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Posted by Sukhmeet singh badesha
Punjab
24-09-2019 06:00 PM

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Punjab
09-24-2019 09:19 PM
Posted by Sp singh Rathod
Uttar Pradesh
24-09-2019 05:57 PM
Maharashtra
09-25-2019 05:02 PM
धान में तेले की रोकथाम के लिए आप glamore @50 ग्राम को प्रति एकर के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Sp singh Rathod
Uttar Pradesh
24-09-2019 05:52 PM

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Punjab
09-25-2019 03:06 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Harpal singh
Uttar Pradesh
24-09-2019 05:49 PM
Punjab
09-24-2019 09:23 PM
Posted by kuldeep
Jharkhand
24-09-2019 05:42 PM
Punjab
10-01-2019 06:30 PM
Kuldeep ji PPR bakrio mai vaccination ki jatti hai iske vare mai puri jankari ke liye aap iss link per click krke video dekh skte hai https://www.youtube.com/watch v=oQ0ClCT6XQ0
Posted by lucky
Madhya Pradesh
24-09-2019 05:38 PM
Punjab
12-04-2019 04:53 PM
Shrimaan ji, aap isme NPK 191919 @ 10 gm prati liter pani ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by Bhagva singh
Rajasthan
24-09-2019 05:31 PM
Punjab
09-26-2019 10:17 AM
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं .... (Read More)
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं है तो तो आप अमृतपाल सिंह बराड़ प्रोफेसर, पीएयू लुधियाना इस वीडियो संबंधी विचार पड़ सकते हैं, यह फसल केसर की नहीं है, यह फसल कसुंबडे की है, इसे अंग्रेजी में Safflower कहते है, और विज्ञानं में इसे Carthamus tinctorius कहते है
Posted by Achlaram Kanasar
Rajasthan
24-09-2019 05:30 PM

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Punjab
09-25-2019 03:06 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Anurag Kharwar
Uttar Pradesh
24-09-2019 05:30 PM
Rajasthan
09-25-2019 10:21 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Pavan Waghmare
Maharashtra
24-09-2019 05:29 PM
Rajasthan
09-25-2019 10:21 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by pushkar Rajput
Madhya Pradesh
24-09-2019 05:28 PM
Punjab
12-04-2019 04:56 PM
Shrimaan ji, yeh fungus ka hamla hua hai, iski roktham ke liye ap folicur @ 200 ml prati acre ke hisaab se spray karin, dhanywad
Posted by Pavan Waghmare
Maharashtra
24-09-2019 05:25 PM
Rajasthan
09-25-2019 10:22 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Kuldeep Yadav
Uttar Pradesh
24-09-2019 05:16 PM
Punjab
09-24-2019 05:20 PM
Kuldeep ji deemak ki roktham ke liye aap chlorpyriphos @1 litre ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Nadeem
Uttar Pradesh
24-09-2019 05:12 PM
Punjab
09-25-2019 03:08 PM
आप उसे नज़दीकी डॉक्टर से जांच करवायें जिससे उसके थन की सोजिश या कोई ओर समस्या हो तो उसके बारे में पता लगाया जा सके और उसका सही इलाज हो सके
Posted by Daljit Singh
Punjab
24-09-2019 05:11 PM
Maharashtra
09-24-2019 05:16 PM
UNNAT PBW 343: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਯੋਗ ਹੈ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਰਨਾਲ ਬੰਟ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਅਤੇ ਬਲਾਈਟ ਨੂੰ ਵੀ ਸਹਿਣ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਔਸਤ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PBW 725: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੀ ਏ ਯੂ, ਐਗਰੀਕਲਚਰ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੁਆਰਾ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਮੱਧਰੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾ.... (Read More)
UNNAT PBW 343: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਯੋਗ ਹੈ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਰਨਾਲ ਬੰਟ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਅਤੇ ਬਲਾਈਟ ਨੂੰ ਵੀ ਸਹਿਣ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਔਸਤ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PBW 725: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੀ ਏ ਯੂ, ਐਗਰੀਕਲਚਰ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੁਆਰਾ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਮੱਧਰੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੇ ਅਤੇ ਭੂਰੇ ਜੰਗ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦੇ ਦਾਣੇ ਮੋਟੇ , ਅਤੇ ਗਹਿਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਸਲਾਨਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
Posted by sukhvirsingh
Punjab
24-09-2019 05:05 PM
Punjab
09-25-2019 03:09 PM
Tuci Vitum-H liquid 10-10ml swere sham de skde ho..
