Posted by R Singh
Haryana
07-09-2019 07:59 PM
Posted by arun Patidar
Madhya Pradesh
07-09-2019 07:58 PM
भैंसों में आप मुर्रा नस्ल की भैंस रख सकते और गायों में आप जर्सी गाय, साहीवाल रख सकते है ज्यादा दूध के लिए एचएफ नस्ल रख सकते है पर इसकी देखभाल ज्यादा होती है और इसे बीमारियां भी ज्यादा लगती हैं यदि आप डेयरी फार्मिंग बड़े स्तर पर करना चाहते है तो आप इसकी ट्रेनिंग लेकर इस काम को करें जिसमें आपको इस काम के बारे म.... (Read More)
भैंसों में आप मुर्रा नस्ल की भैंस रख सकते और गायों में आप जर्सी गाय, साहीवाल रख सकते है ज्यादा दूध के लिए एचएफ नस्ल रख सकते है पर इसकी देखभाल ज्यादा होती है और इसे बीमारियां भी ज्यादा लगती हैं यदि आप डेयरी फार्मिंग बड़े स्तर पर करना चाहते है तो आप इसकी ट्रेनिंग लेकर इस काम को करें जिसमें आपको इस काम के बारे में सारी जानकारी प्राप्त होगी , वहां आपको इसके शेड को तैयार करना और उसमें पशुओं को सही तरीके से रखने के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी आप एक बार में इक्ट्ठी गाय ना खरीदें गायों को 2-2 महीनों के फासले पर खरीदें या फिर 3 पहले खरीदें ओर 3 महीने बाद फिर खरीद लें इससे दूध की कमी नहीं आयेगी पशु की नसल सबसे ज्यादा जरूरी है पशु खरीदने के समय कोशिश करें कि दिन में तीन बार दूध निकालकर ही पशु खरीदें भैंसो का एक दिन का दूध 12 लीटर और गायों को दूध 16-17 लीटर से कम ना हो गाभिनों को खरीदने का सही समय रखड़ियों से लेकर वैशाखी तक का होता है क्योंकि इस समय मौसम अच्छा होने के कारण हरा चारा भी खुला होता है गाभिनों के लिए शैड आवाजाई वाली सड़क पर ना बनायें और शैड सड़क से कम से कम 100 गज दूर हो शैड को धूप और हवा का ध्यान रखकर ही बनायें शैड हमेशा खेत या आस पास से 2 फुट ऊंचा बनायें क्योंकि निचले स्थान पर पानी खड़ा हो जाता है जिस कारण गंदगी पैदा हो जाती है और बाकी पशुओं का मल मूत्र का निकास भी आसानी से हो जाता है पशुओं के लिए बनायी जाने वाली खुरली ढाई तीन फुट चौड़ी होनी चाहिए खुरली पर खड़ने के लिए एक पशु को तकरीबन चार फुट जगह चाहिए मतलब 10 पशुओं के लिए 40 फुट लंबी खुरली बनेगी डेयरी फार्म से संबंधित सामान रखने के लिए स्टोर बनायें पशुओं का वितरण/दाना स्टोर करने के लिए कमरा सैलाब से रहित होना चाहिए शैड का फर्श पक्क, फिसलन रहित और जल्दी साफ होने वाला हो शैड में जितना हो सके पशुओं को खुला छोंड़े और पानी और दाना पूरा डालें पशु को खुला छोड़ने से पशुओं में अफारे की समस्या कम आती है बाकी अपनी आवश्यकता और क्षमता के मुताबिक ही सामान खरीदें और आर्थिक नुकसान से बचने के लिए प्रत्येक गाभिन का बीमा जरूर करवायें

Posted by Ramlal Beniwal Beniwal
Rajasthan
07-09-2019 07:57 PM
आप उनका नज़दीकी डॉक्टर से जांच करवाकर इलाज करवायें उनका बुखार जरूर जांच करवायें जिससे उनका सही इलाज हो सके

Posted by rinku
Uttar Pradesh
07-09-2019 07:57 PM
रिंकू जी आप चूहों को रोकने के लिए 1 kg अनाज का आटा लीजिये और उसमे 20 ग्राम बासमती का तेल +20 ग्राम तगार +25 ग्राम zinc phosphide लें .इन चारों चीज़ों को अच्छे से मिला के जहाँ चूहे हैं वहां रख दें बनस्पति तेल खुशबूदार होना चाहिए ताकि चूहे उसकी खुशबू की तरफ ज्यादा आएं.

