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Posted by ਬੇਅੰਤ ਸਿੰਘ ਚੋਹਾਨ
Punjab
30-08-2019 09:48 AM

Punjab
08-30-2019 01:08 PM
Nazdik de laboratory cho taaran culture karwa ke dasi pashuan wali dwaee doctor se bachedani me bharwao
Posted by Dhillon Saab
Punjab
30-08-2019 09:38 AM
Punjab
08-30-2019 04:30 PM
Dhillon Saab ji mai tohade swal da answer dita hai ji. audio record karke answer send kita hai tusi check karo ji.
Posted by Raj dadawat
Rajasthan
30-08-2019 09:38 AM
Punjab
08-31-2019 12:53 AM
raj ji yeh fungus ke karn ho raha hai iske liye aap iske uper mancozeb@400 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywd
Posted by Ajay Chopra
Punjab
30-08-2019 09:33 AM
Maharashtra
01-23-2020 11:04 AM
Ajay Chopra ji, for selling your chia seeds , you can contact Mr. Anil Saini 9555233266 Gauranga Enterprises, thank you
Posted by Hafiz Sadiq Patel
Madhya Pradesh
30-08-2019 09:32 AM
Maharashtra
08-31-2019 01:02 AM
कृपया आप इसमें कीट का हमला चेक करें अगर मौजूद है तो बताये ताकि आपको उसके हिसाब से जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by ajay
Madhya Pradesh
30-08-2019 09:31 AM
Maharashtra
08-31-2019 01:00 AM
इसकी खेती के लिए अच्छे निकास वाली, उच्च उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 6-7.5 होनी चाहिए यह चूना और क्लोरीन युक्त मिट्टी को भी सहनेयोग्य है इसकी खेती के लिए नदी के नज़दीक वाली मिट्टी भी उपयुक्त होती है Pant Mahima: यह लंबी और फैलने वाली किस्म है इसके फल हल्के हरे से हल्के भूरे रंग के होते हैं इसक कतारों म.... (Read More)
इसकी खेती के लिए अच्छे निकास वाली, उच्च उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 6-7.5 होनी चाहिए यह चूना और क्लोरीन युक्त मिट्टी को भी सहनेयोग्य है इसकी खेती के लिए नदी के नज़दीक वाली मिट्टी भी उपयुक्त होती है Pant Mahima: यह लंबी और फैलने वाली किस्म है इसके फल हल्के हरे से हल्के भूरे रंग के होते हैं इसक कतारों में रखने के साथ साथ पकाने के लिए भी उपयुक्त किस्म है इसके फल का औसतन भाग लगभग 6.5 किलो होता है Pant Garima: यह लंबी और फैलने वाली किस्म है इसके फल हल्के हरे से हल्के भूरे रंग के होते हैं इसके फल का औसतन भाग लगभग 5 किलो होता है Singapore or Ceylon Jack: यह जल्दी फल देने वाली किस्म है इसके फल मध्यम आकार के मीठे होते हैं और गुद्दा कुरकुरा होता है इसका मादा प्रजनन अंग पीले रंग का, छोटा और गुठली से चिपका हुआ और तेज सुगंध वाला होता है गर्मियों में, रोपाई के लिए 1x1x1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें और धूप में खुला छोड़ दें इससे हानिकारक बैक्टीरिया मर जायेंगे और फसल मिट्टी से पैदा होने वाले कीटों और बीमारियों से बचेगी उसके बाद गड्ढों को रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 20-30 किलो, सिंगल सुपर फास्फेट 0.5 किलो और फोरेट 10-20 ग्राम से भरें प्रत्येक गड्ढे में 3-4 बीज बोयें कटहल की बिजाई के लिए जून - जुलाई का महीना उपयुक्त होता है बिजाई के लिए, आयताकार या वर्गाकार बिजाई ढंग प्रयोग किया जाता है कम उपजाऊ मिट्टी में षट्कोणीय प्रणाली का प्रयोग करें मिट्टी के आधार पर 8x8 मीटर या 10x10 मीटर या 12x12 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है बिजाई के लिए ताजे बीजों या एक महीने से कम स्टोर किए बीजों का प्रयोग किया जाता है बीजों को पहले पॉलीथीन बैग में बोया जाता है और फिर मुख्य खेत में रोपण किया जाता है बिजाई से पहले बीजों को NAA 25 पी पी एम के घोल में 24 घंटे के लिए भिगो कर रखें यह बीजों के जल्दी अंकुरण के साथ अच्छी