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Posted by SANJEET KUMAR YADAV SANJEET
Bihar
14-09-2019 08:01 PM
Rajasthan
09-14-2019 08:07 PM
यदि आप पशुपालन के लिए लोन लेना चाहते है तो उसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें ,इसके लिए आपके पास डे.... (Read More)
यदि आप पशुपालन के लिए लोन लेना चाहते है तो उसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें ,इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी केवीके से प्राप्त कर सकते है वहां समय समय पर ट्रेनिंग दी जाती है आप वहां जाकर अपना फार्म भर आए जब भी वहां ट्रेनिंग होगी तो आपको फोन करके बता दिया जाएगा..
Posted by Dharminder singh
Punjab
14-09-2019 07:56 PM
Punjab
12-13-2019 04:55 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਤੁਸੀ ਕਾਲੇ ਤੇਲੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ buprofezin @250 ml ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by nandkishor
Uttar Pradesh
14-09-2019 07:55 PM
Posted by Suraj Gupta
Chattisgarh
14-09-2019 07:48 PM
Punjab
12-10-2019 06:37 PM
Shrimaan ji, sheath blight ki roktham ke liye aap folicur @ 200 ml ko 150 liter pani mein mila kar prati acre ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by Suraj Gupta
Chattisgarh
14-09-2019 07:46 PM
Punjab
12-10-2019 06:46 PM
Shrimaan ji, aap iske liye fame @ 20 ml ta coragen @ 60 ml ko 150 liter pani mein mila kar prati acre ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by बाबुल नाथ
Uttar Pradesh
14-09-2019 07:43 PM
Rajasthan
12-18-2019 02:39 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Naveen Kharb
Haryana
14-09-2019 07:35 PM
Punjab
12-18-2019 02:40 PM
Shrimaan ji, dhaan ki katai punjab state mein start ho gai hai, dhanywad
Posted by Manish Yadav
Haryana
14-09-2019 07:33 PM
Punjab
12-10-2019 06:48 PM
श्रीमान जी, गेहूं की फसल को अंकुरण के लिए अच्छे बीज बैड की जरूरत होती है पिछली फसल की कटाई के बाद खेत को अच्छे तरीके से ट्रैक्टर की मदद से जोताई की जानी चाहिए खेत को आमतौर पर टै्रक्टर के साथ तवियां जोड़कर जोता जाता है और उसके बाद दो या तीन बार हल या सुहागे से जोता जाता है अच्छे अंकुरन के लिए बिजाई से 7-10 दिन पहले .... (Read More)
श्रीमान जी, गेहूं की फसल को अंकुरण के लिए अच्छे बीज बैड की जरूरत होती है पिछली फसल की कटाई के बाद खेत को अच्छे तरीके से ट्रैक्टर की मदद से जोताई की जानी चाहिए खेत को आमतौर पर टै्रक्टर के साथ तवियां जोड़कर जोता जाता है और उसके बाद दो या तीन बार हल या सुहागे से जोता जाता है अच्छे अंकुरन के लिए बिजाई से 7-10 दिन पहले सिंचाई की जानी चाहिए खेत की जोताई शाम के समय की जानी चाहिए और रोपाई की गई ज़मीन को पूरी रात खुला छोड़ देना चाहिए ताकि वह ओस की बूंदों से नमी सोख सके सुबह के समय प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरना चाहिए धन्यवाद
Posted by Sirvi Lokesh Solanki
Madhya Pradesh
14-09-2019 07:27 PM
Punjab
12-10-2019 06:50 PM
Shrimaan ji, yeh fungus ka hamla hua hai, iski roktham ke liye aap custodia @ 300 ml ko 150 liter pani mein mila kar prati acre ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by radha Devi
Bihar
14-09-2019 07:22 PM
Punjab
09-14-2019 08:08 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by samrat
Punjab
14-09-2019 07:15 PM
Punjab
03-16-2020 09:50 PM
ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਕਰਵਾਉਣ ਲਈ ਸਰਕਾਰੀ ਸੂਰ ਫਾਰਮ ਬਣੇ ਹਨ ਜਿਵੇ ਮੱਲੋਵਾਲ, ਖਰੜ, ਨਾਭਾ , ਗੁਰਦਾਸਪੁਰ ਵਿੱਚ ਜਿੱਥੇ 5 ਦਿਨ ਦੀ ਮੁਫਤ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸੂਰ ਪਾਲਣ ਤੇ 2 ਲੱਖ ਦੀ ਸਬਸਿਡੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਕੁੱਲ ਪ੍ਰੋਜੇਕਟ 8 ਲੱਖ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਉਸ ਵਿੱਚੋ 2 ਲੱਖ ਸਬਸਿਡੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੇ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਕਰਨਾ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ 2-2.50 ਲੱਖ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਵਾਰ ਛੋਟੇ ਲੈਵ.... (Read More)
ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਕਰਵਾਉਣ ਲਈ ਸਰਕਾਰੀ ਸੂਰ ਫਾਰਮ ਬਣੇ ਹਨ ਜਿਵੇ ਮੱਲੋਵਾਲ, ਖਰੜ, ਨਾਭਾ , ਗੁਰਦਾਸਪੁਰ ਵਿੱਚ ਜਿੱਥੇ 5 ਦਿਨ ਦੀ ਮੁਫਤ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸੂਰ ਪਾਲਣ ਤੇ 2 ਲੱਖ ਦੀ ਸਬਸਿਡੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਕੁੱਲ ਪ੍ਰੋਜੇਕਟ 8 ਲੱਖ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਉਸ ਵਿੱਚੋ 2 ਲੱਖ ਸਬਸਿਡੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੇ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਕਰਨਾ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ 2-2.50 ਲੱਖ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਵਾਰ ਛੋਟੇ ਲੈਵਲ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ..
