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Posted by Rahul Chauhan
Uttar Pradesh
19-09-2019 05:15 PM
Rajasthan
09-19-2019 06:24 PM
कृपया आप उसकी नज़दीकी डॉक्टर से जांच करवाएं उसकी जांच करके सही इलाज हो सकता है
Posted by satwant singh
Punjab
19-09-2019 05:14 PM
Punjab
09-19-2019 07:48 PM
tci puss nu potassium payageren LAL diwi NL saaf kr k farnail deya golia kutt k uper toh Patti NL bn deo 3 4 var krn NL khere mar gu ge
Posted by GURPREET SINGH SIDHU
Punjab
19-09-2019 05:09 PM
Maharashtra
09-19-2019 05:11 PM
ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਇਹ ਲੋਕਲ ਮਾਰਕੀਟ ਵਿੱਚੋ ਹੀ ਮਿਲ ਜਾਏਗੀ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by abdul gaffar
Punjab
19-09-2019 05:08 PM
Punjab
09-19-2019 05:11 PM
Abdul ji PAU kisan mela 21-22 september nu hai .dhanwad
Posted by gora sharma
Punjab
19-09-2019 05:08 PM
Maharashtra
09-19-2019 05:12 PM
iss di roktham de lyi folicur@200ml ja pulsor@200ml ja custodia@300ml ja nativo@80gm ja amistar top@200ml ja indofil di avtar@400gm ja hexaconazole@300ml prati acre de hisaab nal 150ltr pani de nal mila ke spray kro. jekar jhone de vich kala tela pai gya hai tan iss di roktham de lyi Glamore di dosage 50gm prati acre hai. chess di dosage 120gm prati acre hai ate dentop di dosage 35gm per acre hai. ihh saria jhone de vich tele di roktham krdia hnn. Chess ate glamore di spray 10-15% tela pain te kro ja iss ton v pehla kro. iss ton ilava ik oswal di black gold de nam te dwaayi aundi hai. Iss di matra 250ml per acre hai. Ihh sasti v hai ate result v wdia hai. 
Posted by Nirvair Singh
Punjab
19-09-2019 05:07 PM
Punjab
09-19-2019 06:29 PM
ehh Cross nasal di hai isde dhudh da record isde parents de dhudh de record te nirbhar krda hai, jekar isdi maa de dhudh da record vdia c tan isde dhudh v vdia howega, baki tuci isdi khurak ate dekhbhal da purra dian rkho ate her 3 mahine badd pett de kiria lai goli jrur deo..
Posted by Major Sandhu
Punjab
19-09-2019 04:56 PM
Punjab
09-19-2019 05:19 PM
major ji chamak de layi tuc NPK 130045 @1 kilo nu prati acre de hisab nal spray karo. jekar jhone de vich kala tela pai gya hai tan iss di roktham de lyi Glamore di dosage 50gm prati acre hai. chess di dosage 120gm prati acre hai ate dentop di dosage 35gm per acre hai. ihh saria jhone de vich tele di roktham krdia hnn. Chess ate glamore di spray 10-15% tela pain te kro ja iss ton v pehla kro. iss ton ilava ik oswal di black gold de nam te dwaayi aundi hai. Iss di matra 250ml per acre hai. Ihh sasti v hai ate result v wdia hai. 
Posted by Vikas Patidar
Madhya Pradesh
19-09-2019 04:40 PM
Punjab
09-24-2019 06:00 PM
विकास जी कृपया आप इसकी जड़ों में दीमक चेक करें अगर मौजूद है तो आप इसके ऊपर chlorpyriphos @4ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by goldy
Punjab
19-09-2019 04:35 PM
Punjab
12-13-2019 12:30 PM
Shrimaan ji, yeh fungus ke hamle ke karan hua hai, iski roktham ke liye ap carbendazim @ 4gm ya mancozeb @ 4m prati liter apni ke hisaab se spray karo, dhanwad
Posted by niraj
Madhya Pradesh
19-09-2019 04:28 PM
Punjab
09-19-2019 05:14 PM
niraj ji mirch men thrips ki roktham ke liye imidacloprid@1.5ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Surendra Kumar Sahu Surendra
Chattisgarh
19-09-2019 04:27 PM
Punjab
12-17-2019 04:24 PM
श्रीमान जी, अगर अपने ह्यूमिक एसिड का इस्तेमाल कर लिया है तो अभी आपको किसी और खाद का इस्तेमाल करणे की जरुरत नहीं है, धन्यवाद
Posted by tejinder singh
Punjab
19-09-2019 04:22 PM
Punjab
09-20-2019 05:27 PM
Tejinder ji ehh kudarti hai, jddo janwar vdia growth krda howe sarir walo fitt howe tan ohh vdia heat vich aawega, isde lai kujj den di jrurat nhi hai...
