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Posted by vikash kumar
Bihar
08-09-2019 02:50 PM
Punjab
10-31-2019 02:01 PM
Vikash ji, yeh machhr ke hamle ki vajah se hua hai, iski roktham ke liye ap imidacloprid @ 1.5 ml prati liter pani ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by parhlad
Rajasthan
08-09-2019 02:49 PM
Punjab
12-12-2019 11:49 AM
Shrimaan ji, iske liye ap NPK 130045 @ 1kg ko 150 liter pani mein mila kar prati acre ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by Raju.
Bihar
08-09-2019 02:43 PM
Punjab
09-08-2019 03:58 PM
Bhai sahib gau ko rajwa hara chaara te har 4kg dudh lai 1 kg feed pao har 3 mahine baad pet ke kirhe nikalne ki dwaee deo
Posted by Harsh Deep Singh
Punjab
08-09-2019 02:37 PM
Punjab
09-08-2019 04:03 PM
BhaaG Pehlan te tuci dekho tuhanu ki pasnd ae Je sambhal wadhya kar sakde o te HF crossbred rakho nahi te maj Je Sahiwal rakhni dudh da rate wadhya mil sakda te rakh lao Sab ton zaruri deputy director dairy development Sangrur naal sampark karo Training lao saara kujh das denge
Posted by arjun choudhary
Madhya Pradesh
08-09-2019 02:35 PM
Punjab
12-12-2019 12:24 PM
Shrimaan ji, isme ap NPK 130045 @ 10 gm prati liter pani ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by sukhvinder singh
Punjab
08-09-2019 02:32 PM
Punjab
12-12-2019 11:21 AM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਗੋਭ ਦੀ ਸੁੰਡੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਤੁਸੀ fame @ 20 ml ਜਾਂ coragen @ 60 ml ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Krishna baglary
Assam
08-09-2019 02:28 PM
Punjab
12-12-2019 11:04 AM
श्रीमान जी, बादाम की खेती के लिए सूखी गर्म उष्णकटिबंधीय जलवायु के अनुकूल होती है फल पकते समय गर्म शुष्क मौसम होना चाहिए, ठण्डा और धुन्ध वाली ग्रीष्म ऋतु बादाम के लिए उपयुक्त नहीं है इसके लिए न्यूनतम 7 और अधिकतम 24 डिग्री सेल्सियस तक तापमान उत्तम होता है पुष्प खिलते समय -2 डिग्री सेल्सियस तक तापमान को सहन कर .... (Read More)
श्रीमान जी, बादाम की खेती के लिए सूखी गर्म उष्णकटिबंधीय जलवायु के अनुकूल होती है फल पकते समय गर्म शुष्क मौसम होना चाहिए, ठण्डा और धुन्ध वाली ग्रीष्म ऋतु बादाम के लिए उपयुक्त नहीं है इसके लिए न्यूनतम 7 और अधिकतम 24 डिग्री सेल्सियस तक तापमान उत्तम होता है पुष्प खिलते समय -2 डिग्री सेल्सियस तक तापमान को सहन कर सकते है, लेकिन ज्यादा लम्बे समय तक कम तापमान नुकसान पहुँचाता है औसत वार्षिक वर्षा 80 से110 सैंटीमीटर सफल उत्पादन के लिए पूरे वर्ष वर्षा का सही से वितरण आवश्यक होता है बादाम को 750 से 3,210 मीटर समुद्र तल से उंचाई पर सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है बादाम की बागवानी के लिए समतल, बलुई दोमट से चिकनी गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें जल निकास की सुविधा हो, उपयुक्त रहती है बादाम की खेत के लिए भरपूर कार्बनिक पदार्थ, उचित जल निकास तथा मिटटी में वायु का मिश्रण वाली सरंचना उपयुक्त होती है भारी तथा कम जल निकास वाली खेत में विकास कम होता है शुष्क शीतोष्ण क्षेत्र की किस्में- नी- प्लस – अल्ट्रा, टैक्सास (मिशन), थिनशैल्ड आदि ऊँचे तथा मध्य पर्वतीय क्षेत्र की किस्में- मर्सिड, नॉन पेरिल, आई एक्स एल, नौ णी स्लैक्शन, निकितस्काई, व्हाईट