
Posted by Manoj sahani
Bihar
10-09-2019 01:44 PM
manoj ji aap iske uper NPK 191919 ek kilo ko 150 litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by subhas Kumar
Uttar Pradesh
10-09-2019 01:41 PM
subah ji aap ise vermicompost@4 kilo ko prati acre ke hisab se daale.dhanywad

Posted by चन्द्रप्रकाश सिन्हा
Chattisgarh
10-09-2019 01:36 PM
इसकी खेती के लिए अच्छे निकास वाली, उच्च उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 6-7.5 होनी चाहिए यह चूना और क्लोरीन युक्त मिट्टी को भी सहनेयोग्य है इसकी खेती के लिए नदी के नज़दीक वाली मिट्टी भी उपयुक्त होती है Pant Mahima: यह लंबी और फैलने वाली किस्म है इसके फल हल्के हरे से हल्के भूरे रंग के होते हैं इसक कतारों म.... (Read More)
इसकी खेती के लिए अच्छे निकास वाली, उच्च उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 6-7.5 होनी चाहिए यह चूना और क्लोरीन युक्त मिट्टी को भी सहनेयोग्य है इसकी खेती के लिए नदी के नज़दीक वाली मिट्टी भी उपयुक्त होती है Pant Mahima: यह लंबी और फैलने वाली किस्म है इसके फल हल्के हरे से हल्के भूरे रंग के होते हैं इसक कतारों में रखने के साथ साथ पकाने के लिए भी उपयुक्त किस्म है इसके फल का औसतन भाग लगभग 6.5 किलो होता है Pant Garima: यह लंबी और फैलने वाली किस्म है इसके फल हल्के हरे से हल्के भूरे रंग के होते हैं इसके फल का औसतन भाग लगभग 5 किलो होता है Singapore or Ceylon Jack: यह जल्दी फल देने वाली किस्म है इसके फल मध्यम आकार के मीठे होते हैं और गुद्दा कुरकुरा होता है इसका मादा प्रजनन अंग पीले रंग का, छोटा और गुठली से चिपका हुआ और तेज सुगंध वाला होता है गर्मियों में, रोपाई के लिए 1x1x1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें और धूप में खुला छोड़ दें इससे हानिकारक बैक्टीरिया मर जायेंगे और फसल मिट्टी से पैदा होने वाले कीटों और बीमारियों से बचेगी उसके बाद गड्ढों को रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 20-30 किलो, सिंगल सुपर फास्फेट 0.5 किलो और फोरेट 10-20 ग्राम से भरें प्रत्येक गड्ढे में 3-4 बीज बोयें कटहल की बिजाई के लिए जून - जुलाई का महीना उपयुक्त होता है बिजाई के लिए, आयताकार या वर्गाकार बिजाई ढंग प्रयोग किया जाता है कम उपजाऊ मिट्टी में षट्कोणीय प्रणाली का प्रयोग करें मिट्टी के आधार पर 8x8 मीटर या 10x10 मीटर या 12x12 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है बिजाई के लिए ताजे बीजों या एक महीने से कम स्टोर किए बीजों का प्रयोग किया जाता है बीजों को पहले पॉलीथीन बैग में बोया जाता है और फिर मुख्य खेत में रोपण किया जाता है बिजाई से पहले बीजों को NAA 25 पी पी एम के घोल में 24 घंटे के लिए भिगो कर रखें यह बीजों के जल्दी अंकुरण के साथ अच्छी वृद्धि में भी मदद करेगा कटहल खादों में अच्छे परिणाम देता है 1 से 3 वर्ष के पौधों मे नाइट्रोजन 200 ग्राम और फासफोरस 60 ग्राम प्रति वर्ष डालें चार से छ: वर्ष के पौधों के लिए नाइट्रोजन 400 ग्राम, फासफोरस 240 ग्राम और पोटाश 120 ग्राम प्रति वर्ष डालें नियमित कटाई और छंटाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन फसल को कीटों और बीमारियों के हमले से बचाने के लिए कमज़ोर, बीमारी वाली और मरी हुई शाखाओं को बारिश के मौसम के अंत तक निकाल दें नदीनों की तीव्रता के आधार पर गोडाई करें नदीनों के हमले से फसल को बचाने के लिए मल्च का प्रयोग करें यह फसल की उचित वृद्धि में भी सहायता करेगा शुरूआती वर्षों के दौरान, जब फसल फल देने की अवस्था में पहुंच जाती है (वृक्ष 6-8 वर्ष में फल देना शुरू करता है) अंतरफसली जैसे मिर्च, बैंगन, और दालें जैसे लोबिया, कुलथी और काले चने को अंतरफसली के रूप में लिया जा सकता है बारिश के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती बारिश की नियमितता और तीव्रता के आधार पर सिंचाई करें कटहल की फसल को शुरूआती 2-3 वर्षों में सिंचाई की आवश्यकता होती है उसके बाद सिंचाई की कोई आवश्यकता नहीं होती भारी बारिश में पानी खड़ा ना होने दें क्योंकि यह फसल जल जमाव की स्थिति को सहनेयोग्य नहीं है

Posted by Ajaib sandha
Punjab
10-09-2019 01:34 PM
ehh injection zehar de nal nal tezabi pann nu ghht krda hai..