Posted by Harsh Deep Singh
Punjab
14-09-2019 07:14 PM
Punjab
09-14-2019 08:09 PM
ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਉਸਦੀ ਨਸਲ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਨਸਲ ਵਧਿਆ ਹੈ ਤਾਂ ਦੁੱਧ ਵੀ ਵੱਧ ਹੋਵੇਗੀ, ਬਾਕੀ ਖੁਰਾਕ, ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਰਹਿਣ ਸਹਿਣ, ਟਾਈਮ ਟਾਈਮ ਤੇ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਕਰਵਾਉਣਾ, ਇਹਨਾਂ ਸਭ ਗੱਲਾਂ ਦਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ ਅਤੇ 1 ਕਿਲੋ ਦਲੀਆ ਚੰਗੀ ਤ੍ਰਾਹ ਰਿਨ ਕੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰੋ , ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਅੱਧਾ ਅੱਧਾ ਕਰਕੇ ਸਵ.... (Read More)
ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਉਸਦੀ ਨਸਲ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਨਸਲ ਵਧਿਆ ਹੈ ਤਾਂ ਦੁੱਧ ਵੀ ਵੱਧ ਹੋਵੇਗੀ, ਬਾਕੀ ਖੁਰਾਕ, ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਰਹਿਣ ਸਹਿਣ, ਟਾਈਮ ਟਾਈਮ ਤੇ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਕਰਵਾਉਣਾ, ਇਹਨਾਂ ਸਭ ਗੱਲਾਂ ਦਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ ਅਤੇ 1 ਕਿਲੋ ਦਲੀਆ ਚੰਗੀ ਤ੍ਰਾਹ ਰਿਨ ਕੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰੋ , ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਅੱਧਾ ਅੱਧਾ ਕਰਕੇ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਤੁਸੀ 5-7 ਦਿਨ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗਾ , ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ Anabolite liquid 100ml ਰੋਜ, Milkout ਪਾਊਡਰ ਦੇ 2-2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ, ਇਸਦਾ ਵੀ ਦੁੱਧ ਵਧਾਉਣ ਵਿਚ ਵਧਿਆ ਰਿਜਲਟ ਹੈ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਖੁਰਾਕ ਦਾ ਪੂਰਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ.
Posted by Sharad Patel
Madhya Pradesh
14-09-2019 07:09 PM
Punjab
12-18-2019 02:42 PM
श्रीमान जी, कृपया आप मकड़ी की फोटो भेजें ताकि आपको इसके बारे में उच्चित जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by Mohan Yadav
Rajasthan
14-09-2019 07:06 PM
Maharashtra
10-01-2019 01:55 PM
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है ब.... (Read More)
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है बस आपको इस बात का ध्यान रखना है कि पौधा ज्यादा पानी वाली और ज्यादा ठंड पड़ने वाली जगह पर नहीं लगाना है कम पानी और रेतली भूमि में लगाने के लिए यह सबसे अच्छी फसल है खेत की तैयारी - खेत की तैयारी के लिए सबसे पहले खेत की 2 बार अच्छी तरह जोताई करके उसमें प्रति हेक्टेयर 10 से 20 टन में पुरानी रूड़ी की खाद डालें साथ ही 120 किलोग्राम यूरिया + 150 किलोग्राम फास्फोरस + 30 किलोग्राम पोटाश इन्हें खेत में समान रूप से बिखेर दें फिर एक बार हल्की जोताई और कराहे से भूमि को समतल कर लें फिर खेत में 50x50 सैं.मी. की दूरी पर मेंड़ें बना लें पौधे की रोपाई और देख रेख - पौधे की रोपाई किसी भी समय की जा सकती है पर अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए जून- जुलाई या फरवरी- मार्च में कर सकते हैं एलोवेरा की रोपाई मेंड़ों पर होती है यह पौधे किसी पुरानी एलोवेरा फार्म या नर्सरी से प्राप्त किए जा सकते हैं यही पौधे बाद में पनीरी के रूप में प्रयोग किए जाते हैं इस विधि को रूट सक्कर कहा जाता है अच्छी उपज के लिए किस्में - सिम सितल, L 1 , 2 , 5 और 49 लगाएं जिसमें जैल की मात्रा ज्यादा पायी जाती है इसके अलावा नेशनल बोटनीकल और प्लांट जैनेटिक रिसोर्स, आई. सी. ए. आर द्वारा रिलीज़ की गई किस्में IC111271, IC111269, IC111280 आदि हैं मेंड़ों पर 50 x 50 सैं.मी. की दूरी पर पौधों को लगाएं पौधे से पौधे की दूरी 50 सैं.