ब्रान्डिस, क्रिस्टोमोरटो, वेस्ता और जेन्को आदि निचले पर्वतीय तथा घाटी क्षेत्र की किस्में- ड्रेक, काठा, नी- प्लस अल्ट्रा, पीयरलैस आदि बादाम के पौधे मुख्यतः बीज और ग्राफ्टिंग विधि से तैयार किये जाते है इसकी ग्राफ्टिंग के लिए बादाम, आड़ू और आलूबुखारा के बीजू पौधे मूलवृन्त के रूप में प्रयोग किये जाते है बीजू या एक साल पुराना, कलमी पौधा, स्वस्थ जड़ तथा पत्ती रहित होना चाहिए तैयार गड्ढों में गोबर की खाद, केचुए की खाद मिलाकर गड्ढे भरने चाहिये तैयार गड्ढों में नवम्बर से दिसम्बर के महीने में पौधे लगाने चाहिये दूरी और गहराई- पतझड़ ऋतु में पौधे लगाने के लिए गड्ढे का आकार 1 × 1 × 1 मीटर और पौधे से पौधे और पक्ति से पक्ति की दूरी 6 x 7 मीटर रखनी चाहिये पौधे को ठीक तरीके से उगाने के लिए 3 पंक्ति मुख्य प्रजाति की और एक पंक्ति परागणकर्ता की लगानी चाहिए तथा एक हैक्टर में 5 से 7 डब्बे मधुमक्खी के रखने चाहिये, जिससे की सुचारू रूप से परागण हो सकें बादाम के छोटे बगीचे में गर्मियों के समय मे 10 दिन के अन्तराल पर तथा सर्दियों में 20 से 25 दिन के अन्तर पर सिंचाई करनी चाहिये ऊँची-नीची कृन्दाओं में टपक विधि का प्रयोग करना चाहिए फलत वाले पौधे मे अच्छी फलत के लिये गर्मियों में सिंचाई बहुत आवश्यक होती है इससे फलों के गिरने की समस्या समाप्त होती है और अगले वर्ष की फलत अच्छी आती है वृक्षों के चारों तरफ मृदा के ऊपर पत्तियों, भूसा व अन्य कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थो का प्रयोग कर सकते है इससे पानी का वाष्पोत्सर्जन कम होता है, खरपतवार कम निकलते है पहली निराई 10 से 15 दिन बाद, दूसरी निराई 25 से 35 दिन बाद, तीसरी निराई 45 दिन बाद, खरपतवार सघनता के अनुसार, 2-3 बार हाथ से निराई करनी चाहिए धन्यवाद
Posted by ਗੁਰਲਾਲ
Punjab
08-09-2019 02:26 PM
Punjab
09-10-2019 05:58 PM
ehh beetal cross nasal hai ji..
Posted by Ranjeet singh
Punjab
08-09-2019 02:24 PM
Punjab
12-12-2019 10:58 AM
Shrimaan ji, kirpa kar ke hare tidey di photo bhejo taki tuhnu dekh ke is bare jankari diti ja sake, dhanwad
Posted by Gurpreet Singh
Punjab
08-09-2019 02:15 PM
Punjab
09-08-2019 04:04 PM
BhaaG isnu 1kg kanak da dalia 500g gur ch rinh ke swer shaam 7 din khuao Rajwa hara chaara te har 3kg dudh lai 1kg feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo
Posted by जितेंद्र सिंह
Uttar Pradesh
08-09-2019 02:14 PM
Punjab
09-10-2019 05:05 PM
अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए बिजाई अक्तूबर से नवंबर के मध्य में पूरी कर लें बिजाई में देरी होने से उपज में काफी नुकसान होता है
Posted by ਹਰੀਸ਼ ਕੁਮਾਰ
Punjab
08-09-2019 02:13 PM
Punjab
09-08-2019 04:46 PM
BhaaG tuci nazdik di laboratory wich taaran culture karwa ke dasi pashuan wali dwaee doctor se bachedani ch bharwao Je gau swere bole teeka shaam nu luwao je shaam nu tan teeka swer nu luwao par teeka pashuan de hospital cho luao
Posted by ਗੁਰਦੀਪ ਸਿੰਘ ਨਾਗਰਾ
Punjab
08-09-2019 02:07 PM
Punjab
09-08-2019 04:48 PM
BhaaG isnu rajwa hara chaara te har 4kg dudh lai gau nu 1kg feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo 1-2bottle calcium dian doctor ton luao
Posted by ਸਰਬਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
08-09-2019 02:07 PM
Posted by abhishek
Madhya Pradesh
08-09-2019 02:02 PM
Punjab
09-08-2019 09:08 PM