वृद्धि में भी मदद करेगा कटहल खादों में अच्छे परिणाम देता है 1 से 3 वर्ष के पौधों मे नाइट्रोजन 200 ग्राम और फासफोरस 60 ग्राम प्रति वर्ष डालें चार से छ: वर्ष के पौधों के लिए नाइट्रोजन 400 ग्राम, फासफोरस 240 ग्राम और पोटाश 120 ग्राम प्रति वर्ष डालें नियमित कटाई और छंटाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन फसल को कीटों और बीमारियों के हमले से बचाने के लिए कमज़ोर, बीमारी वाली और मरी हुई शाखाओं को बारिश के मौसम के अंत तक निकाल दें नदीनों की तीव्रता के आधार पर गोडाई करें नदीनों के हमले से फसल को बचाने के लिए मल्च का प्रयोग करें यह फसल की उचित वृद्धि में भी सहायता करेगा शुरूआती वर्षों के दौरान, जब फसल फल देने की अवस्था में पहुंच जाती है (वृक्ष 6-8 वर्ष में फल देना शुरू करता है) अंतरफसली जैसे मिर्च, बैंगन, और दालें जैसे लोबिया, कुलथी और काले चने को अंतरफसली के रूप में लिया जा सकता है बारिश के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती बारिश की नियमितता और तीव्रता के आधार पर सिंचाई करें कटहल की फसल को शुरूआती 2-3 वर्षों में सिंचाई की आवश्यकता होती है उसके बाद सिंचाई की कोई आवश्यकता नहीं होती भारी बारिश में पानी खड़ा ना होने दें क्योंकि यह फसल जल जमाव की स्थिति को सहनेयोग्य नहीं है
Posted by Ajay Chopra
Punjab
30-08-2019 09:31 AM
Maharashtra
01-23-2020 11:05 AM
Ajay Chopra ji, for selling your chia seeds , you can contact Mr. Anil Saini 9555233266 Gauranga Enterprises, thank you
Posted by navpreet Singh
Punjab
30-08-2019 09:28 AM
Punjab
08-31-2019 01:03 AM
navpreet ji kirpa karke ehna di photo bhejo ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by Aman
Punjab
30-08-2019 09:24 AM
Punjab
08-31-2019 02:26 AM
ਇਸਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਬਿਮਾਰੀ ਦੇ ਸ਼ੁਰੂਆਤੀ ਸਮੇਂ ਤੇ ਮੈਨਕੋਜ਼ੈੱਬ ਜਾਂ ਜ਼ਾਈਨੈਬ 2-4 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ 10 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ
Posted by Rajdeep Singh
Punjab
30-08-2019 09:23 AM
Punjab
08-30-2019 01:12 PM
Mastitis hai dudh nazdik laboratory ch culture k dasi dwaee deo or 15 se20 gm nimbu da sat 15 se 20din deo cuuwi baad chare thanna nu dwaee da doba deo
Posted by raghav
Haryana
30-08-2019 09:22 AM
Maharashtra
08-31-2019 02:25 AM
raghav ji aap gobh men keet ki roktham ke liye fame@20ml ya coragen@60ml ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by ravi
Uttar Pradesh
30-08-2019 09:16 AM
Punjab
08-31-2019 02:23 AM
बिजाई के समय 11 किलो यूरिया ,70 किलो सिंगल सुपर फासफेट की मात्रा प्रति एकड़ में डालें
Posted by Mohammed hussain
Rajasthan
30-08-2019 09:11 AM
Punjab
08-30-2019 03:31 PM
इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सहनेयोग्य किस्म है यह .... (Read More)
इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सहनेयोग्य किस्म है यह उच्च घनत्व में रोपाई के लिए लाभदायक है Pusa Giant: इस किस्म के पौधे तेज हवा को सहनेयोग्य है यह बड़े फलों का उत्पादन करती है यह पैकिंग के लिए उपयुक्त किस्म है CO 3: इसके फल बड़े आकार के और अंडाकार होते हैं इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है CO 1: यह छोटे कद की किस्म है जिसके फल मध्यम आकार के होते हैं फल गोलाकार, नर्म हरा-पीला छिल्का और संतरी पीले रंग का गुद्दा होता है फल रसदार होता है और इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है Coorg Honey Dew: इसे सीधे तौर पर खाने के लिए और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है इसके फल