Experts Q&A Search

Posted by GURPREET SINGH SIDHU
Punjab
18-09-2019 10:45 PM
Maharashtra
09-19-2019 05:30 PM
ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਬਦਾਮ ਦੀ ਖੇਤੀ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by anil meena
Rajasthan
18-09-2019 10:42 PM
Rajasthan
09-19-2019 10:25 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by shailesh kumar
Madhya Pradesh
18-09-2019 10:41 PM
Punjab
09-20-2019 06:05 PM
Shailesh ji uttar pardesh sabse jyada milk utpadan krne wala state hai.
Posted by Ravi Kumar Verma
Uttar Pradesh
18-09-2019 10:40 PM
Maharashtra
09-18-2019 10:43 PM
मक्खन घास की बिजाई अक्तूबर-दिसंबर महीने में की जाती है यदि इसकी अकेली की बिजाई करनी हो तो 1.25—1.5 किलो और यदि किसी फसल के साथ बिजाई करनी हो तो 0.50—0.75 किलो बीज डालें मक्खन घास की बिजाई कतारों में 30 सैं.मी. के प्लॉट में की जाती है इसकी बिजाई छींटा देकर, मशीन से या हाथों से की जा सकती है अंकुरण के लिए बैडों पर नमी बनाए र.... (Read More)
मक्खन घास की बिजाई अक्तूबर-दिसंबर महीने में की जाती है यदि इसकी अकेली की बिजाई करनी हो तो 1.25—1.5 किलो और यदि किसी फसल के साथ बिजाई करनी हो तो 0.50—0.75 किलो बीज डालें मक्खन घास की बिजाई कतारों में 30 सैं.मी. के प्लॉट में की जाती है इसकी बिजाई छींटा देकर, मशीन से या हाथों से की जा सकती है अंकुरण के लिए बैडों पर नमी बनाए रखेंं साधारण हालातों में अंकुरण 10 से 14 दिन में शुरू हो जाता है और 18 दिनों में पूरा हो जाता है इसकी जड़ें 4 से 6 सप्ताह में विकसित हो जाती है ज़मीन की तैयारी के समय 15—20 टन रूड़ी की खाद डालें बाकि खादें बिजाई से पहले डालें नाइट्रोजन 30 किलो, फासफोरस 20 किलो प्रति एकड़, हर कटाई के बाद 30 किलो नाइट्रोजन डालें पहली सिंचाई बिजाई के तुरंत बाद करें, दूसरी सिंचाई बिजाई के 5 से 6 दिन बाद और फिर 10 दिन के अंतराल पर आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहें पहली सिंचाई के बाद हाथों से गोडाई करें और 20 किलो नाइट्रोजन डालें
Posted by Mustak ali
Rajasthan
18-09-2019 10:39 PM
Punjab
09-18-2019 10:41 PM
mustak ji kripya aap btaye ke aapne isme kya kya khaad daali hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Surjit Singh
Punjab
18-09-2019 10:39 PM
Punjab
09-20-2019 06:02 PM
tuci ohna nu Hitek injection 1ml/50kg sarir ke bhar ke hisab se chamdi mai lgwayen baki aap unke ass pass saff safai ka purra dian rkhen..
Posted by GURPREET SINGH SIDHU
Punjab
18-09-2019 10:38 PM
Punjab
09-18-2019 10:40 PM
ਜਦੋਂ ਰੁੱਖ 1-2 ਸਾਲ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਚੰਗੀ ਤਰਾਂ ਨਾਲ ਗਲੀ ਹੋਈ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 6-12 ਕਿਲੋ, ਯੂਰੀਆ 60-120 ਗ੍ਰਾਮ, ਐਸ ਐਸ ਪੀ 95-120 ਗ੍ਰਾਮ, ਅਤੇ ਮਿਊਰੇਟ ਆਫ ਪੋਟਾਸ਼ 60-120 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਰੁੱਖ ਪਾਓ ਜਦੋਂ ਰੁੱਖ 3-4 ਸਾਲ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਚੰਗੀ ਤਰਾਂ ਨਾਲ ਗਲੀ ਹੋਈ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 8-24 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ180-240 ਗ੍ਰਾਮ, ਐਸ ਐਸ ਪੀ 95-120 ਗ੍ਰਾਮ ਅਤੇ ਮਿਊਰੇਟ ਆਫ ਪੋਟਾਸ਼ 180-240 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਰੁੱਖ ਪਾਓ ਅਤੇ ਜਦੋਂ .... (Read More)
ਜਦੋਂ ਰੁੱਖ 1-2 ਸਾਲ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਚੰਗੀ ਤਰਾਂ ਨਾਲ ਗਲੀ ਹੋਈ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 6-12 ਕਿਲੋ, ਯੂਰੀਆ 60-120 ਗ੍ਰਾਮ, ਐਸ ਐਸ ਪੀ 95-120 ਗ੍ਰਾਮ, ਅਤੇ ਮਿਊਰੇਟ ਆਫ ਪੋਟਾਸ਼ 60-120 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਰੁੱਖ ਪਾਓ ਜਦੋਂ ਰੁੱਖ 3-4 ਸਾਲ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਚੰਗੀ ਤਰਾਂ ਨਾਲ ਗਲੀ ਹੋਈ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 8-24 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ180-240 ਗ੍ਰਾਮ, ਐਸ ਐਸ ਪੀ 95-120 ਗ੍ਰਾਮ ਅਤੇ ਮਿਊਰੇਟ ਆਫ ਪੋਟਾਸ਼ 180-240 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਰੁੱਖ ਪਾਓ ਅਤੇ ਜਦੋਂ ਰੁੱਖ 5 ਸਾਲ ਦਾ ਇਸਤੋਂ ਜਿਆਦਾ ਉਮਰ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਚੰਗੀ ਤਰਾਂ ਨਾਲ ਗਲੀ ਹੋਈ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 30-36 ਕਿਲੋ, ਯੂਰੀਆ 300-360 ਗ੍ਰਾਮ, ਐਸ ਐਸ ਪੀ 95-120 ਗ੍ਰਾਮ ਅਤੇ ਮਿਊਰੇਟ ਆਫ ਪੋਟਾਸ਼ 300-360 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਰੁੱਖ ਪਾਓ
Posted by mani bhushan Kumar
Bihar
18-09-2019 10:36 PM
Punjab
09-18-2019 10:44 PM
Posted by GURPREET SINGH SIDHU
Punjab
18-09-2019 10:31 PM
Punjab
09-18-2019 10:47 PM
ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਇਸਦੀ ਫੋਟੋ ਭੇਜੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Sarvan
Uttar Pradesh
18-09-2019 10:28 PM
Punjab
09-18-2019 10:52 PM
सिटरस का कोढ़ रोग: पौधों में तनों, पत्तों और फलों पर भूरे, पानी रंग जैसे धब्बे बन जाते हैं सिटरस कैंकर बैक्टीरिया पौधे के रक्षक सैल में से प्रवेश करता है इससे नए पत्ते ज्यादा प्रभावित होते हैं क्षेत्र में हवा के द्वारा ये बैक्टीरिया सेहतमंद पौधों को भी प्रभावित करता है दूषित उपकरणों के द्वारा भी यह बीमारी.... (Read More)
