Experts Q&A Search

Posted by Gaurav yadav
Uttar Pradesh
24-09-2019 09:23 PM
Rajasthan
09-25-2019 02:44 PM
Gaurav ji yeh pashu ke hajam krne per nirbhar krta hai kisi v chare ko dene se dhudh kam nhi hota yadi aap sahi trike se usko pashu ko dete hai too uska fyada hota hai, baki silage dene se pashu ki growth achi hoti hai pashu ka liver saff rehta hai jisse dhudh vddh jata hai, aap pashuo ke liye makki ka silage bnnakr dee skte hai..
Posted by Aman
Punjab
24-09-2019 09:05 PM
Punjab
09-25-2019 12:54 PM
Aman ji mushroom seed len lai tusi Nirmal singh 9878811157, 9876306548 nal samparak kar sakde, Thankyou.
Posted by Rajendra Kumar
Uttarakhand
24-09-2019 08:49 PM
Maharashtra
09-25-2019 05:31 PM
ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के दूसरे पखवाड़े से लेकर नवंबर का पहला पखवाड़ा है जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 दिसंबर से 20 दिसंबर का समय उचित है निचले पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर मध्य नवंबर तक का है जबकि पि.... (Read More)
ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के दूसरे पखवाड़े से लेकर नवंबर का पहला पखवाड़ा है जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 दिसंबर से 20 दिसंबर का समय उचित है निचले पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर मध्य नवंबर तक का है जबकि पिछेती बिजाई के लिए नवंबर का दूसरा पखवाड़ा उचित समय है
Posted by gurlal pannu
Punjab
24-09-2019 08:44 PM
Punjab
09-24-2019 09:05 PM
Posted by Rajajan chakravarti
Madhya Pradesh
24-09-2019 08:42 PM
Punjab
09-26-2019 05:55 PM
Posted by tej
Uttar Pradesh
24-09-2019 08:33 PM
Maharashtra
09-25-2019 05:39 PM
जैविक खेती क्या है यह एक तरीका है जिसमें फसलें उगाने के लिए रासायनिक खादों या कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया जाता जैविक खेती से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है और पैदावार की गुणवत्ता में भी वृद्धि होती है ​इसमें खेती के लिए पशुओं और फसलों के व्यर्थ और कुछ बायोफर्टिलाइज़र प्रयोग किए जाते हैंं जैविक खेती के ल.... (Read More)
जैविक खेती क्या है यह एक तरीका है जिसमें फसलें उगाने के लिए रासायनिक खादों या कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया जाता जैविक खेती से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है और पैदावार की गुणवत्ता में भी वृद्धि होती है ​इसमें खेती के लिए पशुओं और फसलों के व्यर्थ और कुछ बायोफर्टिलाइज़र प्रयोग किए जाते हैंं जैविक खेती के लिए वातावरण अनुकूलन विधि है और प्रदूषण को कम करने में मदद करती है विशेषताएं इससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति लंबे समय तक बनी रही है और खेती के लिए मशीनों की कम जरूरत पड़ती है यह अप्रत्यक्ष ढंग से ज़मीन को मित्र सूक्ष्मजीव प्रदान करता है जो घुलनाशील तत्वों को पौधों की वृद्धि के लिए प्रयाग में लाते हैं इस कुदरती तरीके से नाइट्रोजन की कमी पूरी हो जाती है और हमें बार बार खेत में रसायन डालने की जरूरत नहीं पड़ती इससे पशुओं के गोबर और फसलों के बचे कुचे को दोबारा प्रयेाग में लाया जा सकता है जो पशु जैविक ढंग से तैयार की फसलों को खुराक के तौर पर प्रयोग करते हैं उन्हें अधिक संतुलन तत्व मिलते हैं और सेहत भी अच्छी रहती है जैविक खेती करने से जंगली जीवन और कुदरती आवास में सुधार आता है
Posted by Govinda Joshi
Chattisgarh
24-09-2019 08:32 PM
Maharashtra
09-25-2019 05:44 PM
सफ़ेद मूसली की खेती के लिए 15-35°C तापमान की जरुरत होती है इसकी खेती कई तरह की मिट्टी जैसे कि दोमट से रेतली और बढ़िया निकास वाली में की जा सकती है यह पहाड़ी ढलानों वाली या गीली मिट्टी को भी सहर सकती है यह जैविक तत्वों से भरपूर लाल मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है जल-जमाव वाली स्थिति में इसकी खेती ना करें इस लिए मिट्ट.... (Read More)
