
Posted by GulamAnsari
Jharkhand
25-09-2019 08:04 PM
तिलहनी फसलों के लिए हल्की से भारी ज़मीनें अच्छी होती हैं राया हर तरह की ज़मीन में उगाया जा सकता है पर तोरिये के लिए भारी ज़मीनें चाहिए तारामीरा के लिए आमतौर पर रेतली से मैरा रेतली ज़मीनें अच्छी होती हैं सीड बैड पर बोयी फसल अच्छी अंकुरित होती है ज़मीन को देसी हल से दो या तीन बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद .... (Read More)
तिलहनी फसलों के लिए हल्की से भारी ज़मीनें अच्छी होती हैं राया हर तरह की ज़मीन में उगाया जा सकता है पर तोरिये के लिए भारी ज़मीनें चाहिए तारामीरा के लिए आमतौर पर रेतली से मैरा रेतली ज़मीनें अच्छी होती हैं सीड बैड पर बोयी फसल अच्छी अंकुरित होती है ज़मीन को देसी हल से दो या तीन बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरें बीजों के एकसार अंकुरित होने के लिए बैड नर्म, गीले और समतल होने चाहिए सूखे असिंचित क्षेत्रों के लिए 1.5-2 किलो बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें और सिंचित क्षेत्रों के लिए 1.2-1.6 किलो बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें बीज को मिट्टी के अंदरूनी कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए बीजों को 3 ग्राम थीरम से प्रति किलो बीज के हिसाब से उपचार करें चेपा और रंगीली भुंडी से फसल को बचाने के लिए इमीडाक्लोप्रिड 8 मि.ली. से प्रति किलो बीजों का उपचार करें नदीनों की संख्या को देखते हुए दो सप्ताह के अंतराल पर दो से तीन गोडाई और दो निराई करें बिजाई के तीन से चार सप्ताह पहले 8-10 टन रूड़ी की खाद और गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में खादों के सही प्रयोग के लिए मिट्टी की जांच करवायें सिंचित हालातों में 20 किलो नाइट्रोजन (40 किलो यूरिया) और 12-16 किलो फासफोरस (सुपर फासफेट 75 किलो) का प्रयोग करें पोटाश्यिम का प्रयोग केवल मिट्टी में इसकी कमी होने पर ही करें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें और नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा पहली सिंचाई के समय डालें दानों की उपज बढ़ाने के लिए 10-15 प्रतिशत के साथ थियोरिया 0.05 प्रतिशत की स्प्रे करें बिजाई के 30-40 दिनों के बाद पहली सिंचाई करें और दूसरी सिंचाई बिजाई के 70-80 दिनों के बाद करें मिट्टी की किस्म और पानी की उपलब्धता के आधार पर सिंचाई करें फसल पकने के लिए 110-140 दिनों का समय लेती है फसल की कटाई फलियां पीली और बीज सख्त होने पर करें बीजों के झड़ने को रोकने के लिए कटाई सुबह के समय करें द्राती की मदद से बूटो को ज़मीन के नज़दीक से काटें फिर 7-10 दिनों के लिए फसल को सूखने के लिए रखें और सूखने के बाद गहाई करें

Posted by Vedparkash Grewal
Haryana
25-09-2019 08:00 PM
श्रीमान जी मैंने आर्गेनिक गन्ने की खेती करनी है, तो इसके लिए मुझे जानकारी चाहिए की कैसे करनी चाहिए ?
वेदप्रकाश गरेवाल जी ,आर्गेनिक गन्ने की खेती के लिए आप वर्मीकम्पोस्ट का इस्तेमाल तत्वों को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर सकते है. अगर आपके गन्ने पर कोई कीट आ गया है तो आप नीम के रस का इस्तेमाल करें और अगर इस पर फंगस का किसी बीमारी का अटैक है तो आप खट्टी लस्सी का इस्तेमाल करें, धन्यवाद्

