Posted by Mohit Choudhary
Uttar Pradesh
19-09-2019 09:53 PM
Shrimaan ji , kripya ap tidde ki photo bejein taki apko iske bare mein ucchit jawab iya ja sake, dhanywad
Posted by sarbjit singh
Punjab
19-09-2019 09:46 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਇਹ ਫੰਗਸ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੋਇਆ ਹੈ, ਇਸਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਤੁਸੀ tilt @ 200 ml ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by sukhraj sandhu
Punjab
19-09-2019 09:38 PM
jekar tuci apne hisab nal tarr lgaunde ho tan isda khrach nhi milda hai, kyuki sarkar walo machi talab lai subsidy diti jndi hai
Posted by Gautamchaudhary
Uttar Pradesh
19-09-2019 09:38 PM
Shrimaan ji, yeh ek bactericide hai, iska use ap dhaan mein bacteria se hone vali bimariyon ki roktham ke liye kar sakte hain, iski dose @ 6gm prati acre ke hisaab se folicur @ 200 ml ke sath mila kar ki jati hai, dhanywad

Posted by Gurvinder Singh
Uttar Pradesh
19-09-2019 09:37 PM
श्रीमान जी, यह फंगस का हमला हुआ है, इसकी रोकथाम के लिए आप tilt @ 200ml को 150 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद

Posted by Ravi Tiwari
Uttar Pradesh
19-09-2019 09:35 PM
गेहूं की फसल को अच्छे अंकुरन के लिए अच्छी तरह से तैयार, पर ठोस बीज बैड की आवश्यकता होती है पिछली फसल की कटाई के बाद खेत की अच्छे तरीके से ट्रैक्टर की मदद से जोताई की जानी चाहिए खेत को आमतौर पर ट्रैक्टर के साथ तवियां जोड़कर जोता जाता है और उसके बाद दो या तीन बार हल या सुहागे से जोता जाता है खेत की जोताई शाम के समय .... (Read More)
गेहूं की फसल को अच्छे अंकुरन के लिए अच्छी तरह से तैयार, पर ठोस बीज बैड की आवश्यकता होती है पिछली फसल की कटाई के बाद खेत की अच्छे तरीके से ट्रैक्टर की मदद से जोताई की जानी चाहिए खेत को आमतौर पर ट्रैक्टर के साथ तवियां जोड़कर जोता जाता है और उसके बाद दो या तीन बार हल या सुहागे से जोता जाता है खेत की जोताई शाम के समय की जानी चाहिए और रोपाई की गई ज़मीन को पूरी रात खुला छोड़ देना चाहिए ताकि वह ओस की बूंदों से नमी सोख सके प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरना चाहिए बारानी क्षेत्रों में फसल को दीमक के हमले से बचाव के लिए क्लोरपाइरीफॉस 20 ई सी 700 मि.ली. को 5 लीटर पानी में मिलाकर 100 किलो बीजों का उपचार करें उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं पश्चिमी यू पी में, सिंचित और सामान्य बिजाई स्थितियों में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक बिजाई पूरी कर लें और पिछेती बिजाई की स्थितियों में 1 से 25 दिसंबर तक बिजाई पूरी कर लें पूर्वी यू पी के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय 1 नवंबर से 15 नवंबर तक है, जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 से 20 दिसंबर का समय उचित है ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के दूसरे पखवाड़े से लेकर नवंबर का पहला पखवाड़ा है जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 दिसंबर से 20 दिसंबर का समय उचित है निचले पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर मध्य नवंबर तक का है जबकि पिछेती बिजाई के लिए नवंबर का दूसरा पखवाड़ा उचित समय है सामान्य बिजाई के लिए कतारों में 20-22-5 सैं.मी. के फासले की सलाह दी जाती है यदि बिजाई देरी से करनी हो तो 15-18 सैं.मी. का फासला होना चाहिए लंबी किस्मों के लिए 6-7 सैं.मी. की गहराई का प्रयोग करें जबकि अन्य किस्मों के लिए 5-6 सैं.मी. की गहराई का प्रयोग करें बिजाई की विधि:-बीज ड्रिल,बुरकाव विधि छोटे आकार की किस्मों के लिए 40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और मोटे किस्म के बीजों के लिए 50 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें यदि पिछेती बिजाई करनी हो तो 60 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से पहले बीज साफ और छांटे हुए होने चाहिए
Posted by GURPREET SINGH SIDHU
Punjab
19-09-2019 09:33 PM
gurpreet ji isdi katayi January vich kitti jave te boote nu paani ghatt lgaya jave!!! Before flowering plant nu stress (ਔੜ) vich laike aanda jave ta jo flowering vadh ho sake.dhanwad
Posted by ਜਗਮੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
19-09-2019 09:29 PM
ਜਗਮੀਤ ਸਿੰਘ ਜੀ ਤੁਹਾਡਾ ਕੋਈ ਵੀ ਫਸਲਾਂ, ਪਸ਼ੂ ਪਾਲਣ ਦੇ ਸੰਬੰਧ ਵਿਚ ਕੋਈ ਵੀ ਸਵਾਲ ਹੈ ਤੁਸੀ ਇਸ ਐੱਪ ਵਿਚ ਆਪਣਾ ਸਵਾਲ ਮਾਹਿਰਾਂ ਤੋਂ ਪੁੱਛ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਐੱਪ ਵਿਚ ਹੀ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਦਾ ਜਵਾਬ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਧੰਨਵਾਦ ਜੀ
Posted by Gautamchaudhary
Uttar Pradesh
19-09-2019 09:29 PM
Shrimaan ji, yeh ik fungicide hai, yeh fungus ke hamel ki roktham ke liye istemal ki jati hai, dhanywad

