
Posted by Ravendra Dhar
Madhya Pradesh
18-09-2019 08:13 PM
तुलसी - (ऑसीमम सैक्टम) एक शाकीय तथा औषधीय पौधा है इनमें ऑसीमम सैक्टम को प्रधान या पवित्र तुलसी माना गया जाता है, इसकी भी दो प्रधान प्रजातियाँ हैं- श्री तुलसी जिसकी पत्तियाँ हरी होती हैं तथा कृष्णा तुलसी जिसकी पत्तियाँ निलाभ-कुछ बैंगनी रंग लिए होती हैं इसके अतिरिक्त ऐलोपैथी, होमियोपैथी और यूनानी दवाओं में भ.... (Read More)
तुलसी - (ऑसीमम सैक्टम) एक शाकीय तथा औषधीय पौधा है इनमें ऑसीमम सैक्टम को प्रधान या पवित्र तुलसी माना गया जाता है, इसकी भी दो प्रधान प्रजातियाँ हैं- श्री तुलसी जिसकी पत्तियाँ हरी होती हैं तथा कृष्णा तुलसी जिसकी पत्तियाँ निलाभ-कुछ बैंगनी रंग लिए होती हैं इसके अतिरिक्त ऐलोपैथी, होमियोपैथी और यूनानी दवाओं में भी तुलसी का किसी न किसी रूप में प्रयोग किया जाता है तुलसी ऐसी औषधि है जो ज्यादातर बीमारियों में काम आती है इसका उपयोग सर्दी-जुकाम, खॉसी, दंत रोग और श्वास सम्बंधी रोग के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है तुलसी की पत्तियों में एक चमकीला पीला वाष्पशील तेल पाया जाता है जो कीड़े और बैक्टीरिया के खिलाफ उपयोगी होता है काली तुलसी की खेती (Black Tulsi farming in hindi) हेतु यह सूरज की रोशनी में बहुत अधिक पनपता है तुलसी स्वाभाविक रूप से समुद्र तल से 2000 मीटर की ऊचाँई तक पाई जाती है यह प्रारंभिक स्थिति में अच्छी तरह नहीं बढ़ती है और इसे धूप की आवश्यकता होती है इसे अच्छी तरह से सूखी मिट्टी की आवश्यकता होती है पौधे को विशेष रूप से घर के अंदर गर्म मिट्टी में रखने पर तेजी से बढ़ता है यह पौधा नम मिट्टी में स्वाभाविक रूप से बढ़ता है इसकी बुबाई वर्षा आधारित क्षेत्रों में बारिश के मौसम में और सिंचित क्षेत्रों अक्टूबर – नवंबर माह में की जाती है सिंचित क्षेत्रों में 6 से 10 से.मी. लंबे अंकुरित पौधो को जुलाई या अक्टूबर – नवंबर माह में खेतों में लगाया जाता है अंकुरित पौधो को कतार में 40 से.मी. की दूरी पर लगाया जाता है रोपण के तुंरत बाद खेत की सिंचाई की जाती है गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग किया जाता है बीज नर्सरी में बोये जाते है एक हेक्टेयर भूमि के लिए लगभग 20-30 कि.ग्रा. बीजों की आवश्यकता होती है बुवाई के बाद FYM और मिट्टी के मिश्रण की पतली परत को बीजों के ऊपर फैलाया जाता है स्पिंक्लर द्दारा सिंचाई की जाती है बीज अंकुरण के लिए 8-12 दिन का समय लेते है और लगभग 6 सप्ताह के बाद पौधे रोपण के लिए तैयार हो जाते है काली तुलसी हेतु रोपण के बाद विशेष रूप से मानसून के अंत के बाद खेत की सिंचाई की जाती है दूसरी सिंचाई के बाद पौधे अच्छी तरह जम जाते है अंतराल को भरने और कमजोर पौधो को अलग करने का यह सही समय होता है ताकि खेत में एक समान पौधे रहें गार्मियो में 3-4 बार सिंचाई की आवश्यकता होती है जबकि शेष अवधि के दौरान आवश्यकता के अनुसार सिंचाई की जाती है लगभग 20-25 बार सिंचाई देना पर्याप्त होता है
Posted by Sharry Ahluwalia
Punjab
18-09-2019 08:10 PM
sharry ji jekar eh kalm nal tyar kita gya hoye ta eh 4-5 saal tak fal dinda hai ate jekar beej nal tyar kita janda hai ta 7-8 saal tak fal dinda hai.dhanwad