Posted by Davinder singh
Punjab
08-09-2019 01:55 PM
Punjab
09-08-2019 04:49 PM
Rajwa hara chaara te 3kg feed rojana dyo Malap rehat karan di dawaee dyo
Posted by ਅਮਰੀਕ ਸਿੰਘ
Punjab
08-09-2019 01:53 PM
Punjab
12-12-2019 12:05 PM
Shrimaan ji, Proclaim sundi di rktham lai vareta janda hai, eh syngenta company da aunda hai, shrimaan ji kirpa kar ke tuc bhamakad di photo behjo taki tuhnu is bare ouri janakri diti ja sake, dhanwad
Posted by Deepak kewat
Madhya Pradesh
08-09-2019 01:49 PM
Rajasthan
09-08-2019 09:31 PM
Posted by Deepak kewat
Madhya Pradesh
08-09-2019 01:46 PM
Madhya Pradesh
09-17-2019 12:08 PM
खुसखबरी बमोरिया फार्म को अब भारत सरकार का सपोर्ट मोती पालन और इंटीग्रेटेड फार्मिंग हेतु प्रशिक्षण में शुल्क में सब्सिड़ी पाए .एक एवं दो दिवशीय प्रशिक्षण साथ ही सरकार की योजनाए से कमाए 1-2 लाख रूपये प्रतिमाह MSME WHH Gram Swaraj Mission Debates free india Swachh bharat Abhiyan Zero waste Management मोती पालन के साथ समस्त योजनाओ की जानकारी अधिक जानकारी .... (Read More)
खुसखबरी बमोरिया फार्म को अब भारत सरकार का सपोर्ट मोती पालन और इंटीग्रेटेड फार्मिंग हेतु प्रशिक्षण में शुल्क में सब्सिड़ी पाए .एक एवं दो दिवशीय प्रशिक्षण साथ ही सरकार की योजनाए से कमाए 1-2 लाख रूपये प्रतिमाह MSME WHH Gram Swaraj Mission Debates free india Swachh bharat Abhiyan Zero waste Management मोती पालन के साथ समस्त योजनाओ की जानकारी अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे अमित बमोरिया 9770085381,9407461361 https://youtu.be/nnzNw41gUIc
Posted by yadvendra pratap singh
Uttar Pradesh
08-09-2019 01:44 PM
Rajasthan
09-09-2019 04:08 PM
gajiyabad d. r. kc sahndra
Posted by lakhwinder brar
Punjab
08-09-2019 01:38 PM
Punjab
09-08-2019 06:57 PM
isde vare jankari lai tuci mere nal 9781589637 sampark kr skde ho..
Posted by Ashish kumar
Uttar Pradesh
08-09-2019 01:38 PM
Maharashtra
09-24-2019 05:43 PM
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई कर.... (Read More)
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आप इसकी किस्मे जैसे Washington Coorg Honey Pusa Delicious Pusa Dwarf की बिजाई कर सकते है आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं एक एकड़ में 104 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें कम बारिश वाले क्षेत्रों में जून - जुलाई के महीने में बिजाई की जानी चाहिए और तराई और अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में सितंबर महीने में बिजाई की जानी चाहिए और क्षेत्र जहां सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हो वहां पर फरवरी - मार्च के महीने में बिजाई की जानी चाहिए आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 0.8 किलो प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं तुड़ाई एक एक फल को हाथों से तोड़कर की जाती है फलों को सुबह के समय तोड़ें धन्यवाद
Posted by ਨਵਪਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
08-09-2019 01:32 PM
Punjab
09-09-2019 05:51 PM
ehh Jersey nasal da semen hai tuci Bull id ton detail pta kr skde ho. Bull ID 807 BOND DAM ID JY 607 DMYLD (KG) 10138 HBSSRC ID SIRE ID MIKE SIRE DAM ID SIRE DAM MILK YIELD (KG) 10793
Posted by sandeep mehrok
Punjab
08-09-2019 01:25 PM

..?