सिटरस का कोढ़ रोग: पौधों में तनों, पत्तों और फलों पर भूरे, पानी रंग जैसे धब्बे बन जाते हैं सिटरस कैंकर बैक्टीरिया पौधे के रक्षक सैल में से प्रवेश करता है इससे नए पत्ते ज्यादा प्रभावित होते हैं क्षेत्र में हवा के द्वारा ये बैक्टीरिया सेहतमंद पौधों को भी प्रभावित करता है दूषित उपकरणों के द्वारा भी यह बीमारी सवस्थ पौधों पर फैलती है यह बैक्टीरिया कई महीनों तक पुराने घावों पर रह सकता है यह घावों की उपस्थिति से पता लगाया जा सकता है इसे प्रभावित शाखाओं को काटकर रोका जा सकता है बॉर्डीऑक्स 1 % स्प्रे, एक्यूअस घोल 550 पी पी एम, स्ट्रैप्टोमाइसिन सल्फेट भी सिटरस कैंकर को रोकने के लिए उपयोगी है गुंदियां रोग: वृक्ष की छाल में गूंद निकलना इस बीमारी के लक्षण हैं प्रभावित पौधा हल्के पीले रंग में बदल जाता है तने और पत्ते की सतह पर गूंद की सख्त परत बन जाती है कई बार छाल गलने से नष्ट हो जाती है और वृक्ष मर जाता है पौधा फल के परिपक्व होने से पहले ही मर जाता है इस बीमारी को जड़ गलन भी कहा जाता है जड़ गलन की प्रतिरोधक किस्मों का प्रयोग करना, जल निकास का अच्छे से प्रबंध करने से इस बीमारी को रोका जा सकता है पौधे को नुकसान से बचाना चाहिए मिट्टी में 0.2 % मैटालैक्सिल MZ-72 + 0.5 % ट्राइकोडरमा विराइड डालें, इससे इस बीमारी को रोकने में मदद मिलती है वर्ष में एक बार ज़मीनी स्तर से 50-75 सैं.मी ऊंचाई पर बॉर्डीऑक्स को जरूर डालना चाहिए पत्तों के धब्बा रोग: पौधे के ऊपरी भागों पर सफेद रूई जैसे धब्बे देखे जाते हैं पत्ते हल्के पीले और मुड़ जाते हैं पत्तों पर विकृत लाइनें दिखाई देती हैं पत्तों की ऊपरी सतह ज्यादा प्रभावित होती है नए फल पकने से पहले ही गिर जाते हैं उपज कम हो जाती है पत्तों के ऊपरी धब्बे रोग को रोकने के लिए पौधे के प्रभावित भागों को निकाल दें और नष्ट कर दें कार्बेनडाज़िम की 20-22 दिनों के अंतराल पर तीन बार स्प्रे करने से इस बीमारी को रोका जा सकता है काले धब्बे: काले धब्बे एक फंगस वाली बीमारी है फलों पर काले धब्बों को देखा जा सकता है बसंत के शुरू में हरे पत्तों पर स्प्रे करने से काले धब्बों से पौधे को बचाया जा सकता है इसे 6 सप्ताह के बाद दोबारा दोहराना चाहिए
Posted by पंकज अहिरवार
Madhya Pradesh
18-09-2019 10:26 PM
Punjab
09-18-2019 10:28 PM
पंकज जी धान में माहू की रोकथाम के लिए glamore @50 ग्राम को प्रति एकर के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Parveen Kumar
Haryana
18-09-2019 10:25 PM
Punjab
09-20-2019 06:12 PM
यदि आपकी भैंस बार बार रिपीट होती है तो आप उसकी बच्चेदानी में Lixin-iu तीन दिन भरवायें और उसे Agrimin पाउडर 100 ग्राम रोजाना दें और Concimax bolus रोजाना एक गोली दें और 14 दिन तक देते रहें फिर अगली बार हीट में आने पर उसे टीका भरवायें इस तरह वो गाभिन हो जाएगी और जो भी अंदर इंफेक्शन होगा वो खत्म हो जाएगा, यदि आप कोई ओर जानकारी लेना चाहत.... (Read More)
यदि आपकी भैंस बार बार रिपीट होती है तो आप उसकी बच्चेदानी में Lixin-iu तीन दिन भरवायें और उसे Agrimin पाउडर 100 ग्राम रोजाना दें और Concimax bolus रोजाना एक गोली दें और 14 दिन तक देते रहें फिर अगली बार हीट में आने पर उसे टीका भरवायें इस तरह वो गाभिन हो जाएगी और जो भी अंदर इंफेक्शन होगा वो खत्म हो जाएगा, यदि आप कोई ओर जानकारी लेना चाहते है तो आप दोबारा सवाल पूछ सकते हैं
Posted by Navpreet Singh
Punjab
18-09-2019 10:24 PM
Punjab
09-19-2019 01:57 PM
sahiwal cow lenn lai tuci Sarb Cheema 7508023218 (Sarb Cheema dairy Farm) nal sampark kr skde ho.
Posted by GURPREET SINGH SIDHU
Punjab
18-09-2019 10:24 PM
Punjab
09-18-2019 10:27 PM
ਰੋਪਣ ਸਮੇਂ ਕੋਈ ਵੀ ਖਾਦ ਨਾ ਪਾਓ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਫਰਵਰੀ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ N:P:K(19:19:19) @1 ਕਿਲੋ ਦੋ ਵਾਰ ਪਾਓ
Posted by पंकज अहिरवार
Madhya Pradesh
18-09-2019 10:23 PM
Punjab
09-18-2019 10:25 PM
पंकज जी धान में माहू की रोकथाम के लिए आप glamore @50 ग्राम को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by ANIL kumar
Uttar Pradesh
18-09-2019 10:22 PM
Punjab
09-18-2019 11:01 PM
अनिल जी आप इसके ऊपर mancozeb @4 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by gulab
Punjab
18-09-2019 10:20 PM
Punjab
12-17-2019 05:02 PM
shrimaan ji, same same te kisana di mang de mutabik training chaldia hi rehdia han training len lai tusi apne jile de Krishi Vigyan Kendra (KVK) , Sangrur-Patran Road, VPO Kheri, Distt. Sangrur, Postal Code 148001, Phone No.:01672-245320, 9988111757 nal samparak kar ke apna training farm bhar ke auh fir jida hi training di date rakhi jave gi tuhanu call kar ke das dita jave ga, Thankyou.
Posted by GURPREET SINGH SIDHU
Punjab
18-09-2019 10:12 PM
Maharashtra
09-18-2019 10:16 PM
1-3 ਸਾਲ ਦੀ ਫਸਲ ਨੂੰ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 5-20 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਯੂਰੀਆ 100-300 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਰੁੱਖ ਪਾਓ 4-6 ਸਾਲ ਦੀ ਫਸਲ ਨੂੰ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 25-50 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਯੂਰੀਆ 100-300 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਰੁੱਖ ਪਾਓ 7-9 ਸਾਲ ਦੀ ਫਸਲ ਨੂੰ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 60-90 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਯੂਰੀਆ 600-800 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਰੁੱਖ ਪਾਓ ਜਦੋਂ ਫਸਲ 10 ਸਾਲ ਦੀ ਜਾਂ ਉਸ ਤੋਂ ਵੱਧ ਹੋ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 100 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਯੂਰੀਆ 800-1600 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਰੁੱਖ ਪਾਓ
Posted by ਕੁਲਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
18-09-2019 10:11 PM
Punjab
09-18-2019 11:09 PM
ਵਧੀਆ ਵਰਮੀ ਕੰਪੋਸਟ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਤਰੀਕੇ ਅਨੁਸਾਰ ਬਣਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ * ਇਸ ਲਈ ਇਹੋ ਜਿਹੀ ਥਾਂ ਲਵੋ ਜਿਥੇ ਧੁੱਪ ਨਾ ਆਵੇ ਅਤੇ ਹਵਾਦਾਰ ਹੋਵੇ * ਇਸ ਥਾਂ ਉੱਪਰ ਇੱਟਾਂ ਜਾਂ ਪੱਥਰ ਦੇ ਟੁਕੜੇ ਅਤੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ 2-3 ਇੰਚ ਮੋਟੀ ਪਰਤ ਵਿਛਾਓ * ਇਸ ਉਪਰ 6-8 ਇੰਚ ਮੋਟੀ ਪਰਤ, ਅੱਧੀ ਗੋਬਰ ਜਾਂ ਕੰਪੋਸਟ ਖਾਦ ਅਤੇ ਅੱਧੀ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਪਰਤ ਵਿਛਾ ਦਿਓ * ਮਿੱਟੀ ਉੱਤੇ ਥੋੜ੍ਹਾ ਜਿਹਾ ਪਾਣੀ ਛਿੜਕ ਕੇ ਗਿੱਲਾ ਕਰੋ, ਮ.... (Read More)