Posted by Rakesh Godara
Rajasthan
10-09-2019 01:30 PM
subah ji aap ise vermicompost@4 kilo ko prati acre ke hisab se daale.dhanywad
Posted by NAEEM CHOUDHARY
Maharashtra
10-09-2019 01:24 PM
usko aap nazdiki doctor se janch krwayeb uski janch krke uska sahi ilagg ho skta hai .

Posted by Rajnesh
Haryana
10-09-2019 01:18 PM
Hanji Rajnesh ji aap unki deworming kr skte hai iske liye maa ko aap Flukarid-Ds bolus den aur bache ko Albomar liquid 10-10ml krke 3 din den..
Posted by Anshu
Rajasthan
10-09-2019 01:14 PM
यदि आप पशुपालन के लिए लोन लेना चाहते है तो उसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें ,इसके लिए आपके पास डे.... (Read More)
यदि आप पशुपालन के लिए लोन लेना चाहते है तो उसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें ,इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी केवीके से प्राप्त कर सकते है वहां समय समय पर ट्रेनिंग दी जाती है आप वहां जाकर अपना फार्म भर आए जब भी वहां ट्रेनिंग होगी तो आपको फोन करके बता दिया जाएगा..

Posted by Shiv Rathore
Madhya Pradesh
10-09-2019 01:10 PM
shiv ji aap kapas ke uper NPK 191919 ek kilo ko 150 litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by ਸੁਖਚੈਨ ਸਿੰਘ
Punjab
10-09-2019 12:58 PM
sukhachain ji tuc isde uper tuc tilt@200ml nu prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by Shivmangal Singh
Uttar Pradesh
10-09-2019 12:57 PM
मछली पालन प्रशिक्षण आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञानं केंद्र सकते है जी नज़दीकी कृषि विज्ञानं केंद्र का पता आप नोट कर सकते है जी Krishi Vigyan Kendra,
Sam Higginbottom University of Agriculture,
Technology & Sciences
P.O.: Allahabad Agricultural Institute
Distt.- Allahabad - (U.P.)
इंडिया
आप यहाँ पर जाकर मछली पालन प्रशिक्षण का फॉर्म भर सकते है जी
Posted by Gurnishan Singh Dhillon
Punjab
10-09-2019 12:55 PM
nabha da sarkari seman vadia ne milk record 4100 4200 Lt ne

Posted by malkeet singh
Punjab
10-09-2019 12:54 PM
ਮਲਕੀਤ ਜੀ ਇਸਦੇ ਉਪਰ ਤੁਸੀ tilt @200 ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤੋਂ ਇਹ ਝੋਨੇ ਦੇ ਦਾਣੇ ਕਾਲੇ ਹੋਣ ਤੋਂ ਰੋਕਥਾਮ ਕਰਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Manoj Lodhi
Uttar Pradesh
10-09-2019 12:51 PM
Biofloc मछली पालन की नई तकनीक है, जिसका invention Dr.YORRAM AVNIMELECH जो कि ISRAEL के है जहाँ पानी की कमी हैै उस परस्तिथि में मछली पालन कैसे किया जाये, उस तकनीक का invention किया पर फ़िलहाल भारत के कई राज्यों में किसान इस तकनीक का इस्तेमाल करके मछली पालन कर रहे हैं इसमें हम थोड़ी जगह में जहाँ सिर्फ 4 मीटर का टैंक लगता है और 1 मीटर इसकी लम्बाई होत.... (Read More)
Biofloc मछली पालन की नई तकनीक है, जिसका invention Dr.YORRAM AVNIMELECH जो कि ISRAEL के है जहाँ पानी की कमी हैै उस परस्तिथि में मछली पालन कैसे किया जाये, उस तकनीक का invention किया पर फ़िलहाल भारत के कई राज्यों में किसान इस तकनीक का इस्तेमाल करके मछली पालन कर रहे हैं इसमें हम थोड़ी जगह में जहाँ सिर्फ 4 मीटर का टैंक लगता है और 1 मीटर इसकी लम्बाई होती है मतलब की 10,000 लीटर इसमें हम अपना मछली पालन शुरू करके 1100-1300 किलो fish बना सकते हैं इसमें ज़्यादा पानी की ज़रूरत नहीं पड़ती और ना ही ज़्यादा जगह की ज़रूरत होती है, इसमें 650 -700 रूपये बिकने वाली मछलियां हैं वह हम इसमें डालते हैं और यह मछलियां 6 से 7 महीने तक बिकने योग्य हो जाती है, shrimp farming मतलब की झींगा इसका culture period -90 दिन का होता है BFT टैंक में आपको C:N ratio की सहायता से आपको बढ़िया बैक्टीरिया maintain करना होता है, और drainage की सहायता से sludge removal किया जाता है अगर आपका मैनेजमेंट एकदम सटीक रहा तो 0 % प्रतिशत पानी अदला-बदली किये बिना culture पूरा किया जा सकता है आपको उचित blower की सहायता से DO (dissolved oxygen ) maintain करने की ज़रूरत पड़ती है C:N ratio मतलब की कार्बन: नाइट्रोजन ratio अनुपात बनाएं रखना पड़ता है कार्बन जिससे की बैक्टीरिया (हेट्रोट्रॉपिक बैक्टीरिया) ठीक से काम करके नाइट्रोजन को कम कर सके क्योंकि नाइट्रोजन का एक हिस्सा जो कि non ionised Ammonia [NH3] जो मछली के लिए जानलेवा होता हैैै अधिक जानकारी के लिए 9096843382 पर फ़ोन कीजिये.

