Experts Q&A Search

Posted by Paramjit Singh
Punjab
30-08-2019 01:13 PM

Punjab
09-03-2019 04:40 PM
Posted by simar
Punjab
30-08-2019 01:08 PM
Punjab
08-31-2019 04:54 PM
tuci uss nu Bendikind bolus pett de kiria lai deo ate Cargill di Heifer dry feed deni suru kro ate Cafplan powder 100gm rojana deo, iss nal vdia growth howegi.
Posted by ਸਰਦਾਰ ਗੁਰਭੇਜ ਸਿੰਘ
Punjab
30-08-2019 01:02 PM
Punjab
08-30-2019 03:44 PM
ਬੱਤਖਾਂ ਦੇ ਬੱਚੇ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਮੇਰੇ ਨਾਲ 97815 89637 ਇਸ ਨੰਬਰ ਤੇ ਸੰਪਰਕ ਕਰੋ ਜੀ
Posted by Daleep singh
Rajasthan
30-08-2019 01:01 PM
Rajasthan
08-30-2019 06:25 PM
दलीप सिंह जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्.... (Read More)
दलीप सिंह जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Maninder singh
Punjab
30-08-2019 12:50 PM
Punjab
09-18-2019 03:39 PM
maninder ji kidiya nu bhajjon layi tusi haldi powder jithe kidiya ondiya othe pao ji. ya fir tusi kapoor v rakh sakte ho. mitti de tel da shidkav nal v tusi kidiya bhja sakde ho ji.
Posted by avish singh
Chattisgarh
30-08-2019 12:49 PM
Maharashtra
08-30-2019 12:52 PM
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्ष.... (Read More)
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्षेत्रों में पाई जाती है यह गले को सूखेपन से राहत देता है यह हाथों, पैरों और गठिया की सूजन से आराम देता है Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum): यह चीन, ब्राज़ील, पूर्व नेपाल और साथ ही बंगाल, बिहार, चटगांव और भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में पाई जाती है इसका तना जामुनी और पत्ते हरे रंग के और बहुत ज्यादा सुगंधित होते है इसमें उचित मात्रा में औषधीय गुण जैसे ऐज़ाडिरैकटिन, ऐंटीफंगल , ऐंटीबैक्टीरियल, और पाचन तंत्र को ठीक रखती है यह गर्म क्षेत्रों में बढ़िया उगता है Babi Tulsi: यह पंजाब से त्रिवेंद्रम, बंगाल और बिहार में भी पाई जाती है इसका पौधा 1-2 फीट लम्बा होता है पत्ते 1-2 इंच लम्बे, अंडाकार और नुकीले होते है इसके पत्तों का स्वाद लौंग की तरह और सब्जियों में स्वाद के लिए प्रयोग किया जाता है तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें इसके मंडीकरण के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से संपर्क कर सकते हैं
Posted by Bheem singh Rathore
Rajasthan
30-08-2019 12:44 PM
Maharashtra
08-30-2019 12:45 PM
bheem ji aap iske liye NPK 191919 ek kilo ko 150 litre pani men mila kar prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Rahul
Uttar Pradesh
30-08-2019 12:28 PM
Punjab
08-30-2019 12:44 PM
Rahul ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki apko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Iqbal Singh randhawa
Punjab
30-08-2019 12:28 PM
Punjab
08-30-2019 12:46 PM
Iqbal ji kirpa karke isdi photo bhejo ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by chahal
Punjab
30-08-2019 12:27 PM
Punjab
08-30-2019 12:48 PM