Posted by ਨਵਨੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
19-09-2019 09:22 PM
ਨਵਨੀਤ ਸਿੰਘ ਜੀ ਤੁਹਾਡੀ ਮਿਰਚ ਨੂੰ ਥਿਰਪ (ਜੂੰ) ਦਾ ਅਟੈਕ ਆ ਗਿਆ ਹੈ ਇਸ ਉੱਪਰ ਤੁਸੀਂ Dow Daligate ਦੀ ਸਪਰੇ 1 ml 1 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿੱਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਜੀ ਤੇ 15 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਉਸ ਤੇ Bayer Nativo 125 ਗ੍ਰਾਮ 1 ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by PARAMJEET Singh
Uttar Pradesh
19-09-2019 09:21 PM
Paramjeet ji yaddi aap khud ghar per feed tyar krte hai too usme bhutt khrach hota hai aur usme sarir chijje sahi matra mai nhi mill patti, isss liye aap bazar se tyar feed lakar dalen to usme jyada fyada hai aap Godrej ja kisi aur company ki feed dall skte hai.
Posted by Bikram Dhillo
Punjab
19-09-2019 09:18 PM
ਬਿਕਰਮ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਹ ਦੱਸੋ ਕਿ ਉਹ ਹੀਟ ਵਿਚ ਨਹੀਂ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਜਾ ਰਪੀਟ ਹੋ ਰਹੀ ਹੈ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਆਪਣਾ ਸਵਾਲ ਵਿਸਤਾਰ ਨਾਲ ਪੁੱਛੋਂ ਤਾਂ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ

Posted by lovepreet
Punjab
19-09-2019 09:16 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਇਸ ਫਸਲ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅੱਧ-ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਮਹੀਨੇ ਤੱਕ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by ATMA singh
Punjab
19-09-2019 09:16 PM
GADVASU VETERINARY UNIVERSITY LUDHIANA DE ANIMAL NUTRITION NAAL SAMPARK KARO G No 0161 2414040
Posted by Rajendra yadav
Madhya Pradesh
19-09-2019 09:06 PM
राजेंद्र जी कृपया आप बताये के आपने कोनसे फल की खेती के बारे में जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Rajendra yadav
Madhya Pradesh
19-09-2019 09:00 PM

Posted by sunil kumar singh
Uttar Pradesh
19-09-2019 08:54 PM
श्रीमान जी, कपूर के लिए बीज द्वारा: इस विधि में नर्सरी में बिचड़ा तैयार करते हैं इसके लिए ऊँचा नर्सरी बनाते हैं बीज की बुआई वर्षा के आरंभ में न(मई-जून) में करते हैं तथा रोपाई अगस्त माह में करते हैं एक हेक्टेयर के लिए 8-10 किलो बीज की आवश्कता होती है बोई के पहले बीज को पानी में 24 घंटा फुला लेने पर अंकुरण अच्छा होता .... (Read More)
श्रीमान जी, कपूर के लिए बीज द्वारा: इस विधि में नर्सरी में बिचड़ा तैयार करते हैं इसके लिए ऊँचा नर्सरी बनाते हैं बीज की बुआई वर्षा के आरंभ में न(मई-जून) में करते हैं तथा रोपाई अगस्त माह में करते हैं एक हेक्टेयर के लिए 8-10 किलो बीज की आवश्कता होती है बोई के पहले बीज को पानी में 24 घंटा फुला लेने पर अंकुरण अच्छा होता है बीज अंकुरण कम (15-30%) होता है तथा 3-4 सप्ताह समय लगता है नर्सरी में 20-25 सेंटीमीटर के फासले पर २ सेंटीमीटर गहरे कुंड में २-5 सेंटीमीटर की दूरी पर गिराते हैं दो माह के बाद तैयार बिछड़े को (10-12 सेंटीमीटर के होने ) 45 सेंटीमीटर X 50 सेंटीमीटर दूरी पर रोपाई करते हैं कलम द्वारा: कलम जड़ अथवा तना दोनों से लिया जा सकता है जड़ से कलम के लिये पेन्सिल मोटाई के २.5 से 5 सेंटीमीटर लंबाई के छोटे-छोटे टुकड़े कर लेते हैं इसे 5 सेंटीमीटर गहराई पर पौधशाला में लगाते हैं तीन सप्ताह बाद कल्ले आने पर तैयार खेत में रोपाई करते हैं तना से पौधा तैयार करने के लिए 15-20 सेंटीमीटर पेन्सिल मोटाई के कलम बनाते हैं हरेक कलम में 2-3 नोड (गाँठ) रहना जरूरी है कलम को पौधशाला में लगाते है 4-6 सप्ताह में रुटेड कटिंग को तैयार खेत में रोपाई करते है रुट-शूट कटिंग द्वारा भी प्रसारण किया जा सकता है इसमें 5 से.मी. रूट कटिंग के साथ तना का कुछ हिस्सा को (Collar Portion ) भी रखते हैं रुद्राक्ष के लिए : रुद्राक्ष के तने को छील कर उस पर घास व मिट्टी का लेप चढ़ाया जाता है इससे तने में पोषक तत्व का प्रवाह ऊपर की ओर रुक जाता है फिर मिट्टी व घास के लेप को बाइंडिंग कर दिया जाता है जिससे वहां जड़ निकल आते हैं इसके बाद तने को मदर ट्री से काट कर पौधे तैयार किए जाते हैं बीज से तैयार पौधा नहीं करता विकास : वैज्ञानिकों के अनुसार सूबे की जलवायु में इसके बीज से उगने वाले पौधे की तुलना में एयर लेयरिंग तकनीक वाले पौधे में जल्दी फल लगते हैं व इसका विकास भी तेजी से होता है काजू के पौधों को साफ्ट वुड ग्राफ्टिंग विधि से तैयार किया जा सकता है भेंट कलम द्वारा भी पौधों को तैयार कर सकते हैं पौधा तैयार करने का उपयुक्त समय मई-जुलाई का महीना होता है बीज से बादाम उगाने के लिए बहुत धैर्य की जरूरत होती है हमारे पास बादाम के उच्च क्वालिटी के स्वस्थ बीज होने चाहिए ध्यान रखें बादाम का अंकुरण प्रतिशत कम होता है तो आप कम से कम 15 से 20 बीज एक बार में उगाने की कोशिश करें ▪ बादाम के स्वस्थ बीजोंको हम टिशू पेपर में रख कर पानी से भिगो दिया जाता है इस टिश्यू पेपर में रखे बीजों को आप किसी ऐसी जगह रखें जहां लगातार 15 से 20 डिग्री का तापमान बना रहे सर्दियों के समय आप इसे किसी भी जगह रख सकते हैं मौसम गर्म होने पर फ्रिज की सहायता से यह काम किया जा सकता है 20 दिन बाद बादाम के बीजों में अंकुरण शुरू होता है एक बार अंकुरण शुरू हो जाने पर आप बादाम के बीजों को सावधानी से टिशू पेपर से अलग करें उसके बाद बादाम के अंकुरित बीजों को कोकोपीट में लगा दें धीरे -धीरे 40 दिन बाद बादाम का अंकुरण छोटे पौधे का रूप ले लेता है आपको इस समय बादाम को ज्यादा पानी नही देना और गर्मी से बचाकर रखना है चन्दन के लिए एक एकड़ भूमि में कुल 435 पौधों लगाए जा सकते है , पौधों से पौधों की दूरी 10 फुट की होनी चाहिए बीज रोपण हेतु गड्ढ़े का आकार 45cm*45cm*45cm होना चाहिए आमतौर पर, चंदन मई और अक्टूबर के बीच महीनों में प्रत्यारोपित किया जाता है स्थानीय किस्मों के प्रदूषण को रोकने के लिए, इन के बीजों को लगाने के लिए केवल शहरी क्षेत्रों को हीं चुने ना की Protected forest areas को धन्यवाद