Posted by Abhinav Jain
Andhra Pradesh
10-09-2019 12:49 PM
Posted by sukha singh
Punjab
10-09-2019 12:45 PM
Jekar tuci shedd bnaun chahunde ho tan isda khrach tuhadi jameen de hisab nal ate kine pashua ton suru krna hai ohna de hisab nal hunda hai..
Posted by siddharth Kohli
Uttar Pradesh
10-09-2019 12:43 PM
सिद्धार्थ जी कृपया आप इसकी उम्र बताये ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by sanju rana
Uttar Pradesh
10-09-2019 12:39 PM
भार पड़ने के इलाज के लिए आप यह तरीका प्रयोग कर सकते हैं, आप 1 किलो सत्यानाशी बीज लें, आधा किलो कमरकस, आधा किलो जोखार लें, यह सब पंसारी से मिल जायेगा, यह सब कुछ आप मिला लें और इसका पाउडर बना सकते हैं और रोज़ाना रात को यह मिश्रण आधा किलो लें और आधा किलो शकर लें और इन्हे भिगोकर रख दें और अगले दिन पशु को दें, इस तरह आप 4 दिन .... (Read More)
भार पड़ने के इलाज के लिए आप यह तरीका प्रयोग कर सकते हैं, आप 1 किलो सत्यानाशी बीज लें, आधा किलो कमरकस, आधा किलो जोखार लें, यह सब पंसारी से मिल जायेगा, यह सब कुछ आप मिला लें और इसका पाउडर बना सकते हैं और रोज़ाना रात को यह मिश्रण आधा किलो लें और आधा किलो शकर लें और इन्हे भिगोकर रख दें और अगले दिन पशु को दें, इस तरह आप 4 दिन लगातार दें, इससे फर्क पड़ जायेगा

Posted by kapil yadav
Madhya Pradesh
10-09-2019 12:36 PM
pm kisan samman nidhi yojna के तहत खेती-किसानी के लिए सालाना 6000 रुपए तीन किस्तों में मिल रहे हैं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि स्कीम (pradhan mantri kisan samman nidhi scheme) अब देश के सभी 14.5 करोड़ किसान परिवारों के लिए लागू हो गई है स्टेप बाई स्टेप जाने कैसे लें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का .... (Read More)
pm kisan samman nidhi yojna के तहत खेती-किसानी के लिए सालाना 6000 रुपए तीन किस्तों में मिल रहे हैं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि स्कीम (pradhan mantri kisan samman nidhi scheme) अब देश के सभी 14.5 करोड़ किसान परिवारों के लिए लागू हो गई है स्टेप बाई स्टेप जाने कैसे लें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ लेने के लिए आपको ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन करना पड़ेगा किसानों को इसका लाभ पाने के लिए सबसे पहले कृषि विभाग में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा, प्रशासन उसका वेरीफिकेशन करेगा रेवेन्यू रिकॉर्ड, बैंक अकाउंट नंबर, मोबाइल नंबर और आधार नंबर देना होगा कोई कन्फ्यूजन है तो अपने लेखपाल से संपर्क कर सकते हैं लेखपाल ही यह वेरीफाई करता है कि आप किसान हैं अगर लेखपाल और कृषि अधिकारी किसी असली किसान को इसका लाभ देने में आनाकानी कर रहे हैं तो सोमवार से शुक्रवार तक पीएम-किसान हेल्प डेस्क (PM-KISAN Help Desk) के ई-मेल Email (pmkisan-ict@gov.in) पर संपर्क कर सकते हैं वहां से भी न बात बने तो इस सेल के फोन नंबर 011-23381092 (Direct HelpLine) पर फोन करें आॉनलाइन आवेदन करते समय किसान को अपना आधार कार्ड नंबर, मतदाता पहचान पत्र और बैंक से संबंधित यानी कि बैंक खाता संख्या पास होना जरूरी है इसके अलावा अगर किसान एससी/एसटी वर्ग से है तो उसके लिए उसे सर्टिफिकेट देना होगा इसके बाद आपको अपनी जानकारी देने होगी जैसे कि पिता का नाम, मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, खेती की जानकारी जैसे- खेत का आकार, कितनी जमीन है आदि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का ऑफलाइन आवेदन करने के लिए किसानों को ग्राम पंचायत या फिर पास के सीएससी सेंटर जाना होगा वहां पर जाने के बाग आपको फार्म दिए जाएंगे, जिन्हें आपको भरना होगा कैसे पता चलेगा कि आपका नाम रजिस्टर हो चुका हैं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का फार्म भरने के बाद जो भी लाभकारी किसान हैं, उनके नामों की लिस्ट पंचायत पर लगाई जाएगी इसके अलावा जिन किसानों को उसका लाभ मिलना है उनके मोबाइल पर भी एसएसएस भेजा जाएगा