ਝੁਲਸ ਰੋਗ :- ਪੱਤਿਆਂ ਦੀ ਪਰਤ ਉੱਤੇ ਸਲੇਟੀ ਰੰਗ ਦੇ ਜਾਮਣੀ ਰੰਗ ਦੀ ਧਾਰੀ ਵਾਲੇ ਧੱਬੇ ਪੈ ਜਾਂਦੇ ਹਨ I ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਇਹ ਧੱਬੇ ਵੱਡੇ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ I ਜਿਸ ਬਿਮਾਰੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਫ਼ਸਲ ਵਿਚ ਜ਼ਿਆਦਾ ਦਾਣਾ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦਾ I ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਵਰਤੋਂ ਨਹੀਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ I ਖੇਤ ਨੂੰ ਸਾਫ਼-ਸੁਥਰਾ ਰੱਖੋ I ਜੇਕਰ ਇਸ ਬਿਮਾਰੀ ਦੇ ਲੱਛਣ ਆਉਣ ਤਾਂ 200 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਟੈਬੂਕੋਨਾਜ਼ੋਲ ਜਾਂ .... (Read More)
ਝੁਲਸ ਰੋਗ :- ਪੱਤਿਆਂ ਦੀ ਪਰਤ ਉੱਤੇ ਸਲੇਟੀ ਰੰਗ ਦੇ ਜਾਮਣੀ ਰੰਗ ਦੀ ਧਾਰੀ ਵਾਲੇ ਧੱਬੇ ਪੈ ਜਾਂਦੇ ਹਨ I ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਇਹ ਧੱਬੇ ਵੱਡੇ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ I ਜਿਸ ਬਿਮਾਰੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਫ਼ਸਲ ਵਿਚ ਜ਼ਿਆਦਾ ਦਾਣਾ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦਾ I ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਵਰਤੋਂ ਨਹੀਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ I ਖੇਤ ਨੂੰ ਸਾਫ਼-ਸੁਥਰਾ ਰੱਖੋ I ਜੇਕਰ ਇਸ ਬਿਮਾਰੀ ਦੇ ਲੱਛਣ ਆਉਣ ਤਾਂ 200 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਟੈਬੂਕੋਨਾਜ਼ੋਲ ਜਾਂ 200 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਟਿਲਟ 25 ਈ ਸੀ ਜਾਂ 200 ਗ੍ਰਾਮ ਦਾ 25% ਕਾਰਬੈਂਡਾਜ਼ਿਮ 200 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਘੋਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦਾ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ I 15 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਅੰਤਰਾਲ ਦੌਰਾਨ ਇਸ ਘੋਲ ਦਾ ਫਿਰ ਤੋਂ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ I
Posted by Rocky Kumar
Uttar Pradesh
30-08-2019 12:07 PM
Punjab
08-30-2019 01:04 PM
nazdik de pashuan de hospital naal sampark karo
Posted by sanjay saini
Delhi
30-08-2019 12:01 PM
Rajasthan
08-30-2019 07:07 PM
संजय सैनी जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्.... (Read More)
संजय सैनी जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by gurusevk
Rajasthan
30-08-2019 11:54 AM
Maharashtra
08-30-2019 12:08 PM
गुरसेवक जी यह तत्व की कमी के कारण होता है इसके लिए आप इसके ऊपर NPK 191919 एक किलो को 150 लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by sonu
Rajasthan
30-08-2019 11:49 AM
Punjab
08-30-2019 12:10 PM
सोनू जी इसके ऊपर कीट का हमला चेक करें अगर मौजूद है तो आप इसके ऊपर prophenofos@500ml याEthion@800ml या oberon@200ml या Bayer की Admire pro@12gm या Flotis@400ml की प्रति एकड़ के हिसाब से 150 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें
Posted by ryan
Punjab
30-08-2019 11:46 AM
Maharashtra
08-30-2019 12:04 PM
ਤੁਸੀ ਗਾਜਰ ,ਸ਼ਲਗਮ , ਫੁੱਲਗੋਭੀ, ਪੱਤਾ ਗੋਭੀ , ਬਰੋਕਲੀ, ਆਲੂ , ਟਮਾਟਰ,ਪਾਲਕ, ਮੂਲੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Vandana Kumari
Uttar Pradesh
30-08-2019 11:40 AM
Rajasthan
08-30-2019 11:54 AM
वंदना कुमारी जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण क.... (Read More)
वंदना कुमारी जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by ryan
Punjab
30-08-2019 11:40 AM
Maharashtra
08-30-2019 12:11 PM
ਤੁਸੀ ਮੱਕੀ ਚਰੀ ਜਾ ਬਾਜਰਾ ਕਿਸੇ ਦੀ ਵੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Surjit Singh
Punjab
30-08-2019 11:34 AM
Punjab
08-30-2019 11:59 AM
Surjit singh ji PAU Kissan mela 20-21 sep nu ho reha hai. Thank you.