Posted by sukhpal ghuman
Punjab
24-09-2019 05:04 PM
Punjab
12-04-2019 05:00 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ ਤੁਸੀ ਗੋਭੀ ਦੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ ਕੇ Pusa Snowball 1, Pusa Snowball K-1ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਅਗੇਤੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਲਈ 45x30 ਸੈ:ਮੀ: ਦਾ ਫਾਸਲਾ ਰੱਖੋ ਬੀਜ ਨੂੰ 1-2 ਸੈ:ਮੀ: ਡੂੰਘਾ ਬੀਜਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਨਰਸਰੀ ਵਿੱਚ ਬੀਜ ਬੀਜੋ ਅਤੇ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਅਤੇ ਜਰੂਰਤ ਅਨੁਸਾਰ ਖਾਦਾਂ ਪਾਉ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 25-30 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਪੌਦੇ ਜਾਂ ਪਨੀਰੀ ਨਵੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਪਨੀਰੀ ਲ.... (Read More)
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ ਤੁਸੀ ਗੋਭੀ ਦੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ ਕੇ Pusa Snowball 1, Pusa Snowball K-1ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਅਗੇਤੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਲਈ 45x30 ਸੈ:ਮੀ: ਦਾ ਫਾਸਲਾ ਰੱਖੋ ਬੀਜ ਨੂੰ 1-2 ਸੈ:ਮੀ: ਡੂੰਘਾ ਬੀਜਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਨਰਸਰੀ ਵਿੱਚ ਬੀਜ ਬੀਜੋ ਅਤੇ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਅਤੇ ਜਰੂਰਤ ਅਨੁਸਾਰ ਖਾਦਾਂ ਪਾਉ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 25-30 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਪੌਦੇ ਜਾਂ ਪਨੀਰੀ ਨਵੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਪਨੀਰੀ ਲਈ 3-4 ਹਫਤੇ ਪੁਰਾਣੇ ਪੌਦੇ ਹੀ ਵਰਤੋ ਜਲਦੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦਾ ਬੀਜ 500 ਗ੍ਰਾਮ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਮੁੱਢਲੀ ਰੁੱਤ ਦੇ ਸਮੇਂ ਅਤੇ ਦੇਰ ਨਾਲ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਲਈ ਬੀਜ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਖੇਤ ਵਿਚ 40 ਟਨ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਗਲੀ ਹੋਈ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਪਾਉ ਤੇ ਨਾਲ ਹੀ 50 ਕਿੱਲੋ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ, 25 ਕਿੱਲੋ ਫਾਸਫੋਰਸ ਅਤੇ 25 ਕਿੱਲੋ ਪੋਟਾਸ਼ (110 ਕਿੱਲੋ ਯੂਰੀਆ, 155 ਕਿੱਲੋ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ ਅਤੇ 40 ਕਿੱਲੋ ਮਿਊਰੇਟ ਆਫ ਪੋਟਾਸ਼) ਸਾਰੀ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ , ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ ਅਤੇ ਮਿਊਰੇਟ ਆਫ ਪੋਟਾਸ਼ ਅਤੇ ਅੱਧਾ ਯੂਰੀਆ ਫ਼ਸਲ ਬੀਜਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ ਪਾਉ ਬਾਕੀ ਬਚਿਆ ਯੂਰੀਆ ਬੀਜਣ ਦੇ ਚਾਰ ਹਫਤੇ ਬਾਅਦ ਪਾ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਚੰਗਾ ਝਾੜ ਲੈਣ ਲਈ ਅਤੇ ਵੱਧ ਫੁੱਲਾਂ ਲਈ 57 ਗ੍ਰਾਮ ਘੁੱਲਣਸ਼ੀਲ ਖਾਦਾਂ (19:19:19) ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤੋ ਕਰੋ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 40 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ 4-5 ਗ੍ਰਾਮ 12:16:0, 2.5-3 ਗ੍ਰਾਮ ਲਘੂ ਤੱਤ ਅਤੇ 1 ਗ੍ਰਾਮ ਬੋਰੋਨ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਘੋਲ ਬਣਾਉਣ ਲਈ 8-10 ਗ੍ਰਾਮ ਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਖਾਦਾਂ (13:00:45) ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਉ ਅਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਮਿੱਟੀ ਦਾ ਪਰੀਖਣ ਕਰਾਉ ਅਤੇ ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ ਦੀ ਘਾਟ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਕਰਨ ਲਈ 5 ਗਾ੍ਮ ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ ਸਲਫੇਟ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਬੀਜਣ ਦੇ 30-35 ਦਿਨਾ ਬਾਅਦ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਅਤੇ ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਦੀ ਕਮੀ ਹੋਣ ਤੇ 5 ਗ੍ਰਾਮ ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਨਾਈਟ੍ਰੇਟ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 30-35 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by sukhpal ghuman
Punjab
24-09-2019 05:03 PM
Punjab
09-27-2019 01:44 PM
Sukhpal ghuman ji 1509 da rate 3300 to 3600 de lagbhag chal reha hai, Thankyou.
Posted by shammi kayamkhani
Rajasthan
24-09-2019 05:01 PM
Punjab
09-25-2019 03:12 PM
iske liye aap apne shedd mai saff safai ka dian rakhen aur unki sme sme per deworming kren aur unko sahi sme per Vaccination krwate rehen, isse aap bimario ko dur rakh skte hai aur apne janwaro ki achi growth krwa skte hai.
Posted by Keshav Sahu
Chattisgarh
24-09-2019 04:45 PM
Punjab
12-04-2019 05:10 PM
Shrimaan ji, karela mein fungus ka hamla hua hai, iski roktham ke liye aap carbendazim @ 4gm prati liter pani ke hisaab se spray karein, or dhan mein sundi ki roktham ke liye fame @ 20 ml prati acre ke hisab se spray karein, dhanywad
Posted by RAVNEET SINGH
Punjab
24-09-2019 04:37 PM
Punjab
09-24-2019 05:11 PM
ravneet ji isde layi tuc tilt @200ml nu prati acre de hisab nal varto isde nal daane kaale honi ruk jande han.dhanwad
Posted by anil
Rajasthan
24-09-2019 04:25 PM
Maharashtra
09-24-2019 05:09 PM
तिलहनी फसलों के लिए हल्की से भारी ज़मीनें अच्छी होती हैं राया हर तरह की ज़मीन में उगाया जा सकता है पर तोरिये के लिए भारी ज़मीनें चाहिए तारामीरा के लिए आमतौर पर रेतली से मैरा रेतली ज़मीनें अच्छी होती हैं सीड बैड पर बोयी फसल अच्छी अंकुरित होती है ज़मीन को देसी हल से दो या तीन बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद.... (Read More)
