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Posted by Gurjeet singh
Punjab
16-09-2019 07:37 PM
Punjab
09-17-2019 04:05 PM
Gurjeet ji tuhade sare swala de jwab ditte gye hai tuci App vich apne sare swala de jwab dekh skde ho..
Posted by लक्ष्मण बालाच
Rajasthan
16-09-2019 07:36 PM
Punjab
12-09-2019 06:36 PM
श्रीमान जी, अनार के लिए पहले वर्ष के दौरान अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 10 किलो, यूरिया 100 ग्राम, एस एस पी 250 ग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश 50 ग्राम प्रति पौधे में डालें गाय का गोबर, एस एस पी, पोटाश की पूरी मात्रा और यूरिया की आधी मात्रा फूल निकलने के छ: सप्ताह पहले डालें यूरिया की बाकी बची मात्रा को फल विकसित होने के.... (Read More)
श्रीमान जी, अनार के लिए पहले वर्ष के दौरान अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 10 किलो, यूरिया 100 ग्राम, एस एस पी 250 ग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश 50 ग्राम प्रति पौधे में डालें गाय का गोबर, एस एस पी, पोटाश की पूरी मात्रा और यूरिया की आधी मात्रा फूल निकलने के छ: सप्ताह पहले डालें यूरिया की बाकी बची मात्रा को फल विकसित होने के समय डालें 3 वर्षों तक फूलों की कलियों को निकालते रहें अच्छी वृद्धि और उपज के लिए 3-4 वर्ष बाद शुरू करें धन्यवाद
Posted by parmjit singh
Punjab
16-09-2019 07:27 PM
Punjab
09-16-2019 08:46 PM
परमजीत जी आप फोटो पर किसान मेले की तारीख देख सकते हैं
Posted by kundan kumar
Bihar
16-09-2019 07:24 PM
Rajasthan
09-17-2019 04:07 PM
डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें ,इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अप.... (Read More)
डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें ,इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी केवीके से प्राप्त कर सकते है वहां समय समय पर ट्रेनिंग दी जाती है आप वहां जाकर अपना फार्म भर आए जब भी वहां ट्रेनिंग होगी तो आपको फोन करके बता दिया जाएगा
Posted by shaybe
Uttar Pradesh
16-09-2019 07:24 PM
Punjab
12-10-2019 03:13 PM
Shrimaan ji, pyaj ka rate is samay 4260 se 7580 rupay prati quintal ke hisaab se chal raha hai, dhanywad
Posted by khuspal
Punjab
16-09-2019 07:21 PM
Punjab
09-16-2019 07:31 PM
Posted by kuldeep kaurav
Madhya Pradesh
16-09-2019 07:18 PM
Punjab
09-17-2019 04:09 PM
कुलदीप जी कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप इस वीडियों के बारे में क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by kuldeep kaurav
Madhya Pradesh
16-09-2019 07:17 PM
Punjab
09-17-2019 04:09 PM
कुलदीप जी कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप इस वीडियों के बारे में क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Priyanshu Bharti
Uttar Pradesh
16-09-2019 07:12 PM
Punjab
12-10-2019 02:56 PM
shrimaan ji, yeh sundi ka hamla hua hai, iski roktham ke liye ap quinalphos @ 4gm prati liter pani ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by ਸਤਿਗੁਰ ਸਿੰਘ
Punjab
16-09-2019 07:08 PM
Punjab
09-17-2019 06:04 PM
Posted by Bhagwan Singh
Madhya Pradesh
16-09-2019 07:08 PM
Punjab
09-17-2019 04:10 PM
आपके द्धारा भेंजी गई फोटो अपलोड नहीं हुई है कृप्या आप दोबारा फोटो अपलोड करें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Jaspal Singh Cheema
Punjab
16-09-2019 07:02 PM
Rajasthan
09-19-2019 11:42 AM
boron micronutrients ka use kre. fruit bnte time Pani time se dijiye
Posted by Priyanshu Bharti
Uttar Pradesh
16-09-2019 07:01 PM
Punjab
12-09-2019 06:37 PM
Shrimaan ji, kripya ap urad ki ik photo bejein taki apko iske bare mein ucchit jankri di ja sake, dhanywad
Posted by prabhjot singh
Punjab
16-09-2019 06:59 PM
Punjab
09-16-2019 07:06 PM
15,20 nembo da rass te 250 khad de do 3 4 din
Posted by ਜਸਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
16-09-2019 06:55 PM
Punjab
09-16-2019 08:54 PM
Shrimaan g jhone da rate @1835 rupees per quiental hai g..
Posted by Ashokkumar
Rajasthan
16-09-2019 06:54 PM
Punjab
09-17-2019 01:10 PM
ਇਹ ਫਰਮਾਂਹ ਦਾ ਦਰੱਖਤ ਹੈ
Posted by charnjit
Punjab
16-09-2019 06:54 PM
Punjab
11-30-2019 02:38 PM
Posted by Harsh Deep Singh
Punjab
16-09-2019 06:53 PM
Punjab
09-16-2019 08:55 PM
Haesh g CR 212 kisam transplanting to baad 140-145 din tkk pkk jndi hai g..