Posted by harpreet singh
Punjab
19-09-2019 08:54 PM
harpreet ji isnu phosphorus tat di kami hai isde layi tuc isnu vermicompost @4 kilo prati paudhe de hisab nal pao.dhanwad

Posted by Amandeep singh Rana
Punjab
19-09-2019 08:54 PM
ਅਮਨਦੀਪ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਹ ਦਸੋ ਗਾਂ ਨੂੰ ਮੈਸਟਾਈਟਸ ਵਿਚ ਕਿ ਸਮੱਸਿਆ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਆਪਣਾ ਸਵਾਲ ਵਿਸਤਾਰ ਨਾਲ ਪੁੱਛੋਂ ਤਾਂ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ

Posted by YOGESH
Haryana
19-09-2019 08:43 PM
Yogesh ji pehli varr cross krane ke liye weight 270-300kg tak hona chahiye..

Posted by Bharat singh
Rajasthan
19-09-2019 08:43 PM
श्रीमान जी, 1 एकड़ में 1.6 बीघा होता है, धन्यवाद

Posted by प्रिंस
Bihar
19-09-2019 08:41 PM
प्रिंस जी कृपया बताये कि अपने इसे क्या क्या खाद डाली है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by Jas raj
Rajasthan
19-09-2019 08:36 PM
श्रीमान जी, अरंडी की पूरी फसल को 17-20 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बारिश के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर सिंचाई दें पहली सिंचाई बिजाई के बाद 60-75 दिनों के बाद करें पौधों में फूल निकलने के समय पानी की कमी ना होने दें पकने की अवस्था में सिंचाई बंद कर दें धन्यवाद