तिलहनी फसलों के लिए हल्की से भारी ज़मीनें अच्छी होती हैं राया हर तरह की ज़मीन में उगाया जा सकता है पर तोरिये के लिए भारी ज़मीनें चाहिए तारामीरा के लिए आमतौर पर रेतली से मैरा रेतली ज़मीनें अच्छी होती हैं सीड बैड पर बोयी फसल अच्छी अंकुरित होती है ज़मीन को देसी हल से दो या तीन बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरें बीजों के एकसार अंकुरित होने के लिए बैड नर्म, गीले और समतल होने चाहिए सूखे असिंचित क्षेत्रों के लिए 1.5-2 किलो बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें और सिंचित क्षेत्रों के लिए 1.2-1.6 किलो बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें बीज को मिट्टी के अंदरूनी कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए बीजों को 3 ग्राम थीरम से प्रति किलो बीज के हिसाब से उपचार करें चेपा और रंगीली भुंडी से फसल को बचाने के लिए इमीडाक्लोप्रिड 8 मि.ली. से प्रति किलो बीजों का उपचार करें नदीनों की संख्या को देखते हुए दो सप्ताह के अंतराल पर दो से तीन गोडाई और दो निराई करें बिजाई के तीन से चार सप्ताह पहले 8-10 टन रूड़ी की खाद और गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में खादों के सही प्रयोग के लिए मिट्टी की जांच करवायें सिंचित हालातों में 20 किलो नाइट्रोजन (40 किलो यूरिया) और 12-16 किलो फासफोरस (सुपर फासफेट 75 किलो) का प्रयोग करें पोटाश्यिम का प्रयोग केवल मिट्टी में इसकी कमी होने पर ही करें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें और नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा पहली सिंचाई के समय डालें दानों की उपज बढ़ाने के लिए 10-15 प्रतिशत के साथ थियोरिया 0.05 प्रतिशत की स्प्रे करें बिजाई के 30-40 दिनों के बाद पहली सिंचाई करें और दूसरी सिंचाई बिजाई के 70-80 दिनों के बाद करें मिट्टी की किस्म और पानी की उपलब्धता के आधार पर सिंचाई करें फसल पकने के लिए 110-140 दिनों का समय लेती है फसल की कटाई फलियां पीली और बीज सख्त होने पर करें बीजों के झड़ने को रोकने के लिए कटाई सुबह के समय करें द्राती की मदद से बूटो को ज़मीन के नज़दीक से काटें फिर 7-10 दिनों के लिए फसल को सूखने के लिए रखें और सूखने के बाद गहाई करें
Posted by ravish kumar
Bihar
24-09-2019 04:16 PM
Punjab
09-24-2019 05:10 PM
ravish ji kripya aap apna swal vistar se pooch eke aap konsi fasl ke bare men jankari lena chahte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by inderjit
Punjab
24-09-2019 04:09 PM
Punjab
09-25-2019 03:20 PM
tuci hun ton he dena suru kr skde ho, calcium ate powder de skde ho, ehna nal vdia growth howegi.
Posted by Anupam Singh
Uttar Pradesh
24-09-2019 04:08 PM
Maharashtra
09-26-2019 10:32 AM
सफ़ेद मूसली की खेती के लिए 15-35°C तापमान की जरुरत होती है इसकी खेती कई तरह की मिट्टी जैसे कि दोमट से रेतली और बढ़िया निकास वाली में की जा सकती है यह पहाड़ी ढलानों वाली या गीली मिट्टी को भी सहर सकती है यह जैविक तत्वों से भरपूर लाल मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है जल-जमाव वाली स्थिति में इसकी खेती ना करें इस लिए मिट्ट.... (Read More)