Posted by Gurvail singh
Haryana
25-09-2019 07:58 PM
bhai sahib nazdik ki laboratory mein taaran culture karwa ke dasi pashuan wali dwaee doctor se bachedani me bharwao

Posted by g v g
Madhya Pradesh
25-09-2019 07:58 PM
Ashi nasal ki desi cow lene ke lia aap Gohilraj 8153810007 Krishna Gaushala se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by aakash
Madhya Pradesh
25-09-2019 07:57 PM

Posted by g v g
Madhya Pradesh
25-09-2019 07:56 PM
Pure HF cow lene ke lia aap Ajay Chopra 7009645902 Chopra Dairy Farm se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by Anilkumar
Haryana
25-09-2019 07:54 PM
सिंघाड़ा तालाबों में पैदा होने वाली एक नगदी फसल है मध्यप्रदेश में सिंघाड़े का उत्पादन लगभग 6000 हेक्टेयर में किया जाता है सिंघाड़े के कच्चे व ताजे फलों का ही उपयोग मुख्यत: किया जाता है इसके अलावा पके फलों को सुखाकर उसकी गोटी से आटा बनाया जाता है जिससे बने व्यंजनों का उपयोग उपवास में किया जाता है सिंघाड़े में .... (Read More)
सिंघाड़ा तालाबों में पैदा होने वाली एक नगदी फसल है मध्यप्रदेश में सिंघाड़े का उत्पादन लगभग 6000 हेक्टेयर में किया जाता है सिंघाड़े के कच्चे व ताजे फलों का ही उपयोग मुख्यत: किया जाता है इसके अलावा पके फलों को सुखाकर उसकी गोटी से आटा बनाया जाता है जिससे बने व्यंजनों का उपयोग उपवास में किया जाता है सिंघाड़े में मुख्य पोषक तत्व प्रोटीन 4.7 प्रतिशत एवं शर्करा 23.3 प्रतिशत होते हैं इसके अलावा इसमें कैल्शियम, फास्फोरस, लोहा, पोटेशियम, तांबा, मैगनीज, जिंक एवं विटामिन सी भी सूक्ष्म मात्रा में उपलब्ध होते हैं सामान्यत: तालाबों में होने वाले सिंघाड़े की फसल की खेती उन्नत कृषि तकनीक अपनाकर निचले खेतों जिनमें पानी का भराव जुलाई से नवम्बर – दिसम्बर माह तक लगभग एक से दो फीट तक होता है आसानी से की जा सकती है इस तकनीक को अपनाकर खासकर धान के क्षेत्र जैसे बालाघाट, सिवनी आदि के कृषक निचले खेतों में अपनी उपज में प्रति एकड़ डेढ़ गुना वृद्धि कर सकते हैं सिंघाड़े की खेती उष्ण कटिबन्धीय जलवायु वाले क्षेत्रों में की जाती है इसकी खेती के लिए खेत में एक से दो फीट पानी की आवश्यकता होती है इसकी खेती स्थिर जल वाले खेतों में की जाती है साथ ही साथ खेतों में ह्युमस की मात्रा अच्छी होनी चाहिये सिंघाड़ा उत्पादन हेतु दोमट या बलुई दोमट मिट्टी जिसका पी. एच. 6.0 से 7.5 तक होता है अधिक उपयुक्त होती है सिंघाड़े मेंं कोई उन्नत जाति विकसित नहीं की गई हैं परन्तु जो किस्म प्रचलित है उनमें जल्द पकने वाली जातियां हरीरा गठुआ, लाल गठुआ, कटीला, लाल चिकनी गुलरी, किस्मों की पहली तुड़ाई रोपाई के 120 – 130 दिन में होती है इसी प्रकार देर से पकने वाली किस्में – करिया हरीरा, गुलरा हरीरा, गपाचा में पहली तुड़ाई 150 से 160 दिनों में होती है जिस खेत में रोपाई करनी हो उसमें जुलाई के प्रथम सप्ताह में कीचड़ मचा लिया जाता है रोपाई के पूर्व या एक सप्ताह के अंदर 300 किलोग्राम सुपर फॅास्फेट 60 किलोग्राम पोटाश व 20 किलोग्राम यूरिया प्रति हेक्टेयर मिलाएं साथ ही गोबर की सड़ी खाद का उपयोग अवश्य करें इसके उपरांत रोपाई के पूर्व रोपणी को इमीडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एस. एल. के घोल में 15 मिनट तक डुबोकर उपचारित किया जाता है उपचारित बेल एक मीटर लंबी 2-3 बेलों की गठान लगाकर 131 मीटर के अन्तराल पर अंगूठे की सहायता से कीचड़ में गड़ाकर किया जाता है रोपाई का कार्य जुलाई के प्रथम सप्ताह से 15 अगस्त के पहले तक किया जा सकता है खरपतवार नियंत्रण रोपाई पूर्व व मुख्य फसल में समय – समय पर करते रहना चाहिये कीट एवं रोगों पर सतत निगरानी रखें, प्रारंभिक अवस्था में प्रकोपित पत्तियों को तोड़कर नष्ट करें ताकि कीट एवं रोग नाशियों का उपयोग न करना पड़े यदि आवश्यकता हो तो उचित दवा का उपयोग करें सिंघाड़ा फल जो अच्छी तरह से सूखे हो उनको सरोते या सिंघाड़ा छिलाई मशीन द्वारा छिला जाता है इसके उपरांत एक से दो दिनों तक सूर्य की रोशनी में सुखाकर मोटी पॉलीथिन बैग में रखकर पैक कर दिया जाता है