Posted by anni
Uttar Pradesh
19-09-2019 08:20 PM
श्रीमान जी, गुलाब पौधे की आवश्यकता के अनुसार कंटेनर को चुनें, 12 इंच (30.5 सेंटीमीटर) कंटेनरों में छोटे गुलाब लग जाता है, जबकि फ्लोरिबुन्ड और हाइब्रिड के लिए १५ इंच (38 सेमी) की आवश्यकता होती है बड़े संकर और वृक्ष गुलाब 18 इंच (45.7 सेमी) या इससे अधिक बड़े मापने वाले कंटेनरों में होना चाहिए एक बात को ध्यान में रखा जाना .... (Read More)
श्रीमान जी, गुलाब पौधे की आवश्यकता के अनुसार कंटेनर को चुनें, 12 इंच (30.5 सेंटीमीटर) कंटेनरों में छोटे गुलाब लग जाता है, जबकि फ्लोरिबुन्ड और हाइब्रिड के लिए १५ इंच (38 सेमी) की आवश्यकता होती है बड़े संकर और वृक्ष गुलाब 18 इंच (45.7 सेमी) या इससे अधिक बड़े मापने वाले कंटेनरों में होना चाहिए एक बात को ध्यान में रखा जाना चाहिए कि कंटेनर में अच्छा जल निकासी होनी चाहिए गमले में गुलाब का विकास करने के लिए, आप गुलाब पौधे के लिए मिट्टी बनाने के लिए निम्न संयोजन कर सकते हैं , साधारण मिट्टी 50%, गोबर खनिज 30%, नीम केक पाउडर 10%, और रेत 10% गुलाब पौधे के लिए सबसे अच्छा खाद जैव खाद जैसे गोबर खनिज, वर्मीकंपोस्ट, कंपोस्ट है गुलाब को बहुत अधिक पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है यदि आप अधिक रासायनिक उर्वरक का उपयोग करते हैं, तो गुलाब का पौधा खराब हो जाता है, आप १५ दिनों में आप गुलाब के पेड़ में खाद डाल सकते हैं हालांकि गुलाब प्लांट में हजारों प्रजातियां हैं, जैसे भारतीय दैनिक, इंग्लिश रोज, डच रोज, ऑस्ट्रेलियाई रोज हैं लेकिन गमले के लिए, आप चीनी गुलाब के पौधे बहुत आसानी से विकसित कर सकते हैं धन्यवाद

Posted by guggu singh
Punjab
19-09-2019 08:17 PM
Guggu ji tuhade sare swala de jwab ditte gye hai tuci aap vich apne swala de jwab dekh skde ho..

Posted by Jas raj
Rajasthan
19-09-2019 08:15 PM
शुरूआती अवस्था में नदीनों की रोकथाम बहुत महत्तवपूर्ण है बिजाई के 20वें और 50वें दिन बाद हाथों से दो बार गोडाई करें बिजाई के दूसरे और तीसरे दिन बाद पैंडीमैथालीन 1 लीटर को 250 लीटर पानी में मिलाकर डालें यह घास और चौड़े पत्तों वाले नदीनों को रोकने में सहायक होगा

Posted by pratap
Uttar Pradesh
19-09-2019 08:09 PM
किसान 444 किस्म महाराष्ट्र की प्राइवेट कंपनी Kisan Agri Technology India Pvt Ltd की है, इसके बीज लेने और अधिक जानकारी के लिए आप Dr T. Y. Mirja 8999542709 से सम्पर्क कर सकते है
Posted by ਨੀਟੂ ਗਰੇਵਾਲ
Punjab
19-09-2019 08:09 PM
BhaaG isnu rajwa hara chaara te har 3kg dudh lai majh nu 1kg feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo feed wadhya pao unj fat hai kini eh v check karo kfat theek lag rahi ae je shuk pawe te dujje thaan to v check karwa lao
Posted by sanwar lal mali
Rajasthan
19-09-2019 08:06 PM
अच्छे निकास वाली और उच्च कार्बनिक पदार्थों वाली मिट्टी जीरे की खेती के लिए उपयुक्त होती है जीरे की खेती के लिए उस ज़मीन का चयन करें जहां 3-4 वर्ष जीरे की खेती ना की गई हो निम्नलिखित किस्में राजस्थान में लगाने के लिए उपयुक्त हैं: RZ 19: यह किस्म राजस्थान के सभी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह 125 दिनों में कट.... (Read More)
अच्छे निकास वाली और उच्च कार्बनिक पदार्थों वाली मिट्टी जीरे की खेती के लिए उपयुक्त होती है जीरे की खेती के लिए उस ज़मीन का चयन करें जहां 3-4 वर्ष जीरे की खेती ना की गई हो निम्नलिखित किस्में राजस्थान में लगाने के लिए उपयुक्त हैं: RZ 19: यह किस्म राजस्थान के सभी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह 125 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसका पौधा लंबा, फूल गुलाबी रंग के, और दाने बड़े होते हैं इसकी औसतन पैदावार 4.2 क्विंटल प्रति एकड़ होती है RZ 209: यह किस्म राजस्थान के सभी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने स्वाह जैसे भूरे रंग के होते हैं यह किस्म 120-125 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 2.4-2.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म पत्तों के ऊपरी धब्बा रोगों की प्रतिरोधक है Gujarat Jeera 2: यह किस्म गुजरात कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित की गई है इसकी औसतन पैदावार 2.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म 100 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है RZ 223: यह मध्यम समय की किस्म है यह किस्म 120-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 2.4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है GC 4: यह किस्म राजस्थान के सभी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने स्वाह जैसे भूरे रंग के होते हैं यह किस्म 120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 2.4-2.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है जीरे की खेती के लिए अच्छी तरह से जोती गई और समतल ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें और मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें जीरे की बिजाई के लिए 15 से 30 नवंबर सही समय होता है कतारों में बिजाई के लिए दो पंक्तियों में 30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को 10 सैं.मी. की गहराई में बोयें एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 4-6 किलो बीज पर्याप्त होते हैं खादों की सही मात्रा के लिए और अतिरिक्त प्रयोग ना करने के लिए मिट्टी की जांच सबसे महत्तवपूर्ण कदम है फसल की अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए नाइट्रोजन 15 किलो (यूरिया 32 किलो) फासफोरस 11 किलो (एस एस पी 66 किलो) और पोटाश 7 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 12 किलो) को गाय के गले हुए गोबर 2 टन के साथ प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के 35 दिनों के बाद डालें बिजाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें दूसरी सिंचाई बिजाई के 10 दिनों के बाद अंकुरण के समय करें उसके बाद तीन सिंचाइयां पर्याप्त होती हैं बाकी की सिंचाइयां बिजाई के 35वें, 60वें और 85वें दिन बाद करें एक बार फसल पक जाये तब सिंचाई ना करें बीज भरने की अवस्था में सिंचाई पत्तों के ऊपरी धब्बा रोग, चेपे और झुलस रोग के हमले को बढ़ाती है जीरे की फसल में नदीन गंभीर समस्या होते हैं नदीनों की जांच के लिए लगातार गोडाई और निराई करें पहली गोडाई बिजाई के 30-35 दिनों के बाद करें जब जीरे की फसल 5 सैं.मी. कद की हो जाये दूसरी गोडाई पहली गोडाई के 20-25 दिन बाद करें और खेत को नदीन रहित रखें रासायनिक रोकथाम के लिए बिजाई के 1-2 दिन बाद पैंडीमैथालीन 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें जीरे की फसल 100-115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है कटाई दरांती की सहायता से की जाती है फसल की कटाई के बाद पौधों को फर्श पर खिलार दें और धूप में सुखाने के लिए छोड़ दें धूप में अच्छे से सुखाने के बाद पौधों से दाने अलग कर लें

