Posted by manoj
Jharkhand
04-09-2019 02:02 PM
Nazdik de pashuan de hospital or krishi vigyan kendar se sampark karein

Posted by नारायण
Rajasthan
04-09-2019 01:58 PM
नारायण जी काले गेहूं का बीज लेने के लिए आप पुनीत सिंह थिंद 9991320236 से सम्पर्क कर सकते है धन्यवाद
Posted by Gurpartap dhillon
Punjab
04-09-2019 01:51 PM
Gurpratap dhillon ji Alika syngenta ik keetnashak hai ,eh ras choosan wale keet jiven ke thrips,aphids,hoppers de lai istemaal kita jaanda hai .Tussi es di 80 ml dose 150 ml paani wich paa ke istemaal kar sakde ho.

Posted by HARJEET SINGH
Punjab
04-09-2019 01:48 PM
jhulas rog di roktham de layi tuc mancozeb@4 gram nu prtai litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by jaskarn
Haryana
04-09-2019 01:36 PM
shrimaan g kirpa krke fungicide ke level ki photo bhejo ta jo aap ko poori jaankari mil ske g..

Posted by Ramlal Beniwal Beniwal
Rajasthan
04-09-2019 01:36 PM
रामलाल बेनीवाल जी ये फफूँद के कारण हुआ है आप इसके लिए copper oxychloride 400 ग्राम 150 लीटर पानी मैं इस्तेमाल कर सकते हैं.जब तापमान अधिक होता है तब फल फ़ट जाते हैं .कृपया आप इसके लिए सिंचाई अच्छी रखें .
Posted by sunilbabu
Uttar Pradesh
04-09-2019 01:35 PM
sunilbabu ji aap iske liye quinolphos 4 ml prati acre ke hisaab se istemaal kar sakte hain.

Posted by kamal
Haryana
04-09-2019 01:31 PM
Dhaan mein patta lapet soondi ki roktham ke liye Fame @30 ml ja Coragen @60 ml per acre ja Barazide @400 ml per acre ka spray kr skte ho g..
Posted by Dilbag singh
Punjab
04-09-2019 01:27 PM
ਜੇਕਰ ਮੱਝਾ ਦੇ ਲੇਵੇ ਨੂੰ ਸੋਜਿਸ਼ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸ ਨੂੰ ਕਾਲੀਆ ਮਿਰਚਾਂ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਲਿਆ ਕੇ 20 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣੀਆਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਸਬਜ਼ੀ ਵਾਲਾ ਪੇਠਾ 1 ਕਿਲੋ ਰੋਜਾਨਾ ਖਿਲਾਓ, 5 ਦਿਨ ਦੇਣ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ, ਜੇਕਰ ਫਰਕ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦਾ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਇਸਨੂੰ carpaid injection 10ml ਲਗਵਾਓ, ਇਹ carries company ਦਾ ਪ੍ਰੋਡਕਟ ਹੈ ਜਾਂ ਤੁਸੀਂ cotalife injection ਲਗਵਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ,ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਵੀ ਇੱਕ ਲਗਵ.... (Read More)
ਜੇਕਰ ਮੱਝਾ ਦੇ ਲੇਵੇ ਨੂੰ ਸੋਜਿਸ਼ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸ ਨੂੰ ਕਾਲੀਆ ਮਿਰਚਾਂ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਲਿਆ ਕੇ 20 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣੀਆਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਸਬਜ਼ੀ ਵਾਲਾ ਪੇਠਾ 1 ਕਿਲੋ ਰੋਜਾਨਾ ਖਿਲਾਓ, 5 ਦਿਨ ਦੇਣ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ, ਜੇਕਰ ਫਰਕ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦਾ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਇਸਨੂੰ carpaid injection 10ml ਲਗਵਾਓ, ਇਹ carries company ਦਾ ਪ੍ਰੋਡਕਟ ਹੈ ਜਾਂ ਤੁਸੀਂ cotalife injection ਲਗਵਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ,ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਵੀ ਇੱਕ ਲਗਵਾਓ.

Posted by gurvinder singh
Punjab
04-09-2019 01:21 PM
shrimaan g eh fungus disease hai esdi roktham lyi Custodia @250 ml ja Amistar top @200 ml per acre ja Validamycin @300 ml per acre da spray kr skde ho g..