Punjab
09-08-2019 07:09 PM
ਇਸਦੀ ਪੁੰਗ ਛੱਡਣ ਲਈ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਅਕਤੂਬਰ ਦਾ ਤੱਕ ਸਮਾਂ ਵਧੀਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਹੈ ਤਾਂ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਮੁਤਾਬਿਕ ਤੁਸੀ ਇੱਕ ਏਕੜ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ 5000 ਪੂੰਗ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਇਹ 2 to 3 ਇੰਚ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ 5000 ਪਾਉਣਾ ਹੈ ਤਾਂ 3000 ਰੋਹੂ , 1000 ਕਤਲਾ , 500 ਕੋਮਨ ਕਾਰਪ ਤੇ 500 ਮਰੀਗਲ ਨਸਲ ਪਾਈ ਜਾਵੇ ਇਹ ਪੂੰਗ ਤੁਸੀ ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਵਿਭਾਗ ਤੋਂ ਖਰੀਦ .... (Read More)
ਇਸਦੀ ਪੁੰਗ ਛੱਡਣ ਲਈ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਅਕਤੂਬਰ ਦਾ ਤੱਕ ਸਮਾਂ ਵਧੀਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਹੈ ਤਾਂ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਮੁਤਾਬਿਕ ਤੁਸੀ ਇੱਕ ਏਕੜ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ 5000 ਪੂੰਗ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਇਹ 2 to 3 ਇੰਚ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ 5000 ਪਾਉਣਾ ਹੈ ਤਾਂ 3000 ਰੋਹੂ , 1000 ਕਤਲਾ , 500 ਕੋਮਨ ਕਾਰਪ ਤੇ 500 ਮਰੀਗਲ ਨਸਲ ਪਾਈ ਜਾਵੇ ਇਹ ਪੂੰਗ ਤੁਸੀ ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਵਿਭਾਗ ਤੋਂ ਖਰੀਦ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਇਹ ਇੱਕ ਇੰਚ ਦਾ ਬੱਚਾ 10 ਪੈਸਾ ਪ੍ਰਤੀ ਬੱਚਾ ਮਿਲੇਗਾ ਜੇਕਰ ਵਧੀਆਂ ਖੁਰਾਕ ਪਾਈ ਜਾਵੇ ਤਾਂ 8 ਮਹੀਨਿਆ ਵਿੱਚ ਇਹ ਲੱਗਭੱਗ 800-900 ਗ੍ਰਾਮ ਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਬਾਕੀ ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਲਈ ਨਹਿਰੀ ਪਾਣੀ ਵਧੀਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤੇ ਤੁਸੀ ਪਿੰਡ ਦਾ ਛੱਪੜ ਠੇਕੇ ਤੇ ਲੈ ਕੇ ਵੀ ਇਹ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਤਾਲਾਬ ਵਿੱਚ ਮੱਛੀ ਦੇ ਬੀਜ ਪਾਉਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਇਸ ਗੱਲ ਦੀ ਪਰਖ ਕਰ ਲੈਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਕਿ ਉਸ ਤਾਲਾਬ ਵਿੱਚ ਕਾਫੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਮੱਛੀ ਦੀ ਕੁਦਰਤੀ ਖੁਰਾਕ (ਪਲੈਂਕਟਾਨ) ਉਪਲਬਧ ਹੈ ਤਾਲਾਬ ਵਿੱਚ ਪਲੈਂਕਟਾਨ ਦੀ ਚੰਗੀ ਮਾਤਰਾ ਕਰਨ ਦੇ ਉਦੇਸ਼ ਨਾਲ ਇਹ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਦੇ ਨਾਲ ਸੁਪਰਫਾਸਫੇਟ 300 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਅਤੇ ਯੂਰੀਆ 180 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਸਾਲ ਪ੍ਰਤੀ ਹੈਕਟੇਅਰ ਦੇ ਮਾਨ ਨਾਲ ਪਾਈ ਜਾਵੇ ਤਲਾਬ ਵਿਚੋਂ ਹਾਨੀਕਾਰਕ ਮੱਛੀਆਂ ਅਤੇ ਕੀੜੇ-ਮਕੌੜਿਆਂ ਨੂੰ ਕੱਢ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਮੰਡੀਕਰਨ ਦੀ ਕੋਈ ਦਿੱਕਤ ਨਹੀ ਹੈ ਇਹ ਲੋਕਲ ਹੀ ਸੇਲ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ
Posted by Paramjeet Singh
Punjab
08-09-2019 01:21 PM
Punjab
09-08-2019 07:09 PM
Posted by Atanu Kumar Pal
Tripura
08-09-2019 01:17 PM
Punjab
12-12-2019 11:33 AM
Posted by munish Khan
Uttar Pradesh
08-09-2019 01:09 PM
Punjab
12-12-2019 11:39 AM
Shrimaan ji, iski roktham ke liye ap cartap hydrochloride @ 170 gm ko 150 liter pani mein mila kar prati acre ek hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by dipak Kumar
Bihar
08-09-2019 01:08 PM
Punjab
12-12-2019 11:41 AM
Posted by harp bajwa
Punjab
08-09-2019 01:08 PM
Punjab
12-11-2019 06:16 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਇਸ ਵਿਚ ਤੁਸੀ folicur @ 200 ਮਿਲ ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by ਕੁਲਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
08-09-2019 01:06 PM
Punjab
12-12-2019 11:42 AM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਕਿਰਪਾ ਕਰ ਕੇ ਤੁਸੀ ਜੀਰੀ ਦੀ ਫੋਟੋ ਭੇਜੋ ਤਾਂਜੋ ਦੇਖ ਕੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਦਾ ਸਹੀ ਹੱਲ ਦੱਸਿਆ ਜਾ ਸਕੇ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by ਕੇਵਲਸਿੰਘ
Punjab
08-09-2019 01:02 PM
Punjab
09-10-2019 09:33 PM
hun tuc gajar, shalgum, fullgobhi, allu,tmatar,mooli di bijai kar sakde ho.