Posted by Ajeet vishvakarma
Uttar Pradesh
19-09-2019 08:01 PM
अजीत जी आप आम की किस्मे जैसे Dusheri: यह बहुत ज्यादा क्षेत्रों में उगाया जाता है इसके फल जुलाई के पहले सप्ताह में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं इस किस्म के फलों का आकार छोटे से दरमियाना, रंग पीला, चिकना और गुठली छोटी होती है यह फल ज्यादा देर तक स्टोर किए जा सकते हैं ये फल सदाबहार लगते रहते हैं इसकी औसतन पैदावार 150 .... (Read More)
अजीत जी आप आम की किस्मे जैसे Dusheri: यह बहुत ज्यादा क्षेत्रों में उगाया जाता है इसके फल जुलाई के पहले सप्ताह में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं इस किस्म के फलों का आकार छोटे से दरमियाना, रंग पीला, चिकना और गुठली छोटी होती है यह फल ज्यादा देर तक स्टोर किए जा सकते हैं ये फल सदाबहार लगते रहते हैं इसकी औसतन पैदावार 150 क्विंटल प्रति वृक्ष होती है
Langra: इस किस्म के फलों का आकार दरमियाने से बड़ा, रंग निंबू जैसा पीला और चिकना होता है यह फल रेशे रहित और स्वाद में बढ़िया होते हैं इसके फल का छिल्का दरमियाना मोटा होता है इसके फल जुलाई के दूसरे सप्ताह में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं इसकी औसतन पैदावार 100 किलो प्रति वृक्ष होती है
Chausa: यह पिछेते मौसम की किस्म है इसके फल बड़े और अंडाकार आकार के और हल्के पीले रंग के होते हैं
Ambika: इसके फल मध्यम आकार के, नर्म और मजबूत छिल्का होता है इसके फल गहरे पीले रंग के होते हैं और गहरी लाल रंग की लालिमा देते हैं यह देरी से पकने वाली किस्म है और लगातार फल देती है
Arunika: यह किस्म Amrapali और Vanraj किस्म से तैयार की गई है इस किस्म के फल आकर्षित हल्के लाल रंग के होते हैं

Posted by Naresh
Haryana
19-09-2019 07:59 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by अनवर सिंह भाटी
Rajasthan
19-09-2019 07:58 PM
श्रीमान जी, यह सुंडी का हमला हुआ है, इसकी रोकथाम के लिए आप quinalphos @ 400ml को 150 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें. धनयवाद

Posted by guggu singh
Punjab
19-09-2019 07:57 PM
Guggu ji kirpa krke apna swal post krnn ton badd 24 hours tak intzar kro ji tuhade swal da jwab 24 hours vich mill jawega jekar 24 hours vich jwab nhi milda tan tuci sade help line no. 97799-77641 te sampark kr skde ho..