Posted by chhina saab
Punjab
07-09-2019 07:55 PM
tuci pashu de suun ton 1 mahina pehla Hyporid powder rojana 1pouch deo ate suun ton badd jddi uterotone liquid adhi botal pilla deo ate adhi 2 hours badd deo, iss nal jer paa jndi hai..
Posted by Gurmukh Singh Garry
Punjab
07-09-2019 07:54 PM
haldi de vich saro oil mix kr k laga do Tek ho u g 4,5 din
Posted by agyapal singh gill
Punjab
07-09-2019 07:43 PM
ਉਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ Mifex 450ml ਬੋਤਲ ਲਗਵਾਓ, ਬੋਤਲ ਵਿਚ Injection Tonofas 20ml, Injection Avil 10ml ਪਾਓ ਅਤੇ ਇਸ ਨੂੰ IV(slow) ਲਗਵਾਓ, ਬਾਕੀ ਉਸ ਨੂੰ Injection X-nil 1gm, Injection Megludyne 20ml (IM) ਲਗਵਾਓ ਅਤੇ 3 ਦਿਨ ਲਗਾਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ

Posted by sonu
Uttar Pradesh
07-09-2019 07:25 PM
shrimaan g cotton mein white fly ke liye Lano @500 ml,Osheen @60 gm ja Ethion @800 ml ja Polo @200 gm per acre ka spray kr skte ho g..

Posted by arsh
Punjab
07-09-2019 07:14 PM
BhaaG jhoti dian taaran culture karwa lao saaf sheeshi ch taaran pa ke nere di laboratory wich culture karwa ke dasi pashuan wali dwaee doctor ton bachedani ch bharwao lao

Posted by gurpreet singh
Punjab
07-09-2019 07:10 PM
HD3226 kisam jhone di university valo sifarish nahi hai. eh punjab seed store valo tyar kiti gayi hai. isda austan jhaad 28 quintal prati acre de hisab nal dasya ja reha hai ate kisan trail de layi es var isda beej lai sakde han beej lain layi tuc 9478489622,9814130982 Punjab Seed Company, Gidderbaha de nal sampark kar sakde ho.dhanwad

Posted by gurpreet singh
Punjab
07-09-2019 06:59 PM
mastitis di parkh karwa lao nazdik de pashuan de hospital naal sampark karo

Posted by Virender jhorar
Haryana
07-09-2019 06:43 PM
shrimaan g basmati 1509 mein fungicide Custodia @250 ml ja Amistar top @200 ml ja Nativo @120 gm per acre ka spray kr skte ho g jiss se dane ki quality v bnegi or kalapan v nhi ayega...
Posted by Ramu Morey
Uttar Pradesh
07-09-2019 06:37 PM
रामु मोरे जी कृपया आप अपना सवाल स्पष्ट पूछें कि आप किस तरह के छिड़काव के बारे में पूछना चाहते हैं.

Posted by Iqbaljit Singh
Punjab
07-09-2019 06:31 PM
BhaaG dudh nazdik di laboratory wich culture karwa ke dasi pashuan wali dwaee warto or 15-20gram nimbu da sat 20din deo

Posted by Gurjant s
Punjab
07-09-2019 06:30 PM
gurjant ji eh tapman de karn hunda hai ate isde uper tuc copper oxychloride@3 gram nu prtai litre pani de hisab nal spray karo. isto ilava boote da sinchai parbandhan sahi rakho.dhanwad

Posted by lau Singh
Uttar Pradesh
07-09-2019 06:25 PM
lau singh ji aap sarso ke saath gehu laga sakte hain .Aap dono ko october se november mahine main laga sakte hain.aap gehu ko choti par laga sakte hain.