मी. रखने पर प्रति एकड़ में 15000 पौधों की रोपाई की जरूरत पड़ेगी सिंचाई - सिंचाई साल भर में इसे सिर्फ 4 से 5 बार सिंचाई की जरूरत होती है सिंचाई के लिए ड्रिप प्रणाली अच्छी रहती है इससे इसकी उपज में वृद्धि होती है गर्मी क दिनों में 25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए कीट और बीमारियां - वैसे इस फसल पर कोई विशेष कीट और रोगों का प्रभाव नहीं होता है पर कहीं कहीं तने के सड़ने और पत्तियों पर दाग वाली बीमारियों का असर देखा गया है जो एक फंगस रोग होता है उसके उपचार के लिए मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए कटाई - यह फसल एक साल बाद काटने के लायक हो जाती है कटाई के दौरान पौधों की सबसे पहले निचली ठोस 3 या 4 पत्तों की कटाई करें उसके बाद लगभग 1 महीने के बाद उससे ऊपर वाली पत्तियों की कटाई करनी चाहिए कभी भी ऊपर वाली नई नाज़ुक पत्तियों की कटाई ना करें कटी हुई पत्तियों में फिर नई पत्तियां बननी शुरू हो जाती हैं प्रति हेक्टेयर में 50 से 60 टन ताजी पत्तियां प्रति वर्ष मिल जाती हैं दूसरे वर्ष में 15 से 20 फीसदी वृद्धि होती है बाजार में इसकी पत्तियों की अनुमानित कीमत 3 से 6 रूपये किलो होती है एक तंदरूस्त पौधे से एक साल में लगभग 3-4 किलो पत्तियां ली जा सकती हैं इस तरह एक वर्ष में एक एकड़ में से 1.5 से 3 लाख की फसल हो जाती है एलोवेरा का प्रयोग तंदरूस्त पत्तियों की कटाई के बाद साफ पानी से धोकर पत्तियों के निचली ओर ब्लेड या चाकू से कट लगाकर थोड़े समय के लिए छोड़ देते हैं जिसमें पीले रंग का गाढ़ा चिपचिपा रस (जेल) निकलता है उसे एक टैंक में इकट्ठा करके इस रस को सुखा लिया जाता है इस सूखे हुए रस को अलग अलग ढंग से तैयार करने के बाद अलग अलग नामों से जाना जाता है जैसे कि सकोतरा केप जब फसल पूरी तरह तैयार हो जाये और उसकी कटाई कर ली जाये तो उसे आप सब्जी मंडी में सीधे तौर पर बेच सकते हैं यदि आप खुद मंडी में बेचते हैं तो आपको अंदाजन 5 से 10 रूपये प्रति किलो तक मुल्य मिल सकता है पर यदि आप किसी कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट करते हो तो इसका रेट उस कंपनी की जरूरत और शर्तों के मुताबिक उस कंपनी के द्वारा तय होता है यह मुल्य आपकी उनके साथ डीलिंग पर निर्भर करता है
Posted by harry
Punjab
14-09-2019 07:04 PM
Punjab
12-10-2019 06:52 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ , ਇਸ ਵਿਚ NPK 130045 @ 1 kg ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕਿ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Vijay Vidua
Madhya Pradesh
14-09-2019 07:03 PM
Punjab
12-18-2019 02:44 PM
श्रीमान जी, खेत की तैयारी के लिए खेत को अच्छी तरह से 2 और 3 बार जूताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए अंतिम जूताई से पहले खेत में 5,6 टन प्रति हेक्टेयर की दर से गोबर की खाद् मिला देना चाहिए फिर उचित जल निकासी की व्यवस्था करनी चाहिए ! इसकी बुआई ऑक्टोबर , फरवरी, मार्च और कई जगह जून-जुलाई में भी की जाती है इसका बी.... (Read More)
श्रीमान जी, खेत की तैयारी के लिए खेत को अच्छी तरह से 2 और 3 बार जूताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए अंतिम जूताई से पहले खेत में 5,6 टन प्रति हेक्टेयर की दर से गोबर की खाद् मिला देना चाहिए फिर उचित जल निकासी की व्यवस्था करनी चाहिए ! इसकी बुआई ऑक्टोबर , फरवरी, मार्च और कई जगह जून-जुलाई में भी की जाती है इसका बीज बहुत ही छोटा होता है इसलिए प्रति बीघे में 400 से 600 ग्राम पर्याप्त होता है इसकी बुआई कतरों में और सीधे बिखेर कर भी कर सकते है! इसका बीज खेत की मिट्टी में 1.5 सेमी से 2 सेमी तक गहरा लगाना चाहिए जब इसके पौधे 5,6 इंच के हो जाये तब पौधे से पौधे के बीच की दूरी 10 से 14 इंच बना लेनी चाहिए अन्य पौधे को हटा देना चाहिए ! बुआई के तुरंत बाद सिचाई कर देना चाहिए इसके पौधे को बहुत ही कम पानी की आवश्यकता होती है फसल लगाने से काटने तक 3 से 4 बार पानी देना पर्याप्त रहता है! जब पौधे छोटे रहे तब खतपतवार को निकलवा देना चाहिए किनोवा की फसल 100 दिनों में तैयार हो जाती है अच्छी विकसित फसल की ऊचाई 4 से 6 फिट तक होती है इसको सरसों की तरह काट कर थ्रेसर मशीन में आसानी से निकाल सकते है बीज को निकालने के बाद कुछ दिनों की धुप आवश्यक होती है ! प्रति बीघा उत्पादन 5 से 8-9 क्विंटल तक होता है!धन्यवाद
Posted by ਇਕਬਾਲ ਸਿੰਘ
Punjab
14-09-2019 06:57 PM
Punjab
12-18-2019 02:46 PM