Posted by lekhram patel
Chattisgarh
19-09-2019 07:54 PM
गेंदे की खेती करना चाहते है से मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इसकी खेती के ल.... (Read More)
गेंदे की खेती करना चाहते है से मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल नहीं है फ्रैंच गेंदे की किस्म हल्की मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म उच्च जैविक खाद वाली मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है प्रसिद्ध किस्में :- African Marigold: इस किस्म की फसल 90 सैं.मी. तक लम्बी होती है इसके फूल बड़े आकार के और लैमन, पीले, सुनहरे, संतरी और गहरे पीले रंग के होते हैं यह लम्बे समय की किस्म है इसकी अन्य किस्में जैसे Giant Double African Orange, Crown of Gold, Giant Double African Yellow, Chrysanthemum Charm, Golden Age, Cracker Jack आदि हैं French Marigold: यह छोटे कद की जल्दी पकने वाली किस्में हैं इसके फूल छोटे आकार के और पीले, संतरी, सुनहरे पीले, लाल जंग और महोगनी रंग के होते हैं इसकी अन्य किस्में जैसे Rusty Red, Butter Scotch, Red Borcade, Star of India, Lemon drop आदि हैं Pusa Basanti Gainda: यह लम्बे समय की किस्म है इसका पौधा 58.80 सैं.मी. लम्बा और गहरे हरे रंग के पत्ते होते हैं इसके फूल सल्फर पीले, दोहरे और कारनेशन किस्म के होते हैं Pusa Narangi Gainda: फूल निकलने के लिए 125-136 दिनों की आवश्यकता होती है इसका पौधा लम्बा और कद में 73.30 सैं.मी. का होता है और पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं इसके फूल संतरी रंग के और कारनेशन किस्म के होते हैं फूल घने और दोहरी परत वाले होते हैं इसके ताजे फूलों की पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए आखिरी जोताई के समय 250 क्विंटल रूड़ी की खाद और अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर मिट्टी में मिलायें गेंदे की बिजाई एक वर्ष में कभी भी की जा सकती है बारिश के मौसम में इसकी बिजाई मध्य जून से मध्य जुलाई में करें सर्दियों में इसकी बिजाई मध्य सितंबर से मध्य अक्तूबर में पूरी कर लें नर्सरी बैड 3x1 मीटर आकार के तैयार करें गाय का गला हुआ गोबर मिलायें बैडों में नमी बनाए रखने के लिए पानी दें सूखे फूलों का चूरा करें और उनका कतार या बैड पर छिड़काव करें जब पौधों का कद 10-15 सैं.मी. हो जाये, तब वे रोपाई के लिए तैयार होते हैं फैंच किस्म को 35x35 सैं.मी. और अफ्रीकी किस्म को 45x45 सैं.मी. के फासले पर रोपाई करें नर्सरी बैड पर बीजों का छिड़काव करें बिजाई के लिए पनीरी ढंग का प्रयोग किया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 600 से 800 ग्राम बीजों की आवश्यकता होती है जब फसल 30-45 दिन की हो जाए, तब पौधे के सिरे से उसे काट दें इससे पौधे को झाड़ीदार और घना होने में मदद मिलती है, इससे फूलों की गुणवत्ता और अच्छा आकार भी प्राप्त होता है बिजाई से पहले बीजों को एजोसपीरियम 200 ग्राम को 50 मि.ली. धान के चूरे में मिलाकर उपचार करें शुरूआती खुराक के तौर पर अच्छी वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 32 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 53 किलो) प्रति एकड़ में डालें मिट्टी की किस्म के अनुसार खाद की खुराक बदल दें सही खुराक देने के लिए मिट्टी की जांच करवायें और उसके आधार पर खुराक दें नदीनों की संख्या के आधार पर गोडाई करें खेत में रोपाई के बाद तुरंत सिंचाई करें कली बनने से लेकर कटाई तक की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है अप्रैल से जून के महीने में 4-5 दिनों के अंतराल पर लगातार सिंचाई करना आवश्यक होता है किस्म के आधार पर गेंदा 2 से 2.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं फ्रैंच गेंदे की किस्म 1.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म दो महीने में तैयार हो जाती है जब गेंदे का पूरा आकार विकसित हो जाये तब उसे तोड़ लें कटाई सुबह के समय और शाम के समय करें फूलों की तुड़ाई से पहले खेत को सिंचित करना चाहिए इससे फूलों की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है इसे आप अपनी नजदीकी फूल मंडी में बेच कर इसे अपनी आय का साधन बना सकते है इसका बीज आप कृषि यूनिवर्सिटी से ले सकते है या नजदीकी नर्सरी से ले सकते है जा फिर गेंदे और गुलाब के बीज लेने के लिए आप प्रेम राज सैनी 9719432296 से सम्पर्क करे धन्यवाद
Posted by Varun Garg
Punjab
19-09-2019 07:52 PM
Varun Garg ji bilofloc vich tusi common corp te singi breed rakh sakde ho ji. ehdi training aje punjab vich kito nai mildi ji tusi haryana vich parvesh ji ka farm visit kar sakte ho. ihna da contact number 9817084445 hai ji.

Posted by chhina saab
Punjab
19-09-2019 07:51 PM
pashu jddo heat vich hunda hai tan bilkul pani vangu saff tara krda hai, varr varr pishab krda hai, usdi suu moti ho jndi hai, pashu varr varr bolda rehnda hai, dujje pashu nu apne uparr chddan dinda hai ja dujia upar chdan lggda hai, ehh kujj nisahian hundia hai heat vich aaye hoye pashu dia, tuci ehh nisahina dekh skde ho..
Posted by baljinder Singh Sandhu
Punjab
19-09-2019 07:51 PM
ਤੁਸੀ ਇੱਕ ਵਾਰ ਮੇਰੇ ਨਾਲ 99156 32577 ਨੰਬਰ ਤੇ ਗੱਲ ਕਰੋ ਜੀ