Posted by bablu kumar
Bihar
30-08-2019 11:22 AM
Punjab
08-30-2019 01:53 PM
बरसीम, लूसर्न, लोबिया आदि छोटे पत्तों वाला कोई भी घास इस तरह के घास में प्रोटीन की मात्रा बहुत होती है और पानी की मात्रा लंबे पत्तो वाले घास के मुकाबले में कम कम पानी की मात्रा वाला घास बकरी के लिए उत्तम होता है
Posted by singh dhaliwal
Punjab
30-08-2019 11:20 AM
Maharashtra
08-30-2019 11:59 AM
ਜੇਕਰ ਇੱਕ ਬੂਟੇ ਤੇ ਦੋ ਸੁੰਡੀਆਂ ਦਿਖਣ ਤਾਂ ਬੀ ਟੀ 10 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ 10 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਅਤੇ ਬਾਅਦ ਵਿੱਚ ਨਿੰਮ ਦੇ 40 ਗ੍ਰਾਮ ਅਰਕ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਜੇਕਰ ਹਮਲਾ ਵੱਧ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਥਾਇਉਡੀਕਾਰਬ 75 ਡਬਲਿਯੂ ਪੀ 40 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ 15 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਸਪਾਈਨੋਸੈਡ 25 ਈ ਸੀ ਜਾਂ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਇਮਾ ਮੈਕਟਿਨ ਬੈਂਜੋਏਟ 5 ਐੱਸ ਜੀ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਪਰ.... (Read More)
ਜੇਕਰ ਇੱਕ ਬੂਟੇ ਤੇ ਦੋ ਸੁੰਡੀਆਂ ਦਿਖਣ ਤਾਂ ਬੀ ਟੀ 10 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ 10 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਅਤੇ ਬਾਅਦ ਵਿੱਚ ਨਿੰਮ ਦੇ 40 ਗ੍ਰਾਮ ਅਰਕ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਜੇਕਰ ਹਮਲਾ ਵੱਧ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਥਾਇਉਡੀਕਾਰਬ 75 ਡਬਲਿਯੂ ਪੀ 40 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ 15 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਸਪਾਈਨੋਸੈਡ 25 ਈ ਸੀ ਜਾਂ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਇਮਾ ਮੈਕਟਿਨ ਬੈਂਜੋਏਟ 5 ਐੱਸ ਜੀ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਤਾਕਤ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ NPK 191919 ਇਕ ਕਿਲੋ ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Banshi lal uraon
Chattisgarh
30-08-2019 11:18 AM
Maharashtra
08-30-2019 01:07 PM
मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिसमे नमी सोखने की क्षमता हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की pH 6-7 अनुकूल है आप इसकी .... (Read More)
मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिसमे नमी सोखने की क्षमता हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की pH 6-7 अनुकूल है आप इसकी किस्मे जैसे Arka Meghana,Arka Sweta,Kashi Early, Kashi Surkh की बिजाई कर सकते है खेत को तैयार करने के लिए 2-3 बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद डलियों को तोड़ें बिजाई से 15-20 दिन पहले रूड़ी की खाद 150-200 क्विंटल प्रति एकड़ डालकर मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें टमाटर और मिर्च की खेती एक ही या नज़दीक वाले खेत में ना करें, क्योंकि दोनों की बीमारियां एक जैसी होती हैं और इस कारण एंथ्राक्नोस और बैक्टीरिया वाली बीमारीयों के बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है मिर्च की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ की फसल के लिए मई-जून और गर्मियों की फसल के लिए फरवरी - मार्च का समय मिर्च की रोपाई के लिए उपयुक्त होता है खरीफ के मौसम में 60-75 सैं.मी. x 45 सैं.मी. और सिंचित क्षेत्रों में 60 x 60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में बीजों को 3-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें और फिर मिट्टी से ढक दें इसकी मुख्य खेत में रोपाई की जाती है 1 मीटर चौड़े और आवश्यकतानुसार लंबे बैड बनाएं कीटाणु रहित कोकोपिट 300 किलो, 5 किलो नीम केक को मिलाए और 1-1किलो एज़ोसपीरिलियम और फासफोबैक्टीरिया भी डालें उपचार किए हुए बीज ट्रे में एक बीज प्रति सैल बोयें बीज को कोकोपिट से ढक दें और ट्रे एक- दूसरे के साथ रखें बीज अंकुरन तक इन्हें पॉलीथीन से ढक दें नर्सरी में बीज बीजने के बाद बैडों को 400 मैश नाइलोन जाल या पतले सफेद कपड़े से ढक दें यह नए पौधों को कीड़े-मकौड़े और बीमारियों के हमले से बचाता है 6 दिनों के बाद, ट्रे में लगे नए पौधों को एक एक करके जाल की छांव के नीचे बैडों में लगाएं बीज अंकुरन तक पानी देने वाले बर्तन की मदद से पानी दें बिजाई के 18 दिन बाद 19:19:19 की 0.5 % (5 ग्राम प्रति लीटर ) की स्प्रे करें किस्मों के