आयताकार और गुद्दा मोटा संतरी रंग का होता है Pusa Majesty: इसके फल मध्यम आकार के, गोल होते हैं इन्हें रखने की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है यह किस्म 146 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म जड़ गलन निमाटोड के प्रतिरोधक किस्म है Pusa Delicious: यह मध्यम लंबी किस्म है इसके फल मध्यम आकार के होते हैं, गुद्दा गहरे संतरी रंग का होता है इस किस्म को कतारों में लगाने के लिए प्रयोग किया जाता है पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें यूरिया 150 ग्राम, फासफोरस 80 ग्राम, पोटाश 100 ग्राम प्रति वृक्ष में प्रति वर्ष डालें खादों को 4 भागों में बांटकर रोपाई के बाद पहले, तीसरे, पांचवे और सातवें महीने में डालें बसंत के मौसम में फरवरी मार्च के महीने में बिजाई करें जबकि मॉनसून के मौसम में बिजाई के लिए जून जुलाई का महीना उपयुक्त होता है और पतझड़ के मौसम में बिजाई अक्तूबर से नवंबर महीने में की जाती है आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 1 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है 100-120 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें मिट्टी की किस्म, जलवायु के हालातों आदि के आधार पर सिंचाई करें सर्दियों में 15 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें तने को पानी के संपर्क में ना आने दें और खेत में पानी भी खड़ा ना होने दें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 800 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं पौधे लेने के लिए आप Chai ram Chouddary 9414135250 7014026106 Chaoudhary Dinesh Nursery जी से संपर्क कर सकते है धन्यवाद
Posted by Rohan
Punjab
30-08-2019 09:09 AM
Punjab
08-31-2019 01:18 AM
ਰੋਹਨ ਜੀ ਤੁਸੀ ਇਸਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹ ਇਕ ਜੈਵਿਕ ਕੀਟਨਾਸ਼ਕ ਦਾ ਕੰਮ ਕਰਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by M. S Romana
Punjab
30-08-2019 09:00 AM
Maharashtra
08-30-2019 03:17 PM
ਰੋਮਾਣਾ ਜੀ ਇਹ ਫੰਗਸ ਦੇ ਕਾਰਨ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ folicur@200ml ਜਾ pulsor@200ml ਜਾ custodia@300ml ਜਾ nativo@80gm ਜਾ amistar top@200ml ਜਾ indofil avtar@400gm ਜਾ hexaconazole@300ml ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Dharminder singh
Punjab
30-08-2019 08:59 AM
Punjab
08-30-2019 03:13 PM
ਧਰਮਿੰਦਰ ਜੀ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਇਸਦੇ ਵਿਚ sticker ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਹੈ ਤਾ ਇਸਦਾ ਅਸਰ ਹੋ ਜਾਏਗਾ
Posted by Baljinder singh
Punjab
30-08-2019 08:54 AM
Maharashtra
08-30-2019 02:56 PM
ਬਲਜਿੰਦਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਇਸਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸਦੀ ਮਾਤਰਾ 1-1.5ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ 005234 ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਇਸਦੇ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Sanjay Kumar
Uttar Pradesh
30-08-2019 08:53 AM
Punjab
08-31-2019 04:57 PM
Sanjay ji apko ek bakri ke liye 12-15 sq.feet cover jgah aur 25-30 sq.feet area open chahiye, iss hisab se aap apni jgah ke hisab se bakrio ko rakh skte hai..
Posted by Nishan singh
Punjab
30-08-2019 08:52 AM
Punjab
08-30-2019 08:04 PM
ehh pashu da dhudh vdaun vich help krda hai jekar pashu da dhudh ghat hai jaa sunn ton badd dhudh puura nhi dinda tan issdi varto kr skde ho, iss nu 1 pouch rojana de skde ho, jddo dhudh vdh jawe fir iss nu bnnd kr skde ho ate usdi khurak vdhha skde ho..