ਵਧੀਆ ਵਰਮੀ ਕੰਪੋਸਟ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਤਰੀਕੇ ਅਨੁਸਾਰ ਬਣਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ * ਇਸ ਲਈ ਇਹੋ ਜਿਹੀ ਥਾਂ ਲਵੋ ਜਿਥੇ ਧੁੱਪ ਨਾ ਆਵੇ ਅਤੇ ਹਵਾਦਾਰ ਹੋਵੇ * ਇਸ ਥਾਂ ਉੱਪਰ ਇੱਟਾਂ ਜਾਂ ਪੱਥਰ ਦੇ ਟੁਕੜੇ ਅਤੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ 2-3 ਇੰਚ ਮੋਟੀ ਪਰਤ ਵਿਛਾਓ * ਇਸ ਉਪਰ 6-8 ਇੰਚ ਮੋਟੀ ਪਰਤ, ਅੱਧੀ ਗੋਬਰ ਜਾਂ ਕੰਪੋਸਟ ਖਾਦ ਅਤੇ ਅੱਧੀ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਪਰਤ ਵਿਛਾ ਦਿਓ * ਮਿੱਟੀ ਉੱਤੇ ਥੋੜ੍ਹਾ ਜਿਹਾ ਪਾਣੀ ਛਿੜਕ ਕੇ ਗਿੱਲਾ ਕਰੋ, ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ 25 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਤੋਂ ਵੱਧ ਨਮੀ ਨਹੀਂ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ * ਇਸ ਉੱਪਰ ਗੰਡੋਏ (40 ਗੰਡੋਏ ਪ੍ਰਤੀ ਵਰਗ ਫੀਟ ਥਾਂ) ਮਿੱਝਹ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਓ * ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਵੇਸਟ ਜਿਵੇਂ- ਕਿ ਬਚੀ-ਖੁਚੀ ਸਬਜ਼ੀਆਂ, ਫਲ, ਕੱਚਾ ਗੋਬਰ, ਗੋਬਰ ਦੀ ਸਲਰੀ ਦੀ 8-10 ਇੰਚ ਮੋਟੀ ਪਰਤ ਪਾਓ * ਦੂਜੀ ਪਰਤ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇਸ ਉੱਪਰ ਸੁੱਕੇ ਪੱਤੇ ਜਾਂ ਪਆਲ ਨਾਲ ਢਕ ਦਿਓ ਹਰ ਪਰਤ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਾਣੀ ਛਿੜਕੋ ਤਾਂ ਕਿ ਨਮੀ ਬਣੀ ਰਹੇ * ਵਰਮੀ ਕੰਪੋਸਟ ਦੇ ਬੈੱਡ ਨੂੰ 3-4 ਇੰਚ ਮੋਟੀ ਗੋਬਰ ਦੀ ਪਰਤ ਨਾਲ ਢਕ ਦਿਓ ਅਤੇ ਇਸ ਉੱਪਰ ਬੋਰਾ ਜਾਂ ਤਰਪਾਲ ਰੱਖੋ ਤਾਂ ਕਿ ਥੱਲੇ ਹਨੇਰਾ ਰਹੇ ਰੋਸ਼ਨੀ ਵਿੱਚ ਗੰਡੋਏ ਘੱਟ ਵਧਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਖਾਦ ਬਣਨ ਵਿੱਚ ਸਮਾਂ ਲਗਦਾ ਹੈ ਬੋਰਾ ਅਤੇ ਤਰਪਾਲ ਮੀਂਹ ਦੇ ਨੁਕਸਾਨ ਤੋਂ ਵੀ ਬਚਾਉਂਦੇ ਹਨ * ਵਰਮੀ ਕੰਪੋਸਟ ਦੇ ਬੈੱਡ ਉੱਪਰ ਹਰ ਦੂਸਰੇ ਦਿਨ ਥੋੜ੍ਹਾ ਪਾਣੀ ਛਿੜਕਾਉਂਦੇ ਰਹੋ ਤਾਂ ਜੋ ਨਮੀ ਬਣੀ ਰਹੇ * ਰਸੋਈ, ਫਸਲਾਂ ਜਾਂ ਡੇਅਰੀ ਦੇ ਰਹਿੰਦ-ਖੂੰਹਦ ਦੀ ਪਰਤ ਨੂੰ ਰੈਕ ਨਾਲ ਪਲਟਦੇ ਰਹੋ ਅਤੇ ਲੋੜ ਹੋਣ ’ਤੇ ਥੋੜ੍ਹਾ ਥੋੜ੍ਹਾ ਕਰਕੇ ਹੋਰ ਵੇਸਟ ਵੀ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹਾਂ, ਇਸ ਉੱਪਰ ਕੱਚਾ ਗੋਬਰ ਵੀ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਪਰ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਕਿ ਇਹ ਪਰਤ ਪਹਿਲਾਂ ਜਿੰਨੀ ਹੀ ਮੋਟੀ ਰਹੇ * ਵਰਮੀ ਕੰਪੋਸਟ ਦੀ ਖਾਦ ਮੌਸਮ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ 45-60 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਉੱਪਰ ਵਾਲੀ ਪਰਤ ਨੂੰ ਹਟਾ ਕੇ ਗੰਡੋਏ ਛਲਣੀ ਨਾਲ ਵੱਖਰੇ ਕਰ ਲਵੋ ਅਤੇ ਨਿਚਲੀ ਛੱਡ ਦਿਓ ਇਸ ਉਪਰ ਦੁਬਾਰਾ ਰਸੋਈ ਜਾਂ ਐਗਰੋ ਵੇਸਟ ਦੀ 6 ਇੰਚ ਮੋਟੀ ਪਰਤ ਵਿਛਾ ਕੇ ਦੁਬਾਰਾ ਖਾਦ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ * 45 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਪਾਣੀ ਛਿੜਕਣਾ ਬੰਦ ਕਰਨ ਨਾਲ ਵੀ ਗੰਡੋਏ ਹੇਠਲੀ ਪਰਤ ਵਿਚ ਚਲੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਛਲਣੀ ਨਾਲ ਅਲੱਗ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਘੱਟ ਸਮਾਂ ਲਗਦਾ ਹੈ ਤਿਆਰ ਵਰਮੀ ਕੰਪੋਸਟ ਕਾਲੇ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਦੀ ਗੰਧ ਰਹਿਤ ਅਤੇ ਚਾਹ ਪੱਤੀ ਵਰਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਨੂੰ ਛਾਂ ਹੇਠਾਂ ਹਵਾ ਵਿੱਚ ਸੁਕਾ ਕੇ ਲੋੜ ਮੁਤਾਬਕ ਥੈਲੇ ਜਾਂ ਬੋਰੀਆਂ ਵਿਚ ਪਾ ਕੇ ਰੱਖਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇੱਕ ਟਨ ਵਰਮੀ ਕੰਪੋਸਟ ਵਿੱਚ 1.0-1.5 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਨਾਈਟਰੋਜਨ, 5-10 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਪੋਟਾਸ਼ ਅਤੇ 3.5-5.0 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਫਾਸਫੋਰਸ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਸ ਵਿੱਚ ਕਈ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਇੰਜਾਈਮਸ ਅਤੇ ਸੂਖਮ ਤੱਤ ਕਾਪਰ, ਆਇਰਨ, ਜ਼ਿੰਕ, ਸਲਫਰ, ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਅਤੇ ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ ਆਦਿ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੀ ਵਰਤੋਂ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਵੀ ਫ਼ਸਲ ਤੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਇਹ ਫ਼ਸਲ ਦੇ ਵਾਧੇ ਲਈ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Rajendra
Uttarakhand
18-09-2019 10:11 PM
Punjab
09-18-2019 10:21 PM
राजेंद्र जी पपीते के mosaic वायरस कीट के हमले के कारण होता है इसके लिए आप इसके ऊपर imidacloprid @1.5 ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Dr. Ram Charan Mathuria
Delhi
18-09-2019 10:03 PM
Punjab
09-19-2019 06:56 PM
Posted by ਕੁਲਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
18-09-2019 10:01 PM
Punjab
09-19-2019 04:53 PM
Stevia ਤੋਂ ਸਾਨੂੰ ਸ਼ੁਗਰ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਸਾਨੂੰ ਇਸ ਦੇ ਪਤਿਆਂ ਤੋਂ ਜ਼ੀਰੋ ਕੈਲੋਰੀਜ਼ ਸਵੀਟਨੈੱਸ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਇਹ ਸ਼ੂਗਰ ਤੋਂ ਜਾਇਦਾ ਮਿੱਠੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਭਾਰਤ ਵਿਚ ਇਸਦੀਆਂ 2 ਕਿਸਮਾਂ ਲਗਾਈਆ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ mds 14 ਅਤੇ mds13 ਇਸਦੇ ਲਈ ਤਾਪਮਾਨ 30℃ ਤੋਂ 32℃ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ 1. ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਝੋਨੇ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਜ਼ਮੀਨ ਹੇਠਲੇ ਪਾਣੀ ਦਾ ਪੱਧਰ ਹੇਠਾਂ ਜਾਣਾ ਵੱਡੀ ਚਿੰਤਾ ਦਾ ਵਿਸ਼ਾ ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਦੇ .... (Read More)
Stevia ਤੋਂ ਸਾਨੂੰ ਸ਼ੁਗਰ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਸਾਨੂੰ ਇਸ ਦੇ ਪਤਿਆਂ ਤੋਂ ਜ਼ੀਰੋ ਕੈਲੋਰੀਜ਼ ਸਵੀਟਨੈੱਸ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਇਹ ਸ਼ੂਗਰ ਤੋਂ ਜਾਇਦਾ ਮਿੱਠੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਭਾਰਤ ਵਿਚ ਇਸਦੀਆਂ 2 ਕਿਸਮਾਂ ਲਗਾਈਆ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ mds 14 ਅਤੇ mds13 ਇਸਦੇ ਲਈ ਤਾਪਮਾਨ 30℃ ਤੋਂ 32℃ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ 1. ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਝੋਨੇ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਜ਼ਮੀਨ ਹੇਠਲੇ ਪਾਣੀ ਦਾ ਪੱਧਰ ਹੇਠਾਂ ਜਾਣਾ ਵੱਡੀ ਚਿੰਤਾ ਦਾ ਵਿਸ਼ਾ ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਪੌਣ-ਪਾਣੀ ਮੁਤਾਬਕ ਰੇਤਲੀ ਤੇ ਕੰਢੀ ਖੇਤਰ ਦੀ ਧਰਤੀ ਇਸ ਫ਼ਸਲ ਲਈ ਵਧੇਰੇ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੈ ਇਸ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਲੱਗਦਾ ਹੈ ਤੇ ਇੱਕ ਵਾਰੀ ਪੌਦੇ ਲਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 5 ਸਾਲ ਫ਼ਸਲ ਦੀ ਕਟਾਈ ਹੀ ਕਰਨੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ 2. ਪਹਿਲੀ ਫ਼ਸਲ ਦੀ ਕਟਾਈ ਤਿੰਨ ਮਹੀਨਿਆਂ ਬਾਅਦ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਆਮਦਨ ਜਲਦੀ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇੱਕ ਏਕੜ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿੱਚ 30 ਤੋਂ 40 ਹਜ਼ਾਰ ਪੌਦੇ ਲੱਗਦੇ ਹਨ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਤੱਥ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਇਸ ਫ਼ਸਲ ’ਤੇ ਕੀਟਨਾਸ਼ਕ ਜਾਂ ਨਦੀਨਨਾਸ਼ਕ ਦਵਾਈਆਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ 3. ਯੂਰੀਆ ਜਾਂ ਡੀਏਪੀ ਖਾਦ ਦੀ ਥਾਂ ਸਿਰਫ਼ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਦੀ ਹੀ ਵਰਤੋਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਕੁਦਰਤੀ ਖੇਤੀ ਦਾ ਹਿੱਸਾ ਵੀ ਕਹੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਸਟੀਵੀਆ ਦੇ ਪੌਦੇ ਵਿੱਚ ਮਿਠਾਸ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਪਸ਼ੂ ਵੀ ਮੂੰਹ ਨਹੀਂ ਲਾਉਂਦੇ 4.