Posted by shubhash chhillar
Uttar Pradesh
10-09-2019 12:36 PM
सुबाष जी आप इसके ऊपर NPK 191919 एक किलो को 150 लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by ramgopal
Haryana
10-09-2019 12:34 PM
aap iski roktham ke liye folicur@200ml ja pulsor@200ml ja custodia@300ml ja nativo@80gm ja amistar top@200ml ja indofil avtar@400gm ja hexaconazole@300ml prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by Yogesh Sharma
Rajasthan
10-09-2019 12:34 PM
योगेश जी यह किसम पर निर्भर करता है इसके लिए आप इसके ऊपर NPK 191919 एक किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by kapil yadav
Madhya Pradesh
10-09-2019 12:33 PM
kapil ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by subhas Kumar
Uttar Pradesh
10-09-2019 12:20 PM
subhas ji aap iske uper NPK 191919 ek kilo ko 150 litre pani ke hisab se spray karen.jo keet hai uski roktham ke liye fame@20ml ya coragen@60ml ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by jalandhar Patel
Uttar Pradesh
10-09-2019 12:20 PM
jalandhar patel ji aap folicur@200ml ja pulsor@200ml ja custodia@300ml ja nativo@80gm ja amistar top@200ml ja indofil di avtar@400gm ja hexaconazole@300ml prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by MAHIPAL PURI GOSWAMI
Rajasthan
10-09-2019 12:16 PM
Mahipal ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iskebare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by jamuna bareth
Chattisgarh
10-09-2019 12:16 PM
jamuna ji kripya aap iski company ka nam btaye taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Gurnishan Singh Dhillon
Punjab
10-09-2019 12:14 PM
Muuran nasal lai tuci Redhu, Bahubali, Maharaja, Mahabali, Vikrant koi v semen bhrwa skde ho..