Posted by Ajeet vishvakarma
Uttar Pradesh
18-09-2019 08:08 PM
आम की खेती कईं तरह की मिट्टी में की जा सकती है इसकी खेती के लिए घनी ज़मीन, जो 4 फुट की गहराई तक सख्त ना हो, की जरूरत होती है मिट्टी की पी एच 8.5 प्रतिशत से कम होनी चाहिए Dusheri: यह बहुत ज्यादा क्षेत्रों में उगाया जाता है इसके फल जुलाई के पहले सप्ताह में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं इस किस्म के फलों का आकार छोटे से दरमिया.... (Read More)
आम की खेती कईं तरह की मिट्टी में की जा सकती है इसकी खेती के लिए घनी ज़मीन, जो 4 फुट की गहराई तक सख्त ना हो, की जरूरत होती है मिट्टी की पी एच 8.5 प्रतिशत से कम होनी चाहिए Dusheri: यह बहुत ज्यादा क्षेत्रों में उगाया जाता है इसके फल जुलाई के पहले सप्ताह में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं इस किस्म के फलों का आकार छोटे से दरमियाना, रंग पीला, चिकना और गुठली छोटी होती है यह फल ज्यादा देर तक स्टोर किए जा सकते हैं ये फल सदाबहार लगते रहते हैं इसकी औसतन पैदावार 150 क्विंटल प्रति वृक्ष होती है Langra: इस किस्म के फलों का आकार दरमियाने से बड़ा, रंग निंबू जैसा पीला और चिकना होता है यह फल रेशे रहित और स्वाद में बढ़िया होते हैं इसके फल का छिल्का दरमियाना मोटा होता है इसके फल जुलाई के दूसरे सप्ताह में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं इसकी औसतन पैदावार 100 किलो प्रति वृक्ष होती है Chausa: यह पिछेते मौसम की किस्म है इसके फल बड़े और अंडाकार आकार के और हल्के पीले रंग के होते हैं Ambika: इसके फल मध्यम आकार के, नर्म और मजबूत छिल्का होता है इसके फल गहरे पीले रंग के होते हैं और गहरी लाल रंग की लालिमा देते हैं यह देरी से पकने वाली किस्म है और लगातार फल देती है Arunika: यह किस्म Amrapali और Vanraj किस्म से तैयार की गई है इस किस्म के फल आकर्षित हल्के लाल रंग के होते हैं पौधे अगस्त से सितंबर और फरवरी मार्च के महीने में बोये जाते हैं पौधे हमेशा शाम को ठंडे समय में बोयें फसल को तेज हवा से बचाएं कलमी किस्मों के लिए 10 मीटर x 10 मीटर फासले का प्रयोग करें और मध्यम घनता की रोपाई के लिए 5 x 5 मीटर फासले का प्रयोग करें रोपाई के लिए वर्गाकार प्रणाली का प्रयोग करें बिजाई से एक महीना पहले 1x1x1 मीटर के आकार के गड्ढे 10x10 मीटर के फासले पर खोदें गड्ढों को सूर्य की रोशनी में खुला छोड़ दें फिर इन्हें मिट्टी में 30-40 किलो रूड़ी की खाद और 1 किलो सिंगल सुपर फासफेट मिलाकर भर दें बिजाई वर्गाकार और 6 भुजाओं वाले तरीके से की जा सकती है 6 भुजाओं वाले तरीके से बिजाई करने से 15 प्रतिशत वृक्ष ज्यादा लगाए जा सकते हैं
Posted by Vijay
Uttar Pradesh
18-09-2019 08:08 PM

Posted by sharwan kumar
Rajasthan
18-09-2019 08:07 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप अंगूरों के बारे में क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by ashok nagar
Madhya Pradesh
18-09-2019 08:07 PM
श्रीमान जी, प्याज की फसल दिसंबर जनवरी में की जाती है और यह रोपाई के 120 से 130 दिन बाद तैयार हो जाती है , धन्यवाद