ਇਹ ਫ਼ਸਲ ਘੱਟੋ ਘੱਟ ਇੱਕ ਕਨਾਲ ਰਕਬੇ ਵਿੱਚ ਵੀ ਲਗਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਪਰ ਜੇਕਰ 5 ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਲਾਈ ਜਾਵੇ, ਤਾਂ ਭਾਰਤ ਸਰਕਾਰ ਕੁੱਲ ਲਾਗਤ ਦਾ 40 ਫੀਸਦੀ ਸਬਸਿਡੀ ਵੀ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ ਪ੍ਰਫੁੱਲਤ ਕਰਨ ਲਈ ਸਰਕਾਰ ਲਾ ਰਹੀ ਜ਼ੋਰ:ਇਸ ਲਈ ਕੰਢੀ ਖੇਤਰ ਦੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਸਟੀਵੀਆ ਲਾਉਣ ਲਈ ਪ੍ਰੇਰਿਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਪੰਜਾਬ ’ਚ ਇਸ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ ਪ੍ਰਫੁੱਲਤ ਕਰਨ ਲਈ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਵਧੀਕ ਮੁੱਖ ਸਕੱਤਰ (ਵਿਕਾਸ) ਸੁਰੇਸ਼ ਕੁਮਾਰ ਦੀ ਅਗਵਾਈ ਹੇਠ ਕਮੇਟੀ ਦਾ ਗਠਨ ਕੀਤਾ ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਕਮਿਸ਼ਨਰ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਡਾ. ਬਲਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਸਿੱਧੂ ਦਾ ਕਹਿਣਾ ਹੈ ਕਿ ਸਟੀਵੀਆ ਦੀ ਫਸਲ ਝੋਨੇ ਤੇ ਕਣਕ ਦਾ ਬਦਲ ਬਣ ਸਕਦੀ ਹੈ ਦੂਜਾ ਇਸ ਫ਼ਸਲ ਤੋਂ ਕਣਕ ਤੇ ਝੋਨੇ ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਕਮਾਈ ਵੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਬਾਰੇ ਹੋਰ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੰਬਰ ਤੇ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ :-Rajpal Singh Gandhi :-9814060700, surinder Nagra 9814305864.
Posted by mohandeep singh sekhon
Punjab
18-09-2019 09:52 PM
Punjab
09-18-2019 09:57 PM
ਵਧੀਆ ਜਲ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀਆਂ ਹਲਕੀਆਂ ਜਾਂ ਭਾਰੀਆਂ , ਰੇਤਲੀਆਂ ਅਤੇ ਚੀਕਣੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਇਸ ਲਈ ਵਧੀਆ ਮੰਨੀਆ ਜਾਂਦੀਆ ਹਨ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਖੜਾ ਨਾ ਹੋਣ ਦਿਓ, ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਫਸਲ ਖੜੇ ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਸਹਾਰ ਨਹੀਂ ਸਕਦੀ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਕਿਸਮਾਂ :- Punjab Haldi 1: ਇਹ ਦਰਮਿਆਨੇ ਕੱਦ ਦੀ, ਹਰੇ ਤੇ ਲੰਬੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੀ ਅਤੇ ਮੋਟੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਗੁੱਦਾ ਗੂੜੇ ਪੀਲੇ ਰੰਗ ਦਾ ਅਤੇ ਛਿਲਕਾ ਭੂਰੇ ਹੁੰ.... (Read More)
ਵਧੀਆ ਜਲ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀਆਂ ਹਲਕੀਆਂ ਜਾਂ ਭਾਰੀਆਂ , ਰੇਤਲੀਆਂ ਅਤੇ ਚੀਕਣੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਇਸ ਲਈ ਵਧੀਆ ਮੰਨੀਆ ਜਾਂਦੀਆ ਹਨ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਖੜਾ ਨਾ ਹੋਣ ਦਿਓ, ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਫਸਲ ਖੜੇ ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਸਹਾਰ ਨਹੀਂ ਸਕਦੀ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਕਿਸਮਾਂ :- Punjab Haldi 1: ਇਹ ਦਰਮਿਆਨੇ ਕੱਦ ਦੀ, ਹਰੇ ਤੇ ਲੰਬੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੀ ਅਤੇ ਮੋਟੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਗੁੱਦਾ ਗੂੜੇ ਪੀਲੇ ਰੰਗ ਦਾ ਅਤੇ ਛਿਲਕਾ ਭੂਰੇ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 215 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 108 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ Punjab Haldi 2: ਇਹ ਲੰਬੇ ਕੱਦ ਦੀ ਹਰੇ ਅਤੇ ਚੌੜੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੀ ਅਤੇ ਮੋਟੀ ਗੰਢੀਆਂ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਗੁੱਦਾ ਪੀਲੇ ਰੰਗ ਦਾ ਅਤੇ ਛਿਲਕਾ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 240 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 122 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਖੇਤ ਨੂੰ 2-3 ਵਾਰ ਵਾਹ ਕੇ ਅਤੇ ਸੁਹਾਗੇ ਨਾਲ ਪੱਧਰਾ ਕਰਕੇ ਤਿਆਰ ਕਰੋ ਹਲਦੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਬੈੱਡ 15 ਸੈ.ਮੀ. ਉੱਚੇ ,1 ਮੀ. ਚੌੜੇ ਅਤੇ ਲੋੜ ਅਨੁਸਾਰ ਲੰਬੇ ਹੋਣੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ ਦੋ ਬੈੱਡਾਂ ਵਿਚਕਾਰ 50 ਸੈ.ਮੀ. ਦਾ ਫਾਸਲਾ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਵੱਧ ਝਾੜ ਲੈਣ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਅਪ੍ਰੈਲ ਦੇ ਅੰਤ ਵਿੱਚ ਕਰੋ ਇਸ ਨੂੰ ਪਨੀਰੀ ਦੇ ਨਾਲ ਵੀ ਉਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਜੂਨ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਪੰਦੜਵਾੜੇ ਤੱਕ ਪਨੀਰੀ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਾ ਦਿਓ ਪਨੀਰੀ ਲਈ 35-45 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾਓ ਰਹਾਈਜ਼ੋਮਸ (ਗੰਢੀਆਂ ) ਨੂੰ ਕਤਾਰਾਂ ਵਿੱਚ ਬੀਜੋ ਅਤੇ ਕਤਾਰ ਤੋਂ ਕਤਾਰ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 30 ਸੈ.ਮੀ. ਅਤੇ ਪੌਦਿਆਂ ਵਿੱਚ 20 ਸੈ.ਮੀ. ਦਾ ਫਾਸਲਾ ਰੱਖੋ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਬਾਅਦ ਖੇਤ ਵਿੱਚ 2.5 ਟਨ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਸਟਰਾਅ ਮਲਚ ਪਾਓ ਬੀਜ ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ 3 ਸੈ:ਮੀ: ਤੋਂ ਵੱਧ ਨਹੀ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਸਿੱਧੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾ ਕੇ ਜਾਂ ਪਨੀਰੀ ਲਗਾ ਕੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਸਾਫ-ਸੁਥਰੇ ਤਾਜ਼ੇ ਅਤੇ ਬਿਮਾਰੀ ਰਹਿਤ ਰਹਾਈਜ਼ੋਮਸ (ਗੰਢੀਆਂ) ਦੀ ਵਰਤੋ ਕਰੋਂ ਬੀਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 6-8 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਬਹੁਤ ਹੁੰਦੀ ਬਿਜਾਈ ਤੋ ਪਹਿਲਾਂ ਕੁਇਨਲਫੋਸ 25 ਈ ਸੀ ਨੂੰ 20 ਮਿ.