Posted by Harjeet singh
Punjab
16-09-2019 06:49 PM
Punjab
09-17-2019 02:06 PM
ਹਰਜੀਤ ਜੀ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਅਫੀਮ ਬੀਜਣ ਦੀ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by sanjay janghel
Chattisgarh
16-09-2019 06:49 PM
Punjab
12-10-2019 02:58 PM
श्रीमान जी, कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें के आप लाइट किसे कह रहे है, ताकि आपको इसके बारे में उच्चित जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by Basant Bhalse
Madhya Pradesh
16-09-2019 06:48 PM
Maharashtra
09-24-2019 11:25 AM
मालाबार नीम के पेड़ की खेती सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है और पानी की कम आपूर्ति की आवश्यकता होती है मालाबार नीम रोपण से 2 साल के भीतर 40 फुट तक उचाई लेलेता है, मालाबार नीम एक नकदी नीम परिवार से संबंधित है इस पेड़ अपनी तेजी से विकास के लिए जाना जाता है हाल के दिनों में कर्नाटक के आसपास के किसान, तमिलनाडु, आ.... (Read More)
मालाबार नीम के पेड़ की खेती सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है और पानी की कम आपूर्ति की आवश्यकता होती है मालाबार नीम रोपण से 2 साल के भीतर 40 फुट तक उचाई लेलेता है, मालाबार नीम एक नकदी नीम परिवार से संबंधित है इस पेड़ अपनी तेजी से विकास के लिए जाना जाता है हाल के दिनों में कर्नाटक के आसपास के किसान, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल में इस वृक्ष की बढ़ी मात्रा में फार्मिंग कर रहे है और इसका प्रयोग सस्ती वुड (plywood इंडस्ट्री) के रूप में कर रहे है यदि पेड़ो को सिंचित किया जाये तो 5 वर्ष के अंत में काटा जा सकता है और प्लाई के लिए प्रयोग किया जासकता है मार्च - अप्रैल के दौरान बीज बोना सबसे अच्छा है
Posted by ramgopal
Haryana
16-09-2019 06:46 PM
Punjab
12-10-2019 03:11 PM
Shrimaan ji, valida ik fungicide hai, yeh fungus ka hamla hone par ki jati hai, iski matra valida @ 300 ml ko 150 liter pani mein mila kar prati acre ke hisaab se spray kiya jata hai, dhanywad
Posted by narendra
Uttar Pradesh
16-09-2019 06:46 PM
Maharashtra
09-20-2019 05:36 PM
मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिसमे नमी सोखने की क्षमता हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की pH 6-7 अनुकूल है आप इसकी .... (Read More)
मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिसमे नमी सोखने की क्षमता हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की pH 6-7 अनुकूल है आप इसकी किस्मे जैसे Arka Meghana,Arka Sweta,Kashi Early, Kashi Surkh की बिजाई कर सकते है खेत को तैयार करने के लिए 2-3 बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद डलियों को तोड़ें बिजाई से 15-20 दिन पहले रूड़ी की खाद 150-200 क्विंटल प्रति एकड़ डालकर मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें टमाटर और मिर्च की खेती एक ही या नज़दीक वाले खेत में ना करें, क्योंकि दोनों की बीमारियां एक जैसी होती हैं और इस कारण एंथ्राक्नोस और बैक्टीरिया वाली बीमारीयों के बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है मिर्च की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ की फसल के लिए मई-जून और गर्मियों की फसल के लिए फरवरी - मार्च का समय मिर्च की रोपाई के लिए उपयुक्त होता है खरीफ के मौसम में 60-75 सैं.मी. x 45 सैं.मी. और सिंचित क्षेत्रों में 60 x 60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में बीजों को 3-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें और फिर मिट्टी से ढक दें इसकी मुख्य खेत में रोपाई की जाती है 1 मीटर चौड़े और आवश्यकतानुसार लंबे बैड बनाएं कीटाणु रहित कोकोपिट 300 किलो, 5 किलो नीम केक को मिलाए और 1-1किलो एज़ोसपीरिलियम और फासफोबैक्टीरिया भी डालें उपचार किए हुए बीज ट्रे में एक बीज प्रति सैल बोयें बीज को कोकोपिट से ढक दें और ट्रे एक- दूसरे के साथ रखें बीज अंकुरन तक इन्हें पॉलीथीन से ढक दें नर्सरी में बीज बीजने के बाद बैडों को 400 मैश नाइलोन जाल या पतले सफेद कपड़े से ढक दें यह नए पौधों को कीड़े-मकौड़े और बीमारियों के हमले से बचाता है 6 दिनों के बाद, ट्रे में लगे नए पौधों को एक एक करके जाल की छांव के नीचे बैडों में लगाएं बीज अंकुरन तक पानी देने वाले बर्तन की मदद से पानी दें बिजाई के 18 दिन बाद 19:19:19 की 0.5 % (5 ग्राम प्रति लीटर ) की स्प्रे करें किस्मों के लिए 200 ग्राम बीज और हाइब्रिड के लिए 80-100 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (110 किलो यूरिया), फासफोरस 16 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा पनीरी खेत में लगाने के समय डालें रोपाई के बाद बाकी बची नाइट्रोजन दो बराबर हिस्सों में 30वें और 50वें दिन डालें सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 84 किलो (182 किलो यूरिया), फासफोरस 24 