सफ़ेद मूसली की खेती के लिए 15-35°C तापमान की जरुरत होती है इसकी खेती कई तरह की मिट्टी जैसे कि दोमट से रेतली और बढ़िया निकास वाली में की जा सकती है यह पहाड़ी ढलानों वाली या गीली मिट्टी को भी सहर सकती है यह जैविक तत्वों से भरपूर लाल मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है जल-जमाव वाली स्थिति में इसकी खेती ना करें इस लिए मिट्टी का pH 6.5-8.5 होना चाहिए आप इसकी किस्मे जैसे RC-2, RC-16, RC-36, RC-20, RC-23, RC-37 and CT-1,MDB-13 and MDB-14 की बिजाई कर सकते है सफेद मूसली के लिए अच्छी तरह से तैयार बैडों की जरूरत होती है बिजाई से पहले ज़मीन की तैयारी के लिए एक बार 2-3 गहरी जोताई करें ज़मीन की तैयारी आम-तौर पर अप्रैल-मई के महीने में की जाती है सफेद मूसली की बिजाई के लिए उचित समय जून से अगस्त तक का होता है पौधे के विकास के अनुसार पौधों के बीच 10x12 इंच का फासला रखें इसकी बिजाई नए पौधे मुख्य खेत में रोपाई करके की जाती है इसकी बिजाइसके प्रजनन के लिए आम-तौर पर गांठों या बीजों का प्रयोग करें इसके उचित विकास के लिए 450 किलो बीजों का प्रयोग करें ई नए पौधे मुख्य खेत में रोपाई करके की जाती है सफेद मूसली की बिजाई 1.2 मीटर चौड़े और आवश्यकता अनुसार लम्बे बैडों पर करें नए पौधे तैयार करने वाले बैड अच्छी तरह से तैयार करें इसकी बिजाई छिड़काव के द्वारा की जाती है बिजाई के बाद बैडों को हल्की मिट्टी से ढक दें बढ़िया विकास के लिए मलचिंग भी की जा सकती है बीज 5-6 दिनों में अंकुरण होना शुरू होना कर देते है और पौधे बिजाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई से 24 घंटे पहले बैडों को पानी दें, ताकि नए पौधों को आसानी के साथ उखाड़ा जा सके खेत की तैयारी समय, रूड़ी की खाद 80-100 क्विंटल प्रति एकड़ गोबर डालें और मिट्टी में मिलाये जैविक खादें जैसे कि रूड़ी की खाद 8-10 टन प्रति एकड़ डालर मिट्टी में मिलाये सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो, मिउरेट ऑफ़ पोटाश 50 किलो और हड्डियों का चूरा 100 किलो प्रति एकड़ डालें 3 महीने तक कसी की सहायता के साथ गोड़ाई करें और मेंड़ के साथ मिट्टी लगाएं अंकुरण के बाद 2-3 बार करें अगर पौधे के विकास में कोई कमी दिखाई दें, तो तुरंत आवश्यक स्प्रे करें बढ़िया विकास के लिए 20-22 दिनों के फासले पर सिंचाई करें बारिश की ऋतु में, सिंचाई की जरूरत नहीं होती, पर बारिश ना होने पर सिंचाई सही फासले पर करें सिंचाई जलवायु और मिट्टी पर भी निर्भर करती है इस फसल के पौधे बिजाई से लगभग 90 दिन के बाद फल देना शुरू कर देती है इसकी कटाई सितम्बर-अक्तूबर महीने में की जाती है कटाई पत्ते पीले पड़ने और सूखने पर की जाती है इसका बीज आपको लोकल मार्किट में मिल जायेगा इसका बीज लेने के लिए आप Vivesh Sharma 9826556880 Grow Further से संपर्क कर सकते है धन्यवाद
Posted by Sukhmander Sidhu
Punjab
24-09-2019 08:26 PM
Punjab
09-24-2019 09:05 PM
Posted by Govinda Joshi
Chattisgarh
24-09-2019 08:26 PM
Maharashtra
09-25-2019 05:45 PM
सफ़ेद मूसली की खेती के लिए 15-35°C तापमान की जरुरत होती है इसकी खेती कई तरह की मिट्टी जैसे कि दोमट से रेतली और बढ़िया निकास वाली में की जा सकती है यह पहाड़ी ढलानों वाली या गीली मिट्टी को भी सहर सकती है यह जैविक तत्वों से भरपूर लाल मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है जल-जमाव वाली स्थिति में इसकी खेती ना करें इस लिए मिट्ट.... (Read More)
सफ़ेद मूसली की खेती के लिए 15-35°C तापमान की जरुरत होती है इसकी खेती कई तरह की मिट्टी जैसे कि दोमट से रेतली और बढ़िया निकास वाली में की जा सकती है यह पहाड़ी ढलानों वाली या गीली मिट्टी को भी सहर सकती है यह जैविक तत्वों से भरपूर लाल मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है जल-जमाव वाली स्थिति में इसकी खेती ना करें इस लिए मिट्टी का pH 6.5-8.5 होना चाहिए आप इसकी किस्मे जैसे RC-2, RC-16, RC-36, RC-20, RC-23, RC-37 and CT-1,MDB-13 and MDB-14 की बिजाई कर सकते है सफेद मूसली के लिए अच्छी तरह से तैयार बैडों की जरूरत होती है बिजाई से पहले ज़मीन की तैयारी