
Posted by Aslam Bhai
Uttar Pradesh
09-09-2019 06:31 AM
इस फसल की खेती अलग-अलग मिट्टी की किस्मों में की जा सकती है जैसे कि रेतली, चिकनी, दोमट, काली, लाल मिट्टी, जिसमें पानी के निकास का सही प्रबंध हो इसकी अच्छी पैदावार के लिए इसे अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी में उत्तम जैविक तत्वों से उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी की पी एच 7-8.5 होनी चाहिए यह तेजाबी और खारी मि.... (Read More)
इस फसल की खेती अलग-अलग मिट्टी की किस्मों में की जा सकती है जैसे कि रेतली, चिकनी, दोमट, काली, लाल मिट्टी, जिसमें पानी के निकास का सही प्रबंध हो इसकी अच्छी पैदावार के लिए इसे अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी में उत्तम जैविक तत्वों से उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी की पी एच 7-8.5 होनी चाहिए यह तेजाबी और खारी मिट्टी में भी उगने योग्य फसल है ज्यादा तेजाबी मिट्टी में खेती ना करें अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी लाभदायक है, जबकि अच्छी पैदावार के लिए चिकनी, दोमट और बारीक रेत वाली मिट्टी बहुत अच्छी है प्रसिद्ध किस्में :- Pusa Rubi,Pusa Early Dwarf,Punjab Chhuhara,Pusa 120,Roma Selection 120 टमाटर के बीजों को पहले नर्सरी में बोया जाता है और फिर हन्हें मुख्य खेत में रोपित किया जाता है मुख्य खेत की तैयार के लिए अच्छी जोताई और समतल मिट्टी की जरूरत होती है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए 4-5 बार जोताई करें फिर मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें आखिरी जोताई के समय गाय का गला हुआ गोबर 60 किलो को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें रोपाई के लिए 80-90 सैं.मी. चौड़े बैड तैयार करें बिजाई से एक महीना पहले मिट्टी को धूप में खुला छोड़ दें आवश्यक लंबाई और 80-90 सैं.मी. की चौड़ाई वाले बैडों पर टमाटर के बीजों को बोयें बिजाई के बाद बैडों को प्लास्टिक शीट से ढक दें और फूलों को पानी देने वाले डब्बे से रोज़ सुबह बैडों की सिंचाई करें रोगाणुओं के हमले से फसल को बचाने के लिए नर्सरी वाले बैडों को अच्छे नाइलोन के जाल से ढक दें पनीरी लगाने के 10-15 दिन बाद 19:19:19 के साथ सूक्ष्म तत्वों की 2.5-3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें पौधों को तंदरूस्त और मजबूत बनाने के लिए बिजाई के 20 दिन बाद लीहोसिन 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें प्रभावित पौधों को खेत में से उखाड़ दें ताकि पौधों का फासला सही रखा जा सके और निरोग पौधों को रोगाणुओं से भी बचाया जा सके रोगाणुओं से बचाव के लिए मिट्टी में नमी बनाये रखें यदि सूखा दिखे तो पौधों को रोपाई से पहले मैटालैक्सिल 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में 2-3 बार भिगोयें बिजाई से 25-30 दिन बाद पनीरी वाले पौधे तैयार हो जाते हैं और इनके 3-4 पत्ते निकल आते हैं यदि पौधों की आयु 30 दिन से ज्यादा हो तो इसके उपचार के बाद इसे खेत में लगायें पनीरी उखाड़ने के 24 घंटे पहले बैडों को पानी लगायें ताकि पौधे आसानी से उखाड़े जा सकें बसंत के मौसम के लिए नर्सरी नवंबर-दिसंबर में तैयार करें जबकि सर्दियों में KE मौसम में सितंबर-अक्तूबर महीने में नर्सरी में बीजों को बोयें किस्म और विकास के ढंग मुताबिक 60x30 सैं.मी. या 75x60 सैं.मी. या 75x75 सैं.मी. का फासला रखें में छोटे कद वाली किस्म के लिए 75x30 सैं.मी. का फासला रखें और वर्षा वाले मौसम के लिए 120-150x30 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीजों को 0-5 सैं.मी. गहराई में बोयें और मिट्टी से ढक दें पनीरी को उखाड़कर खेत में लगा दें एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 100-160 ग्राम बीज नए पौधे तैयार करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं हाइब्रिड किस्मों के लिए 80-100 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन 40-60 किलो (90-130 किलो यूरिया), फासफोरस 25 किलो (155 किलो एस एस पी) और पोटाश 25 किलो (42 किलो एम ओ पी) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें नए पौधों की रोपाई के 2-3 सप्ताह पहले फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई 30 और 50 दिनों के बाद डालें लगातार गोडाई करें और जड़ों को मिट्टी लगाएं 45 दिनों तक खेत को नदीन रहित रखें यदि नदीन नियंत्रण से बाहर हो जायें तो यह 70-90 प्रतिशत पैदावार कम कर देंगे रोपाई से पहले मुख्य खेत में पैंडीमैथालीन 0.4 किलो को प्रति एकड़ में लगाएं यदि नदीनों की संख्या ज्यादा हो तो नदीनों के अंकुरण के बाद सैंकर 0.2 किलो की प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों को रोकने के साथ साथ मिट्टी के तापमान को कम करने के लिए मलचिंग भी प्रभावी तरीका है रोपाई के बाद दो से तीन दिन हल्की सिंचाई करें मिट्टी में नमी के आधार पर सर्दियों में 12 से 15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें और गर्मियों में 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए गंभीर होती हैं इस अवस्था में पानी की कमी से फूलों का गिरना बढ़ता है और फलों और उत्पादकता पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है बहुत सारी जांचों के मुताबिक यह पता चला है कि हर पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई करने से जड़ें ज्यादा फैलती हैं और इससे पैदावार भी अधिक हो जाती है अत्याधिक सिंचाई ना करें पनीरी लगाने के 70 दिन बाद पौधे फल देना शुरू कर देते हैं कटाई का समय इस बात पर निर्भर करता है कि फलों को दूरी वाले स्थानों पर लेकर जाना है या ताजे फलों को मंडी में ही बेचना है आदि पके हरे टमाटर जिनका 1/4 भाग गुलाबी रंग का हो, लंबी दूरी वाले स्थानों पर लेकर जाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं ज्यादातर सारे फल गुलाबी या लाल रंग में बदल जाते हैं, पर सख्त गुद्दे वाले टमाटरों को नज़दीक की मंडी में बेचा जा सकता है अन्य उत्पाद बनाने और बीज तैयार करने के लिए पूरी तरह पके और नर्म गुद्दे वाले टमाटरों का प्रयोग किया जाता है कटाई के बाद आकार के आधार पर टमाटरों को छांट लिया जाता है इसके बाद टमाटरों को बांस की टोकरियों या लकड़ी के बक्सों में पैक कर लिया जाता है लंबी दूरी पर लिजाने के लिए टमाटरों को पहले ठंडा रखें ताकि इनके खराब होने की संभावना कम हो जाये पूरी तरह पके टमाटरों से जूस, सीरप और कैचअप आदि उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं

Posted by punit tana
Jharkhand
09-09-2019 06:25 AM
सिंचित क्षेत्रों बिजाई के लिए सितंबर का आखिरी सप्ताह उचित समय होता है जबकि बाकी के क्षेत्रों के लिए 15 अक्तूबर तक बिजाई पूरी कर लें असिंचित क्षेत्रों के लिए बिजाई का उपयुक्त समय सितंबर के दूसरे पखवाड़ा होता है

Posted by pankaj kumar
Bihar
09-09-2019 06:12 AM
गाजर की जड़ों के अच्छे विकास के लिए गहरी, नर्म और चिकनी मिट्टी की जरूरत होती है बहुत ज्यादा भारी और ज्यादा नर्म मिट्टी गाजरों की फसल के लिए अच्छी नहीं मानी जाती अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी की पी एच 5.5 से 7 होनी चाहिए (अच्छी पैदावार के लिए 6.5 पी एच लाभदायक होती है) Pusa Kesar: यह लाल रंग की गाजर की किस्म है और आई ए आर आई, नई द.... (Read More)
गाजर की जड़ों के अच्छे विकास के लिए गहरी, नर्म और चिकनी मिट्टी की जरूरत होती है बहुत ज्यादा भारी और ज्यादा नर्म मिट्टी गाजरों की फसल के लिए अच्छी नहीं मानी जाती अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी की पी एच 5.5 से 7 होनी चाहिए (अच्छी पैदावार के लिए 6.5 पी एच लाभदायक होती है) Pusa Kesar: यह लाल रंग की गाजर की किस्म है और आई ए आर आई, नई दिल्ली की तरफ से तैयार की गई है यह 90-110 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Meghali: यह संतरी रंग की गाजर की किस्म है और आई ए आर आई नई दिल्ली की तरफ से तैयार की गई है इसकी औसतन पैदावार 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है खेत को अच्छी तरह जोत कर नदीनों से मुक्त कर लेना चाहिए और कंकड़ों को अच्छी तरह तोड़कर समतल कर लें खेत की जोताई समय 10 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें ताजे गोबर और कम गली खाद को डालने से परहेज़ करें क्योंकि इससे जड़ें नर्म हो जाती हैं गाजर की देसी किस्मों के लिए अगस्त सितंबर का समय सही माना जाता है और यूरोपियन किस्मों के लिए अक्तूबर-नवंबर का महीना अच्छा माना जाता है बिजाई के लिए पंक्ति से पंक्ति का फासला 30-40 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 6-8 सैं.मी. होता है फसल के अच्छे विकास के लिए बीज की गहराई 1.5 सैं.मी. होनी चाहिए बिजाई के लिए 4-5 किलो बीज प्रति एकड़ के लिए काफी होती है बिजाई से पहले बीजों को 12-24 घंटे पानी में भिगो दें इससे बीज के अंकुरन में वृद्धि होती है गली हुई रूड़ी की खाद के साथ नाइट्रोजन 25 किलो (55 किलो यूरिया), फासफोरस 12 किलो (75 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 12 किलो (20 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में बिजाई के समय डालें जड़ों के अच्छे विकास के लिए पोटाश की जरूरत होती है बिजाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई करें यह अंकुरन में सहायता करती है उसके बाद मिट्टी की किस्म और जलवायु के आधार पर बाकी सिंचाइयां गर्मियों में 6-7 दिनों के फासले पर करें और सर्दियों के महीने में 10-12 दिनों के अंतराल पर करें आमतौर पर गाजर को तीन से चार सिंचाइयां की जरूरत होती है ज्यादा सिंचाई से परहेज़ करें क्योंकि इससे जड़ों के गलने का डर रहता है कटाई से दो या तीन हफ्ते पहले सिंचाई रोक दें इससे गाजर की मिठास और स्वाद बढ़ जाता है किस्मों के आधार पर बिजाई के 90-100 दिनों के बाद गाजरों की कटाई की जाती है इसकी कटाई हाथों से पौधों को जड़ों सहित उखाड़कर की जाती है कटाई के बाद गाजरों के ऊपरी हरे पत्तों को तोड़कर गाजरों को साफ पानी से धो लिया जाता है

Posted by harvinder singh
Rajasthan
09-09-2019 06:08 AM
नरमे में जूं, तेले और थ्रिप्स है, इसकी रोकथाम के लिए prophenofos@500ml याEthion@800ml या oberon@200ml या Bayer की Admire pro@12gm या Flotis@400ml की प्रति एकड़ के हिसाब से 150 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें
Posted by Vijay Malan
Uttar Pradesh
09-09-2019 06:05 AM
vijay ji coragen ek keetnashak hai jo gobh ki sundi ki roktham karti hai iski matra ek acre men 60ml ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by gurpreet gill
Punjab
09-09-2019 05:51 AM
gurpreet ji kirpa krke ehh dso cow nu mastits vich smasia ki aundi hai.usde thna cho dhudh nhi aunnda, blood aunda hai, sojish aa , malai aaundi hai, blood aaunda hai yaa koi hor kujj smasia aa rehi aa kirpa apna swal thode vistar nal pusho tan jo tuhanu sahi jankari diti jaa skee