Posted by Vishnumirotha
Madhya Pradesh
19-09-2019 04:09 PM
Punjab
09-19-2019 04:24 PM
Vishnumirotha ji yeh keet ke hamle ke karn hota hai iske liye aap imidacloprid @1.5ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.
Posted by satwinder singh
Punjab
19-09-2019 04:05 PM
Punjab
09-19-2019 06:32 PM
tuci uss nu Gestaprojen powder 25gm rojana deo, ehh tuci 20 din tak dinde rho jekar ohh gaban hoi tan rukk jawegi jekar gaban naa hoi tan dubara heat vich aa jawegi..
Posted by Vishnumirotha
Madhya Pradesh
19-09-2019 04:03 PM
Punjab
09-19-2019 05:35 PM
Vishnumirotha ji polyhouse ke bare mein puri jankari or ise lgvane ke liye aap Chander shekhar bangar 9827074545, 8770110731Green More Organic Food Ltd. se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by k.p.tripathi
Uttar Pradesh
19-09-2019 04:00 PM

?

Punjab
10-24-2019 02:06 PM
tripathi ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Mainpal Singh
Uttar Pradesh
19-09-2019 03:55 PM
Punjab
09-19-2019 07:12 PM
यह मिट्टी की कई किस्मों जैसे अच्छे जल निकास वाली लाल दोमट से चिकनी मिट्टी, काली मिट्टी से लैटेराइट मिट्टी में उगाई जाती है यह चट्टानी मिट्टी और हल्की मिट्टी में भी उगाई जा सकती है मिट्टी की गहराई 20-30 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए यह रेतली दोमट से दरमियानी काली मिट्टी जो अच्छे जल निकास वाली हो, में अच्छे पर.... (Read More)
यह मिट्टी की कई किस्मों जैसे अच्छे जल निकास वाली लाल दोमट से चिकनी मिट्टी, काली मिट्टी से लैटेराइट मिट्टी में उगाई जाती है यह चट्टानी मिट्टी और हल्की मिट्टी में भी उगाई जा सकती है मिट्टी की गहराई 20-30 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए यह रेतली दोमट से दरमियानी काली मिट्टी जो अच्छे जल निकास वाली हो, में अच्छे परिणाम देती है पौधे की वृद्धि के लिए मिट्टी pH 6-8 होना चाहिए Satavari (Asparagus racemosus): यह किस्म अफ्रीका, चीन, श्री लंका, भारत और हिमालय में पायी जाती है पौधे की ऊंचाई 1-3 मीटर होती है फूल 3 सैं.मी. लंबे होते और इसके फूल का बाहरी भाग 3 मि.मी. लंबा होता है Satavari (Asparagus sarmentosa Linn.) : यह किस्म सूदरलैंड, बुरशैल और दक्षिण अफ्रीका में पायी जाती है इस पौधे की ऊंचाई 2-4 मीटर लंबी होती है और फूल का बाहरी भाग 1 इंच लंबा होता है शतावरी की खेती के लिए, अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए, ज़मीन की अच्छे से जोताई करें, और 15 सैं.मी. की गहराई में गड्ढा खोदें रोपाई तैयार बैडों पर की जाती है पौधों की रोपाई जून-जुलाई के महीने में की जाती है इसके विकास के अनुसार 4.5x 1.2 मीटर फासले का प्रयोग करें और 20 सैं.मी. गहराई में गड्ढा खोदें जब पौधा 45 सैं.मी. का हो जाए, तब खेत में रोपाई की जाती है अधिक पैदावार के लिए, 400-600 ग्राम बीजों का प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से पहले मिट्टी का रासायनिक उपचार किया जाता है अप्रैल के महीने में बीज बोये जाते हैं शतावरी के बीजों को 30-40 सैं.मी. की चौड़ाई वाले और आवश्यक लंबाई वाले बैडों पर बोया जाता है बिजाई के बाद बैडों को नमी के लिए पतले कपड़े से ढक दिया जाता है 8-10 दिनों में पौधों का अंकुरण शुरू हो जाता है 45 सैं.मी. ऊंचाई के होने पर पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं पौधों की रोपाई 60 x 60 सैं.