Posted by Rakesh Tiwari
Uttar Pradesh
10-09-2019 12:09 PM
Biofloc मछली पालन की नई तकनीक है, जिसका invention Dr.YORRAM AVNIMELECH जो कि ISRAEL के है जहाँ पानी की कमी हैै उस परस्तिथि में मछली पालन कैसे किया जाये, उस तकनीक का invention किया पर फ़िलहाल भारत के कई राज्यों में किसान इस तकनीक का इस्तेमाल करके मछली पालन कर रहे हैं इसमें हम थोड़ी जगह में जहाँ सिर्फ 4 मीटर का टैंक लगता है और 1 मीटर इसकी लम्बाई होत.... (Read More)
Biofloc मछली पालन की नई तकनीक है, जिसका invention Dr.YORRAM AVNIMELECH जो कि ISRAEL के है जहाँ पानी की कमी हैै उस परस्तिथि में मछली पालन कैसे किया जाये, उस तकनीक का invention किया पर फ़िलहाल भारत के कई राज्यों में किसान इस तकनीक का इस्तेमाल करके मछली पालन कर रहे हैं इसमें हम थोड़ी जगह में जहाँ सिर्फ 4 मीटर का टैंक लगता है और 1 मीटर इसकी लम्बाई होती है मतलब की 10,000 लीटर इसमें हम अपना मछली पालन शुरू करके 1100-1300 किलो fish बना सकते हैं इसमें ज़्यादा पानी की ज़रूरत नहीं पड़ती और ना ही ज़्यादा जगह की ज़रूरत होती है, इसमें 650 -700 रूपये बिकने वाली मछलियां हैं वह हम इसमें डालते हैं और यह मछलियां 6 से 7 महीने तक बिकने योग्य हो जाती है, shrimp farming मतलब की झींगा इसका culture period -90 दिन का होता है BFT टैंक में आपको C:N ratio की सहायता से आपको बढ़िया बैक्टीरिया maintain करना होता है, और drainage की सहायता से sludge removal किया जाता है अगर आपका मैनेजमेंट एकदम सटीक रहा तो 0 % प्रतिशत पानी अदला-बदली किये बिना culture पूरा किया जा सकता है आपको उचित blower की सहायता से DO (dissolved oxygen ) maintain करने की ज़रूरत पड़ती है C:N ratio मतलब की कार्बन: नाइट्रोजन ratio अनुपात बनाएं रखना पड़ता है कार्बन जिससे की बैक्टीरिया (हेट्रोट्रॉपिक बैक्टीरिया) ठीक से काम करके नाइट्रोजन को कम कर सके क्योंकि नाइट्रोजन का एक हिस्सा जो कि non ionised Ammonia [NH3] जो मछली के लिए जानलेवा होता हैैै अधिक जानकारी के लिए 9096843382 पर फ़ोन कीजिये.
Posted by gurdeep
Punjab
10-09-2019 12:08 PM
ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਦੋ ਤੋਲੇ ਮਲੱਠੀ ਅਤੇ 2 ਤੋਲੇ ਨੁਸਦਾਰ ਜੋ ਪੰਸਾਰੀ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪਾਊਡਰ ਬਣਾ ਕੇ ਗੁੜ ਵਿਚ ਦਿਓ ਅਤੇ 4-5 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..
Posted by Gurpartap dhillon
Punjab
10-09-2019 12:01 PM
ਪੱਤਾ ਰੰਗ ਚਾਰਟ ਪਲਾਸਟਿਕ ਦੀ ਬਣੀ ਹੋਈ 8 ਬਾਈ 3 ਇੰਚ ਦੀ ਇਕ ਪੱਟੀ ਹੈ ਜਿਸ ਤੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੀਆਂ 6 ਟਿੱਕੀਆਂ ਬਣੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਇਕ ਨੰਬਰ ਵਾਲੀ ਟਿੱਕੀ ਦਾ ਰੰਗ ਹਲਕਾ ਹਰਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਕਿ 6 ਨੰਬਰ ਵਾਲੀ ਟਿੱਕੀ ਦਾ ਰੰਗ ਗੂੜ੍ਹਾ ਹਰਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਨ੍ਹਾਂ ਟਿੱਕੀਆਂ ਉੱਪਰ ਬਰੀਕ-ਬਰੀਕ ਉੱਭਰਵੀਆਂ ਨਾੜੀਆਂ ਬਣੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਸ ਨਾਲ ਇਹ ਟਿੱਕੀਆਂ ਦੇਖਣ ਵਿਚ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਂਗ ਹੀ ਲਗ.... (Read More)
ਪੱਤਾ ਰੰਗ ਚਾਰਟ ਪਲਾਸਟਿਕ ਦੀ ਬਣੀ ਹੋਈ 8 ਬਾਈ 3 ਇੰਚ ਦੀ ਇਕ ਪੱਟੀ ਹੈ ਜਿਸ ਤੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੀਆਂ 6 ਟਿੱਕੀਆਂ ਬਣੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਇਕ ਨੰਬਰ ਵਾਲੀ ਟਿੱਕੀ ਦਾ ਰੰਗ ਹਲਕਾ ਹਰਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਕਿ 6 ਨੰਬਰ ਵਾਲੀ ਟਿੱਕੀ ਦਾ ਰੰਗ ਗੂੜ੍ਹਾ ਹਰਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਨ੍ਹਾਂ ਟਿੱਕੀਆਂ ਉੱਪਰ ਬਰੀਕ-ਬਰੀਕ ਉੱਭਰਵੀਆਂ ਨਾੜੀਆਂ ਬਣੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਸ ਨਾਲ ਇਹ ਟਿੱਕੀਆਂ ਦੇਖਣ ਵਿਚ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਂਗ ਹੀ ਲਗਦੀਆਂ ਹਨ ਜੇਕਰ 6 ਜਾਂ ਇਸ ਤੋਂ ਵੱਧ ਪੱਤਿਆਂ ਦਾ ਰੰਗ 4 ਨੰਬਰ ਟਿੱਕੀ ਤੋਂ ਗੂੜ੍ਹਾ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਯੂਰੀਆ ਖਾਦ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਨਹੀਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਰੰਗ ਮਿਲਾਉਣ ਵੇਲੇ ਪੱਤਿਆਂ ਨੂੰ ਬੂਟੇ ਨਾਲੋਂ ਤੋੜਨਾ ਨਹੀਂ ਚਾਹੀਦਾ ਅਤੇ ਹਰ ਵਾਰੀ ਰੰਗ ਮਿਲਾਉਣ ਸਮੇਂ ਇਕੋ ਹੀ ਸਮਾਂ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਸਵੇਰੇ 9-10 ਵਜੇ ਜਾਂ ਸ਼ਾਮ 4-5 ਵਜੇ ਸਮੇਂ ਨੂੰ ਤਰਜੀਹ ਦੇਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਰੰਗ ਮਿਲਾਉਣ ਵਾਲੇ ਵਿਅਕਤੀ ਦਾ ਪਰਛਾਵਾਂ ਪੱਤੇ ਅਤੇ ਚਾਰਟ ਤੇ ਪੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਝੋਨਾ ਨਿੱਸਰ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਇਸ ਚਾਰਟ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਨਹੀਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਅਤੇ ਨਾ ਹੀ ਖੇਤ ਵਿਚ ਹੋਰ ਖਾਦ ਪਾਉਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ

Posted by deep
Punjab
10-09-2019 11:58 AM
tuci uss nu intalye powder 2-2 chamch swere sham ate Teramycin-LA injection 15-15ml gardan de dona pase lgwao ate ehh 1 injection lgwao bakki uss nu Milonex plus injection 15ml, CRB injection 20ml ehh 3 din lgwao, iss nal frak paa jawega..