Posted by Aman Yadav
Uttar Pradesh
09-09-2019 05:34 AM
मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिसमे नमी सोखने की क्षमता हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की pH 6-7 अनुकूल है आप इसकी .... (Read More)
मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिसमे नमी सोखने की क्षमता हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की pH 6-7 अनुकूल है आप इसकी किस्मे जैसे Arka Meghana,Arka Sweta,Kashi Early, Kashi Surkh की बिजाई कर सकते है खेत को तैयार करने के लिए 2-3 बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद डलियों को तोड़ें बिजाई से 15-20 दिन पहले रूड़ी की खाद 150-200 क्विंटल प्रति एकड़ डालकर मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें टमाटर और मिर्च की खेती एक ही या नज़दीक वाले खेत में ना करें, क्योंकि दोनों की बीमारियां एक जैसी होती हैं और इस कारण एंथ्राक्नोस और बैक्टीरिया वाली बीमारीयों के बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है मिर्च की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ की फसल के लिए मई-जून और गर्मियों की फसल के लिए फरवरी - मार्च का समय मिर्च की रोपाई के लिए उपयुक्त होता है खरीफ के मौसम में 60-75 सैं.मी. x 45 सैं.मी. और सिंचित क्षेत्रों में 60 x 60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में बीजों को 3-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें और फिर मिट्टी से ढक दें इसकी मुख्य खेत में रोपाई की जाती है 1 मीटर चौड़े और आवश्यकतानुसार लंबे बैड बनाएं कीटाणु रहित कोकोपिट 300 किलो, 5 किलो नीम केक को मिलाए और 1-1किलो एज़ोसपीरिलियम और फासफोबैक्टीरिया भी डालें उपचार किए हुए बीज ट्रे में एक बीज प्रति सैल बोयें बीज को कोकोपिट से ढक दें और ट्रे एक- दूसरे के साथ रखें बीज अंकुरन तक इन्हें पॉलीथीन से ढक दें नर्सरी में बीज बीजने के बाद बैडों को 400 मैश नाइलोन जाल या पतले सफेद कपड़े से ढक दें यह नए पौधों को कीड़े-मकौड़े और बीमारियों के हमले से बचाता है 6 दिनों के बाद, ट्रे में लगे नए पौधों को एक एक करके जाल की छांव के नीचे बैडों में लगाएं बीज अंकुरन तक पानी देने वाले बर्तन की मदद से पानी दें बिजाई के 18 दिन बाद 19:19:19 की 0.5 % (5 ग्राम प्रति लीटर ) की स्प्रे करें किस्मों के लिए 200 ग्राम बीज और हाइब्रिड के लिए 80-100 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (110 किलो यूरिया), फासफोरस 16 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा पनीरी खेत में लगाने के समय डालें रोपाई के बाद बाकी बची नाइट्रोजन दो बराबर हिस्सों में 30वें और 50वें दिन डालें सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 84 किलो (182 किलो यूरिया), फासफोरस 24 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 किलो) प्रति एकड़ डालें रोपाई से पहले 24 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 52 किलो), फासफोरस की पूरी मात्रा और पोटाश की आधी मात्रा प्रति एकड़ में डालें बाकी बची नाइट्रोजन को पांच भागों में बांटें और पोटाश को तीन बराबर भागों में बांटें नाइट्रोजन 12 किलो (यूरिया 26 किलो) को बिजाई के बाद 45वें, 60वें, 75वें, 95वें और 115वें दिन डालें और पोटाश 4 किलो को बिजाई के बाद 45वें, 60वें, और 75वें दिन डालें 45 दिनों तक गोडाई करें, कही की मदद से मिट्टी चढ़ाएं और खेत को नदीन मुक्त रखें यदि नदीनों की रोकथाम ना की जाये तो यह 70-90 % पैदावार कम कर देते हैं रोपाई से पहले मुख्य खेत में पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ में डालें यदि नदीनों की संख्या ज्यादा हो तो उनके अंकुरण के बाद सेन्कोर 800 मि.ली की स्प्रे प्रति एकड़ में करें नदीनों की रोकथाम के साथ मिट्टी में नमी को बनाए रखने के लिए मलचिंग एक प्रभावी तरीका है मिट्टी में नमी के आधार पर सर्दियों में 6-7 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 4-5 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए गंभीर होती है इस अवस्था पर पानी की कमी से फल गिरते हैं जिससे फलों के उत्पादन में कमी होती है विभिन्न खोजों में यह पाया गया है, कि प्रत्येक पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई से जड़ों में नमी ज्यादा होती है जिससे वे अधिक उपज देती हैं मिर्चों की तुड़ाई हरा रंग आने पर करें या फिर पकने के लिए पौधे पर ही रहने दें मिर्चों का पकने के बाद वाला रंग किस्म पर निर्भर करता है अधिक तुड़ाइयां लेने के लिए यूरिया 10 ग्राम प्रति लीटर और घुलनशील K @ 10 ग्राम प्रति लीटर पानी (1 प्रतिशत प्रत्येक का घोल) की स्प्रे 15 दिनों के फासले पर कटाई के समय करें पैकिंग के लिए मिर्चें पक्की और लाल रंग की होने पर तोड़ें सुखाने के लिए प्रयोग की जाने वाली मिर्चों की पूरी तरह पकने के बाद ही तुड़ाई करें
Posted by pawan bishnoi
Rajasthan
08-09-2019 11:25 PM

Posted by gurpreet singh
Punjab
08-09-2019 11:23 PM
BhaaG swer shaam taaran dekho jad taaran kare uss nu aas kraun da parbandh karo Arhamdi arhingdi na vekho rajwa hara chaara te 1kg feed pao

Posted by gurpreet singh
Punjab
08-09-2019 11:17 PM
ਕੱਟੀ ਨੂੰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਲਿਆਉਣ ਲਈ ਮਿਨਰਲ ਮਿਕਸਚਰ Bovmin-B ਰੋਜਾਨਾ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ ਰੋਜਾਨਾ Ovumin advance 1 ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆ ਜਾਂਦੇ ਹੈ..
Posted by lovepreet
Punjab
08-09-2019 11:13 PM
BhaaG deputy director dairy development Gurdaspur naal sampark karo Training lao saara kujh das denge Loan training karn baad milega

Posted by chandraket Kumar Singh
Bihar
08-09-2019 11:02 PM
Bhai sahib rajwa chaara dio har 4kg dudh lai gau nu 1kg feed pao har 3 mahine baad pet ke kirhe nikalne ki dwaee deo

Posted by harry dhillon
Punjab
08-09-2019 10:51 PM
Harry dhillon ji basmati 1509 da majuda rate 3300-3500 tak chal reha hai. Thankyou.
Posted by Amarjit Singh
Punjab
08-09-2019 10:42 PM
tuci usdi bachedani vich Lixin-iu dwai bhrwao ehh tuci infection de hisab nal repeat kro ate uss nu Metra liquid 100ml rojana deo ji..