Posted by jaspreet singh
Punjab
08-09-2019 01:01 PM
Punjab
09-10-2019 10:26 PM
tuci isdi bachedani vich Utrawin-oz dwai 30ml nu NS botal 50ml laa ke changi trah mix krke 3 din bhrwao baki iss nu X-nil injection 1gm, Megludyne injection 20ml, Rumirec 10ml injection 3 din lgwao ji..
Posted by Gulashan Kumar
Uttar Pradesh
08-09-2019 12:59 PM
Punjab
09-21-2019 09:04 AM
इस फसल की खेती अलग-अलग मिट्टी की किस्मों में की जा सकती है जैसे कि रेतली, चिकनी, दोमट, काली, लाल मिट्टी, जिसमें पानी के निकास का सही प्रबंध हो इसकी अच्छी पैदावार के लिए इसे अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी में उत्तम जैविक तत्वों से उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी की पी एच 7-8.5 होनी चाहिए यह तेजाबी और खारी मि.... (Read More)
इस फसल की खेती अलग-अलग मिट्टी की किस्मों में की जा सकती है जैसे कि रेतली, चिकनी, दोमट, काली, लाल मिट्टी, जिसमें पानी के निकास का सही प्रबंध हो इसकी अच्छी पैदावार के लिए इसे अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी में उत्तम जैविक तत्वों से उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी की पी एच 7-8.5 होनी चाहिए यह तेजाबी और खारी मिट्टी में भी उगने योग्य फसल है ज्यादा तेजाबी मिट्टी में खेती ना करें अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी लाभदायक है, जबकि अच्छी पैदावार के लिए चिकनी, दोमट और बारीक रेत वाली मिट्टी बहुत अच्छी है प्रसिद्ध किस्में :- Pusa Rubi,Pusa Early Dwarf,Punjab Chhuhara,Pusa 120,Roma Selection 120 टमाटर के बीजों को पहले नर्सरी में बोया जाता है और फिर हन्हें मुख्य खेत में रोपित किया जाता है मुख्य खेत की तैयार के लिए अच्छी जोताई और समतल मिट्टी की जरूरत होती है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए 4-5 बार जोताई करें फिर मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें आखिरी जोताई के समय गाय का गला हुआ गोबर 60 किलो को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें रोपाई के लिए 80-90 सैं.मी. चौड़े बैड तैयार करें बिजाई से एक महीना पहले मिट्टी को धूप में खुला छोड़ दें आवश्यक लंबाई और 80-90 सैं.मी. की चौड़ाई वाले बैडों पर टमाटर के बीजों को बोयें बिजाई के बाद बैडों को प्लास्टिक शीट से ढक दें और फूलों को पानी देने वाले डब्बे से रोज़ सुबह बैडों की सिंचाई करें रोगाणुओं के हमले से फसल को बचाने के लिए नर्सरी वाले बैडों को अच्छे नाइलोन के जाल से ढक दें पनीरी लगाने के 10-15 दिन बाद 19:19:19 के साथ सूक्ष्म तत्वों की 2.5-3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें पौधों को तंदरूस्त और मजबूत बनाने के लिए बिजाई के 20 दिन बाद लीहोसिन 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें प्रभावित पौधों को खेत में से उखाड़ दें ताकि पौधों का फासला सही रखा जा सके और निरोग पौधों को रोगाणुओं से भी बचाया जा सके रोगाणुओं से बचाव के लिए मिट्टी में नमी बनाये रखें यदि सूखा दिखे तो पौधों को रोपाई से पहले मैटालैक्सिल 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में 2-3 बार भिगोयें बिजाई से 25-30 दिन बाद पनीरी वाले पौधे तैयार हो जाते हैं और इनके 3-4 पत्ते निकल आते हैं यदि पौधों की आयु 30 दिन से ज्यादा हो तो इसके उपचार के बाद इसे खेत में लगायें पनीरी उखाड़ने के 24 घंटे पहले बैडों को पानी लगायें ताकि पौधे आसानी से उखाड़े जा सकें बसंत के मौसम के लिए नर्सरी नवंबर-दिसंबर में तैयार करें जबकि सर्दियों में KE मौसम में सितंबर-अक्तूबर महीने में नर्सरी में बीजों को बोयें किस्म और विकास के ढंग मुताबिक 60x30 सैं.