लिए 200 ग्राम बीज और हाइब्रिड के लिए 80-100 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (110 किलो यूरिया), फासफोरस 16 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा पनीरी खेत में लगाने के समय डालें रोपाई के बाद बाकी बची नाइट्रोजन दो बराबर हिस्सों में 30वें और 50वें दिन डालें सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 84 किलो (182 किलो यूरिया), फासफोरस 24 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 किलो) प्रति एकड़ डालें रोपाई से पहले 24 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 52 किलो), फासफोरस की पूरी मात्रा और पोटाश की आधी मात्रा प्रति एकड़ में डालें बाकी बची नाइट्रोजन को पांच भागों में बांटें और पोटाश को तीन बराबर भागों में बांटें नाइट्रोजन 12 किलो (यूरिया 26 किलो) को बिजाई के बाद 45वें, 60वें, 75वें, 95वें और 115वें दिन डालें और पोटाश 4 किलो को बिजाई के बाद 45वें, 60वें, और 75वें दिन डालें 45 दिनों तक गोडाई करें, कही की मदद से मिट्टी चढ़ाएं और खेत को नदीन मुक्त रखें यदि नदीनों की रोकथाम ना की जाये तो यह 70-90 % पैदावार कम कर देते हैं रोपाई से पहले मुख्य खेत में पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ में डालें यदि नदीनों की संख्या ज्यादा हो तो उनके अंकुरण के बाद सेन्कोर 800 मि.ली की स्प्रे प्रति एकड़ में करें नदीनों की रोकथाम के साथ मिट्टी में नमी को बनाए रखने के लिए मलचिंग एक प्रभावी तरीका है मिट्टी में नमी के आधार पर सर्दियों में 6-7 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 4-5 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए गंभीर होती है इस अवस्था पर पानी की कमी से फल गिरते हैं जिससे फलों के उत्पादन में कमी होती है विभिन्न खोजों में यह पाया गया है, कि प्रत्येक पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई से जड़ों में नमी ज्यादा होती है जिससे वे अधिक उपज देती हैं मिर्चों की तुड़ाई हरा रंग आने पर करें या फिर पकने के लिए पौधे पर ही रहने दें मिर्चों का पकने के बाद वाला रंग किस्म पर निर्भर करता है अधिक तुड़ाइयां लेने के लिए यूरिया 10 ग्राम प्रति लीटर और घुलनशील K @ 10 ग्राम प्रति लीटर पानी (1 प्रतिशत प्रत्येक का घोल) की स्प्रे 15 दिनों के फासले पर कटाई के समय करें पैकिंग के लिए मिर्चें पक्की और लाल रंग की होने पर तोड़ें सुखाने के लिए प्रयोग की जाने वाली मिर्चों की पूरी तरह पकने के बाद ही तुड़ाई करें
Posted by ਗੁਰਦੇਵ ਸਿੰਘ ਸੰਧੂ
Punjab
30-08-2019 11:14 AM
Punjab
08-30-2019 11:18 AM
ਇਸ ਬਿਮਾਰੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਸਹੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਪੌਸ਼ਟਿਕ ਤੱਤ ਪਾਉਂਦੇ ਰਹਿਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਸਿੱਟਾ ਬਣਨਾ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਵੇ ਉਸ ਸਮੇਂ 200 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਟੈਬੂਕੋਨਾਜ਼ੋਲ ਜਾਂ 200 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਪ੍ਰੋਪੀਕੋਨਾਜੋਲ ਦਾ 200 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਘੋਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਇਸ ਦਾ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ 15 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਇਸ ਘੋਲ ਦਾ ਫਿਰ ਤੋਂ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ
Posted by manga
Rajasthan
30-08-2019 11:01 AM
Maharashtra
08-30-2019 11:02 AM
Manga ji aap gobh ki sundi ke liye aap iske uper fame@20ml ya coragen@60ml ko 150 litre pani men mila kar spray karen.dhanywad
Posted by gurdeep singh
Punjab
30-08-2019 10:56 AM
Punjab
08-30-2019 03:50 PM
gurdeep singh ji sat sri akal ji , tohadi gal bilkul sahi hai ji phone te gal karvai jave ji par jekar phone gal karvai jave ta har time inniya jeyada call te kissana nal gal sambav nahi ho sakdi ji. ese layi asi kehnde ha ke tusi audio vich record karke swal puche te mahir nu request karo ke audio vich hi answer dase ji. ehi sab to best tareeka hai i . baki tusi sada helpline number te working day vich 9 to 6 vaje tak call karde ho ta call chaki jandi hai ji . baki koe hor sujav hove ta sade helpline no. 97779977641 te call kar sakde ho ji.