Posted by abdul gaffar
Punjab
18-09-2019 08:05 PM
abdul ji ludhiana mela 21-22 september 2019 ko hai.dhanywad
Posted by Vijay
Uttar Pradesh
18-09-2019 08:04 PM
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति वर्.... (Read More)
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति वर्ग फीट जगह) में मिलायें इसके बाद वेस्ट जैसे कि बची कुची सब्जियां, फल, कच्चा गोबर, गोबर की सलरी की 8—10 इंच मोटी परत डालें दूसरी परत के बाद इसके ऊपर सूखे पत्ते या पराली से ढक दें हर परत के बाद पानी छिड़कें ताकि नमी बनी रहे वर्मीकंपोस्ट के बैड को 3—4 इंच मोटी गोबर की परत से ढक दें और इसके ऊपर बोरा या तिरपाल रखें ताकि नमी बनी रहे रसोई, फसलों या डेयरी के बचे कुचे की परत को रैक से पलटते रहें और आवश्यकतानुसार थोड़ा थोड़ा करके और वेस्ट भी डाल सकते हैं इसके ऊपर कच्चा गोबर भी डाल सकते हैं पर ध्यान रखें कि यह परत पहले जितनी ही मोटी रहें वर्मी कंपोस्ट की खाद मौसम के हिसाब से 45—60 दिनों में तैयार हो जाती है सबसे ऊपर वाली परत को हटाकर गंडोए छलनी से अलग कर लें और निचली छोड़ दें इसके ऊपर दोबारा रसोई या एग्रो वेस्ट की 6 इंच मोटी परत बिछाकर दोबारा खाद तैयार की जा सकती हैं 45 दिनों के बाद पानी छिड़कना बंद करने से भी गंडोए निचली परत में चले जाते हैं और छलनी से अलग करने में समय कम लगता है तैयार वर्मी कंपोस्ट काले भूरे रंग की गंध रहित और चाय पत्ती जैसी होती है इसे छांव में हवा में सुखकर आवश्यकतानुसार थैले या बोरियों में डालकर रखा जा सकता है एक टन वर्मी कंपोस्ट में 1.0—1.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 5—10 किलोग्राम पोटाश और 3.5—5.0 किलो फासफोरस होता है इसके अलावा इसमें कई तरह के एन्ज़ाइम और सूक्ष्म तत्व कॉपर, आयरन, जिंक, सल्फर, कैलशियम और मैगनीशियम आदि होते हैं
Posted by vinod chouhan harwar
Madhya Pradesh
18-09-2019 08:03 PM
आप गाय को रोजाना 35—40 किलो हरा चारा डालें और अच्छी कंपनी की फीड डालें बाकि आप उसके रहने का पूरा ध्यान रखें और गाय को anabolite liqiud 100 ml रोज़ाना दे और साथ में glactogouge powder 1-1 पाउच सुबह और शाम को दे और साथ में calcimust gold liqiud 50 ml रोज़ाना दे..