Shrimaan ji, yeh fungus ka hamla hua hai, iski roktham ke liye ap tilt @ 200 ml ko 150 liter pani mein mila kar prati acre ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by Ajit Kumar
Uttar Pradesh
14-09-2019 06:53 PM
Punjab
12-13-2019 05:13 PM
Shrimaan ji, mirch mein fal ke liye ap phool an eke smaay par NPK 130045 @ 10 gm prati liter pani ke hisaab se spray karen, dhanywad
Posted by Bhajan singh
Punjab
14-09-2019 06:48 PM
Punjab
12-18-2019 02:47 PM
Shrimaan ji, eh ghol khraab nahi hoye ga, is di spray tuc kar skde ho, dhanwad
Posted by Sohan Siwach
Haryana
14-09-2019 06:45 PM
Rajasthan
09-24-2019 03:20 PM
apne Najdiki Krsi Anusndan kendr ya Koi nursari ho to vha mil jayge
Posted by Avdhesh yadav
Uttar Pradesh
14-09-2019 06:44 PM
Maharashtra
12-07-2019 05:34 PM
उत्तर प्रदेश में निम्नलिखित किस्में लगाने के लिए उपयुक्त हैं: WH 896: इस किस्म की सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए सिफारिश की गई है PBW 373: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसकी सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म विभिन्न बीमारियों के प्रतिरोधक है PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बि.... (Read More)
उत्तर प्रदेश में निम्नलिखित किस्में लगाने के लिए उपयुक्त हैं: WH 896: इस किस्म की सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए सिफारिश की गई है PBW 373: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसकी सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म विभिन्न बीमारियों के प्रतिरोधक है PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह गर्दन तोड़, जल जमाव की स्थितियों के प्रतिरोधक किस्म है यह करनाल बंट के भी प्रतिरोधक और झुलस रोग को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ होती है HD 2643: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है इस किस्म से अच्छी गुणवत्ता वाली रोटी बनती है यह पत्ता और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधक और करनाल बंट को सहनेयोग्य किस्म है NW-2036: यह सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह जल्दी पकने वाली किस्म है दूसरे शब्दों में, यह किस्म 108 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने छोटे, सुनहरी और अर्द्ध सख्त होते हैं MACS-6145: यह किस्म बारानी क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त है HD-2824: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है Prasad (K-8434): यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर और नमक वाली और क्षारीय मिट्टी में बोने के लिए उपयुक्त है यह जल्दी पकने वाली किस्म है यह 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने अर्द्ध सख्त, सुनहरी होते हैं यह किस्म पत्ता झुलस रोग, करनाल बंट और झूठी कांगियारी को सहनेयोग्य किस्म है Halna (K-7903): यह सिंचित क्षेत्रों में पिछेती और बहुत देर से उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म नमक वाली मिट्टी के साथ साथ क्षारीय मिट्टी में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने सुनहरी और अर्द्ध सख्त होते हैं यह किस्म सभी प्रकार की कुंगियों के प्रतिरोधक किस्म है यह पत्ता झुलस रोग और करनाल बंट को भी सहनेयोग्य किस्म है Naina (K-9533): यह सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने सुनहरी रंग के और अर्द्ध सख्त होते हैं यह सभी प्रकार की कुंगियों के प्रतिरोधक किस्म है यह पत्ता झुलस रोग और करनाल बंट को सहनेयोग्य किस्म है
Posted by Amit singh yadav
Uttar Pradesh
14-09-2019 06:40 PM
Punjab
12-18-2019 02:47 PM
श्रीमान जी, कृपया आप गन्ने की फोटो भेजें ताकि आपको इसके बारे में उच्चित जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by ankur
Haryana
14-09-2019 06:38 PM
Punjab
12-13-2019 05:12 PM
Shrimaan ji, ap makka ya sabjiya jaise ke matar, tamatar, muli, ful gobhi, shimla mirch ki biaji kar sakte hain, iske ilawa ap medicinal podhon ki biaji jiase ke kalihari, shatvari, shankhpushpi, sadabhar ki bijai kar sakte hain, dhanywad