सफ़ेद मूसली की खेती के लिए 15-35°C तापमान की जरुरत होती है इसकी खेती कई तरह की मिट्टी जैसे कि दोमट से रेतली और बढ़िया निकास वाली में की जा सकती है यह पहाड़ी ढलानों वाली या गीली मिट्टी को भी सहर सकती है यह जैविक तत्वों से भरपूर लाल मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है जल-जमाव वाली स्थिति में इसकी खेती ना करें इस लिए मिट्टी का pH 6.5-8.5 होना चाहिए आप इसकी किस्मे जैसे RC-2, RC-16, RC-36, RC-20, RC-23, RC-37 and CT-1,MDB-13 and MDB-14 की बिजाई कर सकते है सफेद मूसली के लिए अच्छी तरह से तैयार बैडों की जरूरत होती है बिजाई से पहले ज़मीन की तैयारी के लिए एक बार 2-3 गहरी जोताई करें ज़मीन की तैयारी आम-तौर पर अप्रैल-मई के महीने में की जाती है सफेद मूसली की बिजाई के लिए उचित समय जून से अगस्त तक का होता है पौधे के विकास के अनुसार पौधों के बीच 10x12 इंच का फासला रखें इसकी बिजाई नए पौधे मुख्य खेत में रोपाई करके की जाती है इसकी बिजाइसके प्रजनन के लिए आम-तौर पर गांठों या बीजों का प्रयोग करें इसके उचित विकास के लिए 450 किलो बीजों का प्रयोग करें ई नए पौधे मुख्य खेत में रोपाई करके की जाती है सफेद मूसली की बिजाई 1.2 मीटर चौड़े और आवश्यकता अनुसार लम्बे बैडों पर करें नए पौधे तैयार करने वाले बैड अच्छी तरह से तैयार करें इसकी बिजाई छिड़काव के द्वारा की जाती है बिजाई के बाद बैडों को हल्की मिट्टी से ढक दें बढ़िया विकास के लिए मलचिंग भी की जा सकती है बीज 5-6 दिनों में अंकुरण होना शुरू होना कर देते है और पौधे बिजाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई से 24 घंटे पहले बैडों को पानी दें, ताकि नए पौधों को आसानी के साथ उखाड़ा जा सके खेत की तैयारी समय, रूड़ी की खाद 80-100 क्विंटल प्रति एकड़ गोबर डालें और मिट्टी में मिलाये जैविक खादें जैसे कि रूड़ी की खाद 8-10 टन प्रति एकड़ डालर मिट्टी में मिलाये सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो, मिउरेट ऑफ़ पोटाश 50 किलो और हड्डियों का चूरा 100 किलो प्रति एकड़ डालें 3 महीने तक कसी की सहायता के साथ गोड़ाई करें और मेंड़ के साथ मिट्टी लगाएं अंकुरण के बाद 2-3 बार करें अगर पौधे के विकास में कोई कमी दिखाई दें, तो तुरंत आवश्यक स्प्रे करें बढ़िया विकास के लिए 20-22 दिनों के फासले पर सिंचाई करें बारिश की ऋतु में, सिंचाई की जरूरत नहीं होती, पर बारिश ना होने पर सिंचाई सही फासले पर करें सिंचाई जलवायु और मिट्टी पर भी निर्भर करती है इस फसल के पौधे बिजाई से लगभग 90 दिन के बाद फल देना शुरू कर देती है इसकी कटाई सितम्बर-अक्तूबर महीने में की जाती है कटाई पत्ते पीले पड़ने और सूखने पर की जाती है इसका बीज आपको लोकल मार्किट में मिल जायेगा
Posted by inderjit
Punjab
24-09-2019 04:04 PM
Punjab
09-25-2019 03:21 PM
tuci Vimeral nu Ostovet vich mix krke deo eh tuci 30ml/100 birds de hisab nal deo ate Broton liquid 20ml/100birds de hisab nal deo ji..