Posted by gaurav rana
Haryana
04-09-2019 01:20 PM
Isko 1kg gahun ka dalia 500g gur ch rinh ke swer shaam khuao Rajwa hara chaara te har 3kg dudh lai majh nu 1kg feed pao har 3 mahine baad pet ke kirhe nikalne ki dwaee deo 1quintal feed da formula Anaaj 40kg khal 30kg chokar or rice polish 30kg min mix 2kg namak 1kg feed aapni banao
Posted by Ankit
Haryana
04-09-2019 01:19 PM
Ankit ji aap inka istemaal kar sakte hain,custodia 300ml prati acre ke hisaab se kar sakte hain,torpid pro 1-2 gram prati acre ke hisaab se kar sakte hain.
Posted by jaspreet singh
Punjab
04-09-2019 01:05 PM
ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਹ ਦੱਸੋ ਤੁਸੀ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਿਸਦੇ ਲਈ ਕਰਨੀ ਹੈ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਆਪਣਾ ਸਵਾਲ ਵਿਸਤਾਰ ਨਾਲ ਪੁਸ਼ੋ ਤਾਂ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ

Posted by Sandeep
Punjab
04-09-2019 01:01 PM
sandeep ji tuc isda istemal kar sakde ho isdi matra 300ml nu prati acre de hisab nal varto.dhanwad

Posted by kawal
Punjab
04-09-2019 12:50 PM
ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ ਅਤੇ 1 ਕਿਲੋ ਦਲੀਆ ਚੰਗੀ ਤ੍ਰਾਹ ਰਿਨ ਕੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰੋ , ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਅੱਧਾ ਅੱਧਾ ਕਰਕੇ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਤੁਸੀ 5-7 ਦਿਨ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗਾ , ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ Anabolite liquid 100ml ਰੋਜ, Milkout ਪਾਊਡਰ ਦੇ 2-2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ, ਇਸਦਾ ਵੀ ਦੁੱਧ ਵਧਾਉਣ ਵਿਚ ਵਧਿਆ ਰਿਜਲਟ ਹੈ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਖੁਰਾਕ ਦਾ ਪੂਰਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ.
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ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ ਅਤੇ 1 ਕਿਲੋ ਦਲੀਆ ਚੰਗੀ ਤ੍ਰਾਹ ਰਿਨ ਕੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰੋ , ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਅੱਧਾ ਅੱਧਾ ਕਰਕੇ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਤੁਸੀ 5-7 ਦਿਨ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗਾ , ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ Anabolite liquid 100ml ਰੋਜ, Milkout ਪਾਊਡਰ ਦੇ 2-2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ, ਇਸਦਾ ਵੀ ਦੁੱਧ ਵਧਾਉਣ ਵਿਚ ਵਧਿਆ ਰਿਜਲਟ ਹੈ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਖੁਰਾਕ ਦਾ ਪੂਰਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ.
Posted by Ravinder Kumar
Punjab
04-09-2019 12:48 PM
Ravinder Kumar ji PAU kisan mela 20-21 sep 2019 nu ho reha hai, Thankyou.