Posted by Ankit
Haryana
10-09-2019 11:56 AM
Ankit ji dono ke product aache hai aap inme se kisi ka bhi istemal kar sakte hai.dhanywad

Posted by MULA
Madhya Pradesh
10-09-2019 11:54 AM
sir app sarson ki kisam Pusa sarson-30 Pusa sarson-31 lga skte hai. vijie ka sahi smay 10oct- 30oct tak hai
Posted by Gagandeep Singh
Punjab
10-09-2019 11:42 AM
ਗਗਨ ਜੀ ਹੁਣ ਤੁਸੀ ਮੱਕੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਤੁਸੀ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਜਿਵੇ ਗਾਜਰ, ਸ਼ਲਗਮ, ਫੁੱਲਗੋਭੀ, ਟਮਾਟਰ, ਕਾਲੀ ਸਰ੍ਹੋਂ ਦੇ ਬੀਜ, ਮੂਲੀ, ਪਾਲਕ, ਪੱਤਾ ਗੋਭੀ, ਧਨੀਆ, ਸੌਂਫ ਦੇ ਬੀਜ, ਸਲਾਦ, ਬਰੌਕਲੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Ranjit singh
Punjab
10-09-2019 11:33 AM
ਰਣਜੀਤ ਜੀ ਇਹ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵਲੋਂ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕਿਸਮ ਨਹੀਂ ਹੈ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਸਦੀ ਕੰਪਨੀ ਦਾ ਨਾਮ ਦੱਸੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by sukhchain
Punjab
10-09-2019 11:27 AM
ਸੁਖਚੈਨ ਜੀ ਇਹ ਫ਼ਲ ਦੀ ਮੱਖੀ ਦੇ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਅਮਰੂਦ ਦੇ ਬੂਟੇ ਨੂੰ ਲੱਗਣ ਵਾਲਾ ਖਤਰਨਾਕ ਕੀੜਾ ਹੈ ਮਾਦਾ ਮੱਖੀ ਨਵੇਂ ਲੱਗਣ ਵਾਲੇ ਫਲਾਂ ਦੇ ਅੰਦਰਲੇ ਪਾਸੇ ਅੰਡੇ ਦੇ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਇਹ ਕੀੜੇ ਇਸ ਦਾ ਗੁੱਦਾ ਖਾਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਫ਼ਲ ਗਲ ਕੇ ਡਿੱਗ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਫ਼ਲ ਉਤੇ ਮੱਖੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਪਹਿਲਾਂ ਵੀ ਹੁੰਦਾ ਰਿਹਾ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਬਰਸਾਤੀ ਮੌਸਮ ਵਿਚ ਬੂਟਿਆਂ.... (Read More)
ਸੁਖਚੈਨ ਜੀ ਇਹ ਫ਼ਲ ਦੀ ਮੱਖੀ ਦੇ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਅਮਰੂਦ ਦੇ ਬੂਟੇ ਨੂੰ ਲੱਗਣ ਵਾਲਾ ਖਤਰਨਾਕ ਕੀੜਾ ਹੈ ਮਾਦਾ ਮੱਖੀ ਨਵੇਂ ਲੱਗਣ ਵਾਲੇ ਫਲਾਂ ਦੇ ਅੰਦਰਲੇ ਪਾਸੇ ਅੰਡੇ ਦੇ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਇਹ ਕੀੜੇ ਇਸ ਦਾ ਗੁੱਦਾ ਖਾਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਫ਼ਲ ਗਲ ਕੇ ਡਿੱਗ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਫ਼ਲ ਉਤੇ ਮੱਖੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਪਹਿਲਾਂ ਵੀ ਹੁੰਦਾ ਰਿਹਾ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਬਰਸਾਤੀ ਮੌਸਮ ਵਿਚ ਬੂਟਿਆਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਨਹੀਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਫ਼ਸਲ ਦੀ ਤੁੜਾਈ ਸਹੀ ਸਮੇਂ ਕਰ ਲੈਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਤੁੜਾਈ ਵਿਚ ਦੇਰੀ ਨਹੀਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਪੀੜਤ ਟਾਹਣੀਆਂ ਅਤੇ ਫ਼ਲਾਂ ਨੂੰ ਤੋੜ ਕੇ ਖੇਤ ਵਿਚੋਂ ਬਾਹਰ ਸੁੱਟ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਫ਼ਲਾਂ ਦੇ ਪੱਕਣ ਵੇਲੇ 80 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਫੈਨਵਾਲਰੇਟ ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਘੋਲ ਕੇ ਹਫ਼ਤੇ ਦੇ ਵਕਫ਼ੇ ਬਾਅਦ ਬੂਟਿਆਂ ਉਤੇ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਫੈਨਵਾਲਰੇਟ ਦੇ ਛਿੜਕਾਅ ਤੋਂ ਤੀਸਰੇ ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਫ਼ਲਾਂ ਦੀ ਤੁੜਾਈ ਕਰ ਲੈਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ
Posted by jay
Gujarat
10-09-2019 11:27 AM
आप उसे अच्छी फीड के साथ एक किलो सरसों की खल, 1 किलो बड़ेवो की खल सुबह शाम दें 20 ग्राम मीठा सोडा रोजाना एक बार दें इसके साथ Fatplus पाउडर 50 ग्राम या Fatmax पाउडर 50 ग्राम दें, इससे फर्क पड़ जाएगा

Posted by Sahib Cheema
Haryana
10-09-2019 11:27 AM
साहिब जी आप इसके ऊपर मछर का हमला चेक करें अगर मौजूद है तो आप imidacloprid @1.5 ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by karansingh
Uttar Pradesh
10-09-2019 11:20 AM
Karan ji aap inki alag alag spray karen inki ek sath spray nahi kar sakte.dhanywad