के लिए एक बार 2-3 गहरी जोताई करें ज़मीन की तैयारी आम-तौर पर अप्रैल-मई के महीने में की जाती है सफेद मूसली की बिजाई के लिए उचित समय जून से अगस्त तक का होता है पौधे के विकास के अनुसार पौधों के बीच 10x12 इंच का फासला रखें इसकी बिजाई नए पौधे मुख्य खेत में रोपाई करके की जाती है इसकी बिजाइसके प्रजनन के लिए आम-तौर पर गांठों या बीजों का प्रयोग करें इसके उचित विकास के लिए 450 किलो बीजों का प्रयोग करें ई नए पौधे मुख्य खेत में रोपाई करके की जाती है सफेद मूसली की बिजाई 1.2 मीटर चौड़े और आवश्यकता अनुसार लम्बे बैडों पर करें नए पौधे तैयार करने वाले बैड अच्छी तरह से तैयार करें इसकी बिजाई छिड़काव के द्वारा की जाती है बिजाई के बाद बैडों को हल्की मिट्टी से ढक दें बढ़िया विकास के लिए मलचिंग भी की जा सकती है बीज 5-6 दिनों में अंकुरण होना शुरू होना कर देते है और पौधे बिजाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई से 24 घंटे पहले बैडों को पानी दें, ताकि नए पौधों को आसानी के साथ उखाड़ा जा सके खेत की तैयारी समय, रूड़ी की खाद 80-100 क्विंटल प्रति एकड़ गोबर डालें और मिट्टी में मिलाये जैविक खादें जैसे कि रूड़ी की खाद 8-10 टन प्रति एकड़ डालर मिट्टी में मिलाये सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो, मिउरेट ऑफ़ पोटाश 50 किलो और हड्डियों का चूरा 100 किलो प्रति एकड़ डालें 3 महीने तक कसी की सहायता के साथ गोड़ाई करें और मेंड़ के साथ मिट्टी लगाएं अंकुरण के बाद 2-3 बार करें अगर पौधे के विकास में कोई कमी दिखाई दें, तो तुरंत आवश्यक स्प्रे करें बढ़िया विकास के लिए 20-22 दिनों के फासले पर सिंचाई करें बारिश की ऋतु में, सिंचाई की जरूरत नहीं होती, पर बारिश ना होने पर सिंचाई सही फासले पर करें सिंचाई जलवायु और मिट्टी पर भी निर्भर करती है इस फसल के पौधे बिजाई से लगभग 90 दिन के बाद फल देना शुरू कर देती है इसकी कटाई सितम्बर-अक्तूबर महीने में की जाती है कटाई पत्ते पीले पड़ने और सूखने पर की जाती है इसका बीज आपको लोकल मार्किट में मिल जायेगा इसका बीज लेने के लिए आप Vivesh Sharma 9826556880 Grow Further से संपर्क कर सकते है धन्यवाद
Posted by sateyndra
Uttar Pradesh
24-09-2019 08:26 PM
Punjab
09-24-2019 09:07 PM
Amistar syngenta company ka fungicide hai jo dhan mein fungus disease ko control krta hai.eski dose @200 ml per acre ka spray kr skte ho g..
Posted by bhuneshvara
Chattisgarh
24-09-2019 08:20 PM
Punjab
09-25-2019 05:43 PM
Bhuneshvara ji mahu ki roktham ke liye aap glamore@50 gram ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by mahen mandal
Chattisgarh
24-09-2019 08:15 PM
Punjab
12-04-2019 04:50 PM
Shriman ji, aap makai ki varities jaise ke Bio 9681, 900M Gold, Hi-shell, NK 30, Seedtech 2324, PMH 3, PMH 1, NMH 731, DKC 9117, Hybrids Bio 9637, HM 10, DHM 117, HM 9, CMH 08- 282, Hybrids JH 3459, Prakash, Vivek 17,Pusa Hybrid 1, Vivek 21, Vivek 9, Pro 4212 ki bijai kar sakt ehain, dhanywad
Posted by neeraj yadav
Madhya Pradesh
24-09-2019 08:14 PM
Maharashtra
09-25-2019 05:22 PM
नीरज जी यह फंगस के कारण होता है इसके लिए आप carbendazim @4 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें इसके इलावा आप 130045 @1 किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by ਬਲਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
24-09-2019 08:11 PM
Punjab
09-24-2019 09:08 PM
UNNAT PBW 343: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਯੋਗ ਹੈ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਰਨਾਲ ਬੰਟ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਅਤੇ ਬਲਾਈਟ ਨੂੰ ਵੀ ਸਹਿਣ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਔਸਤ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ UNNAT PBW 550: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰ.... (Read More)