Posted by pramod
Rajasthan
30-08-2019 08:48 AM
Maharashtra
08-30-2019 02:36 PM
आखिरी जोताई के समय, मिट्टी में अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 4-4.8 टन प्रति एकड़ में डाले बिजाई के समय, नाइट्रोजन 8 किलो (यूरिया 18 किलो) के साथ फासफोरस 24 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 8 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 14 किलो) प्रति एकड़ में डालें अच्छी उपज के साथ अच्छी वृद्धि के लिए, बिजाई के 30 दिन बाद सोडियम मोलीबडे.... (Read More)
आखिरी जोताई के समय, मिट्टी में अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 4-4.8 टन प्रति एकड़ में डाले बिजाई के समय, नाइट्रोजन 8 किलो (यूरिया 18 किलो) के साथ फासफोरस 24 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 8 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 14 किलो) प्रति एकड़ में डालें अच्छी उपज के साथ अच्छी वृद्धि के लिए, बिजाई के 30 दिन बाद सोडियम मोलीबडेट 15 ग्राम को 10 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें
Posted by Choudhary ji
Rajasthan
30-08-2019 08:47 AM
Punjab
08-30-2019 02:10 PM
Choudhary ji aap iske uper NPK 191919 ek kilo ko 150 litre pani men mila kar spray karen,dhanywad
Posted by प्रेम सिंह देवड़ा
Madhya Pradesh
30-08-2019 08:46 AM
Maharashtra
08-30-2019 02:29 PM
प्रेम सिंह जी इसकी रोकथाम के लिए आप imidacloprid @60ml को 150 लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Choudhary ji
Rajasthan
30-08-2019 08:45 AM
Punjab
08-30-2019 02:34 PM
choudhary ji daaru ki spray karna krishi university se sifarish nahi hai.dhanywad
Posted by Choudhary ji
Rajasthan
30-08-2019 08:45 AM
Maharashtra
08-30-2019 02:11 PM
chaudhary ji kisi bhi krishi sansthan ke dwara alcohol ki spray fasl par karna sifarish nahi ki gayi hai.dhanywad
Posted by Dhananjay Kumar Singh
Bihar
30-08-2019 08:43 AM
Maharashtra
08-30-2019 12:52 PM
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्ष.... (Read More)
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्षेत्रों में पाई जाती है यह गले को सूखेपन से राहत देता है यह हाथों, पैरों और गठिया की सूजन से आराम देता है Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum): यह चीन, ब्राज़ील, पूर्व नेपाल और साथ ही बंगाल, बिहार, चटगांव और भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में पाई जाती है इसका तना जामुनी और पत्ते हरे रंग के और बहुत ज्यादा सुगंधित होते है इसमें उचित मात्रा में औषधीय गुण जैसे ऐज़ाडिरैकटिन, ऐंटीफंगल , ऐंटीबैक्टीरियल, और पाचन तंत्र को ठीक रखती है यह गर्म क्षेत्रों में बढ़िया उगता है Babi Tulsi: यह पंजाब से त्रिवेंद्रम, बंगाल और बिहार में भी पाई जाती है इसका पौधा 1-2 फीट लम्बा होता है पत्ते 1-2 इंच लम्बे, अंडाकार और नुकीले होते है इसके पत्तों का स्वाद लौंग की तरह और सब्जियों में स्वाद के लिए प्रयोग किया जाता है तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें इसके मंडीकरण के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से संपर्क कर सकते हैं
Posted by hargun singh
Uttar Pradesh
30-08-2019 08:28 AM
Maharashtra
08-30-2019 02:08 PM
अफीम एक वार्षिक औषधीय बूटी है, जिसमें कई जरूरी एल्कलॉइड (वे तत्व जिनमें ड्रग्स की मात्रा होती है) जैसे मोर्फिन, कोडेन और थिबेन होते हैं अच्छी उपज और वृद्धि के लिए इसे उपजाऊ, अच्छे निकास वाली काली मिट्टी और हल्की दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 7 के लगभग होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :- Chetak: यह अधिक .... (Read More)
