद 12:61:00 4-5 ग्राम + सूक्ष्म तत्व 2.5 से 3 ग्राम + बोरोन 1 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें फूल की गुणवत्ता को सुधारने के लिए पानी में घुलनशील खाद NPK 13:00:45 20 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर फूल के विकसित होने के समय डालें मिट्टी की जांच करें और यदि मैगनीशियम की कमी दिखे तो इसे पूरा करने के लिए मैगनीशियम सल्फेट 5 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर रोपाई के 30-35 दिन बाद और कैल्शियम की कमी को पूरा करने के लिए कैल्शियम नाइट्रेट 5 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर रोपाई के 30-35 दिन बाद डालें कई बार खोखले और बेरंगे तने दिखाई देते हैं, जिससे फूल भी भूरे रंग का हो जाता है और पत्ते भी मुड़ जाते हैं यह सब बोरोन की कमी के कारण होता है इसके लिए बोरेक्स 250-400 ग्राम को प्रति एकड़ में डालें बिजाई के लिए, रोपण विधि का प्रयोग किया जाता है उपयुक्त आकार के बैड तैयार करें प्रत्येक बैड में डी ए पी 40 ग्राम, यूरिया 25 ग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश 30 ग्राम डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें उसके बाद बीज को नर्सरी में बोयें और सिंचाई करें, आवश्यकता के अनुसार खाद डालें बिजाई के बाद नए पौधे 25-30 दिनों के बाद रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं रोपाई के लिए तीन से चार सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें शाम के समय रोपाई करें

Posted by rajesh kumar gupta
Uttar Pradesh
26-08-2019 12:27 PM
rajesh ji aap Bael,Ber,Mango, Karonda ke paudhe lga sakte hai.dhanywad

Posted by Shivank Tiwari
Uttar Pradesh
26-08-2019 12:26 PM
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्ष.... (Read More)
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्षेत्रों में पाई जाती है यह गले को सूखेपन से राहत देता है यह हाथों, पैरों और गठिया की सूजन से आराम देता है Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum): यह चीन, ब्राज़ील, पूर्व नेपाल और साथ ही बंगाल, बिहार, चटगांव और भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में पाई जाती है इसका तना जामुनी और पत्ते हरे रंग के और बहुत ज्यादा सुगंधित होते है इसमें उचित मात्रा में औषधीय गुण जैसे ऐज़ाडिरैकटिन, ऐंटीफंगल , ऐंटीबैक्टीरियल, और पाचन तंत्र को ठीक रखती है यह गर्म क्षेत्रों में बढ़िया उगता है Babi Tulsi: यह पंजाब से त्रिवेंद्रम, बंगाल और बिहार में भी पाई जाती है इसका पौधा 1-2 फीट लम्बा होता है पत्ते 1-2 इंच लम्बे, अंडाकार और नुकीले होते है इसके पत्तों का स्वाद लौंग की तरह और सब्जियों में स्वाद के लिए प्रयोग किया जाता है तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें इसके मंडीकरण के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से संपर्क कर सकते हैं

Posted by jagroop banghu
Punjab
26-08-2019 12:24 PM
ਜਗਰੂਪ ਜੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵਲੋਂ ਏਦਾਂ ਦੀ ਕੋਈ ਦਵਾਈ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਗਈ ਜੋ ਝੋਨੇ ਦੀ height ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਦੇ ਲਈ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by satbir singh
Haryana
26-08-2019 12:18 PM
Guar mein fungicide M-45 @400 gm per acre or streptocycline @1 gm per acre ko 120 liter pani mein mila ke spray kro g..