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 किलो) प्रति एकड़ डालें रोपाई से पहले 24 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 52 किलो), फासफोरस की पूरी मात्रा और पोटाश की आधी मात्रा प्रति एकड़ में डालें बाकी बची नाइट्रोजन को पांच भागों में बांटें और पोटाश को तीन बराबर भागों में बांटें नाइट्रोजन 12 किलो (यूरिया 26 किलो) को बिजाई के बाद 45वें, 60वें, 75वें, 95वें और 115वें दिन डालें और पोटाश 4 किलो को बिजाई के बाद 45वें, 60वें, और 75वें दिन डालें 45 दिनों तक गोडाई करें, कही की मदद से मिट्टी चढ़ाएं और खेत को नदीन मुक्त रखें यदि नदीनों की रोकथाम ना की जाये तो यह 70-90 % पैदावार कम कर देते हैं रोपाई से पहले मुख्य खेत में पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ में डालें यदि नदीनों की संख्या ज्यादा हो तो उनके अंकुरण के बाद सेन्कोर 800 मि.ली की स्प्रे प्रति एकड़ में करें नदीनों की रोकथाम के साथ मिट्टी में नमी को बनाए रखने के लिए मलचिंग एक प्रभावी तरीका है मिट्टी में नमी के आधार पर सर्दियों में 6-7 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 4-5 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए गंभीर होती है इस अवस्था पर पानी की कमी से फल गिरते हैं जिससे फलों के उत्पादन में कमी होती है विभिन्न खोजों में यह पाया गया है, कि प्रत्येक पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई से जड़ों में नमी ज्यादा होती है जिससे वे अधिक उपज देती हैं मिर्चों की तुड़ाई हरा रंग आने पर करें या फिर पकने के लिए पौधे पर ही रहने दें मिर्चों का पकने के बाद वाला रंग किस्म पर निर्भर करता है अधिक तुड़ाइयां लेने के लिए यूरिया 10 ग्राम प्रति लीटर और घुलनशील K @ 10 ग्राम प्रति लीटर पानी (1 प्रतिशत प्रत्येक का घोल) की स्प्रे 15 दिनों के फासले पर कटाई के समय करें पैकिंग के लिए मिर्चें पक्की और लाल रंग की होने पर तोड़ें सुखाने के लिए प्रयोग की जाने वाली मिर्चों की पूरी तरह पकने के बाद ही तुड़ाई करें
Posted by nand kishor
Uttar Pradesh
16-09-2019 06:45 PM
Punjab
09-16-2019 06:56 PM
sab bank loan dete hain aap pehle nazdik ke pashu palan adhikari or krishi vigyan kendar se sampark karein or training lein phir loan lein
Posted by sukhraj sandhu
Punjab
16-09-2019 06:44 PM
Punjab
09-17-2019 04:44 PM
ਤੁਸੀ ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਹੈ ਤਾ ਸਭ ਤੋਂ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਇਹ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੁਹਾਨੂੰ FFDA(fish farmer development aggency) ਜੋ ਕਿ ਲੱਗਭੱਗ ਹਰ ਜ਼ਿਲੇ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਾਂ ਉੱਥੇ ਜਾ ਕੇ ਐਪਲੀਕੇਸ਼ਨ ਫਾਰਮ ਭਰੋ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਤੁਹਾਨੂੰ 5 ਦਿਨ ਦੀ ਮੁਫਤ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇਗੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲਈ ਦਸਵੀ ਪਾਸ ਹੋਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਤੇ ਇਹ ਡਿਪਾਰਮੈ੍ਟ ਜਿੱਥੇ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਅਫਸਰ ਬੈਠਦਾ ਹੈ ਜਿਵ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਹੈ ਤਾ ਸਭ ਤੋਂ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਇਹ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੁਹਾਨੂੰ FFDA(fish farmer development aggency) ਜੋ ਕਿ ਲੱਗਭੱਗ ਹਰ ਜ਼ਿਲੇ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਾਂ ਉੱਥੇ ਜਾ ਕੇ ਐਪਲੀਕੇਸ਼ਨ ਫਾਰਮ ਭਰੋ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਤੁਹਾਨੂੰ 5 ਦਿਨ ਦੀ ਮੁਫਤ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇਗੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲਈ ਦਸਵੀ ਪਾਸ ਹੋਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਤੇ ਇਹ ਡਿਪਾਰਮੈ੍ਟ ਜਿੱਥੇ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਅਫਸਰ ਬੈਠਦਾ ਹੈ ਜਿਵੇ ਕਚਿਹਰੀਆਂ , ਡੀ ਸੀ ਆਫਿਸ ਕਹਿੰ ਦਿੰਦੇ ਹਾਂ ਉਸ ਵਿੱਚ ਬਣਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਲਈ ਸੇਮ ਵਾਲੇ ਇਲਾਕੇ ਵਿੱਚ 90% ਸਬਸਿਡੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੇ ਬਾਕੀ ਇਲਾਕਿਆ ਵਿੱਚ 40 % ਸਬਸਿਡੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਜ਼ਿਲੇ ਦੇ FFDA ( fish farming development agency ) ਦਫਤਰ ਵਿੱਚ ਜਾਓ ਜੋ ਕਿ ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਡੀਸੀ ਦਫਤਰ ਜਾਂ ਕਚਿਹਰੀਆਂ ਵਿੱਚ ਬਣਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਉੱਥੇ ਆਪਣੇ ਜਮੀਂਨ ਦੀ ਫਰਦ , 10th ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਤੇ ਜਿੱਥੇ ਤਲਾਬ ਬਣਾਉਣਾ ਹੈ ਉੱਥੋ ਦੀਆਂ 2 ਫੋਟੋ ਲੈ ਕੇ ਜਾਓ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ FFDA ਦੇ ਅਫਸਰ ਤੁਹਾਨੂੂੰ ਫਾਈਲ ਤਿਆਰ ਕਰਵਾਉਣਗੇ ਤੇ ਤੁਹਾਡੀ ਜਮੀਨ ਦੇਖ ਕੇ ਤਲਾਬ ਬਣਾਉਣ ਦਾ ਤਰੀਕਾ ਦੱਸਣਗੇ ਤੇ ਫਿਰ ਤੁਹਾਨੂੰ 40% ਸਬਸਿਡੀ ਲਈ ਫਾਈ਼ਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਬਾਰੇ ਸਮਝਾ ਦੇਣਗੇ..