मी. की मेड़ों पर की जाती है खेत की तैयारी के समय, 80 क्विंटल प्रति एकड़ गली हुई रूड़ी की खाद को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 32 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 52 किलो), और पोटाश 40 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 66 किलो) प्रति एकड़ में डालें मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारियों से पौधे को बचाने के लिए जैविक कीट नाशी जैसे धतूरा, चित्रकमूल और गाय के मूत्र का प्रयोग करें फसल के विकास के समय लगातार गोडाई की आवश्यकता होती है खेत को नदीन मुक्त बनाने के लिए 6-8 हाथ से गोडाई की आवश्यकता होती है पौधों को खेत में रोपण करने के बाद पहली सिंचाई तुरंत कर देनी चाहिए इस फसल को ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं होती इसलिए शुरूआत में 4-6 दिनों के फासले पर सिंचाई कर दें और फिर कुछ समय के बाद सप्ताह के फासले पर सिंचाई करें पुटाई से पहले सिंचाई जरूर करनी चाहिए ताकि गड्ढों मे से जड़ों को आसानी से निकाला जा सके रोपाई के बाद 20-30 महीनों में पौधे की जड़ें परिपक्व हो जाती हैं मिट्टी और जलवायु के आधार पर जड़ें 12-14 महीनों में पक जाती हैं मार्च-मई के महीने में जब बीज पक जाये, तब पुटाई की जाती है पुटाई कसी की सहायता से की जाती है प्रक्रिया और दवाइयां बनाने के लिए अच्छे से पके बीजों की आवश्यकता होती है
Posted by jaswindersidhu6047@gmail.com
Chandigarh
19-09-2019 03:33 PM
Punjab
09-19-2019 03:38 PM
ਜਸਵਿੰਦਰ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਦੱਸੋ ਕੇ ਇਸਦੇ ਉਪਰ ਤੁਸੀ ਕੋਈ ਸਪਰੇ ਕੀਤੀ ਹੈ ਜਾ ਨਹੀਂ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਦੱਸੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by sanjay sharma
Haryana
19-09-2019 03:29 PM
Punjab
12-13-2019 12:25 PM
घर की छत पर बगीची शहरों में जहां घर के अंदर कृषियोग्य जगह बिलकुल नहीं होती वहां सब्जियों की काश्त गमलों में, बक्सों में, पुराने डिब्बे और कटे हुए ड्रम या तरपाल के कंटेनर में की जा सकती है घर छत बगीची में उन सब्जियों को पहल देनी चाहिए जहां कि एक ही पौधे को अधिक फल लगते हों जैसे खीरा, टमाटर, बेंगन, मिर्च, शिमला मि.... (Read More)
घर की छत पर बगीची शहरों में जहां घर के अंदर कृषियोग्य जगह बिलकुल नहीं होती वहां सब्जियों की काश्त गमलों में, बक्सों में, पुराने डिब्बे और कटे हुए ड्रम या तरपाल के कंटेनर में की जा सकती है घर छत बगीची में उन सब्जियों को पहल देनी चाहिए जहां कि एक ही पौधे को अधिक फल लगते हों जैसे खीरा, टमाटर, बेंगन, मिर्च, शिमला मिर्च आदि विदेशी सब्जियां जोकि सलाद के रूप में प्रयोग की जाती हैं जैसे ब्रॉक्ली, सलाद, चीनी बंद गोभी को पहल देनी चाहिए पत्तेदार सब्जियां जैसे पुदीना, धनिया, मेथी जिसके पत्ते खुशबू के लिए प्रयोग किये जाते हैं को भी उगाना चाहिए इलाके की अनुकूलता, परिवार की पसंद और समय अनुसार सब्जियों का चुनाव करके इनकी काश्त सफलतापूर्वक कंटेनरों में की जाती है कंटेनर का चुनाव 12-14 इंच (30-35 सेंटीमीटर ) गहराई के कंटेनर सब्जी उगाने के लिए अनुकूल है पर इनका चुनाव सब्जी जड़ की गहराई के अनुसार करना चाहिए हर कंटेनर में एक स्वास्थ्य पौधा लगाना चाहिए प्याज, सलाद, धनिया, पुदीना आदि के कई पौधे एक कंटेनर में लगाए जा सकते हैं चप्पन कद्दू के 2 पौधे काओ पीज और भिंडी और फ्रांस बीन के 4-5 बीज एक कंटेनर में लगाए जा सकते हैं मूली,शलगम, चकुंदर, पालक, मेथी, धनिये के कई बीज कंटेनर में लगाए जा सकते हैं देखभाल कंटेनर में पौधे बहुत ध्यान और देखभाल मांगते हैं इनकी सिंचाई मौसम, सब्जी की किस्म और कंटेनर के अकार पर निर्भर करती है कंटेनर यदि छत पर रखें हैं तो गर्मियों में दिन में 2 बार (सुबह और शाम) सिंचाई करनी चाहिए सर्दियों में अधिकतर और गर्मियों में कम सिंचाई नुकसानदायक है बरसात ऋतु में पानी के निकास बहुत जरुरी है और कंटेनर को टेढ़ा करके अनावश्यक पानी निकाल देना चाहिए पौधे के बढ़िया विकास और उत्पादन के लिए 2 किलो गली सड़ी रूडी या आधा किलो केंचुए की खाद प्रति वर्ग मीटर रकबे के हिसाब से बिजाई के 3 हफ्ते या पनीरी लगाने के 2 हफ्ते बाद डालनी चाहिए थोड़ी थोड़ी मात्रा में देसी रूडी या केंचुए खाद का प्रयोग बढ़िया परिणाम देता है बेल वाली सब्जियां और काओ पीज के पौधे को सहारे की जरुरत होती है नदीनों की रोकथाम के लिए हाथ के साथ गुड़ाई करते रहें यदि घनी बिजाई की है तो हाथ के साथ नदीन की पुटाई करते रहें *बेल वाली सब्जियों के लिए 2 बीज/ पौधे एक कंटेनर (अकार 40-40 सेंटीमीटर गहरे और 60 सेंटीमीटर चौड़े हों) में दोनों किनारे पर लगाएं और हर कंटेनर को 2 मीटर की आपसी दूरी पर रख कर बेल को तारों पर चढ़ा दें