Posted by Sukh Deep
Punjab
08-09-2019 10:26 PM
Sukh Deep ji beetal goat len lai tusi Birbal Ram Sharma 7009579091 ji nal samparak kar sakde ho, Thankyou.
Posted by Rakesh kumar
Bihar
08-09-2019 10:16 PM
बढ़िया विकास के लिए, बढ़िया निकास वाली, घनी और उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है इसके लिए मिट्टी का pH 6.5 या इससे ज्यादा होना चाहिए मिट्टी की pH 6.5 से कम होने पर फसल के विकास पर असर पड़ता है Konni Teak, West African teak, Godhavari Teak, South and Central American Teak, Nilambur or Malabar Teak.मिट्टी के भुरभुरा बनाने के लिए खेत की 2-3 बार जोताई करें मिट्टी को समतल करें ताकि खेत में पा.... (Read More)
बढ़िया विकास के लिए, बढ़िया निकास वाली, घनी और उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है इसके लिए मिट्टी का pH 6.5 या इससे ज्यादा होना चाहिए मिट्टी की pH 6.5 से कम होने पर फसल के विकास पर असर पड़ता है Konni Teak, West African teak, Godhavari Teak, South and Central American Teak, Nilambur or Malabar Teak.मिट्टी के भुरभुरा बनाने के लिए खेत की 2-3 बार जोताई करें मिट्टी को समतल करें ताकि खेत में पानी खड़ा ना हो सके नए पौधों की रोपाई के लिए 45x45x45 सैं.मी. के फासले पर गड्ढे खोदे प्रत्येक गड्ढे में गली हुई रूड़ी की खाद के साथ कीटनाशी डालें बीजों को नर्सरी बैड में बोया जाता है रोपाई के लिए 12-15 महीने के नए पौधों का प्रयोग करें टिशू प्रजनन ग्राफ्टिंग, जड़, तने काट कर और micro छोटे प्रजनन द्वारा किया जाता है रोपाई के लिए पूर्व अंकुरन पौधों का प्रयोग किया जाता है मॉनसून का मौसम सागवान की रोपाई के लिए सबसे अच्छा मौसम होता है रोपाई के लिए 2x2 या 2.5x2.5 या 3x3 मीटर के फासले रखा जाता है जब अंतर-फसली अपनाई हो, तो 4x4 मीटर या 5.x5 मीटर फासला रखें सागवान की रोपाई के लिए पूर्व अंकुरित पौधों का प्रयोग करें 45x45x45 सैं.मी. के गड्ढे बनाएं प्रत्येक गड्ढे में गली हुई रूड़ी की खाद और मिट्टी डालें बिजाई पंक्ति में, छींटे द्वारा या पनीरी लगाकर की जा सकती है एक एकड़ में रोपाई के लिए लगभग 1500-1800 clones का प्रयोग करें हर साल अगस्त और सितंबर महीने में 50 ग्राम प्रति पौधे में पहले तीन वर्ष डालें पहले तीन वर्षों में खेत को नदीन मुक्त करना आवश्यक है नियमित समय पर गोड़ाई करें पहले वर्ष में 3 और दूसरे वर्ष में 2 गोड़ाई करें रोपाई के तीसरे वर्ष में एक बार गोड़ाई करें मॉनसून के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती सिंचाई गर्म या गर्मियों के महीने में और आवश्यकता अनुसार करें आवश्यकता अनुसार सिंचाई करने के साथ काफी हद तक पैदावार में सुधार आता है अतिरिक्त सिंचाई से पानी के धब्बे और फंगस ज्यादा हो जाती है

Posted by M.B.Saini
Rajasthan
08-09-2019 10:13 PM
सैनी तो खेती के मामले में बहुत जानकार लोग होते हैं आप लोग आपके क्षेत्र में एलोवेरा की खेती करके देख लीजिए

Posted by armaan deep
Punjab
08-09-2019 09:44 PM
अरमान जी Ganexa पौधे की क्षमता को जैसे कि तापमान का ज्यादा कम होना, पानी की कमी, ज्यादा पानी से मिट्टी से संबंधित समस्या एसिडिटी, एलक्लीनीटी, नमकीन, भारी तत्त आदि बढ़ाते है इसके इलावा बायोजेनिक सिलीकॉन पर्त के बनने के कारण फंगस और कीड़े मकौड़ों द्धारा फैलाने वाली समस्याओं को भी कम करता है

Posted by armaan deep
Punjab
08-09-2019 09:23 PM
अरमान जी Ganexa पौधे की क्षमता को जैसे कि तापमान का ज्यादा कम होना, पानी की कमी, ज्यादा पानी से मिट्टी से संबंधित समस्या एसिडिटी, एलक्लीनीटी, नमकीन, भारी तत्त आदि बढ़ाते है इसके इलावा बायोजेनिक सिलीकॉन पर्त के बनने के कारण फंगस और कीड़े मकौड़ों द्धारा फैलाने वाली समस्याओं को भी कम करता है

Posted by gaurav asthana
Uttar Pradesh
08-09-2019 09:21 PM
gaurav asthana ji dhaan main khaira rog ke liye chelated zinc sulphate @200 g ko 150 litre paani main daal kar aap spray kar sakte hain.