Posted by sanjay janghel
Chattisgarh
16-09-2019 06:42 PM
Punjab
12-09-2019 05:53 PM
श्रीमान जी, इसकी रोकथाम के लिए आप इसमें NPK 130045 @ 1 kg को 150 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by umesh kumar
Delhi
16-09-2019 06:38 PM
Punjab
12-10-2019 03:35 PM
श्रीमान जी, इसके लिए तापमान 15*C से 27*C का होना चाहिए और 10 *C से नीचे तापमान इसको नुक्सानदायक होता है, इससे अच्छी गुणवत्ता वाली मिटटी में उगाया जा सकता है, धन्यवाद
Posted by anil
West Bengal
16-09-2019 06:36 PM
Punjab
12-10-2019 03:48 PM
Anil ji, Amrud ki aap wedge grafting kar sakte hain, wegde grating ke liye ap 6 se 8 month ki rootstock lein, isme ap jameen se 15 se 20 cm upar 4 cm ka ik V akar cut lagaye esa hi ik cut dusre podhe mein lagaye jiske sath ap grafting karna chahte hain, in dono podho ki chodai ik jiasi honi chahiye , in dono ko cut lagane ke baad mila dein or ik polyethyline strip ke sath jorh dein, dhanywad
Posted by ravi
Madhya Pradesh
16-09-2019 06:27 PM
Maharashtra
09-17-2019 12:57 PM
पान की अच्छी खेती के लिये जमीन की गहरी जुताई कर भूमि को खुला छोड देते हैं उसके बाद उसकी दो उथली जुताई करते हैं, फिर बरेजा का निर्माण किया जाता है यह प्रक्रिया 15-20 फरवरी तक पूर्ण कर ली जाती है तैयार बरेजों में फरवरी के अन्तिम सप्ताह से लेकर 20 मार्च तक पान बेलों की रोपाई पंक्ति विधि से दोहरे पान बेल के रूप में की ज.... (Read More)
पान की अच्छी खेती के लिये जमीन की गहरी जुताई कर भूमि को खुला छोड देते हैं उसके बाद उसकी दो उथली जुताई करते हैं, फिर बरेजा का निर्माण किया जाता है यह प्रक्रिया 15-20 फरवरी तक पूर्ण कर ली जाती है तैयार बरेजों में फरवरी के अन्तिम सप्ताह से लेकर 20 मार्च तक पान बेलों की रोपाई पंक्ति विधि से दोहरे पान बेल के रूप में की जाती है उल्लेखनीय है कि पान बेल के प्रत्येक नोड़ पर जडें होती है, जो उपयुक्त समय पाकर मृदा में अपना संचार करती है व बेलों में प्रबर्द्वन प्रारम्भ हो जाता है बीज के रोपण के रूप में पान बेल से मध्य भाग की कलमें ली जाती है, जो रोपण के लिये आदर्श कलम होती है पान की बेल में अंकुरण व प्रबर्द्वन अच्छा हो इसके लिये पान के कलमों को घास से अच्छी प्रकार मल्चिंग करते हुये ढकते हैं व तीन समय पानी का छिडकाव करते हैं चूंकि मार्च से तापमान काफी तीव्र गति से बढता है अतः पौधों के संरक्षण हेतु पानी देकर नमी बनायी जाती है, जिससे कि बरेजों में आर्द्रता बनी रहे पान बेल के अच्छे प्रवर्द्वन हेतु बेलों के साथ-साथ सन की खेती भी करते हैं, जो पान बेलों को आवश्यकतानुसार छाया व सुरक्षा प्रदान करता है उल्लेखनीय है कि पान के बेलों को यदि संरक्षित नही किया जाता है, तो बेलों में ताप का शीघ्र असर होता है व बेले में सिकुडन आती है व पत्तियां किनारे से झुलस जाती है, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है अतः पान की अच्छी खेती के लिये सावधानी और अच्छी देखभाल की अत्यन्त आवश्यकता होती है अच्छी खेती के लिये आवश्यक है कि पान के कलम का उपचार फफूदनाशक से करने के साथ उन्हें वृद्धि नियमक से भी उपचारित करें, जिससे कि जड़ों का उचित विकास हो सके जैसे-एन0ए0ए0,आई0बी0ए0 आदि अच्छी खेती के लिये पंक्ति से पंक्ति की उचित दूरी रखना आवश्यक है इसके लिये आवश्यकतानुसार पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30×30 सेमी0 या 45×45 सेमी0 रखी जाती है पान की फसल को प्रभावित करने वाले जीवाणु व फंफूद को नष्ट करने के लिये पान कलम को रोपण के पूर्व भूमि शोधन करना आवश्यक है इसके लिये बोर्डो मिश्रण के 1 प्रतिशत सांद्रण घोल का छिड़काव करते हैं कलमों का उपचार पान के कलमों को रोपाई के समय के साथ-साथ प्रबर्द्वन के समय भी उपचार की आवश्यकता होती है इसके लिये बुवाई के पूर्व भी मृदा उपचारित करने हेतु 50 प्रतिशत बोर्डा मिश्रण के साथ 500 पी0पी0एम0 स्ट्रेप्टोसाईक्लिन का प्रयोग करते हैं उसके बाद बुवाई के पूर्व भी उक्त मिश्रण का प्रयोग बेलों को फफूंद व जीवाणुओं से बचाने के लिये किया जाता है पान की खेती के लिये यह एक महत्तवपूर्ण कार्य है पान की कलमें जब 6 सप्ताह की हो जाती है तब उन्हें बांस की फन्टी,सनई या जूट की डंडी का प्रयोग कर बेलों को ऊपर चढाते हैं 7-8 सप्ताह के उपरान्त बेलों से कलम के पत्तों को अलग किया जाता है, जिसे ”पेडी का पान“ कहते है बाजार में इसकी विशेष मांग होती है तथा इसकी कीमत भी सामान्य पान पत्तों से अधिक होती है इस प्रकार 10-12 सप्ताह बाद जब पान बेलें 1.5-2 फीट की होती है, तो पान के पत्तों की तुडाई प्रारम्भ कर दी जाती है जब बेजें 2.5-3 मी0 या 8-10 फीट की हो जाती है, तो बेलों में पुनः उत्पादन क्षमता विकसित करने हेतु उन्हें पुनर्जीवित किया जाता है इसके लिये 8-10 माह पुरानी बेलों को ऊपर से 