Posted by Rajesh Kumar
Bihar
25-09-2019 07:54 PM
shrimaan g dhan mein fungicide Custodia @250 ml ja Folicur @250 ml per acre ka spray kr skte ho g jiss se fungus disease ka attack khtm ho jayega aur balli v sahi rhegi..

Posted by Rajeev Singh
Bihar
25-09-2019 07:52 PM
Rajeev ji kripya aap apna swal vistar se pushen ki aap kya jankari lena chahte hai tan jo apko sahi jankari di jaa skee.
Posted by jaskaran sekhon
Punjab
25-09-2019 07:49 PM
ਚੁਕੰਦਰ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਲਈ ਸਤੰਬਰ ਦੇ ਆਖਰੀ ਹਫਤੇ ਅਤੇ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਅੱਧ ਤਕ ਬੀਜ ਸਕਦੇ ਹੋ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਦੇ ਲਈ ਖੇਤ ਵਾਹੋ ਬੀਜ ਦੇ ਚੰਗੇ ਉਤਪਾਦ ਦੇ ਲਈ ਜਮੀਨ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰਾਂ ਤਿਆਰ ਕਰੋ ਅਤੇ ਉਸਮੇ ਸਹੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਨਮੀ ਬਣਾ ਕੇ ਰੱਖੋ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਲਈ ਕਤਾਰਾਂ ਵਿਚ 45-50 cm ਦਾ ਫ਼ਾਸਲਾ ਰੱਖੋ ਇਕ ਏਕੜ ਵਿਚ 1.5-2.5 ਕਿੱਲੋ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤੋਂ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਦੇ ਸਮੇ 5 ਟਨ ਰੂੜੀ.... (Read More)
ਚੁਕੰਦਰ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਲਈ ਸਤੰਬਰ ਦੇ ਆਖਰੀ ਹਫਤੇ ਅਤੇ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਅੱਧ ਤਕ ਬੀਜ ਸਕਦੇ ਹੋ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਦੇ ਲਈ ਖੇਤ ਵਾਹੋ ਬੀਜ ਦੇ ਚੰਗੇ ਉਤਪਾਦ ਦੇ ਲਈ ਜਮੀਨ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰਾਂ ਤਿਆਰ ਕਰੋ ਅਤੇ ਉਸਮੇ ਸਹੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਨਮੀ ਬਣਾ ਕੇ ਰੱਖੋ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਲਈ ਕਤਾਰਾਂ ਵਿਚ 45-50 cm ਦਾ ਫ਼ਾਸਲਾ ਰੱਖੋ ਇਕ ਏਕੜ ਵਿਚ 1.5-2.5 ਕਿੱਲੋ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤੋਂ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਦੇ ਸਮੇ 5 ਟਨ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰੋ ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਯੂਰੀਆ 25 ਕਿੱਲੋ , ਕਿੱਲੋ ਅਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ 30 ਕਿੱਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰੋ ਚਕੁੰਦਰ ਨੂੰ 8 ਸਿੰਚਾਈਆਂ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਹਿਲੀ ਸਿੰਚਾਈ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 25 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਅਤੇ ਅਗਲੀਆਂ 4 ਸਿੰਚਾਈਆਂ 25 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਅੰਤਰਾਲ ਤੇ ਕਰੋ ਅਤੇ ਬਾਕੀ ਦੀ ਸਿੰਚਾਈ 20 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਅੰਤਰਾਲ ਤੇ ਕਰੋ ਇਸ ਫ਼ਸਲ ਦੀ ਤੁੜਾਈ ਮਾਰਚ ਦੇ ਅੰਤ ਤੋਂ ਮਈ ਦੇ ਮਹੀਨੇ ਵਿਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜਦੋ ਪੱਤੇ ਦੀਆਂ ਹੇਠਲੀਆਂ ਤੇਹਾਂ ਪੀਲੇ ਰੰਗ ਦੀ ਹੋ ਜਾਏ ਤਾ ਤੁੜਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕਟਾਈ ਦੇ ਇਕ ਤੋਂ ਤਿੰਨ ਦਿਨ ਪਹਿਲਾ ਹਲਕੀ ਸਿੰਚਾਈ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ
Posted by GYANIK RAM
Chattisgarh
25-09-2019 07:49 PM
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी यदि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं त.... (Read More)
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी यदि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं तो कम से कम 10 हजार मुर्गियों का धंधा शुरू करना चाहते हैं तो आपको 4 से 5 लाख का इतज़ाम करना पड़ेगा, ये आप अपने बजट के हिसाब से कम पंक्षियों से भी शुरू कर सकते हैं बाकि आप इस काम को ट्रेनिंग लेकर शुरू करें जिसमें आपको इस काम के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें आप वहां जाकर अपना ट्रेनिंग का फार्म भर आएं जब भी ट्रेनिंग होगी तो वो आपको फोन करके उसके बारे में बता देंगे, चूज़े लेने के लिए आप Sumit Kumar 8006000291 7906547529 Sumit Kumar Poultry Farm से संपर्क कर सकते है
Posted by ANKIT KUMAR
Uttar Pradesh
25-09-2019 07:44 PM
अंकित कुमार जी आप गन्ने की बुवाई क लिए CoSe 92423: यह किस्म बसंत में बिजाई के लिए उपयुक्त है इसकी औसतन पैदावार 280 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह रतुआ रोग के प्रतिरोधक किस्म है .CoS 94270 (Sweta): यह किस्म कुछ हद तक रतुआ रोग के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 324 क्विंटल प्रति एकड़ होती है CoSe 95422 (Rasbhari): यह किस्म बसंत में बिजाई के ल.... (Read More)
अंकित कुमार जी आप गन्ने की बुवाई क लिए CoSe 92423: यह किस्म बसंत में बिजाई के लिए उपयुक्त है इसकी औसतन पैदावार 280 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह रतुआ रोग के प्रतिरोधक किस्म है .CoS 94270 (Sweta): यह किस्म कुछ हद तक रतुआ रोग के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 324 क्विंटल प्रति एकड़ होती है CoSe 95422 (Rasbhari): यह किस्म बसंत में बिजाई के लिए उपयुक्त है इसकी औसतन पैदावार 271 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह रतुआ रोग के प्रतिरोधक किस्म है
Posted by bhagirath
Uttar Pradesh
25-09-2019 07:44 PM
Bhagirath ji Urad ka bhav 6550 se 6875/q ke aas - pas chal raha hai, Thankyou.

