
Posted by tejinder singh
Punjab
14-09-2019 04:59 PM
tuci uss nu Hitek injection sarir de bhar de hisab nal chamdi vich lgwa deo, iss nal frak paa jawega.
Posted by Jagdeep Singh
Punjab
14-09-2019 04:54 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਅਗਰ ਝੋਨੇ ਦੇ ਪੱਤੇ ਉਪਰੋਂ ਪੀਲੇ ਹੋ ਰਾਹ ਹਨ ਤਾਂ ਇਹ ਤਾਪਮਾਨ ਵਿਚ ਬਦਲਾਵ ਦੇ ਕਾਰਣ ਹੋਇਆ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਕੋਈ ਸਪਰੇ ਕਾਰਨ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by मूरत सिंह दांगी
Madhya Pradesh
14-09-2019 04:40 PM

Posted by Rupinder Singh
Punjab
14-09-2019 04:39 PM
BhaaG deputy director animal husbandry Bathinda or krishi vigyan kendar Bathinda or VETERINARY UNIVERSITY LUDHIANA NAAL SAMPARK KARO G
Posted by Mo Nishar
Uttar Pradesh
14-09-2019 04:38 PM
Shrimaan ji, gandi rog ki roktham ke liye ap tilt @ 200 ml ko 150 liter pani mein mila kar prati acre ke hisaab se spray karein, dhanywad

Posted by Rupinder Singh
Punjab
14-09-2019 04:37 PM
tuci isdi training lain lai apne nazdiki kvk nal sampark kr skde ho uthe sme sme te kisana di mangg de anusar training diti jndi hai tuci training lai KVK Bathinda
Address Associate Director ( Training)
Krishi Vigyan Kendra, Punjab Agricultural University, Bathinda, Phone
0164-2215619 nal sampark kr skde ho.

Posted by raj
Punjab
14-09-2019 04:35 PM
Shrimaan ji, isme fungus ka hamla hua hai, iski roktham ke liye ap custodia @ 300 ml ko 150 liter pani mein mila kar prati acre ke hisaab se spray karein, dhanywad