0.5-7.5 सेमी0 छोडकर 15-20 सेमी0 व्यास के छल्लों के रूप में लपेट कर सहारे के जड के पास रख देते हैं व मिटटी से आंशिक रूप से दबा देते है व हल्की सिंचाई कर देते हैं उल्लेखनीय है कि बेलों को लिटाने से उनकी बढबार सीमित हो जाती है और पान तोडने का कार्य सरल हो जाता है साथ ही कुंडलित बेलों से अधिक मात्रा में किल्ले फूटते हैं व जडें निकलती है, जिससे नई बेलों को अधिक भोजन मिलता है व उत्पादन अच्छा मिलता है उत्तर भारत में प्रति दिन तीरन से चार बार (गर्मियों में) जाडों में दो से तीनबार सिंचाई की आवश्यकता होती है जल निकास की उत्त व्यवस्था भी पान की खेती के लिये आवश्यक है अधिक नमी से पान की जडें सड जाती है, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है अतः पान की खेती के लिये ढालू नुमा स्थान सर्वोत्तम है पान की खेती काफी लागत की खेती होती है अतः अच्छे लाभ के लिये पान की खेती में अन्तः शस्य की फसलों का उत्पादन किया जाना आवश्यक है इसके लिये उत्तर भारत में पान की खेती के साथ-साथ परवल,कुन्दरू, तरोई, लौकी,खीरा, मिर्च, अदरक, पोय,रतालू,पीपर आदि की खेती सफलतापूर्वक की जाती है पान के बेलों को अच्छा पोषक तत्व प्राप्त हो इसके लिये प्रायः पान की खेती में उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है पान की खेती में प्रायः कार्बनिक तत्वों का प्रयोग करते हैं उत्तर भारत में सरसों ,तिल,नीम या अण्डी की खली का प्रयोग किया जाता है, जो जुलाई-अक्टूबर में 15दिन के अन्तराल पर दिया जाता है वर्षाकाल के दिनों में खली के साथ थोडी मात्रा में यूरिया का प्रयोग भी किया जाता है खली को चूर्ण करके मिटटी के पात्र में भिगो दिया जाता है तथा 10 दिन तक अपघटित होने दिया जाता है उसके बाद उसे घोल बनाकर बेल की जडों पर दिया जाता है इसे और पौष्टिक बनाने के लिये उस घोल में गेहूं चावल और चने के आटे का प्रयोग भी करते हैं पान की खेती में अच्छे उत्पादन के लिये समय-समय पर उसमें निराई-गुड़ाई की आवश्यकता होती है बरेजों से अनावश्यक खरपतवार को समय-समय पर निकालते रहना चाहिये इसी प्रकार सितम्बर, अक्टूबर में पारियों के बीच मिटटी की कुदाल से गुड़ाई करके 40-50 सेमी0 की दूरी पर मेड़ बनाते हैं व आवश्यकतानुसार मिट्टी चढ़ाते हैं
Posted by ਜਗਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
16-09-2019 06:25 PM
Punjab
09-16-2019 06:27 PM
ਜਗਜੀਤ ਜੀ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਇਕਠੀ ਸਪਰੇ ਨਾ ਕਰੋ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਅਲੱਗ ਅਲੱਗ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by radhamohan prajapat
Rajasthan
16-09-2019 06:24 PM
Punjab
10-08-2019 01:44 PM
इसे भारत की मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है गेहूं की खेती के लिए चिकनी दोमट या दोमट बनतर, अच्छे ढांचे और पानी सोखने की सामान्य क्षमता वाली मिट्टी उचित होती है छिद्रित और पानी कम सोखने वाली मिट्टी गेहूं की खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती सूखे हालातों, अच्छे जल निकास वाली भारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अ.... (Read More)
इसे भारत की मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है गेहूं की खेती के लिए चिकनी दोमट या दोमट बनतर, अच्छे ढांचे और पानी सोखने की सामान्य क्षमता वाली मिट्टी उचित होती है छिद्रित और पानी कम सोखने वाली मिट्टी गेहूं की खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती सूखे हालातों, अच्छे जल निकास वाली भारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल होती है भारी मिट्टी जिसका घटिया ढांचा और घटिया जल निकास हो इसकी खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती क्योंकि गेहूं की फसल जल जमाव के प्रति संवेदनशील होती है Raj 1482: इस किस्म का गहरे हरे रंग का पौधा, जिसका कद 80-90 सैं.मी. होता है इसकी अधिक फलियां, मोटे दाने, चमकदार और हल्के रंग के दाने होते हैं इसकी औसतन पैदावार 15-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म 126-134 दिनों में परिपक्व होती है इसका मुख्य रूप से ब्रैड बनाने के लिए उपयोग किया जाता है इसमें प्रोटीन की मात्रा 11-12 प्रतिशत होती है PBW 502: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में उगाने के अनुकूल है पौधे का कद 90-100 सैं.मी. होता है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह करनाल बंट के प्रतिरोधी है इसकी औसतन पैदावार 18-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है. PBW 550: पौधे का कद 83-91 सैं.मी. होता है यह किस्म 128-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने मोटे सुनहरे पीले रंग के होते हैं इसके 1000 दानों का भार लगभग 38 ग्राम होता है इसकी औसतन पैदावार 18-24 क्विंटल प्रति एकड़ होती है HD 2697: पौधे का कद 83-91 सैं.