Posted by ਕਰਨਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
03-09-2019 07:29 AM
ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਡੇਅਰੀ ਦੀਆ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਪੰਜਾਬ ਡੇਅਰੀ ਡਿਵੈਲਮੈਟ ਬੋਰਡ ਵੱਲੋ ਲਗਾਈਆ ਜਾਂਦੀਆ ਹਨ ਇਸਦਾ ਮੁੱਖ ਦਫਤਰ ਮੋਹਾਲੀ ਵਿੱਚ ਹੈ ਤੇ ਬਾਕੀ ਸਾਰੇ ਮੁੱਖ ਜ਼ਿਲਿਆ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਸੈਟਰ ਬਣੇ ਹੋਏ ਹਨ ਅਗਲੀ 4 ਹਫਤਿਆ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ 23-09-2019 ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਰਹੀ ਹੈ ਇਸ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮਿਲ ਹੋਣ ਲਈ ਉਮੀਦਵਾਰ ਦਾ ਘੱਟੋ ਘੱਟ 8 ਪਾਸ ਹੋਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਜਾਣਕਾਰੀ ਸਾਡੇ ਪੰਜਾਬ ਡੇਅਰੀ ਡਿਵੈਲਪਮ.... (Read More)
ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਡੇਅਰੀ ਦੀਆ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਪੰਜਾਬ ਡੇਅਰੀ ਡਿਵੈਲਮੈਟ ਬੋਰਡ ਵੱਲੋ ਲਗਾਈਆ ਜਾਂਦੀਆ ਹਨ ਇਸਦਾ ਮੁੱਖ ਦਫਤਰ ਮੋਹਾਲੀ ਵਿੱਚ ਹੈ ਤੇ ਬਾਕੀ ਸਾਰੇ ਮੁੱਖ ਜ਼ਿਲਿਆ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਸੈਟਰ ਬਣੇ ਹੋਏ ਹਨ ਅਗਲੀ 4 ਹਫਤਿਆ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ 23-09-2019 ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਰਹੀ ਹੈ ਇਸ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮਿਲ ਹੋਣ ਲਈ ਉਮੀਦਵਾਰ ਦਾ ਘੱਟੋ ਘੱਟ 8 ਪਾਸ ਹੋਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਜਾਣਕਾਰੀ ਸਾਡੇ ਪੰਜਾਬ ਡੇਅਰੀ ਡਿਵੈਲਪਮੈਂਟ ਬੋਰਡ ਦੇ ਮੁੱਖ ਦਫਤਰ ਦੇ 0172-5027285 ਨੰਬਰ ਤੇ ਕਾਲ ਕਰਕੇ ਆਪਣਾ ਏਰੀਆ ਦੱਸ ਕੇ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਟ੍ਰੈਨਿੰਗ ਸੈਂਟਰ ਦਾ ਪਤਾ ਪੁੱਛ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮਿਲ ਹੋਣ ਲਈ ਇਟਰਵਿਓ 16-09-2019 ਨੂੰ ਹੈ ਜੀ ਬਾਕੀ ਇਸ ਦੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਸੈਂਟਰ ਦੀ ਲਿਸਟ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਲਿੰਕ ਤੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰਕੇ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗੀ http://pddb.in/Content.aspx guid=CiJTeaYB2lQ=