Posted by kuljit singh
Punjab
14-09-2019 06:15 PM
Punjab
12-12-2019 07:17 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਇਹ ਫੰਗਸ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੋਇਆ ਹੈ, ਇਸਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਤੁਸੀ folicur @ 200 ml ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕਿ ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Rohit kumar
Uttar Pradesh
14-09-2019 06:13 PM
Punjab
12-13-2019 05:11 PM
Sir, in one hectare of land approximately 120-125 kg wheat seeds are sown, thank you
Posted by Manpreet Walia
Punjab
14-09-2019 06:12 PM
Punjab
12-18-2019 02:53 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਪੈਂਡੀਮੈਥਾਲਿਨ 1 ਲੀਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਅਤੇ ਬਸਾਲਿਨ 1 ਲੀਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੀ ਵਰਤੋ ਫਸਲ ਬੀਜਣ ਤੋ 48 ਘੰਟਿਆ ਦੇ ਅੰਦਰ ਅੰਦਰ ਕਰੋ
Posted by yuvraj janwa
Rajasthan
14-09-2019 06:11 PM
Punjab
09-14-2019 08:14 PM
ये HF x Gir नस्ल का टीका है Bull No./Name: HFG-505 Date Of Birth: 12.01.12 Dam no. or Name: 340010-469133 Dam’s Best Lact.Yield (Kg): 5187 Fat %: 4.1 Sire no./ Name: Mahadev Source of Sire: NDDB-SAG PT Project
Posted by yuvraj janwa
Rajasthan
14-09-2019 06:08 PM
Punjab
09-14-2019 06:47 PM
Bhai sahib dekhne ko yeh hf te gir ka crossbred sandh ae
Posted by Harsh Deep Singh
Punjab
14-09-2019 06:04 PM
Punjab
09-14-2019 06:49 PM
BhaaG gau nu rajwa hara chaara te har 4kg dudh lai 1kg feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo feed wadhya pao
Posted by जगतसिंह यादव
Madhya Pradesh
14-09-2019 06:02 PM
Punjab
12-18-2019 02:57 PM
श्रीमान जी, उकता रोग की रोकथाम के लिए आप carbendazim @4gm या mancozeb @ 4 gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, और आप सब्जिया जैसे के पियाज, लहसुन, फूल गोभी, शिमला मिर्च, टमाटर, मटर की खेती कर सकते हैं, धन्यवाद
Posted by Harvinder singh
Punjab
14-09-2019 05:56 PM
Punjab
12-10-2019 07:01 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਇਸ ਵਿਚ ਸੁੰਡੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੋਇਆ ਹੈ, ਇਸਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਤੁਸੀ cartap hydrochloride @ 170 gm ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਚ ਮਿਲਾ ਕਿ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by MOHD Altamash
Uttar Pradesh
14-09-2019 05:36 PM
Posted by MOHD Altamash
Uttar Pradesh
14-09-2019 05:31 PM
Punjab
09-14-2019 10:02 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by matusingh
Rajasthan
14-09-2019 05:29 PM
Punjab
12-13-2019 05:10 PM
श्रीमान जी ये फंगस के हमले के कारण होता है इसकी रोकथाम के लिए आप carbendazim @ 4gm या mancozeb @ 4gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे कर सकते है
Posted by ਗਗਨਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
14-09-2019 05:24 PM
Punjab
12-12-2019 07:19 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਇਸ ਵਿੱਚ ਸੁੰਡੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੋਇਆ ਹੈ, ਇਸਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਤੁਸੀ cartap hydrochloride @ 170 gm ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕਿ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Brijesh Kumar
Uttar Pradesh
14-09-2019 05:22 PM
Punjab
09-14-2019 08:16 PM
Brijesh ji aap uska bhukar janch krwayen, yadi bhukar nahi hai too usko pett ke kirro ke liye Flukarid-Ds bolus den aur Lactomood homeopathic dwai ki 10-10 drops din mai 3 varr den aur usko Leptaden bolus 10-10 golia subah sham den yeh Alarsin company ka product hai, yeh 10 din tak den isse frak padd jayega..