Posted by Rohtash
Haryana
08-09-2019 09:19 PM
Sir aap mirch mai Dow Daligate 1 ml 1 liter water ke hissab se spray kre

Posted by guddu सिंह
Uttar Pradesh
08-09-2019 09:17 PM
गुड्डू सिंह जी सल्फर मिर्ची में उसकी गुणवत्ता और पैदावार बढ़ने के लिए इस्तेमाल होती है.

Posted by prabhjot singh
Punjab
08-09-2019 09:15 PM
ਉਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ Mifex 450ml ਬੋਤਲ ਲਗਵਾਓ, ਬੋਤਲ ਵਿਚ Injection Tonofas 20ml, Injection Avil 10ml ਪਾਓ ਅਤੇ ਇਸ ਨੂੰ IV(slow) ਲਗਵਾਓ, ਬਾਕੀ ਉਸ ਨੂੰ Injection X-nil 1gm, Injection Megludyne 20ml (IM) ਲਗਵਾਓ ਅਤੇ 3 ਦਿਨ ਲਗਾਓ, ਤੁਸੀ ਉਸਦਾ ਪਿੱਛਾ ਉੱਚਾ ਰੱਖੋ ਅਤੇ ਉਸਨੂੰ ਤੂੜੀ ਘਟ ਪਾਓ ..
Posted by Narsingh
Chattisgarh
08-09-2019 09:05 PM
नरसिंघ जी -इस फसल की खेती अलग-अलग मिट्टी की किस्मों में की जा सकती है जैसे कि रेतली, चिकनी, दोमट, काली, लाल मिट्टी, जिसमें पानी के निकास का सही प्रबंध हो इसकी अच्छी पैदावार के लिए इसे अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी में उत्तम जैविक तत्वों से उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी की पी एच 7-8.5 होनी चाहिए यह तेज.... (Read More)
नरसिंघ जी -इस फसल की खेती अलग-अलग मिट्टी की किस्मों में की जा सकती है जैसे कि रेतली, चिकनी, दोमट, काली, लाल मिट्टी, जिसमें पानी के निकास का सही प्रबंध हो इसकी अच्छी पैदावार के लिए इसे अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी में उत्तम जैविक तत्वों से उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी की पी एच 7-8.5 होनी चाहिए यह तेजाबी और खारी मिट्टी में भी उगने योग्य फसल है ज्यादा तेजाबी मिट्टी में खेती ना करें अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी लाभदायक है, जबकि अच्छी पैदावार के लिए चिकनी, दोमट और बारीक रेत वाली मिट्टी बहुत अच्छी है Pusa Rubi: यह किस्म IARI, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है यह किस्म बसंत और सर्दियों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसकी औसतन पैदावार 133 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Pusa Early Dwarf: यह किस्म IARI, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है इसके फल मध्यम छोटे और तना पीला होता है यह किस्म रोपाई के बाद 75-80 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Punjab Chhuhara: इसके फल बीज रहित, नाशपाति के आकार के, लाल और बाहरी मोटी परत के होते हैं इसकी गुणवत्ता कटाई के बाद 7 दिनों तक मंडी लायक होती है इसलिए इस किस्म को लंबी दूरी वाले स्थानों और नए उत्पाद बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है
Pusa 120: यह किस्म IARI, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है इसके फल मध्यम छोटे, नर्म, आकर्षित और तना पीले रंग का होता है यह किस्म निमाटोड के प्रतिरोधी किस्म है
Roma Selection 120: यह किस्म IARI, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है यह किस्म जड़ गलन के प्रतिरोधी किस्म है
Rashmi: यह व्यापक रूप से अपनाई गई हाइब्रिड है इसके फल मध्यम, गोल और आकर्षित होते हैं यह किस्म सूखा बीमारी के प्रतिरोधी किस्म है
Karnataka Hybrid: इस किस्म की फसल रोपाई के 80 दिनों के बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके फल लंबे और अंडाकार होते हैं यह किस्म सूखा और निमाटोड के प्रतिरोधक किस्म है
Marglobe: यह किस्म IARI, नई दिल्ली द्वारा जारी की गई है इसके फल बड़े, गोल, नर्म और रसदार होते हैं
HS 101: यह उत्तरी भारत में सर्दियों के समय लगाई जाने वाली किस्म है इसके पौधे छोटे होते हैं इस किस्म के टमाटर गोल और दरमियाने आकार के और रसीले होते हैं यह गुच्छों के रूप में लगते हैं यह पत्ता मरोड़ बीमारी की रोधक किस्म है
HS 102: यह किस्म जल्दी पक जाती है इस किस्म के टमाटर छोटे और दरमियाने आकार के गोल और रसीले होते हैं
Sonali: इस किस्म की औसतन पैदावार 300-320 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Pusa Hybrid 1: यह किस्म ICAR, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है इसकी औसतन पैदावार 128 क्विंटल प्रति एकड़ होती है टमाटर के बीजों को पहले नर्सरी में बोया जाता है और फिर हन्हें मुख्य खेत में रोपित किया जाता है मुख्य खेत की तैयार के लिए अच्छी जोताई और समतल मिट्टी की जरूरत होती है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए 4-5 बार जोताई करें फिर मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें आखिरी जोताई के समय गाय का गला हुआ गोबर 60 किलो को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें रोपाई के लिए 80-90 सैं.मी. चौड़े बैड तैयार करें बिजाई से एक महीना पहले मिट्टी को धूप में खुला छोड़ दें आवश्यक लंबाई और 80-90 सैं.मी. की चौड़ाई वाले बैडों पर टमाटर के बीजों को बोयें बिजाई के बाद बैडों को प्लास्टिक शीट से ढक दें और फूलों को पानी देने वाले डब्बे से रोज़ सुबह बैडों की सिंचाई करें रोगाणुओं के हमले से फसल को बचाने के लिए नर्सरी वाले बैडों को अच्छे नाइलोन के जाल से ढक दें