Posted by sukhbeer nehra
Haryana
19-09-2019 03:25 PM
Maharashtra
09-19-2019 03:41 PM
WH 711 किसम की हाइट 100 -105 cm है यह पकने के लिए 125 -130 दिन का समय लेती है इसकी पैदावार 18 -20 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से होता है धन्यवाद
Posted by mastan kathat
Rajasthan
19-09-2019 03:19 PM
Punjab
09-19-2019 03:48 PM
Mastan kathat ji sabh se pehle to agar aap gae palan ja bakri palan ke lia loan lena chahte hai to aap ke pas goat farming ja dairy farming ki training honi chahia, us ke bad bhi loan ki age or shrenii hoti hai jese ke pashu khreedne ke lia loan, shed bnane ke lia loan, dairy machine len lai loan, Thankyou.
Posted by Rammurti Singh
Uttar Pradesh
19-09-2019 03:11 PM

?

Punjab
09-19-2019 03:43 PM
Rammurti ji iske patton ke neeche keet ka hamla check karen jiske karn patte aise ho jate hai iski roktham ke liye aap imidacloprid@1.5ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Mohan Lal
Punjab
19-09-2019 03:10 PM
Punjab
12-14-2019 05:00 PM
Shrimaan ji, kripya ap bataye ke ap kis fasal ke liye mitti ke bare mein jannna chahte hain, taki apko iske bare mein ucchit jankari di ja sake, dhanywad
Posted by shweta kumari
Bihar
19-09-2019 03:02 PM
Rajasthan
09-19-2019 03:50 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Manu
Maharashtra
19-09-2019 02:57 PM
Punjab
09-19-2019 06:42 PM
आप फीड तैयार करने के लिए 25 किलो मक्की, 20 किलो गेहूं, 5—6 किलो सोयाबीन और थोड़ा मिनरल मिक्सर्च मिक्स करके सुबह और शाम को फीड मुर्गियों को डालें इन्हें भरपूर फीड दें जितनी ये आसानी से खा सकें
Posted by Jagjit Hundal
Punjab
19-09-2019 02:55 PM
Maharashtra
09-19-2019 05:18 PM
ਜਗਜੀਤ ਜੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਕੋਈ ਹੋਰ ਸਪਰੇ ਕਰਨ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by simar
Punjab
19-09-2019 02:49 PM
Punjab
12-17-2019 04:22 PM
Shrimaan ji, eh ik fungicide hai, eh fungus de hamle lai vartea janda hai, isda istemall odo hi kita janda hai jad fasal te fungus da hamla hunda hai, is di matra @ 200 -250 ml prati acre de hisaab nal vartea janda hai, dhanwad
Posted by rajudwivedi
Uttar Pradesh
19-09-2019 02:48 PM
Punjab
09-19-2019 06:01 PM
rajudwivedi ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by sukhjinder Brar
Punjab
19-09-2019 02:48 PM
Punjab
12-06-2019 04:27 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਜਦੋ ਤੇਲੇ ਦਾ ਹਮਲਾ 5 % ਤਕ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਓਦੋ ਹੀ ਇਸਦਾ ਇਸਤੇਮਾਲ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ ਇਸਦੀ dose 60 ml ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Rohi Dullat
Punjab
19-09-2019 02:47 PM
Punjab
12-06-2019 04:12 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਤੇਲੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਤੁਸੀ buprofezin @ 250 ml ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Imran Khan Hasan Imran
Uttar Pradesh
19-09-2019 02:42 PM
Punjab
09-19-2019 04:47 PM
bhai sahib 1 quintal feed da formula Anaaj 40kg khal 30kg chokar or rice 30kg min mix 2kg namak 1kg
Posted by Rohi Dullat
Punjab
19-09-2019 02:38 PM
Punjab
09-19-2019 05:44 PM
Rohi Dullat ji sall 2019-20 vich jhone da smarthan mul (MSP) 1815/q hai, Thankyou.
Posted by GURLAL SINGH GILL
Punjab
19-09-2019 02:34 PM
Punjab
12-17-2019 04:19 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, custodia ਵਿਚ Azoxystrobin 11% + Tebuconazole 18.3% w/w SC ਸਾਲ੍ਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by gurjant
Punjab
19-09-2019 02:22 PM
Punjab
09-19-2019 02:26 PM
gurjant ji eh fasl de uper bimari ja keet de hamle te nirbhar karda hai ke isdi spray kdo karni hai.dhanwad
Posted by gagan faridkot
Punjab
19-09-2019 02:20 PM
Punjab
09-19-2019 04:49 PM
katti da bhaar 270 - 300 kg de aas paas howe isnu rajwa hara chaara te 2kg feed rojana dyo har 3 mahine baad malap rehat karo
Posted by Vibham Saini
Punjab
19-09-2019 02:20 PM
Punjab
09-19-2019 02:26 PM
Vibham ji aap iske uper tilt@200ml ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Harjinder Singh
Punjab
19-09-2019 02:18 PM
Maharashtra
09-27-2019 06:05 PM
iss de vich sheath blight pai gyi hai. iss di roktham de lyi folicur@200ml ja pulsor@200ml ja custodia@300ml ja nativo@80gm ja amistar top@200ml ja indofil di avtar@400gm ja hexaconazole@300ml prati acre de hisaab nal 150ltr pani de nal mila ke spray kro.
Posted by Rajesh Yadav
Haryana
19-09-2019 02:15 PM
Rajasthan
09-19-2019 06:47 PM
यादव जी यदि आप गाय अपने राज्य से बाहर भेजने के बारे में पूछ रहें है तो इसके लिए आप नज़दीकी सरकारी अस्पताल में जाकर मंजूरी लें फिर आप डीसी दफतर से जाकर राज्य के बाहर बेचने के लिए मंजूरी लें फिर आप दूसरे राज्य में उस पशु को बेच सकते है
Posted by GURPREET SINGH SIDHU
Punjab
19-09-2019 02:14 PM
Punjab
12-17-2019 04:25 PM
Shrimaan ji, is vich tuc vermicompost @ 4-5 kg prati podhe de hisaab nal pa sakde ho, dhanwad
Posted by sukhraj sandhu
Punjab
19-09-2019 02:12 PM
Punjab
09-19-2019 06:16 PM
hnji sir sarkar valo free lga ke dita janda hai ji.
Posted by ਗੁਰਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
19-09-2019 02:09 PM
Punjab
12-06-2019 04:10 PM
Shrimaan ji, isdi roktham lai tuc tilt @ 200 ml prati acre de hisaab nal spray karo, dhanwad
Posted by GURPREET SINGH SIDHU
Punjab
19-09-2019 02:08 PM
Punjab
12-17-2019 04:30 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਖੇਤ ਨੂੰ ਇੱਕ ਵਾਰ 20-25 ਸੈ.ਮੀ. ਡੂੰਘਾ ਵਾਹ ਕੇ ਵਧੀਆ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਬੈੱਡ ਬਣਾਓ ਵਾਹੀ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 2-3 ਵਾਰ ਤਵੀਆਂ ਫੇਰੋ ਅਤੇ ਫਿਰ 2-3 ਵਾਰ ਸੁਹਾਗਾ ਫੇਰੋ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਨਮੀ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਬਣਾ ਕੇ ਰੱਖੋ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਦੋ ਢੰਗ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ਤੇ ਵਰਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ: ਵੱਟਾਂ ਅਤੇ ਖਾਲੀਆਂ , ਪੱਧਰੇ ਬੈਂਡਾਂ ਵਾਲਾ ਢੰਗ ਵੱਧ ਝਾੜ ਲੈਣ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਸਹੀ ਸਮੇਂ ਤੇ ਕਰਨੀ ਜਰੂਰੀ ਹ.... (Read More)
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਖੇਤ ਨੂੰ ਇੱਕ ਵਾਰ 20-25 ਸੈ.ਮੀ. ਡੂੰਘਾ ਵਾਹ ਕੇ ਵਧੀਆ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਬੈੱਡ ਬਣਾਓ ਵਾਹੀ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 2-3 ਵਾਰ ਤਵੀਆਂ ਫੇਰੋ ਅਤੇ ਫਿਰ 2-3 ਵਾਰ ਸੁਹਾਗਾ ਫੇਰੋ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਨਮੀ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਬਣਾ ਕੇ ਰੱਖੋ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਦੋ ਢੰਗ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ਤੇ ਵਰਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ: ਵੱਟਾਂ ਅਤੇ ਖਾਲੀਆਂ , ਪੱਧਰੇ ਬੈਂਡਾਂ ਵਾਲਾ ਢੰਗ ਵੱਧ ਝਾੜ ਲੈਣ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਸਹੀ ਸਮੇਂ ਤੇ ਕਰਨੀ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਸਹੀ ਤਾਪਮਾਨ ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ 30-32° ਸੈਲਸੀਅਸ ਅਤੇ ਘੱਟ ਤੋਂ ਘੱਟ 18-20° ਸੈਲਸੀਅਸ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਗੇਤੀ ਬਿਜਾਈ 25 ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ 10 ਅਕਤੂਬਰ ਤੱਕ, ਦਰਮਿਆਨੇ ਸਮੇਂ ਵਾਲੀ ਬਿਜਾਈ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਤੋਂ ਤੀਜੇ ਹਫਤੇ ਅਤੇ ਪਿਛੇਤੀ ਬਿਜਾਈ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਤੀਜੇ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਹਫਤੇ ਤੱਕ ਕਰੋ ਬਸੰਤ ਰੁੱਤ ਲਈ ਜਨਵਰੀ ਦੇ ਦੂਜੇ ਪੰਦਰਵਾੜੇ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਆਲੂਆਂ ਵਿੱਚਕਾਰ 20 ਸੈ.ਮੀ. ਅਤੇ ਵੱਟਾਂ ਵਿੱਚ 60 ਸੈ.ਮੀ ਦਾ ਫਾਸਲਾ ਹੱਥੀਂ ਜਾਂ ਮਕੈਨੀਕਲ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਰੱਖੋ ਫਾਸਲਾ ਆਲੂਆਂ ਦੇ ਆਕਾਰ ਅਨੁਸਾਰ ਬਦਲਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਆਲੂ ਦਾ ਵਿਆਸ 2.5-3.0 ਸੈ.ਮੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਫਾਸਲਾ 60×15 ਸੈ.ਮੀ. ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਆਲੂ ਦਾ ਵਿਆਸ 5-6 ਸੈ.ਮੀ. ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਫਾਸਲਾ 60×40 ਸੈ.ਮੀ. ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ 6-8 ਇੰਚ ਡੂੰਘੀ ਖਾਲੀ ਪੁੱਟੋ ਫਿਰ ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਆਲੂ ਰੱਖੋ ਅਤੇ ਥੋੜਾ ਜਿਹਾ ਜ਼ਮੀਨ ਤੋਂ ਬਾਹਰ ਰਹਿਣ ਦਿਓ ਬਿਜਾਈ ਤੋ ਦੋ ਹਫਤੇ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਸਮੇਂ 200 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਪਾਓ ਫਸਲ ਦੇ ਉਚਿੱਤ ਵਾਧੇ ਲਈ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ 75 ਕਿਲੋ (165 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ), ਫਾਸਫੋਰਸ 25 ਕਿਲੋ (155 ਕਿਲੋ ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ) ਅਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ 25 ਕਿਲੋ (40 ਕਿਲੋ ਮਿਊਰੇਟ ਆੱਫ ਪੋਟਾਸ਼) ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਪਾਓ ਮੋਟੇ ਆਲੂਆਂ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ, 13:0:45 ਦੀ 2 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ ਈ ਡੀ ਟੀ ਏ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਦੇ ਹਮਲੇ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਉੱਲੀਨਾਸ਼ਕ ਪ੍ਰੋਪਿਨੇਬ 3 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਪਾਓ ਆਲੂਆਂ ਦਾ ਆਕਾਰ ਅਤੇ ਗਿਣਤੀ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਹਿਊਮਿਕ ਐਸਿਡ (12%) 3 ਗ੍ਰਾਮ+ਐੱਮ ਏ ਪੀ 12:61:0 ਦੀ 8 ਗ੍ਰਾਮ ਜਾਂ ਡੀ ਏ ਪੀ 15 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਪੌਦੇ ਦੇ ਵਾਧੇ ਸਮੇਂ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by madan lal
Chattisgarh
19-09-2019 02:06 PM
Punjab
12-17-2019 04:27 PM
इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है नदीन रहित और सेहतमंद व.... (Read More)
इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है नदीन रहित और सेहतमंद वृद्धि के लिए ग्लाफोसेट डालनी चाहिए गेहूं की कटाई के बाद ज़मीन पर हरी खाद के तौर पर मई के पहले सप्ताह ढैंचा (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़), या सन (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़) या लोबीया (बीज दर 12 किलोग्राम प्रति एकड़) की बिजाई करनी चाहिए जब फसल 6 से 8 सप्ताह की हो जाए तो इसे खेत में कद्दू करने से एक दिन खेत में ही जोत देना चाहिए इस तरह प्रति एकड़ 25 किलो नाइट्रोजन खाद की बचत होती है भूमि को समतल करने के लिए लेज़र लेवलर का प्रयोग किया जाता है इसके बाद खेत में पानी खड़ा कर दें ताकि भूमि के अंदर ऊंचे नीचे स्थानों की पहचान हो सके इस तरह पानी के रसाव के कारण पानी की होने वाले बर्बादी को कम किया जा सके बिजाई का समय यू पी के सिंचित और निम्न बारानी क्षेत्रों में मध्य जून से शुरूआती जुलाई तक का समय उपयुक्त होता है बीज की गहराई:-पौधे की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए फासला बनाकर लगाने से पौधे ज्यादा पैदावार देते हैं एक एकड़ खेत में 6-8 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से पहले 10 लीटर पानी में 20 ग्राम कार्बेनडाज़िम $ 1 ग्राम स्ट्रैप्टोसाईक्लिन घोल लें और इस घोल में बीजो को 8-10 घंटे तक भिगोयें उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं और फिर बिजाई के लिए प्रयोग करें फसल को जड़ गलन रोग से बचाने के लिए नीचे दिए गए फंगसनाशी का प्रयोग किया जा सकता है पहले रासायनिक फंगीनाशी का प्रयोग करें फिर बीजों का टराईकोडरमा के साथ उपचार करें वैट बैड नर्सरी : यह तकनीक उन क्षेत्रों में अपनाई जाती है जहां पर पानी ज्यादा मात्रा में पाया जाता है नर्सरी का 1/10 हिस्सा दूसरे खेत में लगाया जाता है इसकी बिजाई छींटे द्वारा की जाती है यहां पर खेत की जोताई और खेत को समतल किया जाता है बैडों पर कईं दिन तक नमी बनाए रखनी चाहिए पानी से खेत को ज्यादा ना भरें जब नर्सरी 2 सैं.मी. से वृद्धि कर जाए तब पानी को खेत में लगाते रहना चाहिए बिजाई के 15 दिन बाद 26 किलो यूरिया डालना चाहिए जब नर्सरी 25-30 सैं.मी. तक लंबी हो जाए तब उसे 15-21 दिन बाद दूसरे खेत में लगा देना चाहिए और खेत को लगातार पानी लगाते रहना चाहिए सूखे बैड वाली नर्सरी : यह तकनीक शुष्क क्षेत्रों में अपनाई जाती है जो बैड बनाया जाता है वो बिजाई वाले खेत का 1/10 हिस्से में बीज बोया जाता है बैड का आकार सीमित होना चाहिए और उसकी ऊंचाई 6-10 से.मी होनी चाहिए धान का आधा जला हुआ छिलका बैड पर बिखेर देना चाहिए इससे जड़ें मजबूत होती हैं सही समय पर सिंचाई करते रहना चाहिए और नमी बनाए रखना चाहिए ताकि नए पौधे नष्ट ना हों तत्वों की पूर्ति के लिए खाद डालना जरूरी है मॉडीफाईड मैट नर्सरी : यह नर्सरी लगाने का एक ऐसा तरीका है जिसमें कम जगह और कम बीजों की जरूरत होती है यह नर्सरी किसी भी जगह पर बनाई जा सकती हैं जहां पर समतल जगह हो और पानी की सुविधा हो इसकी पनीरी लगाने के लिए 1% खेत की जरूरत होती है 4 से.मी की सतह पर नए पौधे लगाए जाते हैं इसे बनाने के लिए 1 मीटर चौड़े और 20-30 मीटर लंबे जमीन के टुकड़े की जरूरत होती है इसके ऊपर बिछाने के लिए पॉलीथीन और केले के पत्तों की जरूरत होती है इसके इलावा एक लकड़ी का बकसा जो कि 4 से.मी गहरा होता हैं मिट्टी के मिश्रण से भरा होता है बीजों को इसके अंदर रख देना चाहिए और फिर बीजों को सूखी मिट्टी के साथ ढक देना चाहिए इसके बाद पानी का छिड़काव कर देना चाहिए लकड़ी के बक्से को नमी देते रहना चाहिए बिजाई से 11-14 दिनों के बाद पौध तैयार हो जाती है जब पौध तैयार हो जाती है तब मैट से पौध को दूसरे खेत में रोपण कर दिया जाता है फासला: पौधों का फासला 20x20 सैं.मी. या 25x25 सैं.मी. होना चाहिए पनीरी लगाने का ढंग 1. कद्दू करके लगाई जाने वाली पनीरी : आमतौर पर पंक्ति में लगाए जाने वाले पौधे 20x15 सैं.मी. दूरी पर लगाए जाते हैं और देरी से लगाई जाने वाली पनीरी 15x15 सैं.मी. पर लगाई जाती है नए पौधों की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए 2. बैड बनाकर लगाई जाने वाली पनीरी : यह बैड भारी ज़मीनों के लिए बनाए जाते हैं पनीरी लगाने से पहले खालियों में पानी लगाना चाहिए और फिर पनीरी को खेत में लगाना चाहिए पौधे से पौधे का फासला 9 सैं.मी. होना चाहिए 3. मशीनी ढंग से लगाई जाने वाली पनीरी : मैट पनीरी के लिए मशीनों का प्रयोग किया जाता है यह मशीन 30x12 सैं.