Posted by Pawan Kumar
Uttar Pradesh
14-09-2019 04:34 PM
अदरक भारत की एक अहम मसाले वाली फसल है यह फसल अच्छे जल निकास वाली चिकनी, रेतली और लाल हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है खेत में पानी ना खड़ा होने दें क्योंकि खड़े पानी में यह ज्यादा देर बच नहीं पाएगी फसल की वृद्धि के लिए 6-6.5 पी एच वाली मिट्टी अच्छी मानी जाती है उस खेत में अदरक की फसल ना उगाएं जहां पिछली बार अदरक की.... (Read More)
अदरक भारत की एक अहम मसाले वाली फसल है यह फसल अच्छे जल निकास वाली चिकनी, रेतली और लाल हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है खेत में पानी ना खड़ा होने दें क्योंकि खड़े पानी में यह ज्यादा देर बच नहीं पाएगी फसल की वृद्धि के लिए 6-6.5 पी एच वाली मिट्टी अच्छी मानी जाती है उस खेत में अदरक की फसल ना उगाएं जहां पिछली बार अदरक की फसल उगाई गई हो हर साल एक ही ज़मीन पर अदरक की फसल ना लगाएं प्रसिद्ध किस्में :-Himgiri, IISR Varanda, IISR Mahima,Suprabha, Suruchi, IISR Rejatha खेत को दो तीन बार जोतें और सुहागे से समतल करें अदरक की बिजाई के लिए आवश्यक लंबाई के 15 सैं.मी. ऊंचे और 1 मीटर चौड़े बैड तैयार करें दो बैडों के बीच 50 सैं.मी. का फासला रखें नदीनों कीटों और बीमारियों की जांच के लिए बैड की मिट्टी को धूप लगवायें इसके लिए बैड को पॉलीथीन शीट से 20-30 दिनों के लिए ढकें रोपाई के समय नीम केक 25 ग्राम को प्रति गड्ढे में डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए राइज़ोम की बिजाई मई के पहले सप्ताह में पूरी कर लें राइज़ोम को कतारों में बोयें और कतार में 40-45 सैं.मी. और दो पौधों में 30 सैं.मी. फासला रखें राइज़ोम की रोपाई के बाद खेत में 50 क्विंटल हरे पत्तों की मलचिंग प्रति एकड़ में करें दूसरी मलचिंग 20 क्विंटल हरे पत्तों के साथ 40 दिनों के बाद करें बीज की गहराई 3-4 सैं.मी. के करीब होनी चाहिए अदरक की बिजाई सीधे ढंग से और पनीरी लगाकर की जा सकती है बिजाई के लिए ताजे और बीमारी रहित गांठों का प्रयोग करें बिजाई के लिए 5-6.5 क्विंटल प्रति एकड़ बीज का प्रयोग करें बिजाई से पहले गांठों को मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी से उपचार करें गांठों को 30 मिनट के लिए घोल में भिगो दें इससे गांठों को फफूंदी से बचाया जा सकता है उपचार के बाद गांठों को 3-4 घंटें के लिए छांव में सुखाएं खेत की तैयारी के समय 60 क्विंटल रूड़ी की खाद प्रति एकड़ मिट्टी में डालें नाइट्रोजन 24 किलो (52 किलो यूरिया), फासफोरस 20 किलो (125 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 20 किलो (35 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें रूड़ी की खाद या गाय का गोबर 60 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की दूसरी मात्रा 20 किलो (45 किलो यूरिया) बिजाई के 45 दिनों के बाद, जबकि बिजाई के 120 दिनों के बाद नाइट्रोजन की तीसरी मात्रा 16 किलो (यूरिया 35 किलो) डालें रोपाई के बाद पहली सिंचाई करें इसे बारानी फसल के तौर पर उगाया जाता है इसलिए बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर सिंचाई करें बारिश की अनुपस्थिति में, बाकी की सिंचाई 10 दिनों के अंतराल पर करें अदरक की पूरी फसल को कुल 16-18 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बिजाई के 3 दिन बाद एट्राज़िन 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की नमी वाली मिट्टी पर स्प्रे करें उन नदीनों को खत्म करने के लिए जो पहली नदीन नाशक स्प्रे के बाद पैदा होते हैं, बिजाई के 12-15 दिनों के बाद गलाइफोसेट 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें नदीन नाशक की स्प्रे करने के बाद खेत को हरी खाद से या धान की पराली से ढक दें जड़ों के विकास के लिए जड़ों में मिट्टी लगाएं बिजाई के 50-60 दिनों के बाद पहली बार जड़ों में मिट्टी लगाएं और उसके 40 दिन बाद दोबारा मिट्टी लगाएं

