Posted by mujammil
Uttar Pradesh
02-09-2019 04:10 PM
Dupont galileo ek fungiciode hai isme picoxystrobin nam ka salt maujood hai.dhanywad

Posted by jassa
Punjab
02-09-2019 04:09 PM
BhaaG isnu rajwa hara chaara te 3kg feed pao Ikale dararh ne kujh ni karna sunh to 1 mahina pehlan malap rehat karn di dawaee dyo

Posted by jassa
Punjab
02-09-2019 04:08 PM
Tuci uss nu Tineta company da vitum-H 10-10ml swere sham de skde ho, baki uss nu rojana 35-40kg hara chara, rojana 1.5-2kg feed deo ate sunn ton 1 mahina pehla Metabolite powder di rojana 1`pudi deo, iss nal frak paa jawega..

Posted by shailsingh
Rajasthan
02-09-2019 04:07 PM
इस बीमारी की रोकथाम के लिए रोधक किस्मों का प्रयोग करें इस बीमारी की रोकथाम के लिए इंडोफिल एम 45 या कप्तान 260 ग्राम को 100 लीटर पानी में डालकर प्रति एकड़ पर छिड़काव करें जरूरत पड़ने पर 15 दिनों के फासले पर दुबारा स्प्रे करें

Posted by sundarlalyadav
Madhya Pradesh
02-09-2019 04:03 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Bablu Pateliya
Madhya Pradesh
02-09-2019 04:00 PM
बबलू पटेलिया जी आप इसमें क्विनोल्फोस 800 मिली लीटर का इस्तेमाल कर सकते हैं .
Posted by Omprakash Bagda
Rajasthan
02-09-2019 03:52 PM
Sahib G isnu rajwa hara chaara te har 4kg dudh lai 1kg feed pao har 3 mahine baad pet ke kirhe nikalne ki dwaee deo Agar baccha dudh chungta hai to pehle chugana baad mein nahi Dusra fat dusri jagah te v check karwa lao koi garbar v ho sakti hai
Posted by pawan bishnoi
Rajasthan
02-09-2019 03:51 PM
ਹਾਜੀ ਸਤਿ ਸ਼੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਵੱਲੋਂ ਪੁੱਛੇ ਸਾਰੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦਾ ਜਵਾਬ ਦਾ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਦੇਖਣ ਲਈ ਐਪ ਵਿੱਚ ਮੇਰੇ ਸਵਾਲ ਤੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਮੇਰੀ ਪ੍ਰੋਫਾਈਲ ਦੇ ਹੇਠਾ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਜਵਾਬ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਵੀ ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਨੂੰ ਜਵਾਬ ਸਬੰਧੀ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਨੰਬਰ: 97799-77641 ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ .... (Read More)
ਹਾਜੀ ਸਤਿ ਸ਼੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਵੱਲੋਂ ਪੁੱਛੇ ਸਾਰੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦਾ ਜਵਾਬ ਦਾ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਦੇਖਣ ਲਈ ਐਪ ਵਿੱਚ ਮੇਰੇ ਸਵਾਲ ਤੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਮੇਰੀ ਪ੍ਰੋਫਾਈਲ ਦੇ ਹੇਠਾ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਜਵਾਬ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਵੀ ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਨੂੰ ਜਵਾਬ ਸਬੰਧੀ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਨੰਬਰ: 97799-77641 ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ

Posted by कमलेश झा
Bihar
02-09-2019 03:47 PM
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो
इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें
मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए
इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति वर.... (Read More)
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो
इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें
मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए
इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति वर्ग फीट जगह) में मिलायें
इसके बाद वेस्ट जैसे कि बची कुची सब्जियां, फल, कच्चा गोबर, गोबर की सलरी की 8—10 इंच मोटी परत डालें दूसरी परत के बाद इसके ऊपर सूखे पत्ते या पराली से ढक दें हर परत के बाद पानी छिड़कें ताकि नमी बनी रहे
वर्मीकंपोस्ट के बैड को 3—4 इंच मोटी गोबर की परत से ढक दें और इसके ऊपर बोरा या तिरपाल रखें ताकि नमी बनी रहे
रसोई, फसलों या डेयरी के बचे कुचे की परत को रैक से पलटते रहें और आवश्यकतानुसार थोड़ा थोड़ा करके और वेस्ट भी डाल सकते हैं इसके ऊपर कच्चा गोबर भी डाल सकते हैं पर ध्यान रखें कि यह परत पहले जितनी ही मोटी रहें
वर्मी कंपोस्ट की खाद मौसम के हिसाब से 45—60 दिनों में तैयार हो जाती है सबसे ऊपर वाली परत को हटाकर गंडोए छलनी से अलग कर लें और निचली छोड़ दें इसके ऊपर दोबारा रसोई या एग्रो वेस्ट की 6 इंच मोटी परत बिछाकर दोबारा खाद तैयार की जा सकती हैं 45 दिनों के बाद पानी छिड़कना बंद करने से भी गंडोए निचली परत में चले जाते हैं और छलनी से अलग करने में समय कम लगता है तैयार वर्मी कंपोस्ट काले भूरे रंग की गंध रहित और चाय पत्ती जैसी होती है इसे छांव में हवा में सुखकर आवश्यकतानुसार थैले या बोरियों में डालकर रखा जा सकता है एक टन वर्मी कंपोस्ट में 1.0—1.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 5—10 किलोग्राम पोटाश और 3.5—5.0 किलो फासफोरस होता है इसके अलावा इसमें कई तरह के एन्ज़ाइम और सूक्ष्म तत्व कॉपर, आयरन, जिंक, सल्फर, कैलशियम और मैगनीशियम आदि होते हैं
Posted by Ashish
Madhya Pradesh
02-09-2019 03:30 PM
आशीष जी आप इसमें पहले गोभ की सुंडी और धब्बे चेक करें .

Posted by shailsingh
Rajasthan
02-09-2019 03:29 PM
शैलसिंघ जी आप Krishi Vigyan Kendra P.O. Box No. 29, Danta, Distt. Barmer, Rajasthan में पानी और मिट्टी की जांच करवा सकते हैं.
Posted by jaswant singh
Punjab
02-09-2019 03:29 PM
Deputy director anlmal husbandry or Krishi vigyan kendar or VETERINARY UNIVERSITY LUDHIANA NAAL SAMPARK KARO

Posted by लालु परमार
Rajasthan
02-09-2019 03:29 PM
लालु जी ये आप उनके खाने और हज़म करने के हिसाब से दे सकते है वैसे एक बकरी लगभग 5—6 किलो तक चारा खा जाती है इसमें आप हरा चारा और भूसा मिक्स करके दे सकते है

Posted by लालु परमार
Rajasthan
02-09-2019 03:28 PM
body weight ka 4-6% dry matter dena chahiye bhussa 100% dry matter green depend karta hai aap kis condition me de rahe hai

Posted by Garsevak Garsevaksingh
Punjab
02-09-2019 03:26 PM
Veterinary university Ludhiana lyao Operation karke kad denge 0161 2414002 te phone kar lao