UNNAT PBW 343: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਯੋਗ ਹੈ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਰਨਾਲ ਬੰਟ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਅਤੇ ਬਲਾਈਟ ਨੂੰ ਵੀ ਸਹਿਣ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਔਸਤ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ UNNAT PBW 550: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 86 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ PBW 1 Zn: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 103 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 151 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 22.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ PBW 725: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੀ ਏ ਯੂ, ਐਗਰੀਕਲਚਰ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੁਆਰਾ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਮੱਧਰੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੇ ਅਤੇ ਭੂਰੇ ਜੰਗ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦੇ ਦਾਣੇ ਮੋਟੇ , ਅਤੇ ਗਹਿਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਸਲਾਨਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PBW 677: ਇਹ ਕਿਸਮ 160 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 22.4 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ HD 3086 (PusaGautam) : ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ ਅਤੇ ਭੂਰੇਪਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਵਧੀਆ ਕਿਮਸ ਦੇ ਬਰੈੱਡ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਸਾਰੇ ਗੁਣ/ਤੱਤ ਇਸ ਵਿਚ ਮੌਜੂਦ ਹਨ WH 1105: ਇਸ ਦੀ ਕਾਢ ਪੰਜਾਬ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵੱਲੋਂ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਛੋਟੇ ਕੱਦ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੂਟੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 97 ਸੈ.ਮੀ. ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਸੁਨਹਿਰੇ, ਮਧਰੇ, ਸਖਤ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ ਅਤੇ ਭੂਰੇਪਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਰੰਤੂ ਇਹ ਦਾਣਿਆਂ ਦੇ ਖਰਾਬ ਹੋਣ ਅਤੇ ਸਿੱਟਿਆਂ ਦੇ ਭੂਰੇ ਪੈਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਪ੍ਰਤੀ ਸੰਵੇਦਨਸ਼ੀਲ ਹੈ ਇਹ ਲਗਭਗ 157 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.1 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ HD 2967: ਇਹ ਵੱਡੇ ਕੱਦ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੂਟੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 101 ਸੈ.ਮੀ. ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਸੁਨਹਿਰੇ, ਮਧਰੇ, ਸਖਤ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਲਗਭਗ 157 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 21.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PBW 621: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 158 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 100 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈI
Posted by AaTish SuThar
Haryana
24-09-2019 08:09 PM
Punjab
09-24-2019 09:10 PM
shrimaan g cotton da price approximately 5200-5250 rupees per quiental chl rha hai g..
Posted by ਬਲਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
24-09-2019 08:09 PM
Haryana
09-25-2019 05:45 PM