Posted by kashmir singh
Punjab
03-09-2019 07:24 AM
Kashmir ji tilt de vich propiconazole nam da salt maujood hunda hai eh haldi rog di roktham karda hai isdi matra 200ml nu prati acre de hisab nal vartya janda hai.dhanwad
Posted by ਬਾਜ ਸੰਧੂ
Punjab
03-09-2019 07:20 AM
Tuci uss nu Milkout powder 2-2 chamch swere sham, Anabolite liquid 100ml rojana ate Bovimin-B powder 100gm rojana dena suru kro, iss nal frak paa jawega..
Posted by RAHUL KUMAR
Uttar Pradesh
03-09-2019 07:10 AM
अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए बिजाई अक्तूबर से नवंबर के मध्य में पूरी कर लें बिजाई में देरी होने से उपज में काफी नुकसान होता है
Posted by phoolchand Dadarwal
Rajasthan
03-09-2019 07:04 AM
इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों जैसे दोमट रेतली से चिकनी दोमट मिट्टी में उगाया जा सकता है मक्की की खेती के लिए अच्छे निकास वाली, उपजाऊ रेतली दोमट से गारी दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है अच्छी उपज के लिए उच्च जैविक पदार्थ युक्त मिट्टी, जिसमें पानी सोखने की क्षमता अच्छी हो, की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 5.5-7.5 होन.... (Read More)
इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों जैसे दोमट रेतली से चिकनी दोमट मिट्टी में उगाया जा सकता है मक्की की खेती के लिए अच्छे निकास वाली, उपजाऊ रेतली दोमट से गारी दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है अच्छी उपज के लिए उच्च जैविक पदार्थ युक्त मिट्टी, जिसमें पानी सोखने की क्षमता अच्छी हो, की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 5.5-7.5 होनी चाहिए भारी चिकनी मिट्टी इसकी खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती मिट्टी में किसी भी तत्व की कमी जानने के लिए मिट्टी की जांच जरूर करवायें प्रसिद्ध किस्में :- Ganga 2,Ganga-II,Tarun,Naveen खेती के लिए नदीन रहित और पिछली फसल से मुक्त खेत का ही चयन करें 10-15 सैं.मी. की गहराई पर जोताई करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की 6-7 बार जोताई करें गाय का गला हुआ गोबर 4-6 टन प्रति एकड़ में डालें और खेत में 10 पैकेट एज़ोसपीरीलियम के डालें 45 से 50 सैं.मी. के फासले पर खालियां और मेंड़ तैयार करें सिंचित क्षेत्रों में बिजाई मॉनसून के शुरू होने से 10-15 दिन पहले करें इससे उपज में 10-15 प्रतिशत वृद्धि होगी बारानी क्षेत्रों में बिजाई मॉनसून के शुरू होने पर करें ताकि मिट्टी में उचित नमी विकसित हो सके उचित अंकुरण के लिए मिट्टी में नमी होना आवश्यक है अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए पौधों में सही मात्रा का होना जरूरी है खरीफ की फसल के लिए कतार से कतार में 70 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 22 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें आसानी से अंकुरण के लिए समतल मिट्टी पर बीजों को 3-5 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई हाथों से गड्ढा खोदकर या आधुनिक तरीके से ट्रैक्टर और सीड डरिल की सहायता से मेंड़ बनाकर की जा सकती है उद्देश्य, बीज का आकार, मौसम, पौधे की किस्म, बिजाई का तरीका आदि बीज की दर को प्रभावित करते हैं खरीफ के मक्की के लिए 7-8 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें अच्छी उपज के लिए नाइट्रोजन 24-50 किलो (यूरिया 52-110 किलो), फासफोरस 16-25 किलो (एस एस पी 100-160 किलो) और पोटाश 16 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 27 किलो) प्रति एकड़ में डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और 1/4 नाइट्रोजन बिजाई के समय डालें खादों को 5-7 सैं.मी. की गहराई पर डालें बाकी की नाइट्रोजन को दो भागों में, पहला फसल के घुटने तक आने की अवस्था में और दूसरा बालियां निकलने के समय डालें मक्की की फसल में जिंक और मैग्नीशियम की कमी होना सामान्य है इसे पूरा करने के लिए 10 किलो शुरूआती खुराक के तौर पर डालें जिंक और मैग्नीशियम के साथ ही आयरन की कमी भी देखी जा सकती है इसके कारण पूरा पौधा पीले रंग का दिखाई देता है इसे पूरा करने के लिए सूक्ष्म तत्व मिश्रण 25 किलो को 18 किलो रेत के साथ मक्की के बीज बोने के बाद डालें मक्की की फसल में हाथों से 1-2 गोडाई आवश्य करें पहली गोडाई बिजाई के 20-25 दिनों के बाद और दूसरी बिजाई के 40-45 दिनों के बाद करें नदीनों की जांच के लिए एट्राज़िन 500 ग्राम को 100 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के बाद और नदीनों के अंकुरण से पहले स्प्रे करें गोडाई के बाद खादों को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें और उसके बाद मेंड़ो पर मिट्टी चढ़ाएं छंटाई का अर्थ अत्याधिक पौधे को निकालना और सिर्फ सेहतमंद पौधों को ही रखना और पौधे से पौधे में 20 सैं.मी. के फासले को बनाकर रखना पहली गोडाई के समय छंटाई की प्रक्रिया की जाती है पहली सिंचाई के समय जब पौधे मुख्य फसल से 4-6 दिन के हो जाये, उस समय खाली जगहों को भरें बारिश की तीव्रता, आवृत्ति और तापमान के आधार पर सिंचाई करें नए पौधे, घुटने तक आने की अवस्था, फूल निकलना और दानें भरना सिंचाई के लिए बहुत गंभीर अवस्थाएं होती हैं इन अवस्थाओं पर पानी की कमी उपज में बहुत नुकसान कर सकती है पानी की कमी होने पर खालियां बनाकर सिंचाई करें यह पानी को भी बचाता है छल्लियों के बाहरले पर्दे हरे से सफेद रंग के होने पर फसल की कटाई करें तने के सूखने और दानों में पानी की मात्रा 17-20 प्रतिशत होने की सूरत में कटाई करना इसके लिए अनुकूल समय है प्रयोग की जाने वाली जगह और यंत्र साफ, सूखे और रोगाणुओं से मुक्त होने चाहिए
Posted by RAHUL KUMAR
Uttar Pradesh
03-09-2019 07:04 AM
is samey ap fasle jaise ke gehun, makka, muli, gajar, gobhi, shimla mirch ki bijai kar sakte hai, dhanywad
Posted by jèŕŕy
Haryana
03-09-2019 06:56 AM
इसके लिए आप 13:00:45 @1kg + Boron @100gm प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें
Posted by मुकेश कुमार कुमावत
Rajasthan
03-09-2019 06:48 AM
अगर इस में कीट का हमला है तो Quinalphos @400ml प्रति एकड़ का उपयोग करें
Posted by धर्मपाल सिंह कुशवाहा
Uttar Pradesh
03-09-2019 05:54 AM
स्टीविया से हमें शूगर मिलती है हमें इसके पत्तों से ज़ीरो कैलोरी स्वीटनेस मिलती है जो कि यह शूगर से ज्यादा मीठे होते हैं भारत में इसकी 2 किस्में लगायी जाती हैं mds 14औरmds 13 इसके लिए तापमान 30 डिगरी सेल्सियस से 32 डिगरी सेल्सियस चाहिए पंजाब में धान की काश्त ज्यादा होने के कारण ज़मीन निचले पानी का स्तर नीचे जाना बड़ी चिं.... (Read More)
स्टीविया से हमें शूगर मिलती है हमें इसके पत्तों से ज़ीरो कैलोरी स्वीटनेस मिलती है जो कि यह शूगर से ज्यादा मीठे होते हैं भारत में इसकी 2 किस्में लगायी जाती हैं mds 14औरmds 13 इसके लिए तापमान 30 डिगरी सेल्सियस से 32 डिगरी सेल्सियस चाहिए पंजाब में धान की काश्त ज्यादा होने के कारण ज़मीन निचले पानी का स्तर नीचे जाना बड़ी चिंता का विषय है पंजाब की जलवायु मुताबिक रेतली और कंडियाली क्षेत्र क धरती इस फसल के लिए अधिक लाभदायक है इस फसल को पानी बहुत कम लगता है और एक बार पौधे लगाने के बाद 5 साल फसल की कटाई ही करनी होती है पहली फसल की कटाई तीन महीनों के बाद होने के कारण किसानों को आमदन जल्दी शुरू हो जाती है एक एकड़ ज़मीन में 30 से 40 हज़ार पौधे लगते हैं महत्तवपूर्ण तथ्य यह है कि इस फसल पर कीटनाशक या नदीननाशक दवाईयों का प्रयोग नहीं होता यूरिया या डी ए पी खाद के स्थान पर सिर्फ रूड़ी की खाद का ही प्रयोग होता है इस तरह से कुदरती खेती का हिस्सा भी कहा जा सकता है स्टीविया के पौधे में मीठास होने के काराण पशु भी मुंह नहीं लगाते यह फसल कम से कम एक कनाल रकबे में भी लगायी जा सकती है पर यदि 5 एकड़ में लगायी जाये तो भारत सरकार कुल लागत का 40 फीसदी सब्सिडी भी देती है फसल को प्रफुल्लित करने के लिए सरकार लगा रही ज़ोर इसलिए कंडियाली क्षेत्र के किसानों को स्टीविया लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है पंजाब के कमिश्नर खेतीबाड़ी डॉ.बलविंदर सिंह सिद्धू का कहना है कि स्टीविया की फसल धान और गेहूं का बदल बन सकती है, दूसरा इस फसल से गेहूं और धान के मुकाबले कमाई भी ज़्यादा होती है, स्टीविया की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से संपर्क कर सकते है धन्यवाद

Posted by Chandra mohan singh
Bihar
03-09-2019 04:27 AM
Shrimaan ji, kripya aap dawai ke label ki photo bejein taki apko iske bare mein ucchit jankari di ja sake, dhanywad
Posted by chetan chopdar
Rajasthan
03-09-2019 12:14 AM
Sir mirch ke uper aap Dow Daligate di spray 1 ml 1 liter water ke hissab se kre

Posted by darshan singh
Punjab
03-09-2019 12:10 AM
Bhaa G isnu rajwa hara chaara te har 4kg dudh lai gau nu 1kg feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo 1quintal feed da formula Anaaj 40kg khal 30kg chokar or rice polish 30kg min mix 2kg namak 1kg Feed aap bna lao

Posted by palwinder Singh
Punjab
02-09-2019 11:07 PM
ਹੁਣ ਤੁਸੀ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਜਿਵੇ ਗਾਜਰ ,ਸ਼ਲਗਮ, ਫੁੱਲਗੋਭੀ , ਆਲੂ, ਟਮਾਟਰ, ਪਾਲਕ, ਪੱਤਾ ਗੋਭੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by gurpreet singh
Punjab
02-09-2019 11:04 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Bendikind plus ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Minfa gold ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Ovumin advance ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆ ਜਾਵੇਗੀ ..
Posted by sukhvinder singh
Punjab
02-09-2019 10:49 PM
BhaaG koi fayeda ni isnu 1kg kanak da dalia 500g gur ch rinh ke swer shaam khuao Rajwa hara chaara te har 3kg dudh lai 1kg feed pao

Posted by Harpal Singh
Punjab
02-09-2019 10:45 PM

Posted by md meraz uddin
Bihar
02-09-2019 10:35 PM
uddin ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori janakri di ja sake.dhanywad

Posted by satnam singh
Punjab
02-09-2019 10:35 PM
Satnam singh ji tussi October-November tak beej sakde ho ate mandi wich is da rate 140rs prati killode hissab naal chal reha hai ,eh 114 dina tak pak jaandi hai.