Posted by ਹਰਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
14-09-2019 05:22 PM
Punjab
09-14-2019 05:30 PM
ਕਿਸਾਨ ਮੇਲਾ ਲੁਧਿਆਣਾ ਹੁਣ 21-22 ਸਤੰਬਰ ਨੂੰ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ ਜੀ
Posted by Neeraj Rathi
Uttar Pradesh
14-09-2019 05:19 PM
Punjab
09-14-2019 08:19 PM
ये जब पशु हीट में ना आता हो या बार बार रिपीट होता है तब इस विधी का प्रयोग किया जाता है इसमें पहले दिन Gynarich 5ml लगाया जाता है फिर 7वे दिन Pragma 2ml लगाया जाता है और फिर 9 वे दिन Gynarich 2.5ml लगाया जाता है और उसे 10वे दिन टीका भरवा दिया जाता है
Posted by ramkumar yadav
Madhya Pradesh
14-09-2019 05:18 PM
Punjab
12-10-2019 06:59 PM
श्रीमान जी, इसकी रोकथाम के लिए आप folicur @ 200 ml को 150 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by Baljit Singh
Punjab
14-09-2019 05:15 PM
Punjab
09-14-2019 08:20 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Nirvair Singh
Punjab
14-09-2019 05:14 PM
Punjab
09-14-2019 06:52 PM
BhaaG isnu NIANA PA LAO
Posted by Ravi Mishra
Uttar Pradesh
14-09-2019 05:13 PM
Punjab
09-14-2019 09:20 PM
धान भारत की एक महत्तवपूर्ण फसल है जो कि जोताई योग्य क्षेत्र के लगभग एक चौथाई हिस्से में उगाई जाती है और भारत की लगभग आधी आबादी इसे मुख्य भोजन के रूप में प्रयोग करती है यह उत्तर प्रदेश की मुख्य फसल है और उत्तर प्रदेश के लगभग 5.4 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है Basmati, Kalajeera, Vishnu Parag आदि धान की कुछ उच्च ग.... (Read More)
धान भारत की एक महत्तवपूर्ण फसल है जो कि जोताई योग्य क्षेत्र के लगभग एक चौथाई हिस्से में उगाई जाती है और भारत की लगभग आधी आबादी इसे मुख्य भोजन के रूप में प्रयोग करती है यह उत्तर प्रदेश की मुख्य फसल है और उत्तर प्रदेश के लगभग 5.4 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है Basmati, Kalajeera, Vishnu Parag आदि धान की कुछ उच्च गुणवत्ता वाली किस्में हैं जिनकी खेती उत्तर प्रदेश में की जाती है मिट्टी इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है प्रसिद्ध किस्में और पैदावार Jaya: यह छोटे कद की और अधिक उपज देने वाली किस्म गर्दन तोड़ के प्रतिरोधक है यह किस्म 142 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने बड़े और लंबे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 26 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Chakia 59: यह किस्म कम जल जमाव वाले हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है Govind: यह किस्म पंतनगर द्वारा विकसित की गई है यह किस्म 105 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Indrasan: यह तराई क्षेत्रों की प्रसिद्ध किस्म है Mahsud: यह किस्म निचले क्षेत्रों में बारानी स्थितियों में उगाने के लिए उपयुक्त है Majhera 3: यह लंबी किस्म सूखे को सहनेयोग्य है और ऊंचे क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Nagina 22: यह ऊंचे क्षेत्रों में बारानी हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं Narendra-1 and Narendra-2: यह किस्म 105 और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Pant Dhan 6: यह किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त है Saket 4: यह अगेते समय की किस्म है और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह यू पी की सबसे प्रसिद्ध किस्म है T9: यह देरी से बोयी जाने वाली सुगंधित किस्म है इसके दाने बेलनाकार होते हैं VL Dhan 16: यह निम्न और मध्यम क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त किस्म है VL 206: यह लंबी किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Usar 1: यह किस्म कानपुर में विकसित की गई यह क्षारीय और लवणीय मिट्टी में खेती करने के लिए उपयुक्त है बासमती किस्में Taraori Basmati: यह सिंचित क्षेत्रों में अगेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म 145-155 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Haryana Basmati no 1: यह अर्द्ध छोटे कद की किस्म है और सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Basmati 