Posted by संदीप कुमार
Uttar Pradesh
24-09-2019 04:04 PM
Maharashtra
09-24-2019 05:13 PM
संदीप कुमार जी कृपया आप इसकी फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Sunny Mahey
Punjab
24-09-2019 03:56 PM
Punjab
09-25-2019 03:22 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ 200 ਮਿਲੀ ਲੱਸੀ, 50 ਮਿਲੀ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ, ਅੱਧਾ ਚਮਚ ਹਲਦੀ, ਅੱਧਾ ਚਮਚ ਨਮਕ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮਿਲਾ ਕੇ 5 ਦਿਨ ਪਿਲਾਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ
Posted by Aman Sharma
Punjab
24-09-2019 03:47 PM
Punjab
09-24-2019 06:53 PM
ਵੜੇਵੇ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਪਰ ਇੱਕ ਕਿੱਲੋ 1 ਦਿਨ ਵਿੱਚ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਗਰਮੀ ਦਾ ਕੋਈ ਚੱਕਰ ਨਹੀ ਹੈ ਜੀ, ਇਸ ਤੋ ਬਿਨਾਂ ਤੁਸੀ 2 ਕਿਲੋ ਦਲੀਆ, 1 ਕਿੱਲੋ ਵੜੇਵੇ, ਸਰੋਂ ਦੀ ਖਲ 1 ਕਿੱਲੋ ਦਿਓ ਤੇ ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ 80 ਗ੍ਰਾਮ ਮਿਨਰਲ ਮਿਕਸਚਰ ਤੇ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਨਮਕ ਇੱਕ ਦਿਨ ਵਿੱਚ ਦਿਓ ਹੋਰ ਕੁੱਝ ਦੇਣ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀ ਤੇ ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਵੀ ਬੰਦ ਕਰਕੇ ਦਿਓ ਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਚਾਰੇ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਕੇ ਦਿਓ
Posted by ਜੱਗਸੀਰ ਸਿੰਘ
Punjab
24-09-2019 03:41 PM
Punjab
12-04-2019 05:40 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਤੁਸੀ ਆਪਣੀ ਮਿੱਟੀ ਆਪਣੇ ਨੇੜੇ Krishi Vigyan Kendra, Bathinda Phone 0164-2215619 ਚੋ test ਕਰਵਾਓ ਅਤੇ ਉਸਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਉਸ ਵਿਚ ਖਾਦ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ , ਤਾਂਜੋ ਤੁਹਾਡੇ ਵਲੋਂ ਲਗਾਏ ਗਏ ਬੁੱਟੇ ਸਹੀ ਤਾਰਾ ਉਗ ਸਕਣ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by rk
Rajasthan
24-09-2019 03:38 PM
Punjab
12-04-2019 05:42 PM
Shrimaan ji, Kinnow ek citrus ki variety hai, jo jyada tar Punjab region mein lgai jati hai, dhanywad
Posted by rk
Rajasthan
24-09-2019 03:35 PM
Punjab
09-24-2019 03:41 PM
Rk ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Dhanraj patel
Uttar Pradesh
24-09-2019 03:32 PM
Punjab
09-26-2019 05:34 PM
खेत को एक बार 20-25 सैं.मी. गहरा जोतकर अच्छे ढंग से बैड बनाएं जोताई के बाद 2-3 बार तवियां फेरें और फिर 2-3 बार सुहागा फेरें बिजाई से पहले खेत में नमी की मात्रा बनाकर रखें बिजाई के लिए दो ढंग मुख्य तौर पर प्रयोग किए जाते हैं:1. मेंड़ और खालियों वाला ढंग2. समतल बैडों वाला ढंगअधिक पैदावार के लिए बिजाई सही समय पर करनी जरूरी .... (Read More)
खेत को एक बार 20-25 सैं.मी. गहरा जोतकर अच्छे ढंग से बैड बनाएं जोताई के बाद 2-3 बार तवियां फेरें और फिर 2-3 बार सुहागा फेरें बिजाई से पहले खेत में नमी की मात्रा बनाकर रखें बिजाई के लिए दो ढंग मुख्य तौर पर प्रयोग किए जाते हैं:1. मेंड़ और खालियों वाला ढंग2. समतल बैडों वाला ढंगअधिक पैदावार के लिए बिजाई सही समय पर करनी जरूरी है बिजाई के लिए सही तापमान अधिक से अधिक 30-32° सैल्सियस और कम से कम 18-20° सैल्सियस होता है अगेती बिजाई 25 सितंबर से 10 अक्तूबर तक, दरमियाने समय वाली बिजाई अक्तूबर के पहले से तीसरे सप्ताह तक और पिछेती बिजाई अक्तूबर के तीसरे सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह तक करें बसंत ऋतु के लिए जनवरी के दूसरे पखवाड़े बिजाई का सही समय है बिजाई के लिए आलुओं के बीच में 20 सैं.