मी. होता है यह किस्म 128-133 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है भारी ज़मीनें इस किस्म की खेती के लिए अच्छी रहती हैं इसके दाने मोटे सुनहरे रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 18-24 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Raj 6560: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में उगाने के लिए अनुकूल है पौधे का कद 90-100 सैं.मी. होता है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार18-22 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Raj 3077: इस किस्म को वंडर गेहूं के नाम से जाना जाता है पौधे का कद 115-118 सैं.मी. होता है इसकी औसतन पैदावार 15-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म 126-134 दिनों में परिपक्व हो जाती है इसका प्रयोग मुख्य रूप से ब्रैड बनाने के लिए किया जाता है इसमें प्रोटीन की मात्रा 11-12.5 प्रतिशत होती है Raj 4079: यह किस्म 115-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके पौधे का कद 75-80 सैं.मी. होता है यह सामान्य और सिंचित हालातों में अच्छे परिणाम देती है यह गर्दन तोड़ के प्रतिरोधी किस्म है इसकी औसतन पैदावार 19-21 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसके दाने मोटे, मध्यम आकार के और सख्त होते हैं यह किस्म राजस्थान के गर्म जलवायु को सहने योग्य किस्म है और अच्छी उपज देती है Raj 4037: इसके पौधे का कद 83-95 सैं.मी. होता है इसकी औसतन पैदावार 15-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म 120 दिनों में परिपक्व हो जाती है यह मुख्य रूप से ब्रैड बनाने के लिए उपयोग किया जाता है इसमें प्रोटीन की मात्रा 11-12 प्रतिशत होती है यह किस्म काली जंग और तने पर जंग के प्रतिरोधी है Raj 4120: यह किस्म 110-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके पौधे का कद 80-94 सैं.मी. होता है यह किस्म सामान्य और सिंचित हालातों में अच्छे परिणाम देती है इसका तना मजबूत होता है और गर्दन तोड़ के प्रतिरोधी होता है इसकी औसतन पैदावार 20-24 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म राजस्थान के गर्म जलवायु को सहने योग्य किस्म है और अच्छी उपज देती है DBW 17: इसके पौधे का कद 80-85 सैं.मी. होता है यह किस्म 130-132 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह करनाल बंट के प्रतिरोधी किस्म है इसका तना मजबूत होता है जो कि यह दर्शाता है कि यह गर्दन तोड़ के प्रतिरोधी है इसके दाने मोटे, मध्यम आकार के और सख्त होते हैं यह किस्म सामान्य और सिंचित हालातों में अच्छे परिणाम देती है इसकी औसतन पैदावार 16-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Raj 4238: यह किस्म 115-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके पौधे का कद 82-86 सैं.मी. होती है इसका तना मजबूत होता है जो कि फसल को गर्दन तोड़ से बचाता है यह करनाल बंट के प्रतिरोधी किस्म है इसके दाने मध्यम आकार के होते हैं और औसतन पैदावार 16-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है WH 1080: यह किस्म 127-133 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके पौधे का कद 85-101 सैं.मी. होती है सिंचित हालातों में यह 16-18 क्विंटल प्रति एकड़ उपज देती है इसके दाने सुनहरे, मध्यम मोटे और सख्त होते हैं PBW 175: यह किस्म 130-132 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके पौधे का कद 15-16 सैं.मी. होता है इसके दाने सुनहरे, मध्यम मोटे और सख्त होते हैं इसकी औसतन पैदावार 15-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है CCNNRVOI (Raj Molya Rodhak-1: यह सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है इसके पौधे का कद 84 सैं.मी. होता है इसके दाने सुनहरे, मध्यम सख्त और गोल आकार के होते हैं यह किस्म 120-125 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 15-18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म नेमाटोड से प्रभावित क्षेत्रों में प्रसिद्ध है पिछेती बिजाई की किस्में Raj 3765: यह किस्म दिसंबर से मध्य जनवरी के तीसरे सप्ताह में बोयी जा सकती है इसके पौधे का कद 85-95 सैं.मी. होता है यह किस्म 120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Raj 3777: यह किस्म 90-95 दिनों में परिपक्व हो जाती है यह किस्म मध्य नवरी में बोने के लिए अनुकूल है इसकी औसतन पैदावार 14-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है रेतली मिट्टी वाली किस्में इन किस्मों की वृद्धि के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है C 306: यह किस्म बंजर भूमि में उगाने के लिए प्रयोग की जाती है और इसे कम सिंचाई की आवश्यकता होती है इसका पौधे लंबे कद के होते हैं इसके मध्यम आकार के दाने और रंग में सुनहरे होते हैं इसकी औसतन उपज 14-16 प्रति एकड़ होती है P.B.W. 299: इसके पौधे का कद 95 सैं.