अफीम एक वार्षिक औषधीय बूटी है, जिसमें कई जरूरी एल्कलॉइड (वे तत्व जिनमें ड्रग्स की मात्रा होती है) जैसे मोर्फिन, कोडेन और थिबेन होते हैं अच्छी उपज और वृद्धि के लिए इसे उपजाऊ, अच्छे निकास वाली काली मिट्टी और हल्की दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 7 के लगभग होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :- Chetak: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसके पौधे का औसतन कद 80-90 सैं.मी. होता है इसके फूल सफेद रंग के और फल बड़े और गोल आकार में होते हैं यह अधिक उपजाऊ मिट्टी में अच्छी पैदावार देती है इसमें मोर्फिन की मात्रा 12.5 प्रतिशत होती है यह मोर्फिन की औसतन पैदावार 2 किलोग्राम प्रति एकड़ देती है मिट्टी की किस्म के आधार पर मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की दो-तीन बार जोताई करें मिट्टी को अच्छे से समतल करें ताकि खेत में पानी ना खड़ा हो सके खेत की तैयारी के समय अच्छी तरह से गला हुआ, गाय का गोबर 4 टन प्रति एकड़ में डालें अफीम की बिजाई के लिए अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर नवंबर के पहले सप्ताह तक का समय उपयुक्त होता है इसके बीज छोटे होते हैं इसलिए बीजों को बारीक रेत में अच्छे से मिलाया जाता है और फिर बिजाई के लिए प्रयोग किया जाता है 3 मीटर चौड़े और 5 मीटर लंबे बैड तैयार किए जाते हैं बैड पर 30 सैं.मी. के फासले पर कतार बनाई जाती है, फिर बीजों को कतारों में बोया जाता है पौधे से पौधे का फासला 30 सैं.मी. रखें बिजाई के लिए बुरकाव या कतार में बिजाई का ढंग प्रयोग किया जाता है बीज की मात्रा ज्यादा डालने से गोडाई करने में परेशानी आती है, जिससे फसल का विकास अच्छा नहीं होता, इसलिए बुरकाव विधि से ज्यादा कतारों में बिजाई करने को ज्यादा महत्तव दिया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 2 किलो बीज की मात्रा बहुत होती है बिजाई से पहले मैनकोजेब 4 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें नाइट्रोजन 36 किलो (यूरिया 80 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 4 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 10 किलो) प्रति एकड़ में डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा को दो भागों में बांटे, पहली मात्रा बिजाई के 40-50 दिन के बाद डालें और दूसरी मात्रा फूल बनने से पहले डालें अफीम की पूरी फसल को 8-10 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बिजाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें फिर मिट्टी की किस्म, सिंचित क्षेत्र के आधार पर 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जलवायु हालातों और आवश्यकता के आधार पर सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर, सिंचित खेत में 10-12 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें चीरा लगाने से 8-10 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें नदीनों की तीव्रता के आधार पर दो से तीन गोडाई करें नदीनों की रासायनिक रोकथाम के लिए लसोप्रोटियूरॉन 500 ग्राम को 200 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के बाद तीसरे दिन डालें नदीननाशक क्रिया के 30 दिन बाद पहली गोडाई करें बिजाई के 95-115 दिनों बाद अफीम में फूल निकलते हैं फूल बनने के बाद, 15-20 दिनों में फल परिपक्व हो जाते हैं जब फल अपने रंग को हरे से हल्के हरे में बदल देता है और फल घना हो जाता है तब कट लगाने और दूध इक्ट्ठा करने के लिए सही अवस्था होती है दोपहर में कट लगाने के प्रक्रिया पूरी कर लें और दूध को अगले दिन की सवेर में इक्ट्ठा करें इस प्रक्रिया को हर तीन दिन बाद दोहरायें प्रत्येक फल में 3-56 बार कट लगाए जा सकते हैं आखिरी कट लगाने के बाद फसल को 20-25 दिनों के लिए फसल को सूखने के लिए छोड़ दें अच्छी तरह से सुखाने के बाद फल की तुड़ाई करें और फसल को दरांती के साथ काट दें सूखे फलों की तुड़ाई के बाद उन्हें खुली जगह में बिछा दें और उनमें से बीज निकाल लें धन्यवाद
Posted by vinay
Punjab
30-08-2019 08:24 AM
Punjab
08-30-2019 10:06 PM
विनय जी इन चीज़ों को देने से दूध में फर्क नहीं पड़ता ये तो उसका हाज़मा ठीक रखती है दूध कम होने का कोई ओर कारण हो सकता है उसे आप नज़दीकी डॉक्टर से जांच करवायें जिससे उसके दूध ना देने का सही कारण पता लग सके
Posted by baljinder singh
Punjab
30-08-2019 08:22 AM
Maharashtra
08-30-2019 01:56 PM