Posted by bholu
Uttar Pradesh
18-09-2019 08:03 PM
राजकुमार जी आप आलू की किस्मे जैसे Kufri Bahar: इस किस्म के पौधे लंबे और तने मोटे होते हैं तनों की संख्या 4-5 प्रति पौधा होती है इसके आलू बड़े, सफेद रंग के, गोलाकार से अंडाकार होते हैं और इसका गुद्दा सफेद रंग का होता है यह किस्म 100-110 दिनों में पक जाती है और इसकी औसतन पैदावार 125 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसे ज्यादा देर तक स्टो.... (Read More)
राजकुमार जी आप आलू की किस्मे जैसे Kufri Bahar: इस किस्म के पौधे लंबे और तने मोटे होते हैं तनों की संख्या 4-5 प्रति पौधा होती है इसके आलू बड़े, सफेद रंग के, गोलाकार से अंडाकार होते हैं और इसका गुद्दा सफेद रंग का होता है यह किस्म 100-110 दिनों में पक जाती है और इसकी औसतन पैदावार 125 क्विंटल प्रति एकड़ होती है इसे ज्यादा देर तक स्टोर करके रखा जा सकता है यह पिछेती और अगेती झुलस रोग और पत्ता मरोड़ रोग की रोधक है Kufri Badshah: इसके पौधे लंबे और 4-5 तने प्रति पौधा होते हैं इसके आलू बड़े से दरमियाने, गोलाकार और हल्के सफेद रंग के होते हैं इसके आलू स्वाद होते हैं यह किस्म 100-110 दिनों में पक जाती है यह किस्म कोहरे को सहनेयोग्य है और पिछेती, अगेती झुलस रोग की प्रतिरोधक है Kufri Sutlaj: इस किस्म के पौधे घने और मोटे तने वाले होते हैं पत्ते हल्के हरे रंग के होते हैं आलू बड़े आकार के, गोलाकार और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह किस्म 90-100 दिनों में पकती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म खाने के लिए अच्छी और स्वादिष्ट होती है इन आलुओं को पकाना आसान होता है यह नए उत्पाद बनाने के लिए उचित किस्म नहीं है Kufri Anand: यह मध्यम समय की किस्म है, जो कि पिछेते झुलस रोग और कोहरे के प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 140-160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kufri Pukhraj: इसके पौधे लंबे और तने संख्या में कम और दरमियाने मोटे होते हैं आलू सफेद, बड़े, गोलाकार और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह किस्म 70-90 दिनों में पकती है इसकी औसतन पैदावार 130 क्विंटल प्रति एकड़ है यह अगेती झुलस रोग की रोधक किस्म है और नए उत्पाद बनाने के लिए उचित नहीं है,की बिजाई कर सकते है धन्यवाद

Posted by Krishna Rawte
Chattisgarh
18-09-2019 08:01 PM
krishna ji kripya aap apna swal vistar se pooche ke aap konsi crop requirement ke bare men jankari lena chahte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by arvindkumar
Uttar Pradesh
18-09-2019 07:56 PM
Arvind ji kripya aap apna swal vistar se pushen ki aap kya jankari lena chahthe hai tan jo apko sahi jankari di jaa skee.

Posted by Kamlesh Yadav
Madhya Pradesh
18-09-2019 07:55 PM
Yadav ji kripya aap apna swal vistar se pushen ki aap kya jankari lena chahthe hai tan jo apko sahi jankari di jaa skee.

Posted by Sanskar Kushwaha
Uttar Pradesh
18-09-2019 07:53 PM
sanskar ji aap dheemak ki roktham ke liye chlorpyriphos@1 litre ko 60 kilo mitti me mila kar prati acre chita de.dhanywad

Posted by bholu
Uttar Pradesh
18-09-2019 07:52 PM
Shrimaan ji, ap ik hactare mein vermicompost lagbhag 8-10 quintal ka paryog kar sakte hain, dhanywad
Posted by पुष्पराज पटेल
Chattisgarh
18-09-2019 07:51 PM
आप इसका बुखार नज़दीकी डॉक्टर से जांच करवायें यदि इसे बुखार है तो बुखार के हिसाब डॉक्टर से इलाज करवायें यदि बुखार नहीं है तो इसे पेट के कीड़ों के लिए Flukarid-DS दवा की गोली दें और Broton liquid 50-50ml सुबह शाम और Aptifast bolus 1—1 गोली सुबह शाम दें इससे फर्क पड़ जाएगा
Posted by पुष्पराज पटेल
Chattisgarh
18-09-2019 07:48 PM
धरीमाँ जी आप धना में सल्फर 80% @5 किलो प्रति एकड़ डालें
Posted by rajkumar mourya
Uttar Pradesh
18-09-2019 07:44 PM
Shrimaan ji, mirch mein jab phool ata hai, us samay par ap isme NPK 130045 @ 10 gm prati liter pani ke hisaab se spray karein, dhanywad

Posted by Prabhjot Randhawa
Punjab
18-09-2019 07:37 PM
khal 2 ,3 kg ,Dalia 2 kg. minralmix 50 GM totavit , hara chara 40 kg deo