मी. होता है यह किस्म 150-160 दिनों में परिपक्व हो जाती है और इस किस्म की अगेती बिजाई की जाती है इसकी औसतन पैदावार 16-18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इन किस्मों के साथ PBW 396 और WH 147 की भी खेती की जाती है क्षारीय मिट्टी की किस्में क्षारीय क्षेत्रों में Raj 3077, K.R.L 1-4 और WH 157 जैसी किस्मों का प्रयोग करें, ये अच्छी उपज देती हैं गेहूं की फसल को अच्छे अंकुरन के लिए अच्छी तरह से तैयार, पर ठोस बीज बैड की आवश्यकता होती है पिछली फसल की कटाई के बाद खेत की अच्छे तरीके से ट्रैक्टर की मदद से जोताई की जानी चाहिए खेत को आमतौर पर ट्रैक्टर के साथ तवियां जोड़कर जोता जाता है और उसके बाद दो या तीन बार हल या सुहागे से जोता जाता है बारानी क्षेत्रों में खेत इस तरह से तैयार करना चाहिए कि वह नमी को सोख सके खेत की एक बार आयरन के हल से गहरी जोताई या सामान्य हल से दो या तीन बार जोताई करें और सुहागा फेरें खेत की जोताई शाम के समय की जानी चाहिए और रोपाई की गई ज़मीन को पूरी रात खुला छोड़ देना चाहिए ताकि वह ओस की बूंदों से नमी सोख सके प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरना चाहिए आखिरी जोताई के समय यूरिया 35-40 किलो प्रति एकड़ में डालें इससे गेहूं की अंकुरन प्रतिशतता में वृद्धि होती है अज़ोटोबैक्टर 2.5 किलो + फास्फेटिक 2.5 किलो + ट्राइकोडरमा 2.5 किलो को 100 किलो-125 किलो रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर में मिलाकर आखिरी जोताई के समय खिलार दें गेंहूं की बिजाई सही समय पर करनी जरूरी है बारानी क्षेत्रों के लिए बिजाई नवंबर के पहले से तीसरे सप्ताह में पूरी कर लें, जबकि सिंचित क्षेत्रों में बिजाई अक्तूबर से 15 नवंबर तक पूरी कर लें सामान्य बिजाई के लिए कतारों में 20 सैं.मी. के फासले की सलाह दी जाती है यदि बिजाई देरी से करनी हो तो 18 सैं.मी. का फासला होना चाहिए 4-5 सैं.मी. की गहराई में बिजाई करनी चाहिए बीज ड्रिल बुरकाव विधि जीरो टिलेज़ ड्रिल रोटावेटरबिजाई के लिए 40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें यदि बिजाई देरी से की जाये तो नवंबर के आखिरी सप्ताह से दिसंबर के दूसरे सप्ताह तक बिजाई 50 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करके पूरी कर लें देरी से बिजाई के लिए कम समय की किस्मों का प्रयोग करें सामान्य स्थितियों में बिजाई नवंबर के पहले से तीसरे सप्ताह में पूरी कर लें, जब कि सिंचित हालातों में दिसंबर महीने में बिजाई पूरी कर लें बीज की मात्रा 50 किलोग्राम प्रति एकड़ में रखें बीजों को दीमक, फफूंद, झुलस रोग जैसे बीमारियों से बचाने के लिए बीजने से 24 घंटे पहले एक किलो बीजों का 4 मि.ली. क्लोरपाइरीफॉस या 1.5 - 1.87 ग्राम टेबुकोनाज़ोल 2 डी.एस या 2 ग्राम कार्बेनडाज़िम या थीरम मिलानी चाहिए रासायनिक उपचार के बाद बीजों को टी विराइड 1.15 प्रतिशत डब्लयु पी 4 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें IPM में टी विराइड 4 ग्राम + कार्बोक्सिन 75 डब्लयु पी 1.25 ग्राम या टैबुकोनाज़ोल 1.0 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार झूठी कांगियारी को रोकने के लिए किया जाता है उसके बाद दीमक से बचाव के लिए बिजाई से 15 दिनों के बाद मिट्टी का क्लोरोपाइरीफोस 1 लीटर को प्रति एकड़ में बुरकाव करके उपचार करें मिट्टी की जांच के आधार पर खादों का प्रयोग करें मिट्टी की जांच की मदद से हम खादों को मिट्टी की आवश्यकता के आधार पर दे सकते हैं गेहूं की समय पर बिजाई के लिए नाइट्रोजन 37-50 किलो (यूरिया 80-100 किलो), फासफोरस 8-15 किलो (एस एस पी 50-90 किलो) और पोटाश 12.5 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा, पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें पहली सिंचाई के बाद नाइट्रोजन की बाकी बची आधी मात्रा डाल दें उपज को बढ़ाने के लिए जिंक सलफेट 10 किलोग्राम प्रति एकड़ में डालें जिंक की कमी को जिंक सल्फेट 0.5 प्रतिशत की फोलियर स्प्रे करके पूरा किया जा सकता है 15 दिनों के अंतराल पर दो से तीन स्प्रे करें मजबूत तने और उपज के लिए, बिजाई के 30 दिनों के बाद 19:19:19 पानी में घुलनशील खाद 5 ग्राम + स्टिकर 0.5 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में डालकर स्प्रे करें मिट्टी की किस्म, पानी की उपलब्धता आदि के आधार पर सिंचाई की संख्या की आवश्यकता होती है नमी की अवस्था में जड़ गलन का हमला और बलियां बनने की अवस्था बहुत गंभीर होते हैं छोटे कद और अधिक उपज वाली किस्मों के लिए बिजाई से पहले सिंचाई करें भारी मिट्टी के लिए चार से छ: सिंचाइयों की आवश्यकता होती है जबकि हल्की मिट्टी के लिए 6-8 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पानी की सीमित संख्या में सिंचाई केवल गंभीर अवस्था में ही करें जब पानी केवल एक सिंचाई के लिए