पनीरी लगाने के 10-15 दिन बाद 19:19:19 के साथ सूक्ष्म तत्वों की 2.5-3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें पौधों को तंदरूस्त और मजबूत बनाने के लिए बिजाई के 20 दिन बाद लीहोसिन 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें प्रभावित पौधों को खेत में से उखाड़ दें ताकि पौधों का फासला सही रखा जा सके और निरोग पौधों को रोगाणुओं से भी बचाया जा सके रोगाणुओं से बचाव के लिए मिट्टी में नमी बनाये रखें यदि सूखा दिखे तो पौधों को रोपाई से पहले मैटालैक्सिल 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में 2-3 बार भिगोयें
बिजाई से 25-30 दिन बाद पनीरी वाले पौधे तैयार हो जाते हैं और इनके 3-4 पत्ते निकल आते हैं यदि पौधों की आयु 30 दिन से ज्यादा हो तो इसके उपचार के बाद इसे खेत में लगायें पनीरी उखाड़ने के 24 घंटे पहले बैडों को पानी लगायें ताकि पौधे आसानी से उखाड़े जा सकें
फसल को फसल को बैक्टीरियल सूखे से बचाने के लिए रोपाई से पहले नए पौधों को स्ट्रैपटोसाइकलिन घोल 100 पी पी एम में मिलाकर 5 मिनट के लिए भिगोयें बसंत के मौसम के लिए नर्सरी नवंबर-दिसंबर में तैयार करें जबकि सर्दियों में KE मौसम में सितंबर-अक्तूबर महीने में नर्सरी में बीजों को बोयें किस्म और विकास के ढंग मुताबिक 60x30 सैं.मी. या 75x60 सैं.मी. या 75x75 सैं.मी. का फासला रखें में छोटे कद वाली किस्म के लिए 75x30 सैं.मी. का फासला रखें और वर्षा वाले मौसम के लिए 120-150x30 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीजों को 0-5 सैं.मी. गहराई में बोयें और मिट्टी से ढक दें पनीरी को उखाड़कर खेत में लगा दें एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 100-160 ग्राम बीज नए पौधे तैयार करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं हाइब्रिड किस्मों के लिए 80-100 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें
फसल को मिट्टी से होने वाली बीमारियों और कीड़े मकौड़ों से बचाने के लिए बीजों को बिजाई से पहले थीरम 3 ग्राम या कार्बेनडाज़िम 1 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें इसके बाद टराइकोडरमा 5 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें बीज को छांव में रख दें और फिर बिजाई के लिए प्रयोग करें नाइट्रोजन 40-60 किलो (90-130 किलो यूरिया), फासफोरस 25 किलो (155 किलो एस एस पी) और पोटाश 25 किलो (42 किलो एम ओ पी) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें नए पौधों की रोपाई के 2-3 सप्ताह पहले फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई 30 और 50 दिनों के बाद डालें पनीरी लगाने के 10-15 दिन बाद 19:19:19 के साथ सूक्ष्म तत्वों 2.5-3 ग्राम प्रति लीटर में मिलाकर स्प्रे करें कम तापमान के कारण पौधे तत्वों को कम सोखते हैं और इससे पौधे के विकास पर भी प्रभाव पड़ता है इस तरह की स्थितियों में फोलियर स्प्रे पौधे के विकास में मदद करती है शाखाएं और टहनियां निकलने के समय 19:19:19 या 12:61:00 की 3-5 ग्राम प्रति लीटर स्प्रे करें पौधे के अच्छे विकास और पैदावार के लिए पनीरी लगाने के 40-50 दिन बाद 10 दिनों के फासले पर ब्रोसिनोलाइड 50 मि.ली. प्रति एकड़ को 150 मि.ली. प्रति एकड़ को 150 लीटर पानी में मिलाकर दो बार स्प्रे करें
अच्छी क्वालिटी और पैदावार प्राप्त करने के लिए फूल निकलने से पहले 12:61:00 मोनो अमोनियम फासफेट 10 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे करें जब फूल निकलने शुरू हो जाएं तो शुरूआती दिनों में बोरेन 25 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी की स्प्रे करें यह फूल और टमाटर के झड़ने को रोकेगा कईं बार टमाटरों पर काले धब्बे देखे जा सकते हैं जो कैल्शियम की कमी से होते हैं इसको रोकने के लिए कैल्शियम नाइट्रेट 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें अधिक तापमान में फूल गिरते दिखें तो एन ए ए 50 मि.ली. प्रति 10 लीटर पानी की स्प्रे फूल निकलने पर करें टमाटर के विकास के समय पोटाश और सलफेट (00:00:50+18S) की 3-5 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे करें यह टमाटर के विकास और बढ़िया रंग के लिए उपयोगी होती है टमाटर में दरार आने से इसकी क्वालिटी कम हो जाती है और मूल्य भी 20 प्रतिशत कम हो जाता है इसे रोकने के लिए चिलेटड बोरेन 200 ग्राम प्रति एकड़ प्रति 200 लीटर पानी की स्प्रे फल पकने के समय करें पौधे के विकास, फूल और फल को बढ़िया बनाने के लिए बायोज़ाइम धनज़ाइम 3-4 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे महीने में दो बार करें मिट्टी में नमी बनाई रखें रोपाई के बाद दो से तीन दिन हल्की सिंचाई करें मिट्टी में नमी के आधार पर सर्दियों में 12 से 15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें और गर्मियों में 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए गंभीर होती हैं इस अवस्था में पानी की कमी से फूलों का गिरना बढ़ता है और फलों और उत्पादकता पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है बहुत सारी जांचों के मुताबिक यह पता चला है कि हर पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई करने से जड़ें ज्यादा फैलती हैं और इससे पैदावार भी अधिक हो जाती है अत्याधिक सिंचाई ना करें

Posted by Dilpreet singh
Punjab
08-09-2019 08:59 PM
BhaaaG rajwa hara chaara te 2-3 kg feed pao hun usnu malap rehat karo
Posted by Gurmukh Singh Garry
Punjab
08-09-2019 08:57 PM
ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਕਾਰਗਿਲ ਦੀ Milkogen 5000 ਫੀਡ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ , ਇਸਦਾ ਵਧਿਆ ਰਿਜਲਟ ਹੈ , ਪਰ ਤੁਸੀ ਉਸਦੀ ਫੀਡ ਇਕ ਦਮ ਨਾ ਬਦਲੋ , ਜੋ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਹੁਣ ਫੀਡ ਦਿੰਦੇ ਹੋ ਉਸ ਵਿਚ ਥੋੜੀ ਥੋੜੀ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਦੂਜੀ ਫੀਡ ਖਵਾਓ ਕਿਉਕਿ ਇਕ ਦਮ ਫੀਡ ਬਦਲਣ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਵੀ ਘਟ ਜਾਂਦਾ ਹੈ , ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਘਰ ਵਿੱਚ ਵੀ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਫੀਡ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ , ਉਹ ਸਭ ਤੋਂ ਫਾਇਦੇਮੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ , ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ 3 ਕਿਲੋ ਦੁੱਧ ਦੇ ਮਗਰ 1 ਕ.... (Read More)
ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਕਾਰਗਿਲ ਦੀ Milkogen 5000 ਫੀਡ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ , ਇਸਦਾ ਵਧਿਆ ਰਿਜਲਟ ਹੈ , ਪਰ ਤੁਸੀ ਉਸਦੀ ਫੀਡ ਇਕ ਦਮ ਨਾ ਬਦਲੋ , ਜੋ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਹੁਣ ਫੀਡ ਦਿੰਦੇ ਹੋ ਉਸ ਵਿਚ ਥੋੜੀ ਥੋੜੀ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਦੂਜੀ ਫੀਡ ਖਵਾਓ ਕਿਉਕਿ ਇਕ ਦਮ ਫੀਡ ਬਦਲਣ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਵੀ ਘਟ ਜਾਂਦਾ ਹੈ , ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਘਰ ਵਿੱਚ ਵੀ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਫੀਡ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ , ਉਹ ਸਭ ਤੋਂ ਫਾਇਦੇਮੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ , ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ 3 ਕਿਲੋ ਦੁੱਧ ਦੇ ਮਗਰ 1 ਕਿਲੋ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਫੀਡ ਦਿਓ , ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਤੁਸੀ ਦੁੱਧ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਫੀਡ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ..
Posted by manpreet singh
Punjab
08-09-2019 08:57 PM
Posted by Ravindra Singh
Uttar Pradesh
08-09-2019 08:55 PM
अपने घर से एक कमरा चुन लें जिस मे वायू को आसानी से पहुचा सको और उस कमरे में पानी का नुकसान आप को महशूस ना लगे उस कमरे में मशरूम की खेती करनी चाहिए मशरूम की खेती से अगर आप अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो आपको अक्टूबर में शुरुआत करना पड़ेगा उससे पहले कहीं आपके नजदीक मशरूम की उत्पादन यूनिट लगी हुई है तो वहां भ्.... (Read More)
अपने घर से एक कमरा चुन लें जिस मे वायू को आसानी से पहुचा सको और उस कमरे में पानी का नुकसान आप को महशूस ना लगे उस कमरे में मशरूम की खेती करनी चाहिए मशरूम की खेती से अगर आप अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो आपको अक्टूबर में शुरुआत करना पड़ेगा उससे पहले कहीं आपके नजदीक मशरूम की उत्पादन यूनिट लगी हुई है तो वहां भ्रमण करें उससे आपको मशरूम के फार्म का डिजाइन मशरूम फार्म के अंदर किस तरीके से हवाएं देनी होती हैं फार्म के अंदर से किस तरह गए से बाहर निकाली जाती हैं और मशरूम फार्म के अंदर किस तरह से टेंपरेचर और नमी मेंटेन किया जाता है एक सफल किसान के लिए इन बहुत सारी बातों की जानकारी होना अति आवश्यक है नहीं तो हम जैसे लोगों के द्वारा दिए गए जवाबों को तोड़ मरोड़ करके बहुत सारे लोग गलत जवाब देने पर लगे हुए हैं जिससे किसानों को नुकसान भी होने के चांस बढ़ जाएंगे आपके नजदीक जहां कोई सरकारी संस्था ट्रेनिंग करवाती हो आप उनसे मिली है आपके जिले के नजदीक कृषि विज्ञान केंद्र मैं जाइए वहां कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लेना जो यह बड़ा ही लिखकर बताते हैं यह वह लोग आपको किस वैरायटी का किस समय में कितने टेंपरेचर पर खेती की जाती है बता देंगे उसका आपको फायदा मिलेगा
Posted by Gurmukh Singh Garry
Punjab
08-09-2019 08:51 PM
growth de pashu da hajama thik rakha heat lain vich v thik a hor v Kai phede ne
Posted by surender Singh
Haryana
08-09-2019 08:50 PM
ਸਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਵਿਰਕ ਜੀ ਤੁਸੀ ਸਵਾਲ ਦੇ ਨਾਲ ਕਿਸੇ ਦਵਾਈ ਦੀ ਫੋਟੋ ਅੱਪਲੋ ਨਹੀ ਕੀਤੀ ਜੀ , ਤੁਸੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਦੁਬਾਰਾ ਸਵਾਲ ਫੋਟੋ ਸਮੇਤ ਅੱਪਲੋਡ ਕਰੋ ਤੇ ਤੁਸੀ ਚਾਹੋ ਤਾਂ ਆਡੀਓ ਵਿੱਚ ਵੀ ਸਵਾਲ ਪੋਸਟ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by omprakash
Rajasthan
08-09-2019 08:49 PM
नींबू के पेड़ के नीचे भूरी कीड़ी की मात्रा ज्यादा है जो पेड़ की जड़ों को आगे नहीं चलने दे रहे हल्के हाथ से निराई गुड़ाई करें और रोकथाम करने के प्रयास करें