ਲੀ. + ਕਾਰਬੈਂਡਾਜ਼ਿਮ 10 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਪਾ ਕੇ ਬੀਜ ਨੂੰ ਸੋਧੋ ਬਾਅਦ ਵਿੱਚ ਗੰਢੀਆਂ ਨੂੰ 20 ਮਿੰਟ ਲਈ ਇਸ ਘੋਲ ਵਿੱਚ ਡੋਬੋ ਤਾਂ ਕਿ ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਉੱਲੀ ਤੋਂ ਬਚਾਇਆ ਜਾ ਸਕੇ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ 10 ਕਿਲੋ (25 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ), ਫਾਸਫੋਰਸ 10 ਕਿਲੋ (60 ਕਿਲੋ ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ ) ਅਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ 10 ਕਿਲੋ (16 ਕਿਲੋ ਮਿਊਰੇਟ ਆਫ ਪੋਟਾਸ਼ ) ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਵਰਤੋ ਸਾਰੀ ਪੋਟਾਸ਼ ਅਤੇ ਅੱਧੀ ਫਾਸਫੋਰਸ ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ ਪਾਓ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੋ ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਪਾਓ, ਅੱਧੀ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 75 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਅਤੇ ਬਾਕੀ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਅਤੇ ਅੱਧੀ ਫਾਸਫੋਰਸ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 3 ਮਹੀਨੇ ਬਾਅਦ ਪਾਓ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 2-3 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਵਿੱਚ ਪੈਂਡੀਮੈਥਾਲਿਨ 30 ਈ.ਸੀ 800 ਮਿ.ਲੀ. ਜਾਂ ਮੈਟਰੀਬਿਉਜ਼ਿਨ 70 ਡਬਲਿਊ ਪੀ 400 ਗ੍ਰਾਮ ਨੂੰ 200 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਪਾ ਕੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਨਦੀਨ ਨਾਸ਼ਕ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਖੇਤ ਨੂੰ ਹਰੇ ਪੱਤਿਆਂ ਜਾਂ ਝੋਨੇ ਦੀ ਤੂੜੀ ਨਾਲ ਢੱਕ ਦਿਓ ਜੜ੍ਹਾਂ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 50-60 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਅਤੇ ਫਿਰ 40 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਜੜ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਲਾਓ ਇਹ ਘੱਟ ਵਰਖਾ ਵਾਲੀ ਫਸਲ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਵਰਖਾ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਹਲਕੀ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿੱਚ ਫਸਲ ਨੂੰ ਕੁੱਲ 35-40 ਸਿੰਚਾਈਆਂ ਦੀ ਲੋੜ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਫਸਲ ਨੂੰ 40-60 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹਰੇ ਪੱਤਿਆਂ ਨਾਲ ਢੱਕ ਦਿਓ ਹਰ ਵਾਰ ਖਾਦ ਪਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 30 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਮਲਚ ਪਾਓ ਕਿਸਮ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ 6-9 ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵਾਢੀ ਕਰੋ ਪੱਤੇ ਸੁੱਕਣ ਅਤੇ ਪੀਲੇ ਹੋਣ ਤੇ ਵਾਢੀ ਦਾ ਢੁੱਕਵਾਂ ਸਮਾਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਗੰਢੀਆਂ ਨੂੰ ਪੁੱਟ ਕੇ ਬਾਹਰ ਕੱਢੋ ਅਤੇ ਸਾਫ ਕਰੋ ਗੰਢੀਆਂ ਨੂੰ 2-3 ਦਿਨਾਂ ਲਈ ਛਾਂਵੇਂ ਸੁਕਾਓ ਇਸ ਨਾਲ ਛਿਲਕਾ ਸਖਤ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸੌਖਾ ਉਬਲਦਾ ਹੈ
Posted by Sonelal Kumar
Bihar
18-09-2019 09:45 PM
Punjab
09-18-2019 09:50 PM
Ram ji jo asar ho gya hai spray ka use to kam nahi kiya ja sata usne apna asar poora dikhana hai aap ek kilo urea ko 150 litre pani men mila kar spray kar sakte hai.dhanywad
Posted by sanjayverma
Punjab
18-09-2019 09:43 PM
Punjab
09-20-2019 06:13 PM
tuci uss nu pett de kiria lai Flukarid-Ds bolus deo, uss nu anabolite liquid 100ml rojana, Gouge powder 50gm rojana ate Calcimust gold liquid 50ml rojana dena suru kro, iss nal frak paa jawega
Posted by Avtar Singh
Punjab
18-09-2019 09:41 PM
Punjab
09-20-2019 06:25 PM
ਤੁਸੀ ਉਸਦੀ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ lixin-iu ਦਵਾਈ 3 ਦਿਨ ਲਗਾਤਾਰ ਭਰਵਾਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Bovimin-B ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ Pg care bolus ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ, ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ ਇਹ ਗੋਲੀਆਂ 20 ਦਿਨ ਤਕ ਹੋਰ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ ..
Posted by RAGHUNATH SINGH
Rajasthan
18-09-2019 09:40 PM
Maharashtra
10-07-2019 07:37 PM
मालाबार नीम के पेड़ की खेती सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है और पानी की कम आपूर्ति की आवश्यकता होती है मालाबार नीम रोपण से 2 साल के भीतर 40 फुट तक उचाई लेलेता है, मालाबार नीम एक नकदी नीम परिवार से संबंधित है इस पेड़ अपनी तेजी से विकास के लिए जाना जाता है हाल के दिनों में कर्नाटक के आसपास के किसान, तमिलनाडु, आ.... (Read More)
मालाबार नीम के पेड़ की खेती सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है और पानी की कम आपूर्ति की आवश्यकता होती है मालाबार नीम रोपण से 2 साल के भीतर 40 फुट तक उचाई लेलेता है, मालाबार नीम एक नकदी नीम परिवार से संबंधित है इस पेड़ अपनी तेजी से विकास के लिए जाना जाता है हाल के दिनों में कर्नाटक के आसपास के किसान, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल में इस वृक्ष की बढ़ी मात्रा में फार्मिंग कर रहे है और इसका प्रयोग सस्ती वुड (plywood इंडस्ट्री) के रूप में कर रहे है यदि पेड़ो को सिंचित किया जाये तो 5 वर्ष के अंत में काटा जा सकता है और प्लाई के लिए प्रयोग किया जासकता है मार्च - अप्रैल के दौरान बीज बोना सबसे अच्छा है
Posted by gaurav rana
Haryana
18-09-2019 09:37 PM
Punjab
09-18-2019 09:41 PM
Rana ji inko aap Bendikind plus bolus pett ke kirro ke liye den aur Cargil di Heifer dry feed dalen aur Enerboost powder 100gm rojana den, isse achi growth ho jayegi.
Posted by Hardev Singh Khiala
Punjab
18-09-2019 09:36 PM
Punjab
09-18-2019 10:08 PM
ਹਰਦੇਵ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਦੱਸੋ ਕੇ ਕਿੰਨੂੰ ਦੇ ਬੂਟੇ ਉਪਰ ਕਿਹੜੇ ਕੀਟ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੈ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by jaspreet singh
Punjab
18-09-2019 09:30 PM
Punjab
09-18-2019 11:12 PM
Bathinda kisan mela 26 september nu hai ji..
Posted by kumar
Uttar Pradesh
18-09-2019 09:22 PM
Maharashtra
09-18-2019 09:24 PM
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्ष.... (Read More)
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्षेत्रों में पाई जाती है यह गले को सूखेपन से राहत देता है यह हाथों, पैरों और गठिया की सूजन से आराम देता है Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum): यह चीन, ब्राज़ील, पूर्व नेपाल और साथ ही बंगाल, बिहार, चटगांव और भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में पाई जाती है इसका तना जामुनी और पत्ते हरे रंग के और बहुत ज्यादा सुगंधित होते है इसमें उचित मात्रा में औषधीय गुण जैसे ऐज़ाडिरैकटिन, ऐंटीफंगल , ऐंटीबैक्टीरियल, और पाचन तंत्र को ठीक रखती है यह गर्म क्षेत्रों में बढ़िया उगता है Babi Tulsi: यह पंजाब से त्रिवेंद्रम, बंगाल और बिहार में भी पाई जाती है इसका पौधा 1-2 फीट लम्बा होता है पत्ते 1-2 इंच लम्बे, अंडाकार और नुकीले होते है इसके पत्तों का स्वाद लौंग की तरह और सब्जियों में स्वाद के लिए प्रयोग किया जाता है तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें इसके मंडीकरण के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से संपर्क कर सकते हैं
Posted by varinder dhillon
Punjab
18-09-2019 09:20 PM
Punjab
09-18-2019 09:23 PM
varinder ji thiamethoxam di dose 80 gram prati acre de hisab nal hundi hai eh tele di roktham kardi hai isda asar 15-18 din rehnda hai.dhanwad
Posted by sukhpinder singh bhullar
Punjab
18-09-2019 09:11 PM
Maharashtra
09-19-2019 05:35 PM
ਇਸਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਰੇਤ਼਼ਲੀਆਂ ਅਤੇ ਕਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਉਪਜਾਊ ਅਤੇ ਚੰਗੇ ਜਲ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਇਸ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ ਸਭ ਤੋ ਢੁੱਕਵੀ ਹੈ ਕਲਰ ਵਾਲੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾ ਇਸ ਦੀ ਕਾਂਸਤ ਦੇ ਯੋਗ ਨਹੀ ਉੱਤਮ ph 6.5-8 ਹੈ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਕਿਸਮਾਂ:- Jwalamukhi : ਇਹ ਦਰਮਿਆਨੇ ਕੱਦ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਪੌਦੇ ਦਾ ਕੱਦ 170 ਸੈ:ਮੀ: ਹੈ ਫਸਲ 120 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤ ਝਾੜ 7.3 ਕੁੰਇਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਤੇਲ ਦੀ ਮ.... (Read More)
ਇਸਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਰੇਤ਼਼ਲੀਆਂ ਅਤੇ ਕਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਉਪਜਾਊ ਅਤੇ ਚੰਗੇ ਜਲ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਇਸ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ ਸਭ ਤੋ ਢੁੱਕਵੀ ਹੈ ਕਲਰ ਵਾਲੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾ ਇਸ ਦੀ ਕਾਂਸਤ ਦੇ ਯੋਗ ਨਹੀ ਉੱਤਮ ph 6.5-8 ਹੈ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਕਿਸਮਾਂ:- Jwalamukhi : ਇਹ ਦਰਮਿਆਨੇ ਕੱਦ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਪੌਦੇ ਦਾ ਕੱਦ 170 ਸੈ:ਮੀ: ਹੈ ਫਸਲ 120 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤ ਝਾੜ 7.3 ਕੁੰਇਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਤੇਲ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 42 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਹੈ GKSFH 2002: ਇਹ ਦਰਮਿਆਨੇ ਕੱਦ ਦੀ ਦੋਗਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਫਸਲ 115 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤ ਝਾੜ 7.5 ਕੁੰਇਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਤੇਲ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 42.5 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਹੈ PSH 569: ਪੌਦੇ ਦਾ ਕੱਦ 162 ਸੈ:ਮੀ: ਹੈ ਫਸਲ 98 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਪਿਛੇਤੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਵੀ ਢੁੱਕਵੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 7.44 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ 36.3 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਤੇਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਨਰਮ ਬੈਡ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਖੇਤ ਨੂੰ ਦੋ- ਤਿੰਨ ਵਾਰ ਵਾਹ ਕੇ ਪੱਧਰਾ ਕਰੋ ਵੱਧ ਝਾੜ ਲੈਣ ਲਈ ਫਸਲ ਨੂੰ ਜਨਵਰੀ ਦੇ ਅਖੀਰ ਤੱਕ ਲਗਾ ਦਿਉ ਜੇਕਰ ਬਿਜਾਈ ਫਰਵਰੀ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਕਰਨੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਪਨੀਰੀ ਨਾਲ ਕਰੋ ਕਿਉਕਿ ਇਸ ਸਮੇ ਸਿੱਧੀ ਬਿਜਾਈ ਵਾਲੀ ਫਸਲ ਨੂੰ ਕੀੜੇ ਅਤੇ ਬੀਮਾਰੀਆ ਵੱਧ ਲੱਗਦੀਆ ਹਨ ਦੋ ਕਤਾਰਾ ਵਿੱਚ 60 ਸੈ:ਮੀ:ਅਤੇ ਦੌ ਪੌਦਿਆ ਵਿੱਚਕਾਰ 30 ਸੈ:ਮੀ: ਦਾ ਫਾਸਲਾ ਰੱਖੋ 4-5 ਸੈ:ਮੀ: ਡੂੰਘੇ ਬੀਜ਼ ਬੀਜੋ ਬਿਜਾਈ ਟੋਆ ਪੁੱਟ ਕੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਬਿਜਾਈ ਵਾਲੀ ਮਸ਼ੀਨ ਨਾਲ ਬੈਡ ਬਣਾ ਕੇ ਜਾਂ ਵੱਟਾ ਬਣਾ ਕੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਦੇਰ ਨਾਲ ਬੀਜ਼ਣ ਵਾਲੀ ਫਸਲ ਲਈ ਪਨੀਰੀ ਦੀ ਵਰਤੋ ਕਰੋ ਅਤੇ 1 ਏਕੜ ਖੇਤ ਲਈ 30 ਵਰਗ ਮੀਟਰ ਖੇਤਰ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ 1.5 ਕਿਲੋ ਬੀਜ਼ ਵਰਤ ਕੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਤੋ 30 ਦਿਨ ਪਹਿਲਾ ਪਨੀਰੀ ਲਗਾਉ ਬੈਡ ਬਣਾਉਣ ਸਮੇ 0.5 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਅਤੇ 1.5 ਕਿਲੋ SSP ਪਾਉ ਅਤੇ ਬੈਡਾਂ ਨੂੰ ਪਲਾਸਟਿਕ ਦੀ ਤਰਪਾਲ ਹਟਾ ਦਿਉ ਅਤੇ 4 ਪੱਤਿਆ ਵਾਲੇ ਬੂਟਿਆ ਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉ ਪਨੀਰੀ ਨੂੰ ਪੁੱਟਣ ਤੋ ਪਹਿਲਾ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਬਿਜਾਈ ਲਈ 2-3 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਰਤੋ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਬੀਜਾ ਲਈ ਬੀਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 2-2.5 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਰਤੋ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਦੋ ਜਾਂ ਤਿੰਨ ਹਫਤੇ ਪਹਿਲਾਂ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ 4-5 ਟਨ ਰੂੜੀ ਦੀ ਗਲੀ ਸੜੀ ਖਾਦ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਪਾਉ ਨਾਇਟ੍ਰੋਜਨ 24 ਕਿਲੋ (50 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ), ਫਾਸਫੋਰਸ 12 ਕਿਲੋ (75 ਕਿਲੋ ਐੱਸ.