1121, Pusa Basmati 1, CSR 30, Shabnam दूसरे राज्यों की किस्में Hybrid 6201: यह सिंचित क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है यह भुरड़ रोग के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 25 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Vivek Dhan 62: यह सिंचित और पहाड़ी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं यह भुरड़ रोग के प्रतिरोधक किस्म है यह गर्दन तोड़ और कम तापमान वाले क्षेत्रों को भी सहन कर सकती है इसकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Karnataka Rice Hybrid 2: यह सिंचित और समय से बिजाई वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह पत्तों के झुलस रोग और अन्य बीमारियों को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 35 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kanak: यह दरमियाने क्षेत्रों में बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने लंबे और मोटे होते हैं यह बैक्टीरियल झुलस रोग के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Ratnagiri 1 and 2: सिंचित क्षेत्रों के लिए जबकि निचले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है ये अर्द्ध छोटे कद की किस्म हैं इनकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल और 21 क्विंटल प्रति एकड़ होती है ज़मीन की तैयारी शुष्क खेतों को अच्छा बनाने, नदीन रहित और सेहतमंद वृद्धि के लिए ग्लाफोसेट डालनी चाहिए गेहूं की कटाई के बाद ज़मीन पर हरी खाद के तौर पर मई के पहले सप्ताह ढैंचा (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़), या सन (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़) या लोबीया (बीज दर 12 किलोग्राम प्रति एकड़) की बिजाई करनी चाहिए जब फसल 6 से 8 सप्ताह की हो जाए तो इसे खेत में कद्दू करने से एक दिन खेत में ही जोत देना चाहिए इस तरह प्रति एकड़ 25 किलो नाइट्रोजन खाद की बचत होती है भूमि को समतल करने के लिए लेज़र लेवलर का प्रयोग किया जाता है इसके बाद खेत में पानी खड़ा कर दें ताकि भूमि के अंदर ऊंचे नीचे स्थानों की पहचान हो सके इस तरह पानी के रसाव के कारण पानी की होने वाले बर्बादी को कम किया जा सके बिजाई बिजाई का समय यू पी के सिंचित और निम्न बारानी क्षेत्रों में मध्य जून से शुरूआती जुलाई तक का समय उपयुक्त होता है बीज की गहराई पौधे की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए फासला बनाकर लगाने से पौधे ज्यादा पैदावार देते हैं फासला उपजाऊ मिट्टी में 20 सैं.मी. x 15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जबकि हल्की मिट्टी में रोपाई के लिए 15 सैं.मी. x 10 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 20 x 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बिजाई का ढंग सिंचित और कम बारानी क्षेत्रों में रोपाई ढंग प्रयोग किया जाता है रोपाई के लिए 25-30 दिनों के पौधों का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 30-35 दिनों के पौधे रोपाई के लिए प्रयोग करें ऊंचे क्षेत्रों में, शुष्क और गीली मिट्टी में रोपाई ढंग का प्रयोग करें बीज बीज की मात्रा एक एकड़ खेत में 6-8 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बीज का उपचार बिजाई से पहले 10 लीटर पानी में 20 ग्राम कार्बेनडाज़िम $ 1 ग्राम स्ट्रैप्टोसाईक्लिन घोल लें और इस घोल में बीजो को 8-10 घंटे तक भिगोयें उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं और फिर बिजाई के लिए प्रयोग करें पनीरी की देख-रेख और रोपण वैट बैड नर्सरी : यह तकनीक उन क्षेत्रों में अपनाई जाती है जहां पर पानी ज्यादा मात्रा में पाया जाता है नर्सरी का 1/10 हिस्सा दूसरे खेत में लगाया जाता है इसकी बिजाई छींटे द्वारा की जाती है यहां पर खेत की जोताई और खेत को समतल किया जाता है बैडों पर कईं दिन तक नमी बनाए रखनी चाहिए पानी से खेत को ज्यादा ना भरें जब नर्सरी 2 सैं.मी. से वृद्धि कर जाए तब पानी को खेत में लगाते रहना चाहिए बिजाई के 15 दिन बाद 26 किलो यूरिया डालना चाहिए जब नर्सरी 25-30 सैं.मी. तक लंबी हो जाए तब उसे 15-21 दिन बाद दूसरे खेत में लगा देना चाहिए और खेत को लगातार पानी लगाते रहना चाहिए सूखे बैड वाली नर्सरी : यह तकनीक शुष्क क्षेत्रों में अपनाई जाती है जो बैड बनाया जाता है वो बिजाई वाले खेत का 1/10 हिस्से में बीज बोया जाता है बैड का आकार सीमित होना चाहिए और उसकी ऊंचाई 6-10 से.मी होनी चाहिए धान का आधा जला हुआ छिलका बैड पर बिखेर देना चाहिए इससे जड़ें मजबूत होती हैं सही समय पर सिंचाई करते रहना चाहिए और नमी बनाए रखना चाहिए ताकि नए पौधे नष्ट ना हों तत्वों की पूर्ति के लिए खाद डालना जरूरी है मॉडीफाईड मैट नर्सरी : यह नर्सरी लगाने का एक ऐसा तरीका है जिसमें कम जगह और कम बीजों की जरूरत होती है यह नर्सरी किसी भी जगह पर बनाई जा सकती हैं जहां पर समतल जगह हो और पानी की सुविधा हो इसकी पनीरी लगाने के लिए 1% खेत की जरूरत होती है 4 से.मी की सतह पर नए पौधे लगाए जाते हैं इसे बनाने के लिए 1 मीटर चौड़े और 20-30 मीटर लंबे जमीन के टुकड़े की जरूरत होती है इसके ऊपर बिछाने के लिए पॉलीथीन और केले के पत्तों की जरूरत होती है इसके इलावा एक लकड़ी का बकसा जो कि 4 से.मी गहरा होता हैं मिट्टी के मिश्रण से भरा होता है बीजों को इसके अंदर रख देना चाहिए और फिर बीजों को सूखी मिट्टी के साथ ढक देना चाहिए इसके बाद पानी का छिड़काव कर देना चाहिए लकड़ी के बक्से को नमी देते रहना चाहिए बिजाई से 11-14 दिनों के बाद पौध तैयार हो जाती है जब पौध तैयार हो जाती है तब मैट से पौध को दूसरे खेत में रोपण कर दिया जाता है फासला: पौधों का फासला 20x20 सैं.मी. या 25x25 सैं.मी. होना चाहिए खेत में पौध रोपण पनीरी लगाने का ढंग 1. कद्दू करके लगाई जाने वाली पनीरी : आमतौर पर पंक्ति में लगाए जाने वाले पौधे 20x15 सैं.मी. दूरी पर लगाए जाते हैं और देरी से लगाई जाने वाली पनीरी 15x15 सैं.मी. पर लगाई जाती है नए पौधों की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए 2. बैड बनाकर लगाई जाने वाली पनीरी : यह बैड भारी ज़मीनों के लिए बनाए जाते हैं पनीरी लगाने से पहले खालियों में पानी लगाना चाहिए और फिर पनीरी को खेत में लगाना चाहिए पौधे से पौधे का फासला 9 सैं.मी. होना चाहिए 3. मशीनी ढंग से लगाई जाने वाली पनीरी : मैट पनीरी के लिए मशीनों का प्रयोग किया जाता है यह मशीन 30x12 सैं.मी. के फासले पर पनीरी लगानी चाहिए खरपतवार नियंत्रण रोपाई के 2 से 3 दिन बाद नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 50 ई सी 1200 मि.ली. या थायोबेनकार्ब 50 ई सी 1200 मि.ली. या पैंडीमैथालीन 30 ई सी या प्रैटीलाक्लोर 50 ई सी 600 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें इनमें से किसी एक नदीननाशक को 60 किलो रेत में मिलाकर 4-5 सैं.मी. गहरे खड़े पानी में बुरकाव करें चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए मेटसलफुरॉन 20 डब्लयु पी 30 ग्राम को 150 लीटर पानी में मिलाकर नदीनों के अंकुरण के बाद रोपाई के 20-25 दिन बाद डालें स्प्रे से पहले खेत में खड़े पानी का निकास कर दें और स्प्रे के एक दिन बाद सिंचाई करें नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 1 लीटर को बिजाई के 6 से 7 दिनों के बाद प्रति एकड़ में स्प्रे करें सिंचाई पनीरी लगाने के बाद खेत में दो सप्ताह तक अच्छी तरह पानी खड़ा रहने देना चाहिए जब सारा पानी सूख जाए तो उसके दो दिन बाद फिर से पानी को लगाना चाहिए खड़े पानी की गहराई 10 सै.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए खेत में से बूटी और नदीनों को निकालने से पहले खेत में से सारा पानी निकाल देना चाहिए ओर इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद खेत की फिर से सिंचाई करनी चाहिए पकने से 15 दिन पहले सिंचाई करनी बंद करनी चाहिए ताकि फसल को आसानी से काटा जा सके ऊंची भूमि पर सिंचाई पूरी तरह से बारिश पर निर्भर करती है बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर और पानी की उपलब्धता के आधार पर गंभीर अवस्थाओं में सिंचाई करें
Posted by sukhpreet singh
Punjab
14-09-2019 05:13 PM
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12-18-2019 05:13 PM
Shrimaan ji, narme da rate is samay 5025 rupay prati quintal de hisaab nal chal reha hai, dhanwad
Posted by Nirvair Singh
Punjab
14-09-2019 05:10 PM
Punjab
09-14-2019 06:56 PM
de deo je shak e te butox or tiktak lga deo