Posted by Virender singh
Haryana
07-09-2019 06:23 PM
Posted by vinod mourya
Madhya Pradesh
07-09-2019 06:21 PM
अंजीर की खेती भिन्न-भिन्न जलवायु वाले स्थानों में की जाती है, परंतु भूमध्यसागरीय जलवायु इसके लिए अत्यंत उपयुक्त है फल के विकास तथा परिपक्वता के समय वायुमंडल का शुष्क रहना अत्यंत आवश्यक है पर्णपाती वृक्ष होने के कारण पाले का प्रभाव इस पर कम पड़ता है यों तो सभी प्रकार की मिट्टी में इसका वृक्ष उपजाया जा सकता.... (Read More)
अंजीर की खेती भिन्न-भिन्न जलवायु वाले स्थानों में की जाती है, परंतु भूमध्यसागरीय जलवायु इसके लिए अत्यंत उपयुक्त है फल के विकास तथा परिपक्वता के समय वायुमंडल का शुष्क रहना अत्यंत आवश्यक है पर्णपाती वृक्ष होने के कारण पाले का प्रभाव इस पर कम पड़ता है यों तो सभी प्रकार की मिट्टी में इसका वृक्ष उपजाया जा सकता है, परंतु दोमट अथवा मटियार दोमट, जिसमें उत्तम जल निकास (ड्रेनेज) हो, इसके लिए सबसे श्रेष्ठ मिट्टी है इसमें प्राय खाद नहीं दी जाती; तो भी अच्छी फसल के लिए प्रति वर्ष प्रति वृक्ष 20-30 सेर सड़े हुए गोबर की खाद या कंपोस्ट जनवरी-फरवरी में देना लाभदायक है इसे अधिक सिंचाई की भी आवश्यकता नहीं पड़ती ग्रीष्म ऋतु में फल की पूर्ण वृद्धि के लिए एक या दो सिंचाई कर देना अत्यंत लाभप्रद है अंजीर के नए पौधे मुख्यत कृत्तों (कटिंग) द्वारा प्राप्त होते हैं एक वर्ष की अवस्था की डाल का इस कार्य के लिए प्रयोग किया जाता है कृत्त जनवरी में लगाए जाते हैं और एक वर्ष बाद इस प्रकार तैयार हुए पौधों को स्थायी स्थान पर पंद्रह-पंद्रह फुट की दूरी पर रोपते हैं प्रति वर्ष सुषुप्ति काल में इसकी कटाई-छँटाई करनी चाहिए क्योंकि अच्छे फल पर्याप्त मात्रा में नई डालियों पर ही आते हैं फल अप्रैल से जून तक प्राप्त होते हैं लगाने के तीन वर्ष बाद वृक्ष फल देने लगता है और एक स्वस्थ, प्रौढ़ वृक्ष से लगभग 400 फल मिलते हैं पत्तियों के निचले भाग में एक प्रकार का रोग लगता है जिसे मंडूर (रस्ट) कहते हैं, परंतु यह रोग विशेष हानिकारक नहीं है आप इसकी किस्मे जैसे Brown Turkey. Smyrna Fig की बिजाई कर सकते है
Posted by ritik
Uttar Pradesh
07-09-2019 06:20 PM
ऋतिक जी कृपया आप बताये के कोनसी फसल में है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Atinderpal singh chahal
Punjab
07-09-2019 06:19 PM
ਤੁਸੀ ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਹੈ ਤਾ ਸਭ ਤੋਂ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਇਹ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੁਹਾਨੂੰ FFDA(fish farmer development aggency) ਜੋ ਕਿ ਲੱਗਭੱਗ ਹਰ ਜ਼ਿਲੇ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਾਂ ਉੱਥੇ ਜਾ ਕੇ ਐਪਲੀਕੇਸ਼ਨ ਫਾਰਮ ਭਰੋ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਤੁਹਾਨੂੰ 5 ਦਿਨ ਦੀ ਮੁਫਤ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇਗੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲਈ ਦਸਵੀ ਪਾਸ ਹੋਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਤੇ ਇਹ ਡਿਪਾਰਮੈ੍ਟ ਜਿੱਥੇ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਅਫਸਰ ਬੈਠਦਾ ਹੈ ਜਿਵ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਹੈ ਤਾ ਸਭ ਤੋਂ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਇਹ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੁਹਾਨੂੰ FFDA(fish farmer development aggency) ਜੋ ਕਿ ਲੱਗਭੱਗ ਹਰ ਜ਼ਿਲੇ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਾਂ ਉੱਥੇ ਜਾ ਕੇ ਐਪਲੀਕੇਸ਼ਨ ਫਾਰਮ ਭਰੋ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਤੁਹਾਨੂੰ 5 ਦਿਨ ਦੀ ਮੁਫਤ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇਗੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲਈ ਦਸਵੀ ਪਾਸ ਹੋਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਤੇ ਇਹ ਡਿਪਾਰਮੈ੍ਟ ਜਿੱਥੇ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਅਫਸਰ ਬੈਠਦਾ ਹੈ ਜਿਵੇ ਕਚਿਹਰੀਆਂ , ਡੀ ਸੀ ਆਫਿਸ ਕਹਿੰ ਦਿੰਦੇ ਹਾਂ ਉਸ ਵਿੱਚ ਬਣਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਲਈ ਸੇਮ ਵਾਲੇ ਇਲਾਕੇ ਵਿੱਚ 90% ਸਬਸਿਡੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੇ ਬਾਕੀ ਇਲਾਕਿਆ ਵਿੱਚ 40 % ਸਬਸਿਡੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਜ਼ਿਲੇ ਦੇ FFDA ( fish farming development agency ) ਦਫਤਰ ਵਿੱਚ ਜਾਓ ਜੋ ਕਿ ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਡੀਸੀ ਦਫਤਰ ਜਾਂ ਕਚਿਹਰੀਆਂ ਵਿੱਚ ਬਣਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਉੱਥੇ ਆਪਣੇ ਜਮੀਂਨ ਦੀ ਫਰਦ , 10th ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਤੇ ਜਿੱਥੇ ਤਲਾਬ ਬਣਾਉਣਾ ਹੈ ਉੱਥੋ ਦੀਆਂ 2 ਫੋਟੋ ਲੈ ਕੇ ਜਾਓ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ FFDA ਦੇ ਅਫਸਰ ਤੁਹਾਨੂੂੰ ਫਾਈਲ ਤਿਆਰ ਕਰਵਾਉਣਗੇ ਤੇ ਤੁਹਾਡੀ ਜਮੀਨ ਦੇਖ ਕੇ ਤਲਾਬ ਬਣਾਉਣ ਦਾ ਤਰੀਕਾ ਦੱਸਣਗੇ ਤੇ ਫਿਰ ਤੁਹਾਨੂੰ 40% ਸਬਸਿਡੀ ਲਈ ਫਾਈ਼ਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਬਾਰੇ ਸਮਝਾ ਦੇਣਗੇ..
Posted by Iqbal singh
Punjab
07-09-2019 06:18 PM
ਇਕਬਾਲ ਸਿੰਘ ਜੀ ਜੇ ਤੁਸੀ ਗੋਭ ਦੀ ਸੁੰਡੀ ,ਪੱਤਾ ਲਪੇਟ ਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰਨੀ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਸੀ fame @20 ml ਜਾਂ coragen @60 ml ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਪਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ fafoondnashak ਜਿਵੇਂ ਕਿ blight ਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰਨੀ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਸੀ custodia 200 ml ਜਾਂ ਨਾਟਿਵੋ 80 ਗ੍ਰਾਮ ਜਾਂ amistar top @200 ml ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਵਿਚ ਪਾ ਕੇ ਇਸਤੇਮਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤੇਲੇ ਦੀ ਸ.... (Read More)
ਇਕਬਾਲ ਸਿੰਘ ਜੀ ਜੇ ਤੁਸੀ ਗੋਭ ਦੀ ਸੁੰਡੀ ,ਪੱਤਾ ਲਪੇਟ ਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰਨੀ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਸੀ fame @20 ml ਜਾਂ coragen @60 ml ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਪਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ fafoondnashak ਜਿਵੇਂ ਕਿ blight ਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰਨੀ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਸੀ custodia 200 ml ਜਾਂ ਨਾਟਿਵੋ 80 ਗ੍ਰਾਮ ਜਾਂ amistar top @200 ml ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਵਿਚ ਪਾ ਕੇ ਇਸਤੇਮਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤੇਲੇ ਦੀ ਸਪਰੇ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਗਲਮੌਰ @50 ਗ੍ਰਾਮ ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਇਸਤੇਮਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤੁਹਾਡਾ ਝੋਨਾ ਜੇਕਸਰ ਨਿੱਸਰ ਗਿਆ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ tilt @200 ml ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਪਾ ਕੇ ਇਸਤੇਮਾਲ ਕਰੋ
Posted by harjap singh
Punjab
07-09-2019 06:17 PM
iss di roktham de lyi folicur@200ml ja pulsor@200ml ja custodia@300ml ja nativo@80gm ja amistar top@200ml ja indofil di avtar@400gm ja hexaconazole@300ml prati acre de hisaab nal 150ltr pani de nal mila ke spray kro.