ਇਹ ਫਸਲ ਬਹੁਤ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਛੋਲਿਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਰੇਤਲੀ ਜਾਂ ਚੀਕਣੀ ਜ਼ਮੀਨ ਬਹੁਤ ਢੁੱਕਵੀਂ ਮੰਨੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਮਾੜੇ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਜ਼ਮੀਨ ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਢੁੱਕਵੀਂ ਨਹੀਂ ਮੰਨੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਖਾਰੀ ਜਾਂ ਲੂਣੀ ਜ਼ਮੀਨ ਵੀ ਇਸ ਲਈ ਵਧੀਆ ਨਹੀਂ ਮੰਨੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਵਿਕਾਸ ਲਈ 5.5 ਤੋਂ 7 pH ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਵਧੀਆ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਹਰ ਸਾਲ ਇੱਕ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਹੀ ਫਸਲ ਨਾ .... (Read More)
ਇਹ ਫਸਲ ਬਹੁਤ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਛੋਲਿਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਰੇਤਲੀ ਜਾਂ ਚੀਕਣੀ ਜ਼ਮੀਨ ਬਹੁਤ ਢੁੱਕਵੀਂ ਮੰਨੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਮਾੜੇ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਜ਼ਮੀਨ ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਢੁੱਕਵੀਂ ਨਹੀਂ ਮੰਨੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਖਾਰੀ ਜਾਂ ਲੂਣੀ ਜ਼ਮੀਨ ਵੀ ਇਸ ਲਈ ਵਧੀਆ ਨਹੀਂ ਮੰਨੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਵਿਕਾਸ ਲਈ 5.5 ਤੋਂ 7 pH ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਵਧੀਆ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਹਰ ਸਾਲ ਇੱਕ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਹੀ ਫਸਲ ਨਾ ਬੀਜੋ ਵਧੀਆ ਫਸਲ ਚੱਕਰ ਅਪਣਾਓ ਅਨਾਜ ਵਾਲੀਆਂ ਫਸਲਾਂ ਨੂੰ ਫਸਲ ਚੱਕਰ ਵਿੱਚ ਵਰਤਣ ਨਾਲ ਜ਼ਮੀਨ ਤੋਂ ਲੱਗਣ ਵਾਲੀਆਂ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਰੋਕਣ ਵਿੱਚ ਮਦਦ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਫਸਲੀ ਚੱਕਰ ਵਿੱਚ ਸਾਉਣੀ ਵਾਲੇ ਚਿੱਟੇ ਛੋਲੇ, ਸਾਉਣੀ ਵਾਲੇ ਕਾਲੇ ਛੋਲੇ + ਕਣਕ/ਜੌਂ/ਰਾਇਆ, ਚਰੀ-ਛੋਲੇ, ਬਾਜਰਾ-ਛੋਲੇ, ਝੋਨਾ/ਮੱਕੀ-ਛੋਲੇ ਆਦਿ ਫਸਲਾਂ ਆਉਂਦੀਆਂ ਹਨ PBG 7: ਪੂਰੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦੀ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਟਾਟਾਂ ਤੇ ਧੱਬਾ ਰੋਗ, ਸੋਕਾ ਅਤੇ ਜੜ੍ਹ ਗਲਣ ਰੋਗ ਦੀ ਰੋਧਕ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਦਰਮਿਆਨੇ ਆਕਾਰ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 8 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਤਕਰੀਬਨ 159 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ CSJ 515: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸੇਂਜੂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਲਈ ਢੁੱਕਵੀਂ ਹੈ ਇਸਦੇ ਦਾਣੇ ਛੋਟੇ ਅਤੇ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਭਾਰ 17 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ 100 ਬੀਜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਜੜ੍ਹ ਗਲਣ ਰੋਗ ਦੀ ਰੋਧਕ ਹੈ ਅਤੇ ਟਾਟਾਂ ਦੇ ਉੱਪਰ ਧੱਬੇ ਰੋਗ ਨੂੰ ਸਹਾਰ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਤਕਰੀਬਨ 135 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 7 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ BG 1053: ਇਹ ਕਾਬੁਲੀ ਛੋਲਿਆਂ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਫੁੱਲ ਜਲਦੀ ਨਿਕਲ ਆਉਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਸਫੇਦ ਰੰਗ ਦੇ ਅਤੇ ਮੋਟੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 8 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਪੂਰੇ ਪ੍ਰਾਂਤ ਦੇ ਸੇਂਜੂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ L 550: ਇਹ ਕਾਬੁਲੀ ਛੋਲਿਆਂ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ ਦਰਮਿਆਨੀ ਫੈਲਣ ਵਾਲੀ ਅਤੇ ਛੇਤੀ ਫੁੱਲ ਦੇਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ 160 ਦਿਨਾਂ ਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਦਾਣੇ ਚਿੱਟੇ ਰੰਗ ਦੇ ਅਤੇ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 6 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ L 551: ਇਹ ਕਾਬੁਲੀ ਛੋਲਿਆਂ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ ਸੋਕਾ ਰੋਗ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ 135-140 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 6-8 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਛੋਲਿਆਂ ਦੀ ਫਸਲ ਲਈ ਜ਼ਿਆਦਾ ਪੱਧਰੇ ਬੈੱਡਾਂ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਇਸਨੂੰ ਮਿਕਸ ਫਸਲ ਦੇ ਤੌਰ ਤੇ ਉਗਾਇਆ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਖੇਤ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਵਾਹਿਆ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਇਸ ਫਸਲ ਨੂੰ ਸਾਉਣੀ ਦੀ ਫਸਲ ਦੇ ਤੌਰ ਤੇ ਬੀਜਣਾ ਹੋਵੇ, ਤਾਂ ਖੇਤ ਨੂੰ ਮੌਨਸੂਨ ਆਉਣ ਤੇ ਡੂੰਘਾ ਵਾਹੋ, ਜੋ ਕਿ ਮੀਂਹ ਦੇ ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਸੰਭਾਲਣ ਲਈ ਮਦਦ ਕਰੇਗਾ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਨੂੰ ਇੱਕ ਵਾਰ ਵਾਹੋ ਜੇਕਰ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਨਮੀਂ ਦੀ ਘਾਟ ਨਜ਼ਰ ਆਵੇ ਤਾਂ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਇੱਕ ਹਫਤਾ ਪਹਿਲਾਂ ਸੁਹਾਗਾ ਫੇਰੋ ਬਰਾਨੀ ਹਾਲਾਤਾਂ ਲਈ, 10 ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ 25 ਅਕਤੂਬਰ ਤੱਕ ਪੂਰੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਸਿੰਚਿਤ ਹਾਲਾਤਾਂ ਲਈ 25 ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ 10 ਨਵੰਬਰ ਤੱਕ ਦੇਸੀ ਅਤੇ ਕਾਬੁਲੀ ਛੋਲਿਆਂ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਸਹੀ ਸਮੇਂ ਤੇ ਬਿਜਾਈ ਕਰਨਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਅਗੇਤੀ ਬਿਜਾਈ ਨਾਲ ਬੇਲੋੜੇ ਵਿਕਾਸ ਦਾ ਖਤਰਾ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪਿਛੇਤੀ ਬਿਜਾਈ ਨਾਲ, ਪੌਦਿਆਂ ਵਿੱਚ ਸੋਕਾ ਰੋਗ ਦਾ ਖਤਰਾ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ, ਪੌਦੇ ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਮਾੜਾ ਅਤੇ ਜੜ੍ਹਾਂ ਵੀ ਉਚਿੱਤ ਢੰਗ ਨਾਲ ਨਹੀਂ ਵਧਦੀਆਂ ਹਨ ਬੀਜਾਂ ਵਿੱਚਲੀ ਦੂਰੀ 10 ਸੈ.ਮੀ. ਅਤੇ ਕਤਾਰਾਂ ਵਿੱਚਲੀ ਦੂਰੀ 30-40 ਸੈ.ਮੀ. ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਬੀਜ ਨੂੰ 10-12.5 ਸੈ.ਮੀ. ਡੂੰਘਾ ਬੀਜਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਉੱਤਰੀ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਪੋਰਾ ਢੰਗ ਨਾਲ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਦੇਸੀ ਕਿਸਮਾਂ ਲਈ 15-18 ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ ਅਤੇ 37 ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਕਾਬੁਲੀ ਕਿਸਮਾਂ ਲਈ ਪਾਓ ਜੇਕਰ ਬਿਜਾਈ ਨਵੰਬਰ ਦੇ ਦੂਜੇ ਪੰਦਰਵਾੜੇ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇ ਤਾਂ 27 ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਬਿਜਾਈ ਦਸੰਬਰ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਪੰਦਰਵਾੜੇ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇ ਤਾਂ 36 ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ ਦੇਸੀ ਕਿਸਮਾਂ ਲਈ ਸਿੰਚਿਤ ਅਤੇ ਅਸਿੰਚਿਤ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਨਾਇਟ੍ਰੋਜਨ (ਯੂਰੀਆ 13 ਕਿਲੋ) ਅਤੇ ਫਾਸਫੋਰਸ (ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ 50 ਕਿਲੋ) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ ਪਾਓ ਜਦਕਿ ਕਾਬੁਲੀ ਛੋਲਿਆਂ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਲਈ, ਬਿਜਾਈ ਵੇਲੇ 13 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਅਤੇ 100 ਕਿਲੋ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਵਧੀਆ ਵਰਤੋਂ ਲਈ ਖਾਦਾਂ ਨੂੰ ਖਾਲੀਆਂ ਵਿੱਚ 7-10 ਸੈ.ਮੀ. ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ ਤੇ ਬੀਜੋ
Posted by Vinod Kushwaha
Madhya Pradesh
30-08-2019 08:18 AM
Punjab
08-30-2019 01:53 PM
Vinod ji aap inke uper imidacloprid@60ml ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by RATAN
Punjab
30-08-2019 08:17 AM
Maharashtra
09-06-2019 05:38 PM
आप इसके ऊपर ulala@80gm + admire pro@14gm को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Gurbhej singh
Punjab
30-08-2019 08:16 AM
Punjab
08-30-2019 04:28 PM
Posted by Dhananjay
Chattisgarh
30-08-2019 08:14 AM
Punjab
08-30-2019 04:29 PM
दूध से मलाई को अलग किया जाता है और फिर आप उस मलाई से मखनी बना सकते हो और मखनी से देसी घी बना सकते हो जी
Posted by Dhananjay
Chattisgarh
30-08-2019 08:12 AM
Punjab
08-30-2019 11:57 AM
sahin g swaal ki hai Dudh se malai to cream separater se alag ho jaeegi
Posted by Rajnikant Rai
Bihar
30-08-2019 08:12 AM
Maharashtra
08-30-2019 11:14 AM
रजनीकांत जी आप इसके ऊपर quinalphos @4ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by mohit
Haryana
30-08-2019 08:09 AM
Punjab
08-30-2019 11:13 AM
Mohit ji it is fungal attack to control this do a spray of Metalaxyl@1gm/Ltr or Metalaxyl + Mancozeb@2.5gmLit of water.