Posted by satnam singh
Punjab
02-09-2019 10:32 PM
ਮੱਕੀ ਦੀ ਫਸਲ ਲਗਾਉਣ ਲਈ ਉਪਜਾਊ,ਵਧੀਆ ਜਲ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ, ਮੈਰਾ ਅਤੇ ਲਾਲ ਮਿੱਟੀ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਉਚਿੱਤ ਮਾਤਰਾ ਹੋਵੇ, ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਮੱਕੀ ਰੇਤਲੀਆਂ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਭਾਰੀਆਂ ਹਰ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਪੱਧਰੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਮੱਕੀ ਲਈ ਬਹੁਤ ਅਨੁਕੂਲ ਹਨ, ਪਰ ਕਈ ਪਹਾੜੀ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵੀ ਇਹ ਫਸਲ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਵੱਧ ਝਾੜ ਲੈਣ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਜੈਵਿਕ ਤ.... (Read More)
ਮੱਕੀ ਦੀ ਫਸਲ ਲਗਾਉਣ ਲਈ ਉਪਜਾਊ,ਵਧੀਆ ਜਲ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ, ਮੈਰਾ ਅਤੇ ਲਾਲ ਮਿੱਟੀ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਉਚਿੱਤ ਮਾਤਰਾ ਹੋਵੇ, ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਮੱਕੀ ਰੇਤਲੀਆਂ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਭਾਰੀਆਂ ਹਰ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਪੱਧਰੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਮੱਕੀ ਲਈ ਬਹੁਤ ਅਨੁਕੂਲ ਹਨ, ਪਰ ਕਈ ਪਹਾੜੀ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵੀ ਇਹ ਫਸਲ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਵੱਧ ਝਾੜ ਲੈਣ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਜੈਵਿਕ ਤੱਤਾਂ ਦੀ ਵੱਧ ਮਾਤਰਾ, pH 5.5-7.5 ਅਤੇ ਵੱਧ ਪਾਣੀ ਰੋਕ ਕੇ ਰੱਖਣ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਬਹੁਤ ਜਿਆਦਾ ਭਾਰੀਆਂ ਜਮੀਨਾਂ ਇਸ ਫਸਲ ਲਈ ਵਧੀਆ ਨਹੀ ਮੰਨੀਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ
ਖੁਰਾਕੀ ਤੱਤਾਂ ਦੀ ਘਾਟ ਪਤਾ ਕਰਨ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਜਾਂਚ ਕਰਵਾਉਣੀ ਜਰੂਰੀ ਹੈ PMH 1:-ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸੇਂਜੂ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਸਾਉਣੀ,ਬਸੰਤ ਅਤੇ ਗਰਮੀ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵੇਲੇ ਬੀਜੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਹ ਲੰਮੇ ਸਮੇਂ ਵਾਲੀ ਫਸਲ ਹੈ ਜੋ 95 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਤਣਾ ਮਜ਼ਬੂਤ ਅਤੇ ਜਾਮਣੀ ਰੰਗ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 21 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
Prabhat:-ਇਹ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸੇਂਜੂ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਸਾਉਣੀ,ਬਸੰਤ ਅਤੇ ਗਰਮੀ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵੇਲੇ ਬੀਜੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਹ ਦਰਮਿਆਨੇ ਲੰਬੇ ਕੱਦ, ਮੋਟੇ ਤਣੇ ਅਤੇ ਘੱਟ ਡਿੱਗਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ ਪੱਕਣ ਲਈ 95 ਦਿਨ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 17.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
Kesri:- ਇਹ ਦਰਮਿਆਨੇ ਸਮੇਂ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਪੱਕਣ ਲਈ 85 ਦਿਨ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਦਾਣੇ ਸੰਤਰੀ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇਸਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 16 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
PMH-2:-ਇਹ ਘੱਟ ਸਮੇਂ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਪੱਕਣ ਲਈ 83 ਦਿਨ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਸੇਂਜੂ ਅਤੇ ਘੱਟ ਵਰਖਾ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਹ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਕਿਸਮ ਸੋਕੇ ਨੂੰ ਸਹਿਣਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੇ ਬਾਬੂ ਝੰਡੇ ਦਰਮਿਆਨੇ ਆਕਾਰ ਦੇ ਅਤੇ ਦਾਣੇ ਸੰਤਰੀ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 16.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਫਸਲ ਲਈ ਵਰਤਿਆ ਜਾਣ ਵਾਲਾ ਖੇਤ ਨਦੀਨਾਂ ਅਤੇ ਪਿਛਲੀ ਫਸਲ ਤੋਂ ਮੁਕਤ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਮਿੱਟੀ ਨੂੰ ਨਰਮ ਕਰਨ ਲਈ 6 ਤੋਂ 7 ਵਾਰ ਵਾਹੋ ਖੇਤ ਵਿੰਚ 4-6 ਟਨ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਅਤੇ 10 ਪੈਕਟ ਐਜ਼ੋਸਪੀਰੀਲਮ ਦੇ ਪਾਉ ਖੇਤ ਵਿੱਚ 45-50 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਖਾਲ ਅਤੇ ਵੱਟਾਂ ਬਣਾਉ ਸਾਉਣੀ ਦੀ ਰੁੱਤ ਵਿੱਚ ਇਹ ਫਸਲ ਮਈ ਦੇ ਅਖੀਰ ਤੋਂ ਜੂਨ ਵਿੱਚ ਮਾਨਸੂਨ ਆਉਣ ਤੇ ਬੀਜੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬਸੰਤ ਰੁੱਤ ਦੀ ਫਸਲ ਫਰਵਰੀ ਦੇ ਅੰਤ ਤੋਂ ਅੰਤ ਮਾਰਚ ਤੱਕ ਬੀਜੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬੇਬੀ ਕੋਰਨ ਦਸੰਬਰ-ਜਨਵਰੀ ਨੂੰ ਛੱਡ ਕੇ ਬਾਕੀ ਸਾਰਾ ਸਾਲ ਬੀਜੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਹਾੜੀ ਅਤੇ ਸਾਉਣੀ ਦੀ ਰੁੱਤ ਸਵੀਟ ਕੌਰਨ ਲਈ ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ 3-4 ਸੈ.ਮੀ. ਡੂੰਘਾਈ ਵਿੱਚ ਬੀਜੋ ਸਵੀਟ ਕੌਰਨ ਦੀ ਬਿਜਾਈ 2.5 ਸੈ.ਮੀ. ਡੂੰਘਾਈ ਵਿੱਚ ਕਰੋ ਬਿਜਾਈ ਹੱਥੀਂ ਟੋਆ ਪੁੱਟ ਕੇ ਜਾਂ ਆਧੁਨਿਕ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਟ੍ਰੈਕਟਰ ਅਤੇ ਸੀਡ ਡਰਿੱਲ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਵੱਟਾਂ ਬਣਾ ਕੇ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ (ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਜਾਂਚ ਮੁਤਾਬਕ ਹੀ ਖਾਦਾਂ ਪਾਓ)ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ 75-150 ਕਿਲੋ, ਯੂਰੀਆ 75-110 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ 15-20 ਕਿਲੋ (ਜੇਕਰ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਕਮੀ ਦਿਖੇ) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ ਐੱਸ.ਐੱਸ.ਪੀ. ਅਤੇ ਐੱਮ.ਓ.ਪੀ. ਦੀ ਪੂਰੀ ਮਾਤਰਾ ਅਤੇ ਯੂਰੀਆ ਦਾ ਤੀਜਾ ਹਿੱਸਾ ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ ਪਾਓ ਬਾਕੀ ਬਚੀ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਪੌਦੇ ਗੋਡਿਆਂ ਤੱਕ ਹੋਣ ਤੇ ਅਤੇ ਗੁੱਛੇ ਬਣਨ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਪਾਓ
ਮੱਕੀ ਦੀ ਫਸਲ ਵਿੱਚ ਜਿੰਕ ਅਤੇ ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ ਦੀ ਘਾਟ ਆਮ ਵੇਖਣ ਨੂੰ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਘਾਟ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਕਰਨ ਲਈ ਜ਼ਿੰਕ ਸਲਫੇਟ 8 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਬੁਨਿਆਦੀ ਖੁਰਾਕ ਦੇ ਤੌਰ ਤੇ ਪਾਓ ਜ਼ਿੰਕ ਅਤੇ ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਲੋਹੇ ਦੀ ਕਮੀ ਵੀ ਦੇਖਣ ਨੂੰ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਸਾਰਾ ਪੌਦਾ ਪੀਲਾ ਪੈ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਘਾਟ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਕਰਨ ਲਈ 25 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਸੂਖਮ ਤੱਤਾਂ ਨੂੰ 25 ਕਿੱਲੋ ਰੇਤ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਬੀਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਾਓ ਸਾਉਣੀ/ਮਾਨਸੂਨ ਰੁੱਤ ਦੀ ਮੱਕੀ ਵਿੱਚ ਨਦੀਨ ਵੱਡੀ ਸਮੱਸਿਆ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜੋ ਕਿ ਖੁਰਾਕੀ ਤੱਤ ਲੈਣ ਵਿੱਚ ਫਸਲ ਨਾਲ ਮੁਕਾਬਲਾ ਕਰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ 35% ਤੱਕ ਝਾੜ ਘਟਾ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਲਈ ਵੱਧ ਝਾੜ ਲੈਣ ਲਈ ਨਦੀਨਾਂ ਦਾ ਹੱਲ ਕਰਨਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਮੱਕੀ ਦੀਆਂ ਘੱਟ ਤੋਂ ਘੱਟ ਦੋ ਗੋਡੀਆਂ ਕਰੋ ਪਹਿਲੀ ਗੋਡੀ, ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 20-25 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਅਤੇ ਦੂਜੀ ਗੋਡੀ 40-45 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਪਰ ਜਿਆਦਾ ਹੋਣ ਦੀ ਸੂਰਤ ਵਿੱਚ ਐਂਟੇਰਾਜੀਨ 500 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ 200 ਲੀ. ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਸਪ੍ਰੇਅ ਕਰੋ ਗੋਡੀ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਮਿੱਟੀ ਉੱਪਰ ਖਾਦ ਦੀ ਪਤਲੀ ਪਰਤ ਵਿਛਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਜੜਾਂ ਨਾਲ ਮਿੱਟੀ ਲਾਓ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਤੁਰੰਤ ਬਾਅਦ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਕਿਸਮ ਦੇ ਅਧਾਰ ਤੇ ਤੀਜੇ ਜਾਂ ਚੌਥੇ ਦਿਨ ਦੋਬਾਰਾ ਪਾਣੀ ਲਗਾਓ ਜੇਕਰ ਮੀਂਹ ਪੈ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਸਿੰਚਾਈ ਨਾ ਕਰੋ ਛੋਟੀ ਫਸਲ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਨਾ ਖੜਨ ਦਿਓ ਅਤੇ ਵਧੀਆ ਨਿਕਾਸ ਦਾ ਪ੍ਰਬੰਧ ਕਰੋ ਫਸਲ ਨੂੰ ਬੀਜਣ ਤੋਂ 20-30 ਦਿਨ ਤੱਕ ਘੱਟ ਪਾਣੀ ਦਿਉ ਅਤੇ ਬਾਅਦ ਵਿੱਚ ਹਫਤੇ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਵਾਰੀ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਜਦੋਂ ਪੌਦੇ ਗੋਡੇ ਦੇ ਕੱਦ ਦੇ ਹੋ ਜਾਣ ਤਾਂ ਫੁੱਲ ਨਿਕਲਣ ਸਮੇਂ ਅਤੇ ਦਾਣੇ ਬਣਨ ਸਮੇਂ ਸਿੰਚਾਈ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਇਸ ਸਮੇਂ ਪਾਣੀ ਦੀ ਕਮੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਝਾੜ ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਕਮੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਇੱਕ ਵੱਟ ਛੱਡ ਕੇ ਪਾਣੀ ਦਿਉ ਇਸ ਨਾਲ ਪਾਣੀ ਵੀ ਬਚਦਾ ਹੈ ਛੱਲੀਆਂ ਦੇ ਬਾਹਰਲੇ ਪਰਦੇ ਹਰੇ ਤੋਂ ਚਿੱਟੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੋਣ ‘ਤੇ ਫਸਲ ਦੀ ਵਾਢੀ ਕਰੋ ਤਣੇ ਦੇ ਸੁੱਕਣ ਅਤੇ ਦਾਣਿਆਂ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 17-20% ਹੋਣ ਦੀ ਸੂਰਤ ਵਿੱਚ ਵਾਢੀ ਕਰਨਾ ਇਸ ਲਈ ਢੁਕਵਾਂ ਸਮਾਂ ਹੈ ਵਰਤੇ ਜਾਂਦੀ ਜਗ੍ਹਾ ਅਤੇ ਸੰਦ ਸਾਫ, ਸੁੱਕੇ ਅਤੇ ਰੋਗਾਣੂਆਂ ਤੋਂ ਮੁਕਤ ਹੋਣੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ
ਸਵੀਟ ਕੋਰਨ ਦੀ ਵਾਢੀ:- ਜਦੋਂ ਫਸਲ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਹੋਵੇ ਜਾ ਕੇ ਰੋਜ਼ ਕੁੱਝ ਸਿੱਟਿਆ ਦੀ ਜਾਂਚ ਕਰੋ, ਤਾਂ ਕਿ ਵਾਢੀ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਪਤਾ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕੇ ਛੱਲੀਆਂ ਦੇ ਪੂਰੇ ਆਕਾਰ ਵਿੱਚ ਆਉਣ ਅਤੇ ਰੇਸ਼ੇ ਦੇ ਸੁੱਕਣ ਤੇ ਵਾਢੀ ਦਾਣਿਆਂ ਨੂੰ ਤੋੜਨ ਤੇ ਉਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਦੁੱਧ ਨਿਕਲਦਾ ਹੈ ਵਾਢੀ ਵਿੱਚ ਦੇਰੀ ਹੋਣ ਨਾਲ ਮਿਠਾਸ ਘਟ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਵਾਢੀ ਹੱਥਾਂ ਜਾਂ ਮਸ਼ੀਨ ਨਾਲ ਰਾਤ ਦੇ ਸਮੇਂ ਜਾਂ ਸਵੇਰੇ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ
ਬੇਬੀ ਕੋਰਨ:- ਛੱਲੀਆਂ ਨੂੰ ਨਿਕਲਣ ਤੋਂ 45-50 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਜਦੋਂ ਰੇਸ਼ੇ 1-2 ਸੈਂ.ਮੀ. ਦੇ ਹੋਣ (ਰੇਸ਼ੇ ਨਿਕਲਣ ਤੋਂ 1-2 ਦਿਨ ਬਾਅਦ) ‘ਤੇ ਵਾਢੀ ਕਰੋ ਵਾਢੀ ਸਵੇਰ ਵੇਲੇ ਕਰੋ ਜਦੋਂ ਕਿ ਤਾਪਮਾਨ ਘੱਟ ਅਤੇ ਨਮੀ ਵੱਧ ਹੋਵੇ ਇਸਦੀ ਤੁੜਾਈ ਹਰੇਕ 3 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਕਰੋ ਅਤੇ ਕਿਸਮ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ 7-8 ਤੁੜਾਈਆਂ ਕਰੋ
ਪੋਪ ਕੋਰਨ :-ਛੱਲੀਆਂ ਨੂੰ ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ ਸਮੇਂ ਲਈ ਪੌਦਿਆਂ ਉਤੇ ਹੀ ਰਹਿਣ ਦਿਉ ਜੇਕਰ ਹੋ ਸਕੇ ਤਾਂ ਛਿਲਕੇ ਦੇ ਸੁੱਕਣ ਤੇ ਹੀ ਵਾਢੀ ਕਰੋ