Posted by Mohit paliwal
Uttar Pradesh
04-09-2019 12:41 PM
पुदीना मैंथा के नाम से जानी जाने वाली एक क्रियाशील जड़ी बूटी है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी .... (Read More)
पुदीना मैंथा के नाम से जानी जाने वाली एक क्रियाशील जड़ी बूटी है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- MAS-1: यह छोटे कद की किस्म है जिसकी ऊंचाई 30-45 सैं.मी. होती है यह बीमारीयों की रोधक और जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 70-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है Hybrid-77: इसकी ऊंचाई 50-60 सैं.मी. होती है यह किस्म पत्तों के धब्बा रोग और कुंगी के रोधक होती है, और यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 80-85% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है यह रेतली दोमट मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है औरऐसी शुष्क मौसम में की आवश्यकता होती है Shivalik: यह चीन की खेती से चुनी गई किस्म है यह किस्म उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों और उत्तरांचल में अच्छी वृद्धि करती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 65-70% होती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 72 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है यह किस्म फंगस रोगों से जल्दी प्रभावित होती है EC-41911: यह किस्म रूसी जर्मप्लाज्म से ली गई है यह किस्म पानी की रोधक और आकार में सीधी होती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 70%पायी जाती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 72 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है इस किस्म से तैयार तेल का प्रयोग विभिन्न व्यंजनों में स्वाद के लिए किया जाता है Gomti: यह किस्म रंग में हल्के लाल रंग की होती है इसकी पैदावार बाकी किस्मों की पैदावार से कम होती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 78-80% होती है Himalaya: इसके पत्तों का आकार बाकी किस्मों से बड़ा होता है यह किस्म कुंगी, झुलस, सफेद धब्बे और पत्तों पर धब्बे रोग की रोधक है इसमें मैन्थोल की मात्रा 78-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 80-100 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है Kosi: यह किस्म 90 दिनों में पक जाती है यह किस्म कुंगी, झुलस, सफेद धब्बे और पत्तों के धब्बे रोग की प्रतिरोधक है इसमें मैन्थोल की मात्रा 75-80 प्रतिशत होती है और तेल की पैदावार 80-100 किलोग्राम प्रति एकड़ होती है Saksham: यह किस्म सी वी हिमालय की तरफ से टिशू कल्चर द्वारा तैयार की गई है इसमें मैन्थोल की मात्रा 80% होती है और तेल की पैदावार 90-100 किलोग्राम प्राप्त होती है पुदीने की बिजाई के लिए सुविधाजनक आकार के बैड तैयार करें खेत की तैयारी के समय खेत की अच्छी तरह जोताई करें जैविक खाद जैसे रूड़ी की खाद 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें रूड़ी की खाद के बाद हरी खाद डालें इसकी बिजाई के लिए दिसंबर-जनवरी का समय अनुकूल होता है पौधे के भागों की बिजाई 40 सैं.मी. के फासले पर और पंक्तियों के बीच का फासला 60 सैं.मी होना चाहिए बीज को 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें पौधे के जड़ वाले भाग को मुख्य खेत में बोया जाता है खेत की तैयारी के समय रूड़ी की खाद 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 58 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 32-40 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 80-100 किलो), पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 33 किलो) प्रति एकड़ में डालें गर्मियों में मॉनसून से पहले जलवायु और मिट्टी के आधार पर 6-9 सिंचाइयां जरूर की जानी चाहिए मॉनसून के बाद 3 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई सितंबर महीने में, दूसरी अक्तूबर में और तीसरी नवंबर महीने में की जानी चाहिए सर्दियों में ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि सर्दियों में बारिश ना पड़े तो एक सिंचाई जरूर देनी चाहिए पौधे 100-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं जब निचले पत्ते पीले रंग के होने शुरू हो जायें, तब कटाई करें कटाई दराती से और बूटियों को मिट्टी की सतह के 2-3 सैं.मी. ऊपर से निकालें अगली कटाई पहली कटाई के बाद 80 दिनों के अंतराल पर करें ताजी पत्तियों को उत्पाद बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है, धन्यवाद
Posted by pawan kumar chaubey
Uttar Pradesh
04-09-2019 12:35 PM
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्ष.... (Read More)
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्षेत्रों में पाई जाती है यह गले को सूखेपन से राहत देता है यह हाथों, पैरों और गठिया की सूजन से आराम देता है Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum): यह चीन, ब्राज़ील, पूर्व नेपाल और साथ ही बंगाल, बिहार, चटगांव और भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में पाई जाती है इसका तना जामुनी और पत्ते हरे रंग के और बहुत ज्यादा सुगंधित होते है इसमें उचित मात्रा में औषधीय गुण जैसे ऐज़ाडिरैकटिन, ऐंटीफंगल , ऐंटीबैक्टीरियल, और पाचन तंत्र को ठीक रखती है यह गर्म क्षेत्रों में बढ़िया उगता है Babi Tulsi: यह पंजाब से त्रिवेंद्रम, बंगाल और बिहार में भी पाई जाती है इसका पौधा 1-2 फीट लम्बा होता है पत्ते 1-2 इंच लम्बे, अंडाकार और नुकीले होते है इसके पत्तों का स्वाद लौंग की तरह और सब्जियों में स्वाद के लिए प्रयोग किया जाता है तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें इसके मंडीकरण के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से संपर्क कर सकते हैं
Posted by Ankit
Haryana
04-09-2019 12:33 PM
ankit ji sundi ki roktham ke liye aap quinalphos@400ml ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by sanjay
Rajasthan
04-09-2019 12:29 PM
गाजर की जड़ों के अच्छे विकास के लिए गहरी, नर्म और चिकनी मिट्टी की जरूरत होती है बहुत ज्यादा भारी और ज्यादा नर्म मिट्टी गाजरों की फसल के लिए अच्छी नहीं मानी जाती अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी की पी एच 5.5 से 7 होनी चाहिए (अच्छी पैदावार के लिए 6.5 पी एच लाभदायक होती है) Pusa Kesar: यह लाल रंग की गाजर की किस्म है और आई ए आर आई, नई .... (Read More)
गाजर की जड़ों के अच्छे विकास के लिए गहरी, नर्म और चिकनी मिट्टी की जरूरत होती है बहुत ज्यादा भारी और ज्यादा नर्म मिट्टी गाजरों की फसल के लिए अच्छी नहीं मानी जाती अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी की पी एच 5.5 से 7 होनी चाहिए (अच्छी पैदावार के लिए 6.5 पी एच लाभदायक होती है) Pusa Kesar: यह लाल रंग की गाजर की किस्म है और आई ए आर आई, नई दिल्ली की तरफ से तैयार की गई है यह 90-110 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Pusa Meghali: यह संतरी रंग की गाजर की किस्म है और आई ए आर आई नई दिल्ली की तरफ से तैयार की गई है इसकी औसतन पैदावार 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है खेत को अच्छी तरह जोत कर नदीनों से मुक्त कर लेना चाहिए और कंकड़ों को अच्छी तरह तोड़कर समतल कर लें खेत की जोताई समय 10 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें ताजे गोबर और कम गली खाद को डालने से परहेज़ करें क्योंकि इससे जड़ें नर्म हो जाती हैं गाजर की देसी किस्मों के लिए अगस्त सितंबर का समय सही माना जाता है और यूरोपियन किस्मों के लिए अक्तूबर-नवंबर का महीना अच्छा माना जाता है बिजाई के लिए पंक्ति से पंक्ति का फासला 30-40 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 6-8 सैं.मी. होता है फसल के अच्छे विकास के लिए बीज की गहराई 1.5 सैं.मी. होनी चाहिए बिजाई के लिए 4-5 किलो बीज प्रति एकड़ के लिए काफी होती है बिजाई से पहले बीजों को 12-24 घंटे पानी में भिगो दें इससे बीज के अंकुरन में वृद्धि होती है गली हुई रूड़ी की खाद के साथ नाइट्रोजन 25 किलो (55 किलो यूरिया), फासफोरस 12 किलो (75 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 12 किलो (20 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में बिजाई के समय डालें जड़ों के अच्छे विकास के लिए पोटाश की जरूरत होती है बिजाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई करें यह अंकुरन में सहायता करती है उसके बाद मिट्टी की किस्म और जलवायु के आधार पर बाकी सिंचाइयां गर्मियों में 6-7 दिनों के फासले पर करें और सर्दियों के महीने में 10-12 दिनों के अंतराल पर करें आमतौर पर गाजर को तीन से चार सिंचाइयां की जरूरत होती है ज्यादा सिंचाई से परहेज़ करें क्योंकि इससे जड़ों के गलने का डर रहता है कटाई से दो या तीन हफ्ते पहले सिंचाई रोक दें इससे गाजर की मिठास और स्वाद बढ़ जाता है किस्मों के आधार पर बिजाई के 90-100 दिनों के बाद गाजरों की कटाई की जाती है इसकी कटाई हाथों से पौधों को जड़ों सहित उखाड़कर की जाती है कटाई के बाद गाजरों के ऊपरी हरे पत्तों को तोड़कर गाजरों को साफ पानी से धो लिया जाता है