Posted by ਹਰਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
14-09-2019 04:34 PM
tuci murge lenn lai mere nal 9781589637 sampark kr skde ho.
Posted by Tarik rajput
Uttar Pradesh
14-09-2019 04:34 PM
Shrimaan ji, kripya ap dhaan ki photo bejein taki dekh kar apko iske bare ein ucchit jankari di ja sake, dhanywad
Posted by Mohan kumar
Bihar
14-09-2019 04:31 PM
परवल कद्दू कुल की एक पौष्टिक सब्जी है परवल की खेती के लिए गर्म एवं अधिक आर्द्रता वाली जलवायु उपयुक्त होती है ऐसे क्षेत्र जहां औसत वार्षिक वर्षा 100 से 120 सेंमी. हो तथा तापक्रम 5 डिग्री सेल्सियस से कम नहीं जाता हो, वह क्षेत्र परवल की खेती के लिए सर्वोत्तम होता है लेकिन जहां सिंचाई की सुविधा न हो, वहाँ भी परवल की खे.... (Read More)
परवल कद्दू कुल की एक पौष्टिक सब्जी है परवल की खेती के लिए गर्म एवं अधिक आर्द्रता वाली जलवायु उपयुक्त होती है ऐसे क्षेत्र जहां औसत वार्षिक वर्षा 100 से 120 सेंमी. हो तथा तापक्रम 5 डिग्री सेल्सियस से कम नहीं जाता हो, वह क्षेत्र परवल की खेती के लिए सर्वोत्तम होता है लेकिन जहां सिंचाई की सुविधा न हो, वहाँ भी परवल की खेती सफलतापूर्वक होती है बिहार की गंगा, सोन एवं गंडक दियारा क्षेत्रों में परवल की असिंचित फसल ही उगाई जाती है, फिर भी उपज अधिक प्राप्त होती है परवल भारी मिट्टी को छोड़कर सभी प्रकार की मिट्टियों में उगाया जा सकता है, परन्तु परवल की अच्छी पैदावार के लिए जल निकासयुक्त दोमट, बलुई दोमट मिट्टी जिसमें पर्याप्त मात्रा में जीवांश हो, अधिक उपयुक्त होती है यही कारण है कि परवल की खेती उत्तरप्रदेश, बिहार एवं पश्चिम बंगाल की नदियों के किनारों के दियारा क्षेत्रों में सफलतापूर्वक की जाती है परवल को हमेशा ऊँचे स्थान पर लगाना चाहिए, जहां पानी का जमाव नहीं होता हो उत्तरप्रदेश, बिहार तथा बंगाल में परवल की खेती पान के बरेजों में अंतरावर्ती फसल के रूप में करने की प्रथा अत्यंत पुरानी है, जहां के परवल के फल उच्च कोटि के गुणवत्ता वाले होते हैं मई-जून के महीनों में मिट्टी पलटने वाले हल से खेत को एकबार जुताई कर खुला छोड़ देना चाहिए ताकि हानिकारक कीड़े-मकोड़े मर जायें तथा खरपतवार सुख जायें लत्तर की रोपाई के लगभग एक महीना पहले मिट्टी में गोबर की सड़ी खाद अथवा कम्पोस्ट 200-250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से अच्छी तरह मिला देना चाहिए लत्तर रोपाई के समय खेत को 3-4 बार देशी हल से जुताई करके पाटा चलाकर मिट्टी को भुरभुरा तथा समतल बना लेना आवश्यक है डंडाली, राजेन्द्र परवल-1, राजेन्द्र परवल-2, स्वर्ण रेखा, स्वर्ण अलौकिक, निमियां, सफेदा, सोनपुरा, संतोखबा, तिरकोलबा, गुथलिया की बिजाई कर सकते है परवल उगाने की निम्नलिखित विधियां हैं:-1. बीज द्वारा 2. जड़ों की कलम द्वारा. लत्ताओं की लच्छी द्वारा रोपाई का समय भिन्न-भिन्न स्थानों पर अलग-अलग होता है मैदानी भागों में परवल की रोपनी का उचित समय मध्य जुलाई से अक्टूबर तक और दियारा क्षेत्रों में सितम्बर से अक्टूबर तक होता है परवल में अलग-अलग पौधों पर नर और मादा फूल उत्पन्न होते हैं नर पुष्पों से फल नहीं बनते हैं बल्कि वे मादा पुष्पों में परागण का कार्य करते हैं जिसमें मादा पुष्पों से फल बनना सम्भव होता है नर पुष्प बड़े और सफेद होते हैं, जबकि मादा पुष्प थोड़ा छोटा और सफेद होता है, उसके नीचे गर्भाश्य जुड़ा रहता है जो कुछ दिनों में परागण के बाद बढ़कर फल बन जाता है इसका विस्तार लताओं या बेलों द्वारा किया जाता है परवल लगाने के समय नर और मादा पौधों का अनुपात 1:19 होना अनिवार्य है उपरोक्त अनुपात नहीं रहने पर उत्पादन में काफी कमी हो जाती है खेत में कतार से कतार की दूरी 2.5 मीटर तथा पौधे से पौधे की दूरी 1.5 मीटर रखना चाहिए साथ ही थल्ले, भूमि की सतह से 6-8 सेंमी. ऊँचाई पर बनाने चाहिए एक वर्ष पुरानी लताओं से 120-150 सेंमी. लम्बे टुकड़े काटकर इस प्रकार मोड़ना चाहिए कि लच्छी की लम्बाई 30 सेंमी. हो जाये तथा 10 सेंमी. गहरे थालों में इस प्रकार लगाया जाय कि दोनों सिरे ऊपर खुले रहें रोपनी के बाद और फल लगने के समय तक 4-5 बार निकाई-गुड़ाई करनी चाहिए ताकि लताओं की शाकीय वृद्धि तेजी से हो लताओं के बढ़ जाने पर इसकी अनावश्यक वृद्धि को रोकने के लिए बार-बार लताओं को हाथ से उलटते-पलटते रहना चाहिए ऐसा करने से गांठों से जड़ें निकलकर जमीन में प्रवेश नहीं कर पाती है और फलन अधिक होता है मार्च माह के मध्य से पौधों पर फल लगना शुरू हो जाता है प्रारम्भ में फल लगने के 10-12 दिनों के बाद फल तोड़ने लायक हो जाते हैं इस प्रकार मार्च एवं अप्रैल माह में फलों की तोडनी प्रति सप्ताह एक बार तथा मई में प्रति सप्ताह दो बार अवश्य करनी चाहिए फलों की तोड़ाई मुलायम एवं हरी अवस्था में सूर्योदय से पहले करनी चाहिए इससे फल अधिक समय तक ताजे बने रहते हैं
Posted by Mo Nishar
Uttar Pradesh
14-09-2019 04:25 PM
Shrimaan ji, gandi rog ki roktham ke liye ap isme tilt @ 200 ml ko 150 liter pani mein mila kar prati acre ek hisaab se spray karein, dhanywad