Posted by kuldeep Singh Aulakh
Punjab
02-09-2019 10:22 PM
Tuci uss nu pett de kiria lai Nilzan liquid 1ml/3kg sarir de bhar de hisab nal deo ate her 3 mahine badd deworming jrur kro, baki uss nu broton liquid 20ml rojana deo ate Groviplex liquid 15ml rojana dena suru kro, iss nal vdia growth howegi, baki usdi khurak ate feed da puura dian rkho ji.
Posted by nirlep
Punjab
02-09-2019 10:18 PM
BhaaG har zile ch ik mela officer hunda ae Eh Pendu te Pachayat mahkme heth aunda ae Tuci DDPO OR BDPO NAAL SAMPARK KARO G

Posted by bhimsain
Punjab
02-09-2019 10:15 PM
bhimsan ji fame kaffi mehngi dwa hai agar khet men sundi ka prakop nahi hai to aap iska istemal na karen.dhanywad

Posted by Baljinder Singh
Punjab
02-09-2019 10:12 PM
ਬਲਜਿੰਦਰ ਜੀ ਜੇਕਰ ਝੋਨਾ ਨਿਸਾਰ ਗਿਆ ਹੈ ਤਾ ਤੁਸੀ ਇਸਦੇ ਉਪਰ tilt @200ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by विनायक गिते
Maharashtra
02-09-2019 10:11 PM
गुड गन्ने के रस से बनाया जाता है गुड बनाने के लिए खेत से गन्ने को अच्छे से साफ किया जाता है उसके बाद रस निकालने वाले कॉल उसे करने का रस निकाल लिया जाता है और उस रस को एक तकनीक से कढ़ाई में पकाया जाता है रसगुल्ले लग जाता है तो उसके अंदर बगैर केमिकल एंड भिंडी के पेड़ का रस डाल के उसको साफ कर दिया जाता है जिससे उसका .... (Read More)
गुड गन्ने के रस से बनाया जाता है गुड बनाने के लिए खेत से गन्ने को अच्छे से साफ किया जाता है उसके बाद रस निकालने वाले कॉल उसे करने का रस निकाल लिया जाता है और उस रस को एक तकनीक से कढ़ाई में पकाया जाता है रसगुल्ले लग जाता है तो उसके अंदर बगैर केमिकल एंड भिंडी के पेड़ का रस डाल के उसको साफ कर दिया जाता है जिससे उसका मेल बाहर निकल जाता है और फिर उसको उसका भाई के अंदर अच्छे से मिला दिया जाता है इलाके में दो बार बार पलटी मार के टेंपरेचर के हिसाब से उसको अपने साइज के हिसाब की जाति ऐसे तैयार होता