Posted by Shivkumar
Uttar Pradesh
10-09-2019 11:16 AM
शिवकुमार जी -इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है Jaya: यह छोटे .... (Read More)
शिवकुमार जी -इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है Jaya: यह छोटे कद की और अधिक उपज देने वाली किस्म गर्दन तोड़ के प्रतिरोधक है यह किस्म 142 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने बड़े और लंबे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 26 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Chakia 59: यह किस्म कम जल जमाव वाले हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है
Govind: यह किस्म पंतनगर द्वारा विकसित की गई है यह किस्म 105 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है
Indrasan: यह तराई क्षेत्रों की प्रसिद्ध किस्म है
Mahsud: यह किस्म निचले क्षेत्रों में बारानी स्थितियों में उगाने के लिए उपयुक्त है
Majhera 3: यह लंबी किस्म सूखे को सहनेयोग्य है और ऊंचे क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है
Nagina 22: यह ऊंचे क्षेत्रों में बारानी हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं
Narendra-1 and Narendra-2: यह किस्म 105 और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है
Pant Dhan 6: यह किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त है
Saket 4: यह अगेते समय की किस्म है और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह यू पी की सबसे प्रसिद्ध किस्म है
T9: यह देरी से बोयी जाने वाली सुगंधित किस्म है इसके दाने बेलनाकार होते हैं
VL Dhan 16: यह निम्न और मध्यम क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त किस्म है
VL 206: यह लंबी किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है
Usar 1: यह किस्म कानपुर में विकसित की गई यह क्षारीय और लवणीय मिट्टी में खेती करने के लिए उपयुक्त है
बासमती किस्में
Taraori Basmati: यह सिंचित क्षेत्रों में अगेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म 145-155 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Haryana Basmati no 1: यह अर्द्ध छोटे कद की किस्म है और सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Pusa Basmati 1121, Pusa Basmati 1, CSR 30, Shabnam.शुष्क खेतों को अच्छा बनाने, नदीन रहित और सेहतमंद वृद्धि के लिए ग्लाफोसेट डालनी चाहिए गेहूं की कटाई के बाद ज़मीन पर हरी खाद के तौर पर मई के पहले सप्ताह ढैंचा (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़), या सन (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़) या लोबीया (बीज दर 12 किलोग्राम प्रति एकड़) की बिजाई करनी चाहिए जब फसल 6 से 8 सप्ताह की हो जाए तो इसे खेत में कद्दू करने से एक दिन खेत में ही जोत देना चाहिए इस तरह प्रति एकड़ 25 किलो नाइट्रोजन खाद की बचत होती है भूमि को समतल करने के लिए लेज़र लेवलर का प्रयोग किया जाता है इसके बाद खेत में पानी खड़ा कर दें ताकि भूमि के अंदर ऊंचे नीचे स्थानों की पहचान हो सके इस तरह पानी के रसाव के कारण पानी की होने वाले बर्बादी को कम किया जा सके यू पी के सिंचित और निम्न बारानी क्षेत्रों में मध्य जून से शुरूआती जुलाई तक का समय उपयुक्त होता है पौधे की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए फासला बनाकर लगाने से पौधे ज्यादा पैदावार देते हैं उपजाऊ मिट्टी में 20 सैं.मी. x 15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जबकि हल्की मिट्टी में रोपाई के लिए 15 सैं.मी. x 10 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 20 x 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें सिंचित और कम बारानी क्षेत्रों में रोपाई ढंग प्रयोग किया जाता है रोपाई के लिए 25-30 दिनों के पौधों का प्रयोग करें
जल जमाव वाले क्षेत्रों में 30-35 दिनों के पौधे रोपाई के लिए प्रयोग करें
ऊंचे क्षेत्रों में, शुष्क और गीली मिट्टी में रोपाई ढंग का प्रयोग करें एक एकड़ खेत में 6-8 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से पहले 10 लीटर पानी में 20 ग्राम कार्बेनडाज़िम $ 1 ग्राम स्ट्रैप्टोसाईक्लिन घोल लें और इस घोल में बीजो को 8-10 घंटे तक भिगोयें उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं और फिर बिजाई के लिए प्रयोग करें
फसल को जड़ गलन रोग से बचाने के लिए नीचे दिए गए फंगसनाशी का प्रयोग किया जा सकता है पहले रासायनिक फंगीनाशी का प्रयोग करें फिर बीजों का टराईकोडरमा के साथ उपचार करें वैट बैड नर्सरी : यह तकनीक उन क्षेत्रों में अपनाई जाती है जहां पर पानी ज्यादा मात्रा में पाया जाता है नर्सरी का 1/10 हिस्सा दूसरे खेत में लगाया जाता है इसकी बिजाई छींटे द्वारा की जाती है यहां पर खेत की जोताई और खेत को समतल किया जाता है बैडों पर कईं दिन तक नमी बनाए रखनी चाहिए पानी से खेत को ज्यादा ना भरें जब नर्सरी 2 सैं.मी. से वृद्धि कर जाए तब पानी को खेत में लगाते रहना चाहिए बिजाई के 15 दिन बाद 26 किलो यूरिया डालना चाहिए जब नर्सरी 25-30 सैं.मी. तक लंबी हो जाए तब उसे 15-21 दिन बाद दूसरे खेत में लगा देना चाहिए और खेत को लगातार पानी लगाते रहना चाहिए