Posted by अशोक सिह
Uttar Pradesh
14-09-2019 04:23 PM

Posted by LALARAM
Uttar Pradesh
14-09-2019 04:23 PM
Shrimaan ji, kripya ap apna sawal visthar se puchein tako apko iske bare mein ucchit jankari di ja sake, dhanywad
Posted by Devendra singh
Uttar Pradesh
14-09-2019 04:19 PM
koi fikar na kato bachedani daein orr hoti hai iss leeae aap bacha ek side pe dikh raha ae

Posted by लालु परमार
Rajasthan
14-09-2019 04:18 PM
आपके सभी सवालों के जवाब दिए गए है आप एप में अपने सभी सवालों के जवाब देख सकते है।
Posted by Lalit Baghel
Chattisgarh
14-09-2019 04:17 PM
apple ki kheti ki ja sakti hai iske bare men adhik jankari lene ke liye aap Hariman Sharma 9418867209 7018520244 ji se sampark kar sakte hai.inhi se aapko iski paudh mil jayegi.dhanywad

Posted by monu
Uttar Pradesh
14-09-2019 04:16 PM
श्रीमान जी, इसमें सुंडी का हमला हुआ है, सुंडी की रोकथाम के लिए आप cartap hydrochloride @ 170 gm को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद

Posted by अशोक सिह
Uttar Pradesh
14-09-2019 04:15 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है इसका बीज लेने के लिए आप Mr. jai 8882876224 जी से संपर्क कर सकते है

Posted by Anil Sahu
Madhya Pradesh
14-09-2019 04:15 PM
Shrimaan ji kripya fasal ka nam bataye taki apko iske bare mein ucchit jankari di ja sake, dhanywad