Posted by ਗੁਰਦੇਵ ਸਿੰਘ ਸੰਧੂ
Punjab
30-08-2019 10:55 AM
Maharashtra
08-30-2019 11:17 AM
gurdev ji brown leaf spot bimari de layi tuhanu isde vich kuch hor milaun di lod nahi hai. tuc Tebuconazole @ 200 ml or Propiconazole @200 ml nu 150 litre pani vich mila ke prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by Mohit Rathore
Rajasthan
30-08-2019 10:54 AM
Punjab
08-30-2019 11:19 AM
Mohit ji kripya btaye ke aapne iske uper koi spray ki hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by pramod
Rajasthan
30-08-2019 10:47 AM
Punjab
08-30-2019 12:12 PM
Pramod ji dono me se kisi bhi samey spray kar sakte hai jab khet men 40% tak nami reh jaye tab aap isme spray kar sakte hai.dhanywad
Posted by ਹਰਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਢਿੰਲੋ
Punjab
30-08-2019 10:46 AM
Punjab
08-30-2019 12:15 PM
harvinder ji kirpa karke daso ke isde vich tuc kehdi spray kiti hai ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by sukhpinder singh bhullar
Punjab
30-08-2019 10:45 AM
Maharashtra
08-30-2019 12:17 PM
ਜੇਕਰ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 80-100 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਫਸਲ ਨੂੰ ਫੁੱਲ ਨਾ ਨਿਕਲਣ ਜਾਂ ਫੁੱਲ ਘੱਟ ਹੋਣ ਤਾਂ ਫੁੱਲਾਂ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸੂਖਮ-ਤੱਤ ਖਾਦ 750 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪ੍ਰਤੀ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਬੀ.ਟੀ. ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 85, 95 ਅਤੇ 105 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ 13:0:45 ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ 10 ਗ੍ਰਾਮ ਜਾਂ ਪੋਟਾਸ਼ 5 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਮੇਂ ਕਰੋ ਵਧ.... (Read More)
ਜੇਕਰ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 80-100 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਫਸਲ ਨੂੰ ਫੁੱਲ ਨਾ ਨਿਕਲਣ ਜਾਂ ਫੁੱਲ ਘੱਟ ਹੋਣ ਤਾਂ ਫੁੱਲਾਂ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸੂਖਮ-ਤੱਤ ਖਾਦ 750 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪ੍ਰਤੀ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਬੀ.ਟੀ. ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 85, 95 ਅਤੇ 105 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ 13:0:45 ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ 10 ਗ੍ਰਾਮ ਜਾਂ ਪੋਟਾਸ਼ 5 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਮੇਂ ਕਰੋ ਵਧੇਰੇ ਪੈਦਾਵਾਰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਲਈ ਪੋਟਾਸ਼ੀਅਮ 10 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਅਤੇ ਡੀ.ਏ.ਪੀ. 20 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ (ਪਹਿਲੇ ਫੁੱਲ ਖਿਲਣ ਤੋਂ ਹਰੇਕ 15 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ 2-3 ਸਪਰੇਆਂ) ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਕਈ ਵਾਰੀ ਵਰਗਾਕਾਰ ਲਾਰਵਾ ਡਿੱਗਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਨਾਲ ਫੁੱਲ ਝੜਨੇ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ, ਇਸਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਪਲੈਨੋਫਿਕਸ (ਐਨ.