मी. के फासले पर पनीरी लगानी चाहिए सिंचित और कम बारानी वाले क्षेत्रों के लिए लगभग 41-50 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 90-110 किलो), 30 किलो फासफोरस (एस एस पी 190 किलो) और 27 किलो पोटाश (म्यूरेट ऑफ पोटाश 45 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा रोपाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर, नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा शाखाएं निकलने के समय और 1/4 हिस्सा बालियां निकलने के समय डालें जल जमाव वाले क्षेत्रों में नाइट्रोजन 30-41 किलो (यूरिया 65-90 किलो) प्रति एकड़ में शुरूआती खुराक के तौर पर डालें कम बारानी क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23-32 किलो (यूरिया 52-70 किलो) और फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो) प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा रोपाई से पहले और बाकी बची नाइट्रोजन बालियां निकलने के समय डालें ऊंचे क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो) और पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के तीन सप्ताह बाद डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटे पहले भाग को बिजाई के 6 सप्ताह बाद और दूसरे भाग को बालियां निकलने के समय डालें रोपाई के 2 से 3 दिन बाद नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 50 ई सी 1200 मि.ली. या थायोबेनकार्ब 50 ई सी 1200 मि.ली. या पैंडीमैथालीन 30 ई सी या प्रैटीलाक्लोर 50 ई सी 600 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें इनमें से किसी एक नदीननाशक को 60 किलो रेत में मिलाकर 4-5 सैं.मी. गहरे खड़े पानी में बुरकाव करें चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए मेटसलफुरॉन 20 डब्लयु पी 30 ग्राम को 150 लीटर पानी में मिलाकर नदीनों के अंकुरण के बाद रोपाई के 20-25 दिन बाद डालें स्प्रे से पहले खेत में खड़े पानी का निकास कर दें और स्प्रे के एक दिन बाद सिंचाई करें नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 1 लीटर को बिजाई के 6 से 7 दिनों के बाद प्रति एकड़ में स्प्रे करें पनीरी लगाने के बाद खेत में दो सप्ताह तक अच्छी तरह पानी खड़ा रहने देना चाहिए जब सारा पानी सूख जाए तो उसके दो दिन बाद फिर से पानी को लगाना चाहिए खड़े पानी की गहराई 10 सै.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए खेत में से बूटी और नदीनों को निकालने से पहले खेत में से सारा पानी निकाल देना चाहिए ओर इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद खेत की फिर से सिंचाई करनी चाहिए पकने से 15 दिन पहले सिंचाई करनी बंद करनी चाहिए ताकि फसल को आसानी से काटा जा सके ऊंची भूमि पर सिंचाई पूरी तरह से बारिश पर निर्भर करती है बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर और पानी की उपलब्धता के आधार पर गंभीर अवस्थाओं में सिंचाई करें जब दाने पूरी तरह पक जायें और फसल का रंग सुनहरी हो जाये तो खड़ी फसल की कटाई कर लेनी चाहिए ज्यादातर फसल की कटाई हाथों से द्राती से या कंबाइन से की जाती है काटी गई फसल के बंडल बनाके उनको छांटा जाता है दानों को बालियों से अलग कर लिया जाता है दानों को बालियों से अलग करने के बाद उसकी छंटाई की जाती है धान की कटाई करने के बाद पैदावार को काटने से लेकर प्रयोग तक नीचे लिखी प्रक्रिया अपनाई जाती है 1.कटाई 2. छंटाई 3. सफाई 4. सुखाना 5. गोदाम में रखना 6.पॉलिश करना और इसके बाद इसे बेचने के लिए भेजना दानों को स्टोर करने से पहले इन्हें कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए 10 किलोग्राम दानों के लिए 500 ग्राम नीम के पाउडर को मिलाना चाहिए स्टोर किए गए दानों को कीटों के हमले से बचाने के लिए 30 मि.ली. मैलाथियोन 50 ई.सी. को 3 लीटर पानी में घोल तैयार करके इसका छिड़काव करना चाहिए इस घोल का छिड़काव 100 वर्ग मीटर के क्षेत्र में हर 15 दिनों के बाद करना चाहिए
Posted by Ashok Kumar Nagar
Rajasthan
19-09-2019 02:03 PM
Punjab
12-07-2019 05:44 PM
श्रीमान जी, इसे आप folicur @200ml प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by ਸਰਦਾਰ ਗੁਰਭੇਜ ਸਿੰਘ
Punjab
19-09-2019 02:02 PM
Punjab
09-19-2019 09:41 PM
tuci uss nu Vitol liquid 10-10ml swere sham deo, ehh Gohealthy company da product hai iss nal frak paa jawega.
Posted by mannu sharma
Punjab
19-09-2019 01:58 PM
Punjab
09-19-2019 04:51 PM
bhaa G isnu rajwa hara chaara te har 4kg dudh lai 1kg feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo sab lagoo