मी. और मेड़ में 60 सैं.मी. का फासला हाथों से या मकैनीकल तरीके से रखें फासला आलुओं के आकार के अनुसार बदलता रहता है यदि आलू का व्यास 2.5-3.0 सैं.मी. हो तो फासला 60x15 सैं.मी. और यदि आलू का व्यास 5-6 सैं.मी. हो तो फासला 60x40 सैं.मी. होना चाहिए 6-8 इंच गहरी खालियां बनाएं फिर इनमें आलू रखें और थोड़ा सा ज़मीन से बाहर रहने दें बिजाई के ट्रैक्टर से चलने वाली या ऑटोमैटिक बिजाई के लिए मशीन का प्रयोग करें
Posted by kanhaiya lal
Rajasthan
24-09-2019 03:30 PM
Punjab
11-30-2019 05:09 PM
सुरजीत सिंह जी ,सरसों के लिए तापमान 22 - 25 *C तक का हों चाहिए तिलहनी फसलों के लिए हल्की से भारी ज़मीनें अच्छी होती हैं राया हर तरह की ज़मीन में उगाया जा सकता है पर तोरिये के लिए भारी ज़मीनें चाहिए तारामीरा के लिए आमतौर पर रेतली से मैरा रेतली ज़मीनें अच्छी होती हैं इसकी किस्मे जैसे के Pusa अग्रणी, Pusa Mustard 21 ,Pusa Mustard 24 ,NPJ 112 ,Pusa Mustard 26 की.... (Read More)
सुरजीत सिंह जी ,सरसों के लिए तापमान 22 - 25 *C तक का हों चाहिए तिलहनी फसलों के लिए हल्की से भारी ज़मीनें अच्छी होती हैं राया हर तरह की ज़मीन में उगाया जा सकता है पर तोरिये के लिए भारी ज़मीनें चाहिए तारामीरा के लिए आमतौर पर रेतली से मैरा रेतली ज़मीनें अच्छी होती हैं इसकी किस्मे जैसे के Pusa अग्रणी, Pusa Mustard 21 ,Pusa Mustard 24 ,NPJ 112 ,Pusa Mustard 26 की बिजाई आप कर सकते है, सीड बैड पर बोयी फसल अच्छी अंकुरित होती है ज़मीन को देसी हल से दो या तीन बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरें बीजों के एकसार अंकुरित होने के लिए बैड नर्म, गीले और समतल होने चाहिए सरसों की बिजाई का सही समय सितंबर से अक्तूबर है तोरिया फसल की लिए बिजाई सितंबर के पहले पखवाड़े से मध्य अक्तूबर तक कर लेनी चाहिए अफ्रीकी सरसों और तारामीरा की फसल अक्तूबर के आखिर तक बोयी जा सकती है राया फसल की बिजाई मध्य अक्तूबर से नवंबर के आखिर तक की जाती है जब तारामीरा को मुख्य फसल के बीच उगाया जाता है तो इसकी बिजाई मुख्य फसल पर निर्भर करती है तारामीरा-सरसों की बिजाई के लिए पंक्ति से पंक्ति का फासला 30 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 10 से 15 सैं.मी. रखें गोभी सरसों की बिजाई के लिए पंक्तियों का फासला 45 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 10 सैं.मी. रखें बीज 4-5 सैं.मी. गहरे बीजने चाहिए जब तारामीरा या सरसों अलग अलग उगाए जाते हैं तो बीज की मात्रा 1.5 किलोग्राम प्रति एकड़ की जरूरत होती है बिजाई के 3 सप्ताह बाद कमज़ोर पौधों को नष्ट कर दें और सेहतमंद पौधों को खेत में रहने दें बीज को मिट्टी के अंदरूनी कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए बीजों को 3 ग्राम थीरम से प्रति किलो बीज के हिसाब से उपचार करें फसल की बिजाई सिंचाई के बाद करें अच्छी फसल लेने के लिए बिजाई के बाद तीन हफ्तों के फासले पर तीन सिंचाइयों की जरूरत होती है ज़मीन में नमी को बचाने के लिए जैविक खादों का अधिक प्रयोग करें खेत की तैयारी के समय 7-12 टन रूड़ी की खाद का प्रयोग करें खादों के सही प्रयोग के लिए मिट्टी की जांच करवायें अगर आप तोरिये की बिजाई करना चाहते है तो उसके लिए Urea की मात्रा 50 kg प्रति एकर डालें और SSP की मात्रा 55 kg प्रति एकर डालें और अगर आप गोभी सरसों यां राया बीजना चाहते है तोह urea की मात्रा 90 kg प्रति एकर डालें SSP की मात्रा 70 kg प्रति एकर डालें और murait of potash की मात्रा 10 kg प्रति एकर डालें नदीनों की रोकथाम के लिए 2 सप्ताह के फासले पर, जब नदीन कम हो 2-3 गोडाई करें तोरिये की फसल में नदीनों की रोकथाम के लिए फसल उगाने से पहले ट्राइफलूरालिन 400 मि.