Posted by Vinay Kumar
Haryana
07-09-2019 06:14 PM

Posted by Balram Mali
Madhya Pradesh
07-09-2019 06:12 PM
Soyabean mein Fame @30 ml ja Barazide @400 ml per acre ka spray kr skte ho g..
Posted by saurabh kumar
Uttar Pradesh
07-09-2019 06:11 PM
Sir aap ka mirch lgane ka trika galat hai

Posted by pradeep
Madhya Pradesh
07-09-2019 06:06 PM
प्रदीप जी आप इसमें upl safilizer @500 ग्राम को 150 लीटर पानी में डाल कर प्रति एकड़ के हिसाब से इस्तेमाल करें .

Posted by hardeep singh
Punjab
07-09-2019 06:05 PM
Rajwa hara chaara te har 3kg dudh lai majh nu 1kg feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo Ration swer shaam thande samey pao Dupehar nu 2--3VAAR Nuhao Feed wadhya warto

Posted by Harman Sidhu
Chattisgarh
07-09-2019 05:58 PM
harman sidhu ji tussi leaf folder de lai fame @20 ml ja coragen @60 ml nu 150 litre paani wich paa ke acre de hisaab naal spray kar sakde ho.Ulli rog fafoond naal hunda hai tussi es lai nativo @80 gram,custodia @300 ml nu 150 litre paani wich pa ke prati acre de hisaab naal spray kar sakde ho.Daneyan de lai 13:00:45 @2 kg nu 150 litre paani wich paa ke is di warton kar sakde han.

Posted by Choudhary ji
Rajasthan
07-09-2019 05:54 PM
Posted by bhagwanaram
Rajasthan
07-09-2019 05:37 PM
भगवानाराम जी कृपया आप ये बताएं कि आप किस कीट के लिए पूछना चाहते हैं ताकि हम आपको पूरी जानकारी दे पाएं.
Posted by Neeraj Rathi
Uttar Pradesh
07-09-2019 05:32 PM
Neeraj Rathi ji ye ek Plant growth regulator hai jo paudhon ki badhotri ke liye istemaal kiya jaata hai .Aap iski @2.5 ml ki maatra ko 1litre main daal ke istemaal kren .