Posted by gyanendrasingh
Uttar Pradesh
04-09-2019 12:28 PM
shrimaan g soyabean mein flowering sowing ke hisab se aw jati hai.ess mein aap NPK 13.O.45 @1 kg per acre ko 100 liter pani mein mila ke spray kr skte ho g..

Posted by Ranveer Singh
Punjab
04-09-2019 12:27 PM
Ranveer singh ji tussi is di beejai october mahine wich kar sakde ho.

Posted by gyanendrasingh
Uttar Pradesh
04-09-2019 12:25 PM
Gyanendra singh ji aap ye nutrient ki kami hai aap iske liye NP19:19:19 ko 150 litre paani main istemaal kar sakte hain.

Posted by kadir Ahmed mansuri
Madhya Pradesh
04-09-2019 12:15 PM
Posted by Babu Lal kumbhkar aray
Madhya Pradesh
04-09-2019 12:01 PM
बाबूलाल जी कृपया बताये के आप इसमें कोनसी दिक्कत आ रही है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by khuspal
Punjab
04-09-2019 11:59 AM
ਇਸ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਜਦੋਂ ਸਿੱਟਾ ਬਣਨਾ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਵੇ ਉਸ ਸਮੇਂ 500 ਗ੍ਰਾਮ ਕਾਪਰ ਔਕਸੀਕਲੋਰਾਈਡ ਨੂੰ 200 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਘੋਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ 10 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਅੰਤਰਾਲ ਦੌਰਾਨ ਇਸ ਦਾ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ I 15 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਇਸ ਘੋਲ ਦਾ ਫਿਰ ਤੋਂ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ I 200 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਟਿਲਟ 25 ਈ ਸੀ ਨੂੰ 200 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਇਸ ਘੋਲ ਦਾ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ I