Posted by अशोक सिह
Uttar Pradesh
14-09-2019 04:13 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है इसका बीज लेने के लिए आप Mr. jai bhadouriya 8882876224 से संपर्क कर सकते है
Posted by sushil Nautiyal
Uttarakhand
14-09-2019 04:12 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by कन्हैयालाल मेनारिया ब्राह्मण
Rajasthan
14-09-2019 04:10 PM
rajwa hara chaara te har 3kg dudh lai bhains ko or 4 kg dudh ke lai 1kg feed pao har 3 mahine baad pet ke kirhe nikalne ki dwaee deo
Posted by JZ JATTANA
Punjab
14-09-2019 04:05 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਖੁੰਬਾ ਦੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਕਈ ਤਰਾਂ ਦੀਆ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਬਟਨ ਖੁੰਬ, ਢੀਂਗਰੀ, ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ, ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਅਤੇ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਇਹਨਾਂ ਵਿਚੋਂ +ਅਲਗ ਹੈ ਜਿਵੇ *ਬਟਨ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 2 ਫਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * *ਢੀਂਗਰੀ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 3 ਫ਼ਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * * ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ ਦਾ.... (Read More)
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਖੁੰਬਾ ਦੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਕਈ ਤਰਾਂ ਦੀਆ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਬਟਨ ਖੁੰਬ, ਢੀਂਗਰੀ, ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ, ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਅਤੇ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਇਹਨਾਂ ਵਿਚੋਂ +ਅਲਗ ਹੈ ਜਿਵੇ *ਬਟਨ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 2 ਫਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * *ਢੀਂਗਰੀ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 3 ਫ਼ਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * * ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਅੱਧ ਫਰਵਰੀ ਤਕ ਹੈ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ ਇਕ ਫ਼ਸਲ ਹੀ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * *ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਅਗਸਤ ਤਕ ਹੈ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 4 ਫਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਸਤੰਬਰ ਤਕ ਹੈ ਤੁਸੀ ਹੁਣ ਅਪ੍ਰੈਲ ਵਿਚ ਪਰਾਲੀ ਜਾ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਲਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਦੇ ਲਈ ਤੁਹਾਨੂੰ ਪਰਾਲੀ,ਬੀਜ,ਬਾਂਸ, ਸੇਬਾ ਆਦਿ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੈ *ਪਰਾਲੀ ਦੇ ਪੂਲੇ*-- ਝੋਨੇ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਦੇ 1-1 ਕਿਲੋ ਦੇ ਪੂਲੇ ਦੋਨੋ ਸਿਰਿਆ ਤੋਂ ਸੇਬੇ ਨਾਲ ਬੰਨ ਕੇ ਤਿਆਰ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਪੂਲੇ ਦੇ ਸਿਰੇ ਕਟ ਕ ਇਕ ਬਰਾਬਰ ਕਰ ਲਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ *ਪੂਲਿਆ ਦੀ ਕਿਆਰੀ ਲਗਾਉਣਾ*---ਪਰਾਲੀ ਦੇ ਪੂਲਿਆ ਨੂੰ ਸਾਫ ਪਾਣੀ ਵਿਚ 16-20 ਘੰਟੇ ਲਈ ਡਬੋ ਦਇਓ ਗਿਲੇ ਪੂਲਿਆ ਨੂੰ ਢਲਾਨ ਤੇ ਰੱਖ ਕੇ ਵਾਧੂ ਪਾਣੀ ਨਿਕਲਣ ਦਇਓ ਕਮਰੇ ਚ ਇੱਟਾਂ ਤੇ ਬਾਂਸ ਦਾ ਇਕ ਢਕਵਾ ਪਲੇਟਫਾਰਮ ਬਣਾਓ ਇਸ ਪਲੇਟਫਾਰਮ ਤੇ 5 ਪੂਲਿਆ ਦੀ ਇਕ ਤਹਿ ਲਗਾਓ ਜਿਸ ਉਪਰ ਲਗਭਗ 75 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪਾਓ ਇਸ ਤੋਂ ਉਪਰ ਵਾਲੀ ਤਹਿ ਉਲਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤਰਾਂ 5-5 ਪੂਲਿਆ ਦੀਆ 4 ਤਹਿਆ ਵਿਚ 300 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪਾ ਕ ਇਕ ਕਿਆਰੀ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਉਪਰ 2 ਪੂਲੇ ਖੋਲ ਕੇ ਰੱਖ ਦਿਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ *ਖੁੰਬਾ ਦਾ ਫੁੱਟਣਾ*---ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 7-9 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਖੁੰਬਾਂ ਫੁਟਣ ਲਗ ਪੈਂਦੀਆਂ ਹਨ *ਪਾਣੀ ਤੇ ਹਵਾ ਦਾ ਸੰਚਾਰ*-- ਬਿਜਾਈ ਦੇ 2 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਹਰ ਰੋਜ ਪਾਣੀ ਦਾ ਛਿੜਕਾਅ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਖੁੰਬਾਂ ਫੁਟਣ ਉਪਰੰਤ ਹਵਾ ਦਾ ਸੰਚਾਰ 6-8 ਘੰਟੇ ਪ੍ਰਤੀ ਦਿਨ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ * ਖੁੰਬਾਂ ਦੀ ਤੁੜਾਈ*-- ਖੁੰਬਾਂ ਫੁੱਟਣ ਉਪਰੰਤ 1-2 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਤੋੜਨ ਯੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ **ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ** ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਲਈ ਤੂੜੀ ,ਬੀਜ ,ਮੋਮੀ ਲਿਫਾਫੇ(12×16),ਸੇਬਾ,ਕੇਸਿੰਗ, ਮਿਟੀ ਆਦਿ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ *ਤੂੜੀ ਦੀ ਤਿਆਰੀ*--ਸੁਕੀ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਪੱਕੇ ਫ਼ਰਸ਼ ਤੇ ਵਿਛਾ ਕੇ 16-20 ਘੰਟੇ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਗਿਲਾ ਕਰੋ ਗਿਲੀ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਬੋਰੀ ਵਿਚ ਭਰ ਕੇ ਸੇਬੇ ਨਾਲ਼ ਬੰਨ ਦਇਓ ਇਸ ਬੋਰੀ ਨੂੰ ਉਬਲਦੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ 45-50 ਮਿੰਟ ਲਈ ਰੱਖੋ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਕੱਢ ਕੇ ਪੱਕੇ ਫ਼ਰਸ਼ ਤੇ ਵਿਛਾ ਕੇ ਠੰਡਾ ਕਰ ਲਓ ਇਹ ਤੂੜੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੈ *ਬਿਜਾਈ*--- ਠੰਡੀ ਤੂੜੀ ਵਿਚ ਬੀਜ ਰਲਾ ਕੇ ਮੋਮੀ ਲਿਫਾਫੇ ਵਿਚ ਭਰ ਦਇਓ 1 ਮੋਮੀ ਲਿਫਾਫੇ ਵਿਚ ਲਗਭਗ 2 ਕਿਲੋ ਗਿਲੀ ਤੂੜੀ ਅਤੇ 70-80 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਲਿਫਾਫੇ ਦੇ ਮੂੰਹ ਨੂੰ ਸੇਬੇ ਨਾਲ ਬੰਨ ਕੇ ਕਮਰੇ ਵਿਚ ਰੱਖ ਦਇਓ *ਕੇਸਿੰਗ*--ਬਿਜਾਈ ਦੇ 2-3 ਹਫਤਿਆਂ ਬਾਅਦ ਲਿਫਾਫੇ ਖੋਲ ਕੇ ਕੇਸਿੰਗ ਦੀ 1-1.5 ਦੀ ਤਹਿ ਲਗਾ ਦਇਓ ਕੇਸਿੰਗ ਵਿਚ ਰੂੜੀ ਤੇ ਰੇਤਲੀ ਮਿਟੀ(4:1) ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੋ ਕ 24 ਘੰਟਿਆ ਲਈ 4% ਫਾਰਮਲੇਨ ਦੇ ਘੋਲ਼ ਨਾਲ ਜੀਵਣੁ ਰਹਿਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ *ਖੁੰਬਾਂ ਦਾ ਫੁੱਟਣਾ*-- ਕੇਸਿੰਗ ਮਿਟੀ ਪਾਉਣ ਤੋਂ ਲਗਭਗ 2 ਹਫਤਿਆਂ ਵਿਚ ਖੁੰਬਾਂ ਦੇ ਛੋਟੇ-ਛੋਟੇ ਕਿਣਕੇ ਨਿਕਲਣੇ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਜੋ ਕ 4-5 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਤੋੜਨ ਯੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ *ਖੁੰਬਾਂ ਦੀ ਤੁੜਾਈ*-- ਲਗਭਗ 35 -40 ਦਿਨਾਂ ਤਕ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ
Posted by Davinder singh
Punjab
14-09-2019 03:57 PM
jehrhi malap rehat karn di dawaee mildi de deo sunh ton ik mahina pehlan malap rehat karo
Posted by Rajendra janghel
Chattisgarh
14-09-2019 03:56 PM
राजेंद्र जी आप इसके ऊपर NPK 191919 एक किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Rajesh khanna
Uttar Pradesh
14-09-2019 03:56 PM
Shriman ji, jab dhaan ki baliya 15-20 % niikal jati hain tab ap isme NPK 130045 @ 1kg ko 150 liter pa emin mila kar prati acre ke hisaab se spray karein, dhanywad