Posted by Anil Maan
Haryana
30-08-2019 08:08 AM
Maharashtra
08-30-2019 11:07 AM
Anil ji yeh fungus ke karn ho raha hai iske liye aap folicur@200ml ja pulsor@200ml ja custodia@300ml ja nativo@80gm ja amistar top@200ml ja indofil di avtar@400gm ja hexaconazole@300ml prati acreke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by manveer
Punjab
30-08-2019 08:02 AM
Punjab
08-30-2019 11:01 AM
Manveer ji achar de layi tuc African tall ja J1006 kisam di bijai kar sakde ho.dhanwad
Posted by lakhan sharma
Madhya Pradesh
30-08-2019 07:57 AM
Punjab
08-30-2019 08:05 PM
aap use acchi feed ke sath ek kilo sarson ki khal, 1 kg binaula ki khl subha shaam den 20gm mitha soda rojana ek baar den iske sath fatplus powder 50gm ya fatmax powder 0gm den isse frk padd jaega
Posted by Gurtej Singh
Punjab
30-08-2019 07:53 AM
Rajasthan
08-30-2019 08:06 PM
Iss vich koi darn wali gal nhi hai tuci iss nu Saro da tel 200 ml ate besan 100gm rojana mix krke 5-7 din deo, ehh koi darn wali gal nhi hai..
Posted by Kuldeep Singh
Punjab
30-08-2019 07:49 AM
Maharashtra
08-30-2019 11:03 AM
kuldeep ji tuci makki chari ja bajra kise di vi bijai kar sakde ho.dhanwad
Posted by prabhjot singh
Punjab
30-08-2019 07:38 AM
Rajasthan
08-30-2019 08:07 PM
Nhi ji jekar dhudh saff trike nal leya howe puri safai rakhi howe tan dhudh penn vich koi nuksan nahi hai..
Posted by Randip Daanghar
Uttar Pradesh
30-08-2019 07:24 AM
Punjab
08-30-2019 11:11 AM
Randip ji hydroponics ek takneek jisme bina mitti ke paudhon ko ugaya jata hai.isme pani ke dwara paudhe ko jruri tatv pradan kiye jate hai.dhanywad
Posted by Arshpreet Singh
Punjab
30-08-2019 07:23 AM
Punjab
08-30-2019 10:57 AM
Posted by Arshpreet Singh
Punjab
30-08-2019 07:21 AM
Punjab
08-30-2019 10:49 AM
Posted by Harshay Meena gambhira
Rajasthan
30-08-2019 07:18 AM
Punjab
08-30-2019 10:48 AM
हर्षय जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by Bhupinder singh
Punjab
30-08-2019 07:15 AM
Punjab
08-30-2019 03:09 PM
bhupinder ji tuc isnu 5-7 dina bad vart sakde ho.dhanwad
Posted by sumit
Haryana
30-08-2019 07:09 AM
Maharashtra
08-30-2019 03:11 PM
सुमित जी कृपया इसके लेबल की फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by sumit
Haryana
30-08-2019 07:06 AM
Punjab
08-30-2019 01:52 PM
सुमित जी यह रस चूसने वाले कीटों की रोकथाम के लिए इस्तेमाल की जाती है इसे कपास में इस्तेमाल किया जाता है धन्यवाद
Posted by shyamal kishore mahto
Bihar
30-08-2019 07:06 AM
Maharashtra
08-30-2019 12:43 PM
किशोर जी आप शुरूआती हमले में 5 प्रतिशत नीम एक्सट्रैक्ट 50 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे करें ज्यादा हमला दिखने पर 25 प्रतिशत साइपरमैथरिन 2.4 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें कीटों की गिनती अधिक हो जाने पर स्पाइनोसैड 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें फल पकने के बाद ट्राइज़ोफॉस या किसी और कीटनाशक की स्प्रे .... (Read More)
किशोर जी आप शुरूआती हमले में 5 प्रतिशत नीम एक्सट्रैक्ट 50 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे करें ज्यादा हमला दिखने पर 25 प्रतिशत साइपरमैथरिन 2.4 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें कीटों की गिनती अधिक हो जाने पर स्पाइनोसैड 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें फल पकने के बाद ट्राइज़ोफॉस या किसी और कीटनाशक की स्प्रे ना करें