Posted by Anilkumar
Haryana
25-09-2019 07:42 PM
Anilkumar ji kirpya aap is dwai ki koi photo bhejoe ta jo aap ko is ke bare me sahi jankari di ja sake, ja fir je btae ke aap is dwai ko kis smasea ke lia use kar rahe hai, Thankyou
Posted by Avtar Singh khalsa
Punjab
25-09-2019 07:40 PM
BhaaG deputy director dairy development Muktsar sahib naal sampark karo Training lao naksha v mil jau

Posted by Anilkumar
Haryana
25-09-2019 07:36 PM
Shrimaan ji, kripya ap bataye ke apne isme konsi khadon ka upyog kiya hai, taki apko iske bare mein ucchit jankari di ja sake, dhanywad
Posted by Harjeet Singh
Uttar Pradesh
25-09-2019 07:34 PM
स्टीविया से हमें शूगर मिलती है हमें इसके पत्तों से ज़ीरो कैलोरी स्वीटनेस मिलती है जो कि यह शूगर से ज्यादा मीठे होते हैं भारत में इसकी 2 किस्में लगायी जाती हैं mds 14औरmds 13 इसके लिए तापमान 30 डिगरी सेल्सियस से 32 डिगरी सेल्सियस चाहिए पंजाब में धान की काश्त ज्यादा होने के कारण ज़मीन निचले पानी का स्तर नीचे जाना बड़ी चिं.... (Read More)
स्टीविया से हमें शूगर मिलती है हमें इसके पत्तों से ज़ीरो कैलोरी स्वीटनेस मिलती है जो कि यह शूगर से ज्यादा मीठे होते हैं भारत में इसकी 2 किस्में लगायी जाती हैं mds 14औरmds 13 इसके लिए तापमान 30 डिगरी सेल्सियस से 32 डिगरी सेल्सियस चाहिए पंजाब में धान की काश्त ज्यादा होने के कारण ज़मीन निचले पानी का स्तर नीचे जाना बड़ी चिंता का विषय है पंजाब की जलवायु मुताबिक रेतली और कंडियाली क्षेत्र क धरती इस फसल के लिए अधिक लाभदायक है इस फसल को पानी बहुत कम लगता है और एक बार पौधे लगाने के बाद 5 साल फसल की कटाई ही करनी होती है पहली फसल की कटाई तीन महीनों के बाद होने के कारण किसानों को आमदन जल्दी शुरू हो जाती है एक एकड़ ज़मीन में 30 से 40 हज़ार पौधे लगते हैं महत्तवपूर्ण तथ्य यह है कि इस फसल पर कीटनाशक या नदीननाशक दवाईयों का प्रयोग नहीं होता यूरिया या डी ए पी खाद के स्थान पर सिर्फ रूड़ी की खाद का ही प्रयोग होता है इस तरह से कुदरती खेती का हिस्सा भी कहा जा सकता है स्टीविया के पौधे में मीठास होने के काराण पशु भी मुंह नहीं लगाते यह फसल कम से कम एक कनाल रकबे में भी लगायी जा सकती है पर यदि 5 एकड़ में लगायी जाये तो भारत सरकार कुल लागत का 40 फीसदी सब्सिडी भी देती है फसल को प्रफुल्लित करने के लिए सरकार लगा रही ज़ोर इसलिए कंडियाली क्षेत्र के किसानों को स्टीविया लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है पंजाब के कमिश्नर खेतीबाड़ी डॉ.बलविंदर सिंह सिद्धू का कहना है कि स्टीविया की फसल धान और गेहूं का बदल बन सकती है, दूसरा इस फसल से गेहूं और धान के मुकाबले कमाई भी ज़्यादा होती है, स्टीविया की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से संपर्क कर सकते है धन्यवाद