Posted by khuspal
Punjab
04-09-2019 11:55 AM
khuspal ji jhone vich fatkadi fungus di roktham kardi hai isdi matra 1 killo nu kapde vich lapet ke pani vale nakke kol rakh deo.dhanwad

Posted by khuspal
Punjab
04-09-2019 11:52 AM
Shrimaan ji, joo di bijai vadde gamle vich kiti ja sakdi hai, isde lai tuc joo de beej da gamle vich shitta de sakde ho, dhanwad

Posted by khuspal
Punjab
04-09-2019 11:49 AM
khuspal ji tuc 130045 di sprya kar sakde ho isdi matra 10 gram nu prtai litre pani de hisab nal varto kiti jandi hai.dhanwad
Posted by JABBAR KHAN
Rajasthan
04-09-2019 11:48 AM
Jabbar ji kripya aap iske sath photo bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by Ajay Yadav
Madhya Pradesh
04-09-2019 11:45 AM
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं .... (Read More)
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं है तो तो आप अमृतपाल सिंह बराड़ प्रोफेसर, पीएयू लुधियाना इस वीडियो संबंधी विचार पड़ सकते हैं, यह फसल केसर की नहीं है, यह फसल कसुंबडे की है, इसे अंग्रेजी में Safflower कहते है, और विज्ञानं में इसे Carthamus tinctorius कहते है

Posted by sandeep upadhyay
Uttar Pradesh
04-09-2019 11:44 AM
Sandeep ji kripya aap yeh btayen ki gaye ko Mokk lggi hui hai ya koi aur smasia aa, kripya vistar se swal pushen tan jo apko sahi jankari di jaa skee.

Posted by Saraj Singh
Punjab
04-09-2019 11:33 AM
ਸਾਰਜ ਜੀ ਤੁਸੀ ਇਸਦੇ ਵਿਚ 130045 ਇਕ ਕਿਲੋ ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇ ਕਰੋ

Posted by Gaganpreet Singh
Punjab
04-09-2019 11:25 AM
Shrimaan g jhone vich haldi rog di roktham lyi Kocide @500 gm per acre de hisab nal spray kr skde ho g..

Posted by sunil
Haryana
04-09-2019 11:20 AM

Posted by Man bains
Punjab
04-09-2019 11:16 AM
Bhaa G tuci vachhi di taaran nazdik di laboratory wich culture karwa ke dasi pashuan wali dwaee doctor se bachedani me bharwao je pashu swere bole teeka shaam nu luwao je shaam nu tan teeka swer nu luwao jine din taarran disan une din teekalaguJe

Posted by vikas jat
Madhya Pradesh
04-09-2019 11:04 AM
तंबाकू सुंडी: यदि इस कीट का हमला दिखाई दे तो एसीफेट 57 एस पी 800 ग्राम या क्लोरपाइरीफॉस 20 ई सी को 1.5 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें यदि जरूरत पड़े तो पहली स्प्रे के 10 दिनों के बाद दूसरी स्प्रे करें बालों वाली सुंडी: बालों वाली सुंडी का हमला कम होने पर इसे हाथों से उठाकर या केरोसीन में डालकर खत्म कर दे.... (Read More)
तंबाकू सुंडी: यदि इस कीट का हमला दिखाई दे तो एसीफेट 57 एस पी 800 ग्राम या क्लोरपाइरीफॉस 20 ई सी को 1.5 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें यदि जरूरत पड़े तो पहली स्प्रे के 10 दिनों के बाद दूसरी स्प्रे करें बालों वाली सुंडी: बालों वाली सुंडी का हमला कम होने पर इसे हाथों से उठाकर या केरोसीन में डालकर खत्म कर दें इसका हमला ज्यादा हो तो, क्विनलफॉस 300 मि.ली. या डाइक्लोरवास 200 मि.ली की प्रति एकड़ में स्प्रे करें
Posted by Anupam Chaudhary
Uttar Pradesh
04-09-2019 11:04 AM
Anupam Chaudhary जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर.... (Read More)
Anupam Chaudhary जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by suraj
Madhya Pradesh
04-09-2019 10:59 AM
suraj ji kripya aap apna swal vistar se pooche ke aap konse ped ki jankari lena chahte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake
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