Posted by guddumeena
Rajasthan
02-09-2019 03:18 PM
इसे भारत की मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है गेहूं की खेती के लिए चिकनी दोमट या दोमट बनतर, अच्छे ढांचे और पानी सोखने की सामान्य क्षमता वाली मिट्टी उचित होती है छिद्रित और पानी कम सोखने वाली मिट्टी गेहूं की खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती सूखे हालातों, अच्छे जल निकास वाली भारी मिट्टी इसकी खेती के लिए .... (Read More)
इसे भारत की मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है गेहूं की खेती के लिए चिकनी दोमट या दोमट बनतर, अच्छे ढांचे और पानी सोखने की सामान्य क्षमता वाली मिट्टी उचित होती है छिद्रित और पानी कम सोखने वाली मिट्टी गेहूं की खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती सूखे हालातों, अच्छे जल निकास वाली भारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल होती है भारी मिट्टी जिसका घटिया ढांचा और घटिया जल निकास हो इसकी खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती क्योंकि गेहूं की फसल जल जमाव के प्रति संवेदनशील होती है Raj 1482: इस किस्म का गहरे हरे रंग का पौधा, जिसका कद 80-90 सैं.मी. होता है इसकी अधिक फलियां, मोटे दाने, चमकदार और हल्के रंग के दाने होते हैं इसकी औसतन पैदावार 15-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म 126-134 दिनों में परिपक्व होती है इसका मुख्य रूप से ब्रैड बनाने के लिए उपयोग किया जाता है इसमें प्रोटीन की मात्रा 11-12 प्रतिशत होती है
PBW 502: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में उगाने के अनुकूल है पौधे का कद 90-100 सैं.मी. होता है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह करनाल बंट के प्रतिरोधी है इसकी औसतन पैदावार 18-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है.
PBW 550: पौधे का कद 83-91 सैं.मी. होता है यह किस्म 128-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने मोटे सुनहरे पीले रंग के होते हैं इसके 1000 दानों का भार लगभग 38 ग्राम होता है इसकी औसतन पैदावार 18-24 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
HD 2697: पौधे का कद 83-91 सैं.मी. होता है यह किस्म 128-133 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है भारी ज़मीनें इस किस्म की खेती के लिए अच्छी रहती हैं इसके दाने मोटे सुनहरे रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 18-24 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Raj 6560: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में उगाने के लिए अनुकूल है पौधे का कद 90-100 सैं.मी. होता है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार18-22 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Raj 3077: इस किस्म को वंडर गेहूं के नाम से जाना जाता है पौधे का कद 115-118 सैं.मी. होता है इसकी औसतन पैदावार 15-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म 126-134 दिनों में परिपक्व हो जाती है इसका प्रयोग मुख्य रूप से ब्रैड बनाने के लिए किया जाता है इसमें प्रोटीन की मात्रा 11-12.5 प्रतिशत होती है
Raj 4079: यह किस्म 115-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके पौधे का कद 75-80 सैं.मी. होता है यह सामान्य और सिंचित हालातों में अच्छे परिणाम देती है यह गर्दन तोड़ के प्रतिरोधी किस्म है इसकी औसतन पैदावार 19-21 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसके दाने मोटे, मध्यम आकार के और सख्त होते हैं यह किस्म राजस्थान के गर्म जलवायु को सहने योग्य किस्म है और अच्छी उपज देती है
Raj 4037: इसके पौधे का कद 83-95 सैं.मी. होता है इसकी औसतन पैदावार 15-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म 120 दिनों में परिपक्व हो जाती है यह मुख्य रूप से ब्रैड बनाने के लिए उपयोग किया जाता है इसमें प्रोटीन की मात्रा 11-12 प्रतिशत होती है यह किस्म काली जंग और तने पर जंग के प्रतिरोधी है
Raj 4120: यह किस्म 110-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके पौधे का कद 80-94 सैं.मी. होता है यह किस्म सामान्य और सिंचित हालातों में अच्छे परिणाम देती है इसका तना मजबूत होता है और गर्दन तोड़ के प्रतिरोधी होता है इसकी औसतन पैदावार 20-24 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म राजस्थान के गर्म जलवायु को सहने योग्य किस्म है और अच्छी उपज देती है
DBW 17: इसके पौधे का कद 80-85 सैं.मी. होता है यह किस्म 130-132 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह करनाल बंट के प्रतिरोधी किस्म है इसका तना मजबूत होता है जो कि यह दर्शाता है कि यह गर्दन तोड़ के प्रतिरोधी है इसके दाने मोटे, मध्यम आकार के और सख्त होते हैं यह किस्म सामान्य और सिंचित हालातों में अच्छे परिणाम देती है इसकी औसतन पैदावार 16-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Raj 4238: यह किस्म 115-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके पौधे का कद 82-86 सैं.मी. होती है इसका तना मजबूत होता है जो कि फसल को गर्दन तोड़ से बचाता है यह करनाल बंट के प्रतिरोधी किस्म है इसके दाने मध्यम आकार के होते हैं और औसतन पैदावार 16-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
WH 1080: यह किस्म 127-133 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके पौधे का कद 85-101 सैं.मी. होती है सिंचित हालातों में यह 16-18 क्विंटल प्रति एकड़ उपज देती है इसके दाने सुनहरे, मध्यम मोटे और सख्त होते हैं
PBW 175: यह किस्म 130-132 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके पौधे का कद 15-16 सैं.मी. होता है इसके दाने सुनहरे, मध्यम मोटे और सख्त होते हैं इसकी औसतन पैदावार 15-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
CCNNRVOI (Raj Molya Rodhak-1: यह सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है इसके पौधे का कद 84 सैं.मी. होता है इसके दाने सुनहरे, मध्यम सख्त और गोल आकार के होते हैं यह किस्म 120-125 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 15-18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म नेमाटोड से प्रभावित क्षेत्रों में प्रसिद्ध है
पिछेती बिजाई की किस्में