Posted by Ajeet vishvakarma
Uttar Pradesh
18-09-2019 07:27 PM
इस फल को सभी फलों का राजा कहा जाता है और इसकी खेती भारत में पुराने समय से की जाती है आम की खेती कईं तरह की मिट्टी में की जा सकती है इसकी खेती के लिए घनी ज़मीन, जो 4 फुट की गहराई तक सख्त ना हो, की जरूरत होती है मिट्टी की पी एच 8.5 प्रतिशत से कम होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में:-Dusheri,Langra,Chausa,Ambika,Arunika,Mallika, Amrapali, Ratna, Arka Arjun, Arka Puneet, Arka Anmol, Sindhu, Manjeera.ज़मी.... (Read More)
इस फल को सभी फलों का राजा कहा जाता है और इसकी खेती भारत में पुराने समय से की जाती है आम की खेती कईं तरह की मिट्टी में की जा सकती है इसकी खेती के लिए घनी ज़मीन, जो 4 फुट की गहराई तक सख्त ना हो, की जरूरत होती है मिट्टी की पी एच 8.5 प्रतिशत से कम होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में:-Dusheri,Langra,Chausa,Ambika,Arunika,Mallika, Amrapali, Ratna, Arka Arjun, Arka Puneet, Arka Anmol, Sindhu, Manjeera.ज़मीन की अच्छी तरह जोताई करें और फिर समतल करें ज़मीन को इस तरह तैयार करें ताकि खेत में पानी ना खड़ा हो ज़मीन को समतल करने के बाद एक बार फिर गहरी जोताई करके ज़मीन को अलग अलग भागों में बांट दें फासला जगह के हिसाब से अलग-अलग होना चाहिए बिजाई का समय पौधे अगस्त से सितंबर और फरवरी मार्च के महीने में बोये जाते हैं पौधे हमेशा शाम को ठंडे समय में बोयें फसल को तेज हवा से बचाएं फासला कलमी किस्मों के लिए 10 मीटर x 10 मीटर फासले का प्रयोग करें और मध्यम घनता की रोपाई के लिए 5 x 5 मीटर फासले का प्रयोग करें रोपाई के लिए वर्गाकार प्रणाली का प्रयोग करें बीज की गहराई बिजाई से एक महीना पहले 1x1x1 मीटर के आकार के गड्ढे 10x10 मीटर के फासले पर खोदें गड्ढों को सूर्य की रोशनी में खुला छोड़ दें फिर इन्हें मिट्टी में 30-40 किलो रूड़ी की खाद और 1 किलो सिंगल सुपर फासफेट मिलाकर भर दें बिजाई का ढंग बिजाई वर्गाकार और 6 भुजाओं वाले तरीके से की जा सकती है 6 भुजाओं वाले तरीके से बिजाई करने से 15 प्रतिशत वृक्ष ज्यादा लगाए जा सकते हैं पौधे लगाने के बाद फूले हुए फलों को 4-5 वर्ष तक हटाते रहें, ताकि पौधे के भाग अच्छा विकास कर सकें फलों के बनने तक यह क्रिया जारी रखें इस क्रिया के समय अंतर फसलों को अधिक आमदन और नदीनों की रोकथाम के लिए अपनाया जा सकता है प्याज, टमाटर, फलियां, मूली , बंद गोभी, फूल गोभी और दालों में मूंग, मसूर, छोले आदि को अंतर फसलों के तौर पर प्रयोग किया जा सकता है आड़ू, आलू बुखारा और पपीता भी मिश्रित खेती के लिए अपनाये जा सकते हैं बीज की मात्रा 10 मीटरx 10 मीटर के फासले पर प्रति एकड़ में 40 पौधे लगाए जाते हैं जबकि मध्यम घनता की रोपाई में 160 पौधे प्रति एकड़ में लगाए जाते हैं फासफोरस को वर्ष में दो बार डालें दूसरे शब्दों में मॉनसून के शुरू होने पर जून जुलाई के महीने में डालें और उसके बाद सितंबर अक्तूबर महीने में डालें नाइट्रोजन और पोटाश को जून - जुलाई, सितंबर - अक्तूबर, जनवरी - फरवरी और मार्च - अप्रैल में बराबर भागों में बांटकर डालें कईं बार मौसम के बदलने पर फल गिरने लगते हैं यदि फलों को गिरना देखा जाए तो 13:00:45 10 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें मलचिंग का प्रयोग तापमान के प्रभाव को कम करता है अच्छे फूल और उपज के लिए 00:52:34 150 ग्राम को 15 लीटर पानी में मिलाकर फूल निकलने के शुरू में 8 दिनों के अंतराल पर दो बार स्प्रे करें यह फूल के गिरने को रोकेगा सिंचाई की मात्रा और फासला मिट्टी, जलवायु और सिंचाई के स्त्रोत पर निर्भर करते हैं नए पौधों को हल्की और बार-बार सिंचाई करें हल्की सिंचाई हमेशा दूसरी सिंचाई से अच्छी सिद्ध होती है गर्मियों में 5-6 दिनों के फासले पर सिंचाई करें और सर्दियों में धीरे-धीरे फासला बढ़ा कर 25-30 दिनों के फासले पर सिंचाई करें वर्षा वाले मौसम में सिंचाई वर्षा मुताबिक करें फल बनने के समय, पौधे के विकास के लिए 10-12 दिनों के फासले पर सिंचाई की जरूरत होती है फरवरी के महीने में खादें डालने के बाद हल्की सिंचाई करें नयी फसल के आस-पास गोडाई करें और जड़ों में मिट्टी लगाएं नदीनों की वृद्धि को रोकने के लिए काले रंग की प्लास्टिक की मलच का प्रयोग किया जाता है प्रौढ़ फसल के लिए 1 मीटर x 1 मीटर आकार की काली पॉलीथीन मलच की आवश्यकता होती है जबकि 8 वर्ष या उससे ज्यादा वर्षों के लिए 2.5 मीटर x2.5 मीटर आकार के मलच की आवश्यकता होती है फल का रंग बदलना फल पकने की निशानी है फल का गुच्छा पकने के लिए आमतौर पर 15-16 सप्ताह का समय लेता है सीढ़ी या बांस (जिस पर तीखा चाकू लगा हो) की मदद से पके हुए फल तोड़े और पके फलों को इक्ट्ठा करने के लिए एक जाल भी लगाएं पके फलों को आकार और रंग के आधार पर छांटे और बक्सों में पैक करें तुड़ाई के बाद पॉलीनैट पर फलों के ऊपरी भाग को नीचे की तरफ करके रखें

Posted by brajkishor kushwaha
Uttar Pradesh
18-09-2019 07:15 PM
yeh fungus hai iske liye aap carbendazim@3 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by roshan
Uttar Pradesh
18-09-2019 07:13 PM
श्रीमान जी, तोरिया फसल की लिए बिजाई सितंबर के पहले पखवाड़े से मध्य अक्तूबर तक कर लेनी चाहिए धन्यवाद

Posted by Shubham singh
Uttar Pradesh
18-09-2019 07:04 PM

Posted by inderjit
Punjab
18-09-2019 07:02 PM
tuci ohna nu kisi v company di feed de skde ho, tuci ohna nu vdia khurak deo, khurak de nal nal tuci egg formula product feed vich miila ke de skde ho ate tuci Ostovet calcium 30ml/100 birds de hisab nal de skde ho, iss nal ohna di jldi growth howegi.

Posted by gudda bhunu
Chattisgarh
18-09-2019 06:50 PM
poultry mai hun birds rakhte hai jaise aap egg production ke liye chicks ja meat production ke chicks rakhte hai, isme alag alag nasale hoti hai jinki growth, weight, production v alag alag hoti hai ..
Posted by Sewak Dalio
Punjab
18-09-2019 06:49 PM
sewak ji eh tane de gadue de karn hi hunda hai isde layi tuc cartap hydrochloride@170 gram nu prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by Teajaram
Rajasthan
18-09-2019 06:48 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Tiku Choudhary
Himachal Pradesh
18-09-2019 06:47 PM
आप उनकी अच्छी ग्रोथ के लिए समय समय पर पेट के कीड़ों के लिए दवा देते रहें और आप उन्हें घर में फीड तैयार करके दे सकते है फीड बनाने की सामग्री
1 किलो मिनरल मिक्सचर
2 किलो नमक
मीठा सोडा 1 किलो
मक्की 30 किलो
गेहूं 25 किलो
सोया 10 किलो
सरसों खल 10 किलो
चावल की 21 किलो
इन सब चीज़ों को मिक्स करके फीड तैयार कर लें यह फीड आप ब.... (Read More)
आप उनकी अच्छी ग्रोथ के लिए समय समय पर पेट के कीड़ों के लिए दवा देते रहें और आप उन्हें घर में फीड तैयार करके दे सकते है फीड बनाने की सामग्री
1 किलो मिनरल मिक्सचर
2 किलो नमक
मीठा सोडा 1 किलो
मक्की 30 किलो
गेहूं 25 किलो
सोया 10 किलो
सरसों खल 10 किलो
चावल की 21 किलो
इन सब चीज़ों को मिक्स करके फीड तैयार कर लें यह फीड आप बकरी के भार के हिसाब से डाल सकते हैं बकरी के भार की 5 प्रतिशत फीड डालनी चाहिए या फिर पहले ब्यांत में ब्याई बकरी को 300—400 ग्राम तक फीड डाल सकते हैं यदि छोटे बच्चे हैं या फिर फंडर बकरी उन्हें फीड कम डालनी चाहिए ..