Posted by Atulya Jain
Chattisgarh
19-09-2019 07:47 PM
अदरक भारत की एक अहम मसाले वाली फसल है यह फसल अच्छे जल निकास वाली चिकनी, रेतली और लाल हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है खेत में पानी ना खड़ा होने दें क्योंकि खड़े पानी में यह ज्यादा देर बच नहीं पाएगी फसल की वृद्धि के लिए 6-6.5 पी एच वाली मिट्टी अच्छी मानी जाती है उस खेत में अदरक की फसल ना उगाएं जहां पिछली बार अदरक की.... (Read More)
अदरक भारत की एक अहम मसाले वाली फसल है यह फसल अच्छे जल निकास वाली चिकनी, रेतली और लाल हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है खेत में पानी ना खड़ा होने दें क्योंकि खड़े पानी में यह ज्यादा देर बच नहीं पाएगी फसल की वृद्धि के लिए 6-6.5 पी एच वाली मिट्टी अच्छी मानी जाती है उस खेत में अदरक की फसल ना उगाएं जहां पिछली बार अदरक की फसल उगाई गई हो हर साल एक ही ज़मीन पर अदरक की फसल ना लगाएं प्रसिद्ध किस्में :-Himgiri, IISR Varanda, IISR Mahima,Suprabha, Suruchi, IISR Rejatha खेत को दो तीन बार जोतें और सुहागे से समतल करें अदरक की बिजाई के लिए आवश्यक लंबाई के 15 सैं.मी. ऊंचे और 1 मीटर चौड़े बैड तैयार करें दो बैडों के बीच 50 सैं.मी. का फासला रखें नदीनों कीटों और बीमारियों की जांच के लिए बैड की मिट्टी को धूप लगवायें इसके लिए बैड को पॉलीथीन शीट से 20-30 दिनों के लिए ढकें रोपाई के समय नीम केक 25 ग्राम को प्रति गड्ढे में डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए राइज़ोम की बिजाई मई के पहले सप्ताह में पूरी कर लें राइज़ोम को कतारों में बोयें और कतार में 40-45 सैं.मी. और दो पौधों में 30 सैं.मी. फासला रखें राइज़ोम की रोपाई के बाद खेत में 50 क्विंटल हरे पत्तों की मलचिंग प्रति एकड़ में करें दूसरी मलचिंग 20 क्विंटल हरे पत्तों के साथ 40 दिनों के बाद करें बीज की गहराई 3-4 सैं.मी. के करीब होनी चाहिए अदरक की बिजाई सीधे ढंग से और पनीरी लगाकर की जा सकती है बिजाई के लिए ताजे और बीमारी रहित गांठों का प्रयोग करें बिजाई के लिए 5-6.5 क्विंटल प्रति एकड़ बीज का प्रयोग करें बिजाई से पहले गांठों को मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी से उपचार करें गांठों को 30 मिनट के लिए घोल में भिगो दें इससे गांठों को फफूंदी से बचाया जा सकता है उपचार के बाद गांठों को 3-4 घंटें के लिए छांव में सुखाएं खेत की तैयारी के समय 60 क्विंटल रूड़ी की खाद प्रति एकड़ मिट्टी में डालें नाइट्रोजन 24 किलो (52 किलो यूरिया), फासफोरस 20 किलो (125 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 20 किलो (35 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें रूड़ी की खाद या गाय का गोबर 60 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की दूसरी मात्रा 20 किलो (45 किलो यूरिया) बिजाई के 45 दिनों के बाद, जबकि बिजाई के 120 दिनों के बाद नाइट्रोजन की तीसरी मात्रा 16 किलो (यूरिया 35 किलो) डालें रोपाई के बाद पहली सिंचाई करें इसे बारानी फसल के तौर पर उगाया जाता है इसलिए बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर सिंचाई करें बारिश की अनुपस्थिति में, बाकी की सिंचाई 10 दिनों के अंतराल पर करें अदरक की पूरी फसल को कुल 16-18 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बिजाई के 3 दिन बाद एट्राज़िन 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की नमी वाली मिट्टी पर स्प्रे करें उन नदीनों को खत्म करने के लिए जो पहली नदीन नाशक स्प्रे के बाद पैदा होते हैं, बिजाई के 12-15 दिनों के बाद गलाइफोसेट 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें नदीन नाशक की स्प्रे करने के बाद खेत को हरी खाद से या धान की पराली से ढक दें जड़ों के विकास के लिए जड़ों में मिट्टी लगाएं बिजाई के 50-60 दिनों के बाद पहली बार जड़ों में मिट्टी लगाएं और उसके 40 दिन बाद दोबारा मिट्टी लगाएं
Posted by chandrika sharma
Uttar Pradesh
19-09-2019 07:46 PM
तिलहनी फसलों के लिए हल्की से भारी ज़मीनें अच्छी होती हैं राया हर तरह की ज़मीन में उगाया जा सकता है पर तोरिये के लिए भारी ज़मीनें चाहिए तारामीरा के लिए आमतौर पर रेतली से मैरा रेतली ज़मीनें अच्छी होती हैं सीड बैड पर बोयी फसल अच्छी अंकुरित होती है ज़मीन को देसी हल से दो या तीन बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद .... (Read More)
तिलहनी फसलों के लिए हल्की से भारी ज़मीनें अच्छी होती हैं राया हर तरह की ज़मीन में उगाया जा सकता है पर तोरिये के लिए भारी ज़मीनें चाहिए तारामीरा के लिए आमतौर पर रेतली से मैरा रेतली ज़मीनें अच्छी होती हैं सीड बैड पर बोयी फसल अच्छी अंकुरित होती है ज़मीन को देसी हल से दो या तीन बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरें बीजों के एकसार अंकुरित होने के लिए बैड नर्म, गीले और समतल होने चाहिए बुंदेलखंड और आगरा क्षेत्रों के लिए, बिजाई के लिए सितंबर का आखिरी सप्ताह उचित समय होता है जबकि बाकी के क्षेत्रों के लिए 15 अक्तूबर तक बिजाई पूरी कर लें असिंचित क्षेत्रों के लिए बिजाई का उपयुक्त समय सितंबर के दूसरे पखवाड़ा होता है तारामीरा-सरसों की बिजाई के लिए पंक्ति से पंक्ति का फासला 30 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 10 से 15 सैं.मी. रखें गोभी सरसों की बिजाई के लिए पंक्तियों का फासला 45 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 10 सैं.मी. रखें बीजों को 4-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें बिजाई के लिए सीड ड्रिल विधि का प्रयोग करें सिंचित और असिंचित क्षेत्रों के लिए 2-2.5 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई के 3-4 सप्ताह पहले 8-10 किलो गली हुई रूड़ी की खाद या अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर मिट्टी में मिलायें खादों की उचित मात्रा के लिए मिट्टी की जांच करना जरूरी है सिंचित हालातों में नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोरस 24 किलो (सुपर फास्फेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें बिजाई के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा डालें और बाकी बची नाइट्रोजन पहली सिंचाई के समय डालें फासफोरस के लिए, यदि एस एस पी का प्रयोग ना किया गया हो तो बिजाई के समय सल्फर 16 किलो प्रति एकड़ में डालें यदि डी ए पी का प्रयोग ना किया गया हो तो जिप्सम 80 किलो प्रति एकड़ में डालें थायोरिया 0.05 प्रतिशत की स्प्रे करने से अनाज की उपज में 10-15 प्रतिशत की वृद्धि होती है