Raj 3765: यह किस्म दिसंबर से मध्य जनवरी के तीसरे सप्ताह में बोयी जा सकती है इसके पौधे का कद 85-95 सैं.मी. होता है यह किस्म 120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Raj 3777: यह किस्म 90-95 दिनों में परिपक्व हो जाती है यह किस्म मध्य नवरी में बोने के लिए अनुकूल है इसकी औसतन पैदावार 14-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
रेतली मिट्टी वाली किस्में
इन किस्मों की वृद्धि के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है
C 306: यह किस्म बंजर भूमि में उगाने के लिए प्रयोग की जाती है और इसे कम सिंचाई की आवश्यकता होती है इसका पौधे लंबे कद के होते हैं इसके मध्यम आकार के दाने और रंग में सुनहरे होते हैं इसकी औसतन उपज 14-16 प्रति एकड़ होती है
P.B.W. 299: इसके पौधे का कद 95 सैं.मी. होता है यह किस्म 150-160 दिनों में परिपक्व हो जाती है और इस किस्म की अगेती बिजाई की जाती है इसकी औसतन पैदावार 16-18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इन किस्मों के साथ PBW 396 और WH 147 की भी खेती की जाती है
क्षारीय मिट्टी की किस्में
क्षारीय क्षेत्रों में Raj 3077, K.R.L 1-4 और WH 157 जैसी किस्मों का प्रयोग करें, ये अच्छी उपज देती हैं गेहूं की फसल को अच्छे अंकुरन के लिए अच्छी तरह से तैयार, पर ठोस बीज बैड की आवश्यकता होती है पिछली फसल की कटाई के बाद खेत की अच्छे तरीके से ट्रैक्टर की मदद से जोताई की जानी चाहिए खेत को आमतौर पर ट्रैक्टर के साथ तवियां जोड़कर जोता जाता है और उसके बाद दो या तीन बार हल या सुहागे से जोता जाता है बारानी क्षेत्रों में खेत इस तरह से तैयार करना चाहिए कि वह नमी को सोख सके खेत की एक बार आयरन के हल से गहरी जोताई या सामान्य हल से दो या तीन बार जोताई करें और सुहागा फेरें
खेत की जोताई शाम के समय की जानी चाहिए और रोपाई की गई ज़मीन को पूरी रात खुला छोड़ देना चाहिए ताकि वह ओस की बूंदों से नमी सोख सके प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरना चाहिए आखिरी जोताई के समय यूरिया 35-40 किलो प्रति एकड़ में डालें इससे गेहूं की अंकुरन प्रतिशतता में वृद्धि होती है अज़ोटोबैक्टर 2.5 किलो + फास्फेटिक 2.5 किलो + ट्राइकोडरमा 2.5 किलो को 100 किलो-125 किलो रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर में मिलाकर आखिरी जोताई के समय खिलार दें गेंहूं की बिजाई सही समय पर करनी जरूरी है बारानी क्षेत्रों के लिए बिजाई नवंबर के पहले से तीसरे सप्ताह में पूरी कर लें, जबकि सिंचित क्षेत्रों में बिजाई अक्तूबर से 15 नवंबर तक पूरी कर लें सामान्य बिजाई के लिए कतारों में 20 सैं.मी. के फासले की सलाह दी जाती है यदि बिजाई देरी से करनी हो तो 18 सैं.मी. का फासला होना चाहिए 4-5 सैं.मी. की गहराई में बिजाई करनी चाहिए बीज ड्रिल
बुरकाव विधि
जीरो टिलेज़ ड्रिल
रोटावेटरबिजाई के लिए 40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें यदि बिजाई देरी से की जाये तो नवंबर के आखिरी सप्ताह से दिसंबर के दूसरे सप्ताह तक बिजाई 50 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करके पूरी कर लें देरी से बिजाई के लिए कम समय की किस्मों का प्रयोग करें सामान्य स्थितियों में बिजाई नवंबर के पहले से तीसरे सप्ताह में पूरी कर लें, जब कि सिंचित हालातों में दिसंबर महीने में बिजाई पूरी कर लें बीज की मात्रा 50 किलोग्राम प्रति एकड़ में रखें बीजों को दीमक, फफूंद, झुलस रोग जैसे बीमारियों से बचाने के लिए बीजने से 24 घंटे पहले एक किलो बीजों का 4 मि.ली. क्लोरपाइरीफॉस या 1.5 - 1.87 ग्राम टेबुकोनाज़ोल 2 डी.एस या 2 ग्राम कार्बेनडाज़िम या थीरम मिलानी चाहिए रासायनिक उपचार के बाद बीजों को टी विराइड 1.15 प्रतिशत डब्लयु पी 4 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें IPM में टी विराइड 4 ग्राम + कार्बोक्सिन 75 डब्लयु पी 1.25 ग्राम या टैबुकोनाज़ोल 1.0 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार झूठी कांगियारी को रोकने के लिए किया जाता है उसके बाद दीमक से बचाव के लिए बिजाई से 15 दिनों के बाद मिट्टी का क्लोरोपाइरीफोस 1 लीटर को प्रति एकड़ में बुरकाव करके उपचार करें मिट्टी की जांच के आधार पर खादों का प्रयोग करें मिट्टी की जांच की मदद से हम खादों को मिट्टी की आवश्यकता के आधार पर दे सकते हैं गेहूं की समय पर बिजाई के लिए नाइट्रोजन 37-50 किलो (यूरिया 80-100 किलो), फासफोरस 8-15 किलो (एस एस पी 50-90 किलो) और पोटाश 12.5 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा, पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें पहली सिंचाई के बाद नाइट्रोजन की बाकी बची आधी मात्रा डाल दें
उपज को बढ़ाने के लिए जिंक सलफेट 10 किलोग्राम प्रति एकड़ में डालें जिंक की कमी को जिंक सल्फेट 0.5 प्रतिशत की फोलियर स्प्रे करके पूरा किया जा सकता है 15 दिनों के अंतराल पर दो से तीन स्प्रे करें मजबूत तने और उपज के लिए, बिजाई के 30 दिनों के बाद 19:19:19 पानी में घुलनशील खाद 5 ग्राम + स्टिकर 0.5 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में डालकर स्प्रे करें मिट्टी की किस्म, पानी की उपलब्धता आदि के आधार पर सिंचाई की संख्या की आवश्यकता होती है नमी की अवस्था में जड़ गलन का हमला और बलियां बनने की अवस्था बहुत गंभीर होते हैं छोटे कद और अधिक उपज वाली किस्मों के लिए बिजाई से पहले सिंचाई करें भारी मिट्टी के लिए चार से छ: सिंचाइयों की आवश्यकता होती है जबकि हल्की मिट्टी के लिए 6-8 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पानी की सीमित संख्या में सिंचाई केवल गंभीर अवस्था में ही करें जब पानी केवल एक सिंचाई के लिए उपलब्ध हो तो जड़ गलन के हमले के समय सिंचाई करें जब दो सिंचाइयां उपलब्ध हो तो जड़ गलन के हमले और फूल बनने की अवस्था में सिंचाई करें जब तीन सिंचाइयां संभव हो तो पहली सिंचाई जड़ गलन के हमले के समय, दूसरी सिंचाई तना बनने के समय और तीसरी दूधिया अवस्था में करें तना गलने की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है यह पाया गया है कि यदि जड़ गलन के समय पहली सिंचाई में देरी की जाये तो 85-125 किलोग्राम प्रति एकड़ उपज कम हो जाती है
पहली सिंचाई बिजाई के 20-25 दिनों के बाद करनी चाहिए यह अवस्था जड़ गलन और नमी तनाव का समय होता है जिसके कारण उपज में कमी होती है दूसरी सिंचाई बिजाई के 40-45 दिनों के बाद पौधा बाहर निकलने के समय करनी चाहिए तीसरी सिंचाई 70-75 दिनों के बाद तना बनने के समय करनी चाहिए चौथी सिंचाई 90-95 दिनों के बाद फूल बनने के समय करनी चाहिए पांचवी सिंचाई 110-115 दिनों के बाद दूधिया अवस्था में करनी चाहिए
Posted by raj
Rajasthan
02-09-2019 03:10 PM