ली. को 200 लीटर पानी में डालकर प्रति एकड़ पर छिड़काव करें राया की फसल के लिए बिजाई से 2 दिन पहले या बिजाई के 25-30 दिन बाद आइसोप्रोटिउरॉन 75 डब्लयु पी 300 ग्राम को 200 लीटर पानी में डालकर प्रति एकड़ पर बिजाई के बाद स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Amrit singh
Punjab
24-09-2019 03:28 PM
Punjab
09-24-2019 04:58 PM
ਸਿੰਚਾਈ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਅਤੇ ਫਾਸਲਾ ਮਿੱਟੀ, ਜਲਵਾਯੂ ਅਤੇ ਸਿੰਚਾਈ ਦੇ ਸ੍ਰੋਤ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦੇ ਹਨ ਨਵੇਂ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਹਲਕੀ ਅਤੇ ਬਾਰ-ਬਾਰ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਹਲਕੀ ਸਿੰਚਾਈ ਹਮੇਸ਼ਾ ਦੂਜੀ ਸਿੰਚਾਈ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਸਿੱਧ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿੱਚ 5-6 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਅਤੇ ਸਰਦੀਆਂ ਵਿੱਚ ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਫਾਸਲਾ ਵਧਾ ਕੇ 25-30 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਵਰਖਾ ਵਾਲੇ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ.... (Read More)
ਸਿੰਚਾਈ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਅਤੇ ਫਾਸਲਾ ਮਿੱਟੀ, ਜਲਵਾਯੂ ਅਤੇ ਸਿੰਚਾਈ ਦੇ ਸ੍ਰੋਤ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦੇ ਹਨ ਨਵੇਂ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਹਲਕੀ ਅਤੇ ਬਾਰ-ਬਾਰ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਹਲਕੀ ਸਿੰਚਾਈ ਹਮੇਸ਼ਾ ਦੂਜੀ ਸਿੰਚਾਈ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਸਿੱਧ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿੱਚ 5-6 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਅਤੇ ਸਰਦੀਆਂ ਵਿੱਚ ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਫਾਸਲਾ ਵਧਾ ਕੇ 25-30 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਵਰਖਾ ਵਾਲੇ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ ਸਿੰਚਾਈ ਵਰਖਾ ਮੁਤਾਬਕ ਕਰੋ ਫਲ ਬਣਨ ਸਮੇਂ, ਪੌਦੇ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਲਈ 10-12 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਸਿੰਚਾਈ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਫਰਵਰੀ ਦੇ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਖਾਦਾਂ ਪਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਹਲਕੀ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ
Posted by darshan singh
Punjab
24-09-2019 03:20 PM
Punjab
12-04-2019 05:45 PM
Shrimaan ji, is vich tuc syonk da hamla check karo, jekar syonk hove tan tuc is vich chlorpyriphos @ 4ml prati liter pani de hisaab nal spray karo ate eh vi daso ki tuc is da sinchai parbhandhan kive karde ho kyu ki kai var jayda pani lagan nal vi butta suk janda hai, dhanwad