Posted by praveen Kumar
Uttar Pradesh
26-08-2019 12:16 PM
चिया की खेती के लिए, contract farming के लिए, कौन सी company से संपर्क करें, इसके बीज कैसे मिलेंगे ?
Praveen Kumar ji chia seed ki contract farmiong ke lia aap Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 se samparak kar sakte hai. Thankyou.
Posted by Paramjit Attri
Punjab
26-08-2019 12:13 PM
murgiya di feed de layi tusi feed teyar karan lai 25 kg makki, 20 kg kanak, 5-6 kg soeyabeen khal te thoda mineral mixture mix karke morning te evening nu feed murgiya nu pao. ehna nu rajvi feed deyo jinni eh kha sakan..
Posted by skjb
Rajasthan
26-08-2019 12:07 PM
shrimaan g moongfali ki fasal mein Bavistin @40-50 gm ko 100 liter pani mein mila ke spray kr skte ho g..
Posted by Rajveer Singh
Punjab
26-08-2019 11:59 AM
Posted by ਕੇਵਲਸਿੰਘ
Punjab
26-08-2019 11:59 AM
kewal ji tuc isdi matra 1 ml nu prati litre pani de hisab nal spray karo. eh sundi di roktham de layi varti jandi hai.dhanwad

Posted by rajesh kumar
Chattisgarh
26-08-2019 11:57 AM
बटेर पालन के लिए किसी लाइसेंस की जरुरत नहीं है जी यह मुर्गी पालन से मिलता जुलता काम ही है बटेर पालन से जुड़ी कुछ आम जानकारी आपसे शेयर कर रहे हैं 1.यह बहुत छोटा पक्षी होने के कारण इस काम को शुरू करने के लिए कम जगह की जरूरत होती है उदाहरण के तौर पर 5-6 पक्षियों के लिए 1 वर्ग फीट जगह की आवश्यकता होती है 2.खुराक की खप्त भ.... (Read More)
बटेर पालन के लिए किसी लाइसेंस की जरुरत नहीं है जी यह मुर्गी पालन से मिलता जुलता काम ही है बटेर पालन से जुड़ी कुछ आम जानकारी आपसे शेयर कर रहे हैं 1.यह बहुत छोटा पक्षी होने के कारण इस काम को शुरू करने के लिए कम जगह की जरूरत होती है उदाहरण के तौर पर 5-6 पक्षियों के लिए 1 वर्ग फीट जगह की आवश्यकता होती है 2.खुराक की खप्त भी कम होती है, सिर्फ 20-25 ग्राम प्रति पक्षी रोज़ाना 3.बटेर के अंडे और मांस में अमीनो अम्ल, विटामिन, चर्बी और धातु आदि पदार्थ उपलब्ध रहते हैं 4.बटेर पालन में, 5 सप्ताह का पक्षी मीट के लिए तैयार हो जाता है और 6-7 सप्ताह में अंडे देना शुरू कर देता है 5.मुर्गियों की बजाय बटेरों में छूत की बीमारियां कम होती हैं बीमारियों की रोकथाम के लिए मुर्गी पालन की तरह इनमें किसी प्रकार का टीका लगाने की जरूरत नहीं है 6.बटेर हर वर्ष तीन से चार पीढ़ियों को जन्म दे सकने की क्षमता रखती है 7.इसका मीट मुर्गे से काफी अधिक स्वाद और पोष्टिक होता है हेचरी में 35 से 40 दिनों में बटेरें खाने योग्य हो जाती हैं एक अंडा पांच रूपये में बिकता है जापानी बटेर और इसे पालने की सिखलाई चंडीगढ़ के केंद्रीय मुर्गी पालन संस्था (Central Poultry Development Organization (Northern Region) की तरफ से करवायी जाती है अन्य जानकारी के लिए वैबसाइट http://cpdonrchd.gov.in पर जाकर इसकी सिखलाई और ट्रेनिंग के बारे में पता कर सकते हैं
Posted by Davinder singh
Punjab
26-08-2019 11:52 AM
davinder ji javi di bijai october mahine vich kiti jandi hai.dhanwad

Posted by Priyanshu Bharti
Uttar Pradesh
26-08-2019 11:50 AM
Bharti ji iske liye yeh nirbhar krta hai ki apke pass pashu kaise hai, konsi nasal hai, unka dudh kitna hai, aap unko kya khurak dete hai, inn sabhi batton per dhudh nirbhar krta hai, baki aapke pass yaddi nasal achi hai too aap unko achi khurak dekar, sahi matra mai feed, sme sme per pett ke kiro ki goli dekar acha milk lee skte hai, yaddi nasal achi nahi hai too woh utna he dhudh denge jitna uss nasal ka hai..
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