राज जी आपने कोनसी दवाई का इस्तेमाल किया था.आप हमें बाइये ताकि हम आपको इसका सही से जवाब दे सकें.
Posted by akash singh
Punjab
02-09-2019 03:08 PM
ਅਮਰੀਕ ਸਿੰਘ ਜੀ ਇਸ ਲਈ -ਵਧੀਆ ਜਲ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਡੂੰਘੀ ਜਮੀਨ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਦਾ ਪੱਧਰ 1.5-2 ਸੈਂ.ਮੀ ਹੋਵੇ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਬੰਨ ਕੇ ਰੱਖਣ ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਗੰਨੇ ਦੀ ਫਸਲ ਲਈ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਫਸਲ ਲਈ 5-8.5 pH ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਇਹ ਫਸਲ ਲੂਣ ਅਤੇ ਖਾਰੇਪਨ ਨੂੰ ਸਹਾਰ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਮਿੱਟੀ ਦਾ pH 5 ਤੋਂ ਘੱਟ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਜਮੀਨ ਵਿੱਚ ਕਲੀ ਪਾਓ ਅਤੇ ਜੇਕਰ pH 9.5 ਤੋ ਵੱਧ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਜ਼ਮੀ.... (Read More)
ਅਮਰੀਕ ਸਿੰਘ ਜੀ ਇਸ ਲਈ -ਵਧੀਆ ਜਲ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਡੂੰਘੀ ਜਮੀਨ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਦਾ ਪੱਧਰ 1.5-2 ਸੈਂ.ਮੀ ਹੋਵੇ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਬੰਨ ਕੇ ਰੱਖਣ ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਗੰਨੇ ਦੀ ਫਸਲ ਲਈ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਫਸਲ ਲਈ 5-8.5 pH ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਇਹ ਫਸਲ ਲੂਣ ਅਤੇ ਖਾਰੇਪਨ ਨੂੰ ਸਹਾਰ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਮਿੱਟੀ ਦਾ pH 5 ਤੋਂ ਘੱਟ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਜਮੀਨ ਵਿੱਚ ਕਲੀ ਪਾਓ ਅਤੇ ਜੇਕਰ pH 9.5 ਤੋ ਵੱਧ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿੱਚ ਜਿਪਸਮ ਪਾਓ CoJ 85: ਇਹ ਅਗੇਤੀ ਕਿਸਮ ਹੈ, ਜੋ ਰੱਤਾ ਰੋਗ ਅਤੇ ਕੋਰੇ ਨੂੰ ਸਹਾਰ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਬੂਟੇ ਦੀ ਬਣਤਰ ਖੁੱਲੀ ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਇਸ ਦੇ ਗੰਨੇ ਛੇਤੀ ਡਿੱਗਦੇ ਹਨ ਇਸ ਲਈ ਲਾਈਨਾਂ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਮਿੱਟੀ ਚੜ੍ਹਾਉਣੀ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਬੂਟੇ ਨੂੰ ਬੰਨਣਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔੌਸਤ ਝਾੜ 306 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
Co 118: ਇਹ ਅਗੇਤੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਗੰਨੇ ਦਰਮਿਆਨੇ ਮੋਟੇ, ਹਲਕੇ ਪੀਲੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਕੋਰੇ ਅਤੇ ਰੱਤਾ ਰੋਗ ਨੂੰ ਸਹਾਰਣ ਯੋਗ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਹ ਉਪਜਾਊ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਅਤੇ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔੌਸਤਨ ਝਾੜ 320 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
CoJ 64: ਇਹ ਅਗੇਤੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਵਧੀਆ ਪੁੰਗਰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਬੂਟਾ ਸੰਘਣਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਫੋਟ ਵੀ ਚੰਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਗੁੜ ਚੰਗਾ ਬਣਦਾ ਹੈ ਪਰੰਤੂ ਇਹ ਕਿਸਮ ਰੱਤਾ ਰੋਗ ਦਾ ਟਾਕਰਾ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕਦੀ ਇਸ ਦਾ ਔੌਸਤਨ ਝਾੜ 300 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
CoH 119: ਇਹ ਦਰਮਿਆਨੇ ਮੌਸਮ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਗੰਨਾ ਲੰਬਾ, ਮੋਟਾ ਅਤੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਰੱਤਾ ਰੋਗ ਅਤੇ ਕੋਰੇ ਨੂੰ ਸਹਾਰਣ ਯੋਗ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਫੋਟ ਮੱਧਮ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 340 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
CoJ 88: ਇਸ ਦੇ ਗੰਨੇ ਲੰਮੇ, ਦਰਮਿਆਨੇ ਮੋਟੇ ਅਤੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਕਿਸਮ ਰੱਤਾ ਰੋਗ ਨੂੰ ਸਹਾਰਨ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਰਸ ਵਿੱਚ 17-18% ਮਿਠਾਸ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਮੁੱਢਾ ਬਹੁਤ ਚੰਗਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਗੰਨੇ ਡਿੱਗਦੇ ਨਹੀਂ ਹਨ ਇਸ ਦਾ ਔੌਸਤਨ ਝਾੜ 337 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
CoS 8436: ਇਹ ਦਰਮਿਆਨੇ ਕੱਦ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ, ਜਿਸ ਦੇ ਗੰਨੇ ਠੋਸ, ਮੋਟੇ ਅਤੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਪੀਲੀ ਭਾਅ ਮਾਰਨ ਵਾਲੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਰੱਤਾ ਰੋਗ ਦਾ ਟਾਕਰਾ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਸਮਰੱਥ ਅਤੇ ਨਾ ਡਿੱਗਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਉਪਜਾਊ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦਾ ਝਾੜ ਵਧੇਰੇ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 307 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
CoJ 89: ਇਹ ਕਿਸਮ ਰੱਤਾ ਰੋਗ ਨੂੰ ਸਹਾਰਣ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਗੰਨਾ ਡਿੱਗਦਾ ਨਹੀਂ ਅਤੇ ਖੋਰੀ ਵੀ ਸੌਖੀ ਲਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਝਾੜ 326 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
Co 1148: ਇਸ ਦੇ ਗੰਨੇ ਠੋਸ ਅਤੇ ਵਧੀਆ ਉੱਗਰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਫੋਟ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ਲਈ ਵੀ ਵਰਤੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ ਇਹ ਮੱਧਮ ਕੁਆਲਿਟੀ ਦਾ ਗੁੜ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਕੰਮ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਰੱਤਾ ਰੋਗ ਸਹਾਰ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਝਾੜ 375 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ
CoH 110: ਇਹ ਦੇਰੀ ਨਾਲ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ
Co 7717: ਇਹ ਜਲਦੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਅਤੇ ਵੱਧ ਮਿੱਠੇ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ ਰੱਤਾ ਰੋਗ ਨੂੰ ਸਹਾਰਣਯੋਗ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਰਸ ਵਧੀਆ ਕਿਸਮ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਨੂੰ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਲਈ ਸੰਭਾਲਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ
CoH 128: ਇਹ ਜ਼ਲਦੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ
CoPb 93: ਇਹ ਕਿਸਮ ਰੱਤਾ ਰੋਗ ਅਤੇ ਕੋਹਰੇ ਨੂੰ ਸਹਾਰਨਯੋਗ ਹੈ ਨਵੰਬਰ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੇ ਰਸ ਵਿੱਚ 16-17% ਅਤੇ ਦਸੰਬਰ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ 18% ਮਿਠਾਸ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔੌਸਤਨ ਝਾੜ 335 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਗੁੜ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਬਹੁਤ ਵਧੀਆ ਕਿਸਮ ਹੈ
CoPb 94: ਨਵੰਬਰ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੇ ਰਸ ਵਿੱਚ 16% ਅਤੇ ਦਸੰਬਰ ਵਿੱਚ 19% ਮਿਠਾਸ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔੌਸਤਨ ਝਾੜ 400 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਖੇਤ ਨੂੰ ਦੋ ਵਾਰ ਵਾਹੋ ਪਹਿਲੀ ਵਹਾਈ 20-25 ਸੈ.ਮੀ. ਡੂੰਘੀ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਰੋੜਿਆਂ ਨੂੰ ਮਸ਼ੀਨੀ ਢੰਗ ਨਾਲ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਭੰਨ ਕੇ ਪੱਧਰਾ ਕਰ ਦਿਓ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਗੰਨੇ ਨੂੰ ਬੀਜਣ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਅਕਤੂਬਰ ਅਤੇ ਫਰਵਰੀ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਮਹੀਨਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਗੰਨਾ ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਪੱਕਣ ਲਈ ਇੱਕ ਸਾਲ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦਾ ਹੈ ਉੱਪ-ਊਸ਼ਣ ਕਟਬੰਦੀ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਕਤਾਰਾਂ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 60-120 ਸੈ.ਮੀ. ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਗੰਨੇ ਨੂੰ 3-4 ਸੈ.ਮੀ. ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ ਤੇ ਬੀਜੋ ਅਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਨਾਲ ਢੱਕ ਦਿਓ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਉਚਿੱਤ ਢੰਗ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਡੂੰਘੀਆਂ ਖਾਲੀਆਂ, ਵੱਟਾਂ ਬਣਾ ਕੇ, ਕਤਾਰਾਂ ਦੇ ਜੋੜੇ ਬਣਾ ਕੇ ਅਤੇ ਟੋਆ ਪੁੱਟ ਕੇ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਖਾਲੀਆਂ ਅਤੇ ਵੱਟਾਂ ਬਣਾ ਕੇ ਸੁੱਕੀ ਬਿਜਾਈ: ਟਰੈਕਟਰ ਵਾਲੀ ਵੱਟਾਂ ਪਾਉਣ ਵਾਲੀ ਮਸ਼ੀਨ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਵੱਟਾਂ ਅਤੇ ਖਾਲੀਆਂ ਬਣਾਓ ਅਤੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਵੱਟਾਂ ਅਤੇ ਖਾਲੀਆਂ ਵਿੱਚ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਵੱਟਾਂ ਵਿੱਚ 90 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਦਾ ਫਾਸਲਾ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਗੰਨੇ ਦੀਆਂ ਗੁੱਲੀਆਂ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਦੱਬੋ ਅਤੇ ਹਲਕੀ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਕਤਾਰਾਂ ਦੇ ਜੋੜੇ ਬਣਾ ਕੇ ਬਿਜਾਈ: ਖੇਤ ਵਿੱਚ 150 ਸੈ.ਮੀ. ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਖਾਲੀਆਂ ਬਣਾਓ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ 30-60-90 ਸੈ.ਮੀ. ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਇਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਵੱਟਾਂ ਵਾਲੀ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਵੱਧ ਝਾੜ ਮਿਲਦਾ ਹੈ ਟੋਆ ਪੁੱਟ ਕੇ ਬਿਜਾਈ: ਟੋਏ ਪੁੱਟਣ ਵਾਲੀ ਮਸ਼ੀਨ ਨਾਲ 60 ਸੈ.ਮੀ. ਵਿਆਸ ਦੇ 30 ਸੈ.ਮੀ. ਡੂੰਘੇ ਟੋਏ ਪੁੱਟੋ, ਜਿਨਾਂ ਵਿੱਚ 60 ਸੈ.ਮੀ. ਦਾ ਫਾਸਲਾ ਹੋਵੇ ਇਸ ਨਾਲ ਗੰਨਾ 2-3 ਵਾਰ ਉਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਆਮ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 20-25% ਵੱਧ ਝਾੜ ਆਉਂਦਾ ਹੈ ਇੱਕ ਅੱਖ ਵਾਲੇ ਗੰਨਿਆਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ: ਸਿਹਤਮੰਦ ਗੁੱਲੀਆਂ ਚੁਣੋ ਅਤੇ 75-90 ਸੈ.ਮੀ. ਦੇ ਫਰਕ ਅਤੇ ਖਾਲ਼ੀਆਂ ਵਿੱਚ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਗੁੱਲੀਆਂ ਇੱਕ ਅੱਖ ਵਾਲੀਆਂ ਹੋਣੀਆਂ ਚਾਹੀਦੀਆਂ ਹਨ ਜੇਕਰ ਗੰਨੇ ਦੇ ਉੱਪਰਲੇ ਹਿੱਸੇ ਵਿੱਚੋਂ ਛੋਟੀਆਂ ਗੁੱਲੀਆਂ ਚੁਣੀਆਂ ਗਈਆਂ ਹੋਣ ਤਾਂ ਬਿਜਾਈ 6-9 ਇੰਚ ਦੇ ਫਰਕ ਤੇ ਕਰੋ ਵਧੀਆ ਸਿੰਚਾਈ ਲਈ ਅੱਖਾਂ ਨੂੰ ਉਪਰ ਵੱਲ ਨੂੰ ਕਰਕੇ ਰੱਖੋ ਮਿੱਟੀ ਨਾਲ ਅੱਖਾਂ ਨੂੰ ਢੱਕ ਦਿਓ ਅਤੇ ਹਲਕੀ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋਵੱਖ-ਵੱਖ ਤਜ਼ਰਬਿਆਂ ਤੋਂ ਇਹ ਸਿੱਧ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ ਕਿ 3 ਅੱਖਾਂ ਵਾਲੀਆਂ ਗੁੱਲੀਆਂ ਦਾ ਜਮਾਓ ਵਧੇਰੇ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਦ ਕਿ ਇੱਕ ਅੱਖ ਵਾਲੀ ਗੁੱਲੀ ਵਧੀਆ ਨਹੀਂ ਜੰਮਦੀ, ਕਿਉਂਕਿ ਦੋਨੋਂ ਪਾਸੇ ਕੱਟਣ ਕਰਕੇ ਗੁੱਲੀ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਦੀ ਕਮੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਵੱਧ ਅੱਖਾਂ ਵਾਲੀਆਂ ਗੁੱਲੀਆਂ ਬੀਜਣ ਨਾਲ ਵੀ ਜੰਮ ਵਧੀਆ ਨਹੀਂ ਮਿਲਦਾ
ਅਨੁਕੂਲ ਮੌਸਮ ਨਾ ਮਿਲਣ ਕਰਕੇ ਉੱਤਰ-ਪੱਛਮ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਬੀਜ ਦੀ ਵਧੇਰੇ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਦੀ ਹੈ ਤਿੰਨ ਅੱਖਾਂ ਵਾਲੀਆਂ 20,000 ਗੁੱਲੀਆਂ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਰਤੋ ਬੀਜ 6-7 ਮਹੀਨੇ ਪੁਰਾਣੀ ਫਸਲ ਤੋਂ ਲਓ, ਜੋ ਕਿ ਕੀੜਿਆਂ ਅਤੇ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੋਵੇ ਬਿਮਾਰੀ ਅਤੇ ਕੀੜੇ ਵਾਲੇ ਗੰਨੇ ਅਤੇ ਅੱਖਾਂ ਨੂੰ ਨਾ ਚੁਣੋ ਬੀਜ ਵਾਲੀ ਫਸਲ ਨੂੰ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਇੱਕ ਦਿਨ ਪਹਿਲਾਂ ਵੱਢੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਸਲ ਵਧੀਆ ਪੁੰਗਰਦੀ ਹੈ ਗੁੱਲੀਆਂ ਨੂੰ ਕਾਰਬੈਂਡਾਜ਼ਿਮ 1 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਡੋਬੋ ਰਸਾਇਣਾਂ ਤੋ ਬਾਅਦ ਗੁੱਲੀਆਂ ਨੂੰ ਐਸਪਰਜਿਲੀਅਮ ਨਾਲ ਸੋਧੋ ਇਸ ਲਈ ਗੁੱਲੀਆਂ ਨੂੰ ਐਸਪਰਜਿਲੀਅਮ @800 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ 15 ਮਿੰਟਾਂ ਲਈ ਰੱਖੋ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਸੋਧ ਲਈ ਜੀਵਾਣੂ-ਖਾਦ ਅਤੇ ਰੂੜੀ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਇਸ ਲਈ 5 ਕਿਲੋ ਜੀਵਾਣੂ-ਖਾਦ ਨੂੰ 10 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਮਿਸ਼ਰਣ ਤਿਆਰ ਕਰ ਲਓ ਇਸ ਮਿਸ਼ਰਤ ਘੋਲ ਨੂੰ 80-100 ਕਿਲੋ ਰੂੜੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਘੋਲ ਤਿਆਰ ਕਰ ਲਓ ਇਸ ਘੋਲ ਨੂੰ ਵੱਟਾਂ ਤੇ ਬੀਜੇ ਗੰਨੇ ਦੀਆਂ ਗੁੱਲੀਆਂ ਤੇ ਛਿੜਕਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਵੱਟਾਂ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਨਾਲ ਢੱਕ ਦਿਓ ਫ਼ਸਲ ਬੀਜਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚਲੇ ਤੱਤਾਂ ਦੀ ਜਾਂਚ ਕਰਵਾਉਣੀ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਕਿ ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਸਹੀ ਲੋੜ ਨੂੰ ਸਮਝਿਆਂ ਜਾ ਸਕੇ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ 8 ਟਨ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਮਿਲਾਓ ਜਾਂ ਵਰਮੀਕੰਪੋਸਟ+ਰੈਲੀਗੋਲਡ 8-10 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਜਾਂ ਜੀਵਾਣੂ ਖਾਦ(PSB) 5-10 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ
ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਸਮੇਂ 66 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਕਰੋ ਯੂਰੀਆ ਦਾ ਦੂਜਾ ਹਿੱਸਾ 66 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੂਜੇ ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਾਓ ਅਤੇ ਯੂਰੀਆ ਦਾ ਤੀਸਰਾ ਹਿੱਸਾ 66 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਚੌਥੇ ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਾਓ
ਸਰਦੀਆਂ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ ਤਾਪਮਾਨ ਘੱਟ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਫਸਲ ਤੱਤ ਜਿਆਦਾ ਲੈਂਦੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਪੌਦਾ ਪੀਲਾ ਪੈ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ N:P:K 19:19:19 ਦੀ ਸਪਰੇਅ 250 ਗ੍ਰਾਮ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਲਈ ਵਰਤੋ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਦੀ ਕਮੀ ਹੈ, ਉੱਥੇ ਯੂਰੀਆ+ਪੋਟਾਸ਼ ਦੀ ਵਰਤੋਂ 2.5 ਕਿਲੋ ਨੂੰ 100 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਕਰੋ ਗੰਨੇ ਦੀ ਫਸਲ ਦੀ ਸਿੰਚਾਈ ਜ਼ਮੀਨ(ਹਲਕੀ ਜਾਂ ਭਾਰੀ) ਅਤੇ ਸਿੰਚਾਈ ਦੀ ਸੁਵਿਧਾ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦੀ ਹੈ ਗਰਮੀ ਦੇ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਗੰਨੇ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਗੰਨੇ ਦੀ ਪਹਿਲੀ ਸਿੰਚਾਈ ਫ਼ਸਲ ਦੇ 20-25% ਉੱਗਰਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਲਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਮੀਂਹ ਦੇ ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਗੰਨੇ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਮੀਂਹ ਦੇ ਅਧਾਰ ਤੇ ਲਗਾਓ ਜੇਕਰ ਮੀਂਹ ਘੱਟ ਹੋਵੇ ਤਾਂ 10 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਅੰਦਰ ਤੇ ਪਾਣੀ ਲਗਾਓ ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਾਣੀ ਲਗਾਉਣ ਦਾ ਫਾਸਲਾ ਵਧਾ ਕੇ 20-25 ਦਿਨਾਂ ਤੱਕ ਕਰ ਦਿਓ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿੱਚ ਨਮੀ ਬਣਾਈ ਰੱਖਣ ਲਈ ਕਮਾਦ ਦੀਆਂ ਲਾਈਨਾਂ ਵਿੱਚਕਾਰ ਘਾਹ ਫੂਸ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਜੂਨ ਦੇ ਮਹੀਨੇ ਵਾਲਾ ਸਮਾਂ ਗੰਨੇ ਲਈ ਨਾਜ਼ੁਕ ਸਮਾਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇਂ ਸਿੰਚਾਈ ਦਾ ਸਹੀਂ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਬਾਰਿਸ਼ਾਂ ਦੇ ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਖੜੇ ਹੋਣ ਤੋਂ ਰੋਕੋ ਸਿੱਟੇ ਨਿਕਲਣ ਅਤੇ ਫਸਲ ਦੇ ਵਾਧੇ ਸਮੇਂ ਸਿੰਚਾਈ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਕਹੀ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਕੇ ਗੰਨੇ ਦੀਆਂ ਵੱਟਾਂ ਤੇ ਮਿੱਟੀ ਚੜਾਉਣੀ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ, ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਕਮਾਦ ਨੂੰ ਡਿੱਗਣ ਤੋਂ ਬਚਾਉਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਖਾਦਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਉਣ ਵਿੱਚ ਸਹਾਇਤਾ ਕਰਦੀ ਹੈ
Posted by raj
Rajasthan
02-09-2019 03:08 PM
श्रीमान जी, गुलाब की खेती के लिए जैविक तत्वों से भरपूर और अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी अनुकूल होती है बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 6 से 7.5 होना चाहिए यह जल जमाव को सहनयोग्य नहीं है, इसलिए उचित जल निकास का प्रबंध होना चाहिए और अनावश्यक पानी को निकाल देना चाहिए किस्मों के लिए आप देसी गुलाब और इंग्लिश ग.... (Read More)
श्रीमान जी, गुलाब की खेती के लिए जैविक तत्वों से भरपूर और अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी अनुकूल होती है बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 6 से 7.5 होना चाहिए यह जल जमाव को सहनयोग्य नहीं है, इसलिए उचित जल निकास का प्रबंध होना चाहिए और अनावश्यक पानी को निकाल देना चाहिए किस्मों के लिए आप देसी गुलाब और इंग्लिश गुलाब किस्मे लगा सकते हैं. मिट्टी को नरम करने के लिए जोताई और गोड़ाई करें बिजाई से 4-6 सप्ताह पहले खेती के लिए बैड तैयार करें बैड बनाने कि लिए 2 टन रूड़ी की खाद और 2 किलो सुपर फासफेट डालें बैडों को एक समान बनाने के लिए उनको समतल करें और बैडों के ऊपर बोयें होये गुलाब गड्डों में बोयें हुए गुलाबों से ज्यादा मुनाफे वाले होते है उत्तरी भारत में बिजाई का सही समय मध्य अक्तूबर है रोपाई के बाद पौधे को छांव में रखें और अगर बहुत ज्यादा धुप हो, तो पौधे पर पानी का छिड़काव करें दोपहर के अंत वाले समय बोया गया गुलाब बढ़िया उगता हैबैड पर 30 सैं.मी. व्यास और 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोद कर 75 सैं.मी. के फासले पर पौधों की बिजाई करें दो पौधों के बीच में फासला गुलाब की किस्म पर निर्भर करता है बीजों को 2-3 सैं.मी. गहराई में बोयें इसकी बिजाई सीधी या पनीरी लगा कर की जाती है गुलाब की फसल का का प्रजनन काटी गई जड़ों और बडिंग द्वारा किया जाता है उत्तरी भारत में दिसंबर-फरवरी महीने का समय टी-बडिंग के लिए उचित होता है पौधे की कांट-छांट दूसरे और उसके बाद के वर्षों में की जाती है उत्तरी भारत में गुलाब की झाड़ियों की कांट-छांट अक्तूबर के दूसरे या तीसरे हफ्ते में की जाती है जो शाखाएं झाड़ियों को घना बनाएं, उन्हें निकाल दें लटके हुए गुलाबों को छंटाई की जरूरत नहीं होती छंटाई के बाद, अच्छे से गले हुए 7-8 किलो गाय के गोबर को प्रति पौधे को डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें ग्रीन हाउस में, गुलाबों को पंक्तियों में बोया जाता है और पौधों का घनत्व 7-14 पौधे प्रति वर्ग मीटर होनी चाहिए बैड की तैयारी के समय 2 टन रूड़ी की खाद और 2 किलो सुपर फास्फेट को मिट्टी में डालें तीन महीने के फासले पर 10 किलो रूड़ी की खाद और 8 किलो नाइट्रोजन, 8 किलो फासफोरस और 16 किलो पोटाश प्रति पौधे में डालें छंटाई के बाद ही सारी खादों को डालें ज्यादा पैदावार लेने के लिए छंटाई से एक महीने बाद, जी ए 3@ 200 पी पी एम(2 ग्राम प्रति लीटर) की स्प्रे करें पौधे की तनाव सहन शक्ति को बढ़ाने के लिए घुलनशील जड़ उत्तेजक(रैली गोल्ड/रिजोम) 100 ग्राम+ टिपोल 60 मि.ली. को 100 लीटर पानी में डालकर प्रति एकड़ में शाम के समय सिंचाई करें पौधों को खेत में लगाएं ताकि बढ़िया ढंग से विकास कर सके सिंचाई मिट्टी की किस्म और जलवायु के अनुसार करें आधुनिक सिंचाई तकनीक जैसे ड्रिप सिंचाई गुलाब की खेती के लिए लाभदायक होती है फव्वारा सिंचाई से परहेज करें क्योंकि इससे पत्तों को लगने वाली बीमारियां बढ़ती हैं धन्यवाद