ਤੁਸੀ ਕਣਕ ਦੀਆਂ ਹੇਠ ਦਿਤੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ :-UNNAT PBW 343: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਯੋਗ ਹੈ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਰਨਾਲ ਬੰਟ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਅਤੇ ਬਲਾਈਟ ਨੂੰ ਵੀ ਸਹਿਣ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਔਸਤ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ UNNAT PBW 550: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾਂ ਵ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਕਣਕ ਦੀਆਂ ਹੇਠ ਦਿਤੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ :-UNNAT PBW 343: ਇਹ ਕਿਸਮ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਯੋਗ ਹੈ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਰਨਾਲ ਬੰਟ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਅਤੇ ਬਲਾਈਟ ਨੂੰ ਵੀ ਸਹਿਣ ਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੀ ਔਸਤ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.2 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ UNNAT PBW 550: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 145 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 86 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ PBW 1 Zn: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 103 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 151 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 22.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ PBW 725: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੀ ਏ ਯੂ, ਐਗਰੀਕਲਚਰ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੁਆਰਾ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਮੱਧਰੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੇ ਅਤੇ ਭੂਰੇ ਜੰਗ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਰੋਧੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦੇ ਦਾਣੇ ਮੋਟੇ , ਅਤੇ ਗਹਿਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ 155 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਸਲਾਨਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PBW 677: ਇਹ ਕਿਸਮ 160 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 22.4 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ HD 3086 (PusaGautam) : ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ ਅਤੇ ਭੂਰੇਪਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਵਧੀਆ ਕਿਮਸ ਦੇ ਬਰੈੱਡ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਸਾਰੇ ਗੁਣ/ਤੱਤ ਇਸ ਵਿਚ ਮੌਜੂਦ ਹਨ WH 1105: ਇਸ ਦੀ ਕਾਢ ਪੰਜਾਬ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵੱਲੋਂ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਛੋਟੇ ਕੱਦ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੂਟੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 97 ਸੈ.ਮੀ. ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਸੁਨਹਿਰੇ, ਮਧਰੇ, ਸਖਤ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ ਅਤੇ ਭੂਰੇਪਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਰੰਤੂ ਇਹ ਦਾਣਿਆਂ ਦੇ ਖਰਾਬ ਹੋਣ ਅਤੇ ਸਿੱਟਿਆਂ ਦੇ ਭੂਰੇ ਪੈਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਪ੍ਰਤੀ ਸੰਵੇਦਨਸ਼ੀਲ ਹੈ ਇਹ ਲਗਭਗ 157 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 23.1 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ HD 2967: ਇਹ ਵੱਡੇ ਕੱਦ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੂਟੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 101 ਸੈ.ਮੀ. ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਸੁਨਹਿਰੇ, ਮਧਰੇ, ਸਖਤ ਅਤੇ ਚਮਕਦਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਲਗਭਗ 157 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 21.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PBW 621: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਾਰਿਆਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 158 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੀਲੀ ਅਤੇ ਭੂਰੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 100 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈI
Posted by Joginder Rai
Punjab
24-09-2019 07:53 PM
Posted by ਗੁਰਕੀਰਤ ਸਿੰਘ
Punjab
24-09-2019 07:34 PM
Punjab
09-25-2019 03:00 PM
Hanji tuci uss nu Anabolite mix liquid ate Gouge powder de skde ho, ehna nal pashu di kamjori durr rehndi hai ate dhudh v vdhh jnda hai .