ਏ.ਏ.) 4 ਮਿ.ਲੀ. ਅਤੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸੂਖਮ-ਤੱਤ 120 ਗ੍ਰਾਮ, ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ ਸਲਫੇਟ 150 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ 15 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਜੇਕਰ ਖਰਾਬ ਮੌਸਮ ਦੇ ਕਾਰਨ ਟੀਂਡੇ ਝੜਦੇ ਦਿਖਾਈ ਦੇਣ ਤਾਂ ਇਸ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ 100 ਗ੍ਰਾਮ 00:52:34 + 30 ਮਿ.ਲੀ. ਹਿਊਮਿਕ ਐਸਿਡ (>12%) + 6 ਮਿ.ਲੀ. ਸਟਿੱਕਰ ਨੂੰ 15 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ 10 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਤਿੰਨ ਸਪਰੇਆਂ ਕਰੋ ਅੱਜ-ਕੱਲ ਪੱਤਿਆਂ ਵਿੱਚ ਲਾਲੀ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਦਿਖ ਰਹੀ ਹੈ, ਇਸ ਦਾ ਮੁੱਖ ਕਾਰਨ ਪੌਸ਼ਟਿਕ ਤੱਤਾਂ ਦੀ ਘਾਟ ਹੈ ਇਸ ਨੂੰ ਖਾਦਾਂ ਦੇ ਸਹੀ ਉਪਯੋਗ ਨਾਲ ਠੀਕ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਕਰਨ ਲਈ 1 ਕਿਲੋ ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ ਸਲਫੇਟ ਦੀ ਪੱਤਿਆਂ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਅਤੇ ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਯੂਰੀਆ 2 ਕਿਲੋ ਨੂੰ 100 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ
Posted by Umesh Kumar
Punjab
30-08-2019 10:43 AM
Punjab
08-30-2019 10:47 AM
उमेश जी आप इन सब को मिला कर इकठे स्प्रे नहीं कर सकते आप डा दलाल घोल की स्प्रे कर सकते है डॉ. दलाल घोल तैयार करने का फॉर्मूला: • 2.5 किलो यूरिया, 2.5 किलो डी.ए.पी. और आधा किलो जिंक (21 प्रतिशत वाली) लें • डी.ए.पी. को छिड़काव से एक दिन पहले प्लास्टिक या मिट्टी के बर्तन में भिगोकर रख दें और दिन में 2—3 बार इसे डंडे से हिलाते रह.... (Read More)
उमेश जी आप इन सब को मिला कर इकठे स्प्रे नहीं कर सकते आप डा दलाल घोल की स्प्रे कर सकते है डॉ. दलाल घोल तैयार करने का फॉर्मूला: • 2.5 किलो यूरिया, 2.5 किलो डी.ए.पी. और आधा किलो जिंक (21 प्रतिशत वाली) लें • डी.ए.पी. को छिड़काव से एक दिन पहले प्लास्टिक या मिट्टी के बर्तन में भिगोकर रख दें और दिन में 2—3 बार इसे डंडे से हिलाते रहें इस प्रक्रिया से डी.ए.पी. खाद में मौजूद पोषक तत्व अच्छी तरह मिल जायेंगे   • इसके बाद छिड़काव के समय यूरिया और जिंक को अलग अलग प्लास्टिक या मिट्टी के बर्तनों में पानी में घोल लें इसके बाद 100 लीटर पानी में इन्हें घोलकर फसल पर छिड़कें या फिर एक पैमाना तैयार कर लें और हर टैंकी में उस पैमाने के अनुसार घोली हुई खाद डालते रहें और बाकी पानी मिला लें   • इस बात का खास ध्यान रखें कि यह घोल तैयार करने के लिए किसी धातु के बर्तन का प्रयोग ना किया जाये और इस घोल का प्रयोग सिर्फ 100 लीटर पानी में ही किया जाये, ना कम ना ज्यादा   • फसल पर घोल की प्रक्रिया साधारण रखें पौधे पर एक ही जगह ज्यादा घोल का छिड़काव ना करें इससे पौधे के पत्तों को नुकसान पहुंच सकता है इस स्प्रे से पौधों को भरपूर पोषक तत्व मिल जायेंगे
Posted by akash kumar
Haryana
30-08-2019 10:43 AM
Uttar Pradesh
08-30-2019 05:39 PM
Akash kumar ji Commercial layer feed dijiye.Warna maximum production Nahi milega ji.