Posted by tikesh netam
Chattisgarh
25-09-2019 07:32 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by Brijesh Kumar
Uttar Pradesh
25-09-2019 07:22 PM
Shrimaan ji, sehjan plant weight kam karne mein madad karta hai, cholesterol or blood pressure km karne mein help karta hai , body mein energy paida karta hai, dhanwad
Posted by Chaten Ram Choudhary
Rajasthan
25-09-2019 07:19 PM
Ram Choudhary ji kripya kar k aap hume batain k apne inko nutrients ki kya marta provide ki hai tan jo apko iska sahi hal bta diya jae , dhanyawad

Posted by surya
Madhya Pradesh
25-09-2019 07:18 PM
सूर्य जी मच्छर की रोकथाम के लिए आप imidacloprid @1.5 ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Vijay kumar
Punjab
25-09-2019 07:07 PM
Vijay ji suur farm vich fyada uddo he hai jddo tuci iss kam nu puuri jakari nal ate training laa ke suru krde ho, kyuki iss kam vich jankari hona jruri hai jekar tuhade kol kam di jankari howegi tan tuci iss nu assani nal kr skde ho ate apne farm vich kise v choti smasia da hal kr skde ho, iss lai tuci iss kam nu jddo v kro pehla isdi jankari lao tuci kisi nazdiki pig farm te jaa kee iss kam nu dekho ate isdi training lao fir iss nu suru kro.

Posted by pankaj Singh pilkhwal
Uttarakhand
25-09-2019 07:02 PM
पंकज जी आप पशुओं को किसी भी कंपनी की फीड दे सकते है ये पशु के खाने और उसे आसानी से हज़म करने पर निर्भर होता है फीड में प्रोटीन की मात्रा 20 प्रतिशत तक होनी जरूरी है
Posted by Satyarani
Haryana
25-09-2019 06:59 PM
Posted by sachin
Uttar Pradesh
25-09-2019 06:57 PM
उसे आप Minfa gold powder 100 ग्राम रोजाना, Calcimust gold liquid 50ml , milkout पाउडर 2-2 चम्मच सुबह शाम देना शुरू करें, इससे दूध बढ़ जाएगा.
Posted by karambir singh Josan
Punjab
25-09-2019 06:56 PM
ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਲੋਕ ਬਟੇਰ ਰੱਖਦੇ ਹਨ ਤੇ ਕਿਉਕੀ ਮਾਰਕਿਟਿੰਗ ਦਾ ਕੋਈ ਪੱਕਾ ਜਰੀਆਂ ਨਹੀ ਤੇ ਆਪਣੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਹੀ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਕਰਨੀ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ਜੀ ਜਪਾਨੀ ਬਟੇਰ (Japanese quail ) ਨੂੰ ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਬਟੇਰ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਹੇਚਰੀ ਵਿੱਚ 35 ਵਲੋਂ 40 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਬਟੇਰਾ ਖਾਣ ਲਾਇਕ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇੱਕ ਆਂਡਾ ਪੰਜ ਰੁਪਏ ਵਿੱਚ ਵਿਕਦਾ ਹੈ ਬਟੇਰ ਤਿੰਨ – ਚਾਰ ਸੌ ਗਰਾਮ ਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ 120 ਰ.... (Read More)
ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਲੋਕ ਬਟੇਰ ਰੱਖਦੇ ਹਨ ਤੇ ਕਿਉਕੀ ਮਾਰਕਿਟਿੰਗ ਦਾ ਕੋਈ ਪੱਕਾ ਜਰੀਆਂ ਨਹੀ ਤੇ ਆਪਣੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਹੀ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਕਰਨੀ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ਜੀ ਜਪਾਨੀ ਬਟੇਰ (Japanese quail ) ਨੂੰ ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਬਟੇਰ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਹੇਚਰੀ ਵਿੱਚ 35 ਵਲੋਂ 40 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਬਟੇਰਾ ਖਾਣ ਲਾਇਕ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇੱਕ ਆਂਡਾ ਪੰਜ ਰੁਪਏ ਵਿੱਚ ਵਿਕਦਾ ਹੈ ਬਟੇਰ ਤਿੰਨ – ਚਾਰ ਸੌ ਗਰਾਮ ਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ 120 ਰੁਪਏ ਜੋੜਾ ਵਿਕਦਾ ਹੈ ਪ੍ਰਤੀ ਬਟੇਰ 15 ਵਲੋਂ 20 ਰੁਪਏ ਬਚਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਨੂੰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਬਿਮਾਰੀ ਬਹੁਤ ਹੀ ਘੱਟ ਲੱਗਦੀ ਹੈ ਖੰਭ ਦੇ ਆਧਾਰ ‘ਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਵਿਭਿੰਨ ਕਿਸਮਾਂ ਵਿੱਚ ਵੰਡਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਜਿਵੇਂ ਫਰਾਓਂ, ਇੰਗਲਿਸ਼ ਸਫੈਦ, ਟਿਕਸਡੋ, ਬ੍ਰਿਟਸ਼ ਰੇਜ ਅਤੇ ਮਾਚੁਰੀਅਨ ਗੋਲਡਨ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀਂ ਵੀ ਜਾਪਾਨੀ ਬਟੇਰ ਪਾਲਣ ਬਾਰੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋਂ ਤਾਂ ਇਸਨੂੰ ਪਾਲਣ ਦੀ ਸਿਖਲਾਈ ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਦੇ ਕੇਂਦਰੀ ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਸੰਸਥਾ (Central Poultry Development Organization (Northern Region)) ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗੀ ਇਸ ਸਬੰਧ ਵਿਚ CPDO ਵਲੋਂ ਸਮੇ ਸਮੇ ਤੇ ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਨਾਲ ਸਬੰਧਿਤ ਸਿਖਲਾਈ ਦਿਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜੋ ਤੁਸੀਂ ਆਨਲਾਈਨ ਫਾਰਮ ਭਰ ਕੇ ਰਜਿਸਟਰ ਕਰਵਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹ ਇੰਡਸਟਰੀ ਏਰੀਆ , ਫੇਸ-1, ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਵਿਚ ਸਥਿਤ ਹੈ ਤੁਸੀਂ ਫੋਨ 0172-2655391 ਤੇ ਸੰਪਰਕ ਵੀ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਹੋਰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ ਵੈਬਸਾਈਟ http://cpdonrchd.gov.in ਤੇ ਜਾਓ