Posted by Vinod Kumar
Uttar Pradesh
02-09-2019 09:55 PM
Vinod Kumar ji kanpur me pig farm dekhne ke lia aap Snowbreed Pig Farm, Address: Tajpur, Bhuwanpur road, Uttar Pradesh 209622, Phone: 078811 37363 se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by Gurpreet Singh
Punjab
02-09-2019 09:54 PM
Tuci uss nu doctor ton check krwao ji usdi leg nu koi chott ja koi hor smasia ho skdi hai usdi janch krke sahi ilagg ho skda hai..
Posted by ishwar singh
Haryana
02-09-2019 09:51 PM
85 प्रतिशत फलियों के पक जाने पर कटाई की जाती है फलियों को ज्यादा पकने नहीं देना चाहिए इससे वे झड़ जाती हैं जिससे पैदावार का नुकसान होता है कटाई दरांती से करें कटाई के बाद थ्रैशिंग करें थ्रैशिंग के बाद बीजों का साफ करें और धूप में सूखाएं
Posted by ATMA singh
Punjab
02-09-2019 09:50 PM
ਆਤਮਾ ਜੀ ਉਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਖੇਤ ਵਿਚ ਹਰੀ ਖਾਦ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਜਿਸਦੇ ਵਿਚ ਤੁਸੀ ਜੰਤਰ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by roshan
Maharashtra
02-09-2019 09:46 PM
safed makhi ki roktham ke liye Mainstar @200 gm ja Lano @500 ml per acre ka spray kr skte ho g..spray 200 liter pani mein hi kro..

Posted by Ravi Kumar
Uttar Pradesh
02-09-2019 09:37 PM
Ravi Kumar Ji-aap seed drill ka istemaal kar sakte hain .

Posted by janmajy
Uttar Pradesh
02-09-2019 09:35 PM
Bhains ko aap rojana 35-40kg hara chara deo aur 5-7 kg turri mix krke den, uske rehne wali jgah mai saff safai ka puura dian rkhen aur her 3 mahine ke badd pett de kirro ke liye goli jrur den, isse pashu ki achi growth hoti hai..
Posted by Gurpartap dhillon
Punjab
02-09-2019 09:33 PM
gurpartap ji kirpa karke daso ke tuc isnu kehdi fasl de vich vartna chahunde ho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by Lalchand Mehta
Madhya Pradesh
02-09-2019 09:33 PM
यदि आप डेयरी फार्मिंग बड़े स्तर पर करना चाहते है तो आप इसकी ट्रेनिंग लेकर इस काम को करें जिसमें आपको इस काम के बारे में सारी जानकारी प्राप्त होगी , वहां आपको इसके शेड को तैयार करना और उसमें पशुओं को सही तरीके से रखने के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी प एक बार में इक्ट्ठी गाय ना खरीदें गायों को 2-2 महीनो.... (Read More)
यदि आप डेयरी फार्मिंग बड़े स्तर पर करना चाहते है तो आप इसकी ट्रेनिंग लेकर इस काम को करें जिसमें आपको इस काम के बारे में सारी जानकारी प्राप्त होगी , वहां आपको इसके शेड को तैयार करना और उसमें पशुओं को सही तरीके से रखने के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी प एक बार में इक्ट्ठी गाय ना खरीदें गायों को 2-2 महीनों के फासले पर खरीदें या फिर 3 पहले खरीदें ओर 3 महीने बाद फिर खरीद लें इससे दूध की कमी नहीं आयेगी पशु की नसल सबसे ज्यादा जरूरी है पशु खरीदने के समय कोशिश करें कि दिन में तीन बार दूध निकालकर ही पशु खरीदें भैंसो का एक दिन का दूध 12 लीटर और गायों को दूध 16-17 लीटर से कम ना हो गाभिनों को खरीदने का सही समय रखड़ियों से लेकर वैशाखी तक का होता है क्योंकि इस समय मौसम अच्छा होने के कारण हरा चारा भी खुला होता है गाभिनों के लिए शैड आवाजाई वाली सड़क पर ना बनायें और शैड सड़क से कम से कम 100 गज दूर हो शैड को धूप और हवा का ध्यान रखकर ही बनायें शैड हमेशा खेत या आस पास से 2 फुट ऊंचा बनायें क्योंकि निचले स्थान पर पानी खड़ा हो जाता है जिस कारण गंदगी पैदा हो जाती है और बाकी पशुओं का मल मूत्र का निकास भी आसानी से हो जाता है पशुओं के लिए बनायी जाने वाली खुरली ढाई तीन फुट चौड़ी होनी चाहिए खुरली पर खड़ने के लिए एक पशु को तकरीबन चार फुट जगह चाहिए मतलब 10 पशुओं के लिए 40 फुट लंबी खुरली बनेगी डेयरी फार्म से संबंधित सामान रखने के लिए स्टोर बनायें पशुओं का वितरण/दाना स्टोर करने के लिए कमरा सैलाब से रहित होना चाहिए शैड का फर्श पक्क, फिसलन रहित और जल्दी साफ होने वाला हो शैड में जितना हो सके पशुओं को खुला छोंड़े और पानी और दाना पूरा डालें पशु को खुला छोड़ने से पशुओं में अफारे की समस्या कम आती है बाकी अपनी आवश्यकता और क्षमता के मुताबिक ही सामान खरीदें और आर्थिक नुकसान से बचने के लिए प्रत्येक गाभिन का बीमा जरूर करवायें