Posted by Yadwinder
Punjab
14-09-2019 03:53 PM
yadwinder ji isdi kisam da nam daso ate isde uper tuc NPK 130045@10 gram nu prati litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by harkirat singh
Punjab
14-09-2019 03:49 PM
tuci vdia khurak deo, vdia matra vich hara chara feed deo ate ehna de nal nal rojana kise v vdia company da mineral mixture jrur deo.

Posted by jasvir singh
Punjab
14-09-2019 03:41 PM
tuci uss nu Gocold tablet rojana 1 goli, betnesol tablet rojana 1goli ate Cipro 500mg rojana 1 goli deo ate 3 din tak deo , iss nal frak paa jawega..
Posted by JZ JATTANA
Punjab
14-09-2019 03:37 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਤੁਸੀ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਜਿਵੇ ਕੇ ਫੁੱਲਗੋਭੀ( Pusa Snowball 1, Pusa Snowball K-1) , ਪਿਆਜ (PRO 6, Punjab Naroya, Punjab White) , ਆਲੂ( Kufri Alankar, Kufri Ashoka, Kufri Badshah, Kufri Bahar, Kufri Chamatkar, Kufri Chipsona 2, Kufri Chandramukhi, Kufri Jawahar, Kufri Pukhraj, Kufri Sutlej, Kufri Sindhuri) ਲਸਣ (PG 17, Yamuna Safed (G-1), Yamuna Safed 2(G-50), Yamuna Safed 3 (G 282), Yamuna Safed 4 (G 323) , ਬੈਂਗਨ (Punjab Bahar, Punjab No 8, Jamuni GOI (S 16), Punjab Barsati, Punjab Neelam, Punjab Sadabahar, PH 4, Pusa Purple Long, Pusa Purple Cluster, Pusa Hybrid 5 , Pusa Purple Round, Pant Rituraj , ਮਿਰਚ (CH-1, CH-3, CH-27, Punjab Sindhuri, Punjab Tej, Pusa Jwala, Pusa Sadabahar, Arka Megh.... (Read More)
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਤੁਸੀ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਜਿਵੇ ਕੇ ਫੁੱਲਗੋਭੀ( Pusa Snowball 1, Pusa Snowball K-1) , ਪਿਆਜ (PRO 6, Punjab Naroya, Punjab White) , ਆਲੂ( Kufri Alankar, Kufri Ashoka, Kufri Badshah, Kufri Bahar, Kufri Chamatkar, Kufri Chipsona 2, Kufri Chandramukhi, Kufri Jawahar, Kufri Pukhraj, Kufri Sutlej, Kufri Sindhuri) ਲਸਣ (PG 17, Yamuna Safed (G-1), Yamuna Safed 2(G-50), Yamuna Safed 3 (G 282), Yamuna Safed 4 (G 323) , ਬੈਂਗਨ (Punjab Bahar, Punjab No 8, Jamuni GOI (S 16), Punjab Barsati, Punjab Neelam, Punjab Sadabahar, PH 4, Pusa Purple Long, Pusa Purple Cluster, Pusa Hybrid 5 , Pusa Purple Round, Pant Rituraj , ਮਿਰਚ (CH-1, CH-3, CH-27, Punjab Sindhuri, Punjab Tej, Pusa Jwala, Pusa Sadabahar, Arka Meghana, Arka Sweta, Kashi Early, Kashi Surkh, Kashi Anmol , ਟਮਾਟਰ (Punjab Chhuhara, Punjab Tropic, Punjab Upma, Punjab NR -7, Punjab Red Cherry, Punjab Varkha Bahar 2, Punjab Varkha Bahar 1, Punjab Swarna) , ਮਟਰ ( PG 3, Punjab 88:, Matar Ageta 6, Field Pea 48), ਧੰਨਵਾਦ