Posted by Lakhwinder Singh
Punjab
24-09-2019 07:33 PM
Punjab
09-25-2019 09:20 PM
tuci uss nu Teramycin injection 5ml, Milonex plus injection 2ml lgwao ate 3 din lgwao, iss nal frak paa jawega.
Posted by Ruchika Gangber
Chattisgarh
24-09-2019 07:33 PM
Punjab
09-25-2019 03:01 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Pargat Singh
Punjab
24-09-2019 07:27 PM
Punjab
09-25-2019 03:02 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Lactomood ਹੋਮਿਓਪੈਥਿਕ ਦਵਾਈ ਦੀਆ 10-10 ਬੂੰਦਾਂ ਦਿਨ ਵਿਚ 3 ਵਾਰ ਦਿਓ ਅਤੇ leptaden tablet 10-10 ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ Milkout ਪਾਊਡਰ 1-1 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਅਤੇ Anabolite liquid 100ml ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..
Posted by AVTAR SINGH
Punjab
24-09-2019 07:24 PM
Punjab
09-24-2019 07:51 PM
Posted by ram
Uttar Pradesh
24-09-2019 07:17 PM
Punjab
09-24-2019 07:55 PM
tarbooj ki kheti ki jankari ke liye aap iss link par jakar click krein. https://www.apnikheti.com/hn/pn/%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A4%BF/%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80/%E0%A4%AB%E0%A4%B2/%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%AC%E0%A5%82%E0%A4%9C
Posted by AJAYSINH CHOUHAN
Gujarat
24-09-2019 07:13 PM
Punjab
09-24-2019 07:56 PM
Kapas mein makhi machar aur tele ki roktham ke liye actara@80gm + imidacloprid@60ml prati acre ke hisaab se spray krein.