Posted by gurmukh chahal
Rajasthan
30-08-2019 10:41 AM
Maharashtra
01-21-2020 10:56 AM
Gurmukh chahal ji, metominostrobin dhaan mein blast ki bimari ki roktham ke liye istemal kiya jata hai, iski matra prati acre ke hisaab se 200 ml ko 150 liter pani mein mila kar spray ki jati hai, yeh Summit Agro (Sumitomo) nam ki company se mil jata hai market mein, dhanywad
Posted by jinil patel
Gujarat
30-08-2019 10:36 AM
Punjab
08-31-2019 04:55 PM
यदि आप मछली पालन शुरू करना चाहते है तो इसकी पूंग छोड़ने के लिए मार्च से अक्तूबर का समय उपयुक्त होता है एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिले.... (Read More)
यदि आप मछली पालन शुरू करना चाहते है तो इसकी पूंग छोड़ने के लिए मार्च से अक्तूबर का समय उपयुक्त होता है एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिलेगा यदि बढ़िया खुराक डाली जाए तो 8 महीनों में यह लगभग 800—900 ग्राम का हो जाता है बाकी मछली पालन के लिए नहरी पानी बढ़िया होता है और आप गांव का छप्पड़ ठेके से लेकर भी यह काम शुरू कर सकते हैं तालाब में मछली के बीज डालने से पहले इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि उस तालाब में काफी मात्रा में मछली की कुदरती खुराक उपलब्ध है तालाब में प्लैंकटान की अच्छी मात्रा करने के उद्देश्य से यह जरूरी है कि रूड़ी की खाद के साथ सुपर फास्फेट 300 किलोग्राम और यूरिया 180 किलोग्राम प्रति वर्ष प्रति हेक्टैयर के मान से डाली जाए तालाब में से हानिकारक मछलियों और कीड़े मकौड़ों को निकाल लेना चाहिए मंडीकरण की कोई दिक्कत नहीं है यह लोकल ही सेल हो जाती हे
Posted by Dev Gupta
Uttar Pradesh
30-08-2019 10:21 AM
Rajasthan
09-04-2019 01:23 PM
Dev Gupta जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म .... (Read More)
Dev Gupta जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by ramanjit mahal
Punjab
30-08-2019 10:19 AM
Punjab
08-30-2019 12:21 PM
Posted by Trilok Pati Nath
Bihar
30-08-2019 10:19 AM
Maharashtra
08-30-2019 12:41 PM
Posted by satinderpal singh
Punjab
30-08-2019 10:09 AM
Punjab
08-30-2019 10:16 AM
ਤੁਸੀ j1006 ਕਿਸਮ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸਦੀ ਮਾਤਰਾ 3 -4 ਕਿੱਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਕਨਾਲ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Maninder Singh
Punjab
30-08-2019 10:01 AM
Maharashtra
09-06-2019 05:40 PM
maninder ji isde uper tuc waste decomposer di spray karo is to bad ik mahine bad tuc isdi varto kar sakde ho.dhanwad
Posted by Lalit Markam
Chattisgarh
30-08-2019 09:58 AM
Maharashtra
08-30-2019 01:08 PM
यह फसल रेतली दोमट से चिकनी किसी भी तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती हैं देर से बीजने वाली किस्मों के लिए चिकनी दोमट मिट्टी को पहल दी जाती है जल्दी पकने वाली के लिए रेतली दोमट का प्रयोग करें मिट्टी की पी एच 6-7 होनी चाहिए मिट्टी की पी एच बढ़ाने के लिए उसमें चूना डाला जा सकता है प्रसिद्ध किस्में : पूसा सनोबाल 1, पूसा .... (Read More)