Posted by nazar ahmad khan
Chattisgarh
02-09-2019 09:28 PM
अहमद जी कृपया आप इसकी जड़ों में दीमक चेक करें अगर मौजूद है तो आप इसके ऊपर chlorpyriphos @4 ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें

Posted by Sumer Singh
Haryana
02-09-2019 09:25 PM
Sumer singh ji- कपास की हर तरह की मिट्टी की किस्म में खेती की जा सकती है गहरी मैरा, अच्छी जल निकास वाली, पानी को बांध कर रखने वाली और अच्छी जैविक खनिजों वाली ज़मीन सब से अच्छी रहती है नर्म और रेतली ज़मीनें इसके लिए अच्छी नहीं होती क्योंकि इसमें बनी गांठे जल्दी खराब हो जाती हैं ज़मीन का पी एच 6-7 होना चाहिए HG 27: यह उच्च पैदावार.... (Read More)
Sumer singh ji- कपास की हर तरह की मिट्टी की किस्म में खेती की जा सकती है गहरी मैरा, अच्छी जल निकास वाली, पानी को बांध कर रखने वाली और अच्छी जैविक खनिजों वाली ज़मीन सब से अच्छी रहती है नर्म और रेतली ज़मीनें इसके लिए अच्छी नहीं होती क्योंकि इसमें बनी गांठे जल्दी खराब हो जाती हैं ज़मीन का पी एच 6-7 होना चाहिए HG 27: यह उच्च पैदावार वाली हाइब्रिड किस्म सी सी एस हिसार द्वारा विकसित की गई है
HG 17: यह उच्च पैदावार वाली हाइब्रिड किस्म सी सी एस हिसार द्वारा विकसित की गई है यह जामुनी धब्बों से थोड़ी प्रभावित होती है और इसे लंबे समय के लिए संभालकर रखा जा सकता है इसकी औसतन पैदावार 45-50 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Yamuna Safed (G-1): इसकी गांठे सख्त और सफेद होती हैं और कलियां द्राती के आकार की होती हैं और प्रत्येक गांठ में 25-30 कलियां होती हैं
Yamuna Safed 2(G-50): इसकी गांठे भी सख्त और सफेद होती हैं और 35-40 कलियां प्रति गांठ होती हैं
G 40: इसकी गांठे ताजी, सफेद रंग की होती हैं और इसकी औसतन पैदावार 50-60 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Yamuna Safed 3 (G 282): गांठे सफेद और आकार में बड़ी होती हैं और 15-16 कलियां प्रति गांठ होती हैं
Yamuna Safed 4 (G 323): गांठे सफेद और 20-25 कलियां प्रति गांठ होती हैं खेत को 3-4 बार जोतकर नर्म करें और जैविक खनिजों को बढ़ाने के लिए रूड़ी की खाद डालें खेत को समतल करके क्यारियों और खालियों में बांट दें बिजाई के लिए सही समय सितंबर के आखिरी सप्ताह से अक्तूबर माना जाता हैपौधे से पौधे का फासला 8-10 सैं.मी. और पंक्तियों में फासला 15 सैं.मी. रखेंलहसुन की गांठों को 5-6 सैं.मी. गहरा और उसका उगने वाला हिस्सा ऊपर की तरफ रखेंइसकी बिजाई के लिए केरा ढंग का प्रयोग करें बिजाई हाथों से या मशीन से की जा सकती है लहसुन की गांठों को मिट्टी से ढककर हल्की सिंचाई करें बिजाई के लिए 1.5-2 क्विंटल बीज प्रति एकड़ प्रति एकड़ में प्रयोग करें बीज को थीरम 2 ग्राम प्रति किलो $ बैनोमाईल 50 डब्लयु पी 1 ग्राम प्रति लीटर पानी से उपचार कर उखेड़ा रोग और कांगियारी से बचाया जा सकता है रासायण प्रयोग करने के बाद बीज को टराइकोडरमा विराइड 2 ग्राम प्रति किलो बीज से उपचार कर इसे मिट्टी की बीमारियों से बचाया जा सकता हैखेत की तैयारी के समय में 2 टन रूड़ी की खाद डालें 50 किलो नाइट्रोजन (110 किलो यूरिया) और 20 किलो फासफोरस (125 किलो एस एस पी), पोटाश 10 किलो (17 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) प्रति एकड़ डालें सारी एस एस पी बिजाई से पहले और नाइट्रोजन तीन हिस्सों में बिजाई के 30, 45 और 60 दिन बाद डालें
पानी में घुलनशील खादें: फसल को खेत में लगाने के 10-15 दिन बाद 19:19:19 और सूक्ष्म तत्व 2.5-3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करेंसिंचाई वातावरण और ज़मीन के अनुसार करें पहली सिंचाई बिजाई के तुरंत बाद करें सर्दियों में 10-15 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में हर सप्ताह सिंचाई करें
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