Posted by Amar Nath Singh
Uttar Pradesh
24-09-2019 07:11 PM
Maharashtra
09-25-2019 05:15 PM
अच्छे उत्पादन के लिये कुसुम फसल के लिये मध्यम काली भूमि से लेकर भारी काली भूमि उपयुक्त मानी जाती है कुसुम की उत्पादन क्षमता का सही लाभ लेने के लिये इसे गहरी काली जमीन मेें ही बोना चाहिये इस फसल की जड़ें जमीन में गहरी जाती है कुसुम फसल के बीजों को बोनी करने के पूर्व बीजोपचार करना आवश्यक है, जिससे कि फफूंद से ल.... (Read More)
अच्छे उत्पादन के लिये कुसुम फसल के लिये मध्यम काली भूमि से लेकर भारी काली भूमि उपयुक्त मानी जाती है कुसुम की उत्पादन क्षमता का सही लाभ लेने के लिये इसे गहरी काली जमीन मेें ही बोना चाहिये इस फसल की जड़ें जमीन में गहरी जाती है कुसुम फसल के बीजों को बोनी करने के पूर्व बीजोपचार करना आवश्यक है, जिससे कि फफूंद से लगने वाली बीमारियों न हो बीजों का उपचार करने हेतु 3 ग्राम थायरम या ब्रासीकाल फफूंदनाशक दवा प्रति एक किलोग्राम स्वस्थ्य बीज के लिये पर्याप्त है मूँग या उड़द यदि खरीफ मौसम में बोई गई हो तो कुसुम फसल बोने का उपयुक्त समय सितम्बर माह के अंतिम से अक्टूबर माह के प्रथम सप्ताह तक है यदि खरीफ फसल के रुप में सोयबीन बोई है तो कुसुम फसल बोने का उपयुक्त समय अक्टूबर माह के अंत तक है बारानी खेती है और खरीफ में कोई भी फसल नहीं लगाई हो तो सितम्बर माह के अंत से अक्टूबर माह के प्रथम सप्ताह तक कुसुम फसल सफलतापूर्वक बो सकते हैं 8 किलोग्राम कुसुम का बीज प्रति एकड़ के हिसाब से दुफन या फड़क से बोना चाहिये बोते समय कतार से कतार की दूरी 45 से.मी. या डेढ़ फुट रखना आवश्यक है पौधे से पौधे की दूरी 20 से.मी. या 9 इंच रखना चाहिये यह एक सूखा सहनशील फसल है अत: यदि फसल का बीज एक बार उग आये तो इसे फसल कटने तक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती लेकिन जहाँ सिंचाई उपलब्ध हो, वहां, अधिकतम दो सिंचाई कर सकते हैं प्रथम सिंचाई 50 से 55 दिनों पर (बढ़वार अवस्था) और दूसरी सिंचाई 80 से 85 दिनों पर (शाखायें आने पर) करना उचित होता है
Posted by Charnpreet singh
Punjab
24-09-2019 06:51 PM
Punjab
09-24-2019 07:59 PM
Posted by Mostafa Ahmed
Assam
24-09-2019 06:48 PM
Punjab
09-25-2019 03:04 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप किसके बारे में जानकारी लेना चाहते है और उसे समस्या क्या आ रही है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Surender Gujjar
Haryana
24-09-2019 06:43 PM
Punjab
09-24-2019 07:34 PM
bhai sahib rajwa hara chaara te har 3kg dudh lai 1kg wadhya feed pao har 3 mahine baad pet ke kirhe nikalne ki dwaee deo swer shaam taaran v dekho jab taaran disan ta samjo oh boli ae aas karaun da parbandh karo Arhamdi arhingdi na vekho
Posted by
Uttar Pradesh
24-09-2019 06:42 PM
Maharashtra
09-25-2019 05:49 PM
Posted by surya
Madhya Pradesh
24-09-2019 06:40 PM
Punjab
09-24-2019 08:04 PM
surya g jo patto ki upper ki kinaari sookh rhi hai yeh fungus ke kaarn hai...iss mein aap hexaconazole@300ml ja custodia@300ml ja ridomil gold@300ml ja kavach@300gm prati acre ke hisaab se spray kr skte ho.