यह फसल रेतली दोमट से चिकनी किसी भी तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती हैं देर से बीजने वाली किस्मों के लिए चिकनी दोमट मिट्टी को पहल दी जाती है जल्दी पकने वाली के लिए रेतली दोमट का प्रयोग करें मिट्टी की पी एच 6-7 होनी चाहिए मिट्टी की पी एच बढ़ाने के लिए उसमें चूना डाला जा सकता है प्रसिद्ध किस्में : पूसा सनोबाल 1, पूसा सनोबाल के-1 , पंत शुभ्रा खेत को अच्छी तरह जोतकर नर्म करें अच्छी तरह गली हुई रूड़ी की खाद आखिरी जोताई के समय डालें अगेती किस्मों के लिए जून-जुलाई रोपाई के लिए सबसे अच्छा समय है और पिछेती किस्मों के लिए अगस्त से मध्य सितंबर और अक्तूबर से नवंबर का पहला सप्ताह रोपाई के लिए अच्छा समय है अगेती किस्मों के लिए 45x45 से.मी. और पिछेती किस्मों के लिए 45x30 से.मी. का फासला होना चाहिए बीजों को 1-2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के लिए डिबलिंग विधि और रोपण विधि का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीजों को बोयें और आवश्यकतानुसार खादें और सिंचाई दें बिजाई के 25-30 दिन बाद पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं रोपाई के लिए 3-4 सप्ताह पुराने पौधों का प्रयोग करें अगेते मौसम की किस्मों के लिए 500 ग्राम, जबकि पिछेते और मुख्य मौसम की किस्मों के लिए 250 ग्राम बीज की प्रति एकड़ में आवश्यकता होती है बिजाई से पहले गर्म पानी (30 मिनट के लिए 50 डिगरी सैल्सियस) या स्ट्रैप्टोसाइक्लिन 0.01 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर 2 घंटे के लिए बीजों को इस घोल में भिगोकर रखें उपचार के बाद बीजों को छांव में सुखाएं और फिर उन्हें बैड पर बो दें रबी के मौसम में काली फंगस का हमला ज्यादा होता है इसकी रोकथाम के लिए मरकरी क्लोराइड से बीजों का उपचार करना जरूरी होता है इसके लिए मरकरी क्लोराइड 1 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर 30 मिनट के लिए बीजों को इस घोल में भिगोकर रखें और फिर छांव में सुखाएं रेतली मिट्टी में ये फसल उगाने से तना गलन का खतरा रहता है इसके लिए कार्बेनडाज़िम 50 प्रतिशत डब्लयु पी 3 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें खेत में 40 टन पूरी तरह गली हुई रूड़ी की खाद डालें और साथ ही 50 किलो नाइट्रोजन, 25 किलो फासफोरस और 25 किलो पोटाश (110 किलो यूरिया, 155 किलो सुपरफासफेट और 40 किलो म्यूरेटे ऑफ पोटाश) सारी रूड़ी की खाद, सुपरफासफेट और म्यूरेटे ऑफ पोटाश और आधा यूरिया फसल रोपाई से पहले डालें बाकी बचा यूरिया बीजने के चार सप्ताह बाद डाल देना चाहिए अच्छी पैदावार लेने के लिए और अधिक फूलों के लिए 5-7 ग्राम घुलनशील खादें (19:19:19) प्रति लि. का प्रयोग करें रोपाई के 40 दिनों के बाद 4-5 ग्राम 12:16:0, नाइट्रोजन और फासफोरस, 2.5-3 ग्राम लघु तत्व और 1 ग्राम बोरोन प्रति लि. का छिड़काव करें फूल की अच्छी गुणवत्ता के लिए 8-10 ग्राम घुलनशील खादें (13:00:45) प्रति लि. पानी में मिलाएं मिट्टी का परीक्षण करवाएं बीजने के 30-35 दिनों के बाद मैगनीश्यिम की कमी को पूरा करने के लिए 5 ग्राम मैगनीश्यिम सलफेट प्रति लि. प्रयोग करें कैल्शियम की कमी को पूरा करने के लिए कैल्शियम नाइट्रेट 5 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर 30-35 दिनों के बाद डालें कभी कभी बेरंग तने देखे जा सकते हैं फूल भी भूरे रंग के हो जाते हैं और पत्ते मुड़ने लग जाते हैं यह बोरोन की कमी के कारण होता है इसके लिए बोरैक्स 250-400 ग्राम प्रति एकड़ में डालें नदीनों को रोकने के लिए फसल को खेत में लगाने के बाद फलुक्लोरालिन(बसालिन) @800 मि.ली. को 150 लि. पानी में मिलाकर छिड़काव करें और 30-40 दिनों के बाद रोपाई करें फसल को खेत में लगाने से 1 दिन पहले पैंडीमैथलीन 1 लि. प्रति एकड़ का छिड़काव करें रोपाई के बाद तुरंत पहली सिंचाई करें मिट्टी, जलवायु, के आधार पर गर्मियों में 7-8 दिनों के अंतराल पर और सर्दियों में 10-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें पूरा फूल विकसित होने पर सुबह के समय फूलों की कटाई की जा सकती है और कटाई के बाद फूलों को ठंडी जगह पर रखना चाहिए कटाई के बाद फूलों को आकार के अनुसार छांट लें
Posted by chahal
Punjab
30-08-2019 09:49 AM
Punjab
08-31-2019 12:52 AM
chahal ji isnu tuc 2021 tak lagbhag vart sakde ho.