Posted by gurpreet singh
Punjab
08-09-2019 08:33 PM
20-9 toh band jdo Margi beej sakde bl10,42 vadia kisama de beej ne

Posted by neeraj
Punjab
08-09-2019 08:30 PM
साईलेज तैयार करने के गड्ढा - गड्ढे का आकार, पशुओं की गिणती, हरे चारे की मिकदार और उसे जितने समय के लिए चारना है पर निर्भर करता है आमतौर पर एक घन मीटर स्थान पर 5-6 क्विंटल कटा हुआ हरा चारा संभाला जा सकता है 10 मीटर लंबा, 3 मीटर चौड़ा और 1.5 मीटर गहरा गड्ढा 350-400 क्विंटल हरा चारा संभालने की क्षमता रखता है गड्ढे की लंबाई, चौड़ा.... (Read More)
साईलेज तैयार करने के गड्ढा - गड्ढे का आकार, पशुओं की गिणती, हरे चारे की मिकदार और उसे जितने समय के लिए चारना है पर निर्भर करता है आमतौर पर एक घन मीटर स्थान पर 5-6 क्विंटल कटा हुआ हरा चारा संभाला जा सकता है 10 मीटर लंबा, 3 मीटर चौड़ा और 1.5 मीटर गहरा गड्ढा 350-400 क्विंटल हरा चारा संभालने की क्षमता रखता है गड्ढे की लंबाई, चौड़ाई पशुओं की गिणती और उनकी जरूरतों के अनुसार कम ज्यादा हो सकती है परंतु गहराई हमेशा 1.5 से 2 मीटर होनी चाहिए गड्ढा पशुओं के ढारे के नज़दीक ऊंचे स्थान पर बनाना चाहिए यह पक्का और सीमेंट से पलस्तर किया होना चाहिए आचार बनाने के ढंग • काटी हुई फसल का 5 से 8 सैं.मी. के हिसाब से कुतरा कर ले और इसे गड्ढे में भर दें • गड्ढे में कुतर कर डाले गए चारे को ट्रैक्टर या बैलों की सहायता से अच्छी तरह दबा दें और इसे ज़मीन की सतह से एक मीटर ऊंचा रखें बढ़िया आचार तैयार करने के लिए ज़रूरी है कि आधे मीटर की चारे की तह को अच्छी तरह दबाया जाये • इसे ऊपर से कड़ब या तूड़ी की 10-15 सैं.मी. मोटी तह से ढक दें फिर इसके ऊपर मिट्टी डालकर लीप दें यह ध्यान रखें कि गड्ढा पूरी तरह से बंद हो • इस काम के लिए दबे हुए चारे के ऊपर प्लास्टिक की चादन बिछाकर इसके किनारे गोबर वाल मिट्टी से भी बंद किए जा सकते हैं • इसकी पूरी निगरानी रखें कि चारे के लेप के ऊपर कोई छेद या दरार ना आये यदि ऐसा हो जाये तो इसे जल्दी बंद कर दें आचार 45 दिनों तक तैयार हो जायेगा • प्रयोग करते समय आचार के गड्ढे को एक ओर से खोलें हर रोज़ के प्रयोग अनुसार चारा निकालकर बाकी रहता चारा अच्छी तरह बंद कर दें इस तरह चारा ज्यादा देर तक ठीक रहेगा पशुओं को आचार खिलाना - हो सकता है पशु पहले कुछ दिन आचार पसंद ना करें इसलिए पहले 5-6 दिन 5-10 किलो आचार हरे चारे में मिलाकर उन्हें डालें बाद में हर पशु को 20-30 किलो आचार रोजाना दूसरे चारों के साथ मिला दिया जा सकता है, बाकि जो आप फीड अभी प्रयोग कर रहें है वहीं प्रयोग कर सकते हैं
Posted by ਹਰਪੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
08-09-2019 08:23 PM
ਇਸ ਤਰਾਂ ਨਹੀ ਪਤਾ ਚੱਲਣਾ ਜੀ ਇਹ ਤਾਂ ਪਤਾ ਲੱਗਗਾ ਕਿ ਜਿਹੜੀ ਕੰਪਨੀ ਦੀ ਡੇਅਰੀ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਦੁੱਧ ਪਾਉਣੇ ਹੋਂ ਉਸ ਤੋਂ ਪਤਾ ਚੱਲੇਗਾ ਜੀ, ਕਿੳੇੁਕੀ ਹਰ ਕੰਪਨੀ ਦਾ ਅਲੱਗ ਅਲੱਗ snf ਰੇਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜੀ

Posted by vipindeep singh
Punjab
08-09-2019 08:14 PM
Hb care 100 ml te NL maltistar 100 ml Baki Apne nare de Dr NL sampar kro
Posted by Sarabjit Singh
Punjab
08-09-2019 08:05 PM
ਸਰਬਜੀਤ ਸਿੰਘ ਜੀ ਤੁਸੀ ਇਸ ਵਿਚ ਵਰਮੀਕੰਪੋਸਟ @5 kg ਪ੍ਰਤੀ ਪੌਧੇ ਵਿਚ ਪਾ ਕੇ ਇਸ ਦਾ ਇਸਤਮਾਲ ਕਰੋ

Posted by sunil
Haryana
08-09-2019 08:00 PM
सुनील जी, बीजों को दीमक, फफूंद, झुलस रोग जैसी बीमारियों से बचाने के लिए बीजने से 24 घंटे पहले एक किलो बीजों को 4 मि.ली. क्लोरपाइरीफॉस या 1.5 - 1.87 ग्राम टेबुकोनाज़ोल 2 डी.एस या 2 ग्राम कार्बेनडाज़िम या थीरम से उपचार करें रासायनिक उपचार के लिए बीजों को ट्राइकोडरमा विराइड 1.15 प्रतिशत डब्लयू पी 4 ग्राम से प्रति किलोग्राम बी.... (Read More)
सुनील जी, बीजों को दीमक, फफूंद, झुलस रोग जैसी बीमारियों से बचाने के लिए बीजने से 24 घंटे पहले एक किलो बीजों को 4 मि.ली. क्लोरपाइरीफॉस या 1.5 - 1.87 ग्राम टेबुकोनाज़ोल 2 डी.एस या 2 ग्राम कार्बेनडाज़िम या थीरम से उपचार करें रासायनिक उपचार के लिए बीजों को ट्राइकोडरमा विराइड 1.15 प्रतिशत डब्लयू पी 4 ग्राम से प्रति किलोग्राम बीजों का उपचार करें बीज को मिट्टी के अंदरूनी कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए बीजों को 3 ग्राम थीरम से प्रति किलो बीज के हिसाब से उपचार करें धन्यवाद
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