Posted by ਗਗਨਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
02-09-2019 03:06 PM
BhaaG sunh to 15-20 din pehlan isde lewe nu plosna si hun oal mandi aa Mohre feed pao piar naal chon di koshish karo chahe baccha shaddo bhawe teeka lao kutyo or drayo na Dudh chona bahut zaruri hai je na choee te isne dudh suka jaana je

Posted by jagjeet singh
Punjab
02-09-2019 02:54 PM
Jagjeet singh ji tussi es wich fame 20 ml,coragen 60 ml prati acre de hisaab naal istemaal kar sakde ho.

Posted by rajkumar
Uttar Pradesh
02-09-2019 02:52 PM

Posted by Charnpreet singh
Punjab
02-09-2019 02:49 PM
ਤੁਹਾਡੇ ਦੁਆਰਾ ਪੁੱਛੇ ਗਏ ਸਾਰਿਆਂ ਸਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਦਿਤੇ ਜਾ ਚੁਕੇ ਹਨ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਦੇਖਣ ਲਈ ਐਪ ਤੇ ਮੇਰੇ ਸਵਾਲ ਤੇ ਕਲਿਕ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਮੇਰੀ ਪ੍ਰੋਫਾਈਲ ਦੇ ਥੱਲੇ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਨੂੰ ਜਵਾਬ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧਿਤ ਕੋਈ ਸੱਮਸਿਆ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਤੋਂ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਨੰਬਰ : 97799-77641 ਤੇ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by surendra
Uttar Pradesh
02-09-2019 02:42 PM
Swati (KFPD-24), Malviya Matar-15 (HUDP-15), Vikas, Sapna
(KPMR-1441), IPF 4-9,Kashi Nandini,Kashi uday.
Posted by mujammil
Uttar Pradesh
02-09-2019 02:39 PM
Mujammil ji ye ek fafundinashak hai aur aap iska istemaal sheath blight, Sheath Rot, False Smut and Brown Leaf Spot ke liye chawal,kanak ki fasal ke liye 400 milli litre prati acre ke hisaab se istemaal karen.
Posted by ਦਿਲਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
02-09-2019 02:35 PM
ਦਿਲਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ ਜੀ ਤੁਸੀ ਇਸ ਸਮੇਂ ਬਗੀਚੇ ਲਈ -ਸ਼ਲਗਮ ,ਗਾਜਰ ,ਪਾਲਕ ,ਫੁਲ ਗੋਭੀ ,ਪੱਤਾ ਗੋਭੀ ,ਮੂਲੀ,ਲਹਿਸੁਣ ਉਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by baljinder singh Dhillon
Punjab
02-09-2019 02:30 PM
Dhillon ji kirpa krke swal vistar nal pusho ji katti pani jyada pendi haa ya fir ghatt pani pindi hai ate pishab jyada krdi hai yaa ghatt krdi hai kirpa krke swal vistar nal pusho ji tan jo tuhanu sahi jankari diti jaa skee.
Posted by Khemraj Sahu
Madhya Pradesh
02-09-2019 02:29 PM
इस बीमारी की रोकथाम के लिए सही मात्रा में मिट्टी में पौष्टिक तत्व डालते रहने चाहिए जब बालियां बननी शुरू हो जाए उस समय 200 मि.ली. टैबूकोनाज़ोल या 200 मि.ली. प्रोपीकोनाज़ोल को 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें 15 दिनों के अंतराल पर दोबारा स्प्रे करें
Posted by Rajveer
Uttar Pradesh
02-09-2019 02:29 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आपकी धान की फसल में क्या समस्या आ रही है ताकि आपको पूरी जानकारी दी जा सके
Posted by mujammil
Uttar Pradesh
02-09-2019 02:27 PM
mujammil ji fender men Fluxapyroxad 6.25% + Epoxiconazole 6.25% EC nam ka salt maujood hota hai yeh e fungicide hai jo sheath blight ki roktham karta hai.dhanywad
Posted by ਬੇਅੰਤ ਸਿੰਘ
Punjab
02-09-2019 02:25 PM
Thiamethoxam 30 % FS ik keetnashak hai jo tele, chepe, chitti makhi di roktham krda hai. isdi matra 80 gram prti acre lyi vrto.isda asar 15-18 din tak rehnda hai.
Posted by Balwant Singh Jhajj
Punjab
02-09-2019 02:16 PM
ਬਲਵੰਤ ਸਿੰਘ ਝੱਜ ਜੀ ਇਹ ਇਕ blight ਦਾ ਰੋਗ ਹੈ ਤੁਸੀ ਇਸ ਦੀ ਲਈ ਨਾਟਿਵੋ 80 ਗ੍ਰਾਮ ਦਾ ਇਸਤੇਮਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by पौंठी विकास समिति
Uttarakhand
02-09-2019 02:07 PM
यदि आप डेयरी फार्मिंग बड़े स्तर पर करना चाहते है तो आप इसकी ट्रेनिंग लेकर इस काम को करें जिसमें आपको इस काम के बारे में सारी जानकारी प्राप्त होगी , वहां आपको इसके शेड को तैयार करना और उसमें पशुओं को सही तरीके से रखने के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी प एक बार में इक्ट्ठी गाय ना खरीदें गायों को 2-2 महीनो.... (Read More)