मी. या 75x60 सैं.मी. या 75x75 सैं.मी. का फासला रखें में छोटे कद वाली किस्म के लिए 75x30 सैं.मी. का फासला रखें और वर्षा वाले मौसम के लिए 120-150x30 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीजों को 0-5 सैं.मी. गहराई में बोयें और मिट्टी से ढक दें पनीरी को उखाड़कर खेत में लगा दें एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 100-160 ग्राम बीज नए पौधे तैयार करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं हाइब्रिड किस्मों के लिए 80-100 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन 40-60 किलो (90-130 किलो यूरिया), फासफोरस 25 किलो (155 किलो एस एस पी) और पोटाश 25 किलो (42 किलो एम ओ पी) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें नए पौधों की रोपाई के 2-3 सप्ताह पहले फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई 30 और 50 दिनों के बाद डालें लगातार गोडाई करें और जड़ों को मिट्टी लगाएं 45 दिनों तक खेत को नदीन रहित रखें यदि नदीन नियंत्रण से बाहर हो जायें तो यह 70-90 प्रतिशत पैदावार कम कर देंगे रोपाई से पहले मुख्य खेत में पैंडीमैथालीन 0.4 किलो को प्रति एकड़ में लगाएं यदि नदीनों की संख्या ज्यादा हो तो नदीनों के अंकुरण के बाद सैंकर 0.2 किलो की प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों को रोकने के साथ साथ मिट्टी के तापमान को कम करने के लिए मलचिंग भी प्रभावी तरीका है रोपाई के बाद दो से तीन दिन हल्की सिंचाई करें मिट्टी में नमी के आधार पर सर्दियों में 12 से 15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें और गर्मियों में 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए गंभीर होती हैं इस अवस्था में पानी की कमी से फूलों का गिरना बढ़ता है और फलों और उत्पादकता पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है बहुत सारी जांचों के मुताबिक यह पता चला है कि हर पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई करने से जड़ें ज्यादा फैलती हैं और इससे पैदावार भी अधिक हो जाती है अत्याधिक सिंचाई ना करें पनीरी लगाने के 70 दिन बाद पौधे फल देना शुरू कर देते हैं कटाई का समय इस बात पर निर्भर करता है कि फलों को दूरी वाले स्थानों पर लेकर जाना है या ताजे फलों को मंडी में ही बेचना है आदि पके हरे टमाटर जिनका 1/4 भाग गुलाबी रंग का हो, लंबी दूरी वाले स्थानों पर लेकर जाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं ज्यादातर सारे फल गुलाबी या लाल रंग में बदल जाते हैं, पर सख्त गुद्दे वाले टमाटरों को नज़दीक की मंडी में बेचा जा सकता है अन्य उत्पाद बनाने और बीज तैयार करने के लिए पूरी तरह पके और नर्म गुद्दे वाले टमाटरों का प्रयोग किया जाता है कटाई के बाद आकार के आधार पर टमाटरों को छांट लिया जाता है इसके बाद टमाटरों को बांस की टोकरियों या लकड़ी के बक्सों में पैक कर लिया जाता है लंबी दूरी पर लिजाने के लिए टमाटरों को पहले ठंडा रखें ताकि इनके खराब होने की संभावना कम हो जाये पूरी तरह पके टमाटरों से जूस, सीरप और कैचअप आदि उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं
Posted by Gulashan Kumar
Uttar Pradesh
08-09-2019 12:58 PM
Punjab
09-21-2019 09:05 AM
इस फसल की खेती अलग-अलग मिट्टी की किस्मों में की जा सकती है जैसे कि रेतली, चिकनी, दोमट, काली, लाल मिट्टी, जिसमें पानी के निकास का सही प्रबंध हो इसकी अच्छी पैदावार के लिए इसे अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी में उत्तम जैविक तत्वों से उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी की पी एच 7-8.5 होनी चाहिए यह तेजाबी और खारी मि.... (Read More)