उपलब्ध हो तो जड़ गलन के हमले के समय सिंचाई करें जब दो सिंचाइयां उपलब्ध हो तो जड़ गलन के हमले और फूल बनने की अवस्था में सिंचाई करें जब तीन सिंचाइयां संभव हो तो पहली सिंचाई जड़ गलन के हमले के समय, दूसरी सिंचाई तना बनने के समय और तीसरी दूधिया अवस्था में करें तना गलने की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है यह पाया गया है कि यदि जड़ गलन के समय पहली सिंचाई में देरी की जाये तो 85-125 किलोग्राम प्रति एकड़ उपज कम हो जाती है पहली सिंचाई बिजाई के 20-25 दिनों के बाद करनी चाहिए यह अवस्था जड़ गलन और नमी तनाव का समय होता है जिसके कारण उपज में कमी होती है दूसरी सिंचाई बिजाई के 40-45 दिनों के बाद पौधा बाहर निकलने के समय करनी चाहिए तीसरी सिंचाई 70-75 दिनों के बाद तना बनने के समय करनी चाहिए चौथी सिंचाई 90-95 दिनों के बाद फूल बनने के समय करनी चाहिए पांचवी सिंचाई 110-115 दिनों के बाद दूधिया अवस्था में करनी चाहिए
Posted by Gurchet singh Chahal
Punjab
16-09-2019 06:21 PM
Punjab
09-16-2019 06:59 PM
bhaa G isnu rajwa hara chaara te 2kg feed rojana dyo sunh to baad 1kg kanak da dalia 500g gur ch rinh ke swer shaam khuao saron da tel 100 gm pauna te paa lao Changa hou dalia letti sunh baad pao
Posted by Babli singh
Punjab
16-09-2019 06:17 PM
Punjab
09-16-2019 06:21 PM
chess di matra ik acre vich 120 gram di prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by chandransh Pandey
Madhya Pradesh
16-09-2019 06:07 PM
Punjab
12-10-2019 03:52 PM
Shrimaan ji, is photo ko dekh kar aunmaan lagaya ja sakta hai ke yeh jal kumbhi ka phool hai, yeh jayada tar khade pani mein paya jata hai, dhanywad
Posted by धरम वीर
Rajasthan
16-09-2019 06:04 PM
Maharashtra
09-16-2019 06:06 PM
प्रभावित फल हर सप्ताह तोड़ कर नष्ट कर दें नर्सरी लगाने से 1 महीने बाद ट्राइज़ोफॉस 20 मि.ली. प्रति 10 लीटर पानी और 50 ग्राम नीम एक्सट्रैक्ट 50 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे करें 10-15 दिनों के फासले पर यह स्प्रे दोबारा करें फूल निकलने के समय कोराजैन 18.5 प्रतिशत एस सी 5 मि.ली. + टीपॉल 5 मि.ली. का घोल 12 लीटर पानी में मिलाकर 20 दिनों के.... (Read More)
प्रभावित फल हर सप्ताह तोड़ कर नष्ट कर दें नर्सरी लगाने से 1 महीने बाद ट्राइज़ोफॉस 20 मि.ली. प्रति 10 लीटर पानी और 50 ग्राम नीम एक्सट्रैक्ट 50 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे करें 10-15 दिनों के फासले पर यह स्प्रे दोबारा करें फूल निकलने के समय कोराजैन 18.5 प्रतिशत एस सी 5 मि.ली. + टीपॉल 5 मि.ली. का घोल 12 लीटर पानी में मिलाकर 20 दिनों के फासले पर दो बार स्प्रे करें शुरूआती हमले में 5 प्रतिशत नीम एक्सट्रैक्ट 50 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे करें ज्यादा हमला दिखने पर 25 प्रतिशत साइपरमैथरिन 2.4 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें कीटों की गिनती अधिक हो जाने पर स्पाइनोसैड 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें फल पकने के बाद ट्राइज़ोफॉस या किसी और कीटनाशक की स्प्रे ना करें
Posted by Harvinder singh
Uttar Pradesh
16-09-2019 06:03 PM
Punjab
09-16-2019 06:06 PM
Harvinder singh ji aap iske uper tilt@200ml ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by लाल बहादुर शाक्य
Uttar Pradesh
16-09-2019 05:52 PM
Punjab
12-10-2019 03:54 PM
श्रीमान जी, लहसुन का बीज लेने के लिए आप Shine Brand Seeds 8770896002 से सम्पर्क करें, धन्यवाद
Posted by msgill
Uttarakhand
16-09-2019 05:51 PM
Punjab
09-17-2019 09:54 PM
यदि उसका बुखार 101 से कम है तो उसे आप MIfex 450ml बोतल लगवायें और उस बोतल में Avil injection 10ml, Tonophos injection 20ml मिक्स करके IV slow लगवायें बाकि उसे Xnil injection 1gm, Megludyne injection 20ml, Isoflud injection 5ml लगवायें यदि बुखार 101 से ज्यादा है तो आप सिर्फ Xnil injection 1gm, Megludyne injection 20ml, Isoflud injection 5ml लगवायें इससे फर्क पड़ जाएगा
Posted by Tarlochan singh
Punjab
16-09-2019 05:48 PM
Punjab
09-16-2019 05:49 PM
ਤਰਲੋਚਨ ਜੀ PAU ਲੁਧਿਆਣਾ ਮੇਲਾ 21 22 ਤਾਰੀਕ ਨੂੰ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ ਜੀ
Posted by लाल बहादुर शाक्य
Uttar Pradesh
16-09-2019 05:46 PM
Punjab
12-10-2019 04:00 PM
श्रीमान जी, आप लहसुन की किस्मे जैसे कि Yamuna Safed (G-1), Yamuna Safed 2(G-50), Yamuna Safed 3 (G 282), G 40, Agrifound White (G-41), Agrifound Parvati (G 313), Yamuna Safed 4 (G 323), Godavari (Selection 2), Sweta (Selection 10), T 56-4 की बिजाई करें, इसका बीज लेने के लिए आप Shine Brand Seeds 8770896002 से सम्पर्क करें, धन्यवाद