सूखे बैड वाली नर्सरी : यह तकनीक शुष्क क्षेत्रों में अपनाई जाती है जो बैड बनाया जाता है वो बिजाई वाले खेत का 1/10 हिस्से में बीज बोया जाता है बैड का आकार सीमित होना चाहिए और उसकी ऊंचाई 6-10 से.मी होनी चाहिए धान का आधा जला हुआ छिलका बैड पर बिखेर देना चाहिए इससे जड़ें मजबूत होती हैं सही समय पर सिंचाई करते रहना चाहिए और नमी बनाए रखना चाहिए ताकि नए पौधे नष्ट ना हों तत्वों की पूर्ति के लिए खाद डालना जरूरी है मॉडीफाईड मैट नर्सरी : यह नर्सरी लगाने का एक ऐसा तरीका है जिसमें कम जगह और कम बीजों की जरूरत होती है यह नर्सरी किसी भी जगह पर बनाई जा सकती हैं जहां पर समतल जगह हो और पानी की सुविधा हो इसकी पनीरी लगाने के लिए 1% खेत की जरूरत होती है 4 से.मी की सतह पर नए पौधे लगाए जाते हैं इसे बनाने के लिए 1 मीटर चौड़े और 20-30 मीटर लंबे जमीन के टुकड़े की जरूरत होती है इसके ऊपर बिछाने के लिए पॉलीथीन और केले के पत्तों की जरूरत होती है इसके इलावा एक लकड़ी का बकसा जो कि 4 से.मी गहरा होता हैं मिट्टी के मिश्रण से भरा होता है बीजों को इसके अंदर रख देना चाहिए और फिर बीजों को सूखी मिट्टी के साथ ढक देना चाहिए इसके बाद पानी का छिड़काव कर देना चाहिए लकड़ी के बक्से को नमी देते रहना चाहिए बिजाई से 11-14 दिनों के बाद पौध तैयार हो जाती है जब पौध तैयार हो जाती है तब मैट से पौध को दूसरे खेत में रोपण कर दिया जाता है फासला: पौधों का फासला 20x20 सैं.मी. या 25x25 सैं.मी. होना चाहिए पनीरी लगाने का ढंग
1. कद्दू करके लगाई जाने वाली पनीरी : आमतौर पर पंक्ति में लगाए जाने वाले पौधे 20x15 सैं.मी. दूरी पर लगाए जाते हैं और देरी से लगाई जाने वाली पनीरी 15x15 सैं.मी. पर लगाई जाती है नए पौधों की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए
2. बैड बनाकर लगाई जाने वाली पनीरी : यह बैड भारी ज़मीनों के लिए बनाए जाते हैं पनीरी लगाने से पहले खालियों में पानी लगाना चाहिए और फिर पनीरी को खेत में लगाना चाहिए पौधे से पौधे का फासला 9 सैं.मी. होना चाहिए
3. मशीनी ढंग से लगाई जाने वाली पनीरी : मैट पनीरी के लिए मशीनों का प्रयोग किया जाता है यह मशीन 30x12 सैं.मी. के फासले पर पनीरी लगानी चाहिए सिंचित और कम बारानी वाले क्षेत्रों के लिए लगभग 41-50 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 90-110 किलो), 30 किलो फासफोरस (एस एस पी 190 किलो) और 27 किलो पोटाश (म्यूरेट ऑफ पोटाश 45 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा रोपाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर, नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा शाखाएं निकलने के समय और 1/4 हिस्सा बालियां निकलने के समय डालें
जल जमाव वाले क्षेत्रों में नाइट्रोजन 30-41 किलो (यूरिया 65-90 किलो) प्रति एकड़ में शुरूआती खुराक के तौर पर डालें
कम बारानी क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23-32 किलो (यूरिया 52-70 किलो) और फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो) प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा रोपाई से पहले और बाकी बची नाइट्रोजन बालियां निकलने के समय डालें
ऊंचे क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो) और पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के तीन सप्ताह बाद डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटे पहले भाग को बिजाई के 6 सप्ताह बाद और दूसरे भाग को बालियां निकलने के समय डालें पनीरी लगाने के बाद खेत में दो सप्ताह तक अच्छी तरह पानी खड़ा रहने देना चाहिए जब सारा पानी सूख जाए तो उसके दो दिन बाद फिर से पानी को लगाना चाहिए खड़े पानी की गहराई 10 सै.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए खेत में से बूटी और नदीनों को निकालने से पहले खेत में से सारा पानी निकाल देना चाहिए ओर इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद खेत की फिर से सिंचाई करनी चाहिए पकने से 15 दिन पहले सिंचाई करनी बंद करनी चाहिए ताकि फसल को आसानी से काटा जा सके
ऊंची भूमि पर सिंचाई पूरी तरह से बारिश पर निर्भर करती है बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर और पानी की उपलब्धता के आधार पर गंभीर अवस्थाओं में सिंचाई करें
Posted by karansingh
Uttar Pradesh
10-09-2019 11:14 AM
karan ji virus keet ke failta hai iske liye aap imidacloprid@1.5ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.iske 3-4 din ke bad aap iske uper M-45@4 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
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