Posted by romy
Punjab
14-09-2019 03:35 PM
ਜੇਕਰ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਹਮਲਾ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਕਲੋਰਪਾਇਰੀਫੋਸ 20 ਈ ਸੀ 1 ਲੀਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਜਾਂ ਕਲੋਰੈਂਟਰਾਨੀਲੀਪਰੋਲ 18.5% ਐਸ ਸੀ 60 ਮਿ.ਲੀ. ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਜਾਂ ਡਾਈਫਲੂਬੈਂਜ਼ਿਊਰੋਨ 25% ਡਬਿਲਊ ਪੀ 100-150 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਕਿਸੇ ਇੱਕ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਕੀਟਨਾਸ਼ਕਾਂ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਸਵੇਰ ਜਾਂ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਮੇਂ ਹੀ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ
Posted by Devendra Yadav
Uttar Pradesh
14-09-2019 03:33 PM

Posted by Harsh Deep Singh
Punjab
14-09-2019 03:24 PM
BhaaG HF nasal da teeka lagwa lao je desi gau hai tuhanu showk ae te Sahiwal wart lao Je walaiti ch fsat wadh chahidi te Jersey da teeka wart lao
Posted by Saurabh Tiwari
Uttar Pradesh
14-09-2019 03:19 PM
श्रीमान जी, कृपया आप इसकी जड़ में दीमक के हमले की जाँच करें, अगर हमला मौजूद हो तो आप इसमें chlorpyriphos @ 4ml प्रति लीटर पानी एक हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद

Posted by Hariom Patidar
Madhya Pradesh
14-09-2019 03:18 PM
Hariom ji kripya aap iski photo bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by nagendra
Uttar Pradesh
14-09-2019 03:17 PM
shrimaan ji, isme ap macchar ke hamle ki janch karein, agar hamla mojood ho to aap isme imidacloprid @ 1.5 ml prati liter pani ke hisab se spray karo, dhanwad

Posted by rani sidhu
Punjab
14-09-2019 03:16 PM
rani sidhu ji ajwain di kheti punjab vich sifarish nahi kiti jandi.dhanwad
Posted by Tejinder Gill
Punjab
14-09-2019 03:15 PM
Tejinder ji 1509 da rate 3400-3700 rupaye prati quintal de hisab nal chal reha hai.dhanwad
Posted by Harpreet Singh
Punjab
14-09-2019 03:14 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਕਿਸੀ ਵੀ 2 ਦਵਾਈਆਂ ਦੀ mix ਕਰ ਕੇ ਸਪਰੇ ਕਾਰਨ ਦੀ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਨਹੀਂ ਕਰਦੀ ਹੈ, ਤੁਸੀ taspa @ 200 ml ਨਾਲ cristocyclin @6 gm 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਅਤੇ odis ਤੇਲੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ @ 250 ml ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਇਹਨਾਂ ਦੋਨਾਂ ਸਪ੍ਰੇਹਾਂ ਵਿਚ 5 ਦਿਨ ਦਾ ਫਾਸਲਾ ਰੱਖੋ , ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Saurabh Tiwari
Uttar Pradesh
14-09-2019 03:12 PM
श्रीमान जी, इसकी जड़ में दीमक के हमले की जांच करें अगर हमला मजूद हो तो आप इसमें chlorpyriphos @ 4ml प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by Mahendra Patel
Rajasthan
14-09-2019 03:00 PM
पटेल जी उसे आप नज़दीकी डॉक्टर से जांच करवायें क्योंकि उसके पैर की जांच करके जख्म के हिसाब से सही इलाज हो सकता है

Posted by पंडित,एल,एन, उपाध्याय
Madhya Pradesh
14-09-2019 02:49 PM
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