Posted by Suraj Gupta
Chattisgarh
19-09-2019 07:45 PM
श्रीमान जी, चूहों से बचाव के लिए आप नीचे लिखे तरीके प्रयोग कर सकते हैं, पिंजरो का प्रयोग करना - चूहो को पडने के अलग अलग पिजंरो का प्रयोग किया जाता है इन पिजंरो का प्रयोग करने से पहले पिजंरे को अच्छी तरह धोकर प्रयोग करे ताकि किसी भी प्रकार की गंध ना आये साफ पिंजरो को खेत में चूहो के आने जाने वाले रास्ते और नुक्स.... (Read More)
श्रीमान जी, चूहों से बचाव के लिए आप नीचे लिखे तरीके प्रयोग कर सकते हैं, पिंजरो का प्रयोग करना - चूहो को पडने के अलग अलग पिजंरो का प्रयोग किया जाता है इन पिजंरो का प्रयोग करने से पहले पिजंरे को अच्छी तरह धोकर प्रयोग करे ताकि किसी भी प्रकार की गंध ना आये साफ पिंजरो को खेत में चूहो के आने जाने वाले रास्ते और नुक्सान करने वाली जगह पर रखे बडी संखिया में चूहो को पकडने के लिए पिंजरे में 10-15 ग्राम अनाज को तेल लगाकर दो से तीन दिनो तक मुंह खोलकर रखे चुहो को मगर लगाने के बाद पिंजरे के अंदर कागज के टूकडो पर 10-15 ग्राम दाने और नालीदार दाखले पर चुटकी भर दाने रखकर मुंह को बंद कर दे ऐसा करके तीन दिन तक चूहे और पकडे हुए चूहो को पानी में डूबो कर मारे पिंजरो का दौबारा प्रयोग करने के लिए कम से कम 20 दिनो का फासला रखें कीडेमार जहरो के प्रयोग से रोकथाम - चूहो की कीडेमार और जहर के प्रयोग से रोकथाम करने के लिए जहरीला चोगा प्रयोग करने में ध्यान और सही तरीका प्रयोग करने की जरूरत है चुहो को इस जहरीले चोगे को खाना प्रयोग किये दानो का मियारपन , स्वाद, और तेल की गंध पर निर्भर करता है जहरीला चोगा बनाना जिंक फॉसफाइड का प्रयोग - एक किलो बाजरा गेहूं ज्वार का दलिया या इनका मिश्रण लेकर इसमे 20 ग्राम तेल हो सके तो मुंगफली का तेल और 25 ग्राम जिंकफॉसफाइड डाल कर अच्छी तरह मिलाये इस प्रकार तैया किये जहरीले चोगे को कागज की पुडीया बनाकर खेत में गेज वाली जगह पर रखे बरोमोडाइओलोन का प्रयोग - 20 ग्राम बरोमोडाइओलोन 0 005 फीसदी पाऊडर, 20 ग्राम बूरा खंड, और 20 ग्राम तेल को एक किलो किसी भी अनाज के दलिये में मिलाये और पूरे खेत में 40 जगह पर रख दें रैकुमिन का प्रयोग- 50 ग्राम रैकुमिन 0 0375 फीसदी पाऊडर , 20 ग्राम मुंगफली या सूरजमुखी का तेल और 20 ग्राम बूरा खंड को किसी भी अनाज के दलीये में मिलाये यह भी चूहो को मारने में बहुत फायदेमंद है धन्यवाद

Posted by Purushottam dixena
Chattisgarh
19-09-2019 07:43 PM
Posted by hariom mal
Rajasthan
19-09-2019 07:41 PM
kripya aap apna swal vistar se btayen aap cow milk ke vare mai jankari lena chahteh hai ya buffalo milk ke vare mai aur woh byaa chuuki ha ya byane wali hai, kripya aap vistar se apna swal pushen tan jo apko sahi jankari di jaa skee..

Posted by Nadeem
Uttar Pradesh
19-09-2019 07:41 PM
Nadeem ji kripya aap yeh btayen ki apke dhan mai smasia kya aa rehi hai, aap vistar se apna swal pushen tan jo apko sahi jankari di jaa skee..
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