यदि आप डेयरी फार्मिंग बड़े स्तर पर करना चाहते है तो आप इसकी ट्रेनिंग लेकर इस काम को करें जिसमें आपको इस काम के बारे में सारी जानकारी प्राप्त होगी , वहां आपको इसके शेड को तैयार करना और उसमें पशुओं को सही तरीके से रखने के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी प एक बार में इक्ट्ठी गाय ना खरीदें गायों को 2-2 महीनों के फासले पर खरीदें या फिर 3 पहले खरीदें ओर 3 महीने बाद फिर खरीद लें इससे दूध की कमी नहीं आयेगी पशु की नसल सबसे ज्यादा जरूरी है पशु खरीदने के समय कोशिश करें कि दिन में तीन बार दूध निकालकर ही पशु खरीदें भैंसो का एक दिन का दूध 12 लीटर और गायों को दूध 16-17 लीटर से कम ना हो गाभिनों को खरीदने का सही समय रखड़ियों से लेकर वैशाखी तक का होता है क्योंकि इस समय मौसम अच्छा होने के कारण हरा चारा भी खुला होता है गाभिनों के लिए शैड आवाजाई वाली सड़क पर ना बनायें और शैड सड़क से कम से कम 100 गज दूर हो शैड को धूप और हवा का ध्यान रखकर ही बनायें शैड हमेशा खेत या आस पास से 2 फुट ऊंचा बनायें क्योंकि निचले स्थान पर पानी खड़ा हो जाता है जिस कारण गंदगी पैदा हो जाती है और बाकी पशुओं का मल मूत्र का निकास भी आसानी से हो जाता है पशुओं के लिए बनायी जाने वाली खुरली ढाई तीन फुट चौड़ी होनी चाहिए खुरली पर खड़ने के लिए एक पशु को तकरीबन चार फुट जगह चाहिए मतलब 10 पशुओं के लिए 40 फुट लंबी खुरली बनेगी डेयरी फार्म से संबंधित सामान रखने के लिए स्टोर बनायें पशुओं का वितरण/दाना स्टोर करने के लिए कमरा सैलाब से रहित होना चाहिए शैड का फर्श पक्क, फिसलन रहित और जल्दी साफ होने वाला हो शैड में जितना हो सके पशुओं को खुला छोंड़े और पानी और दाना पूरा डालें पशु को खुला छोड़ने से पशुओं में अफारे की समस्या कम आती है बाकी अपनी आवश्यकता और क्षमता के मुताबिक ही सामान खरीदें और आर्थिक नुकसान से बचने के लिए प्रत्येक गाभिन का बीमा जरूर करवायें

Posted by satyendra yadav
Uttar Pradesh
02-09-2019 02:07 PM
यदि इसका हमला दिखे तो टैबुकोनाज़ोल या टिल्ट 25 ई सी 200 मि.ली. या कार्बेनडाज़िम 25 प्रतिशत 200 ग्राम को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें 15 दिनों के अंतराल पर दोबारा स्प्रे करें

Posted by Raman Thakur
Himachal Pradesh
02-09-2019 02:02 PM
इसके लिए आप वर्मी कंपोस्ट @5kg प्रति पौधा डाल सकते हैं

Posted by Harman Sidhu
Chattisgarh
02-09-2019 01:58 PM
Harman ji eh sundi di roktham de layi varti jandi hai isdi matra 70-100 ml nu 150 litre pani ke hisab se sprya karen.dhanywad

Posted by Gurjant s
Punjab
02-09-2019 01:57 PM
ਗੁਰਜੰਟ ਜੀ PAU ਦੇ ਕਿਸਾਨ ਮੇਲਿਆਂ ਦੇ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਤੁਸੀ ਨਾਲ ਦਿਤੀ ਫੋਟੋ ਤੋਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by Yash Pal mourya
Uttar Pradesh
02-09-2019 01:57 PM
Mourya ji aap bhians ko sarakind plus bolus 1-1 goli subah sham deni suru kren, isse frak padd jayega..

Posted by prakash
Rajasthan
02-09-2019 01:51 PM
prakash ji yeh iski kisam par nirbhar karta hai kripya aap iski kisam ke bare men jankari de taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by rambabu
Madhya Pradesh
02-09-2019 01:50 PM
45 दिनों तक खेत को नदीन रहित रखें यदि नदीन नियंत्रण से बाहर हो जायें तो यह 70-90 प्रतिशत पैदावार कम कर देंगे पनीरी लगाने के 2-3 दिन बाद फ्लूकोरेलिन 800 मि.ली.प्रति 200 लीटर पानी की स्प्रे बिजाई से पहले वाले नदीन नाशक के तौर पर करें यदि नदीन जल्दी उग रहे हों तो नदीन नाशक के तौर पर सैंकर 300 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें न.... (Read More)
45 दिनों तक खेत को नदीन रहित रखें यदि नदीन नियंत्रण से बाहर हो जायें तो यह 70-90 प्रतिशत पैदावार कम कर देंगे पनीरी लगाने के 2-3 दिन बाद फ्लूकोरेलिन 800 मि.ली.प्रति 200 लीटर पानी की स्प्रे बिजाई से पहले वाले नदीन नाशक के तौर पर करें यदि नदीन जल्दी उग रहे हों तो नदीन नाशक के तौर पर सैंकर 300 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें नदीनों पर नियंत्रण डालने और ज़मीन का तापमान कम करने के लिए पॉलीथीन की परत का प्रयोग कर सकते हैं
Posted by ਹਰਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
02-09-2019 01:48 PM
ਹਰਦੀਪ ਸਿੰਘ ਜੀ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਫਲਾਂ ਅਤੇ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਦੀ ਕੁਆਲਟੀ ਦੇਸੀ ਫੁੱਲਾਂ ਅਤੇ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਇੰਨੀ ਵਾਦੀਆਂ ਨਾਈ ਹੁੰਦੀ ਤੁਸੀ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਇਕ ਵਾਰ ਹੀ ਇਸਤੇਮਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by Rajveer
Uttar Pradesh
02-09-2019 01:48 PM
राजवीर जी कृपया आप बताये के आपने कोनसी फसल में इसका इस्तेमाल करना है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
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