Posted by Teajaram
Rajasthan
18-09-2019 06:46 PM
Shrimaan ji, kripya ap bataye ke apne isme kiski spray ki hai , taki apko uske hisaab se iska hal bataya ja sake, dhanywad
Posted by Gurmukh singh
Punjab
18-09-2019 06:28 PM
Sadi american cow suann vali aa ude levaa vasta us nu ki kurakkk payiaa 10 din reh gye sunnn vasta ?
tuci uss nu vitum-h injection 5ml-5ml 1-1 din de frak nal lgwao ate anabolite liquid 100ml rojana deo, iss nal frak paa jawega..
Posted by Harvinder singh
Punjab
18-09-2019 06:28 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, cenator ਇਕ fungicide ਹੈ, ਜੋ ਕੇ sheath blight ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਦਾ ਅਸਰ 40 ਤੋਂ 60 ਦਿਨ ਫ਼ਸਲ ਤੇ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ,ਇਹ 300 ml ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਧਨਵਾਦ
Posted by Harvinder singh
Punjab
18-09-2019 06:27 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, tilt ਵਿਚ propiconazole 25 % ਸਾਲ੍ਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by lakhbeer singh
Punjab
18-09-2019 06:26 PM
Retli jamee. mein 1105, 2851, 3086 kaamjaab hai...agar jameen darmiani hai toh 2967 , 343 bhi pak jayegi.

Posted by ਨਿਸ਼ਾਨ ਸਿੰਘ ਪੰਨੂ
Punjab
18-09-2019 06:24 PM
nishan amistar da result vadhia hai tuc isdi varto kar sakde ho.dhanwad

Posted by lalchand
Rajasthan
18-09-2019 06:16 PM
Shrimaan ji, guar ka rate is samay 3525 se 3650 rupay prati quintal ke hisaab se chal raha hai, dhanywad
Posted by ਅਮਨਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
18-09-2019 06:15 PM
amandeep ji tuc tele de layi glamore@50 gram nu prati acre de hisab nal spray karo. sundi di roktham de layi tuc cartap hydrochloride@170 gram nu prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by dayaram singh
Uttar Pradesh
18-09-2019 06:09 PM
Shrimaan ji, ap gehun ki kisme jaise WH 896, PBW 373, PBW 343,HD 2643, UP 2425, PBW 443, DBW 14, NW 2036, MACS 6145, HD 2824, PBW 524, PBW 502, PBW 291, 524, HD 2864, HI 8627, K9001, K-9162, k-8434, halna, naina, UP 2338 ki biaji kar sakte hain, dhanywad
Posted by Rohit
Uttar Pradesh
18-09-2019 06:06 PM
Rohit ji aap isme sundi ka hamla check karen. agar maujood ha to aap iske uper fame@20ml ya coragen@60ml ko prati acre ke hisab se spray karen.iske ilava aap iske uper folicur@200ml ja pulsor@200ml ja custodia@300ml ja nativo@80gm ja amistar top@200ml ja indofil di avtar@400gm ja hexaconazole@300ml ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by Bittu Singh
Punjab
18-09-2019 05:58 PM
bittu ji gobh di sundi di roktham de layi tuc fame@20ml ja coragen@60ml nu prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by Jasvir singh
Punjab
18-09-2019 05:55 PM
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