Posted by Surendra Kumar Sahu Surendra
Chattisgarh
24-09-2019 06:34 PM
Punjab
09-26-2019 05:38 PM
धान के लिए नाइट्रोजन: फासफोरस: पोटाश को 50:12:12 किलोग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से डालने के लिए 110 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़, 75 किलोग्राम सिंगल सुपर फासफेट प्रति एकड़ और 20 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति एकड़ के हिसाब से खेत में डालें खादों को डालने से पहले मिट्टी की जांच करवा लें और मिट्टी की जांच के अनुसार खेत में .... (Read More)
धान के लिए नाइट्रोजन: फासफोरस: पोटाश को 50:12:12 किलोग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से डालने के लिए 110 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़, 75 किलोग्राम सिंगल सुपर फासफेट प्रति एकड़ और 20 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति एकड़ के हिसाब से खेत में डालें खादों को डालने से पहले मिट्टी की जांच करवा लें और मिट्टी की जांच के अनुसार खेत में खादों का उपयोग करना चाहिए यदि मिट्टी की जांच के समय पोटाश और फासफोरस की कमी सामने आती है तो ही इनका प्रयोग करना चाहिए यदि डी ए पी का प्रयोग करना है तो 100 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़, 27 किलोग्राम डी ए पी प्रति एकड़ और 20 पोटाश और फासफोरस की खुराक डालनी चाहिए दूसरी खुराक को पनीरी लगाने के तीन सप्ताह बाद डालना चाहिए और दूसरी खुराक से तीन सप्ताह बाद नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा डालनी चाहिए नीम की परत चढ़े यूरिया का उपयोग करना चाहिए क्योंकि इससे नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ जाती है जिंक की कमी को पूरा करने के लिए 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट हैप्टाहाइड्रेट या 16 किलोग्राम जिंक सल्फेट मोनोहाइड्रेट प्रति एकड़ के हिसाब से उपयोग करना चाहिए पानी की कमी के कारण पनीरी लगाने के तीन सप्ताह बाद पत्तों का रंग पीला पड़ना शुरू हो जाता है पानी लगाने के तुरंत बाद एक किलोग्राम फैरस सल्फेट का 100 लीटर पानी में घोल तैयार करके प्रति एकड़ के हिसाब से प्रत्येक सप्ताह दो या तीन बार इसका छिड़काव करना चाहिए
Posted by Ganpat Singh
Rajasthan
24-09-2019 06:26 PM
Punjab
09-25-2019 05:48 PM
ganpat ji iski jad men aap dheemak ka hamla check karen agar maujood hai to aap iske uper chlorpyriphos @4ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Mostafa Ahmed
Assam
24-09-2019 06:25 PM
Punjab
09-24-2019 06:34 PM
कृप्या आप इन्हें नज़दीकी डॉक्टर से जांच करवायें क्योंकि इनकी जांच करके इनके मरने का सही कारण पता लग सकता है और सही इलाज हो सकता है
Posted by jagnoor randhawa
Punjab
24-09-2019 06:21 PM
Punjab
09-26-2019 04:20 PM
tuci uss nu nazdiki doctor ton check krwao ate ussdi jer kdwa deo ate uss nu vdia company di calcium v deni suru kro.
Posted by jagnoor randhawa
Punjab
24-09-2019 06:19 PM
Punjab
09-26-2019 04:22 PM
tuci uss nu nazdiki doctor ton check krwao ate ussdi jer kdwa deo ate uss nu vdia company di calcium v deni suru kro.
Posted by Sp singh Rathod
Uttar Pradesh
24-09-2019 06:05 PM
Punjab
09-25-2019 06:03 PM
Sp rathod ji yeh sheath blight hai iski roktham ke liye folicur@200ml ja pulsor@200ml ja custodia@300ml ja nativo@80gm ja amistar top@200ml ja indofil di avtar@400gm ja hexaconazole@300ml prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Guruwinder singh
Rajasthan
24-09-2019 06:04 PM
Punjab
10-31-2019 06:41 PM
gurwinder singh ji yeh photo ke according cross breed lag rahi hai ji.
Posted by Neeraj Anantpura
Rajasthan
24-09-2019 06:01 PM
Punjab
12-04-2019 04:54 PM
Shrimaan ji, kripya aap btaye ke apki crop mein kya dikkat a rahi hai, tajo apko uske hisab se smadhan diya ja sake, dhanywad
Posted by Vikram Singh
Haryana
24-09-2019 06:00 PM
Punjab
12-04-2019 04:51 PM
Shrimaan ji, sundi ki roktham ke liye aap quinalphos @ 400 ml prati acre ke hisaab se spray karein, dhanywad