Posted by lakhwinder singh
Punjab
25-09-2019 06:51 PM
tuci uss nu Hitek injection 1ml/50kg sarir de bhar de hisab nal chamdi vich lgwao baki usdi poosh vich fernail dia golia kutt ke powder bnna ke bnn deo ate uss upar Loraxin spray maro, iss nal frak paa jawega.
Posted by ਪਵਨਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
25-09-2019 06:51 PM
jekar tahniyan sire to sukniyan shuru ho gayian han ta eh die back nam di bimari hai isde layi tuc suki hoyi tahni nu kat ke bordo paste lao, jekar nahi ta isdiyan jdan check karo jekar maujood hai ta tuc chlorpyriphos@4ml nu prati litre pani de hisab nal spray karo.dhanywad

Posted by Suraj Gupta
Chattisgarh
25-09-2019 06:48 PM
Gupta ji aap CFC powder cow ko khila skte hai iske sath pashu ka dhudh vddh jata hai, uski achi growth hoti hai, dhudh ki fatt achi hoti hai aur pashu jldi naye dhudh ho jata hai, CFC powder aap 10-15gm rojana de skte hai..

Posted by prem singh
Punjab
25-09-2019 06:48 PM
ਹਾਜੀ ਸਤਿ ਸ਼੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਵੱਲੋਂ ਪੁੱਛੇ ਸਾਰੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦਾ ਜਵਾਬ ਦਾ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਦੇਖਣ ਲਈ ਐਪ ਵਿੱਚ ਮੇਰੇ ਸਵਾਲ ਤੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਮੇਰੀ ਪ੍ਰੋਫਾਈਲ ਦੇ ਹੇਠਾ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਜਵਾਬ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਵੀ ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਨੂੰ ਜਵਾਬ ਸਬੰਧੀ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਨੰਬਰ: 97799-77641 ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ .... (Read More)
ਹਾਜੀ ਸਤਿ ਸ਼੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਵੱਲੋਂ ਪੁੱਛੇ ਸਾਰੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦਾ ਜਵਾਬ ਦਾ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਦੇਖਣ ਲਈ ਐਪ ਵਿੱਚ ਮੇਰੇ ਸਵਾਲ ਤੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਮੇਰੀ ਪ੍ਰੋਫਾਈਲ ਦੇ ਹੇਠਾ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਜਵਾਬ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਵੀ ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਨੂੰ ਜਵਾਬ ਸਬੰਧੀ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਨੰਬਰ: 97799-77641 ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ
Posted by हनुमान बैरवा
Rajasthan
25-09-2019 06:48 PM
श्रीमान जी मिर्च में actara 100gm प्रति एकड़ और fungicide M 45 500gm प्रति एकड़ की स्प्रे कर सकते हैं।

Posted by Jashan Preet
Punjab
25-09-2019 06:48 PM
Jashan Preet ji kirpa karke apna swal visthar nal pusho ke tusi kis fasal ate kis kisam bare jankari chode ho ta jo tuhanu sahi jankari diti ja sake, Thankyou.
Posted by ਪਵਨਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
25-09-2019 06:46 PM
ਖੁਰਾਕੀ ਤੱਤਾਂ ਦੀ ਘਾਟ ਕਾਰਨ ਫ਼ਲ ਗਿਰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਪੱਤਿਆਂ ਤੇ ਕਾਲਸ ਪੱਤਿਆਂ ਵਿਚ ਸੁਰੰਗ ਸੂੰਡੀ ਕਾਰਨ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ
ਪਹਿਲਾਂ ਪੱਤੇ ਚਮਕੀਲੇ ਤੇ ਫਿਰ ਕਾਲੇ ਹੋਕੇ ਕੱਠੇ ਹੋਣ ਪਿੱਛੋਂ ਝੜ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਇਸ ਵਾਸਤੇ ਮੈਲਾਥਿਆਨ ਪੰਜਾਹ ਪਾਵਰ ਤਿੰਨ ਐਮ ਐਲ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਵਰਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ

Posted by Rakesh batham
Madhya Pradesh
25-09-2019 06:36 PM
श्रीमान जी, इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए, अच्छी तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी को भुरभुरा .... (Read More)
श्रीमान जी, इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए, अच्छी तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए ज़मीन को समतल करना ज़रूरी है आखिरी जोताई के समय, गली हुई रूड़ी की खाद डालें 150-200 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें पौधे से पौधे में 1.5x1.5 मीटर फासले का प्रयोग करें बीज को 1 सैं.मी. की गहराई पर बोयें नर्सरी तैयार की जाती है नए पौधों को 25x10 सैं.मी. लंबाई, चौड़ाई वाले पॉलीथीन के बैगों में तैयार किया जाता है इन पॉलीथीन बैगों में पानी के उचित निकास के लिए निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्ध व्यास के 8-10 छेद करें रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत के समान अनुपात से पॉलीथीन बैगों को भरें मुख्य तौर पर पॉलीथीन बैग में जुलाई के दूसरे सप्ताह से सितंबर के तीसरे सप्ताह तक बीज को बोया जाता है बिजाई से पहले, कप्तान 3 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें नये निकले पौधों को उखेड़ा रोग से बचाने के लिए कप्तान 0.2 प्रतिशत का मिट्टी में छिड़काव करें नए पौधों की रोपाई सितंबर-अक्तूबर महीने में की जाती है धन्यवाद
Posted by Shanker Singh Jaat
Rajasthan
25-09-2019 06:31 PM
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