ਐੱਸ.ਪੀ) ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਵਰਤੋ ਸਹੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਖਾਦ ਪਾਉਣ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਜਾਂਚ ਕਰਵਾਉ ਅੱਧੀ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਅਤੇ ਪੂਰੀ ਫਾਸਫੋਰਸ ਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਸਮੇ ਤੇ ਬਾਕੀ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਬਿਜਾਈ ਤੌ 30 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਪਾਉ ਸੇਜੂ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਬਾਕੀ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਨੂੰ ਦੋ ਭਾਗਾ ਵਿੱਚ ਬਿਜਾਈ ਤੌ 30 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਪਾਉ ਸੂਰਜਮੁਖੀ ਦੇ ਪੱਤੇ ਨੂੰ ਪਹਿਲੇ 45 ਦਿਨ ਨਦੀਨ ਮੁਕਤ ਰੱਖੋ ਅਤੇ ਲੋੜੀਦੇ ਪੌਦਿਆ ਤੇ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 3 ਹਫਤੇ ਬਾਅਦ ਪਹਿਲੀ ਗੋਡੀ ਅਤੇ 6 ਹਫਤੇ ਬਾਅਦ ਦੂਜੀ ਗੋਡੀ ਕਰੋ ਨਦੀਨਾ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਪੈਂਡੀਮੈਥਾਲਿਨ ਇੱਕ ਲੀਟਰ ਨੂੰ 150-200 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਫਸਲ ਦੇ ਉੱਗਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 2-3 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਫਸਲ ਨੂੰ ਡਿੱਗਣ ਤੋ ਬਚਾਉਣ ਲਈ 60-70 ਸੈ:ਮੀ:ਲੰਬੇ ਬੂਟਿਆ ਦੀਆਂ ਜੜਾਂ ਨੂੰ ਫੁੱਲ ਨਿੱਕਲਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ ਮਿੱਟੀ ਲਗਾਉ ਜਦੌ ਫਸਲ 60-70 ਸੈ:ਮੀ: ਲੰਬੀ ਹੋ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਫਸਲ ਨੂੰ ਤਣੇ ਟੁੱਟਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਫੁੱਲ ਬਨਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਜੜਾਂ ਨਾਲ ਮਿੱਟੀ ਲਾ ਦਿਉ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਕਿਸਮ ਤੇ ਮੌਸਮ ਅਨੁਸਾਰ 9-10 ਸਿੰਚਾਈਆ ਕਰੋ ਪਹਿਲੀ ਸਿੰਚਾਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋ 3 ਮਹੀਨਾ ਬਾਅਦ ਕਰੋ ਫਸਲ ਨੂੰ 50% ਫੁੱਲ ਪੈਣ ਤੇ, ਦਾਣਿਆਂ ਦੇ ਨਰਮ ਅਤੇ ਸਖਤ ਸਮੇ ਤੇ ਸਿੰਚਾਈ ਅਤੀ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਘਾਟ ਨਾਲ ਝਾੜ ਘੱਟ ਸਕਦਾ ਹੈ ਬਹੁਤ ਜਿਆਦਾ ਅਤੇ ਲਗਾਤਾਰ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰਨ ਨਾਲ ਉਖੇੜਾ ਅਤੇ ਜੜਾਂ ਦਾ ਗਲਣਾ ਵਰਗੀਆ ਬਿਮਾਰੀਆ ਲੱਗ ਸਕਦੀਆ ਹਨ ਭਾਰੀਆ ਜ਼ਮੀਨਾ ਵਿੱਚ ਸਿੰਚਾਈ 20-25 ਦਿਨ ਅਤੇ ਹਲਕੀਆ ਵਿੱਚ 8-10 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਕਰੋ ਮਧੂ ਮੱਖੀ ਬੀਜ਼ ਬਣਨ ਵਿੱਚ ਮਦਦ ਕਰਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਮਧੂ ਮੱਖੀਆ ਘੱਟ ਹੋਣ ਤਾਂ ਸਵੇਰੇ 8-11 ਸਮੇ 7-10 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਫਰਕ ਤੇ ਹੱਥਾ ਨਾਲ ਪਹਿਚਾਣ ਕਰੋ ਇਸ ਲਈ ਹੱਥਾਂ ਨੂੰ ਮਲਮਲ ਦੇ ਕੱਪੜੇ ਨਾਲ ਢੱਕ ਲਵੋ ਪੱਤਿਆ ਦੇ ਸੁੱਕਣ ਅਤੇ ਫੁੱਲਾਂ ਦੇ ਪੀਲੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੋਣ ਤੇ ਕਟਾਈ ਕਰੋ ਕਟਾਈ ਵਿੱਚ ਦੇਰੀ ਨਾ ਕਰੋ, ਕਿਉਕਿ ਇਸ ਨਾਲ ਪੱਤੇ ਡਿੱਗ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਸਿਉਂਕ ਦਾ ਖਤਰਾ ਵੀ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸਦੀ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਲੋਕਲ ਮੰਡੀ ਵਿਚ ਹੀ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Sonelal Kumar
Bihar
18-09-2019 09:02 PM
Punjab
09-18-2019 09:17 PM
Ram ji agar dhan dwa ki spray ke karn murjha raha hai to iska asar ab kisi aur dwa se kam nahi hoga ab vo dwa apna asar karegi.dhanywad
Posted by simar
Punjab
18-09-2019 09:01 PM
Punjab
09-19-2019 05:37 PM
simar ji isde uper tuc NPK 130045@1 kilo ate Boron@100 gram nu prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by sukhvirsingh
Punjab
18-09-2019 08:56 PM
Punjab
09-18-2019 09:04 PM
BhaaG taaran culture kise v laboratory cho karwa k dasi pashuan wali dwaee doctor ton bachedani ch bharwao
Posted by Gurdarshan singh
Punjab
18-09-2019 08:51 PM
Punjab
09-18-2019 09:00 PM
ha g Murrah nasal Di a tohri lessi a is de Sab sabal kro
Posted by Nitesh Kumawat
Madhya Pradesh
18-09-2019 08:51 PM
Punjab
09-18-2019 11:15 PM
nitesh ji sabjiyon mein aap khaad roodi ki khaad ya vermicompost ka istemal kar sakte hai iske ilava aap iske uper fungus ke hamle se bachne ke liye khatti lassi ki spray karen. dhanywad
Posted by मनजीत
Haryana
18-09-2019 08:34 PM
Punjab
09-18-2019 08:49 PM
अक्तूबर में बिजाई कर सकते हैं
Posted by gaurav rana
Haryana
18-09-2019 08:34 PM
Punjab
09-18-2019 09:05 PM
उसे आप 250 ग्राम गुड, 250 ग्राम गुलकंद, 100 ग्राम सौंफ,100 ग्राम सूखे आंवले और 50 ग्राम अज्वाइन उबाल कर फिर ठंडा करके 5—7 दिन दें
Posted by Gurdarshan singh
Punjab
18-09-2019 08:32 PM
Punjab
09-18-2019 08:38 PM
ਤੁਸੀ ਝੋਟੀ ਨੂੰ vitum-H 10-10ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ Metabolite ਪਾਊਡਰ ਦੀ ਰੋਜਾਨਾ 1 ਪੁੜੀ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ ਕਾਰਗਿਲ ਦੀ Transition mix ਫੀਡ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਲੇਵਾ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਵਧਿਆ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ..
Posted by Jaipal Singh
Uttar Pradesh
18-09-2019 08:31 PM
Rajasthan
09-18-2019 08:38 PM
Jaipal ji aap uska nazdiki doctor se bhukar janch krwayen jisse uska sahi ilagg kiya ja skee.