इस फसल की खेती अलग-अलग मिट्टी की किस्मों में की जा सकती है जैसे कि रेतली, चिकनी, दोमट, काली, लाल मिट्टी, जिसमें पानी के निकास का सही प्रबंध हो इसकी अच्छी पैदावार के लिए इसे अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी में उत्तम जैविक तत्वों से उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी की पी एच 7-8.5 होनी चाहिए यह तेजाबी और खारी मिट्टी में भी उगने योग्य फसल है ज्यादा तेजाबी मिट्टी में खेती ना करें अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी लाभदायक है, जबकि अच्छी पैदावार के लिए चिकनी, दोमट और बारीक रेत वाली मिट्टी बहुत अच्छी है प्रसिद्ध किस्में :- Pusa Rubi,Pusa Early Dwarf,Punjab Chhuhara,Pusa 120,Roma Selection 120 टमाटर के बीजों को पहले नर्सरी में बोया जाता है और फिर हन्हें मुख्य खेत में रोपित किया जाता है मुख्य खेत की तैयार के लिए अच्छी जोताई और समतल मिट्टी की जरूरत होती है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए 4-5 बार जोताई करें फिर मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें आखिरी जोताई के समय गाय का गला हुआ गोबर 60 किलो को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें रोपाई के लिए 80-90 सैं.मी. चौड़े बैड तैयार करें बिजाई से एक महीना पहले मिट्टी को धूप में खुला छोड़ दें आवश्यक लंबाई और 80-90 सैं.मी. की चौड़ाई वाले बैडों पर टमाटर के बीजों को बोयें बिजाई के बाद बैडों को प्लास्टिक शीट से ढक दें और फूलों को पानी देने वाले डब्बे से रोज़ सुबह बैडों की सिंचाई करें रोगाणुओं के हमले से फसल को बचाने के लिए नर्सरी वाले बैडों को अच्छे नाइलोन के जाल से ढक दें पनीरी लगाने के 10-15 दिन बाद 19:19:19 के साथ सूक्ष्म तत्वों की 2.5-3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें पौधों को तंदरूस्त और मजबूत बनाने के लिए बिजाई के 20 दिन बाद लीहोसिन 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें प्रभावित पौधों को खेत में से उखाड़ दें ताकि पौधों का फासला सही रखा जा सके और निरोग पौधों को रोगाणुओं से भी बचाया जा सके रोगाणुओं से बचाव के लिए मिट्टी में नमी बनाये रखें यदि सूखा दिखे तो पौधों को रोपाई से पहले मैटालैक्सिल 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में 2-3 बार भिगोयें बिजाई से 25-30 दिन बाद पनीरी वाले पौधे तैयार हो जाते हैं और इनके 3-4 पत्ते निकल आते हैं यदि पौधों की आयु 30 दिन से ज्यादा हो तो इसके उपचार के बाद इसे खेत में लगायें पनीरी उखाड़ने के 24 घंटे पहले बैडों को पानी लगायें ताकि पौधे आसानी से उखाड़े जा सकें बसंत के मौसम के लिए नर्सरी नवंबर-दिसंबर में तैयार करें जबकि सर्दियों में KE मौसम में सितंबर-अक्तूबर महीने में नर्सरी में बीजों को बोयें किस्म और विकास के ढंग मुताबिक 60x30 सैं.मी. या 75x60 सैं.मी. या 75x75 सैं.मी. का फासला रखें में छोटे कद वाली किस्म के लिए 75x30 सैं.मी. का फासला रखें और वर्षा वाले मौसम के लिए 120-150x30 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीजों को 0-5 सैं.मी. गहराई में बोयें और मिट्टी से ढक दें पनीरी को उखाड़कर खेत में लगा दें एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 100-160 ग्राम बीज नए पौधे तैयार करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं हाइब्रिड किस्मों के लिए 80-100 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन 40-60 किलो (90-130 किलो यूरिया), फासफोरस 25 किलो (155 किलो एस एस पी) और पोटाश 25 किलो (42 किलो एम ओ पी) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें नए पौधों की रोपाई के 2-3 सप्ताह पहले फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई 30 और 50 दिनों के बाद डालें लगातार गोडाई करें और जड़ों को मिट्टी लगाएं 45 दिनों तक खेत को नदीन रहित रखें यदि नदीन नियंत्रण से बाहर हो जायें तो यह 70-90 प्रतिशत पैदावार कम कर देंगे रोपाई से पहले मुख्य खेत में पैंडीमैथालीन 0.4 किलो को प्रति एकड़ में लगाएं यदि नदीनों की संख्या ज्यादा हो तो नदीनों के अंकुरण के बाद सैंकर 0.2 किलो की प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों को रोकने के साथ साथ मिट्टी के तापमान को कम करने के लिए मलचिंग भी प्रभावी तरीका है रोपाई के बाद दो से तीन दिन हल्की सिंचाई करें मिट्टी में नमी के आधार पर सर्दियों में 12 से 15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें और गर्मियों में 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए गंभीर होती हैं इस अवस्था में पानी की कमी से फूलों का गिरना बढ़ता है और फलों और उत्पादकता पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है बहुत सारी जांचों के मुताबिक यह पता चला है कि हर पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई करने से जड़ें ज्यादा फैलती हैं और इससे पैदावार भी अधिक हो जाती है अत्याधिक सिंचाई ना करें पनीरी लगाने के 70 दिन बाद पौधे फल देना शुरू कर देते हैं कटाई का समय इस बात पर निर्भर करता है कि फलों को दूरी वाले स्थानों पर लेकर जाना है या ताजे फलों को मंडी में ही बेचना है आदि पके हरे टमाटर जिनका 1/4 भाग गुलाबी रंग का हो, लंबी दूरी वाले स्थानों पर लेकर जाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं ज्यादातर सारे फल गुलाबी या लाल रंग में बदल जाते हैं, पर सख्त गुद्दे वाले टमाटरों को नज़दीक की मंडी में बेचा जा सकता है अन्य उत्पाद बनाने और बीज तैयार करने के लिए पूरी तरह पके और नर्म गुद्दे वाले टमाटरों का प्रयोग किया जाता है कटाई के बाद आकार के आधार पर टमाटरों को छांट लिया जाता है इसके बाद टमाटरों को बांस की टोकरियों या लकड़ी के बक्सों में पैक कर लिया जाता है लंबी दूरी पर लिजाने के लिए टमाटरों को पहले ठंडा रखें ताकि इनके खराब होने की संभावना कम हो जाये पूरी तरह पके टमाटरों से जूस, सीरप और कैचअप आदि उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं
Posted by Gamdoor singh Brar
Punjab
08-09-2019 12:50 PM
Punjab
09-08-2019 04:57 PM
BhaaG isda dudh nazdik di laboratory wich culture karwa ke dasi pashuan wali dwaee warto Mastitis ae Unj 15-20 din 15-20 gm nimbu da sat de deo iss pashu nu sab ton akheer ch chovo
Posted by kuldeep chand
Punjab
08-09-2019 12:50 PM
Punjab
09-08-2019 04:58 PM
Isnu rajwa hara chaara te 2kg feed rojana dyo sunh to 1 mahina pehlan malap rehat karo
Posted by Indra kumar Damahe
Chattisgarh
08-09-2019 12:43 PM
Punjab
12-11-2019 06:23 PM
Shrimaan ji, isme aap sundi ke hamle ki jaanch krein, agar sundi mojood ho to aap isme fame @ 20 ml ko 150 liter pani mein mila kar prati acre ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by ਬਲਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
08-09-2019 12:37 PM
Punjab
09-08-2019 05:00 PM
BhaaG 1quintal feed da formula Anaaj 40kg khal 30kg chokar or rice polish 30kg min mix 2kg namak 1kg Rajwa hara chaara te har 4kg dudh lai 1kg feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo
Posted by harjap singh
Punjab
08-09-2019 12:36 PM
Punjab
09-09-2019 05:54 PM
Harjap ji tuhade sare swala de jwab ditte gye hai tuci App vich apne swala de jwab dekh skde ho..