Posted by chandrapal
Uttar Pradesh
07-09-2019 05:29 PM
चंद्रपाल जी -यह फसल काफी तरह की मिट्टी में उगाई जाती है चने की खेती के लिए रेतली या चिकनी मिट्टी बहुत अनुकूल मानी जाती है घटिया निकास वाली ज़मीन इसकी बिजाई के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती खारी या नमक वाली ज़मीन भी इसके लिए अच्छी नहीं मानी जाती इसके विकास के लिए 5.5 से 7 पी एच वाली मिट्टी अच्छी होती है
हर साल एक खेत .... (Read More)
चंद्रपाल जी -यह फसल काफी तरह की मिट्टी में उगाई जाती है चने की खेती के लिए रेतली या चिकनी मिट्टी बहुत अनुकूल मानी जाती है घटिया निकास वाली ज़मीन इसकी बिजाई के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती खारी या नमक वाली ज़मीन भी इसके लिए अच्छी नहीं मानी जाती इसके विकास के लिए 5.5 से 7 पी एच वाली मिट्टी अच्छी होती है
हर साल एक खेत में एक ही फसल ना बोयें अच्छा फसली चक्र अपनायें अनाज वाली फसलों को फसल चक्र में प्रयोग करने से ज़मीन से लगने वाली बीमारियां रोकने में मदद मिलती है आमतौर पर फसल चक्र में खरीफ के सफेद चने, खरीफ के काले चने + गेहूं /जौं/राया, चरी-चने, धान/मक्की-चने आदि फसलें आती हैं C 235: यह किस्म तकरीबन 145-150 दिनों में पक जाती है यह किस्म तना गलन और झुलस रोग को सहनेयोग्य है इसके दाने दरमियाने आकार के और पीले-भूरे रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 8.4-10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
G 24: यह दरमियानी फैलने वाली किस्म है और बारानी क्षेत्रों के लिए अनुकूल है यह किस्म तकरीबन 140-145 दिनों में पक जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
G 130: यह दरमियाने अंतराल की किस्म है इसकी औसतन पैदावार 8-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Pant G 114: यह किस्म तकरीबन 150 दिनों में पक जाती है यह झुलस रोग की रोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 12-14 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
C 104: यह काबुली चने की किस्म है, जो कि पंजाब और उत्तर प्रदेश के लिए अनुकूल है इसकी औसतन पैदावार 6-8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Pusa 209: यह किस्म तकरीबन 140-165 दिनों में पक जाती है इसकी औसतन पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है चने की फसल के लिए ज्यादा समतल बैडों की जरूरत नहीं होती यदि इसे मिक्स फसल के तौर पर उगाया जाये तो खेत की अच्छी तरह से जोताई होनी चाहिए यदि इस फसल को खरीफ की फसल के तौर पर बीजना हो, तो खेत की मॉनसून आने पर गहरी जोताई करें, जो बारिश के पानी को संभालने में मदद करेगा बिजाई से पहले खेत की एक बार जोताई करें यदि मिट्टी में नमी की कमी नज़र आये तो बिजाई से एक सप्ताह पहले सुहागा फेरें बारानी हालातों के लिए 10 अक्तूबर से 25 अक्तूबर तक पूरी बिजाई करें सिंचित हालातों के लिए 25 अक्तूबर से 10 नवंबर तक देसी और काबुली चने की किस्मों की बिजाई करें सही समय पर बिजाई करनी जरूरी है क्योंकि अगेती बिजाई से अनआवश्यक विकास का खतरा बढ़ जाता है पिछेती बिजाई से पौधों में सूखा रोग का खतरा बढ़ जाता है, पौधे का विकास घटिया और जड़ें भी उचित ढंग से नहीं बढ़ती बीजों के बीच की दूरी 10 सैं.मी. और पंक्तियों के बीच की दूरी 30-40 सैं.मी. होनी चाहिए बीज को 10-12.5 सैं.मी. गहरा बीजना चाहिए उत्तरी भारत में इसकी बिजाई पोरा ढंग से की जाती है देसी किस्मों के लिए 15-18 किलो बीज प्रति एकड़ डालें और 37 किलो बीज प्रति एकड़ काबुली किस्मों के लिए डालें यदि बिजाई नवंबर के दूसरे पखवाड़े में की जाए तो 27 किलो बीज प्रति एकड़ डालें और यदि बिजाई दिसंबर के पहले पखवाड़े में की जाए तो 36 किलो बीज प्रति एकड़ डालें ट्राइकोडरमा 2.5 किलो प्रति एकड़ + गला हुआ गोबर 50 किलो मिलाएं और फिर जूट की बोरियों से ढक दें फिर इस घोल को नमी वाली ज़मीन पर बिजाई से पहले खिलार दें इससे मिट्टी में पैदा होने वाली बीमारियों को रोका जा सकता है बीजों को मिट्टी में पैदा होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए फफूंदीनाशक जैसे कि कार्बेनडाज़िम 12 प्रतिशत + मैनकोज़ेब 63 प्रतिशत डब्लयू पी (साफ) 2 ग्राम से प्रति किलो बीजों को बिजाई से पहले उपचार करें दीमक वाली ज़मीन पर बिजाई के लिए बीजों को क्लोरपाइरीफॉस 20 ई सी 10 मि.ली. से प्रति किलो बीजों का उपचार करें
बीजों का मैसोराइज़ोबियम से टीकाकरण करें इससे चने की पैदावार 7 प्रतिशत तक वृद्धि होती है इस तरह करने के लिए बीजों को पानी में भिगोकर, उन पर मैसोराइज़ोबियम डालें टीकाकरण से बीजों को छांव में सुखाएं देसी किस्मों के लिए सिंचित और असिंचित इलाकों में नाइट्रोजन (यूरिया 13 किलो) और फासफोरस (सुपर फासफेट 50 किलो) प्रति एकड़ के हिसाब से बिजाई के समय डालें जबकि काबुली चने की किस्मों के लिए, बिजाई के समय 13 किलो यूरिया और 100 किलो सुपर फासफेट प्रति एकड़ डालें खादों की ज्यादा अच्छे प्रयोग के लिए खादों को खालियों में 7-10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें सिंचित हालातों में बिजाई से पहले एक बार पानी दें इससे बीज अच्छे ढंग से अंकुरित होते हैं और फसल की वृद्धि भी अच्छी होती है दूसरी बार पानी फूल आने से पहले और तीसरा पानी फलियों के विकास के समय डालें अगेती वर्षा होने पर सिंचाई देरी से और आवश्यकतानुसार करें अनआवश्यक पानी देने से फसल का विकास और पैदावार कम हो जाती है यह फसल पानी के ज्यादा खड़े रहने को सहन नहीं कर सकती, इसके लिए अच्छे निकास का भी प्रबंध करें

Posted by MUNNA PRAJAPATI
Uttar Pradesh
07-09-2019 05:24 PM
Shriman ji, kripya ap variety k apura nam bataye taki apko uske hisaab se jankari di ja sake, dhanywad
Posted by jaskaran singh
Punjab
07-09-2019 05:22 PM
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