Posted by Ganesh Ghoghra
Rajasthan
18-09-2019 08:29 PM
Maharashtra
09-19-2019 05:44 PM
इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है Jaya: यह छोटे कद की और अधिक .... (Read More)
इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है Jaya: यह छोटे कद की और अधिक उपज देने वाली किस्म गर्दन तोड़ के प्रतिरोधक है यह किस्म 142 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने बड़े और लंबे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 26 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Chakia 59: यह किस्म कम जल जमाव वाले हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है Govind: यह किस्म पंतनगर द्वारा विकसित की गई है यह किस्म 105 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Indrasan: यह तराई क्षेत्रों की प्रसिद्ध किस्म है Mahsud: यह किस्म निचले क्षेत्रों में बारानी स्थितियों में उगाने के लिए उपयुक्त है Majhera 3: यह लंबी किस्म सूखे को सहनेयोग्य है और ऊंचे क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Nagina 22: यह ऊंचे क्षेत्रों में बारानी हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं Narendra-1 and Narendra-2: यह किस्म 105 और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Pant Dhan 6: यह किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त है Saket 4: यह अगेते समय की किस्म है और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह यू पी की सबसे प्रसिद्ध किस्म है T9: यह देरी से बोयी जाने वाली सुगंधित किस्म है इसके दाने बेलनाकार होते हैं VL Dhan 16: यह निम्न और मध्यम क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त किस्म है VL 206: यह लंबी किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Usar 1: यह किस्म कानपुर में विकसित की गई यह क्षारीय और लवणीय मिट्टी में खेती करने के लिए उपयुक्त है बासमती किस्में Taraori Basmati: यह सिंचित क्षेत्रों में अगेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म 145-155 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Haryana Basmati no 1: यह अर्द्ध छोटे कद की किस्म है और सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Basmati 1121, Pusa Basmati 1, CSR 30, Shabnam.शुष्क खेतों को अच्छा बनाने, नदीन रहित और सेहतमंद वृद्धि के लिए ग्लाफोसेट डालनी चाहिए गेहूं की कटाई के बाद ज़मीन पर हरी खाद के तौर पर मई के पहले सप्ताह ढैंचा (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़), या सन (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़) या लोबीया (बीज दर 12 किलोग्राम प्रति एकड़) की बिजाई करनी चाहिए जब फसल 6 से 8 सप्ताह की हो जाए तो इसे खेत में कद्दू करने से एक दिन खेत में ही जोत देना चाहिए इस तरह प्रति एकड़ 25 किलो नाइट्रोजन खाद की बचत होती है भूमि को समतल करने के लिए लेज़र लेवलर का प्रयोग किया जाता है इसके बाद खेत में पानी खड़ा कर दें ताकि भूमि के अंदर ऊंचे नीचे स्थानों की पहचान हो सके इस तरह पानी के रसाव के कारण पानी की होने वाले बर्बादी को कम किया जा सके यू पी के सिंचित और निम्न बारानी क्षेत्रों में मध्य जून से शुरूआती जुलाई तक का समय उपयुक्त होता है पौधे की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए फासला बनाकर लगाने से पौधे ज्यादा पैदावार देते हैं उपजाऊ मिट्टी में 20 सैं.मी. x 15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जबकि हल्की मिट्टी में रोपाई के लिए 15 सैं.मी. x 10 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 20 x 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें सिंचित और कम बारानी क्षेत्रों में रोपाई ढंग प्रयोग किया जाता है रोपाई के लिए 25-30 दिनों के पौधों का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 30-35 दिनों के पौधे रोपाई के लिए प्रयोग करें ऊंचे क्षेत्रों में, शुष्क और गीली मिट्टी में रोपाई ढंग का प्रयोग करें एक एकड़ खेत में 6-8 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से पहले 10 लीटर पानी में 20 ग्राम कार्बेनडाज़िम $ 1 ग्राम स्ट्रैप्टोसाईक्लिन घोल लें और इस घोल में बीजो को 8-10 घंटे तक भिगोयें उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं और फिर बिजाई के लिए प्रयोग करें फसल को जड़ गलन रोग से बचाने के लिए नीचे दिए गए फंगसनाशी का प्रयोग किया जा सकता है पहले रासायनिक फंगीनाशी का प्रयोग करें फिर बीजों का टराईकोडरमा के साथ उपचार करें वैट बैड नर्सरी : यह तकनीक उन क्षेत्रों में अपनाई जाती है जहां पर पानी ज्यादा मात्रा में पाया जाता है नर्सरी का 1/10 हिस्सा दूसरे खेत में लगाया जाता है इसकी बिजाई छींटे द्वारा की जाती है यहां पर खेत की जोताई और खेत को समतल किया जाता है बैडों पर कईं दिन तक नमी बनाए रखनी चाहिए पानी से खेत को ज्यादा ना भरें जब नर्सरी 2 सैं.मी. से वृद्धि कर जाए तब पानी को खेत में लगाते रहना चाहिए बिजाई के 15 दिन बाद 26 किलो यूरिया डालना चाहिए जब नर्सरी 25-30 सैं.मी. तक लंबी हो जाए तब उसे 15-21 दिन बाद दूसरे खेत में लगा देना चाहिए और खेत को लगातार पानी लगाते रहना चाहिए सूखे बैड वाली नर्सरी : यह तकनीक शुष्क क्षेत्रों में अपनाई जाती है जो बैड बनाया जाता है वो बिजाई वाले खेत का 1/10 हिस्से में बीज बोया जाता है बैड का आकार सीमित होना चाहिए और उसकी ऊंचाई 6-10 से.मी होनी चाहिए धान का आधा जला हुआ छिलका बैड पर बिखेर देना चाहिए इससे जड़ें मजबूत होती हैं सही समय पर सिंचाई करते रहना चाहिए और नमी बनाए रखना चाहिए ताकि नए पौधे नष्ट ना हों तत्वों की पूर्ति के लिए खाद डालना जरूरी है मॉडीफाईड मैट नर्सरी : यह नर्सरी लगाने का एक ऐसा तरीका है जिसमें कम जगह और कम बीजों की जरूरत होती है यह नर्सरी किसी भी जगह पर बनाई जा सकती हैं जहां पर समतल जगह हो और पानी की सुविधा हो इसकी पनीरी लगाने के लिए 1% खेत की जरूरत होती है 4 से.मी की सतह पर नए पौधे लगाए जाते हैं इसे बनाने के लिए 1 मीटर चौड़े और 20-30 मीटर लंबे जमीन के टुकड़े की जरूरत होती है इसके ऊपर बिछाने के लिए पॉलीथीन और केले के पत्तों की जरूरत होती है इसके इलावा एक लकड़ी का बकसा जो कि 4 से.मी गहरा होता हैं मिट्टी के मिश्रण से भरा होता है बीजों को इसके अंदर रख देना चाहिए और फिर बीजों को सूखी मिट्टी के साथ ढक देना चाहिए इसके बाद पानी का छिड़काव कर देना चाहिए लकड़ी के बक्से को नमी देते रहना चाहिए बिजाई से 11-14 दिनों के बाद पौध तैयार हो जाती है जब पौध तैयार हो जाती है तब मैट से पौध को दूसरे खेत में रोपण कर दिया जाता है फासला: पौधों का फासला 20x20 सैं.मी. या 25x25 सैं.मी. होना चाहिए पनीरी लगाने का ढंग 1. कद्दू करके लगाई जाने वाली पनीरी : आमतौर पर पंक्ति में लगाए जाने वाले पौधे 20x15 सैं.मी. दूरी पर लगाए जाते हैं और देरी से लगाई जाने वाली पनीरी 15x15 सैं.मी. पर लगाई जाती है नए पौधों की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए 2. बैड बनाकर लगाई जाने वाली पनीरी : यह बैड भारी ज़मीनों के लिए बनाए जाते हैं पनीरी लगाने से पहले खालियों में पानी लगाना चाहिए और फिर पनीरी को खेत में लगाना चाहिए पौधे से पौधे का फासला 9 सैं.मी. होना चाहिए 3. मशीनी ढंग से लगाई जाने वाली पनीरी : मैट पनीरी के लिए मशीनों का प्रयोग किया जाता है यह मशीन 30x12 सैं.मी. के फासले पर पनीरी लगानी चाहिए सिंचित और कम बारानी वाले क्षेत्रों के लिए लगभग 41-50 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 90-110 किलो), 30 किलो फासफोरस (एस एस पी 190 किलो) और 27 किलो पोटाश (म्यूरेट ऑफ पोटाश 45 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा रोपाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर, नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा शाखाएं निकलने के समय और 1/4 हिस्सा बालियां निकलने के समय डालें जल जमाव वाले क्षेत्रों में नाइट्रोजन 30-41 किलो (यूरिया 65-90 किलो) प्रति एकड़ में शुरूआती खुराक के तौर पर डालें कम बारानी क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23-32 किलो (यूरिया 52-70 किलो) और फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो) प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा रोपाई से पहले और बाकी बची नाइट्रोजन बालियां निकलने के समय डालें ऊंचे क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो) और पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के तीन सप्ताह बाद डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटे पहले भाग को बिजाई के 6 सप्ताह बाद और दूसरे भाग को बालियां निकलने के समय डालें पनीरी लगाने के बाद खेत में दो सप्ताह तक अच्छी तरह पानी खड़ा रहने देना चाहिए जब सारा पानी सूख जाए तो उसके दो दिन बाद फिर से पानी को लगाना चाहिए खड़े पानी की गहराई 10 सै.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए खेत में से बूटी और नदीनों को निकालने से पहले खेत में से सारा पानी निकाल देना चाहिए ओर इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद खेत की फिर से सिंचाई करनी चाहिए पकने से 15 दिन पहले सिंचाई करनी बंद करनी चाहिए ताकि फसल को आसानी से काटा जा सके ऊंची भूमि पर सिंचाई पूरी तरह से बारिश पर निर्भर करती है बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर और पानी की उपलब्धता के आधार पर गंभीर अवस्थाओं में सिंचाई करें
Posted by Janak Juglan@ gaimal com
Punjab
18-09-2019 08:18 PM
Punjab
09-18-2019 08:22 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Metabolite ਪਾਊਡਰ ਦੀ 1-1 ਪੂੜੀ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ Anabolite liquid 100ml ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਇਸ ਨਾਲ ਉਸਦਾ ਦੁੱਧ ਵਧਿਆ ਹੋਵੇਗਾ ਅਤੇ ਕਮਜ਼ੋਰੀ ਦੂਰ ਰਹੇਗੀ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਅਤੇ ਫੀਡ ਵਧਿਆ ਦਿਓ ਅਤੇ ਉਸਦੇ ਰਹਿਣ ਸਹਿਣ ਦਾ ਪੂਰਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਜੀ.